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नयी दिल्ली। बिहार में राजनीतिक उलटफेर के बाद बदली हुई परिस्थितियों के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी राज्य इकाई में प्रमुख पदों पर बदलाव कर सकती है और नए चेहरों को प्रमुख जिम्मेदारी सौंप सकती है। ऐसे संकेतों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने बिहार के प्रमुख भाजपा नेताओं के साथ मंगलवार को यहां पार्टी मुख्यालय में मंथन किया और भावी रणनीति पर चर्चा की। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भाजपा का शीर्ष नेतृत्च विधानसभा और विधानपरिषद में पार्टी के नेताओं के साथ ही संगठन में भी प्रमुख पदों पर बदलाव की दिशा में काम कर रहा है। पार्टी उन विधानसभा क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है, जहां अभी तक वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जनता दल यूनाइटेड के छोटे सहयोगी के रूप में काम करती रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नौ अगस्त को राजग से नाता तोड़ने के बाद भाजपा की यह पहली बड़ी बैठक है, जिसमें पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी मौजूद है। बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि जद(यू) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के गठबंधन ने जनादेश का अपमान किया है और पिछले दरवाजे से ‘‘लालू राज'' का प्रवेश कराया है। ज्ञात हो कि भाजपा के नेता ‘‘लालू राज'' का उल्लेख पूर्व मुख्यमंत्री व राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के 15 वर्षों के कार्यकाल के लिए करते हैं और इस दौरान कुशासन रहने का आरोप लगाते हैं। जायसवाल ने दावा किया कि गरीब लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना ‘‘मसीहा'' मानते हैं और भाजपा अगले लोकसभा चुनाव में बिहार में 40 में से 35 सीटें जीतेगी। ज्ञात हो कि जद (यू) ने पिछले दिनों राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग होकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ हाथ मिला लिया था और बिहार में महागठबंधन की सरकार बनाई थी। भाजपा सूत्रों ने बताया कि पार्टी अब उन समुदायों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए आक्रामक रुख अख्तियार करेगी, जो वह अभी तक जद (यू) के कारण नहीं करती थी। उसका जोर खासकर अति पिछड़ा और दलितों के एक वर्ग को लुभाने पर होगा, जिन्हें मुख्यमंत्री कुमार की मजबूती का प्रमुख आधार माना जाता है। पार्टी का जोर पूरे राज्य में अपना जनाधार बढ़ाने का भी रहेगा क्योंकि जद(यू) के साथ गठबंधन के कारण वह आधे के करीब सीटों पर ही उम्मीदवार खड़े करती थी। पार्टी मुख्यालय में हुई इस बैठक में शाह और नड्डा के अलावा भाजपा के संगठन महासचिव बी एल संतोष भी शामिल थे। बिहार से आने वाले केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, गिरिराज सिंह और नित्यानंद राय के अलावा वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद, सुशील मोदी, नंदकिशोर यादव तथा बिहार के सह प्रभारी हरीश द्विवेदी भी इसमें उपस्थित थे। इनके अलावा संजय जायसवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी तथा पूर्व मंत्री शाहनवाज हुसैन ने भी इस बैठक में भाग लिया। पार्टी नेताओं से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी की भावी रणनीति पर भी चर्चा की गई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को ही अपनी मंत्रिपरिषद में विस्तार किया है। उनकी मंत्रिपरिषद में 31 विधायकों को शामिल किया गया है। इनमें ज्यादातर सदस्य राजद के हैं। नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठित नयी सरकार में राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। कुमार के दो सदस्यीय मंत्रिमंडल का विस्तार मंगलवार को हुआ।
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दिल्ली/जम्मू। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद को केंद्र शासित प्रदेश में पार्टी की प्रचार समिति का प्रमुख नियुक्त किया, लेकिन आजाद ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जम्मू और कश्मीर में संगठन में सुधार के तौर पर गांधी ने आज़ाद के करीबी माने जाने वाले विकार रसूल वानी को अपनी जम्मू-कश्मीर इकाई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया। आजाद कांग्रेस के 'जी 23' समूह के प्रमुख सदस्य हैं। यह समूह पार्टी नेतृत्व का आलोचक रहा है और एक संगठनात्मक बदलाव की मांग करते आया है। आजाद को राज्यसभा से सेवानिवृत्त होने के बाद दोबारा उच्च सदन में नहीं भेजा गया था।
कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता रमन भल्ला को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। पूर्व पीडीपी नेता तारिक हामिद कर्रा को अभियान समिति के उपाध्यक्ष के रूप में नामित किया गया है। नियुक्तियों को सार्वजनिक किए जाने के कुछ घंटे बाद, सूत्रों के हवाले से पता लगा है कि आज़ाद ने गांधी के प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। हालांकि, वानी ने गुलाम अहमद मीर की जगह ली है जिन्होंने आठ साल तक इस पद पर रहने के बाद जुलाई में इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कहा कि सोनिया ने गुलाम अहमद मीर का प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा स्वीकार कर लिया और उनके स्थान पर रसूल वानी को अध्यक्ष नियुक्त किया। आजाद के करीबी माने जाने वाले वानी प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और बानिहाल से विधायक रह चुके हैं। बयान में कहा गया है कि सोनिया गांधी ने जम्मू-कश्मीर कांग्रेस कमेटी के लिये चुनाव अभियान समिति और राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) समेत सात समितियों का भी गठन किया। पार्टी ने जम्मू-कश्मीर के लिये समन्वय समिति, घोषणापत्र समिति, प्रचार एवं प्रकाशन समिति, अनुशासन समिति और प्रदेश चुनाव समिति का भी गठन किया है। जम्मू-कश्मीर में पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधान खत्म किये जाने के बाद से ही विधानसभा अस्तित्व में नहीं है। परिसीमन का काम संपन्न हो चुका है। फिलहाल सरकार की तरफ विधानसभा चुनाव की तिथि को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है।
