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नई दिल्ली। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज शुक्रवार को भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बड़ी उपलब्धि बताते हुए इसके तकनीकी फीचर्स और महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शुक्रवार को जींद से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। रेल मंत्री ने कहा, “यह देश के लिए, खासकर इंजीनियरों के लिए गर्व की बात है कि इतनी जटिल तकनीक भारत में विकसित की गई है। पूरी प्रोपल्शन सिस्टम और टेक्नोलॉजी देसी है और इसके IP राइट्स भारत के पास हैं। साथ ही कहा कि रेलवे फिलहाल इसे आगे विकसित करने पर कार्य कर रहा है।”
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताए प्रमुख पॉइंट्स:– स्वदेशी तकनीक: हाइड्रोजन प्रोडक्शन से लेकर मोटर तक पूरा सिस्टम भारत में डेवलप किया गया है।– कैसे काम करती है ट्रेन: जीरो-एमिशन ट्रेन के पीछे के टेक्निकल मैकेनिज्म के बारे में उन्होंने बताया कि यह सिस्टम पानी को पावर में बदलता है।– पास में एक इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट लगाया गया है। हाइड्रोजन पानी से बनता है और फिर इस फ्यूल सेल के ज़रिए वापस बिजली में बदला जाता है। इस बिजली का इस्तेमाल फिर मोटर चलाने के लिए किया जाता है। अंत में सिर्फ पानी की भाप निकलती है।– सुरक्षा: TUV SUD जैसी विश्वसनीय एजेंसी द्वारा गहन सुरक्षा जांच की गई। हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, हीट डिटेक्टर समेत एडवांस्ड सेंसर लगाए गए हैं। अगर हाइड्रोजन का स्तर 0.25% से ज्यादा होता है तो सेफ्टी सिस्टम एक्टिवेट हो जाते हैं। यह एक बहुत ही सुरक्षित गाड़ी है, जिसे अच्छी तरह से टेस्ट किया गया है, और लगातार टेस्टिंग और टेस्ट रन किए जाते हैं।केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह ट्रेन न सिर्फ रेलवे के लिए मील का पत्थर है, बल्कि भविष्य में हाइड्रोजन तकनीक को कई देशों में निर्यात करने की संभावना भी खोलती है।ट्रेन की मुख्य विशेषताएं:– 10 कोच वाली ट्रेन (2 हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार + 8 ट्रेलर कोच)– 1200 kW हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम– अधिकतम गति: 110 किमी/घंटा– यात्री क्षमता: लगभग 2600– जीरो एमिशन – केवल पानी की भाप निकलती है– जींद में समर्पित हाइड्रोजन उत्पादन, स्टोरेज और रीफ्यूलिंग प्लांटरेल मंत्री ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को RDSO के डिजाइन अप्रूवल के अनुसार विकसित किया गया है और यह नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन तथा नेट-जीरो लक्ष्य को मजबूती देगा। इसे पूरी तरह से भारत में डिज़ाइन और डेवलप किया गया यह प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत के विज़न को दर्शाता है।हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजीहाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी हाइड्रोजन का इस्तेमाल करके केमिकल रिएक्शन से बिजली बनाती है। प्राइमरी एनर्जी सोर्स एक प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल (PEMFC) है। यह एक फ्यूल सेल है जो प्रोटॉन-कंडक्टिंग परफ्लूरोसल्फोनिक एसिड (PFSA) पॉलीमर मेम्ब्रेन पर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के रिएक्शन से बिजली बनाता है। इस प्रोसेस से बायप्रोडक्ट के तौर पर सिर्फ़ पानी की भाप और गर्मी निकलती है।हाइड्रोजन एक हाई-एनर्जी फ्यूल है, डीजल की तुलना में 120 MJ/Kg (मेगाजूल प्रति किलोग्राम), जो 43 MJ/Kg है। इसका मेंटेनेंस कम होता है और कार्बन फुटप्रिंट मैनेज किया जा सकता है। यह हाइड्रोजन को रेल ट्रांसपोर्ट के लिए अभी उपलब्ध सबसे साफ प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी बनाता है। इसे सपोर्ट करने के लिए, इंडियन रेलवे ने डेडिकेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है। ऐसे में हाइड्रोजन ट्रेन सिर्फ एक नए ट्रेन सेट की शुरुआत से कहीं अधिक है। यह भविष्य में हाइड्रोजन से चलने वाले रेल ऑपरेशन के लिए ज़रूरी सिस्टम, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंस्टीट्यूशनल कैपेसिटी बनाता है। इंडियन रेलवे के लगातार मॉडर्नाइजेशन के साथ यह पहल इसे बड़े पैमाने पर अपनाने की नींव रखती है।ट्रेन का नाम: नमो ग्रीन रेलयह लॉन्च भारत को उन चुनिंदा देशों (यूरोप, चीन, अमेरिका) के एलीट ग्रुप में शामिल कर रहा है जो हाइड्रोजन ट्रेन चला रहे हैं। ऐसे में आत्मनिर्भर भारत और ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में आज का दिन ऐतिहासिक साबित होगा। -
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। इसी क्रम में भारतीय नौसेना को एक और अत्याधुनिक एमएच-60आर सीहॉक नौसैनिक हेलीकॉप्टर मिला है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने इसे दोनों देशों की रक्षा साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। वहीं, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इसे द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के लिए अच्छी खबर करार दिया।
भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित एक और एमएच-60आर सीहॉक नौसैनिक हेलीकॉप्टर भारतीय तट पर पहुंच गया है। दूतावास के अनुसार, पिछले सप्ताह यह हेलीकॉप्टर कोच्चि में भारतीय नौसेना को सौंपा गया था और इस सप्ताह दो अन्य हेलीकॉप्टर भी पहुंचने वाले हैं। दूतावास ने कहा कि अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर कहा कि यह अमेरिका-भारत की बढ़ती रक्षा साझेदारी के लिए बेहद अच्छी खबर है। उन्होंने कहा कि उन्नत सैन्य क्षमताएं समुद्री सुरक्षा को मजबूत कर रही हैं और स्वतंत्र तथा खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को आगे बढ़ा रही हैं। भारत ने अपनी नौसैनिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अमेरिका से 24 एमएच-60आर सीहॉक हेलीकॉप्टर खरीदने का समझौता किया है। इन हेलीकॉप्टरों की चरणबद्ध तरीके से आपूर्ति की जा रही है। भारतीय नौसेना इन्हें मुख्य रूप से युद्धपोतों पर तैनात करेगी, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, पनडुब्बियों की निगरानी और समुद्री सीमाओं की रक्षा की क्षमता और मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक परिदृश्य के बीच एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों की तैनाती भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को नई मजबूती देगी। साथ ही, यह डिलीवरी भारत और अमेरिका के बीच लगातार गहराते रणनीतिक तथा रक्षा संबंधों का भी महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।एमएच-60आर सीहॉक दुनिया के सबसे आधुनिक मल्टी-रोल नौसैनिक हेलीकॉप्टरों में शामिल है। इसे पनडुब्बी रोधी युद्ध, सतही युद्ध, समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान और विशेष नौसैनिक अभियानों के लिए विकसित किया गया है। यह हेलीकॉप्टर अत्याधुनिक रडार, सोनार, इलेक्ट्रॉनिक सेंसर और आधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है, जिससे भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। ( -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद में लगभग 14,700 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पूरा हरियाणा अब विकास की नई पटरी पर चल पड़ा है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जींद की जनता को ‘राम-राम’ करते हुए संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा, “मेरे लिए जींद आना पुरानी यादों का झरोखा खोलने जैसा है। जींद के घी और घेवर तो नहीं बदले, लेकिन जींद के तेवर बदल गए हैं। आज जींद भाजपा-एनडीए के सुशासन मॉडल की तस्वीर बन रहा है।”
