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वाशिंगटन. भारतीय मूल के मिशिगन के विधायक रणजीव पुरी तीन नवंबर को होने वाले चुनाव में राज्य विधानसभा के स्पीकर पद की दौड़ में हैं। पुरी (42) वर्ष 2020 में मिशिगन प्रतिनिधि सभा के लिए चुने जाने वाले पहले सिख अमेरिकी बने थे। राज्य के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था। पंजाबी प्रवासी परिवार में जन्मे पुरी को 2025 में रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाली 110 सदस्यीय विधानसभा में डेमोक्रेटिक पार्टी का नेता नियुक्त किया गया था। मिशिगन में ग्रेचेन व्हिटमर डेमोक्रेटिक पार्टी की गवर्नर हैं, लेकिन राज्य विधानसभा पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है। मैट हॉल विधानसभा के स्पीकर हैं।
डेमोक्रेट्स को उम्मीद है कि वे तीन नवंबर के चुनाव में विधानसभा में बहुमत हासिल कर लेंगे। इससे पुरी के देश के पहले भारतीय-अमेरिकी विधानसभा अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ हो सकता है। राज्य की अमेरिकी सांसद हेली स्टीवंस ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा, मिशिगन में डेमोक्रेट्स आगे बढ़ रहे हैं। हम राज्य विधानसभा में बहुमत हासिल करने वाले हैं और रणजीव पुरी को देश का पहला भारतीय-अमेरिकी राज्य विधानसभा स्पीकर बनाएंगे। स्टीवंस इस साल अमेरिकी सीनेट चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी का नामांकन हासिल करने में नाकाम रहने के बाद अमेरिकी कांग्रेस से सेवानिवृत्त होने वाली हैं। पुरी ने 2008 और 2012 में राष्ट्रपति बराक ओबामा के चुनाव प्रचार अभियानों में भाग लिया था। इसके बाद उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए की डिग्री हासिल की और मिशिगन लौट आए। यहां उन्होंने ऑटोमोबाइल उद्योग में काम किया। राज्य विधानसभा में अपने तीसरे कार्यकाल में पुरी को 2025 में सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी का नेता नियुक्त किया गया था। तीन नवंबर को होने वाले चुनाव में पुरी का मुकाबला रिपब्लिकन पार्टी की एलिसन के फुलर से है।
रिपब्लिकन रणनीतिकार अनंग मित्तल द्वारा तैयार भारतीय अमेरिकी वोटर एटलस के अनुसार, मिशिगन में भारतीय मूल के 1.27 लाख लोग रहते हैं, जो राज्य की कुल आबादी का 1.27 प्रतिशत हैं। -
लॉस एंजिलिस. अपराध आधारित लोकप्रिय धारावाहिक 'ब्रेकिंग बैड' में वॉल्टर व्हाइट के बेटे की भूमिका निभाने वाले अभिनेता आरजे मिटे ने आत्महत्या कर ली। वह 34 वर्ष के थे। मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करने वाली स्थिति 'सेरेब्रल पाल्सी' से पीड़ित मिटे हॉलीवुड में दिव्यांगों के अधिकारों की वकालत करते थे। अमेरिकी मनोरंजन वेबसाइट 'टीएमजेड' ने उनके प्रतिनिधि के हवाले से खबर में बताया कि मिटे ने सोमवार को टेक्सास में आत्महत्या कर ली। उनके प्रतिनिधि ने कहा, "सभी के चहेते अभिनेता, समाजसेवी और दिव्यांगों के अधिकारों के प्रबल समर्थक आरजे मिटे की मौत की खबर हम बड़े दुख के साथ साझा कर रहे हैं।" प्रतिनिधि ने बताया कि दुनिया भर के दर्शकों का मनोरंजन करने के अलावा मिटे ने 'यूनाइटेड सेरेब्रल पाल्सी' और 'श्राइनर्स चिल्ड्रन्स' के बेसडर के तौर पर भी काम किया था। विंस गिलिगन के बनाए धारावाहिक 'ब्रेकिंग बैड' के लिए जब मिटे ने ऑडिशन दिया था, तब उनकी उम्र महज 13 वर्ष थी। धारावाहिक के पहले कड़ी की शूटिंग के समय वह 14 वर्ष के थे। इस धारावाहिक ने इसके कलाकारों को दुनियाभर में पहचान दिलाई। मिटे ने धारावाहिक की 56 कड़ियों में वॉल्टर व्हाइट जूनियर की भूमिका निभाई थी। इसमें ब्रायन क्रैंस्टन और अन्ना गन ने उनके माता-पिता की भूमिकाएं निभाई थीं। बाद में उन्होंने 'द ओक रूम', 'द गार्डियंस ऑफ जस्टिस' और 'ट्रायम्फ' जैसी फिल्मों और धारावाहिकों में भी काम किया। मिटे आखिरी बार अल्बुकर्क में आयोजित बैलून फिएस्टा में सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए थे। इस दौरान उनके साथ 'ब्रेकिंग बैड' में उनके सह-कलाकार लुइस मोनकाडा भी मौजूद थे।
