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- ऑकलैंड । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक न्यूज़ीलैंड दौरे के स्वागत में शुक्रवार को ऑकलैंड की प्रतिष्ठित स्काई टावर भारतीय तिरंगे के रंगों से रोशन कर दी गई। करीब 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की आधिकारिक न्यूज़ीलैंड यात्रा के अवसर पर यह विशेष सम्मान दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के तीसरे और अंतिम चरण के तहत शुक्रवार शाम (स्थानीय समयानुसार) ऑकलैंड पहुंचे, जहां न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी की।विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तिरंगे की रोशनी से सजी स्काई टावर की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “ऑकलैंड में विशेष स्वागत! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूज़ीलैंड यात्रा के अवसर पर प्रतिष्ठित स्काई टावर को भारतीय तिरंगे के रंगों से रोशन किया गया, जो दोनों देशों की मित्रता का प्रतीक है।”ऑकलैंड पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। इस दौरान न्यूज़ीलैंड में भारत की उच्चायुक्त मुआनपुई सैयावी सहित दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री लक्सन ने भी ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री मोदी के आगमन का वीडियो साझा करते हुए उनका स्वागत किया।प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि चार दशकों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली न्यूज़ीलैंड यात्रा है। उन्होंने एयरपोर्ट पर स्वागत के लिए प्रधानमंत्री लक्सन का आभार जताते हुए कहा कि वह दोनों देशों की मित्रता के सभी पहलुओं पर व्यापक चर्चा करेंगे। साथ ही ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करने को लेकर भी उत्साह जताया।विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों को नई गति देगी। व्यापार, रक्षा, खेल, संस्कृति, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों पर चर्चा होगी। मंत्रालय ने कहा कि यह ऐतिहासिक दौरा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और आपसी सहयोग के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
- ऑकलैंड । न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने शनिवार को घोषणा की कि भारत और न्यूज़ीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) तक बढ़ाने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देगा और भविष्य में संबंधों को और गहरा करने के लिए व्यापक ढांचा प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री लक्सन ने ऑकलैंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान यह बात कही।प्रधानमंत्री लक्सन ने कहा कि 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला न्यूज़ीलैंड दौरा दोनों देशों के संबंधों में ऐतिहासिक पड़ाव है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया था और अब उन्हें न्यूज़ीलैंड में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत कर खुशी हो रही है।पीएम क्रिस्टोफर ने कहा कि दोनों देशों ने कम समय में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब सहयोग केवल एफटीए तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि रणनीतिक साझेदारी के जरिए दोनों देश रक्षा, व्यापार, निवेश और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को और व्यापक बनाएंगे। प्रधानमंत्री लक्सन ने कहा कि रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के रिश्तों को अधिक गहराई और स्पष्ट दिशा देगी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दो अलग-अलग छोर पर होने के बावजूद भौगोलिक दूरी भारत और न्यूज़ीलैंड के आर्थिक सहयोग में बाधा नहीं बनेगी। उन्होंने कहा कि एफटीए के लागू होने के पहले दिन से ही न्यूज़ीलैंड के भारत को होने वाले निर्यात पर 57% टैरिफ समाप्त हो जाएगा, जिससे दोनों देशों के व्यापार को नई गति मिलेगी।ऑकलैंड में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की मौजूदगी में विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में शुक्रवार को न्यूज़ीलैंड पहुंचे थे।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ऑकलैंड में आयोजित भारत-न्यूज़ीलैंड बिजनेस इवेंट को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को आर्थिक सहयोग के नए युग की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि भारत और न्यूज़ीलैंड 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेंगे और निवेश, प्रौद्योगिकी, सेवाओं तथा प्रतिभा आदान-प्रदान के नए अवसरों का लाभ उठाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और न्यूज़ीलैंड के संबंध एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। उन्होंने कहा कि रणनीतिक साझेदारी केवल एक कूटनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि साझा भविष्य का नया संकल्प है। उन्होंने प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के नेतृत्व में रिकॉर्ड नौ महीनों में एफटीए को अंतिम रूप दिए जाने की सराहना की।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि न्यूज़ीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि यह केवल निवेश नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा में सहभागी बनने का भरोसा है। उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बताते हुए कहा कि बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल परिवर्तन और मजबूत बुनियादी ढांचा भारत को वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बना रहे हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत 14 क्षेत्रों में लगभग 20 अरब डॉलर का समर्थन दिया जा रहा है। उन्होंने न्यूज़ीलैंड की कंपनियों को इस मैन्युफैक्चरिंग अभियान का हिस्सा बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने एविएशन, एयर कार्गो, पर्यटन, हॉर्टिकल्चर, डेयरी साइंस, फॉरेस्ट्री, एग्री-टेक, फिनटेक, ग्रीन फाइनेंस, स्मार्ट सिटी और स्पेस सेक्टर में भी साझेदारी बढ़ाने की अपील की।पीएम मोदी ने कहा कि भारत में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप काम कर रहे हैं और एक यूनिकॉर्न भी बन चुका है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की कंपनियां स्मॉल सैटेलाइट, रिमोट सेंसिंग और ओशन मॉनिटरिंग जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की 50% रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट भारत में होती हैं और दोनों देश डिजिटल भुगतान, ग्रीन बॉन्ड तथा ब्लेंडेड फाइनेंस में सहयोग बढ़ा सकते हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने माओरी बिजनेस लीडर्स का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और माओरी परंपराओं में प्रकृति, समुदाय और सतत विकास के प्रति समान सम्मान है। उन्होंने दोनों देशों के बीच पांच प्रमुख फ्लैगशिप परियोजनाओं की पहचान कर समयबद्ध बिजनेस रोडमैप तैयार करने का सुझाव दिया। साथ ही 35 वर्ष से कम आयु के युवा उद्यमियों के द्विपक्षीय प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान का प्रस्ताव भी रखा, ताकि नई पीढ़ी के बीच मजबूत कारोबारी संबंध विकसित किए जा सकें। - नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया का सफल दौरा पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्यूजीलैंड के लिए रवाना हो गए। यात्रा समाप्त होने पर पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज, उनकी सरकार और जनता की गर्मजोशी के लिए आभार व्यक्त किया।पीएम मोदी ने यह भी कहा कि इस यात्रा ने हमारी साझेदारी को और मजबूत किया है।“मेरी ऑस्ट्रेलिया यात्रा समाप्त हुई। मैं प्रधानमंत्री अल्बानीज, ऑस्ट्रेलिया की सरकार और लोगों को उनकी गर्मजोशी के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। इस यात्रा के परिणामों ने हमारी साझेदारी को और मजबूत किया है और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खोले हैं। आने वाले समय में इस गति से हमारे देश और पूरी दुनिया को लाभ होगा।”दौरे के दौरान पीएम मोदी और अल्बानीज ने मशहूर मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) का दौरा किया और वहां सेल्फी भी ली। पीएम मोदी ने MCG की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि खेल भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी का एक अहम हिस्सा है, जो दोनों देशों के लोगों को जुनून और आपसी सम्मान से करीब लाता है। उन्होंने युवा खिलाड़ियों के साथ मुलाकात की तस्वीरें भी पोस्ट कीं और कहा कि बच्चों को क्रिकेट, कबड्डी और ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल खेलते देखना बहुत खुशी का अनुभव था।खेल साझेदारी का नया रोडमैपविदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स कोलैबोरेशन रोडमैप लॉन्च किया।इस रोडमैप में शामिल प्रमुख बातें:– अधिक खेल आदान-प्रदान– युवाओं का जुड़ाव– खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट डेवलपमेंट में सहयोगप्रधानमंत्री मोदी ने उल्लेख किया कि 2030 में भारत कॉमनवेल्थ गेम्स और 2032 में ऑस्ट्रेलिया ओलंपिक की मेजबानी करने जा रहा है, जिससे अगले दशक में दोनों देशों के बीच खेल संबंध और मजबूत होंगे। यह यात्रा न केवल आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बल्कि लोगों के बीच सांस्कृतिक और खेल संबंधों को नई ऊंचाई देने वाली साबित हुई है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान शुक्रवार को वहां के विपक्ष के नेता एंगस टेलर से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) को और मजबूत बनाने तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
