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नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का 28 जनवरी से आगाज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी मंजूरीसंसद का बजट सत्र 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक चलेगा। सत्र का पहला फेज 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा, जबकि दूसरा फेज 9 मार्च से 2 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के बजट सत्र को बुलाने की मंजूरी दे दी है।संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार की सिफारिश पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों को 2026 के बजट सत्र के लिए बुलाने की मंजूरी दे दी है। यह सत्र 28 जनवरी 2026 से शुरू होकर 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा।उन्होंने लिखा कि पहला चरण 13 फरवरी 2026 को समाप्त होगा और संसद 9 मार्च 2026 को पुनः एकत्रित होगी। यह सार्थक बहस और जन-केंद्रित शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आम बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा। इसके साथ ही टैक्सपेयर्स, नौकरीपेशा, किसान और उद्योग हर किसी की निगाहें अब बजट 2026 पर टिक गई हैं।केंद्र सरकार की ओर से 2017-18 से आम बजट को लगातार एक फरवरी को पेश किया जा रहा है। स्टॉक एक्सचेंज भी संकेत दे चुके हैं कि अगर बजट रविवार को पेश किया जाता है तो इस दिन एक स्पेशल ट्रेडिंग सेशन रखा जाएगा।यह केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला लगातार नौवां बजट होगा। उन्होंने लगातार सबसे अधिक बजट प्रस्तुत करने का रिकॉर्ड पहले ही बना लिया है। यदि वह एक और बजट भी प्रस्तुत करती हैं, तो वे दिवंगत मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगी, जिन्होंने दो कार्यकालों, 1959 से 1964 के बीच छह और 1967 से 1969 के बीच चार, में कुल 10 बजट प्रस्तुत किए थे।अन्य हालिया वित्त मंत्रियों में, पी. चिदंबरम ने नौ बजट प्रस्तुत किए थे, जबकि प्रणब मुखर्जी ने अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में आठ बजट प्रस्तुत किए थे।
- नई दिल्ली। हाइपरसोनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। यह उपलब्धि डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) की सहायता से हासिल की गई है।दरअसल, डीआरडीएल ने सक्रिय शीतलन युक्त पूर्ण-स्तरीय स्क्रैमजेट इंजन (फुल स्केल कंबस्टर) का दीर्घ-अवधि ग्राउंड परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया है। डीआरडीएल, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की हैदराबाद स्थित अग्रणी प्रयोगशाला है। इस सफल परीक्षण ने भारत को उन्नत एयरोस्पेस क्षमताओं की वैश्विक अग्रिम पंक्ति में स्थापित किया है। यह महत्वपूर्ण परीक्षण 09 जनवरी को डीआरडीएल की अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट सुविधा में किया गया।रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसने स्क्रैमजेट दहनकक्ष ने 12 मिनट से अधिक समय तक निरंतर और स्थिर संचालन प्रदर्शित किया। यह उपलब्धि भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए एक निर्णायक और आधारभूत कदम मानी जा रही है।गौरतलब है कि हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक, अर्थात 6,100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम होती है। यह असाधारण क्षमता अत्याधुनिक एयर-ब्रीदिंग स्क्रैमजेट इंजन के माध्यम से प्राप्त की जाती है।यह सुपरसोनिक दहन तकनीक का उपयोग कर दीर्घ-अवधि तक निरंतर प्रणोदन (मिसाइल को आगे बढ़ाने के लिए उत्पन्न की जाने वाली शक्ति) प्रदान करता है। स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट सुविधा में किए गए इन ग्राउंड परीक्षणों ने उन्नत स्क्रैमजेट दहनकक्ष के डिजाइन को सफलतापूर्वक प्रमाणित किया है।रक्षा मंत्रालय का कहना है कि शुक्रवार को मिली यह कामयाबी बीते साल 25 अप्रैल को किए गए दीर्घ-अवधि के सब-स्केल परीक्षण पर आधारित है। उस परीक्षण ने इस उन्नत प्रौद्योगिकी के क्रमिक और सुदृढ़ विकास को सुनिश्चित किया है। पूर्ण-स्तरीय स्क्रैमजेट दहनकक्ष और परीक्षण सुविधा का डिजाइन एवं विकास डीआरडीएल द्वारा किया गया।वहीं, इसके निर्माण और कार्यान्वयन में भारतीय उद्योग साझेदारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस उपलब्धि पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, उद्योग साझेदारों और शैक्षणिक संस्थानों को बधाई दी।राजनाथ सिंह ने कहा कि यह कामयाबी भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए एक मजबूत और ठोस आधार प्रदान करती है।उन्होंने बताया कि यह देश की सामरिक क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। वहीं, डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस परीक्षण से जुड़े सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियर्स और तकनीकी टीमों को उनके सराहनीय योगदान के लिए शुभकामनाएं दीं। इस सफल ग्राउंड परीक्षण के साथ भारत ने हाइपरसोनिक प्रणोदन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर लिया है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोमनाथ धाम के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत महत्व पर प्रकाश डाला और इसे पीढ़ियों से भारतीयों के लिए आस्था, साहस और स्वाभिमान का एक शाश्वत स्रोत बताया।
पीएम मोदी ने एक्स (X) पर एक संदेश किया साझाइस संबंध में प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक संदेश साझा किया, जिसमें इस पवित्र स्थल की स्थायी विरासत पर जोर दिया गया। अपने पोस्ट में, पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि सोमनाथ धाम ने सदियों से लोगों की सामूहिक चेतना को जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो अटूट आस्था और आंतरिक शक्ति का प्रतीक है।प्रधानमंत्री मोदी ने पोस्ट में लिखा…प्रधानमंत्री मोदी ने पोस्ट में लिखा “पावन-पुनीत सोमनाथ धाम की भव्य विरासत सदियों से जन-जन की चेतना को जागृत करती आ रही है। यहां से निकलने वाली दिव्य ऊर्जा युग-युगांतर तक आस्था, साहस और स्वाभिमान का दीप प्रज्वलित करती रहेगी।”पीएम मोदी ने सोमनाथ के आध्यात्मिक सार और भगवान शिव के साथ इसके जुड़ाव को दर्शाने वाला एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया। यह श्लोक सोमनाथ को एक पवित्र और अत्यंत शक्तिशाली क्षेत्र के रूप में उजागर करता है जहां आध्यात्मिक पूर्णता और मुक्ति प्राप्त होती है।आदिनाथेन शर्वेण सर्वप्राणिहिताय वै।आद्यतत्त्वान्यथानीयं क्षेत्रमेतन्महाप्रभम्।प्रभासितं महादेवि यत्र सिद्ध्यन्ति मानवाः॥श्लोक का अर्थइस श्लोक का अर्थ है “भगवान शिव ने, आदिनाथ के रूप में, सभी जीवों के कल्याण के लिए, अपने शाश्वत सिद्धांत के माध्यम से इस पवित्र और अत्यंत शक्तिशाली क्षेत्र (प्रभास खंड) को प्रकट किया। दिव्य आभा से नहाया हुआ, यह पवित्र स्थान वह है जहां मनुष्य आध्यात्मिक पूर्णता, सद्गुण और मुक्ति मोक्ष प्राप्त करते हैं।”इससे पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर की अपनी पिछली यात्राओं की यादें साझा कीं, और मंदिर पर बार-बार हुए ऐतिहासिक हमलों के बावजूद आस्था की दृढ़ता पर रोशनी डाली।पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट में लिखा, जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले, जिसके बाद कई और हमले हुए, लोगों के आध्यात्मिक संकल्प को कमजोर करने में विफल रहे।”हज़ार साल पहले, जनवरी 1026 में, सोमनाथ मंदिर पर इतिहास का पहला हमला हुआ था। 1026 के हमले और उसके बाद हुए कई हमलों से भी हमारा अटूट विश्वास नहीं डिगा। इसके उलट, इसने भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना को और मजबूत किया और सोमनाथ मंदिर को बार-बार फिर से बनाया गया। मैं सोमनाथ की अपनी पिछली यात्राओं की कुछ तस्वीरें शेयर कर रहा हूं। अगर आप भी सोमनाथ गए हैं, तो कृपया अपनी तस्वीरें #SomnathSwabhimanParv के साथ शेयर करें।”बताना चाहेंगे, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले बड़े हमले के 1,000 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। -
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज शुक्रवार को राजधानी के सरोजनी नगर क्षेत्र में अशोक लेलैंड के अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) प्लांट का उद्घाटन किया। इस दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य इलेक्ट्रिक वाहनों का है, इसी दिशा में भारत आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आने वाले वर्षों में पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन प्रमुख होंगे। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से ईवी को बढ़ावा देना आवश्यक है और सरकार भविष्य की तकनीकों पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए नियमों को सरल किया गया है और उद्योगों को ऑनलाइन प्रक्रियाओं के माध्यम से सहूलियत दी जा रही है।उन्होंने कहा कि अशोक लेलैंड का यह संयंत्र केवल एक कंपनी की सफलता नहीं, बल्कि उद्योग जगत के सरकार की नीतियों पर बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। डबल इंजन की सरकार के तहत उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, सड़कों और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण निवेश का माहौल सुदृढ़ हुआ है।राजनाथ सिंह ने बताया कि संयंत्र का निर्माण 24 महीनों में प्रस्तावित था, लेकिन रिकॉर्ड 18 महीनों में इसे पूरा किया गया। यहां परिचालन शुरू होने के बाद हर महीने लगभग 2,500 इलेक्ट्रिक वाहन तैयार किए जाएंगे। इससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और अगले पांच वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के निवेश तथा लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेश को बढ़ावा देने के लिए ‘फॉर्च्यून ग्लोबल 500 एवं फॉर्च्यून इंडिया 500 कंपनी निवेश प्रोत्साहन नीति-2023’ लेकर आई है। साथ ही ‘उत्तर प्रदेश एयरोस्पेस एवं डिफेंस यूनिट और रोजगार प्रोत्साहन नीति’ के माध्यम से राज्य को रक्षा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है।