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- पारंपरिक परिधान के बिना त्योहार की बात पूरी नहीं होती। और पारंपरिक परिधान जेवर और अन्य एक्सेसरीज के बिना प्रभावी नहीं लगता। पर, इन सबके अलावा एक और चीज आपके पारंपरिक लुक को खास बनाती है और वह है, आपका हेयर स्टाइल। साड़ी, सलवार-सूट या फिर लहंगा के साथ आप हेयर स्टाइल कैसा बनाती हैं, इसका असर इस बात पर पड़ता है कि पूरा लुक कितना प्रभावी लग रहा है। ऐसे में आपकी व्यस्तता चाहे कितनी भी ज्यादा क्यों ना हो, अपने पारंपरिक कपड़े के अनुरूप हेयर स्टाइल बनाने के लिए कुछ वक्त जरूर निकाल लें। अनारकली सूट से लेकर मैक्सी ड्रेस तक और साड़ी से लेकर लहंगा तक को पहनने के बाद हेयर स्टाइल के मामले में आपके पास क्या-क्या हैं विकल्प, आइए जानें:पारंपरिक जूड़ा है ना!पारंपरिक त्योहारी लुक को पूरा करने में जूड़े से बेहतर हेयर स्टाइल कुछ और नहीं हो सकता। जूड़ा ऊंचा बनाने की जगह थोड़ा नीचे की ओर बनाएं। इसे अंग्रेजी में लो बन भी कहते हैं। इसे बनाने के लिए सबसे पहले अपने चेहरे के आकार के मुताबिक मांग निकालें। आप बीच या फिर साइड में भी मांग निकाल सकती हैं। बेहतर होगा कि आप अपने बालों को स्ट्रेट कर लें। अब कंघी करते हुए बालों को पीछे की ओर ले जाएं। फिर बालों को रोल करें और हेयर पिन की मदद से उसे जूड़े का आकार दें। जूड़े पर हेयर स्प्रे कर लें ताकि आपके बाल सेट हो जाएं। इस जूड़े पर बन एक्सटेंशन लगा लें। खूबसूरत जूड़ा तैयार है। आप जूड़े पर गजरा या फिर सुंदर-सी कोई हेयर एक्सेसरीज लगाकर उसकी खूबसूरती को और निखार सकती हैं।कमाल की लगेगी फिशटेल चोटीफिशटेल चोटी के लिए शानदार के अलावा किसी और शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा सका। पर, यह भी सच है कि पहली बार देखकर यह काफी जटिल लग सकती है। पर, एक बार सीखने के बाद इसे बनाना बहुत आसान हो जाता है। फिशटेल चोटी सबसे खूबसूरत हेयर स्टाइल में से एक है, जो न सिर्फ आम लोगों के बीच बल्कि सेलिब्रिटीज के बीच भी काफी लोकप्रिय है। फिशटेल चोटी की खासियत यह भी है कि चाहे आपके बाल छोटे हों या लंबे, आप यह चोटी बना सकती हैं। इतना ही नहीं, फिशटेल चोटी को बालों में कई अलग-अलग तरीकों से बनाया जा सकता है, जिसके कारण आप हर बार एक नया लुक तैयार कर सकती हैं। आप फिशटेल चोटी के अलावा, डबल फिशटेल चोटी, फिशटेल जूड़ा और फिशटेल पोनीटेल भी बना सकती हैं। यह चोटी बनाना आप यूट्यूब ट्यूटोरियल से सीख सकती हैं।साइड वाली चोटीचोटी बनाना तो आप जानती ही होंगी। बस, अपने इसी स्किल का इस्तेमाल त्योहारों पर पारंपरिक लुक को निखारने में करें। खास बात यह है कि इसे बनाना भी बेहद आसान है। इसे बनाने के लिए बालों में कंघी करके उसे सुलझाएं। अपने चेहरे के आकार के अनुरूप मांग निकालें और सारे बालों को कंघी करके एक ओर लाएं और चोटी गूंथ लें। अब उंगलियों की मदद से चोटी को बीच में दबाएं और साइड से बालों को हल्का-हल्का बाहर की ओर खींच लें। हेयर स्टाइल तैयार है। आप चाहें तो चोटी के बीच में छोटे-छोटे फूल भी लगा सकती हैं। यह हेयर स्टाइल आपके पारंपरिक लुक में चार-चांद लगा देगा।सीधे बालों का अनूठा अंदाजआप अपने पसंदीदा पारंपरिक पहनावे के साथ स्टाइलिश सीधे बालों वाला हेयर स्टाइल भी अपना सकती हैं। इसके लिए शैंपू किए हुए बालों को हेयर स्ट्रेटनर की मदद से बिल्कुल सीधा कर लें और पनपसंद मांग निकाल लें। बस, तैयार है आपका हेयरस्टाइल! यह एक बिना झंझट वाला हेयर स्टाइल है, जिसे आप किसी भी पारंपरिक पहनावे के साथ आजमा सकती हैं।न भूलें एक्सेसरीज का साथ1) अपने हेयर स्टाइल को निखारने के लिए आप फैंसी हेयरपिन का इस्तेमाल कर सकती हैं, जिसमें नकली फूल, क्रिस्टल या रंग-बिरंगे स्टोन शामिल होते हैं।2) पारंपरिक लुक लिए अपने बालों में फूल लगाना ना भूलें। बालों को आप चमेली से लेकर गुलाब जैसे फूलों तक से सजा सकती हैं।3) यदि आप अपने बालों को थोड़ा और आकर्षक बनाना चाहती हैं, तो ऐसी लेयर्ड या नॉर्मल चेन का इस्तेमाल करें, जिस पर पेंडेंट हों।4) जूड़ा या चोटी की खूबसूरती को निखारने के लिए आप हेयर ब्रोच का इस्तेमाल भी एक्सेसरीज के रूप में कर सकती हैं। सबसे खास बात यह है कि इसे बालों में लगाना भी बहुत आसान है।
- हर साल 12 अक्टूबर को विश्व गठिया दिवस मनाया जाता है। यह दिवस गठिया की बीमारी में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। गठिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें जोड़ों में सूजन, दर्द, कठोरता और जकड़न हो जाती है। यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन यह बुजुर्गों में अधिक आम है।गठिया के प्रकार की बात करें तो गठिया के कई प्रकार होते हैं, जिनमें ऑस्टियोआर्थराइटिस जो उम्र के साथ होता है और जोड़ों में दिक्कत होती है, रूमेटॉइड आर्थराइटिस जोकि एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें इम्यून सिस्टम हेल्दी टिश्यू पर हमला करती है, जिससे जोड़ों में सूजन होती है, आर्थराइटिस जोकि यूरिक एसिड के क्रिस्टल के जोड़ों में जमा होने के कारण होता है।गठिया के लिए कई इलाज हैं लेकिन इसके लक्षणों को अप अपनी डाइट में बदलाव करके भी कम कर सकते हैं। आर्थराइटिस फाउंडेशन के अनुसार (ref) एंटी इंफ्लेमेटरी फूड के सेवन से गठिया के दर्द, सूजन और अन्य लक्षणों की गंभीरता को कम किया जा सकता है। चलिए जानते हैं कि गठिया के मरीजों को कौन-कैन से एंटी इंफ्लेमेटरी फूड खाने चाहिए।साबुत अनाजआपको अपनी डाइट में ब्राउन राइस, क्विनोआ, साबुत गेहूं और ओट्स जैसे अनाज शामिल करने चाहिए। साबुत अनाज में फाइबर और पोषक तत्व होते हैं जो सी-रिएक्टिव प्रोटीन (सीआरपी) के लेवल को कम करते हैं, जो गठिया से जुड़े सूजन का एक बड़ा कारण है। इनके अलावा आप ग्रीन टी, हल्दी, अदरक, लहसुन और बीन्स आदि का भी सेवन करें।
- गंदगी और पसीने के कारण बालों से बदबू आने लगती है। बालों से आ रही बदबू को दूर करने के लिए दालचीनी से बना हेयर पैक लगाएं। दालचीनी को उसकी खुशबू के लिए जाना जाता है। खुशबू से बीमारियों का इलाज करने के लिए अरोमाथेरेपी में भी दालचीनी का प्रयोग किया जाता है। दालचीनी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जिससे इन्फेक्शन दूर होता है और बाल स्वस्थ बनते हैं। दालचीनी में मौजूद माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की मदद से बाल लंबे, मुलायम और चमकदार नजर आते हैं। दालचीनी में एंटीफंगल गुण होते हैं जो स्कैल्प के इंफेक्शन को रोकने का काम करते हैं। आगे जानेंगे दालचीनी से हेयर पैक बनाने का तरीका।दालचीनी से हेयर पैक कैसे बनाएं?सामग्री:दालचीनी पाउडर- 2 चम्मचशहद- 2 चम्मचनींबू का रस- 1 चम्मचविधि:-सबसे पहले, एक कटोरी में दालचीनी पाउडर लें।-अब इसमें शहद और नींबू का रस डालें।-सभी सामग्री को अच्छे से मिला लें ताकि एक मिश्रण बन जाए।-अब इस मिश्रण को अपने बालों की झड़ों पर लगाएं।-बालों पर मिश्रण को लगाने के बाद, 20-30 मिनट तक इसे लगाए रखें।-फिर ठंडे पानी से बालों धो लें और बालों पर शैंपू लगाकर स्कैल्प को साफ कर लें।बालों की बदबू से कैसे बचें?-बालों की बदबू से बचने के लिए शैंपू और कंडीशनर का उपयोग करें जिससे बाल साफ होंगे और बदबू दूर होगी।-अपने हेयर टाइप के मुताबिक, अच्छे शैंपू का चयन करें जिससे बालों को ताजगी मिले और बालों से बदबू न आए।-बालों को स्वस्थ रखने के लिए तेल लगाएं। तेल लगाने से बालों से बदबू आने की समस्या दूर होती है।-नम बालों में बैक्टीरिया बढ़ने की संभावना होती है इसलिए बालों को बिना सुखाएं बांधने की गलती न करें।-अधिक हेयर स्प्रे का इस्तेमाल करने से बालों में बदबू की समस्या होती है इसलिए इस गलती से बचें।-समय-समय पर बालों को ट्रिम करवाएं, इससे बालों में मौजूद मृत कोशिकाओं हट जाती हैं और बालों से बदबू नहीं आती।