पीएम मोदी के संबोधन के प्रमुख अंश:– “आज जींद का हरियाणा का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। आज यहां से देश को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिली है।”– “भविष्य में जब भी हाइड्रोजन ट्रेन का जिक्र आएगा, तो जींद, सोनीपत और हरियाणा का नाम आएगा।”– स्वच्छता पर जोर देते हुए उन्होंने जींद और हरियाणा के लोगों की सराहना की और कहा कि अगर लोग तय कर लें तो जींद कभी गंदा नहीं हो सकता।उद्घाटन और शिलान्यास की मुख्य परियोजनाएं– दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे (157.92 किमी)– अंबाला-काला अंब 4-लेन राजमार्ग (33.81 किमी)– जींद-गोहाना ग्रीनफील्ड राजमार्ग (40.60 किमी)– हांसी-बरवाला ब्राउनफील्ड हाईवे (24.27 किमी) – शिलान्यास– कुरुक्षेत्र एलिवेटेड रेलवे ट्रैक– भिवानी में पंडित नेकी राम शर्मा सरकारी मेडिकल कॉलेज– नारनौल में महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज और राव तुला राम अस्पताल– कुरुक्षेत्र में सिख म्यूजियम – शिलान्यास– प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चाबियांइससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया था। डबल इंजन सरकार के मिशन को नई ऊर्जा देते हुए पीएम मोदी का यह दौरा हरियाणा के विकास में एक नया अध्याय जोड़ने वाला साबित होगा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को जींद में कहा कि भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह टेक्नोलॉजी अभी दुनिया में सिर्फ 3-4 देशों के पास है और भारत ने इसमें भी सबसे आगे रहकर अपनी स्वदेशी क्षमता का परिचय दिया है।
ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हाइड्रोजन ट्रेनें हाल ही में दुनिया के सामने आई हैं। ये सिर्फ सात-आठ साल पहले शुरू हुई थीं। अभी केवल तीन या चार देशों के पास हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की क्षमता है। लेकिन भारत की हाइड्रोजन ट्रेन की क्षमताओं को सुनकर हर भारतीय को गर्व होगा।”पीएम मोदी ने दी ये जानकारी– जींद-सोनीपत रूट पर चलने वाली यह ट्रेन 3,200 हॉर्सपावर के प्रोपल्शन सिस्टम से चलती है।– यह न सिर्फ दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन है, बल्कि भारत की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन भी है।– 21वीं सदी हाइड्रोजन-पावर्ड रेल ट्रांसपोर्ट की सदी होगी।प्रधानमंत्री ने रेलवे के इलेक्ट्रिफिकेशन का जिक्र करते हुए कहा कि 1925 से 2014 तक 90 वर्षों में केवल 30% रेल नेटवर्क इलेक्ट्रिफाइड हो पाया था, जबकि पिछले 12 वर्षों में यह बढ़कर लगभग 99% हो गया है। हरियाणा में तो 100% इलेक्ट्रिफिकेशन हो चुका है।अन्य प्रमुख बातेंपीएम मोदी ने हरियाणा को 14,700 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का तोहफा दिया, जिनमें दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे, जींद-गोहाना हाईवे, अंबाला-काला अंब फोर-लेन सड़क और मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। उन्होंने हालिया विदेश यात्राओं (इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड) का जिक्र करते हुए कहा कि भारत इन देशों के साथ खेल और स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में सहयोग बढ़ाएगा, जिससे हरियाणा के खिलाड़ियों को विशेष लाभ मिलेगा। इसी के साथ पीएम मोदी ने हरियाणा के खिलाड़ियों को जमकर तैयारी करने को भी कहा ताकि आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक खेलों में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।पीएम मोदी का यह दौरा हरियाणा के लिए विकास, आधुनिकता और ग्रीन टेक्नोलॉजी का प्रतीक बन गया है। हाइड्रोजन ट्रेन का लॉन्च भारत को ग्लोबल क्लीन मोबिलिटी मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करता है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार सुबह हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर दिया। यह ट्रेन जींद से सोनीपत के रूट पर चलेगी। इस ऐतिहासिक मौके पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौजूद रहे। हरी झंडी दिखाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने स्टेशन पर उपस्थित लोगों और स्कूली छात्र-छात्राओं का अभिनंदन किया।
स्कूली बच्चों ने किया ‘ग्रीन ट्रेन’ का पहला सफरट्रेन के पहले सफर पर स्कूली बच्चे हाथों में तिरंगा लिए बेहद उत्साहित नजर आए। बच्चों ने ग्रीन ट्रांसपोर्ट का यह अनुभव बेहद यादगार बताया।विकास परियोजनाओं का तोहफाहाइड्रोजन ट्रेन को रवाना करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी जींद के एकलव्य स्टेडियम पहुंचे, जहां उन्होंने 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और कुछ को राष्ट्र को समर्पित किया।मुख्य परियोजनाएं:– दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे (पैकेज 1-5): 157.92 किमी लंबा, 4-लेन एक्सप्रेसवे (9,680 करोड़ रुपये)– दिल्ली-कटरा यात्रा समय: 14 घंटे से घटकर 6 घंटे– दिल्ली-अमृतसर यात्रा समय: 8 घंटे से घटकर 4 घंटे– अंबाला-काला अंब राजमार्ग: 33.81 किमी, 4-लेन (NH-7 और NH-344)– जींद-गोहाना ग्रीनफील्ड राजमार्ग: 40.60 किमी (NH-352A)– हांसी-बरवाला ब्राउनफील्ड राजमार्ग की आधारशिलाइस मौके पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रधानमंत्री का साफा पहनाकर और उपहार भेंट कर स्वागत किया।देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का आज का यह लॉन्च स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भर भारत और ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। -
हैदराबाद. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व अध्यक्ष जी. सतीश रेड्डी को प्रसिद्ध लेखक और जादूगर बी. वी. पट्टाभिराम की स्मृति में 'एमेस्को बुक्स' द्वारा शुरू किया गया पहला 'चेंज मेकर- 2026' पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। प्रतिष्ठित प्रकाशन हाउस 'एमेस्को बुक्स' ने बृहस्पतिवार को एक विज्ञप्ति में बताया कि केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा, अभिनेता चिरंजीवी और जया पट्टाभिराम सतीश रेड्डी को इस पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। विज्ञप्ति के अनुसार, 'एमेस्को' ने इस पुरस्कार की शुरुआत समाज के उन पथ-प्रदर्शकों को सम्मानित करने के लिए की है, जो युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। विज्ञप्ति में कहा गया कि पट्टाभिराम (1950-2025) ने अपने जीवन के बाद के वर्षों में पुस्तकों, व्याख्यानों और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से लाखों विद्यार्थियों को पेशेवर और शिक्षाविद के रूप में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। विज्ञप्ति के अनुसार, सतीश रेड्डी ने रक्षा क्षेत्र में अपनी अनूठी और नयी पहलों के माध्यम से रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और डीआरडीओ के अध्यक्ष के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
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राष्ट्रपति मुर्मू ने भगवान जगन्नाथ पर लिखा लेख
नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी श्रद्धा जताई और बताया कि कैसे उन्हें अहम मौकों पर भगवान से मार्गदर्शन मिला, जिसमें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए उनकी उम्मीदवारी की घोषणा भी शामिल है। अपने लिखे एक लेख को 'एक्स' पर साझा करते हुए मुर्मू ने कहा कि वह बचपन से ही महाप्रभु जगन्नाथ की भक्त रही हैं। राष्ट्रपति ने लिखा, ''बचपन से मैं जगनाथ जी की भक्त हूं। वे सर्वदा मेरे परम आराध्य हैं। मेरे जीवन के उत्थान और पतन के वे नियंता हैं। मेरे दुख-सुख के कर्ता-धर्ता हैं। जीवन में मैंने बहुत कष्ट भी सहे हैं। उन सब दुख से उबारा है मुझे महाबाहु ने। मैं उनकी बेटी जो हूं!'' उन्होंने कहा, ''राष्ट्रपति पद के लिए मुझे उम्मीदवार बनाने की घोषणा होते ही मैंने महाप्रभु का स्मरण किया। इतनी ऊंचाई पर मुझे ले जा रहे हो प्रभु, पग-पग पर मुझे सहारा देना, सदा मेरे पास रहना - यह मेरी प्रार्थना थी। उन्होंने मेरी प्रार्थना सुनी, सुन भी रहे हैं।'' मुर्मू ने कहा, ''राष्ट्रपति पद की उमीदवार के रूप में दिल्ली में रहने के दौरान रथयात्रा का महापर्व आया। परंतु पुरी जाना संभव नहीं था। रथयात्रा के दिन बड़े भोर में दिल्ली के हौजखास में बने जगन्नाथ मंदिर जाकर मैंने महाप्रभु के दर्शन किए। मन आनंद से भर गया। उनका आशीष मुझ पर बरस गया। बड़े आत्मविश्वास से मैंने अपना नामांकन-पत्र दाखिल किया।'' 'इस विशाल पथ पर' शीर्षक वाला लेख रथ यात्रा के अवसर पर साझा किया गया।