बैठक के दौरान भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए ऑस्ट्रेलिया में मौजूद मजबूत द्विदलीय (बाइपार्टिजन) समर्थन पर भी जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने रणनीतिक, आर्थिक और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार तथा दोनों देशों के लगातार मजबूत होते संबंधों पर विचार-विमर्श किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एंगस टेलर के बीच सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि यह बैठक भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने तथा भारत के साथ संबंधों को लेकर ऑस्ट्रेलिया में व्यापक राजनीतिक समर्थन को दर्शाती है।ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इसके अलावा उन्होंने गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन, विक्टोरिया की गवर्नर मार्गरेट गार्डनर, ऑस्ट्रेलिया-इंडिया सीईओ फोरम के प्रतिनिधियों, भारतीय समुदाय के सदस्यों और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन से भी मुलाकात की।प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) का भी दौरा करेंगे। इस दौरान दोनों नेता भारत-ऑस्ट्रेलिया खेल सहयोग रोडमैप का अनावरण करेंगे, जिसका उद्देश्य खेल क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देना है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि एमसीजी का दौरा खेल क्षेत्र में दोनों देशों के बढ़ते सहयोग का प्रतीक होगा। उन्होंने बताया कि भारत वर्ष 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा, जबकि ऑस्ट्रेलिया 2032 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। ऐसे में खेल दोनों देशों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभर रहा है। -
हिंद-प्रशांत पर नजर
मेलबर्न. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज ने शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने में द्विपक्षीय साझेदारी की अहम भूमिका को रेखांकित किया और उनकी इस मुलाकात के दौरान भारत एवं ऑस्ट्रेलिया ने असैन्य परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने संबंधी कई महत्वपूर्ण समझौतों को बृहस्पतिवार को अंतिम रूप दिया। मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई नेता के साथ व्यापक बातचीत की। मोदी तेजी से बदलते और विभाजित होते भू-राजनीतिक माहौल के बीच व्यापार एवं रक्षा संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीन देशों की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में इंडोनेशिया से ऑस्ट्रेलिया पहुंचे। मोदी एवं अल्बनीज की बैठक के बाद दोनों पक्षों ने सुरक्षा पर भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त घोषणा, ऊर्जा संबंधों पर संयुक्त बयान और साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग के लिए एक खाका जारी किया। असैन्य परमाणु ऊर्जा से जुड़े समझौते के जरिए ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की वाणिज्यिक आपूर्ति का रास्ता खुलेगा। इससे भारत की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को मदद मिलेगी। दोनों पक्षों ने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते के साथ-साथ द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौते पर भी तेजी से काम करने का निर्णय लिया। मोदी ने मीडिया में जारी अपने बयान में कहा, ''आज हमने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता खुलेगा और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में हमारे लक्ष्यों को नयी गति मिलेगी।'' उन्होंने कहा, ''महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में हमारा सहयोग हमारी रणनीतिक सुरक्षा एवं स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने संबंधी बदलाव के लिए अहम है। इसी को ध्यान में रखते हुए आज हमने साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ऑस्ट्रेलिया-भारत साझेदारी शुरू की है।'' मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष महत्वपूर्ण खनिज गलियारे पर भी मिलकर काम करेंगे।
प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग का भी उल्लेख किया और स्वतंत्र एवं स्थिर हिंद-प्रशांत के महत्व पर जोर दिया। रक्षा संबंधों को मजबूत करने की ये नयी पहल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन द्वारा अपनी सैन्य ताकत दिखाए जाने को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच की गई हैं। उन्होंने कहा, ''हिंद-प्रशांत क्षेत्र केवल दो महासागरों का संगम नहीं है। यह भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे समान सोच वाले लोकतंत्रों की साझा आकांक्षाओं का भी प्रतीक है।'' मोदी ने कहा, ''आज हमने सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण संयुक्त घोषणा जारी की है। भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा नवोन्मेष गलियारे के माध्यम से हम रक्षा स्टार्टअप और उद्योगों को जोड़ने के लिए काम करेंगे।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा सहयोग खाका, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा प्रयासों को नयी गति देगा। उन्होंने कहा, ''हम पोत निर्माण, पोतों की मरम्मत और रखरखाव के क्षेत्र में भी साथ-साथ आगे बढ़ेंगे।''
मोदी ने यह भी कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि आतंकवाद किसी एक देश के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा, ''इसलिए आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई साझा है, हमारा संकल्प अडिग है और हमारा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।'' मोदी ने कहा, ''हम यह भी मानते हैं कि दुनिया के कई हिस्सों में जारी तनाव और संघर्षों का समाधान केवल संवाद और कूटनीति से ही हो सकता है। हम मिलकर पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, नौवहन की स्वतंत्रता तथा नियम-आधारित व्यवस्था को और मजबूत करेंगे।'' अल्बनीज ने अपने संबोधन में कहा कि ऑस्ट्रेलिया के भारत के साथ संबंध आज जितने अहम हैं, उतने पहले कभी नहीं रहे। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा पर हुआ समझौता शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम के निर्यात को आसान बनाएगा। उन्होंने कहा, ''यह व्यवस्था ऑस्ट्रेलिया से भारत में यूरेनियम का निर्यात सुगम बनाएगी जिससे गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी और ऑस्ट्रेलिया के संसाधन क्षेत्र को एक अतिरिक्त बाजार मिलेगा।'' अल्बनीज ने कहा कि दोनों पक्ष संबंधों में विविधता लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि ये संबंध लगातार और मजबूत होते रहें। उन्होंने कहा, ''हमारी रणनीतिक साझेदारी के छह वर्ष पूरे होने पर ऑस्ट्रेलिया के भारत के साथ संबंध आज जितने महत्वपूर्ण हैं, उतने पहले कभी नहीं रहे। हमारी साझेदारी पहले कभी इतनी मजबूत नहीं रही।'' उन्होंने कहा, ''हमारा ध्यान अपने देशों के संबंधों को और गहरा तथा विविधतापूर्ण बनाने पर है ताकि हम लगातार और मजबूत होते रहें।'' अल्बनीज ने कहा, ''आज हमने अपने संबंधों के पूरे दायरे में इसी दिशा में कदम बढ़ाया है। नए ऐतिहासिक समझौतों के माध्यम से हम सुरक्षा, शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में अपने संबंधों का विस्तार कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा ''व्यावहारिक साझेदारी'' को और गहरा करने का रास्ता तैयार करेगी। अल्बनीज ने कहा, ''ऑस्ट्रेलिया भारत को शीर्ष स्तरीय सुरक्षा साझेदार मानता है और यह घोषणा शांतिपूर्ण, स्थिर एवं समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।'' उन्होंने कहा, ''हम रणनीतिक समन्वय को बढ़ाएंगे, अपने रक्षा अभ्यासों को और जटिल बनाएंगे तथा अपनी रक्षा सेनाओं के बीच आपसी संचालन क्षमता को और मजबूत करेंगे। -
नई दिल्ली। ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट सिटी के तटीय इलाकों में गुरुवार दोपहर कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरान की समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक, ये आवाजें स्थानीय समय के अनुसार करीब दोपहर 2 बजे (भारतीय समयानुसार शाम 4 बजे) शहर के दक्षिणी तट के आसपास सुनी गईं। माना जा रहा है कि ये धमाके खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट के कुछ हिस्सों में हुई गोलीबारी या सैन्य कार्रवाई के कारण हुए।
इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि गुरुवार सुबह अमेरिका के हमले में खुजेस्तान प्रांत के उसके तीन सैनिक मारे गए।वहीं, बहरीन और कुवैत ने बताया कि उनके हवाई रक्षा तंत्र ने ईरान की ओर से किए गए हवाई हमलों को रोक दिया और उन्हें नष्ट कर दिया। बहरीन डिफेंस फोर्स (बीडीएफ) ने एक बयान में कहा कि ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन हमलों के जरिए आम नागरिकों को निशाना बनाना जारी रखा है। उसने इसे देश के खिलाफ एक ‘लगातार शत्रुतापूर्ण रवैया’ बताया।बीडीएफ ने कहा कि उसकी सभी सैन्य इकाइयां देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे हमलों के बाद मिले किसी भी अनजान या संदिग्ध सामान के पास न जाएं और उसे हाथ न लगाएं।बहरीन ने कहा कि आम लोगों और निजी संपत्ति को निशाना बनाने के लिए मिसाइल और ड्रोन का जानबूझकर इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है।उधर, कुवैत की सशस्त्र सेनाओं के जनरल स्टाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि सेना ने तड़के तीन बैलिस्टिक मिसाइल, एक क्रूज मिसाइल और दस ड्रोन को रोक दिया। हालांकि, इनके मलबे से कई जगहों पर नुकसान हुआ और एक व्यक्ति घायल हुआ, जिसकी हालत स्थिर बताई गई है।गुरुवार सुबह पूरे कुवैत में हवाई हमले के सायरन बजाए गए। हमलों के दौरान गिरे मलबे को हटाने के लिए विस्फोटक निष्क्रिय करने वाली टीमें तैनात की गईं। इसके अलावा, कुवैत के विदेश मंत्रालय ने ईरानी हमलों की निंदा करते हुए उन्हें कुवैत की संप्रभुता का ‘खुला उल्लंघन’, उसकी सुरक्षा और स्थिरता के लिए ‘सीधा खतरा’ और अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का गंभीर उल्लंघन बताया।इससे पहले अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने कहा था कि उसकी सेनाओं ने ईरान की होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों पर हमला करने की क्षमता को कम करने के लिए एक और दौर के हमले पूरे किए हैं। यह लगातार दूसरे दिन की गई ऐसी कार्रवाई थी।अमेरिकी सेना ने बताया कि उसने ईरान के तट के पास करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें हवाई रक्षा प्रणाली, तटीय निगरानी उपकरण, मिसाइल और ड्रोन रखने के स्थान, नौसैनिक क्षमताएं और सैन्य सामान पहुंचाने से जुड़ी सुविधाएं शामिल थीं। ईरान के आईआरजीसी और सेना ने दावा किया कि उन्होंने बहरीन, कुवैत और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सुविधाओं पर हमला किया। दरअसल, ये नए संघर्ष ऐसे समय में हुए हैं, जब ईरान और अमेरिका हाल ही में हुए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के आधार पर 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए बातचीत कर रहे थे। -
जकार्ता. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत ''सुधार, प्रदर्शन और बदलाव'' के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसकी आत्मनिर्भरता न केवल इंडोनेशिया के लिए, बल्कि पूरे आसियान क्षेत्र के प्रभाव को कई गुना बढ़ाने वाली ताकत है। जकार्ता में प्रवासी भारतीयों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को भारत का ''सच्चा मित्र'' बताया। कार्यक्रम में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और उनके शीर्ष मंत्री भी मौजूद थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''भारत ने एक के बाद एक कई सुधार किए हैं। हमने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है और इसी वजह से आज देश बदलाव के दौर से गुजर रहा है। हम सुधार, प्रदर्शन और बदलाव के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहे हैं।'' मोदी ने कहा कि अगर भारत के विकास की गति और पैमाने को एक पंक्ति में व्यक्त करना हो तो वह कहेंगे, ''1.4 अरब आकांक्षाएं गति में हैं।'' उन्होंने कहा, ''भारत केवल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा राष्ट्र है जहां एक अरब से अधिक सपने आगे बढ़ रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''ऊर्जा से लेकर कनेक्टिविटी और चिप निर्माण तक, भारत को रोका नहीं जा सकता। आज का भारत केवल अपने सपनों को पूरा नहीं कर रहा, बल्कि हर मित्र देश के सपनों को पूरा करने में भी योगदान दे रहा है। भारत 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र पर चलता है।'' उन्होंने कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता केवल इंडोनेशिया ही नहीं, बल्कि पूरे आसियान क्षेत्र के लिए विकास को बढ़ावा देने वाली ताकत है। मोदी ने कहा कि भारत अपने बंदरगाहों का आधुनिकीकरण कर रहा है, नये जहाजों का निर्माण कर रहा है और समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नये समुद्री मार्गों की तलाश कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में इंडोनेशिया भारत का एक पसंदीदा मित्र है। उन्होंने कहा, ''चाहे इंडोनेशिया हो या भारत, हमारा साझा लक्ष्य विकास है। हम न तो इंतजार कर सकते हैं और न ही रुक सकते हैं।'' मोदी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आज वैश्विक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा, ''जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी, तब भी भारत की अर्थव्यवस्था नहीं रुकी। जब पश्चिम एशिया में संकट पैदा हुआ, तब भी भारत की अर्थव्यवस्था थमी नहीं। हमने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और यही कारण है कि भारत तेजी से परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है।'' इस अवसर पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने कहा कि 2025 के भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनना उनके लिए सम्मान की बात थी। उन्होंने बताया कि यह अवसर उन्हें राष्ट्रपति पद संभालने के मात्र तीन महीने बाद मिला था। सुबियांतो ने कहा, ''भारत की अपनी राजकीय यात्रा से ठीक पहले मैंने जीनोम अनुक्रमण परीक्षण कराया था। जब मेरे डीएनए की जांच हुई तो पता चला कि उसमें भारतीय डीएनए भी है। शायद यही वजह है कि जब भी मैं कोई संगीत सुनता हूं, खासकर भारतीय संगीत, तो मेरे पैर अपने आप थिरकने लगते हैं।'' उन्होंने कहा कि वह सभी भारतीयों के दोस्त हैं, लेकिन वह प्रधानमंत्री मोदी के ''बहुत बड़े प्रशंसक'' हैं और उन्होंने उनकी कई नीतियों को अपनाया है। उन्होंने कहा, ''इंडोनेशिया के लोगों को भारत के अनुभवों से सीखना चाहिए। हमारी सभ्यता और संस्कृति पर भारतीय सभ्यता का गहरा प्रभाव है। हमारी भाषा का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा संस्कृत से आया है। हमारे कई नाम भी संस्कृत मूल के हैं। इसलिए हमारे बीच एक विशेष निकटता है और हम दोनों देशों के बीच और अधिक घनिष्ठ सहयोग का स्वागत करते हैं।'' इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के अंदर भारतीय डीएनए होने संबंधी उनकी टिप्पणी का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, ''आपके इस बयान ने भारतीयों के दिलों को छू लिया। यह डीएनए आपसी विश्वास, साझा विरासत और साझा स्मृतियों से बना है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध साझा सभ्यतागत विरासत और दोनों देशों को जोड़ने वाले समुद्रों पर आधारित हैं। तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में सोमवार को जकार्ता पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बुधवार को वह योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रम्बानन मंदिर जाएंगे। सदियों पुराने इस मंदिर को इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर माना जाता है। यह योग्याकार्ता शहर से करीब 17 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महानदी में केले के तने से बनी छोटी-छोटी नावों को प्रवाहित करने की परंपरा हो, 'वायंग कुलित' के माध्यम से महाभारत का मंचन हो या देवी श्री की पूजा, हर परंपरा भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों की जीवंत झलक प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में बॉलीवुड की प्रसिद्ध फिल्म 'कुछ कुछ होता है' का गीत बेहद लोकप्रिय है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''मैंने राष्ट्रपति प्रबोवो से कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो बहुत कुछ होता है...।'' उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया द्वारा उन्हें सर्वोच्च सम्मान से नवाजा जाना दोनों देशों के बीच गहरी मित्रता का एक और प्रतीक है। मोदी ने प्रवासी भारतीय समुदाय से अपील की कि वे अपने इंडोनेशियाई मित्रों को भारत के बारे में बताएं और उन्हें भारत यात्रा के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा, "अब सीधी उड़ानें उपलब्ध होने से भारत की यात्रा काफी आसान हो गई है। इंडोनेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय को वहां की युवा पीढ़ी को भी भारत के बारे में अधिक जानने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।" मोदी ने यह भी कहा कि इंडोनेशिया में फुटबॉल के प्रति लोगों का जबरदस्त जुनून है। उन्होंने कहा, ''जब-जब मैं इंडोनेशिया आया हूं, तब-तब यहां फीफा विश्व कप का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है।'' बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''मुझे खुशी है कि भारत और इंडोनेशिया आपसी विश्वास के आधार पर मिलकर एक नए भविष्य की रचना कर रहे हैं। इस साझेदारी का सबसे अधिक लाभ इंडोनेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय को मिलेगा।'' उन्होंने सामुदायिक कार्यक्रम में संबोधन के लिए राष्ट्रपति सुबियांतो का भी आभार जताते हुए कहा, ''उनका संबोधन भारत के प्रति अभूतपूर्व आत्मीयता और सराहना से परिपूर्ण था।'' इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल के पारंपरिक धुनुची नृत्य का भी आनंद लिया। -
जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को इंडोनेशिया की तीन दिन की यात्रा पूरी करके ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना हो गए। इस यात्रा के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों, समुद्री सुरक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 14 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। मोदी ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''इंडोनेशिया की अपनी यात्रा पूरी करते हुए, मैं हमारी साझेदारी के भविष्य को लेकर आए परिणामों से बहुत संतुष्ट हूं।