- इन दिनों में हम लोग जिस तरह की जीवनशैली जी रहे हैं, उसमें कब्ज की समस्या होना आम बात है। कब्ज में पेट अच्छी तरह से साफ नहीं हो पाता है, जिसके कारण फिशर और पाइल्स की समस्या भी होती है।कब्ज की समस्या का सामना कर रहे ज्यादातर लोग, इससे राहत पाने के लिए गोलियां, सिरप और कई तरह की दवाएं लेते हैं। लेकिन कई बार दवा का सेवन करने से भी कब्ज की समस्या से छुटकारा नहीं मिलता है। आप भी काफी लंबे समय तक कब्ज की समस्या से जूझ रहे हैं, तो अब वक्त है दवा की जगह एक आयुर्वेदिक नुस्खे को आजमाने का। कब्ज से छुटकारा पाने का यह आयुर्वेदिक उपाय है छोटी हरड़।कब्ज में क्यों फायदेमंद है छोटी हरड़?आयु्र्वेद में छोटी हरड़ का इस्तेमाल हजारों वर्षों से कब्ज और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने के लिए किया जा रहा है। छोटी हरड़ में एंटी बैक्टीरियल, एंटी -इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो मल को मुलायम बनाकर, मल त्याग की प्रक्रिया को आसान बनाते हैं। जिससे कब्ज और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। इतना ही नहीं छोटी हरड़ शरीर में एक लैक्सेटिव की तरह काम करता है। छोटी हरड़ का सेवन करने से पेट आसानी से साफ हो जाता है। इसकी मदद से पेट में दर्द समेत अन्य पाचन से जुड़ी परेशानियां भी नहीं होती हैं।कब्ज के लिए छोटी हरड़ का उपयोग कैसे करें?- 20 ग्राम छोटी हरड़ को देखकर साफ कर लें। अब एक तवा लें और इसे गर्म कर लें।- गर्म तवे पर 2 से 4 बूंदें कैस्टर ऑयल और छोटी हरड़ डालकर अच्छे से भूनकर तैयार करें।- भूनने के बाद छोटी हरड़ का ग्राइंडर में पीसकर चूर्ण के तौर पर तैयार कर लें।- रोजाना सुबह खाली पेट छोटी हरड़ के चूर्ण का सेवन गुनगुने पानी के साथ करें।डॉक्टर का कहना है कि कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए छोटी हरड़ का सेवन शुरुआत में 4 से 8 सप्ताह तक लगातार करना चाहिए। इसके बाद एक बीच का गैप करके 4 सप्ताह तक हरड़ का सेवन करना चाहिए। कब्ज के लिए छोटी हरड़ का इस्तेमाल आयुर्वेद और भारतीय घरों में सदियों से किया जा रहा है, लेकिन जो लोग किसी प्रकार की मेडिकल कंडीशन से गुजर रहे हैं या किसी विशेष प्रकार की दवा का सेवन कर रहे हैं, वह छोटी हरड़ का इस्तेमाल डॉक्टरी सलाह पर ही करें।
- मौसम बदल रहा है। मानसून के बाद, अब सर्दी का मौसम आने वाला है। इस बदलते हुए मौसम में सेहत के साथ ही, त्वचा पर भी असर पड़ता है। बदलते मौसम में त्वचा रूखे और बेजान होने लगती है। त्वचा का निखार खो जाता है। त्वचा डल और बेदाग नजर आने लगती है। ऐसे में खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए त्वचा की अतिरिक्त देखभाल करनी बहुत जरूरी हो जाती है। त्वचा की देखभाल सुबह से लेकर रात को सोते समय तक किया जाना जरूरी होता है। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि त्वचा पर निखार बनाए रखने और खूबसूरती बढ़ाने के लिए बदलते मौसम में सुबह चेहरे पर क्या लगाना चाहिए?1. गुलाब जलबदलते मौसम में गुलाब जल लगाना फायदेमंद हो सकता है। गुलाब जल में मॉइश्चराइजिंग गुण होते हैं, जो त्वचा को मुलायम और कोमल बनाए रखने में मदद करते हैं। आप भी बदलते मौसम में गुलाब जल का इस्तेमाल कर सकते हैं। खासकर, अगर आपकी ड्राई स्किन है, तो इस मौसम में रोज सुबह अपने चेहरे पर गुलाब जल का इस्तेमाल जरूर करें। आप गुलाब जल का इस्तेमाल क्लींजर या टोनर के रूप में कर सकते हैं। इससे आपकी स्किन पूरे दिन सॉफ्ट और शाइनी नजर आएगी।2. एलोवेरा जेलएलोवेरा सेहत के साथ ही, स्किन के लिए भी फायदेमंद होता है। बदलते मौसम में रोज सुबह चेहरे पर एलोवेरा लगाना लाभकारी होता है। एलोवेरा में मौजूद मॉइश्चराइजिंग गुण त्वचा को नमी प्रदान करने में मदद करते हैं। एलोवेरा त्वचा के रूखेपन को कम करने में मदद करता है। अगर आपकी ड्राई स्किन है, तो आप रोज सुबह एलोवेरा लगा सकते हैं। इसके लिए आप फ्रेश एलोवेरा पल्प लें। इसे अपने चेहरे पर अप्लाई करें और 15-20 मिनट बाद चेहरे को पानी से साफ कर लें। इसके बाद आप चेहरे पर मेकअप यूज कर सकते हैं। इससे त्वचा की खोई हुई खूबसूरती भी वापस लौटेगी।3. नारियल का तेलनारियल तेल स्किन के लिए बेहद अच्छा होता है। खासकर, बदलते मौसम में चेहरे पर नारियल तेल लगाना फायदेमंद हो सकता है। इसलिए आप बदलते मौसम में रोज सुबह चेहरे पर नारियल तेल की मालिश कर सकते हैं। इससे त्वचा का रूखापन दूर होगा और खूबसूरती बनी रहेगी। इसके लिए आप एक चम्मच नारियल तेल लें। इसे अपने चेहरे पर अप्लाई करें। अब हल्के हाथों से चेहरे की मालिश करें। 15-20 मिनट बाद चेहरे को अच्छी तरह से धो लें।4. मॉइश्चराइजरवैसे तो आपको हर मौसम में ही मॉइश्चराइजर जरूर अप्लाई करना चाहिए। लेकिन बदलते मौसम में त्वचा को ड्राई होने से बचाने के लिए मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करना ज्यादा जरूरी हो जाता है। मॉइश्चराइजर लगाने से त्वचा में नमी बनी रहती है। इससे त्वचा कोमल और मुलायम नजर आती है। अगर आप रोज सुबह चेहरे पर मॉइश्चराइजर अप्लाई करेंगे, तो इससे चेहरे पर दिनभर निखार बना रहेगा।
- बहुत से लोग पकोड़े खाने के शोकीन होते हैं। कई लोग तो चाय के साथ अक्सर चिप्स, समोसे और पकोड़े खाना पसंद करते हैं। यह सभी चीजें तेल में छानकर बनती हैं, इसलिए सेहत के लिए कई तरीकों से नुकसानदायक होती हैं। इन्हें खाने से न केवल मोटापा बढ़ता है, बल्कि हार्ट से जुड़ी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ता है। क्या आप भी पकोड़े, समोसे और चिप्स खाने के शौकीन हैं? अगर हां तो संभल जाएं यह आदत आपको डायबिटीज का शिकार बना सकती है। जी हां, इंडियन मेडिकल काउंसिल ऑफ रिसर्च एंड मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन, चेन्नई के साथ कुछ मेडिकल पैनल ने रिसर्च की जिसमें यह पता लगता है कि पकोड़े, समोसे और चिप्स जैसे खाद्य पदार्थ खाने से डायबिटीज का जोखिम बढ़ता है।क्या कहती है स्टडी?स्टडी के शोधकर्ताओं के मुताबिक समोसे, पकोड़े और चिप्स जैसे खाद्य पदार्थ भारत में डायबिटीज के जोखिम को तेजी से बढ़ा रहे हैं। यह स्टडी 25 से 45 वर्ष के युवाओं पर की गई, जिनका बॉडी मास इंडेक्स 23 या उससे ज्यादा था। शोध में भाग लेने वाले लोगों को 12 हफ्तों के लिए लो और हाई डाइट दी गई। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने भी इस पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह की चीजें खाने से भारत में डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है। यह स्टडी Journal of Food Sciences and Nutrition में प्रकाशित हुई है।हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड्स बढ़ाते हैं ब्लड शुगरहेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स खाना सेहत के लिए अन्य तरीकों से नुकसानदायक होने के साथ ही साथ डायबिटीज के जोखिम को भी बढ़ाता है। तैलीय पदार्थ जैसे पकोड़े, चिप्स, समोसे, चाऊमीन और छोले भटूरे आदि जैसे खाद्य पदार्थों में ग्लाइसेमिक इंडेक्स होते हैं, जो डायबिटीज के जोखिम को बढ़ता है। इन चीजों को खाने से शरीर में ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है। अगर आप लंबे समय तक इस आदत को फॉलो कर रहे हैं तो इससे डायबिटीज का रिस्क तेजी से बढ़ता है।
- व्रत के दौरान कई चीजें खाने की मनाही भी होती है। ऐसे में हम हाई कैलोरी फूड्स अवॉइड करते हैं जिससे वेट लॉस में मदद मिलती है। नवरात्रि के व्रत में लोग कुट्टु, समा के चावल और सिंघाडे के आटे का इस्तेमाल करते हैं। वहीं कुछ लोगों को व्रत में साबूदाना खाना पसंद होता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ पचने में भी आसान होता है। इसलिए इसके सेवन से काफी देर तक भूख नहीं लगती है। लेकिन क्या आप जानते हैं व्रत में रोज साबूदाना खाने से भी आपका वजन बढ़ सकता है? वहीं अगर आप वेट लॉस डाइट पर हैं, तो इसके सेवन से वेट लॉस करना आपके लिए मुश्किल हो सकता है?वेट लॉस के लिए साबूदाना क्यों अवॉइड करना चाहिए?एक्सपर्ट के मुताबिक अगर आपक वेट लॉस करना चाहते हैं, तो नवरात्रि डाइट में साबूदाना शामिल न करें। साबूदाना में स्टार्च और कैलोरी की मात्रा काफी ज्यादा होती है। मात्रा के मुताबिक देखें तो 100 ग्राम साबूदाने से आपको 360 कैलोरी मिलती है। जब आप इसमें उबले आलू और अन्य चीजें मिलाकर बनाते हैं, तो इसमें कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे में इसका रोज सेवन करने से वेट गेन हो सकता है। वहीं जो लोग वेट लॉस कर रहे हैं उन्हें भी कम मात्रा में ही ज्यादा कैलोरी मिल जाती है। इसलिए वेट लॉस के दौरान साबूदाना अवॉइड करना जरूरी है। इसके अलावा, अगर आपको वजन बढ़ाना है या आपको बार-बार भूख लगती है तो साबूदाने का सेवन जरूर करना चाहिए।साबूदाने की जगह किन चीजों का सेवन करना फायदेमंद होता है?साबूदाने की जगह आप कुट्टु का सेवन कर सकते हैं। कुट्टु में फाइबर अधिक होता है और इसमें साबुदाने के मुकाबले कैलोरी कम होती है। कुट्टु की रोटी, पराठे, चीला या इडली बनाकर खाने से आपको जल्दी भूख नहीं लगगी। समा के चावल का सेवन करना साबूदाने से ज्यादा बेहतर होगा। इससे आप इडली, खिचड़ी या पुलाव बनाकर खा सकते हैं। यह पचने में आसान होता है और इसमें भी फाइबर अधिक होता है। इसके सेवन के बाद आपको बहुत ज्यादा भारीपन महसूस नहीं होगा।सिंघाडे को आप चाट, सब्जी या आटा किसी भी तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है और इसके सेवन से क्रेविंग्स भी कंट्रोल रहती हैं। इसके साथ ही आप राजगीरा भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे आप दूध, चाय, खिचड़ी या रोटी बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।इन चीजों का सेवन आप व्रत के दौरान कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि हर चीज का सेवन कम मात्रा में ही करें। क्योंकि ज्यादा मात्रा में खाने से आपको पाचन संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। लेख में दी गई जानकारी पसंद आई हो, तो इसे शेयर करना न भूलें।
