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- काठमांडू. प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने रविवार को स्पष्ट किया कि नेपाल सरकार ने भारत के साथ सीमा विवाद को सुलझाने के लिए ब्रिटेन से मध्यस्थता की मांग नहीं की थी। चितवन जिले में सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के पहले आम अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ''हमने कहा था कि अगर (भारत में) ब्रिटिश शासन के समय के सबूतों की जरूरत पड़ी तो हम उन्हें पेश करेंगे। हमने उनकी मध्यस्थता की मांग नहीं की थी।'' बालेंद्र शाह के ये बयान विदेश मंत्री शिशिर खनाल के संसद में यह कहने के कुछ दिनों बाद आए हैं कि एक संयुक्त कार्य समूह नेपाल और भारत के बीच सीमा-पार कब्जे के मुद्दे को सुलझाएगा। पिछले महीने बालेंद्र शाह ने संसद में कहा था कि नेपाल ने अलग-अलग जगहों पर भारतीय इलाकों पर कब्जा किया है और इस मुद्दे को सुलझाने के लिए देश ने चीन और ब्रिटेन को शामिल किया है, जिससे बड़ा विवाद शुरू हो गया। नयी दिल्ली ने इस विवाद को सुलझाने में किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को साफ तौर पर खारिज किया है।
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वॉशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए सिरे से तैयार किए गए 'एयर फोर्स वन' विमान का अनावरण किया जिसे अगले महीने की शुरुआत से राष्ट्रपति की आधिकारिक यात्राओं के लिए इस्तेमाल किए जाने से पहले परीक्षण उड़ानों पर भेजा जाएगा। यह विमान पहले कतर के स्वामित्व में था और इसे व्यापक रूप से नवीनीकृत करके आधुनिक बनाया गया है।
बोइंग 747-8आई विमान को अमेरिकी ध्वज के रंगों- लाल, सफेद और गहरे नीले रंग में रंगा गया है, जबकि पुराना विमान हल्के आसमानी रंग का है और उसका इस्तेमाल अमेरिका के राष्ट्रपतियों द्वारा लगभग 40 वर्षों से किया जाता रहा है। नए विमान की 'टेल' पर अमेरिकी राष्ट्रीय ध्वज का चित्र अंकित किया गया है।
ट्रंप ने यहां के निकट 'ज्वाइंट बेस एंड्रूज' में एक समारोह में कहा, ''सबसे बड़ा अंतर इसके आकार में है। यह लगभग दोगुना बड़ा हैं।'' 'ज्वाइंट बेस एंड्रूज' राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान का मुख्य ठिकाना है।
ट्रंप ने कहा, ''ये नए रंग हैं- लाल, सफेद और नीला। हमें हल्का आसमानी रंग भी पसंद था, लेकिन अब बदलाव का समय आ गया था... मुझे अमेरिकी ध्वज के रंग पसंद हैं।'' अमेरिकी वायु सेना ने कहा कि यह विमान जल्द ही ''परीक्षण उड़ानें'' भरेगा जो राष्ट्रपति के परिवहन के लिए उपयोग किए जाने से पहले इसकी अंतिम परीक्षा होगी। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह विमान कतर के अमीर (कतर के शासक) से इसलिए प्राप्त करने की पहल की क्योंकि बोइंग के एयर फोर्स वन प्रतिस्थापन कार्यक्रम में हो रही देरी से वह निराश थे। साथ ही, अमेरिका के राष्ट्रपति बेड़े के पुराने हो चुके विमानों की तुलना विदेशी सरकारों के अधिक आधुनिक विमानों से किए जाने की बातें भी लगातार बढ़ रही थीं। ट्रंप ने कहा, ''मैंने अमीर से पूछा कि क्या हम इस बिल्कुल नए 747 विमान का उपयोग कर सकते हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि इस विमान ने अपेक्षाकृत बहुत कम उड़ान घंटे पूरे किए हैं। ट्रंप ने कहा, "देखिए, कोई सामान्य राष्ट्रपति ऐसा नहीं करता। एक सामान्य राष्ट्रपति विमान जैसे मामलों से दूर रहना चाहता है लेकिन हमारे देश का प्रतिनिधित्व उचित ढंग से होना चाहिए।'' अमेरिकी वायु सेना ने कहा कि एयर फोर्स वन बनने वाले किसी भी विमान को कड़े सुरक्षा मानकों को पूरा करना होता है। वायु सेना के अनुसार, कतर से प्राप्त इस विमान में सुव्यवस्थित और अनुशासित इंजीनियरिंग प्रक्रिया के तहत संशोधन किए गए है। ट्रंप ने कहा कि नया एयर फोर्स वन अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर चार जुलाई को 'नेशनल मॉल'' में आयोजित समारोहों के दौरान हवाई प्रदर्शन करेगा। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह अगले महीने तुर्किये में होने वाले नाटो के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए इस नए विमान का उपयोग करेंगे। -
दुबई. ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने शनिवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया गया है। इसने कहा कि यह कदम लेबनान में इज़राइल के हमले जारी रहने और अमेरिका की ''बदनीयती'' व युद्ध खत्म करने संबंधी वादों के स्पष्ट उल्लंघन की वजह से उठाया गया है। सरकारी टेलीविज़न पर दिए गए बयान में यह चेतावनी भी दी गई कि ''अगर आक्रामकता जारी रहती है, तो आगे के कदम उठाने की योजना बना ली गई है।'' इस हफ़्ते की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद जहाज़ों ने जलडमरूमध्य से गुज़रना शुरू कर दिया था। युद्धविराम समझौते की ख़बरें आने के कुछ ही घंटों बाद, शनिवार को दक्षिणी लेबनान पर इज़राइली हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। इस बीच, सरकारी टीवी ने कहा कि युद्ध के मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत करने वाली ईरानी टीम स्विट्जरलैंड जा रही है।
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तेल अवीव. भारत ने कहा है कि उसने जनसंख्या स्थिरीकरण के लक्ष्य को अधिकार-आधारित, स्वैच्छिक और विकास-उन्मुख दृष्टिकोण के माध्यम से आगे बढ़ाया है। इजराइल में भारत के राजदूत जे पी सिंह ने बुधवार को तेल अवीव यूनिवर्सिटी में ''अंतरराष्ट्रीय जनसांख्यिकीय रुझान और सार्वजनिक नीति'' पर आयोजित एक सामूहिक परिचर्चा के दौरान ये बातें कहीं। सिंह ने कहा कि भारत की रणनीति में आबादी को स्थिर करने के राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ-साथ परिवार नियोजन के निजी फैसलों को ध्यान रखा गया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रजनन से जुड़े फैसले पूरी जानकारी और अच्छी गुणवत्ता वाली सेवाओं तक पहुंच के आधार पर लिए जाएं। उन्होंने कहा, ''इस दृष्टिकोण को स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा, महिलाओं के सशक्तिकरण और परिवार नियोजन तक बेहतर पहुंच में निवेश से समर्थन मिला है।'' सिंह ने कहा, ''भारत, जहां लगभग 1.4 अरब लोग रहते हैं और जो दुनिया की आबादी का करीब 17 प्रतिशत है, उसने जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए लोकतांत्रिक रास्ता अपनाया है।'' राष्ट्रीय जनसंख्या नीति (2000) का जिक्र करते हुए, भारतीय राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि यह नीति स्वैच्छिक और सुविचारित चयन, प्रजनन अधिकारों, मां और बच्चे की सेहत और सामाजिक विकास पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि ''भारत का अनुभव यह दिखाता है कि टिकाऊ जनसंख्या बदलाव जबरदस्ती के उपायों के बजाय विकास और बेहतर मौकों के जरिए हासिल किया जाता है।'' भारतीय राजदूत ने मां और बच्चे की सेहत, परिवार नियोजन, टीकाकरण, पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और महिलाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्रों में हुई अहम प्रगति पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''मां और नवजात शिशु की सेहत से जुड़े नतीजों में लगातार सुधार हो रहा है। गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव-पूर्व देखभाल का दायरा 2020-21 में 92.6 प्रतिशत था, जो 2023-24 में बढ़कर 95.9 प्रतिशत हो गया, संस्थागत प्रसव 88.6 प्रतिशत से बढ़कर 90.6 प्रतिशत हो गए हैं, और कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में होने वाले प्रसव 91.3 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं।