राजनाथ ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक, यानी 2047 में, उत्तर प्रदेश रोजगार, उद्योग, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि यही विकसित भारत का सपना और संकल्प है। राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन मात्र 46 हजार करोड़ रुपये था, जो आज रिकॉर्ड बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इसी तरह, रक्षा निर्यात जो पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, अब रिकॉर्ड 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रयासों के चलते भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। कौशल विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है, ताकि वे देश और प्रदेश के विकास में निर्णायक भूमिका निभा सकें।रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर स्थापित किया गया है और लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस की फैक्ट्री में अब ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण हो रहा है। इससे स्पष्ट है कि भारत अब अपने हथियार खुद बना रहा है और उत्तर प्रदेश इसमें नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने कहा कि जो उत्तर प्रदेश कभी ‘बीमारू राज्य’ के रूप में जाना जाता था, आज वही राज्य औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का मजबूत केंद्र बन रहा है। वर्ल्ड-क्लास ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड कमर्शियल व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की शुरुआत प्रदेश की औद्योगिक यात्रा में ऐतिहासिक उपलब्धि है। - -दोनों नेता भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे-पीएम मोदी और चांसलर मर्ज़ साबरमती आश्रम जाएंगे और अहमदाबाद में अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव में हिस्सा लेंगेनई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जर्मनी के फेडरल चांसलर, महामहिम श्री फ्रेडरिक मर्ज़ से 12 जनवरी को अहमदाबाद में मुलाकात करेंगे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर जर्मनी के चांसलर, महामहिम श्री फ्रेडरिक मर्ज़ 12-13 जनवरी 2026 को भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। जर्मन चांसलर मर्ज़ की भारत की यह पहली आधिकारिक यात्रा होगी।दोनों नेता 12 जनवरी को सुबह लगभग 9:30 बजे साबरमती आश्रम जाएंगे। उसके बाद लगभग 10 बजे वे साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भाग लेंगे। इसके बाद सुबह 11:15 बजे से गांधीनगर के महात्मा मंदिर में द्विपक्षीय बैठकें होंगी।भारत-जर्मनी ने रणनीतिक साझेदारी के हाल ही में 25 साल पूरे किए हैं, दोनों नेता द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कौशल विकास और गतिशीलता में सहयोग को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, साथ ही रक्षा और सुरक्षा, विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान, हरित और सतत विकास सहित दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज़ क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे, और दोनों देशों के व्यापार और उद्योग जगत के नेताओं के साथ बातचीत करेंगे।
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नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के रूप में रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय की एक संयुक्त पहल, प्रोजेक्ट ‘वीर गाथा 5.0’ को भारी प्रतिक्रिया मिली है। इस वर्ष इस परियोजना में लगभग 1.90 लाख स्कूलों के लगभग 1.92 करोड़ छात्रों ने भाग लिया, जो 2021 में शुरू होने के बाद से अब तक की सबसे अधिक भागीदारी है।
वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर 100 विजेताओं का चयन किया गया है: प्रारंभिक चरण (कक्षा 3-5) से 25, मध्य चरण (कक्षा 6-8) से 25 और माध्यमिक चरण (कक्षा 9-10 और 11-12 से समान प्रतिनिधित्व) से 50 ।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 8 सितंबर, 2025 को प्रारंभ की गई वीर गाथा 5.0 में छात्रों की सहभागिता बढ़ाने हेतु नवाचारी विशेषताएं जोड़ी गईं। पहली बार इस पहल में वीडियोग्राफी, एंकरिंग, रिपोर्टिंग और कहानी सुनाने जैसे लघु वीडियो प्रारूपों को शामिल किया गया। इसके माध्यम से छात्रों को भारत की समृद्ध सैन्य परंपराओं, रणनीतियों, अभियानों और वीरतापूर्ण विरासत पर केंद्रित सामग्री तैयार के लिए प्रोत्साहित किया गया।छात्रों को कलिंग के राजा खारवेल, पृथ्वीराज चौहान, छत्रपति शिवाजी महाराज, 1857 के योद्धाओं और जनजातीय विद्रोहों के नेताओं सहित अन्य महान भारतीय योद्धाओं की अदम्य भावना और सैन्य रणनीतियों का अध्ययन करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। विषयों की इस विविधता ने न केवल प्रविष्टियों की गुणवत्ता को बढ़ाया, बल्कि प्रतिभागियों की भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की समझ को भी बढ़ाया।एक महत्वपूर्ण विस्तार के रूप में विदेशों में स्थित सीबीएसई- संबद्ध स्कूलों ने पहली बार इस पहल में भाग लिया। 18 देशों के 91 स्कूलों के 28,005 छात्रों ने अपनी प्रविष्टियां प्रस्तुत कीं, जो भारत की वीरता और राष्ट्रीय गौरव की कहानियों को वैश्विक दर्शकों तक ले जाने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुई और जिसने इस पहल की अंतर्राष्ट्रीय पहुंच को और मजबूत किया।आपको बता दें, इस परियोजना में स्थानीय स्तर पर विद्यालयों द्वारा गतिविधियां आयोजित करना, वीरता पुरस्कार विजेताओं द्वारा राष्ट्रव्यापी संवाद कार्यक्रम (ऑफ़लाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से) आयोजित करना तथा MyGov पोर्टल के माध्यम से सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियों को जमा करना शामिल था। विद्यालय स्तर की गतिविधियां 10 नवंबर, 2025 को समाप्त हुईं।वहीं, राज्य और जिला स्तर पर मूल्यांकन के बाद राष्ट्रीय स्तर के मूल्यांकन के लिए लगभग 4,020 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जिनमें से शीर्ष 100 प्रविष्टियों को सुपर-100 विजेताओं के रूप में चुना गया। इन विजेताओं को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक विजेता को 10,000 रुपये का नकद पुरस्कार और विशेष अतिथि के रूप में कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड 2026 देखने का अवसर मिलेगा। राष्ट्रीय स्तर के 100 विजेताओं के अतिरिक्त राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर आठ विजेताओं (प्रत्येक श्रेणी से दो) और जिला स्तर पर चार विजेताओं (प्रत्येक श्रेणी से एक) का चयन किया जाएगा तथा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश/जिला अधिकारियों द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाएगा।गौरतलब हो, परियोजना वीर गाथा की शुरुआत 2021 में आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत भारत की स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में की गई थी। इस पहल का उद्देश्य वीरता पुरस्कार विजेताओं के साहस, उनके वीरतापूर्ण कार्यों और उनकी जीवन यात्राओं को उजागर करना तथा छात्रों में देशभक्ति और नागरिक कर्तव्यबोध की भावना का विकास करना है। पहले संस्करण से लेकर पांचवें संस्करण तक यह परियोजना एक प्रेरणादायक आंदोलन के रूप में विकसित हुई है, जिसकी पहुंच देशभर में ही नहीं, बल्कि विदेशों में स्थित भारतीय स्कूलों तक भी निरंतर बढ़ती गई है।अपनी शुरुआत के बाद से परियोजना वीर गाथा ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। पहले दो संस्करणों में से प्रत्येक में 25 राष्ट्रीय विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिसमें पहले संस्करण में लगभग 8 लाख और दूसरे संस्करण में लगभग 19 लाख छात्रों ने भाग लिया। तीसरे संस्करण ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जिसमें 100 राष्ट्रीय विजेताओं का चयन किया गया और इसमें 1.36 करोड़ छात्रों की सहभागिता रही, जो वीर गाथा 4.0 में बढ़कर 1.76 करोड़ हो गई। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 और 11 जनवरी को सोमनाथ की यात्रा पर आने वाले हैं। पीएम मोदी की अध्यक्षता में और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में गुजरात सरकार द्वारा सोमनाथ में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026’ का आयोजन किया गया है, जिससे समग्र सोमनाथ भक्तिमय एवं शिवमय बना है।
इस भक्तिमय उत्सव में सोमनाथ को स्वच्छ तथा पवित्र बनाए रखने के लिए शहर का स्थानीय निकाय प्रशासन तथा अनेक सफाई कर्मचारी अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। सोमनाथ महादेव के सानिध्य में जो भक्ति का माहौल बना है, उसे स्वच्छता के माध्यम से अधिक मनमोहक बनाने में शहरी निकाय प्रशासन और सफाई कर्मचारियों ने आधारभूत भूमिका निभाई है। विभिन्न नगर पालिकाओं के समन्वय द्वारा स्वच्छता का एक भगीरथ कार्य यहां साकार हो रहा है। सोमनाथ शहर को स्वच्छ बनाने के लिए मानव संसाधन का एक विशाल गठबंधन बनाया गया है। सफाई कार्य के लिए वेरावळ नगर पालिका से 300 से अधिक तथा अहमदाबाद, जूनागढ, भावनगर महानगर पालिका और अन्य नगर पालिका क्षेत्रों के 700 से अधिक सहित कुल 1000 से अधिक सफाई कर्मयोगी यहां तत्परता से सेवा दे रहे हैं। पिछले पांच दिनों से दिन-रात ये सफाई कर्मचारी सोमनाथ तथा वेरावळ को स्वच्छ बनाए रखने के लिए अथक परिश्रम कर रहे हैं। मार्गों की सफाई तथा कचरा उठाने के साथ मार्गों के आसपास अतिरिक्त घास और पेड़-पत्तों की छंटाई का कार्य भी युद्ध स्तर पर किया गया है। आधुनिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों द्वारा मुख्य मार्गों की सघन सफाई की जा रही है। इसके अलावा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए आवासीय स्थलों तथा भंडारे के स्थलों पर विशेष सफाई टुकड़ियां तैनात की गई हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर 40 से अधिक मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।उल्लेखनीय है कि सोमनाथ में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ भक्ति का पावन पर्व है। इस पर्व में लाखों श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। ऐसे में शहरी निकाय प्रशासन एवं सफाई कर्मचारियों के परिश्रम की प्रशंसा हो रही है। इसके कारण ही सोमनाथ और वेरावळ का वातावरण स्वच्छ, सुंदर एवं पवित्र बना हुआ है। -