- स्टॉकहोम। अमेरिकी अर्थशास्त्री रॉबर्ट हॉल और माइकल वुडफोर्ड को 2026 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। दोनों अर्थशास्त्रियों को मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरीकरण के सूक्ष्म आर्थिक आधारों पर उनके काम के लिए सम्मानित किया गया है।इस पुरस्कार का आधिकारिक नाम ‘अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में अर्थशास्त्र में स्वेरिगेस रिक्सबैंक पुरस्कार’ है। इस वर्ष दिए जाने वाले नोबेल पुरस्कारों में यह आखिरी पुरस्कार है। इसके तहत विजेताओं को कुल 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर यानी करीब 12 लाख अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि दी जाती है।अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार पहली बार 1969 में दिया गया था। यह पुरस्कार मूल रूप से अल्फ्रेड नोबेल की 1895 की वसीयत में शामिल पांच पुरस्कारों में से नहीं था, बल्कि स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने इसकी शुरुआत की थी।अब तक इस पुरस्कार के अधिकांश विजेता अमेरिका से रहे हैं। हालांकि, इसे जीतने वाली महिलाओं की संख्या अब तक केवल तीन है। वर्ष 2023 में क्लाउडिया गोल्डिन को अमेरिका में वेतन और रोजगार पर लैंगिक अंतर के प्रभाव से जुड़े उनके शोध के लिए यह पुरस्कार दिया गया था।इस साल पुरस्कार के संभावित विजेताओं को लेकर इंस्टीट्यूट फॉर साइंटिफिक इन्फॉर्मेशन ने मौद्रिक नीति, सूचना प्रौद्योगिकी के अर्थशास्त्र और विकासवादी आर्थिक सिद्धांत पर काम करने वाले शोधकर्ताओं के नामों का आकलन किया था।पिछले साल यह पुरस्कार जोएल मोकिर, फिलिप एघियन और पीटर हॉविट को मिला था। उन्हें ‘क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन’ यानी नई तकनीक और उत्पादन के तरीकों के जरिए आर्थिक विकास तथा जीवन स्तर में सुधार से जुड़े काम के लिए सम्मानित किया गया था। इससे पहले पिछले सप्ताह चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य और शांति के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की गई थी।
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लंदन. ब्रिटेन में प्रवासी भारतीयों के विभिन्न संगठनों का एक समूह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्वाचित पद पर ''जनसेवा के 25 वर्ष'' के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार को 'हाउस ऑफ लॉर्ड्स' परिसर में हुई। इसकी मेजबानी लॉर्ड रामी रेंजर ने सरदार पटेल मेमोरियल सोसाइटी के अध्यक्ष के रूप में की। कार्यक्रम में असमिया और ओडिसी के पारंपरिक नृत्य, वायलिन वादन और औपचारिक रूप से केक काटने के आयोजन के जरिए भारत की सांस्कृतिक विविधता भी प्रदर्शित की गई। आयोजकों ने एक बयान में कहा, ''इन समारोहों के केंद्र में भारत का शाश्वत दर्शन 'वसुधैव कुटुंबकम' है, जिसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। यह मार्गदर्शक सिद्धांत समावेशिता, शांति, साहस, खुशी, समृद्धि और नई शुरुआत जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को दर्शाता है।'' उन्होंने कहा, ''इस महत्वपूर्ण