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- नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को कहा कि 'हर घर तिरंगा' अभियान एक सशक्त जन अभियान में बदल गया है, जिसमें समाज के हर वर्ग के लोग देश के प्रति गर्व व्यक्त करने के लिए शामिल हो रहे हैं। नवीन ने यहां कर्तव्य पथ पर 'तिरंगा यात्रा' को संबोधित करते हुए कहा कि तिरंगा भारत के शौर्य, बलिदान, एकता और आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने लोगों से 13, 14 और 15 अगस्त को 'हर घर तिरंगा' अभियान में भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और उसके साथ 'सेल्फी' लेने की अपील की। उन्होंने कहा, ''13, 14 और 15 अगस्त—इन तीन दिनों तक हर घर में तिरंगे के सम्मान को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। हमारे घरों पर तिरंगा फहराया जाना चाहिए, उसके साथ 'सेल्फी' ली जानी चाहिए और यह संकल्प लिया जाना चाहिए कि हम अपना भविष्य स्वयं बनाएंगे तथा भारत के भविष्य को बनाने और उसे विकसित करने का संकल्प अपनाएंगे।'' नवीन ने कहा कि भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर के साथ होगा। उन्होंने कहा, ''इस वर्ष लाल किले की प्राचीर से 'वंदे मातरम्' की वह गूंज सुनाई देगी।'' भाजपा प्रमुख ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद से कश्मीर में तिरंगा गर्व के साथ लहरा रहा है। उन्होंने कहा, ''2011 में जब कश्मीर के लाल चौक पर भारत का तिरंगा फहराने को लेकर सवाल उठाए गए थे, तब भारत के करोड़ों युवाओं के दिलों को ठेस पहुंची थी।'' उन्होंने कहा, ''हमें खुशी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया और आज वहां तिरंगा सम्मान, गर्व और गरिमा के साथ लहराता हुआ दिखाई देता है।'' उन्होंने इस महीने की शुरुआत में घोषित केंद्र सरकार की 'सूर्यपथ तिरंगा' पहल का भी उल्लेख किया। इस पहल के तहत, भारतीय दूतावास और मिशन पूर्व से पश्चिम की ओर राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे।नवीन ने कहा, ''यह भारत के बढ़ते प्रभाव और भारत के संकल्प का प्रतीक होगा।''कर्तव्य पथ के निकट स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का उल्लेख करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यह स्थल लोगों को स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हमारे नेताओं द्वारा दिए गए बलिदानों की याद दिलाता है। इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौजूद थीं।
- नयी दिल्ली. भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल छात्र प्रदर्शनों को लेकर संसद में चर्चा से भाग रहे हैं क्योंकि वे गृह मंत्री अमित शाह का सामना करने से 'डरते हैं। नवीन ने कहा कि गृह मंत्री ने सड़कों से लेकर सदन तक एक लंबी राजनीतिक यात्रा तय की है और पूरा देश जानता है कि जब वह तथ्यों के साथ सदन में बोलते हैं, तो विपक्ष की ''बोलती बंद हो जाती है।'' भाजपा अध्यक्ष ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''इसी डर के कारण विपक्ष पूरे सत्र के दौरान गोलपोस्ट बदलता रहा और चर्चा से बचता रहा।'' उन्होंने कहा, ''इस पूरे सत्र में राहुल गांधी और समूचे विपक्ष का रवैया उनकी अराजक मानसिकता और लोकतंत्र-विरोधी सोच को उजागर करता है। पूरा सत्र बीतने को है, पर वे एक भी मुद्दे पर गंभीर चर्चा के लिए तैयार नहीं हुए।'' भाजपा अध्यक्ष ने कहा, '' पहले उन्होंने युवाओं के विषय पर चर्चा करने की मांग की, और जब सरकार इसके लिए पूरी तरह तैयार हो गई, तो कांग्रेस और 'इंडी' गठबंधन यह कहकर भाग खड़ा हुआ कि उन्हें कोई चर्चा ही नहीं करनी है।'' उन्होंने कहा, ''यह साफ तौर पर दिखाता है कि विपक्ष मुद्दों को लेकर न तो संजीदा है और न ही गंभीर।''नवीन ने कहा, ''सच्चाई यह है कि राहुल गांधी, कांग्रेस और 'इंडी' गठबंधन चर्चा से इसलिए भाग रहा था क्योंकि उन्हें पता था कि जब गृह मंत्री संसद में बोलेंगे तो विपक्ष के सारे झूठ धराशायी हो जायेंगे। पूरा देश जानता है कि जब गृह मंत्री सदन में तथ्यों के साथ बोलते हैं, तो उनके तर्कों के सामने विपक्ष की बोलती बंद हो जाती है। इसी डर से विपक्ष पूरे सत्र में केवल विषयों को बदलता रहा और चर्चा से भागता रहा।'' उन्होंने कहा, ''संसद लोकतंत्र का वह पवित्र मंदिर है जहां जनता के मुद्दों पर सार्थक चर्चा से देश की दिशा तय होती है, लेकिन इस बार के मानसून सत्र में गैरजिम्मेदार कांग्रेस ने चर्चा से भाग कर और बार–बार अपना गोलपोस्ट बदलकर देश की लोकतांत्रिक मर्यादा और गरिमा को ही तार–तार कर दिया। वास्तव में कांग्रेस ने देश की जनता को धोखा दिया है।
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नयी दिल्ली. उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीयों में देशभक्ति की भावना जगाने और अलग-अलग क्षेत्रों, भाषाओं, धर्मों और सामाजिक पृष्ठभूमियों के लोगों को एकजुट करने में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' ने अहम भूमिका निभाई। 'वंदे मातरम्' गीत की रचना के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित 'हर घर तिरंगा' बाइक रैली को यहां भारत मंडपम में संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि 'वंदे मातरम्' के दो शब्द ने ''उस समय हर भारतीय के मन में देशभक्ति की भावना को जगाया'' और यही वह मुख्य ताकत बनी जिसने भारत से ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को उखाड़ फेंका। उन्होंने कहा, ''हमारी आजादी की लड़ाई भारतीय सोच, भारतीय भावना और भारतीय चेतना की जागृति थी। इसने अलग-अलग क्षेत्रों, भाषाओं, धर्मों और सामाजिक पृष्ठभूमियों के लोगों को आजादी के एक साझे सपने और 'एक भारत' के साझे सपने के जरिए एकजुट किया।'' राधाकृष्णन ने कहा कि जब बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इन अमर शब्दों को लिखा, तो उन्होंने ''आजाद माहौल में सांस लेने की चाह रखने वाले इस राष्ट्र की आत्मा को आवाज दी''। उप राष्ट्रपति ने कहा, ''हमारे अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए यह गीत महज कुछ शब्द नहीं था, बल्कि हिम्मत, त्याग और उम्मीद का स्रोत था।'' उन्होंने कहा कि कई स्वतंत्रता सेनानी अपने दिलों में 'वंदे मातरम्' की भावना के साथ फांसी के फंदे पर चढ़ गए। राधाकृष्णन ने 'वंदे मातरम्' की 150वीं सालगिरह पर संसद में हुई विशेष चर्चा का जिक्र करते हुए कहा कि यह चर्चा 12 घंटे से अधिक समय तक चली और यह ''सत्र की सबसे दिलचस्प और सार्थक चर्चाओं में से एक'' थी। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह उनके लिए खास तौर पर अहम था क्योंकि इस विषय पर चर्चा राज्यसभा के सभापति के रूप में उनके ''पहले सत्र'' के दौरान हुई। उन्होंने कहा कि भारत अब हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू और केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी भी मौजूद थे।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने और दूसरों के संघर्षों से सीखने की बुधवार को अपील करते हुए कहा कि 'रील के युग' में रह रहे युवाओं को याद रखना चाहिए कि ''शॉर्टकट आपको नुकसान पहुंचा सकता है।'' मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स' के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोविंद का जीवन दिखाता है कि दृढ़ संकल्प किसी व्यक्ति को मुश्किलों से उबरने और सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने में कैसे मदद कर सकता है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी कोविंद के लगातार सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने का जिक्र करते हुए कहा कि पद छोड़ने के बाद भी उन्होंने आराम नहीं किया, बल्कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पहल पर काम कर रहे हैं, जो ''भारतीय लोकतंत्र में एक नया अध्याय खोल सकती है।'' मोदी ने कहा कि इस मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति के प्रयास भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में उनके निरंतर योगदान का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने की अपील की, क्योंकि इनसे किसी खास दौर को उस व्यक्ति के जीवन के ज़रिए समझने का मौका मिलता है जिसने उसे खुद अनुभव किया हो। उन्होंने कहा, ''यह रील का ज़माना है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अक्सर आपको अपनी ओर खींचते हैं और कुछ खास रास्तों पर ले जाते हैं। शॉर्टकट के इस दौर में, आइए रेलवे स्टेशनों पर अक्सर दिखने वाले उस संदेश को याद करें, शॉर्टकट आपकी ज़िंदगी छोटी कर सकता है। यह इसलिए लिखा होता है क्योंकि कुछ लोगों को रेल पुल का इस्तेमाल करने के बजाय पटरियों पर कूदने की आदत होती है। हालांकि, अगर जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए कोई शॉर्टकट अपनाना ही है, तो वह है किसी ऐसे व्यक्ति की आत्मकथा पढ़ना जिसे आप पसंद करते