मुर्मू ने 25 जुलाई, 2022 को देश के 15वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली, जिससे वह देश की पहली आदिवासी राष्ट्राध्यक्ष बन गईं। मुर्मू ने याद किया, ''अत्यंत उत्साह से चुनाव प्रचार में भाग लिया। 25 जुलाई, 2022 को संसद के केंद्रीय कक्ष में शपथ लेने जाते समय मैं जगन्नाथ जी से प्रार्थना करते-करते जा रही थी। उनके आशीवाद से मेरा शपथ-पाठ खूब अच्छी तरह संपन्न हुआ। राष्ट्रपति के रूप में मेरे प्रथम भाषण के समय मानो वे मेरे साथ ही थे।'' उन्होंने कहा कि जल्द ही 10 नवंबर 2022 को पुरी जाने का कार्य्रकम तय हो गया।
राष्ट्रपति ने कहा, ''श्रीमंदिर के सिंहद्वार के पास पहुंचते ही मैं स्थिर नहीं रह पाई। तब तक मैं खुद को भूल चुकी थी। पावन-पथ की धूल में साष्टांग लेटकर मैंने महाप्रभु को प्रणाम किया। उसके बाद मंदिर में प्रवेश। गर्भगृह में पहुंचकर चतुर्धा मूर्तियों का दर्शन करते ही मैं आनंद से अभिभूत हो गई। महाप्रभु जगत के नाथ हैं, अनाथों के नाथ हैं। जगत के लोगों का दुःख दूर करने के लिए वे सदा तत्पर रहते हैं।'' इससे पहले दिन में 'एक्स' पर एक अलग पोस्ट में, मुर्मू ने रथ यात्रा के मौके पर लोगों को बधाई दी और देश की समृद्धि के लिए प्रार्थना की। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी)-2026 के परिणाम घोषित किए, जिसमें पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने शीर्ष स्थान हासिल किया जबकि कुल 11.21 लाख अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। सफल अथ्यर्थियों में 58 फीसदी से अधिक महिलाएं हैं।
एनटीए के अनुसार, जहां गुप्ता और बंसल ने 720 में से 715-715 अंक हासिल किए, वहीं 19 अभ्यर्थियों ने 700 अंक और 138 अभ्यर्थियों ने 690 अंक प्राप्त किए। इसके अलावा कुल 1,492 अभ्यर्थियों ने 650 या उससे अधिक अंक अर्जित किए, जबकि 10,160 अभ्यर्थियों ने 600 या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नौ मई को आयोजित यह परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच 12 मई को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा रद्द कर दी गई थी। इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा है। परीक्षा का दोबारा आयोजन 21 जून को किया गया था।
पिछले वर्ष परीक्षा के परिणाम 25 जून को घोषित किए गए थे। दोबारा परीक्षा के कारण प्रवेश प्रक्रिया के कार्यक्रम में देरी की आशंकाओं को दूर करते हुए एनटीए ने स्पष्ट किया कि परिणाम समय पर घोषित किए गए हैं, ताकि अभ्यर्थियों के लिए चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश और काउंसिलिंग का कार्यक्रम निर्धारित समय के अनुसार जारी रह सके। एनटीए ने कहा, ''प्रक्रिया में बदलाव करके परिणाम समय पर घोषित किए गए। इसके तहत विभिन्न चरणों को एक के बाद एक पूरा करने के बजाय समानांतर रूप से संचालित किया गया। साथ ही, ओएमआर शीट से संबंधित आपत्तियों की प्रक्रिया को उत्तर कुंजी जारी करने की प्रक्रिया से अलग रखा गया। प्रत्येक चरण को पूरी तरह पूरा किया गया और अभ्यर्थियों के देखने के लिए उपलब्ध कराया गया।" एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए कुल 1,08,000 सीट उपलब्ध हैं। इनमें से लगभग 56,000 सीट सरकारी कॉलेजों में हैं और करीब 52,000 सीट निजी कॉलेजों में हैं। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को देश में सेमीकंडक्टर परिवेश को मजबूत बनाने, मोबाइल फोन का उत्पादन बढ़ाने और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण केंद्र के तौर पर स्थिति मजबूत करने के लिए लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये के व्यय वाली दो बड़े विनिर्माण कार्यक्रमों को मंजूरी दी। सरकार ने सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के 'सेमीकॉन 2.0' कार्यक्रम को मंजूरी दी है। इसके साथ ही, मोबाइल फोन का घरेलू उत्पादन बढ़ाने, निर्यात को बढ़ावा देने और स्थानीय मूल्य सृजन को मजूबूत करने के मकसद से 62,500 करोड़ रुपये की 'मोबाइल फोन विनिर्माण' योजना को भी मंजूरी दी गई है। सेमीकंडक्टर कार्यक्रम 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' के पहले चरण पर आधारित है। यह छह मुख्य क्षेत्रों... चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण और सामग्री, फैब्रिकेशन सुविधाएं, अत्याधुनिक पैकेजिंग और परीक्षण, शोध और विकास तथा प्रतिभा विकास पर ध्यान देगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''इस कार्यक्रम के अंत तक हम स्वदेशी चिप के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जाएंगे।'' सरकार को उम्मीद है कि नई योजना से लगभग चार लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा और योजना अवधि के दौरान दो लाख करोड़ रुपये मूल्य का सेमीकंडक्टर उत्पादन होगा। वैष्णव ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपये की 'मोबाइल फोन विनिर्माण योजना' को भी मंजूरी दी है। इसके तहत वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक यानी पांच वर्षों के लिए विनिर्माताओं को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) दिए जाएंगे। पात्र मोबाइल फोन की बिक्री पर प्रोत्साहन 2.25 प्रतिशत से पांच प्रतिशत तक होंगे। साथ ही मुख्य कलपुर्जे की घरेलू खरीद और उत्पाद डिजाइन और शोध में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि मोबाइल फोन योजना से योजना अवधि के दौरान लगभग 39 लाख करोड़ रुपये का कुल उत्पादन होगा, निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और लगभग 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां सृजित होंगी। भारत मोबाइल फोन विनिर्माण के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। अब देश में उपयोग होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन यहीं बनते हैं। 2025 में मोबाइल फोन भारत का सबसे अधिक निर्यात होने वाला उत्पाद बन गया। इसने डीजल और तराशे हुए हीरों जैसे पारंपरिक निर्यात वस्तुओं को पीछे छोड़ दिया। सेमीकॉन 2.0 का मकसद सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा, वाणिज्यिक और रणनीतिक चिप डिजाइन और विभिन्न क्षेत्रों में जरूरी महत्वपूर्ण कलपुर्जे बनाने की क्षमता को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम सेमीकंडक्टर मशीनरी, सामग्री, रसायन और गैस बनाने वाली कंपनियों को मदद देगा और साथ ही भारत में और फैब्रिकेशन संयंत्र लाने की कोशिश करेगा। मंत्रिमंडल बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस पहल से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के तौर पर स्थापित करने में मदद मिलेगी। उम्मीद है कि देश की पहली सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाई 2028 में काम करना शुरू कर देगी। इस कार्यक्रम का मकसद असेंबली, परीक्षण, मार्किंग और पैकेजिंग और आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट क्षमताओं को बढ़ाना और साथ ही अत्याधुनिक चिप प्रौद्योगिकी पर शोध को आगे बढ़ाना भी है। भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर जोर देने से 12 विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। इन परियोजनाओं में कुल मिलाकर 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा। सरकार ने कहा कि 2014-15 के बाद से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में काफी वृद्धि हुई है। उत्पादन सात गुना और निर्यात 11 गुना बढ़ गया है। इसमें 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत मोबाइल फोन विनिर्माण का बड़ा योगदान है। सेमीकंडक्टर और मोबाइल विनिर्माण के ये कार्यक्रम भारत की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका मकसद प्रमुख प्रौद्योगिकी में घरेलू क्षमताएं बनाना, आयात पर निर्भरता कम करना और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती के साथ एकीकृत होना है।