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- नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था के कृषि, शिक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य देखभाल और विनिर्माण सहित पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का योगदान 2035 तक बढ़कर करीब 550 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई। वियतनाम टाइम्स की रिपोर्ट में पीडब्ल्यूसी इंडिया की एक स्टडी का हवाला देते हुए भारत में एआई के विकास पर बातचीत की गई है।रिपोर्ट में कहा गया कि पीडब्ल्यूसी इंडिया की एआई एज फॉर विकसित भारत स्टडी को दावोस 2026 में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) में पेश किया गया था और इससे भारत की एआई महत्वाकांक्षाओं को एक संरचित और विश्व स्तर पर गूंजने वाला रूप मिला। दावोस मंच से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि देश की एआई रणनीति को दक्षता और विकास से परे लक्ष्यों के साथ आकार दिया जा रहा है और इसमें समावेश, शासन और संस्थागत तत्परता पर विचार किया गया है।स्टडी ने भारत को एक संभावित वैश्विक बेंचमार्क के रूप में स्थापित किया है कि कैसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एआई को सार्वजनिक प्रणालियों और रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों में शामिल करते हुए बड़े पैमाने पर तैनात करना चाहिए। रिपोर्ट में एआई को स्केल करने के लिए एक सिस्टम-स्तरीय प्लेबुक के रूप में एक 3ए2आई ढांचे – एक्सेस, स्वीकृति, एसिमिलेशन, कार्यान्वयन और संस्थागतकरण पर प्रकाश डाला गया है। ‘एक्सेस’ डेटा, डिजिटल बुनियादी ढांचे और कुशल प्रतिभा की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर केंद्रित है जबकि ‘स्वीकृति’ व्यापक रूप से अपनाने के लिए जनता के विश्वास पर जोर देती है।एसिमिलेशन नियमित रूप से पायलटों से परे वास्तविक वर्कफ़्लो में एआई के एकीकरण को संबोधित करता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “एक बार जब ये नींव स्थापित हो जाती है, तो रूपरेखा बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन और दीर्घकालिक संस्थागतकरण की ओर आगे बढ़ती है।” पीडब्ल्यूसी ने कहा कि भारत बड़े पैमाने पर तैनात एआई से परिचालन उत्कृष्टता, स्थिरता, सुशासन, लचीलापन और वित्तीय अनुशासन की उम्मीद कर सकता है।महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने हाल ही में औद्योगिक निवेश के लिए मैत्री जैसे एआई-सक्षम प्लेटफार्मों की ओर इशारा किया है, जहां स्वचालन और डेटा-संचालित प्रक्रियाएं व्यापार करने में आसानी बढ़ा रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, “ऊर्जा क्षेत्र में, एआई का उपयोग करने वाले स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम ने बिजली चोरी के मामलों को उच्च सटीकता के साथ चिह्नित किया है, जिससे वित्तीय अनुशासन में सुधार हुआ है, जबकि स्वास्थ्य सेवा में, एआई-संचालित ट्यूबरकुलोसिस का पता लगाने वाले टूल्स ने अधिसूचना दरों में काफी सुधार किया है, रोग निगरानी को मजबूत किया है।”
- नयी दिल्ली। 'इंडिया वन एयर' के विमान के चालक दल ने 10 जनवरी को ओडिशा के राउरकेला के एक खुले मैदान में विमान उतारने की कोशिश की, लेकिन अंतिम प्रयास के दौरान विमान एक पेड़ और बिजली की तार से टकरा गया, जिसके परिणामस्वरूप विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इस दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और तीन अन्य घायल हुए।वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (एएआईबी) ने बताया कि भुवनेश्वर से राउरकेला जा रही उड़ान में चार यात्री सवार थे, इसी दौरान चालक दल को इंजन में खामी पता चली और उसने निकटतम उपयुक्त स्थान पर आपातकालीन लैंडिंग का निर्णय लिया। रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त हुआ 'सेसना ग्रैंड कारवां 208बीईएक्स' विमान रेडाउंड एविएशन लिमिटेड के स्वामित्व वाला था। ओडिशा के राउरकेला के पास 10 जनवरी को हुए इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। एएआईबी ने इस घटना पर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कोई अंतरिम सिफारिश नहीं की है। एएआईबी ने बताया कि कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (सीवीआर) और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) का डेटा डाउनलोड कर लिया गया है और उसका विश्लेषण किया जा रहा है। उसने कहा कि इंजन को विस्तृत जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।रिपोर्ट में कहा गया है कि विमान रखरखाव रिकॉर्ड, तकनीकी रिकॉर्ड और विमान से संबंधित सभी प्रासंगिक स्वीकृतियां जांच के लिए प्राप्त कर ली गई हैं।
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नई दिव्वी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईटी दिल्ली में 10 नए जमाने के एडटेक स्टार्टअप्स के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) राउंडटेबल बैठक की। इस दौरान शिक्षा में एआई के प्रभावी उपयोग और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
बैठक में शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार और जयंत चौधरी भी मौजूद रहे। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस चर्चा में अरिविहान, फर्मी एआई, खरे एआई, सीखो, स्पीकएक्स, सुपरकलाम, सुपरनोवा, वेदांतु, कंवेजीनियस और विरोहन जैसे स्टार्टअप्स शामिल हुए। ये कंपनियां स्कूल शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, स्किल डेवलपमेंट और भाषा सीखने के क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान विकसित कर रही हैं।मंत्रालय के मुताबिक, यह पहल विशेष रूप से दूरदराज और संसाधन-वंचित क्षेत्रों के छात्रों के लिए उपयोगी साबित होगी। बैठक आगामी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से पहले आयोजित की गई।शिक्षा मंत्री ने आईआईटी दिल्ली में दो प्रमुख परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया, जिनकी कुल लागत करीब 430 करोड़ रुपए है। पहली परियोजना अकादमिक ब्लॉक-103 की है, जो लगभग 5 लाख वर्ग फुट में बनेगा। यह संस्थान की पहली 10 मंजिला अकादमिक इमारत होगी।इस भवन में 31 क्लासरूम, 150 रिसर्च लैब, 150 फैकल्टी ऑफिस, कॉन्फ्रेंस रूम, कैफेटेरिया और बैंकिंग सुविधाएं होंगी।दूसरी परियोजना गर्ल्स हॉस्टल-50 की है, जो करीब 3.9 लाख वर्ग फुट में विकसित होगा। इसमें 1400 छात्राओं के रहने की व्यवस्था होगी। कमरों में अलमारी, पढ़ाई की टेबल और चार्जिंग पॉइंट जैसी सुविधाएं होंगी, जबकि भवन में डाइनिंग हॉल भी होगा।दोनों इमारतें पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाई जाएंगी। परिसर में सोलर पैनल, वर्षा जल संचयन और हरियाली संरक्षण की व्यवस्था की जाएगी। निर्माण के दौरान एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा।कार्यक्रम में आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारी, शिक्षक और छात्र भी उपस्थित रहे। मंत्रालय के अनुसार, सरकार एआई और मजबूत बुनियादी ढांचे के जरिए शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। - मुंबई. बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह को अज्ञात व्यक्तियों ने व्हाट्सऐप के जरिए धमकी दी है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि सिंह को एक 'वॉयस नोट' के जरिए धमकी मिलने और इसकी सूचना पुलिस को देने के बाद, उनके आवास के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सिंह को यह धमकी शहर में फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के आवास के बाहर हुई गोलीबारी की घटना के कुछ दिनों बाद मिली है। अधिकारी ने कहा कि पुलिस को संदेह है कि जबरन वसूली के उद्देश्य से रणवीर सिंह को दी गई इस धमकी के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के सदस्य हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने मामले की जांच शुरू कर दी है।