- Home
- देश
-
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से कहा कि वह इस अकादमिक सत्र के लिए छठी कक्षा के छात्रों को अपनी त्रि-भाषा नीति से छूट देने पर विचार करे। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 17 सितंबर तक टालते हुए बोर्ड से कहा कि वह मौजूदा अकादमिक सत्र में छठी कक्षा के छात्रों को शामिल करने की संभावना पर विचार करे। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।
न्यायालय ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ''इस साल छठी कक्षा पर विचार करें...यदि उन्हें कुछ छूट दी जा सकती है...।'' मेहता ने अदालत से सुनवाई टालने का अनुरोध किया क्योंकि अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भाटी उपलब्ध नहीं थीं। फिर भी, उन्होंने भरोसा दिलाया कि संबंधित अधिकारी पीठ के सुझाव पर विचार करेंगे।
शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा, ''हम सब मिलकर बैठेंगे और फिर आपको सूचित करेंगे।''
याचिकाकर्ताओं में से एक के वरिष्ठ वकील ने कहा कि मामले में और देरी नहीं होनी चाहिए क्योंकि छात्रों को आखिरकार परीक्षा देनी है और इससे उनके माता-पिता की चिंता बढ़ रही है। न्यायालय उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था जिनमें सीबीएसई की उस नीति को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए एक जुलाई से तीन भाषाएं (जिनमें दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं) पढ़ना अनिवार्य किया गया था। न्यायालय ने 20 अगस्त को सीबीएसई की उस नीति से पैदा होने वाली समस्याओं का समाधान तलाशने पर जोर दिया, जिसके तहत नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना जरूरी है। अदालत ने कहा कि बच्चों पर किसी भी तरह का दबाव नहीं पड़ना चाहिए।
- -
मथुरा (उप्र) . मथुरा में वृन्दावन स्थित ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के विशेष उत्सव एवं पर्वों पर ठाकुरजी को भेंट किए गए सोने-चांदी आदि बहुमूल्य रत्न जड़े झूले, रथ एवं विभिन्न प्रकार के सिंहासन आदि सामग्री का सेवा में उपयोग न किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। यह जानकारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति से मिली। यह सवाल भी उठा कि उक्त सामग्री आखिर कहां है और संबंधित सेवायतों ने उनका उपयोग क्यों नहीं किया।
मंदिर की उच्चाधिकारी प्राप्त समिति ने मंगलवार शाम आयोजित बैठक में इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष एवं नगर आयुक्त की त्रिसदस्यीय समिति गठित की। बैठक की अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश एवं समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने की। उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने वृन्दावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप देने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया था। यह समिति तब से श्रद्धालुओं की सुविधा एवं मंदिर की कुशल व्यवस्था के लिए समय-समय पर बैठक करके आपसी मंत्रणा के आधार पर निर्णय लेती रहती है। मंगलवार को इस समिति की 19वीं बैठक सम्पन्न हुई। जिला सूचना कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में ठाकुरजी को भेंट किए गए श्रृंगार के अनेक बहुमूल्य रत्नों, सोने व चांदी से निर्मित झूले, रथ, नौका एवं विभिन्न प्रकार के सिंहासन मंदिर परंपरा के अनुसार विशिष्ट उत्सवों के दौरान सेवा में प्रयोग नहीं किए जाने पर सवाल उठे। यह सवाल उठा कि आखिर उक्त सामग्री का प्रदर्शन उनके समयानुसार क्यों नहीं कराया गया और वे सब सामान कहां हैं। विज्ञप्ति के अनुसार वृन्दावन के लक्ष्मण शहीद स्मारक में हुई बैठक की अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एवं समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने की। विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में मंदिर प्रबंधन से संबंधित व्यवस्थाओं में सामने आ रही कथित अनियमितताओं एवं अन्य आधा दर्जन विषयों पर चर्चा हुई। विज्ञप्ति के अनुसार चढ़ावे की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए। बताया गया कि कुछ भण्डारी एवं अन्य लोग श्रद्धालुओं के हाथ से चढ़ावा ले रहे थे। विज्ञप्ति के अनुसार इस व्यवस्था को लेकर उच्चतम न्यायालय के आदेश और मंदिर की गरिमा के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में यह भी कहा गया कि मंदिर की व्यवस्थाओं में भण्डारियों की निर्धारित संख्या और प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है। श्रद्धालुओं का चढ़ावा मंदिर के खजाने में ही जाना चाहिए। विज्ञप्ति के अनुसार सेवायतों से भगवान के श्रृंगार और सेवा को परंपरा के अनुरूप भव्य बनाए रखने की अपेक्षा की गई। विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में मंदिर के प्रसाद की गुणवत्ता और वितरण के तरीके को लेकर भी सवाल उठे।
विज्ञप्ति के अनुसार अध्यक्ष ने बताया कि यह निर्णय लिया गया है कि मंदिर में ठाकुरजी की ओर पेड़े ओर मालाएं फेंकी नहीं जाएंगी। विज्ञप्ति के अनुसार समिति की ओर से प्रसाद को श्रद्धालुओं तक सम्मानजनक और व्यवस्थित तरीके से पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया गया। विज्ञप्ति के अनुसार मंदिर में फूलों की सजावट को लेकर भी नई व्यवस्था पर विचार किया गया लेकिन इस पर सेवायतों ने इन्कार कर दिया। विज्ञप्ति के अनुसार मंदिर की बैंकिंग व्यवस्था भी बैठक में चर्चा का अहम विषय रही। विज्ञप्ति के अनुसार सेवायत सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि सेवायत सदस्यों ने कहा कि समिति की पिछली बैठक में निजी बैंकों को फण्ड नहीं देने के निर्देश के बावजूद निजी बैंक में फण्ड जमा किया जा रहा है। विज्ञप्ति के अनुसार इस पर सेवायत सदस्यों ने संबंधित दस्तावेज और कागजात मांगे हैं। विज्ञप्ति के अनुसार साथ ही, समिति द्वारा कार्यभार संभालने के बाद से बैंकों ने मंदिर और श्रद्धालुओं के हित में कौन-कौन से कार्य किए तथा उन पर कितना खर्च हुआ, इसका भी विवरण मांगा गया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज रेल मंत्रालय की कुल 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं में शामिल हैं:
खड़गपुर – झारसुगुड़ा (बागडेही) चौथी लाइनकटनी – पेंड्रा रोड चौथी लाइनबिलासपुर (उस्लापुर) – पेंड्रा रोड तीसरी लाइनलाइन क्षमता में वृद्धि से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता बेहतर होगी। ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यू इंडिया’ के विजन के अनुरूप हैं, जिसके तहत क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से लोगों को “आत्मनिर्भर” बनाया जाएगा और रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।इन परियोजनाओं की योजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई है, जिसमें एकीकृत योजना और हितधारकों के साथ परामर्श के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएंगी।पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को कवर करने वाली ये तीन परियोजनाएं भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की वृद्धि करेंगी। प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 4,790 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिनकी कुल आबादी करीब 56 लाख है।प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर (झारसुगुड़ा के निकट प्राचीन मंदिर), बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल, रतनपुर महामाया मंदिर आदि शामिल हैं।प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, सीमेंट, लौह एवं इस्पात आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण मार्ग हैं। क्षमता विस्तार के इन कार्यों से अतिरिक्त माल ढुलाई यातायात में 27 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) की वृद्धि होने की संभावना है।