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मेरठ (उप्र)/ मेरठ में सौरभ राजपूत की हत्या और 'नीला ड्रम' कांड के तौर पर चर्चित हुए मामले की दोषी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को मौत की सजा भले ही बुधवार को सुनाई गई, लेकिन दोनों फैसला सुनाये जाने से दो दिन पहले से ही खासे बेचैन थे। वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि सजा सुनाए जाने से पहले मुस्कान और साहिल परेशान तथा बेचैन नजर आ रहे थे और दोनों ने मंगलवार की रात और बुधवार सुबह बहुत कम खाना खाया और पिछले कुछ दिनों से वे ठीक से सो भी नहीं पा रहे थे।
शर्मा ने बताया कि मुस्कान पिछले तीन-चार दिनों से अपनी बड़ी बेटी से मिलने की गुजारिश कर रही है। उन्होंने बताया कि करीब सात साल की बच्ची को अभी मुस्कान से मिलवाने के लिए जेल नहीं लाया गया है। उन्होंने बताया कि जेल के नियमों के तहत छह साल की उम्र तक ही संतान अपनी मां के साथ रह सकती है। शर्मा ने यह भी बताया कि मुस्कान अपने साथ जेल में ही रह रही अपनी 10 महीने की बेटी के भविष्य को लेकर चिंतित है और वह इस बारे में सवाल भी करती रही है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि साहिल जेल में खेतीबाड़ी का काम करता था लेकिन उसने पिछले कुछ दिनों से यह कहते हुए वह काम छोड़ दिया था कि सजा सुनाए जाने के बाद वह फिर काम करेगा। सौरभ राजपूत की हत्या तीन मार्च 2025 की रात को कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, मुस्कान ने अपने पति सौरभ को कथित तौर पर मादक पदार्थ देकर बेहोश किया और फिर साहिल की मदद से चाकू से वार कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उन्हें एक नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से सील कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश चले गए थे और पुलिस ने उन्हें 18-19 मार्च 2025 को गिरफ्तार किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में गवाह और साक्ष्य पेश किए और करीब 126 तारीखों तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने 30 सितंबर को दोनों को दोषी ठहराया था। -
मेरठ (उप्र). मेरठ के चर्चित सौरभ हत्याकांड में दोषी करार दी गयी उसकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को एक स्थानीय अदालत ने फांसी की सजा सुनायी है। जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे ने बताया कि जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में बुधवार को सजा पर सुनवाई के बाद दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनायी गयी। उन्होंने बताया कि गत 30 सितंबर को सौरभ राजपूत हत्याकांड मामले में दोषी करार दिये गये साहिल और मुस्कान जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अदालत के समक्ष पेश हुए, जिसके बाद सजा पर बहस और दोषियों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने के लिए सुनवाई हुई। चौबे ने बताया कि सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने दोनों से पूछा कि वे सजा के संबंध में कुछ कहना चाहते हैं या नहीं। जेल प्रशासन के मुताबिक, मुस्कान और साहिल को अलग-अलग पेश किया गया और दोनों ने अपना पक्ष रखा। वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि सुनवाई संक्षिप्त रही। उन्होंने बताया कि अदालत ने दोनों से विभिन्न बिंदुओं पर सवाल किए, जिनमें फॉरेंसिक रिपोर्ट से जुड़े सवाल भी शामिल थे। हालांकि, उन्होंने सवालों का विस्तृत ब्योरा साझा करने से इनकार किया। अभियोजन के मुताबिक, सौरभ राजपूत की हत्या मार्च 2025 में की गई थी। आरोप था कि मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पति की हत्या की और शव के टुकड़े कर उन्हें नीले ड्रम में डालकर उसे सीमेंट से सील कर दिया था। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में गवाह और साक्ष्य पेश किए और करीब 126 तारीखों तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने 30 सितंबर को दोनों को दोषी ठहराया था।
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अमेठी (उप्र) . अमेठी के गौरीगंज से विधायक समेत समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायक बुधवार को केंद्रीय मंत्री एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए। गौरीगंज में आयोजित भाजपा के सदस्यता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ईरानी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस निर्वाचन आयोग को निशाना बनाकर देश में अराजकता फैलाने का काम कर रही है और लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। ईरानी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने 'युवराज' को 'शहंशाह' बनाना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस कई विपक्षी दलों को एकजुट कर ले, तब भी उसे सफलता नहीं मिलेगी। इस कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के बागी विधायकों राकेश प्रताप सिंह (गौरीगंज), अभय सिंह (गौसाईगंज) और विनोद चतुर्वेदी (कालपी) ने अपने समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। चौधरी ने दावा किया कि भाजपा 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अमेठी और रायबरेली ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में निर्णायक जीत हासिल करेगी और लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी। ईरानी ने कहा कि 1989 से कांग्रेस की सरकार उत्तर प्रदेश में नहीं है और वे लगातार नौ चुनाव हारे हैं।
अमेठी की पूर्व सांसद ईरानी ने कहा, ''गांधी परिवार के अंदर इतना साहस नहीं है कि अमेठी से अकेले चुनाव लड़ सके। अमेठी से चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस को सपा की साइकिल का सहारा लेना पड़ता है।'' उन्होंने आरोप लगाया, ''आज दिल्ली में कांग्रेस निर्वाचन आयोग को मोहरा बनाकर भारत के लोकतंत्र को कुचलना चाहती है, लेकिन उसके इस मंसूबे को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।'' सदस्यता ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए पंकज चौधरी ने कहा, ''भारत किसी की जागीर नहीं है। देश की जनता जाग चुकी है, जाति और परिवारवादी राजनीति का खात्मा शुरू हो गया है। देश की जनता सपा और कांग्रेस को रसातल में भेजने का काम करेगी।'' -
नई दिल्ली। बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में हुई भीषण नाव दुर्घटना में 13 बच्चों की जान चली गई। इस दर्दनाक घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है और पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा भी की है। इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने जानकारी दी कि हादसे में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायल हुए लोगों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी।प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर कहा कि वैशाली में नाव पलटने की घटना में हुई मौतें बेहद दुखद और पीड़ादायक हैं। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की हर संभव मदद कर रहा है।इससे पहले बिहार सरकार मृतकों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान कर चुकी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रशासन को राहत-बचाव कार्यों में तेजी लाने और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार देर शाम वैशाली के राघोपुर थाना क्षेत्र में एक छोटी नाव पर 15 से 20 बच्चे भोज में शामिल होने जा रहे थे। अचानक नाव असंतुलित होकर पलट गई और बच्चे गंगा नदी में डूब गए। स्थानीय लोगों और प्रशासन की संयुक्त मदद से चलाए गए बचाव अभियान में अब तक 13 बच्चों के शव बरामद हो चुके हैं। मृतकों की पहचान मीरा कुमारी, निशु कुमारी, अनिशा कुमारी, सुनीता कुमारी, आर्यन कुमार, मोहन कुमार, अमृता कुमारी, अंकिता कुमारी, पिंकी कुमारी, नमन कुमार, सिकी कुमारी, भोनू कुमारी और सोनम कुमारी के रूप में की गई है। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल छाया हुआ है। प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस घटना पर दुख जताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। (
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्माण्डा की पूजा की और सभी के जीवन में नई उम्मीद, खुशी, समृद्धि तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “नवरात्रि के अवसर पर, आज देवी माता के चौथे स्वरूप, मां कूष्माण्डा की पूजा का दिन है। उनकी असीम ऊर्जा हमारे सभी देशवासियों के जीवन में नई उम्मीद, खुशी, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य लाए।”
पीएम मोदी ने ‘विजयवाडाल्लो वेलिसिना दुर्गाम्मा, दुर्गा देवी डिवोशनल सॉन्ग्स तेलंगाना फोक्स’ का यूट्यूब लिंक भी साझा किया, जिसमें देवी को समर्पित भक्ति गीत हैं। इसके साथ उन्होंने देवी मां को समर्पित एक भक्तिपूर्ण प्रार्थना भी पोस्ट की। प्रार्थना में कहा गया है, “हे मां नारायणी! आप सभी शुभ चीजों में सबसे शुभ हैं। आप दैवीय कृपा और परोपकार का स्वरूप हैं, और सभी नेक इच्छाओं और प्रिय कामनाओं को पूरा करने वाली हैं। आप शरण में आने वालों की रक्षक हैं, त्रिनेत्रधारी देवी हैं और गोरे रंग वाली मां गौरी हैं; हे ब्रह्मांड की दिव्य माता, मैं आपको सादर नमन करता हूं।”उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन शुभकामनाएं दीं। एक्स पर उन्होंने लिखा, “मां भगवती के चौथे स्वरूप, मां कूष्माण्डा के चरणों में बार-बार नमन। मां की कृपा सभी भक्तों के जीवन में स्वास्थ्य, खुशी, समृद्धि, ऊर्जा और सकारात्मकता लाए—यही प्रार्थना है। जय मां कूष्माण्डा।”दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मां कूष्माण्डा को ब्रह्मांड की आदि सृजन शक्ति बताते हुए कहा, “नवरात्रि के पवित्र चौथे दिन, ब्रह्मांड की आदि सृजन शक्ति, दिव्य मां कूष्माण्डा के चरण-कमलों में सादर नमन। जिनकी सौम्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना हुई और जिनकी दिव्य आभा से संपूर्ण सजीव और निर्जीव जगत प्रकाशित है, वे मां कूष्माण्डा ही समस्त सृष्टि में जीवन, ऊर्जा और चेतना का आधार हैं। जगत-जननी माँ की कृपा से सर्वत्र मंगल हो और सभी का कल्याण हो।” शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन भक्त देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्माण्डा की पूजा करते हैं। वे सृजनात्मक ऊर्जा, ऊष्मा और नई शुरुआत की प्रतीक मानी जाती हैं। हिंदू परंपरा के अनुसार, मां कूष्माण्डा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की और उसमें प्रकाश तथा ऊर्जा का संचार किया। भक्त अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि, शक्ति और सुख का आशीर्वाद पाने के लिए उनकी आराधना करते हैं। शारदीय नवरात्रि का नौ दिवसीय उत्सव देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित है। हर दिन का अपना विशेष धार्मिक महत्व है। इस पर्व का समापन विजयादशमी यानी दशहरा के साथ होता है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। -