मध्य मुंबई स्थित जिस हाउसिंग सोसाइटी में अभिनेता रहते हैं, वहां मुंबई पुलिस के कर्मियों के अलावा निजी गार्ड भी तैनात किए गए हैं। मंगलवार को सोसाइटी की प्रबंध समिति ने पुलिस से संपर्क किया और इन गार्डों की तैनाती पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने एक पत्र में कहा, "चूंकि ये सशस्त्र गार्ड लॉबी, जिम और बच्चों के खेलने के क्षेत्र जैसे सामान्य स्थानों पर हथियारों के साथ बार-बार घूम रहे हैं, इससे सोसाइटी की प्रबंध समिति को अन्य निवासियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो रही है।" हाल में, एक अज्ञात शूटर ने जुहू स्थित फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के आवास पर पांच गोलियां चलाई थी। लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के सदस्य शुभम लोनकर ने कथित तौर पर उस गोलीबारी की जिम्मेदारी ली थी। इस मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को सीबीआई और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) से एनआईए, ईडी और बैंकों जैसी अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर एक संयुक्त प्रणाली विकसित करने को कहा। इसका उद्देश्य एक "समन्वित और अत्यंत सुरक्षित तंत्र" तैयार करना है, ताकि नयी तकनीकों का इस्तेमाल कर अपराध करने वाले साइबर अपराधियों से ''दो कदम आगे'' रहा जा सके। देश में साइबर अपराधों की गंभीरता को रेखांकित करते हुए, गृह मंत्री ने कहा कि भारत के डिजिटल लेन-देन की मात्रा और हिस्सेदारी को देखते हुए, साइबर अपराध का परिदृश्य चिंताजनक प्रतीत होता है, जिसमें औसतन हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति शिकार बन रहा है, और हर घंटे 100 लोग इसका शिकार बन रहे हैं। शाह ने कहा कि सरकार ने साइबर धोखाधड़ी की 361,000 शिकायतों के माध्यम से 8,189 करोड़ रुपये को सुरक्षित करने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने कहा कि अनुमान के मुताबिक, धोखाधड़ी की कुल राशि लगभग 20,000 करोड़ रुपये थी, जिसमें से एजेंसियों ने 8,189 करोड़ रुपये जब्त कर लिए हैं या पीड़ितों को वापस कर दिए हैं। गृह मंत्री ने कहा, "साइबर सुरक्षा अब आर्थिक सुरक्षा तक ही सीमित नहीं है बल्कि अब यह राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग बन गई है। अगर हमने पर्याप्त कदम नहीं उठाए होते तो साइबर धोखाधड़ी एक राष्ट्रीय संकट बन गई होती।" शाह ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और गृह मंत्रालय की साइबर अपराध रोधी इकाई, आई4सी द्वारा 'साइबर-आधारित धोखाधड़ी से निपटने और पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करने' पर आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने राज्य पुलिस से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए साइबर अपराध रिपोर्टिंग कॉल सेंटर 1930 के प्रबंधन के लिए पर्याप्त कर्मी तैनात करने को कहा ताकि इसमें शामिल राशि को बचाया जा सके। गृह मंत्री ने कहा, "यदि किसी पीड़ित के फोन का जवाब कई बार घंटी बजने के बाद भी नहीं मिलता है, तब तक उनका पैसा जा चुका होता है। यह कॉल सेंटर 1930 की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।" शाह ने कहा कि सभी निजी, सार्वजनिक और सहकारी बैंकों को साइबर अपराधियों द्वारा धन शोधन से निपटने के लिए भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ''म्यूल अकाउंट हंटर सॉफ्टवेयर'' को तुरंत अपनाना चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि 100 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ताओं, 181 अरब से अधिक यूपीआई लेन-देन और 57 करोड़ जन धन खातों के साथ, भारत तेजी से साइबर सफल समाज बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "इन लेन-देन को सुरक्षित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।"शाह ने सीबीआई की एक नयी साइबर अपराध शाखा का भी उद्घाटन किया और सीबीआई अधिकारियों को पदक प्रदान करने के अलावा, आई4सी के एक राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र (एस4सी) डैशबोर्ड को भी शुरू किया। सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद ने कहा कि साइबर अपराध के केंद्र जामताड़ा, मेवात और भरतपुर से कंबोडिया, थाईलैंड और म्यांमा में स्थानांतरित हो गए हैं।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर के बदलते स्वरूप को रेखांकित करते हुए मंगलवार को कहा कि कभी माओवादी हिंसा के लिए पहचाना जाने वाला यह इलाका अब विकास और स्थानीय लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास की पहचान बन रहा है। प्रधानमंत्री ने सात से नौ फरवरी के बीच आयोजित 'बस्तर पंडुम' के विशेष उत्सव की भी सराहना की।
मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "इस उत्सव के दौरान बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जनजातीय विरासत का भव्य रूप दिखा।'' उन्होंने कहा, ''इस प्रयास से जुड़े सभी परिवारजनों को मेरी हार्दिक बधाई। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''पहले जब बस्तर का नाम लिया जाता था तो माओवाद, हिंसा और विकास में पिछड़ेपन की छवि उभरती थी लेकिन अब हालात बिल्कुल बदल चुके हैं।'' उन्होंने कहा, ''आज बस्तर विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास के लिए जाना जाता है। मेरी यही कामना है कि यहां का आने वाला समय शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव की भावना से परिपूर्ण हो।'' -
बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने मंगलवार को कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम एक जन-केंद्रित और अनुप्रयोग-उन्मुखी पहल के रूप में परिकल्पित किया गया है और यह प्रतिस्पर्धा के बजाय अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित है। देश की अंतरिक्ष यात्रा के छह दशक को रेखांकित करते हुए नारायणन ने कहा कि इस कार्यक्रम ने विश्व स्तर पर सम्मान हासिल किया है और यह न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी सेवा करता है, जिसमें सहयोग इसका मूल सिद्धांत है। इसरो प्रमुख ने अमेरिका-भारत 'स्पेस बिजनेस फोरम' के उद्घाटन समारोह में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में अमेरिका के योगदान को रेखांकित किया। देश में अंतरिक्ष संबंधी कार्य स्वतंत्रता के 15 वर्ष बाद यानी 1962 में शुरू हुए और भारत द्वारा प्रक्षेपित किया गया पहला रॉकेट अमेरिका में निर्मित था और नासा ने इसकी आपूर्ति की थी। नारायणन ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय अंतरिक्ष मिशन मुख्य रूप से आम लोगों के लाभ के लिए है।
अंतरिक्ष विभाग के सचिव नारायणन ने कहा, ''भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम किसी से प्रतिस्पर्धा करने के लिए नहीं, बल्कि भारत के आम आदमी के लाभ के लिए उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी लाने के लिए शुरू किया गया था।'' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कार्यक्रम का दृष्टिकोण समय के साथ-साथ वैश्विक जरूरतों को पूरा करने के लिए विस्तृत हुआ है, साथ ही यह मानव-केंद्रित भी बना हुआ है। उन्होंने कहा, ''आज, हमारा दृढ़ता से मानना है कि यह कार्यक्रम न केवल भारत के आम आदमी के लिए है, बल्कि वैश्विक समुदाय की भी सेवा करता है और यह एक मानव-केंद्रित, अनुप्रयोग-उन्मुखी कार्यक्रम है।'' उन्होंने अंतरिक्ष अन्वेषण और वाणिज्य के क्षेत्र में गहन अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का आह्वान किया।
अमेरिकी प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के दिग्गजों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि यह मंच अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते तालमेल का प्रतीक है। नारायणन ने कहा, ''इस तरह का कार्यक्रम सहयोगात्मक होना चाहिए। एक अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक कार्यक्रम। इसी संदर्भ में अमेरिका-भारत 'स्पेस बिजनेस फोरम' अमेरिका से लगभग 14 व्यापारिक साझेदारों को लाया है।'' हाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए नारायणन ने चंद्रयान मिशन, निसार उपग्रह और वाणिज्यिक प्रक्षेपण जैसी संयुक्त उपलब्धियों को रेखांकित किया और कहा कि यह सहयोग एक समान साझेदारी में तब्दील हो गया है। उन्होंने कहा, ''इस मिशन ने भारत और अमेरिका के बीच सिर्फ सहयोग नहीं, बल्कि भावनात्मक सहयोग का भी विश्व में प्रदर्शन किया और एक मजबूत जुड़ाव को दर्शाया।'' भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए, इसरो अध्यक्ष ने एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5, मंगल और शुक्र मिशन, भू अवलोकन और दिशा सूचक उपग्रह समूहों का विस्तार तथा गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने 2028 तक अपने पहले अंतरिक्ष स्टेशन मॉड्यूल को लॉन्च करने और 2035 तक पूरी तरह से चालू बहु-मॉड्यूल भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही यह 2040 तक मानव को चंद्र मिशन के तहत चंद्रमा पर भेजने की दिशा में भी काम कर रहा है। नारायणन ने कहा कि इसरो पहले से ही 30,000 किलोग्राम की 'एलईओ' क्षमता वाले अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यानों पर काम कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 2040 तक मानव चंद्र मिशन को पूरा करने के लिए निरंतर तकनीकी विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से कई गुना विस्तार की आवश्यकता होगी। -