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ठाणे। महाराष्ट्र में ठाणे शहर के एक थाने में 34 वर्षीय महिला पुलिसकर्मी ने मंगलवार को कथित रूप से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। एक अधिकारी ने बताया कि घटना वागले एस्टेट डिवीजन के तहत आने वाले श्रीनगर थाने में अपराह्न करीब डेढ़ बजे हुई। उन्होंने बताया कि पुलिस नायक अनीता भीमराव वावहाल थाने में महिला कर्मियों को आवंटित कक्ष में फंदे से लटकी मिली। अधिकारी के मुताबिक, शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है और दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अनीता ने घरेलू कारणों से अपनी जान दी है।
file photo
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जयपुर। राजस्थान में एक महिला शिक्षक को आरोपियों ने जिंदा जला दिया। करीब 7 दिन पहले की इस वारदात का वीडियो आज सामने आया है। यह भयावह मामला राज्य के किसी दूर-दराज के इलाके का नहीं, ऐन राजधानी का है। उस महिला का कसूर इतना था कि वह आरोपियों से काफी दिन पहले अपने उधार दिए पैसे मांग रही थी। बुरी तरह झुलसी टीचर ने मंगलवार देर रात हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया। पुलिस ने जुर्म दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने बताया कि यह घटना 10 अगस्त को जयपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर रायसर गांव की है। सुबह आठ बजे रैगरों के मोहल्ले में एक स्कूल की टीचर अनीता रेगर (32) अपने बेटे राजवीर (6) के साथ स्कूल जा रही थी। इस दौरान कुछ आरोपियों ने घेरकर उस पर हमला कर दिया। अनीता खुद को बचाने के लिए पास ही में कालू राम रैगर के घर में घुस गई। इसके बाद आरोपियों ने पेट्रोल छिड़ककर अनीता को आग लगा दी। महिला चीखती, चिल्लाती रही, लेकिन लोग वीडियो बनाते रहे। जयपुर ग्रामीण के एएसपी धर्मेंद्र यादव ने बताया कि महिला ने आरोपियों के नाम बताए हैं। जांच चल रही है। जल्द कार्रवाई की जाएगी। - नयी दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सुभाष पार्क इलाके में मंगलवार को 70 वर्षीय एक महिला और उसकी बहु अपने घर में मृत पाई गईं। एक पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी।उन्होंने बताया कि मृतक महिलाओं की पहचान विमला देवी और डोली राय (45) के रूप में की गई है।अधिकारी के मुताबिक, मृतक महिलाओं का परिवार पूजा सामग्री का व्यवसाय करता था।उन्होंने बताया कि डोली के बेटे सार्थक और शशांक दो-तीन दिन के लिए ऋषिकेश और मनाली घूमने गए थे। वापस आने पर उन्होंने मां और दादी का शव देखा तथा पुलिस को इसकी सूचना दी।अधिकारी के अनुसार, वेलकम पुलिस थाना क्षेत्र में दोनों महिलाओं की मौत के संबंध में सोमवार शाम चार बजकर 20 मिनट पर एक पीसीआर कॉल प्राप्त हुई थी। उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया मौत का कारण चाकू से किया गया वार प्रतीत होता है। मामले की जांच जारी है।
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रोहतक। हरियाणा के जिला रोहतक के गांव मदीना से मोखरा रोड पर आराम कर रहे गाड़ी चालक को मोटरसाइकिल सवार तीन युवकों ने पिस्तौल के बल पर लूट लिया। घटना उस समय हुई जब बिस्किट फैक्ट्री का ड्राइवर सामान लेकर गांव मोखरा मदीना जा रहा था और बीच रास्ते में आराम करने लगा। इसी दौरान मोटरसाइकिल सवार पिस्तौल दिखाकर 2900 रुपये व मोबाइल छीन ले गए। पीडि़त की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस के अनुसार झज्जर के गांव डीघल निवासी राहुल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह बिस्किट फैक्ट्री में ड्राइवर की नौकरी करता है। सोमवार को वह गाड़ी लेकर मोखरा मदीना बिक्री के लिए जा रहा था। बीच रास्ते में मदीना से मोखरा रोड पर पुल के नीचे गाड़ी खड़ी करके आराम करने लगा। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार होकर तीन आरोपी युवक आए।
मोटरसाइकिल सवार आरोपी युवकों ने उसके पास आए और एक ने पिस्तौल तान दी। वहीं दूसरा युवक मारपीट करने लगा। वहीं जेब में रखे 2900 रुपए व मोबाइल छीन लिया। आरोपित युवक घटना को अंजाम देकर बहुअकबरपुर की तरफ भाग गए। वहीं आरोपी युवक जिस मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए, उस पर नंबर प्लेट भी नहीं थी। जिसके बाद आरोपी युवक घटना को अंजाम देकर वहां से फरार हो गए। पीडि़त ने घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस मामले की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची। पुलिस ने पीडि़त की शिकायत पर अज्ञात तीन युवकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। -
अंबाला। हरियाणा के अंबाला जिले में तेज रफ्तार डंपर ने बाइक चालक को रौंद दिया। डंपर के पहिए नीचे कुचले जाने से बाइक चालक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की शिनाख्त हाउसिंग बोर्ड अंबाला निवासी करीब 56 वर्षीय श्रीभगवान पुत्र जिले सिंह के रूप में हुई है। श्रीभगवान हाउसिंग बोर्ड से बलदेव नगर की तरफ जा रहा था। जैसे ही वह बलदेव नगर पुल के नजदीक पहुंचा तो डंपर ने कुचल दिया। हादसे की सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंची बलदेव नगर थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में रखवाया। पुलिस ने डंपर को कब्जे में ले लिया है। आरोपी को भी हिरासत में लिया गया है।
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वाराणसी। वाराणसी के एक वाटर पार्क में डूबने से क्लास-2 के एक स्टूडेंट की मौत हो गई। बच्चे का अंतिम संस्कार करने के बाद परिजन सारनाथ थाने पहुंचे और कार्रवाई की मांग करते हुए धरने पर बैठ गए। पुलिस वाटर पार्क प्रबंधन से जुड़े लोगों से पुलिस पूछताछ कर रही है।