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पिछले कुछ सालों से थायराइड के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हार्मोनस में गड़बड़ी के कारण थायराइड की समस्या बढ़ने लगती है, जिसमें वजन बढ़ना सबसे आम है। थायराइड कंट्रोल करने के लिए पोषत तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना जरूरी होता है। लेकिन काम के प्रेशर या अन्य कारणों से लोग अपने स्वास्थ्य की ओर खास ध्यान नहीं दे पाते हैं, जिस कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने से रोकने के लिए सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं। डाइट सप्लीमेंट्स उन्हें थायराइड से जुड़े लक्षणों को कम करने और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
थायराइड कंट्रोल करने के लिए सप्लीमेंट्स -1. सेलेनियमसेलेनियम थायराइड हार्मोन को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाता है। यह सूजन को कम करने और थायराइड असंतुलन में सुधार करने में मदद कर सकता है, जो ब्राजील नट्स, सी फूड्स, अंडे और सूरजमुखी के बीज में पाया जाता है।2. विटामिन डीविटामिन डी की कमी हाइपोथायरायडिज्म में आम समस्या है और ऑटोइम्यून थायराइड डिसऑर्डर से जुड़ा है। विटामिन डी सप्लीमेंट्स थायराइड फंक्शन को बेहतर बनाने और सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।3. ओमेगा-3 फैटी एसिडओमेगा 3 फैटी एसिड अपने सूजन-रोधी गुणों के लिए जाना जाता है, जो मछली के तेल या सैल्मन, मैकेरल और सार्डिन जैसी वसायुक्त मछली में पाया जाता है।4. प्रोबायोटिक्सगट हेल्थ को बेहतर रखने में प्रोबायोटिक्स अहम भूमिका निभाता है, जो थायराइड को भी प्रभावित करता है। प्रोबायोटिक्स आंत के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं, जो हाइपोथायरायडिज्म वाले व्यक्तियों के लिए फायदेमंद है।5. अश्वगंधाअश्वगंधा एक एडाप्टोजेनिक जड़ी बूटी है, जो एड्रेनालाईन फंक्शन को बेहतर रखने और तनाव कम करने में फायदेमंद है। इसके सेवन से थायराइड फंक्शन में सुधार होता है और हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों को कम किया जा सकता है।6. आयरनथायराइड हार्मोन के उत्पादन के लिए आयरन एक महत्वपूर्ण सप्लीमेंट है। जिसकी कमी पूरी करने के लिए आप आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं।7. आयोडीनआयोडीन थायराइड हार्मोन का एक प्रमुख घटक है, थायरायड ग्रंथि आयोडीन का उपयोग थायरोक्सिन (T4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) का उत्पादन करने के लिए करती है। ऐसे में आप आयोडीन युक्त नमक को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। - मक्खन का इस्तेमाल खाना बनाने में अक्सर किया जाता है। इससे बनी चीजों का स्वाद अलग ही होता है। सब्जी में मलाईदार टेक्सचर पाने के लिए मक्खन का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन कई बार इसका इस्तेमाल सही तरह से न किया जाए तो ये स्वाद को बिगाड़ सकता है। दरअसल, मक्खन बहुत जल्दी पिघल जाता है ऐसे में ध्यान हटते ही ये जल सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं मक्खन को जलने से रोकने के लिए कुछ बेहतरीन तरीकों के बारे में। ऐसा करके आप मक्खन को जलने से बचा सकते हैं।1) हीट लेवल को देखेंमक्खन के जलने के पीछे मुख्य कारणों में से एक बहुत ज्यादा हीट लेवल है। ऐसे में जब भी आप इसे इस्तेमाल करें तो अपने पैन को मध्यम आंच पर गर्म करें और फिर मक्खन डालें। मक्खन के पिघलते समय उसे देखते रहें। ज्यादा तेज आंच पर इसे न रखें क्योंकि मक्खन बहुत जल्दी भूरा हो सकता है और जल सकता है।2) तेल के साथ करें मिक्सइसे जलने से रोकने के लिए मक्खन को पिघलाने से पहले पैन में जरा सा तेल का डालें। तेल मक्खन को सुरक्षित रखने में मदद करता है और जलने से कुछ हद तक बचा सकता है। आप किसी भी वेजिटेबल ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं इससे स्वाद खराब नहीं होगा।3) मक्खन के रंग को देखेंजैसे-जैसे मक्खन गर्म होता है, यह झाग बनने और भूरा होने लगता है। मक्खन के पिघलते समय उसके रंग और सुगंध पर कड़ी नजर रखें। जब मक्खन हल्के सुनहरे भूरे रंग का होने लगे, तो इसे आंच से उतारें।4) इस समय डालें मक्खनमक्खन को जलने से बचाने के लिए इसे खाना पकने के अंत में डालें। आप सब्जी को आंच से उतारकर भी मक्खन डाल सकते हैं। इसकी गर्माहट से इसे धीरे से पिघलाया जा सकता है।
- नवरात्रि का समय हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस नौ दिन के उत्सव के दौरान, भक्त मां दुर्गा की पूजा करते हैं और कई लोग उपवास रखते हैं। उपवास का उद्देश्य न केवल धार्मिक होता है, बल्कि इसे शरीर के शुद्धिकरण के लिए भी लाभकारी माना जाता है। हालांकि, उपवास के दौरान खानपान को लेकर कई गलतफहमियां भी हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव डाल सकती हैं। सही जानकारी के अभाव में, लोग मानते हैं कि जो कुछ भी उपवास के दौरान अब तक उन्हें करने या खाने के लिए बताया गया है, वह सब सही है। जबकि ऐसा नहीं है। कई ऐसी गलतफहमियां हैं जिन्हें समझने की जरूरत है। इस लेख में हम नवरात्रि उपवास से जुड़ी कुछ गलतफहमियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।1. व्रत में खाने वाली सभी चीजें हेल्दी हैं-व्रत के दौरान लोग कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, जैसे साबूदाना, आलू, कुट्टू का आटा और सिंघाड़े का आटा। यह धारणा आम है कि ये सभी खाद्य पदार्थ हेल्दी होते हैं, क्योंकि इन्हें व्रत के लिए उपयुक्त माना जाता है। हालांकि, यह पूरी तरह सच नहीं है। व्रत के दौरान बहुत से लोग तले हुए या ज्यादा घी-तेल में बने व्यंजनों का सेवन करते हैं, जैसे साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू के पकौड़े या तले हुए आलू। इन खाद्य पदार्थों में कैलोरी और फैट की मात्रा ज्यादा होती है, जो स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है, खासकर अगर आप इसे ज्यादा मात्रा में खा लें। इसलिए, यह जरूरी है कि व्रत के दौरान भी भोजन संतुलित और हल्का हो।2. कोई भी उपवास रख सकता है-उपवास को लेकर एक आम धारणा यह भी है कि यह सभी के लिए उपयुक्त होता है। जबकि उपवास का धार्मिक महत्व होता है, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से यह हर व्यक्ति के लिए उचित नहीं होता। जिन लोगों को डायबिटीज की बीमारी, ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी समस्याएं होती हैं, उनके लिए उपवास रखना, हानिकारक हो सकता है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भी उपवास से बचना चाहिए, क्योंकि उनकी पोषण की ज़रूरतें अलग होती हैं। ऐसे में, अगर किसी को स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या हो, तो उन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना उपवास नहीं करना चाहिए।3. उपवास के बाद कुछ भी खा सकते हैंयह एक और बड़ी गलतफहमी है कि उपवास खत्म होते ही आप कुछ भी खा सकते हैं। उपवास के दौरान पेट लंबे समय तक खाली रहता है, और अचानक भारी या मसालेदार भोजन खाने से पाचन तंत्र पर भारी दबाव पड़ सकता है। इससे एसिडिटी, पेट दर्द और गैस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। उपवास खत्म करने के बाद हल्का और पौष्टिक भोजन लेना सबसे अच्छा होता है, जैसे कि फल, दही, सूप या सादा खिचड़ी।