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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर वीर सैनिकों के अद्भुत पराक्रम और देशभक्ति को सलाम किया है। उन्होंने कहा कि एक साल बाद भी आतंकवाद को हराने और उसे पनपने में मदद करने वाले पूरे तंत्र को नेस्तनाबूद करने के अपने संकल्प पर हम पहले की तरह ही अडिग हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “एक साल पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हमारी सेनाओं ने अद्वितीय साहस, सटीकता और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया था। उन्होंने पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर हमला करने का दुस्साहस करने वालों को करारा जवाब दिया। पूरा राष्ट्र हमारे वीर जवानों के शौर्य को सलाम करता है।”उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के प्रति उसके अटूट संकल्प को दर्शाया। इसने हमारी सेनाओं की पेशेवर क्षमता, तत्परता और समन्वित शक्ति को भी उजागर किया। साथ ही, इसने हमारी सेनाओं के बीच बढ़ते आपसी तालमेल को भी प्रदर्शित किया और यह भी रेखांकित किया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की भारत की मुहिम ने हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को कितनी मजबूती प्रदान की है।अपने ‘एक्स’ पोस्ट में पीएम मोदी ने आगे लिखा…अपने ‘एक्स’ पोस्ट में पीएम मोदी ने आगे लिखा, “आज, एक साल बाद भी, आतंकवाद को हराने और उसे पनपने में मदद करने वाले पूरे तंत्र को नेस्तनाबूद करने के अपने संकल्प पर हम पहले की तरह ही अडिग हैं।”प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “ऑपरेशन सिंदूर में भारत को मिली असाधारण विजय हमारे वीर सैनिकों के अद्भुत पराक्रम और देशभक्ति की प्रेरक मिसाल है। उनके अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और कर्तव्यनिष्ठा पर हर देशवासी को गर्व है।”पीएम मोदी ने ‘संस्कृत सुभाषितम्’ भी किया शेयरइस अवसर पर पीएम मोदी ने ‘संस्कृत सुभाषितम्’ भी शेयर किया। उन्होंने लिखा, “उदीर्णमनसो योधा वाहनानि च भारत। यस्यां भवन्ति सेनायां ध्रुवं तस्यां जयं वदेत्।।”‘संस्कृत सुभाषितम्’ में कहा गया है, “जिस सेना में योद्धा उत्साही और उच्च मनोबल वाले हों तथा जिनके पास युद्ध के उत्तम साधन हों, निश्चय ही विजय उन्हीं की होती है।”ज्ञात हो कि भारतीय सेना ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब अद्भुत सैन्य कार्रवाई के जरिए दिया था। पहलगाम हमला 22 अप्रैल 2025 को हुआ था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए। इसके बाद भारतीय सेना ने 6 और 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान के अंदर छिपे कई आतंकवादियों को मार गिराया गया था। -
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने बताया कि ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत के चलते अब तक 11 भारतीय जहाज होर्मुज की खाड़ी से निकल चुके हैं। नई दिल्ली में गुरुवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में आगे प्रगति हो रही है और मंत्रालय लगातार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में है।
उन्होंने कहा, “हमें प्रगति दिख रही है और इसी प्रगति, कूटनीतिक बातचीत और ईरान के साथ संवाद के चलते अब तक 11 भारतीय जहाज होर्मुज की खाड़ी से बाहर निकल चुके हैं। अभी 13 जहाज फारस की खाड़ी में मौजूद हैं। हम ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं, ताकि बाकी जहाज भी सुरक्षित रूप से होर्मुज की खाड़ी पार करके भारत आ सकें, जो उनका अंतिम गंतव्य है।”खबरों के मुताबिक, होर्मुज की खाड़ी अब फिर से खुलने की ओर बढ़ रही है। बुधवार को अमेरिका और ईरान की ओर से ऐसे संकेत मिले कि इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर लगी रोक हटाई जा सकती है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार की शाम को कहा था कि वह कुछ समय के लिए रोक हटाकर देखना चाहते हैं कि ईरान के साथ कोई समझौता हो सकता है या नहीं। इसके बाद ईरान के सैन्य संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को कहा कि वह अब जहाजों को इस रास्ते से गुजरने देगा।उसने दावा किया कि अमेरिका की धमकियों को ‘बेअसर’ कर दिया गया है।वहीं ट्रंप ने बुधवार की सुबह चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने इस समुद्री रास्ते पर रोक नहीं हटाई तो वह फिर से और भी ज्यादा ताकत के साथ बमबारी शुरू कर सकते हैं। ईरान ने यह रास्ता उस समय बंद कर दिया था जब 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने उसके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। यह वही रास्ता है जिससे दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है। इसके बाद अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरानी बंदरगाहों पर अपनी ओर से भी रोक लगा दी थी, जब दोनों देशों के बीच बातचीत अचानक टूट गई थी। -
नई दिल्ली। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक वर्ष पूरे होने पर आज गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सशस्त्र बलों के अद्वितीय शौर्य को नमन किया और कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत का एक ऐतिहासिक मिशन है, जो हमारे दुश्मनों को हमेशा हमारे सशस्त्र बलों की अचूक प्रहार क्षमता की याद दिलाता रहेगा।
सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में अमित शाह ने कहा ऑपरेशन सिंदूर भारत का एक युगांतरकारी मिशन है, जो हमारे दुश्मनों को हमारी सशस्त्र सेनाओं की अचूक प्रहार क्षमता की याद हमेशा दिलाता रहेगा। इतिहास इसे एक ऐसे दिन के तौर पर याद रखेगा जब हमारे सशस्त्र बलों की सटीक मारक क्षमता, हमारी एजेंसियों की पैनी खुफिया जानकारी और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति—ये तीनों एक होकर सीमा पार मौजूद आतंकवाद के हर उस ठिकाने को नेस्तनाबूद करने के लिए उठ खड़े हुए, जिसने पहलगाम में हमारे नागरिकों पर अपना बुरा साया डालने की हिमाकत की थी।उन्होंने कहा, “यह दिन हमारे दुश्मनों के लिए यह खौफनाक संदेश लेकर आता रहेगा कि वे कहीं भी छिप जाएं, वे बच नहीं सकते। वे हर पल हमारी नज़रों में और हमारी मारक क्षमता के प्रचंड कोप की जद में हैं। इस अवसर पर, मैं हमारी सेनाओं के अद्वितीय शौर्य को नमन करता हूँ।”ज्ञात हो, पहलगाम आतंकी हमले के बाद 7 मई, 2025 को शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने एक संतुलित, तीनों सेनाओं की प्रतिक्रिया को प्रदर्शित किया, जिसमें सटीकता, व्यावसायिकता और उद्देश्य का समावेश था। ऑपरेशन सिंदूर की परिकल्पना नियंत्रण रेखा के पार और पाकिस्तान के अंदर तक आतंकी ढांचे को नष्ट करने के लिए एक दंडात्मक कदमों और लक्षित अभियान के रूप में की गई थी। -
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय वायुसेना के एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा कि अनादि काल से हमारी संस्कृति ‘जियो और जीने दो’ की रही है लेकिन जब शांति की हमारी इच्छा को कमजोरी समझ लिया जाए और हमारे संयम को हमारी अनुपस्थिति माना जाए, तब कार्रवाई के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचता। और जब भारत कार्रवाई करता है, तो उसमें कोई आधा-अधूरा कदम नहीं होता। वह निर्णायक होती है, वैध होती है और उसी का परिणाम था ऑपरेशन सिंदूर। ऑपरेशन सिंदूर एक निर्णायक लेकिन संतुलित प्रतिक्रिया थी जिसने आतंकवादियों और उनके संरक्षकों को निशाना बनाया।