रेलवे परिवहन का पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल साधन है। इन परियोजनाओं से देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, लगभग 12 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी आएगी और लगभग 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन कम होगा, जो 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। - नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को कवर करने वाली तीन मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। कुल 10,783 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इन परियोजनाओं के तहत भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी। परियोजनाओं को 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे रेल परिचालन की क्षमता बढ़ने के साथ भीड़भाड़ कम होगी और यात्रियों तथा माल की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी।तीन प्रमुख रेल परियोजनाओं को मंजूरीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रेल मंत्रालय की तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी। इनमें खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से संबंधित रेल मार्गों पर अतिरिक्त लाइन क्षमता उपलब्ध होगी।14 जिलों और 4,790 गांवों को मिलेगा लाभतीनों परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों से होकर गुजरेंगी। करीब 656 किलोमीटर के अतिरिक्त रेल नेटवर्क से लगभग 4,790 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। इससे करीब 56 लाख की आबादी को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।परिचालन क्षमता बढ़ने से घटेगी भीड़मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं से रेल मार्गों की क्षमता बढ़ेगी, जिससे ट्रेनों के आवागमन में सुधार होगा। रेलवे के मुताबिक, इससे परिचालन अधिक सुचारु होगा और महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी। इसके परिणामस्वरूप भारतीय रेल की प्रचालनगत दक्षता और सेवा विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।गति शक्ति मास्टर प्लान के तहत परियोजनाएंइन परियोजनाओं को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य एकीकृत योजना और विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ावा देना है। नई रेल क्षमता से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही को मजबूती मिलेगी।पर्यटन स्थलों तक बेहतर रेल संपर्करेल क्षमता बढ़ने से क्षेत्र के कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक कनेक्टिविटी में सुधार होगा। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर समेत कई प्रमुख स्थल शामिल हैं।माल ढुलाई के लिए महत्वपूर्ण मार्गप्रस्तावित रेल परियोजनाएं कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसी प्रमुख वस्तुओं के परिवहन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। क्षमता वृद्धि से इन मार्गों पर हर साल करीब 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी। इससे औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी और माल परिवहन की दक्षता बढ़ेगी।रेलवे से घटेगी लॉजिस्टिक्स लागतरेलवे को पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा दक्ष परिवहन माध्यम बताते हुए सरकार ने कहा कि इन परियोजनाओं से देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी। अधिक माल को रेल के जरिए परिवहन किए जाने से सड़क परिवहन पर दबाव कम होगा और देश की लॉजिस्टिक्स लागत घटाने में योगदान मिलेगा।12 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी का अनुमानपरियोजनाओं से परिवहन क्षेत्र में ईंधन की खपत कम होने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से हर साल करीब 12 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी आ सकती है। साथ ही करीब 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटने का अनुमान है, जो करीब 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।रोजगार और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावासरकार के मुताबिक, इन रेल परियोजनाओं का उद्देश्य केवल रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना नहीं है, बल्कि संबंधित क्षेत्रों के व्यापक आर्थिक विकास को गति देना भी है। बेहतर कनेक्टिविटी से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।
- मुंबई. घरों में बनने वाले भोजन की लागत अगस्त में मामूली रूप से बढ़ गई। शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर एक प्रतिशत बढ़कर 29.5 रुपये रही, जबकि मांसाहारी थाली की लागत पांच प्रतिशत बढ़कर 57.5 रुपये हो गई। क्रिसिल इंटेलिजेंस की मंगलवार को जारी मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज, खाद्य तेल, चावल और रसोई गैस (एलपीजी) की ऊंची कीमतों ने थाली की लागत को ऊंचा बनाए रखा। हालांकि, आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट से कुल बढ़ोतरी सीमित रही। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में प्याज की कीमत सालाना आधार पर 43 प्रतिशत बढ़कर 40 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो एक साल पहले 28 रुपये प्रति किलोग्राम थी। महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण प्याज की कीमत बढ़ी।इस दौरान खाद्य तेल की कीमत में 11 प्रतिशत और एलपीजी यानी रसोई गैस की कीमत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, आलू की कीमत 12 प्रतिशत और टमाटर की कीमत 28 प्रतिशत घटने से थाली की लागत में कुल बढ़ोतरी को सीमित करने में मदद मिली। इसके परिणामस्वरूप शाकाहारी थाली की लागत में सालाना और मासिक दोनों आधार पर एक-एक प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई। मुर्गे के मांस की कीमत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के कारण मांसाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर पांच प्रतिशत बढ़कर 57.5 रुपये हो गई। हालांकि, जुलाई की 58.3 रुपये की लागत की तुलना में अगस्त में यह एक प्रतिशत कम रही। क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषन शर्मा ने कहा, ''अगले दो-तीन महीनों तक प्याज की कीमतें ऊंची बनी रहने का अनुमान है। इसकी वजह रबी फसल की कम आपूर्ति और खरीफ फसल की आवक में देरी है।'' मासिक आधार पर अगस्त में प्याज की कीमत 17 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन टमाटर की कीमत में सात प्रतिशत की गिरावट से इसका असर सीमित रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुओं के लिए पवित्र माने जाने वाले श्रावण माह के कारण मुर्गे के मांस की कीमत में चार प्रतिशत की मासिक गिरावट आई। इससे अगस्त में मांसाहारी थाली की लागत जुलाई के मुकाबले एक प्रतिशत घट गई।
- गुवाहाटी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को महान गायक और संगीतकार भूपेन हजारिका को उनकी जन्मशती पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी आवाज असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना को पूरे देश तक पहुंचाती थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि हजारिका के गीतों ने लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम किया।मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''डॉ. भूपेन हजारिका जी की 100वीं जयंती पर उन्हें याद कर रहा हूं। उनकी आवाज असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना को पूरे देश तक पहुंचाती थी।'' उन्होंने कहा, ''अपने संगीत के माध्यम से उन्होंने अनगिनत लोगों के विचारों और भावनाओं को बेहद खूबसूरती से अभिव्यक्ति दी। उनके गीत लोगों को एक-दूसरे के करीब लाए।'' प्रधानमंत्री ने पिछले साल गुवाहाटी में आयोजित भूपेन हजारिका की जन्मशती समारोह की शुरुआत में शामिल होने की अपनी स्मृतियों को भी साझा किया। उन्होंने कहा, ''भूपेन दा का जीवन और उनका काम आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।''प्रधानमंत्री के पोस्ट के जवाब में असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा, ''आदरणीय नरेन्द्र मोदी की ओर से ब्रह्मपुत्र के कवि को उनकी जन्मशती पर यह एक उपयुक्त श्रद्धांजलि है।'' शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले साल सितंबर में भूपेन हजारिका की जन्मशती के उपलक्ष्य में सालभर चलने वाले समारोहों की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि इन समारोहों से भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका के असाधारण जीवन और उनकी कालजयी विरासत को देशभर में याद करने और सम्मानित करने की प्रेरणा मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत मार्गदर्शन और समारोहों में उनकी भागीदारी के लिए आभारी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री इस साल के अंत में नयी दिल्ली में होने वाले समापन कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।