पड़ाव का जश्न मनाते हुए इन आयोजनों को गैर-राजनीतिक रखा गया है। इनमें सार्वजनिक सेवा, समावेशिता, शांति, साहस, खुशी, समृद्धि और सभी भारतीयों की सफलता जैसे सार्वभौमिक मूल्यों पर विशेष जोर दिया गया है।'' इस बीच, ब्रिटिश भारतीय समुदाय ने 17 अक्टूबर को पश्चिमी लंदन के रुइस्लिप में एक सामुदायिक समारोह आयोजित करने की योजना की घोषणा की है। इस समुदाय में 'इंडियन डायस्पोरा (आईडी) यूके', 'स्लाउ मित्र मंडल' और बकिंघमशायर स्थित श्री विट्ठल रुक्मिणी मंदिर जैसे संगठन शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक जीवन के इस पड़ाव के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ''समुदाय के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करना और उन्हें एकजुट करने वाले मूल्यों का जश्न मनाना'' होगा। आयोजकों ने अगले सप्ताह होने वाले 'जनसेवा के 25 वर्ष' समारोह को ऐसा अवसर बताया है, जो ''आशावाद, मित्रता और सामूहिक प्रगति की भावना को प्रेरित करेगा तथा परिवारों, मित्रों और समुदायों को एक साथ मिलकर जश्न मनाने के अवसर उपलब्ध कराएगा।''
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दुबई/ सऊदी अरब की राजधानी रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक भारतीय की मौत हो गई और 10 अन्य भारतीय घायल हुए हैं। इस हमले में 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने रविवार को यह जानकारी दी। पिछले एक सप्ताह के दौरान हवाई अड्डे को निशाना बनाकर किए गए कई हमलों में यह सबसे नया हमला था। शनिवार को हुए इस हमले में 12 लोगों की मौत हुई है। मरने वालों में सऊदी अरब के चार नागरिकों के अलावा बांग्लादेश, फलस्तीन, अमेरिका, मिस्र, जॉर्डन, सीरिया और सूडान के एक-एक नागरिक भी शामिल हैं।
भारतीय दूतावास ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि रियाद में हुए हमले में घायल हुए एक भारतीय नागरिक की आज मौत हो गई। दूतावास ने कहा, 'हम मृतक के परिवार के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं। हम परिवार के संपर्क में हैं और पार्थिव शरीर को जल्द भारत भेजने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेंगे।'' उसने अन्य पोस्ट में कहा कि वह रियाद हवाई अड्डे पर हुए इस "कायरतापूर्ण हमले" के मामले पर लगातार नजर रख रहा है और घायलों का हाल जानने के लिए स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है। भारत ने रविवार को इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि खाड़ी देश में आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर बार-बार किए जा रहे हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और इन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "हम पिछले कुछ दिन में रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बार-बार किए गए हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। इनमें 10 अक्टूबर को किया गया कायरतापूर्ण हमला भी शामिल है, जिसमें लोगों की जान गई, कई लोग घायल हुए और संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
बयान में कहा गया है, "हम मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।" सऊदी अरब ने इस हमले के लिए हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है। विदेश मंत्रालय ने कहा, "हम सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए वहां की जनता और सरकार के साथ एकजुटता से खड़े हैं। हम आशा करते हैं कि क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति और सामान्य स्थिति बहाल होगी। -