हैं।'' मोदी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सरकार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोशल मीडिया पर 'जेन जी' से जुड़ने की कोशिशें तेज कर दी हैं। चिकित्सा के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) का प्रश्नपत्र लीक होने के खिलाफ पिछले महीने हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद मोदी ने अपने मंत्रियों से कहा था कि वे युवाओं से जुड़ने के लिए इंस्टाग्राम का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करें और रील 'पोस्ट' करें। हाल के हफ्तों में मोदी ने स्वयं युवाओं को संबोधित करते हुए कई बार रील साझा की हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविंद की आत्मकथा ''भारतीय लोकतंत्र की धरोहर'' बनेगी और नयी पीढ़ी को इससे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। मोदी ने कहा, ''हमें भविष्य में और ऐसे कई युवाओं की जरूरत है जो कोविंद की तरह हों। ऐसे लोग जो हालात से हार न मानें, बल्कि हर चुनौती से पार पाने का पुख्ता इरादा रखें। वे आत्मनिर्भर भारत का रास्ता बनाएंगे और यह आत्मकथा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।'' उन्होंने कहा कि आत्मकथा का शीर्षक बिल्कुल सही है क्योंकि कोविंद का जीवन और संघर्ष भले ही व्यक्तिगत थे, लेकिन ''उन संघर्षों की जीत भारतीय लोकतंत्र की है''। मोदी ने याद किया कि बचपन में घर का सामान बचाने की कोशिश के दौरान लगी आग में कोविंद ने अपनी मां को खो दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दुखद घटना कोविंद को तोड़ सकती थी लेकिन इसके बजाय इसने उन्हें और मजबूत बनाया। मोदी ने कहा कि कोविंद में अच्छे संस्कार डालने में उनके पिता की अहम भूमिका रही।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन में कोविंद के साथ अपनी मुलाकातों को याद करते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति उनसे ऐसी बातें करते थे जिनकी प्रोटोकॉल के तहत आम तौर पर अनुमति नहीं होती थी और उनके मना करने के बावजूद वे उन्हें खुद कार तक छोड़ने आते थे। कोविंद ने इस अवसर पर अपने बचपन की मुश्किलों और अपने आस-पास के माहौल से मिली सीख को याद किया।
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, ''मैं उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के एक गांव से आता हूं। मैंने ग्रामीणों से एक-दूसरे के प्रति दया और प्रेम का भाव सीखा।'' उन्होंने याद किया कि कैसे उनके घर की छत से बारिश का पानी टपकता था और उनका परिवार बारिश रुकने का इंतजार करता था। कोविंद ने कहा कि सरकारी आवास योजनाओं के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को सिर पर छत मिली है और उन्हें सम्मान के साथ जीने का मौका मिला है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ''कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति'' के उत्थान के संकल्प को याद करते हुए कोविंद ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत, उनका दृष्टिकोण और आम कार्यकर्ताओं से जुड़ने की उनकी क्षमता ने भी उन्हें बहुत प्रभावित किया। कोविंद ने कहा कि वह भाजपा से इसलिए जुड़े क्योंकि उनकी नजर में यह पार्टी परिवार या समुदाय के हितों से ऊपर देश को रखती है। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में मौजूद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोविंद को दृढ़ संकल्प की 'जीवंत मिसाल' बताया और भारत के कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए उनकी सराहना की। कार्यक्रम में देश के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और कई केंद्रीय मंत्री भी मौजूद थे। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि विपक्षी दल छात्रों से जुड़े विषय पर चर्चा के लिए तैयार हो जाएं तो वह हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं ताकि देश की जनता के सामने सब 'दूध का दूध, पानी का पानी' हो जाए, क्योंकि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। बीते 20 जुलाई को आरंभ हुए संसद के मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों में जारी गतिरोध के बीच शाह ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा और आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा होने ही नहीं देना चाहता। शाह ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने के बाद से वह नियमित रूप से संसद आ रहे हैं और अपने कक्ष में बैठते हैं, लेकिन विपक्ष दोनों सदनों की कार्यवाही नहीं चलने दे रहा है। उन्होंने कहा, '' "लापता, भाग गए, भगोड़े.." इस प्रकार की भाषा भारत के सार्वजनिक जीवन और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ी है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ है, तब से लगातार मैं संसद में आता हूं, अपने कक्ष में बैठता हूं। चूंकि संसद भवन में विपक्ष दोनों सदनों में कार्यवाही चलने नहीं दे रहा है, तो कोई जाकर क्या करेगा?'' गृह मंत्री ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार नीट से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों के मुद्दे पर सभी प्रकार से चर्चा के लिए तैयार है, समय तय किया जाए और विपक्ष भी चर्चा के लिए तैयार हो जाए। उन्होंने कहा, ''मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सभी प्रकार के जवाब दूंगा, सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। मैं इस बात पर भी चर्चा करूंगा कि आपने (विपक्ष) चर्चा क्यों नहीं चाही।'' शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को संसद की कार्यवाही चलने देनी चाहिए। उनका कहना था, ''मैं हर चीज का जवाब दूंगा ताकि देश की जनता के सामने दूध का दूध, पानी का पानी हो जाए।'' गृह मंत्री ने कहा कि अब विपक्ष को तय करना है कि उन्हें चर्चा करनी है या हंगामा करना है।
बाद में, शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से नीट प्रश्नपत्र लीक मुद्दे को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर सदन में चर्चा के लिए विपक्ष से बातचीत करने करने का आग्रह किया और कहा कि वह सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। -
नई दिल्ली। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के तहत योजना की शुरुआत से अब तक करीब 18.45 लाख ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि करीब 12.35 लाख अभ्यर्थियों को रोजगार मिला है। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत संचालित इस योजना का उद्देश्य प्लेसमेंट से जुड़े कौशल कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को रोजगार योग्य बनाना और उनके लिए सतत आजीविका के अवसर बढ़ाना है। यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
उद्योग की बदलती जरूरतों और रोजगार के उभरते अवसरों को देखते हुए डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के संशोधित दिशा-निर्देश वित्तीय वर्ष 2025-26 से लागू किए गए हैं। इनमें उद्योग-संचालित प्रशिक्षण, सतत रोजगार, नियोजन पश्चात सहायता, कौशल उन्नयन और पुनर्कौशलन के अवसर तथा प्रशिक्षण वितरण में अधिक लचीलापन शामिल है। इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) रखरखाव, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य सेवा, देखभाल आधारित अर्थव्यवस्था, खुदरा, आतिथ्य और मीडिया एवं मनोरंजन जैसे उभरते क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।डीडीयू-जीकेवाई के तहत परिधान, ऑटोमोटिव, सौंदर्य एवं वेलनेस, निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवा, आतिथ्य, आईटी-आईटीईएस, लॉजिस्टिक्स, खुदरा, दूरसंचार तथा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षित युवाओं के नियोजन को उद्योग साझेदारियों, नियोक्ता समझौतों, रोजगार मेलों, कैंपस प्लेसमेंट अभियानों, उद्योग परामर्शों और सेक्टर स्किल काउंसिलों एवं नियोक्ताओं के साथ समन्वय के जरिए सुगम बनाया जाता है।योजना के तहत प्लेसमेंट से जुड़े परिणामों के साथ पाठ्यक्रम तैयार करने और प्रशिक्षण देने में उद्योग की निरंतर भागीदारी को अनिवार्य किया गया है। उद्योगों के साथ समन्वय सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक राज्य और संघ राज्य क्षेत्र में कैप्टिव नियोक्ताओं के लिए लक्ष्यों का 20% आवंटन किया गया है। इसके अलावा, परियोजना कार्यान्वयन अभिकरणों (पीआईए) को बैच मोड भुगतान छह महीने की सफल अनिवार्य नियोजन अवधि से जोड़ा गया है।डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में रोजगार के स्थायित्व और टिकाऊपन को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत एक वर्ष की नियोजन पश्चात निगरानी एवं सहायता, परामर्श, प्रवासन सहायता, पूर्व छात्रों से जुड़ाव और शिकायत निवारण तंत्र जैसी व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं। साथ ही, कौशल उन्नयन और पुनर्कौशलन के अवसर भी दिए जाएंगे। संशोधित ढांचे में न्यूनतम 70% प्लेसमेंट का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अधिकतम 20% स्वरोजगार या गिग रोजगार को शामिल किया जा सकता है, बशर्ते रोजगार कम से कम छह महीने तक बना रहे।वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 1.37 लाख ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए 750 करोड़ रुपए का बजट अनुमान रखा गया है। इसके अलावा, राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को 361.96 करोड़ रुपए की मूल स्वीकृति जारी की गई है। राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा अब तक 50.89 करोड़ रुपए का व्यय किया जा चुका है।मध्य प्रदेश में डीडीयू-जीकेवाई का कार्यान्वयन मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एमपीएसआरएलएम) के माध्यम से किया जा रहा है। योजना की शुरुआत से अब तक राज्य में करीब 93 हजार अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि करीब 56 हजार अभ्यर्थियों को रोजगार मिला है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मध्य प्रदेश को 10 करोड़ रुपए की मूल स्वीकृति जारी की गई है।ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत योजना की शुरुआत से अब तक ग्वालियर जिले में 1,909 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया गया, जिनमें से 701 को रोजगार मिला। वहीं, शिवपुरी जिले में 944 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया गया और 579 अभ्यर्थियों को रोजगार मिला है। -
नई दिल्ली। अक्टूबर 2021 में शुरू किया गया पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (पीएमजीएस-एनएमपी) देश में एकीकृत और समन्वित अवसंरचना योजना को सक्षम बना रहा है। यह पहल विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एक साझा मंच पर लाकर अवसंरचना परियोजनाओं की एकीकृत योजना और समन्वित क्रियान्वयन को बढ़ावा देती है। अब तक नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) के माध्यम से करीब 18.66 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली 396 अवसंरचना परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जा चुका है। यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
पीएम गतिशक्ति एक एकीकृत योजना फ्रेमवर्क उपलब्ध कराता है, लेकिन इसके लिए अलग से कोई बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है। परियोजनाओं की मंजूरी और उनका क्रियान्वयन संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की अपनी योजनाओं, प्रक्रियाओं और बजटीय एवं वित्तीय प्रावधानों के तहत किया जाता है। इसलिए पीएम गतिशक्ति पहल के तहत कोई मात्रात्मक लक्ष्य या अलग व्यय आवश्यकता निर्धारित नहीं की गई है। पीएम गतिशक्ति एनएमपी का उद्देश्य मंत्रालयों और राज्यों को डेटा आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाना है। इसके लिए भू-स्थानिक डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और एपीआई इंटीग्रेशन का उपयोग किया जा रहा है। इससे अवसंरचना विकास की निगरानी, योजना और उसे बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। योजना के तहत परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने के साथ सामाजिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं की भी एकीकृत और समन्वित योजना बनाने में सुविधा हो रही है।पीएम गतिशक्ति फ्रेमवर्क के तहत गठित नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप केंद्र सरकार की प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं का योजना स्तर पर मूल्यांकन करता है। इसका उद्देश्य एकीकृत नियोजन, मल्टी-मोडल और इंटर-मोडल कनेक्टिविटी, प्रयासों में तालमेल, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी और परियोजना स्थल एवं आसपास के क्षेत्र के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। अब तक एनपीजी तंत्र के जरिए 18.66 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली 396 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया है। इनमें से 256 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 198 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं।एनपीजी के माध्यम से मूल्यांकन की गई 396 परियोजनाओं में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 171 परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें 108 को मंजूरी मिल चुकी है और 53 कार्यान्वयन के अधीन हैं। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत 9,01,668 करोड़ रुपए है। रेल मंत्रालय की 162 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया है, जिनमें 102 को मंजूरी मिली है और सभी 102 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। इनकी अनुमानित लागत 5,43,315 करोड़ रुपए है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की 31 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया, जिनमें 17 को मंजूरी मिली है और 17 कार्यान्वयन के अधीन हैं। इनकी अनुमानित लागत 2,88,614 करोड़ रुपए है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की चार, पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय की तीन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की छह परियोजनाओं का भी मूल्यांकन किया गया है। इसके अलावा एनआईसीडीसी और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग की 12, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की एक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक तथा वस्त्र मंत्रालय की पांच परियोजनाएं एनपीजी मूल्यांकन के दायरे में आई हैं।सरकार के विभिन्न अध्ययनों और मूल्यांकनों के अनुसार पीएम गतिशक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, प्रगति, सागरमाला और एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, समर्पित रेल फ्रेट कॉरिडोर, औद्योगिक गलियारों जैसी कनेक्टिविटी अवसंरचना पहलों ने लॉजिस्टिक्स दक्षता, टर्न-अराउंड टाइम, कारोबार सुगमता और औद्योगिक विकास को बेहतर करने में योगदान दिया है। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग ने 2025 में नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) के सहयोग से लॉजिस्टिक्स लागत का मूल्यांकन किया। इसके अनुसार भारत में लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी के 7.9% रहने का अनुमान है, जो दुनिया की उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के स्तर के बराबर है।आर्थिक समीक्षा 2023-24 में भी इन पहलों से घरेलू विनिर्माण और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार की बात कही गई है। भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु के एक अध्ययन के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग विकास पर खर्च किए गए प्रत्येक एक रुपए से जीडीपी में 3.2 रुपए की वृद्धि होती है। अब तक 58 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को पीएमजीएस-एनएमपी में शामिल किया जा चुका है। इसमें सड़क, रेल, बंदरगाह एवं जलमार्ग, बिजली, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, नागरिक उड्डयन, दूरसंचार और औद्योगिक गलियारों समेत प्रमुख अवसंरचना क्षेत्र शामिल हैं।सितंबर 2025 में पीएम गतिशक्ति पब्लिक प्लेटफॉर्म शुरू किया गया, जिसके जरिए निजी संस्थाओं और आम जनता को पीएम गतिशक्ति डेटा एनालिटिक्स तक पहुंच उपलब्ध कराई गई है। प्रश्न आधारित इस तंत्र के माध्यम से सार्वजनिक और निजी संस्थाएं सरल प्रक्रिया के जरिए पीएमजीएस-एनएमपी पोर्टल से डेटा एनालिटिक्स रिपोर्ट प्राप्त कर अपनी परियोजनाओं की योजना बना सकती हैं। राज्यों को जिला स्तरीय योजना में भी पीएम गतिशक्ति के उपयोग को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। हितधारकों के उपयोग के लिए करीब 1,800 डेटा लेयर्स एकीकृत किए गए हैं। इसके अलावा 65 से अधिक सॉफ्टवेयर मॉड्यूल/टूल और 100 से अधिक मोबाइल एवं वेब एप्लिकेशन विकसित कर प्लेटफॉर्म से जोड़े गए हैं।मंत्रालयों, विभागों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य हितधारकों की जरूरतों के अनुसार पीएम गतिशक्ति पहल का विस्तार लगातार जारी है। इसके तहत नए डेटा लेयर्स का मैपिंग और इंटीग्रेशन, अतिरिक्त सुविधाओं का विकास, योजना एवं विश्लेषण के लिए नए सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और टूल तथा मोबाइल एवं वेब एप्लिकेशन विकसित करने का काम किया जा रहा है -
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना के बेड़े में मंगलवार को नई पीढ़ी की स्वदेशी अपतटीय गश्ती पोत ‘श्रुति’ शामिल होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। यार्ड 3037 ‘श्रुति’ का गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता में जलावतरण किया गया। इस पोत को देश में ही डिजाइन और निर्मित किया जा रहा है। नई पीढ़ी की अपतटीय गश्ती पोतों की यह श्रृंखला भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और त्वरित कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।