- वडोदरा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी सरकार के विकास कार्यों पर सवाल उठाने वालों पर मंगलवार को निशाना साधते हुए उन्हें एक बार फिर ''नाराज फूफा'' बताया। मोदी ने गुजरात के वडोदरा में 'नमो फॉर विकसित भारत' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद पिछले 12 वर्ष में देश की कार्यसंस्कृति बदल गई है। इस कार्यक्रम में उन्होंने 35,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में 2,800 किलोमीटर लंबा समर्पित माल ढुलाई गलियारा भी शामिल है, जिसे मोदी ने ''21वीं सदी की ऐतिहासिक उपलब्धि'' बताया। मोदी ने गलियारा परियोजना की उपयोगिता पर सवाल उठाने वालों पर तंज कसते हुए कहा, ''नाराज फूफा जी कहेंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा?'' उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा, ''नाराज फूफा को अब काम मिल गया।''मोदी ने कहा, ''2014 के बाद भारत ने 50,000 आधुनिक रेल कोच बनवाए लेकिन पिछली (कांग्रेस) सरकार 10 साल में 50,000 शौचालय भी नहीं बनवा सकी।'' प्रधानमंत्री ने समर्पित माल ढुलाई गलियारे (पश्चिम) के तीन प्रमुख खंडों का उद्घाटन किया। यह गलियारा नवी मुंबई के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह को उत्तर प्रदेश के दादरी से जोड़ता है और इन खंडों के उद्घाटन के साथ परियोजना पूरी हो गई। मोदी ने कहा, ''समर्पित माल ढुलाई गलियारे तेजी से विकसित हो रहे भारत की जीवनरेखा हैं। इस आधुनिक माल ढुलाई नेटवर्क के कारण भारत में बदलाव की रफ्तार तेज हो रही है।'' उन्होंने कहा कि पहले यात्री और मालगाड़ियों को एक ही पटरी पर चलना पड़ता था जिससे यात्री और माल परिवहन दोनों की रफ्तार धीमी हो जाती थी लेकिन समर्पित माल ढुलाई गलियारे ने इस स्थिति को बदल दिया है। मोदी ने कहा, ''आपके आशीर्वाद से जब मैं 2014 में दिल्ली पहुंचा तो हमने इस परियोजना के काम में तेजी लानी शुरू कर दी। आज 2,800 किलोमीटर लंबे समर्पित माल ढुलाई गलियारे का काम पूरा हो गया है।''उन्होंने कहा कि आज पूर्वी और पश्चिमी माल ढुलाई गलियारे देश के व्यापार और कारोबार की मुख्य रीढ़ बन रहे हैं। मोदी ने कहा कि 2,800 किलोमीटर लंबा समर्पित माल ढुलाई गलियारा इस बात का प्रमाण है कि पिछले 12 वर्ष में देश की कार्यसंस्कृति किस तरह बदली है। उन्होंने कहा, ''इस समर्पित माल ढुलाई गलियारे का विचार 2004 में सामने आया था। इस काम के लिए 2006 में एक विशेष कंपनी बनाई गई लेकिन 2014 तक फाइलें एक जगह से दूसरी जगह घूमती रहीं।'' मोदी ने कहा, ''इन फाइलों की किस्मत में भी दुर्भाग्य से कोई समर्पित गलियारा नहीं था। फाइलें कहीं अटक जाती थीं, कहीं पड़ी रहती थीं और इधर-उधर भटकती रहती थीं।'' प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' पहल पर भी तंज कसते हुए कहा कि युवा सच्चाई के साथ खड़े रहेंगे और ''झूठ की गूंज'' से गुमराह नहीं होंगे। उन्होंने कहा, ''आपको हर जगह ऐसे लोग मिलेंगे जो 'झूठ की गूंज' के जरिये आपको गुमराह करने की कोशिश करेंगे, लेकिन आज का युवा सच्चाई के साथ खड़ा रहेगा।'' 'छात्रों की गूंज' कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया छात्रों से संवाद का एक अभियान है, जिसके तहत देश के विभिन्न शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कांग्रेस इस अभियान के जरिये परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, महंगी शिक्षा, सरकारी भर्तियों में अनियमितताओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवा देख सकते हैं कि सरकार सौर, पवन, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा समेत विभिन्न क्षेत्रों में कितनी गंभीरता से काम कर रही है। मोदी ने युवाओं से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने का भी आग्रह किया।उन्होंने कहा, ''देश के युवाओं को एआई के क्षेत्र में विशेषज्ञ बनना होगा और हम चाहते हैं कि हमारे युवा इस क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करें।'' मोदी ने न्यू सानंद, न्यू मकरपुरा, न्यू उंबरगांव और नवी मुंबई के न्यू जेएनपीटी से मालगाड़ी सेवाओं को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने टांडा रोड और वडोदरा के बीच एक यात्री ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाई।
- नयी दिल्ली. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कथित मानहानि को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक सौरभ दास व आशुतोष रांका से दो करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। भाटिया की ओर से दायर मानहानि मामला बुधवार को उच्च न्यायालय में विचार के लिए आएगा। इसमें कॉजपा को भी प्रतिवादी बनाया गया है। हालांकि, दास ने पांच सितंबर को किया गया अपना पोस्ट ''एआई-निर्मित'' होने के कारण बाद में हटा दिया, लेकिन भाटिया ने बिना शर्त माफ़ी की मांग की। भाटिया ने मंगलवार को 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''जब आरोप अपनी सीमा पार कर जाते हैं, तो कानून अपनी सीमा तय करता है।'' उन्होंने कहा कि अदालत में तथ्यों, सबूतों और कानून के शासन के आधार पर सच्चाई की परख की जाएगी।भाटिया की ओर से दायर मामले में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर कॉजपा नेताओं के व्यवहार का तरीका यह दिखाता है कि वे पोस्ट के ज़रिए लोगों को बदनाम करके उन्हें निशाना बनाने की लगातार प्रवृत्ति रखते हैं। याचिका में कहा गया, ''प्रतिवादी नंबर 1 और 2 (दास और रांका) ने वादी द्वारा दिए गए किसी बयान की केवल आलोचना, उस पर टिप्पणी या असहमति ही नहीं जताई, बल्कि जनता के सामने गलत तरीके से यह बताया कि वादी ने ऐसे बयान दिए थे, जो असल में उसने कभी दिए ही नहीं थे।'' दायर मामले में कहा गया है कि कॉजपा और इसके नेता लगातार ऐसी टिप्पणियां करते रहते हैं जिनसे न्यायपालिका की गरिमा और अधिकारों का महत्व भी कमतर होता है। मामले में कॉजपा और इसके नेताओं के ख़िलाफ़ स्थायी कार्रवाई की मांग की गई।
- मुंबई. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को फिनटेक क्षेत्र से एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) की वैश्विक पहुंच बढ़ाने, इसे अन्य देशों की स्थानीय भुगतान प्रणालियों से जोड़ने और प्रवासी भारतीयों के लिए पैसा भेजने की लागत कम करने में मदद करने का आह्वान किया। मोदी ने यहां वैश्विक फिनटेक सम्मेलन के सातवें संस्करण के उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की 7.8 प्रतिशत की वृद्धि ने पूरी दुनिया को भरोसा दिया है। यह प्रदर्शन ऐसी चुनौतीपूर्ण तिमाही में आया, जब पश्चिम एशिया संघर्ष का असर सबसे अधिक था। प्रधानमंत्री ने फिनटेक (वित्तीय प्रौद्योगिकी) क्षेत्र से पिछले एक दशक की उपलब्धियों पर संतुष्ट होकर रुकने के बजाय यूपीआई की पहुंच को और व्यापक बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ने को कहा।