- Home
- धर्म-अध्यात्म
- किसी भी मनुष्य अथवा देवता की कुल 16 कलाएं होती हैं। भगवान विष्णु भी इन सभी 16 कलाओं के धारक हैं। इसके अतिरिक्त चन्द्रमा को भी महादेव की कृपा से 16 कलाएं प्राप्त हैं और माता दुर्गा के पास भी कुल 16 कलाएं हैं। हालांकि चंद्र एवं मां दुर्गा की कलाएं श्रीहरि की कलाओं से भिन्न हैं। कलाओं का अर्थ एक प्रकार से गुण होता है। वैसे तो भगवान विष्णु के गुण तो अनंत हैं, किन्तु ये 16 गुण (कला) उनके प्रधान गुण माने जाते हैं। ये हैं:श्री (लक्ष्मी),भू (भूमि),कीर्ति (प्रसिद्धि),वाणी (वाक् क्षमता) ,लीला (चमत्कार),कांति (तेज),विद्या (ज्ञान),विमला (निर्मल स्वाभाव),उत्कर्षिणि (किसी को प्रेरित करने की क्षमता),विवेक (अपने ज्ञान एवं परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेना),कर्मण्यता (कर्मठ),योगशक्ति (ईश्वर से जुड़ जाना),विनय (शिष्टता),सत्य (सदैव सच बोलने वाला),आधिपत्य (प्रभाव) और अनुग्रह (दूसरों का कल्याण और क्षमा करना)।भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम त्रेतायुग के अंतिम चरण में जन्में। उनके अवतार का उद्देश्य संसार को राक्षस और रावण से मुक्त कर एक मर्यादित समाज की स्थापना करना था। उस उद्देश्य के लिए केवल 12 कलाएं ही पर्याप्त थीं, इसी कारण वो केवल 12 कलाओं के साथ जन्में। इसी कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया।वहीं श्रीकृष्ण द्वापर के बिलकुल अंतिम चरण में जन्में। उनका उद्देश्य संसार में धर्म की पुनस्र्थापना करना था। इस काल में भगवान विष्णु को अपनी सभी कलाओं की आवश्यकता थी। इसी कारण वे अपनी सभी 16 कलाओं के साथ अवतरित हुए। उसी कारण उन्हें पूर्णावतार अथवा परमावतार कहा गया।माना जाता है कि भगवान कल्कि कलियुग के बिलकुल अंतिम चरण में अवतरित होंगे और उनका उद्देश्य संसार से सभी पापियों का नाश करना होगा। कलियुग के अंतिम चरण में, उन परिस्थियों में अपने उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए श्रीहरि को केवल अपनी 4 कलाओं की आवश्यता होगी। यही कारण है कि भगवान कल्कि श्रीहरि की केवल 4 कलाओं के साथ जन्म लेंगे। इसका अर्थ ये नहीं कि उनका महत्व श्रीकृष्ण या श्रीराम से कम है। सभी अवतारों का महत्व अपने-अपने युग में समान ही है।
- घर या फ्लैट खरीदते समय वास्तु शास्त्र काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इन दिनों वास्तु पर विचार करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लेआउट, दिशाओं में कभी-कभी वास्तु का अभाव होता है। दरअसल विशेष व्यक्ति वर्ग के बीच एक बुनियादी धारणा है कि अपार्टमेंट के लिए वास्तु पर विचार करने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन वास्तविकता यह है कि किसी भी स्थान के लिए वास्तु का पालन किया जाना चाहिए चाहे वह एक स्वतंत्र घर हो या एक फ्लैट। छोटी से छोटी वस्तु भी आपके घर में ऊर्जा के प्रवाह को बदल सकती है। खिड़कियां आपके घर में बहने वाली ऊर्जा को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है। वास्तु परंपरा के अनुसार, खिड़कियों को सही ढंग से रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि वे हमारे घरों में प्रकाश, वायु और ऊर्जा लाते हैं। यही कारण है कि खिड़कियों की सही स्थिति के नियमों और दिशाओं को जानना महत्वपूर्ण है।पश्चिम और दक्षिण दिशा में खिड़कियांयदि आप पश्चिम या दक्षिण दिशा में खिड़कियां बनाना चाहते हैं, तो इन दिशाओं में छोटी खिड़कियां रखना सबसे अच्छा है। लेकिन यदि पश्चिम दिशा या दक्षिण दिशा में जगह चौड़ी या खुली हुई है तो ऐसे में उधर खिड़कियां नहीं बनानी चाहिए।इस दिशा में लगाएं बड़ी खिड़कियांवास्तु शास्त्र के अनुसार यदि आप उत्तर पूर्व या पूर्व दिशा में खिड़की लगाते हैं, तो वह बड़ी होनी चाहिए। इससे आपके घर में ताजी हवा और सूर्य कि प्रचुर मात्र तो मिलेगी साथ ही सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रवाह रहेगा।सम संख्या में लगाएं खिड़कियांवास्तु शास्त्र के अनुसार घर की खिड़कियों को सकारात्मकता का स्रोत माना जाता है, जिससे घर की उन्नति होती है। जब भी घर बनावाएं, उसमें सम संख्या में खिड़कियों को लगवाएं। घर में खिड़कियों की संख्या 4, 6, 8, 10 जैसी सम संख्या में होनी चाहिए।दो पल्ले वाली खिड़कियां होती हैं शुभवास्तु शास्त्र के अनुसार खिड़कियों के पल्ले अंदर की ओर खुलने वाले होने चाहिए। और खिड़कियां दो पल्ले वाली होनी चाहिए। वास्तु के अनुसार इसका अर्थ हैं कि आपके घर के अंदर ऊर्जा का प्रवाह बाहर से अंदर की हो रहा है।दक्षिण- पश्चिम दिशा में नहीं होनी चाहिए खिड़कियांवास्तु शास्त्र के अनुसार घर की दक्षिण- पश्चिम दिशा में खिड़की होने से स्वास्थ्य में परेशानी होती है। इस वजह से इस दिशा में खिड़की लगाना वर्जित है।
- वर्क फ्रॉम होम के दौरान लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि घर का वातावरण अलग होता है। ऐसे में काम पर ध्यान केंद्रित करना और भी मुश्किल होता है। अक्सर लोग अपने आसपास रखी चीजों से डिस्ट्रैक्ट हो जाते हैं या सही जगह पर नहीं बैठते हैं। ऐसे में काम के प्रति उत्साह होने के बावजूद लोग काम के प्रति ऑर्गेनाइज्ड नहीं महसूस करते हैं। नींद आना और काम पर ध्यान केंद्रित न कर पाना बहुत स्वभाविक होता है। ऐसे में प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए आप वास्तु के ये टिप्स फॉलो कर सकते हैं।जॉब के हिसाब से चुनें डेस्क डायरेक्शनअगर आप लेखन, बैंक, व्यवसाय प्रबंधन या खातों जैसे व्यवसायों में हैं तो आपके लिए उत्तर दिशा में बैठना फायदेमंद रहेगा। वहीं अगर आपकी नौकरी कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, शिक्षा, ग्राहक सेवा, तकनीकी सेवा, कानून या चिकित्सा से संबंधित है तो आपके लिए पूर्व दिशा में बैठना सबसे अच्छा है। इस तरह आपका मन काम में लगा रहेगा, ऊर्जा का स्तर ऊंचा रहेगा और नकारात्मक ऊर्जा आपके काम में बाधा नहीं बनेंगी। उत्तर-पश्चिम दिशा से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि इस दिशा में बैठने से मन की एकाग्रता शक्ति कम हो जाती है।टेबल-कुर्सी की व्यवस्थाबैठने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुर्सी के पीछे एक दीवार होनी चाहिए क्योंकि वास्तु के अनुसार इसे शुभ माना जाता है। कुर्सी के पीछे कभी भी खिड़की या दरवाजा नहीं होना चाहिए और आपकी कुर्सी-टेबल के ठीक ऊपर बीम नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे आर्थिक नुकसान हो सकता है।वास्तु शास्त्र के अनुसार टेबल पर फाइलें, कागज का ढेर या अन्य घरेलू सामान रखने से काम की गुणवत्ता प्रभावित होती है और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। नकारात्मक ऊर्जा के बढऩे से आप तनाव में रहेंगे और काम समय पर खत्म नहीं हो पाएगा। कांच के टॉप वाली टेबल से बचें क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है जो आपके काम को धीमा कर सकती है। ऐसी मेज को आप हरे या सफेद कपड़े से ढंक सकते हैं।वर्कस्टेशन की लाइटजिस कमरे में आप अपना वर्कस्टेशन स्थापित करने की प्लान बना रहे हैं, उस कमरे की रोशनी पर विचार करना महत्वपूर्ण है। ये आपके काम और मूड को प्रभावित कर सकता है। बहुत तेज या बहुत कम रोशनी आंखों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। साथ ही प्रकाश की कमी से वास्तु दोष उत्पन्न होते हैं और वहां नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। ये प्रगति में भी बाधा डाल सकता है, काम में बाधा डाल सकता है और बहस का कारण बन सकता है।पौधे रखेंवर्कस्टेशन को सुंदर और सकारात्मक बनाने के लिए आप इंडोर प्लांट्स रख सकते हैं। मनी प्लांट, बांस , सफेद लिली और रबर के पौधे पूर्व या उत्तर दिशा में रखे जाने पर न केवल उस स्थान को सुशोभित करते हैं बल्कि लाभकारी भी माने जाते हैं। हालांकि अपने कार्यस्थल पर कभी भी सूखे और कांटेदार पौधे न रखें क्योंकि ये निराशा का संकेत देते हैं। हरा रंग सुख, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक है। ये सकारात्मक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है और मन पर शांत प्रभाव डालता है।