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) श्रम-प्रधान उद्योगों में छिपी संभावनाओं के द्वार खोलने वाला है, जिससे देश के 99 प्रतिशत निर्यात को बगैर-शुल्क (जीरो-ड्यूटी) बाजार पहुंच मिलेगी। शाह ने कहा कि बुधवार से लागू होने वाला यह समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना वाले 'विकसित भारत' की कुंजी है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''यह समझौता श्रम-प्रधान उद्योगों में मौजूद कई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला है। इससे भारतीय निर्यात का 99 प्रतिशत हिस्सा शुल्क-मुक्त हो जायेगा, जिनमें कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) क्षेत्र शामिल हैं।'' उन्होंने कहा कि यह समझौता केंद्र सरकार की जन-हितैषी कूटनीति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह समझौता ब्रिटेन में भारतीय पेशेवरों को भी महत्वपूर्ण छूट प्रदान करेगा। बुधवार से लागू हुए वृहद आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर पिछले वर्ष जुलाई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्रिटेन के उनके समकक्ष केअर स्टॉर्मर ने हस्ताक्षर किये थे।
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नयी दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के डॉक्टरों ने चार महीने के एक शिशु के फेफड़े बचाने के लिए उसकी बेहद जटिल और दुर्लभ सर्जरी सफलतापूर्वक की है। यह शिशु जन्मजात विकृति से पीड़ित था, जिससे उसके दोनों फेफड़े प्रभावित थे। अस्पताल प्रशासन ने बुधवार को यह जानकारी दी। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि ऑपरेशन के महज दो दिन बाद शिशु को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टरों के मुताबिक, फेफड़े के एक हिस्से को निकालने वाली 'सेगमेंट-लेवल लंग रिसेक्शन या सेगमेंटेक्टॉमी सर्जरी' इतनी कम उम्र के मरीज पर की गई अपनी तरह की सबसे दुर्लभ सर्जरी में से एक है। यह देश के अग्रणी संस्थान में उपलब्ध उन्नत बाल चिकित्सा सर्जिकल सुविधाओं को भी दर्शाती है। डॉक्टरों के अनुसार, शिशु के दाएं फेफड़े में यह सर्जरी की गई, जबकि बाएं फेफड़े की सर्जरी कुछ महीने बाद निर्धारित की जाएगी। डॉक्टरों ने बताया कि जन्म से पहले ही शिशु में जन्मजात पल्मोनरी एयरवे मालफॉर्मेशन (सीपीएएम) की पहचान कर ली गई थी। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भावस्था के दौरान फेफड़े का कुछ हिस्सा असामान्य रूप से विकसित हो जाता है और उसमें गांठ जैसी संरचनाएं बन जाती हैं, जो फेफड़े के सामान्य ऊतकों की तरह काम नहीं कर पातीं। डॉक्टरों ने बताया कि यह मामला विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि इस विकृति ने एक फेफड़े के बजाय दोनों फेफड़ों को प्रभावित किया था, जबकि आमतौर पर यह स्थिति केवल एक ही फेफड़े में देखी जाती है। उन्होंने बताया कि पूरे फेफड़े के एक हिस्से को निकालने से भविष्य में फेफड़ों की क्षमता में काफी कमी आ सकती थी, इसलिए डॉक्टरों की टीम ने फेफड़े को बचाने वाली तकनीक अपनाई और दाएं फेफड़े के केवल प्रभावित हिस्सों को ही हटाया। प्रत्येक फेफड़ा छोटे-छोटे कार्यात्मक हिस्सों में बंटा होता है, जिन्हें सेगमेंट कहा जाता है। इनमें से हर हिस्से की अपनी अलग वायु नली और रक्त आपूर्ति होती है। डॉक्टरों ने बताया कि जहां फेफड़े के एक बड़े हिस्से को निकालने की सर्जरी अपेक्षाकृत आसान होती है, वहीं सेगमेंटेक्टॉमी में गहराई में स्थित रक्त वाहिकाओं और वायु नलियों को बेहद सावधानी से अलग करना पड़ता है, ताकि आसपास के स्वस्थ ऊतकों को सुरक्षित रखा जा सके। यह सर्जरी बाल शल्य चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. विशेष जैन के नेतृत्व में की गई। ऑपरेशन बिना किसी जटिलता के सफलतापूर्वक पूरा हुआ और शिशु को दो दिन बाद स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि फेफड़ों की जन्मजात विकृति से पीड़ित चुनिंदा शिशुओं में समूचे हिस्से को हटाने के बजाय केवल प्रभावित भाग को निकालना संभव है। उन्होंने कहा कि इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद मिलती है और मरीज के लिए लंबे समय तक बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकते हैं। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को बुधवार को मंजूरी दे दी। इसका उद्देश्य देश में एक करोड़ टन अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता सृजित करना और सर्वाधिक इस्तेमाल होने वाले इस उर्वरक के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूर नए निवेश ढांचे के तहत प्राकृतिक गैस आधारित आठ से नौ नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा, ''पिछले एक दशक में छह नए संयंत्र स्थापित होने से यूरिया आयात पर भारत की निर्भरता कम हुई है। आठ से नौ नए संयंत्रों की स्थापना से देश अपनी पूरी आवश्यकता की पूर्ति घरेलू स्तर पर कर सकेगा और इस उर्वरक के मामले में आत्मनिर्भर बन जाएगा।'' उन्होंने कहा कि यूरिया की मांग हर साल लगभग पांच प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। भारत में यूरिया का उत्पादन लगभग तीन करोड़ टन है जबकि मांग चार करोड़ टन है। एक करोड़ टन की कमी आयात के माध्यम से पूरी की जाती है। आज मंजूर की गई नीति का उद्देश्य अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता सृजित करना और इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। वैष्णव ने कहा कि इस नीति के तीन प्रमुख स्तंभ -सब्सिडी की गणना के लिए स्थिर एवं परिवर्तनीय लागत को अलग करना, यूरिया संयंत्र संचालित करने वाली कंपनियों के लिए 12-16 प्रतिशत के बीच सुनिश्चित प्रतिफल और विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम को कम करना है। उन्होंने कहा कि नई नीति, नई निवेश नीति (एनआईपी)-2012 का विस्तार है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) और सामाजिक सुरक्षा समझौता लागू होने को दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण क्षण बताया और कहा कि इससे आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि इन दोनों समझौतों से भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंध और अधिक गहरे होंगे तथा दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षा लोगों के लिए ठोस अवसरों में बदलेगी। मोदी ने कहा कि सीईटीए से किसानों, उद्यमियों और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही कई प्रमुख क्षेत्रों को ब्रिटेन के बाजार तक अधिक मजबूत पहुंच प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि यह समझौता प्रौद्योगिकी, पेशेवर सेवाओं और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को भी गहरा करेगा तथा कुशल भारतीय प्रतिभाओं की अधिक आवाजाही को बढ़ावा देगा। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, '' यह भारत-ब्रिटेन साझेदारी में एक महत्वपूर्ण क्षण है। व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) तथा सामाजिक सुरक्षा समझौता लागू होने से हमारे आर्थिक संबंध और अधिक गहरे होंगे। ये दोनों समझौते मिलकर हमारी साझा महत्वाकांक्षा को हमारे लोगों के लिए ठोस अवसरों में बदलेंगे।'' मोदी ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा समझौता ब्रिटेन में अस्थायी रूप से काम कर रहे भारतीय पेशेवरों को अमूल्य सहयोग प्रदान करेगा और भारतीय उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा, '' यह क्षण हमारे देशों के बीच विश्वास और व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश एवं नवाचार से प्रेरित भविष्य की साझेदारी बनाने के हमारे संकल्प को दर्शाता है। भारत और ब्रिटेन साझा समृद्धि के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।'' भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) बुधवार से लागू हो गया। इससे शुल्कों में कटौती की प्रक्रिया शुरू होगी और वस्तुओं तथा सेवाओं की दोनों दिशाओं में आवाजाही बढ़ने से द्विपक्षीय व्यापार को गति मिलेगी। सीईटीए पर पिछले साल जुलाई में हस्ताक्षर किए गए थे।