उन्होंने कहा, ''इस साल अगस्त तक यूपीआई के जरिये वास्तविक समय में किए जाने वाले भुगतान की संख्या बढ़कर 24.51 अरब हो गई है और अब अगला लक्ष्य यूपीआई की वैश्विक पहुंच का विस्तार करना होना चाहिए।'' मोदी ने कहा कि ध्यान उन देशों पर होना चाहिए जहां बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं, भारत के साथ व्यापार की मात्रा अधिक है या जो भुगतान प्रणालियों को जोड़ने में भारत के साथ साझेदारी करने के इच्छुक हैं। मोदी ने कहा, ''यह जरूरी है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय विदेशों में काम करते हैं। वे सबसे अधिक पैसा भेजने वाले लोग हैं। जो पैसा भेजा जाता है, उसका एक हिस्सा लेनदेन लागत में चला जाता है। यूपीआई इस लागत को बचाने में मदद कर सकता है और पैसा परिवारों तक तेजी से भी पहुंच सकता है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि यूपीआई मंच अब 11 देशों में काम कर रहा है और इसे सिंगापुर की स्थानीय भुगतान प्रणाली से भी जोड़ा गया है। इससे दोनों देशों के बीच लेनदेन उसी तरह आसान हो गया है, जैसे किसी स्थानीय इलाके में दो पड़ोसियों के बीच भुगतान किया जाता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक कार्ड भुगतान फिलहाल अन्य देशों में विकसित प्रणालियों पर चलते हैं, लेकिन भारत के पास अब इसका विकल्प मौजूद है। मोदी ने कहा, "हम अपने नियम और मानक खुद तय कर सकते हैं और उन्हें दुनिया से जोड़ सकते हैं।"प्रधानमंत्री ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के शब्दों को दोहराते हुए कहा कि यूपीआई केवल प्रौद्योगिकी की कहानी नहीं है, बल्कि यह सभ्यता से भी जुड़ी है। मोदी ने कहा कि पिछले कई वर्षों में भुगतान के क्षेत्र में मिली बड़ी सफलताओं के बाद भारतीय फिनटेक उद्योग का अगला अध्याय गैर-भुगतान लेनदेन होना चाहिए। इसके तहत लोगों को बचत उत्पादों, पेंशन, बीमा और अन्य वित्तीय सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि रेहड़ी-पटरी वालों को कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराने की प्रधानमंत्री स्वनिधि (पीएम-स्वनिधि) पहल यूपीआई की वजह से संभव हो सकी। इससे इस योजना के लाभार्थियों की औसत वार्षिक आय में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी से किसी व्यक्ति की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उसके लिए विशेष रूप से तैयार वित्तीय मॉडल उपलब्ध कराना संभव है। फिनटेक क्षेत्र को इस दिशा में काम करना चाहिए और गैर-भुगतान लेनदेन को भी उतना ही आसान बनाना चाहिए, जितना क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान करना है। मोदी ने कहा कि 'एजेंटिक' कृत्रिम मेधा (एआई) क्वांटम टेक्नोलॉजी आदि जैसे प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आगामी विकास नई संभावनाओं के द्वार खोल रहे हैं। उन्होंने फिनटेक क्षेत्र से इन पर ध्यान केंद्रित करने और इनके लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करने का आग्रह किया। मोदी ने कहा, ''जैसे-जैसे हम इस दिशा में आगे बढ़ेंगे, फिनटेक समुदाय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारत में साइबर सुरक्षा सर्वोच्च स्तर की हो, उद्योग के पास निजी जानकारी के संरक्षण के अपने मानक हों। साथ ही एक फिनटेक उपभोक्ता संरक्षण सूचकांक भी हो, जो प्रत्येक कंपनी की पारदर्शी तरीके से रेटिंग करे।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को एक मजबूत फिनटेक-नियामक-उद्योग-नवोन्मेष परिवेश बनाने की भी जरूरत है।वैश्विक मोर्चे पर मोदी ने कहा कि दुनिया संघर्ष और अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। ऊर्जा और जिंस की आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव है और तेल को लेकर भी चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि के प्रदर्शन को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। मोदी ने कहा कि जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा भारत की रेटिंग को 'बीबीबी+' से बढ़ाकर 'ए-' करना दुनिया के भारत पर भरोसे को बताता है। तीन दशक में पहली बार है कि जब इस स्तर की रेटिंग मिली है। उन्होंने कहा, ''यह बताता है कि भारत की वृद्धि की गति, वृहद आर्थिक स्थिरता और पिछले कुछ वर्षों में किए गए संरचनात्मक सुधार दुनिया को भरोसा दे रहे हैं।"
-
पणजी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि भारत ने वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद अन्य देशों के साथ जुड़ाव बढ़ाकर और रणनीतिक साझेदारियां कायम कर अपनी आर्थिक वृद्धि की रफ्तार को कायम रखा है। शाह ने गोवा पुलिस को राष्ट्रपति ध्वज प्रदान करने के लिए यहां आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि दूसरे देशों के साथ बढ़े आर्थिक जुड़ाव का भी वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने में अहम योगदान रहा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध और अब अमेरिका, ईरान एवं खाड़ी देशों के बीच संघर्ष के कारण वैश्विक कूटनीतिक परिदृश्य में अस्थिरता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 22 देशों की यात्रा की, जबकि करीब 15 देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भारत का दौरा किया। शाह ने कहा, "जब भी कोई मुद्दा आता है तो पूरी दुनिया इस पर नजर रखती है कि भारत के प्रधानमंत्री की इस पर क्या राय और नजरिया है। लंबे समय बाद हमारे नेता नरेन्द्र मोदी ने दुनिया में भारत के लिए यह सम्मान हासिल किया है।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के लगातार प्रयासों और वैश्विक पहुंच के कारण भारत की कूटनीति ने दुनिया में अपनी जगह मजबूत की है। उन्होंने कहा कि 2026 तक भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं और 38 देशों के साथ ऐसे समझौते प्रस्तावित हैं। उन्होंने कहा कि भारत व्यापार बढ़ाने के उद्देश्य से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ एफटीए पर आगे बढ़ रहा है। शाह ने कहा कि भारत ने रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, निवेश और व्यापार जैसे क्षेत्रों में अन्य देशों के साथ ठोस समझौते किए हैं। उन्होंने कहा, ''चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का एक कारण व्यापक आर्थिक जुड़ाव भी है।'' उन्होंने कहा कि मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है, जो अब 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प में बदल गया है। शाह ने कहा कि भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियां दुनिया के साथ साझा की हैं तथा कई देशों को आपदा राहत और क्षमता निर्माण में सहायता दी है। उन्होंने डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस खतरे से निपटने के लिए राज्यों के साथ सीधे संवाद की शुरुआत की है और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन '1930' आने वाले समय में एक बड़ा सुरक्षा कवच बनेगी। गृह मंत्री ने कहा कि विकसित राष्ट्र के लिए पहली शर्त आंतरिक और सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि गोवा पुलिस ने आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के साथ पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत करने में भी अच्छा काम किया है।
-
नयी दिल्ली. प्रबंधन के शिक्षण से जुड़े भारत के 14 संस्थानों को फाइनेंशियल टाइम्स (एफटी) की नवीनतम रैंकिंग में दुनिया के शीर्ष 100 में जगह मिली है। इनमें सात भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) शामिल हैं। सोमवार को जारी 'मास्टर्स इन मैनेजमेंट' (एमआईएम) 2026 रैंकिंग में शामिल भारतीय संस्थानों में आईआईएम बेंगलूर सबसे आगे रहा। उसे वैश्विक स्तर पर 21वां स्थान मिला है। इसके बाद मुंबई के एसपी जैन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च (एसपीजेआईएमआर) का स्थान रहा, जो 26वें पायदान पर है। आईआईएम अहमदाबाद 27वें, एक्सएलआरआई 33वें और आईआईएम कलकत्ता 39वें स्थान पर रहे।
