मोदी ने साइबर धोखाधड़ी, डीपफेक से निपटने के लिए वैश्विक व्यवस्था बनाने का किया आह्वान
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साइबर धोखाधड़ी और 'डीपफेक' के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए वैश्विक व्यवस्था बनाने का बृहस्पतिवार को आह्वान किया। उन्होंने ऐसी धोखाधड़ी लोगों तक पहुंचने से पहले ही रोकने के लिए सरकारों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, दूरसंचार कंपनियों और वित्तीय संस्थानों से मिलकर काम करने का आग्रह किया। मोदी ने कहा कि भारत ने साइबर धोखाधड़ी से निपटने में काफी अनुभव हासिल किया है और वह अपने अनुभव दुनिया के साथ साझा करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि साइबर धोखाधड़ी और साइबर अपराध किसी भी देश की सीमा से परे हैं तथा प्रौद्योगिकी का विस्तार तभी होता है जब उस पर भरोसा कायम होता है। प्रधानमंत्री ने 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस' (आईएमसी) 2026 को संबोधित करते हुए कहा, ''प्रौद्योगिकी का विस्तार तभी होता है जब उस पर भरोसा कायम होता है। आप सभी जानते हैं कि साइबर धोखाधड़ी और साइबर अपराध सीमाओं से परे हैं। वे पहले ही सीमाएं पार कर चुके हैं।'' साइबर अपराधों की सीमाओं से परे प्रकृति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक देश से व्यक्ति दूसरे देश में मौजूद किसी जालसाज की मदद से तीसरे देश में अपराध कर सकता है। मोदी ने 'डीपफेक' से पैदा हो रही चुनौती को भी रेखांकित किया और कहा कि ऐसे उभरते खतरों से निपटने के लिए देशों को वैश्विक ढांचे पर मिलकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ''इसलिए, इसके लिए वैश्विक ढांचे पर काम करना जरूरी है। सरकारों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, दूरसंचार कंपनियों और वित्तीय संस्थानों-सभी को इस ढांचे से जुड़ना होगा। मैं जीएसएमए और दुनियाभर के दूरसंचार संचालकों से आग्रह करता हूं : आइए, हम एक ऐसा वैश्विक तंत्र बनाएं जो इस तरह की धोखाधड़ी को लोगों तक पहुंचने से पहले ही रोक सके।'' उद्योग संगठन ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन (जीएसएमए) दुनियाभर में मोबाइल नेटवर्क संचालकों और इस क्षेत्र से जुड़े विभिन्न कारोबारों का प्रतिनिधित्व करता है। मोदी ने कहा कि दूरसंचार और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के आसपास सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना उनके तेजी से विस्तार के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है और फोन तथा नेटवर्क की सुरक्षा प्राथमिकता बन रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने इस दिशा में अपने अनुभवों से काफी कुछ सीखा है और वह अपने अनुभव दुनिया के साथ साझा करने के लिए हमेशा तैयार है। उन्होंने कहा कि एक आम नागरिक के लिए भरोसे का मतलब यह जानना है कि फोन कौन कर रहा है, कोई संदेश असली है या फर्जी, भुगतान सुरक्षित है या नहीं और व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित है या नहीं। प्रधानमंत्री ने बढ़ते डिजिटल तंत्र में साइबर खतरों से सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि मोबाइल फोन अब केवल संचार का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि शासन एवं सार्वजनिक सेवाओं के वितरण का महत्वपूर्ण माध्यम बन गए हैं। मोदी ने 2022 में 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस' के मंच से देश में 5जी सेवा की शुरुआत किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि अब 5जी सेवाएं हर जिले तक पहुंच गई है। 5जी नेटवर्क के लिए पांच लाख 50 हजार से अधिक 'बेस स्टेशन' काम कर रहे हैं और 2022 की तुलना में मोबाइल इंटरनेट की गति 10 गुना बढ़ गई है। मोदी ने डिजिटल कामकाज के क्षेत्र में भारत के अनुभव का उल्लेख किया और कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिये करीब 50 लाख करोड़ रुपये लाभार्थियों के मोबाइल से जुड़े बैंक खातों में सीधे भेजे जा सके हैं। उन्होंने कहा कि करीब पांच लाख करोड़ रुपये ''गलत हाथों'' में जाने से बचाए गए हैं। मोदी ने कहा कि वह ''गलत तौर-तरीकों'' को रोकने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