नई पीढ़ी की अपतटीय गश्ती पोतों को समुद्री डकैती रोधी अभियान, समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान, समुद्र में महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है। इन पोतों से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा मजबूत करने और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की निगरानी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।पोत का नाम ‘श्रुति’ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और वैदिक विरासत से लिया गया है। ‘श्रुति’ चारों वेदों को संदर्भित करता है। पोत के प्रतीक चिह्न में उर्सा मेजर तारामंडल और लाल एवं सफेद रंग का प्रकाशस्तंभ दर्शाया गया है। प्रकाशस्तंभ समुद्र में मार्गदर्शन और सुरक्षा का प्रतीक है, जबकि तारामंडल समुद्री दिशा-निर्धारण और नौवहन की परंपरा को दर्शाता है।जलावतरण समारोह में नौसेना के युद्धपोत निर्माण एवं अधिग्रहण नियंत्रक वाइस एडमिरल संजय साधु मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति में मनिका साधु ने पोत का जलावतरण किया। इस अवसर पर भारतीय नौसेना, रक्षा मंत्रालय और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे।नई पीढ़ी की अपतटीय गश्ती पोतों का निर्माण एक साथ दो भारतीय पोत निर्माण कंपनियों में किया जा रहा है। इनमें गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता शामिल हैं। इन पोतों को देश में ही डिजाइन और निर्मित किया जा रहा है, जो भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाता है। नई पीढ़ी की ये गश्ती पोत भारतीय नौसेना के मौजूदा अपतटीय गश्ती पोत बेड़े की क्षमता को और बढ़ाएंगी। इनका इस्तेमाल समुद्री क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के अभियानों के लिए किया जा सकेगा। निगरानी, सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया से जुड़े अभियानों में इनकी तैनाती से नौसेना की समुद्री क्षेत्र में परिचालन क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।‘श्रुति’ का जलावतरण भारतीय नौसेना की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इन पोतों का देश में डिजाइन और निर्माण किया जाना भारत की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाता है। यह परियोजना केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियानों के अनुरूप है। भारतीय पोत निर्माण कंपनियों में युद्धपोतों और गश्ती पोतों के निर्माण से देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलने के साथ स्वदेशी रक्षा उद्योग और उससे जुड़े उद्योगों को भी मजबूती मिल रही है। इसी वजह से यार्ड 3037 ‘श्रुति’ का जलावतरण भारतीय नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण अभियान में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान कर्नाटक और केरल के सांसदों के साथ बैठक कर टीबी-मुक्त भारत अभियान की प्रगति और आगे की रणनीति पर चर्चा की। बैठक में दोनों राज्यों के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने टीबी-मुक्त कर्नाटक, टीबी-मुक्त केरल और टीबी-मुक्त भारत के निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नड्डा ने सांसदों से जिला कलेक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों के साथ समन्वय कर जांच, उपचार और मरीजों को सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की लगातार निगरानी करने का आह्वान किया।
‘टीबी-मुक्त भारत के लिए सांसदों की अग्रणी भूमिका’ विषय पर आयोजित बैठक विस्तारित संसद भवन परिसर में हुई। इसमें कर्नाटक और केरल के विभिन्न दलों के सांसदों ने हिस्सा लिया। बैठक का उद्देश्य टीबी उन्मूलन की दिशा में राजनीतिक स्तर पर एकजुट प्रयासों को गति देना और राज्यों में चल रही गतिविधियों की समीक्षा करना था।बैठक में 100-दिवसीय टीबी-मुक्त भारत अभियान के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की गई। अभियान का पहला चरण 7 दिसंबर 2024 को शुरू हुआ था, जिसमें शुरुआत में 347 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों को शामिल किया गया। बाद में इसका विस्तार पूरे देश में किया गया और यह चरण 24 मार्च 2025 को समाप्त हुआ। अभियान का दूसरा चरण 24 मार्च 2026 को शुरू हुआ और जुलाई 2026 में समाप्त हुआ। इसमें देशभर के करीब 1.58 लाख उच्च जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों को शामिल किया गया। नड्डा ने कहा कि वर्ष 2015 से 2024 के बीच भारत में टीबी के मामलों में 21% की कमी आई है, जो वैश्विक स्तर की प्रगति की तुलना में करीब दोगुनी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत ने 92% उपचार कवरेज दर हासिल की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मिली गति को जमीनी स्तर के प्रभाव में बदलने के लिए कर्नाटक और केरल में टीबी की जांच, उपचार और मरीजों को सहायता की पहुंच बढ़ाना महत्वपूर्ण है।केंद्रीय मंत्री ने हाल में संपन्न 100-दिवसीय टीबी-मुक्त भारत अभियान की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। 24 मार्च से 4 जुलाई 2026 तक चले अभियान में देशभर में 2.02 करोड़ से अधिक संवेदनशील लोगों की जांच की गई और 7 लाख से अधिक नए टीबी मामलों का पता लगाया गया। इनमें 1.97 लाख ऐसे मामले भी शामिल थे, जिनमें लक्षण नहीं थे और जिनका सामान्य परिस्थितियों में पता चलना मुश्किल था।स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त सचिव अराधना पटनायक ने अभियान के तकनीकी आधार की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले एक दशक में आणविक जांच की क्षमता को कुछ सौ मशीनों से बढ़ाकर 11,000 से अधिक मशीनों तक पहुंचाया है। देश में करीब 3,000 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित पोर्टेबल एक्स-रे इकाइयां भी क्षेत्र स्तर पर इस्तेमाल की जा रही हैं।स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने दोनों राज्यों में टीबी के अधिक बोझ से जुड़े संवेदनशील कारकों की जानकारी दी। इनमें शहरी क्षेत्र, प्रवासी आबादी, शहरी झुग्गियां, कुपोषण, शराब और तंबाकू का सेवन, एचआईवी एवं मधुमेह का अधिक बोझ, बुजुर्ग आबादी, निर्माण और औद्योगिक श्रमिक तथा पहाड़ी एवं जनजातीय क्षेत्र शामिल हैं। पत्थर की खदानों, रेशम बुनकरों, कॉफी और चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों को भी संवेदनशील समूहों में शामिल किया गया है।100-दिवसीय अभियान के दौरान कर्नाटक और केरल ने स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विशेष रणनीतियां अपनाईं। इसके तहत आयुष्मान आरोग्य शिविरों को शहरी झुग्गियों, निर्माण स्थलों और प्रवासी श्रमिकों के समूहों तक पहुंचाया गया, ताकि जांच और स्वास्थ्य सेवाएं जरूरतमंद लोगों के करीब उपलब्ध हो सकें। बैठक में सांसदों ने जागरूकता अभियान तेज करने, टीबी से जुड़े कलंक को कम करने और शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान को बढ़ावा देने के लिए निक्षय शिविरों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। वे जिला और प्रखंड स्तर पर टीबी सेवाओं की निगरानी भी मजबूत करेंगे, ताकि अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण जांच, उपचार और मरीज-केंद्रित देखभाल पहुंच सके। नड्डा ने कहा कि टीबी-मुक्त भारत केवल स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामूहिक स्वामित्व से संचालित जन आंदोलन है। उन्होंने सांसदों से अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लगातार जनसंपर्क, प्रशासनिक निगरानी और सामाजिक भागीदारी के जरिए अभियान को मजबूत करने का आह्वान किया।सांसदों ने टीबी से प्रभावित लोगों को पोषण संबंधी सहायता, मनोसामाजिक सहयोग और आजीविका से जुड़ी मदद उपलब्ध कराने के लिए समुदायों को संगठित करने की प्रतिबद्धता जताई। नड्डा ने कहा कि 100-दिवसीय अभियान का समापन जिम्मेदारी का अंत नहीं, बल्कि अधिक गहन और निरंतर प्रयासों की शुरुआत है। उन्होंने विश्वास जताया कि कर्नाटक और केरल टीबी उन्मूलन की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पारदर्शी प्रक्रियाओं, व्यापक भागीदारी और बेहतर अवसरों के जरिए भारत में सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया को बदल रहा है। यह मंच व्यवसायों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी और समावेशी इकोसिस्टम तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में यह बात कही। उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के उस लेख को साझा किया, जिसमें 9 अगस्त 2016 को लॉन्च होने के बाद से सरकारी ई-मार्केटप्लेस की प्रगति और उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पारदर्शी खरीद, व्यापक भागीदारी और बेहतर अवसरों के जरिए जीईएम भारत की सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया में बदलाव ला रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जीईएम के विकास में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल ने सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के साथ देश में कारोबार करने में आसानी को मजबूत करने में भी योगदान दिया है। उनके अनुसार, पिछले 10 वर्षों में जीईएम ने अधिक प्रतिस्पर्धी और समावेशी खरीद प्रणाली तैयार करने में मदद की है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी को केंद्र में रखते हुए जीईएम ने अधिक प्रतिस्पर्धी और समावेशी इकोसिस्टम तैयार किया है। इससे विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने में मदद मिली है। सरकारी खरीद के अवसरों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराकर यह मंच छोटे कारोबारियों और महिला उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है।