पुलिस ने बताया कि लाटभैरव सरैयां निवासी सब्जी विक्रेता राजकुमार सोनकर के दो बेटों और तीन बेटियों में दूसरे नंबर का यश आठ साल का था। वह क्लास-2 का स्टूडेंट था। यश सोमवार की दोपहर अपने मुहल्ले के लड़कों के साथ पास के ही दानियालपुर स्थित वाटर पार्क गया था। आरोप है कि वाटर पार्क में नहाने के दौरान यश डूब गया। साथ गए मोहल्ले के लड़कों की सूचना पर परिजन आए और यश को आनन-फानन अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में बच्चे के शव को मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद परिजन यश के शव को ले जाकर गंगा में प्रवाहित कर दिए। उधर, इस घटना के बाद से यश की मां कोमल देवी और उसके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। यश का अंतिम संस्कार करने के बाद परिजन और मुहल्ले के लोग रात में सारनाथ थाने पहुंचे। सभी ने वाटर पार्क प्रबंधन से जुड़े लोगों पर कार्रवाई की मांग लेकर हंगामा शुरू कर दिया। इसके साथ ही धरने पर बैठ गए। सभी का कहना था कि बच्चों को उनके गार्जियन के बिना वाटर पार्क में एंट्री कैसे दे दी गई।
पुलिस ने आश्वस्त किया कि तहरीर के आधार पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही वाटर पार्क प्रबंधन से जुड़े दो लोगों को बुलाकर उनसे पूछताछ शुरू की तो यश के परिजन और उसके मुहल्ले के लोग शांत हुए। उधर, इस संबंध में सारनाथ थाना प्रभारी धरमपाल सिंह ने बताया कि बच्चे की अंत्येष्टि करने के बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी है। मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि देश ने पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथनॉल मिलाने का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया है।प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से 76वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए ऊर्जा के मामले में स्वतंत्रता और आत्मनिर्भर होने का आह्वान किया।उन्होंने कहा, ‘‘हमें ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की जरूरत है।’’ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है। हम अपनी अपनी तेल जरूरतों का 85 प्रतिशत और गैस जरूरतों का 50 प्रतिशत आयात से पूरा करते हैं।मोदी ने कहा, ‘‘हमें ऊर्जा स्वतंत्रता के लिये सौर ऊर्जा से लेकर हाइड्रोजन मिशन तथा इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे कदमों को अगले स्तर पर ले जाने की जरूरत है।’’सरकार तेल आयात पर निर्भरता कम करने के लिये पेट्रोल में एथनॉल मिलाने पर जोर दे रही है। एथनॉल चावल और गेहूं के भूसे, गन्ने की खोई आदि से बनायी जाती है।उल्लेखनीय है कि सरकार ने पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पहले ही प्राप्त कर लिया है। यह लक्ष्य नवंबर, 2022 तक पूरा होना था, लेकिन इसे पांच महीने पहले ही जून में हासिल कर लिया गया है। राष्ट्रीय जैव-ईंधन नीति के तहत संशोधित लक्ष्य के अंतर्गत 2025-26 तक 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है।प्रधानमंत्री ने पिछले सप्ताह कहा था कि पेट्रोल में एथनॉल मिलाने से बीते सात-आठ साल में देश के करीब 50 हजार करोड़ रुपये विदेश जाने से बचे हैं और करीब इतनी ही राशि एथनॉल मिश्रण के कारण किसानों को मिली है।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि देश में नयी पीढ़ी की 5जी सेवाएं जल्द शुरू होंगी और डिजिटल भारत का सपना गांवों से गुजरेगा। मोदी ने 76वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए देश में 5जी से लेकर इलेक्ट्रॉनिक चिप के विकास को बढ़ावा देने समेत गांवों में ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) के जाल को बिछाने और साझा सेवा केंद्रों के जरिये डिजिटल उद्यमिता बढ़ाने की बात कही।उन्होंने कहा, "अब हम 5जी के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। इसका बहुत इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हम ऑप्टिकल फाइबर को हर गांव में लेकर जा रहे हैं और मुझे पूरी भरोसा है कि डिजिटल भारत का सपना गांवों से गुजरेगा।" प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि भारत के चार लाख साझा सेवा केंद्र गांवों में विकसित हो रहे हैं। देश इस बात पर गर्व कर सकता है कि गांवों में चार लाख डिजिटल उद्यमी तैयार हो रहे हैं और गांव के लोगें की उनसे सेवा लेने की आदत हो रही है।’’गौरतलब है कि सरकार ने इस महीने की शुरुआत में उद्योगपति मुकेश अंबानी की दूरसंचार कंपनी जियो, सुनील मित्तल की अगुवाई वाली भारती एयरटेल, गौतम अडाणी के समूह और वोडाफोन आइडिया को 1.5 लाख करोड़ रुपये में 5जी स्पेक्ट्रम बेची है। मोदी ने कहा हम बार-बार पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को याद करते है। 'जय जवान जय किसान' का उनका मंत्र आज भी देश के लिए प्रेरणा है। मोदी ने कहा, "बाद में अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जय विज्ञान कह कर उस मंत्र में एक कड़ी जोड़ दी थी और देश ने उसको प्राथमिकता दी थी। लेकिन अब अमृतकाल के लिए एक और अनिवार्यता है और वो है जय अनुसंधान......यानी जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान।" उन्होंने कहा कि नवाचार की ताकत देखिये। आज डिजिटल भुगतान मंच यूपीआई भीम (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस), सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों और डिजिटल वित्तीय लेनदेन में हमारी विश्व में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल भारत अभियान, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और 5जी की तरफ जो हम कदम बढ़ा रहे हैं.....यह केवल आधुनिकता की पहचान नहीं है इसमें तीन बड़ी ताकतें समाई हुई है।उन्होंने कहा, "शिक्षा में सम्पूर्ण क्रान्ति, स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति, डिजिटल माध्यम से आएगी और किसी जीवन में बहुत बड़ा बदलाव डिजिटल माध्यम से आने वाला है। एक नया विश्व तैयार हो रहा है। मानव जाति के लिए यह दशक प्रौद्योगिकी का समय है और भारत के लिए तो यह प्रौद्योगिकी-दशक (टेकड) हैं।"मोदी ने कहा कि अटल नवाचार मिशन, ‘इन्क्यूबेशन’ केंद्र (पालना केंद्र) और स्टार्टअप नए क्षेत्रों का विकास कर रहे हैं, युवा पीढ़ी के लिए नए अवसर ला रहे हैं।