नयी दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि आर्थिक सुदृढ़ता राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे का अभिन्न अंग है और भारतीय अर्थव्यवस्था ने बाहरी कारकों से उत्पन्न व्यवधानों को झेलने की अपनी क्षमता बार-बार साबित की है। उन्होंने यहां राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एनडीसी) के 66वें पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि आज राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य क्षमताओं तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नवाचार को व्यावहारिक समाधान में बदलने के वास्ते वैज्ञानिक संस्थानों और सशस्त्र बलों के बीच करीबी सहयोग जरूरी है। राष्ट्रपति ने कहा कि हाल के संघर्षों ने ऐसी किफायती प्रौद्योगिकियों के महत्व को रेखांकित किया है, जो उन्नत रक्षा प्रणालियों की पूरक हों और उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में नवाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संबंध मजबूत करने में सरकारी पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने स्वदेशी अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की अनुसंधान, विकास एवं नवाचार योजना का उल्लेख किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि यह योजना न केवल अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी (डीप-टेक) से जुड़े स्टार्टअप को समर्थन देती है, बल्कि रणनीतिक जरूरतों, आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के विकास में भी मदद करती है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, ''आर्थिक सुदृढ़ता राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे का अभिन्न अंग है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने बाहरी कारकों से उत्पन्न व्यवधानों को झेलने की अपनी क्षमता बार-बार साबित की है। भारत ने ऐसा अपनी रणनीतिक निर्णय लेने की स्वतंत्रता से समझौता किए बिना किया है।'' राष्ट्रपति ने कहा कि प्राचीन भारत के कई ग्रंथों में सुरक्षा संबंधी प्रतिक्रिया तंत्र और उन कर्तव्यों का विस्तार से वर्णन किया गया है, जिनसे एक शासक को अवगत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि रामायण और महाभारत में राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शासक द्वारा उठाए जाने वाले विभिन्न कदमों का विस्तार से वर्णन किया गया है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इसी तरह, महाभारत के शांति पर्व में युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से पूछा है कि एक शासक को शासन कैसे करना चाहिए। इसके विस्तृत उत्तर में भीष्म ने राज्य संचालन के विभिन्न पहलुओं तथा योग्य शासक के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा, ''भीष्म राज्य की रक्षा और शत्रुओं को परास्त करने की रणनीतियों के बारे में बताते हैं, जिनमें गुप्तचरों के नेटवर्क का प्रबंधन भी शामिल है। भीष्म की सीख सुरक्षा से आगे जाती है। वह सामाजिक एकजुटता के साथ सुरक्षा पर जोर देते हैं।
धर्मसम्मत शासन की अपनी अवधारणा में भीष्म आर्थिक संसाधनों, कूटनीति, रक्षा और आंतरिक शांति को इसके अभिन्न अंग बताते हैं।'' मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के संकाय सदस्यों और पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सहित कई देशों ने माना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के भविष्य का परिदृश्य क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बीच तालमेल पर आधारित होगा। उन्होंने कहा, ''अंतरिक्ष आधारित क्षमताएं भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो गई हैं। विज्ञान, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। यह प्रौद्योगिकी रणनीतिक निर्णय लेने में लगातार अधिक मददगार साबित होने वाली है।'' भारतीय सशस्त्र बलों, नागरिक सेवाओं और मित्र देशों के वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, जिससे नयी और जटिल चुनौतियां सामने आ रही हैं। -
नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने की तैयारी के बीच उप निर्वाचन आयुक्तों के नेतृत्व में आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन राज्यों में तैयारियों का जायजा लेना शुरू कर दिया है। आयोग की एक टीम फिलहाल उत्तराखंड के दौरे पर है। आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में अधिकारी मणिपुर और पंजाब का दौरा करेंगे। गोवा का दौरा भी प्रस्तावित था, लेकिन अब यात्रा की तारीखों में बदलाव किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के दौरे को लेकर अभी कोई जानकारी नहीं है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटों पर चुनाव होना है। आमतौर पर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों वाली 'पूर्ण आयोग' की टीम चुनाव वाले राज्यों का दौरा करती है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 22 मई को समाप्त हो रहा है, जबकि 60 सदस्यीय मणिपुर, 40 सदस्यीय गोवा, 117 सदस्यीय पंजाब और 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधान निर्वाचन आयोग को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने से पहले भी चुनाव कराने की अनुमति देते हैं। चुनाव की तैयारियों के तहत उत्तर प्रदेश और गोवा ने मतदान में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) और वीवीपैट मशीनों की 'प्रथम स्तर की जांच' (एफएलसी) शुरू कर दी है। एफएलसी के दौरान इन दोनों उपकरणों में तकनीकी खामियों की जांच भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) के इंजीनियर करते हैं। ये दोनों सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां इन उपकरणों का निर्माण करती हैं। खराब मशीनों को मरम्मत या बदलने के लिए निर्माताओं के पास वापस भेज दिया जाता है।
राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में दोनों मशीनों की जांच के लिए 'मॉक पोल' भी कराया जाता है। चुनाव की तैयारियों में एफएलसी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। निर्वाचन आयोग एक कैलेंडर जारी करता है, जिसका राज्यों को पालन करना होता है। मशीनों की ये जांच भी उसी कार्यक्रम का हिस्सा है। एफएलसी के दौरान कंट्रोल यूनिट और बैलेट यूनिट में पिछले चुनावों से जुड़ा कोई भी डेटा पूरी तरह मिटा दिया जाता है। सभी जांचों में सफल होने वाली यूनिट पर 'एफएलसी ओके' का निशान लगाया जाता है और चुनाव की तैयारियों के अगले चरणों से पहले अनधिकृत पहुंच रोकने के लिए उसे विशेष गुलाबी कागजी सील से सील कर दिया जाता है। एक ईवीएम में कम से कम एक बैलेट यूनिट, एक कंट्रोल यूनिट और एक वीवीपैट मशीन होती है। -
देहरादून. निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 25 वर्ष पूरे होने पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ हरकी पैड़ी पर गंगा पूजन और आरती की। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन के साथ ही देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। हरिद्वार में गंगा तट पर स्थित मेला नियंत्रण भवन में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल होने से पहले मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों ने हरकी पैड़ी पर मां गंगा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और आरती की। धामी ने प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन के साथ ही देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की कामना भी की। हरिद्वार में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक का आयोजन प्रदेश के विभिन्न जिलों में कैबिनेट बैठकें करने की राज्य सरकार की पहल के तहत किया गया। इससे पहले, चार अक्टूबर को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक चंपावत जिले के बनबसा में आयोजित की गई थी।