पीएम नरेंद्र मोदी ने लोगों से पीयूष गोयल के लेख को पढ़ने का आग्रह किया, ताकि वे जीईएम की उपलब्धियों और भारत में सार्वजनिक खरीद के आधुनिकीकरण में इसकी भूमिका को विस्तार से समझ सकें। उन्होंने कहा कि प्लेटफॉर्म ने बीते एक दशक में सार्वजनिक खरीद व्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है।सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों की खरीद प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए सरकार की ओर से शुरू किया गया जीईएम एक ऑनलाइन बाजार के रूप में काम करता है। इस प्लेटफॉर्म पर खरीदार और विक्रेता पारदर्शी और कुशल तरीके से लेनदेन कर सकते हैं। इसका उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में दक्षता बढ़ाना और खरीद से जुड़ी बाधाओं को कम करना है।जीईएम को देशभर के कारोबारियों की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने वाली प्रमुख पहल के रूप में स्थापित किया गया है। डिजिटल माध्यम से सरकारी खरीद के अवसरों को अधिक सुलभ बनाकर यह मंच प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और सार्वजनिक खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता मजबूत करने में योगदान दे रहा है। - नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ध्वज संहिता का पालन करने का निर्देश दिया। मंत्रालय ने कहा कि हालांकि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेल आयोजनों के दौरान आम लोग कागज से बने झंडे लहरा सकते हैं, लेकिन कार्यक्रमों के बाद उन्हें फेंका या जमीन पर नहीं डाला जाना चाहिए। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजे गए एक संदेश में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने से जुड़े कानूनों, तौर-तरीकों और नियमों के बारे में लोगों के साथ-साथ सरकारी संगठनों और एजेंसियों में भी अक्सर जानकारी की कमी देखी जाती है। इसमें कहा गया, "मुझे यह कहने का निर्देश दिया गया है कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतीक है, इसलिए इसे सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए।" मंत्रालय ने राज्यों से कहा कि वे इस संबंध में बड़े पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम चलाएं और इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों के जरिए इनका व्यापक प्रचार-प्रसार करें। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकों से तिरंगा यात्राओं, तिरंगा रैलियों और 'वंदे मातरम' के सामूहिक गायन के माध्यम से इस अभियान में भाग लेने और इसे मनाने तथा हर घर तिरंगा की आधिकारिक वेबसाइट पर तिरंगा फहराते हुए अपनी सेल्फी साझा करने की अपील की। सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक संदेश में उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा शुरू किया गया 'हर घर तिरंगा' अभियान हमारे राष्ट्र की सामूहिक ताकत का प्रतिबिंब है, जो हमें एक 'विकसित भारत' के निर्माण के हमारे प्रयास में एकजुट करता है।" उन्होंने कहा, "इस वर्ष 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ का अवसर इस अभियान के साथ मिलकर हर देशभक्त के लिए इस पल को और भी भावुक और खास बना देता है।" गृह मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काता और बुना हुआ या मशीन से बना होना चाहिए, और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री सूती, पॉलिएस्टर, ऊन, रेशम या खादी की होनी चाहिए। आदेश के साथ संलग्न ध्वज संहिता में कहा गया, "कोई भी आम नागरिक, निजी संस्था या शिक्षण संस्थान राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए, किसी भी दिन या अवसर पर-चाहे वह औपचारिक हो या कोई अन्य-राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है या प्रदर्शित कर सकता है। 19 जुलाई, 2022 के आदेश के जरिए 'भारतीय झंडा संहिता, 2002' में संशोधन किया गया था... यदि तिरंगा खुले स्थान पर या किसी आम नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है तो उसे दिन-रात फहराया जा सकता है।" इसमें स्पष्ट किया गया कि जब कभी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाए तो उसकी स्थिति सम्मानजनक होनी चाहिए, और फटा हुआ एवं मैला-कुचैला झंडा प्रदर्शित न किया जाए। संदेश में कहा गया कि झंडे को किसी अन्य झंडे अथवा झंडों के साथ एक ही ध्वज दंड से नहीं फहराया जाए।इसमें कहा गया, "संहिता के भाग-3 की धारा-9 में उल्लखित गणमान्य व्यक्तियों जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल आदि, के सिवाय झंडे को किसी वाहन पर नहीं लगाया जाएगा। किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचाई पर या उससे ऊपर या उसके बराबर में नहीं लगाना चाहिए।"
- नयी दिल्ली. सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि 15 अगस्त को ऐतिहासिक लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् गाया जाएगा और इस कार्यक्रम की थीम 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवा शक्ति का योगदान होगी। रक्षा सचिव आरके सिंह ने कहा कि लाल किले में होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान युवाओं की उपलब्धियों और योगदान को रेखांकित करने की योजना जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन से पहले ही तय की जा चुकी थी। उन्होंने कहा, ''विकसित भारत की दिशा में हमारी यात्रा में युवा बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, क्योंकि वे इसमें योगदान भी देंगे और उम्मीद है कि इसका लाभ भी उठाएंगे। यही एकमात्र वजह है।'' सिंह ने कहा, ''स्वतंत्रता दिवस समारोह में युवाओं की उपलब्धियों और योगदान को रेखांकित करने की योजना किसी भी अन्य घटना से पहले की है।'' रक्षा सचिव ने कहा, ''मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि यह योजना जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से पहले ही बनाई गई थी।'' भारत 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिल्ली के लाल किले से स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगे। सिंह ने कहा कि 2026 में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पहली बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रगीत का गायन किया जाएगा। रक्षा सचिव के अनुसार, प्रधानमंत्री के लाल किले पहुंचने पर वंदे मातरम् का गायन होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और राष्ट्र के नाम पारंपरिक संबोधन देंगे। सिंह ने कहा कि इस साल के समारोह में युवा शक्ति को भी रेखांकित किया जाएगा और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में देश के युवाओं के योगदान को सम्मान दिया जाएगा। भारतीय वायुसेना का एमआई-17 हेलीकॉप्टर वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक बैनर लेकर लाल किले के ऊपर से उड़ान भरेगा और वहां मौजूद लोगों पर फूल बरसाएगा। एक सवाल पर रक्षा सचिव ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को समारोह में आमंत्रित किया गया है और आमंत्रित लोगों के बैठने की व्यवस्था पदानुक्रम के अनुसार की जाएगी। सिंह ने कहा कि पदानुक्रम के अनुसार राहुल गांधी की सीट केंद्रीय मंत्रियों के बाद होगी। रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया जाएगा। अधिकारी ने कहा, ''2026 के अंतरराष्ट्रीय भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित ओलंपियाड में पदक जीतने वाले 19 विद्यार्थियों की उपलब्धियां विज्ञान के क्षेत्र में युवा शक्ति की सफलता का उदाहरण हैं। उन्हें समारोह में आमंत्रित किया गया है और वे लाल किले की प्राचीर पर बैठेंगे।'' उन्होंने बताया कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह में करीब 5,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। ये वे लोग हैं जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में कामयाबी हासिल की है और देश को विकसित भारत की राह पर आगे ले जाने में मदद कर रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि इस वर्ष मुख्य समारोह के निमंत्रण पत्रों पर 'सेवा तीर्थ' को दर्शाया गया है, ताकि लोगों को हर नागरिक के कल्याण के लिए समर्पण और निष्ठा के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सके।