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पेरिस. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रौद्योगिकी तभी प्रगति का माध्यम बन सकती है जब उसका लोकतंत्रीकरण किया जाए और भारत के लिए एआई (कृत्रिम मेधा) का मतलब 'ऑल इनक्लूसिव' (सर्वसमावेशी) होना है। प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन 'वीवाटेक 2026' में यह बयान ऐसे समय दिया है जब अमेरिका ने विदेशी नागरिकों के लिए एंथ्रोपिक के नवीनतम एआई मॉडल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने कहा, "प्रौद्योगिकी तभी प्रगति का माध्यम बन सकती है, जब उसका लोकतंत्रीकरण किया जाए।"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत प्रौद्योगिकी के दम पर तेज बदलाव के दौर से गुजरा है। उन्होंने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के कुल डिजिटल लेनदेन का लगभग आधा भारत में हो रहा है। उन्होंने कहा, "दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली से लेकर सबसे बड़े डिजिटल भुगतान मंच तक, हम वित्तीय समावेशन, शिक्षा और टेलीमेडिसिन के लिए बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहे हैं।" वीवाटेक सम्मेलन यूरोप का प्रमुख प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन है। इस बार के सम्मेलन में भारत ने भारतीय और यूरोपीय नवाचार पारिस्थितिकी के बीच साझेदारी की संभावनाओं को दर्शाते हुए सबसे बड़ा राष्ट्रीय मंडप स्थापित किया है। -
पेरिस. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कई कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर भारत में निवेश अवसरों और विस्तार योजनाओं पर चर्चा की। प्रधानमंत्री से मुलाकात करने वाले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों से संबंधित हैं। इनमें टिकाऊ निर्माण, परिवहन और कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र शामिल हैं। फ्रांस की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दो दिनों में जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई विश्व नेताओं के साथ बातचीत की। प्रधानमंत्री से बृहस्पतिवार को पेरिस में मिलने वालों में सीएमए सीजीएम के चेयरमैन एवं सीईओ रोडोल्फ सादे शामिल थे, जिनके साथ समुद्री परिवहन, लॉजिस्टिक और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर केंद्रित चर्चा हुई। सादे ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "हमने विकास से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की, जिन्हें हम अंततः भारत में लागू कर सकते हैं। हमने जहाज विनिर्माण, जहाज पुनर्चक्रण, गहरे समुद्री बंदरगाहों के साथ-साथ कंटेनर विनिर्माण पर भी चर्चा की।" उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि फ्रांस और भारत के पास सहयोग जारी रखने और नए साझेदारियां बनाने की बहुत संभावनाएं हैं। हमारी ओर से हम भारत के साथ साझेदारी को बहुत अच्छा मानते हैं और मेरा मानना है कि शिपिंग और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में हम और अधिक काम कर सकते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "मेरा मानना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की बड़ी भूमिका है। अब हम भारत में कंटेनर जहाज बनाने की स्थिति में हैं, जो निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है। भारत का भविष्य अब आकार ले रहा है।" विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने समूह की भारत में मजबूत और निरंतर बढ़ती उपस्थिति को रेखांकित किया। विदेश मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री ने सेंट-गोबेन के चेयरमैन एवं सीईओ बेनोआ बाजिन से मुलाकात की। इस दौरान निर्माण सामग्री क्षेत्र में अवसरों पर चर्चा हुई, जिसमें विशेष रूप से टिकाऊपन पर खास जोर दिया गया। मंत्रालय ने बताया कि बाजिन ने भारत में निवेश बढ़ाने और विस्तार करने की अपनी योजनाएं साझा की हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने एल्सटॉम के सीईओ मार्टिन सियॉन से भी मुलाकात की और परिवहन एवं रेल आधुनिकीकरण से जुड़े अवसरों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत में एल्सटॉम के महत्वपूर्ण निवेश और विनिर्माण उपस्थिति का उल्लेख किया, जो रोजगार सृजन और देश के रेल क्षेत्र के विकास में योगदान दे रहे हैं। सियॉन ने भारत में भविष्य में विस्तार और निवेश की अपनी योजनाएं साझा कीं।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने मिस्ट्रल एआई के सह-संस्थापक एवं सीईओ आर्थर मेंश से भी मुलाकात की और भारत के तेजी से बढ़ते कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र में अवसरों को रेखांकित किया। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मेंश ने भारत के साथ सहयोग में गहरी रुचि व्यक्त की और भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी कर नवाचार को बढ़ावा देने तथा एआई क्षमताओं के विस्तार की इच्छा जताई। -
वाशिंगटन. डेमोक्रेटिक पार्टी की दो सांसदों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से रूसी तेल की खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों से और छूट नहीं दिए जाने का आग्रह करते हुए कहा है कि ईरान के साथ युद्ध अब समाप्त हो चुका है इसलिए इस कदम का कोई औचित्य नहीं है। सीनेटर जीन शाहीन और एलिजाबेथ वॉरेन ने मंगलवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि प्रतिबंधों से दी गई छूट से केवल रूस को यूक्रेन के खिलाफ अपने ''अवैध युद्ध'' का वित्तपोषण करने में मदद मिली है। अमेरिका ने मार्च में भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए प्रतिबंधों से छूट दी थी। इसका उद्देश्य 28 फरवरी को ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि होने के बीच वैश्विक तेल बाजारों को स्थिर रखना था। बाद में यह छूट अन्य देशों को भी दे दी गई। शुरुआत में एक महीने के लिए दी गई इस छूट की अवधि दो बार बढ़ाई जा चुकी है और इसकी अवधि 17 जून को समाप्त हो रही है। दोनों सीनेटर ने कहा, ''इस छूट की अवधि फिर से बढ़ाने से (रूस के राष्ट्रपति) व्लादिमीर पुतिन को ऐसे समय में भारी वित्तीय लाभ हासिल करने का एक और अवसर मिलेगा, जब वह यूक्रेन के खिलाफ अपना युद्ध जारी रखे हुए हैं।'' उन्होंने कहा कि छूट को बढ़ाना ट्रंप की उस घोषणा के भी स्पष्ट रूप से विपरीत होगा कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त हो गया है और यह इन छूटों के पीछे दिए गए उनके इस तर्क के भी खिलाफ होगा कि ईरान के विरुद्ध युद्ध के कारण ऊर्जा बाजार में पैदा हुई बाधाओं को कम करने के लिए यह फैसला किया गया। सांसदों ने कहा कि तेल बाजार में बाधाएं कम करने के ट्रंप के प्रयास स्पष्ट रूप से विफल रहे हैं और युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकियों को पेट्रोल पंपों पर और किराना दुकानों से सामान खरीदने पर अत्यधिक दाम चुकाने पड़ रहे हैं। शाहीन और वॉरेन ने कहा, ''हमें उम्मीद है कि राष्ट्रपति ट्रंप वह बात समझेंगे जो साफ दिखाई दे रही है: यूक्रेन जीत रहा है और यदि राष्ट्रपति ट्रंप शांति समझौते में रुचि रखते हैं तो उन्हें पुतिन पर न्यायसंगत और स्थायी शांति स्वीकार करने के लिए दबाव बढ़ाना चाहिए, न कि उन्हें प्रतिबंधों से और राहत देनी चाहिए।''