संयुक्त राष्ट्र. भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि परमाणु हथियारों को शासन चलाने का ''सामान्य साधन नहीं माना जाना'' चाहिए। भारत ने कहा कि वह किसी भी परमाणु धमकी या दबाव के आगे नहीं झुकेगा। निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचार करने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति की बैठक में शुक्रवार को भारत ने अपने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल किया। निरस्त्रीकरण सम्मेलन के लिए जिनेवा स्थित भारत के स्थायी मिशन में वरिष्ठ सलाहकार (निरस्त्रीकरण) अनमोल शेर सिंह बेदी ने पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है। उन्होंने कहा, "हम भारत के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करने और उन्हें वापस सौंपने का आह्वान करते हैं।" बेदी ने साथ ही कहा कि भारत संघर्ष नहीं चाहता। उन्होंने कहा, "भारत हमेशा शांति के पक्ष में खड़ा रहा है और सभी के साथ शांति चाहता है। हालांकि, अगर गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाइयों के लिए जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तो संकटों के बीच शांति केवल एक संक्षिप्त विराम बनकर रह जाएगी।" बेदी ने स्पष्ट किया कि भारत की सैन्य क्षमताएं पूरी तरह रक्षात्मक हैं और उनका निर्धारण देश की सुरक्षा संबंधी जरूरतों के आधार पर होता है। उन्होंने कहा कि ये क्षमताएं किसी अन्य देश को निशाना बनाकर हासिल नहीं की गईं।
उन्होंने कहा, "हमने तनाव बढ़ने को लेकर जताई गई चिंताओं को सुना है और ये चिंताएं जायज हैं। हालांकि, किसी देश की मंशा का सही आकलन उसके समय के साथ किए गए आचरण से ही किया जा सकता है। परमाणु हथियारों को शासन-संचालन का सामान्य साधन नहीं माना जाना चाहिए।" पाकिस्तान की रणनीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के अनुभव के मुताबिक इस क्षेत्र में हर संकट का एक जैसा ही तरीका रहा है- ''पहले उकसाना, फिर पल्ला झाड़ना, और जब भारत करारा जवाब दे दे, तो संयम बरतने की दुहाई देना।'' भारत ने रेखांकित किया कि उसने तीन स्पष्ट रेखाएं तय की हैं, जिनका उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बेदी ने कहा, "पहली, भारत के खिलाफ किसी भी आतंकवादी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। दूसरी, भारत परमाणु धमकी के आगे नहीं झुकेगा। तीसरी, भारत आतंकवाद को प्रायोजित करने वालों और उसके मुख्य षड्यंत्रकारियों के बीच कोई अंतर नहीं करेगा।" उन्होंने समिति को बताया कि पिछले साल मई में भारत की कार्रवाई एक "गंभीर उकसावे" के बाद की गई थी। पहलगाम आतंकवादी हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने आत्मरक्षा में कदम उठाया था। पिछले साल मई में भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था। - ओस्लो। भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी विधिवेत्ता नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार देने की शुक्रवार को घोषणा की गई।संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख पिल्लई ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए शुक्रवार को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई। इनके काम ने नरसंहार और यौन हिंसा से संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानून को आकार देने में मदद की।वह अंतरराष्ट्रीय अदालत में एक ऐसे मामले में न्यायाधीश के रूप में भी कार्यरत हैं, जिसमें गाम्बिया ने म्यांमा पर नरसंहार रोधी संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया है।