पोस्ट में कहा गया, ''मैं इंडोनेशिया के लोगों और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने बहुत गर्मजोशी दिखाई और भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रतिबद्धता दिखाई।" इसमें कहा गया, ''इस यात्रा ने रक्षा और सुरक्षा, समुद्री सहयोग, अहम और उभरती हुई तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल नवाचार और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खोले हैं।'' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 'एक्स' पर लिखा, ''तेरिमा कसिह (धन्यवाद) इंडोनेशिया! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडोनेशिया की अपनी राजकीय यात्रा पूरी की और तीन देशों की यात्रा के दूसरे चरण के लिए मेलबर्न रवाना हुए।'' पोस्ट में लिखा है, ''दोस्ती की एक विशेष भाव-भंगिमा दिखाते हुए राष्ट्रपति प्रबोवो ने हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री को विदा किया। इंडोनेशिया की इस यात्रा से सहयोग के अहम क्षेत्रों में महत्वपूर्ण नतीजे निकले, जिससे भारत-इंडोनेशिया की साझेदारी और भी मज़बूत हुई और भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी एजेंडा तय हुआ।'' इस यात्रा के दौरान, मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। राष्ट्रपति स्वयं उन्हें हवाई अड्डे पर विदा करने के लिए आए थे। दोनों नेताओं ने एक स्वतंत्र और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए गहरी द्विपक्षीय साझेदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। दोनों पक्षों ने कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए 14 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें महत्वपूर्ण खनिज और इस्पात की आपूर्ति शृंखलाएं, समुद्री सुरक्षा, दवाएं, शिक्षा, अंतरिक्ष, अनुसंधान और नवाचार, दूरसंचार तथा खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच संबंध और मजबूत होंगे। एक और अहम कदम के तौर पर, भारत और इंडोनेशिया रणनीतिक रूप से अहम सबांग पत्तन को संयुक्त रूप से विकसित करने पर सहमत हुए। यह पोर्ट मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित है और भारत की ग्रेट निकोबार बंदरगाह परियोजना से लगभग 100 मील दूर है। मोदी सोमवार को जकार्ता पहुंचे थे जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। यह उनके तीन देशों के दौरे का पहला चरण था। इसमें ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी शामिल हैं। मंगलवार को एक सामुदायिक समारोह में मोदी ने कहा कि भारत 'सुधार, प्रदर्शन और बदलाव' (रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म) के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की आत्मनिर्भरता न केवल इंडोनेशिया के लिए, बल्कि पूरे आसियान क्षेत्र के लिए एक बड़ी ताकत साबित होगी। जकार्ता में भारतीय समुदाय के एक कार्यक्रम में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो ने कहा कि उनमें भारतीय डीएनए है। उन्होंने अपने देश के लोगों से भारत के अनुभव से सीखने का आह्वान किया, क्योंकि भारत ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देश की सभ्यता और संस्कृति को काफी प्रभावित किया है। राष्ट्रपति प्रबोवो ने कहा कि पद संभालने के ठीक तीन महीने बाद 2025 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनना उनके लिए सम्मान की बात थी। बुधवार को रवाना होने से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता में विशाल प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा किया। इस दौरान यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के लिए एक संयुक्त संरक्षण परियोजना की शुरुआत की गई। मोदी ने प्रम्बानन मंदिर परिसर की विरासत को संरक्षित रखने के लिए इंडोनेशिया और वहां के लोगों का धन्यवाद किया। दोनों नेताओं ने इस ऐतिहासिक जगह का दौरा तब किया, जब भारत और इंडोनेशिया ने भारत की मदद से मंदिर परिसर के संरक्षण और जीर्णोद्धार की परियोजना शुरू करने के लिए 'आशय पत्र' का आदान-प्रदान किया था। इंडोनेशिया के बाद, मोदी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर 8 से 10 जुलाई तक मेलबर्न की यात्रा करेंगे। उन्होंने प्रस्थान के समय अपने बयान में कहा, ''मेरी यात्रा हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी, और प्रधानमंत्री अल्बनीज के साथ बातचीत में मैं रक्षा और सुरक्षा, व्यापार और निवेश, शिक्षा और आवाजाही तथा लोगों के बीच आपसी संबंधों के क्षेत्रों में हमारे रिश्तों को आगे बढ़ाऊंगा।'' मोदी ने कहा कि मेलबर्न में वह भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत करेंगे, जो इस रणनीतिक साझेदारी का एक अहम स्तंभ हैं। -
अंकारा. अमेरिका नीत सैन्य गठबंधन उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने मंगलवार को अरबों अमेरिकी डॉलर की हथियार खरीद योजना की घोषणा की। नाटो ने यह घोषणा ऐसे समय की जब मंगलवार दोपहर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संगठन के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए तुर्किये के अंकारा शहर पहुंचे। माना जा रहा है कि नाटो ने यह घोषणा अस्थिर स्वभाव वाले ट्रंप को खुश करने की कोशिश के तहत की है। अंकारा में अमेरिकी राष्ट्रपति के विमान 'एयर फोर्स वन' के उतरने से ठीक पहले नाटो ने अरबों डॉलर के कई सैन्य परियोजनाओं की घोषणा की। एक संगठन के तौर पर नाटो के पास अपना कोई हथियार नहीं है। ये हथियार इसके 32 सदस्य देशों की संपत्ति हैं। हालांकि नाटो के पास 14 अवाक्स पूर्व चेतावनी रडार निगरानी विमानों का बेड़ा है जो लगभग 50 साल पुराने हैं, और साथ ही कुछ नए निगरानी ड्रोन भी हैं। पुराने हो चुके विमानों को बदलने के लिए मंगलवार को एक समझौते की घोषणा की गई। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने घोषणा की कि स्वीडिश कंपनी साब 10 देशों के समूह को 10 नए ग्लोबलआई निगरानी विमान की आपूर्ति करेगी। कुछ परियोजनाओं का वित्तपोषण यूरोपीय संघ द्वारा स्थापित किफायती ऋण प्रणाली से किया जाएगा। इस प्रणाली के तहत पूंजी बाजार से 170 अरब अमेरिकी डॉलर तक की रकम जुटाई जाएगी। संगठन के महासचिव मार्क रुटे ने कहा, ''हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम अपनी आर्थिक ताकत को सैन्य क्षमताओं में बदलें और धन का इस्तेमाल रक्षा परियोजनाओं से लेकर ड्रोन, मिसाइल और इंटरसेप्टर आदि के लिए करें।''
- वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की अपने देशों के बीच जारी युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस ने कीव पर ताजा हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, ''राष्ट्रपति पुतिन इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं। मैं यह बात पूरे दृढ़ता से कह सकता हूं। हमारी अच्छी बातचीत हुई। राष्ट्रपति जेलेंस्की भी अब वास्तव में युद्ध समाप्त करना चाहते हैं। हम नाटो सम्मेलन में जा रहे हैं और वहां भी इस मुद्दे पर चर्चा होगी।'' ट्रंप न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और नैस्डैक में बच्चों के लिए 'ट्रंप अकाउंट्स' योजना की शुरुआत के अवसर पर ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सप्ताहांत में उन्होंने पुतिन और ज़ेलेंस्की से फोन पर अलग-अलग बातचीत कर यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के प्रयासों पर चर्चा की।रूस-यूक्रेन युद्ध का उल्लेख करते हुए ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान सहित आठ युद्धों को रुकवाया। उन्होंने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष से परमाणु युद्ध का खतरा भी था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ''मैंने आठ युद्ध खत्म कराए। मुझे लगा था कि यूक्रेन से जुड़ा मामला आसान होगा, क्योंकि मैं दोनों नेताओं को जानता हूं। मैंने भारत-पाकिस्तान के बीच भी तनाव कम कराया।'' उन्होंने कहा, ''वह स्थिति परमाणु युद्ध तक पहुंच सकती थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के अनुसार, इसमें चार से पांच करोड़ लोगों की जान जा सकती थी। 11 विमान गिराए जा चुके थे और चार दिनों तक संघर्ष जारी था, लेकिन मैंने उसे रुकवा दिया।'' ट्रंप का यह बयान पिछले वर्ष भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के संदर्भ में था।हालांकि, भारत किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावों को लगातार खारिज करता रहा है। नयी दिल्ली का कहना है कि मई 2025 में पाकिस्तान के साथ संघर्ष समाप्त करने पर सहमति दोनों देशों के सैन्य अभियान महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच हुई प्रत्यक्ष बातचीत के बाद बनी थी।
- कोलंबो. श्रीलंका के बदुल्ला जिले में भारत की सहायता से बनाए जाने वाले 10,000 आवासों की परियोजना के तहत सोमवार को आधारशिला रखी गई। भारतीय उच्चायोग ने यह जानकारी दी। भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, ''अठारह अरब रुपये से अधिक की अनुदान सहायता से भारतीय आवास परियोजना के चौथे चरण के तहत बदुल्ला के ''कैनावरेला प्लांटेशन एस्टेट'' में 57 नए आवासों की आधारशिला रखी गई है।''उच्चायोग ने बताया कि इस परियोजना के तहत श्रीलंका के छह प्रांतों में बागान क्षेत्रों के समुदायों के लिए 10,000 से अधिक आवास बनाए जाएंगे। विज्ञप्ति के अनुसार, भारतीय आवास परियोजना भारत सरकार की प्रमुख विकास परियोजनाओं में से एक है, जिसके तहत लगभग 60,000 आवासों का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना के पहले दो चरणों में उत्तरी और पूर्वी प्रांतों में 46,000 आवासों का निर्माण या जीर्णोद्धार किया गया, जबकि तीसरे चरण में बागान क्षेत्रों में 4,000 आवास बनाए गए। विज्ञप्ति में कहा गया कि श्रीलंका के तमिल समुदाय और बागान क्षेत्र भारत-श्रीलंका विकास सहयोग साझेदारी के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं।