- नयी दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा सहित उसके 32 सहयोगी संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारी अगले सप्ताह आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले में वार्षिक समन्वय बैठक के लिए जुटेंगे। बैठक में समकालीन मुद्दों के साथ-साथ जेन-जी से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। तीन दिन की यह बैठक 19 अगस्त को विशाखापत्तनम के गुडीलोवा में शुरू होगी। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और महासचिव दत्तात्रेय होसबाले इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक 21 अगस्त को समाप्त होगी। आरएसएस के राष्ट्रीय मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख सुनील आंबेकर ने एक बयान में कहा, "बैठक के दौरान, सभी 32 संगठन अपनी-अपनी गतिविधियों के बारे में जानकारी साझा करेंगे और विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार और सुझाव रखेंगे।" उन्होंने कहा कि बैठक में आपसी तालमेल और सहयोग को बेहतर बनाने के साथ-साथ जन-कल्याण और नीति से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, "इस बैठक में जनसंख्या असंतुलन, 'नशा मुक्ति', युवाओं में जागरूकता पैदा करने, 'पंच परिवर्तन' को लागू करने, विकास की भारतीय अवधारणा और अन्य संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।" सूत्रों के मुताबिक, बैठक में "जेन-जी से जुड़े मुद्दों" पर भी चर्चा होगी। इस बैठक में आरएसएस से जुड़ी सभी 32 संस्थाओं के शीर्ष पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। इनमें संस्थाओं के अध्यक्ष और राष्ट्रीय संगठन सचिव शामिल हैं। आरएसएस ने एक बयान में कहा, "सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सभी सहसरकार्यवाह और अखिल भारतीय कार्यविभाग प्रमुख बैठक में मौजूद रहेंगे।"
- नयी दिल्ली. देश के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा इस साल आयोजित किये जाने वाले 'ऐट होम' समारोह में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है, जिनमें महाराष्ट्र का लावणी और छत्तीसगढ़ का गेड़ी नृत्य शामिल हैं। लावणी महाराष्ट्र की सबसे मशहूर लोक परंपराओं में से एक है, जिसमें संगीत, कविता, नृत्य और रंगमंच का मेल होता है और इसके जरिए बहादुरी, भक्ति और इंसानी भावनाओं को दिखाया जाता है। छत्तीसगढ़ का गेड़ी नृत्य ऊंचे बांस के डंडों पर किया जाता है, जिसमें जबरदस्त संतुलन, फुर्ती और कौशल का प्रदर्शन होता है। राष्ट्रपति की उप प्रेस सचिव नाविका गुप्ता ने सोमवार को कहा, "भारत की आजादी की 80वीं सालगिरह पर, 15 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन में स्वतंत्रता दिवस का रिसेप्शन आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण की देखभाल की उसकी स्थायी परंपराओं के जश्न के तौर पर आयोजित किया जा रहा है।" उन्होंने कहा कि इस साल का मुख्य विषय महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और गोवा राज्यों की पर्यावरण के अनुकूल जीवन-शैली और जीवित कला परंपराओं पर केंद्रित है, जो समुदायों, संस्कृति और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है। गुप्ता ने कहा, "रिसेप्शन के दौरान चार राज्यों के लगभग 35 कलाकार कई तरह के लोक-नृत्य और पारंपरिक संगीत प्रस्तुत करेंगे।"
- देहरादून. दुनिया की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक कांवड़ यात्रा में इस वर्ष श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ी है जहां सोमवार शाम तक करीब 4.43 करोड़ कांवड़िए हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने घरों को लौट चुके हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अकेले सोमवार को 63.60 लाख कांवड़ियों ने हरिद्वार पहुंचकर गंगा जल लिया।सावन माह की शुरूआत के साथ 30 जुलाई को इस वर्ष की कांवड़ यात्रा की शुरूआत हुई थी और इसका समापन 11 अगस्त को होगा। हर साल करीब 15 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से शिवभक्त हरिद्वार पहुंचते हैं और गंगाजल लेकर अपने-अपने घरों को लौटते हैं जहां शिवरात्रि के दिन वे शिवालयों में भगवान शिव का गंगा जल से अभिषेक करते हैं। कांवड़िए पैदल यात्रा करते हुए सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करते हैं और पवित्र जल को सजाई गई कांवड़ में लेकर जाते हैं। यात्रा के विशाल स्वरूप को देखते हुए उत्तराखंड प्रशासन और पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए हैं। कांवड़ मार्गों पर सुरक्षा, चिकित्सा, पेयजल, विश्राम स्थलों और यातायात प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की गई है। हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में कांवड़ियों की आवाजाही को सामान्य यातायात से अलग रखने के लिए बड़े पैमाने पर यातायात के मार्ग में परिवर्तन और प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
- कोलकाता. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उन्हें पिछले कुछ महीनों में कई धमकी भरे पत्र मिले हैं, जिनमें से एक पत्र में उन्हें और उनकी पत्नी डोना गांगुली को जान से मारने की चेतावनी दी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने यह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है कि ये पत्र किसने भेजे थे।अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (सीएबी) के अध्यक्ष गांगुली की ओर से दक्षिण कोलकाता के ठाकुरपुकुर पुलिस थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। यह कदम सोमवार को गांगुली के कार्यालय में एक नया धमकी भरा पत्र मिलने के बाद उठाया गया। ये पत्र कथित तौर पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष के नाम पर पिछले छह महीनों से आ रहे थे, लेकिन शुरुआत में इन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया था। पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी के मैनेजर द्वारा दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत के अनुसार, सोमवार को उनके कार्यालय में दो पत्र मिले, जिनमें गांगुली और उनकी पत्नी को जान से मारने तथा उनके करीबी लोगों को नुकसान पहुंचाने की सीधी धमकी दी गई थी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ता पत्रों की सामग्री की समीक्षा कर रहे हैं और भेजने वाले की पहचान तथा उसके मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि ये पत्र कथित तौर पर उत्तर 24 परगना जिले के बेलघरिया के एक व्यक्ति द्वारा कूरियर सेवा के जरिए भेजे गए हैं।
- नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 16 मुकदमे लंबित होने और लौटकर नहीं आने की दलीलों को दरकिनार करते हुए सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को आंखों के उपचार के वास्ते तीन हफ्ते के लिए विदेश जाने की अनुमति दे दी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने टिप्पणी की कि हर व्यक्ति को अपने इलाज के लिए चिकित्सक को चुनने का अधिकार है। साथ ही बनर्जी को निर्देश दिया कि वह विदेश में ठहरने के स्थान सहित अपनी यात्रा का पूरा ब्योरा जांच एजेंसी को दें। तृणमूल सांसद ने कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा पांच अगस्त को दिये गए उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रखने के लिए पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि बनर्जी के खिलाफ 16 मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा, ''हमें आशंका है कि वह शायद वापस न लौटे।'' पीठ ने कहा, ''प्रत्येक व्यक्ति को विदेश जाने का अधिकार है। हर व्यक्ति को अपने इलाज के लिए चिकित्सक को चुनने का अधिकार है।'' बनर्जी का पक्ष रखने के लिए पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने राजू की दलीलों का विरोध किया और कहा कि तृणमूल नेता एक सांसद हैं और उनका परिवार भारत में है। उन्होंने कहा कि बनर्जी के खिलाफ अधिकतर मामले पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के बाद दर्ज किए गए हैं।अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि उन्हें बनर्जी के विदेश में इलाज कराने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन चिकित्सा जांच के बाद यह तय करना होगा कि उन्हें विदेश जाने की जरूरत है या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर बनर्जी चिकित्सा जांच कराने को तैयार नहीं हैं, तो उनके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि किसी बीमारी या स्थिति के लिए इलाज कराना कभी-कभी निजता के अधिकार का हिस्सा होता है।