नई दिल्ली। डिजिटल दुनिया में जहां हर चीज मोबाइल, कंप्यूटर से लेकर आपकी मल्टी-फंक्शन टीवी स्क्रीन पर एक क्लिक में उपलब्ध हो जाती है। उस दौर में भी किताबों का अपना क्रेज है। आज भी किताबों के कद्रदान कम नहीं हैं। कहते हैं, ‘किताबें बोलती हैं, आप बीती और जग बीती भी।’ इस लिहाज से किताबों के शौकीनों, युवाओं, बच्चों-बूढ़ों से लेकर महिलाओं तक, सभी का इंतजार नई दिल्ली में ‘विश्व पुस्तक मेले’ में पूरा होने वाला है।
दरअसल, विश्व का सबसे बड़ा पुस्तक मेला अपने 53वें संस्करण के साथ राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में लौट रहा है। ‘विश्व पुस्तक मेला- 2026’ की शुरुआत शनिवार से हो रही है। यह 18 जनवरी तक चलेगा। विश्व पुस्तक मेले में साहित्य, संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान से लेकर हर विषय पर लाखों किताबें लोगों के लिए रहेंगी। इस बार पुस्तक मेले को भारतीय सीमाओं की सुरक्षा में तैनात हमारे वीर जवानों को समर्पित किया गया है। विश्व पुस्तक मेले में एंट्री फ्री रखी गई है।राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे के मुताबिक, “हमने स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे किए हैं और अपनी सशस्त्र सेनाओं को नमन करते हुए इस बार के विश्व पुस्तक मेले की थीम ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा 75’ रखी गई है।” नौ दिनों तक चलने वाले विश्व पुस्तक मेले का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे। इस खास अवसर पर कतर और स्पेन का प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहेगा।विश्व पुस्तक मेले में 35 से अधिक देशों के 1,000 से अधिक प्रकाशक आ रहे हैं। मेले में 3,000 से ज्यादा स्टॉल शामिल होंगे। यहां 600 से अधिक आयोजनों में 1,000 से ज्यादा वक्ता संवाद भी करेंगे। इस पुस्तक मेले में 20 लाख से अधिक लोगों के आने का अनुमान भी जताया गया है।आयोजकों ने बताया कि इस बार का विश्व पुस्तक मेला भारतीय सेनाओं के तीनों अंगों के साहस, बलिदान और राष्ट्र-निर्माण में उनकी सराहनीय भूमिका को समर्पित है। इसी को ध्यान में रखते हुए पहली बार पुस्तक मेले में सभी के लिए प्रवेश फ्री रखा गया है। मेले का आयोजन पुस्तकों और ज्ञान को सभी के लिए सुलभ बनाने के मकसद से किया गया है। जेन-जी को किताबों से जोड़ने के लिए भी यह पहल बेहद खास है। पुस्तक मेले के अंदर आयोजित होने वाली सभी गतिविधियां भी निशुल्क रहेंगी।वहीं, मेले में बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिलने जा रही है। इस साहित्यिक महाकुंभ में नन्हे पाठकों को देश के गौरव, एस्ट्रोनॉट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से रूबरू होने और उनसे प्रेरणा लेने का विशेष अवसर मिलेगा। विज्ञान, अंतरिक्ष और ज्ञान की दुनिया से सीधे संवाद के साथ यह मुलाकात बच्चों के लिए एक यादगार अनुभव बनेगी, जहां किताबों के साथ-साथ सपनों को भी पंख मिलेंगे। -
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में भारतीय भाषाओं पर तीसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन वैश्विक हिंदी परिवार, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और दिल्ली विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा विभाग द्वारा आयोजित किया गया था।
विद्वानों, भाषाविदों और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने भाषा को सभ्यता की अंतरात्मा बताया, जो पीढ़ियों तक सामूहिक स्मृति, ज्ञान प्रणालियों और मूल्यों को संजोए रखती है। उन्होंने कहा कि प्राचीन शिलालेखों और ताड़ के पत्तों पर लिखी पांडुलिपियों से लेकर आज की डिजिटल लिपियों तक, भाषाओं ने दर्शन, विज्ञान, कविता और नैतिक परंपराओं को संरक्षित किया है जो मानवता को परिभाषित करती हैं।चेन्नई में हाल ही में आयोजित सिद्ध दिवस समारोह में अपनी भागीदारी को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने बड़ी संख्या में ताड़ के पत्तों पर लिखी पांडुलिपियां देखीं, जो देश की विशाल और बहुभाषी ज्ञान परंपराओं की अमिट गवाही देती हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय भाषा ने दर्शन, चिकित्सा, विज्ञान, शासन और आध्यात्मिकता में गहरा योगदान दिया है।उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश की अनेक भाषाओं ने कभी भी राष्ट्र को विभाजित नहीं किया; बल्कि, उन्होंने एक साझा सभ्यतागत लोकाचार और एक समान धर्म को संरक्षित और मजबूत किया है।राज्यसभा के अध्यक्ष के रूप में संसद के अपने पहले सत्र के अनुभव को साझा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अब अधिकाधिक सांसद अपनी-अपनी मातृभाषा में बोल रहे हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत के संविधान का संथाली भाषा में अनुवाद हाल ही में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी किया गया था, जिसे उन्होंने भाषाई समावेशन और सभी भाषा समुदायों के लिए लोकतांत्रिक सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का संविधान और इसकी आठवीं अनुसूची भाषाई विविधता को मान्यता देकर और उसका सम्मान करके देश के प्राचीन ज्ञान को दर्शाती है, और यह पुष्टि करती है कि राष्ट्रीय एकता एकरूपता पर नहीं बल्कि आपसी सम्मान पर टिकी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब प्रत्येक नागरिक अपनी भाषा में खुद को व्यक्त कर सके।समकालीन चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि विश्व भर में कई स्वदेशी भाषाएं लुप्तप्राय हैं। उन्होंने कहा कि भाषा सम्मेलन अनुसंधान को मजबूत करने, अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने और प्राचीन लिपियों और पांडुलिपियों, विशेष रूप से लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में शुरू की गई पहलों का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर प्रकाश डाला और भारतीय भाषाओं की पांडुलिपियों के संरक्षण और प्रसार के लिए ज्ञान भारतम मिशन की सराहना करते हुए इस बात को दोहराया कि भारत का मानना है कि ज्ञान पवित्र है और इसे साझा किया जाना चाहिए।भाषा संरक्षण में प्रौद्योगिकी को सहयोगी बनाने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने डिजिटल अभिलेखागार, एआई-आधारित अनुवाद उपकरणों और बहुभाषी प्लेटफार्मों के उपयोग की वकालत की ताकि भारतीय भाषाएं वर्तमान में फले-फूले और भविष्य को आकार दें।उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि भाषाओं के संरक्षण में देश अपनी सभ्यताओं का संरक्षण करता है; भाषाई विविधता को बढ़ावा देकर लोकतंत्र को मजबूत करता है; और प्रत्येक भाषा का सम्मान करके मानवता की गरिमा को बनाए रखता है।इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक'; इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय; अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद के महासचिव श्री श्याम परांदे के साथ देश-विदेश से आए विद्वान, शिक्षाविद, भाषाविद, शोधकर्ता और प्रतिनिधि उपस्थित थे। -
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज सुषमा स्वराज भवन, प्रवासी भारतीय केंद्र, नई दिल्ली में समग्र शिक्षा 3.0 पर हितधारकों के साथ 'नए सिरे से समग्र शिक्षा की परिकल्पना’ शीर्षक संबंधी एक दिवसीय परामर्श बैठक की अध्यक्षता की।इस बैठक का उद्देश्य राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों के साथ सहयोगात्मक विचार-विमर्श के माध्यम से समग्र शिक्षा 3.0 के लिए एक रणनीतिक, परामर्शपूर्ण और कार्यान्वयन योग्य रोडमैप विकसित करना था। चर्चा में उभरती चुनौतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और योजना के अगले चरण में शासन, बुनियादी ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण और छात्र अधिकारों को मजबूत करने के लिए आवश्यक प्राथमिकता वाले उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया।इस बैठक में कौशल विकास एवं उद्यमिता और शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी; विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता सचिव श्री संजय कुमार; उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी; मंत्रालय के अपर एवं संयुक्त सचिव; 11 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य शिक्षा सचिव और समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक (एसपीडी); विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि तथा शिक्षा क्षेत्र के प्रख्यात विशेषज्ञ शामिल हुए।इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का विजन सामने रखा है, जो तभी साकार हो सकता है जब भारत के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो और देश में कक्षा बारहवीं तक शत-प्रतिशत नामांकन हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीखने संबंधी खाइयों को पाटना, स्कूल छोड़ने वालों की संख्या को कम करना, अधिगम एवं पोषण परिणामों में सुधार करना, शिक्षकों की क्षमता को मजबूत करना, महत्वपूर्ण कौशलों को बढ़ावा देना और 'अमृत पीढ़ी' को मैकाले की मानसिकता से आगे ले जाना- ये सभी सशक्त मानव पूंजी के निर्माण की साझा जिम्मेदारियां हैं।केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि मंच पर साझा किए सहयोगात्मक विचार-विमर्श और नवोन्मेषी सुझाव विद्यालयी शिक्षा इकोसिस्टम को मजबूत करने तथा समग्र शिक्षा की नए सिरे से परिकल्पना कर उसे परिणामोन्मुख, वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी, भारतीयता में निहित और विद्यार्थियों की विविध आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने में सहायक होंगे। उन्होंने जोर दिया कि विद्यार्थियों के समग्र विकास को बढ़ावा देने और प्रौद्योगिकी के सार्थक एकीकरण के माध्यम से ज्ञान तक पहुंचने का विस्तार करने के लिए विद्यालयों को एक बार फिर समाज के भरोसे सौंपना आवश्यक है।