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एवियॉन (फ्रांस) .प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कनेक्टिविटी और व्यापार में सहयोग बढ़ाने के लिए 'जी-7', भारत और 'ग्लोबल साउथ' देशों की क्षमताओं का इस्तेमाल करके एक वैश्विक व्यवस्था बनाने का बुधवार को सुझाव दिया। साथ ही उन्होंने विकासशील देशों पर पश्चिम एशिया संकट के दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर चिंता भी जताई। उन्होंने फ्रांस के एवियॉन शहर में जी-7 शिखर सम्मेलन के एक सत्र के दौरान 'इंटरनेशनल मोबिलाइजेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड' (इम्पैक्ट) नामक नयी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव रखा। मोदी ने जोर देकर कहा कि आधुनिक आर्थिक विकास को केवल व्यापार की मात्रा या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता। उन्होंने कहा कि असली महत्व इस बात का है कि विकास किस दिशा में हो रहा है और उसका लाभ आखिर किसे मिल रहा है। मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट का ईंधन, उर्वरक और खाद्य आपूर्ति शृंखलाओं पर पड़ने वाला प्रभाव ग्लोबल साउथ के देशों पर लंबे समय तक असर डालेगा। उन्होंने कहा कि सबसे कमजोर देशों पर भू-राजनीतिक संकटों का बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा, "यदि हम वास्तव में अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करना चाहते हैं, तो इन संकटों का बोझ केवल सबसे कमजोर देशों पर नहीं पड़ना चाहिए।" मोदी ने कहा, "हमारी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं को ऐसी सहायता व्यवस्थाएं बनानी चाहिए, जो विकासशील देशों को इन झटकों का सामना करने और उनकी आर्थिक मजबूती बनाए रखने में मदद करें।" मोदी ने कहा कि इस नयी व्यवस्था को महत्वाकांक्षी भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की तर्ज पर बनाया जा सकता है। उन्होंने सवाल किया, "आईएमईसी की तरह, क्या हम अफ्रीका, लातिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप के देशों के साथ कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर काम कर सकते हैं?" प्रधानमंत्री ने कहा, "जी-7 की पूंजी, भारत की प्रतिभा और 'ग्लोबल साउथ' देशों की भागीदारी के जरिये हम कनेक्टिविटी और व्यापार को तेज करने के लिए 'इंटरनेशनल मोबिलाइजेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड' (इम्पैक्ट) की स्थापना पर भी विचार कर सकते हैं।" उन्होंने कहा, "इसका उद्देश्य ऐसे गलियारे बनाना होना चाहिए, जो व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और अवसरों को आपस में जोड़ें।" आईएमईसी पहल को वर्ष 2023 में दिल्ली में हुए 'जी20' शिखर सम्मेलन के दौरान अंतिम रूप दिया गया था। इसे एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है, जिसमें सऊदी अरब, भारत, अमेरिका और यूरोप के बीच बड़े सड़क, रेल व समुद्री नेटवर्क बनाने की योजना है, ताकि एशिया, पश्चिम एशिया और पश्चिम के बीच एकीकरण सुनिश्चित किया जा सके। पश्चिम एशिया में संकट के कारण यह परियोजना अभी शुरू नहीं हो सकी है।
उन्होंने कहा, "अच्छी बात है कि जी-7 के अध्यक्ष फ्रांस ने इस विषय को महत्व दिया है। आज की सच्चाई यह है कि जब विकास की बात होती है, तो सवाल सिर्फ सकल घरेलू उत्पाद या व्यापार के आंकड़ों का नहीं होना चाहिए। असली सवाल यह है कि विकास किसके लिए, किसके साथ और किस दिशा में है?" मोदी ने कहा कि भारत का अनुभव दिखाता है कि साझा विकास को केवल एक सपना नहीं, बल्कि हकीकत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा, "जब भारत आगे बढ़ता है, तो आबादी का छठा हिस्सा आगे बढ़ता है। इसलिए भारत की विकास यात्रा सभी के लिए समावेश, बड़े स्तर पर विकास और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की कहानी है।" उन्होंने कहा, "पिछले 12 वर्षों में भारत 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' के मंत्र पर आगे बढ़ा है। यही सिद्धांत दुनिया के साथ हमारे संबंधों का भी मार्गदर्शन करता है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि आईएमईसी से व्यापार को तेजी मिलेगी, आपूर्ति शृंखलाएं मजबूत होंगी और निवेश, रोजगार तथा नवाचार के नए अवसर पैदा होंगे। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ग्लोबल साउथ देशों की ताकतों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, "आज कई समाज वृद्ध होते जा रहे हैं, जबकि भारत और ग्लोबल साउथ के अन्य देशों के पास युवा प्रतिभा, उद्यमिता और कौशल की भरमार है।" प्रधानमंत्री ने कहा, "इस प्राकृतिक मेल-जोल का फायदा उठाने के लिए एक वैश्विक कौशल साझेदारी बनाई जानी चाहिए। इसमें सभी देश मिलकर लोगों के कौशल की पहचान करेंगे और भरोसेमंद कुशल कामगारों के एक देश से दूसरे देश में जाने को बढ़ावा देंगे।" मोदी ने कहा कि भारत साझा वैश्विक समृद्धि में विश्वास करता है और यह केवल कथनों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके कार्यों में भी दिखाई देता है। उन्होंने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इस बैठक में मौजूद अधिकांश देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। इससे साबित होता है कि भारत बंटवारे नहीं, बल्कि एकीकरण में; संरक्षणवाद नहीं, बल्कि साझेदारी में; और अनिश्चितता नहीं, बल्कि साझा समृद्धि में विश्वास करता है।" उन्होंने कहा, "आने वाले समय में भारत आप सभी के साथ मिलकर साझा आर्थिक संबंध प्रगाढ़ बनाने और अधिक स्थिर, भरोसेमंद तथा समृद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था बनाने के लिए काम करता रहेगा।" मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए फ्रांस में हैं। सम्मेलन में भारत को अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। 'जी-7' दुनिया की सात सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का समूह है, जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। यूरोपीय संघ भी इस समूह का सदस्य है। यह समूह अपने सदस्यों के लिए वैश्विक आर्थिक, वित्तीय और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा एवं समन्वय करने का प्रमुख मंच है। -
एवियन-लेस-बैंस (फ्रांस)) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 'कुशल और बहुत सख्त वार्ताकार' के रूप में प्रशंसा की और कहा कि वह भविष्य में भारत का दौरा करेंगे। दोनों नेताओं की यहां जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर मुलाकात हुई।
दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में कितने करीब है, इस सवाल के जवाब में ट्रंप ने मोदी के वार्ता कौशल की सराहना की। ट्रंप ने कहा, ''बहुत करीब।'' उन्होंने कहा, '''हम इस पर कुछ समय से काम कर रहे हैं। वह बहुत सख्त वार्ताकार हैं। सबसे सख्त लोगों में से एक।'' अपने विशिष्ट अंदाज में प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए ट्रंप ने कहा, ''वह देखने में सबसे खूबसूरत व्यक्ति हैं, वह बहुत अच्छे लगते हैं, वह एक फरिश्ते (एंजल) जैसे हैं। लेकिन वास्तव में वह बेहद सख्त हैं, वह एक 'घातक (किलर)' हैं।'' अमेरिकी राष्ट्रपति जब यह टिप्पणी कर रहे थे तो बगल में बैठे मोदी मुस्कुरा रहे थे। ट्रंप ने कहा, ''लेकिन वह देखने में इतने अच्छे लगते हैं कि वे आपको चौंका देते हैं। लोग कहते हैं कि वह बहुत अच्छे व्यक्ति हैं, लेकिन मैं कहता हूं कि सौदेबाजी के मामले में वह बेहद सख्त हैं।'' ट्रंप ने यह भी कहा कि मोदी भारतीय लोगों से बहुत प्रेम करते हैं। साथ ही उन्होंने 2019 में टेक्सास में आयोजित ''हाउडी मोदी!'' कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। जब मोदी ने 2020 में अहमदाबाद में आयोजित 'नमस्ते ट्रंप' कार्यक्रम का उल्लेख किया, तब ट्रंप ने कहा, ''हम भविष्य में भारत की यात्रा करेंगे।'' इस फ्रांसीसी शहर में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान ट्रंप ने ये टिप्पणियां कीं। उनकी व्यापक चर्चा प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते, रक्षा और सुरक्षा संबंधों तथा पश्चिम एशिया संकट पर केंद्रित रही। - एवियॉन (फ्रांस). ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के कुछ दिनों बाद, मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत जी7 नेताओं की बैठक में कहा कि सभी देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें। जी7 शिखर सम्मेलन के संपर्क सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार में रुकावटों से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है और कई भारतीय नागरिकों की जान गई है। पिछले हफ़्ते ओमान के तट पर एक वाणिज्यिक जहाज पर अमेरिकी सेना के हमले में चालक दल के तीन भारतीय सदस्यों की मौत के बाद भारत में बढ़ते गुस्से के बीच, मोदी ने समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के महत्व पर ज़ोर दिया। मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ अपनी द्विपक्षीय बातचीत से एक दिन पहले यह मुद्दा उठाया।'