- वास्तु शास्त्र में घर में सकारात्मकता बढ़ाने और नकारात्मकता दूर करने के कई नियम और उपाय बताए गए हैं। वास्तु में पिरामिड का अपना महत्व होता है. आइए जानें घर में पिरामिड रखने के लाभ।-वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में पिरामिड होना अच्छा माना जाता है। घर में पिरामिड रखने से घर के सदस्यों की आय में वृद्धि होती है और समृद्धि बनी रहती है। पिरामिड को उस जगह पर रखें जहां घर के सदस्य सबसे ज्यादा समय बिताते हैं।-पिरामिड में अपने आप में बहुत अधिक ऊर्जा होती है। इसलिए अगर कोई थका हुआ व्यक्ति कुछ समय के लिए पिरामिड के पास या पिरामिड के आकार की जगह जैसे मंदिर में बैठता है, तो उसकी थकान दूर हो जाती है। ये मन को शांत रखने में मदद करता है।-वास्तु शास्त्र के अनुसार पिरामिड को उत्तर दिशा में रखने से धन लाभ और आर्थिक स्थिति में भी सुधार होता है। ये आर्थिक समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। ये मानसिक तनाव को दूर करता है।-वास्तु शास्त्र के अनुसार पिरामिड शरीर को एक नई शक्ति देकर एकाग्रता को बढ़ाता है। इससे आप मन लगाकर काम कर पाते हैं। बच्चों के स्टेडी टेबल पर क्रिस्टल का पिरामिड रख सकते हैं। इससे बच्चों की एकाग्रता बढ़ती है और वे मन लगाकर पढ़ाई कर पाते हैं।-घर में चांदी, पीतल या तांबे का पिरामिड रखना सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन अगर आप इतना महंगा पिरामिड नहीं खरीद सकते हैं, तो आप लकड़ी का बना पिरामिड भी रख सकते हैं, लेकिन कभी भी लोहे, एल्यूमीनियम या प्लास्टिक का पिरामिड नहीं रखें। साथ ही पिरामिड की तस्वीर न लगाएं, इससे कोई फायदा नहीं होगा।
- वास्तु शास्त्र की तरह की फेंगशुई शास्त्र में धन और तरक्की संबंधी कई उपायों को बताया गया है। धन लाभ और तरक्की के लिए लोग कई तरह के उपाय करते हैं। फेंगशुई शास्त्र में ऊंट का शो-पीस लाइफ के मुश्किल समय को काटने में मदद करता है। फेंगशुई शास्त्र के अनुसार, अगर बिजनेस में लाभ नहीं हो रहा या कर्मचारी काम करने से जी चुराते हैं तो व्यापार में लाभ और प्रोड्क्टिविटी को बढ़ाने के लिए ऊंट को लगाना शुभ होता है।इसी तरह फेंगशुई के अनुसार, अगर व्यक्ति को करियर में लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ रहा है या कड़ी मेहनत के बावजूद भी अपेक्षित रिजल्ट की प्राप्ति नहीं हो रही है। मान्यता है कि इस स्थिति में अपने स्टडीरूम या ऑफिस में ऊंट की मूर्ति को लगाने से शुभ लाभ मिलते हैं। कहा जाता है कि ऊंट की मूर्ति लगाने के बाद आप जो भी काम करते हैं, उनमें आपका फोकस बढ़ जाता है और करियर संबंधी दिक्कतें दूर हो जाती हैं।मान्यता है कि अगर घर में धन संबंधी दिक्कत है तो ऊंट के जोड़े को घर में लाकर रखने से धन का आगमन तेजी से होता है। कहते हैं कि ऐसा करने से धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति सुधरने लगती है। घर में पॉजिटिव और खुशनुमा माहौल रखने के लिए एक, दो या कई ऊंट की तस्वीर या ऊंट के जोड़ों की मूर्ति को घर पर उत्तर-पश्चिम दिशा में लगाना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से घर के सदस्यों को मानसिक तौर पर शांति मिलती है।फेंगशुई के अनुसार, जीवन में आ रही मुश्किलों से बचने के लिए भी ऊंट की मूर्ति रखना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि ऊंट की मूर्ति व्यक्ति की सहन-शक्ति बढ़ाती है। जिससे व्यक्ति सही निर्णय लेने में सफल होता है।
- सफलता हासिल करने के लिए आत्मविश्वास का होना बहुत जरूरी है। कई बार लाख मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिलती ऐसे में कहीं न कहीं आत्मविश्वास की कमी भी जिम्मेदार हो सकती है। वास्तु शास्त्र में कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं जिससे आत्मविश्वास को मजबूत किया जा सकता है। आइए जानते हैं इनके बारे में।आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए मूंगा धारण करें। मान्यता है कि पंछियों को दाना-पानी देने से भी आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। अपने घर के लिविंग रूम में उगते हुए सूर्य का चित्र लगाएं। ऐसा करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है साथ ही घर से नकारात्मकता दूर होती है। शनि यंत्र को भी घर में स्थापित करें। अपने घर के दरवाजे पर शनिवार को नींबू और मिर्ची लगाएं। नींबू सूखा होने लगे तो इसे शनिवार के दिन ही बदलें। गाय को हरा चारा खिलाएं। कुत्तों को खाना खिलाएं, उन्हें दुलार करें। घर में मछलियां रखें और दो गोल्डन फिश जरूर होनी चाहिए। शनियंत्र को अपने साथ रखें। घर में उगते सूर्य या दौड़ते हुए सफेद घोड़े की तस्वीर लगाएं। भागते घोड़े बाहर से अंदर की होने चाहिए। खाली दीवार की ओर मुंह कर कभी न बैठें ऐसा करने से आत्मविश्वास डगमगा सकता है। आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए सुबह जल्दी उठकर उगते सूर्य का दर्शन कर ध्यान करें। आदित्य हृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करें। प्रतिदिन प्रातः काल सूर्यदेव को जल अर्पित करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। पूर्व दिशा की ओर मुंह कर खाना खाएं। घर की खिड़कियां खुला रखें। यह सकारात्मक ऊर्जा लाती है। खिड़की के एकदम सामने पीठ कर न बैठें, क्योंकि इससे ऊर्जा बह जाती है और आत्मविश्वास में कमी आती है। सुबह गायत्री मंत्र का उच्चारण करें। अपने बैठने के स्थान के पीछे पर्वत का चित्र लगाएं। सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण लोगों के साथ समय व्यतीत करें। जो दूसरों के दोष देखते हों उनसे दूर रहें।