उन्होंने कहा हमें सौर ऊर्जा से लेकर हाइड्रोजन मिशन तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाकर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना है। ‘‘हमें ऊर्जा क्षेत्र में आतमनिर्भर बनने के लिये इन कार्यक्रमों को अगले चरण में ले जाना है।’’मोदी ने कहा कि भारत का औद्योगिक विकास जमीनी स्तर से होगा और हमारे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, रेहड़ी-पटरी वालों और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वालों को मजबूत करने की जरूरत है।प्रधानमंत्री मोदी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ भी पूरे जोश के साथ लड़ने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "हमें पूरी ताकत से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना है। पिछले आठ साल में, आधार, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) और मोबाइल फोन के उपयोग से दो लाख करोड़ रुपये के काले धन का पता लगाया गया है।’’
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नई दिल्ली। हर घर तिरंगा वेबसाइट पर पांच करोड़ से अधिक तिरंगा सेल्फी अपलोड की जा चुकी हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में हर घर तिरंगा अभियान की घोषणा की थी। लोगों से देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस को मनाने के लिए अपने घरों में तिरंगा फहराने के लिए कहा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जुलाई को घरों में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर हर घर तिरंगा अभियान में शामिल होने का आह्वान किया था। केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा है कि पांच करोड़ तिरंगा सेल्फी राष्ट्र को आगे रखने की सामूहिक प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती हैं।
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नयी दिल्ली. नई अंतरिक्ष नीति लाने की सरकार की तैयारियों के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में सक्रिय स्टार्टअप की सफलता के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर स्पष्टता होना काफी अहम है। इस क्षेत्र के एक विशेषज्ञ ने इस पर जोर दिया है। अंतरिक्ष गतिविधियों में कारोबार को सुगम बनाने के लिए सरकार नई अंतरिक्ष नीति लाने की कोशिशों में जुटी हुई है। इस नीति से जुड़े विचार-विमर्श का दौर अंतिम चरण में है और इससे इस क्षेत्र में निजी कंपनियों के लिए काम करने का खाका तैयार होने की उम्मीद है। इंडियन स्पेस एसोसिएशन (इस्पा) के चेयरमैन जयंत पाटिल ने इस मुद्दे पर आयोजित एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि अंतरिक्ष विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने के बाद इसके क्रियान्वयन के लिए अंतरिक्ष नीति से कानूनी समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सक्रिय स्टार्टअप के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों का मसला बहुत परेशान कर रहा है। उन्होंने कहा, "क्या इन स्टार्टअप द्वारा विकसित उत्पादों का बौद्धिक संपदा अधिकार उनके पास ही रहेगा या वह सरकार के पास ही जाएगा? इस पहलू पर बहुत ध्यान देने की जरूरत है।" उन्होंने कहा, "सरकार के तौर पर बौद्धिक संपदा पर समूचा अधिकार उसका ही नहीं हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो फिर स्टार्टअप के लिए वह अधिकार किसी काम का नहीं होगा।" सरकार ने दो साल पहले अंतरिक्ष क्षेत्र में शोध एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए इसके दरवाजे निजी क्षेत्र के लिए खोल दिए थे। इस मौके पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व चेयरमैन ए एस किरण कुमार ने स्टार्टअप फर्मों से कहा कि उन्हें किसी भी उद्यम में आगे बढ़ने के पहले अपने उत्पादों के लिए खरीदारों एवं उपभोक्ताओं की पहचान करनी चाहिए।
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भुवनेश्वर. बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक बार फिर हवा के निम्न दबाव का क्षेत्र बन रहा है, जिसके कारण ओडिशा की महानदी में ‘मध्यम बाढ़' के आसार बन रहे हैं, जबकि राज्य में पिछले एक सप्ताह से मूसलाधार बारिश जारी है। निम्न दबाव का क्षेत्र पश्चिम बंगाल में दीघा के पास तट को सुबह साढ़े 10 से साढ़े ग्यारह बजे के बीच पार कर गया, जिससे ओडिशा के कई तटीय, उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, बालासोर से लगभग 70 किमी उत्तर पूर्व में स्थित हवा का निम्न दबाव अब उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है और अगले 24 घंटों तक इसकी तीव्रता बनी रहेगी। विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) पी. के. जेना ने कहा कि महानदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र सहित राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश तेज हो गयी है, इसलिए राज्य सरकार इस बार "मध्यम बाढ़" की आशंका जता रही है। एसआरसी ने कहा, ''हमें सोमवार शाम तक कटक के पास मुंडाली बैराज में लगभग 10.5 लाख क्यूसेक बाढ़ के पानी के प्रवाह की उम्मीद है। तदनुसार, हम महानदी में मध्यम बाढ़ की तैयारी कर रहे हैं।'' प्रशासन ने अगस्त 2019 में भी ऐसी ही स्थिति का सामना किया था।
जेना ने कहा कि वर्तमान में 9.5 लाख क्यूसेक पानी महानदी के निचले इलाके खैरमल के पास से बह रहा है और इसके मुंडाली तक पहुंचने में 24 घंटे लगेंगे। एसआरसी ने कहा, ''इसलिए, हम सोमवार शाम तक महानदी के आसपास मध्यम बाढ़ की उम्मीद कर रहे हैं, जब 10 लाख क्यूसेक से अधिक पानी इसमें पहुंचेगा।'' हालांकि, जिला अधिकारियों को निचले इलाकों से लोगों को निकालने के लिए कहा गया है।
स्थिति की समीक्षा करने वाले जेना ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), आडिशा राज्य आपदा मोचन बल (ओडीएआरएफ) और दमकलकर्मियों के 22 बचाव दलों को पुरी, खुर्दा, केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर और कटक जिलों में भेजा गया है, क्योंकि इन स्थानों के संभावित कारणों से अधिक बाढ़ प्रभावित होने की संभावना है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि महानदी की सहायक नदियां जैसे लूना, करंदिया, चित्रोत्ताला, दया, भार्गवी, रजुआ और मालागुनी में भी जलस्तर बढ़ गया है। -