न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बनर्जी की अपील मंजूर कर ली और उन्हें तीन हफ्ते के लिए विदेश जाने की अनुमति दे दी। उच्च न्यायालय ने पांच अगस्त को बनर्जी की विदेश यात्रा की अनुमति संबंधी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने इस तथ्य पर संज्ञान लिया था कि वह अपनी चिकित्सा स्थिति की जांच के लिए अगले दिन सरकारी एसएसकेएम अस्पताल के चिकित्सा बोर्ड के समक्ष जाने को इच्छुक नहीं थे। उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर बनर्जी चिकित्सा बोर्ड के सामने पेश हुए होते, तो चिकित्सकों की राय के आधार पर अदालत यह तय कर सकता थी कि उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने की ज़रूरत है या नहीं। उच्चतम न्यायालय ने तीन अगस्त को कलकत्ता उच्च न्यायालय से कहा था कि वह विदेश यात्रा की अनुमति मांगने वाली बनर्जी की याचिका पर एक हफ्ते के भीतर सुनवाई करे।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि सरकार सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या शून्य पर लाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए अधिक दुर्घटनाओं वाले 100 जिलों की पहचान कर वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की संख्या आधी करना है। 'आईसीआईसीआई लोम्बार्ड' के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना और यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा, ''सड़क दुर्घटनाओं में मौतों को शून्य पर लाने के लिए काम किया जा रहा है। अधिक दुर्घटनाओं वाले 100 जिलों की पहचान की गई है और दुर्घटना संभावित स्थलों पर तत्काल सुधार के उपाय किए जा रहे हैं।'' सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में देश में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 5.3 प्रतिशत बढ़कर 5.13 लाख से अधिक हो गई। इन दुर्घटनाओं में 1,83,382 लोगों की मौत हुई, यानी औसतन हर घंटे 21 लोगों की जान गई। इस दौरान देश में हर घंटे औसतन 59 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। गडकरी ने कहा कि वर्ष 2026 की पहली छमाही में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस विभागों ने देशभर में 2,85,770 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मौतें दोपहिया वाहनों से जुड़े मामलों में हुईं। इसके बाद कार, टैक्सी, वैन और अन्य हल्के मोटर वाहनों तथा ट्रकों का स्थान रहा। गडकरी ने कहा कि यदि दोपहिया वाहन चालक हेलमेट पहनना सुनिश्चित करें तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि सड़क उपयोगकर्ताओं की श्रेणी में कुल मौतों में दोपहिया वाहन चालकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 46.2 प्रतिशत रही। इसके बाद पैदल यात्रियों की हिस्सेदारी 20.6 प्रतिशत और कार, टैक्सी, वैन तथा अन्य हल्के मोटर वाहनों में यात्रा करने वालों की 12.4 प्रतिशत रही। गडकरी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं से देश को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग तीन प्रतिशत आर्थिक नुकसान होता है। इससे निपटने के लिए सड़क अभियांत्रिकी, सुरक्षित वाहन निर्माण और यातायात नियमों के कड़े अनुपालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने सड़क परिवहन मंत्री का पद संभाला था तब भारतीय वाहन उद्योग का आकार 14 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अमेरिका का वाहन उद्योग 78 लाख करोड़ रुपये, चीन का 47 लाख करोड़ रुपये और भारत का 22 लाख करोड़ रुपये का है। गडकरी ने कहा कि देश में वाहन उद्योग ने अब तक 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार दिया है और यह माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में केंद्र और राज्य सरकारों को सबसे अधिक राजस्व देने वाले क्षेत्रों में शामिल है।
- नयी दिल्ली. इतिहास में दस अगस्त का दिन कई घटनाओं के साथ दर्ज है। इनमें एक दिलचस्प घटना यह है कि बच्चों का चहेता आभासी चरित्र स्पाइडरमैन पहली बार कॉमिक बुक में नजर आया। इसे बच्चों ने इतना पसंद किया कि बाद में यह कार्टून और फिर फिल्मों के पर्दे पर भी नजर आया। गरीबों और मजलूमों का मसीहा स्पाइडरमैन लंबे वक्त तक दुनियाभर में बच्चों का पसंदीदा चरित्र रहा। देश-दुनिया के इतिहास में दस अगस्त की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:- 1809 : इक्वाडोर को स्पेन से आजादी मिली।1822 : सीरिया में विनाशकारी भूकंप से 20 हजार लोगों की मौत।1831: कैरेबियाई द्वीप समूह बारबाडोस में चक्रवाती तूफान से डेढ़ हजार लोगों की मौत।1894 : देश के चौथे राष्ट्रपति वी वी गिरि का जन्म।1966 : अमेरिका ने अंतरिक्ष में रॉकेट उतारने की लिए उपयुक्त स्थान का चित्र लेने पहला अंतरिक्ष यान भेजा। 1962 : आज ही के दिन बच्चों का चहेता स्पाइडरमैन कॉमिक बुक अमेजिंग फैंटेसी में नजर आया।1979 : उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 प्रक्षेपित।2000 : पड़ोसी देश श्रीलंका में सिरिमावो भंडारनायके का प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा, आर. विक्रमनायके नये प्रधानमंत्री नियुक्त। 2000 : आत्मनिर्णय के अधिकार पर जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।2001 : रूस ने अमेरिकी प्रक्षेपास्त्र प्रणाली को सशर्त समर्थन दिया।2004 : संयुक्त राष्ट्र और सूडान के बीच दारफुर कार्ययोजना पर हस्ताक्षर।2006 : तमिल विद्रोहियों पर फ़ौजी कार्रवाई में श्रीलंका में 50 नागरिक मारे गये।2008 : चेन्नई के एक लैब में एंटी एड्स वैक्सीन का सफल परीक्षण किया गया।2022: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा नीत राजग से नाता तोड़कर प्रदेश में 'महागठबंधन' की सरकार के गठन के तहत मुख्यमंत्री के तौर पर रिकॉर्ड आठवीं बार शपथ ली। 2024: गाजा के एक स्कूल में इजराइली हवाई हमले में कम से कम 80 लोगों की मौत।2025: तुर्किये में 6.1 तीव्रता का भूकंप, कई इमारतें ढही गईं।
- नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को लोगों से अपील की कि वे अपने घरों, प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर राष्ट्रध्वज फहराकर बड़ी संख्या में 'हर घर तिरंगा' अभियान में शामिल हों। पार्टी ने कहा कि यह पहल देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करेगी। भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अलग-अलग पोस्ट के माध्यम से लोगों से नौ से 17 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान में भाग लेने और तिरंगे को हर घर व हर दिल का हिस्सा बनाने की अपील की। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि तिरंगा भारत के गौरव, एकता और आजादी के लिए दिए गए बलिदानों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह हर भारतीय को देश की सेवा में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करता है।नवीन ने कहा, "तिरंगा हमारे गौरव, एकता और आजादी के लिए दिए गए बलिदानों का प्रतीक है, जो हर भारतीय को देश की सेवा में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करता है।" उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में 'हर घर तिरंगा' अभियान हर व्यक्ति में देशभक्ति की भावना जगाने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है।" केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने लोगों से अपील की कि वे तिरंगे को हर घर और हर दिल का हिस्सा बनाएं।उन्होंने कहा, "इस स्वतंत्रता दिवस पर आइए, हम तिरंगे को हर घर और हर दिल का हिस्सा बनाएं। 'हर घर तिरंगा' अभियान से जुड़ें, अपने घर पर तिरंगा फहराएं।" केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि तिरंगा भारत के गौरव व वैभव का प्रतीक बनना चाहिए और हर घर की पहचान होना चाहिए। गोयल ने कहा, "हर घर तिरंगा, हर दिल तिरंगा... आइए, राष्ट्रगीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर 'हर घर तिरंगा 2026' अभियान से जुड़ें और देशभक्ति के इस उत्सव का जश्न मनाएं।" भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने लोगों से अपील की कि वे 9 से 17 अगस्त तक चलाए जा रहे 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत अपने घरों, प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराएं। उन्होंने कहा, "इसके साथ सेल्फी लें और हर घर तिरंगा की वेबसाइट पर अपलोड करें।
- नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक राहुल नवीन का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है और यह 13 अगस्त से प्रभावी होगा। एक सरकारी आदेश में यह जानकारी दी गई। भारतीय राजस्व सेवा के आयकर कैडर के 1993 बैच के अधिकारी नवीन(59)धनशोधन रोधी संघीय एजेंसी का 14 अगस्त 2024 से पूर्णकालिक निदेशक के तौर पर कार्य कर रहे हैं। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी)ने शनिवार को जारी आदेश में नवीन के ईडी के निदेशक के तौर पर कार्यकाल को 13 अगस्त 2026 से एक साल यानी 13 अगस्त, 2027 तक बढ़ाने की मंज़ूरी दी। इसमें उनके सेवानिवृत्ति की तारीख (31 जुलाई, 2027) के बाद भी सेवा का विस्तार शामिल है, या फिर अगले आदेश तक इनमें से जो भी पहले हो का विस्तार भी शामिल है। नियमों के अनुसार, किसी अधिकारी को दो साल के कार्यकाल के लिए ईडी का निदेशक नियुक्त किया जा सकता है, जिसके बाद उन्हें एक-एक साल के लिए तीन बार सेवा विस्तार दिया जा सकता है। सितंबर 2023 में, नवीन को एजेंसी का कार्यवाहक निदेशक बनाया गया था।नवीन के कार्यकाल के दौरान, ईडी ने कई चर्चित मामलों की जांच शुरू कीं, जिनमें राजनीतिक परामर्श कंपनी आई-पैक, रिलायंस अनिल अंबानी समूह और कई ऑनलाइन मनी गेमिंग कंपनियों से जुड़ी जांच शामिल हैं। उनके कार्यकाल में ईडी ने घर खरीदारों के साथ रियल एस्टेट की बड़ी कंपनियों द्वारा की गई धोखाधड़ी के कई मामलों पर संज्ञान लिया है। एजेंसी ने धनशोधन रोधी कानून के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करके पीड़ितों को करोड़ों रुपये की संपत्ति वापस दिलाई। नवीन ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-कानपुर से बीटेक और एमटेक और मेलबर्न की स्विनबर्न यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी से एमबीए किया है। उन्होंने प्रत्यक्ष कर से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कराधान और अंतरण प्रक्रिया के कई मुद्दों पर किताबें और पत्रिकाओं में लेख भी लिखे हैं।
- अयोध्या. राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति ने आगामी सावन झूला उत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। इसके तहत दर्शन का समय बढ़ाने, संतों के लिए विशेष व्यवस्था करने और पुजारियों की वेशभूषा में बदलाव समेत कई निर्णय लिए गए हैं। समिति के सदस्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने रविवार को बताया कि शृंगार आरती के बाद रामलला और उनके तीनों भाइयों को झूले पर विराजमान किया जाएगा। श्रद्धालुओं को पूरे दिन दर्शन की अनुमति होगी, हालांकि दोपहर के भोग के समय कुछ देर के लिए दर्शन बंद रहेगा। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त से 28 अगस्त तक प्रतिदिन शाम को दो से तीन घंटे के लिए विशेष झूलनोत्सव और दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद रामलला की छोटी प्रतिमा को पालकी में विराजमान कर पारंपरिक उत्सव के लिए कुबेर टीला ले जाया जाएगा और बाद में वापस मंदिर लाया जाएगा। समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि पुजारी रामानंद परंपरा के अनुसार वेशभूषा और श्रृंगार का पालन करेंगे। शरण ने बताया कि उत्सव के दौरान प्रतिदिन भगवान को पूरी, सब्जी, खीर और मालपुआ का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संतों और साधु-संतों के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए उन्हें एक दिन पहले अपनी जानकारी देनी होगी। उन्होंने बताया कि अयोध्या के निवासियों और संतों के लिए नियमित दर्शन पास भी जारी किए जाएंगे और दर्शन की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। राम मंदिर परिसर में हुई इस बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि, ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के प्रतिनिधि कमल नयन दास, ट्रस्टी जिनेंद्र दास, विश्व प्रसन्न तीर्थ, रामानंद दास, धार्मिक समिति के सदस्य डॉ. मिथिलेश नंदिनी शरण और समिति के अन्य सदस्य शामिल हुए।
- माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से पैदल लौट रहे बागपत के दो भाईबागपत. उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के चिरचिटा गांव के दो भाई हरिद्वार से करीब 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर वापस लौट रहे हैं। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। माता-पिता के प्रति सेवा और सम्मान के इस अनोखे भाव को देखकर लोग और राहगीर दोनों भाइयों की सराहना कर रहे हैं और उन्हें 'कलयुग का श्रवण कुमार' बता रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, चिरचिटा गांव निवासी संजीव कुमार और अनिल कुमार हरिद्वार गए थे। वहां उन्होंने हर की पौड़ी से गंगाजल लिया और कांवड़ की दोनों टोकरियों में अपने पिता वेदराम और मां राजेंद्र को बैठाकर बागपत के लिए पैदल यात्रा शुरू की। दोनों भाई बारी-बारी से अपने कंधों पर कांवड़ उठाकर करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं। रास्ते में श्रद्धालु उनकी कांवड़ को देखकर रुक जाते हैं और दोनों भाइयों की सेवा भावना की प्रशंसा करते हैं। दोनों भाइयों ने कहा, ''हमने भगवान से कोई विशेष वरदान नहीं मांगा है। हमारे लिए माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा कर्तव्य और तीर्थ यात्रा है।'' उन्होंने कहा कि जीवन में सच्चा आशीर्वाद माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा करने से मिलता है।दोनों भाइयों ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा करना बेहद जरूरी है।
- गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर नगर निगम (जीएमसी) ने आवारा व बेसहारा कुत्तों की 'माइक्रोचिपिंग' के लिए एजेंसी के चयन को लेकर चौथी बार निविदा जारी की है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। पिछले छह महीनों में तीन बार निविदा जारी करने के बावजूद किसी कंपनी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई थी। नगर निकाय को उम्मीद है कि इस परियोजना के लिए 14 अगस्त तक एजेंसी का चयन कर लिया जाएगा।यह परियोजना पशु प्रबंधन और कल्याण से संबंधित उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में शुरू की जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रत्येक आवारा कुत्ते के शरीर में एक माइक्रोचिप लगाई जाएगी, जिसमें एक विशिष्ट पहचान संख्या होगी। निकाय ने बताया कि यह चिप एक डिजिटल डेटाबेस से जुड़ी होगी, जिसमें कुत्ते की नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण, स्वास्थ्य स्थिति और व्यवहार संबंधी इतिहास की जानकारी दर्ज होगी। अधिकारियों ने बताया कि इस डेटाबेस से नगर निगम को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन कुत्तों की नसबंदी या टीकाकरण पहले ही हो चुका है। उन्होंने बताया कि इससे एक ही प्रक्रिया दोबारा किए जाने से बचा जा सकेगा और पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रमों की निगरानी बेहतर होगी। अधिकारियों के मुताबिक, इसमें कुत्तों के आक्रामक व्यवहार से जुड़ी घटनाओं का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा और इससे अधिकारियों को उन इलाकों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां कुत्तों के हमले अधिक होते हैं तथा वहां लक्षित उपाय किए जा सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रणाली से नगर निगम को टीकाकरण, उपचार, भोजन उपलब्ध कराने और आश्रय गृहों के प्रबंधन की योजना बनाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि माइक्रोचिप के रिकॉर्ड के जरिए उन पालतू कुत्तों के मालिकों का भी पता लगाया जा सकेगा, जिन्हें सड़क पर छोड़ दिया गया है। नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी रॉबिन चंद्रा ने बताया कि डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली से आवारा कुत्तों के स्वास्थ्य, संख्या और व्यवहार का व्यापक रिकॉर्ड रखा जा सकेगा, जिससे उनका प्रबंधन अधिक व्यवस्थित अधिक प्रभावी हो जाएगा।
- हरदा .मध्यप्रदेश के हरदा रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी के दौरान रविवार को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के एक कॉन्स्टेबल की कथित तौर पर प्लेटफार्म पर फिसलने के बाद ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी यह जानकारी दी। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) चौकी प्रभारी कमलेश सिंह रघुवंशी ने बताया कि आरपीएफ का कॉन्स्टेबल लोकेश कुमार (30) प्लेटफार्म क्रमांक संख्या-दो पर तैनात था तभी यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि कुमार का अचानक से प्लेटफार्म पर पैर फिसल गया और वह वहां से गुजर रही रेलगाड़ी (20103 संत कबीर धाम एक्सप्रेस) की चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। रघुवंशी ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी है और शव को जिला अस्पताल की शवगृह में रखवा दिया गया है। उन्होंने कहा कि मृतक के परिजनों के आने पर शव का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। जीआरपी के मुताबिक मृतक लोकेश कुमार राजस्थान के भरतपुर जिले के रहने वाले थे और वे हरदा में पिछले तीन वर्षों से पदस्थ थे।



























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