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मुंबई. तटवर्ती और उथले समुद्री क्षेत्र में चलने वाले तीसरे पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) 'मंगरोल' को सोमवार को यहां भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। इससे नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है खासकर तटीय समुद्री क्षेत्रों में, जहां बड़े युद्धपोतों को संचालन संबंधी सीमाओं का सामना करना पड़ता है। कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) द्वारा निर्मित यह पोत समुद्री गश्ती विमानों, हेलीकॉप्टरों और अन्य युद्धपोतों के साथ मिलकर काम कर सकता है। यह दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उनके खतरे से निपटने में सक्षम है। इस पोत के नौसेना में शामिल होने से बंदरगाहों, समुद्री पत्तनों और तटीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा करने की नौसेना की क्षमता बढ़ेगी। इसके साथ ही, यह बेड़े के व्यापक अभियानों में भी मदद करेगा। नौसेना की पश्चिमी कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्सायन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच आईएनएस मंगरोल को नौसेना में शामिल किया जाना विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि समुद्र अब केवल व्यापार और संपर्क के माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, तकनीकी बदलाव और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के केंद्र भी बन गए हैं। वात्सायन ने कहा कि भारत की विस्तृत तटरेखा, द्वीपों और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों को देखते हुए एक विश्वसनीय, त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम और युद्ध के लिए तैयार नौसेना बनाए रखना बेहद जरूरी है। आईएनएस मंगरोल के कमांडिंग ऑफिसर यू. शरण कुमार ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र भू-राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई देशों की ओर से पनडुब्बियों की तैनाती में काफी वृद्धि हुई है। कुमार ने कहा कि ऐसे में पानी के भीतर से उत्पन्न होने वाले खतरों, उनकी आशंका तथा उनका पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने की आवश्यकता पहले के मुकाबले कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा, ''इन घटनाओं के परिदृश्य में आईएनएस मंगरोल विशेष रूप से नौसेना की रक्षा क्षमता और समग्र रूप से भारत के समुद्री हितों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।'' उन्होंने कहा कि पानी के भीतर का क्षेत्र हमेशा से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है।
कुमार ने कहा, ''समुद्र की सतह पर जो दिखाई देता है, उसके विपरीत पानी के भीतर क्या मौजूद है, यह दिखाई नहीं देता। इसलिए पहली चुनौती पानी के भीतर किसी चीज का पता लगाना है। दूसरी चुनौती यह पहचानना है कि पानी के भीतर क्या मौजूद है। तीसरी चुनौती उस लक्ष्य के खिलाफ कार्रवाई करना है।'' उन्होंने कहा, ''यह एक बेहद विशिष्ट क्षेत्र है। दुनिया के बहुत कम देशों के पास इस तरह के अभियान चलाने की क्षमता है। भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जो ऐसे अभियान चलाने में सक्षम हैं। आईएनएस मंगरोल इसमें बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।'' कुमार ने कहा कि आईएनएस मंगरोल उथले पानी में भी अभियान चला सकता है, जहां बड़े युद्धपोत काम नहीं कर सकते। इस पोत की बहुमुखी क्षमता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों (एलआईएमओ) के लिए भी किया जा सकता है। कुमार ने कहा, ''इसलिए हम कह सकते हैं कि यह पोत कई आयामों में नौसेना की क्षमता को मजबूत करेगा।''
इस पोत को नौसेना में शामिल किया जाना भारत की स्वदेशी पोत निर्माण क्षमताओं में हो रही वृद्धि को दर्शाता है। इस पोत का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले के तटीय शहर और मछली पकड़ने वाले प्रमुख बंदरगाह मंगरोल के नाम पर रखा गया है। यह पोत पूर्ववर्ती आईएनएस मंगरोल (एम85) की विरासत को आगे बढ़ाता है। पूर्ववर्ती पोत एक बारूदी सुरंग-रोधी पोत था, जिसने अप्रैल 2004 तक भारतीय नौसेना में सेवाएं दी थीं। इस नए पोत का नामकरण नौसेना की उस परंपरा को जारी रखता है, जिसके तहत उसके पूर्ववर्ती युद्धपोतों की विरासत को संरक्षित किया जाता है। नौसेना ने बताया कि 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित 'मंगरोल' युद्धपोतों के डिजाइन, निर्माण तथा उन्नत हथियारों और सेंसरों को एकीकृत करने की भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। तटीय और कम गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने के लिए तैयार 'मंगरोल' आधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस है। इनमें 'अभय' हल-माउंटेड सोनार, हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर और 'मारीच' उन्नत टॉरपीडो डिकॉय प्रणाली शामिल हैं। तीन डीजल इंजनों और वॉटरजेट प्रणोदन प्रणाली से संचालित यह पोत उथले समुद्री क्षेत्रों में बेहद कुशलता से दिशा बदलने और संचालन करने में सक्षम है। यह पानी के भीतर निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों और बारूदी सुरंगों से जुड़े अभियानों को अंजाम देने में भी सक्षम है। वात्सायन ने कहा कि भारतीय नौसेना के बेड़े का विस्तार रणनीतिक जरूरतों को दर्शाता है। नौसेना ने 2026 में अब तक 10 पोतों को अपने बेड़े में शामिल किया है और इस साल के अंत तक आठ अन्य पोतों को शामिल किए जाने की संभावना है। वात्सायन ने कहा, ''वर्तमान में हमारे पास 151 प्लेटफॉर्म हैं, जिनमें 131 पोत और 20 पनडुब्बियां शामिल हैं। भारतीय शिपयार्ड में फिलहाल 42 पोतों का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा, 69 अन्य पोतों, छह पनडुब्बियों और 120 तेज अवरोधन नौकाओं के लिए आवश्यकता की स्वीकृति दी जा चुकी है।'' वाइस एडमिरल ने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में भारतीय नौसेना के बेड़े में 170 से अधिक प्लेटफॉर्म होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि हर 40 से 50 दिन में एक नया पोत नौसेना में शामिल किया जा रहा है। -
नई दिल्ली। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत के नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से अगले डेढ़ साल में देश को कुल $85 ट्रिलियन GDP वाले विकसित देशों के बाजारों तक खास पहुंच मिलेगी। ‘दिल्ली डायलॉग: भविष्य के लिए तैयार भारत की नीतियां’ कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा, “हम ग्लोबल मार्केटप्लेस का हिस्सा बनना चाहते हैं और लोगों, नौकरियों, स्टार्टअप्स तथा युवाओं के लिए नए आइडिया लाने के मौके बनाना चाहते हैं। इस प्रक्रिया में हम दोहरी रणनीति अपनाएंगे—दुनिया की बेहतरीन टेक्नोलॉजी से जुड़ना और ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना जहां नौकरी व बिजनेस की ग्रोथ की ज्यादा संभावना हो।” उन्होंने टूरिज्म को ग्रोथ वाले क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि यह AI-प्रूफ है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ इसकी क्षमता को और बेहतर बना सकता है।
मंत्री ने बताया कि आज भारत की अर्थव्यवस्था $4 ट्रिलियन की है और IMF के अनुसार परचेजिंग पावर पहले से $16 ट्रिलियन है। 1.4 अरब की आबादी, डेमोग्राफिक फायदा और तेज ग्रोथ इसे कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं से अलग बनाती है, जो बढ़ती उम्र और धीमी ग्रोथ से जूझ रही हैं। FTA बातचीत में भारत की रणनीति स्पष्ट है। पीयूष गोयल ने कहा, “ट्रेड डील पर बातचीत में मेरा पक्ष बहुत सीधा है। बातचीत शुरू होने से पहले कमजोर सेक्टर की पहचान की जाती है और ज्यादा मार्केट एक्सेस के संभावित असर का सावधानी से आकलन किया जाता है।”सरकार विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए कौन से सेक्टर खोले जा सकते हैं और किनकी सुरक्षा जरूरी है, यह तय करने से पहले संवेदनशील क्षेत्रों की लिस्ट बनाती है—खासकर किसान, मछुआरे और MSME से जुड़े क्षेत्रों की।गोयल ने जोर दिया कि भारत हर देश की आर्थिक संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए बातचीत करता है। उन्होंने कहा, “ज्यादातर बातचीत मैं इस बुनियादी नियम के साथ शुरू करता हूं—आप मेरी भावनाओं का सम्मान करें, मैं आपकी भावनाओं का सम्मान करूंगा। इससे बातचीत आसान हो जाती है।” -
जोधपुर. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत अपने क्षेत्र और उससे बाहर हो रहे घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहा है और उनके रणनीतिक प्रभावों का आकलन कर रहा है क्योंकि दुनिया आधुनिक युद्ध एवं वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। सिंह ने जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर आयोजित अभ्यास 'तरंग शक्ति 2026' के तहत हवाई प्रदर्शन देखने के बाद अपने संबोधन में कहा, "भारत अपने क्षेत्र और उससे बाहर हो रहे घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहा है तथा उनके रणनीतिक प्रभावों का भी आकलन कर रहा है।" रक्षा मंत्री ने कहा कि स्थापित वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है और भविष्य की व्यवस्था कैसी होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर भारतीय सशस्त्र बलों की संरचना, संसाधनों और रणनीति में बुनियादी बदलाव किए जा रहे हैं। सिंह ने कहा, "आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का मतलब दुनिया से अलग-थलग रहना नहीं है। इसका अर्थ महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों के डिजाइन और विकास के साथ-साथ उनके निर्माण, रखरखाव और उन्नयन की घरेलू क्षमता विकसित करना है।" रक्षा मंत्री ने कहा कि तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों और टकराव के नए क्षेत्रों के उभरने से आधुनिक युद्ध कौशल लगातार जटिल होती जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार से इतर तत्वों की बढ़ती भूमिका, अहम व्यापारिक मार्गों और समुद्री रास्तों के लिए खतरे व नई तकनीकों के इस्तेमाल ने वैश्विक सुरक्षा माहौल में अनिश्चितता बढ़ी है। उन्होंने कहा, "नई तकनीकी बदलावों, हथियारों के इस्तेमाल के दायरे के विस्तार और नई चीजों के जुड़ने से आधुनिक युद्ध कौशल और भी जटिल होती जा रही है। यह अब जमीन, समुद्र और हवा तक ही सीमित नहीं है। अब इसमें अंतरिक्ष, साइबर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम और सूचना का दायरा भी शामिल है। अचानक होने वाली घटनाएं व गहरी अनिश्चितता अब आम बात हो गई है। इसके साथ ही युद्ध के मैदान में 'सरकार से इतर तत्वों' का प्रभाव भी बढ़ रहा है।'' रक्षामंत्री ने कहा कि प्रमुख व्यापारिक मार्गों, जरूरी समुद्री रास्तों और संवेदनशील जगहों को सक्रिय रूप से हथियारों के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।" उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) फैसले लेने में मदद करने के तरीके को बदल रहा है और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के लिए स्पेक्ट्रम पर पूरा नियंत्रण जरूरी है। सिंह ने कहा, ''हम ऐसे हालात का सामना कर रहे हैं जहां पुरानी स्थापित वैश्विक व्यवस्था तेजी से खत्म हो रही है जबकि भावी यानी भविष्य की व्यवस्था का स्वरूप अभी सामने आना बाकी है।'' उन्होंने कहा कि सुरक्षा की अस्थिर स्थिति को देखते हुए देशों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है।