4. फलों से पूरी ऊर्जा मिल जाती हैफलों का सेवन उपवास के दौरान फायदेमंद होता है, क्योंकि वे विटामिन, मिनरल्स और फाइबर से भरपूर होते हैं। हालांकि, एनर्जी के लिए केवल फलों पर निर्भर रहना काफी नहीं है। फलों में प्राकृतिक चीनी होती है, जो तुरंत ऊर्जा देती है, लेकिन इसका असर बहुत जल्दी खत्म हो जाता है। इसके अलावा, फलों में प्रोटीन और स्वस्थ फैट की कमी होती है, जो शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा नहीं दे पाते। इसलिए, उपवास के दौरान फलों के साथ-साथ नट्स, बीज और दूध जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन भी जरूरी है, ताकि शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, फैट और अन्य पोषक तत्व मिल सकें।5. दूध, शरबत से शरीर हाइड्रेट रहता है-बहुत से लोग मानते हैं कि व्रत के दौरान दूध, शरबत या अन्य मीठे पेय पदार्थ पीने से शरीर की पानी की जरूरत पूरी हो जाती है। हालांकि, यह धारणा पूरी तरह से सही नहीं है। दूध या शरबत जैसे पेय पदार्थों में शुगर और फैट की मात्रा होती है, जो शरीर को ऊर्जा तो देते हैं, लेकिन इन्हें केवल हाइड्रेशन का स्रोत मानना गलत है। ये पेय पदार्थ शरीर को कुछ समय के लिए ताजगी का अहसास दे सकते हैं, लेकिन इनका ज्यादा सेवन करने से शुगर लेवल बढ़ सकता है और प्यास बुझाने की बजाय यह शरीर में ज्यादा थकान का कारण बन सकते हैं। हाइड्रेशन के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- नवरात्रि में कई लोग ऐसे भी हैं जो 9 दिनों तक माता रानी के लिए उपवास रखते हैं। ऐसे में वजन कम करने वाले लोगों के लिए भी इन 9 दिनों का व्रत काफी फायदेमंद हो सकता है। हालांकि कई लोग ऐसे भी हैं, जिनके नवरात्रि के व्रत के दौरान खाने में अक्सर कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है, क्योंकि इसमें आलू, तेल और चीनी जैसी सामग्री का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है। ऐसे में अगर आप नवरात्रि के व्रत के दौरान अपना वजन कम करना या कंट्रोल में रखना चाहते हैं तो आइए जानते हैं कि आप व्रत के खाने से कैलोरी कैसे कम कर सकते हैं?व्रत रखते समय कैलोरी का सेवन कम कैसे करें?1. स्वस्थ आटे का सेवन करेंनवरात्रि के व्रत के दौरान कैलोरी की मात्रा कम रखने के लिए आप सिंघाड़ा या कुट्टू के आटे की जगह राजगिरा या क्विनोआ का आटा इस्तेमाल कर सकते हैं, जो खाने में हल्का होता है और प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है।2. तलने के बजाय बेक करेंव्रत के खाने से कैलोरी कम करने के लिए आप साबूदाना वड़ा, कुट्टू पूरी या आलू टिक्की को डीप-फ्राई करने के बजाय, तेल की खपत कम करने के लिए बेक कर सकते हैं या फिर एयर फ्राई भी कर सकते हैं।3. आलू के हेल्दी विकल्प चुनेंआलू का इस्तेमाल आमतौर पर व्रत के भोजन में किया जाता है, लेकिन इसमें स्टार्च की मात्रा ज्यादा होती है और यह कैलोरी से भी भरपूर होता है। इसकी जगह आप कद्दू, कच्चा केला या शकरकंद जैसी सब्ज़ियां इस्तेमाल करें, जो ज़्यादा पोषक तत्व और कम कैलोरी वाली होती हैं।4. ज्यादा दही और पनीर का सेवन करेंउपवास के दौरान प्रोटीन बढ़ाने के लिए अपने भोजन में कम फैट वाले दही या पनीर को शामिल करें, जो आपको लंबे समय तक भरा हुआ रखने और कुल कैलोरी सेवन को कम करने में मदद कर सकता है।5. जूस के बजाय ताजे फल खाएंसाबुत फलों में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है, जो फलों के रस की तुलना में ज्यादा हेल्दी और कैलोरी में कम होता है।नवरात्रि के व्रत के दौरान अपने खाने से कैलोरी की मात्रा कम करने के लिए आप इन टिप्स को फॉलो कर सकते हैं, और इसके साथ खुद को हाइड्रेटेड रखने की कोशिश करें, और पेट को देर तक भरा रखने के लिए आप नट्स और सीड्स भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।
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शहनाज़ हुसैन (लेखिका अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सौन्दर्य विशेष्ज्ञ है और हर्बल क्वीन के रूप में लोकप्रिय है)
टमाटर का इस्तेमाल खूबसूरती को बढ़ाने और त्वचा से जुड़ी समस्याओं को मिटाने के लिए परम्परागत रूप से किया जा रहा है / खूबसूरती निखारने के लिए टमाटर को चेहरे पर सीधे रगड़ सकते हैं/ त्वचा पर टमाटर को सीधे रगड़ने से तैलीय त्वचा को भी फायदा मिलता है क्योंकि टमाटर में एन्टी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो कि त्वचा से तेल को कम करने में मदद करते है और स्किन पुनर्जीवित हो उठती हैअगर आपको टमाटर को चेहरे पर सीधे रगड़ने में कोई दिक्कत है तो आप इस इसे जोजोबा तेल, जैतून का तेल, बेसन, दही, ओट्स, एलोवेरा खीरा नींबू जैसे प्रकृतिक उत्पादों के साथ मिलाकर भी उपयोग में ला सकते हैं ।टमाटर में लाइकोपीन, विटामिन सी और विटामिन ई पाए जाते हैं। ये गुण त्वचा की गहराई में जाकर काम करते हैं इससे त्वचा पर जमा धूल.मैल और मृत त्वचा कोशिकाएं साफ होती हैं और त्वचा की रंगत में निखार आता है / टमाटर में कई तरह के एंजाइम और पोषक तत्व होते हैं,जिसकी बजह से टमाटर को चेहरे पर रगड़ने से चेहरे के दाग, .धब्बों, मुंहासे और झुर्रियों को मिटाने में मदद मिलती है /आप टमाटर से चेहरे को स्क्रब कर सकते हैं/ इसके लिए एक टमाटर के स्लाइस को चेहरे पर 15--20 मिनट तक रगड़िये और आधे घण्टे बाद चेहरे को साफ़ ताजे पानी से धो डालिये /टमाटर में मौजूद एंजाइम त्वचा को धीरे.धीरे एक्सफोलिएट करते हैं जिससे त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद मिलती है जिससे चेहरे की खूबसूरती निखर कर बाहर आती है और चेहरे पर झुर्रियों को रोकने में मदद मिलती है / इससे एजिंग को करने में मदद मिलती है और आप युवा और जुबां दिखेंगी / अगर आप टमाटर को चेहरे पर डायरेक्ट रूप से लगाने में असहज महसूस कर रही हैं तो तो कांच की कटोरी में थोड़ी पीसी हुई चीनी और टमाटर को मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर लें और इस मिश्रण को चेहरे पर अच्छे से रगड़कर चेहरा धो लें/ इससे चेहरे की मृत कोशिकाएं निकल जाएँगी और चेहरे पर प्रकृतिक निखार लौट आएगा /टमाटर को चेहरे पर रगड़ने से चेहरे पर नज़र आने बाले बड़े पोर्स यानी छिद्र बंद हो जाते हैं जिससे चेहरे पर धूल ,मिट्टी और गन्दगी के कण जमा नहीं हो पाते जिससेत्वचा पर कील मुहांसे आदि नहीं पनप सकते क्योंकि धूल मिटटी के कण जब त्वचा के प्रकृतिक तेलों से मिलते हैं तो ही त्वचा पर कील मुहांसे निकलते हैं / टमाटर को सीधे चेहरे पर लगाने से चेहरे की त्वचा के प्रकृतिक स्वरुप को बचाने में मदद मिलती है / टमाटर को चेहरे पर सीधे रगड़ने से चेहरे के दाग , धब्बे साफ करने में मदद मिलती है / टमाटर में मौजूद विटामिन.सी और एंटीऑक्सीडेंट गुण मुंहासों के निशानों को जल्दी ठीक करने में मदद करते हैं/ टमाटर को सबसे पहले मिक्सी में अच्छे से पीस कर पेस्ट पेस्ट बना लें और इस पेस्ट में थोड़ा सा शहद और एलोवेरा जेल मिला कर आधा घण्टा तक चेहरे पर लगा रहने दें / बाद ने चेहरे को साफ़ ताजे पानी से धो डालें / आप इसे हफ्ते में दो बार इस्तेमाल कर सकते हैं /टमाटर में विटामिन ए ,सी और के बिद्यमान होते हैं तथा टमाटर में एसिडिक गुण भी बिद्यमान होते हैं जिसकी बजह से यह त्वचा के पी एच लेवल को बनाये रखने में मदद करता है और त्वचा को गहराई तक साफ़ रखने में सहायक होता है /टमाटर को चेहरे पर रगड़ने से त्वचा को यु बी किरणों से बचाने में मदद मिलती है जिससे स्किन टैनिंग के उपचार में भी मदद मिलती है / दो चमच्च दही और आधे टमाटर को मिलाकर बने मिश्रण को चेहरे पर लगा लें और आधा घण्टा बाद चेहरे को साफ पानी से धो डालें / इससे त्वचा को सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणों से बचाने में मदद मिलती हैचेहरे पर टमाटर लगाने का सबसे अच्छा समय रात को सोने से पहले है। क्योंकि टमाटर में लाइकोपीन होता हैए जो एक एंटीऑक्सीडेंट है जो त्वचा को नुकसान से बचाने में मदद करता है। रात को सोते समय त्वचा अधिक ग्रहणशील होती है/ इसलिए यह टमाटर के लाभों को अधिकतम करने का सबसे अच्छा समय होता है। -
लिवर शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक है, जो विषाक्त पदार्थों यानी टॉक्सिंस को बाहर निकालने, पाचन में मदद करने और एनर्जी को बनाए रखने में मदद करता है। लेकिन जब लिवर से जुड़ी समस्याएं शुरू होती हैं तो व्यक्ति को पाचन की दिक्कतें, थकान और पेट में सूजन जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। आयुर्वेद में लिवर की समस्याओं के लिए शरपुंखा का उपयोग लाभकारी बताया गया है। शरपुंखा के आयुर्वेदिक गुण लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाने और लिवर को डिटॉक्स करने में मददगार होते हैं।
शरपुंखा क्या है?