आईआईएम बेंगलूर ने पिछले साल के 28वें स्थान से सुधार करते हुए इस साल 21वां स्थान हासिल किया है। वह 2024 में 41वें स्थान पर रहा था। रैंकिंग में शामिल अन्य भारतीय संस्थानों में आईआईएम कोझिकोड 54वें, आईआईएम इंदौर 62वें, मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट (एमडीआई) गुरुग्राम 67वें, आईआईएम लखनऊ 72वें और नरसी मोंजी इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एनएमआईएमएस) मुंबई 73वें स्थान पर रहे। वहीं, आईआईएम उदयपुर 83वें, इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (आईएमटी) गाजियाबाद 86वें, इंटरनेशनल मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट (आईएमआई) दिल्ली 90वें और टीए पई मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट कर्नाटक 98वें स्थान पर रह। आईआईएम बेंगलूर के प्रभारी निदेशक यू दिनेश कुमार ने कहा, "एफटी की रैंकिंग संस्थान की शिक्षा और उसके छात्रों के वैश्विक स्तर पर प्रभाव को दर्शाती है। संस्थान अपने पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धतियों और परिणामों की तुलना दुनिया के बेहतरीन संस्थानों से करता है।" वैश्विक स्तर पर स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट गैलेन ने रैंकिंग में शीर्ष स्थान बरकरार रखा है। पुर्तगाल की नोवा स्कूल ऑफ बिजनेस एंड इकॉनमिक्स दूसरे और चीन की शंघाई जियाओ टोंग यूनिवर्सिटी का अंताई कॉलेज ऑफ इकॉनमिक्स एंड मैनेजमेंट तीसरे स्थान पर रहा। फाइनेंशियल टाइम्स की एमआईएम रैंकिंग में रोजगार के अवसर, वेतन वृद्धि, शिक्षा पर खर्च के मुकाबले लाभ, अंतरराष्ट्रीय अनुभव, छात्रों की विविधता और टिकाऊ विकास से जुड़ी पहल जैसे विभिन्न मानकों के आधार पर संस्थानों का आकलन किया जाता है। रैंकिंग में कुल 19 मानकों को शामिल किया गया है। इसमें पूर्व छात्रों की प्रतिक्रिया को 56 प्रतिशत और संस्थानों से मिले आंकड़ों को 44 प्रतिशत भारांक दिया गया है। रोजगार, निवेश पर लाभ, विविधता, पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक (ईएसजी) मानकों तथा अंतरराष्ट्रीयकरण जैसे परिणामों को भी आकलन में शामिल किया जाता है। -
बेगूसराय. केंद्रीय वस्त्र मंत्री एवं बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह को डाक के जरिए जान से मारने की धमकी भरा पत्र मिला है, जिसके बाद पुलिस ने इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजा गया यह धमकी भरा पत्र बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली स्थित केंद्रीय मंत्री के कार्यालय के पते पर प्राप्त हुआ था। नगर थाना प्रभारी (एसएचओ) सतीश कुमार हिमांशु ने शुक्रवार को दर्ज अपने बयान में घटना की पुष्टि की। अधिकारियों ने बताया कि गिरिराज सिंह के निजी सचिव योगेंद्र सिंह ने मामले की सूचना बेगूसराय के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को दी, जिसके बाद एसपी के निर्देश पर नगर थाना में मामला दर्ज किया गया। पत्र में अंग्रेजी में लिखा था, "यू विल बी किल्ड शॉर्टली बाय हार्डकोर टेररिस्ट्स" (तुम्हें जल्द कट्टर आतंकवादियों द्वारा मार दिया जाएगा)। पत्र में दो मोबाइल नंबर भी दर्ज थे। इसके अलावा पत्र पर कर्नाटक के कोलार जिले के श्रीनिवासपुर तालुका के एक गांव के निवासी रामकृष्ण रेड्डी का नाम और पता भी अंकित था। पुलिस ने बताया कि प्राथमिकी में अज्ञात प्रेषक के साथ-साथ पत्र में उल्लिखित नाम, पते और मोबाइल नंबर से जुड़े व्यक्तियों को भी नामजद किया गया है तथा धमकी से उनके संभावित संबंध की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि जांच अधिकारी पत्र मूल रूप से कहां से भेजा गया और धमकी के उद्देश्य का पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं।
-
वडोदरा. गुजरात के वडोदरा में मंगलवार को होने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम में लोगों की भागीदारी के लिए पहली बार 'बुकमाईशो' के जरिए नि:शुल्क पंजीकरण की सुविधा दी गई और एक घंटे के भीतर ही सभी सीट बुक हो गईं। मोदी गुजरात के इस शहर में 35,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्धाटन व शिलान्यास करेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे। वह एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि अपनी तरह की पहली पहल के तहत, मंगलवार को होने वाले प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए 'बुकमाईशो' के जरिए नि:शुल्क पंजीकरण की सुविधा शुरू की गई, जिसमें वडोदरा नगर निगम ने पंजीकरण का प्रबंधन करने के लिए इस निजी डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि लोगों की शानदार प्रतिक्रिया मिली और पंजीकरण शुरू होने के एक घंटे के भीतर ही सभी सीट बुक हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि बाद में पंजीकरण बंद कर दिया गया और 42,000 से अधिक आवेदकों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया है, जो इस कार्यक्रम के लिए लोगों में भारी उत्साह को दर्शाता है। इस कार्यक्रम में पूरी तरह से डिजिटल और प्रौद्योगिकी आधारित प्रवेश प्रणाली होगी। पंजीकृत भागीदारों को उनके 'बुकमाईशो' खाते पर एक डिजिटल एम-टिकट मिलेगा, जिसमें प्रवेश सत्यापन के लिए एक सुरक्षित 'लाइव क्यूआर कोड' होगा। पंजीकरण और सत्यापन से लेकर आयोजन स्थल पर प्रवेश और बैठने की व्यवस्था तक, पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से प्रबंधित की जा रही है, ताकि प्रवेश प्रक्रिया सुगम हो और लोगों की आवाजाही आसानी से हो सके। प्रधानमंत्री पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे (डब्ल्यूडीएफसी) के तीन अहम खंड देश को समर्पित करेंगे जो 326 मार्ग किलोमीटर में फैले हैं और इन्हें 20,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार किया गया है। इनमें न्यू साणंद (एन)-न्यू मकरपुरा, न्यू उमरगांव-न्यू सफाले और न्यू सफाले-न्यू जेएनपीटी खंड शामिल हैं। जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण (जेएनपीए) की सीधी कनेक्टिविटी से एक्जिम कार्गो की आवाजाही तेज होगी, औद्योगिक केंद्रों और बंदरगाहों के बीच संपर्क मजबूत होगा, साजो-सामान संबंधी लागत कम होगी और मुंबई के रेलवे नेटवर्क पर भीड़ कम करने में मदद मिलेगी। मोदी न्यू साणंद (नॉर्थ), न्यू मकरपुरा, न्यू उमरगांव और न्यू जेएनपीटी, मुंबई से मालगाड़ी सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाएंगे। इसके अलावा, वह टांडा रोड और वडोदरा (प्रतापनगर) के बीच एक नयी यात्री ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाएंगे। यह रेल लाइन अलीराजपुर के दूर-दराज के और आदिवासी इलाकों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगी।
-
तिरुवनंतपुरम. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को कहा कि सरकार ने पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग का अंतराल तत्काल प्रभाव से 25 दिन करने को कहा है। गोपी ने सोशल मीडिया मंच 'फेसबुक' पर पोस्ट में कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से एलपीजी आपूर्ति पर बने दबाव के बीच गैस सिलेंडर की रिफिल बुकिंग का अंतराल शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन कर दिया गया था। उन्होंने कहा, ''हालांकि, अब एलपीजी आपूर्ति की स्थिति में सुधार और रिफिल के लंबित मामलों में उल्लेखनीय गिरावट को देखते हुए सरकार ने इस पाबंदी में ढील दी है। अब शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सभी घरेलू एलपीजी उपभोक्ता 25 दिन के अंतराल पर सिलेंडर की दोबारा बुकिंग करा सकेंगे।'' केंद्रीय मंत्री ने अपनी पोस्ट के साथ पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को भेजे गए पत्र की प्रति भी साझा की। इस पत्र में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए गैस बुकिंग की अवधि 45 दिन से घटाकर 25 दिन करने की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा गया है। शहरी क्षेत्रों में 25 दिन का गैस बुकिंग अंतराल पश्चिम एशिया संघर्ष के समय से ही लागू है।
- आगरा (उप्र). 'ब्रिक्स' सदस्य देशों के मुख्य न्यायाधीशों सहित 65 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को बारिश के बीच यहां ताजमहल का भ्रमण किया और करीब दो घंटे तक इस प्रतिष्ठित स्मारक को देखा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को ताजमहल के इतिहास और स्थापत्य महत्व के बारे में जानकारी दी गई। बारिश के बावजूद स्मारक पर फोटो सत्र भी आयोजित किया गया। जिला सूचना अधिकारी शीलेन्द्र शर्मा ने बताया कि 'ब्रिक्स' सदस्य देशों के सभी मुख्य न्यायाधीशों और प्रतिनिधियों का आगरा में स्वागत किया गया और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें ताजमहल ले जाया गया। शर्मा ने बताया कि मेहमान यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा पहुंचे। बारिश के मौसम के बावजूद प्रतिनिधियों ने स्मारक का भ्रमण किया और उसकी सुंदरता की सराहना की। इस वैश्विक सम्मेलन की मेजबानी उच्चतम न्यायालय द्वारा की गयी। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका एवं अन्य सदस्य देशों से बना 'ब्रिक्स' दुनिया के प्रमुख उभरते हुए देशों का एक समूह है।