- ज्योतिष में शुक्र देव को विशेष स्थान प्राप्त है। शुक्र के शुभ होने पर मां लक्ष्मी की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। मां लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है। मां लक्ष्मी की कृपा से व्यक्ति का भाग्योदय हो जाता है और जीवन में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं रहती है। शुक्र देव को ज्योतिष में भौतिक सुख, वैवाहिक सुख, भोग-विलास, शौहरत, कला, प्रतिभा, सौन्दर्य, रोमांस, काम-वासना और फैशन-डिजाइनिंग के कारक ग्रह हैं। शुक्र, वृष और तुला राशि के स्वामी होते हैं और मीन इनकी उच्च राशि है, जबकि कन्या इनकी नीच राशि है। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार 27 फरवरी तक कुछ राशि वालों पर शुक्र देव की विशेष कृपा रहेगी।मेष राशि-इस दौरान आपको कार्यक्षेत्र में तरक्की और भाग्य का पूरा साथ मिलेगा।नए साल में आप अपने लक्ष्यों की प्राप्ति भी कर सकेंगे।प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को शुभ समाचार मिल सकता है।सुख-समृद्दि और पद- प्रतिष्ठा में वृद्धि के योग बन रहे हैं।धन-लाभ होगा, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा।जीवनसाथी के साथ समय व्यतीत करने का अवसर मिलेगा।कार्यों में सफलता मिलेगी।वृष राशि-इस दौरान आपको धन प्राप्ति के योग बनेंगे।आपके संचार कौशल में वृद्धि और वाणी में मधुरता आएगी।आप सभी को प्रभावित करने में सफल रहेंगे।शुक्र के राशि परिवर्तन से शुभ फल की प्राप्ति होगी।आर्थिक पक्ष मजबूत होगा, लेकिन धन का खर्च सोच- समझकर ही करें।कार्यों में सफलता के योग बन रहे हैं।सुख-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होगी।वैवाहिक जीवन में सुख का अनुभव करेंगे।परिवार के सदस्यों के साथ समय व्यतीत करें।कर्क राशि-कार्यक्षेत्र में तरक्की मिल सकती है।नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को शुभ समाचार मिल सकता है।आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी।जीवनसाथी के साथ समय व्यतीत करने का अवसर मिलेगा।आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिलेगा।भाग्य का पूरा साथ मिलेगा।नौकरी और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं।जीवन आनंद से भर जाएगा।शुक्र देव के शुभ प्रभाव से जीवन आनंद से भर जाएगा।सिंह राशि-सिंह राशि के जातकों को शुभ फल की प्राप्ति होगी।शुक्र के राशि परिवर्तन से सिंह राशि वालों को नौकरी और व्यापार में लाभ होगा।मान- सम्मान बढ़ेगा।पद- प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।धन- लाभ होगा, जिससे आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।वैवाहिक जीवन में आनंद का अनुभव करेंगे।धनु राशि-शुक्र के राशि परिवर्तन करने से धनु राशि के जातकों को शुभ परिणाम मिलेंगे।आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।नया कार्य आरंभ करने के लिए समय शुभ है।नौकरी और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं।विद्यार्थियों के लिए ये समय किसी वरदान से कम नहीं है।वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा।
- वैलेंटाइन वीक की शुरुआत हो चुकी है। साल के सबसे रोमांटिक हफ्ते में कपल एक दूसरे के साथ समय बिताने के लिए वैलेंटाइन डे के मौके पर ट्रिप प्लान करते हैं। प्रेमी जोड़ा किसी ऐसी जगह पर जाना चाहता है, जो रोमांटिक भी हो और उनके प्यार के पलों को यादगार बनाने वाला भी हो। ऐसे में कम बजट में खूबसूरत नजारों, अच्छा खाना मिल जाए तो मजा ही आ जाए। कपल्स के लिए रोमांटिक और कम पैसों की ट्रिप में राजस्थान को शामिल किया जा सकता है। सर्दियों में घूमने के लिए यह जगह मौसम के लिहाज से तो अच्छी है ही, साथ ही यहां घूमने के लिए काफी कुछ मिल जाएगा लेकिन अगर वैलेंटाइन डे के मौके पर राजस्थान आ रहे हैं तो यहां प्रेमियों के लिए सबसे बेस्ट जगह है एक खास मंदिर। यह मंदिर प्रेमी जोड़ों के लिए बहुत खास माना जाता है। इस मंदिर में प्रेमियों की मुरादें पूरी होती हैं। ऐसे में अगर राजस्थान आए तो इस मंदिर के दर्शन जरूर करें।कहां है इश्किया गजानन मंदिरकपल्स की ट्रैवल सूची में जोधपुर शहर का नाम हमेशा शामिल होता है। इस शहर का अंदाज और खूबसूरती कपल्स के बीच आकर्षण का केंद्र है। जोधपुर में ही प्रेमियों का खास मंदिर इश्किया गजानन मंदिर स्थित है। यह मंदिर जोधपुर के परकोटे में मौजूद है।इश्किया गजानन मंदिर की खासियतभगवान गणेश जी के यह मंदिर प्रेमी जोड़ों के लिए महत्वपूर्ण है। यहां कई जोड़े अपनी शादी की मुरादें लेकर आते हैं। प्यार करने वाले भगवान गणेश से मनौती मांगते हैं। इसलिए इस मंदिर को इश्किया गजानन मंदिर कहा जाता है।इश्किया गजानन मंदिर की मान्यतामान्यता है कि प्यार करने वालों के लिए श्रीगणेश क्यूपिड की भूमिका निभाते हैं। यहां कुवारे लड़के या लड़कियां मन्नत मांगते हैं तो उनका रिश्ता बहुत जल्द तय हो जाता है। अगर आप किसी से प्यार करते हैं और उसे ही जीवनसाथी बनाना चाहते हैं तो यहां मुराद मांगने से आपको जीवनसाथी के तौर पर वही मिल सकता है।इश्किया गजानन के साथ ही इस मंदिर को गुरु गणपति के नाम से भी जाना जाता है। जिन लोगों की शादी होने वाली है, वह भी पहली मुलाकात और गणेश जी से आशीर्वाद के लिए इसी मंदिर में आते हैं।इश्किया गजानन मंदिर का खास स्ट्रक्चरजोधपुर के इश्किया गजानन मंदिर का निर्माण कुछ इस तरह का है कि मंदिर के आगे खड़े लोग दूर से किसी को आसानी से दिखाई नहीं देते। इस कारण यहां प्रेमी जोड़ों का जमावड़ा लगता है। कपल्स के मिलने के लिए यह मुख्य स्थान बन गया।
- माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जया एकादशी व्रत रखा जाता है। पूरे साल में कुल मिलकर 24 एकादशी व्रत पड़ते हैं। इस बार जया एकादशी व्रत 12 फरवरी, 2022, दिन शनिवार को रखा जाएगा। जया एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु की पूरे विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। कहते हैं कि भगवान विष्णु जीवन की हर एक बाधा को भक्तों के जीवन से दूर करते हैं। अगर कोई भी साधक जया एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ-साथ श्री विष्णु के मंत्रों का जाप करता है तो उसे अनंत फल की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए किन मंत्रों का जाप करना चाहिए।विष्णुजी के इन मंत्रों का करें जापजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और उनसे मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करें।विष्णु मूल मंत्रॐ नमोः नारायणाय॥उपरोक्त मंत्र भगवान विष्णु का मूल मंत्र है। इस मंत्र का जाप करने से विष्णु जी अवश्य प्रसन्न होते हैं।भगवते वासुदेवाय मंत्रॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥श्री विष्णु का जो भी साधक इस मंत्र का जाप करते हुए ध्यान लगाता है उसे भगवत कृपा की प्राप्ति होती है।विष्णु गायत्री मंत्रॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥विष्णु गायत्री मंत्र के जाप से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।श्री विष्णु मंत्रमंगलम भगवान विष्णुः, मंगलम गरुणध्वजः। मंगलम पुण्डरी काक्षः, मंगलाय तनो हरिः॥उपरोक्त विष्णु मंत्र जीवन के सभी दुखों को दूर करके जीवन में सुख और समृद्धि प्रदान करता है।विष्णु स्तुतिशान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशंविश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम् ।लक्ष्मीकांत कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यंवन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम् ॥यं ब्रह्मा वरुणैन्द्रु रुद्रमरुत: स्तुन्वानि दिव्यै स्तवैवेदे: ।सांग पदक्रमोपनिषदै गार्यन्ति यं सामगा: ।ध्यानावस्थित तद्गतेन मनसा पश्यति यं योगिनोयस्यातं न विदु: सुरासुरगणा दैवाय तस्मै नम: ॥भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए उनकी स्तुति का पाठ करना सबसे फलदायी माना जाता है।यदि भक्त इन मंत्रों का जाप जया एकादशी के दिन पूरे विधि विधान से करें तो उनके जीवन के सारे संकट श्री हरि विष्णु अवश्य दूर करेंगे।