मथुरा. उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के खप्परपुर गांव में मंगलवार को एक दंपति और उनके तीन नाबालिग बच्चे अपने घर में मृत पाए गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने कहा कि उन्हें संदेह है कि यह सामूहिक आत्महत्या का मामला है।
पुलिस को परिवार के मुखिया द्वारा बनाया गया एक वीडियो और दीवार पर लिखे संदेश के अलावा एक सुसाइड नोट भी मिला है। सुसाइड नोट और वीडियो की सामग्री के बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।
मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) श्लोक कुमार ने बताया कि मृतकों की पहचान किसान मनीष कुमार (35), उनकी 32 वर्षीय पत्नी तथा उनके तीन नाबालिग बच्चों - दो बेटियों और एक बेटे के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारी ने कहा, ''वे अपने घर के एक कमरे में मृत पाए गए।'' पुलिस ने बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी मनीष कुमार के भाई से मिली। पुलिस के मुताबिक जब बच्चे सुबह खेलने के लिए बाहर नहीं आए, तो मनीष का भाई कुछ ग्रामीणों के साथ दीवार फांदकर घर के अंदर गया और दरवाजा तोड़कर अंदर घुसा, जहां उसने अपने परिवार के सदस्यों को मृत पाया। एसएसपी ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। -
सोमनाथ (गुजरात). गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर में इस सप्ताहांत महाशिवरात्रि उत्सव के दौरान लगभग पांच लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, पिछले महीने आयोजित 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी उछाल देखा गया है। विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि उत्सव के लिए तैयारियां जोरों पर हैं।
गिर सोमनाथ के जिलाधिकारी एन. वी. उपाध्याय ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि इस वर्ष अपेक्षित भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन और स्थानीय अधिकारी सुरक्षा और सुविधाओं के लिए व्यापक इंतजाम कर रहे हैं। जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले दर्ज हमले के 1,000 साल पूरे होने पर आठ से 11 जनवरी तक 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' मनाया गया। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी हिस्सा लिया था। उपाध्याय ने कहा, '''सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। सामान्य दिनों में लगभग 20,000 श्रद्धालु मंदिर आते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर प्रतिदिन लगभग 75,000 हो गई है। आगामी महाशिवरात्रि पर्व के मुख्य दिन 15 फरवरी को इस तीर्थ स्थल पर लगभग पांच लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। -
नई दिल्ली। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर भारत आएंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर राष्ट्रपति मैक्रों भारत आ रहे हैं। इस दौरे के दौरान वे भारत-एआई इम्पेक्ट समिट 2026 में भी हिस्सा लेंगे।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ‘हॉरिजोन 2047 रोडमैप’ के तहत कई अहम क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही दोनों नेता आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श करेंगे, जिसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग भी शामिल रहेगा।दोनों नेता मुंबई में भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन का उद्घाटन करेंगे। यह कार्यक्रम वर्ष 2026 के दौरान भारत और फ्रांस दोनों देशों में मनाया जाएगा और इसका उद्देश्य इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देना है।राष्ट्रपति मैक्रों 19 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित भारत-एआई इम्पेक्ट समिट में भाग लेंगे। यह समिट 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वैश्विक समिट का उद्घाटन करेंगे।भारत-एआई इम्पेक्ट समिट को ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला पहला एआई समिट बताया जा रहा है। इसमें दुनियाभर के देशों से नेता, नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल होंगे।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत के विकास सफर, गवर्नेंस को मजबूत करने और पब्लिक सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह समावेशी विकास को समर्थन देता है और 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है।भारत की भाषायी और सांस्कृतिक विविधता देश को बहुभाषी और मल्टी-मॉडल एआई सिस्टम विकसित करने के लिए एक अनुकूल मंच प्रदान करती है। समिट में गवर्नेंस, नवाचार और सतत विकास के लिए एआई की परिवर्तनकारी क्षमता पर गहन चर्चा होगी।यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी के हालिया फ्रांस दौरे के बाद हो रहा है और भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी में गहराते आपसी विश्वास और सहयोग को दर्शाता है। दोनों देश शांति, तकनीक और वैश्विक स्थिरता के क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। -
नयी दिल्ली. गृह मंत्रालय (एमएचए) ने उच्चतम न्यायालय को अवगत कराया है कि ''डिजिटल अरेस्ट'' की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से प्रणालीगत खामियों को दूर करने और साइबर अपराध के पीड़ितों की सुरक्षा तत्काल सुनिश्चित करने के लिए एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समिति (आईडीसी) का गठन किया गया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व वाली एक पीठ ने 16 दिसंबर, 2025 को इस मुद्दे पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी के मार्गदर्शन में अंतर-विभागीय मंत्रालयी परामर्श करने का निर्देश दिया था और इसके परिणाम से अवगत कराने को कहा था। पीठ ने निर्देश दिया कि पिछले वर्ष एक दिसंबर को जारी किए गए निर्देशों के साथ-साथ न्यायमित्र द्वारा की गई सिफारिशों पर भी संबंधित पक्षों द्वारा विचार किया जाना चाहिए।
गृह मंत्रालय द्वारा 12 जनवरी को दाखिल स्थिति रिपोर्ट में बताया गया कि भोलेभाले नागरिकों से धन की ठगी के लिए जाली दस्तावेजों और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे हथकंडों का इस्तेमाल करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के खात्मे के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), रिजर्व बैंक, दूरसंचार विभाग और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े प्रमुख मंत्रालयों की भागीदारी के साथ एक बहु-एजेंसी अभियान चलाया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पीठ के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने दिल्ली के एक हाई-प्रोफाइल धोखाधड़ी मामले की जांच आधिकारिक रूप से अपने हाथ में ले ली है, जिसमें 76 साल की एक पेंशनर से कथित तौर पर "डिजिटल अरेस्ट" धोखाधड़ी के जरिये 1.64 करोड़ रुपये ठग लिये गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि फर्जी लोगों ने उसे जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके धमकाया था। सीबीआई ने अदालत को बताया कि इस तरह की ठगी अक्सर 'संगठित और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोहों' द्वारा की जाती है और एजेंसी अब अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल के खात्मे के लिए इंटरपोल के माध्यमों का उपयोग कर रही है। गृह मंत्रालय ने आंतरिक सुरक्षा के विशेष सचिव की अध्यक्षता में एक अंतर-विभागीय समिति (आईडीसी) का गठन किया है। समिति में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), विदेश मंत्रालय तथा भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि समिति को विधायी खामियों की पहचान करने, सुधारात्मक उपाय सुझाने और बैंकिंग एवं दूरसंचार क्षेत्रों में 'समयबद्ध अनुपालन' सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया है।