सैन्य अभियानों में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि ड्रोन और 'बिना पायलट वाली प्रणालियों' ने युद्ध की गति, पैमाने और स्वरूप को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में सैन्य ताकत इस बात पर कम निर्भर करेगी कि किसी देश के पास कितने प्लेटफॉर्म (हथियार या उपकरण) हैं बल्कि इस बात पर ज़्यादा निर्भर करेगी कि वह कितनी तेजी से जानकारी जुटा सकता है, स्थिति को समझ सकता है, फैसले ले सकता है और कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने कहा, ''गति, सटीकता, जानकारी और एकीकरण अब असली और अहम विशेषताएं हैं।" सिंह ने कहा कि भारत ने कई साल पहले ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की जरूरत को समझ लिया था क्योंकि कोई भी देश अपने हथियार और अहम तकनीकें खुद बनाने की क्षमता के बिना लंबे समय तक युद्ध नहीं लड़ सकता। उन्होंने कहा कि आजादी के समय सीमित संसाधनों के साथ काम करने वाली भारतीय वायुसेना ने अब बहुत तरक्की कर ली है और अब वह अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट, सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों, आधुनिक सेंसर, एकीकृत नेटवर्क और लगातार बेहतर होती स्वदेशी तकनीक से लैस है। रक्षा मंत्री ने भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के उदाहरण के तौर पर तेजस लड़ाकू विमान, ध्रुव, रुद्र और प्रचंड हेलीकॉप्टर, लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर और आकाश वायु रक्षा प्रणाली का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ये क्षमताएं न सिर्फ़ अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बल्कि भरोसेमंद वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने के लिए भी विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा, "हमारा मकसद सिर्फ उपकरण बनाना नहीं है। हमारा मकसद डिजाइन करना, नवोन्मेष करना, एकीकरण करना और आपूर्ति करना है। -
भुवनेश्वर. पूरे ओडिशा में लोगों ने शनिवार को महालय के अवसर पर पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की। महालय के साथ 'पितृ पक्ष' का समापन होता है। राज्य भर से लोग पूर्वजों को तिल तर्पण और पिंडदान करने के लिए समुद्र, नदियों और तालाबों सहित विभिन्न जलाशयों के किनारे एकत्र हुए। भुवनेश्वर में लिंगराज मंदिर के पास बिंदु सागर सरोवर, पुरी में जगन्नाथ मंदिर के उत्तरी द्वार पर स्थित नरेंद्र पोखर और जाजपुर में मां बिरजा मंदिर के पास बैतरणी नदी के तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। संबलपुर स्थित समलेश्वरी मंदिर में भी हजारों श्रद्धालु देवी के दर्शन के लिए उमड़े। इस अवसर पर देवी को सफेद वस्त्रों से सजाया गया था। देवी के इस शृंगार को 'धबलमुखी बेशा' कहा जाता है, जो 'गंगा माता' का प्रतीक है। महालय को छोड़कर समलेश्वरी देवी पूरे वर्ष लाल वस्त्र धारण करती हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की आशंका को देखते हुए मंदिर के द्वार सुबह पांच बजे ही खोल दिए गए। महालय से 'देवी पक्ष' की शुरुआत होती है। नवरात्रि का त्योहार महालय के एक दिन बाद शुरू होता है।
ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने इस अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "पवित्र महालय के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं। मां दुर्गा के आशीर्वाद से सभी के जीवन में सुख और समृद्धि आए।" माझी ने कहा, "अपने पूर्वजों को याद करने के अवसर पवित्र महालय अमावस्या पर सभी को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। मां दुर्गा के आगमन के इस पावन समय में सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।" -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को चेन्नई का दौरा करेंगे और 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। प्रधानमंत्री चेन्नई मेट्रो में पोरूर बाईपास स्टेशन से पूनामल्ली बाईपास स्टेशन के बीच सफर करेंगे। वह जलकंठेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, वह शहर में स्थित 'जयगोपाल गरोड़िया हिंदू विद्यालय मैट्रिकुलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल' के स्वर्ण जयंती समारोह में भी शामिल होंगे। मोदी के कार्यक्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के ब्रेन सेंटर का दौरा भी शामिल है।
बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन करेंगे और लोगों को संबोधित करेंगे। जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा, उनमें 4,900 करोड़ रुपये की लागत से बना चेन्नई मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण का पूनामल्ली-वडापलानी खंड शामिल है। प्रधानमंत्री करीब 3,700 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास करेंगे।
मोदी राष्ट्रीय राजमार्ग-744 के वडुगापट्टी-तेरकुवेंगनल्लूर खंड का उद्घाटन करेंगे। यह 36 किलोमीटर लंबा और चार लेन का मार्ग है। इस परियोजना से क्षेत्र के प्रमुख तीर्थस्थलों, औद्योगिक केंद्रों और वाणिज्यिक केंद्रों तक सड़क संपर्क बेहतर होगा। वह राष्ट्रीय राजमार्ग-744ए के मदुरै रिंग रोड के 30 किलोमीटर लंबे, चार लेन वाले खंड का भी उद्घाटन करेंगे। इस मार्ग से मदुरै के आसपास यातायात की आवाजाही बेहतर होगी। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राजमार्ग-83 के नागपत्तनम-तंजावुर खंड पर तिरुवारूर बाईपास को चार लेन का बनाने की परियोजना की आधारशिला रखेंगे। इस परियोजना से तिरुवारूर में सड़क संपर्क बेहतर होगा और शहर के बाहर एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने से यातायात की आवाजाही सुगम होगी। रेलवे की 750 करोड़ रुपये से अधिक की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया जाएगा। - जबलपुर ।मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को तत्कालीन कमलनाथ नीत कांग्रेस सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने संबंधी 2019 के कानून को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि यह उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा के विपरीत है।न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने अपने 159 पृष्ठ के फैसले में कहा कि आरक्षण बढ़ाने के लिए कोई असाधारण परिस्थिति नहीं थी। अदालत ने राज्य में ओबीसी के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण बहाल कर दिया।पीठ ने कहा कि संशोधन पर्याप्त तैयारी के बिना और ‘‘अनुचित जल्दबाजी’’ में पारित किया गया था तथा कानून के मसौदे में त्रुटियां सरकार की ‘‘अपर्याप्त तैयारी’’ को दर्शाती हैं।अदालत ने संशोधन को ‘‘संवैधानिक प्रावधानों के अधिकार क्षेत्र से बाहर’’ बताते हुए कहा कि यह उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा के भी विपरीत है।पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले में विवाद ओबीसी को आरक्षण देने के अधिकार को लेकर नहीं, बल्कि आरक्षण की सीमा को लेकर है।अदालत ने कहा कि उच्च शिक्षा और सरकारी सेवाओं में ओबीसी के प्रतिनिधित्व से संबंधित उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है। ऐसे में आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का कोई आधार नहीं बनता।पीठ ने इंद्रा साहनी और जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल मामलों में उच्चतम न्यायालय के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा पार करने के लिए ‘‘कोई असाधारण परिस्थिति या आपात स्थिति मौजूद नहीं है।’’उच्च न्यायालय ने वर्ष 2019 के अध्यादेश और उसके बाद तत्कालीन कमलनाथ नीत कांग्रेस सरकार द्वारा पारित संशोधन को निरस्त कर दिया। इस संशोधन के जरिए सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था।पीठ ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी), कर्मचारी चयन मंडल और अन्य भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिया कि आरक्षण बढ़ाने संबंधी कानून को चुनौती दिए जाने के बाद रोके गए 13 प्रतिशत पदों को तीन महीने के भीतर अनारक्षित वर्ग से भरा जाए।हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि मार्च 2019 से 29 सितंबर 2022 के बीच बढ़े हुए आरक्षण के तहत नियुक्त ओबीसी उम्मीदवारों की सेवाएं समाप्त नहीं की जाएंगी। 14 प्रतिशत की निर्धारित सीमा से अधिक नियुक्त उम्मीदवारों के पदों का समायोजन अगली तीन भर्ती प्रक्रियाओं में किया जाएगा।अदालत ने कहा कि 29 सितंबर 2022 के बाद की गई भर्तियों में 87 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां की गई थीं, जबकि शेष 13 प्रतिशत पदों को मामले में मुकदमेबाजी के परिणाम के इंतजार में रोक दिया गया था। अब इन पदों को अनारक्षित वर्ग से भरा जाएगा।राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि अदालत ने दस्तावेजों, आंकड़ों और तालिकाओं की जांच करने के बाद फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा कि विवाद पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने के अधिकार को लेकर नहीं, बल्कि सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण को 2019 में 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने को लेकर था।