गौरतलब है कि यह समझौता 2030 तक दोनों देशों के बीच मौजूदा अनुमानित 48 अरब पाउंड के सालाना व्यापार को कम से कम दोगुना करने में मदद करेगा। साथ ही, दीर्घावधि में दोनों देशों के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हर साल करीब पांच अरब पाउंड की वृद्धि में योगदान देगा। -
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की घटना से "हम जैसे राम भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है", लेकिन इस मामले के बहाने अयोध्या और राम जन्मभूमि को बदनाम करना उचित नहीं है। इंडिया टुडे समूह के कार्यक्रम "पंचायत आज तक" को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी (सपा), पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अपने पुराने रिकॉर्ड के बावजूद आस्था से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, "अयोध्या की घटना ने निश्चित रूप से हम सभी की, हम जैसे राम भक्तों की आस्था को चोट पहुंचाई है। राम मंदिर ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और सरकार को इसके मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। ट्रस्ट ने जांच का अनुरोध किया और राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया। जैसे ही एसआईटी की रिपोर्ट आई, कार्रवाई शुरू कर दी गई।" उन्होंने कहा कि चोरी की घटना में कथित रूप से शामिल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उनकी सहायता करने के आरोप में दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है। योगी ने कहा कि गिरफ्तारी के साथ-साथ नैतिक आधार पर दो इस्तीफे भी हुए हैं, जिनमें ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा शामिल हैं। उन्होंने कहा, "लेकिन इस घटना का इस्तेमाल अयोध्या, राम जन्मभूमि और हिंदुओं की आस्था को बदनाम करने के लिए करना उचित नहीं है।"
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नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी अवसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों को मजबूत करने और तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने के प्रयासों से पूर्वोत्तर अब वैज्ञानिक नवाचार और प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। डॉ. सिंह ने शिलांग स्थित उत्तर पूर्व प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग एवं पहुंच केंद्र (NECTAR) में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों की समीक्षा बैठक की और नई भू-सूचना विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले पूरे पूर्वोत्तर में केवल दो मौसम रडार थे, जिनमें मेघालय में सिर्फ एक रडार था, जबकि चेरापुंजी दुनिया में सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र है। अब पूरे क्षेत्र में 13 मौसम रडार कार्यरत हैं। इसी तरह भूकंपीय वेधशालाओं की संख्या 84 से बढ़कर 171 हो गई है। उन्होंने बताया कि मेघालय और त्रिपुरा में पहली बार बिजली गिरने का पता लगाने वाले विशेष स्टेशन भी स्थापित किए गए हैं, जिससे आपदा प्रबंधन और वैज्ञानिक तैयारी मजबूत हुई है।शिलांग में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान डॉ. सिंह ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के विभिन्न संस्थानों के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि NECTAR प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को किसानों, युवाओं, उद्यमियों और ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विज्ञान का लाभ सीधे आम नागरिकों के जीवन में दिखाई देना चाहिए।जितेंद्र सिंह ने NECTAR और CSIR-CFTRI द्वारा विकसित मोबाइल फूड प्रोसेसिंग यूनिट का अवलोकन किया। उन्होंने इसे “चलती-फिरती प्रसंस्करण इकाई” बताते हुए कहा कि यह तकनीक सीधे किसानों तक पहुंचकर कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन, खाद्य गुणवत्ता, कौशल विकास और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दे रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।उन्होंने पीएम-डिवाइन कार्यक्रम के तहत स्थापित वसुंधरा मृदा कार्बनिक कार्बन पहचान प्रयोगशाला की सराहना करते हुए कहा कि यह सुविधा किसानों को वैज्ञानिक मृदा परीक्षण और सटीक कृषि सलाह उपलब्ध करा रही है। अब तक लगभग 2,500 किसानों को मृदा परीक्षण किट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं, जिससे क्षेत्र का व्यापक मृदा स्वास्थ्य डेटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी।डॉ. सिंह ने NECTAR की STEM शिक्षा प्रयोगशाला का दौरा किया, जहां रोबोटिक्स, कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और 3D प्रिंटिंग के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर के सहयोग से पूर्वोत्तर में 50 STEM प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जिनसे लगभग 25,000 विद्यार्थियों को लाभ मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान ने अब तक 569 ड्रोन तकनीशियन, 247 GIS एवं रिमोट सेंसिंग विशेषज्ञ, 107 प्रमाणित ड्रोन पायलट और 4,500 से अधिक छात्रों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया है।केंद्रीय मंत्री ने NECTAR की अत्याधुनिक भू-सूचना विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि 17 उन्नत ड्रोन, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीक से लैस यह प्रयोगशाला वन कार्बन आकलन, जैव विविधता संरक्षण, आपदा प्रबंधन और खनन बहाली जैसी परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ड्रोन आधारित मैपिंग से स्वामित्व योजना के तहत 700 से अधिक गांवों और लगभग 25,000 किसानों से जुड़ी वैज्ञानिक जैविक कृषि परियोजनाओं को भी सहायता मिली है।डॉ. सिंह ने कहा कि NECTAR वैज्ञानिक जैविक कृषि, सामुदायिक बीज बैंक, केले के रेशे का मूल्य संवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण, बांस और प्राकृतिक रेशा तकनीक, उद्यमिता और तकनीक आधारित ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि इन पहलों से किसान संगठनों को मजबूती मिल रही है, बाजार तक पहुंच बेहतर हो रही है और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।केंद्रीय मंत्री ने न्यू शिलांग में NECTAR के स्थायी परिसर के निर्माण कार्य पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इसके पूरा होने पर अनुसंधान, नवाचार, इन्क्यूबेशन, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि NECTAR भविष्य में भू-स्थानिक विज्ञान, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक आधारित ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय केंद्र बनकर विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा। -