भोपाल.मध्य प्रदेश के श्योपुर जिला स्थित कुनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में विदेश लाए गए चीतों को शुरुआती दिनों में रखने के लिए पांच वर्ग किलोमीटर के दायरे में बनाये गये बाड़े में घुसे चार तेंदुओं को भगाने के लिए दो हाथियों को तैनात किया जा रहा है। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी है। सतपुड़ा बाघ अभयारण्य के निदेशक एल कृष्णमूर्ति ने बताया कि दोनों हाथी अपने महावतों के साथ ट्रकों पर सवार होकर रविवार सुबह सतपुड़ा बाघ अभयारण्य से कुनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान की करीब 800 किलोमीटर लंबी यात्रा पर निकल पड़े हैं। वन अधिकारियों के अनुसार, ऐसे प्रशिक्षित हाथियों का उपयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है, जिसमें बेहोश करने के लिए जानवरों को घेरना और हमलावार जानवरों को भगाने सहित अन्य कार्य शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि कुनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में चीतों को लाकर शुरू में रखने के लिए पांच वर्ग किलोमीटर के दायरे में बनाये गये बाड़े में छह तेंदुए घुस गये थे, जिनमें से दो को पिंजड़े में पकड़कर वहां से बाहर निकाल लिया गया है, जबकि चार अन्य को बाहर निकालने का प्रयास कई दिनों से जारी है। दुनिया के सबसे तेज दौड़ने वाला स्तनधारी चीता 70 साल पहले भारत में विलुप्त हो गया था और इन चीतों को अब मध्य प्रदेश के श्योपुर जिला स्थित कुनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में बसाने की योजना है। गौरतलब है कि चीतों को दक्षिण अफ्रीका एवं नामीबिया से अगले महीने तक भारत लाये जाने की उम्मीद है। -
श्रीनगर.श्रीनगर में रविवार को एक कार्यक्रम में 1850 मीटर से अधिक लंबा एक तिरंगा प्रदर्शित किया गया, जो देश का सबसे लंबा राष्ट्रीय ध्वज है। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में करीब 5,000 लोग शामिल हुए।
जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि इतने विशाल तिरंगे ने केंद्र शासित प्रदेश के इतिहास में एक उत्कृष्ट अध्याय जोड़ दिया है। आधिकारिक प्रवक्ता ने उन्हें उद्धृत करते हुए कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के तहत हर घर तिरंगा अभियान के तहत यहां बख्शी स्टेडियम में यह तिरंगा प्रदर्शित किया गया। प्रवक्ता ने कहा कि श्रीनगर जिला प्रशासन ने देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर सबसे लंबा राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित कर एक राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया है। समारोह की अध्यक्षता मुख्य सचिव अरूण कुमार मेहता ने की।
इस अवसर पर, मुख्य सचिव ने 1850 मीटर लंबा तिरंगा प्रदर्शित के लिए इस तरह के एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन करने को लेकर जिला प्रशासन की कोशिशों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह नागरिकों में राष्ट्रवाद, बलिदान और बंधुत्व की भावना लाएगा। प्रवक्ता ने बताया कि इस झंडे को तैयार करने में 10 दिनों का वक्त लगा। -
नयी दिल्ली. नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार का मानना है कि राज्य सरकारों को अपनी राजकोषीय क्षमताओं से इतर ‘मुफ्त सौगात' नहीं देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षमता से बाहर जाकर उपहार या टिकाऊ उपभोक्ता सामान मुफ्त में देना कतई सही नहीं है। कुमार ने कहा कि पात्रता के आधार पर अंतरण भुगतान और सरकार की राजकोषीय क्षमता से इतर दी जाने वाली मुफ्त सौगातों में अंतर है। उन्होंने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘मुफ्त उपहार या टिकाऊ उपभोक्ता सामान को सौगात में देने की प्रकृति ऐसी है, जिसकी जरूरत नहीं है। किसी भी मामले में ऐसा काम उन सरकारों को नहीं करना चाहिए जो राजकोषीय गतिरोधों से जूझ रही हों।'' कुमार ने कहा कि कराधान और वितरण के जरिये सरकार से भुगतान का अंतरण एक लोकतंत्र में हमेशा जरूरी होता है। उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी अंतरण भुगतान जिसके प्रतिफल की सामाजिक दर निजी दर के प्रतिफल से अधिक है यानी जिसमें सकारात्मक प्रभाव हैं, उन्हें करना वाजिब है।'' कुछ राजनेताओं द्वारा भारत की मौजूदा आर्थिक स्थिति की तुलना श्रीलंका से किए जाने के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा, ‘‘ऐसी कोई भी तुलना कई स्तरों पर अनुचित और शरारती है।'' श्रीलंका गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और भारत उसे आर्थिक सहायता दे रहा है। उन्होंने कहा कि नॉर्डिक देशों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में कर का अनुपात लगभग 50 प्रतिशत है क्योंकि वे आम लोगों को सार्वजनिक सेवाएं एवं सामान मुहैया कराने में बहुत सारा पैसा खर्च करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह ऐसी बात नहीं है जिसपर हमें चर्चा या बहस करनी चाहिए।'' उन्होंने कहा, ‘‘आम आदमी, खासकर निचले तबके के लोगों के लिए सार्वजनिक वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को बढ़ाना काफी अहम है।'' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में सरकारों की तरफ से लोगों को मुफ्त उपहार देने की प्रवृत्ति को ‘रेवड़ी बांटना' बताते हुए इसकी आलोचना की है। उन्होंने इसे करदाताओं के पैसे की बर्बादी के साथ ही एक आर्थिक आपदा भी बताया है जो भारत के आत्मनिर्भर बनने के सफर पर असर डाल सकता है। जब उनसे तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के नीति आयोग के बारे में आए हालिया बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि राव अपनी राय रखने के लिए स्वतंत्र हैं। राव ने नीति आयोग को एक अनुपयोगी संस्था बताते हुए इसके संचालन परिषद की बैठक का पिछले हफ्ते बहिष्कार किया था। इस पर कुमार ने कहा, ‘‘सच तो यह है कि संचालन परिषद की बैठक में लगभग सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। यह दिखाता है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री की राय से अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री इत्तेफाक नहीं रखते हैं।'' भारत की मौजूदा वृहद-आर्थिक स्थिति पर उन्होंने कहा कि किसी भी समय पूरे देश में मंदी आने का कोई डर नहीं है। उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से मंदी तब होती है जब कोई देश लगातार दो तिमाहियों में नकारात्मक वृद्धि का गवाह बनता है। कुमार ने कहा, ‘‘भारत के मामले में मैं ऐसा होते हुए नहीं देख रहा हूं। लिहाजा मेरे मन में यह पूरी तरह साफ है कि भारत किसी भी मंदी के दबाव का सामना नहीं करेगा। -