शरपुंखा एक जड़ी-बूटी है, जिसका वैज्ञानिक नाम Tephrosia purpurea है। शरपुंखा को आयुर्वेद में विशेष रूप से लिवर संबंधी समस्याओं के इलाज में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, शरपुंखा का उपयोग अन्य बीमारियों में भी किया जाता है। डॉक्टर श्रेय ने बताया कि शरपुंखा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल लिवर की डिजीज में होता है और इसकी तासीर ठंडी होती है। लिवर कमजोर होने के कारण जिन लोगों को भूख कम लगती है, कमजोरी रहती है, शरीर में गर्मी रहती है, फैटी लिवर की समस्या, लिवर सिरोसिस की समस्या आदि में शरपुंखा का उपयोग कारगर हो सकता है।लिवर के लिए शरपुंखा के फायदे1. लिवर डिटॉक्सिफिकेशनशरपुंखा का सबसे बड़ा फायदा लिवर की सफाई में है। यह लिवर को डिटॉक्स करके विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, जिससे लिवर की कार्यक्षमता बेहतर होती है। आयुर्वेद के अनुसार, शरपुंखा लिवर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करने में मदद करता है और इसे फैटी लिवर जैसी समस्याओं से बचाता है।2. लिवर सिरोसिस में राहतशरपुंखा में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो लिवर की कमजोर हुई कोशिकाओं की मरम्मत में मदद करते हैं और लिवर सिरोसिस के लक्षणों को कम करते हैं। नियमित सेवन से यह लिवर को मजबूत बनाता है और लिवर सिरोसिस की समस्या को कम करता है।3. पित्त समस्याओं में लाभकारीशरपुंखा पित्त के बढ़ने को कंट्रोल करता है, जिससे पाचन प्रक्रिया में सुधार होता है। जब लिवर बेहतर तरीके से काम करता है और पाचन तंत्र सुचारू रूप से चलता है।4. फैटी लिवर की समस्या में कारगरअनहेल्दी लाइफस्टाइल और खराब खानपान के कारण फैटी लिवर की समस्या आजकल काफी सामान्य हो गई है। शरपुंखा के एंटीऑक्सीडेंट गुण लिवर में जमे फैट को घटाने में मदद करते हैं। यह लिवर की सूजन को कम करके इसे हेल्दी रखता है।5. लिवर की सूजन को कम करेशरपुंखा में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो लिवर की सूजन को कम कर सकते हैं। इससे लिवर की कोशिकाओं को ठीक होने में मदद मिलती है और लिवर के काम करने की क्षमता में सुधार होता है।आयुर्वेद के अनुसार शरपुंखा का उपयोग कैसे करेंशरपुंखा का काढ़ाशरपुंखा का काढ़ा लिवर की समस्याओं में फायदेमंद है। इसे बनाने के लिए 3 ग्राम शरपुंखा के पाउडर को रात में पानी में भिगो दें और अगली सुबह इसे हल्का गुनगुना कर के पिएं। इस काढ़े को सुबह और शाम में लिया जा सकता है। यह काढ़ा लिवर की सूजन को कम करता है और पाचन तंत्र को सुधारने में भी मदद करता है। शरपुंखा पाउडर का नियमित सेवन लिवर को डिटॉक्स करता है और उसकी कार्यक्षमता को बढ़ाता है। - इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 3 अक्टूबर से होने वाली है। नवरात्रि में कलश स्थापना करके 9 देवियों की पूजा की जाती है। नवरात्रि में 9 दिनों के व्रत रखने की भी परंपरा सदियों से चली आ रही है। नवरात्रि के व्रत में सात्विक आहार खाया जाता है। लेकिन कई बार देखा जाता है कि व्रत के कारण लोग भोजन के साथ-साथ पानी पीना भी कम कर देते हैं। अचानक से कम पानी पीने से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। पानी कम पीने की वजह से सुस्ती, ड्राई लिप्स, पेशाब कम आना, भ्रम की स्थिति और सिर चकराना की समस्या होती है। गंभीर मामलों में शरीर में पानी की कमी से उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताने जा रहे हैं, 5 ऐसे फलों के बारे में, जिसका सेवन करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती हैशारदीय नवरात्रि के व्रत में खाएं ये 5 मौसमी फल- Seasonal Fruits to Include in Shardiya Navratri Fast1. कीवीकीवी स्वाद और सेहत का खजाना है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। व्रत के दौरान कीवी का सेवन करने डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती है। कीवी न केवल आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है बल्कि उपवास के दौरान त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में भी मदद करता है। कीवी का हल्का खट्टा स्वाद इसे ताजगी देता है और इसमें मौजूद हाई फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त बनाता है।2. मस्क मेलन (खरबूजा)मस्क मेलन या खरबूजे में 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी पाया जाता है। नवरात्रि व्रत के दौरान मस्क मेलन का सेवन किया जाए, तो यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। मस्क मेलन में मौजूद विटामिन ए और सी न केवल शरीर को हाइड्रेट करते हैं बल्कि इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है। व्रत में मस्क मेलन का सेवन करने से पेट भी लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है।3. पपीतापपीते में विटामिन ए, सी और ई भरपूर मात्रा पाया जाता है। व्रत के दौरान पपीते का सेवन करने से डिहाइड्रेशन की समस्या के साथ-साथ पाचन संबंधी परेशानियों से राहत मिलती है। व्रत के दौरान लंबे समय तक भूखे रहने के कारण लोगों को गैस, पेट में दर्द और ब्लोटिंग की समस्या हो जाती है। ऐसे में अगर पपीते का सेवन किया जाए, तो यह प्राकृतिक एंजाइम प्रोटीन को तोड़ने में भी सहायता करते हैं, जिससे पाचन संबंधी समस्याओं से राहत मिलती है।4. अनारअनारएंटीऑक्सीडेंट और आवश्यक विटामिन से भरपूर एक हाइड्रेटिंग फल है। व्रत के दौरान अनार का सेवन करने से शरीर को एनर्जी मिलती है। यह थकान और कमजोरी को भी दूर करने में मदद करता है। व्रत में अनार खाने से स्किन और बालों से संबंधी परेशानियों से भी छुटकारा मिलता है।5. संतरासंतरे में 80 से 85 प्रतिशत तक पानी पाया जाता है। संतरा विटामिन सी एक अच्छा सोर्स है। इसका सेवन करने से डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती है। विटामिन सी की वजह से आपकी इम्यूनिटी को मजबूत करने में मदद मिलती है।
- पान का पत्ता, जिसे आयुर्वेद में तांबूल कहा जाता है, भारतीय संस्कृति में एक खास महत्व रखता है। इसे पारंपरिक रूप से कई स्वास्थ्य लाभों से जोड़ा गया है। लेकिन क्या रात में पान का पत्ता खाने से अच्छी नींद आती है? इस लेख में हम पान के पत्ते के गुण, उसके लाभ और नींद पर इसके प्रभाव के बारे में विस्तार से बात करेंगे।पान का पत्ता और इसके गुण-पान का पत्ता एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है। यह पाचन को सुधारने, मुंह की दुर्गंध को दूर करने में मदद करता है। इसके साथ ही इसमें कैल्शियम, थायमिन और नियासिन जैसे जरूरी पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।क्या रात में पान का पत्ता खाने से अच्छी नींद आती है?-पान के पत्ते में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं जिससे वह नींद में मददगार साबित हो सकता है।1. पाचन में मदद करता है पान का पत्तारात में सोने से पहले पाचन तंत्र का सही ढंग से काम करना नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। पान का पत्ता पाचन में सुधार कर सकता है, जिससे भारीपन, गैस या अपच जैसी समस्याएं दूर हो सकती हैं। जब पाचन अच्छा होता है, तो शरीर बेहतर तरीके से आराम कर पाता है, जो अच्छी नींद के लिए जरूरी है।2. तनाव और चिंता कम करता है पान का पत्ताकुछ आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, पान का पत्ता दिमाग को शांत रखने और तनाव को कम करने में मदद करता है। तनाव और चिंता की स्थिति में अक्सर नींद नहीं आती, इसलिए अगर पान का पत्ता हो, तो आप रात को सोने से पहले खा सकते हैं।3. सर्दी-जुकाम में राहतअगर किसी व्यक्ति को रात में सर्दी, खांसी या सांस की समस्या होती है, तो पान का पत्ता राहत दे सकता है। इसकी एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण यह गले की सूजन को कम कर सकता है और सांस की समस्याओं में आराम पहुंचा सकता है। जब व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी नहीं होती, तो उसे बेहतर और गहरी नींद आती है।पान का पत्ता खाने के तरीके-रात में पान का पत्ता खाने के लिए इसे चूना, कत्था और सुपारी के बिना सेवन करना चाहिए। चूना और कत्था का ज्यादा सेवन शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है, खासकर जब इसे नियमित रूप से खाया जाए।पान का पत्ता खाली चबाने से इसके ज्यादा स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।अगर आपको पाचन संबंधी समस्याएं हैं, तो इसमें सौंफ, इलायची और लौंग का सेवन किया जा सकता है।पान का पत्ता खाने के तुरंत बाद पानी पीने से बचें, ताकि इसके सक्रिय तत्व सही से एब्सॉर्ब हो सकें।हालांकि पान का पत्ता स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसे सही मात्रा और सही तरीके से खाना जरूरी है। ज्यादा मात्रा में पान का सेवन दांतों के लिए नुकसानदायक हो सकता है और इससे मुंह में जलन या अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। साथ ही, अगर आप इसे चूना या तंबाकू के साथ खाते हैं, तो इसके हानिकारक प्रभाव हो सकते हैं, जैसे कि मुंह के कैंसर का खतरा बढ़ जाना।पान का पत्ता आयुर्वेद में एक खास जड़ी-बूटी मानी जाती है, जो पाचन, तनाव और सांस की समस्याओं में राहत दे सकती है। हालांकि इसे नींद लाने का पारंपरिक उपाय नहीं माना गया है, लेकिन इसके गुण जैसे पाचन सुधारना, तनाव कम करना, और ब्लड शुगर को नियंत्रित करना अप्रत्यक्ष रूप से अच्छी नींद में मददगार साबित हो सकते हैं। इसे रात में बिना चूना और तंबाकू के सेवन करें।उम्मीद करते हैं कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। इस लेख को शेयर करना न भूलें।