उन्होंने इस मौके पर मिशन सुदर्शन चक्र का जिक्र किया और बताया कि स्वयं वह भी मिशन सुदर्शन चक्र के सक्रिय सहभागी रहे हैं। उन्होंने बताया, हम एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण प्रणाली की सफलता को आगे बढ़ाते हुए देश को और मजबूत क्षमता प्रदान करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज ठीक एक वर्ष हो गया है जब हमारे हथियारों ने अपने लक्ष्य को भेदा था। उन्होंने यह भी कहा कि पहलगाम में हुआ आतंकवादी हमला अपने आप में ऐसी घटना थी, जिसकी न तो कोई निंदा पर्याप्त हो सकती है और न ही कोई भी अस्वीकृति। 22 अप्रैल 2025 को जिन निर्दोष देशवासियों की निर्ममता से हत्या की गई, उन्हें हम वापस नहीं ला सकते, लेकिन हम यह संकल्प अवश्य ले सकते हैं कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जो फिलहाल स्थगित अवस्था में है, उसी संकल्प की दिशा में उठाया गया एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस अभियान में प्रवेश करते समय हमारे निर्देश बिल्कुल स्पष्ट थे। उद्देश्य पूरी तरह तय था और सेनाओं को पूर्ण ऑपरेशनल स्वतंत्रता प्रदान की गई थी। इस अभियान की परिकल्पना से लेकर उसके क्रियान्वयन तक ‘जॉइंटनेस’ इसकी मूल भावना रही। सीडीएस और तीनों सेनाओं के प्रमुखों की कमेटी ने हर विकल्प पर विचार किया और प्रत्येक निर्णय को सावधानीपूर्वक संतुलित किया। इसी स्पष्टता और समन्वय के साथ एक सफल संयुक्त अभियान शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर तथा पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था।एयर मार्शल ने बताया कि जब पहला हथियार अपने लक्ष्य पर लगा, उसी क्षण यह स्पष्ट हो गया कि भारत अब आतंकवाद के विरुद्ध अपनी नीति और प्रतिक्रिया के नए अध्याय में प्रवेश कर चुका है। एयर मार्शल ने कहा कि इन अभियानों की योजना बनाते समय हमारा पूरा ध्यान सूक्ष्मतम विवरणों पर था। हमारा उद्देश्य केवल प्रहार करना नहीं था, बल्कि उद्देश्य था कि वह प्रहार घातक भी हो, सटीक भी हो। इसलिए लक्ष्यों का चयन, समय, इस्तेमाल किए जाने वाले हथियार समेत हर पहलू पर अत्यंत सावधानी से विचार किया गया। जब सारी तैयारी पूरी हुई, तब उसका क्रियान्वयन घड़ी की सुई जैसी सटीकता के साथ किया गया।एयर मार्शल भारती ने कहा कि एक प्रश्न बार-बार उठता है कि हमने रुकने पर सहमति क्यों दी। उन्होंने कहा, मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि हमारी लड़ाई आतंकवादियों और उनके समर्थन ढांचे से थी, और हमने उसी को निशाना बनाया, वह भी इस प्रकार से कि कोई सहायक क्षति न हो। हमने अपने सभी उद्देश्य प्राप्त कर लिए थे और हमारा मिशन पूरा हो चुका था। लेकिन जब पाकिस्तान की व्यवस्था ने आतंकवाद का साथ देने और उसे अपनी लड़ाई बनाने का निर्णय लिया, तब हमारे पास जवाब देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। यह केवल आतंकवाद-रोधी अभियान नहीं रह गया था, बल्कि आत्मरक्षा का प्रश्न बन गया था।उन्होंने कहा कि जब हमने जवाब दिया, तो वह घातक और कठोर था। उसके बाद जब विरोधी पक्ष को भारी नुकसान हुआ, तब उसे स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ और उसने संघर्ष विराम का अनुरोध किया। हमने अनुरोध आने पर अभियान को विराम दिया। लेकिन झुके नहीं। हमने अपना संदेश स्पष्ट रूप से पहुंचा दिया कि किसी भी दुस्साहस का जवाब अवश्य दिया जाएगा और आतंकवादी कृत्यों की कीमत चुकानी पड़ेगी। पिछले एक वर्ष में सबसे बड़ा प्रश्न यह भी रहा कि इस अभियान से क्या सबक मिले। सशस्त्र बल लगातार अभ्यास, प्रशिक्षण और सिमुलेशन के माध्यम से अपनी रणनीतियों और विकल्पों का मूल्यांकन करते रहते हैं। लेकिन वास्तविक अभियान से बेहतर प्रशिक्षण का कोई विकल्प नहीं होता। इसलिए हमने इस अभियान के अनुभवों को भी अपनी भविष्य की योजना का हिस्सा बनाया है।उन्होंने कहा कि पहला महत्वपूर्ण सबक यह रहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने वायु शक्ति की सर्वोच्च भूमिका को पुन स्थापित किया। एयर मार्शल भारती ने कहा, जब मैं वायु शक्ति कहता हूँ, तो उसका अर्थ केवल वायु सेना नहीं बल्कि आकाश में संचालित हर क्षमता से है। यह किसी भी राष्ट्र के लिए पहली प्रतिक्रिया और पसंदीदा आयाम बनकर उभरी। दूसरा, इस अभियान ने ‘जॉइंटनेस’ और ‘समग्र राष्ट्रीय दृष्टिकोण’ के महत्व को फिर से प्रमाणित किया। इसने भारतीय वायु सेना के प्रिसीजन टार्गेटिंग और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध को दिए गए महत्व को सही सिद्ध किया, जिसमें एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण प्रणाली एक महत्वपूर्ण सक्षम तत्व बनकर सामने आई।उन्होंने कहा कि हम अपने प्रतिद्वंद्वी की क्षमताओं, संसाधनों और उन रणनीतियों को भी प्रत्यक्ष रूप से समझ पाए जिन्हें वह छिपाने का प्रयास कर रहा था। यह अनुभव हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। एक और महत्वपूर्ण सबक यह है कि किसी भी संघर्ष में प्रवेश करने वाले राष्ट्र के पास संघर्ष समाप्त करने की स्पष्ट रणनीति और मानदंड होने चाहिए। अन्यथा संघर्ष दिशा खो सकता है और उससे बाहर निकलना कठिन हो सकता है।उन्होंने कहा, इसके साथ ही हमने महसूस किया कि अंतरिक्ष, मानव रहित प्रणालियों और साइबर क्षमताओं में और अधिक निवेश की आवश्यकता है। पिछले एक वर्ष में इन क्षेत्रों में कई कदम उठाए भी गए हैं। जैसा पहले कहा गया, आत्मनिर्भर भारत ही आगे का मार्ग है। भारतीय वायु सेना स्वदेशी तकनीकों पर तेजी से निर्भर हो रही है और रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों तथा निजी उद्योग के साथ साझेदारी को मजबूत किया जा रहा है। आगे बढ़ते हुए भारतीय वायु सेना अपने संकल्प के साथ खड़ी रहेगी।अवधेश कुमार भारती ने कहा कि जब भी हमारी शांति और स्थिरता को चुनौती दी जाएगी, जब भी हमारी संप्रभुता पर खतरा आएगा, भारतीय वायु सेना प्रथम प्रतिक्रिया देने वाली शक्ति बनी रहेगी। भारतीय वायुसेना का कहना है कि कोई दूरी इतनी अधिक नहीं, कोई गहराई इतनी बड़ी नहीं और कोई आयाम ऐसा नहीं जिसे हम नियंत्रित न कर सकें। इस क्षण भी हम सतर्क हैं और पहले से कहीं अधिक तैयार हैं।
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नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि संभवत: भारत की सामरिक यात्रा का एक निर्णायक क्षण था। भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर यह संदेश दिया है। सेना के मुताबिक इस अभियान को भारत ने बेहद सोच-समझकर और स्पष्ट रणनीतिक दृष्टि के साथ शुरू किया। नियंत्रण रेखा तथा पाकिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार मौजूद आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाया।
भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि हमलें का समय पूरी तरह सटीक था, ऑपरेशन सिंदूर ने पूर्ण आश्चर्य उत्पन्न किया और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर तथा पाकिस्तान के भीतर स्थापित आतंकवादी ठिकानों को भारी क्षति पहुंचाई। इस ऑपरेशन से यह स्पष्ट संदेश गया कि अब आतंकियों का कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं बचा है। इसके साथ ही पाकिस्तान द्वारा भारत के सैन्य ढांचे और ठिकानों को निशाना बनाने के सभी प्रयास एक सुविचारित और मजबूत वायु रक्षा संरचना के कारण विफल हो गए।भारत ने अत्यंत कम समय में एक जटिल बहु-आयामी अभियान की योजना बनाई, उसे क्रियान्वित किया और सफलतापूर्वक पूरा भी किया। इस पूरे अभियान ने भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को भी प्रदर्शित किया। इस्तेमाल किए गए हथियार प्रणालियों, गोला-बारूद, रॉकेट, मिसाइलों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों का बड़ा हिस्सा भारत में विकसित और निर्मित था। ब्रह्मोस, आकाश, उन्नत निगरानी एवं लक्ष्यीकरण प्रणालियों के साथ स्वदेशी गोला-बारूद और स्पेयर पार्ट्स ने इस अभियान में निर्णायक भूमिका निभाई।उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर तीनों सेनाओं का संयुक्त अभियान था। इसमें थल, वायु और समुद्री क्षमताओं का एकीकृत उपयोग किया गया। इसमें साझा परिस्थितिजन्य जागरूकता, सामान्य परिचालन एवं खुफिया तस्वीर तथा वास्तविक समय में निर्णय लेने की क्षमता शामिल थी। कुल नौ स्टैंडऑफ प्रिसीजन स्ट्राइक की गईं, जिनमें सात भारतीय सेना और दो भारतीय वायु सेना द्वारा अंजाम दी गईं।उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल एक नारा नहीं, बल्कि वास्तव में एक फोर्स मल्टीप्लायर है। आज भारत के 65 प्रतिशत से अधिक रक्षा उपकरण देश में ही निर्मित किए जा रहे हैं। सटीकता, अनुपातिकता और उद्देश्य की स्पष्टता के साथ यह अभियान एक राष्ट्र के संकल्प, जिम्मेदारी और रणनीतिक संयम का प्रतीक बनकर सामने आया।लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि शुरुआत से ही सरकार ने सशस्त्र बलों को स्पष्ट उद्देश्य दिए। इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक ऑपरेशनल लचीलापन भी प्रदान किया। तय लक्ष्य थे-आतंकवादी तंत्र को नष्ट और कमजोर करना, दुश्मन द्वारा योजना बनाने की क्षमता को बाधित करना तथा इन ठिकानों से भविष्य में होने वाली आक्रामकता को रोकना। ऑपरेशन सिंदूर में ये लक्ष्य पूरी स्पष्टता के साथ निर्धारित किए गए थे। वहीं सशस्त्र बलों को इस अभियान की योजना बनाने और उसे क्रियान्वित करने के लिए आवश्यक संसाधन और स्वतंत्रता सौंपी गई।लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि शीर्ष स्तर पर दृढ़ दिशा और परिचालन स्तर पर पेशेवर स्वायत्तता तथा लचीलापन, यही पिछले वर्ष हमारी सफलता की महत्वपूर्ण कुंजी साबित हुआ। उन्होंने बताया कि इससे सेना को तेजी से परिस्थितियों के अनुसार ढलने, विभिन्न अभियानों के बीच तालमेल स्थापित करने, समन्वय बढ़ाने और बहु-आयामी युद्धक्षेत्र में निर्णायक प्रतिक्रिया देने की क्षमता मिली।उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के विकसित हो रहे ‘समग्र दृष्टिकोण’ को भी रेखांकित किया, जो युद्ध क्षेत्र में अत्यंत सटीक समन्वय के साथ दिखाई दिया। सरकार के सर्वोच्च कार्यालयों और मंत्रालयों, खुफिया एजेंसियों, साइबर एवं सूचना अभियान संस्थानों तथा सीमा सुरक्षा बल जैसी सीमा-रक्षक अर्धसैनिक इकाइयों ने सशस्त्र बलों के साथ मिलकर कार्य किया। परिणामस्वरूप यह अभियान सैन्य और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से विश्व स्तर पर एक गोल्ड स्टैंडर्ड के रूप में देखा जाने लगा।उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों के इस दौर में भारत ने तीव्र और सटीक प्रहार किए, अपने स्पष्ट रूप से निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त किया और उसके बाद शत्रु के बातचीत के लिए विवश होने तथा संघर्ष विराम का अनुरोध करने पर सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय लिया। इन उद्देश्यों को एक संतुलित, सीमित लेकिन तीव्र सैन्य कार्रवाई के माध्यम से प्राप्त किया गया। दुश्मन की जोखिम उठाने की क्षमता को बदल दिया गया और उसकी कमान एवं नियंत्रण प्रणाली को बाधित कर दिया। यह सब कुछ भारत को बिना किसी लंबे युद्ध या संघर्ष में उलझाए किया गया।उन्होंने कहा कि आज दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों के दुष्परिणाम हम देख ही रहे हैं। भारत का यह संतुलित दृष्टिकोण हमारी रणनीतिक संस्कृति की परिपक्वता और सशस्त्र बलों की पेशेवर क्षमता को दर्शाता है। अंततः इस अभियान ने प्रत्येक क्षेत्र की बड़ी जिम्मेदारी तय की। खुफिया एजेंसियों ने वह सटीक जानकारी उपलब्ध कराई जो प्रिसीजन टार्गेटिंग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी। साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध इकाइयों ने सूचना क्षेत्र में बढ़त बनाए रखी।उन्होंने कहा कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय माहौल, आंतरिक सुरक्षा और जनता के विश्वास को प्रभावी ढंग से संभाला। वहीं सशस्त्र बलों ने अत्यधिक अनुशासन, सटीकता और न्यूनतम सहायक क्षति के साथ अभियान के सैन्य चरण को अंजाम दिया। सेना का मानना है कि यह बहु-एजेंसी और बहु-आयामी समन्वय भविष्य के अभियानों के लिए एक आदर्श मॉडल बना रहेगा।सेना के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर अंत नहीं था बल्कि यह केवल शुरुआत थी। भारत की आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई जारी रहेगी। एक वर्ष बाद आज हम केवल उस अभियान को ही नहीं, बल्कि उसके पीछे निहित सिद्धांत को भी याद करते हैं। भारत अपनी संप्रभुता, अपनी सुरक्षा और अपने नागरिकों की रक्षा दृढ़ता, पेशेवर क्षमता और सर्वोच्च जिम्मेदारी के साथ करता रहेगा। -
नई दिल्ली। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई केंद्रीय मंत्रियों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल की तस्वीर बदली है। सभी नेताओं ने अपनी प्रोफाइल में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की फोटो लगाई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी शुरुआत की। उन्होंने अपनी प्रोफाइल फोटो बदलकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का लोगो लगा लिया। इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों ने अपनी प्रोफाइल फोटो को बदलकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का लोगो लगाया। इनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी शामिल हैं।भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपनी प्रोफाइल फोटो को बदला है और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का लोगो लगाया है। इनमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी भी शामिल हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार सुबह ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, “एक साल पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हमारी सेनाओं ने अद्वितीय साहस, सटीकता और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया था। उन्होंने पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर हमला करने का दुस्साहस करने वालों को करारा जवाब दिया। पूरा राष्ट्र हमारे वीर जवानों के शौर्य को सलाम करता है।”उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के प्रति उसके अटूट संकल्प को दर्शाया। इसने हमारी सेनाओं की पेशेवर क्षमता, तत्परता और समन्वित शक्ति को भी उजागर किया। साथ ही, इसने हमारी सेनाओं के बीच बढ़ते आपसी तालमेल को भी प्रदर्शित किया और यह भी रेखांकित किया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की भारत की मुहिम ने हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को कितनी मजबूती प्रदान की है।भारत ने 6-7 मई की दरमियानी रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए गए थे। यह सैन्य अभियान 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में किया गया था, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने 26 निर्दोष नागरिकों की धर्म पूछकर हत्या कर दी थी। पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े एक संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।( -
नई दिल्ली। भारत ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी, सिंधू जल संधि (आईडब्ल्यूटी) और आतंकवाद के मुद्दे पर अपना कड़ा रुख दोहराया है। सरकार ने कहा कि भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी विदेशी नागरिकों को कानून और द्विपक्षीय समझौतों के तहत वापस भेजा जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को साप्ताहिक प्रेस वार्ता में देश से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार की राय रखी।
बंगाल में भाजपा की बंपर जीत के बाद बांग्लादेश के दो मंत्रियों की टिप्पणियां चर्चा में हैं, जिसमें अवैध प्रवासियों को वापस सीमा पार भेजने की आशंका है, तो उम्मीद है कि भारत ऐसा नहीं करेगा। बांग्लादेश के गृहमंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने पुशबैक की आशंका जताई, तो विदेश मंत्री खलीलपुर रहमान ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर जबरन लोगों को हमारी ओर भेजा जाएगा तो कार्रवाई की जाएगी।इन्हीं टिप्पणियों को लेकर पूछे सवाल पर जायसवाल ने भारत की नीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “ऐसी टिप्पणियों को एक बैकग्राउंड के रूप में समझने की जरूरत है। मुख्य मुद्दा अवैध लोगों को यहां से वापसी का है। जाहिर है, इसके लिए बांग्लादेश के सहयोग की जरूरत है। बांग्लादेश के पास नागरिकता सत्यापन के 2,860 से ज्यादा मामले लंबित पड़े हैं, और इनमें से कई मामले पांच साल से भी ज्यादा समय से लंबित हैं। हमारी नीति है कि जो भी अवैध तरीके से रह रहे हैं, उन्हें यहां से जाना पड़ेगा। हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश राष्ट्रीय सत्यापन करेगा ताकि अवैध रूप से रह रहे लोगों को वापस भेजा जा सके।”वहीं, आईडब्ल्यूटी यानी सिंधु जल संधि को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में जायसवाल ने कहा, “सिंधु जल संधि पर हमारा रुख हमेशा एक जैसा रहा है। पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दिए जाने के जवाब में आईडब्ल्यूटी को फिलहाल रोक दिया गया है। पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद के समर्थन पूरी तरह और हमेशा के लिए छोड़ देना चाहिए।”जायसवाल ने यह भी कहा कि आतंकवाद लंबे समय से पाकिस्तान की राज्य नीति का हिस्सा रहा है और भारत को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का पूरा अधिकार है। 7 मई की देर रात भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था; उसकी पहली वर्षगांठ पर सरकार ने कहा कि पूरी दुनिया ने पहलगाम आतंकी हमले की गंभीरता को देखा था और भारत ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का करारा जवाब दिया था।उन्होंने कहा, “देश वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए लगातार काम करता रहेगा। हमारा मानना है कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त और निर्णायक कार्रवाई ही क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित कर सकती है।” -