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जकार्ता. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तीन देशों की अपनी यात्रा के पहले चरण में सोमवार को इंडोनेशिया पहुँचे। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी', 'महासागर विजन' तथा एक स्वतंत्र, खुले एवं समावेशी हिंद-प्रशांत के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत करना है। विशेष सद्भावना के तहत हवाई अड्डे पर मोदी का स्वागत इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने किया। इसके अलावा, प्रधानमंत्री की अगवानी करने के लिए चार मंत्री भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी का इस दौरान पारंपरिक ढंग से स्वागत किया गया और उन्होंने सलामी गारद का निरीक्षण किया। मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''जकार्ता पहुँच गया हूँ। हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा मेरा स्वागत किए जाने की सद्भावना से मैं बहुत प्रभावित हूँ।'' वर्ष 2018 में संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक ले जाए जाने के बाद से इंडोनेशिया की यह मोदी की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। मोदी ने कहा, ''2018 में इंडोनेशिया की मेरी पहली यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया, जिससे हमारे लोगों को लाभ हुआ है।'' उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ बातचीत करेंगे, जिसका उद्देश्य ''अलग-अलग क्षेत्रों में इस साझेदारी को और गति देना'' है। मोदी ने कहा, ''राष्ट्रपति प्रबोवो और मैं योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा करेंगे। इससे हमारे देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे। इंडोनेशिया में रहने के दौरान, मैं भारतीय समुदाय के लोगों से मिलने के लिए भी उत्सुक हूँ।'' योग्याकार्ता शहर से लगभग 17 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित यह सदियों पुराना मंदिर इंडोनेशिया का सबसे विशाल हिंदू मंदिर माना जाता है। दिल्ली से रवाना होने से पहले, मोदी ने कहा कि इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की उनकी यात्रा भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी', 'महासागर विजन' और साथ ही ''मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत के प्रति हमारे नजरिए'' को और मजबूत करेगी। महासागर, यानी 'सभी क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए पारस्परिक एवं समग्र विकास', सभी क्षेत्रों की सुरक्षा और विकास के लिए भारत का विजन है। मोदी की यह यात्रा जनवरी 2025 में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रपति प्रबोवो की भारत की राजकीय यात्रा के बाद हो रही है। उन्होंने कहा, ''भारत और इंडोनेशिया के बीच सभ्यतागत एवं लोगों के आपसी संबंध बहुत मजबूत हैं, तथा मेरी यह यात्रा हमारी बहुआयामी साझेदारी के सभी पहलुओं को और मजबूत करेगी।'' इंडोनेशिया से मोदी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर मेलबर्न जाएंगे। यात्रा के आखिरी चरण में वह न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के न्योते पर ऑकलैंड पहुंचेंगे।
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न्यूयॉर्क. अमेरिका में 300 से अधिक कलाकारों ने भारत की विविध शास्त्रीय और लोक नृत्य कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के समक्ष समृद्ध भारतीय संस्कृति और परंपराओं की एक झलक पेश की। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने भरतनाट्यम कलाकार एवं शिक्षिका विजी राव द्वारा स्थापित फिलाडेल्फिया की गैर-लाभकारी नृत्य संस्था 'थ्री अक्ष' के साथ मिलकर रविवार को मैनहट्टन के प्रतिष्ठित कार्नेगी हॉल में 'अखिल भारतीय नृत्य उत्सव-2026' का आयोजन किया। अमेरिका ने चार जुलाई को अपना 250वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। इसके एक दिन बाद भारतीय वाणिज्य दूतावास की ओर से आयोजित इस नृत्य महोत्सव में दोनों देशों की सांस्कृतिक साझेदारी की झलक देखने को मिली। अमेरिका में जन्मे और पले-बढ़े भारतीय मूल के बच्चों ने कथक, कुचिपुड़ी और भरतनाट्यम जैसे शास्त्रीय नृत्यों के साथ-साथ भांगड़ा की भी आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। करीब दो घंटे तक चले इस महोत्सव में न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, फिलाडेल्फिया और डेलावेयर के 10 विभिन्न नृत्य संस्थानों के लगभग 387 कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की प्रस्तुति दी। न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत विनय प्रधान ने कलाकारों की ''बेहतरीन प्रस्तुति'' की सराहना करते हुए कहा, ''आप सभी कलाकार आज एक मंच पर आए और भारत की 5,000 वर्षों पुरानी संस्कृति, उसकी विविधता और उसकी जीवंत परंपरा को हमारे सामने प्रस्तुत किया।'' विजी राव ने भी इस बात पर जोर दिया कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय की नयी पीढ़ी तक भारतीय संस्कृति और विरासत की परंपराओं को नृत्य तथा अन्य कला के माध्यम से निरंतर पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है। महोत्सव की शुरुआत वीणा पंडिरी के कलात्मक निर्देशन में संचालित 'नोट्स एन बीट्स स्कूल' के विद्यार्थियों द्वारा 'वंदे मातरम्' की भावपूर्ण प्रस्तुति से हुई। इस प्रस्तुति का नेतृत्व गायक और संगीतकार भार्गव एचसी ने किया। गायत्री सुधाकर के निर्देशन में 'नृत्य समर्पणम स्कूल ऑफ डांस' ने 'सर्वम् शिवमयम्' प्रस्तुत किया। इसमें भगवान शिव के तांडव से प्रेरित भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और मोहिनीअट्टम की अनूठी शास्त्रीय जुगलबंदी देखने को मिली। इसी तरह अन्य कलाकारों ने विभिन्न प्रस्तुतियां दी। करीब तीन हजार दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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किन्शासा. मध्य अफ्रीकी देश कांगो में लकड़ी की एक नौका के डूब जाने से कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्य कांगों में परीक्षाओं में शामिल होने के बाद छात्र इस नौका से अपने घर लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह नौका कसई प्रांत में संकुरु और कसाई नदियों के संगम क्षेत्र में प्रवेश करते समय डूब गई। कसई प्रांत के इलेबो क्षेत्र के प्रशासक फ्रांस्वा कबुला ने बताया कि यह हादसा शुक्रवार को हुआ।
उन्होंने कहा, "इस दुर्घटना में 80 लोगों को बचा लिया गया, जबकि 20 शव बरामद किए गए हैं।"हालांकि, दुर्घटना के प्रत्यक्षदर्शी शिकुडी जीन ने 'एसोसिएटेड प्रेस' को बताया कि नौका पर 200 से अधिक लोग सवार थे। -
न्यूयॉर्क. पेप्सिको की भारतीय मूल की पूर्व चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) इंद्रा नूयी ने कहा है कि अमेरिका की 'योग्यता-आधारित व्यवस्था' ने ही उन्हें इतनी बड़ी वैश्विक कंपनी का मुखिया बनने का मौका दिया, जो भारत समेत किसी भी दूसरे देश में संभव नहीं हो पाता। नूयी ने पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडलीजा राइस के साथ बातचीत में कहा कि अमेरिका में प्रतिभा को पहचानने और आगे बढ़ाने की ऐसी व्यवस्था है, जहां लिंग, जातीयता या पृष्ठभूमि से ज्यादा योग्यता मायने रखती है। उन्होंने इस परिचर्चा में कहा, ''एक प्रवासी भी यहां बिना संसाधनों के आकर शीर्ष पद तक पहुंच सकता है। यह दुनिया के किसी अन्य देश में संभव नहीं हो पाता। मैं किसी भी अन्य देश, यहां तक कि भारत में भी, सीईओ नहीं बन पाती।'' येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की पूर्व छात्रा नूयी 12 वर्षों तक पेप्सिको के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की कमान संभालने के बाद 2018 में पद से हटी थीं। उन्हें आज भी दुनिया के सर्वाधिक प्रभावशाली कारोबार दिग्गजों में गिना जाता है। इसके साथ ही नूयी ने अमेरिका और भारत को 'स्वाभाविक साझेदार' बताते हुए कहा कि चीन के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि एशिया में संतुलन बनाए रखने के लिए भारत एक बेहद महत्वपूर्ण देश है, क्योंकि उस क्षेत्र में चीन का वर्चस्व नहीं होना चाहिए। नूयी ने कहा कि भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के साथ युवा और अंग्रेजी बोलने वाली आबादी के कारण भविष्य में वैश्विक स्तर पर बड़ी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर और एआई पेशेवर तथा प्रवासी समुदाय दुनिया के विकास में अहम योगदान देंगे। उन्होंने भारत और चीन की तुलना करते हुए कहा कि चीन में प्रतिस्पर्धा काफी आक्रामक है और वहां की अधिक केंद्रीकृत व्यवस्था ने उसे तेजी से वैश्विक शक्ति बनने में मदद की। इसके उलट नूयी ने भारत को 'अराजकता से भरपूर एक खूबसूरत' देश बताते हुए कहा, ''भारत अब भी एक वैश्विक शक्ति बनने के लिए संघर्ष कर रहा है, क्योंकि यहां लोकतंत्र है। जब हर व्यक्ति को मत देने और अपनी बात रखने का अधिकार होता है तो प्रगति की गति धीमी हो जाती है, लेकिन मुझे खुशी है कि व्यवस्था ऐसी ही है।''
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काठमांडू, जून में हवाई मार्ग से नेपाल आने वाले विदेशी पर्यटकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक रही। इस दौरान पिछले साल इसी महीने की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक (41,809) भारतीय पर्यटक नेपाल पहुंचे। यह जानकारी बृहस्पतिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार है। नेपाल पर्यटन बोर्ड (एनटीबी) ने बताया कि इस महीने हवाई मार्ग से कुल 91,363 विदेशी पर्यटक नेपाल आए।