तेईस सितंबर, 1941 को डरबन में तमिल मूल के भारतीय माता-पिता के घर जन्मीं पिल्लई का बचपन रंगभेद के दौर में बीता। उन्होंने आगे चलकर रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं का बचाव करने तथा मानवाधिकारों और समानता को बढ़ावा देने के क्षेत्र में अपना करियर बनाया।इंस्टीट्यूट फॉर अफ्रीकन वुमेन इन लॉ द्वारा प्रकाशित परिचय के अनुसार, पिल्लई के पिता बस चालक थे और परिवार का भरण-पोषण करने के लिए कई काम करते थे, जबकि उनकी मां अपने आठ बच्चों की देखभाल करती थीं। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद, उनके माता-पिता शिक्षा को बहुत महत्व देते थे और इस बात पर जोर देते थे कि उनके बेटों की तरह बेटियों को भी शिक्षा मिलनी चाहिए।पिल्लई ने नेटाल विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और बाद में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की।इंस्टीट्यूट फॉर अफ्रीकन वुमेन इन लॉ के अनुसार, 1967 में पिल्लई दक्षिण अफ्रीका के नेटाल प्रांत में वकालत शुरू करने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं।उन्होंने कई दशकों तक रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं का बचाव किया और राजनीतिक बंदियों के साथ किए जाने वाले व्यवहार को उजागर किया।साउथ अफ्रीकन हिस्ट्री ऑनलाइन के अनुसार, 1973 में उन्होंने राजनीतिक कैदियों को कानूनी सलाहकार की सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार दिलाने में मदद की।उन्होंने रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधित्व भी किया और बंदियों के साथ यातना तथा एकांत कारावास के इस्तेमाल की ओर ध्यान आकर्षित किया।पिल्लई दक्षिण अफ्रीका के संविधान में समानता के अधिकार को शामिल कराने के प्रयासों में भी शामिल रहीं। वूमेन्स नेशनल कोएलिशन की सदस्य के रूप में उन्होंने उस अभियान में योगदान दिया, जिसके परिणामस्वरूप संविधान में भेदभाव पर रोक लगाने वाला समानता संबंधी प्रावधान शामिल किया गया।साउथ अफ्रीकन हिस्ट्री ऑनलाइन के साथ एक साक्षात्कार में पिल्लई ने बताया कि किस तरह अलग-अलग राजनीतिक, नस्ली और धार्मिक पृष्ठभूमि की महिलाओं ने समानता को बढ़ावा देने और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर काम किया।बाद में उनका करियर दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय, रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत तक पहुंचा। उन्होंने रवांडा न्यायाधिकरण में न्यायाधीश और अध्यक्ष के रूप में काम किया तथा 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त रहीं।अगस्त 2013 में श्रीलंका की यात्रा के दौरान पिल्लई ने चेतावनी दी थी कि देश में तेजी से निरंकुश शासन की प्रवृत्ति बढ़ती दिखाई दे रही है और गृहयुद्ध समाप्त होने के चार साल बाद भी वहां कानून का शासन कमजोर हो रहा है।उन्होंने कहा था कि यात्रा के दौरान उनसे मिलने वाले लोगों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। उन्होंने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर भी चिंता जताई थी। उत्तरी शहर जाफना में उन्होंने तमिल परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने अपने लापता परिजनों, सेना द्वारा जमीन अधिग्रहण और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बारे में बताया। पिल्लई ने कहा था कि वह उन लोगों के साथ हो रहे व्यवहार पर ध्यान देती रहेंगी, जिनसे उन्होंने मुलाकात की थी।श्रीलंका सरकार ने उत्पीड़न के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि पिल्लई को अपनी इच्छा से किसी से भी मिलने की अनुमति दी गई थी।