समग्र शिक्षा के अगले चरण का जिक्र करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय विकास नीति 2020 के लागू होने के पांच साल बाद हम राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप शैक्षिक सुधार के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने सभी हितधारकों से शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए एक मजबूत और समग्र वार्षिक योजना तैयार करने और इसे एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का आहवान किया, ये कहते हुए कि विचारों का समन्वय सामूहिक क्षमता को सुदृढ़ करेगा। श्री प्रधान ने शैक्षणिक विशेषज्ञों, क्षेत्रीय (सेक्टोरल) मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों और 11 भागीदार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी और बहुमूल्य सुझावों की भी सराहना की।अपने संबोधन में श्री जयंत चौधरी ने कहा कि योजनाएँ तभी सबसे अधिक सफल होती हैं, जब उन्हें विद्यालयों और राज्यों की वास्तविकताओं पर आधारित जमीनी स्तर के दृष्टिकोण से तैयार किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि समग्र शिक्षा 3.0 इसी भावना को दर्शाती है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति की व्यापक और क्रियात्मक अभिव्यक्ति है, जहाँ विद्यालय बदलाव के कारक के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि बहुविषयक शिक्षा ढांचे में कौशल विकास, व्यावसायिक मार्ग, डिजिटल अधिगम और समावेशन को समाहित कर समग्र शिक्षा सुधार से आगे बढ़ते हुए विद्यार्थियों को कार्य, जीवन और तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करती है।इस अवसर पर विद्यालयी शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अपर सचिव श्री धीरज साहू द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इसमें समग्र शिक्षा और एनईपी नई नीति 2020 के अंतर्गत हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला गया, साथ ही आगामी वर्षों के लिए एक रूपरेखा और महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए गए। प्रमुख फोकस क्षेत्रों में पहुंच, समानता, गुणवत्ता, शिक्षक क्षमता निर्माण, डिजिटल शिक्षा और परिणाम-आधारित अधिगम आदि शामिल है।समग्र शिक्षा विद्यालयी शिक्षा के लिए एक एकीकृत, केंद्र प्रायोजित योजना है, जो विद्यालयी शिक्षा के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाकर एक आदर्श बदलाव को चिन्हित करती है और जिसमें प्री-प्राइमरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी स्तर तक के पूरे शैक्षिक क्रम को बिना किसी खंडन के शामिल किया जाता है। -
नई दिल्ली। आनुवंशिक और दुर्लभ रोगों से निपटने में पहले रोगों की प्रारंभिक पहचान करने और किफायतीपन दो सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं। इस बात की चर्चा करते हुए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान के लिए स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री तथा पीएमओ, अंतरिक्ष विभाग और परमाणु ऊर्जा विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि भारत अब जीनोमिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और निवारक स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए वैज्ञानिक और आर्थिक रूप से सक्षम है। श्री सिंह डीबीटी-ब्रिक डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नोस्टिक्स सेंटर (सीडीएफडी), हैदराबाद के अपने दौरे के दौरान बोल रहे थे। यहाँ उन्होंने नेशनल स्किल डेवलपमेंट सेंटर, समर्थ का शिलान्यास किया और आईडिया-एनए ब्रिक-सीडीएफडी टेक्नोलॉजी इंक्यूबेटर का भी उद्घाटन किया।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्व के दशकों में भारत मुख्य रूप से संक्रामक रोगों से जूझ रहा था, परअब देश स्वास्थ्य रक्षा के भविष्योन्मुखी चरण में प्रवेश कर चुका है जहाँ आणविक निदान, जीनोम सीक्वेंसिंग और व्यक्तिगत चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा का केंद्र बन रही हैं। उन्होंने नोट किया कि सीडीएफडी जैसे संस्थान प्रयोगशाला अनुसंधान के वास्तविक जीवन की नैदानिक परिणामों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सरकार की नीतिगत दिशा को रेखांकित करते हुए, मंत्री ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अभूतपूर्व प्राथमिकता मिली है, जिसका लाल किले की प्राचीरों से बार-बार जोर दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान बायो-ई3 नीति की घोषणा का स्मरण किया, जिसे उन्होंने देश भर के वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स और युवा नवोन्मेषकों में व्यापक रुचि जगाने वाले उत्प्रेरक के रूप में वर्णित किया।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत जीनोमिक्स-नेतृत्व वाले प्रयासों में तेजी से प्रगति कर रहा है, जिसमें बड़े पैमाने पर जीनोम सीक्वेंसिंग, बाल चिकित्सा आनुवंशिक रोग कार्यक्रम और हेमोफीलिया जैसे क्षेत्रों में अग्रणी कार्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये प्रयास स्वास्थ्य प्रणाली को व्यक्तिगत उपचार के युग के लिए तैयार कर रहे हैं, जहाँ समान स्थितियों वाले रोगी अलग-अलग चिकित्सकीय दृष्टिकोणों की आवश्यकता रख सकते हैं।दुर्लभ रोगों के मुद्दे का उल्लेख करते हुए, मंत्री ने कहा कि 2021 में भारत की पहली राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति का परिचय सरकार के दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव था, जो दूरदृष्टि और वैज्ञानिक इनपुट्स के प्रति खुलापन दर्शाता है। उन्होंने जोर दिया कि पहचान केवल पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के लिए निरंतर उपचार को भी किफायती बनाना चाहिए।मंत्री ने सरकार द्वारा प्रोत्साहित एकीकृत स्वास्थ्य मॉडल के बारे में भी बात की, जिसमें आयुष मंत्रालय के माध्यम से पारंपरिक प्रणालियों का संस्थाकरण और योग को निवारक स्वास्थ्य उपकरण के रूप में वैश्विक मान्यता शामिल है। उन्होंने कहा कि कल्याणकारी प्रथाओं का आधुनिक चिकित्सा के साथ साक्ष्य-आधारित एकीकरण जीवनशैली और चयापचय विकारों के प्रबंधन में सकारात्मक परिणाम दिखा चुका है।अपने दौरे के दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीडीएफडी में चल रहे अनुसंधान और नवाचार गतिविधियों की समीक्षा की और जीनोम सीक्वेंसिंग कार्यक्रमों तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से आउटरीच प्रयासों जैसे पहल की सराहना की। मंत्री ने कहा कि विज्ञान को नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं के लिए सुलभ भाषा में संप्रेषित करना जैव प्रौद्योगिकी में विश्वास और रुचि निर्माण के लिए आवश्यक है।भारत की बढ़ती जैव-आर्थिक स्थिति को रेखांकित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्षों में बायोटेक स्टार्टअप्स की संख्या कई गुना बढ़ गई है, जबकि इस क्षेत्र का अर्थव्यवस्था में योगदान भी तेजी से बढ़ा बढ़ा है। उन्होंने जोड़ा कि बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन काउंसिल (ब्रिक) के गठन ने संस्थानों के बीच समन्वय को मजबूत किया है, जिससे उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान और उद्योग सहयोग को बढ़ावा मिला है।मंत्री ने टीकों और निवारक स्वास्थ्य सेवा में भारत के नेतृत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी नवाचार अब राष्ट्रीय स्तर पर तैनात किए जा रहे हैं और वैश्विक रूप से साझा किए जा रहे हैं, जो देश की वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में भूमिका को मजबूत कर रहे हैं।अपने संबोधन के समापन पर, मंत्री ने कहा कि भारत की लगभग 70 प्रतिशत आबादी 40 वर्ष से कम आयु की होने के साथ, प्रारंभिक निदान और रोकथाम के माध्यम से स्वास्थ्य में निवेश एक राष्ट्रीय अनिवार्यता है। उन्होंने सीडीएफडी पर हो रहे कार्य पर संतुष्टि व्यक्त की और कहा कि ऐसे संस्थान एक स्वस्थ, मजबूत और भविष्य के लिए तैयार भारत का निर्माण करने में सार्थक योगदान दे रहे हैं। -
नई दिल्ली। नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण के अंतर्गत, वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में पांच सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का संचालन शुरू होना, विभिन्न राज्यों में प्रदूषण नियंत्रण और नदी पुनर्जीवन प्रयासों को सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इस वित्त वर्ष के दौरान अब तक 9 परियोजनाओं को चालू किया जा चुका है जिससे प्रमुख शहरी केंद्रों में सीवेज उपचार क्षमता में सुधार हुआ है। दूसरी तिमाही तक, उधम सिंह नगर (उत्तराखंड), मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश), महेशतला (पश्चिम बंगाल) और जंगीपुर (पश्चिम बंगाल) में परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं।
