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रांची. नक्सल-विरोधी अभियानों में एक बड़ी कामयाबी के तहत प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को झारखंड के धनबाद ज़िले से गिरफ़्तार किया गया है। उस पर 2.2 करोड़ रुपये से ज़्यादा का इनाम था। झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा ने बुधवार को बताया कि बेसरा पर 2.20 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम था और वह 175 मामलों में वांछित था। डीजीपी ने दावा किया कि देश के सबसे वांछित नक्सली की गिरफ्तारी के साथ राज्य में नक्सलवाद का ''लगभग खात्मा हो गया है।'' उन्होंने बताया कि बेसरा (65) को मंगलवार शाम 'ऑपरेशन दौड़ा पहाड़' के दौरान धनबाद जिले के बरवाअड्डा थानाक्षेत्र के मनियाडीह इलाके से गिरफ्तार किया गया। गिरिडीह जिले के मदनाडीह गांव का निवासी बेसरा ''प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) का एकमात्र सक्रिय शीर्ष स्तरीय पोलित ब्यूरो सदस्य था।'' पुलिस अधिकारी ने बताया, "इस शीर्ष माओवादी पर झारखंड और ओडिशा सरकारों की ओर से कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वह झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में दर्ज 175 मामलों में वांछित था।" डीजीपी ने बताया कि अभियान के दौरान दो अन्य नक्सलियों-15 लाख रुपये का इनामी मेहनत उर्फ मोछू और गौरव को भी गिरफ्तार किया गया। उनके अनुसार, तीनों कुल 320 आपराधिक मामलों में वांछित थे। पुलिस के अनुसार, सागर दा और भास्कर दा के नाम से भी जाना जाने वाला बेसरा वर्ष 1980 में प्रतिबंधित संगठन में शामिल होकर 2003 में उसकी केंद्रीय कमेटी का सदस्य बना था। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बेसरा ने झारखंड और पड़ोसी राज्यों में माओवादी नेटवर्क के विस्तार में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने बताया कि उसने राज्य में सशस्त्र दस्तों के गठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। झारखंड पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) नरेंद्र सिंह ने कहा कि गिरफ्तार किए गए तीनों नक्सली कई बड़े हमलों में शामिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इनमें 2005 में जहानाबाद जेल से भागने का मामला, कई बैंक डकैती, बड़े पैमाने पर हथियार और गोला-बारूद की लूट तथा कई आईईडी विस्फोट शामिल हैं। उन्होंने कहा, "ये सुरक्षा बलों के 100 से अधिक जवानों की मौत के लिए जिम्मेदार थे।"
सिंह ने बताया कि इन तीनों ने वर्ष 2001 में दो महीने के भीतर 25 सुरक्षाकर्मियों की हत्या की थी। उन्होंने बताया कि इनमें उसी वर्ष सितंबर में हजारीबाग जिले के चर्चू थाना क्षेत्र के ओरिया-हरली जंगल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 12 जवानों की हत्या भी शामिल थी। सिंह ने बताया कि इन लोगों ने सुरक्षाकर्मियों से हथियार और गोला-बारूद भी लूट लिया था। उन्होंने बताया कि इसके बाद, अक्टूबर 2001 में इन तीनों ने टोपचांची प्रखंड में एक और हमला किया, जिसमें झारखंड आर्म्ड पुलिस (जेएपी) के 13 जवानों की मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार, तीनों नक्सली पारसनाथ क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहे थे। सिंह ने कहा, "सुरक्षा बल पूरे क्षेत्र की तलाशी लेंगे और झारखंड में सक्रिय माने जा रहे शेष 15-20 नक्सलियों को पकड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाएंगे। इनमें तीन ऐसे नक्सली भी शामिल हैं, जिन पर नकद इनाम घोषित है। इनमें प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के केंद्रीय कमेटी सदस्य असीम मंडल शामिल है, जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम है। इसके अलावा सालुका कायम पर 10 लाख रुपये और मनोहर गंझू पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित है।" अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार तीनों माओवादियों के पास से तीन एके-47 राइफल, आठ मैगजीन और 288 कारतूस बरामद किए हैं। अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा धनबाद जिले से उनके दो सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, राज्य में पिछले तीन महीनों के दौरान कुल 44 नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण किया है, जबकि सात नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी पर उसके भाई देवलाल बेसरा ने कहा कि परिवार को मंगलवार रात करीब 10 से 11 बजे के बीच धनबाद और गिरिडीह की सीमा क्षेत्र से उसकी गिरफ्तारी की जानकारी मिली। उसने कहा, "वह 1986-87 के बाद कभी घर नहीं आया। हमारा एक भतीजा है। हमारी एक भतीजी भी थी, लेकिन उसका निधन हो गया। हमने कई बार उससे मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी।" ये गिरफ्तारियां झारखंड पुलिस के समक्ष 16 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के कुछ घंटे बाद हुईं। आत्मसमर्पण करने वालों में छह ऐसे नक्सली शामिल थे, जिन पर कुल 39 लाख रुपये का इनाम था। आत्मसमर्पण करने वालों में संतोष महतो उर्फ वासुदेव दा उर्फ दिलीप भी शामिल था, जिस पर 15 लाख रुपये का इनाम था और वह 128 मामलों में वांछित था। पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में दो उप-क्षेत्रीय कमेटी सदस्य और दो क्षेत्रीय कमेटी के पदाधिकारी शामिल हैं। इस ताजा अभियान को नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार के अभियान में एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। इस साल की शुरुआत में पश्चिमी सिंहभूम जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में नक्सली अनल उर्फ पतिराम मांझी समेत 16 माओवादी मारे गए थे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उस अभियान को क्षेत्र को नक्सलवाद मुक्त बनाने के अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया था और बचे हुए नक्सलियों से हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी।
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-छात्रों की चिंताएं दूर करने के निर्देश दिये
नयी दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 2026 की काउंसलिंग के लिए की गई तैयारियों का बुधवार को जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अभ्यर्थियों की चिंताओं को दूर करने के लिए सक्रिय कदम उठाएं और पारदर्शी, निष्पक्ष एवं मेधा-आधारित दाखिला प्रक्रिया सुनिश्चित करें। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) के अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) और उसके अंतर्गत आने वाली अन्य सीट पर काउंसलिंग की तैयारियों की समीक्षा करते हुए नड्डा ने अभ्यर्थियों के लिए सुगम प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को मजबूत तकनीकी सहायता व्यवस्था बनाए रखने और शिकायतों का तुरंत समाधान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।नड्डा ने प्रवेश प्रक्रिया के दौरान काउंसलिंग पोर्टल का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि समीक्षा बैठक के दौरान नड्डा ने काउंसलिंग कार्यक्रम, आईटी ढांचे, साइबर सुरक्षा तैयारियों, शिकायत निवारण व्यवस्था, अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए किए गए उपायों और हिस्सा लेने वाले संस्थानों के साथ समन्वय का जायजा लिया। बयान के मुताबिक, अधिकारियों ने नड्डा को बताया कि नीट-यूजी काउंसलिंग में प्रौद्योगिकी आधारित और छात्र-केंद्रित कई बड़े सुधार किए गए हैं, जिनका मकसद दाखिला प्रक्रिया को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और आसान पहुंच सुनिश्चित करना है। बयान में कहा गया है कि एक बार की भौतिक रिपोर्टिंग व्यवस्था की शुरुआत एक प्रमुख सुधार है, जिससे अभ्यर्थियों को बार-बार संस्थानों के चक्कर लगाने की जरूरत काफी कम हो जाएगी। इसमें बताया गया है कि सीट आवंटन के बाद अभ्यर्थी या तो आवंटित सीट को 'फ्रीज' कर सकते हैं या फिर बेहतर सीट पाने के लिए 'फ्लोट' विकल्प चुन सकते हैं। बयान के अनुसार, 'फ्रीज' विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थियों को तय समयसीमा के भीतर अपने आवंटित संस्थान में व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट करना होगा, जहां उन्हें मूल दस्तावेजों के सत्यापन और प्रवेश शुल्क जमा करने सहित दाखिले से जुड़ी अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इसमें कहा गया है कि बेहतर सीट के लिए अगले दौर की काउंसलिंग में शामिल होने की खातिर 