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने आज गुरुवार को राज्य में नई सरकार के गठन से पहले विधानसभा भंग कर दी। राज्यपाल ने 7 मई से पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी किया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भारी बहुमत से जीत हासिल की है और राज्य में अपनी पहली सरकार बनाने जा रही है। पार्टी ने शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा सूत्रों के अनुसार, नवनिर्वाचित पार्टी विधायकों की बैठक कल होने की संभावना है, जिसमें विधायक दल के नेता का चुनाव किया जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने बुधवार को बताया कि पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों की एक बैठक को संबोधित किया और कहा कि वह विधानसभा चुनाव परिणामों के मद्देनजर अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी और केंद्र सरकार उन्हें बर्खास्त कर सकती है। ममता बनर्जी ने कहा कि पार्टी के उम्मीदवारों को चुनावों में जबरदस्ती हराया गया उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के 1500 से अधिक कार्यालयों पर कब्जा कर लिया गया।टीएमसी सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने कहा कि वह अपना संघर्ष जारी रखेंगी। मैं इस्तीफा नहीं दूंगी। चाहे वे मुझे बर्खास्त कर दें। उन्होंने बताया कि ममता ने कहा, “मैं चाहती हूं कि यह काला दिन साबित हो। हमें मजबूत रहना होगा। विधानसभा के पहले दिन काले कपड़े पहनें। जिन्होंने धोखा दिया है, उन्हें पार्टी से निकाल दिया जाएगा। मैं हंस रही हूं। मैंने उन्हें नैतिक रूप से हराया है। मैं एक स्वतंत्र पंछी हूं। मैंने सबके लिए काम किया है। हम भले ही हार गए हों, लेकिन हम लड़ेंगे। गृह मंत्री और प्रधानमंत्री सीधे तौर पर शामिल हैं।”सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ बदसलूकी और धक्का-मुक्की की गई। उन्होंने कहा कि जो लोग हारे, उन्हें जबरदस्ती हराया गया। मैं पश्चिम बंगाल पुलिस, सीआरपीएफ, भाजपा समर्थक मुख्य निर्वाचन अधिकारी और चुनाव आयोग की निंदा करती हूं। 1500 से अधिक पार्टी कार्यालयों पर कब्जा कर लिया गया। मुझे धक्का-मुक्की की गई और मेरे साथ बदसलूकी की गई।गौरतलब हो कि ममता बनर्जी के पद छोड़ने से इनकार करने के कारण राज्य में अभूतपूर्व स्थिति और एक प्रकार का संवैधानिक संकट पैदा हो गया था। इसके मद्देनजर 2026 के चुनाव प्रक्रिया के पूरा होने के बाद पश्चिम बंगाल के मौजूदा गवर्नर ने एक बड़ा कदम उठाया। विधानसभा भंग कर दिये जाने के बाद ममता बनर्जी अब स्वाभाविक रूप से राज्य की मुख्यमंत्री नहीं रहीं। -
नई दिल्ली। बिहार सरकार के मंत्रिमंडल का गुरुवार को विस्तार किया जा रहा है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने विजय सिन्हा, दिलीप जायसवाल, श्रवण कुमार, निशांत कुमार और लेसी सिंह को मंत्री पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में नीतीश मिश्रा समेत पांच मंत्रियों ने भी एक साथ शपथ ली।
इन मंत्रियों ने ली शपथरामकृपाल यादव, नीतीश मिश्रा, दामोदर रावत, संजय सिंह टाइगर, अशोक चौधरी ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इसके अलावा मदन सहनी, भगवान सिंह कुशवाहा, अरुण शंकर प्रसाद, संतोष कुमार सुमन, रमा निषाद भी सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं। रत्नेश सदा, कुमार शैलेंद्र, शीला कुमार, केदार प्रसाद गुप्ता, लखेंद्र कुमार रौशन ने मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली है।शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी और गृह मंत्री भी रहे मौजूदगांधी मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव, राज्यसभा सांसद और बिहार के प्रभारी विनोद तावड़े, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित एनडीए के कई प्रमुख नेता शामिल हुए।बता दें कि पिछले महीने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद भाजपा के नेतृत्व में बिहार में पहली बार सरकार बनी और सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ जदयू के बिजेन्द्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी उप मुख्यमंत्री बने। बिहार एनडीए में भाजपा और जदयू के अलावा लोजपा (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। -
नयी दिल्ली. विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद रोधी अभियानों में भारत की रणनीति में न केवल नयी सीमाएं तय की हैं, बल्कि इससे कुछ महत्वपूर्ण सैन्य सबक भी मिले हैं जिनमें हवाई शक्ति का संयुक्त और समन्वित उपयोग, ड्रोन तकनीक को मजबूत करना और एक सशक्त संचार प्रणाली का निर्माण शामिल है। ठीक एक साल पहले छह-सात मई की दरमियानी रात को शुरू की गई निर्णायक सैन्य कार्रवाई को याद करते हुए, रक्षा और रणनीतिक मामलों के कई विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सैन्य अभियान ने इस बात पर भी जोर दिया कि भविष्य के संघर्ष न केवल हवाई क्षेत्र में, बल्कि साइबरस्पेस और सूचना एवं संज्ञानात्मक क्षेत्रों में भी होंगे। लगभग चार दिन तक चले संघर्ष के दौरान भारतीय सेना न केवल पश्चिमी सीमा के उस पार से, लेह से लेकर सर क्रीक तक, कई चरणों में आने वाले ड्रोन हमलों का सामना कर रही थी, बल्कि एक गहन दुष्प्रचार अभियान का भी मुकाबला कर रही थी जिसका उद्देश्य सेना और जनता के मनोबल को नुकसान पहुंचाना था। इस अभियान में शामिल रहे एयर कमोडोर गौरव एम त्रिपाठी (सेवानिवृत्त) ने किसी भी संघर्ष के परिणाम को तय करने में हवाई शक्ति की महत्ता को स्वीकार करते हुए इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति में, तीनों सेवाओं की ''संयुक्त हवाई शक्ति'' का उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि वह एक ''सक्षम प्रतिद्वंद्वी'' के खिलाफ समन्वित रूप से कार्य कर सके। उन्होंने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने देखा कि पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में ड्रोन का उपयोग किया। इनमें से अधिकांश हानि नहीं पहुंचाने वाले थे और जिनका उद्देश्य केवल भारतीय हथियारों और गोला-बारूद बर्बाद कराना था, ताकि बाद में हमला करने वाले ड्रोन का इस्तेमाल किया जा सके।'' एयर कमोडोर त्रिपाठी ने कहा, ''लेकिन दुश्मन चालाक है। अगली बार वे और भी उन्नत ड्रोन भेजेंगे, जिन्हें जाम करना शायद और भी मुश्किल होगा... उनकी नेविगेशन क्षमता बेहतर होगी, शायद उन्हें जीपीएस की जरूरत न पड़े, और उनमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल होमिंग डिवाइस भी हो सकते हैं और वे शायद झुंड बनाकर एक साथ काम करेंगे।'' भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी त्रिपाठी कई प्रकार के लड़ाकू विमान उड़ा चुके हैं और 'हॉक एमके 132 स्क्वाड्रन' की कमान संभाल चुके हैं, साथ ही एक लड़ाकू विमान अड्डे के मुख्य संचालन अधिकारी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उन्होंने पिछले वर्ष अगस्त में समय पूर्व सेवानिवृत्ति ले ली थी। उन्होंने अभियान से सीखे गए सैन्य सबक के बारे में कहा, ''भारतीय वायु सेना में ड्रोन रोधी क्षमताओं में पहले से ही कुछ निवेश किया गया है, लेकिन ड्रोन रोधी क्षमताओं को वास्तव में विस्तारित करना होगा और सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को कवर करना होगा।" वायु सेना के पूर्व अधिकारी ने 'एस-400' तथा हथियार प्रणाली आकाश तथा अन्य मिसाइल प्रणालियों की सराहना करते हुए कहा कि इन्होंने आसमान की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दुश्मन को प्रभावी नुकसान पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, ''हमने एस-400 सिस्टम का इस्तेमाल बेहद आक्रामक तरीके से किया। हमने इन्हें बार-बार एक जगह से दूसरी जगह तैनात किया। हमने इन्हें छिपाया भी और इनके नकली रूपों का इस्तेमाल दुश्मन को धोखा देने के लिए किया। सैन्य भाषा में इस तकनीक को छद्मावरण, छिपाव और छल या सीसीडी कहा जाता है।'' सेना के पूर्व अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह प्रदर्शित किया है कि भारत के आतंकवाद रोधी रुख के मामले में रणनीति में न केवल नयी सीमाएं तय की गई हैं बल्कि वह "दुश्मन के परमाणु खतरे का सामना करने" के लिए भी तैयार है। उन्होंने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर से मिले प्रमुख सैन्य सबकों में से एक यह है कि हम रणनीतिक संयम से रणनीतिक सक्रियता की ओर बढ़े हैं। अगली बार अगर ऐसी कोई घटना होती है तो हमें बहुत ही कम समय में जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा।" भारत ने गत वर्ष 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।
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लातेहार. प्रतिबंधित झारखंड जन मुक्ति परिषद से जुड़े दो माओवादियों को हथियार और गोला-बारूद के साथ लातेहार जिले के कुरुखेता जंगल क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक (एसपी) कुमार गौरव ने बताया कि मंगलवार को एक खुफिया सूचना के बाद जंगल में चलाए गए एक अभियान के दौरान मनोज लोहरा (26) और महादेव सिंह (24) को पकड़ा गया। उन्होंने कहा, "उनके बयान के आधार पर हमने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया। संगठन के अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।" अधिकारी ने बताया कि बरामद की गई वस्तुओं में एक एके-47 राइफल, 318 कारतूस, मोबाइल फोन और सिम कार्ड शामिल हैं। उन्होंने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