उनके न्यायिक करियर के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में उनका काम रहा। वहां वह जीन-पॉल अकायेसू के खिलाफ ऐतिहासिक मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीशों में शामिल थीं। पूर्व महापौर अकायेसू को 1994 के रवांडा नरसंहार के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार के लिए प्रत्यक्ष एवं सार्वजनिक रूप से उकसाने का दोषी ठहराया गया था।न्यायाधिकरण के फैसले ने स्थापित किया कि यदि आवश्यक मंशा मौजूद हो, तो बलात्कार और यौन हिंसा को नरसंहार के कृत्यों के रूप में माना जा सकता है। इन्हें मानवता के खिलाफ अपराध भी माना जा सकता है।नॉर्वे की नोबेल समिति ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए पिल्लई की सराहना की।समिति ने नरसंहार के लिए उकसाने के मामले में न्यायाधिकरण के काम को भी रेखांकित किया। अकायेसू मामले में न्यायाधिकरण ने उन्हें नरसंहार के लिए प्रत्यक्ष और सार्वजनिक रूप से उकसाने का दोषी ठहराया, जिससे अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कानून में एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम हुई।संगठन के आधिकारिक इतिहास के अनुसार, पिल्लई ने 1992 में जेसिका न्युविर्थ और फेरियल घराही के साथ मिलकर ‘इक्वैलिटी नाउ’ की स्थापना की थी। यह अंतरराष्ट्रीय महिला अधिकार संगठन महिलाओं के अधिकारों को आगे बढ़ाने और भेदभावपूर्ण कानूनों एवं प्रथाओं को चुनौती देने के लिए काम करता है।सितंबर 2025 में, पिल्लई की अध्यक्षता वाले स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि इजराइली अधिकारियों और सुरक्षा बलों ने गाजा में फलस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार किया था। हालांकि इजराइल ने रिपोर्ट के निष्कर्षों को खारिज कर दिया था।नोबेल पुरस्कार की घोषणा करते हुए नॉर्वे की नोबेल समिति ने सार्वभौमिक कानूनी सिद्धांतों के प्रति पिल्लई की प्रतिबद्धता की सराहना की। समिति ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रों और राष्ट्रीय नेताओं को जवाबदेह ठहराया तथा हिंसा और संघर्ष के पीड़ितों में आशा जगाई।समिति ने उन्हें अपने समय की सबसे सम्मानित अंतरराष्ट्रीय विधिवेत्ताओं में से एक बताया और इस बात पर जोर दिया कि शांति बनाए रखने तथा हिंसा के बिना संघर्षों का समाधान करने के लिए कानून का शासन आवश्यक है।समिति ने कहा, “शांति के लिए न्याय जरूरी है।” उसने दलील दी कि स्थायी शांति की नींव कानूनी सिद्धांतों पर होनी चाहिए, न कि शक्तिशाली देशों की इच्छा या शक्ति के नाजुक संतुलन पर।नोबेल शांति पुरस्कार पहली बार 1901 में दिया गया था। इस तरह 2026 में इस पुरस्कार की 125वीं वर्षगांठ है।
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स्टॉकहोम. कनाडाई कवि, निबंधकार और अनुवादक ऐनी कार्सन को इस साल के साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। स्टॉकहोम में स्वीडिश अकादमी ने बृहस्पतिवार को यह घोषणा की। टोरंटो में जन्मीं 76 वर्षीय कार्सन प्राचीन यूनानी और रोमन साहित्य के विषयों और कहानियों को अपनी रचनाओं का आधार बनाती हैं, जो अक्सर कविता, निबंध और कथा साहित्य के तत्वों का मिश्रण होती हैं। स्वीडिश अकादमी की स्थायी सचिव इंग्रिड कार्लबर्ग ने बताया कि जब अकादमी ने उन्हें नोबेल साहित्य पुरस्कार विजेता बनने की सूचना देने के लिए संपर्क किया, तो लेखिका आइसलैंड में ''हवा की सुगबुगाहट सुन रही थीं''। कार्लबर्ग ने कहा, ''वह बहुत आश्चर्यचकित थीं।''