'फ्लोट' विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थी तय समयसीमा के भीतर ऑनलाइन माध्यम से दस्तावेज सत्यापन समेत प्रवेश से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कर सकेंगे। बयान में कहा गया है कि इस अवधि के दौरान अभ्यर्थियों को आवंटित संस्थान में व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट करने, मूल दस्तावेज जमा करने या प्रवेश शुल्क भरने की जरूरत नहीं होगी। इसमें कहा गया है कि अगले दौर की काउंसलिंग में शामिल होने के दौरान उनका अस्थायी प्रवेश मान्य रहेगा। बयान के मुताबिक, सीट अपग्रेड करने की सुविधा काउंसलिंग के तीसरे दौर तक उपलब्ध रहेगी। इसमें कहा गया है कि तीसरे दौर के पूरा होने के बाद जिन अभ्यर्थियों को सीट आवंटित हो चुकी होगी, उन्हें मूल दस्तावेजों के सत्यापन, प्रवेश शुल्क जमा करने और संस्थान से जुड़ी अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अपने संबंधित संस्थानों में व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट करना होगा। बयान के अनुसार, संशोधित ढांचे के तहत संस्थान में एक बार रिपोर्टिंग, मूल दस्तावेजों के एक बार सत्यापन और प्रवेश शुल्क एक बार जमा करने की व्यवस्था की गई है, जिससे अनावश्यक यात्रा की जरूरत नहीं पड़ेगी, दाखिले की प्रक्रिया सरल बनेगी और अभ्यर्थियों को आसानी होगी। बयान में कहा गया है कि इस साल नीट-यूजी काउंसलिंग में ऑनलाइन सीट छोड़ने की सुविधा भी प्रदान की गई है। इसमें कहा गया है कि मान्य काउंसलिंग नियमों और तय समयसीमा के तहत जिन अभ्यर्थियों को अपनी आवंटित सीट छोड़नी होगी, वे अब एमसीसी काउंसलिंग पोर्टल के जरिये ऑनलाइन ऐसा कर सकेंगे। बयान के मुताबिक, सीट छोड़ने के लिए अभ्यर्थियों को आवंटित संस्थान में व्यक्तिगत रूप से जाने की जरूरत नहीं होगी, जब तक कि सूचना पुस्तिका में कोई अलग निर्देश न दिया गया हो या एमसीसी की ओर से अलग से कोई सूचना जारी न की गई हो।
बयान में कहा गया है कि अधिकारियों ने पारदर्शिता और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए किए गए उपायों की भी जानकारी दी, जिनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से प्राप्त अभ्यर्थियों के पहले से भरे हुए डेटा का इस्तेमाल, ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की ओर से सीट मैट्रिक्स की पुष्टि और हिस्सा लेने वाले संस्थानों द्वारा सत्यापन जैसे कदम शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। बयान में कहा गया है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में ज्यादा सुलभता, पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए देशभर में निर्धारित मूल्यांकन केंद्रों की संख्या 16 से बढ़ाकर 61 कर दी गई है। इसमें कहा गया है कि एनएमसी की ओर से 27 जुलाई को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित मेडिकल बोर्ड की ओर से जारी किए जाने वाले प्रमाण-पत्र को अब 'पात्रता प्रमाण-पत्र' के नाम से जाना जाएगा। यह कदम अभ्यर्थी की दक्षता के आकलन के आधार पर एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए उसकी पात्रता तय करने के उद्देश्य को दर्शाता है। बयान में कहा गया है कि नये दिशा-निर्देशों में अपीलीय दिव्यांगता मूल्यांकन बोर्ड का भी प्रावधान किया गया है, जिसमें पात्र अभ्यर्थी प्रारंभिक दिव्यांगता मूल्यांकन बोर्ड के आकलन के खिलाफ अपील कर सकेंगे। इसमें कहा गया है कि एक और अहम सुधार अनिवासी भारतीय (एनआरआई) श्रेणी के तहत दाखिला प्रक्रिया का पूरी तरह से डिजिटलीकरण है। बयान के अनुसार, एनआरआई अभ्यर्थियों के लिए पंजीकरण अब तय पात्रता मानदंडों के अनुसार पूरी तरह से ऑनलाइन काउंसलिंग पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। इसमें कहा गया है कि अभ्यर्थी सभी जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड कर सकेंगे, जबकि पहले ये दस्तावेज ईमेल के जरिये जमा किए जाते थे। बयान में कहा गया है कि अपलोड किए गए दस्तावेजों की जांच तय अधिकारी करेंगे, जिससे जांच प्रक्रिया पारदर्शी, कुशल और समयबद्ध बन सकेगी। इसमें कहा गया है कि नड्डा को यह भी बताया गया कि नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की गई है। बयान के अनुसार, पूरे देश में काउंसलिंग प्रक्रिया को एक समान रूप से लागू करने के लिए दिव्यांगता मूल्यांकन बोर्ड, कॉलेज नोडल अधिकारियों और दस्तावेज सत्यापन अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि अभ्यर्थियों की मदद के लिए चौबीसों घंटे चलने वाली टोल-फ्री हेल्पलाइन (1800-102-7637) शुरू की गई है। बयान में कहा गया है कि काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों की मदद के लिए अलग-अलग मंचों के जरिये दो भाषाओं में जानकारी, अक्सर पूछे जाने वाले सवाल के जवाब और मार्गदर्शक वीडियो भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसमें कहा गया है कि अभ्यर्थियों की चिंताओं के तुरंत समाधान के लिए ईमेल-आधारित शिकायत निवारण प्रणाली भी बनाई गई है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 अगस्त को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की देशव्यापी शुरुआत करेंगे। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूक करना और उन्हें ‘नशा मुक्त भारत’ तथा ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प से जोड़ना है।
अभियान की खास बातें:– MY Bharat के युवा स्वयंसेवक इस अभियान का नेतृत्व करेंगे।– 2 अगस्त को पूरे देश में 10,000 स्थानों पर एक साथ कार्यक्रम आयोजित होंगे।– एक करोड़ से ज्यादा युवा नशा मुक्ति की शपथ लेंगे।– NSS, युवा क्लब, स्कूल-कॉलेज, NGOs, औद्योगिक संघ और 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठन इसमें शामिल होंगे।यह अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं बल्कि 100 हफ्तों (लगभग 2 साल) तक चलने वाला जन-आंदोलन होगा। हर रविवार को खेल-कूद, वॉकथॉन, ध्यान सत्र, नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले स्वयंसेवकों और संगठनों को 50वें, 75वें और 100वें सप्ताह पर सम्मानित किया जाएगा।प्रधानमंत्री मोदी के ‘नशा मुक्त भारत’ के विजन को मजबूती देने वाला यह अभियान युवाओं की सकारात्मक ऊर्जा को राष्ट्र-निर्माण में लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। ( -
नई दिल्ली। सहकारिता आधारित डिजिटल मोबिलिटी प्लेटफॉर्म भारत टैक्सी से 19 जुलाई 2026 तक देशभर में 7.97 लाख सारथी (ड्राइवर-सदस्य) जुड़ चुके हैं। सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) के तहत संचालित इस प्लेटफॉर्म का आधिकारिक शुभारंभ दिल्ली-एनसीआर, गुजरात और महाराष्ट्र में किया गया है। यह जानकारी केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। सरकार के अनुसार, भारत टैक्सी प्लेटफॉर्म से जुड़े 7.97 लाख सारथियों में सबसे अधिक 2.55 लाख दिल्ली-एनसीआर में पंजीकृत हैं। इसके अलावा गुजरात में 1.01 लाख और महाराष्ट्र में 71,095 सारथी प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) ने बताया कि भारत टैक्सी की सेवाओं का अन्य शहरों और राज्यों में विस्तार परिचालन तैयारियों तथा आवश्यक सरकारी अनुमोदनों के आधार पर किया जाएगा। इसमें सारथियों की उपलब्धता, वैधानिक आवश्यकताओं की पूर्ति और राज्य सरकारों, सहकारी संस्थाओं तथा अन्य हितधारकों के साथ समन्वय को ध्यान में रखा जाएगा।
भारत टैक्सी शून्य-कमीशन मॉडल पर संचालित होती है। प्लेटफॉर्म के जरिए बुक की गई राइड पर ड्राइवर की कमाई में से कोई कमीशन नहीं काटा जाता। तकनीकी सेवाओं, ऐप के रखरखाव और विस्तार के लिए सारथियों से अलग से मामूली राइड सब्सक्रिप्शन या प्लेटफॉर्म उपयोग शुल्क लिया जाता है। इससे ड्राइवर को मिलने वाले किराए पर कोई असर नहीं पड़ता।सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड के सदस्य बनने वाले सारथियों को बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 और समिति के उप-विधियों के तहत विभिन्न लाभ प्राप्त होते हैं। समिति अपने सदस्यों को कल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता तक पहुंच भी उपलब्ध कराती है। सारथियों को रियायती दरों पर स्वास्थ्य एवं व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, एसबीआई मुद्रा ऋण सहित संस्थागत ऋण तथा बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के माध्यम से वाहन वित्तपोषण की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग, ग्राहक सेवा, सड़क सुरक्षा और यात्री सुरक्षा से संबंधित समय-समय पर प्रशिक्षण एवं अभिविन्यास कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। -