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चेन्नई. तमिलनाडु में हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में थिरु वी का नगर सीट पर जीत दर्ज करने वाली टीवीके उम्मीदवार एमआर पल्लवी सुर्खियों में हैं। आठ महीने की गर्भवती पल्लवी (36) ने थिरु वी का नगर सुरक्षित सीट पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता केएस रविचंद्रन को 22,333 मतों के अंतर से हराया। पल्लवी ने कक्षा 12 तक की पढ़ाई की है। अभिनेता-नेता विजय की तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) ने पल्लवी की गर्भावस्था के बावजूद उनके जज्बे और जुझारु व्यक्तित्व को देखते हुए उन्हें टिकट देने का फैसला किया। पल्लवी भी पार्टी के भरोसे पर खरी उतरीं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने घर-घर जाकर वोट मांगी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक मौके पर वह बेहोश भी हुईं, लेकिन ठीक होने के बाद उन्होंने प्रचार जारी रखा। जीत के बाद से पल्लवी ने मीडिया से बात नहीं की है, क्योंकि डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है। पल्लवी के पति राजेश ने बताया कि डॉक्टरों ने उनसे (पल्लवी) 20 मई के आसपास अस्पताल में भर्ती होने के लिए कहा है। पल्लवी और राजेश अपनी दूसरी संतान के स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे चार मई को घोषित किए गए। राज्य में पहली बार चुनावी राजनीति में किस्मत आजमाने वाली टीवीके 108 सीट पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक को 59 सीट, जबकि विपक्षी दल ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) को 47 सीट पर जीत हासिल हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पल्लवी जैसे उम्मीदवारों की जीत तमिलनाडु के सियासी परिदृश्य में संभावित बदलाव का संकेत देती है, जिसमें मतदाता एक नयी पार्टी और गैर-पारंपरिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे हैं।
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पलक्कड़. केरल के पलक्कड़ जिले में एक दिलचस्प सियासी घटनाक्रम सामने आया है जहां एक दंपति क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं-पति संसद में और पत्नी राज्य विधानसभा में। हाल में संपन्न केरल विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस उम्मीदवार केए तुलसी ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का गढ़ कहलाने वाली कोंगड सीट जीती, तो यह घटनाक्रम केवल एक चुनावी उलटफेर से कहीं अधिक था। कोंगड में तुलसी ने माकपा उम्मीदवार के सांताकुमारी को 3,706 से अधिक मतों के अंतर से हराकर राज्य विधानसभा में दस्तक दी। वह एक ऐसे क्षेत्र से विधायक चुनी गईं, जो उनके पति एवं कांग्रेस सांसद वीके श्रीकंदन के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। तुलसी ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि जिस दिन उन्हें उम्मीदवार घोषित किया गया, उसी दिन से उनका चुनाव प्रचार अभियान शुरू हो गया। तुलसी ने कहा कि चुनावी रणनीति पहले से ही बननी शुरू हो गई थी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने समन्वित तरीके से काम किया। उन्होंने कहा, "कोई नकारात्मकता नहीं थी। लोगों ने गर्मजोशी से प्रतिक्रिया दी।"
तुलसी ने कहा कि पूरे चुनाव प्रचार अभियान के दौरान श्रीकंदन लगातार उनके साथ रहे। उन्होंने बताया कि श्रीकंदन ने यूडीएफ के अन्य उम्मीदवारों के समर्थन में भी जमकर प्रचार किया। श्रीकंदन लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। वह कांग्रेस की पलक्कड़ जिला इकाई के अध्यक्ष के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। उन्हें जमीनी हकीकत और चुनावी दबाव, दोनों की बेहतरीन समझ है। श्रीकंदन के मुताबिक, जब पार्टी नेताओं ने पहली बार पूछा कि क्या शिक्षाविद और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) की महासचिव तुलसी चुनाव जीत सकती हैं, तो वह कुछ देर के लिए सोच में पड़ गए थे। चूंकि, कोंगड श्रीकंदन के लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए उनका जवाब मायने रखता था। उन्होंने तुलसी की जीत का भरोसा जताया। तुलसी उनके भरोसे पर खरी उतरीं और कोंगड से विधायक चुनी गईं। श्रीकंदन ने कहा कि विधायक के रूप में तुलसी की पहचान अपने आप में ही काफी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "तुलसी को एक स्वतंत्र विधायक के रूप में काम करना चाहिए, जिनसे आम लोग बेझिझक संपर्क कर सकें।" तुलसी ने श्रीकंदन की बात से इत्तफाक जताया। उन्होंने कहा, "मतदाताओं ने अपने वोट के माध्यम से मेरे प्रति जो प्यार दिखाया है, मैं अपने काम के जरिये उसे लौटाऊंगी।" -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई वार्ता के बाद बुधवार को भारत और वियतनाम ने अपने संबंधों को बढ़ाकर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने का निर्णय लिया और आर्थिक एवं रक्षा संबंधों को उल्लेखनीय रूप से विस्तार देने का संकल्प जताया। मोदी ने कहा कि दोनों देशों का हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए साझा दृष्टिकोण है और दोनों पक्ष कानून के शासन, शांति, स्थिरता और समृद्धि में अपना योगदान जारी रखेंगे। समझा जाता है कि दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति के प्रदर्शन का मुद्दा भी शामिल था। लैम ने मंगलवार को भारत की अपनी तीन दिवसीय यात्रा शुरू की। उनके साथ उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। इस महीने राष्ट्रपति चुने जाने के बाद यह उनकी पहली राजकीय यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया में जारी अपने बयान में कहा कि भारत और वियतनाम ने अपने संबंधों को बढ़ाकर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया है। मोदी ने कहा, ''वियतनाम भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और 'विजन ओशन' का एक प्रमुख स्तंभ है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी, हम एक समान दृष्टिकोण साझा करते हैं।'' उन्होंने कहा, ''रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करके हम कानून के शासन, शांति, स्थिरता और समृद्धि में योगदान देना जारी रखेंगे।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वियतनाम के सहयोग से आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संघ) के साथ अपने संबंधों का विस्तार करेगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय संपर्क को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत की यूपीआई और वियतनाम की त्वरित भुगतान प्रणाली जल्द आपस में जुड़ जाएंगी।
लाम ने अपने संबोधन में कहा कि दोनों पक्ष राजनीतिक विश्वास को गहरा करने और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। पिछले साल, दोनों पक्षों ने पनडुब्बी खोज, बचाव और सहायता तंत्र के लिए एक ढांचा स्थापित करने से संबंधित एक समझौता पर हस्ताक्षर किया था। उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा उद्योग सहयोग को मजबूत करने के लिए आशय पत्र (एलओआई) पर भी हस्ताक्षर किए।
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कोलकाता. निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य में नयी विधानसभा के गठन के लिए मंगलवार को एक अधिसूचना जारी की। यह अधिसूचना पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को भेज दी गई है, जो औपचारिक रूप से चुनावी प्रक्रिया की समाप्ति का संकेत है और नयी सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त करती है। निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नतीजों की घोषणा के बाद, अधिसूचना जारी करना एक अहम संवैधानिक कदम है। अधिकारी ने कहा, "इसके साथ ही, पश्चिम बंगाल में नयी विधानसभा के गठन की प्रक्रिया आयोग की तरफ से पूरी हो गई है। इससे तय प्रक्रियाओं के तहत सरकार बनाने के अगले कदम उठाने में मदद मिलती है।" उन्होंने कहा कि आयोग ने चुनावों के संचालन के दौरान सभी मानदंडों का पालन सुनिश्चित किया।
उन्होंने कहा, मतदान से लेकर मतगणना तक की पूरी प्रक्रिया, वैधानिक ढांचे के अनुरूप, स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस अधिसूचना से निर्वाचित प्रतिनिधियों के शपथ ग्रहण और राज्य में नयी सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। -
कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार किया और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम "जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश" है। बनर्जी के इस फैसले से राज्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है जिसको लेकर संविधान में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। साथ ही इससे राजनीतिक टकराव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। भाजपा द्वारा 207 सीट जीतकर 294 सदस्यीय विधानसभा में निर्णायक बहुमत हासिल करने और राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत करने के एक दिन बाद बनर्जी ने नतीजों को "साजिश करके गढ़ा हुआ" बताकर खारिज कर दिया और कहा कि उनकी पार्टी चुनाव आयोग से लड़ रही थी, भाजपा से नहीं। तृणमूल को सिर्फ 80 सीट ही मिल सकीं। उन्होंने पद छोड़ने से इनकार करते हुए कहा, ''मैं पद क्यों छोड़ूं? हम हारे नहीं हैं। जनादेश लूटा गया है। इस्तीफे का सवाल ही कहां उठता है?'' उन्होंने खचाखच भरे संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमारी हार जनता के जनादेश से नहीं बल्कि एक साजिश से हुई है... मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी।'' बनर्जी ने मतगणना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि लगभग 100 सीट की "लूट" हुई है और उनकी पार्टी का मनोबल तोड़ने के लिए मतगणना की गति जानबूझकर धीमी की गई। उन्होंने कहा, "हम भाजपा से नहीं लड़ रहे थे; हम निर्वाचन आयोग से लड़ रहे थे, जो भाजपा के लिए काम कर रहा था। मैंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में ऐसा चुनाव कभी नहीं देखा।'' बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें ''कल मतगणना केंद्र के अंदर लात मारी गई, धकेला गया और बदसलूकी की गई।'' उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय बल के जवान मतगणना केंद्रों के बाहर "गुंडों" जैसा व्यवहार कर रहे थे।
उन्होंने निर्वाचन आयोग पर अपना हमला तेज करते हुए कहा, "इतिहास में एक काला अध्याय लिख दिया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त खलनायक बन गए हैं।" संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव हारने के बाद किसी मुख्यमंत्री द्वारा पद छोड़ने से इनकार करने की स्थिति की कल्पना पहले कभी नहीं की गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जब विधानसभा चुनाव हारने के बाद किसी पराजित मुख्यमंत्री ने इस्तीफा देने से इनकार किया हो। उन्होंने कहा कि यदि बनर्जी अपने रुख पर अडिग रहती हैं, यह भारत के संसदीय लोकतंत्र के विकास में एक अभूतपूर्व क्षण साबित हो सकता है। संविधान विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव पी डी टी आचार्य ने बताया कि नये मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण करते ही बनर्जी को पद छोड़ना होगा। उन्होंने कहा, "एक राज्य में दो मुख्यमंत्री नहीं हो सकते।" उन्होंने कहा कि बनर्जी निवर्तमान विधानसभा के लिए निर्वाचित हुई थीं और विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। उन्होंने कहा, "संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, सरकार विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है। कार्यकाल समाप्त होने पर सरकार को भी जाना पड़ता है।" बनर्जी के बयान के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के सामने मौजूद संवैधानिक या कानूनी विकल्पों के बारे में पूछे जाने पर, वरिष्ठ अधिवक्ता और संवैधानिक कानून विशेषज्ञ राकेश द्विवेदी ने कहा कि राजनीतिक नैतिकता और संवैधानिक अनुशासन के अनुसार उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा, "लेकिन, नयी विधानसभा का चुनाव हो चुका है और जल्द ही भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश करेगा और राज्यपाल द्वारा उसे मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाएगा। अगर बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल उन्हें (बनर्जी को) बर्खास्त कर देंगे।'' वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने कहा, "उन्हें (राज्यपाल को) उन्हें (बनर्जी) बर्खास्त करना चाहिए।" वरिष्ठ अधिवक्ता अजित सिन्हा ने कहा कि बनर्जी को इस्तीफा देना चाहिए, अन्यथा नये मुख्यमंत्री के पदभार संभालने और सदन में बहुमत साबित करने के बाद वह पद हट जाएंगी। सिन्हा ने कहा, "ममता बनर्जी को इस्तीफा देना होगा। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, राज्यपाल को बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाना होगा और सदन में बहुमत साबित करना होगा… नए मुख्यमंत्री के पदभार संभालने के बाद, यह मान लिया जाएगा कि वह पद से हट गई हैं।'' जब 2011 में वाम मोर्चे का 34 साल का शासन समाप्त हुआ, तो तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने हार स्वीकार करते हुए तुरंत राजभवन जाकर राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने बिना किसी देरी के पद त्याग दिया, जो एक सुव्यवस्थित लोकतांत्रिक परिवर्तन का प्रतीक था। उस वर्ष वाम-विरोधी लहर के बल पर सत्ता में आईं बनर्जी ने खुद को एक जमीनी कार्यकर्ता से प्रशासक के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, "जब तक मैं कुर्सी पर थी, मैंने बहुत कुछ सहन किया। अब मैं एक स्वतंत्र पंछी हूँ, एक आम इंसान हूँ। मैं एक जमीनी कार्यकर्ता हूँ। मैं सड़कों पर रहूँगी और सभी अत्याचारों के खिलाफ लड़ूँगी।" साथ ही, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संवैधानिक विकल्प अभी भी खुले हैं। उन्होंने विस्तार से बताए बिना कहा, "वे संवैधानिक मानदंडों के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।" बनर्जी ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान केंद्रित करने की भी कोशिश की और इस बात पर जोर दिया कि वह विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन को मजबूत करने पर काम करेंगी। उन्होंने कहा, "इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मुझे फोन करके एकजुटता व्यक्त की। सोनिया जी और राहुल गांधी ने भी मुझसे बात की है।" साथ ही उन्होंने बताया कि उन्हें अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और हेमंत सोरेन जैसे नेताओं के भी फोन आए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ममता बनर्जी का कांग्रेस से नजदीकी बढ़ाना थोड़ा विरोधाभासी है, क्योंकि उनकी पार्टी पहले कांग्रेस और उसके नेताओं, खासकर राहुल गांधी, की आलोचना करती रही है और कई राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में दोनों के बीच अक्सर मतभेद भी रहे हैं। बनर्जी ने चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए 10 सदस्यीय तथ्यान्वेषी समिति के गठन की भी घोषणा की। उन्होंने 2021 में चुनाव के बाद हुई हिंसा के आरोपों को निराधार बताया। वहीं, भाजपा ने उनके दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और जनता के फैसले को नकारने का आरोप लगाया। पार्टी प्रवक्ता देबोजित सरकार ने कहा, "उनकी टिप्पणियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। वह सिर्फ खुद को हंसी का पात्र बना रही हैं। हमें लगता है कि वह कुछ और दिनों तक सुर्खियां बटोरने के लिए इस तरह की बेतुकी टिप्पणियां कर रही हैं।" उन्होंने यह भी दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित किया और कहा कि मतदान के दोनों चरणों के दौरान "हिंसा, गोलीबारी या मृत्यु की एक भी घटना" नहीं हुई। इस बीच, निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख द्वारा भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में "अनियमितताओं" के आरोपों को "बेबुनियाद और झूठा" बताते हुए खारिज कर दिया। इस सीट से चुनाव लड़ रही बनर्जी भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से 15,105 वोट के अंतर से हार गईं और इसके बाद उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। -