इसमें कहा गया है कि भारतीय पर्यटकों की संख्या पिछले साल जून में 32,662 से बढ़कर इस साल 41,809 हो गई। एनटीबी ने बताया कि 2026 के शुरुआती छह महीनों में हवाई मार्ग से नेपाल आने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या 177,159 रही, जो पिछले साल इसी अवधि में आए 148,540 पर्यटकों की तुलना में 19.27 प्रतिशत अधिक है। इसमें बताया गया है कि जून में सबसे अधिक आने वाले पर्यटकों के मामले में अमेरिका दूसरे नंबर पर रहा और वहां से 11,836 लोग आए; इसके बाद चीन (9,995), बांग्लादेश (4,322) और ब्रिटेन (2,500) का नंबर था। कुल मिलाकर, इस साल जनवरी से जून के बीच नेपाल में 6,20,426 विदेशी पर्यटक आए, जो 2025 की इसी अवधि की तुलना में सात प्रतिशत की वृद्धि है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के वरिष्ठ निदेशक मणि आर. लामिछाने ने कहा कि हाल के महीनों में भारतीय पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी की वजह भारतीय शहरों में अधिक गर्मी, शिक्षण संस्थानों में लंबी छुट्टियां और विदेशी मुद्रा के बाहर जाने को कम करने के लिए घरेलू और क्षेत्रीय यात्रा को बढ़ावा देने की भारत सरकार की कोशिशें हो सकती हैं। -
न्यूयॉर्क. अमेरिकी पॉप गायिका टेलर स्विफ्ट और फुटबॉल खिलाड़ी ट्रैविस केल्सी जल्द ही विवाह करेंगे और शुक्रवार रात न्यूयॉर्क के 'मैडिसन स्क्वायर गार्डन' में शादी का जश्न मनाया जाएगा। एक कानून प्रवर्तन अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने अपना नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर 'एसोसिएटेड प्रेस' को आयोजन से जुड़ी सुरक्षा की जानकारी देते हुए बताया कि विवाह समारोह की शुरुआत बृहस्पतिवार रात विवाह-पूर्व भोज से होगी। पिछले कुछ सप्ताह से ऐसी अपुष्ट खबरें आ रही थीं कि स्विफ्ट और केल्सी का विवाह इस सप्ताहांत न्यूयॉर्क के किसी ऐतिहासिक स्थल पर होगा। इस सप्ताह 'मैडिसन स्क्वायर गार्डन' के बाहर कर्मचारी ट्रकों से सामान उतारते देखे गए थे। एक प्रवेश द्वार के बाहर कुछ देर के लिए एक बड़ा कालीन बिछाया गया जिसे तुरंत हटा लिया गया। स्विफ्ट एवं केल्सी ने अपने विवाह की तारीख को लेकर अभी तक सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की है।
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कीव. रूस ने बृहस्पतिवार रात यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलों और ड्रोन से भीषण हमला किया जिसमें कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई और 90 से अधिक अन्य घायल हो गए। हमलों के दौरान कई घंटों तक राजधानी में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं। रूस ने इस हमले को यूक्रेन की ओर से मॉस्को के तेल प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों का ''प्रतिशोध'' बताया है। यूक्रेन के इन हमलों से रूस में ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बढ़ा है। बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों तथा ड्रोन से किए गए इस हमले में राजधानी के कई हिस्सों में आवासीय इमारतों और नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अन्य अधिकारियों की ओर से हमले को लेकर पहली बार सतर्क किए जाने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने सबवे स्टेशनों में शरण ली। रूस के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह हमला यूक्रेन की ओर से रूस के नागरिक बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों के जवाब में किया गया। हाल के सप्ताहों में रूस ने कीव पर अपने हमले और तेज कर दिए हैं। वहीं, यूक्रेन भी रूस के सैन्य ठिकानों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर लगातार ड्रोन हमले कर रहा है, जिससे रूस के भीतर ईंधन की कमी पैदा हुई है और उसकी आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है। कीव के मेयर विताली क्लित्सको ने बताया कि हमले में 17 लोगों की मौत हुई है जबकि 90 से अधिक अन्य घायल हुए हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने इस हमले को ''खौफनाक'' करार देते हुए सहयोगी देशों से यूक्रेन की वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वायु रक्षा प्रणालियों और मिसाइलों की आपूर्ति से जुड़े फैसलों में अब और देरी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने यूक्रेन के ड्रोन हमलों के जवाब में रूस की कार्रवाई को उचित ठहराने की किसी भी कोशिश को खारिज करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत यूक्रेन आत्मरक्षा के अपने अधिकार का प्रयोग कर रहा है जबकि रूस ही आक्रामक रुख अपनाए हुए है। कीव शहर के सैन्य प्रशासन के प्रमुख तिमूर तकाचेंको ने बताया कि हमले में आवासीय इमारतों और नागरिक बुनियादी ढांचे समेत शहर के 30 स्थानों को नुकसान पहुंचा है। यूक्रेन के गृह मंत्री इहोर क्लीमेंको ने बताया कि करीब 20 आवासीय इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं।
क्लित्स्को ने बताया कि देस्न्यांस्की जिले में एक क्षतिग्रस्त नौ मंजिला आवासीय इमारत में कुछ लोग फंस गए थे, जिन्हें निकालने के लिए बचाव दल को मौके पर भेजा गया। यूक्रेन की आपातकालीन सेवा के अनुसार, होलोसिएव्स्की जिले में 16 मंजिला एक इमारत की छत पर आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए करीब 500 कर्मियों और 100 विशेष वाहनों को तैनात किया गया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि इस हमले में ''लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों'' और ड्रोन का इस्तेमाल कर कीव तथा कीव क्षेत्र में सैन्य उद्योग से जुड़े प्रतिष्ठानों, ईंधन एवं ऊर्जा परिसरों और यूक्रेन के चार अन्य क्षेत्रों में स्थित सैन्य हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। मंत्रालय ने उन स्थानों की सूची भी जारी की, जिन्हें निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। इनमें अधिकांश यूक्रेन के ड्रोन, मिसाइल और उनके कलपुर्जों के निर्माण एवं संयोजन संयंत्र बताए गए हैं। यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने इस हमले में 74 मिसाइलें दागीं, जिनमें 24 बैलिस्टिक मिसाइलें थीं। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के 496 ड्रोन भी छोड़े गए। इस बीच, यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने दावा किया कि उसकी सेना ने रातभर चले अभियान में मॉस्को के पूर्व में स्थित निजनी नोवगोरोद क्षेत्र की रूस की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक पर हमला किया, जिससे वहां आग लग गई। जनरल स्टाफ ने यह भी दावा किया कि यूक्रेनी सेना ने रूस के कब्जे वाले लुहान्स्क क्षेत्र में सिवेर्स्की दोनेत्स नदी पर बने एक रेलवे पुल को भी निशाना बनाया। उसके अनुसार, रूसी सेना इस पुल का इस्तेमाल सैनिकों, हथियारों और सैन्य सामग्री की आवाजाही के लिए कर रही थी। -
संयुक्त राष्ट्र. भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद को उचित ठहराने के लिए किसी भी शिकायत को आधार बनाए बिना इस ''हत्यारी विचारधारा'' को जड़ से मिटाने के मकसद से मिलकर काम करने का आह्वान करते हुए कहा है कि आतंकवादी, आतंकवादी ही होता है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा, ''भारत सीमा पार आतंकवाद का दशकों से शिकार रहा है। हमारे लोगों ने आतंकवाद की भारी कीमत चुकाई है- जानें गईं, परिवार बर्बाद हुए और समाज बिखर गए। इसी अनुभव ने भारत के इस रुख को आकार दिया है कि आतंकवाद को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।'' उन्होंने कहा, ''चाहे कोई भी शिकायत, राजनीतिक उद्देश्य या रणनीतिक गुणाभाग हो, आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों की बिना किसी हिचकिचाहट के निंदा की जानी चाहिए।'' पर्वतनेनी ने संयुक्त राष्ट्र वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति (जीसीटीएस) की नौवीं समीक्षा को स्वीकार किए जाने के अवसर पर बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद से निपटने को लेकर दोहरे मानदंडों को खारिज करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वालों, उनकी साजिश रचने वालों, उन्हें वित्तीय मदद देने वालों और उनके प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराना तथा न्याय के कठघरे में लाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को इस संबंध में पूरा सहयोग करना चाहिए।