-
नयी दिल्ली. भारत ने रविवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र की पहल पर प्रस्तावित विश्व मानचित्र में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को देश के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप दिखाया जाना चाहिए तथा इनका कोई भी ''गलत'' या ''भ्रामक'' चित्रण स्वीकार्य नहीं होगा। भारत ने महाद्वीपों के भूभाग को ''अधिक सटीकता से प्रदर्शित'' करने के उद्देश्य से विश्व मानचित्र में सुधार से जुड़े संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया जिसके दो दिन बाद विदेश मंत्रालय ने यह बयान दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्यों ने 'मानचित्र में सुधार: वैश्विक मानचित्रण प्रतिनिधित्व में संतुलन कायम करना और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों, विशेष रूप से अफ्रीका का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना' शीर्षक वाले प्रस्ताव को शुक्रवार को भारी बहुमत से पारित किया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि यह प्रस्ताव किसी विशेष मानचित्र, मानचित्रण पद्धति या राष्ट्रीय सीमाओं के किसी खास चित्रण का समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा, ''भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया और मतदान पर अपने स्पष्टीकरण में 'इक्वल एरिया' (भूभागों के क्षेत्रफल का वास्तविक अनुपात बनाए रखने वाली) मानचित्रण पद्धतियों को बढ़ावा देने के मूल सिद्धांत पर जोर दिया।'' जायसवाल ने इस मुद्दे पर मीडिया के एक सवाल के जवाब में कहा, ''केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत के संप्रभु क्षेत्र को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप दिखाया जाना चाहिए। कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार्य नहीं है।'' उन्होंने कहा, ''भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमारा रुख स्पष्ट और अडिग है तथा इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।'' जायसवाल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उद्देश्य ''ऐसी 'इक्वल एरिया' मानचित्रण पद्धतियों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है, जिनमें महाद्वीपों के भूभागों के आपसी क्षेत्रफल का वास्तविक अनुपात बना रहता है।'' उन्होंने कहा, ''यह प्रस्ताव न तो किसी विशेष विश्व मानचित्र को अपनाता है और न ही उसे प्रमाणित करता है। यह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नाम समेत राजनीतिक मानचित्रण से भी संबंधित नहीं है।'' टोगो द्वारा पेश प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया। एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने मतदान में भाग नहीं लिया जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ एकमात्र मत दिया।
-
इंदौर (मप्र)। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सतीश कुमार ने रविवार को कहा कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को अधिकतम 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से परिचालित करने का प्रयास किया जा रहा है और अन्य रेल खंडों पर भी इसके संचालन को लेकर विचार किया जा रहा है। कुमार ने आला अफसरों के साथ इंदौर और इसके आस-पास के क्षेत्रों की कई रेल परियोजनाओं की समीक्षा की। इनमें अलग-अलग रेल लाइन के निर्माण के साथ ही इंदौर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े अन्य काम शामिल हैं। उन्होंने इंदौर में संवाददाताओं से कहा, ''अब तक हाइड्रोजन ट्रेन की परिचालन गति अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई। हालांकि, इसका 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए परीक्षण कर लिया गया है। इसके बाद इसे अधिकतम 110 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से परिचालित करने का प्रयास किया जा रहा है।'' हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर लंबे मार्ग पर संचालित की जा रही भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 जुलाई को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। कुमार ने कहा कि सभी हितधारकों से चर्चा करके तय किया जा रहा है कि नयी हाइड्रोजन ट्रेन को देश के किन रेल खंडों में चलाया जा सकता है और इस सिलसिले में तकनीकी पहलुओं व ईंधन की आपूर्ति की व्यवस्थाओं को भी परखा जा रहा है। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि देश की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेन हावड़ा और कामाख्या (गुवाहाटी) के बीच परिचालित की जा रही है, जबकि ऐसी चार और ट्रेन बनकर आ चुकी हैं तथा आने वाले दिनों में उनका विधिवत उद्घाटन होना है। उन्होंने कहा कि रेलवे को इस साल 11 और वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मिलने की उम्मीद है।
रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि 200 वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर बनायी जा रही हैं और इन्हें तैयार होने में एक से डेढ़ साल लगेगा। उन्होंने यह भी बताया कि उज्जैन में 2028 के दौरान लगने वाले सिंहस्थ मेले के वास्ते 100 से 125 विशेष ट्रेन चलाने की योजना बनाई जा रही है और इस विशाल धार्मिक आयोजन के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। कुमार ने कहा कि रेलगाड़ियों में चूहों की समस्या के निदान के लिए जरूरी प्रशासनिक कदम उठाने के साथ ही व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि रेलगाड़ियों और रेलवे स्टेशन की सुरक्षा बढ़ाने के लिए सीसीटीवी कैमरा के साथ कृत्रिम मेधा (एआई) को जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में स्वीकृत इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन के लिए तेज गति से भूमि अधिग्रहण का कार्य किया जा रहा है। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि 18,500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम चार से पांच साल में पूरा किया जाएगा। -
नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि बौद्धिक स्वतंत्रता मजबूत होने के साथ भारत आज "आत्मविश्वास से भरा और बेझिझक" है तथा अपनी विरासत के अध्ययन के लिए अब किसी और की अनुमति का इंतजार नहीं करता है। यहां फाउंडेशन फॉर इंडियन हिस्टोरिकल एंड कल्चरल रिसर्च की ओर से आयोजित वार्षिक इतिहास पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "1991 में हमें आर्थिक स्वतंत्रता मिली थी, अब जाकर बौद्धिक स्वतंत्रता को मजबूती मिल रही है... बौद्धिक स्वतंत्रता से ही हमें खुद को जानने का अधिकार मिलेगा।" उन्होंने सभी नजरियों वाले विचारकों को बहस में शामिल करने की वकालत की, ताकि अलग-अलग विचारों के बीच टकराव हो सके और जागरूक जनता खुद तथ्यों व प्रमाणों के आधार पर निष्कर्ष निकाल सके। वित्त मंत्री ने कहा, "आज का भारत आत्मविश्वास से भरा है और इसे लेकर उसे कोई झिझक नहीं है; हमने अपनी विरासत का अध्ययन करने के लिए किसी और की मंजूरी का इंतजार करना भी छोड़ दिया है।" उन्होंने कहा, "हम अपने शिलालेखों को फिर से पढ़ रहे हैं, समुद्री व्यापार को समझ रहे हैं, अपने गणित की ओर लौट रहे हैं और इन कहानियों को सच्ची खुशी और पूरी सटीकता के साथ सुना रहे हैं। मुझे लगता है कि उपनिवेश-मुक्ति का यही मतलब होना चाहिए। यह सिर्फ एक तय पाठ्यपुस्तक की जगह दूसरी पाठ्यपुस्तक लाने का मामला नहीं हो सकता।" सीतारमण ने कहा, "इसका मतलब है एक बड़ा अभिलेख, ज्यादा भाषाएं, मुश्किल सवाल और विद्वानों का एक बहुत बड़ा दायरा, जिनके काम को असल में पढ़ा जाए। सबसे बड़ी बात यह है कि किसी भी संस्था को यह पहले से तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि कौन से सबूत देखे जा सकते हैं।" इस अवसर पर वित्त मंत्री ने एसएल भैरप्पा स्मृति व्याख्यान भी दिया।