नई दिल्ली। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए उद्योग-उन्मुख कुशल कार्यबल तैयार करने की दिशा में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (एनआईएफटीईएम), तंजावुर ने आईटीसी लिमिटेड के इंटीग्रेटेड कंज्यूमर गुड्स मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स (आईसीएमएल), त्रिची के सहयोग से सहायक बेकिंग तकनीशियन (एनएसक्यूएफ लेवल-3) प्रमाणपत्र कार्यक्रम के तहत अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण की शुरुआत की है। 3 जुलाई 2026 को आईटीसी-आईसीएमएल, त्रिची परिसर में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन एनआईएफटीईएम-तंजावुर के निदेशक प्रो. वी. पलानीमुथु ने किया। इस अवसर पर आईटीसी-आईसीएमएल के महाप्रबंधक एवं प्रमुख सुरजीत सिंह रोरिया और वरिष्ठ मानव संसाधन प्रबंधक पद्मनाभन टी. भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के पहले बैच में 18 प्रशिक्षुओं का चयन किया गया है। इन्हें 7 जुलाई से 20 अगस्त 2026 तक आईटीसी-आईसीएमएल के औद्योगिक परिसर में व्यावहारिक और उद्योग-एकीकृत प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान वास्तविक उत्पादन वातावरण में कौशल विकास कराया जाएगा।एनआईएफटीईएम ने बताया कि इस बैच के सभी प्रशिक्षुओं को पहले ही आईटीसी लिमिटेड में रोजगार का आश्वासन दिया जा चुका है। इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षण के साथ रोजगार उपलब्ध कराकर उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करना है।संस्थान के अनुसार, खाद्य प्रसंस्करण के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे उद्योग-एकीकृत कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। एनसीवीईटी से मान्यता प्राप्त डीम्ड अवार्डिंग बॉडी के रूप में एनआईएफटीईएम-तंजावुर राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF) के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराता रहेगा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) के उद्योग-तैयार कार्यबल विकसित करने के मिशन को आगे बढ़ाएगा। -
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन् ने उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में ‘द वॉयस ऑफ जस्टिस: जस्टिस गवई स्पीक्स’ पुस्तक का विमोचन किया। प्रो. (डॉ.) एस. शिवकुमार द्वारा संपादित और कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन (सीएलईए) के सहयोग से थॉमसन रॉयटर्स द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर. गवई के भाषणों, व्याख्यानों और विचारों का संकलन किया गया है। उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि यह पुस्तक अनुभव, संवैधानिक अनुशासन और सार्वजनिक उत्तरदायित्व से परिपक्व न्यायिक सोच का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि यह संविधान, विधि के शासन, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है तथा संवैधानिक विमर्श और विधिक अध्ययन को नई मजबूती देगी।
सी. पी. राधाकृष्णन् ने कहा कि भारतीय संविधान एक जीवंत और निरंतर विकसित होने वाला दस्तावेज है, जिसने पिछले 75 वर्षों में अधिकार और जवाबदेही, अधिकारों और कर्तव्यों तथा निरंतरता और परिवर्तन के बीच संतुलन बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि संविधान लोकतांत्रिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला बना हुआ है, जबकि संसद की संशोधन शक्ति उसे समय की जरूरतों के अनुरूप विकसित होने में सक्षम बनाती है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि न्यायपालिका की भूमिका संवैधानिक शासन व्यवस्था और विधि के शासन में नागरिकों के विश्वास को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में अधिकारों के साथ संयम भी उतना ही आवश्यक है। उनके अनुसार मजबूत संस्थाएं और न्याय व्यवस्था संस्थागत सत्यनिष्ठा, संवैधानिक अनुशासन, जनविश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर ही कायम रहती हैं। उन्होंने कहा कि संवैधानिक शासन व्यवस्था को समाज की बदलती जरूरतों और नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति उत्तरदायी रहना चाहिए। वंचित समुदायों के सशक्तीकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा, अवसर और आशा सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है।उपराष्ट्रपति ने न्यायमूर्ति बी.आर. गवई के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी न्यायिक यात्रा संवैधानिक मूल्यों, संस्थागत संतुलन और सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने की अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक है।अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने विधि जगत से जुड़े लोगों से समय-समय पर गरीब और वंचित लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की अपील की, ताकि न्याय सभी के लिए सुलभ बन सके।कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर. गवई, सीएलईए के अध्यक्ष एवं पुस्तक के संपादक प्रो. (डॉ.) एस. शिवकुमार, थॉमसन रॉयटर्स के प्रकाशक गौरी शंकर नटेशन सहित विधि जगत की अनेक प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। -
नई दिल्ली। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत टेक्स 2026 का उद्घाटन किया। चार दिवसीय आयोजन में रिकॉर्ड अंतरराष्ट्रीय भागीदारी दर्ज की गई है। 130 से अधिक देशों के 6,000 से ज्यादा खरीदार, 1.3 लाख से अधिक व्यापारिक आगंतुक और 20,000 से अधिक वस्त्र उत्पाद इस आयोजन का हिस्सा हैं। इसे भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से भारत टेक्स ट्रेड फेडरेशन (बीटीटीएफ) आयोजित कर रहा है। उद्घाटन समारोह में गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत टेक्स 2026 भारत के वस्त्र विजन को वैश्विक व्यापारिक अवसरों से जोड़ने वाला मंच है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारतीय एमएसएमई, पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों और मैन्युफैक्चरर्स को वैश्विक खरीदारों से जोड़ने के साथ भारत को विश्वसनीय, इनोवेटिव और सस्टेनेबल सोर्सिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करेगा।
आयोजन 16 लाख वर्ग फुट से अधिक प्रदर्शनी क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है। इसमें टेक्सटाइल वैल्यू चेन के सभी प्रमुख क्षेत्रों का प्रदर्शन किया गया है। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा, वस्त्र सचिव नीलम शमी राव, विभिन्न राज्यों के मंत्री, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, वैश्विक खरीदार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहे। रूस और न्यूजीलैंड के मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। भारत टेक्स 2026 में आठ प्रायोजक राज्यों—मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु—के अलावा आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, मणिपुर, राजस्थान और पश्चिम बंगाल सहित नौ अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने औद्योगिक बुनियादी ढांचे, निवेश अवसरों और नीतिगत पहलों का प्रदर्शन किया।आगामी चार दिनों में आयोजन के दौरान 100 से अधिक नॉलेज सेशन होंगे, जिनमें 39 पैनल चर्चा, 16 राउंडटेबल, 37 मास्टरक्लास और आठ स्टेट सेशन शामिल हैं। साथ ही 4,000 से अधिक क्यूरेटेड बी2बी बैठकें, 100 से ज्यादा बी2जी बैठकें और व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी तथा मार्केट एक्सेस से जुड़े 30 से अधिक एमओयू पर हस्ताक्षर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।भारत टेक्स 2026 में सीआईटीआई टेक्सटाइल सस्टेनेबिलिटी अवॉर्ड्स 2026 का आयोजन भी होगा, जिसमें जिम्मेदार व्यावसायिक प्रथाओं को सात प्रमुख श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। आयोजन के लिए मोबाइल ऐप और डिजिटल बिजनेस प्लेटफॉर्म के माध्यम से एआई आधारित सहायता, बायर-सैलर मैचमेकिंग, डिजिटल बैज, क्यूआर आधारित लीड कैप्चर और मीटिंग शेड्यूलिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। -