- बेवजह वजन बढ़ना और हार्मोन्स में उतार-चढ़ाव होना थायराइड बढ़ने के लक्षण है। थायराइड हमारे गले में मौजूद तितली के आकार की एक ग्रंथि है, जिसमें गड़बड़ी होने के कारण आपको कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिससे बचाव के लिए जरूरी है कि आप अपने खान-पान का खास ध्यान रखें। थायराइड कंट्रोल करने के लिए घर में मौजूद 6 जड़ी बूटियों से तैयार हर्बल ड्रिंक की रेसिपी शेयर की है, जिसे पीने से आपको थायराइड कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है और वजन कंट्रोल करने में भी ये ड्रिंक फायदेंमंद साबित हो सकता है।थायराइड कंट्रोल करने के लिए हर्बल ड्रिंक कैसे बनाएं? -सामग्री-दालचीनी- 1 इंचकसा हुआ अदरक- 1/2 छोटा चम्मचजीरा- 1/2 छोटा चम्मचजायफल पाउडर- एक चुटकीमुलेठी- 1 इंचनींबू का रस- ½ चम्मचपानी- 150 मि.ली.हल्दी- एक चुटकीड्रिंक बनाने की विधि-एक सॉस पैन में पानी डालें और पानी को अच्छी तरह उबाल लें। अब उबलते पानी में सभी सामग्रियों को एक साथ डाल दें। इसके बाद गैस की आंच कम कर दें और मिश्रण को 10 मिनट तक अच्छे से उबलने दें।तैयार हर्बल ड्रिंक को एक कप में छान लें। आप इसमें स्वाद के लिए शहद भी मिला सकते हैं।थायराइड कंट्रोल करने के लिए हर्बल ड्रिंकपीने के फायदे-दालचीनी में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो सूजन को कम करने और थायराइड फंक्शन को बेहतर तरीके से काम करने में मदद कर सकते हैं।-अदरक एंटी-ऑक्सिडेंट और सूजन-रोधी गुणों से भरपूर होते हैं, जो थायराइड को कंट्रोल रखने और सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।-जीरा में ऐसे कंपाउंड्स होते हैं, जो थायराइड फंक्शन और चयापचय को मैंटेन करने में मदद कर सकते हैं।-जायफल में मैग्नीशियम और मैंगनीज जैसे मिनरल्स होते हैं, जो थायराइड फंक्शन के बेहतर तरीके से काम करने के लिए जरूरी हैं।-मुलेठी में ऐसे यौगिक होते हैं, जो हार्मोन के स्तर को संतुलित करने और थायराइड को बेहतर ढंग से काम करने में मदद कर सकते हैं।-हल्दी सूजन-रोधी गुणों से भरपूर होते हैं, जो थायरायड ग्लेंड में सूजन को कम करने और इसे कंट्रोल करने में मदद करता है।- थायराइड कंट्रोल करने के लिए इस ड्रिंक को पीने के साथ संतुलित आहार को अपनी डाइट का हिस्सा बनाए और किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
- आजकल दूषित खान-पान एक्सरसाइज की कमी और खराब जीवनशैली फॉलो करने के चलते लोगों में हार्ट से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ने लगी हैं। इसके सबसे ज्यादा शिकार आज के समय में युवा हो रहे हैं। आजकल हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर के चलते लाखों लोगों की जान जा रही है। हर साल 29 सितंबर को देश-विदेश में विश्व हार्ट दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने के पीछे का मकसद लोगों को हार्ट के प्रति जागरूक करके हार्ट से जुड़ी बीमारियों को रोकना है। आइये जानते हैं वर्ल्ड हार्ट डे का इतिहास, महत्व और थीम के बारे में।विश्व हार्ट दिवस का इतिहासविश्व हार्ट दिवस मनाने की पहल वर्ल्ड हार्ट फेरडरेशन (WHF) की अध्यक्ष रहीं एंटनी बेयस डी ने की थी। लूना ने हार्ट डे मनाने का विचार रखा जिसपर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी सहमति जताई। दोनों संस्थाओं द्वारा मिलकर साल 2000 में इसकी शुरूआत की गई। पहली बार 24 सितंबर को विश्व हार्ट दिवस मनाया गया था, जिसके बाद इस दिन को बदलकर 29 सितंबर कर दिया गया था। यहीं से विश्व हार्ट दिवस की शुरूआत हुई थी, जो अब जोर-शोर से दुनियाभर में मनाया जाता है।विश्व हार्ट दिवस का महत्वविश्व हार्ट दिवस मनाने का महत्व या उद्देश्य लोगों में बढ़ती हुई हार्ट से जुड़ी बीमारियों पर रोक लगाना है। इस दिन को मनाकर लोगों को हार्ट हेल्थ के प्रति जागरूक किया जाता है। इस दिन स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े लोग न केवल हार्ट के मरीजों का हौंसला बढ़ाते हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी इसकी गिरफ्त में आने से बचाने की कोशिश करते हैं। इस दिवस को मनाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों के हार्ट को स्वस्थ रखने की पहल की जाती है।विश्व हार्ट दिवस 2024 की थीमविश्व हार्ट दिवस 2024 की थीम है "Use Heart for Action"। इस थीम से यह सीख मिलती है कि हमें अपने हार्ट का सही इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही साथ हार्ट का ख्याल भी रखना चाहिए, जिससे हम एक्शन लेने में समर्थ बने रह सकें। यह थीम हार्ट हेल्थ को गंभीरता से लने की बात कह रही है।
- आजकल लोगों में हड्डियों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कुछ लोग अर्थराइटिस, ओस्टियोपोरोसिस तो कुछ लोग अक्सर जोड़ों के दर्द से परेशान रहते हैं। इसके पीछे शरीर में कैल्शियम की कमी भी काफी हद तक जिम्मेदार मानी जाती है। कैल्शियम की कमी होने पर अक्सर यह समस्याएं शरीर में घर कर लेती हैं। कैल्शियम की कमी पूरी करने के लिए आप रागी और दूध पी सकते हैं। लेकिन कई बार इन दोनों को लेकर भी कंफ्यूजन रहती है कि इनमें से ज्यादा कैल्शियम किसमें पाया जाता है।रागी और दूध में से ज्यादा कैल्शियम किसमें होता है?डाइटिशियन दीपशिखा के मुताबिक वैसे तो रागी और दूध दोनों ही कैल्शियम के अच्छे सोर्स होते हैं। दोनों ही हड्डियों से जुड़ी समस्या में काफी कारगर साबित होते हैं। लेकिन बात जब आती है कि दोनों में से कैल्शियम किसमें ज्यादा होता है तो ऐसे में रागी का नाम उपर आता है। दूध की तुलना में रागी ज्यादा कैल्शियम से भरपूर होती है।किसमें कितना कैल्शियम होता है?आसान भाषा में समझें तो अगर आप 100 ग्राम दूध पीते हैं तो इससे आपको 110 mg कैल्शियम मिलता है। वहीं, अगर आप 100 ग्राम रागी खाते हैं तो इससे आपको करीब 350 ग्राम कैल्शियम मिलता है। एक्सपर्ट की मानें तो 100 ग्राम रागी जितना कैल्शियम पाने के लिए आपको 3 गिलास दूध पीना होगा। तब जाकर यह फांसला पूरा होगा। इसलिए अगर आप कैल्शियम का अच्छा सोर्स देख रहे हैं तो रागी का विकल्प चुन सकते हैं।दूध से ज्यादा फायदेमंद होती है रागीकेवल कैल्शियम ही नहीं, बल्कि रागी अन्य मामलों में भी दूध से आगे है। दूध पीने से कई बार आपको पेट फूलने या अपच की भी समस्या हो सकती है, लेकिन रागी में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को हेल्दी रखकर पेट से जुड़ी समस्याएओं को कम करने में मददगार होती है।
- दही में लैक्टिक एसिड होता है, जो स्किन के लिए बेहद फायदेमंद होता है और दाग-धब्बों को हल्का करने में मदद करता है। दही का इस्तेमाल ड्राई स्किन से लेकर ऑयली स्किन हर त्वचा प्रकार पर किया जाता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या त्वचा पर दही लगाना स्किन के लिए सही है। दही में लैक्टिक एसिड होता है, जो एक अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड (AHA) है और अपने एक्सफोलीएटिंग गुणों के लिए जाना जाता है।" तो आइए जानते हैं स्किन पर दही लगाने के क्या फायदे हैं?1. एक्सफोलीएशनदही में मौजूद लैक्टिक एसिड आपकी स्किन से धीरे-धीरे डेड स्किन सेल्स को हटाने में मदद करता है, जो स्किन को चिकना बनाने और इसकी बनावट को बेहतर करने में मदद कर सकता है।2. स्किन को रखे हाइड्रेटेडदही में मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं, जो त्वचा को मुलायम और हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं, जिससे ड्राई स्किन की समस्या को दूर किया जा सकता है।3. सूजन कम करेंदही में सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो चिड़चिड़ी या सेंसिटिव स्किन को शांत करने में मदद करते हैं और स्किन की रेडनेस कम कर सकते हैं।4. दाग-धब्बों को कम करेंदही में मौजूद लैक्टिक एसिड के एक्सफोलीएटिंग और मॉइस्चराइजिंग गुण पोर्स की बनावट को बेहतर बनाने, काले धब्बों को कम करने और फाइन लाइन्स को कम करने में मदद कर सकते हैं।5. पिग्मेंटेशन से राहतदही के नियमित उपयोग से, स्किन पर मौजूद पिग्मेंटेशन को हल्का किया जा सकता है। साथ ही यह सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से स्किन को होने वाले नुकसान के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है।अगर दही लगाने के बाद आपको स्किन पर खुजली या कोई अन्य समस्या महसूस हो तो इसका इस्तेमाल करना बंद कर दें और अगर आप पहली बार स्किन पर दही लगाने जा रहे हैं तो पैच टेस्ट जरूर करें।