सीतारमण ने कहा कि भैरप्पा ने कभी अपने अनुयायियों की कोई सेना नहीं जुटाई; बल्कि उन्होंने इस बात को बेहतर बनाने की कोशिश की कि इंसान सच को किस नजरिए से देखते हैं। उन्होंने कहा कि पांच सितंबर को हम अपने शिक्षकों और विचारकों के प्रति सबसे अच्छी कृतज्ञता यही व्यक्त कर सकते हैं कि भारत के बौद्धिक मंच के दोनों पक्षों को रोशन बनाए रखें। एसएल भैरप्पा एक प्रसिद्ध उपन्यासकार, दार्शनिक और पटकथा लेखक थे, जिन्होंने कन्नड़ भाषा में लेखन किया। वर्ष 2025 में 94 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। -
पणजी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य है कि नशा-मुक्त युवा शक्ति 2047 में 'विकसित भारत' का नेतृत्व करे तथा इस सिलसिले में केंद्र सरकार ने 2029 तक भारत को नशा-मुक्त बनाने के लिए एक प्रारूप तैयार किया है। शाह ने यहां प्रेसवार्ता में कहा कि विकसित भारत का सपना साकार करने के लिए मोदी सरकार देश को नशा-मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ठीक वैसे ही जैसे उसने नक्सलवाद और आतंकवाद की समस्या को खत्म करने के लिए काम किया है। शाह ने कहा, ''नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य है कि नशा-मुक्त युवा शक्ति 2047 में विकसित भारत का नेतृत्व करे।'' उन्होंने कहा, ''वर्ष 2014 से पहले मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई अधिकतर छोटी इकाइयों द्वारा और अलग-थलग रहकर लड़ी जाती थीं। एजेंसियां अक्सर छोटे-मोटे आरोपियों को पकड़कर ही संतुष्ट हो जाती थीं। हमारी सरकार इस लड़ाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से प्राथमिकता बना रही है।'' उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल में, आतंकवाद में कमी आने के बाद जम्मू-कश्मीर तरक्की और विकास की राह पर है और वहां आतंकवाद धीरे-धीरे खत्म होने के करीब है। शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से अलगाववाद की भावना कम हुई है।
उन्होंने कहा, ''मोदी सरकार ने आंतरिक सुरक्षा को बेहतर और मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। जिन लोगों ने तिरुपति से पशुपति तक 'लाल' (माओवादी) गलियारा बनाने का सपना देखा था, उन्होंने हथियार डाल दिए हैं और मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। पूर्वोत्तर में भी शांति है। 10,000 से ज़्यादा युवाओं ने हथियार डाल दिए हैं।'' शाह ने कहा कि पांच दशकों तक चलने वाला नक्सलवाद अब अतीत की बात हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ''हमने नक्सलवाद को खत्म कर दिया है और नशीले पदार्थों की समस्या से भी उसी तरह निपटेंगे। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार अक्टूबर, 2027 से भारत एनसीएपी 2.0 शुरू करने की योजना बना रही है। इसमें वाहनों की पूरी सुरक्षा व्यवस्था का आकलन किया जाएगा और देश में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीर समस्या से निपटने में मदद मिलेगी। सियाम के 66वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने भारत एनसीएपी की सफलता का उल्लेख किया। भारत एनसीएपी (भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम) देश की आधिकारिक और स्वतंत्र वाहन सुरक्षा रेटिंग प्रणाली है, जिसे 2013 में शुरू किया गया था। इसके तहत यात्री वाहनों का 'दुर्घटना' परीक्षण किया जाता है और उन्हें एक से पांच स्टार तक की सुरक्षा रेटिंग दी जाती है। इसमें दुर्घटना के दौरान वयस्कों और बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से वाहनों का आकलन किया जाता है। भारत में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीर समस्या से निपटने की जरूरत पर जोर देते हुए गडकरी ने कहा, "हम भारत एनसीएपी-2 की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह एक बहुत महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसके तहत अक्टूबर, 2027 से सुरक्षा की पूरी श्रृंखला का आकलन किया जाएगा। यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी समस्या हैं... हम दुनिया में पहले स्थान पर हैं।" गडकरी ने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा यात्री वाहन बाजार है। भारत में वाहनों के परीक्षण में लगने वाला समय और लागत, एनसीएपी के तहत वैश्विक स्तर पर लगने वाली 2.5 करोड़ रुपये की लागत की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों के बावजूद देश में सड़क दुर्घटनाओं और इनमें जान गंवाने वालों की संख्या अब भी काफी अधिक है। हर साल पांच लाख दुर्घटनाएं होती हैं और 1.80 लाख लोगों की मौत होती है। मंत्री ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले अधिकतर लोग 18 से 36 वर्ष की आयु के होते हैं।
उन्होंने कहा कि यह देश के लिए बेहद गंभीर स्थिति है और हर कीमत पर इन आंकड़ों को कम करना होगा। इस दिशा में वाहन की पूरी मूल्य श्रृंखला का आकलन करना बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, "हम दुर्घटना से जुड़ी पूरी मूल्य श्रृंखला का आकलन करने जा रहे हैं और इसमें नई प्रौद्योगिकियों के साथ भारतीय स्टार्टअप द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों का भी इस्तेमाल करेंगे।" सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए गडकरी ने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था पर भी काम कर रही है, जिसके तहत सुरक्षा नियम तोड़ने वालों का ड्राइविंग लाइसेंस रद्द किया जा सकेगा जबकि जिम्मेदारी से वाहन चलाने वालों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चालक का व्यवहार एक बड़ी समस्या है। लगातार गलतियां करने वाले व्यक्ति को वाहन चलाने से रोकना उचित होगा। मंत्रालय ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र में चरणबद्ध अंक प्रणाली शुरू करने की योजना बना रहा है। मंत्री ने कहा, "यह बहुत महत्वपूर्ण और अच्छी योजना है। हर अपराध पर ड्राइविंग लाइसेंस के अंक कम होंगे और एक निश्चित सीमा के बाद लाइसेंस निलंबित या आगे चलकर रद्द भी किया जा सकेगा। वहीं, जिन लोगों के अंक अच्छे होंगे, उन्हें बीमा कंपनियों की ओर से प्रोत्साहन और अन्य लाभ मिलेंगे।" उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को हतोत्साहित करने की जरूरत है जिनके गलत कृत्यों के कारण आम लोगों की जान जाती है। -
नयी दिल्ली/भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बृहस्पतिवार को पार्टी शासित राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों की एक कार्यशाला की अध्यक्षता की। इसमें बेहतर समन्वय, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और लोगों को सुशासन उपलब्ध कराने के मुद्दों पर चर्चा की गई। भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक आशीष उषा अग्रवाल ने बताया कि इस पहल का आयोजन भाजपा के सुशासन प्रकोष्ठ की ओर से किया गया है। 'जल मंथन' नाम से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत बुधवार शाम नवीन के आवास पर उनके संबोधन के साथ हुई थी। सूत्रों ने बताया कि कार्यशाला के समापन के बाद सभी मंत्री बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से उनके आवास पर मुलाकात करेंगे। भाजपा के वरिष्ठ नेता और सुशासन प्रकोष्ठ के प्रमुख विनय सहस्रबुद्धे ने कार्यशाला का ब्योरा साझा करते हुए कहा कि इसमें भाजपा शासित 24 राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि देश में जल संसाधनों की स्थिति, विभिन्न कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन तथा पार्टी और उसकी सरकारों के बीच बेहतर समन्वय सहित कई विषयों पर चर्चा की गई। सहस्रबुद्धे ने संवाददाताओं से कहा, ''कार्यशाला का समग्र उद्देश्य सुशासन सुनिश्चित करना है।''
-
अयोध्या. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जीतेंद्र मिश्रा ने बृहस्पतिवार को अयोध्या पहुंचने के बाद ट्रस्ट के सदस्यों के साथ अपनी पहली बैठक में भाग लिया। यह बैठक राम मंदिर की देखरेख करने वाले ट्रस्ट के जारी प्रशासनिक पुनर्गठन के बीच हुई।