पर्वतनेनी ने कहा, ''आतंकवादी, आतंकवादी ही होता है। हमें आतंकवाद को उचित ठहराने के लिए किसी भी शिकायत को आधार बनाए बिना इस हत्यारी विचारधारा को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से मिलकर काम करना चाहिए।'' भारत ने कहा कि आतंकवाद-रोधी प्रयासों को गलत तुलना या राजनीतिक रंग वाले विमर्श के कारण कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। पर्वतनेनी ने कहा, ''हमें आतंकवाद को फैलाने में मददगार परिस्थितियों से निपटना चाहिए लेकिन हमें कभी भी परिस्थितियों को आतंकवाद के औचित्य के रूप में नहीं देखना चाहिए। हमें मानवाधिकारों और कानून के शासन को कायम रखना चाहिए लेकिन यह भी स्वीकार करना चाहिए कि पहला मानवाधिकार जीवन का अधिकार है और आतंकवाद इस मानवाधिकार पर सबसे प्रत्यक्ष हमला है।'' भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामूहिक प्रयासों का केंद्र बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा, ''अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वित्तीय खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था बेहतर करनी चाहिए, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के मानकों के क्रियान्वयन को मजबूत करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी क्षेत्र आतंकवाद के वित्तपोषण का सुरक्षित माध्यम न बने।'' भारत ने कहा कि आतंकवादियों द्वारा नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों का दुरुपयोग किए जाने की बात पर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। उसने कहा कि यह ''निराशाजनक'' है कि जीसीटीएस की इस समीक्षा के दौरान बातचीत में इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी कि आतंकवादियों को उनके नापाक कृत्यों को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी संबंधी साधनों से वंचित रखा जाए। भारत ने कहा कि इस समीक्षा को ऐसे महत्वपूर्ण समय पर स्वीकार किया गया है, जब 20 वर्ष पहले सदस्य देशों ने जीसीटीएस को अपनाने के लिए एकजुटता दिखाई थी। पर्वतनेनी ने कहा, ''ऐसा करके अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस बात की पुष्टि की कि आतंकवाद मानवता के लिए खतरा है और इसे केवल अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ही हराया जा सकता है।'' भारत ने 2006 में जीसीटीएस को पहली बार स्वीकार किए जाने से एक दशक पहले ही अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि (सीसीआईटी) को अपनाने का आह्वान किया था। पर्वतनेनी ने कहा कि सर्वमान्य कानूनी ढांचे का अभाव आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई में अब भी बाधा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि नियम संबंधी खामियों को दूर करने, अभियोजन एवं प्रत्यर्पण को मजबूत करने और आतंकवादियों एवं उनके प्रायोजकों को सुरक्षित ठिकानों, धन तथा हथियारों तक पहुंच से वंचित करने के लिए यह कानूनी व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने कहा, ''लगभग तीन दशक की देरी ने आतंकवाद से निपटने के हमारे सामूहिक प्रयासों में बाधा डाली है। अब सीसीआईटी को अंतिम रूप देने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने का समय आ गया है।'' भारत ने कहा कि उसने आतंकवाद-रोधी वैश्विक प्रयासों में लगातार योगदान दिया है और आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नयी एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल से निपटने संबंधी दिल्ली घोषणा तथा 'नो मनी फॉर टेरर' (आतंकवाद के लिए कोई वित्तीय मदद नहीं) सम्मेलनों सहित कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं की मेजबानी की है। भारत ने 2023 में जीसीटीएस में ऐतिहासिक दिल्ली घोषणा का उल्लेख नहीं किए जाने की आलोचना करते हुए कहा कि यह ''इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को दर्शाता है कि यह महासभा किस तरह तुच्छ हिसाब-किताब की बंधक बनी हुई है। यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तरह के व्यवहार को लगातार सहन कर रहा है।'' भारत ने यह रुख भी दोहराया कि वह किसी धर्म या जातीयता, राष्ट्रीयता, भौगोलिक पहचान अथवा नस्ल जैसी हर विशेषता के प्रति पूर्वाग्रह से प्रेरित सभी कुकृत्यों की निंदा करता है। - काराकास। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने 24 जून को देश में आए शक्तिशाली भूकंप के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए सात दिनों के लिए राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। उन्होंने एक्स पर कहा कि खतरनाक भूकंपों से हुए इंसानी नुकसान से वेनेजुएला की आत्मा टूट गई है। रोड्रिगेज ने सोशल मीडिया पर लिखा, “पीड़ितों की याद में मैंने बुधवार (स्थानीय समय) की शाम 6:00 बजे से सात दिनों के लिए राष्ट्रीय शोक घोषित करने का फैसला किया है। भारी दुख की इस घड़ी में हम इस त्रासदी से पीड़ित लोगों को गले लगाते हैं और उनके साथ रहने और उनकी रक्षा करने का अपना वादा दोहराते हैं।” न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, मंगलवार तक भूकंप से कम से कम 1,943 लोगों की मौत हो चुकी थी और 10,500 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इससे पहले, पुर्तगाली सरकार ने भी वेनेजुएला में भूकंप के पीड़ितों, खासकर पुर्तगाली नागरिकों और पुर्तगाली मूल के लोगों के लिए रविवार (5 जुलाई) को राष्ट्रीय शोक दिवस मनाने की घोषणा की थी।पुर्तगाल के विदेश मंत्रालय के नए अपडेट के मुताबिक, पुर्तगाली नागरिकों और पुर्तगाली मूल के लोगों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 71 हो गई है, जिसमें 11 बच्चे शामिल हैं, जबकि 71 और लोग लापता हैं।आधिकारिक लुसा न्यूज एजेंसी के अनुसार, वेनेजुएला में रहने वाला पुर्तगाली समुदाय दुनिया भर में बसे पुर्तगाली प्रवासी समुदायों में सबसे बड़े समुदायों में से एक है। लैटिन अमेरिका में इसका स्थान ब्राजील के बाद दूसरा है। सामुदायिक अनुमानों के मुताबिक, पुर्तगाली मूल के लोगों सहित इस समुदाय की आबादी लगभग 12 लाख (1.2 मिलियन) है।पिछले हफ्ते, वेनेजुएला नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज ने घोषणा की कि ला गुएरा राज्य को बचाव के कामों में मदद करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलिट्री कंट्रोल में ले लिया गया है। ला गुएरा लगातार आए दो भूकंपों से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। रोड्रिगेज ने एक टेलीविजन ब्रीफिंग के दौरान कहा, “हम सभी को बताना चाहते हैं कि ला गुएरा राज्य अब पूरी तरह से मिलिट्री के कंट्रोल में है और पूरी तरह से बोलिवेरियन नेशनल आर्म्ड फोर्सेज के नियंत्रण में है।” रोड्रिगेज ने कहा कि कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, अंदरूनी व्यवस्था बनाए रखने और वेनेजुएला के इमरजेंसी रेस्पॉन्डर्स और अंतरराष्ट्रीय बचाव दलों के रेस्क्यू ऑपरेशन को आसान बनाने के लिए यह कदम उठाने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा कि ज्यादातर रेस्क्यू करने वाले लोग काराबालेडा, मैकुटो, लॉस कोरालेस और कैटिया ला मार में काम कर रहे थे। ये ऐसे इलाके हैं जो भूकंप से बुरी तरह प्रभावित हुए थे।
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विक्टोरिया (सेशेल्स) . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को सेशेल्स में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की। सेशेल्स के पीस पार्क में महात्मा गांधी की एक प्रतिमा स्थापित है, जो वहां उनकी विरासत के प्रति गहरे सम्मान को दिखाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने पार्क का दौरा करके वहां महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और कुछ बच्चों से बातचीत की। उन्होंने इस दौरान एक कलाकार द्वारा प्रस्तुत गायन कार्यक्रम को भी देखा। पार्क में भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने अपने हाथों से छोटे-छोटे भारतीय ध्वज लहराकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। श्री नवशक्ति विनायगर मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद प्रधानमंत्री पीस पार्क पहुंचे।
प्रधानमंत्री शनिवार को सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा के लिए रवाना हुए थे। उन्होंने रविवार को सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ विभिन्न मुद्दों पर व्यापक बातचीत की। उन्होंने सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। भारत और सेशेल्स इस समय अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं।
एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति हर्मिनी ने प्रधानमंत्री मोदी को 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' सम्मान से सम्मानित किया। -
विक्टोरिया (सेशेल्स). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। वह तीन दिवसीय यात्रा पर सेशेल्स में हैं और उनकी यह यात्रा शनिवार को शुरू हुई थी। सेशेल्स में इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस समारोह ऐसे वक्त मनाया जा रहा है जब भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे हुए हैं। इस विशेष अवसर पर रविवार रात आयोजित राष्ट्रीय परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की टुकड़ियों ने भी हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''भारत को सेशेल्स के विकास के सफर में एक भरोसेमंद दोस्त और साझेदार के तौर पर उसके साथ खड़े होने पर गर्व है। हमारी साझेदारी साझा मूल्यों और लोगों के बीच आपसी संबंधों के साथ और मज़बूत हो रही है। मुझे यकीन है कि आने वाले समय में हमारी दोस्ती और भी बढ़ेगी।'' एक विशेष सम्मान के रूप में प्रधानमंत्री मोदी भारतीय सैन्य दल के मार्च पास्ट के दौरान खड़े हुए और कृतज्ञता व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''असम रेजिमेंट और भारतीय नौसेना की टुकड़ियों ने कल सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लिया। यह भारत और सेशेल्स के बीच स्थायी और मजबूत मित्रता का एक और प्रतीक है।'' भारतीय दल में असम राइफल्स के जवान, भारतीय नौसेना के जवान और भारतीय नौसेना का मार्चिंग बैंड शामिल था। इसके अलावा भारतीय नौसेना के युद्धपोत तरकश और इक्षक भी पोर्ट विक्टोरिया पहुंचे।
इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ विभिन्न द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक वार्ता की। एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति हर्मिनी ने प्रधानमंत्री मोदी को 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' सम्मान से भी नवाजा। यह सम्मान उन्हें पर्यावरण संरक्षण में नेतृत्व, विकासशील देशों के हितों को आगे बढ़ाने के प्रयासों तथा समुद्री अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के प्रति उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के लिए प्रदान किया गया। -