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में बताया कि पिछले 10 वर्षों में ट्रेन दुर्घटनाओं में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2014-15 में 135 दुर्घटनाएं हुई थीं, जो 2025-26 में घटकर मात्र 16 रह गईं। चालू वित्तीय वर्ष में जून महीने तक केवल दो दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। मंत्री ने ‘कॉन्सिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स’ (प्रति मिलियन ट्रेन-किलोमीटर पर दुर्घटनाएं) का आंकड़ा देते हुए कहा कि यह 2014-15 में 0.11 से घटकर 2025-26 में 0.01 हो गया है, जो करीब 91 प्रतिशत की कमी दर्शाता है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षा संबंधी कार्यों पर व्यय लगातार बढ़ाया गया है। वर्ष 2013-14 में यह खर्च 39,200 करोड़ रुपये था, जो 2026-27 में बढ़कर 1,20,389 करोड़ रुपये हो गया है।लिए गए प्रमुख सुरक्षा उपाय– 6,671 स्टेशनों पर सेंट्रलाइज्ड इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ पूरी ट्रैक सर्किटिंग लागू।– 10,395 लेवल क्रॉसिंग गेट्स को इंटरलॉक किया गया।सभी लोकोमोटिव में विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस लगाए गए।– कोहरे वाले क्षेत्रों में लोको पायलटों को GPS-आधारित फॉग सेफ्टी डिवाइस उपलब्ध कराए गए।– अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (USFD) टेस्टिंग, लंबी रेल वेल्डिंग और बेहतर वेल्डिंग तकनीक अपनाई गई।– स्टाफ की नियमित ट्रेनिंग और निरीक्षण।रेल मंत्री ने कवच (देशी Automatic Train Protection System) के क्रियान्वयन का भी जिक्र किया, जो ट्रेन की गति नियंत्रित रखते हुए जरूरत पड़ने पर स्वचालित ब्रेकिंग सुनिश्चित करता है। सरकार का दावा है कि इन तकनीकी और संरचनात्मक उपायों के कारण भारतीय रेलवे अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो गई है। -
नई दिल्ली। लोकसभा में आज बुधवार को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ ध्वनिमत से पारित हो गया। साथ ही, विधेयक पर लंबी चर्चा के बाद सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष, विशेषकर लोकसभा में विपक्ष के नेता के रवैये पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर सार्थक सुझाव देने के बजाय विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है।
जितेंद्र सिंह ने कहा, “सबसे पहले विपक्ष का आचरण बेहद निराशाजनक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाने वाले इतने गंभीर और महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष राजनीति कर रहा है। विपक्ष के नेता ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह न केवल असंसदीय थी, बल्कि इतनी अनुचित थी कि मैं उसे दोहराना भी नहीं चाहूंगा। यदि कोई खुद को शिक्षित और संसदीय परंपराओं से परिचित मानता है, तो उसे पता होना चाहिए कि सदन के भीतर ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया जा सकता।”उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष के नेता द्वारा देश के युवाओं को “मूर्ख” कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, “इस देश के युवाओं को, जो देश का भविष्य हैं, ‘मूर्ख’ कहना इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है। मुझे आश्चर्य होता है कि क्या उन्हें संसदीय कार्यवाही के बुनियादी नियमों और मर्यादाओं की भी जानकारी है।”केंद्रीय मंत्री ने 21 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए विपक्ष के नेता पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “21 जुलाई को विपक्ष के नेता शायद किसी विशेष सोच के कारण प्रधानमंत्री के आवास 7 एलकेएम के बाहर जाकर बैठ गए। ऐसा लगा मानो उनकी गहरी इच्छा थी कि देश उन्हें चुने और 7 एलकेएम में बैठाए। जब यह इच्छा पूरी नहीं हुई तो वे निराश और हताश होकर वहां के गेट पर जाकर बैठ गए। जब उन्हें विनम्रता से समझाया गया कि ऐसा व्यवहार उनके पद और कद के अनुरूप नहीं है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें बस वहां से हटा दिया जाए।” सदन में उठाए गए एक अन्य मुद्दे पर जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिस घटना का उल्लेख किया जा रहा है, उसमें गोली नहीं चलाई गई थी, बल्कि केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा, “बार-बार स्पष्ट किया गया है कि कोई गोली नहीं चली। जब गोली चली ही नहीं, तो गोली चलाने के आदेश का सवाल ही नहीं उठता। इस तरह का आदेश देने का अधिकार मंत्री के पास नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट के पास होता है।” ( -
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधन रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ के पारित होने पर देशभर के छात्रों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने और युवाओं के सपनों व आकांक्षाओं की रक्षा के लिए सख्त कानूनी प्रावधान सुनिश्चित करता है।
अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि लोकसभा में इस महत्वपूर्ण विधेयक के पारित होने पर भारत के सभी छात्रों को बधाई। उन्होंने कहा कि यह कानून सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों और परीक्षा की पवित्रता भंग करने वालों के खिलाफ सबसे कठोर सजा का प्रावधान करता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह संशोधन विधेयक युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं की रक्षा के लिए लाया गया है। इसके जरिए सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को और मजबूत किया जाएगा।अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि मोदी सरकार छात्रों के भविष्य को खतरे में डालने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कानून की पूरी सख्ती से कार्रवाई की जाएगी और उन्हें कठोर दंड दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। सरकार का मानना है कि नए संशोधन के लागू होने से सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगेगी और ईमानदार अभ्यर्थियों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी। -
नई दिल्ली। काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रावण मास और कांवड़ की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने सावन में काशी विश्वनाथ धाम में लगभग 1 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई है।
विश्वभूषण मिश्रा ने कहा, “श्री काशी विश्वनाथ धाम में सावन के महीने में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। श्रद्धालुओं के स्वागत और सुरक्षा के साथ-साथ उनके दर्शन को सुगम और सुविधाजनक बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। हमारे स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के अनुसार, श्रद्धालुओं के लिए जिग-जैग कतार व्यवस्था, छायादार जगह, ग्लूकोज-पानी की सुविधा और बारिश से बचाव जैसे इंतजाम किए गए हैं।”विश्वभूषण मिश्रा ने आगे बताया कि सावन के पहले और प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालुओं पर फूल वर्षा की गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए सभी प्रकार के अनुरोध और प्रोटोकॉल दर्शन और काशी द्वार फिलहाल अभी प्रतिबंधित किया गया है। यह कदम भीड़ को देखते हुए उठाया गया है। अगर भीड़ कम होगी तो काशी द्वार का संचालन शुरू किया जाएगा।मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि काशी विश्वनाथ के सभी सोशल मीडिया हैंडल पर श्रद्धालु लाइव दर्शन कर सकेंगे। विगत वर्षों में यहां 1 करोड़ 65-70 लाख श्रद्धालु काशी विश्वनाथ में दर्शन-पूजन करने पहुंचते हैं। इस बार 80 लाख से 1 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, काशी धाम में पॉलीथिन पूरी तरह बैन है, जिसका स्थानीय लोग पूर्णतः पालन कर रहे हैं। इसलिए बाहर से आने वाले श्रद्धालु प्लास्टिक में कांवड़ का जल लेकर न आएं। वहीं, गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर वाराणसी में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंचे और आस्था की डुबकी लगाई। भक्तों ने गंगा स्नान के बाद पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठान किए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घाटों पर जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें तैनात रहीं। - नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को देश के शीर्ष नौकरशाहों से कहा कि वे शासन व्यवस्था में लोगों को केंद्र में रखें और यह सुनिश्चित करें कि हर नीति और निर्णय आम नागरिकों के हितों और आकांक्षाओं के अनुरूप हो। भारत सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आह्वान किया कि सरकार के भीतर सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें ताकि एकीकृत परिणाम हासिल किए जा सकें। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में प्रगति तेज करने के प्रयासों के तहत वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के भविष्य के कार्य एजेंडे की समीक्षा की। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "आज भारत सरकार के सचिवों के साथ बैठक में वित्त और अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। नागरिक केंद्रित शासन को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वदेशी तकनीक विकसित करने के तरीकों पर जोर दिया। साथ ही प्रमुख क्षेत्रों में युवा उद्यमियों की सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।" प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों और विभागों में टीम भावना के साथ काम करने की जरूरत पर जोर देते हुए अधिकारियों से साझा उद्देश्य के साथ काम करने का आग्रह किया। बयान में कहा गया कि मोदी ने नागरिक केंद्रित शासन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत के लोगों को हमेशा शासन के केंद्र में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हर नीति और निर्णय आम नागरिक के हितों और आकांक्षाओं से प्रेरित होना चाहिए।'' मोदी ने कहा कि भारत बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है, लेकिन इसके साथ स्वदेशी तकनीक विकसित करने को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी आत्मनिर्भरता और घरेलू क्षमताओं के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिकों के कल्याण से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि भारत को नवाचार, विविधीकरण और क्षमता विस्तार में तेजी लाकर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी। सुधारों पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि सुधार केवल एक चलन वाला शब्द नहीं है, बल्कि प्रभावी शासन के लिए लगातार जरूरी प्रक्रिया है। उन्होंने प्रक्रियाओं में सुधार, कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने और संस्थागत दक्षता मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डिजिटल प्रणालियों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देना होगा। प्रधानमंत्री ने उभरते साइबर खतरों के प्रति सतर्क रहने और साइबर सुरक्षा क्षेत्र में युवा नवप्रवर्तकों एवं उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। मोदी ने रणनीतिक क्षेत्रों में देश द्वारा की जा रही प्रमुख पहल को लेकर सक्रिय संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि भ्रामक सूचनाओं और निराधार आशंकाओं का मुकाबला किया जा सके। उन्होंने कहा कि उभरते और भविष्य के उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कार्यबल को तैयार करने के लिए उद्योगों के साथ मिलकर नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार को हमेशा युवा, गतिशील और भविष्य की ओर देखने वाली बनी रहना चाहिए तथा नयी चुनौतियों और अवसरों के अनुसार स्वयं को लगातार बदलते रहना चाहिए। बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों में प्रगति, प्राथमिकताओं और क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। इसमें कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों और विभागों के सचिव तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
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नयी दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले में मंगलवार को एक विशेष त्वरित अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि अदालत बुधवार को इस मामले पर सुनवाई कर सकती है।
जांच एजेंसी ने इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
सीबीआई प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ''सीबीआई ने इस आरोपपत्र में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 अहम सबूतों का जिक्र किया है। आरोपपत्र में नामजद सभी 13 आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं।'' प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने मेडिकल में प्रवेश के लिए तीन मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा को 12 मई को रद्द कर दिया था। इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई थी। -
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार फौजदारी कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' को औपचारिक रूप से परिभाषित करने और इसे कड़ी सजा वाला एक अलग अपराध घोषित करने पर विचार कर सकती है। 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर अपराध का व्यापक होता एक स्वरूप है, जिसमें ठग खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारियों, अदालत के कर्मचारियों या सरकारी एजेंसियों के पदाधिकारी बताकर ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ितों को डराते-धमकाते हैं। वे पीड़ितों को 'डिजिटल मंच पर एक तरह से बंधक बना लेते हैं और उन पर पैसे देने का दबाव डालते हैं। प्रधान न्याधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में ठोस सबूतों के आधार पर जब किसी आरोपी के खिलाफ अपराध में संलिप्तता की शुरुआती राय बन जाती है, तो उसकी संपत्ति को 'कुर्क' किया जा सकता है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' को पहले ही एक अपराध के तौर पर परिभाषित किया गया है। उन्होंने न्यायालय को सूचित किया कि प्रणाली की खामियों का पता लगाने के लिए एक अंतर-विभागीय समिति (आईडीसी)एक विस्तृत रिपोर्ट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। प्रधान न्यायाधीश कांत ने सुझाव दिया, ''शायद आपको फौजदारी कानूनों में 'डिजिटल गिरफ्तारी' को औपचारिक रूप से परिभाषित करने की आवश्यकता है । इसमें जबरन वसूली और डकैती के तत्व भी शामिल हैं। संभवतः, आपको इसे गंभीर परिणामों वाले एक अलग अपराध के रूप में परिभाषित करने की आवश्यकता है, साथ ही यह प्रावधान भी होना चाहिए कि यदि किसी आरोपी के खिलाफ कुछ पाया जाता है, तो उसकी संपत्ति को कुर्क किया जा सकता है।'' न्यायमूर्ति बागची ने 'डीपफेक' के खतरे की ओर भी ध्यान दिलाया और ऐसे उभरते हुए ऑनलाइन अपराधों को परिभाषित करने के लिए कानूनी हस्तक्षेप की आवश्यकता को रेखांकित किया। न्यायमूर्ति ने कहा, ''अब हमारे सामने 'डीपफेक' की चुनौती है। इसका इस्तेमाल धोखाधड़ी और प्रतिरूपण के लिए किया जा सकता है। आपके पास जो है उसी से लड़ना होगा, लेकिन आपको उसे तराशना भी होगा। अनुच्छेद 142 के तहत हम किसी अपराध को परिभाषित नहीं कर सकते।'' केंद्र का पक्ष रखने के लिए पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार 'डीपफेक' और 'डिजिटल अरेस्ट' से निपटने के लिए एक कानून पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, ''एक मसौदा विधेयक सामने आने वाला है। संभव है कि इसमें 'डिजिटल अरेस्ट', 'डीपफेक' और अन्य ऑनलाइन अपराधों से निपटने का प्रावधान हो।'' वेंकटरमणी ने पीठ को सूचित किया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) पहले से ही 10 करोड़ रुपये और उससे अधिक की साइबर धोखाधड़ी वाले करीब 20 बड़े मामलों की जांच कर रही है, जबकि बाकी मामलों की जांच राज्य पुलिस कर रही हैं। अटॉर्नी जनरल ने कई सुरक्षा उपायों का अनुरोध करते हुए कहा कि इस मामले में कुछ निर्देश आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि जैसे, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई)को यह निर्देश दिया जाए कि वह ' मानक परिचालन प्रक्रिया' (एसओपी)को औपचारिक रूप से अपनाए और लागू करे। इस एसओपी में यह बताया जाए कि साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध 'बैंक खातों' से पैसे की निकासी को कुछ समय के लिए रोकने के लिए बैंकों को क्या कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से शिकायत निवारण मापदंड और पैसे की वापसी के मापदंडों को तेजी से लागू करने, और साइबर-आधारित वित्तीय धोखाधड़ी के कारण बैंक खाते 'फ्रीज' करने से जुड़े मामलों का जल्द निस्तारण करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया। इस पर, पीठ ने कहा कि वह बुधवार को दिशानिर्देश जारी करेगी।