तत्कालीन कमलनाथ नीत कांग्रेस सरकार ने आठ मार्च 2019 को अध्यादेश जारी कर ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। बाद में 14 अगस्त 2019 को इसे कानून का रूप दिया गया।इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। मामला बाद में उच्चतम न्यायालय पहुंचा, जहां से संबंधित याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई और निर्णय के लिए इसे मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय वापस भेज दिया गया। याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई इस साल पांच अगस्त को पूरी हुई, जिसके बाद पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।इस बीच, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि उनकी पार्टी 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव पर ओबीसी वर्ग के खिलाफ साजिश करने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी।ओबीसी महासभा ने भी फैसले पर निराशा जताई। संगठन की राष्ट्रीय कोर समिति के सदस्य और मामले में याचिकाकर्ता लोकेन्द्र गुर्जर ने कहा कि महासभा फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी और ओबीसी वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष जे पी धनौपिया ने आरोप लगाया कि यह फैसला राज्य सरकार की ‘‘दुर्भावनापूर्ण मंशा’’ का परिणाम है।उन्होंने दावा किया कि सरकार अदालत के समक्ष तथ्यों को प्रभावी ढंग से पेश करने में विफल रही, जिसके कारण ओबीसी वर्ग 27 प्रतिशत आरक्षण के लाभ से वंचित रह गया।
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छत्रपति संभाजीनगर. देश भर में दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर शोक के बीच, मध्य महाराष्ट्र के एक गांव ने याद किया कि कैसे दस साल पहले एक जल संरक्षण परियोजना के जरिए अभिनेता ने इस गांव को 'टैंकर-मुक्त' बनाने में मदद की थी। नाना पाटेकर (76) का बृहस्पतिवार तड़के गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया।
पाटेकर और मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे द्वारा स्थापित 'नाम फाउंडेशन' ने 2016 में वैजापुर तहसील के असोलकर को गोद लिया था। नदी विशेषज्ञ आनंद असोलकर ने बताया कि छत्रपति संभाजीनगर शहर से 57 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में मानसून खत्म होने और दिवाली नजदीक आते ही हर साल टैंकरों से पानी की आपूर्ति करनी पड़ती थी। निजाम काल के दौरान से यह गांव अपनी मोसंबी के लिए प्रसिद्ध था, जिन्हें पास के करंजगांव रेलवे स्टेशन से देश के अन्य हिस्सों में भेजा जाता था। हालांकि, स्थानीय नदी के बैराजों में गाद भर जाने के कारण मोसंबी की खेती या साल में एक से अधिक फसल उगाना संभव नहीं रह गया था। असोलकर ने बताया, "नाम फाउंडेशन की स्थापना के बाद मकरंद अनासपुरे और नाना पाटेकर एक ऐसे गांव की तलाश में थे जहां जल संरक्षण का काम शुरू किया जा सके...मैंने उन्हें असोलकर के बारे में बताया... दो अक्टूबर 2015 को वे यहां आए तथा कार्य का उद्घाटन किया।" उन्होंने बताया कि नदी पर बने 12 बांध पूरी तरह गाद से भरे थे, जिससे पानी नहीं ठहरता था। ग्रामीणों के सहयोग से 4.5 किलोमीटर के हिस्से की गाद निकाली गई, जिससे लगभग 20 करोड़ लीटर पानी के भंडारण की क्षमता बनी। असोलकर के अनुसार, इस परियोजना ने गांव की अर्थव्यवस्था बदल दी। अब लगभग 70 प्रतिशत किसान साल में दो फसलें उगाते हैं और कुछ तो तीन फसलें भी ले रहे हैं। वर्ष 2016 से आज तक यह गांव पूरी तरह टैंकर-मुक्त है, केवल 2018 के भीषण सूखे के दौरान कुछ महीनों को छोड़कर। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता राहुल साबले ने कहा कि पानी की उपलब्धता से डेयरी कारोबार को भी बढ़ावा मिला। अब गांव में रोजाना 10,000 लीटर तक दूध का उत्पादन होता है, जो जिले में सबसे अधिक उत्पादन वाले क्षेत्रों में शामिल है। दूध के कारोबार से करीब 800 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है। साबले ने कहा, ''नाना ने हमारे गांव को गोद लिया और इससे गांव के प्रति लोगों का नजरिया बदल गया। राजनेताओं ने भी हमारे गांव के विकास को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया। मुझे यह कहते हुए गर्व है कि यह काम पूरा होने के बाद से यहां एक भी किसान ने आत्महत्या नहीं की है।'' -
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साइबर धोखाधड़ी और 'डीपफेक' के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए वैश्विक व्यवस्था बनाने का बृहस्पतिवार को आह्वान किया। उन्होंने ऐसी धोखाधड़ी लोगों तक पहुंचने से पहले ही रोकने के लिए सरकारों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, दूरसंचार कंपनियों और वित्तीय संस्थानों से मिलकर काम करने का आग्रह किया। मोदी ने कहा कि भारत ने साइबर धोखाधड़ी से निपटने में काफी अनुभव हासिल किया है और वह अपने अनुभव दुनिया के साथ साझा करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि साइबर धोखाधड़ी और साइबर अपराध किसी भी देश की सीमा से परे हैं तथा प्रौद्योगिकी का विस्तार तभी होता है जब उस पर भरोसा कायम होता है। प्रधानमंत्री ने 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस' (आईएमसी) 2026 को संबोधित करते हुए कहा, ''प्रौद्योगिकी का विस्तार तभी होता है जब उस पर भरोसा कायम होता है। आप सभी जानते हैं कि साइबर धोखाधड़ी और साइबर अपराध सीमाओं से परे हैं। वे पहले ही सीमाएं पार कर चुके हैं।'' साइबर अपराधों की सीमाओं से परे प्रकृति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक देश से व्यक्ति दूसरे देश में मौजूद किसी जालसाज की मदद से तीसरे देश में अपराध कर सकता है। मोदी ने 'डीपफेक' से पैदा हो रही चुनौती को भी रेखांकित किया और कहा कि ऐसे उभरते खतरों से निपटने के लिए देशों को वैश्विक ढांचे पर मिलकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ''इसलिए, इसके लिए वैश्विक ढांचे पर काम करना जरूरी है। सरकारों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, दूरसंचार कंपनियों और वित्तीय संस्थानों-सभी को इस ढांचे से जुड़ना होगा। मैं जीएसएमए और दुनियाभर के दूरसंचार संचालकों से आग्रह करता हूं : आइए, हम एक ऐसा वैश्विक तंत्र बनाएं जो इस तरह की धोखाधड़ी को लोगों तक पहुंचने से पहले ही रोक सके।'' उद्योग संगठन ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन (जीएसएमए) दुनियाभर में मोबाइल नेटवर्क संचालकों और इस क्षेत्र से जुड़े विभिन्न कारोबारों का प्रतिनिधित्व करता है। मोदी ने कहा कि दूरसंचार और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के आसपास सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना उनके तेजी से विस्तार के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है और फोन तथा नेटवर्क की सुरक्षा प्राथमिकता बन रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने इस दिशा में अपने अनुभवों से काफी कुछ सीखा है और वह अपने अनुभव दुनिया के साथ साझा करने के लिए हमेशा तैयार है। उन्होंने कहा कि एक आम नागरिक के लिए भरोसे का मतलब यह जानना है कि फोन कौन कर रहा है, कोई संदेश असली है या फर्जी, भुगतान सुरक्षित है या नहीं और व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित है या नहीं। प्रधानमंत्री ने बढ़ते डिजिटल तंत्र में साइबर खतरों से सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि मोबाइल फोन अब केवल संचार का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि शासन एवं सार्वजनिक सेवाओं के वितरण का महत्वपूर्ण माध्यम बन गए हैं। मोदी ने 2022 में 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस' के मंच से देश में 5जी सेवा की शुरुआत किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि अब 5जी सेवाएं हर जिले तक पहुंच गई है। 5जी नेटवर्क के लिए पांच लाख 50 हजार से अधिक 'बेस स्टेशन' काम कर रहे हैं और 2022 की तुलना में मोबाइल इंटरनेट की गति 10 गुना बढ़ गई है। मोदी ने डिजिटल कामकाज के क्षेत्र में भारत के अनुभव का उल्लेख किया और कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिये करीब 50 लाख करोड़ रुपये लाभार्थियों के मोबाइल से जुड़े बैंक खातों में सीधे भेजे जा सके हैं। उन्होंने कहा कि करीब पांच लाख करोड़ रुपये ''गलत हाथों'' में जाने से बचाए गए हैं। मोदी ने कहा कि वह ''गलत तौर-तरीकों'' को रोकने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
उन्होंने कहा, ''अब आप मुझे बताइए, जिन लोगों की गलत तरीके से होने वाली कमाई बंद हो गई है, क्या वे मोदी से प्यार करेंगे? क्या मैंने सही काम किया या नहीं? क्या यह किया जाना चाहिए या नहीं? क्या इन सभी गलत तौर-तरीकों को रोका जाना चाहिए या नहीं? वे चाहे कितना भी चिल्लाएं या शोर मचाएं, मैं इसे करके ही रहूंगा।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर पुरानी व्यवस्था कायम रहती तो सरकार के पांच लाख करोड़ रुपये भ्रष्टाचार की वजह से ऐसे लोगों की जेबें भरते। उन्होंने कहा, ''मोदी ने इसे रोक दिया है।'' उन्होंने कहा कि अब यह धन सही लाभार्थियों तक पहुंच रहा है और सही उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 'पीएम-किसान सम्मान निधि' के तहत किसानों के बैंक खातों में चार लाख करोड़ रुपये से अधिक जमा किए जा चुके हैं। यह राशि हर चार महीने में किसानों को दी जाती है और इसकी जानकारी किसानों को उनके मोबाइल फोन पर संदेश के जरिये मिलती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दूरसंचार क्षेत्र में उपभोक्ता से आगे बढ़कर निर्माता बन गया है और अब देश में उत्पादों के डिजाइन तथा प्रौद्योगिकी एवं बौद्धिक संपदा पर स्वामित्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र में 'सुधार एक्सप्रेस' तेजी से आगे बढ़ रही है। दशकों पुराने कानूनों को आधुनिक बनाया जा रहा है और दूरसंचार अधिनियम के जरिये आधुनिक नियामकीय व्यवस्था तैयार की जा रही है। मोदी ने कहा, ''हमारी ओर से एजीआर और बैंक गारंटी जैसे ढांचागत बोझ को तर्कसंगत बनाने का काम भी किया जा रहा है, ताकि बोझ को उपलब्धियों में बदला जा सके।'' उन्होंने कहा कि गति 'शक्ति संचार' मंच ने डिजिटल माध्यम से 'राइट ऑफ वे' की मंजूरी की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में मोबाइल बाजार के अगले दशक का खाका तैयार करने में 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस' की महत्वपूर्ण भूमिका है। अपने संबोधन की शुरुआत में मोदी ने कहा कि बुधवार को उन्होंने निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर 25 वर्ष पूरे कर लिए। मोदी सात अक्टूबर, 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री चुने गए थे और इसके बाद उन्होंने लगातार तीन कार्यकाल तक राज्य की कमान संभाली। इसके बाद वह 2014 में भारत के प्रधानमंत्री चुने गए। उन्होंने अभिनेता नाना पाटेकर को भी श्रद्धांजलि दी और उन्हें एक शानदार कलाकार बताया। पाटेकर का बृहस्पतिवार तड़के गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया।