इन पांच परियोजनाओं के चालू होने के साथ ही नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत चालू की गई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कुल क्षमता 3,976 एमएलडी तक पहुंच गई है जबकि चालू किए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की कुल संख्या अब 173 हो गई है। ये उपलब्धियां नदियों में बिना शोधन के सीवेज के प्रवाह को रोकने और शहरी स्वच्छता सुविधा के ढांचे को बेहतर बनाने के मिशन के मुख्य उद्देश्य को मजबूती प्रदान करती हैं।उत्तर प्रदेश के शुक्लागंज में 65 करोड़ रुपये की लागत से विकसित 5 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन शुरू होने से प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों को महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिला है। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत लागू इस परियोजना में सीक्वेंशियल बैच रिएक्टर (एसबीआर) तकनीक का उपयोग किया गया है। इस परियोजना से लगभग तीन लाख लोगों को लाभ मिलेगा, सीवेज का प्रभावी रूप से अवरोधन और डायवर्जन सुनिश्चित हो सकेगा और गंगा नदी में प्रदूषक तत्वों के बहाव पर रोक लगाई जा सकेगी।उत्तर प्रदेश का आगरा, जो यमुना बेसिन का एक महत्वपूर्ण शहर है, वहां प्रदूषण नियंत्रण के अंतर्गत आगरा परियोजना के तहत तीसरी तिमाही में 31 एमएलडी और 35 एमएलडी क्षमता वाले दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) शुरू किए गए हैं। 842 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत इस परियोजना में कुल 13 एसटीपी के जरिए 177.6 एमएलडी की संयुक्त क्षमता विकसित की गई है। यह परियोजना एसबीआर तकनीकी का उपयोग करते हुए एचएएम मॉडल पर आधारित है। इसके माध्यम से लगभग 25 लाख लोगों को लाभ मिलेगा, यमुना नदी में अनुपचारित सीवेज का प्रवाह काफी हद तक कम होगा और शहर की स्वच्छता में उल्लेखनीय सुधार होगा।पवित्र वाराणसी शहर में, अस्सी-बीएचयू क्षेत्र में 55 एमएलडी की क्षमता वाला एक एसटीपी संचालन में आया है। इस परियोजना को 308 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृति दी गई है। एसबीआर तकनीक पर आधारित और डीबीओटी मॉडल के तहत तैयार की गई यह परियोजना करीब 18 लाख लोगों की आबादी को सेवा प्रदान करेगी। इस संयंत्र के संचालन से गंगा नदी को सीवेज प्रदूषण से बचाने और शहर में अपशिष्ट जल प्रबंधन को अधिक सुदृढ़ बनाने में अहम भूमिका निभाने की संभावना है।पश्चिम बंगाल के उत्तर बैरकपुर में, तीसरी तिमाही के दौरान 154 करोड़ रुपए की स्वीकृत परियोजना के तहत 30 एमएलडी क्षमता वाला एक एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) शुरू किया गया है। यह परियोजना दो एसटीपी की कुल नियोजित क्षमता 38 एमएलडी में से एक है। एचएएम मॉडल पर आधारित इस परियोजना को एनजीटी के मानकों के अनुसार डिज़ाइन किया गया है। इसके माध्यम से लगभग 2.2 लाख लोगों को लाभ मिलेगा, क्षेत्र में स्वच्छता में सुधार होगा और गंगा नदी में अनुपचारित सीवेज का प्रवाह रोकने में मदद मिलेगी।इसके अलावा, बिहार में पटना के कंकरबाग स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, जिसे पहले 15 एमएलडी क्षमता के तहत आंशिक रूप से चालू किया गया था, अब वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही तक इसकी क्षमता बढ़ाकर 30 एमएलडी कर दी गई है। इससे शहर के सीवेज ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूती मिलेगी जिससे गंगा नदी के तटों पर प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को महत्वपूर्ण सहयोग मिलेगा।ये उपलब्धियां स्वच्छ नदियों और बेहतर शहरी स्वच्छता हासिल करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाती हैं। साथ ही सतत और समग्र नदी पुनर्जीवन के मिशन के मुख्य उद्देश्य को और अधिक सुदृढ़ बनाती हैं। - -प्रधानमंत्री शौर्य यात्रा में भाग लेंगे-इस यात्रा में 108 घोड़ों की प्रतीकात्मक शोभायात्रा निकाली जाएगी, यह वीरता और बलिदान का प्रतीक है-यह कार्यक्रम सोमनाथ मंदिर पर प्रथम आक्रमण के बाद से अटूट भावना और सभ्यतागत निरंतरता के 1000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है-प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और उत्सव के लिए उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है-प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा अर्चना करेंगे-प्रधानमंत्री मोदी सोमनाथ मंदिर में ओंकार मंत्र के जाप में भी भाग लेंगेनई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 10-11 जनवरी 2026 को गुजरात के सोमनाथ की यात्रा पर रहेंगे। श्री मोदी इस दौरान सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री 10 जनवरी को शाम लगभग 8 बजे ओंकार मंत्र का जाप करेंगे और उसके बाद सोमनाथ मंदिर में ड्रोन शो का अवलोकन करेंगे।प्रधानमंत्री 11 जनवरी को सुबह लगभग 9:45 बजे शौर्य यात्रा में भाग लेंगे। यह एक औपचारिक शोभा यात्रा है जो सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति देने वाले अनगिनत योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित की जाती है। शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकलेगा, जो वीरता और बलिदान का प्रतीक होगा। इसके बाद, लगभग 10:15 बजे प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा अर्चना करेंगे। प्रधानमंत्री लगभग 11 बजे सोमनाथ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेंगे और एक जनसभा को संबोधित भी करेंगे।सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, 8 जनवरी को शुरू हुआ। यह पर्व 11 जनवरी 2026 तक चलेगा। सोमनाथ में आयोजित किया जा रहा यह पर्व भारत के उन असंख्य नागरिकों की स्मृति में मनाया जा रहा है, जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए बलिदान दिया और जो आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक चेतना को प्रेरित करते रहेंगे।यह कार्यक्रम 1026 ईस्वी में महमूद गजनी के सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण की 1,000वीं वर्षगांठ की स्मृति में आयोजित किया गया है। सदियों से इसे नष्ट करने के कई बार प्रयास किए जाने के बावजूद, सोमनाथ मंदिर आज भी सुगमता, आस्था और राष्ट्रीय गौरव के एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में मौजूद है। इसका श्रेय इसे इसके प्राचीन वैभव में पुनर्स्थापित करने के सामूहिक संकल्प और प्रयासों को जाता है।सरदार वल्लभ भाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद, मंदिर के जीर्णोद्धार का प्रयास किया गया। इस पुनरुद्धार यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक 1951 का है, जब जीर्णोद्धार किए गए सोमनाथ मंदिर को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में श्रद्धालुओं के लिए औपचारिक रूप से खोला गया। वर्ष 2026 में इस ऐतिहासिक जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूरे होने पर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का विशेष महत्व बढ़ गया है।इस समारोह में देश भर से सैकड़ों संत भाग लेंगे। इसके साथ ही मंदिर परिसर के भीतर 72 घंटे तक लगातार 'ओम' का जाप किया जाएगा।सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में प्रधानमंत्री की भागीदारी भारत की सभ्यता की चिरस्थायी भावना का प्रदर्शन करती है और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहन देने की उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।
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नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के राष्ट्रीय आईईडी डेटा प्रबंधन प्रणाली (एनआईडीएमएस) का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में केन्द्रीय गृह सचिव, आसूचना ब्यूरो (आईबी) के निदेशक, एनएसजी के महानिदेशक, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के महानिदेशक और राज्यों के पुलिस महानिदेशक भी उपस्थित थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गत 6 वर्षों में अनेक प्रकार का डेटा जनरेट कर उसे व्यवस्थित तरीके से एकत्रित करने का महत्वपूर्ण काम हुआ है। उन्होंने कहा कि एनआईडीएमएस आगामी दिनों में देश में होने वाली सभी प्रकार की आतंकवादी घटनाओं की जांच और उनके विभिन्न पहलुओं के विश्लेषण में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। साथ ही, एनआईडीएमएस आतंकवाद के विरुद्ध नेक्स्ट जेनरेशन सुरक्षा कवच बनेगा।गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय ने विगत वर्षों में विभिन्न प्रकार के डेटा सृजित किए हैं। अब हम इन सभी डेटा स्रोतों को एक-दूसरे से जोड़ने और उनके विश्लेषण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एक उन्नत सॉफ्टवेयर विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनआईडीएमएस की आज की यह शुरुआत इस प्रक्रिया को गति प्रदान करेगी और देश को आतंकवाद से सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी।अमित शाह ने कहा कि आज शुरू हो रहे एनआईडीएमएस से एनआईए, देशभर की एटीएस, राज्यों की पुलिस और सभी सीएपीएफ को एक वृहद, एकीकृत और ऑनलाइन डेटा प्लेटफॉर्म उपलब्ध होगा, जो दो-तरफा (टू-वे) होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थान पर हुए विस्फोट या आईईडी संबंधी घटना का डेटा इस सिस्टम में शामिल किया जा सकेगा। इस डेटा का उपयोग करके हर राज्य में जांच के दौरान आवश्यक गाइडेंस प्राप्त हो सकेगी। उन्होंने कहा कि एनआईडीएमएस आतंकी गतिविधियों की जांच, विस्फोटों के ट्रेंड समझने और उनके खिलाफ प्रभावी रणनीति बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि एनएसजी के पास जो डेटाबेस उपलब्ध है, उसमें 1999 से लेकर अब तक सभी बम विस्फोटों से संबंधित डेटा संग्रहीत है। उन्होंने कहा कि एनआईडीएमएस के माध्यम से यह डेटा अब देशभर की पुलिस और संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध होगा। एनआईडीएमएस देश में अब तक हुए बम विस्फोटों के पैटर्न, काम करने का ढंग और इस्तेमाल हुए विस्फोटकों का सटीक विश्लेषण करने का मजबूत प्लेटफॉर्म बनेगा।अमित शाह ने कहा कि एनआईडीएमएस एक सुरक्षित राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से देशभर की बम विस्फोट संबंधी घटनाओं का संगठित रूप से सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा। यह प्लेटफॉर्म आईईडी संबंधित डेटा को संकलित करने, मानकीकृत करने, संयोजित करने और सुरक्षित तरीके से साझा करने की प्रक्रिया को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि एनआईडीएमएस इन्वेस्टिगेशन एजेंसियों और एंटी टेरर ऑर्गनाइजेशन के लिए अलग-अलग केस फाइलों में बिखरे डेटा का सिंगल क्लिक एक्सेस विंडो होगा। इससे केन्द्र एवं राज्यों की जांच एजेंसियों, आतंकवाद-निरोधक संगठनों और सभी सीएपीएफ को डेटा तत्काल उपलब्ध हो सकेगा। अमित शाह ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म से हमारे देश के आंतरिक सुरक्षा तंत्र को तीन प्रमुख तरीकों से लाभ हो सकेगा।गृह मंत्री ने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक डेटा भंडार’ के माध्यम से अलग-अलग विभागों में बिखरा डेटा अब एक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में हर पुलिस इकाई को उपलब्ध होगा। इससे अभियोजन की गति और गुणवत्ता दोनों में बहुत अच्छा और सकारात्मक बदलाव आएगा और हम पैटर्न को भी आसानी से समझ पाएंगे। उन्होंने कहा कि पैटर्न को समझने से वैज्ञानिक साक्ष्य आधारित अभियोजन संभव होगा। साथ ही, एजेंसियों के बीच समन्वय भी बेहतर तरीके से स्थापित होगा। - नयी दिल्ली । दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में भारी पुलिस बल, ड्रोन के जरिये निगरानी, जगह-जगह लगाए गए अवरोधकों तथा सुरक्षा संबंधी अन्य तैयारियों के बीच जुमे की नमाज अदा की गई।