- घर या फ्लैट का निर्माण करते समय वास्तु का विशेष महत्व है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि घर बनाते समय आप वास्तु का ध्यान रखेंगे तो आपके जीवन में आने वाली समस्याएं आपसे दूर रहेंगी। वास्तुविदों का मानना है यदि घर पहले ही बन चुका है और आप उसमें कुछ तोड़फोड़ नहीं कर सकते तो घर में वास्तु से संबंधित उपाय किए जा सकते हैं। वास्तु के अनुसार घर बनाते समय लोग पूरे घर में वास्तु विचार करते हैं विशेष रूप से बेडरूम और पूजाघर में। लेकिन लिविंग रूम को लोग अनदेखा कर देते हैं। लेकिन यदि आपने लिविंग रूम के वास्तु पर विशेष ध्यान दिया तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास रहेगा। इसलिए लिविंग रूम के वास्तु पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आइए जानते हैं वास्तु के उन उपायों के बारे में जिनसे लिविंग रूम की नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होगा।लिविंग रूम में हो ज्यादा खिड़कियांवास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही बैठक यानि लिविंग एरिया आता है। इसलिए लिविंग एरिया यानि ड्रॉइंग रूम थोड़ा खुला होना चाहिए। उसमें खिड़कियां अधिक होनी चाहिए जिससे पर्याप्त रोशनी आए। साथ ही रोशनी और वायु के अच्छे प्रवाह के कारण लिविंग रूम में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होगा।लिविंग एरिया बड़ा होआमतौर पर घर में सभी कमरे एक जैसे बना दिए जाते हैं और उसमें से ही किसी एक कमरे को बैठक चुन लिया जाता है लेकिन लिविंग रूम को घर के बाकी कमरों से बड़ा होना चाहिए। लिविंग रूम या ड्रॉइंग रूम जितना बड़ा होगा उसमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार उतना ही अधिक होगा।लिविंग रूम में न लगाएं ऐसी तस्वीरेंघर का सबसे खास एरिया होता है लिविंग रूम और इसलिए घर में सभी लोग इस रूम को खास तरीके से सजाते भी हैं लेकिन एक बात का ध्यान रखें इस रूम में कोई भी ऐसी तस्वीर न लगाएं जो उदास प्रकृति की हो या कोई लड़ाई-झगड़े वाली तस्वीर हो। ऐसी तस्वीर घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित करती है। इसकी जगह खूबसूरत पेंटिंग और कलाकृतियों से लिविंग रूम को सजा सकती हैं।इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स की दिशाड्रॉइंग रूम में टीवी या अन्य इलेक्ट्रानिक्स उपकरण रखे जाते हैं लेकिन इसकी दिशा का ध्यान देना बेहद आवश्यक है। कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद लिविंग रूम के दक्षिण-पूर्व दिशा में रखे जाने चाहिए। समान रखने के लिए आप इस दिशा में रैक भी बनवा सकते हैं। यदि आप लिविंग रूम में टीवी लगाना चाहते हैं तो दक्षिण दिशा की दीवार इसके लिए उपयुक्त रहेगी।उत्तर पूर्वी दिशा में रखें फर्नीचरलिविंग रूम में टेबल और कुर्सी जैसे फर्नीचर को इस तरह से व्यवस्थित करें कि आने जाने में बाधा न आए। लिविंग रूम में फर्नीचर उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना शुभ होता है।
- हिंदू पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। भगवान भोलेनाथ की पूरे विधि विधान से महाशिवरात्रि के दिन पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन महादेव का व्रत रखने से सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के लिंग स्वरूप का पूजन किया जाता है। यह भगवान शिव का प्रतीक है। शिव का अर्थ है- कल्याणकारी और लिंग का अर्थ है सृजन। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव ने ही धरती पर सबसे पहले जीवन का प्रचार-प्रसार किया था, इसीलिए भगवान शिव को आदिदेव भी कहा जाता है। आइए जानते हैं महाशिवरात्रि की तिथि, शुभ पूजन मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।महाशिवरात्रि तिथिचतुर्दशी तिथि आरंभ: 1 मार्च, मंगलवार, 03:16 am सेचतुर्दशी तिथि समाप्त: 2 मार्च, बुधवार, 1:00 am तकचारों प्रहर का पूजन मुहूर्तआइए जानते हैं इस दिन चार पहर की पूजा का समयमहाशिवरात्रि पहले पहर की पूजा: 1 मार्च 2022 को 6:21 pm से 9:27 pm तकमहाशिवरात्रि दूसरे पहर की पूजा: 1 मार्च को रात्रि 9:27 pm से 12:33 am तकमहाशिवरात्रि तीसरे पहर की पूजा: 2 मार्च को रात्रि 12:33 am से सुबह 3:39 am तकमहाशिवरात्रि चौथे पहर की पूजा: 2 मार्च 2022 को 3:39 am से 6:45 am तकमहाशिवरात्रि पूजा का महत्वमहाशिवरात्रि पर्व के यदि धार्मिक महत्व की बात की जाए तो महाशिवरात्रि शिव और माता पार्वती के विवाह की रात्रि मानी जाती है। मान्यता है इस दिन भगवान शिव ने सन्यासी जीवन से ग्रहस्थ जीवन की ओर रुख किया था। महाशिवरात्रि की रात्रि को भक्त जागरण करके माता-पार्वती और भगवान शिव की आराधना करते हैं। मान्यता है जो भक्त ऐसा करते हैं उनकी सभी मनोकामना पूरी होती है।महाशिवरात्रि की पूजा विधिमहाशिवरात्रि के दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर लें।इसके उपरांत एक चौकी पर जल से भर हुए कलश की स्थापना कर शिव-पार्वती की मूर्ति या चित्र रखें।इसके बाद रोली, मौली, अक्षत, पान सुपारी ,लौंग, इलायची, चंदन, दूध, दही, घी, शहद, कमलगटटा्, धतूरा, बिल्व पत्र, कनेर आदि अर्पित करें।इसके बाद भगवान शिव की आरती पढ़ें।यदि आप रात्रि जागरण करते हैं तो उसमें भगवान शिव के चारों प्रहर में आरती करने का विधान है।
-
बसंत पंचमी के दिन से शीत ऋतु समाप्त हो जाती है और बसंत ऋतु का आगाज होता है. इस दौरान प्रकृति स्वयं का सौंदर्यीकरण करती है. पुरानी चीजों को त्यागकर पेड़ों पर नई पत्तियां और नई कोपलें नजर आती हैं. पीले रंग की सरसों की फसल खेतों में लहलहाती है. माना जाता है कि इसी दिन माता सरस्वती भी प्रकट हुई थीं, इसलिए बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की विशेष रूप से पूजा होती है. उत्तर भारत में इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व है. लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और पीली ही चीजें भगवान को अर्पित करते हैं.
इस बार बसंत पंचमी आज 5 फरवरी 2022 को मनाई जा रही है. इस पावन अवसर पर यहां जानिए बसंत पंचमी से जुड़ी खास बातें.
– कहा जाता है कि माता सरस्वती के जन्म से पहले ये संसार मौन था. इसमें बहुत नीरसता थी. लेकिन बसंत पंचमी के दिन जब माता सरस्वती प्रकट हुई तो उनके वीणा का तार छेड़ते ही संसार के जीव जंतुओं में वाणी आ गई. वेद मंत्र गूंज उठे. तब भगवान श्रीकृष्ण ने माता सरस्वती को वरदान दिया कि आज का ये दिन आपको समर्पित होगा. इस दिन लोग आपकी पूजा करेंगे. आप ज्ञान, वाणी और संगीत की देवी कहलाएंगी.
– बसंत पंचमी के दिन तमाम घरों में कॉपी-किताबों की पूजा के बाद छोटे बच्चे को पहली बार लिखना सिखाया जाता है. मान्यता है कि इससे बच्चे कुशाग्र बुद्धि के होते हैं और उन पर माता सरस्वती की हमेशा कृपा बनी रहती है. ऐसे बच्चे खूब तरक्की करते हैं.
– बसंत पंचमी के दिन भारत में तमाम जगहों पर पतंग उड़ाई जाती है. कहा जाता है कि पतंग उड़ाने का रिवाज़ हज़ारों साल पहले चीन में शुरू हुआ था. इसके बाद फिर कोरिया और जापान के रास्ते होता हुआ भारत पहुंचा.
– बसंत पंचमी के दिन देश के तमाम हिस्सों में अलग अलग मिष्ठान बनाकर दिन को सेलिब्रेट किया जाता है. बंगाल में बूंदी के लड्डू और मीठा भात चढ़ाया जाता है. बिहार में खीर, मालपुआ और बूंदी और पंजाब में मक्के की रोटी, सरसों का साग और मीठा चावल चढाया जाता है. उत्तर प्रदेश में भी पीले मीठे चावल प्रसाद के तौर पर बनाएं जाते हैं.
– बसंत पंचमी के दिन होलिका दहन के लिए लकड़ियों को इकट्ठा करके एक सार्वजनिक स्थान पर रख दिया जाता है. अगले 40 दिनों के बाद, होली से एक दिन पहले श्रद्धालु होलिका दहन करते हैं. इसके बाद होली खेली जाती है.
– कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन श्रीराम गुजरात और मध्य प्रदेश में फैले दंडकारण्य इलाके में मां सीता को खोजते हुए आए थे और यहीं पर मां शबरी का आश्रम था. इस क्षेत्र के वनवासी आज भी एक शिला को पूजते हैं, उनका मानना है कि श्रीराम उसी शिला पर आकर बैठे थे. वहां शबरी माता का मंदिर भी है
– कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन ही पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गोरी का वध करके आत्मबलिदान दिया था. - घर बनाते समय वास्तु को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी के अनुसार घर के सभी हिस्सों का निर्माण किया जाता है। हालांकि बहुत से लोग घर बनाते समय वास्तु पर विचार करते हैं, लेकिन वे अक्सर लिविंग रूम के बारे में भूल जाते हैं। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार एक बार घर बन जाने के बाद लिविंग रूम को वास्तु के अनुसार सजाना चाहिए। इससे लिविंग रूम में सकारात्मक ऊर्जा आती है। जरा सी लापरवाही घर में कलह और परेशानी का कारण बन सकती है। अगर आप भी अपने लिविंग रूम से नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखना चाहते हैं तो आप ये वास्तु टिप्स आजमा सकते हैं।वास्तु के अनुसार इस तरह का होना चाहिए लिविंग रूम-वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार एक लिविंग रूम में ज्यादा से ज्यादा खिड़कियां होनी चाहिए। इससे लिविंग रूम में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जब भी आप लिविंग रूम बनाने प्लान बनाएं तो लिविंग रूम में ज्यादा से ज्यादा खिड़कियां बनाना सुनिश्चित करें।-आपका लिविंग रूम अन्य कमरों के समान नहीं होना चाहिए। लिविंग रूम सबसे बड़ा होना चाहिए। लिविंग रूम में ऐसी तस्वीर न लगाएं जो रोने, शोक और विवाद से संबंधित हो। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा आती है। घर में कलह की उत्पन्न होता है। इससे घर की शांति भंग होती है। लिविंग रूम में बिजली के उपकरणों को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। आप इस दिशा में एक रैक या अलमारी बना सकते हैं। इसके अलावा दक्षिण की दीवार पर टीवी लगाएं।-लिविंग रूम में टेबल और कुर्सी जैसे फर्नीचर को इस तरह से व्यवस्थित करें कि आपको चलने फिरने में दिक्कत न हो। लिविंग रूम का निर्माण उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में करना शुभ होता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।-घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने के लिए रोजाना शाम को मोमबत्ती या मिट्टी का दीपक जलाएं। आप इन्हें पूजा स्थल या मेडिटेशन स्थल पर जला सकते हैं।-लिविंग रूम में पानी के बाउल में फूल रखें। आर्टिफिशियल की बजाए असली फूलों का इस्तेमाल करें। इससे न केवल घर में सुंगध होगी बल्कि इससे सकारात्मक वातावरण रहेगा।-साथ ही अपनी दीवारों और छत के रंगों को अलग-अलग रखें। सीधे शब्दों में कहें तो दीवार और छत अलग-अलग रंगों की होनी चाहिए।
- वैसे तो इंसान कर्ज यानि ऋण से बचना चाहता है. लेकिन शास्त्रों के मुताबिक जन्म से ही इंसान पांच प्रकार के ऋण से युक्त हो जाता है. ये ऋण हैं- मातृ ऋण, पितृ ऋण, देव ऋण, ऋषि ऋण और मनुष्य ऋण. कते हैं कि जो मनुष्य ऋणों को नहीं उतारता है, उसे कई प्रकार के दुख और संताप झेलने पड़ते हैं. आगे जानते हैं इस बारे में.मातृ ऋण (Matri Rin)शास्त्रों में माता का स्थान परमात्मा से भी ऊंचा बताया गया है. मातृ ऋण में माता और मातृ पक्ष के सभी लोग जैसे-नाना, नानी, मामा-मामी, मौसा-मौसी और इनके तीन पीढ़ी के पूर्वज होते हैं शामिल . ऐसे में मातृ पक्ष या माता के प्रति किसी प्रकार का अपशब्द बोलने या कष्ट देने से अनेक प्रकार का कष्ट झेलना पड़ता है. इतना ही नहीं, पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार में कलह-क्लेश होते रहते हैं.पितृ ऋण (Pitra Rin)पिता की छत्रछाया में कोई इंसान पलता-बढ़ता है. पितृ ऋण में पितृ-पक्ष के लोग जैसे दादा-दादी, ताऊ, चाचा और इनके पहले की तीन पीढ़ीयों के लोग शामिल होते हैं. शास्त्रों के मुताबिक पितृ भक्त बनना हर इंसान का परम कर्तव्य है. इस धर्म का पालन नहीं करने पर पितृ दोष लगता है. जिससे जीवन में तमाम तरह की समस्याएं उत्पन्न होती हैं. इतनी ही नहीं इस दोष के प्रभाव से जीवन में दरिद्रता, संतानहीनता, आर्थिक तंगी और शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ता है.देव ऋण (Dev Rin)माता-पिता के आशीर्वाद के कारण ही गणेशजी देवताओं में प्रथम पूज्य हैं. यही कारण है कि हमारे पूर्वज भी मांगलिक कार्यों में सबसे पहले कुलदेवी या देवता की पूजा करते थे. इस नियम का पालन न करने वालों के देवी-देवता का श्राप लगता है.ऋषि ऋण (Rishi Rin)मनुष्य का गोत्र किसी न किसी ऋषि से जुड़ा है. गोत्र में संबंधित ऋषि का नाम जुड़ा होता है. इसलिए पूजा-पाठ में ऋषि तर्पण का विधान है. ऐसे में ऋषि तर्पण नहीं करने वालों को इसका दोष लगता है. जिससे मांगलिक कार्यों में बाधा आती है और यह क्रम पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है.मनुष्य ऋण (Manushya Rin)माता-पिता के अलावा इंसान को समाज के लोगों से भी प्यार दुलार और सहयोग प्राप्त होता है. इसके अलावा इंसान जिस पशु का दूध पीता है, उसका कर्ज भी उतारना पड़ता है. साथ ही कई बार ऐसा भी होता है कि मनुष्य, पशु-पक्षी भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हमारी मदद करते हैं. ऐसे में इनके ऋण भी चुकाने पड़ते हैं. कहते हैं कि मनुष्य ऋण के कारण ही राजा दशरथ के परिवार को कष्ट झेलना पड़ा.
-
धनवान बनने की चाहत किसे नहीं होती। व्यक्ति धनवान बनने के लिए दिन-रात कोशिश में जुटे रहते हैं। लेकिन हस्तरेखा में ऐसे बहुत से चिह्न होते हैं जो व्यक्ति के धनवान बनने का इशारा करते हैं। यदि ये चिह्न आपकी हथेली में हैं तो आप निश्चित रूप से धनवान होंगे। इसके लिए सूर्य पर्वत बहुत महत्वपूर्ण है। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार यदि सूर्य पर्वत पर मछली का चिह्न बना है तो तय मानिए यह आपको जीवन में नाम और पैसा मिलेगा। ऐसे चिह्न वाले लोग अत्यधिक धनवान होते हैं। ऐसे व्यक्ति जीवन में धनवान और मान-सम्मान पाने वाले व्यक्ति होते हैं। मछली का चिह्न जितना बड़ा होगा, उसका असर उतना ज्यादा रहेगा।
लोकप्रिय होना चाहते हैं तो अपनाएं यह उपाय
यदि गुरु पर्वत पर भी मछली का निशान बनता है तो यह भी व्यक्ति के जीवन में धनवान बनने का संकेत देता है। ऐसे व्यक्ति बड़ा काम करते हैं। यदि इस पर्वत पर मछली के निशान के साथ तर्जनी उंगली भी लंबी है तो ऐसे व्यक्ति अधिकारी अथवा प्रभावशाली राजनेता होते हैं। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार सूर्य पर्वत पर चक्रनुमा कोई निशान मिलता है तो भी व्यक्ति जीवन में राजनीति अथवा सरकारी क्षेत्र से जुड़कर पैसा कमाते हैं। इस तरह के लोग अपने जीवन में धनवान होते हैं। शनि पर्वत पर चक्र का निशान मिलना राजनीति की ओर ले जाता है। ऐसे लोग करोड़पति होते हैं। इनके पास धन की कोई कमी नहीं होती। हाथ में यह निशान अकूत धन-संपत्ति का संकेत है। चंद्रमा पर चक्र का निशान व्यक्ति को विदेश से धन कमाने का इशारा करता है। इस तरह के लोग बहुतायत में विदेश से धन कमाते हैं। यदि सूर्य पर्वत पर पद्म का निशान है तो भी व्यक्ति बहुत धनवान होता है। ऐसे व्यक्ति उच्च स्तरीय पदाधिकारी होता है। -
साल 2022 में कुल 4 ग्रहण होंगे। पहला सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल को पड़ेगा। वैसे ग्रहण एक खगोलीय घटना है जिसका वैज्ञानिक आधार होता है। लेकिन ज्योतिषशास्त्र में इसके बारे में कई मान्यताएं व महत्व/प्रभाव बताए गए हैं। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार 30 अप्रैल का सूर्य ग्रहण भारत समेत विश्व के कई देशों में दिखाई देगा। भारत में इसे आंशिक सूर्य ग्रहण माना गया है। इसके बाद अगला ग्रहण मई महीने में होगा जोकि एक चंद्र ग्रहण है।
आगे देखिए इस साल के आगामी ग्रहणों की तारीखें व समय-
आपको बता दें कि ज्योतिषशात्र के अनुसार, सभी चंद्र ग्रहण अमावस्या के तिथि को पड़ते हैं जबकि सूर्य ग्रहण पूर्णिमा तिथि को होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दिन कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। हालांकि इस दिन पूजा-पाठ का विशेष महत्व बताया गया है। ग्रहण के दौरान लोग गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए जिससे कि उनके गर्भ में पल रहे शिशु पर किसी नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव न पड़े। ग्रहण के 12 घंटे पहले और 12 घंटे बाद के समय को सूतक काल के रूप में जानते हैं। सूतक काल के दौरान कोई भी नया काम नहीं करना चाहिए। इस दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद रखे जाते हैं और ग्रहण समाप्ति के बाद देवी-देवताओं को स्नान कराकर मंदिर फिर से खोले जाते हैं।