नयी साझेदारियां तैयार करने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से बनाने' के विषय पर यहां आयोजित सत्र में मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "हम पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष के कारण क्षेत्र में हमारे मित्र देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार में रुकावटों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, "यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें जो वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए सभी देशों को जोड़ते हैं। हमें यह पक्का करना होगा कि समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।" अपने संबोधन में, भू-राजनीतिक उथल-पुथल और घटनाक्रमों पर चर्चा करते हुए मोदी ने देशों के बीच "भरोसे" की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज सबसे अहम रणनीतिक संपत्ति खनिज, तकनीक या बाज़ार नहीं, बल्कि आपसी भरोसा है। उन्होंने कहा, "आज की दुनिया पहले से कहीं ज़्यादा आपस में जुड़ी और एक-दूसरे पर निर्भर है। किसी देश की ऊर्जा, भोजन, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा, साथ ही उसकी आर्थिक समृद्धि, सिर्फ़ उसकी अपनी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। आवाजाही, डेटा, पूंजी और प्रौद्योगिकी—ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।" प्रधानमंत्री ने कहा, "ऐसे समय में, साझेदारी का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। हालांकि, साझेदारी तभी सफल होती है जब उसके मूल में भरोसा हो।" मोदी ने 'ग्लोबल साउथ' के देशों की चिंताओं का भी ज़िक्र किया और कहा कि वे वैश्विक विकास में भागीदार बनना चाहते हैं।
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ब्रातिस्लावा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने स्लोवाकिया की राजधानी में स्कूली बच्चों की योग की प्रस्तुति देखी। मोदी अपने सप्ताहभर के यूरोप दौरे के तहत स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में हैं और उन्होंने वाराणसी पर आधारित एक आकर्षक प्रदर्शनी भी देखी। सोमवार को उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट किया, '' राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और मुझे स्लोवाकिया के स्कूली बच्चों के एक विशेष योग प्रदर्शन को देखकर प्रसन्नता हुई।'' उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, '' जैसे-जैसे दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की ओर बढ़ रही है, युवाओं द्वारा योग को अपनाते देखना बहुत सुखद है। यह भी खुशी की बात है कि योग कल्याण के माध्यम से लोगों को लगातार एकजुट कर रहा है।'' अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर साल 21 जून को मनाया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी के प्रस्ताव पर 2014 में संयुक्त राष्ट्र ने इसे योग दिवस की मान्यता दी थी। मोदी ने अपने पोस्ट में कहा, ''ब्रातिस्लावा में बनारस से जुड़ाव ।
उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट किया, कल ब्रातिस्लावा के राष्ट्रपति भवन में, राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और मैंने वाराणसी पर केंद्रित एक आकर्षक प्रदर्शनी देखी। हाल ही में इस शहर का दौरा करने वाले स्लोवाक कलाकारों की कृतियां भी इसमें शामिल थीं। कला और संस्कृति में वास्तव में एक अनूठी क्षमता होती है।'' मोदी ने कहा, ''इस प्रदर्शनी में जिनकी कृतियां प्रदर्शित की गईं, उन सभी को मेरी बधाई।
एक अलग पोस्ट में मोदी ने साहित्यिक विद्वान रॉबर्ट गैफ्रिक के साथ अपनी बातचीत साझा की, जिन्होंने दस प्रमुख उपनिषदों का संस्कृत से स्लोवाक भाषा में अनुवाद करने में पांच वर्ष समर्पित किए। मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, '' कल शाम (सोमवार) ब्रातिस्लावा में मैंने डॉ. रॉबर्ट गैफ्रिक से मुलाकात की, जिन्होंने उपनिषदों का स्लोवाक भाषा में अनुवाद करने के प्रयास का किया है।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''भारतीय इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिकता के प्रति उनका जुनून सराहनीय है।''
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वाशिंगटन. अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने शिकागो स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास परिसर में स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। स्वामी विवेकानंद एक महान दार्शनिक, चिंतक और आध्यात्मिक नेता थे। उन्होंने वेदांत और योग के संदेश को विश्वभर में पहुंचाया। अमेरिका में उन्हें विशेष रूप से वर्ष 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक और प्रेरणादायी संबोधन के लिए याद किया जाता है। विनय मोहन क्वात्रा ने प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "शिकागो स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण करना मेरे लिए गर्व का क्षण है। यह हमारे प्रवासी भारतीय समुदाय की ओर से मिला एक अनमोल उपहार है। सेवा, मानवता और सार्वभौमिक सद्भाव का उनका (स्वामी विवेकानंद) कालजयी संदेश आज भी हम सभी को प्रेरित करता है। हमारे जीवंत और ऊर्जावान भारतीय समुदाय से जुड़ने का अवसर मिलने के लिए मैं हृदय से आभारी हूं।" स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के अनावरण का समारोह रविवार को शिकागो स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास में आयोजित किया गया। प्रतिमा के अनावरण के बाद एक विशेष परिचर्चा का आयोजन भी किया गया, जिसमें निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, प्रवासी भारतीय संगठनों के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न समुदायों के प्रमुख नेताओं ने भाग लिया। दूतावास ने सोशल मीडिया पर बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत 'वंदे मातरम्' की भावपूर्ण प्रस्तुति से हुई, जिसने उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया। इसके बाद कई गणमान्य अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों तथा उनके वैश्विक योगदान पर प्रकाश डाला। भारतीय दूतावास के अनुसार, इस अवसर पर भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भारत की तेज आर्थिक प्रगति, देश में हो रहे सकारात्मक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों तथा लगातार मजबूत हो रही भारत–अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध नए आयाम प्राप्त कर रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
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ब्रातिस्लावा ।स्लोवाकिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां के प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारिक नेताओं से मुलाकात की। इस बैठक में भारत और स्लोवाकिया के बीच निवेश, तकनीकी सहयोग और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने के अवसरों पर व्यापक चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो के साथ मिलकर देश के प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारिक नेताओं से बातचीत की। बैठक में रेलवे, रक्षा, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।पीएम मोदी ने भारत और स्लोवाकिया के बीच बढ़ते बिजनेस-टू-बिजनेस संबंधों की सराहना की। उन्होंने हाल के वर्षों में भारत में कारोबार सुगमता बढ़ाने, पारदर्शी और स्थिर आर्थिक व्यवस्था विकसित करने तथा निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के उद्देश्य से किए गए प्रमुख सुधारों और नीतिगत पहलों की जानकारी दी।प्रधानमंत्री ने स्लोवाक कंपनियों को भारत में उपलब्ध व्यापक अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने विशेष रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल नवाचार, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर जोर दिया।उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में भारत द्वारा किए जा रहे सुधारों का स्वागत किया और देश की आर्थिक प्रगति पर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने भारत में निवेश बढ़ाने, तकनीकी साझेदारी विकसित करने और भारतीय कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने में रुचि दिखाई।बैठक में शामिल उद्योगपतियों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के संपन्न होने का स्वागत किया। उनका मानना है कि इसके लागू होने से व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे तथा दोनों पक्षों के उद्योगों को लाभ मिलेगा।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो ने रेलवे, रक्षा, ऑटोमोटिव, ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया।बैठक के दौरान परिवहन, हरित ऊर्जा, नई प्रौद्योगिकियों और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग को गहरा करने, निवेश प्रवाह बढ़ाने और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। -