इंदौर। मध्य प्रदेश के झाबुआ मूल का कड़कनाथ मुर्गा डेढ़ दशक पहले विलुप्ति की ओर बढ़ रहा था, लेकिन नस्ल बचाने के वैज्ञानिक प्रयासों और जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स (जीआई) का अहम तमगा मिलने के बाद इसके दिन बदल गए हैं। काले रंग के पौष्टिक मांस के लिए मशहूर यह कुक्कुट प्रजाति इस आदिवासी बहुल जिले से निकलकर देश के अधिकांश हिस्सों में फैल चुकी है। झाबुआ के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के प्रमुख डॉ. आईएस तोमर ने कहा,‘‘इन दिनों देश के लगभग हर राज्य के कुक्कुट पालन केंद्रों के संचालक कड़कनाथ मुर्गे की शुद्ध नस्ल के चूजों के लिए झाबुआ की अलग-अलग हैचरी (मशीन से अंडे सेकर इनसे चूजे निकालने का उपक्रम) का रुख कर रहे हैं।" उन्होंने बताया कि मांग में इजाफे के चलते झाबुआ में सरकारी, निजी और सहकारी स्तर पर कड़कनाथ के चूजों की कुल पैदावार बढ़कर 2.5 लाख के वार्षिक स्तर पर पहुंच चुकी है। तोमर ने बताया कि केवीके ने सरकार की एक परियोजना के तहत वर्ष 2009-10 में अध्ययन किया, तो पता चला कि मुर्गी पालन के सही तरीकों के प्रति आदिवासियों में जागरूकता के अभाव के कारण तब कड़कनाथ के चूजों की मृत्यु दर काफी अधिक थी। उन्होंने कहा कि अध्ययन से यह भी मालूम पड़ा कि आदिवासी क्षेत्रों में कड़कनाथ और दूसरी प्रजातियों के मुर्गे-मुर्गियों को साथ रखा जा रहा था जिससे इसकी संकर नस्लें पैदा हो रही थीं और कड़कनाथ के वजूद पर खतरा मंडरा रहा था। तोमर ने बताया कि इन तथ्यों के प्रकाश में आने पर केवीके ने झाबुआ में अपनी हैचरी शुरू की और कड़कनाथ की मूल नस्ल को बचाने तथा इसे बढ़ावा देने का बीड़ा उठाया। उन्होंने कहा कि स्थानीय आदिवासियों को इस मुर्गा प्रजाति को पालने के उचित तौर-तरीकों को लेकर प्रशिक्षित भी किया गया जिनमें इनका टीकाकरण और सही खुराक शामिल है। तोमर के मुताबिक, दूसरी मुर्गा प्रजातियों के चिकन के मुकाबले कड़कनाथ के काले रंग के मांस में चर्बी और कोलेस्ट्रॉल काफी कम होता है, जबकि इसमें प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत कहीं ज्यादा होती है। कुक्कुट उद्योग के जानकारों के मुताबिक, इन गुणों के चलते देश भर में बढ़ती मांग ने झाबुआ में ‘‘कड़कनाथ अर्थव्यवस्था" विकसित कर दी है और आदिवासी बहुल जिले में इसके चूजों, अंडों और मुर्गों से संबंधित कुल वार्षिक कारोबार चार करोड़ रुपये के आस-पास पहुंच चुका है। झाबुआ में कड़कनाथ के उत्पादन से जुड़ी एक सहकारी संस्था के प्रमुख विनोद मेड़ा ने कहा,‘‘हम देश भर के राज्यों के लोगों के साथ हर साल 20 से 25 लाख रुपये का कारोबार कर लेते हैं। इन दिनों करीब 1.5 किलोग्राम वजन का एक कड़कनाथ मुर्गा 1,000 से 1,200 रुपये के बीच बिक रहा है, जबकि पांच साल पहले यह मुर्गा 500 से 800 रुपये के बीच बिकता था।'' गौरतलब है कि घरेलू बाजार में झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गे की प्रामाणिकता को तब बल मिला, जब देश की जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री ने वर्ष 2018 में "मांस उत्पाद तथा पोल्ट्री एवं पोल्ट्री मांस" की श्रेणी में कड़कनाथ चिकन के नाम भौगोलिक पहचान (जीआई) का चिह्न पंजीकृत किया था। झाबुआ मूल के कड़कनाथ मुर्गे को स्थानीय जुबान में "कालामासी" कहा जाता है। इसकी त्वचा और पंखों से लेकर मांस तक का रंग काला होता है। कड़कनाथ प्रजाति के जीवित पक्षी, इसके अंडे और इसका मांस दूसरी कुक्कुट प्रजातियों के मुकाबले महंगी दरों पर बिकता है।
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नयी दिल्ली. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और राज्य बलों के कुल 1,082 पुलिसकर्मियों को वीरता समेत सेवा पदक की विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। एक आधिकारिक बयान में रविवार को कहा कि 347 पुलिस पदक वीरता के लिए, विशिष्ट सेवा के लिए 87 राष्ट्रपति पुलिस पदक और सराहनीय सेवा के लिए 648 पुलिस पदक प्रदान किए गए। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि वीरता के लिए 347 पदक में से 204 कर्मियों को जम्मू कश्मीर में वीरतापूर्ण कार्य करने के लिए, 80 पुलिसकर्मियों को वामपंथी चरमपंथ या नक्सल हिंसा प्रभावित स्थानों में वीरता का प्रदर्शन करने के लिए तथा 14 पुलिसकर्मियों को पूर्वोत्तर क्षेत्र में बहादुरी का परिचय देने के लिए सम्मानित किया गया। इस बार सबसे ज्यादा 109 वीरता पदक केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को मिले। इसके बाद जम्मू कश्मीर पुलिस को 108, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को 19 तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) तथा सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) को छह-छह पदक मिले। राज्य के पुलिस बलों में से 42 वीरता पदक महाराष्ट्र को दिए गए।
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भावनगर. गुजरात में भावनगर जिले में एक कार और एक डंपर के बीच हुई भिड़ंत में कार सवार एक परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि हादसा शनिवार रात करीब 11 बजे जिले के वल्लभीपुर शहर के पास राजमार्ग पर हुआ। उन्होंने कहा कि कार सवार लोग सूरत से अमरेली जिले के झाड़किया गांव जा रहे थे कि तभी रास्ते में उनकी कार डंपर से टकरा गई। अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना में एक दंपति और उनके 15 साल के बेटे की मौत हो गई तथा उनके 18 वर्षीय भतीजे को भावनगर के एक अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया।