नयी दिल्ली में सात से 10 अक्टूबर तक आयोजित किए जा रहे 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस' (आईएमसी) के 10वें संस्करण के उद्घाटन सत्र में संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, भारती समूह के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल, रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन आकाश अंबानी और आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला समेत कई लोग मौजूद रहे। दूरसंचार विभाग (डीओटी) और सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित आईएमसी 2026 का मुख्य विषय 'सीमाओं से परे विस्तार' है। इसमें डिजिटल नवाचार, अगली पीढ़ी के संपर्क और प्रौद्योगिकी आधारित वृद्धि के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता को रेखांकित किया गया है। इसमें वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रमुखों, नीति निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों, स्टार्टअप, निवेशकों और नवोन्मेषकों को डिजिटल तंत्र में उभरते अवसरों पर चर्चा करने के लिए एक मंच पर लाया गया है। वर्ष 2026 के संस्करण के प्रमुख क्षेत्रों में 5जी व 6जी, अगली पीढ़ी के एआई नेटवर्क, सेमीकंडक्टर, गैर-स्थलीय नेटवर्क, साइबर सुरक्षा, क्वांटम संचार, उद्यम बदलाव, संसाधनों का पूर्ण उपयोग करने वाली अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, सामाजिक व शासन (ईएसजी) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण शामिल हैं। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने परीक्षा संचालन, व्यवस्था को मजबूत करने, उम्मीदवारों के अनुभव में सुधार और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के जरिये विश्वास कायम करने जैसे मुद्दों पर चार दिवसीय ''चिंतन शिविर'' में मंथन किया। एनटीए ने नीट प्रश्नपत्र लीक और अन्य कथित अनियमितताओं को लेकर हुए देशव्यापी प्रदर्शनों तथा तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अपनी परीक्षा व्यवस्था में सुधार की कवायद शुरू की है। एजेंसी ने हाल ही में अपने कामकाज को मिंटो रोड स्थित नए कार्यालय में स्थानांतरित किया है। गोपनीय क्षेत्रों में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अब वहां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की तैनाती की गई है। एनटीए ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "नये परिसर में आयोजित चिंतन शिविर चार दिन तक चला और इसमें आत्ममंथन, संवाद तथा आगे की दिशा तय करने पर चर्चा हुई। बैठक में तीन प्राथमिकताओं ईमानदारी, समावेशन और नवाचार पर विशेष जोर रहा।"
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना साकार करने के लिए ''हम करके रहेंगे'' का नारा देते हुए बुधवार को कहा कि यह लक्ष्य दूरदर्शी नीतियों एवं कड़ी मेहनत से हासिल किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने चुनावों के दौरान जाति के आधार पर समाज को बांटे जाने को देश के सामने मौजूद बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। मोदी ने निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर उनके 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 'विकसित भारत संकल्प सभा' को संबोधित करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया और कहा कि जो बातें कभी अकल्पनीय लगती थीं, वे अब संभव हो गई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ''2026 में आज हम विकसित भारत का जो सपना देख रहे हैं, वह निश्चित रूप से पूरा होगा। भारत के रुकने का अब कोई कारण नहीं है। सौ साल पहले हमारी आबादी 40 करोड़ से भी कम थी और आज हम 140 करोड़ से अधिक हैं। ये 140 करोड़ नागरिक मिलकर 2047 तक विकसित भारत बनाएंगे और हम निश्चित रूप से ऐसा करके रहेंगे। हम करके रहेंगे।''
प्रधानमंत्री ने हालांकि आगाह किया कि वोट बैंक के फायदे के लिए समाज को बांटना देश के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियां किसी जाति या समुदाय में भेद नहीं करतीं। उन्होंने कहा, ''जब किसी किसान के खेत में पानी नहीं होता तो क्या यह समस्या केवल एक जाति को प्रभावित करती है? जब बिजली नहीं होती तो क्या अंधेरा केवल एक समुदाय के यहां होता है? इसका जवाब है-नहीं। अगर समस्या सबकी है तो समाधान भी सबके लिए होना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि किसने सोचा होगा कि एक दशक के भीतर 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल सकते हैं लेकिन भारत ने यह करके दिखाया। प्रधानमंत्री ने कहा, ''इसीलिए मुझे 140 करोड़ भारतीयों की शक्ति और उनके सामर्थ्य पर विश्वास है। मैं 25 वर्ष के अनुभव के बाद विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हम अपनी आंखों के सामने भारत का कायाकल्प होते देख रहे हैं।'' मोदी ने कहा, ''2047 तक विकसित भारत बनना- हम करके रहेंगे। दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना- हम करके रहेंगे। आत्मनिर्भर बनना- हम करके रहेंगे। वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनना- हम करके रहेंगे। ओलंपिक की मेजबानी करना- हम करके रहेंगे। अंतरिक्ष में कदम बढ़ाना- हम करके रहेंगे। यह ऊर्जा, यह उत्साह और यह आत्मविश्वास असाधारण है।'' 'फ्लाईदुबई' के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि सह-पायलट द्वारा चाकू मारे जाने के कारण घायल होने के बावजूद उन्होंने इजराइल जा रहे विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश नाकाम कर दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया भारतीय पायलट की चर्चा कर रही है और वह दिन भी आएगा जब दुनिया भारत में बने विमानों की चर्चा करेगी। उन्होंने कहा, ''ये लक्ष्य दूरदर्शी नीतियों और अथक परिश्रम से हासिल किए जाएंगे। भारत के सामने चुनौतियां हो सकती हैं लेकिन हमारे पास 140 करोड़ समाधान भी हैं।'' मोदी सात अक्टूबर 2001 से प्रशासन के प्रमुख के पदों पर लगातार बने रहे हैं। वह पहले तीन कार्यकाल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और इसके बाद लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बने। मोदी ने कहा कि सात अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेते समय उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह मुकाम आएगा। उन्होंने कहा, ''आज मैंने प्रशासन के प्रमुख के रूप में लगातार सेवा करते हुए 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। मुझ पर विश्वास जताने के लिए मैं भारत की जनता के सामने नतमस्तक हूं। मेरे लिए जनता भगवान है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मेहनती कार्यकर्ता मेरी ताकत हैं। मैं देश की जनता के चरणों में सिर झुकाकर नमन करता हूं।'' प्रधानमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सभी सहयोगियों और लोकतंत्र के प्रति गहरी आस्था रखने वाले सभी लोगों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। मोदी ने कहा कि पिछले 25 वर्ष में अनेक चुनाव हुए और चाहे विधानसभा चुनाव हों या लोकसभा चुनाव, जनता ने अपनी सेवा के लिए उन्हें हर बार चुना। उन्होंने कहा, ''आज मैं भारत के लोकतंत्र और भारत के संविधान को भी नमन करता हूं। मैं आज जहां भी हूं और जिस भी पद पर हूं, उसमें सबसे बड़ा योगदान जनता का है।'' मोदी ने कहा, ''मेरे लिए जनता ईश्वर का ही रूप है। करोड़ों भारतीयों का विश्वास और असंख्य पार्टी कार्यकर्ताओं का परिश्रम हमेशा मेरी सबसे बड़ी ताकत रहे हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वह पीछे मुड़कर देखते हैं, उनके मन में केवल कृतज्ञता का भाव आता है और वह हर उस व्यक्ति एवं हर उस अनुभव के आभारी हैं, जिसने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया। उन्होंने कहा, ''मेरे शिक्षकों ने मुझे विनम्रता सिखाई। जिन्होंने मुझे गिराया, उनसे मैंने फिर से उठना सीखा। शुभचिंतकों ने मुझे प्रोत्साहित किया जबकि आलोचकों ने मुझे आत्ममंथन करना सिखाया। जो मेरे साथ खड़े रहे, उन्होंने मुझे विश्वास की ताकत दिखाई।'' उन्होंने कहा कि देश ने उन्हें बहुत आशीर्वाद दिया है और इसलिए देश के प्रति उनकी जिम्मेदारी भी सबसे बड़ी है। मोदी ने कहा, ''मेरा वास्तव में यह मानना है कि मुझ पर सबसे पहला अधिकार देश के प्रत्येक नागरिक का है। जनता के विश्वास के ये 25 वर्ष और अनुभव के ये 25 वर्ष बहुत बड़ी पूंजी हैं। यह पूंजी केवल मोदी की नहीं, बल्कि राष्ट्र की है। भारत माता की प्रत्येक संतान का इस पूंजी पर अधिकार है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि सीखने की ललक हमेशा से उनके जीवन का हिस्सा रही है और वह आज भी खुद को विद्यार्थी मानते हैं तथा हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, ''मैंने कभी महसूस नहीं किया कि मैं अकेला हूं। ऐसे असंख्य स्वयंसेवक हैं, जो भारत की सांस्कृतिक आत्मा के संरक्षक हैं और जिनका एकमात्र उद्देश्य भारत की सेवा करना है। वे इसी भावना के साथ जीते हैं और हर पल खुद को याद दिलाते हैं कि 'हम सेवक हैं, हम मानवता के सेवक हैं।' '' मोदी ने कहा, ''राष्ट्र की सेवा में प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ जुटे प्रत्येक स्वयंसेवक और कार्यकर्ता को मैं आदरपूर्वक नमन करता हूं।'' मोदी ने कहा कि जिन्होंने उनका विरोध किया, उन्होंने उन्हें लोकतंत्र की ताकत समझाई, हर संकट ने उनके धैर्य की परीक्षा ली, हर सफलता ने उनकी जिम्मेदारी बढ़ाई और हर उपलब्धि ने उन्हें बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ने का साहस और संकल्प दिया। उन्होंने कहा, ''आज का दिन केवल स्मृतियों का दिन नहीं है। यह अपने संकल्पों में नयी ऊर्जा भरने का दिन है। यह उस वचन को दोहराने और उस इरादे को व्यक्त करने का दिन है, जो कहता है कि हम करके रहेंगे।