- चावल सेहत के साथ ही, त्वचा और बालों के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं। अक्सर लोग चावल के पानी का इस्तेमाल त्वचा और बालों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए करते हैं। आप चाहें तो बालों पर चावल का पेस्ट भी लगा सकते हैं। बालों पर उबले हुए चावल का पेस्ट लगाना बेहद फायदेमंद होता है। उबले हुए चावल का पेस्ट लगाने से बाल मजबूत बनेंगे। चावल का पेस्ट स्कैल्प हेल्थ के लिए भी फायदेमंद होता है।बालों पर उबले हुए चावल का पेस्ट लगाने के फायदे1. बालों को स्मूथ बनाएबालों पर उबले हुए चावल का पेस्ट लगाने से बाल स्मूथ और शाइनी बनते हैं। आप बालों को स्मूथ और चमकदार बनाने के लिए चावल का पेस्ट लगा सकते हैं।2. ड्राई बालों से छुटकाराअगर आपके ड्राई या फ्रिजी बाल हैं, तो भी आप उबले हुए चावल का पेस्ट बालों पर लगा सकते हैं। चावल का पेस्ट लगाने से ड्राई और फ्रिजी बालों से छुटकारा मिलता है। अगर आप बालों पर इस पेस्ट को लगाएंगे, तो इससे ड्राई बालों से पूरी तरह से छुटकारा मिलेगा।3. बालों को चमकदार बनाएबालों को चमकदार बनाने के लिए भी आप उबले हुए चावल के पेस्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपके बाल रूखे और बेजान हैं, तो उबले हुए चावल का पेस्ट लगाना बेहद फायदेमंद हो सकता है। चावल का पेस्ट लगाने से रूखे बालों से छुटकारा मिलता है। इससे बालों की चमक बढ़ती है और बाल मुलायम बनते हैं।4. स्कैल्प हेल्थ को बेहतर बनाएबालों को हेल्दी बनाने के लिए, स्कैल्प हेल्थ का बेहतर होना भी बहुत जरूरी होता है। अगर आप स्कैल्प और बालों पर चावल का पेस्ट लगाएंगे, तो इससे स्कैल्प की सारी गंदगी आसानी से निकल जाएगी। आप उबले हुए चावल का पेस्ट बालों और स्कैल्प पर लगा सकते हैं। इससे स्कैल्प इंफेक्शन और फंगस से भी छुटकारा मिलेगा। साथ ही, डैंड्रफ की समस्या दूर होगी।बालों पर उबले हुए चावल का पेस्ट कैसे लगाएं?-इसके लिए आप चावल को अच्छी तरह से उबाल लें। फिर इन चावल को पीसकर बारीक बना लें।इसमें पानी और एलोवेरा जेल मिलाएं। फिर इस पेस्ट को बालों और स्कैल्प पर अच्छी तरह से लगाएं। आप सप्ताह में 1-2 बार बालों पर उबले हुए चावल का पेस्ट लगा सकते हैं। बालों से जुड़ी समस्याएं दूर करने के लिए आप भी उबले हुए चावल का पेस्ट लगा सकते हैं। चावल का पेस्ट बालों को मजबूत बनाता है। साथ ही, स्कैल्प हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखता है।
- रात को सोते समय सिर के नीचे तकिए का इस्तेमाल बड़े से लेकर बच्चे सभी उम्र के लोग करते हैं। सिर के नीचे तकिया लगाने से गर्दन और सिर को आराम मिलता है। साथ ही नींद भी अच्छी आती है। वहीं नवजात शिशुओं के सिर के नीचे भी लोग सरसों का ये बेबी पीलो का उपोयोग करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि बच्चे के सिर के नीचे तकिया लगाने से उनके स्कैल्प का आकार गोल रहता है, सिर को सही शेर देने में मदद मिलती है। लेकिन क्या सच में शिशुओं के सिर के नीचे तकिया लगाना सेफ और फायदेमंद होता है।शिशुओं के लिए तकिया इस्तेमाल करने से जुड़े फैक्ट्स1. अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) शिशुओं के लिए तकिए का उपयोग न करने की सलाह देता है, क्योंकि इससे दम घुटने का जोखिम बढ़ सकता है। बता दें कि अगर तकिए लगाने के कारण शिशुओं को सांस लेने में समस्या होती है तो इस कारण उन्हें सिर हिलाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।2. कुछ माता-पिता पोजिशनल प्लेगियोसेफली (फ्लैट हेड सिंड्रोम) को रोकने के लिए बेबी तकिए का उपयोग करते हैं। हालांकि, इस स्थिति को रोकने या उसका इलाज करने के लिए रीपोजिशनिंग तकनीक और टमी टाइम सुरक्षित और अधिक प्रभावी तरीके हैं।3. तकिए का उपयोग करने से शिशु की लुढ़कने, बैठने या सही मोटर कौशल विकसित करने की क्षमता में बाधा आ सकती है, क्योंकि उन्हें इन हरकतों का अभ्यास करने के लिए एक सपाट, और सही सतह की जरूरत होती है।4. चाइल्ड स्पेशलिस्ट आमतौर पर शिशुओं को तकिया देने से पहले बच्चे के कम से कम 18 महीने से 2 साल की उम्र होने का इंतजार करने की सलाह देते हैं, क्योंकि बड़े बच्चे बेहतर तरीके से हिलने-डुलने में सक्षम होते हैं और दम घुटने के जोखिम से बचते हैं।5. शिशुओं के सिर के नीचे तकिया लगाने से गर्दन में खिंचाव या असुविधा हो सकती है, क्योंकि बच्चों की रीढ़ और गर्दन तकिए के इस्तेमाल के लिए सही तरह से विकसित नहीं होती है।तकिए का इस्तेमाल शिशुओं के लिए सही नहीं माना जाता है, फिर चाहे शिशु का सिर बड़ा हो या चपटा हो। शिशु के सिर का आकार समय के साथ अपने आप धीरे-धीरे सही होने लगता है। इसलिए, जब तक आपका बच्चा 18 महीने का न हो जाए आप उसके सिर के नीचे तकिया न लगाएं और उसे एक सपाट और खुला स्थान दें। इसके साथ ही, किसी भी तरह की कंफ्जून होने पर अपने बच्चे के डॉक्टर से कंसल्ट करें।
- आंखों के नीचे काले घेरे पड़ते हैं तो पूरे चेहरे की खूबसूरती कम हो जाती है। आंखों के नीचे होने वाले काले घेरों यानी डार्क सर्कल को छिपाने के लिए लोग कंसीलर जैसे मेकअप प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, जो कि स्किन के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। मेकअप प्रोडक्ट्स को बनाने में कई तरह के केमिकल्स का उपयोग किया जाता है, ऐसे में इनके इस्तेमाल से स्किन को नुकसान पहुंच सकता है। आंखों के नीचे होने वाले काले घेरों को छिपाने के बजाय इन्हें कम करने के लिए घरेलू नुस्खे आजमा सकते हैं।1. दहीदही न सिर्फ पेट से जुड़ी समस्याओं को कम करने में सहायक होता है बल्कि इसके इस्तेमाल से स्किन भी बेहतर हो सकती है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड और प्रोबायोटिक्स आपकी त्वचा को रिपेयर करने में मदद करते हैं। डार्क सर्कलकम करने के लिए दही को एक मलमल के कपड़े में बांधकर 1 घंटे के लिए टांग कर रखें। समय पूरा होने पर आप देखेंगे कि दही से पानी निकल चुका है। इस दही को आंखों के नीचे काले घेरों पर लगाएं। 15-20 मिनट के बाद ताजे पानी से धो लें, बेहतर रिजल्ट के लिए इसे हफ्ते में कम से कम तीन बार लगाएं।2. कॉफी और हल्दीआंखों के नीचे होने वाले काले घेरों को कम करने के लिए कॉफी और हल्दी का प्रयोग भी कारगर साबित हो सकता है। कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और हल्दी के एंटीबैक्टीरियल गुण आपकी त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाने में मदद करते हैं। एक छोटी कटोरी में एक चौथाई चम्मच कॉफी पाउडर में 2 चुटकी हल्दी डालें और फिर गुलाबजल की मदद से पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को आंखों के नीचे काले घेरों पर लगाएं और 10-15 मिनट के लिए रखें। समय पूरा होने पर ताजे पानी से साफ करें।3. शहद और नींबूशहद में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और नींबू का विटामिन C आपकी त्वचा को निखारते हैं और काले घेरों को कम करने में मदद करते हैं। एक छोटी कटोरी में एक चम्मच शहद के साथ आधा चम्मच नींबू का रस मिलाएं। इस मिश्रण को आंखों के नीचे काले घेरों पर लगाएं और 15-20 मिनट के बाद धो लें। हफ्ते में दो-तीन बार इसका उपयोग करें, आपको फायदा दिखने लगेगा। ये सभी घरेलू उपाय आंखों के नीचे के काले घेरों को कम करने में सहायक हो सकते हैं। ध्यान दें कि इनका प्रयोग करते समय त्वचा को किसी भी तरह की जलन या एलर्जी महसूस हो, तो तुरंत इसे साफ कर दें और डॉक्टर से परामर्श करें।