ब्रातिस्लावा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्लोवाकिया की यात्रा के दौरान देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास)’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत और स्लोवाकिया के बीच मजबूत होते संबंधों और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जा रहा है।
स्लोवाकिया का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह किसी विदेशी देश की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया गया 33वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने स्लोवाकिया की सरकार और वहां के नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि ब्रातिस्लावा में ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास)’ प्राप्त कर वह सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान स्लोवाकिया के लोगों और सरकार के साथ-साथ भारत के 140 करोड़ नागरिकों का भी सम्मान है। प्रधानमंत्री ने इस पुरस्कार को भारत और स्लोवाकिया की स्थायी मित्रता को समर्पित किया।पीएम नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी के साथ हुई बातचीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बैठक में विनिर्माण, परिवहन, नवाचार, निवेश, ऊर्जा और जैव ईंधन जैसे अनेक विषयों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाओं और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और स्लोवाकिया के बीच डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। दोनों पक्षों ने निवेश संबंधों को मजबूत करने और नई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई।स्लोवाकिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वहां के प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारिक नेताओं से भी मुलाकात की। उन्होंने स्लोवाक कंपनियों को भारत में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने और निवेश बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो की मेजबानी में आयोजित बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, निवेश प्रवाह बढ़ाने तथा नवाचार, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने भारत की सुधार यात्रा और निवेशकों के लिए उपलब्ध अवसरों को भी रेखांकित किया।पीएम नरेंद्र मोदी ने स्लोवाक उद्योग जगत से भारत के साथ अपनी साझेदारी को और गहरा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत में तेजी से विकसित हो रहा आर्थिक और औद्योगिक वातावरण विदेशी निवेशकों के लिए अनेक नए अवसर प्रदान कर रहा है। -
ब्रातिस्लावा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो के साथ हुई बैठक को भारत-स्लोवाकिया संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने अपने रिश्तों को ‘कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप’ (व्यापक साझेदारी) का दर्जा देकर द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा प्रदान की है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि रॉबर्ट फित्सो के साथ उनकी बैठक बेहद सकारात्मक रही और यह भारत-स्लोवाकिया मित्रता के लिए एक विशेष क्षण है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए उन्हें ‘कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप’ के स्तर तक उन्नत किया गया है।प्रधानमंत्री ने बताया कि बैठक के दौरान ऑटोमोबाइल, रेलवे, उन्नत विनिर्माण (एडवांस मैन्युफैक्चरिंग) और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भी दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को नई गति प्रदान करेगा।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्लोवाकिया की साझेदारी में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से सहयोग के नए अवसर खुलेंगे। दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अंतरिक्ष जैसे उभरते क्षेत्रों में भी मिलकर काम करेंगे।पीएम नरेंद्र मोदी और रॉबर्ट फित्सो ने संयुक्त प्रेस वार्ता में बैठक के प्रमुख परिणामों की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह व्यापक साझेदारी आने वाले वर्षों में नए अवसरों, साझा समृद्धि और दोनों देशों के नागरिकों के उज्ज्वल भविष्य का आधार बनेगी। दौरे के दौरान तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। इनमें भारत और स्लोवाकिया के संबंधों को ‘कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप’ का दर्जा देना, आतंकवाद-रोधी सहयोग के लिए संयुक्त कार्य समूह (ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप) की स्थापना तथा नियमित कांसुलर संवाद शुरू करने का निर्णय शामिल है।दोनों देशों के बीच क्वांटम कम्युनिकेशन और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन के क्षेत्र में सहयोग समझौते हुए। इसके अलावा भारत के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचरोपैथी और स्लोवाक हेल्थ स्पा पीएस्टनी के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में साझेदारी स्थापित की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि भारत के प्राचीन उपनिषदों का स्लोवाक भाषा में अनुवाद दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता का उत्कृष्ट उदाहरण है।पीएम नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया में रह रहे भारतीय मूल के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि वे वहां की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नई व्यापक साझेदारी व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा, अंतरिक्ष, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग सहित अनेक क्षेत्रों में संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। -
वाशिंगटन. अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिन तक जारी रहे युद्ध को समाप्त करने व होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बन गई है और दोनों देशों के बीच समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार शाम 'ट्रुथ सोशल' पर यह घोषणा की, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव कम हुआ। अधिकारियों ने बताया कि शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे। ट्रंप ने कहा, ''इस्लामिक गणराज्य ईरान के साथ समझौते को अंतिम रूप दिया जा चुका है। सभी को बधाई।''
उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी समाप्त कर दी जाएगी। ट्रंप ने कहा, ''मैं मुक्त आवाजाही के लिए तत्काल होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की मंजूरी देता हूं। दुनिया के जहाजों, इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह होने दो।'' हालांकि, एक अन्य पोस्ट में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य शुक्रवार को समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने के बाद ही खोला जाएगा। यह समझौता ऐसे दिन हुआ जब ट्रंप अपना 80वां जन्मदिन मना रहे थे।