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन का रिपोर्ट कार्ड ऐसे व्यक्ति का कार्ड है, जिसने केवल संगठन के लिए काम किया। उन्होंने कहा, ''मैं दूसरों को चुनाव लड़ाता था लेकिन खुद कभी एक भी चुनाव नहीं लड़ा था। अगर चुनावी राजनीति में चमकने की इच्छा होती तो मैं बहुत पहले मैदान में उतर सकता था लेकिन मेरा स्वभाव ऐसा नहीं था। बचपन से मुझे यही शिक्षा और संस्कार मिले कि मैं महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि मिशन के लिए जीने वाला व्यक्ति हूं।'' मोदी ने कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारियां मिलीं, उन्होंने उन्हें एक के बाद एक निभाया।
उन्होंने कहा, ''जीवन का केवल एक लक्ष्य रहा- देश की निस्वार्थ सेवा। मेरे लिए कर्म ही सब कुछ है, कर्म ही मेरा धर्म है।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''मेरा अधिकार मेरे कर्म पर है, इसलिए मैं कर्म को अपना कर्तव्य मानता हूं। मैं पूरी क्षमता के साथ हर कर्म करता रहूंगा और निरंतर कर्म करता रहूंगा। काम रुकना नहीं चाहिए और प्रयास थमना नहीं चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''इसलिए मेरे लिए कर्म केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि देश के प्रति मेरी भक्ति है।'' -
नयी दिल्ली. सरकार ने मंगलवार को लघु एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) में प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश के इरादे से 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई वृद्धि कोष स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। इसका मकसद भविष्य के दिग्गज उद्यम तैयार करने में मदद करना है। एसएमई वृद्धि कोष (एसजीएफ) भारत के लघु और मझोले उद्यमों के लिए वृद्धि आधारित पूंजी को बढ़ावा देगा। साथ ही यह विनिर्माण, सेवाओं, प्रौद्योगिकी, नवाचार आधारित क्षेत्रों और रणनीतिक मूल्य शृंखलाओं में अग्रणी भारतीय उद्यम तैयार करेगा। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि मंत्रिमंडल ने ''भविष्य के दिग्गज उद्यम तैयार करने के लिए लघु एवं मझोले उद्यमों में प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश के लिए 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड की स्थापना'' को मंजूरी दी है। इस कोष की घोषणा आम बजट 2026-27 में की गई थी। इस पहल के तहत सरकार एसजीएफ ढांचे के तहत स्थापित वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) में कुल 10,000 करोड़ रुपये का योगदान देगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस कोष का विवरण साझा किया। दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराकर यह पहल भारतीय एसएमई को परिचालन का दायरा बढ़ाने, प्रौद्योगिकी तथा विनिर्माण क्षमता में निवेश करने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करने, वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जुड़ने और रणनीतिक निवेश करने में सक्षम बनाएगी।
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नयी दिल्ली. रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए ब्रह्मोस अग्नि नियंत्रण प्रणाली और लांचर की खरीद के लिए करीब 661 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। ब्रह्मोस शस्त्र प्रणाली अनेक युद्धपोतों में होती है। यह समुद्री अभियानों के लिए सतह से सतह पर वार करने वाली नौसेना की प्राथमिक मिसाइल प्रणाली है। यह सुपरसोनिक गति से पूरी सटीकता के साथ समुद्री और जमीनी लक्ष्यों पर लंबी दूरी से निशाना साधने में सक्षम है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उसने भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए ब्रह्मोस अग्नि नियंत्रण प्रणाली और भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए लांचर की खरीद के लिए 'भारतीय आईडीडीएम' श्रेणी में ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (बीएपीएल) के साथ अनुबंध पर हस्तारक्षर किए गए थे। आईडीडीएम से आशय 'स्वदेशी तौर पर डिजाइन किए गए, विकिसत और बनाए गए' से संबंधित है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में 661.50 करोड़ रुपये मूल्य का अनुबंध किया गया।
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मॉस्को और कीव के साथ की जा रही वार्ता
नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि भारत ने यूक्रेन संकट को सुलझाने के लिए सिर्फ पैरोकारी करने के बजाय हाल के महीनों में कीव और मॉस्को, दोनों के साथ वार्ता करके अपने प्रयास तेज कर दिए हैं तथा यह लंबे समय से जारी युद्ध को खत्म करने की दिशा में नयी दिल्ली की हालिया पहल की पहली उद्घोषणा है। एक कार्यक्रम में जयशंकर की ये टिप्पणियां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस बयान के कुछ दिनों बाद आईं, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास इस विवाद का पारस्परिक रूप से स्वीकार्य होने वाला एक समाधान तलाशने के लिए ''अच्छे विचार'' हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने शुक्रवार को कहा कि कीव को संभावित युद्धविराम के लिए भारत और तीन अन्य देशों से अलग-अलग प्रस्ताव मिले हैं। नयी दिल्ली की कोशिशों के बारे में जानकारी देते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत काला सागर में जहाजों की सुरक्षा के साथ-साथ अनाज के निर्यात और ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रहा है। पिछले चार साल से अधिक समय से भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए यूक्रेन विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। नयी दिल्ली में 'म्यूनिख लीडर्स मीटिंग' में जयशंकर ने कहा, ''उस टकराव पर हमारा रुख बहुत स्पष्ट रहा है कि हम इसे खत्म होते देखना चाहते हैं। इसके लिए बातचीत और कूटनीति की जरूरत होगी। इस मामले में बातचीत होनी चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''हम कई साल से इसकी हिमायत कर रहे हैं, और हाल के महीनों में हम सिर्फ इससे कहीं आगे बढ़कर इसमें थोड़ा और शामिल हुए हैं। इस मामले में हमारी रूस और यूक्रेन, दोनों से बातचीत हो रही है। हम मदद करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत काला सागर में पोत परिवहन की सुरक्षा के मुद्दे से हो रही है।'' जयशंकर ने कहा कि भारत इससे आगे बढ़कर कुछ ऐसी तात्कालिक चिंताओं पर भी ध्यान दे रहा है जो दोनों (रूस और यूक्रेन) को अनाज और ऊर्जा के निर्यात तथा हमले न होने की संभावनाओं से संबंधित हैं। इन विषयों पर अभी बातचीत जारी है। प्रधानमंत्री मोदी ने 31 अगस्त को बिश्केक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ व्यापक वार्ता की थी, जिसमें उन्होंने उल्लेख किया था कि अंतहीन युद्ध को अब समाप्त करना चाहिए। विदेश मंत्री ने रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों पर भी बात की।
उन्होंने कहा, ''भारत और रूस के संबंध ऐतिहासिक रूप से बहुत अच्छे रहे हैं, खासकर 1950 के दशक से। उस इतिहास को भुलाया नहीं गया है।'' विदेश मंत्री ने कहा कि जब भारत की सुरक्षा और हमारी क्षेत्रीय अखंडता खतरे में थी, तब तत्कालीन सोवियत संघ कई तरह से देश के साथ खड़ा रहा। उन्होंने कहा, ''ऐसे समय में जब दुनिया का एक बड़ा हिस्सा हमारे पड़ोसी देश में सैन्य शासन का समर्थन कर रहा था, रूस एक ऐसा देश था जिसके साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे थे, और उस विरासत का हम पर कई तरह से असर पड़ा है।'' जयशंकर ने कहा कि अब यह जुड़ाव काफी व्यापक हो गया है।