कार्सन पिछले कुछ वर्षों के उन साहित्य नोबेल पुरस्कार विजेताओं में से एक हैं जो अधिक चर्चित रहे हैं। इस पुरस्कार से अक्सर ऐसे लेखकों को सम्मानित किया जाता है जो साहित्यिक दुनिया के बाहर बहुत कम जाने जाते हैं और व्यापक पाठकों से जुड़ने की क्षमता की तुलना में साहित्यिक प्रयोग को प्राथमिकता देने के लिए इसकी कभी-कभी आलोचना भी की जाती है। हालांकि, यह पुरस्कार पाठकों को उनकी भाषाओं या पाठन अभिरुचियों से परे लेखकों और कृतियों से भी परिचित कराता है। कार्सन की पुस्तकों में प्राचीन यूनानी साहित्य में इच्छा के सुख और दर्द पर आधारित नजरिया प्रस्तुत करने वाली 'इरोज द बिटरस्वीट', छंदबद्ध उपन्यास 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड', कविता और गद्य का संग्रह 'मेन इन द ऑफ ऑवर्स' (जिसने 2001 में कनाडा का प्रतिष्ठित ग्रिफिन पोएट्री प्राइज जीता था), और मर्लिन मुनरो तथा ट्रॉय की हेलेन की तुलना करने वाली कृति ''नॉर्मा जीन बेकर ऑफ ट्रॉय'' शामिल हैं। कार्सन ने शास्त्रीय यूनानी साहित्य की ऐसी कृतियों का अनुवाद भी किया है, जिन्हें स्वीडिश अकादमी के अनुसार ''स्वयं में उनकी स्वतंत्र कृतियां माना जा सकता है।'' इनमें सैफो की कविताओं पर आधारित 'इफ नॉट, वंडर' भी शामिल है। साहित्य समिति के अध्यक्ष एंडर्स ओल्सन ने कहा, ''उनकी लगभग पूरी साहित्यिक रचना, शब्दों के प्रति भाषाशास्त्री के जुनून और नए अर्थ के लिए कवि की तड़प के बीच के संगम पर केंद्रित रही है।'' कार्सन ने कई उत्तर अमेरिकी विश्वविद्यालयों में क्लासिक्स (शास्त्रीय साहित्य) पढ़ाया है और वह आइसलैंड में रह चुकी हैं, जहां उन्हें और उनके पति रॉबर्ट क्यूरी को 2022 में नागरिकता प्रदान की गई थी। उन्होंने 2010 में प्रकाशित 'नॉक्स' में अपने खुद के जीवन को भी शब्दों में उतारा है। यह किताब उनके भाई माइकल की दशकों लंबी अनुपस्थिति और फिर उनकी मृत्यु पर आधारित है। ओल्सन ने इसे ''जितना साहित्यिक, उतना ही मूर्तिकला जैसा (शिल्पगत) सृजन कहा—एक बक्से के रूप में एक समाधि-लेख, जिसमें उनके मृत भाई को समर्पित चित्रों, पत्रों और अन्य लिखित पाठों का एक अकॉर्डियन की तरह खुलने वाला संग्रह है।'' इसमें रोमन कवि कैटुलस द्वारा उनके अपने भाई के लिए लिखे गए एक शोकगीत का कार्सन द्वारा किया गया अनुवाद भी शामिल है। कार्सन ने 2024 में 'लंदन रिव्यू ऑफ बुक्स' में पार्किंसंस रोग से पीड़ित होने के बारे में लिखा था। उन्होंने कहा कि एक 'विशेष रूप से परेशान करने वाला' लक्षण यह था कि उनकी लिखावट 'बिखर गई थी'। साहित्य के नोबेल पुरस्कार की घोषणा स्टॉकहोम में स्वीडिश अकादमी द्वारा की गई। इस बारे में कार्सन या उनके किसी प्रतिनिधि की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी और उन्होंने 'एपी' के ईमेल का तत्काल जवाब नहीं दिया। पिछले साल, हंगरी के लेखक लास्लो क्रास्नाहोरकाई ने साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीता था।
इस साल के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की शुरुआत सोमवार को हुई। चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार सोमवार को कार्ल डीसेरोथ, पीटर हेगेमन और जॉर्ज नागेल को देने की घोषणा की गई, जिन्होंने इस बात पर अनुसंधान किया है कि मस्तिष्क व्यक्तिगत तंत्रिका कोशिकाओं (नर्व सेल्स) की गतिविधियों को चालू या बंद करने के लिए किन प्रणालियों का उपयोग करता है। मंगलवार को भौतिकी के नोबेल पुरस्कार की घोषणा की गई। बेल्जियम में जन्मे वैज्ञानिक फ्रांसिस हैल्जेन को 'न्यूट्रिनो' के एक दुर्लभ समूह से जुड़े रहस्य सुलझाने के उनके प्रयास के लिए 2026 