उन्होंने कहा, ''अब आप मुझे बताइए, जिन लोगों की गलत तरीके से होने वाली कमाई बंद हो गई है, क्या वे मोदी से प्यार करेंगे? क्या मैंने सही काम किया या नहीं? क्या यह किया जाना चाहिए या नहीं? क्या इन सभी गलत तौर-तरीकों को रोका जाना चाहिए या नहीं? वे चाहे कितना भी चिल्लाएं या शोर मचाएं, मैं इसे करके ही रहूंगा।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर पुरानी व्यवस्था कायम रहती तो सरकार के पांच लाख करोड़ रुपये भ्रष्टाचार की वजह से ऐसे लोगों की जेबें भरते। उन्होंने कहा, ''मोदी ने इसे रोक दिया है।'' उन्होंने कहा कि अब यह धन सही लाभार्थियों तक पहुंच रहा है और सही उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 'पीएम-किसान सम्मान निधि' के तहत किसानों के बैंक खातों में चार लाख करोड़ रुपये से अधिक जमा किए जा चुके हैं। यह राशि हर चार महीने में किसानों को दी जाती है और इसकी जानकारी किसानों को उनके मोबाइल फोन पर संदेश के जरिये मिलती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दूरसंचार क्षेत्र में उपभोक्ता से आगे बढ़कर निर्माता बन गया है और अब देश में उत्पादों के डिजाइन तथा प्रौद्योगिकी एवं बौद्धिक संपदा पर स्वामित्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र में 'सुधार एक्सप्रेस' तेजी से आगे बढ़ रही है। दशकों पुराने कानूनों को आधुनिक बनाया जा रहा है और दूरसंचार अधिनियम के जरिये आधुनिक नियामकीय व्यवस्था तैयार की जा रही है। मोदी ने कहा, ''हमारी ओर से एजीआर और बैंक गारंटी जैसे ढांचागत बोझ को तर्कसंगत बनाने का काम भी किया जा रहा है, ताकि बोझ को उपलब्धियों में बदला जा सके।'' उन्होंने कहा कि गति 'शक्ति संचार' मंच ने डिजिटल माध्यम से 'राइट ऑफ वे' की मंजूरी की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में मोबाइल बाजार के अगले दशक का खाका तैयार करने में 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस' की महत्वपूर्ण भूमिका है। अपने संबोधन की शुरुआत में मोदी ने कहा कि बुधवार को उन्होंने निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर 25 वर्ष पूरे कर लिए। मोदी सात अक्टूबर, 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री चुने गए थे और इसके बाद उन्होंने लगातार तीन कार्यकाल तक राज्य की कमान संभाली। इसके बाद वह 2014 में भारत के प्रधानमंत्री चुने गए। उन्होंने अभिनेता नाना पाटेकर को भी श्रद्धांजलि दी और उन्हें एक शानदार कलाकार बताया। पाटेकर का बृहस्पतिवार तड़के गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया।
नयी दिल्ली में सात से 10 अक्टूबर तक आयोजित किए जा रहे 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस' (आईएमसी) के 10वें संस्करण के उद्घाटन सत्र में संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, भारती समूह के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल, रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन आकाश अंबानी और आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला समेत कई लोग मौजूद रहे। दूरसंचार विभाग (डीओटी) और सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित आईएमसी 2026 का मुख्य विषय 'सीमाओं से परे विस्तार' है। इसमें डिजिटल नवाचार, अगली पीढ़ी के संपर्क और प्रौद्योगिकी आधारित वृद्धि के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता को रेखांकित किया गया है। इसमें वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रमुखों, नीति निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों, स्टार्टअप, निवेशकों और नवोन्मेषकों को डिजिटल तंत्र में उभरते अवसरों पर चर्चा करने के लिए एक मंच पर लाया गया है। वर्ष 2026 के संस्करण के प्रमुख क्षेत्रों में 5जी व 6जी, अगली पीढ़ी के एआई नेटवर्क, सेमीकंडक्टर, गैर-स्थलीय नेटवर्क, साइबर सुरक्षा, क्वांटम संचार, उद्यम बदलाव, संसाधनों का पूर्ण उपयोग करने वाली अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, सामाजिक व शासन (ईएसजी) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण शामिल हैं।










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