आगामी ग्रहणों की तारीखें ---
30 अप्रैल 2022 - सूर्य ग्रहण
16 मई 2022 - चंद्र ग्रहण
25 अक्टूबर 2022- सूर्य ग्रहण
08 नवंबर 2022 - चंद्रग्रहण
सूतक काल में बरतें ये सावधानियां----
1- धार्मिक व ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सूतक काल में बालक, वृद्ध एवं रोगी को छोड़कर अन्य किसी को भोजन नहीं करना चाहिए।
2- सूतक काल लगते ही तुलसी या कुश मिश्रित जल को खाने-पीने की चीजों में रखना चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि तुलसी दल या कुश को ग्रहण के बाद निकाल देना चाहिए। कहते हैं ग्रहण का असर तुलस दल ले लेता है और आपकी चीजों को दूषित नहीं होने देता । इसलिए ग्रहण समाप्त होने के बाद इसे निकाल लेना चाहिए।
3- गर्भवतियों को खासतौर से सावधानी रखनी चाहिए।
4- मान्यता है कि सूतक के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते। घर में भी मंदिर को कपड़े से कवर कर देना चाहिए। इस दौरान कोई पूजा पाठ नहीं किया जाता है।
5- ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।
6- ग्रहणकाल में स्नान न करें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें।
7- ग्रहण (Solar) को खुली आंखों से न देखें।
8- ग्रहणकाल के दौरान गुरु प्रदत्त मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। - ज्यादातर लोगों को इस बात की जानकारी होती है कि नमक का अधिक सेवन सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है. नमक (Vastu tips of Salt) किचन की अहम चीजों में से एक होता है. वैसे ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के मुताबिक भी नमक का जीवन में बहुत महत्व होता है. किसी भी स्थान को शुद्ध करने के लिए नमक का इस्तेमाल किया जाता है. कहीं पर नमक की मदद से नेगेटिव एनर्जी को दूर किया जाता है. कहते हैं कि नमक घरों के माहौल को शुद्ध और स्वस्थ रखने में भी कारगर होता है. भले ही ये घर के लिए फायदेमंद हो, लेकिन मान्यता है कि कभी-कभी इसका इस्तेमाल प्रतिकूल प्रभाव भी छोड़ सकता है. देखा जाए तो वास्तु के मुताबिक इसके कई सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव भी होते है. आज हम आपको इन्हीं नेगेटिव और पॉजिटिव इफेक्ट्स के बारे में बताने जा रहे हैं.नमक के सकारात्मक प्रभाव1. कभी-कभी नकारात्मकता शरीर पर इतनी हावी हो जाती है कि लोग थका हुआ महसूस करते हैं. ऐसे में इस नेगेटिविटी को दूर करने के लिए आप नमक के पानी का स्नान कर सकते हैं. कहते हैं कि इससे प्रभावित व्यक्ति पॉजिटिव फील करने लगता है.2. घर में शांति और पॉजिटिविटी बनाए रखने में भी नमक कारगर माना जाता है. इसके लिए घर के किसी कोने में एक कटोरी में नमक का पानी रखना चाहिए. ये तरीका घर से नेगेटिविटी को दूर करता है. हालांकि, अगर दिन इस पानी को घर के बाहर जाकर जरूर फेंक दें.3. नमक से एक और सकारात्मक प्रभाव की बात की जाए तो बता दें कि ये नींद न आने की समस्या को भी दूर करने में सक्षम माना जाता है. बस जिस कमरे में आप सोने जा रहे हैं, वहां नमक रख लें. कहते हैं कि इससे सुकून की नींद आती है.नमक के नकारात्मक प्रभाव1. कभी-कभी लोगों से किचन में गलती से नमक गिर जाता है. इसे शुभ नहीं माना जाता, क्योंकि कहते हैं कि इससे घर में नेगेटिविटी आती है. अगर गलती से नमक किचन में गिर भी जाए, तो उसे कपड़े से साफ करें. अक्सर लोग गिरे हुए नमक को झाड़ू से साफ करने की भूल कर देते हैं, जो बहुत अशुभ माना जाता है.2. ज्यादातर लोगों को खान में ऊपर से नमक डालकर खाने की आदत होती है. इस दौरान भी नमक का नकारात्मक प्रभाव बुरा असर डाल सकता है. दरअसल, ग्रहणी अगर अपने हाथ से खाना खाने वाले के हाथों में नमक दे, तो ये भी घर में नेगेटिविटी या झगड़े की वजह बन सकता है.3. नमक से किए गए उपाय के बाद उसे वहां से हटाने के भी कुछ नियम होते हैं. घर में रखे गए नमक के पानी को दोबारा इस्तेमाल में लिया जाए, तो घर में पॉजिटिविटी के बजाय नेगेटिविटी आने लगती है. बेहतर रहेगा कि इस पानी को घर के बाहर जाकर फेंका जाए.
- हम सभी के शरीर के तमाम हिस्सों पर तिल होते हैं. ये तिल काले, भूरे और लाल रंग के हो सकते हैं. ये तिल अगर आपके चेहरे (Moles on Face) पर हों, तो इन्हें खूबसूरती से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन ज्योतिष (Astrology) के मुताबिक ये तिल आपके जीवन के कई रहस्यों के बारे में बताते हैं. समुद्र शास्त्र की मानें तो तिल के जरिए व्यक्ति के जीवन से जुड़े कई रहस्यों को आसानी से उजागर किया जा सकता है. कुछ जगहों पर तिल का होना भाग्यशाली बनाता है, तो कई बार इन्हें दुर्भाग्य से भी जोड़कर देखा जाता है।यहां जानिए समुद्र शास्त्र (के मुताबिक आपके चेहरे के तिल क्या बताते हैं----– यदि किसी महिला या पुरुष के बाएं गाल पर तिल हो तो इसका मतलब है कि उसका वैवाहिक जीवन काफी खुशहाल होगा. ऐसे लोगों को अपने वैवाहिक जीवन में बहुत मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता. उनकी मैरिड लाइफ खुशहाल रहती है.– अगर आपके होंठ के पास तिल है तो इसके कई मायने हो सकते हैं. होंठ के नीचे का तिल आपके सुखद और अमीरी के साथ जीवन जीने की ओर इशारा करता है. ऐसे लोगों को कुछ भी प्राप्त करने के लिए बहुत मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती. वहीं होंठ के ऊपर का तिल आपके व्यक्तित्व और खूबसूरती को आकर्षक बनाता है. ऐसे लोगों को महंगी चीजों को इस्तेमाल करने का बहुत शौक होता है.– जिन लोगों के दोनों भौहों के बीच में तिल होता है, उनकी उम्र काफी मानी जाती है. ये लोग काफी उदार दिल वाले होते हैं और लोगों की मदद के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं.– वहीं माथे पर तिल ये बताता है कि आपको जीवन में जो भी हासिल होगा, वो काफी संघर्ष के बाद मिलेगा. वहीं जिनके नाक पर तिल होता है, ऐसे लोग कई तरह की प्रतिभाओं में निपुण होते हैं. लेकिन इन्हें गुस्सा जल्दी आता है.– दाहिने गाल पर तिल का होना ये संकेत देता है कि व्यक्ति खूब बुद्धिमान है. ऐसे लोगों को अपने भाग्य से ज्यादा खुद पर यकीन करना चाहिए. अगर आप कुछ ठान लेंगे तो उसे हर हाल में पूरा करके ही दम लेंगे.– ठुड्डी पर तिल वाले लोग काफी दिल के साफ माने जाते हैं. जिनकी ठुड्डी पर दाहिनी तरफ तिल होता है, वो काफी कलात्मक और खुशमिजाज होते हैं और ठुड्डी पर बांयीं ओर जिसके तिल होता है, वो काफी कंजूस माने जाते हैं।
- भगवान गणेश माता पार्वती और महादेव के पुत्र हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता लक्ष्मी (Mata Lakshmi) भी श्रीगणेश को ही अपना पुत्र मानती है? गणपति को माता लक्ष्मी का दत्तक पुत्र कहा जाता है. दीपावली पर माता लक्ष्मी की श्रीगणेश के साथ पूजन माता और पुत्र के रूप में होता है. कहा जाता है कि लक्ष्मी के साथ अगर गणपति का भी पूजन किया जाए तो माता अत्यंत प्रसन्न होती हैं और ऐसे भक्तों पर सदैव अपनी कृपा दृष्टि बनाकर रखती हैं. भगवान गणेश माता लक्ष्मी के पुत्र कैसे बने, इसके पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है. यहां जानिए उस कथा के बारे में.गणपति को माता लक्ष्मी ने लिया था गोदमाता लक्ष्मी को जगत जननी कहा जाता है, क्योंकि वे जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पत्नी हैं. सारा संसार माता लक्ष्मी के ही प्रेम और माया से चलता है. पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता लक्ष्मी को इस बात का घमंड हो गया कि संसार में हर कोई लक्ष्मी को ही पाना चाहता है. लक्ष्मी के बगैर किसी का काम ही नहीं चल सकता.मां लक्ष्मी के इस अभिमान को श्री हरि ने भांप लिया, तब विष्णु जी ने सोचा कि माता का ये अहंकार समाप्त करना बहुत जरूरी है. इसलिए उन्होंने कहा कि ये सच है कि देवी लक्ष्मी के बगैर संसार में कुछ नहीं हो सकता. सारा संसार आपको पाने के लिए व्याकुल रहता है, लेकिन फिर भी देवी आप अपूर्ण हैं. नारायण की बात सुनकर माता लक्ष्मी को बहुत बुरा लगा और उन्होंने नारायण से पूछा कि वे अपूर्ण कैसे हैं?तब विष्णु जी ने उनसे कहा कि जब तक कोई स्त्री मां नहीं बनती है, तब तब वह पूर्ण नहीं होती है. ये जानकर मां लक्ष्मी अत्यंत पीड़ा का अनुभव हुआ और वे अपने मन की बात कहने अपनी सखी पार्वती के पास पहुंचीं. उन्होंने कहा कि नि:संतान होना बेहद परेशान कर रहा है. इसलिए हे पार्वती क्या आप अपने दोनों पुत्रों में से एक को मुझे गोद दे सकती हैं? माता पार्वती ने उनका दुख दूर करने के लिए ये बात मान ली और गणपति को माता लक्ष्मी को सौंप दिया. इसके बाद से गणपति माता लक्ष्मी के दत्तक पुत्र कहलाने लगे.इसके बाद मां लक्ष्मी ने कहा कि आज से जिस घर में लक्ष्मी के साथ उसके दत्तक पुत्र गणेश की भी पूजा होगी, वहां मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहेगी. यही कारण है कि गणपति के साथ लक्ष्मी की प्रतिमा मां विराजमान होती हैं और दोनों की पूजा हमेशा साथ की जाती है.
- माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मां सरस्वती (Maa Saraswati) के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस पर्व को बसंत पंचमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन बुद्धि, विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है. इसी दिन से बसंत ऋतु की भी शुरुआत हो जाती है. इस मौसम में माता सरस्वती को पीले रंग की चीजों को अर्पित किया जाता है. माता सरस्वती का पसंदीदा भोग मीठे चावल को माना जाता है. इस बार बसंत पंचमी 5 फरवरी को शनिवार के दिन मनाई जाएगी. ऐसे में आप माता सरस्वती का पसंदीदा भोग अपने हाथों से तैयार करके उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.जानिए मीठे चावल को बनाने का तरीका---मीठे चावल बनाने की सामग्री-चावल- 1 कप -चीनी – 3 कप -देशी घी – 2 चम्मच -पानी – जरूरत के अनुसार -तेजपत्ता – 1 -हल्दी – आधा चम्मच -कटे हुए काजू – 1 चम्मच -केसर – 15 पत्ती -छोटी इलायची- 4 -लौंग – 2 -कटे हुए बादाम – 1 चम्मचमीठे चावल को बनाने का तरीका– मीठे चावल को बनाने के लिए सबसे पहले चावल को बीनकर और धोकर करीब आधे घंटे के लिए भिगो दें. भिगोने से चावल अच्छे से पकता है और खिला खिला बनता है.– इस बीच इलायची को छीलकर पीस लें और काजू, बादाम को छोटे टुकड़ों में काट लें. जितना पानी चावल पकाते समय इस्तेमाल करना हो, उतना पानी लेकर हल्का सा गुनगुना करें और उसमें तीन कप चीनी डाल दें, ताकि चीनी पानी में अच्छे से घुल जाए.– अब आप गैस पर कुकर रखें और गैस जलाएं. जिस पानी में चावल भिगोए हैं, उस पानी को चावल से हटा दें. कुकर में घी डालें और गर्म करें. इसके बाद तेजपत्ता, लौंग और पिसी इलायची डालें.– अब इसमें हल्दी डालकर चावल डालें और सारी चीजों को अच्छी तरह से मिक्स करें. इसके बाद आप चीनी मिला हुआ पानी डाल दें. चावल में दो सीटी लगाकर चावल को पकाएं. चावल पकने के बाद इसमें काजू और बादाम डालकर चावल को गार्निश करें.सुझाव : आप चाहें तो चावल को अलग से पकाकर कड़ाही में घी डालकर फ्राई भी कर सकते हैं. ऐसे में फ्राई करने के दौरान शक्कर डालें.
- शरद ऋतु के समाप्त होते ही बसंत ऋतु आती है. बसंत पंचमी बसंत ऋतु में आने वाला खास त्योहार है. हर साल माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ये त्योहार मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती प्रकट हुई थीं. उनके प्रकट होने के साथ ही चारों ओर ज्ञान और उत्सव का वातावरण उत्पन्न हो गया और वेदमंत्र गूंजने लगे थे. मां सरस्वती को ज्ञान और संगीत की देवी कहा जाता है. इस कारण ये दिन विद्यार्थियों और संगीत प्रेमियों के लिए विशेष होता है. इस बार बसंत पंचमी 5 फरवरी को शनिवार के दिन मनाई जाएगी. अगर आप भी विद्यार्थी हैं या किसी विशेष परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से काफी लाभ हो सकता है.प्रतियोगिता की तैयारी करने वालों के लिएअगर आप किसी उच्च शिक्षा या फिर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा के समय अपनी किताबों की भी पूजा करें और ब्राह्मण को वेदशास्त्र दान करें.पढ़ाई में मन न लगता हो तोअगर आपके बच्चों का मन पढ़ाई-लिखाई में नहीं लगता है तो बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का चित्र अपने कमरे में लगाएं और हरे रंग का फल अर्पित करें.बच्चे को कुशाग्र बुद्धि का बनाने के लिएअगर आपका बच्चा ढाई से तीन साल का है, तो बसंत पंचमी के दिन चांदी की कलम या फिर अनार की लकड़ी से बच्चे की जीभ पर ॐ लिखें. इसके अलावा बच्चों को लाल कलम से एक नोटबुक पर ॐ ऐं लिखवाएं. इससे बच्चा कुशाग्र बुद्धि का और ज्ञानी बनता है.एकाग्रता बढ़ाने के लिएअगर बच्चे की एकाग्रता बढ़ानी है तो बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती के पूजन के बाद उसे छह मुखी रुद्राक्ष धारण करवाएं. पूजा के बाद बच्चे की स्टडी टेबल पर माता सरस्वती की तस्वीर स्थापित करें और बच्चे से कहें कि पढ़ाई से पहले नियमित रूप से माता को प्रणाम करना है. ऐसा रोजाना करने से मां सरस्वती का आशीर्वाद मिलेगा और एकाग्रता भी बढ़ेगी.
- हिंदू धर्म में रात में नाखूनों और बालों को काटना अशुभ बताया जाता है. मान्यता है कि शाम के समय देवी लक्ष्मी का घर में प्रवेश होता है. ऐसे में बालों और नाखूनों को काटने से घर में गंदगी होती है और इसे माता लक्ष्मी का अनादर माना जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं. इससे घर में धन हानि होती है और दरिद्रता आ जाती है. इस मान्यता को सच मानकर तमाम लोग इस नियम का पालन करते हैं. लेकिन वास्तव में हर मान्यता के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक तथ्य छिपा होता है, जिन पर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते. यहां जानिए रात में नाखून और बाल न काटने की मान्यता के पीछे वास्तविक वजह क्या है !ये है वास्तविक वजहदरअसल इस तरह के कोई भी नियम काफी पहले बनाए गए हैं. उस समय में घरों में रोशनी के अच्छे प्रबंध नहीं हुआ करते थे. लोग जुगाड़ से किसी तरह रोशनी का प्रबन्ध करते थे. इस कारण ज्यादातर काम सूर्य अस्त होने से पहले ही निपटाने का नियम था. रात के समय कैंची से नाखून काटने से चोट लगने की आशंका रहती थी, वहीं बाल इधर उधर उड़ते थे. इसलिए हमारे पूर्वजों ने इस काम को रात में करने से मना किया. लोग इस नियम का पालन ठीक से करें, इसलिए इसे दुर्भाग्य का कारण बताकर धर्म से जोड़ दिया गया. तब से आज तक इस नियम का पालन किया जा रहा है.ये भी है कारणरात में बाल और नाखून न काटने का एक कारण ये भी था कि नाखून मजबूत होते हैं. इन्हें कैंची से काटने पर ये छिटक कर दूर गिरते हैं, वहीं बाल उड़कर गंदगी फैलाते हैं. ऐसे में इनके खाने की किसी चीज में पहुंचने की आशंका रहती थी. बालों और नाखूनों में कई तरह के बैक्टीरिया होते हैं, जो खाने को दूषित करते हैं. ऐसे में व्यक्ति के पेट में भी गंदगी जाने की आशंका बढ़ जाती है. इस कारण रात के समय नाखून और बाल न काटने का नियम बना दिया गया.
- सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है. कुंडली में अगर सूर्य कमजोर स्थिति में हो या व्यक्ति सूर्य की महादशा को झेल रहा हो तो उसकी सेहत और मान-प्रतिष्ठा प्रभावित होती है. कॅरियर में तमाम समस्याएं आती हैं, जिससे आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है. व्यक्ति के संबन्ध पिता से बिगड़ने लगते हैं और निर्णय क्षमता भी कमजोर होने लगती है. यदि आपके जीवन में भी ऐसा कुछ घटित हो रहा है तो गुड़ से जुड़े कुछ उपाय करने से आपको राहत मिल सकती है. ज्योतिष में गुड़ को सूर्य का कारक माना गया है. यहां जानिए गुड़ से जुड़े कुछ ज्योतिषीय उपायों के बारे में.नौकरी के लिएअगर आपका कॅरियर मुश्किल में है और आप बेहतर नौकरी चाहते हैं, तो नौकरी की तलाश करने से पहले रोटी में गुड़ मिलाकर गाय को खिलाएं. इंटरव्यू के लिए जाते समय गुड़ खाकर और जल पीकर घर से निकलें. आपको इसके सकारात्मक परिणाम मिलेंगे.सूर्य की स्थिति को प्रबल करने के लिएसूर्य की कमजोर स्थिति को प्रबल करने के लिए रविवार के दिन 800 ग्राम गेंहू और इतनी ही मात्रा में गुड़ लेकर किसी मंदिर में रख देना दें. इसके अलावा नियमित रूप से सूर्य देवता को अर्घ्य देने की आदत डालें.तनाव दूर करने के लिएअगर तमाम परेशानियों को झेलते झेलते आपके जीवन में काफी तनाव आ गया है, जिसके कारण आप रात में ठीक से सो भी नहीं पाते, तो रविवार के दिन दो किलो गुड़ को एक लाल कपड़े में बांधकर अपने बेडरूम में किसी सुरक्षित स्थान पर रख दें. इससे आपकी समस्या दूर हो जाएगी.पिता से संबन्ध सुधारने के लिएपिता का कारक सूर्य होता है. अगर सूर्य की अशुभ स्थिति के कारण पिता और पुत्र के संबन्धों में खटास आ गई है तो गुड़ का एक उपाय लगातार तीन रविवार तक करना चाहिए. इसके लिए सवा किलो गुड़ को बहते हुए जल में लगातार तीन रविवार तक प्रवाहित करें.यश प्राप्त करने के लिएसूर्य से जुड़ी बीमारियों में राहत पाने और मान-प्रतिष्ठा व यश में वृद्धि के लिए रोजाना तांबे के लोटे में रोली, अक्षत और थोड़ा गुड़ डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें. अगर रोजाना ये संभव न हो, तो कम से कम रविवार के दिन सुबह जल्दी उठकर ऐसा जरूर करें.
- फेंगशुई के अनुसार लाफिंग बुद्धा की मूर्ति नकारात्मकता को दूर करती है. आप इसे घरों, रेस्तरां, व्यवसाय के स्थानों आदि में रख सकते हैं. लाफिंग बुद्धा को घर या व्यवसाय में धन और समृद्धि लाने के लिए जाना जाता है. ये मूर्ति न केवल घर और कार्यालय की शोभा को बढ़ाती है बल्कि ये सकारात्मकता का संचार भी करती है. ये मूर्ति गुड लक लाने के लिए घर में रखी जाती हैं. लोग लाफिंग बुद्धा की मूर्ति को सुख-समृद्धि का प्रतीक मानते हैं. लाफिंग बुद्धा की मूर्ति कहां स्थापित करनी चाहिए और इस मूर्ति को कैसे रखा जाना चाहिए इसके क्या नियम हैं आइए जानें.कार्य डेस्क या स्टडी रूम में रखेंआप अपने ऑफिस में लाफिंग बुद्धा को अपने डेस्क पर रख सकते हैं. इससे आपको अपने करियर में बेहतरीन संभावनाएं तलाशने में मदद मिलती है. छात्र इस मूर्ति को अपने स्टडी टेबल पर रख सकते हैं. ऐसा करने से पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है. इसके अलावा ये मूर्ति नकारात्मकता ऊर्जा, झगड़ों और बहस को रोकने में मदद करती है. फेंगशुई के नियम के अनुसार लाफिंग बुद्धा को अपने घर में दक्षिण पूर्व दिशा में रखें. इससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. घर के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम के लिए लाफिंग बुद्धा पूर्व दिशा में भी रख सकते हैं. लाफिंग बुद्धा दोनों हाथों को उठाकर हंस रहे हों ऐसी मूर्ति इस दिशा में रखें.लाफिंग बुद्धा रखने से कहां बचेंफेंगशुई और बौद्ध धर्म में लाफिंग बुद्धा का बहुत सम्मान किया जाता है. लाफिंग बुद्धा की मूर्ति पूजा और सम्मान की चीज है. अगर आप इस मूर्ति का अनादर करते हैं, तो कहा जाता है कि ये सब उलट देती है और दुर्भाग्य लाती है. ऐसा करने से नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. इसलिए इसे रखते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए. इस मूर्ति को कभी भी बाथरूम, किचन या फर्श पर न रखें. फेंगशुई के अनुसार इन जगहों को अशुभ माना जाता है.कैसे रखेंमूर्ति की ऊंचाई कम से कम आंखों के स्तर पर होनी चाहिए. मूर्ति को नीचे से देखना सम्मान की बात है न कि ऊपर से नीची देखना. ये किसी भी छवि या मूर्ति के लिए अच्छा है जो धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व की है. ये महत्वपूर्ण है कि आप भाग्य को आकर्षित करने के लिए लाफिंग बुद्धा की मूर्ति को मुख्य द्वार की सामने स्थापित करें. आप लाफिंग बुद्धा को उपहार के रूप में भी दे सकते हैं. आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहें तो बुद्धा की मूर्ति घर पर ला सकते हैं. इससे न केवल घर की सुख शांति बनी रहेगी बल्कि आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा.वू लू धारण किए हुए लाफिंग बुद्धा को पूर्व दिशा में रखेंअपने और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य के लिए आप घर में वू लू धारण किए हुए लाफिंग बुद्धा की मूर्ति रख सकते हैं. इस मूर्ति को पूर्व दिशा में रखें. इससे घर के सभी सदस्यों की सेहत दुरूस्त रहेगी.
- हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस बार मौनी अमावस्या 01 फरवरी 2022 के दिन पड़ रही है। माघ अमावस्या पर गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है।हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। अमावस्या तिथि पर दान, स्नान और पूजा-पाठ करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस बार मौनी अमावस्या 01 फरवरी 2022 के दिन पड़ रही है। माघ अमावस्या पर गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। इस दिन मौन व्रत करके पितरों को तर्पण और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। माघ के महीने में अमावस्या तिथि पर पितृदोष से छुटकारा पाने के लिए विशेष तिथि होती है। इस दिन पितरगण को प्रसन्न करने के लिए गंगा स्नान के बाद उन्हें तर्पण, पिंडदान और दान करने की परंपरा होती है। सालभर में सभी पड़ने वाली सभी अमावस्या में मौनी अमावस्या पर पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए खास मानी गई है। मान्यता है मौनी अमावस्या तिथि पर कुछ उपाय करने से पितृदोष से मुक्ति मिल जाती है। आइए जानते हैं मौनी अमावस्या तिथि पर आप किन-किन उपायों का अपनाकर पितृदोष से मुक्ति पा सकते हैं।पितृदोष से मुक्ति पाने के उपाय- ऐसी मान्यता है कि भगवान सूर्य को रोजाना सुबह जल अर्पित करने से जातक के जीवन से सभी तरह दोष फौरन ही दूर हो जाते हैं। ऐसे में पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए मौनी अमावस्या पर पितरों का ध्यान करते हुए सूर्यदेव को जल अर्पित करें। सूर्यदेव को जल देने के साथ उसमें लाल फूल, काला तिल और अक्षत डालकर सूर्य मंत्र जरूर बोलें।- मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद पीलल के पेड़ की पूजा जरूर करनी चाहिए। मान्यता है पीपल के पेड़ में सभी देवी- देवताओं समेत पितरगण भी निवास करते हैं। ऐसे में पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए और पितरों को तर्पण करने के लिए फूल,जल और दीपक जलाएं।- मौनी अमावस्या तिथि पर गंगास्नान के बाद गरीबों और जरूरमंदों को काले तिल से बने हुए लड्डू, तिल का तेल, कंबल और वस्त्रों का दान करना चाहिए। इस उपाय से पितृदोष की शांति होती है।- मौनी अमावस्या पर जानवरों को रोटी भी खिलाएं। इसके अलावा इस दिन चीटियों को आटे में चीनी मिलाकर खिलाने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है।-



