इसमें कहा गया है कि दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने 'स्पूफ्ड कॉल' (विदेश से की गई ऐसी कॉल जो भारतीय नंबर के रूप में दिखाई देती हैं) पर अंकुश लगाने में उल्लेखनीय प्रगति की जानकारी दी। नव-प्रवर्तित सेंट्रल इंटरनेशनल आउट रोमर (सीआईओआर) तंत्र के माध्यम से सरकार ने अकेले अक्टूबर 2024 में लगभग 1.35 करोड़ 'स्पूफ्ड कॉल' को ब्लॉक किया, जिससे वर्तमान में इनकी संख्या घटकर करीब 1.5 लाख रह गई है। उसने कहा कि इसके अलावा, डीओटी ने बताया कि वह दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत नियमों को अंतिम रूप दे रहा है, ताकि प्वाइंट-ऑफ-सेल (पीओएस) एजेंटों द्वारा सिम कार्ड जारी करने में लापरवाही, प्रति व्यक्ति नौ सिम की सीमा के अनुपालन तथा धोखेबाजों द्वारा उपयोग किए जाने वाले 'सिम बॉक्स' के नियमन से निपटा जा सके। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आईडीसी को बताया कि 23 बैंकों ने पहले ही 'म्यूलहंटर एआई' लागू कर दिया है, जो अपराधियों द्वारा चोरी की गई रकम को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 'म्यूल खातों' की पहचान करने का एक विशेष उपकरण है। समिति ने बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े प्रमुख सुधारों पर भी चर्चा की। इसमें धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 12एए के तहत, रकम के स्थानांतरित होने से पहले ठगी गई राशि को अग्रिम रूप से फ्रीज करने का भी उल्लेख किया गया। इसके साथ ही, बैंकों द्वारा निष्क्रिय खातों की पहचान और उन्हें बंद करने के लिए एकरूप दिशानिर्देश सुनिश्चित करने हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने पर भी चर्चा हुई। न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एन. एस. नप्पिनई ने पीड़ित राहत में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रस्ताव रखा है और सुझाव दिया है कि सभी मामलों में अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज किए बिना, पोर्टल पर दर्ज शिकायतों और क्षतिपूर्ति बाण्ड के आधार पर 'फ्रीज' की गई राशि पीड़ितों को जारी की जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे मंच अज्ञात नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल की अवधि सीमित करें, ताकि लंबे समय तक दबाव बनाकर की जाने वाली ठगी को रोका जा सके। सरकार ने सभी हितधारकों से प्राप्त सुझावों को एकत्रित करने के लिए उच्चतम न्यायालय से एक महीने का अतिरिक्त समय मांगा है।
समिति का अगला जोर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 46 के तहत 'न्यायनिर्णयन तंत्र' को सुदृढ़ करने और साइबर अपराधों के अधिनिर्णय के लिए एक राष्ट्रीय ऑनलाइन पोर्टल को अंतिम रूप देने पर होगा। स्थिति रिपोर्ट में गृह मंत्रालय ने कहा, ''उपरोक्त तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, यह विनम्रतापूर्वक प्रार्थना की जाती है कि यह माननीय न्यायालय प्रतिवादियों को कम से कम एक माह की अवधि प्रदान करने की कृपा करे, ताकि अंतर-विभागीय समिति के शेष सदस्यों से सुझाव प्राप्त किए जा सकें और उन पर आगे विचार-विमर्श करके एक समेकित और सुविचारित परिणाम इस माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।'' -
नयी दिल्ली. मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बात कर दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने रामगुलाम से कहा कि वह अगले सप्ताह 'एआई इम्पैक्ट' सम्मेलन के लिए भारत में उनका स्वागत करने को लेकर उत्सुक हैं। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "अपने मित्र प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम से फोन पर बात कर बहुत खुशी हुई। हमने पिछले वर्ष वाराणसी में हुई हमारी यादगार मुलाकात के बाद से भारत और मॉरीशस के बीच व्यापक सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की।" मोदी ने कहा कि उन्होंने और रामगुलाम ने दोनों देशों को जोड़ने वाले विशेष, ऐतिहासिक व जन-केंद्रित संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। मोदी ने कहा, "भारत और मॉरीशस हिंद महासागर क्षेत्र में शांति व स्थिरता के साझा उद्देश्यों को हासिल करने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।"
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नयी दिल्ली. नीति आयोग के एक अध्ययन में सोमवार को कहा गया कि भारत को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने और 2070 तक 'शुद्ध शून्य' उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए कुल 22.7 लाख करोड़ डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी। 'विकसित भारत और शुद्ध शून्य की ओर परिदृश्य : एक अवलोकन' शीर्षक वाली नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, इस कुल आवश्यकता का वार्षिक औसत लगभग 500 अरब डॉलर है। इसकी तुलना में 2024 में वास्तविक वार्षिक निवेश लगभग 135 अरब डॉलर रहा, जिसमें से केवल 70-80 अरब डॉलर ही इस समय स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि कुल राशि में से लगभग आठ लाख करोड़ डॉलर का निवेश 2050 तक पहले करना होगा, जिसमें बिजली क्षेत्र में लगभग पांच लाख करोड़ डॉलर का निवेश शामिल हैं। अध्ययन के अनुसार, घरेलू और बाहरी सुधारों के साथ भारत 2070 तक अपने शुद्ध शून्य लक्ष्य के लिए लगभग 16.2 लाख करोड़ डॉलर जुटा सकता है। घरेलू स्तर पर इसके लिए कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूत करने, घरेलू बचत के वित्तीयकरण को बढ़ाने और संस्थागत निवेशकों को नए क्षेत्रों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है। बाहरी स्तर पर, एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) और एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) की भागीदारी बढ़ाने से विदेशी पूंजी का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित होगा।
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नयी दिल्ली. भारत और यूनान ने सोमवार को रक्षा औद्योगिक सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए, जो साझेदारी को बढ़ाने के लिए पांच वर्षीय रोडमैप विकसित करने की दिशा में एक प्रारंभिक कदम है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और हेलेनिक गणराज्य के रक्षा मंत्री निकोलाओस-जॉर्जियोस डेंडियास के बीच यहां मानेकशॉ सेंटर में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद यह समझौता हुआ। बाद में 'एक्स' पर एक पोस्ट में राजनाथ सिंह ने यूनान की उस घोषणा का भी स्वागत किया, जिसमें कहा गया है कि दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करने के लिए यूनान का एक अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारी गुरुग्राम स्थित 'इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन' (आईएफसी-आईओआर) में तैनात किया जाएगा। सिंह ने कहा, "आज नयी दिल्ली में हेलेनिक गणराज्य के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री निकोलाओस-जॉर्जियोस डेंडियास से मिलकर खुशी हुई। भारत और यूनान ने द्विपक्षीय रक्षा उद्योग सहयोग को मजबूत करने के लिए संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए और वर्ष 2026 के लिए द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना का आदान-प्रदान किया।" उन्होंने लिखा, "मैं यूनान के एक अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारी को गुरुग्राम में स्थित 'इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन' (आईएफसी-आईओआर) में तैनात करने की घोषणा का स्वागत करता हूं, जिससे दोनों राष्ट्रों के बीच समुद्री सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।" बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने दोहराया कि भारत-यूनान रणनीतिक साझेदारी "शांति, स्थिरता, स्वतंत्रता व आपसी सम्मान के साझा मूल्यों" पर आधारित है। बैठक से पहले यूनान के रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय समर स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने मानेकशॉ सेंटर में 'गार्ड ऑफ ऑनर' का निरीक्षण भी किया।