विक्टोरिया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के बीच हुई वार्ता के बाद भारत और सेशेल्स ने रविवार को 19 महत्वपूर्ण समझौतों की घोषणा की, जिससे रक्षा और समुद्री सुरक्षा से लेकर डिजिटल भुगतान, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य देखभाल, कृषि और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार किया जाएगा। ये समझौते हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीपीय देश सेशेल्स के साथ सुरक्षा, संपर्क, क्षमता निर्माण और विकास साझेदारी के क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भागीदारी को दर्शाते हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन परिणामों में प्रत्यर्पण संधि, बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग संबंधी समझौता, सेशेल्स में यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने का समझौता, एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ इंडिया (एक्ज़िम बैंक) के साथ एक व्यापक ऋण सुविधा समझौता तथा नए सेशेल्स राष्ट्रीय अस्पताल की प्रारंभिक तैयारियों से संबंधित समझौता शामिल हैं। दोनों देशों ने सेशेल्स को एक तेज गश्ती पोत उपहार में देने, सेशेल्स रक्षा बल को 10 यूटिलिटी वाहन और पांच लेजर रेडियल श्रेणी की नौकाएं सौंपने, सेशेल्स कोस्ट गार्ड के पोत 'पीएस जोरोस्टर' के पुनर्निर्माण कार्य के पूरा होने तथा डोर्नियर विमान को आधुनिक ग्लास कॉकपिट प्रणाली से उन्नत करने की भी घोषणा की। विदेश मंत्रालय ने 'एक्स' पर सिलसिलेवार पोस्ट में बताया कि अन्य विकासात्मक पहलों के तहत छह एम्बुलेंस, 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट सेशेल्स को सौंपा गया। साथ ही भारत-सेशेल्स राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक स्मारक लोगो जारी किया गया तथा व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा केंद्र की आधारशिला का डिजिटल माध्यम से समारोह आयोजित किया गया। दोनों देशों ने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड और सेशेल्स के केंद्रीय बैंक के बीच एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य सेशेल्स में यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देना और आर्थिक व तकनीकी सहयोग को और मजबूत करना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और सेशेल्स के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच जन औषधि योजना के तहत हुए समझौते का उद्देश्य सेशेल्स के लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती भारतीय दवाएं उपलब्ध कराना है। वहीं, एक अन्य समझौता ज्ञापन नए सेशेल्स राष्ट्रीय अस्पताल की प्रारंभिक तैयारियों से संबंधित है। मंत्रालय ने कहा कि इसके अलावा, दोनों देशों ने सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान और सेशेल्स के विदेश एवं प्रवासी मामलों के मंत्रालय के बीच राजनयिक प्रशिक्षण, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा, सेशेल्स के ध्वज वाले जहाजों पर कार्यरत नाविकों के प्रशिक्षण और प्रमाणन की पारस्परिक मान्यता, तथा बाह्य अंतरिक्ष की खोज और उसके शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए। इन सभी समझौतों की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति हर्मिनी के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद की गई। प्रधानमंत्री मोदी की यह तीन-दिवसीय राजकीय यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर सेशेल्स पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी यहां राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भी शामिल होंगे।
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दुबई. ईरान के अर्धसैनिक बल 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' ने अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में बहरीन और कुवैत को निशाना बनाकर रविवार को ड्रोन एवं मिसाइल हमले किए और धमकी दी कि यदि अमेरिका ने हमले जारी रखे तो युद्ध समाप्त करने के लिए जारी वार्ता ''पूरी तरह रोकी'' जा सकती है। ईरान की सीधी निगरानी के बिना होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की कोशिशों के कारण गोलाबारी हुई जिसने अब पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है और इससे लंबे समय तक चलने वाले युद्धविराम के लिए हो रही बातचीत भी खतरे में पड़ गई है। बहरीन और कुवैत पर ये हमले ऐसे समय हुए, जब अमेरिकी नौसेना की निगरानी में काम करने वाली एक बहुराष्ट्रीय समुद्री संस्था ने शनिवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ओमान के पास स्थित एक मार्ग का विस्तार किया जाएगा ताकि उससे खाड़ी में प्रवेश करने और बाहर जाने वाले पोतों की आवाजाही हो सके। इस कदम से ईरान के साथ टकराव का एक नया कारण पैदा हो सकता है। ईरान और ओमान के समुद्री इलाके में होने के बावजूद, दुनियाभर के देश लंबे समय से इस जलडमरूमध्य को एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता मानते रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए अंतरिम समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य से पोतों की आवाजाही फिर शुरू करने की बात कही गई है। हालांकि, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी के समर्थन से बनाए गए ओमान मार्ग से गुजर रहे पोतों पर दो बार हमले किए हैं। अमेरिका और खाड़ी के अरब देशों के विरोध के बावजूद तेहरान का कहना है कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से पोतों की आवाजाही पर उसका नियंत्रण होना चाहिए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को इराक की राजकीय यात्रा के दौरान इस दावे को दोहराया। एक समय दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस का पांचवां हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता था। अराघची ने बगदाद में कहा, "इस मामले में कोई भी दखल, या ईरान द्वारा अभी किए जा रहे इंतजामों से अलग कोई नयी व्यवस्था करने की कोशिश, सिर्फ और मुश्किलें पैदा करेगी। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में देरी होगी और तनाव बढ़ेगा, ठीक वैसे ही जैसे पिछले दो रातों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हुई घटनाओं से तनाव और टकराव बढ़ा था।" कुवैत की सेना ने बताया कि रविवार सुबह, अमेरिका के हमले के ठीक बाद, वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से आ रहे ड्रोन और मिसाइलों को रोक दिया। कुवैत, जहां अमेरिकी सेना का एक बड़ा अड्डा है, ने कहा कि उसने दो बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाकर उन्हें रोक दिया; किसी के घायल होने या किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है। बहरीन के गृह मंत्रालय ने बताया कि ईरान के हमलों से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा, लेकिन इसमें किसी की मौत नहीं हुई। मंत्रालय ने 8 मंजिला इमारत की तस्वीरें जारी कीं, जिसमें सबसे ऊपर की मंज़िल पूरी तरह तबाह हो गई थी, वहां मलबा भरा था और खिड़कियों के कांच टूटकर बिखर गए थे। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है, जिसके अड्डे पर युद्ध के दौरान बार-बार हमले हुए थे। रविवार को जिस इमारत को नुकसान पहुंचा, वह शहर के बीचों-बीच मनामा में मौजूद बेड़े के मुख्यालय के पास नहीं थी। बहरीन के विदेश मंत्री ने हमले की निंदा की है। ईरान के अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने हमलों की जिम्मेदारी ली है।
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमान ने रविवार तड़के कहा कि समुद्र में एक पोत पर शनिवार तड़के हमले के बाद उसने ''ईरान के सैन्य निगरानी ढांचे, संचार प्रणालियों, हवाई रक्षा ठिकानों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया।'' ईरानी हमले का शिकार हुआ पनामा के ध्वज वाला तेल टैंकर 'किकू' कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी के लिए कच्चा तेल लेकर गया था। कतर, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में प्रमुख मध्यस्थ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका ने ''युद्धविराम समझौते का फिर से उल्लंघन किए जाने के जवाब में ईरान के मिसाइल एवं ड्रोन भंडारण केंद्रों और तटीय रडार स्थलों पर हमले किए।'' उन्होंने चेतावनी दी कि एक समय ऐसा आ सकता है, जब अमेरिका के लिए संयम बरतना संभव नहीं होगा और वह ''सैन्य कार्रवाई के जरिये काम पूरा करने के लिए मजबूर हो जाएगा।'' ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, ''अगर ऐसा हुआ तो इस्लामी गणराज्य ईरान का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।'' ईरान के एक ड्रोन ने बृहस्पतिवार को ओमान के तट के पास एक मालवाहक पोत को निशाना बनाया था, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने हमले किए थे। हिज्बुल्ला को लेकर गतिरोध कायम है। पिछले हफ़्ते, इजराइल और लेबनान की सरकार ने टकराव खत्म करने के लिए एक कार्यढांचा समझौते पर हस्ताक्षर किए। लेकिन इस समझौते में हिज़्बुल्ला या ईरान शामिल नहीं थे। हिज़्बुल्ला ने इस समझौते की आलोचना की है और हथियार छोड़ने की मांगों को ठुकरा दिया है। रविवार को इराक के दौरे के दौरान अराघची ने फिर कहा कि अमेरिका को इजराइल पर हमले रोकने और पीछे हटने के लिए दबाव डालना चाहिए। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के लगभग 600 वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्ज़ा कर रखा है; उसका कहना है कि हिज़्बुल्ला के हमलों को रोकने के लिए उसे सुरक्षित बफर क्षेत्र के तौर पर इस इलाके की जरूरत है।
















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