इससे पहले, गृह मंत्रालय ने 'डिजिटल अरेस्ट' के बढ़ते खतरे से निपटने के संबंध में न्यायालय को सूचित किया कि उसने प्रणाली की खामियों को दूर करने और साइबर अपराध के पीड़ितों को तुरंत सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च स्तरी अंतर विभागीय समिति (आईडीसी) गठित की है। -
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद अनुराग ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि परीक्षाओं में धांधली और प्रश्नपत्र लीक आतंकवाद और नक्सलवाद से भी बड़ी समस्या है और मोदी सरकार ही इसका खात्मा करेगी। उन्होंने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा में भाग लेते हुए यह भी कहा कि विपक्ष शासित राज्यों में पेपर लीक हो रहा है, लेकिन विपक्षी दल उनका उल्लेख नहीं करते। ठाकुर ने कहा, ''परीक्षा में धांधली और पेपर लीक किसी आतंकवाद और माओवाद से बड़ी समस्या है। युवाओं से कहना चाहता हूं कि इस मर्ज का इलाज भी मोदी सरकार की करेगी... मोदी सरकार ने आतंकवाद और नक्सलवाद को जड़ से खत्म किया और अब पेपर लीक को भी हम (सरकार) ही खत्म करेंगे।'' उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कि जब कांग्रेस नेता को लगा कि युवा उन्हें पूछ नहीं रहे हैं तो प्रधानमंत्री आवास के बाहर जाकर लेट गए। ठाकुर ने कहा, ''मैं राहुल गांधी जी की प्रधानमंत्री आवास जाने की तड़प समझ सकता हूं। अंदर जाने का मौका नहीं मिला तो बाहर ही लेट गए। आपको अंदर जाने का कभी मौका नहीं मिलेगा।'' अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आज युवाओं से सीधा जुड़े हुए हैं और युवा उनसे सीधे जुड़ते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता आज भी कायम है, इसलिए देश की जनता ने उन्हें तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाया है। ठाकुर ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा, ''वह मंद-मंद मुस्कुरा कर बोलती हैं और गुमराह करती हैं तथा अपनी पुरानी सरकारों पर पर्दा डालने का प्रयास करती हैं। उन्होंने कहा, ''प्रियंका जी ने एक शिक्षाविद् के बारे में कहा कि वह गौमूत्र विशेषज्ञ हैं। जिस पर दुनिया शोध कर रही है, कांग्रेस उसका मजाक बनाती है। कांग्रेस हमारी संस्कृति और वैज्ञानिकों को हमेशा मजाक बनाती है।'' ठाकुर ने कहा कि यह संशोधन कानून एक नजीर बनेगा। भाजपा सांसद ने कहा कि छात्रों के आंदोलन में शामिल असामाजिक तत्वों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेताओं को लेकर कुछ टिप्पणियां की, जिसको लेकर पार्टी सांसदों ने विरोध दर्ज कराया। ठाकुर ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार के दौरान राज्य का लोक सेवा आयोग एक जाति का आयोग बनकर रह गया था। उन्होंने दावा किया कि सपा नकल करने वालों की पक्षधर पार्टी है।
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नयी दिल्ली. सरकार ने मंगलवार को संसद में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के पास 880.52 मीट्रिक टन स्वर्ण भंडार है लेकिन उसे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है कि देश के 'धार्मिक स्थानों' या परिवारों के पास कितना सोना है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 26 जून, 2026 की स्थिति के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक के पास 880.52 मीट्रिक टन स्वर्ण भंडार था। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2025 को 879.58 मीट्रिक टन, 31 मार्च 2024 को 822.10 मीट्रिक टन स्वर्ण भंडार था। उनसे सवाल किया गया था कि भारतीय रिजर्व बैंक के पास वर्तमान में कितना स्वर्ण भण्डार है?
इसके साथ ही यह सवाल भी किया गया था कि क्या यह पता लगाने के लिए कोई अध्ययन कराया गया है कि देश में ''धार्मिक स्थानों'' और भारतीय परिवारों में कितना सोना जमा है? इस सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक, आर्थिक कार्य विभाग तथा सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा इस संबंध में कोई अध्ययन नहीं किया गया है। - नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ वास्तविक समय में ''फ्रॉड इंटेलिजेंस'' और अन्य जानकारी साझा करने के मकसद से ''इंडिया डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन'' (आईडीपीआईसी) बनाया है। राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने कहा कि साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए यह नयी संस्था रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साथ सलाह-मशविरा कर बनाई गई है। उन्होंने कहा, ''साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए, सरकार ने रिजर्व बैंक के साथ मिलकर 'इंडिया डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन' बनाया है। यह संस्था कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके बैंकों और वित्तीय संस्थानों को धोखाधड़ी 'इंटेलिजेंस' और अन्य जानकारी देगी।'' उन्होंने कहा कि बढ़ते साइबर खतरों से निपटने के लिए सरकार वित्तीय संस्थानों की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के मकसद से वित्तीय क्षेत्र के नियामकों के साथ मिलकर सक्रिय रूप से काम कर रही है।
- नयी दिल्ली.। सरकार ने मंगलवार को बताया कि आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत 44.73 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं, तथा योजना के तहत अस्पतालों में 12.69 लोगों के इलाज पर 1.92 लाख करोड़ रुपये का खर्च आया। राज्यसभा को एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि 22 जुलाई, 2026 तक एबी-पीएमजेएवाई के तहत कुल 44.73 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके थे। उन्होंने लिखित जवाब में कहा कि 30 जून, 2026 तक इस योजना के तहत अस्पताल में 12.69 करोड़ लोगों का इलाज किया गया जिन पर 1.92 लाख करोड़ रुपये का खर्च आया। इसके माध्यम से पात्र लाभार्थियों को नकदी रहित उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई। जाधव ने बताया कि मौजूदा राष्ट्रीय स्वास्थ्य लाभ पैकेज (एचबीपी-2022) के तहत 27 चिकित्सा विशेषज्ञताओं में 1,961 उपचार पैकेजों के माध्यम से नकदी रहित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन पैकेजों में विभिन्न प्रकार की द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। इनमें कैंसर, हृदय संबंधी रोग, गुर्दे की पुरानी बीमारी, मधुमेह से जुड़ी जटिलताएं, स्ट्रोक, लंबे समय तक चलने वाली श्वसन संबंधी बीमारियां, तंत्रिका संबंधी विकार और यकृत रोग जैसी गैर-संचारी बीमारियों का इलाज भी शामिल है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार देशभर में स्थापित करीब 1.86 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूत कर रही है। ये केंद्र नागरिकों के लिए प्राथमिक संपर्क बिंदु के रूप में काम करते हैं और प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के बीच कड़ी का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि देश की बढ़ती स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के माध्यम से तृतीयक स्वास्थ्य ढांचे का भी बड़े पैमाने पर विस्तार किया गया है।
- नयी दिल्ली। नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले पर हालिया विवाद के बाद भाजपा ने डिजिटल माध्यम से युवाओं तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर काम तेज कर दिया है। इस दौरान 'इंस्टाग्राम' राजनीतिक संदेश देने का प्रमुख मंच बनकर उभरा है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कई केंद्रीय मंत्री तथा पार्टी नेता भाजपा के अभियान में सक्रिय रूप से शामिल हैं। मोदी ने कुछ दिन पहले अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों से कहा था कि वे इंस्टाग्राम रील्स के जरिए युवाओं से जुड़ाव मजबूत करें। राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ छात्रों के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद भाजपा ने 'इंस्टाग्राम' पर विशेष ध्यान देना शुरू किया, क्योंकि इन प्रदर्शनों ने दिखाया कि युवाओं के बीच राजनीतिक चर्चा के लिए सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम, की भूमिका काफी बढ़ गई है। छात्रों के इन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) की शुरुआत इसी साल मई में एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक आंदोलन के रूप में हुई थी। अब तक इंस्टाग्राम पर इसके 2.6 करोड़ से अधिक 'फॉलोअर' हो चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल के दिनों में इंस्टाग्राम पर कई वीडियो साझा किए, जिनमें उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में सुधार जैसे मुद्दों पर युवाओं की प्रतिक्रिया और सुझावों के लिए उनका आभार व्यक्त किया। मोदी 2014 से इंस्टाग्राम का उपयोग कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों के दौरान आधी रात को पोस्ट किए गए उनके एक वीडियो के बाद उनके करीब 10 लाख फॉलोअर बढ़े और कुल फॉलोअर्स की संख्या लगभग 10.5 करोड़ हो गई। भाजपा के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर 95 लाख फॉलोअर्स हैं और वह इस मंच पर सबसे अधिक फॉलोवर वाली राजनीतिक पार्टी है। हाल के दिनों में इस अकाउंट पर परीक्षा प्रश्नपत्र लीक से जुड़ी कई वीडियो डाली गई हैं, जिनमें खास तौर पर पंजाब में कथित प्रश्नपत्र लीक के मामलों का उल्लेख किया गया है। पार्टी की हालिया पोस्ट में संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक पेश किए जाने से जुड़े वीडियो भी शामिल हैं। इनमें विपक्ष पर आरोप लगाया गया है कि उसने विधेयक पर चर्चा में बाधा डाली, जबकि सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य प्रश्नपत्र लीक रोकना और छात्रों के हितों की रक्षा करना है। हाल ही में नियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी इंस्टाग्राम के माध्यम से नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद पर सरकार की कार्रवाई के बारे में प्रमुखता से जानकारी दी। उन्होंने एक पोस्ट में कहा, "हमने सख्त लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू किया है, जिसमें परीक्षा माफिया के लिए 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।" उन्होंने कहा, "हम व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत करना चाहते हैं और संसद में तथ्यों पर आधारित सार्थक चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अखिलेश यादव और कांग्रेस के कई सांसद भी कह चुके हैं कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। दुर्भाग्य से एक व्यक्ति के अहंकार के कारण चर्चा नहीं हो पा रही।" उन्होंने सभी से राजनीति से ऊपर उठकर परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए चर्चा में शामिल होने की अपील की। प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो सभी मंत्रियों ने अपने-अपने इंस्टाग्राम खातों पर साझा किए, जबकि एक सप्ताह पहले तक कई मंत्रियों के खातों पर इस तरह की पोस्ट बहुत कम दिखाई देती थीं। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा ने नीट मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रवक्ताओं के साथ हुई बैठकों से जुड़े वीडियो साझा किए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने प्रश्नपत्र लीक विरोधी कानून में संशोधन वाले विधेयक की प्रस्तुति से जुड़े वीडियो पोस्ट किए हैं। उन्होंने छात्रों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान भी सरकार बातचीत के लिए तैयार थी। जितेंद्र सिंह के अकाउंट पर पिछले एक सप्ताह से हर दिन कई पोस्ट डाली जा रही हैं, जबकि इससे पहले वह सप्ताह में औसतन चार-पांच पोस्ट ही करते थे। नड्डा भी अब हर दिन कई वीडियो पोस्ट कर रहे हैं, जबकि पहले उनकी गतिविधि बहुत कम थी। प्रधानमंत्री की अपील से पहले उन्होंने आखिरी पोस्ट चार जुलाई को और उससे पहले 27 जून को की थी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विधेयक और प्रश्नपत्र लीक मुद्दे पर कई वीडियो साझा किए हैं। इनमें संसद में दिए गए उनके भाषणों के अंश शामिल हैं, जिनमें उन्होंने राजनीतिक दलों से विधेयक पर चर्चा और समर्थन करने की अपील की है। उन्होंने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक को दलगत राजनीति का विषय मानने के बजाय"गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा" बताया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी एक वीडियो साझा किया, जिसमें सरकार की इस प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया है कि युवाओं को न्याय मिलेगा और प्रश्नपत्र लीक के दोषियों के खिलाफ त्वरित अदालतों के माध्यम से कार्रवाई की जाएगी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी परीक्षा प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए सरकार के प्रयासों, त्वरित अदालतों के प्रावधान और विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, से इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करने तथा संसद में चर्चा में भाग लेने की अपील वाले वीडियो साझा किए।
- - आर बी सिंह बोले - शिक्षा का राष्ट्रीयकरण हो, एक समान शिक्षा लागू होभोपाल । अपना दल (एस) मध्य प्रदेश द्वारा सोमवार को पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के नेतृत्व में नवनियुक्त जिला अध्यक्षों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मार्गदर्शन पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आर. बी. सिंह पटेल ने किया, जबकि इसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष मान सिंह बिसेन ने की। वहीं राजनीतिक रणनीतिकार डॉ अतुल मलिकराम ने लक्ष्य निर्धारित कर आगामी दिनों की कार्ययोजना पर प्रेजेंटेशन साझा की। इस प्रशिक्षण सत्र का उद्देश्य संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना तथा नए दायित्व प्राप्त पदाधिकारियों को आगामी कार्ययोजना से अवगत कराना रहा।इस दौरान राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आर. बी. सिंह पटेल ने शिक्षा के राष्ट्रीयकरण और एकसमान शिक्षा लागू करने की बात करते हुए कहा कि "संगठन की वास्तविक शक्ति उसके सक्रिय कार्यकर्ता और मजबूत जिला संगठन होते हैं। सभी जिला अध्यक्ष निर्धारित समय-सीमा में संगठन का विस्तार करें और जनता के बीच पार्टी की विचारधारा एवं जनहित के मुद्दों को मजबूती से लेकर जाएं।" उन्होंने शिक्षा के राष्ट्रीयकरण और एकसमान शिक्षा लागू करने के विषय को भी पुख्ता करने पर जोर दिया।पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं आईटी मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद गंगवार ने सोशल मीडिया के प्रभावी एवं जिम्मेदार उपयोग पर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि “वर्तमान समय में डिजिटल माध्यम जनता तक पार्टी की नीतियों और जनहित के कार्यों को पहुंचाने का सबसे प्रभावी साधन है, इसलिए प्रत्येक पदाधिकारी को सोशल मीडिया का सकारात्मक और तथ्यात्मक उपयोग करना चाहिए।“प्रदेश अध्यक्ष मान सिंह बिसेन ने कहा कि, "यह प्रशिक्षण केवल जिम्मेदारियों की जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठनात्मक कार्यशैली को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास है। प्रत्येक जिला अध्यक्ष अपने जिले में मजबूत टीम बनाकर संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य करें।"राजनीतिक रणनीतिकार, डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा कि, "सफल संगठन वही होता है जो लक्ष्य तय करके समयबद्ध तरीके से कार्य करे। अगले 30 दिनों में प्रत्येक जिला अध्यक्ष को संगठन विस्तार, जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता दिखाते हुए परिणाम आधारित कार्य संस्कृति विकसित करनी होगी।" उन्होंने संगठन विस्तार, जनसंपर्क, स्थानीय मुद्दों की पहचान, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और प्रभावी संवाद जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली अपनाने पर जोर दिया।बैठक में विभिन्न जिलों के जिला अध्यक्षों ने भाग लिया। इनमें सिंगरौली से त्रिलोकी सिंह, भोपाल से सुरेंद्र नाहर, सिवनी से चैतराम प्रजापति, इंदौर से टीकमचंद्र शर्मा, मऊगंज से अजय बिहारी पटेल, सतना से राजमणि सिंह पटेल, रीवा से अशोक पटेल, ग्वालियर से राहुल सिंह, मैहर से मनोज पटेल, उमरिया से रमेश पटेल, जबलपुर से कमलेश पटेल तथा सागर से मनीष सरवैया सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।बैठक के दौरान जिला अध्यक्षों को 15 अगस्त से पूर्व जिला कार्यकारिणी एवं विधानसभा अध्यक्षों की नियुक्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाने तथा संगठन को प्रत्येक बूथ तक सक्रिय बनाने का आह्वान किया गया।