स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों को बहाल करने का आग्रह किया।लोगों का कहना था कि प्रतिबंधों के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।हाल ही में हुई पथराव की घटना के बाद जुमे की नमाज के मद्देनजर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।बड़ी संख्या में पुलिस व अर्धसैनिक बलों के जवान न केवल मस्जिदों के पास बल्कि संकरी गलियों और प्रमुख चौराहों पर भी तैनात दिखाई दिये।वरिष्ठ अधिकारी जमीनी स्तर पर व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं।पुलिस के ड्रोन इलाके के ऊपर मंडरा रहे हैं और सीसीटीवी कैमरों से आवाजाही पर नजर रखी जा रही है।साथ ही, अतिक्रमण मुक्त कराए गये स्थल पर मलबा हटाने का काम भी जारी है।निवासियों ने बताया कि सुरक्षाकर्मियों की गलियों में तैनाती के कारण लोग दबी आवाज में बात कर रहे हैं। आवागमन को नियंत्रित करने के लिए कई जगहों पर अवरोधक लगाए गए हैं।स्थानीय लोगों ने बताया कि भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद नमाज अदा करने पर कोई प्रतिबंध नहीं था और स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही। कई निवासियों ने हालांकि मौजूदा माहौल के कारण असहजता का हवाला देते हुए इलाके की बड़ी मस्जिदों के बजाय अपने घरों के पास की मस्जिदों में जाना पसंद किया।दिल्ली पुलिस ने तुर्कमान गेट पर हुई पथराव की घटना के संबंध में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच जारी है। इस बीच, स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि शांति बनी रहेगी ताकि प्रतिबंधों में ढील दी जा सके और दुकानें फिर से खुल सकें।
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नई दिल्ली। गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया जा रहा है। 11 जनवरी तक चलने वाले पर्व में अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को 500 से अधिक साधु संतों ने डाक डमरू बजाकर शौर्य यात्रा निकाली। ‘हर-हर महादेव’ के नारों ने सोमनाथ मंदिर में भक्तिमय माहौल बना दिया।
गिरनार तीर्थस्थल से शुक्रवार को बड़ी संख्या में साधु-संत भगवान सोमनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे। सोमनाथ के शंख चौक से मंदिर तक साधु-संत की शौर्य यात्रा में डमरू की ध्वनि गूंज रही थी। इसी बीच, राज्य के सामाजिक और न्याय अधिकारिता मंत्री प्रद्युम्न वाजा और सांसद राजेश चुडासमा समेत कई लोग संतों की शौर्य रैली में शामिल हुए।इस मौके पर साधु पियुदान गढ़वी ने कहा कि यह गुजरात का बेहद अनोखा पर्व है, जो इस समय सोमनाथ में मनाया जा रहा है। यहां शौर्य यात्रा निकाली गई थी। 11 जनवरी तक यहां भजन और ‘ओंकार’ जाप के साथ सभी को आस्था से जोड़ने का कार्य चल रहा है।उन्होंने बताया कि यहां संतों की उपस्थिति है और शौर्य गाथा का गायन होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्म सबसे अलग है। यह सभी को अपने साथ लेकर चलता है। हमारे जैसा धर्म कोई नहीं हो सकता है।महंत भारद्वाज नंद गिरी महाराज ने कहा कि सोमनाथ में ‘मिनी कुंभ’ जैसा माहौल है। यहां ‘सोमनाथ स्वाभिमान’ पर्व मनाया जा रहा है। हजारों पंडित और साधु-संत कार्यक्रम का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर हमारी आस्था का प्रतीक है। सोमनाथ मंदिर पर बार-बार हमले हुए, लेकिन यह मंदिर बार-बार उठ खड़ा हुआ। वर्तमान में हिंदुत्ववादी सरकार का समय है। आज हम कह सकते हैं कि भारत ‘हिंदू राष्ट्र’ बनने के लिए तैयार है।बता दें कि सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के एक हजार साल होने पर यह ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया जा रहा है। 11 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी भी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई बैराबी-सैरांग रेल लाइन के उद्घाटन के बाद मिजोरम सरकार के सैरांग रेलवे स्टेशन कार्यालय से अब तक 22,500 से अधिक इनर लाइन परमिट (आईएलपी) जारी किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने आज शुक्रवार को यह जानकारी दी।
आईएलपी एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है, जिसे भारतीय नागरिकों और गैर-स्थानीय लोगों को पूर्वोत्तर के संरक्षित क्षेत्रों, जिनमें मिजोरम भी शामिल है, में प्रवेश के लिए जारी किया जाता है। मिजोरम गृह विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, 13 सितंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 के बीच सैरांग रेलवे स्टेशन स्थित आधिकारिक काउंटर से पर्यटकों, पेशेवरों, व्यापारियों, प्रवासी श्रमिकों और अन्य श्रेणियों के आगंतुकों को 22,500 से अधिक आईएलपी जारी किए गए हैं।प्रधानमंत्री द्वारा 13 सितंबर को 51.38 किलोमीटर लंबी बैराबी (दक्षिणी असम के पास)–सैरांग (आइजोल के पास) रेल खंड का उद्घाटन किए जाने के बाद गृह विभाग ने सैरांग रेलवे स्टेशन पर आईएलपी काउंटर स्थापित किया था।उसी दिन पीएम मोदी ने आइजोल को नई दिल्ली से जोड़ने वाली राजधानी एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई थी। इसके अलावा, आइजोल को कोलकाता और गुवाहाटी से जोड़ने वाली दो अन्य ट्रेनों का भी शुभारंभ किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, प्रतिदिन औसतन लगभग 400 नए आईएलपी जारी किए जा रहे हैं, क्योंकि सैरांग रेलवे स्टेशन पर रोजाना आमतौर पर दो यात्री ट्रेनें पहुंचती हैं।अधिकांश आगंतुक दिल्ली, पश्चिम बंगाल और दक्षिणी राज्यों से आ रहे हैं, जबकि सबसे ज्यादा संख्या पड़ोसी असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से आने वालों की है। हालांकि, अधिकारी ने यह भी बताया कि सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) और आईएलपी काउंटर में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण कानून-व्यवस्था बनाए रखने, आईएलपी जारी करने और परमिट सत्यापन में गंभीर चुनौतियां सामने आ रही हैं।आईएलपी प्रणाली का उद्देश्य स्थानीय और आदिवासी लोगों की पहचान और अस्तित्व की रक्षा करना है। वर्तमान में यह व्यवस्था मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर में लागू है। कई संगठनों द्वारा मेघालय और त्रिपुरा में भी आईएलपी लागू करने की मांग की जा रही है।आईएलपी व्यवस्था बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत संचालित होती है, जिसे 1875 में ब्रिटिश सरकार ने अधिसूचित किया था। इसके तहत भारतीय नागरिकों को सीमित अवधि और विशेष उद्देश्य के लिए आईएलपी लागू राज्यों में प्रवेश की अनुमति दी जाती है।मिजोरम की यात्रा के लिए आईएलपी आइजोल के लेंगपुई हवाई अड्डे के अलावा शिलांग, गुवाहाटी, सिलचर, कोलकाता और नई दिल्ली स्थित मिजोरम सरकार के काउंटरों से भी प्राप्त किए जा सकते हैं। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत पर दुनिया का विश्वास ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि भारतीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मॉडल नैतिक, निष्पक्ष और पारदर्शी होने के साथ-साथ डेटा गोपनीयता सिद्धांतों पर आधारित हो। उन्होंने यह भी कहा कि स्टार्टअप को इस देश से वैश्विक नेतृत्व की दिशा में काम करना चाहिए और उल्लेख किया कि भारत वहनीय एआई, समावेशी एआई और मितव्ययी नवाचार को विश्व स्तर पर बढ़ावा दे सकता है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' से पहले, भारतीय एआई स्टार्टअप के साथ एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए मोदी ने सुझाव दिया कि भारतीय एआई मॉडल विशिष्ट होने चाहिए और उन्हें स्थानीय और स्वदेशी सामग्री तथा क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता उद्यमी देश के भविष्य के सह-निर्माता हैं।
अगले महीने आयोजित होने वाले 'एआई फॉर ऑल: ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज' शिखर सम्मेलन के लिए अर्हता प्राप्त कर चुके 12 भारतीय एआई स्टार्टअप ने बैठक में भाग लिया तथा अपने विचारों और कार्य से अवगत कराया। बाद में, 'एक्स' पर एक पोस्ट में, मोदी ने कहा कि उन्होंने भारतीय स्टार्टअप जगत के युवाओं के साथ एआई पर चर्चा की। उन्होंने कहा, ‘‘यह एक यादगार और ज्ञानवर्धक बातचीत थी, जिसमें उन्होंने एआई की दुनिया में भारत के परिवर्तन के बारे में अपना दृष्टिकोण और कार्य साझा किया। यह प्रशंसनीय है कि ये स्टार्टअप ई-कॉमर्स, मार्केटिंग, इंजीनियरिंग सिमुलेशन, सामग्री अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा अनुसंधान जैसे विविध क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने इस बात पर चर्चा की कि एआई का उपयोग समाज कल्याण के लिए कैसे किया जा सकता है। बैठक के दौरान, मोदी ने समाज में परिवर्तन लाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के महत्व को रेखांकित किया।उन्होंने कहा कि भारत अगले महीने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट' शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसके माध्यम से देश प्रौद्योगिकी क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत एआई का लाभ उठाकर परिवर्तन लाने का प्रयास कर रहा है।उन्होंने कहा कि स्टार्टअप और एआई उद्यमी भारत के भविष्य के सह-निर्माता हैं। उन्होंने कहा कि देश में नवाचार और व्यापक कार्यान्वयन, दोनों की अपार क्षमता है। मोदी ने कहा कि भारत को दुनिया के सामने एक ऐसा अनूठा एआई मॉडल प्रस्तुत करना चाहिए जो 'मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड' की भावना को प्रतिबिंबित करे। ये स्टार्टअप विविध क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जिनमें भारतीय भाषा फाउंडेशन मॉडल, बहुभाषी एलएलएम, ‘स्पीच-टू-टेक्स्ट, टेक्स्ट-टू-ऑडियो और टेक्स्ट-टू-वीडियो' के अलावा ई-कॉमर्स, मार्केटिंग और व्यक्तिगत सामग्री निर्माण के लिए जनरेटिव एआई का उपयोग करके 3डी सामग्री तैयार करना शामिल हैं। इनमें इंजीनियरिंग सिमुलेशन और विभिन्न उद्योगों में डेटा-संचालित निर्णय लेने के लिए उन्नत विश्लेषण तथा स्वास्थ्य जांच और चिकित्सा अनुसंधान आदि शामिल हैं। बैठक में अवतार, भारतजेन, फ्रैक्टल, गान, जेनलूप, ज्ञानी, इंटेलीहेल्थ, सर्वम, शोध एआई, सोकेट एआई, टेक महिंद्रा और ज़ेंटिक सहित भारतीय एआई स्टार्टअप के सीईओ और प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी उपस्थित थे। -