- विशेषज्ञों की मानें, तो अगर पेट की चर्बी को कम न किया जाए, तो यह स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है। मोटापा कई अन्य बीमारियों को जन्म दे सकता है। मोटापा कम करने के लिए आप सुबह के समय कुछ ड्रिंक्स को अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। इससे मोटापा कम होगा और पेट चर्बी भी दूर हो जाएगी।पेट की चर्बी कम करने के लिए पिएं नींबू पानीदिन की शुरुआत आप गुनगुना पानी में नींबू का रस मिक्स करके पी सकते हैं। नींबू में विटामिन-सी होता है, जो मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है। इसके अलावा, यह बॉडी को हाइड्रेटेड रखता है और पाचन क्षमता में सुधार होता है। इसकी मदद से पेट की चर्बी भी तेजी से गलने लगती है।ग्रीन-टी पीने से कम होगी पेट की चर्बीग्रीन-टी एंटीऑक्सीडेंट और कैटेचिन का बेहतरी स्रोत है। जिन लोगों का मेटाबॉलिज्म सही तरह से काम नहीं करता है, उन्हें अपनी रोजाना सुबह उठकर ग्रीन-टी जरूर पीना चाहिए। इससे फैट लूज होता है। खासकर, बेली फैट कम करने में मदद मिलती है। आप चाहें, तो इसके स्वाद को एन्हैंस करने के लिए इसमें नींबू का रस डाल सकते हैं।पेट की चर्बी कम करने के लिए पिएं एप्पल साइडर विनेगरएक गिलास पानी में 1-2 बड़े चम्मच एप्पल साइडर विनेगर मिक्स करके पिएं। यह आपके ओवर ऑल हेल्थ के लिए बहुत ही फायदेमंद है। यह ब्लड शुगर के स्तर को बैलेंस्ड रखता है और बॉडी में जमा फैट को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। अगर आपको एप्पल साइडर विनेगर पसंद न हो, तो इसमें जरा-सा मधु या दालचीनी मिक्स करके पी सकते हैं।पेट की चर्बी दूर करने के लिए पिएं प्रोटीन शेकआपने अक्सर देखा होगा कि वेट लॉस जर्नी में प्रोटीन का बहुत अहम योगदान होता है। इसी तरह, अगर आप अपने पेट की चर्बी को दूर करना चाहते हैं, तो नियमित रूप से प्रोटीन शेक का सेवन जरूर करें। इसे आप घर में भी बना सकते हैं। जैसे प्रोटीन पाउडर को आप बादाम के दूध में मिक्स करके पी सकते हैं। इससे मांसेपशियों की रिकवरी में मदद मिलती है और बॉडी एनर्जेटिक रहती है। यह पेट की चर्बी कम करने में भी योगदान देते हैं।पेट की चर्बी कम करने के लिए पिएं हर्बल डिटॉक्स चाय पिएंहर्बल चाय, जैसे डंडेलियन या अदरक की चाय पीना भी बहुत पेट की चर्बी कम करने में फायेदमं साबित हो सकता है। अदरक की चाय पीने से पाचन संबंधी समस्याएं भी दूर होती हैं। इसे आप नाश्ते में अपने बैलेंस्ड डाइट का हिस्सा बना सकते हैं।याद रखें, पेट की चर्बी कम करने के उक्त ड्रिंक्स काफी फायदेमंद हो सकते हैं। लेकिन, इसके साथ-साथ आपको फिजिकल एक्टिविटी भी करनी चाहिए। सिर्फ डाइट में बदलाव करने पेट की चर्बी कम करना काफी नहीं होता है। इसके लिए, बेहतर होगा कि आप एक बार एक्सपर्ट से बात करें।
- स्वस्थ रहने के लिए हेल्थ एक्सपर्ट्स ड्राई फ्रूट्स खाने की सलाह देते हैं। किशमिश भी एक ड्राई फ्रूट है, जो विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर होता है। आयुर्वेद में किशमिश को बल्य बताया गया है। यानी किशमिश खाने से शरीर को ताकत मिलती है। इसलिए बच्चों और महिलाओं के लिए किशमिश का सेवन करना बेहद फायदेमंद होता है। किशमिश में फाइबर होता है, जो पाचन को मजबूत बनाता है। अगर नियमित रूप से किशमिश का सेवन किया जाए, तो वेट गेन में भी मदद मिलती है। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए आपको भी अपनी डाइट में किशमिश जरूर शामिल करना चाहिए। किशमिश का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है, जिससे बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।1. किशमिश खाने का सही समय क्या है?“किशमिश खाने का सबसे सही समय सुबह का होता है। सुबह खाली पेट किशमिश का सेवन करना सबसे अधिक फायदेमंद होता है। खासकर, अगर आप सिर्फ किशमिश का सेवन कर रहे हैं, तो इसे सुबह खाली पेट खा सकते हैं।”2. किशमिश की तासीर क्या होती है?“किशमिश की तासीर गर्म होती है। लेकिन अगर इसे पानी में भिगोकर लिया जाए, तो किशमिश की तासीर सामान्य हो जाती है। इसलिए सभी लोगों को किशमिश का सेवन भिगोकर ही करना चाहिए। खासकर, पित्त वाले लोगों को भिगोए हुए किशमिश ही खाने चाहिए। हालांकि, वात और कफ प्रकृति के लोग किशमिश का सेवन सीधे तौर पर भी कर सकते हैं। लेकिन, भिगोए हुए किशमिश सेहत के लिए अधिक फायदेमंद होते हैं।”3. किशमिश खाने का सही तरीका क्या होना चाहिए?किशमिश का सेवन भिगोकर करना चाहिए। आप रात को पानी में 4-5 किशमिश भिगोकर रख दें। सुबह खाली पेट भीगे हुए किशमिशका सेवन कर लें। आप चाहें तो किशमिश को हलवा, खीर, स्मूदी, शेक आदि में भी मिला सकते हैं। सर्दियों में आप किशमिश के लड्डू बनाकर भी खा सकते हैं। किशमिश का सेवन बादाम, काजू, अखरोट आदि के साथ भी किया जा सकता है।4. किशमिश में कौन-से पोषक तत्व पाए जाते हैं?सोडियमपोटैशियमडाइटरी फाइबरप्रोटीनविटामिन सीआयरनकैल्शियमविटामिन बी6मैग्नीशियम5. एक दिन में कितने किशमिश खाने चाहिए?“आप रोजाना 4-7 किशमिश का सेवन कर सकते हैं। आपको अधिक मात्रा में किशमिश का सेवन करने से बचना चाहिए। लेकिन यह बात पाचन शक्ति पर भी निर्भर करता है।” किशमिश सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसकी तासीर बेहद गर्म होती है। इसलिए किशमिश का सेवन भिगोकर ही करना चाहिए। स्वस्थ रहने के लिए आप रोजाना 6-7 किशमिश का सेवन कर सकते हैं। लेकिन, अगर आपकी पित्त प्रकृति है, तो किशमिश का सेवन सीधे तौर पर करने से बचें। पित्त वाले लोगों को किशमिश का सेवन सिर्फ भिगोकर ही करना चाहिए।
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बालों की समस्या आज के समय में एक बड़ी परेशानी बनती जा रही है। आप कुछ घरेलू उपायों को अपनाकर भी बालों की ग्रोथ को बेहतर कर सकते हैं। दरअसल, सदियों से भारतीय मसालोंं में दालचीनी का उपयोग किया जा रहा है। यह खाने के स्वाद को बढ़ाने के साथ ही सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है। इसका उपयोग कई बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है। ऐसे में लोगों के मन में प्रश्न उठता है कि क्या दालचीनी बालों की ग्रोथ के लिए फायदेमंद होती है।
एक्सपर्ट के अनुसार दालचीनी में कई आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, जो बालों के स्वास्थ्य में सुधार करते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन्स और आवश्यक मिनरल्स पाए जाते हैं, जो बालों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं और बालों के झड़ने की समस्या को कम करते हैं। इसके अलावा, इसमें एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो स्कैल्प की समस्याओं जैसे डैंड्रफ और खुजली से राहत दिलाने में सहायक होते हैं। इन समस्याओं को दूर करने से आपके बालों की ग्रोथ में सुधार होता है।दालचीनी से बालों को होने वाले फायदेब्लड सर्कुलेशन में सुधार करें- दालचीनी आपके सिर की त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ा सकती है। बढ़ा हुआ ब्लड सर्कुलेशन हेयर फॉलिक्स को आवश्यक पोषक तत्व और ऑक्सीजन प्रदान करता है, जिससे बालों की ग्रोथ होती है।एंटीऑक्सिडेंट गुण- दालचीनी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट हेयर फॉलिक्स को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाते हैं। यह समय से पहले बालों के झड़ने और पतले होने को रोकने में मदद कर सकता है।एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण- दालचीनी में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, यह सिर की त्वचा में सूजन को कम करने में मदद करते हैं। सूजन बालों के ग्रोथ को बाधित कर सकती है, इसलिए इसे कम करना आवश्यक होता है।बैक्टीरिया को दूर करे- दालचीनी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो सिर की त्वचा में बैक्टीरिया की ग्रोथ को रोकते हैं। बैक्टीरिया की अधिकता बालों के जड़ों को कमजोर करती है और बालों के झड़ने का कारण बन सकती है।बालों की ग्रोथ के लिए दालचीनी का उपयोग कैसे करें?एक चम्मच दालचीनी पाउडर को नारियल तेल या जैतून के तेल के साथ मिलाएं। इस मिश्रण को अपने सिर की त्वचा पर लगाएं और कुछ समय के लिए छोड़ दें, फिर बालों को शैम्पू से धो लें।आप अपने नियमित शैम्पू में एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिला सकते हैं और अपने बालों को धोने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।दालचीनी पाउडर को पानी में उबालें और ठंडा होने दें। इस टॉनिक को अपने बालों और सिर की त्वचा पर लगाएं और कुछ समय के लिए छोड़ दें, फिर धो लें।दालचीनी आपके बालों के स्वास्थ्य और ग्रोथ के लिए एक प्राकृतिक और प्रभावी उपाय हो सकती है। अपने बालों में दालचीनी का उपयोग करने से पहले आप डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। बालों की समस्या होने पर आप पहले उस समस्या का इलाज कराएं।




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