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नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य पेपर लीक, संगठित परीक्षा घोटालों और अन्य अनुचित गतिविधियों पर पहले से अधिक प्रभावी ढंग से रोक लगाना है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी।जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन के लिए लाया गया है। उन्होंने बताया कि 2024 का कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन अब उसे और मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई। प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद सरकार यह संशोधन लेकर आई है ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रही हैं। अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग परीक्षाओं में पहले भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, हालांकि पहले इस तरह की सख्त कार्रवाई नहीं होती थी जैसी अब की जा रही है।
वहीं, कांग्रेस पर निशाना साधते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि 2009 के रेलवे भर्ती परीक्षा पेपर लीक से लेकर 2012 के एम्स प्रवेश परीक्षा पेपर लीक तक कई बड़े मामले कांग्रेस सरकार के समय सामने आए। उन्होंने कहा कि इन्हीं घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार ने एक लीकप्रूफ परीक्षा प्रणाली तैयार करने का फैसला किया।जितेंद्र सिंह ने बताया कि 1992 में कांग्रेस सरकार के दौरान एक समिति ने केंद्रीय परीक्षा समिति बनाने की सिफारिश की थी। इसके बाद 2010 में भी एक समिति ने यही सुझाव दिया, लेकिन कांग्रेस और यूपीए सरकारों ने इन सिफारिशों को लागू नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) का गठन किया और 2024 में पहली बार इस विषय पर व्यापक कानून बनाया, जिसे जून 2024 में लागू किया गया।केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि इस संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था है। इसके तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके बाद ट्रायल कोर्ट में तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया जाएगा। यानी घटना होने से लेकर फैसले तक अधिकतम पांच महीने का समय लगेगा।उन्होंने बताया कि यदि कोई पक्ष फैसले के खिलाफ अपील करना चाहता है तो उसे 30 दिनों के भीतर अपील करनी होगी। साथ ही यह भी प्रावधान किया गया है कि ऐसे मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में डबल बेंच से नहीं होगी। जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विधेयक पेश होने के साथ ही कानून मंत्रालय ने स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।उन्होंने यह भी बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इसके अलावा राधाकृष्णन समिति की कुल 46 सिफारिशों में से 35 सिफारिशें सरकार पहले ही लागू कर चुकी है। केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह ईमानदार है और यह संशोधन भी उसी सोच के तहत लाया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस विधेयक के प्रावधानों पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी। क्योंकि यह कानून लाखों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए लाया गया है। - नयी दिल्ली. डाक विभाग ने पहली बार 'दस्तावेज' की परिभाषा अधिसूचित की है जिसमें पत्र, मुद्रित सामग्री और ऐसी पूरक वस्तुएं शामिल होंगी जिनका कोई पुनर्विक्रय मूल्य नहीं है। ऐसी सामग्रियों पर कम डाक शुल्क लगेगा, जबकि अन्य सभी वस्तुएं पार्सल श्रेणी में आएंगी। इसके साथ विभाग ने खुदरा और थोक ग्राहकों के लिए 24 स्पीड पोस्ट और 48 स्पीड पोस्ट सेवाओं की दरें भी अधिसूचित की हैं। ये सेवाएं क्रमश: 24 घंटे और 48 घंटे में सामान पहुंचाने का वादा करती हैं। अधिसूचना के मुताबिक, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र से जुड़े उत्पाद- वेलकम किट, पत्र, पासबुक, चेक बुक, बैंक विवरण, प्लास्टिक कार्ड, डेबिट और क्रेडिट कार्ड को दस्तावेज श्रेणी में रखा जाएगा।इसके अलावा पैन कार्ड, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे सरकारी दस्तावेज भी इसी श्रेणी में शामिल होंगे। राखी के लिफाफे या पैकेट और ग्रीटिंग कार्ड जैसे 500 ग्राम तक के गैर-व्यावसायिक पैकेट भी दस्तावेज माने जाएंगे। अधिसूचना के मुताबिक, नोट-1 में बताए गए सामान को छोड़कर अन्य सभी वस्तुओं को पार्सल श्रेणी के तहत भेजा जाएगा। खुदरा ग्राहकों के लिए मौजूदा दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन दस्तावेज श्रेणी में थोक बुकिंग के लिए नई दरें अधिसूचित की गई हैं। एक अगस्त से 24 स्पीड पोस्ट के तहत खुदरा ग्राहकों के लिए शुल्क वजन और दूरी के आधार पर 38 रुपये से 186 रुपये प्रति पैकेट होगा।वहीं, 50 ग्राम से कम वजन वाले पैकेट के लिए स्थानीय डाक शुल्क 38 रुपये और देशभर में 94 रुपये (जीएसटी अतिरिक्त) होगा। अधिसूचना के मुताबिक, 51-250 ग्राम के लिए डाक शुल्क 118-154 रुपये और 251-500 ग्राम के लिए 140-186 रुपये प्रति पैकेट तय किया गया है। वहीं, थोक ग्राहकों के लिए 24 घंटे वाली स्पीड पोस्ट सेवा का शुल्क 38 से 100 रुपये और 48 घंटे वाली सेवा का शुल्क 48 से 72 रुपये के बीच रहेगा। डाक विभाग ने कहा कि 48 स्पीड पोस्ट सेवा के तहत खुदरा ग्राहकों को वजन और गंतव्य के आधार पर 61 से 121 रुपये प्रति पैकेट देना होगा। फिलहाल 24 स्पीड पोस्ट और 48 स्पीड पोस्ट सेवाएं देश के केवल छह शहरों- दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में ही उपलब्ध हैं।
- पुरी. भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र तथा देवी सुभद्रा की वार्षिक रथ यात्रा का समापन सोमवार को 'नीलाद्रि बीजे' अनुष्ठान के साथ हो गया। वे 12 दिन बाहर बिताने के बाद 12वीं सदी के मंदिर में वापस लौट आए। 'नीलाद्रि बीजे' अनुष्ठान वार्षिक रथ यात्रा का अंतिम चरण माना जाता है। रथ यात्रा 16 जुलाई को शुरू हुई थी, जब भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ रथों पर सवार होकर मुख्य मंदिर से 2.6 किलोमीटर दूर स्थित अपने जन्मस्थान श्रीगुंडिचा मंदिर के लिए रवाना हुए थे। चौबीस जुलाई को बहुडा यात्रा या वापसी रथ यात्रा के बाद से ही अपने-अपने रथों पर विराजमान विग्रहों को एक-एक करके एक औपचारिक शोभायात्रा के साथ मंदिर के गर्भगृह में ले जाया गया और मंदिर के भीतर स्थापित किया गया। सबसे पहले भगवान जगन्नाथ के चक्र स्वरूप शस्त्र श्रीसुदर्शन को मंदिर में प्रवेश कराया गया।इसके बाद भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को ले जाया गया। अंत में 'हरिबोल' और 'जय जगन्नाथ' के जयघोष के बीच भगवान जगन्नाथ के विग्रह को मंदिर में प्रवेश कराया गया। इस वर्ष रथ यात्रा पूरी तरह दुर्घटनारहित नहीं रही। गर्मी और उमस भरे मौसम के कारण दम घुटने से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। 16 जुलाई को रथ यात्रा के दिन दो लोगों की जान गई। गर्मी, उमस और भारी भीड़ के कारण कई श्रद्धालुओं की तबीयत भी बिगड़ गई। समुद्र तटीय इस तीर्थ नगरी में 10 दिनों के दौरान देश-विदेश से 50 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, "हर श्रद्धालु की सुरक्षा, सुविधा और सुगम दर्शन हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। महाप्रभु की कृपा और सभी के सहयोग से इस वर्ष श्रीक्षेत्र में श्रद्धालु शांतिपूर्ण वातावरण और उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के बीच महाप्रभु के दिव्य दर्शन कर रहे हैं।"
- जलपाईगुड़ी. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को आरोप लगाया कि 'राष्ट्र विरोधी गिरोह' एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं और देश को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने "राष्ट्रवादी ताकतों" से ऐसी कोशिशों का एकजुट होकर मुकाबला करने का आह्वान किया। जलपाईगुड़ी जिले के जलपेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए अधिकारी ने यह टिप्पणी की। जलपेश शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने धर्मनिरपेक्ष और मार्क्सवादी राजनीति पर कटाक्ष करते हुए "सेकू" और "माकू" जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि "राष्ट्रविरोधी 'टुकड़े-टुकड़े' गिरोह" एक बार फिर देश को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "राष्ट्रविरोधी टुकड़े-टुकड़े गिरोह, सेकू और माकू फिर जाग गए हैं।" उन्होंने राष्ट्रवादी ताकतों से एकजुट रहने का आह्वान किया।