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नयी दिल्ली. अंग्रेजी हुकूमत ने करीब 200 साल पहले कोयले की ढुलाई के लिए भारत में रेल लाइन बिछाने पर काम शुरू किया था और खनिजों एवं कोयले की ढुलाई के लिए यात्री गाड़ियों को भी रोक दिया जाता था। कोयला खनन के इतिहास को बयां करती एक पुस्तक में यह बात कही गई है। राजकमल प्रकाशन समूह के उपक्रम सार्थक बुक्स द्वारा प्रकाशित वरिष्ठ पत्रकार सुदीप ठाकुर की नयी किताब ‘दस साल : जिनसे देश की सियासत बदल गई' के अनुसार, अंग्रेजी हुकूमत को रेलवे की अहमियत पता थी जिसके जरिये वह हिन्दुस्तान के कोने-कोने से कीमती खनिज और कच्चा माल इंग्लैंड भेज रही थी और कोयला उसके लिए काला सोना साबित हो रहा था। पुस्तक में कहा गया है कि मालगाड़ियों की वजह से कई बार यात्री गाड़ियों को भी रोक दिया जाता था।
इसमें कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के लिए शोध करने वाले दिलीप सिमियन के हवाले से कहा गया है कि बिहार के धनबाद-झरिया के कोयला क्षेत्र में 1895 में रेल लाइन के बिछने के बाद से कोयला उत्पादन में बेतहाशा वृद्धि होने लगी। कोयले और रेलवे के संबंधों का जिक्र करते हुए पुस्तक में कहा गया है कि हकीकत यह है कि अंग्रेजों ने करीब 200 साल पहले भारत से कोयले की ढुलाई के लिए ही रेल लाइन बिछाने पर काम शुरू किया था। पुस्तक के अनुसार, ‘‘दरअसल 19वीं सदी के पूर्वार्ध में नील, चाय, अफीम और कपास के निर्यात के साथ ही बंगाल के रानीगंज क्षेत्र में कोयले का खनन शुरू हो चुका था। स्काटिश इतिहासकार और आईसीएस अधिकारी विलियम विल्सन हंटर का आकलन था कि दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह कोयले का उत्पादन और रेलवे का विस्तार साथ-साथ हुआ।'' इसमें कहा गया है कि भारत में कोयले की खदानों की कहानी 250 साल पहले 1774 में ईस्ट इंडिया कंपनी के समय से शुरू होती है जब दामोदर नदी के पश्चिमी तट पर स्थित रानीगंज में कोयला भंडार खोजा गया था। किताब के अनुसार, पहली पंचवर्षीय योजना के मसौदे के मुताबिक, देश में करीब 6,500 करोड़ टन कोयले का भंडार था और इसका अधिकांश हिस्सा पश्चिम बंगाल और बिहार में जमीन के 2000 फुट नीचे था। तब देश के औद्योगीकरण के लिए इस कोयला भंडार को पर्याप्त माना गया था। पुस्तक में खास तौर पर धनबाद के झरिया क्षेत्र और पश्चिम बंगाल के रानीगंज कोयला क्षेत्र का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि इंदिरा गांधी के कार्यकाल में कोयला क्षेत्र के राष्ट्रीयकरण के बाद कोयला उत्पादन में वृद्धि तो हुई लेकिन खास तौर से धनबाद, झरिया क्षेत्र में कोयला को लेकर गैंगवार तेज हो गई। किताब के अनुसार, श्रमिकों की सुरक्षा का मुद्दा तो पहले से था और 27 दिसंबर 1975 को चासनाला की कोयला खदान में हुए हादसे की खबर से पूरा देश स्तब्ध रह गया था जब खदान से पानी निकालने के लिए पोलैंड और सोवियत संघ शक्तिपंप मंगवाए गए थे। कोई ठीक से समझ नहीं पा रहा था कि आखिर खदान के भीतर क्या हुआ। पुस्तक में कोयला खदान हादसों की पड़ताल करते हुए कहा गया है कि कोयला खदानों में अतीत में कई हादसे हुए जिनमें अनेक श्रमिकों की जान चली गई लेकिन चासनाला की दुर्घटना सबसे भयावह थी जिसमें 375 लोगों के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि हुई थी। इसमें कहा गया है कि झरिया, धनबाद कोयला क्षेत्र में श्रमिकों के शोषण के साथ लूट का सिलसिला साठ के दशक से शुरू हो गया था लेकिन 1970 का दशक आते-आते यह लूट कोयला खदान की समानांतर व्यवस्था में बदल गई थी। किताब के अनुसार, देश में 250 साल पहले शुरू हुई कोयले की अंतर्कथा जारी है। भाप वाले इंजनों की विदाई के बाद यह जरूर हुआ है कि रेलवे की कोयले पर सीधी निर्भरता खत्म हो गई है लेकिन सरकारी और निजी क्षेत्रों द्वारा कोयले का दोहन जारी रहने वाला है क्योंकि देश को बिजली, इस्पात और सीमेंट संयंत्रों के लिए इसकी जरूरत है।
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नयी दिल्ली. नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रविवार को राकेश झुनझुनवाला के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें एक दशक से अधिक समय के बाद भारत को नयी उड़ान कंपनी ‘अकासा एयर' देने के लिए याद किया जाएगा। भारत के ‘वारेन बफे' कहे जाने वाले शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक झुनझुनवाला का रविवार सुबह मुंबई में निधन हो गया। झुनझुनवाला का ‘नेटवर्थ' 5.8 अरब डॉलर (46,000 करोड़ रुपये) है। अकासा एयर में उनकी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सिंधिया ने सात अगस्त को मुंबई से अहमदाबाद के बीच अकासा एयर की पहली उड़ान को हरी झंडी दिखाई थी। अकासा एयर को सात जुलाई को नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की ओर से उड़ान संचालन प्रमाण पत्र मिला था। सिंधिया ने रविवार को कहा, ‘‘श्री राकेश झुनझुनवाला जी न केवल एक कुशल व्यवसायी थे, बल्कि भारत के विकास में भी निवेश करते थे। उन्हें एक दशक से अधिक समय के बाद भारत को नयी उड़ान कंपनी अकासा एयर देने के लिए याद किया जाएगा। मैं उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति संवेदनाएं प्रकट करता हूं।'' झुनझुनवाला सात अगस्त को अकासा एयर की पहली उड़ान को हरी झंडी दिखाने के दौरान मुंबई हवाई अड्डे पर मौजूद थे। झुझुनवाला ने तब अपने संबोधन में कहा था, ‘‘मुझे आपको (सिंधिया) धन्यवाद देना चाहिए क्योंकि लोग कहते हैं कि भारत में बहुत खराब नौकरशाही है लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हमें जो सहयोग दिया है, वह अविश्वसनीय है।'' उन्होंने कहा था कि दुनिया में कहीं भी किसी भी एयरलाइन की कल्पना किए जाने के बाद उसे 12 महीनों में मूर्त रूप नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘आम तौर पर एक बच्चा नौ महीने में पैदा होता है, हमें 12 महीने लगे। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सहयोग के बिना यह संभव नहीं होता।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को 76वें स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे की धारियों वाला सफेद रंग का साफा पहना। पारंपरिक कुर्ता और चूड़ीदार पायजामे के ऊपर नीले रंग का जैकेट तथा काले रंग के जूते पहने, प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराया और लगातार नौवीं बार देश को संबोधित किया। इसी के साथ ही मोदी ने स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोहों में आकर्षक, चटकीले और रंग-बिरंगे साफे पहनने का सिलसिला जारी रखा। प्रधानमंत्री का साफा पीछे की ओर लंबा था तथा उस पर भी तिरंगे की धारियां बनी हुई थी।पिछली बार प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर धारीदार केसरिया साफा पहना था।74वें स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने केसरिया और क्रीम रंग का साफा पहना था। प्रधानमंत्री ने इसके साथ आधी बाजू वाला कुर्ता और चूड़ीदार पायजामा पहना था। उन्होंने केसरिया किनारी वाला सफेद गमछा भी डाल रखा था, जिसे उन्होंने कोविड-19 से बचाव के उपायों के तहत इस्तेमाल किया।वर्ष 2019 में लगातार दूसरी बार सत्ता में आने के बाद लाल किले से अपने पहले संबोधन में प्रधानमंत्री ने कई रंगों से बना साफा पहना था। यह लाल किले से उनका लगातार छठा संबोधन था।पहली बार देश की कमान संभालने के बाद जब ऐतिहासिक लाल किले से प्रधानमंत्री ने पहली बार देश को 2014 में संबोधित किया था तब उन्होंने गहरे लाल और हरे रंग का जोधपुरी बंधेज साफा पहना था।प्रधानमंत्री मोदी ने 2015 में पीले रंग का साफा पहना था, जिस पर बहुरंगी धारियां थीं, जबकि 2016 में उन्होंने गुलाबी और पीले रंग का लहरिया ‘टाई एंड डाई’ साफा चुना था।उन्होंने 2017 में सुनहरी धारियों वाला चटकीले लाल रंग का साफा पहना था।उन्होंने 2018 में केसरिया साफा पहना था। गणतंत्र दिवस समारोहों में भी कच्छ के लाल बांधनी साफे से लेकर पीले राजस्थानी साफे तक, प्रधानमंत्री मोदी के साफे लोगों का ध्यान आकर्षित करते रहे हैं।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 76वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सोमवार को राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित की।अपने सरकारी आवास से निकलने के बाद वह सीधे राजघाट पहुंचे और बापू की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इससे पहले, उन्होंने ट्वीट कर देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर आजादी के आंदोलन और स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, वीर सावरकर और कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों एवं महापुरुषों को याद किया तथा उन्हें नमन किया।मोदी ने सोमवार को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम दिए संबोधन में कहा, ‘‘आजादी की जंग में गुलामी का पूरा कालखंड संघर्ष में बीता। हिंदुस्तान का कोई कोना और कोई काल ऐसा नहीं था, जब देशवासियों ने सैकड़ों साल तक जंग न लड़ी हो, यातानाएं न झेली हों। आज हम सब देशवासियों के लिए ऐसे हर महापुरुष को नमन करने का अवसर है।’’उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी देशवासी पूज्य बापू जी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर को स्मरण करते हैं और उन्हें नमन करते हैं... यह देश मंगल पांडे, भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव, अशफाक उल्ला खान, राम प्रसाद बिस्मिल का कृतज्ञ है।’’प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हम आजादी की लड़ाई लड़ने वाले और आजादी के बाद देश बनाने वाले राजेंद्र प्रसाद जी, नेहरू जी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीन दलाय उपाध्याय, जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया का स्मरण करते हैं।’’उन्होंने बिरसा मुंडा और कई आदिवासी नायकों के साथ-साथ रानी लक्ष्मी बाई और बेगम हजरत महल समेत कई महिला स्वतंत्रता सेनानियों को भी नमन किया।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत की तरक्की के लिए महिलाओं का सम्मान एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और उन्होंने ‘नारी शक्ति’ का समर्थन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।देश के 76वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि बोलने में और आचरण में ‘‘हम ऐसा कुछ न करें जो महिलाओं का सम्मान कम करता हो।’’प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘हमारे आचरण में विकृति आ गयी है और हम कभी-कभी महिलाओं का अपमान करते हैं। क्या हम अपने व्यवहार और मूल्यों में इससे छुटकारा पाने का संकल्प ले सकते हैं।’’प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के 75 वर्ष की यात्रा अनेक उतार-चढाव भरी रही है, लेकिन दुख-सुख के बावजूद देशवासियों ने हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि सैंकडों वर्ष की गुलामी भी देशवासियों की जिद नहीं तोड सकी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद और छद्म युद्ध ने समय-समय पर चुनौती प्रस्तुत की। लेकिन इसके बावजूद देश आगे बढता रहा।श्री मोदी ने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है।
श्री मोदी ने कहा कि पीडित, वंचित, दिव्यांगजनों सहित अंतिम छोर तक बैठे लोगों के कल्याण पर ध्यान दिया जा रहा है।श्री मोदी ने कहा कि इस समय देश के हर वर्ग के मन में आकांक्षा है, जो आगे बढना चाहता है, प्रगति चाहता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में सामूहिक चेतना का पुनर्जागरण हुआ है। यह हमारी सबसे बडी अमानत है।श्री मोदी ने कहा कि आज पूरे विश्व का भारत की तरफ देखने का नजरिया बदल रहा है, जो हमारी 75 वर्ष की संकल्प यात्रा का परिणाम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीतिक स्थिरता और नीतियों में गतिशीलता के कारण ही भारत बदल रहा है।



