नयी दिल्ली. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बृहस्पतिवार को रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और 2026 में 52 हफ्तों में 52 बड़े सुधार लागू करने की योजना का ऐलान किया। रेल मंत्रालय के प्रेस नोट के मुताबिक, बैठक में नए साल की भावना और रेलवे में बड़े सुधार लाने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया। चर्चा अवसंरचना विकास, रख-रखाव और क्षमता बढ़ाने की कोशिशों पर केंद्रित रही।
अधिकारियों ने कहा कि यात्री सुविधाओं और परिचालन सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए भारतीय रेलवे में बड़े सुधारों की जरूरत है। ‘52 हफ्तों में 52 सुधार' योजना क्षमता, शासन और सेवा प्रदान करने में प्रणालीगत सुधार पर केंद्रित रहेगी। -
नयी दिल्ली. सभी उत्तरी राज्यों में सर्दी का सितम बृहस्पतिवार को और बढ़ गया, जहां जम्मू-कश्मीर में डल झील और कई अन्य जलस्रोतों में पानी जम गया और राष्ट्रीय राजधानी तथा उत्तर प्रदेश में पारा और नीचे चला गया। अधिकारियों ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भी बर्फीली शीत लहर की स्थिति जारी रही, 13 जिलों में तापमान शून्य से नीचे और चार में शून्य के करीब रहा। जम्मू-कश्मीर में, श्रीनगर सहित कई स्थानों पर मौसम की सबसे ठंडी रात महसूस की गई और अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई है। हाड़ कंपा देने वाली सर्दी की वजह से यहां की प्रसिद्ध डल झील समेत कई जलस्रोतों के किनारे पानी जम गया। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार रात श्रीनगर का न्यूनतम तापमान शून्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जो मंगलवार रात के शून्य से 1.6 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान से 3.5 डिग्री कम है। उन्होंने बताया कि यह शहर में इस मौसम की सबसे ठंडी रात थी और न्यूनतम तापमान इस मौसम के सामान्य से 3.2 डिग्री कम था। उन्होंने बताया कि मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले का पर्यटन स्थल सोनमर्ग जम्मू-कश्मीर में सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां तापमान शून्य से 9.8 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के गुलमर्ग में रात का तापमान शून्य से 7.6 डिग्री सेल्सियस से कम होकर शून्य से 9.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। कश्मीर घाटी इस समय अत्यधिक ठंड की 40 दिन की अवधि 'चिल्ला-ए-कलां' से गुजर रही है, जिस दौरान रात का तापमान अक्सर हिमांक बिंदु से कई डिग्री नीचे चला जाता है, और बर्फबारी की संभावना सबसे अधिक होती है। हालांकि, इस मौसम में घाटी के मैदानी इलाकों में अब तक कोई बर्फबारी नहीं हुई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि 20 जनवरी तक मौसम शुष्क लेकिन बादल छाए रहने की संभावना है। इसमें कहा गया है कि 10 जनवरी तक घाटी में रात के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट देखी जाएगी।
हिमाचल प्रदेश में कुकुमसेरी शून्य से 11.2 डिग्री सेल्सियस नीचे न्यूनतम तापमान के साथ सबसे ठंडा रहा, जबकि ताबो में न्यूनतम तापमान शून्य से 8.9 डिग्री नीचे दर्ज किया गया। 34 स्टेशनों में से 13 में न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री से नीचे दर्ज किया गया, जबकि सात स्टेशनों का डेटा उपलब्ध नहीं था। बाकी 10 स्टेशनों पर पारा तीन से सात डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। स्थानीय मौसम विज्ञान केंद्र ने नौ से 12 जनवरी तक ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, कांगड़ा, मंडी, सोलन और सिरमौर में अलग-अलग स्थानों पर घने कोहरे का 'येलो' अलर्ट जारी किया है। मौसम कार्यालय ने अगले चार दिनों तक राज्य में शुष्क मौसम और अगले तीन से चार दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में दो से चार डिग्री की क्रमिक वृद्धि की भविष्यवाणी की है। इसमें कहा गया है कि अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है, जिससे अगले चार से पांच दिनों के दौरान वृद्धि का रुख बना रहेगा। राष्ट्रीय राजधानी में सभी स्टेशनों पर तापमान सामान्य से नीचे रहने के कारण कड़ाके की ठंड रही और दिल्ली में अधिकतम तापमान 17.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो मौसमी औसत से लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस कम है। न्यूनतम तापमान गिरकर 5.8 डिग्री सेल्सियस हो गया, जो इस साल अब तक दर्ज किया गया सबसे कम और सर्दियों के मौसम का तीसरा सबसे कम तापमान है। न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.1 डिग्री सेल्सियस कम रहा। न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस के साथ पालम सबसे ठंडा स्थान रहा, इसके बाद लोधी रोड 6.1 डिग्री सेल्सियस पर रहा, जबकि सफदरजंग, रिज और आयानगर सभी में 5.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। आईएमडी के अनुसार, बृहस्पतिवार सुबह घने कोहरे के कारण सफदरजंग और पालम में दृश्यता कम हो गई, जिससे सफदरजंग में दृश्यता घटकर 500 मीटर और पालम में 100 मीटर रह गई, लेकिन सुबह आठ बजे के आसपास इसमें धीरे-धीरे सुधार हुआ। मौसम कार्यालय ने शुक्रवार के लिए न्यूनतम तापमान लगभग छह डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान लगभग 17 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान लगाया है और घने कोहरे के लिए 'येलो' अलर्ट भी जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, राज्य की राजधानी में अधिकतम तापमान 16.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.5 डिग्री कम है, जबकि न्यूनतम तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.2 डिग्री कम है। आईएमडी ने कहा कि शुक्रवार को पूर्वाह्न के दौरान लखनऊ और आसपास के इलाकों में हल्के से मध्यम कोहरा छाने की संभावना है, इसके बाद दिन में आसमान साफ रहेगा। आईएमडी ने कहा कि उत्तरी पंजाब पर केंद्रित पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण 11 जनवरी तक ठंड और कोहरे की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने के संकेत हैं। विभाग को उम्मीद है कि कोहरे के घनत्व में धीरे-धीरे कमी आएगी और तापमान में वृद्धि होगी, जिससे चल रही ठंड से अल्पकालिक राहत मिलेगी। हरियाणा और पंजाब के कई हिस्सों में भी ठंड की स्थिति बनी रही, नारनौल में न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक हरियाणा में नारनौल सबसे ठंडा स्थान रहा। दोनों राज्यों की साझा राजधानी चंडीगढ़ में न्यूनतम तापमान 7.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम विभाग ने कहा कि राजस्थान में कई हिस्सों में शीतलहर जारी है। सीकर जिला 2.5 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान के साथ सबसे ठंडा रहा। जयपुर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमश: 17.6 डिग्री सेल्सियस और 4.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य भर में कई स्थानों पर घना से बहुत घना कोहरा छाया रहा और कई क्षेत्रों में शीत लहर और गंभीर शीत दिवस की स्थिति बनी रही। इसमें कहा गया है कि अगले सप्ताह तक राज्य भर में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। -
नई दिल्ली। वर्ष 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले बड़े हमले के 1,000 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को सोमनाथ मंदिर की भव्यता और आकर्षण को प्रदर्शित करने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देशवासियों से 8 जनवरी से 11 जनवरी तक सोमनाथ में मनाए जा रहे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ से जुड़ने की अपील की।गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सोमनाथ महादेव मंदिर ज्योतिर्लिंग होने के साथ-साथ सनातन संस्कृति व आध्यात्मिक गौरव की अक्षुण्ण विरासत भी है। बीते हजार वर्षों में इस मंदिर पर कई हमले हुए, लेकिन यह हर बार उठ खड़ा हुआ। यह हमारी सभ्यतागत अमरता और कभी हार न मानने की दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है। इसे मिटाने की कोशिश करने वालों के नामो-निशान मिट गए, लेकिन यह मंदिर आज और भी वैभवता के साथ खड़ा है।उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर की ऐतिहासिकता बताती है कि ऐसे हमले हमें क्षति पहुंचा सकते हैं, लेकिन मिटा नहीं सकते, क्योंकि हर बार और भी भव्यता और दिव्यता के साथ उठ खड़ा होना सनातन संस्कृति की मूल प्रवृत्ति है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले के एक हजार वर्ष होने पर ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाने का निर्णय लिया है ताकि हमारी भावी पीढ़ी तक सनातन संस्कृति की अविरलता और जीवटता का संदेश पहुंचाया जा सके। मेरा सौभाग्य है कि मैं इस पवित्र मंदिर का ट्रस्टी हूं। मेरी सभी देशवासियों से अपील है कि आप भी आज से 11 जनवरी तक चलने वाले सोमनाथ स्वाभिमान पर्व से जुड़ें।गृह मंत्री अमित शाह द्वारा एक्स पर शेयर किए गए वीडियो में दिखाया गया कि कैसे सोमनाथ मंदिर पर विदेशी आक्रांताओं ने बार-बार हमले किए, कैसे मंदिर को बार-बार लूटा गया और उसको मिटाने का प्रयास किया गया, लेकिन सनातन की आस्था के प्रतीक सोमनाथ मंदिर ने हर बार विदेशी हमलावरों के इरादों पर पानी फेर दिया।सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाने के लिए गुजरात के सोमनाथ मंदिर में सालभर कई कार्यक्रम होंगे। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि 8 से 11 जनवरी तक मंदिर परिसर में कई आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम होंगे। वर्ष 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले बड़े हमले के 1,000 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व आयोजित किया जा रहा है। विदेशी आक्रांताओं ने कई बार इस मंदिर को लूटा और नष्ट किया, लेकिन हर बार इसे बनाया गया। -