अपने प्रवास के दौरान हेलेनिक प्रतिनिधिमंडल ने बेंगलुरु में प्रमुख रक्षा एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों का दौरा किया और नयी दिल्ली में डीपीएसयू, रक्षा उद्योग तथा स्टार्ट-अप प्रतिनिधियों से बातचीत की। बयान में कहा गया, "यह यात्रा भारत और हेलेनिक गणराज्य के बीच रणनीतिक साझेदारी की पुनः पुष्टि करती है, जो दोनों देशों और उनके लोगों के बीच लंबे समय से चले आ रहे गर्मजोशीपूर्ण और निकट संबंधों पर आधारित है। - जम्मू। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक कदम बढ़ाते हुए रविवार को तीर्थयात्रियों के लिए बीमा कवर को पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये प्रति व्यक्ति करने को मंजूरी दे दी। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। यह निर्णय जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में हुई बोर्ड की बैठक में लिया गया।प्रवक्ता ने कहा कि बोर्ड ने पिछली बैठक के बाद की गई कार्रवाइयों की समीक्षा कर उन्हें अनुमोदित किया। उन्होंने बताया कि बोर्ड की कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने तथा तीर्थयात्रा सेवाओं में सुधार के उद्देश्य से 25 एजेंडा बिंदुओं पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उन्होंने कहा कि बैठक में प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई, जिनमें भवन (मंदिर परिसर) में निकास मार्ग का निर्माण, सांझीछत से भवन तक यात्रा मार्ग का चौड़ीकरण, ढलान स्थिरीकरण कार्य, कटरा में श्री शंकराचार्य मंदिर और संबंधित सुविधाओं का निर्माण और जम्मू के चैतन्य आश्रम में दिव्यांगजनों के लिए विद्यालय का निर्माण शामिल है। प्रवक्ता ने कहा कि बोर्ड ने गुणवत्ता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करते हुए समयसीमा का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है। हट्ट गांव में नवनिर्मित हेलीपैड के संबंध में बोर्ड ने यह मंजूरी दी कि संशोधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद वह तीर्थयात्रा के बुनियादी ढांचे के विकास और उन्नयन के लिए श्राइन अधिनियम के तहत श्री शिव खोरी श्राइन बोर्ड को एकमुश्त वित्तीय अनुदान प्रदान करेगा। प्रवक्ता ने कहा कि तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए दोनों तीर्थस्थलों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं एक ही हेलीपैड से संचालित की जाएंगी। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्राइन बोर्ड को कटरा शहर और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता और हरियाली को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देते हुए पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का निर्देश दिया।
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मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को धर्मांतरण, घुसपैठ और कम जन्म दर को जनसंख्या असंतुलन के लिए जिम्मेदार तीन प्रमुख कारक बताया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध "एक परिवार में तीन बच्चे पैदा करने" का सुझाव देते हैं, जो हालांकि पसंद का मामला है। भागवत ने लोगों का धर्मांतरण कराने और किसी संप्रदाय की आबादी बढ़ाने के लिए बल, प्रलोभन और छल का सहारा लिए जाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने मूल धर्म में लौटना चाहते हैं, उनके लिए "घर वापसी" ही एकमात्र उपाय है। घुसपैठ से जुड़े एक सवाल पर संघ प्रमुख ने कहा कि आरएसएस कार्यकर्ता भाषा के जरिये संदिग्ध घुसपैठियों की पहचान करते हैं और उनकी सूचना अधिकारियों को देते हैं। भागवत आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल लोगों के साथ एक संवाद सत्र के दौरान सवालों के जवाब दे रहे थे। जनसंख्या असंतुलन पर आरएसएस प्रमुख ने कहा, "इसके तीन प्रमुख कारण हैं; पहला-धर्मांतरण। हालांकि, धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी है, लेकिन लोगों का धर्म बदलवाने और किसी संप्रदाय की आबादी बढ़ाने के लिए बल, प्रलोभन या छल का सहारा लिया जाना पूरी तरह से निंदनीय है।" उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता को रेखांकित करने के लिए कवि नारायण वामन तिलक का उदाहरण दिया।
भागवत ने कहा कि जो लोग अपने मूल धर्म में लौटना चाहते हैं, हम उनके लिए रास्ता बनाते हैं और ऐसे लोगों के लिए "घर वापसी" ही एकमात्र उपाय है। संघ प्रमुख ने कहा, "दूसरा कारण घुसपैठ है, जिसके लिए सरकार को बड़े पैमाने पर काम करने की जरूरत है।"
उन्होंने कहा कि घुसपैठियों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो अभी धीमी गति से चल रही है, लेकिन इसमें तेजी आएगी। भागवत ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास का हवाला दिया, जिसके तहत कुछ व्यक्तियों को गैर-नागरिक के रूप में पहचाना गया है और उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। भागवत ने कहा, "आरएसएस कार्यकर्ताओं ने भी भाषा के माध्यम से संदिग्ध घुसपैठियों की पहचान की है और उनके बारे में अधिकारियों को सूचना दी है।" उन्होंने कहा कि मुस्लिम सहित भारतीय नागरिकों को रोजगार दिया जाएगा, लेकिन विदेशियों को नहीं। भागवत ने कहा कि जनसंख्या असंतुलन का तीसरा कारण कम जन्म दर है।
एक सवाल के जवाब में संघ प्रमुख ने कहा कि डॉक्टरों ने सलाह दी है कि 19 से 25 साल की उम्र के बीच शादी और तीन बच्चों का जन्म माता-पिता और बच्चों, दोनों को स्वस्थ रखने में सहायक होता है, जबकि मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि तीन बच्चे 'मैं' की भावना से निपटने में मदद करते हैं और दीर्घकालिक रूप से एक स्थिर पारिवारिक जीवन सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने कहा कि जनसंख्या वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि जब प्रजनन दर 2.3 से नीचे गिर जाती है, तो आबादी खतरे में पड़ जाती है और उस स्तर पर किसी देश को पतन की ओर बढ़ता माना जाता है। भागवत ने कहा, "अब हमारी जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से नीचे चली गई है और बिहार जैसे राज्यों की वजह से ही हम बच पा रहे हैं।" भारत की जनसंख्या नीति का जिक्र करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि निर्धारित प्रजनन अनुपात 2.1 को अगर पूर्णांक में बदला जाए, तो इसका मतलब प्रभावी रूप से तीन बच्चे होते हैं। उन्होंने कहा, "हर तरह के वैज्ञानिक शोध सुझाव देते हैं कि एक परिवार में तीन बच्चे होने चाहिए। हालांकि, यह पुरुषों, महिलाओं और परिवारों के लिए पसंद का मामला बना हुआ है और इस पर एक व्यापक सामाजिक मुद्दे के रूप में विचार किया जाना चाहिए।" भागवत ने अंग्रेजी पुस्तक 'चीपर बाय द डजन' का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पता चलता है कि एक से अधिक बच्चों का पालन-पोषण करना कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है। अमेरिका में 12 बच्चों के पालन-पोषण के बारे में लेखक के व्यक्तिगत अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पुस्तक में तर्क दिया गया है कि अधिक बच्चे पैदा करना किफायती हो सकता है और इस पर आधारित एक फिल्म भी बनाई गई है। भागवत ने कहा कि शादी सिर्फ दो लोगों के बीच शारीरिक संबंध के बारे में नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी संस्था है, जिसका मकसद परिवार का निर्माण करना है, जो समाज का हिस्सा बनता है। उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं होना चाहिए कि कोई जिम्मेदारी लिए बिना शादी कर ले।
भागवत ने कहा कि शादी न करना आरएसएस स्वयंसेवकों के लिए व्यक्तिगत निर्णय का मामला है, लेकिन पारिवारिक जीवन में ऐसे कर्तव्य और रिश्ते शामिल होते हैं, जिन्हें बनाए रखना आवश्यक होता है। संघ प्रमुख ने घुसपैठ के मुद्दे पर कहा कि भारतीय नागरिकों, जिनमें मुस्लिम भी शामिल हैं, को रोजगार दिया जाएगा, लेकिन विदेशियों को नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए सतर्कता जरूरी है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज अच्छे वेतन की चाह में काफी हद तक छोटे-मोटे कामों से दूर हो गया है, जिससे घुसपैठियों को ऐसे काम करने का अवसर मिल रहा है। भागवत ने कहा, "हम किसी की नौकरी नहीं छीनना चाहते, लेकिन पहले हमारे लोगों को नौकरी मिलनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार में उन नागरिकों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जो हिंदू नहीं हैं। रोजगार और प्रौद्योगिकी का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि भारत की आबादी बहुत ज्यादा है और उसे ऐसी प्रौद्योगिकियों की जरूरत है, जो अधिक रोजगार सृजन करें। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल इस तरह से किया जाना चाहिए कि रोजगार के अवसर तैयार हों। भागवत ने बड़े पैमाने पर उत्पादन के बजाय "जनता द्वारा उत्पादन" का आह्वान किया।