रामघाट स्थित ट्रस्ट के श्री राम जन्मभूमि क्षेत्र कार्यालय में आयोजित बैठक मुख्य रूप से परिचयात्मक थी। मिश्रा ने इस दौरान ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों से मुलाकात की तथा उन्हें लेखांकन एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं सहित ट्रस्ट के कामकाज के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी गई। मिश्रा ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, "यह एक परिचयात्मक बैठक थी, जिसमें मैंने ट्रस्ट के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। मुझे अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों को समझने में कुछ और दिन लगेंगे।" ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव गिरि ने कहा, "आज (बुधवार को) ट्रस्ट के सदस्यों का नए सीईओ से औपचारिक परिचय हुआ। आगे का कामकाज और जिम्मेदारियों का आवंटन आने वाले दिनों में किया जाएगा।" सूत्रों ने बताया कि मिश्रा फिलहाल मंदिर ट्रस्ट कार्यालय में ठहरे हुए हैं और उनके दिन में ट्रस्ट की कुछ अन्य बैठकों में शामिल होने की उम्मीद है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व करने वाले 62 वर्षीय पूर्व एयर मार्शल बृहस्पतिवार सुबह विमान से दिल्ली से अयोध्या पहुंचे। उन्होंने राम मंदिर जाकर रामलला की पूजा भी की।
इससे पहले दिन में मिश्रा ने कहा था कि वह चयन समिति के आभारी हैं और अपनी नियुक्ति को भगवान राम का आशीर्वाद मानते हैं। उन्होंने कहा था, "मैं आज खुद को सबसे भाग्यशाली व्यक्ति मानता हूं कि मुझे अपने जीवन में दो बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं, एक बार राष्ट्रीय सेवा के लिए और अब श्री राम के मंदिर के संगठन एवं प्रशासन तथा श्री राम के भक्तों के लिए।" सीईओ की नियुक्ति ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे व्यापक प्रशासनिक बदलाव का हिस्सा है। यह बदलाव मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर उपजे विवाद के बाद किया गया है।
इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है और चंपत राय ने महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट ने बुधवार को गोविंद देव गिरि को महासचिव और महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया।
इसके अलावा मदन मोहन पांडे और निर्मला यादव सहित नए ट्रस्टियों को शामिल किया गया। इस पुनर्गठन का उद्देश्य राम मंदिर से जुड़ी बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच ट्रस्ट के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज को मजबूत करना है। इस बीच, गिरि ने बृहस्पतिवार को कारसेवक पुरम स्थित भरत कुटी में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से मुलाकात की। बैठक में पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा और ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य तथा विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय सलाहकार समिति के सदस्य दिनेश जी भी मौजूद थे। बैठक एक घंटे से अधिक समय तक चली।
प्रशासनिक बदलाव के बाद ट्रस्ट के महासचिव पद से हटाए गए गिरि और राय के बीच यह बैठक बंद कमरे में हुई। -
नयी दिल्ली. भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत शुक्रवार को 26 मोबाइल ई-सेवा वैन को हरी झंडी दिखाएंगे। इस पहल का उद्देश्य दूरदराज और सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक ई-कोर्ट सेवाओं, कानूनी सहायता और विवाद समाधान की सुविधाएं पहुंचाना है। उच्चतम न्यायालय की ई-कमेटी द्वारा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और विधि विभाग के सहयोग से आयोजित ध्वजारोहण समारोह उच्चतम न्यायालय के प्रशासनिक भवन परिसर की एबी लॉबी में होगा। शीर्ष अदालत के एक बयान के अनुसार, उच्चतम न्यायालय से शुरू की जा रही ये 26 वैन कुल 73 मोबाइल ई-सेवा वैन के पहले चरण का हिस्सा हैं। इन्हें देशभर में चिन्हित उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों के अधिकार क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से तैनात किया जाएगा। यह पहल ई-कोर्ट परियोजना के विस्तार के रूप में शुरू की गई है।
ये वैन नागरिकों को डिजिटल ई-फाइलिंग, सुरक्षित ई-भुगतान, मोबाइल लोक अदालत, कानूनी साक्षरता कार्यक्रम और ई-कोर्ट की अन्य सुविधाएं सीधे उपलब्ध कराएंगी। -
- दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी
इंदौर. ''मैं अगर अंग्रेजी माध्यम में सिविल इंजीनियरिंग पढ़ता, तो मुश्किल विषय समझने के लिए मुझे गूगल और चैटजीपीटी की मदद लेनी पड़ती, लेकिन मातृभाषा हिन्दी में पढ़ाई के दौरान शिक्षक अंग्रेजी की तकनीकी बातों को भी आसानी से समझा देते हैं।'' इंजीनियरिंग के छात्र रोहित शर्मा का यह अनुभव नयी शिक्षा नीति के मुताबिक मध्यप्रदेश में मौजूदा अकादमिक सत्र से शुरू हुए हिन्दी माध्यम के नये बी.टेक. पाठ्यक्रम की तस्वीर पेश करता है।
मध्यप्रदेश में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई को हिन्दी माध्यम में उपलब्ध कराने की पहल इंदौर के श्री जीएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (एसजीएसआईटीएस) में की गई है। एसजीएसआईटीएस, सरकारी सहायता प्राप्त स्वायत्त संस्थान है और इसकी गिनती मध्य भारत के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में होती है। अधिकारियों के मुताबिक खास बात यह है कि हिन्दी माध्यम से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में राज्य सरकार की ओर से दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि इस पाठ्यक्रम के विशेष बैच के लिए 30 सीट निर्धारित की गई हैं और इसमें करीब 20 विद्यार्थियों का दाखिला हो चुका है। एसजीएसआईटीएस के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख सुनील अजमेरा ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया,''गुजरे बरसों में हमने देखा है कि 12वीं तक हिन्दी माध्यम में पढ़े कई विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम में इंजीनियरिंग की पढ़ाई में कठिनाई महसूस करते हैं और इनमें से कुछ बीच में ही पाठ्यक्रम छोड़ देते हैं।' -
अगले दशक के लिए भारत का दृष्टिकोण बताया
नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को रक्षा कूटनीति पर एक दस्तावेज का विमोचन किया। रक्षा नामक यह व्यापक दस्तावेज अगले 10 वर्षों में वैश्विक रक्षा साझेदारियों पर देश के रणनीतिक खाके और दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। रक्षा मंत्रालय ने कहा, ''रक्षा कूटनीति भारत की विदेश नीति का एक मुख्य स्तंभ है, इसलिए यह दस्तावेज अगले दशक के लिए एक स्पष्ट और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत बदलते वैश्विक परिदृश्य में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बना रहे।'' मंत्रालय ने कहा कि यह दस्तावेज देश की रणनीतिक प्रतिबद्धता में एक बदलाव को दर्शाता है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों को सक्रिय वैश्विक सहयोग के साथ जोड़ा गया है। इससे दीर्घकालिक स्थिरता और पारस्परिक विकास को बढ़ावा मिलता है। सिंह ने नयी दिल्ली में रक्षा कूटनीति पर इस दस्तावेज का विमोचन किया।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ''यह व्यापक दस्तावेज अगले 10 वर्षों में वैश्विक रक्षा साझेदारियों पर देश के रणनीतिक खाके और दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत करता है।'' रणनीतिक खाके में जिन प्रमुख स्तंभों को रेखांकित किया गया है, उनमें रणनीतिक साझेदारी, दक्षता विकास, स्वदेशी निर्यात और समुद्री सुरक्षा शामिल हैं। बयान में कहा गया कि रणनीतिक साझेदारी के तहत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है। दक्षता विकास के अंतर्गत संयुक्त सैन्य अभ्यासों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना तथा मित्र देशों के साथ रक्षा के सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करना शामिल है। स्वदेशी निर्यात के तहत भारत में निर्मित रक्षा प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देकर देश को एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। समुद्री सुरक्षा के तहत लक्ष्य हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा प्रदाता और किसी घटना, आपदा की स्थिति में सबसे पहले कदम उठाने वाले के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करना है।



.jpg)
.jpg)