नई दिल्ली। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व गुरुवार से शुरू हो गया है, जो ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा समारोह की 75वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। इसके साथ ही पूरे साल होने वाले कई आध्यात्मिक कार्यक्रमों और आयोजनों की शुरुआत भी हो गई है।
मोदी आर्काइव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर 2001 के एक प्रोग्राम की पुरानी तस्वीरें शेयर की हैं, जब मंदिर ने अपनी स्वर्ण जयंती मनाई थी और उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी भी कार्यक्रम में मौजूद थे। यह कार्यक्रम उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की देखरेख में हुआ था।मोदी आर्काइव ने शेयर किया कि 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ मंदिर में एक ऐतिहासिक सभा हुई। इस कार्यक्रम में ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा के सालभर चले स्वर्ण जयंती समारोह का समापन हुआ। यह तारीख सरदार पटेल की जयंती के साथ भी मेल खाती थी, वही लौह पुरुष जिन्होंने 1951 में सबसे पहले सोमनाथ मंदिर के रेनोवेशन की योजना बनाई थी।पोस्ट में आगे बताया गया कि 1026 में सोमनाथ का मंदिर ध्वस्त किया गया था। सोमनाथ मंदिर के भीतर भारत की आत्मा है। सोमनाथ का मंदिर पौराणिक काल से भारत की संस्कृति, श्रद्धा और समृद्धि का प्रतीक रहा है। यह भूमि द्वादश ज्योतिर्लिंग दादा सोमनाथ की एक दिव्य भूमि के रूप में प्रचलित पवित्र भूमि है। सोमनाथ मंदिर राष्ट्र के स्वाभिमान को जागरुक करने वाली भव्य कृति है।इस कार्यक्रम में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद और कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी जैसे दिग्गजों के विजन को याद किया, जिनके समर्पण और लगन से सोमनाथ का पुनर्निर्माण संभव हो पाया। एक भावुक भाषण देते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सोमनाथ मंदिर देश की आत्मा को दर्शाता है और उन्होंने उन ‘वीरों’ को भी याद किया, जिन्होंने विदेशी हमलावरों से 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहले ज्योतिर्लिंग को बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी।उन्होंने कहा कि मेरे जीवन का लक्ष्य सोमनाथ का पुनर्निर्माण है। सरदार पटेल ने हिंदुस्तान को सोमनाथ के रूप में सांस्कृतिक चेतना में जो मंदिर दिया है, उसके लिए न सिर्फ गुजरात बल्कि पूरा देश गौरव अनुभव करता है। आज हम संकल्प करें कि सोमनाथ के मंदिर का पुनर्निर्माण होना ही चाहिए। यह हमारा परम कर्तव्य है। सोमनाथ को शिक्षा, संस्कृति और धर्म के केंद्र के रूप में विकसित करना मेरा संकल्प है। -
नई दिल्ली ।केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। केंद्रीय बजट से पहले हुई यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस मुलाकात के दौरान शिक्षा मंत्री ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी आकांक्षाओं को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ साझा किया। उन्होंने वित्त मंत्री के साथ स्कूली शिक्षा तथा उच्च शिक्षा से जुड़े विषयों पर बात की। उन्होंने स्कूली व उच्च शिक्षा के इकोसिस्टम के समग्र रूपांतरण के लिए विभिन्न विचारों और प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की।
बता दें कि बीते वर्षों के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय बजटीय घोषणाएं की गई हैं। बजट में रिसर्च व बच्चों को शुरुआती स्तर से ही सीखने को लेकर कई प्रावधान किए गए थे। गुरुवार को हुई इस बैठक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बजट में शिक्षा को अच्छे आवंटन की उम्मीद जताई। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि मोदी सरकार की परंपरा के अनुरूप बजट 2026–27 में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में पहले से कहीं अधिक बड़े और साहसिक निवेश देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे निवेश रोजगार-आधारित विकास को गति देंगे।उनका कहना है कि शिक्षा में यह निवेश ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वहीं गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय में स्कूल प्रबंधन विकास समिति–2026 के गठन से संबंधित मसौदा दिशा-निर्देशों पर एक प्रस्तुति की समीक्षा भी की गई। इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की भावना के अनुरूप सरकार विद्यालय प्रशासन को अधिक सहभागी बनाने व स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने शैक्षणिक उद्देश्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने, विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को सशक्त करने तथा विद्यालयी इकोसिस्टम को मजबूत करने की बात कही है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि स्कूल प्रबंधन समितियां (एसएमसी) प्रभावी स्कूल प्रशासन की महत्वपूर्ण उत्प्रेरक हैं। ये समितियां शैक्षणिक परिणामों में सुधार व जवाबदेही बढ़ाने में मदद करती हैं। इसके अलावा शिक्षा में समानता सुनिश्चित करने, अभिभावकों और समुदाय की आवाज को निर्णय प्रक्रिया में शामिल कराने का काम भी करती हैं। साथ ही स्कूल प्रबंधन समितियां विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। - नई दिल्ली। भारतीय एआई स्टार्टअप्स के साथ की राउंडटेबल चर्चा के बाद पीएम मोदी ने गुरुवार को कहा कि स्टार्टअप्स के साथ एआई पर बातचीत यादगार और ज्ञानवर्धक रही। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, “भारतीय स्टार्टअप जगत के युवाओं के साथ एआई पर चर्चा हुई। यह एक यादगार और ज्ञानवर्धक बातचीत थी, जिसमें उन्होंने भारत द्वारा एआई की दुनिया को बदलने के प्रयासों के बारे में अपने दृष्टिकोण और कार्यों को साझा किया। यह सराहनीय है कि ये स्टार्टअप ई-कॉमर्स, मार्केटिंग, इंजीनियरिंग सिमुलेशन, सामग्री अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा अनुसंधान और अन्य विविध क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।”पीएम मोदी ने अपने आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर सुबह भारतीय एआई स्टार्टअप के साथ बैठक की। यह बैठक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले हुई है, जो कि अगले महीने भारत में होने वाला है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वह 12 एआई स्टार्टअप शामिल हुए हैं, जिन्होंने एआई फॉर ऑल: ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज के लिए क्वालीफाई किया है।बैठक में पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि स्टार्टअप और एआई उद्यमी भारत के भविष्य के सह-निर्माता हैं और कहा कि देश में इनोवेशन और बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन दोनों की अपार क्षमता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत को दुनिया के सामने एक ऐसा अनूठा एआई मॉडल प्रस्तुत करना चाहिए जो “मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड” की भावना को दर्शाता हो।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पर दुनिया का भरोसा ही देश की सबसे बड़ी ताकत है। इस कारण भारतीय एआई मॉडल नैतिक, निष्पक्ष, पारदर्शी और डेटा गोपनीयता सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए। साथ ही कहा कि भारत किफायती एआई, समावेशी एआई और किफायती इनोवेशन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दे सकता है।उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भारतीय एआई मॉडल विशिष्ट होने चाहिए और स्थानीय एवं स्वदेशी सामग्री तथा क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने वाले हो। इस बैठक में अवतार, भारतजेन, फ्रैक्टल, गैन, जेनलोप, ज्ञानी, इंटेलीहेल्थ, सर्वम, शोध एआई, सॉकेट एआई, टेक महिंद्रा और जेंटिक सहित भारतीय एआई स्टार्टअप्स के सीईओ, प्रमुख और प्रतिनिधि शामिल हुए। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी बैठक में उपस्थित थे।
- नई दिल्ली। संस्कृति मंत्रालय के तहत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण Archaeological Survey of India (ASI) ने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स Open Network for Digital Commerce (ONDC) पर 170 से ज़्यादा केंद्र संरक्षित स्मारकों और संग्रहालयों के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग शुरू कर दी है।यह पहल एएसआई के स्मारकों और संग्रहालयों तक डिजिटल पहुंच को बहुत बढ़ाती है। इससे भारत और विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए देश के कुछ सबसे मशहूर विरासत स्थलों और संग्रहालयों के प्रवेश टिकट कई डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए आसानी से बुक करना आसान हो जाता है।एएसआई के टिकटिंग सिस्टम को ओपन डिजिटल नेटवर्क पर एकीकृत करके, नागरिक और पर्यटक अलग-अलग एप्लिकेशन के ज़रिए टिकट बुक कर सकते हैं। इससे पहुंच और सुविधा बेहतर होती है, साथ ही इंटरऑपरेबल डिजिटल सिस्टम के ज़रिए सार्वजनिक सेवाओं की पारदर्शी और कुशल डिलीवरी मज़बूत होती है।ओएनडीसी-इनेबल्ड एप्लिकेशन के ज़रिए एएसआई स्मारकों के लिए टिकट बुक करने वाले पर्यटक मौजूदा सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। इसमें भारतीय पर्यटकों के लिए ₹5 और विदेशी नागरिकों के लिए ₹50 की छूट शामिल है।दरअसल, ऑनलाइन बुकिंग से पर्यटक स्मारकों और संग्रहालयों में फिजिकल टिकट की कतारों से बच सकते हैं, जिससे तेज़ी से और आसानी से एंट्री सुनिश्चित होती है। इस इंटीग्रेशन को एनडीएमएल (NSDL डेटाबेस मैनेजमेंट लिमिटेड) ने तकनीकी रूप से संभव बनाया है, जिसने एएसआई के स्मारकों और संग्रहालयों की पूरी इन्वेंट्री को ओएनडीसी नेटवर्क पर जोड़ा है।इसके अलावा, टिकट Highway Delite (वेब, Android और iOS), Pelocal के WhatsApp-आधारित टिकटिंग अनुभव (यूज़र +91 84228 89057 पर “Hi” भेजकर बुकिंग शुरू कर सकते हैं)। यह Abhee by Mondee (Android और iOS) जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। कई और कंज्यूमर-फेसिंग एप्लिकेशन ओएनडीसी नेटवर्क के साथ एकीकरण के अलग-अलग चरणों में हैं।


















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