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में पार्टी की भारी जीत के एक दिन बाद मंगलवार को दक्षिण दिल्ली के चितरंजन पार्क स्थित कालीबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की। नवीन के साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और भाजपा के अन्य नेता भी थे। उन्होंने कहा कि लोगों ने इस बार 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों की भरपाई कर दी है, जब चुनाव के नतीजे उम्मीद के अनुरुप नहीं थे। उन्होंने पश्चिम बंगाल, असम और उन अन्य तीन राज्यों के लोगों का आभार व्यक्त किया जहां विधानसभा चुनाव हुए हैं। भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ''मैं मां काली और मां कामाख्या की पवित्र भूमि में पार्टी की जीत पर दर्शन करने आया हूं।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के विकास और विरासत एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए राष्ट्र नायक और प्रधान सेवक के रूप में लागातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि बंगाल की संस्कृति और विरासत केवल प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ही प्रगति कर सकती है।" पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने 293 सीटों में से 206 सीटों पर जीत हासिल की है, वहीं असम चुनावों में भी पार्टी को भारी बहुमत से जीत मिली है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शहर फुजैरा पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की, जिसमें तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए। फुजैरा के एक प्रमुख तेल उद्योग क्षेत्र में ड्रोन हमलों के कारण लगी आग में भारतीयों के घायल होने के एक दिन बाद मोदी ने इन हमलों की कड़ी निंदा की। यूएई ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा, ''यूएई पर हुए हमलों की मैं कड़ी निंदा करता हूं, जिनमें तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं। आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अस्वीकार्य है।'' उन्होंने कहा, ''भारत यूएई के साथ पूरी तरह एकजुट है और संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से सभी मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपना समर्थन दोहराता है।'' प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ''होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करना क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।'' फुजैरा शहर पर हमला ऐसे समय में हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के लगभग बीस फीसदी तेल और गैस का परिवहन होता है जो दोनों देशों के बीच वार्ता में एक प्रमुख अड़चन बना हुआ है। संघर्ष के कारण जलडमरूमध्य के इस संकरे जलमार्ग से होकर गुजरने वाले जहाजों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है और कई देशों में ऊर्जा की कमी हो गई है। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि उसके वायु रक्षा तंत्र ने ईरान से दागी गई 12 बैलिस्टिक मिसाइलों, तीन क्रूज मिसाइलों और चार ड्रोन को नाकाम कर दिया। मंत्रालय ने पुष्टि की कि वह ''किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है और देश की सुरक्षा को कमजोर करने के उद्देश्य से किए गए किसी भी प्रयास का दृढ़ता से मुकाबला करेगा।
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का जनादेश केवल सत्ता परिवर्तन का संकेत नहीं है, बल्कि यह उस राजनीतिक व्यवस्था में संरचनात्मक दरार को दर्शाता है जिसे ममता बनर्जी ने पिछले डेढ़ दशक में खड़ा किया था। इस चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अब तक की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही है। वर्ष 2011 से राज्य की राजनीति की मुख्य धुरी बनी तृणमूल कांग्रेस के लिए यह हार महज चुनावी नहीं, बल्कि प्रणालीगत है। भाजपा ने उस व्यवस्था में निर्णायक सेंध लगाई है, जो केंद्रीकृत नेतृत्व, कल्याणकारी योजनाओं और मजबूत संगठनात्मक ढांचे पर आधारित थी। राजनीतिक विश्लेषक बिस्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा, "तृणमूल का मॉडल सत्ता तक पहुंच पर आधारित था। जैसे ही यह धुरी बदलती है, पूरी संरचना को फिर से गढ़ना पड़ता है।" आंकड़े इस बदलाव की गहराई को दर्शाते हैं। भाजपा का वोट शेयर 2021 के 38 प्रतिशत से बढ़कर करीब 44.8 प्रतिशत हो गया है, जो उसके आधार के विस्तार और मजबूती दोनों को दिखाता है। वहीं तृणमूल का वोट शेयर 48 प्रतिशत से घटकर लगभग 41.7 प्रतिशत रह गया, जो उसके सामाजिक आधार में लगातार क्षरण को दर्शाता है, खासकर अर्ध-शहरी क्षेत्रों में। एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि 177 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या पिछली जीत के अंतर से अधिक थी। इन सीटों पर भाजपा ने न केवल अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी, बल्कि तृणमूल के गढ़ों में भी उल्लेखनीय सेंध लगाई। एक अन्य राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, "यह पारंपरिक अर्थों में लहर नहीं है, बल्कि राजनीतिक जमीन का पुनर्वितरण है। भाजपा अब चुनौतीदाता से व्यवस्था बदलने वाली ताकत बन गई है।" तृणमूल की सबसे बड़ी ताकत रहा केंद्रीकरण ही अब उसकी प्रमुख कमजोरी के रूप में उभरा है। शीर्ष नेतृत्व पर अत्यधिक निर्भरता के कारण जब यह परत कमजोर होती है, तो पार्टी के पास संस्थागत सुरक्षा तंत्र सीमित रह जाता है। इसके अलावा, आम आदमी पार्टी के विपरीत अन्य राज्यों में विस्तार न कर पाने के कारण तृणमूल का आधार लगभग पूरी तरह बंगाल तक सीमित रहा है, जिससे इस हार का प्रभाव और गहरा हो गया है। पार्टी के भीतर इसके असर तत्काल और संभावित रूप से अस्थिर करने वाले हो सकते हैं। प्रशासनिक नियंत्रण, संरक्षण तंत्र और चुनावी वर्चस्व पर आधारित संगठन को अब इन साधनों के बिना खुद को संभालने की चुनौती है। वैचारिक एकजुटता की कमी के बीच कुछ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के दल बदलने की आशंका भी जताई जा रही है। यह स्थिति तृणमूल के लिए अस्तित्व के संकट जैसी हो सकती है।
ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक जीवन की निर्णायक लड़ाइयों में से एक माना जा रहा था। तीन कार्यकाल और लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद यह मुकाबला केवल सरकार बचाने का नहीं, बल्कि उनके बनाए राजनीतिक ढांचे को बचाने का भी था। 71 वर्ष की उम्र में और तीन कार्यकाल पूरे करने के बाद ममता की वापसी की राह पहले से अधिक कठिन नजर आती है। हालांकि सिंगूर और नंदीग्राम जैसे आंदोलनों से उभरने की उनकी क्षमता पहले देखी जा चुकी है, लेकिन इस बार चुनौती का पैमाना अलग है, जहां समय, संगठनात्मक कमजोरी और मजबूत प्रतिद्वंद्वी एक साथ मौजूद हैं। फिर भी, उनका राजनीतिक सफर अक्सर संघर्ष की राजनीति से मजबूत हुआ है। सत्ता से बाहर होने पर वह पार्टी को फिर से विपक्षी ताकत के रूप में ढालने की कोशिश कर सकती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी इसके असर दिखाई देंगे। बंगाल में हार से विपक्षी गठबंधन में उनकी तत्काल प्रभावशीलता कमजोर हो सकती है, हालांकि उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता पूरी तरह खत्म नहीं होती। आने वाले समय में अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर भी नजर रहेगी, जिनकी संगठनात्मक जिम्मेदारी बढ़ सकती है। हालांकि बिना सत्ता के सहारे आंतरिक चुनौतियों को संभालना आसान नहीं होगा। तृणमूल की हार के मूल में सत्ता विरोधी लहर का बढ़ता प्रभाव भी रहा। भ्रष्टाचार के आरोप, भर्ती घोटाले और विपक्ष की संगठित रणनीति ने पार्टी की स्थिति को कमजोर किया। भाजपा के लिए यह परिणाम लंबे समय से प्रतीक्षित सफलता है, लेकिन इसके साथ ही एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में शासन करने की चुनौती भी जुड़ी है, जहां उसका प्रमुख प्रतिद्वंद्वी अभी भी मजबूत बना हुआ है। इतना स्पष्ट है कि बंगाल अब एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर चुका है।
तृणमूल के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सत्ता में वापसी नहीं, बल्कि बिना सत्ता के खुद को नए सिरे से परिभाषित करना है। यह परिणाम उस राजनीतिक चक्र के अंत का संकेत भी है, जिसकी शुरुआत ममता बनर्जी ने 34 साल पुराने वाम मोर्चा शासन को समाप्त कर की थी। - नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रदर्शन को ''ऐतिहासिक'' बताया और दावा किया कि विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन अब ''ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा।'' उन्होंने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्य चुनावों में मिली हार के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया। पश्चिम बंगाल में पार्टी के शानदार प्रदर्शन और असम और पुडुचेरी में राजग की सफलता का जश्न मनाने के लिए यहां भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, नवीन ने कहा कि चुनाव परिणाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लोगों के निरंतर विश्वास को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों ने भाजपा और उसके सहयोगियों को चुनाव में जनादेश देकर ''विभाजनकारी ताकतों'' और उनके ''हिंदू विरोधी एजेंडे'' को परास्त कर दिया है। राज्य चुनावों में टीएमसी और द्रमुक की हार का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ''यह विफलता किसी और की नहीं बल्कि 'इंडी' गठबंधन के नेता राहुल गांधी की है।'' उन्होंने कहा, ''मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि इन चुनावी नतीजों के बाद 'इंडी' गठबंधन ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा।''