उन्होंने समाज में असंतोष से बचने के लिए रोजगार सृजन की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि खाली दिमाग नक्सलवाद, शहरी हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों का कारण बन सकता है। भागवत ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) आर्थिक स्थिति का उपयुक्त संकेतक नहीं है, क्योंकि यह केवल मूर्त और मापने योग्य गतिविधियों को ही मापता है। महिलाओं की ओर से किए जाने वाले अवैतनिक घरेलू कार्यों का उदाहरण देते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि ऐसे योगदान जीडीपी आंकड़ों में परिलक्षित नहीं होते हैं। उन्होंने मात्रात्मक और गुणात्मक दोनों तरह के उत्पादन का आह्वान किया और कहा कि जीडीपी आंकड़े चाहे जो भी हों, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होगा। बांग्लादेश की हिंदू आबादी का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि एकजुटता उन्हें स्थानीय राजनीति को प्रभावित करने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने कहा, "बांग्लादेश में हिंदुओं ने भागने के बजाय एकजुट होकर प्रतिरोध करने का विकल्प चुना है। आरएसएस अपनी सीमित क्षमता के भीतर उनके हित के लिए हरसंभव प्रयास करेगा।" भागवत ने कहा कि देश को तोड़ने की कोशिश करने वाली ताकतें खुद ही विघटित हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि भारत ऐसी चालों का शिकार नहीं बनेगा। साल 2047 तक देश के विभाजन के खतरे के बारे में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए भागवत ने कहा, "लोगों को तब तक 'अखंड भारत' की कल्पना करनी चाहिए।" -
मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का निर्माण सभी को विश्वास में लेकर किया जाना चाहिए और इससे मतभेद नहीं पैदा होने चाहिए। यह पूछे जाने पर कि क्या आरएसएस के लिए "अच्चे दिन" भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद आए, भागवत ने कहा कि मामला "इसके विपरीत" था। उन्होंने कहा कि संघ अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध रहा और उसका समर्थन करने वालों को इसका फायदा मिला। हिंदुत्व विचारक वीडी सावरकर को 'भारत रत्न' से अलंकृत किए जाने की लंबे समय से जारी मांग पर भागवत ने कहा कि अगर उन्हें (सावरकर को) यह सम्मान प्रदान किया जाता है, तो इसकी प्रतिष्ठा और बढ़ जाएगी। भागवत आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में रवीना टंडन, विकी कौशल, अनन्या पांडे, करण जौहर, मधुर भंडारकर, रमेश तौरानी और पंडित हृदयनाथ मंगेशकर सहित कई दिग्गज फिल्मी हस्तियां मौजूद थीं। भागवत ने कहा कि यूसीसी का निर्माण सभी को विश्वास में लेकर किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "इससे मतभेद नहीं पैदा होने चाहिए। उत्तराखंड में तीन लाख सुझाव हासिल हुए और सभी हितधारकों से चर्चा के बाद अधिनियम पारित किया गया।" एक अन्य सवाल के जवाब में संघ प्रमुख ने कहा कि कोई बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक (समुदाय) नहीं है, "हम सब एक ही समाज हैं।" उन्होंने मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोगों के साथ विश्वास, मित्रता और संवाद कायम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। भागवत ने कहा, "इस्लाम को शांति का धर्म कहा जाता है, लेकिन शांति दिखाई नहीं देती। अगर धर्म में आध्यात्मिकता न हो, तो वह प्रभुत्वशाली और आक्रामक हो जाता है। आज इस्लाम और ईसाई धर्म में जो कुछ देखा जा रहा है, वह ईसा मसीह और पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं के अनुसार नहीं है। हमें वास्तविक इस्लाम और ईसाई धर्म के अनुसरण की आवश्यकता है।" भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते के बारे में भागवत ने कहा कि उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, "यह सच है कि हम अलग-थलग नहीं रह सकते। सौदों में लेन-देन होता है। यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होना चाहिए... हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमें नुकसान न हो।" अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति कायम हो गई है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, "अब भारत में निर्मित उत्पादों पर 'टैरिफ' घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा।" भागवत ने एक सवाल के जवाब में कहा, "हमारे (आरएसएस) लिए अच्छे दिन भाजपा की वजह से नहीं आए... बल्कि मामला इसके विपरीत था। हम राम मंदिर के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध रहे। जिन्होंने हमारा समर्थन किया, उन्हें लाभ मिला।" उन्होंने कहा, "आरएसएस के लिए 'अच्छे दिन' स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत और वैचारिक नीतियों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण आए।" भागवत ने कहा कि आरएसएस जरूरत पड़ने पर सलाह देता है। उन्होंने कहा, "उनके गलत कर्मों का दोष हम पर इसलिए मढ़ा जाता है, क्योंकि वे हमारे भीतर से ही निकले हैं।" भागवत ने कहा कि राजनीतिक दबाव मतदाताओं की तरफ से आता है, न कि आरएसएस की तरफ से।
यह पूछे जाने पर कि 100 वर्षों में वामपंथियों का जनाधार क्यों नहीं बढ़ा, भागवत ने कहा कि आरएसएस उन्हें मार्गदर्शन दे सकता है, बशर्ते वे इसकी मांग करें। संघ प्रमुख ने कहा कि आरएसएस एक युवा संगठन है, जिसके कार्यकर्ताओं की औसत आयु 28 साल है। उन्होंने कहा, "हम इसे घटाकर 25 साल करना चाहते हैं।" -
मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि अगर संघ उन्हें पद से हटने के लिए कहेगा तो वह इस्तीफा दे देंगे और इस संगठन ने ही उनसे उनकी उम्र के बावजूद काम जारी रखने के लिए कहा है। भागवत ने यह भी कहा कि संघ का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति हमेशा एक हिंदू ही होगा, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो और शीर्ष पद सबसे योग्य उम्मीदवार को ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ''आरएसएस प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए।'' वह आरएसएस शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के साथ एक संवादात्मक सत्र के दौरान प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने कहा, ''मैंने 75 वर्ष पूरे कर लिए और मैंने आरएसएस को इसकी सूचना भी दे दी थी, लेकिन संगठन ने मुझसे काम जारी रखने को कहा। जब भी आरएसएस मुझसे पद छोड़ने को कहेगा, मैं पद छोड़ दूंगा लेकिन काम से सेवानिवृत्ति कभी नहीं होगी।'' भागवत ने कहा कि आरएसएस में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व नहीं है और स्वयंसेवक अपने काम के आधार पर पदोन्नति पाते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस प्रमुख को हिंदू होना चाहिए चाहे उसकी जाति कोई भी हो। उन्होंने बताया कि जब आरएसएस की स्थापना हुई थी, तब इसका काम ब्राह्मण-बहुल समुदाय में शुरू हुआ था और इसलिए इसके अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण थे, जिसके कारण उस समय संगठन को ब्राह्मण संगठन के रूप में जाना जाता था। उन्होंने कहा कि लोग हमेशा ऐसे संगठन की तलाश करते हैं जिसमें उनके समुदाय के प्रतिनिधि हों।
भागवत ने कहा कि वह इस बारे में कोई निश्चित जवाब नहीं दे सकते कि संघ प्रमुख अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति पृष्ठभूमि से होगा या नहीं क्योंकि यह निर्णय संघ प्रमुख की नियुक्ति करने वालों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, ''अगर मुझे किसी प्रमुख का चयन करना होता, तो मैं 'सबसे योग्य उम्मीदवार' के मानदंड को अपनाता। जब मुझे आरएसएस प्रमुख नियुक्त किया गया था, तब कई योग्य उम्मीदवार थे लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। मैं ही वह व्यक्ति था जिसे कार्यभार से मुक्त किया जा सकता था और नियुक्त किया जा सकता था।'' उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होना अयोग्यता नहीं है, और न ही ब्राह्मण होना संघ प्रमुख बनने की योग्यता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि परिस्थितियां सहायक या प्रतिकूल हो सकती हैं और उन पर अत्यधिक ध्यान देने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, ''हमें समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय समाधान खोजने पर ध्यान देना चाहिए। जब तक सच्चाई सामने नहीं आती, भ्रम बना रहता है।'' भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन ''अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है'' और उन्होंने दावा किया कि आरएसएस के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो। उन्होंने कहा कि संघ का काम संस्कारों को बढ़ावा देना है, न कि चुनाव प्रचार करना।