- नयी दिल्ली. कृत्रिम मेधा (एआई) के तेजी से बढ़ते उपयोग, बड़े पैमाने पर क्लाउड अवसंरचना में निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था के दम पर भारत की डेटा सेंटर क्षमता वर्ष 2025 के 2.2 गीगावाट से बढ़कर 2030 तक 12 गीगावाट से अधिक होने का अनुमान है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। परामर्श कंपनी वुड मैकेंजी की रिपोर्ट के अनुसार, एआई के लिए समर्पित डेटा सेंटर क्षमता वर्ष 2025 के 275 मेगावाट से बढ़कर 2030 तक 6,546 मेगावाट होने का अनुमान है। वहीं, डेटा सेंटर की बिजली मांग 2025 के 10 टेरावाट-घंटे (टीडब्ल्यूएच) से बढ़कर 2040 तक 191 टेरावाट-घंटे होने का अनुमान है। वुड मैकेंजी के शोध सहयोगी सौहार्द पाल ने कहा, ''भारत का डेटा सेंटर बाजार दीर्घकालिक निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में उभर रहा है।बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश, एआई आधारित कार्यभार में वृद्धि और पिछले एक दशक के नीतिगत समर्थन ने भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख बाजारों की बराबरी करने की स्थिति में ला खड़ा किया है। अब डेवलपर्स और निवेशकों के लिए सवाल यह नहीं रह गया है कि भारत में निवेश किया जाए या नहीं, बल्कि यह है कि निवेश कहां और किस प्रकार किया जाए।'' रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में 32 लाख करोड़ रुपये मूल्य वाली और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 12 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था डेटा सेंटर अवसंरचना की मांग को बढ़ा रही है। देश में 103 करोड़ से अधिक सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और हर महीने करीब 2,200 करोड़ यूपीआई लेनदेन किए जाते हैं। भारत का घरेलू एआई बाजार वर्ष 2032 तक 11.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।रिपोर्ट में कहा गया कि महाराष्ट्र और तमिलनाडु वर्तमान में देश के कुल स्थापित सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) भार का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। हालांकि, भविष्य में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में निवेश बढ़ने की संभावना है। ये उभरते बाजार वैश्विक स्तर की बड़ी क्लाउड सेवा कंपनियों से महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित कर रहे हैं। इनमें अमेजन वेब सर्विसेज और गूगल के अलावा घरेलू कंपनी अदाणीकॉननेक्स भी शामिल है, जिसने 2.6 गीगावाट क्षमता की विकास परियोजनाओं की घोषणा की है। रिपोर्ट के अनुसार, विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली की उपलब्धता अब डेटा सेंटर उद्योग की सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
- नयी दिल्ली. आयकर विभाग ने सोमवार को कहा कि आकलन वर्ष 2026-27 के लिए अबतक चार करोड़ आयकर रिटर्न भरे गये हैं। विभाग ने करदाताओं से 31 जुलाई की अंतिम तिथि से पहले अपना रिटर्न दाखिल करने की अपील की है। विभाग ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर करदाताओं से 31 जुलाई से पहले आयकर रिटर्न एक (सहज) और दो भरने को कहा है। आईटीआर-1 (सहज) एक सरल फॉर्म है, जिसे छोटे और मध्यम आय वर्ग के बड़ी संख्या में करदाताओं के लिए तैयार किया गया है। यह फॉर्म उन निवासी व्यक्तिगत करदाताओं के लिए है, जिनकी वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक है और जिनकी आय वेतन, एक आवासीय संपत्ति तथा कृषि से सालाना 5,000 रुपये तक होती है। वहीं, आईटीआर-2 उन व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) के लिए है, जिनकी आय व्यवसाय या पेशे से नहीं होती, लेकिन उन्हें पूंजीगत लाभ से आय प्राप्त होती है।
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अयोध्या. राम मंदिर कथित चढ़ावा चोरी मामले के सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत एक स्थानीय विशेष अदालत ने सोमवार को 14 दिनों के लिए बढ़ा दी। बचाव पक्ष के वकील ने यह जानकारी दी। बचाव पक्ष के वकील कुल शेखर सिंह ने बताया कि विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निरोधक) रजत वर्मा ने आरोपियों को जिला जेल से वस्तुतः अदालत में पेश किए जाने के बाद उनकी न्यायिक हिरासत 10 अगस्त तक बढ़ा दी। ये आरोपी अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू हैं। पुलिस जांच के तहत उनसे पुलिस हिरासत के दौरान पूछताछ कर चुकी है। यह मामला अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाये गये चढ़ावे के कथित गबन से संबंधित है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करने के वास्ते इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल के गठन की घोषणा की है। कार्यबल के छह सदस्यों का ब्यौरा इस प्रकार है:
1. नंदन नीलेकणि
इंफोसिस के सह-संस्थापक एवं चेयरमैन नीलेकणि को भारत के 'आधार' डिजिटल पहचान कार्यक्रम- भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। उन्होंने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंतर-संचालनीय भुगतान प्रणाली के माध्यम से भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को आकार देने में योगदान दिया। वर्ष 1981 में नीलेकणि ने पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स की नौकरी छोड़ने के बाद एन आर नारायण मूर्ति और पांच अन्य लोगों के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की। कार्यबल में भूमिका: परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल संबंधी कार्यबल की सिफारिशों का नेतृत्व करना।
2. एस. सोमनाथ
प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक सोमनाथ ने बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में आईआईटी मद्रास से पीएचडी की। उन्होंने वर्ष 2022 से 2025 तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव के रूप में सेवाएं दीं। कार्यबल में भूमिका: परीक्षा प्रणाली से जुड़े पैनल में बड़े पैमाने की प्रौद्योगिकी प्रणालियों से संबंधित विशेषज्ञता उपलब्ध कराना.
3. तपन डेका
हिमाचल प्रदेश कैडर के 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी डेका ने जून 2022 से जून 2026 तक खुफिया ब्यूरो (आईबी) के निदेशक के रूप में कार्य किया। अनुभवी खुफिया अधिकारी डेका ने आतंकवाद रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनमें 26/11 मुंबई हमले, इंडियन मुजाहिदीन के खिलाफ कार्रवाई और जम्मू-कश्मीर एवं पूर्वोत्तर में सुरक्षा अभियान शामिल हैं। कार्यबल में भूमिका: सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा से लेकर अभ्यर्थियों के सत्यापन एवं परिणाम प्रक्रिया तक परीक्षा के हर चरण को सुरक्षित बनाने वाले डिजिटल समाधानों की समीक्षा में मदद करना।
4. अनीता करवल
वर्ष 1988 बैच की आईएएस अधिकारी करवल के पास लोक प्रशासन, विशेषकर स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में 36 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने 2017 से 2021 तक केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और बाद में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की सचिव रहीं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीबीएसई अध्यक्ष रहते हुए 2018 में बोर्ड परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले के बाद उन्हें छात्रों के विरोध प्रदर्शन का सामना भी करना पड़ा था। कार्यबल में भूमिका: शिक्षा नीति संबंधी विशेषज्ञता उपलब्ध कराना।
5. वी कामकोटि
कामकोटि वर्ष 2022 से आईआईटी मद्रास के निदेशक हैं और भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर 'शक्ति' विकसित करने वाली शोध टीम का नेतृत्व करने के लिए जाने जाते हैं। आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र कामकोटि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य हैं और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा गठित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कार्यबल के अध्यक्ष भी हैं। वह स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकास से जुड़े कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों का नेतृत्व कर रहे हैं। कार्यबल में भूमिका: शैक्षणिक और तकनीकी सुझाव उपलब्ध कराना।
6. अमृत लाल मीणा
बिहार कैडर के 1989 बैच के आईएएस अधिकारी मीणा के पास 36 वर्षों से अधिक का प्रशासनिक अनुभव है, जिसमें बिहार सरकार के साथ 25 वर्ष और केंद्र सरकार के साथ 11 वर्ष शामिल है। वह इससे पहले बिहार के मुख्य सचिव और कोयला मंत्रालय के सचिव रह चुके हैं। उन्होंने उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) में विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स) का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला था। कार्यबल में भूमिका: लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ के रूप में योगदान देना।














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