ट्रंप ने कहा, ''यह समझौता पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाएगा। मुझसे पहले कई राष्ट्रपतियों ने ईरान के साथ शांति स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन सभी विफल रहे।'' उन्होंने कहा, ''क्षेत्र के नेताओं को पहली बार ऐसा राष्ट्रपति मिला है, जो उन्हें वास्तविक शांति दिलाने में मदद कर सकता है। शुक्रवार को समझौते पर हस्ताक्षर होने के साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य खोल दिया जाएगा...।'' समझौते को अंतिम रूप दिए जाने से कुछ घंटे पहले बेरूत में हिजबुल्ला के ठिकानों पर इजराइल के हवाई हमलों के कारण तनाव बढ़ गया और ट्रंप की इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ तीखी बातचीत हुई। ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया को बताया कि उन्होंने नेतन्याहू और ईरानी वार्ताकारों, दोनों से नए हमले नहीं करने को कहा है।
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नीस (फ्रांस) . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को नीस में 'भारत इनोवेट्स 2026' कार्यक्रम का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया, जो भारत की डीप-टेक क्षमताओं को प्रदर्शित करता है। दोनों नेता स्टार्टअप प्रदर्शनी देखने पहुंचे और नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं तथा उद्यमियों से बातचीत की। 'भारत इनोवेट्स 2026' भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप, नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं और निवेशकों को वैश्विक नवाचार फंड और 'वेंचर कैपिटल फर्म' के साथ एक मंच पर लाता है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 'भारत इनोवेट्स 2026' में 13 अहम प्रौद्योगिकी क्षेत्र के 120 बेहतरीन स्टार्टअप और 20 से ज्यादा बेहतरीन संस्थानों के अलावा दुनियाभर से 350 से ज्यादा निवेशक और 'वेंचर कैपिटलिस्ट' हिस्सा ले रहे हैं। 'वेंचर कैपिटल फर्म' से आशय ऐसी निवेश कंपनियों से है, जो उच्च विकास क्षमता वाले स्टार्टअप और शुरुआती चरण के व्यवसायों में पूंजी लगाती हैं। वहीं, 'वेंचर कैपिटलिस्ट' उन निजी निवेशकों को कहते हैं, उच्च विकास क्षमता वाले स्टार्टअप और शुरुआती चरण के व्यवसायों में पूंजी निवेश करते हैं। मोदी और मैक्रों ने स्टार्टअप प्रदर्शनी का दौरा किया और क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, रक्षा, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य देखभाल, चिकित्सा प्रौद्योगिकी, एडवांस्ड मटीरियल और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप और नवोन्मेषकों से बातचीत की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों नेताओं ने भारत के युवा नवोन्मेषकों, स्टार्टअप संस्थापकों और शोधकर्ताओं से बातचीत की। उन्होंने कहा कि इनक्यूबेटर और स्टार्टअप "भविष्य के विकास इंजन" होंगे, जो नौकरियां और समृद्धि पैदा करेंगे तथा ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि 'भारत इनोवेट्स 2026' में हुई बातचीत "काफी समृद्ध और ज्ञानवर्धक" रही। उन्होंने नवाचार, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और उभरते हुए क्षेत्रों में भारत में मौजूद मौकों पर चर्चा करने के लिए निवेशकों और वेंचर कैपिटलिस्ट से मुलाकात की। मोदी ने कहा, "भारत की तरक्की उसकी प्रतिभा, उसके पैमाने, उसकी स्थिरता और उसके सुधारों पर आधारित है, जो उसे निवेश और नवाचार के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाते हैं।" मैक्रों ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "हम अपने लोगों के लिए प्रतिभा, निवेश और ठोस समाधानों का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं।" 'भारत इनोवेट्स 2026' 14 से 16 जून के बीच आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम 'भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष' का हिस्सा है, जिसका मकसद वैश्विक मंच पर भारत की नवाचार क्षमताओं को प्रदर्शित करना है।
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नीस (फ्रांस). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्टार्टअप, व्यापार, बुनियादी ढांचा और स्वास्थ्य समेत कई क्षेत्रों पर बातचीत की। विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने अहम अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। मोदी शनिवार रात फ्रांस के नीस शहर पहुंचे और मैक्रों के साथ 'भारत इनोवेट्स' कार्यक्रम का उद्घाटन किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "भारत-फ्रांस साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की, जिसमें उन्होंने भारत-फ्रांस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति का जायजा लिया।" जायसवाल ने लिखा, "दोनों नेताओं ने नवाचार, व्यापार एवं निवेश, टिकाऊ समाधानों, सुरक्षा, संस्कृति और दोनों देशों की जनता के स्तर पर संबंधों जैसे विषयों पर चर्चा की।" उन्होंने कहा, "इस बैठक के दौरान नवाचार और एआई, विज्ञान और अंतरिक्ष, स्टार्टअप और फिनटेक, व्यापार और बुनियादी ढांचा, परिवहन और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में कई परिणाम उभरकर सामने आए। दोनों नेताओं ने अहम अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए।" शनिवार को नयी दिल्ली से नीस के लिए रवाना होने से पहले मोदी ने कहा कि भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण में फ्रांस का एक खास स्थान है और यह दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों को और मजबूत करता है। यात्रा के दौरान मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे, जहां उनकी मुलाक़ात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दुनिया के अन्य नेताओं से होगी।
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काठमांडू,. नेपाल ने भारतीय आमों के आयात पर अपना रुख बदलते हुए कहा कि इन पर कोई प्रतिबंध नहीं है और मांग के अनुरूप तथा कुछ नियमों के तहत नेपाल के बाजारों में इन फलों के प्रवेश की अनुमति दी गई है। यह स्पष्टीकरण उन खबरों के कुछ दिन बाद सामने आया है, जिनमें नेपाल के अधिकारियों ने कहा था कि सरकार ने अत्यधिक कीटनाशक वाले भारतीय आमों के आयात को सीमित कर दिया है और सीमावर्ती क्षेत्रों, खासकर मधेश प्रांत में 'क्वारंटीन' सुविधाओं की कमी के कारण यह कदम उठाया गया है। कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि भारत से आमों के आयात पर कोई प्रतिबंध नहीं है। मंत्रालय के अधीन 'प्लांट क्वारंटीन एंड पेस्टिसाइड मैनेजमेंट सेंटर' ने कहा कि विभिन्न मीडिया और सोशल मीडिया मंचों पर भारतीय आमों पर प्रतिबंध संबंधी खबरें आने के बाद इस मामले पर उसका ध्यान गया। इसने कहा कि उसने भारत से आमों के आयात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। कुछ नियमों के तहत मांग के आधार पर नेपाल के बाजारों में इन फलों के प्रवेश की अनुमति दी गई है। कुछ दिन पहले मधेश प्रांत के भिट्टामोड़ 'क्वारंटीन' जांच चौकी पर भारत से आए आमों की एक बड़ी खेप को फलों में हानिकारक कीटों की आशंका के कारण रोक दिया गया था। मधेश प्रांत के भूमि प्रबंधन, कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय के प्रवक्ता मनीष कुमार पाल ने बताया कि हालांकि, भारतीय प्राधिकरणों द्वारा 'प्लांट हेल्थ सर्टिफिकेट' जारी किए जाने के बाद अब उस खेप को छोड़ दिया गया है। समाचार पत्र 'द राइजिंग नेपाल' के अनुसार, मधेश प्रांत के जनकपुरधाम में फल एवं सब्जी व्यापारियों के संघ के महासचिव भुवनेश्वर पुरबे ने पहले कहा था कि भारतीय आयात को रोकने से घरेलू बाजारों में कमी हो सकती है। उन्होंने सरकार को सलाह दी थी कि वह 'क्वारंटीन' प्रणाली को मजबूत करे और पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय उचित गुणवत्ता जांच के बाद भारतीय फलों को नेपाल के बाजारों में प्रवेश की अनुमति दे। - वाशिंगटन। अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमिटी के चेयरमैन माइकल मैककॉल ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो चीन दलाई लामा का नकली उत्तराधिकारी नियुक्त करने की कोशिश कर सकता है। रिपब्लिकन सांसद मैककॉल ने इस हफ्ते कमिटी की बैठक में एक महत्वपूर्ण संशोधन पेश किया, जिसमें साफ कहा गया है कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनना पूरी तरह से तिब्बती बौद्ध धर्मगुरुओं और उनके कार्यालय का आध्यात्मिक एवं धार्मिक मामला है, जिसमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) को कोई भूमिका नहीं मिलनी चाहिए।