भुवनेश्वर. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को बंगाल की खाड़ी में संभावित रूप से बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव के कारण रथयात्रा के दौरान तीर्थनगरी पुरी सहित ओडिशा के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की। विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा इस वर्ष 16 जुलाई को पुरी में आयोजित की जाएगी। इस उत्सव को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। आईएमडी के दोपहर की बुलेटिन के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बांग्लादेश तट पर कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। मौसम प्रणाली के प्रभाव से बुधवार से शुक्रवार सुबह तक पुरी में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। आईएमडी ने बुधवार सुबह तक केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर और भद्रक जिलों के कई हिस्सों में भी भारी बारिश का अनुमान जताते हुए इन तीन जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है। समुद्र की स्थिति खराब से बहुत खराब रहने की संभावना है और आईएमडी ने इसे देखते हुए मछुआरों को 14 से 18 जुलाई तक ओडिशा तट के आसपास एवं समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है। आईएमडी ने मयूरभंज, क्योंझर, बालासोर, जाजपुर, खुर्दा, पुरी, कटक, नयागढ़, गंजाम और गजपति जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' तथा देवगढ़, सुंदरगढ़, अंगुल, बौध, ढेंकनाल, कंधमाल और रायगडा जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किये है। इसी तरह बुधवार के लिए जगतसिंहपुर जिले में 'रेड अलर्ट' और केंद्रपाड़ा, भद्रक, क्योंझर, खुर्दा, पुरी, कटक, जाजपुर, कंधमाल और नयागढ़ जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है। आईएमडी ने 15 जुलाई के लिए मयूरभंज, बालासोर, देवगढ़, सुंदरगढ़, अंगुल, बौध, ढेंकनाल, गंजाम, गजपति और रायगडा जिलों के वास्ते 'येलो अलर्ट' जारी किया है। इसके अलावा 16 जुलाई को केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर, कटक, मयूरभंज, बालासोर, भद्रक, क्योंझर, खुर्दा, पुरी, जाजपुर, देवगढ़, सुंदरगढ़, संबलपुर, झारसुगुड़ा, बरगढ़, अंगुल, बौध, ढेंकनाल, गंजाम, गजपति, रायगडा, कंधमाल और नयागढ़ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
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गुवाहाटी. प्रख्यात साहित्यकार, अनुवादक और शिक्षाविद तथा पद्मश्री से सम्मानित गीता उपाध्याय का उम्र संबंधी बीमारियों के कारण तेजपुर में निधन हो गया। वह 87 वर्ष की थीं। वह एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं और असम की पहली गोरखा महिला थीं जिन्होंने स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की थी। वह गोरखा समुदाय के अखिल भारतीय संगठन भारतीय गोरखा परिसंघ (बीजीपी) की असम इकाई की संस्थापक अध्यक्ष भी थीं। उपाध्याय को तेजपुर के एक निजी अस्पताल में कुछ समय के लिए भर्ती कराया गया था और स्वस्थ होने के बाद वह सोमवार दोपहर घर लौट आई थीं। हालांकि, इसके कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई और रात करीब नौ बजे उनका निधन हो गया। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "असमिया और नेपाली साहित्य में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रख्यात शिक्षाविद और लेखिका श्रीमती गीता उपाध्याय के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है।" उन्होंने कहा, "पद्मश्री और 2026 के सती साधनी पुरस्कार से सम्मानित गीता उपाध्याय की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।" शर्मा ने कहा, "इस दुख की घड़ी में उनके परिवार, प्रशंसकों और शुभचिंतकों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं हैं। दिवंगत आत्मा की सद्गति के लिए प्रार्थना करता हूं।" बीजीपी, असम के महासचिव नंदा किराती देवान ने कहा कि उपाध्याय के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए संगठन ने मंगलवार से एक सप्ताह के शोक की घोषणा की है। 14 फरवरी, 1939 को असम के तत्कालीन दरांग ज़िले (अब विश्वनाथ ज़िला) के गंगमौथान में जन्मीं उपाध्याय एक प्रतिष्ठित परिवार से थीं। वह स्वतंत्रता सेनानी छबीलाल उपाध्याय की पोती थीं जो असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पहले (चयनित) अध्यक्ष भी थे। उन्होंने 2012 में 'करेन्गोर लिगिरी' का असमिया से नेपाली में 'दरबारी सुसारे' के रूप में अनुवाद करने के लिए साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार जीता। 2016 में, उपाध्याय ने अपने दादाजी के जीवन पर आधारित नेपाली उपन्यास 'जन्मभूमि मेरो स्वदेश' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार जीता था।
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नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने आज भोजशाला विवाद को सुलझाने के लिए रोज़ाना सुनवाई करने पर सहमति जताई। हालांकि, न्यायाधीश सूर्यकांत, जॉयमाल्य बागची और न्यायाधीश वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की उस अंतरिम आदेश की मांग को ठुकरा दिया जिसमें पुरानी स्थिति बहाल करने को कहा गया था। इस पुरानी व्यवस्था के अंतर्गत मुसलमानों को तय दिनों पर हिंदुओं की पूजा के साथ-साथ शुक्रवार को नमाज़ पढ़ने की इजाज़त थी। पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह विवादित जगह के पास ही मुस्लिम पक्ष के लिए शुक्रवार को दोपहर एक बजे से तीन बजे के बीच नमाज़ पढ़ने के लिए एक अलग खुली जगह उपलब्ध कराए।
पीठ ने साफ़ किया कि यह व्यवस्था फ़िलहाल के लिए अस्थाई है और मामले के अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगी। पीठ ने मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए दोनों पक्षों से संयम बरतने को कहा। शीर्ष अदालत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली कई अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि धार ज़िले में विवादित भोजशाला परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है और वहां नमाज़ पढ़ने पर रोक लगा दी गई थी। -
नई दिल्ली। भारत ने आज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय दो जहाजों, एमटी अल बहिया और एमटी मोम्बासा पर हुए हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने आज सुबह नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास के उप मिशन प्रमुख को तलब किया और इन हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। दोनों जहाजों पर सवार 46 सदस्यीय चालक दल में से 30 भारतीय नाविक थे।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि एमटी अल बहिया पर सवार 12 भारतीय नागरिकों में से एक की मृत्यु हो गई है और एक घायल हो गया है। एमटी मोम्बासा पर सवार 18 भारतीय नागरिकों में से नौ घायल हुए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। मंत्रालय ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय मिशन और दूतावास स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं और प्रभावित भारतीय नाविकों को हर संभव सहायता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों के संपर्क में हैं। भारत ने नाविकों को निशाना बनाकर किए गए इन हमलों और हिंसा की कड़ी निंदा की है। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध और सुरक्षित नौवहन बाधित हुआ है। भारत ने पश्चिम एशियाई क्षेत्र में हमलों की दोबारा शुरुआत और शत्रुता बढने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। साथ ही क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए हिंसा को तत्काल रोकने और संवाद तथा कूटनीति की ओर लौटने का आह्वान किया है। बयान में कहा गया है कि क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बंद होना चाहिए ताकि क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में निर्बाध नौवहन और व्यापार को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। -
नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 13 जुलाई, 2026 को अपने आधिकारिक स्पेन दौरे की शुरुआत की। यात्रा के पहले दिन उन्होंने भारत-स्पेन आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से कई उच्च स्तरीय बैठकों में भाग लिया। दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, नवाचार, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ाने के साथ-साथ नए आर्थिक अवसरों की तलाश पर जोर दिया। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और स्पेन अपने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं और वर्ष 2026 को भारत-स्पेन द्विभाषी संस्कृति, पर्यटन एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता वर्ष के रूप में मना रहे हैं।
पीयूष गोयल ने स्पेन के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं अर्थव्यवस्था, व्यापार और व्यवसाय मंत्री कार्लोस कुएर्पो कैबालेरो से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत बनाने, बाजार पहुंच बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने तथा नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, उन्नत विनिर्माण, डिजिटल प्रौद्योगिकी, अवसंरचना और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर भी विचार-विमर्श किया तथा नए निवेश को बढ़ावा देने के लिए फास्ट ट्रैक तंत्र का प्रभावी उपयोग करने और इस वर्ष के अंत में भारत-स्पेन संयुक्त आयोग की बैठक आयोजित करने पर सहमति जताई।गोयल ने स्पेन के उद्योग एवं पर्यटन मंत्री जोर्डी हेरेउ बोहर से भी मुलाकात की। बैठक में सतत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, गतिशीलता, उन्नत विनिर्माण, पर्यटन, ऑटोमोटिव, रेलवे और स्मार्ट बुनियादी ढांचे में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने “मेक इन इंडिया” के तहत सी-295 कार्यक्रम को औद्योगिक साझेदारी का सफल उदाहरण बताया और वर्ष 2026 को भारत-स्पेन संस्कृति, पर्यटन एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता वर्ष के रूप में मनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।दौरे का प्रमुख आकर्षण भारत-स्पेन व्यापार मंच रहा, जिसका आयोजन एफआईसीसी, स्पेन चैंबर ऑफ कॉमर्स, सीईओई और आईसीईएक्स स्पेन ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट ने संयुक्त रूप से किया। मंच में दोनों देशों के सरकारी अधिकारियों, उद्योगपतियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अपने संबोधन में पीयूष गोयल ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बताते हुए स्पेनिश कंपनियों को विनिर्माण, अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और नवाचार जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया।गोयल ने स्पेन की व्यापार एवं निवेश प्रोत्साहन एजेंसी आईसीईएक्स के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर निवेश प्रवाह बढ़ाने, प्रौद्योगिकी सहयोग और कारोबारी संबंधों को आसान बनाने के उपायों पर चर्चा की। दिन के अंत में उन्होंने एफआईसीसी के नेतृत्व वाले भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कर स्पेन में निवेश और व्यापार विस्तार के अवसरों पर विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने विश्वास जताया कि यह यात्रा व्यापार, निवेश, औद्योगिक सहयोग और नवाचार के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देगी। -
नई दिल्ली। भारत ने फिलिस्तीन की संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण सदस्यता की मांग का फिर से समर्थन किया है। साथ ही, इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान के लिए “दो-राष्ट्र समाधान” (Two-Nation Solution) पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। विदेश मंत्रालय (MEA) की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने सोमवार को ब्रुसेल्स में ‘फिलिस्तीन डोनर ग्रुप’ की मंत्री-स्तरीय बैठक में भारत का आधिकारिक रुख रखा।
बैठक में रंगनाथन ने कहा कि भारत लंबे समय से फिलिस्तीन का विश्वसनीय साझेदार रहा है। उन्होंने दो-राष्ट्र समाधान के प्रति भारत के निरंतर समर्थन और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की सदस्यता के लिए फिलिस्तीन की दावेदारी के समर्थन को दोहराया।उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत फिलिस्तीन की UN पूर्ण सदस्यता का समर्थन करता है और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इजराइल और फिलिस्तीन दोनों देशों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का समर्थन करता है।MEA सचिव ने फिलिस्तीन में भारत द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न विकास कार्यक्रमों का जिक्र किया। भारत की परियोजनाएं मुख्य रूप से स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, क्षमता निर्माण और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर केंद्रित हैं। ब्रुसेल्स बैठक के दौरान श्रीप्रिया रंगनाथन ने फिलिस्तीनी लोगों के लिए और सहायता बढ़ाने की दिशा में पुनर्वास, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ी नई परियोजनाओं की घोषणा भी की।भारत का यह रुख उसकी पारंपरिक विदेश नीति के अनुरूप है, जिसमें वह फिलिस्तीनी मुद्दे पर लंबे समय से संतुलित और सिद्धांतवादी रुख अपनाता आया है। यह बैठक यूरोपीय संघ, उसके सदस्य देशों, फिलिस्तीन और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच फिलिस्तीनी अथॉरिटी को वित्तीय सहायता और मानवीय मदद पहुंचाने पर चर्चा के लिए आयोजित की गई थी। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार, 15 जुलाई को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन करेंगी। आयुष मंत्रालय के तहत आयोजित यह सेमिनार 15 से 17 जुलाई तक चलेगा, जबकि 14 जुलाई को पूर्व-कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम शल्य चिकित्सा के जनक आचार्य सुश्रुत की जयंती के अवसर पर आयोजित हो रहा है।
सेमिनार में आयुर्वेद और आधुनिक शल्य चिकित्सा के एकीकरण पर देश-विदेश के विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे। कार्यक्रम के दौरान एनसीआईएसएम द्वारा तैयार “आयुर्वेद महिला स्नातकों के पेशेवर करियर का मूल्यांकन” विषयक राष्ट्रीय अध्ययन भी जारी किया जाएगा। इसके अलावा, 14.5 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक 3-टेस्ला हाई-फील्ड एमआरआई प्रणाली का उद्घाटन होगा। इस प्रणाली में एआई-सक्षम वर्कफ्लो, बायोमेट्रिक्स और उन्नत इमेजिंग सुविधाएं उपलब्ध होंगी।चर्चा के प्रमुख विषयतीन दिवसीय कार्यक्रम में मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चाएं, कार्यशालाएं और वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रस्तुतियां होंगी। मुख्य विषयों में शामिल हैं:– मलाशय रोग विज्ञान– पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा– एकीकृत ऑन्कोलॉजी– चिकित्सा-कानूनी मुद्दे– सर्जरी में बौद्धिक संपदा– घाव प्रबंधन, अग्निकर्म, क्षारसूत्र और मर्म चिकित्साअंतरराष्ट्रीय भागीदारीसेमिनार में थाईलैंड, इजराइल, ऑस्ट्रिया, यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल, ग्रीस और भारत के प्रमुख सर्जन, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग लेंगे। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन आयुर्वेद की प्राचीन शल्य विद्या को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






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