- मुख्यमंत्री ने जताया शोकपटना. बिहार में राजधानी पटना समेत कई हिस्सों में सोमवार शाम अचानक मौसम बदल गया और बिजली गिरने, आंधी चलने तथा तेज बारिश के कारण होने वाली अप्रिय घटनाओं में 12 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार दोपहर की भीषण गर्मी के बाद शाम करीब चार बजे आसमान में घने बादल छा गए, जिससे अधिकांश इलाकों में अंधेरा हो गया। इसके बाद तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी एक बयान के अनुसार पूर्वी चंपारण में पांच, गया जिले में चार और औरंगाबाद जिले में तीन लोगों की मौत हुई है। मौसम विभाग ने हालांकि पटना समेत आसपास के जिलों में तेज आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की थी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन घटनाओं पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का निर्देश दिया है। साथ ही लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और बिजली से बचाव के लिए आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
- नयी दिल्ली. विदेश मंत्रालय ने उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से दशकों से आयोजित होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति को रविवार को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि क्षेत्रीय दावों का ऐसा ''एकतरफा कृत्रिम विस्तार'' अस्वीकार्य है। नेपाल ने रविवार को भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे के रास्ते आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित करने की योजना पर आपत्ति जताई और दावा किया कि यह उसका क्षेत्र है। नेपाल ने कहा कि तीर्थयात्रा के मार्ग को अंतिम रूप देने से पहले उससे परामर्श नहीं किया गया। नेपाल की इस आपत्ति के बाद भारत की कड़ी प्रतिक्रिया आई है।विदेश मंत्रालय ने 30 अप्रैल को घोषणा की थी कि वार्षिक कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष जून से अगस्त तक दो मार्गों - उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रा और सिक्किम में नाथू ला दर्रा - के रास्ते होगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ''इस संबंध में भारत का रुख हमेशा एक जैसा और स्पष्ट रहा है। लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक प्रमुख मार्ग रहा है और इस मार्ग से यात्रा दशकों से होती रही है।'' उन्होंने कहा, ''यह कोई नया घटनाक्रम नहीं है। क्षेत्रीय दावों के संबंध में, भारत लगातार यह कहता रहा है कि ऐसे दावे न तो न्यायसंगत हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों एवं साक्ष्यों पर आधारित हैं।'' जायसवाल ने कहा कि क्षेत्रीय दावों का इस तरह का ''एकतरफा कृत्रिम विस्तार अस्वीकार्य'' है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत द्विपक्षीय संबंधों के सभी मुद्दों पर नेपाल के साथ ''रचनात्मक वार्ता'' के लिए तैयार है, जिसमें लंबित सीमा मुद्दों का संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान भी शामिल है।
- श्री विजय पुरम. अंडमान निकोबार द्वीपसमूह ने रविवार को स्वराज द्वीप (पूर्व में हैवलॉक द्वीप) पर पानी के अंदर सबसे ऊंचा मानव पिरामिड बनाया गया। इसके साथ ही, लगातार दूसरे दिन दूसरा 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड' बनाया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, उपराज्यपाल डीके जोशी सहित 14 लोगों ने इसमें हिस्सा लिया और उन्होंने 22.3 मीटर ऊंचा मानव पिरामिड बनाया तथा वे तीन मिनट तक पानी के अंदर रहे। इससे एक दिन पहले, केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन ने इसी द्वीप के पास समन्वित अभियान के तहत समुद्र के अंदर विश्व के सबसे बड़े राष्ट्रीय ध्वज को फहराकर ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया था। इस ध्वज का आकार लगभग 60 मीटर लंबा और 40 मीटर चौड़ा था। द्वीप विकास एजेंसी के उपाध्यक्ष उपराज्यपाल ने शनिवार के कार्यक्रम में भी भाग लिया था।अधिकारियों ने बताया कि लगातार हासिल की जा रही ये उपलब्धियां इन द्वीपों को एक प्रमुख वैश्विक गोताखोरी गंतव्य के रूप में स्थापित करने की पहल का हिस्सा हैं।
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नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विधान चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पार्टी के मजबूत प्रदर्शन और जनसमर्थन पर प्रकाश डाला। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “मैं सभी पांच राज्यों के मतदाताओं को हार्दिक बधाई और आभार व्यक्त करता हूं। अपना वोट डालकर उन्होंने अपनी पसंद व्यक्त की है और अपनी पसंदीदा सरकारें चुनी हैं। यही लोकतंत्र का सार और हमारी संवैधानिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत है।”
पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन पर न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “मैं इसे उपलब्धि नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी मानता हूं। लोकतंत्र में जब लोग बार-बार अपना विश्वास जताते हैं तो वह पार्टी पर भरोसा करते हुए जिम्मेदारी देते हैं। आज 22 से अधिक राज्यों में एनडीए और भाजपा की सरकारें हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लगातार तीन कार्यकालों से हम राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं।”मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “यह हताशा और हार की भाषा है। अगर ममता बनर्जी को नैतिकता और संवैधानिक व्यवस्था में विश्वास है तो उन्हें हार को शालीनता से स्वीकार कर लेना चाहिए। जनता उन्हें पहले ही नकार चुकी है।”केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा, “आज भारतीय जनता पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार कहा था, “बादल छटेंगे, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा। आज पूरे देश में कमल खिल रहा है। पश्चिम बंगाल में पहली बार हमारी सरकार बनने जा रही है। सचमुच, यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकतंत्र की है।”वहीं, भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा, “पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत अचानक नहीं हुई है। पिछले 15 वर्षों में लोगों ने ममता बनर्जी के बढ़ते निरंकुश व्यवहार को देखा है। जिस तरह ममता ने एक मेडिकल छात्रा से जुड़े मामले में एफआईआर तक दर्ज नहीं होने दी, उससे वहां की महिलाओं और युवाओं में आक्रोश फैल गया। ऐसे कई मुद्दों को लेकर पश्चिम बंगाल की जनता नाराज थी और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकास के लिए भाजपा को मतदान किया है।” -
नई दिल्ली।‘ असम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में आने की हैट्रिक लगाने जा रही है। इस बीच असम में भाजपा और सहयोगी दलों के शानदार प्रदर्शन पर हिमंता बिस्वा सरमा की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जनता का आशीर्वाद, तीसरी बार, विकास और विरासत के लिए, असम की जनता ने प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व पर लगातार तीसरी बार अपना विश्वास जताया है। यह हमारे कार्यकर्ताओं के अथक प्रयासों, जिनका नेतृत्व अध्यक्ष नितिन नवीन ने किया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प के बिना संभव नहीं हो पाता।”उन्होंने आगे लिखा, ”यह जीत विकास, नारी शक्ति, अस्मिता और एक ‘विकसित असम’ की परिकल्पना के पक्ष में दिया गया जनादेश है। यह विशाल जनादेश जनता के मिजाज को दर्शाता है, बराक से लेकर ब्रह्मपुत्र तक और ऊपरी असम से लेकर निचले असम तक, जिन्होंने विकास और अस्मिता के विमर्श के साथ पूरी दृढ़ता से खड़े रहने का निर्णय लिया है। अत्यंत विनम्रता के साथ, हम जनता के आशीर्वाद के समक्ष नतमस्तक हैं और ‘विकसित एवं सुरक्षित असम’ के हमारे आह्वान पर उन्होंने जो जोरदार समर्थन दिया है, उसके लिए हम उनके आभारी हैं। असम को भारत के शीर्ष 5 राज्यों में शुमार करने के हमारे अथक प्रयास, आज से और भी अधिक जोर-शोर से जारी रहेंगे।”इससे पहले सीएम सरमा ने एक्स पर लिखा, ”शतक के साथ हैट्रिक।”चुनाव आयोग के अनुसार, असम में 126 विधानसभा सीटों में से एनडीए 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 82 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जिसमें 51 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है, वहीं 31 सीटों पर आगे चल रही है। एनडीए में शामिल अन्य दल, एजीपी को 10 सीटों पर आगे है, जिसमें 3 पर जीत और 7 सीट पर आगे चल रही है। वहीं बीपीएफ 10 सीट पर आगे चल रही है, जिसमें 6 सीट पर उसे जीत और 4 सीट पर आगे है। इसके अलावा कांग्रेस 19 सीटों पर आगे है, जिसमें एक सीट पर पार्टी को जीत मिली है, जबकि 18 सीटों पर आगे है।

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