मैककॉल ने कहा, “अगर हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे, तो बीजिंग एक नकली दलाई लामा को सामने लाएगा। एक ऐसा आध्यात्मिक नेता जो तिब्बती लोगों के प्रति नहीं, बल्कि कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादार होगा।”उन्होंने आगे चेतावनी दी कि चीन इस नकली नेता का इस्तेमाल पूरे हिमालयी क्षेत्र — खासकर नेपाल, मंगोलिया और भारत की सीमा के पास अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए करेगा।मैककॉल ने 2024 में भारत के धर्मशाला में दलाई लामा से हुई अपनी मुलाकात को याद करते हुए कहा कि दलाई लामा बेहद गर्मजोशी, बुद्धिमत्ता और हास्य से भरे हुए व्यक्ति हैं। उन्होंने बताया कि दलाई लामा ने उनसे कहा था कि वे 110 साल तक जीने की योजना बना रहे हैं।हालांकि, मैककॉल ने कहा कि दलाई लामा के स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना के बावजूद, उत्तराधिकार के मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दलाई लामा पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनका उत्तराधिकारी “आजादी के माहौल” में चुना जाएगा, न कि चीन में। इस संबंध में दलाई लामा की ओर से कहा गया कि वे चीन में नहीं, बल्कि आजादी के माहौल में पुनर्जन्म लेंगे।मैककॉल ने याद दिलाया कि 2007 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने खुद को दलाई लामा के उत्तराधिकारी चुनने का “अधिकार” दे दिया था। उन्होंने कहा, “एक आधिकारिक तौर पर नास्तिक सरकार तिब्बती लोगों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है।”उन्होंने हाल ही में चीन द्वारा पारित “जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाले कानून” का भी जिक्र किया, जिसके जरिए बीजिंग अल्पसंख्यक समुदायों पर अपना नियंत्रण और मजबूत कर रहा है।यह संशोधन 2020 के द्विदलीय ‘तिब्बती नीति और समर्थन अधिनियम’ पर आधारित है। मैककॉल ने कहा कि उनका प्रस्ताव अमेरिकी नीति को स्पष्ट रूप से परिभाषित करेगा कि दलाई लामा का उत्तराधिकार तिब्बती लोगों और उनके धर्मगुरुओं का फैसला है, CCP का नहीं।मैककॉल ने अंत में अपील की कि दलाई लामा की इच्छा का सम्मान किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उनका उत्तराधिकारी उन्हीं के लोगों द्वारा चुना जाए, न कि उस सरकार द्वारा जिसने दशकों से तिब्बती संस्कृति और पहचान को मिटाने की कोशिश की है।
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दुबई. ईरान ने बुधवार को कहा कि उसने जॉर्डन में स्थित उस हवाई अड्डे पर मिसाइल हमला किया है, जहां अमेरिकी सैन्य बल तैनात हैं। हालांकि, जॉर्डन और अमेरिका दोनों ने जॉर्डन को निशाना बनाकर किए गए किसी भी हमले की अभी पुष्टि नहीं की। ईरान के अर्धसैन्य बल रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि उसने मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस पर मिसाइलें दागी हैं। इस एयर बेस पर अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमान और अन्य सैन्य विमान तैनात रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य के समीप अमेरिकी सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद अमेरिका ने बुधवार को ईरान पर हमले किए, जिसके बाद तेहरान ने इनका जवाब देने की चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दुर्घटना के लिए ईरान को दोषी ठहराया है।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई की कसम खाई, जिससे ईरान युद्ध में स्थायी युद्धविराम की संभावनाओं पर फिर सवाल खड़े हो गए। इस युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग अवरुद्ध हो गया है और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया है। इस बीच बहरीन में मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजने लगे, जहां अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है। तेहरान ने कहा कि उसने जवाबी कार्रवाई के तहत इस ठिकाने को निशाना बनाया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने कहा कि अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के लड़ाकू विमानों ने ईरान में ''वायु रक्षा प्रणालियों, जमीनी नियंत्रण स्टेशन और निगरानी रडार ठिकानों'' को निशाना बनाकर हमले किए। ईरान ने बंदर अब्बास और केश्म द्वीप के आसपास हमलों की पुष्टि की, लेकिन नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। सेंट्रल कमांड ने कहा, ''यह अभियान अमेरिकी बलों और क्षेत्रीय समुद्री मार्गों से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों पर हालिया हमलों के उसी तरह जवाब के रूप में चलाया गया।'' इसके बाद ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय और कुवैत में अमेरिकी सैनिकों वाले सैन्य अड्डे को ड्रोन से निशाना बनाया। हालांकि, बहरीन और कुवैत दोनों ने ऐसे किसी हमले को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की। ट्रंप ने इससे पहले सोशल मीडिया पर लिखा था कि ईरान ने जलडमरूमध्य के ऊपर गश्त कर रहे अमेरिकी विमान को मार गिराया। राष्ट्रपति ने कहा था कि अमेरिका को ''इस हमले का जवाब देना ही होगा।'' ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान के क्षेत्र के पास मौजूद विदेशी सैन्य बल ''लगातार खतरे मे'' हैं और बाद में उन्होंने अमेरिकी हमलों का जवाब देने की भी चेतावनी दी। अराघची ने 'एक्स' पर लिखा, ''ईरानी बल किसी भी हमले या खतरे को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ेंगे। यदि सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो हमारे क्षेत्र से दूर चले जाएं।'' अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को गिराए जाने और उसके बाद किए गए अमेरिकी हमलों ने दो महीने से लागू युद्धविराम को और कमजोर कर दिया। इससे एक दिन पहले ही युद्धविराम लागू होने के बाद पहली बार ईरान और इजराइल के बीच गोलेबारी हुई थी। - वाशिंगटन.। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास निशाना बनाए गए अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर में सवार चालक दल के दो सदस्यों को बचाने के लिए जिस ड्रोन नाव का इस्तेमाल किया गया, उसका निर्माण टेक्सास की एक कंपनी ने किया था, जिसके संस्थापकों में भारतीय-अमेरिकी इंजीनियर वैभव आल्टेकर भी शामिल हैं। 'सैरोनिक टेक्नोलॉजी' की ओर से विकसित ड्रोन नाव 'कोर्सेयर' से संचालित बचाव अभियान अमेरिकी सशस्त्र बलों की ओर से चलाया गया अपनी तरह का पहला मिशन था। अमेरिकी बल इस तरह के अभियानों के काफी समय से मानवरहित विमानों का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। कैप्टन टिम हॉकिंस ने मंगलवार को कहा कि यह एक स्वचालित समुद्री नाव से संचालित अमेरिका का पहला बचाव अभियान था, जिसे एक मानव संचालक दूर से निर्देशित कर रहा था। हॉकिंस के मुताबिक, 24 फुट लंबी 'कोर्सेयर' डीजल पर चलती है और 35 नॉट तक की अधिकतम रफ्तार अख्तियार कर सकती है। उन्होंने बताया कि यह ड्रोन नाव 1,000 पौंड तक का भार उठाने में सक्षम है और एक बार में 1,000 नॉटिकल मील की दूरी तय कर सकती है। 