उन्होंने कहा, ''हम अपने प्रचार-प्रसार में पिछड़ गए हैं। अत्यधिक प्रचार से प्रसिद्धि तो मिलती है, लेकिन फिर अहंकार भी आ जाता है। इससे बचना जरूरी है। प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए, यानी समय और मात्रा दोनों में उचित होना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि आरएसएस जनसंपर्क अभियान चला रहा है। भागवत ने कहा कि आरएसएस के कामकाज में अंग्रेजी कभी भी संचार का माध्यम नहीं होगी क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। उन्होंने कहा, ''हम भारतीयों के साथ काम करना चाहते हैं। जहां भी अंग्रेजी आवश्यक होगी, हम उसका उपयोग करेंगे। हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है।'' संघ प्रमुख ने कहा कि लोगों को इस तरह से अंग्रेजी बोलनी आनी चाहिए कि अंग्रेजी भाषी लोग उसे सुनना चाहें। भागवत ने कहा, ''हमें अंग्रेजी में महारत हासिल करनी चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपनी मातृभाषा को भूल जाएं।'' बेंगलुरु में हुई इसी तरह की एक बातचीत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि कई दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधि हिंदी नहीं समझ पा रहे थे और उन्होंने उनके सवालों का जवाब अंग्रेजी में दिया था। भागवत ने कहा कि विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों से बातचीत के दौरान संवाद या तो हिंदी में होता है या उनकी मातृभाषा में, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे अंग्रेजी बोलने वाले देशों से हैं या गैर-अंग्रेजी भाषी। विरोध के बावजूद मुस्लिम समुदायों में संघ के स्वयंसेवकों के काम के बारे में पूछे जाने पर भागवत ने कहा कि अगर दोनों पक्ष एक-दूसरे का विरोध करते हैं, तो केवल टकराव होगा और कोई काम नहीं हो सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरएसएस किसी जाति या समुदाय को निशाना नहीं बनाता बल्कि भौगोलिक आधार पर काम करता है। संघ प्रमुख ने कहा, ''अगर किसी क्षेत्र की आबादी 10,000 है, तो हम वहां काम करने की कोशिश करते हैं। एक बार जब हम भौगोलिक रूप से फैल जाएंगे, तो सभी वर्गों और समुदायों तक हमारी पहुंच हो जाएगी। अगर आप आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व को देखें, तो लगभग सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व है।'' भागवत ने कहा कि आरएसएस भ्रष्टाचार को उजागर करने में विश्वास रखता है और इसके खिलाफ लड़ने वाले किसी भी व्यक्ति का समर्थन करता है। उन्होंने कहा, ''हमारे स्वयंसेवकों को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वालों का समर्थन करने के लिए कहा गया है। आरएसएस भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानूनों और विधानों के पक्ष में है और वह भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करेगा।'' उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार व्यवस्था में नहीं बल्कि लोगों के दिमाग में भरा पड़ा है।
भागवत ने कहा, ''कुछ लोग व्यवस्था में भ्रष्टाचार फैलाते हैं और कुछ लोग इससे लड़ते हैं।'' - मथुरा (उप्र) .यमुना एक्सप्रेसवे पर एक कंटेनर ट्रक के बस से टकरा जाने से छह लोगों की मौत हो गयी और एक अन्य घायल हो गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह घटना मथुरा जिले के सुरीर थाना क्षेत्र में शुक्रवार देर रात दो बजकर 45 मिनट पर हुई। सुरीर पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) अजय कुमार ने बताया कि यह दुर्घटना तब हुई जब नोएडा से कानपुर जा रही एक बस को बीच में एक यात्री के शौचालय जाने के कारण रोका गया था। उन्होंने बताया कि एक कंटेनर ने बस को बगल से टक्कर मार दी, जिससे बस से उतरकर सड़क पर खड़े छह लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति घायल हो गया। थाना प्रभारी ने बताया कि घायल व्यक्ति को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। हालांकि, बस और कंटेनर चालक भाग गए। मामले की जांच जारी है।
- शिवपुरी/श्योपुर/मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता 'आशा' ने पांच शावकों को जन्म दिया है जिसके साथ ही देश में इस वन्यजीव की कुल संख्या बढ़कर 35 हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शनिवार को यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "कूनो में गर्व का क्षण है। मादा चीता आशा द्वारा पांच स्वस्थ शावकों को जन्म देने से भारत में चीता संरक्षण अभियान को मजबूती मिली है। इसके साथ ही भारत में जन्मे शावकों की संख्या 24 हो गई है और कुल चीता आबादी 35 पर पहुंच गई है।" उन्होंने कहा कि नामीबिया से लाई गई मादा चीता आशा से शावकों का जन्म होना परियोजना की सफलता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह परियोजना दशकों पहले भारत में विलुप्त हो चुके दुनिया के सबसे तेज रफ़्तार प्राणी चीते के पुनर्वास के उद्देश्य से शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह सफलता वनकर्मियों और विशेषज्ञों के सतत परिश्रम का परिणाम है। यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।
- देहरादून. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किसान परंपरा, ग्रामीण जीवन और गोवंश के महत्व पर आधारित फिल्म 'गोदान' को शनिवार को प्रदेश में कर मुक्त करने की घोषणा की। यह फिल्म छह फरवरी को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई है।मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय केवल धर्म और आस्था का विषय नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, समाज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गोवंश संरक्षण को लेकर निरंतर कार्य कर रही है जिसके तहत बेसहारा और निराश्रित गोवंश की बेहतर देखभाल के लिए गोसदनों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है जबकि गोपालकों और पशुपालकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'गोदान' जैसी फिल्मों के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच और संवेदनशीलता विकसित होती है, इसलिए ऐसी फिल्मों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक, सांस्कृतिक और जनहित से जुड़े विषयों पर बनी फिल्मों और रचनात्मक प्रयासों को भविष्य में भी प्रोत्साहन देती रहेगी।
- जम्मू. पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के कारण पर्यटन उद्योग को लगे झटके के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर आने के लिए देश भर से पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। शाह केंद्र शासित प्रदेश में विकास परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करने के लिए जम्मू में एक समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ''देश भर से जम्मू-कश्मीर आने वाले पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। जम्मू-कश्मीर की पर्यटन संभावनाओं को उजागर करने के लिए अन्य राज्यों में इसके पर्यटन स्थलों का जोर शोर से प्रचार करने की आवश्यकता है।'' शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में नए पर्यटन स्थल विकसित करने की योजना में हर संभव सहायता प्रदान करेगी। लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े पाकिस्तानी आतंकवादियों ने पिछले साल 22 अप्रैल को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाया, जिसमें 26 लोग मारे गए। इस घटना से जम्मू-कश्मीर में पर्यटन उद्योग को गंभीर झटका लगा।
- मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भगवत ने शनिवार को कहा कि संघ किसी के ''खिलाफ'' नहीं है और ना ही वह सत्ता या लोकप्रियता चाहता है। भागवत ने यहां जनसभा को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उभरी विभिन्न विचारधाराओं का उल्लेख किया, जिनका प्रतिनिधित्व राजा राम मोहन रॉय, स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती सहित सुधारकों और नेताओं ने किया। उन्होंने कहा, "हालांकि फिर भी यह देखा जा रहा है कि समाज को दिशा देने और अनुकूल वातावरण बनाने का काम नहीं हो रहा है।" भागवत ने कहा कि आरएसएस ''किसी के खिलाफ नहीं है'' और किसी घटना की प्रतिक्रिया के रूप में काम नहीं करता है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य देश में जारी सकारात्मक प्रयासों का समर्थन और उन्हें मजबूत करना है। भगवत ने कहा कि संघ कोई अर्धसैनिक बल नहीं है, भले ही वह नियमित 'पथ संचलन' करता है और उसके स्वयंसेवक लाठी चलाते हैं, लेकिन इसे एक अखाड़े के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरएसएस राजनीति में भी शामिल नहीं है, हालांकि संघ से जुड़े कुछ लोग राजनीतिक जीवन में सक्रिय हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने वर्ष 1925 में आरएसएस की स्थापना से पहले के देश की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक "सुरक्षा वाल्व" के रूप में स्थापित किया, लेकिन भारतीयों ने इसे स्वतंत्रता संग्राम का शक्तिशाली साधन बना दिया। भागवत ने आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार का उल्लेख करते हुए उनके बचपन की कठिन परिस्थितियों का वर्णन किया, जिसमें 13 वर्ष की उम्र में प्लेग से माता-पिता का निधन और उसके बाद हुई आर्थिक कठिनाइयां शामिल थीं। भागवत ने कहा कि हेडगेवार ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसमें उनके स्कूल के दिनों में वंदे मातरम् आंदोलन भी शामिल था। भागवत ने कहा कि जब उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की, तो नागपुर के कुछ लोगों ने उन्हें मेडिकल की पढ़ाई के लिए कोलकाता भेजने हेतु धन जुटाया, जहां वह क्रांतिकारी समूहों के सम्पर्क में आये। भागवत ने उस दौर की एक घटना को याद करते हुए कहा कि हेडगेवार ने "कोकेन" नाम के कोडनेम से काम किया, जो कोकेनचंद्र नामक व्यक्ति से प्रेरित था। उन्होंने कहा कि एक बार पुलिस की टीम, जो कोकेनचंद्र को गिरफ्तार करने आई थी, गलतफहमी में हेडगेवार को ही हिरासत में ले गई और यह घटना रास बिहारी बोस की किताब में दर्ज है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कुआलालंपुर में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने भारत-मलेशिया संबंधों की गहराई पर ज़ोर देते हुए कहा कि भारत की सफलता मलेशिया की प्रगति और बदले में एशिया के विकास से जुड़ी हुई है। भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, मलेशिया में दुनिया में भारतीय मूल के लोगों की दूसरी सबसे बड़ी कम्युनिटी है। यह भारत और मलेशिया के दिलों को जोड़ता है। जिस प्रदर्शनी को मैंने और पीएम अनवर इब्राहिम ने देखा, वह इस कनेक्शन को बहुत खूबसूरती से दिखाती है। आप एक जीता-जागता पुल हैं जो हमें जोड़ता है।”
पीएम मोदी दो दिवसीय दौरे पर आज शनिवार को मलेशिया पहुंचे। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेता एक साथ एक ही कार में कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए। कुआलालंपुर में पीएम मोदी के स्वागत में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय पहुंचा। इस दौरान लगभग 800 लोगों ने पीएम मोदी के स्वागत में क्लासिकल और लोक नृत्य किया।इसके बाद पीएम मोदी ने अपना संबोधन शुरू किया। प्रधानमंत्री जैसे ही अपना संबोधन शुरू करने के लिए मंच पर पहुंचे, ‘मोदी-मोदी’ की गूंज शुरू हो गई। लोगों ने तालियां बजाकर पूरे उत्साह से पीएम का स्वागत किया।प्रधानमंत्री मोदी ने तमिल भाषा और संस्कृति की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, “तमिल के लोगों ने अपने टैलेंट से मानवता की सेवा की है। मैं गर्व के साथ कहता हूं कि भारत के उपराष्ट्रपति थिरु सीपी राधाकृष्णन, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, जिन्होंने हमारे देश का बजट 9 बार प्रस्तुत किया है, और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के राज्य मंत्री मुर्गन लोगनाथन मुरुगन ये सभी तमिलनाडु से आते हैं।”उन्होंने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा,”पीएम अनवर इब्राहिम और मैं उनके पीएम बनने से पहले से ही दोस्त हैं, पिछले साल मैं आसियान समिट के लिए नहीं आ पाया था, लेकिन मैंने अपने दोस्त से वादा किया था कि मैं जल्द ही मलेशिया आऊंगा। और जैसा वादा किया था, मैं यहां हूं । यह 2026 में मेरी पहली विदेश यात्रा है। इन त्योहारों के समय में आपके साथ आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है।”पीएम मोदी ने कहा, “आपको पता है कि प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम बहुत अच्छा गाना गाते हैं, लेकिन कई भारतीयों को यह नहीं पता। मलेशियाई पीएम के भारत दौरे के दौरान भारतीय काफी हैरान थे। उनके गाने का एक वीडियो वायरल हो गया, जिसमें वह पुराना बॉलीवुड गाना गा रहे थे। वह एमजीआर के तमिल गाने भी बहुत पसंद करते हैं।” उनके ऐसा कहते ही पीएम अनवर भी हंस पड़े।पीएम मोदी ने कहा, “इस मौके पर मलेशिया में नेताजी सर्विस सेंटर और नेताजी वेलफेयर फाउंडेशन की कोशिशों को भी सलाम करता हूं। यह सच में कमाल की बात है कि आपने सदियों से भारतीय परंपराओं को बनाए रखा है। हाल ही में, मैंने ‘मन की बात’ में आपके काम के बारे में कहा था। मैंने कहा था कि मलेशिया में 500 से ज़्यादा स्कूल हैं जो भारतीय भाषाओं में शिक्षा देते हैं।”वहीं, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कहा, “हम आज न सिर्फ नर्तकों, बल्कि वहां मौजूद सभी लोगों के उत्साह और प्यार को महसूस कर सकते हैं। कैसे हमारे दो दोस्त, दो महान देश और मैं और आप, प्रधानमंत्री मोदी। यह सच में सम्मान की बात है। जैसा कि मैंने आपको कार में बताया था कि मैं व्यक्तिगत तौर पर बहुत उत्साहित हूं, बहुत शुक्रगुजार हूं, बहुत आभारी हूं कि मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त, भारत से एक बहुत अच्छा दोस्त मलेशिया में हमारे साथ जुड़ रहा है।”प्रधानमंत्री इब्राहिम ने कहा, “पीएम मोदी, मैंने आपके संघर्ष, आपकी राजनीतिक मुश्किलों को देखा है, और मुझे यह कहना होगा, मैं खुशकिस्मत हूं कि मैं भारत के मोदी जी का एक बहुत अच्छा पर्सनल दोस्त हूं।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर मलेशिया पहुंचे हैं। राजधानी कुआलालंपुर पर मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेता एक साथ, कार में कुआलालंपुर में एक कम्युनिटी इवेंट में शामिल होने लिए गए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी झलकियां साझा करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत–मलेशिया के जन-जन के बीच संबंधों का उत्सव! प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और मैं कुआलालंपुर में आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम में जा रहे हैं।”
यह दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी भरे और व्यक्तिगत संबंधों को दिखाता है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में भारतीय समुदाय ने एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की गई।मलेशिया की राजधानी में लैंड करने पर, प्रधानमंत्री मोदी ने एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। अनवर इब्राहिम खुद पीएम मोदी को रिसीव करने आए थे, जो दोनों नेताओं के बीच गहरे संबंधों को दिखाता है। पर एक अलग पोस्ट में, पीएम मोदी ने कहा, “कुआलालंपुर पहुंच गया हूं। एयरपोर्ट पर मेरे दोस्त, प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत से बहुत प्रभावित हूं। मैं हमारी बातचीत और भारत और मलेशिया के बीच दोस्ती के बंधन को और मजबूत करने के लिए उत्सुक हूं।”वहीं, एक एक्स पर एक पोस्ट में, विदेश मंत्रालय ने कहा कि मलेशिया भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, विजन महासागर और इंडो-पैसिफिक विजन में एक महत्वपूर्ण पार्टनर है, और उम्मीद है कि यह दौरा करीबी और बहुआयामी द्विपक्षीय साझेदारी को नई गति देगा।विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की 7 से 8 फरवरी तक की यात्रा का मकसद 2024 में स्थापित भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करना है। इस दौरे के दौरान, पीएम मोदी प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे और राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत करेंगे।


























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