उन्होंने कहा, ''आज यह रिश्ता काफी हद तक आर्थिक भी हो गया है। इसमें सैन्य और परमाणु पहलू हैं, साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र भी है। दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार और निवेश के साथ-साथ ऊर्जा और संसाधनों का भी लेन-देन होता है।'' विदेश मंत्री ने बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बारे में कहा, ''बैठक में मौजूद कोई भी इस बात से असहमत नहीं होगा कि आज के हालात में अमेरिका ने अपनी स्थिति में एक बड़ा बदलाव किया है। यह स्थिति में बदलाव उसकी अपनी पसंद का नतीजा है।'' उन्होंने यह भी संकेत दिया कि एक तरह से, वह ''जान-बूझकर'' एक ''अकेली पड़ती हुई महाशक्ति'' बन गया है। जयशंकर ने कहा, ''इस परिदृश्य की दूसरी विशेषता निश्चित रूप से चीन का उदय है। चीन खुद को एक अनोखा देश मानता है--और एक तरह से, यह उसकी अपनी सोच भी है और कई मायनों में हकीकत भी। और हम बहुत कड़ी प्रतिस्पर्धा देख रहे हैं।'' जयशंकर ने कहा, ''आज यह प्रतिस्पर्धा सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कारण हर देश के पास मौजूद किसी भी तरह के प्रभाव या ताकत का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जाने लगा है। और यह प्रतिस्पर्धा एक-दूसरे पर निर्भरता की जटिलता के साथ-साथ जारी रहती है।'' -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारतीय दल के प्रदर्शन के लिए उन्हें रविवार को बधाई दी और खिलाड़ियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने दृढ़ संकल्प, जुनून और खेल भावना के साथ देश का प्रतिनिधित्व किया। भारत 85 पदकों (21 स्वर्ण, 27 रजत, 37 कांस्य) के साथ पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा जो चीन के हांग्झोउ में हुए पिछले चरण के पदकों की तुलना से 21 कम है। मोदी ने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, ''एशियाई खेल 2026 के समापन के साथ ही मैं भारतीय दल के हर सदस्य को बधाई देता हूं जिन्होंने दृढ़ संकल्प, जुनून और शानदार खेल भावना के साथ हमारे देश का प्रतिनिधित्व किया। '' उन्होंने सभी भारतीय पदक विजेताओं को भी बधाई दी और कहा कि उनके प्रदर्शन ने 'देश को अपार खुशी' दी है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''उम्मीद है कि ये खेल आने वाले वर्षों में और बड़ी उपलब्धियों के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही, ये जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत करने में भी योगदान देंगे। '' दो सप्ताह से अधिक समय तक चली कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद रविवार को नागोया के मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में भव्य समापन समारोह के साथ एशियाई खेलों का समापन हुआ। इन खेलों में 350 से अधिक रिकॉर्ड बने जिनमें कम से कम 50 विश्व रिकॉर्ड शामिल हैं। एशिया के 45 देशों के खिलाड़ियों ने इन खेलों में हिस्सा लिया।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन की मेजबानी की और इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार एवं निवेश, आवागमन और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों समेत विभिन्न क्षेत्रों में भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को मजबूत करने के नए अवसरों पर व्यापक बातचीत की। पार्मेलिन सोमवार सुबह तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर नयी दिल्ली पहुंचे, जो उनकी इस देश की पहली आधिकारिक यात्रा है। हालांकि, इस वर्ष वह दूसरी बार भारत आए हैं। वह इससे पहले फरवरी में आयोजित 'एआई इंपैक्ट समिट' में हिस्सा लेने पहुंचे थे। राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने के तुरंत बाद स्विस राष्ट्रपति का राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''दोनों नेताओं के समक्ष एक व्यापक एजेंडा है, जिसके तहत वे भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी के विभिन्न आयामों पर चर्चा करने के साथ-साथ इसे और मजबूत करने के उपायों पर भी विचार करेंगे।'' प्रधानमंत्री मोदी के साथ वार्ता से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी स्विस राष्ट्रपति से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। मुलाकात के बाद विदेश मंत्री ने कहा कि वह भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के आधार पर भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को गहरा करने की राष्ट्रपति पार्मेलिन की प्रतिबद्धता की "सराहना" करते हैं। मुलाकात के बाद विदेश मंत्री ने कहा कि वह भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) को आगे बढ़ाते हुए भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को गहरा करने की राष्ट्रपति पार्मेलिन की प्रतिबद्धता की ''सराहना'' करते हैं। करीब 16 वर्षों तक चली बातचीत के बाद मार्च 2024 में भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच इस महत्वाकांक्षी व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस व्यापक व्यापार समझौते के तहत ईएफटीए के सदस्य देश आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की योजना बना रहे हैं। पिछले वर्ष अक्टूबर में प्रभावी हुए इस व्यापार समझौते से भारत और स्विट्जरलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। वर्तमान में इंजीनियरिंग, सेवा, रसायन और दवा जैसे क्षेत्रों में 330 से अधिक स्विस कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। वहीं, भारतीय कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी, दवा और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में स्विट्जरलैंड में अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं। अपनी यात्रा के दौरान पार्मेलिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति मुर्मू उनके सम्मान में राजकीय भोज का आयोजन करेंगी।
- नयी दिल्ली. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने शनिवार को कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार ने इस सप्ताह 'फ्लाईदुबई' की एक उड़ान को बचाने में असाधारण बहादुरी का परिचय दिया। एयर चीफ मार्शल सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ''हर भारतीय को मच्छार पर गर्व है। उन्होंने जो किया, वह असाधारण बहादुरी थी। उन्होंने अदम्य शारीरिक और मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया।'' बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान एफजेड1073 के कॉकपिट में उनके सह-पायलट ने मच्छार पर चाकू से हमला किया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे। हालांकि, मच्छार ने घायल अवस्था में भी हमलवार का वीरता से मुकाबला करते हुए विमान गिराने के उसके प्रयास को विफल कर दिया।
- नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि वैश्विक अनिश्चितता अब 'स्थायी स्थिति' बन गई है और ऐसी नीतियां बनाने की जरूरत है, जो आर्थिक मजबूती बढ़ाएं। उन्होंने देशों से खुले और भरोसेमंद आर्थिक संबंध बनाए रखने का आह्वान किया। सीतारमण ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अगले दशक के झटकों से निपटने के लिए भारत की चार प्राथमिकताएं गिनाते हुए कहा कि मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं तैयार करने में आत्मनिर्भरता पर ध्यान देने और निजी क्षेत्र को अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) समेत निवेश का नेतृत्व करने का समय आ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कामकाज की बदलती दुनिया के बीच कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण और उसे लागू करने में उद्योग को बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। वित्त मंत्री ने यहां कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन 2026 में कहा, ''वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता अब लगातार बनी रहने वाली स्थिति है और नीतियां इसी को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। हमें आगे बढ़ते हुए लगातार मजबूती बढ़ाते रहना होगा। यह एक बार किया जाने वाला प्रयास नहीं है। आने वाले वर्षों के लिए तैयारी जरूरी है और भारत इनका सामना मजबूती के साथ कर रहा है।'' खुले, भरोसेमंद और नियम आधारित वैश्विक आर्थिक संबंधों की बात करते हुए सीतारमण ने कहा कि देशों को एक-दूसरे के साथ संवाद और बातचीत के जरिये हुए समझौतों के माध्यम से जुड़ना चाहिए, न कि भू-राजनीतिक मतभेदों को व्यापार और निवेश में बाधा बनने देना चाहिए। उन्होंने कहा, ''अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति में कारोबार के लिए अधिक निश्चितता होनी चाहिए, देशों की विकास संबंधी प्राथमिकताओं का सम्मान किया जाना चाहिए और बाजारों को विभाजित करने वाले अनावश्यक प्रतिबंधों से बचना चाहिए।'' सीतारमण ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक क्षेत्रों में संरचनात्मक आत्मनिर्भरता की जरूरत बताते हुए कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाओं को इस तरह बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि एक ही स्रोत पर निर्भरता कम हो और घरेलू स्तर पर उत्पादन एवं आपूर्ति की क्षमता बढ़े। उन्होंने कहा कि भारत का अनुसंधान एवं विकास पर खर्च सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.83 प्रतिशत है, जबकि आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के देशों में यह 2.7 प्रतिशत है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के कुल अनुसंधान एवं विकास खर्च में निजी क्षेत्र का योगदान केवल 36 प्रतिशत है। निजी क्षेत्र से निवेश का नेतृत्व करने का आह्वान करते हुए सीतारमण ने कहा, ''निवेश का स्तर और निजी क्षेत्र की भागीदारी, दोनों बढ़ाना हमारी नवोन्मेष क्षमता को मजबूत करने के लिए जरूरी है।'' मंत्री ने कहा कि भारत के लिए मजबूती का अर्थ पिछले एक दशक में तैयार की गई बुनियादी संरचना पर आगे बढ़ते हुए आर्थिक वृद्धि को तेज और व्यापक बनाना है। उन्होंने कहा, ''आने वाले वर्षों में भारत की मजबूती की परीक्षा इस बात से भी होगी कि वह वैश्विक आर्थिक झटकों का सामना किस तरह करता है और इनका असर परिवारों और कारोबारी गतिविधियों पर कितना कम पड़ता है।'' 'बदलाव के दौर में मजबूती' विषय पर सीतारमण ने अपने संबोधन में कहा कि मजबूती का प्रमाण उन संभावित नतीजों में निहित है, जो सामने नहीं आए। इनमें महंगाई का ऐसा दौर शामिल है, जिसने जोर नहीं पकड़ा, ईंधन केंद्रों पर लंबी कतारें नहीं लगीं, बैंकिंग क्षेत्र में तनाव नहीं उभरा और राजकोषीय सुधार के लिए दबाव नहीं बना। उन्होंने कहा, ''इन संभावित लेकिन सामने नहीं आए परिणामों पर अर्थशास्त्रियों को उतना ही ध्यान देना चाहिए जितना मुख्य आर्थिक वृद्धि दर पर।'' सीतारमण ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने देशभर में आर्थिक गतिविधियों को सरल, अधिक भरोसेमंद और अधिक उत्पादक बनाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी), दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता, चार श्रम संहिताओं और जन विश्वास अधिनियमों के जरिये राष्ट्रीय स्तर की रूपरेखा को आगे बढ़ाया है।




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