'सैरोनिक टेक्नोलॉजी' की 'लिंक्डइन प्रोफाइल' के मुताबिक, उसने स्वचालित समुद्री नाव के उत्पादन के लिए अमेरिकी नौसेना के साथ 39.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर का करार कर रखा है। 'नेवी सील' से 11 साल तक जुड़े रहे डीनो मवरुकास ने वैभव आल्टेकर, डग लैंबर्ट और रॉब लीहमन के साथ मिलकर सितंबर 2022 में 'सैरोनिक टेक्नोलॉजी' की स्थापना की थी। कंपनी का मुख्यालय टेक्सास के ऑस्टिन में है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले आल्टेकर 'सैरोनिक टेक्नोलॉजी' के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) हैं। कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार, आल्टेकर 'सैरोनिक टेक्नोलॉजी' की स्वचालित प्रणालियों और सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर के विकास का काम देखते हैं। वह 'फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियरिंग', 'प्रोडक्ट' और 'स्पेशल प्रोग्राम्स' के साथ-साथ 'सॉफ्टवेयर' टीम का नेतृत्व करते हैं, जिसमें उन्हें प्रोडक्ट अवधारणा, नेविगेशन, मशीन लर्निंग, कमांड एंड कंट्रोल और सिस्टम्स इंटीग्रेशन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले कर्मियों के साथ काम करने का मौका मिलता है। आल्टेकर सैन्य प्रौद्योगिकी कंपनी 'एंड्युरिल इंडस्ट्रीज' से भी जुड़े रहे हैं, जिसने रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी के लिए 'घोस्ट शार्क' ड्रोन पनडुब्बी सहित कई अन्य सैन्य उपकरणों का निर्माण किया है।
- दुबई. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए हेलीकॉप्टर के पायलट इसमें घायल नहीं हुए। पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान ईरान द्वारा आवागमन के लिए बंद किए गए इस जलडमरूमध्य के पास हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण मंगलवार सुबह तक स्पष्ट नहीं हुए। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने मंगलवार को बताया कि इजराइल के हमले में उसकी हवाई रक्षा इकाइयों के कम से कम दो सदस्य मारे गए। अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए जाने के बाद से शुरू हुए युद्ध ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है।ट्रंप ने न्यूयॉर्क में बॉस्केटबॉल स्पर्धा एनबीए का फाइनल मैच देखने के बाद जॉन एफ. केनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के पायलट सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, ''पायलट ठीक हैं। कोई घायल नहीं हुआ। हम कल एक रिपोर्ट जारी करेंगे। लेकिन पायलट सुरक्षित हैं।''न्यूयॉर्क टाइम्स ने सबसे पहले खबर जारी की थी कि अमेरिकी सेना का एक अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास गिर गया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह हेलीकॉप्टर किन हालात में गिरा। अमेरिकी सेना की केंद्रीय कमान और रक्षा विभाग ने 'द एसोसिएटिड प्रेस' के प्रतिक्रिया के अनुरोधों पर तत्काल जवाब नहीं दिया। अपाचे हेलीकॉप्टर अमेरिकी सेना के लिए ऐसे समय में एक प्रमुख परिसंपत्ति रहा है, जब ईरान के कच्चे तेल के टैंकरों पर नाकाबंदी लागू की जा रही है ताकि तेहरान पर समझौते के लिए दबाव बढ़े। संयुक्त अरब अमीरात ने भी ईरान युद्ध के दौरान ईरानी ड्रोनों को मार गिराने के लिए इन हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया है। उधर, ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को लेकर नए सिरे से विश्वास प्रकट किया।उन्होंने कहा, ''दो से तीन दिन में हमें समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है।'' हालांकि उन्होंने इस नई उम्मीद के लिए कोई वजह नहीं बताई। हेलीकॉप्टर दुर्घटना सोमवार को ईरान और इजराइल के एक दूसरे पर हमले किए जाने के बाद हुई, जिससे ईरान युद्ध में कमजोर पड़ते संघर्ष विराम को मजबूती प्रदान करने के मकसद से की जाने वाली बातचीत जोखिम में पड़ गई।
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कहा- देश को बहुत नुकसान हो रहा
वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संघीय अदालत के उस आदेश की आलोचना की, जिसमें एक लाख डॉलर के एच-1बी वीजा शुल्क को रद्द कर दिया गया। ट्रंप ने यह भी कहा कि ऐसे अदालती फैसले देश को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में एनबीए फाइनल देखने के बाद न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, ''ये न्यायाधीश हमें बहुत परेशान कर रहे हैं, यह बिलकुल पागलपन है। वे हमें बहुत अधिक परेशान कर रहे हैं... वे हमारे देश को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं।'' मैसाचुसेट्स के एक संघीय न्यायाधीश ने सोमवार को ट्रंप प्रशासन द्वारा उच्च कुशल श्रमिकों के लिए एच-1बी वीजा पर लगाए गए एक लाख डॉलर के शुल्क को रद्द कर दिया। शुल्क आदेश को कैलिफोर्निया और 19 अन्य प्रांतों ने चुनौती दी थी। न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने फैसला सुनाया कि एच-1बी आवेदनों पर ट्रंप द्वारा लगाया गया एक लाख डॉलर का शुल्क गैरकानूनी था, क्योंकि इसे अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी नहीं मिली थी। ट्रंप ने पिछले साल सितंबर में एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें नये एच-1बी वीजा आवेदनों के लिए एक लाख डॉलर का शुल्क निर्धारित किया गया था। व्हाइट हाउस की एक प्रवक्ता ने संकेत दिया कि इस आदेश को अपीलीय अदालत में चुनौती दी जाएगी।
प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा, ''एच-1बी कार्यक्रम का दशकों से दुरुपयोग होता रहा है और राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरकार इसे ठीक करने के लिए कदम उठाया था।'' रोजर्स ने यह भी कहा, ''वाशिंगटन में एक संघीय न्यायाधीश पहले ही लगभग इसी तरह के एक आदेश को बरकरार रख चुके हैं, और प्रशासन को विश्वास है कि अपील में यह आदेश पलट दिया जाएगा। -
तेल अवीव में भारतीय दूतावास
तेल अवीव. इजराइल और ईरान के मध्य फिर से बढ़ते हमलों के बीच तेल अवीव स्थित भारतीय मिशन ने इजराइल में रह रहे भारतीय नागरिकों को ''अत्यधिक सतर्कता बरतने, स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने और देश की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। भारतीय दूतावास ने सोमवार को जारी एक परामर्श में कहा, "क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए इजराइल में सभी भारतीय नागरिकों को हर समय अत्यधिक सावधानी बरतने और सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।" ईरान ने रविवार शाम से इजराइल पर दर्जनों मिसाइल दागीं, जिसके जवाब में इजराइल ने भी कार्रवाई की, जिससे क्षेत्र में बड़े तनाव और संभावित गंभीर स्थिति की आशंका बढ़ गई है। परामर्श में कहा गया है, "भारतीय नागरिकों को इजराइली प्राधिकारियों और होम फ्रंट कमांड द्वारा जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों और निर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी जाती है (अद्यतन निर्देश वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं)।'' भारतीय नागरिकों को अपने आवास या कार्यस्थल के निकट उपलब्ध सुरक्षित आश्रयों के बारे में जानकारी रखने और उनके पास रहने की सलाह दी गई है। परामर्श में यह भी कहा गया है कि अगले आदेश तक इजराइल के भीतर सभी गैर-जरूरी यात्रा से बचा जाए। इसमें कहा गया है कि नागरिकों को स्थानीय समाचार और आधिकारिक सूचनाओं पर लगातार नजर रखनी चाहिए। इजराइल में रहने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या पिछले ढाई वर्षों में बढ़कर 40,000 से अधिक हो गई है, जो पूरे देश में फैले हुए हैं। भारतीय मिशन ने आपात स्थिति के लिए 24x7 हेल्पलाइन भी जारी की है।
दूतावास ने कहा कि वह संबंधित प्राधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और आवश्यकता अनुसार आगे भी अद्यतन जानकारी जारी करता रहेगा।



























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