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। हेनरी बी कागन और केंसो सोआई को रासायनिक अणुओं में रहस्यमयी दर्पण छवियों (मिरर इमेज) को सुलझाने के उनके प्रयासों के लिए इस वर्ष का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा बुधवार को की गई। शुक्रवार को नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा की जाएगी, जिसके बाद अर्थशास्त्र में नोबेल स्मृति पुरस्कार के विजेता का नाम सोमवार को घोषित किया जाएगा। इस साल पुरस्कार की राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर (लगभग 12 लाख अमेरिकी डॉलर) है। -
स्टेनफोर्ड. कैलिफोर्निया के वैज्ञानिक डॉ. कार्ल डीसेरोथ ने रविवार देर रात चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार जीतने की खबर मिलने के बाद बधाई देने वालों के फोन का जवाब दिया लेकिन इसके कुछ ही देर बाद उन्होंने अपने बच्चों के लिए स्कूल का लंच तैयार किया। डीसेरोथ (54) को ऑप्टोजेनेटिक्स नामक मस्तिष्क विज्ञान की एक नयी शाखा विकसित करने में योगदान के लिए जर्मनी के दो वैज्ञानिकों के साथ इस साल का चिकित्सा नोबेल पुरस्कार का विजेता घोषित किया गया है। ऑप्टोजेनेटिक्स में प्रकाश और जीन की मदद से जीवित मस्तिष्क में न्यूरॉन्स को सक्रिय या निष्क्रिय किया जाता है। स्टेनफोर्ड स्थित अपने घर में डीसेरोथ देर रात तक पत्रकारों और शुभचिंतकों से बातचीत करते रहे। तब उनके बच्चे सो रहे थे। उन्होंने बताया कि बच्चों के स्कूल जाने से पहले उन्हें उनके लिए लंच तैयार करना था। खुद को रात में देर तक काम करने वाला व्यक्ति बताने वाले डीसेरोथ हावर्ड ह्यूजेस मेडिकल इंस्टीट्यूट के अन्वेषक और स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। उन्होंने बताया कि शोधपत्रों की समीक्षा करने और अपने छात्रों को ईमेल भेजने के बाद वह सोने गए ही थे कि उन्हें स्टॉकहोम स्थित नोबेल असेंबली से फोन आया। उन्होंने 'द एसोसिएटेड प्रेस' से कहा, ''मुझे लगभग ऐसा लगा जैसे बोलने की मेरी क्षमता ही चली गई हो, लेकिन एक-दो मिनट बाद मैं संभल गया।'' इसके बाद उन्होंने एपी के विज्ञान संवाददाताओं को दूरस्थ माध्यम से साक्षात्कार भी दिए। पुरस्कार की घोषणा के करीब एक घंटे बाद उन्होंने कहा, ''वास्तव में नींद नहीं आई।'' डीसेरोथ से फोन और वीडियो कॉल के जरिए बातचीत के दौरान एपी का एक फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर स्टैनफोर्ड स्थित उनके घर की ओर रवाना हो गए। फोटोग्राफर करीब तड़के साढ़े तीन बजे उनके घर पहुंचा। बाहर हैलोवीन की सजावट थी और अंदर केवल एक रोशनी जल रही थी। उसे कुछ देर लगा कि कहीं वह गलत घर तो नहीं पहुंच गया। इसके बाद उसने दरवाजा खटखटाया। वैज्ञानिक की पत्नी डॉ. मिशेल मोन्जे-डीसेरोथ ने दरवाजा खोला और फोटोग्राफर को अंदर बुलाया। उस समय नोबेल पुरस्कार विजेता घर के सोफे पर बैठकर फोन पर लोगों से बातचीत कर रहे थे। मोन्जे-डीसेरोथ भी हावर्ड ह्यूजेस मेडिकल इंस्टीट्यूट की अन्वेषक और स्टेनफोर्ड की बाल न्यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट हैं। वह अपने पति के साथ थीं और स्टेनफोर्ड के संचार विभाग के कर्मचारियों के लिए कॉफी भी बना रही थीं, जो इस उपलब्धि का जश्न मनाने वहां पहुंचे थे। डीसेरोथ ने एपी को बताया कि वह अपने काम को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की खबर से हैरान थे, लेकिन उनकी पत्नी को आश्चर्य नहीं हुआ। उन्होंने अपने साथ नोबेल पुरस्कार विजेता घोषित किए गए पीटर हेगेमन और जॉर्ज नागेल के साथ किए गए शोध तथा उसके व्यावहारिक प्रभावों के बारे में बताया। उन्होंने कहा, ''मैं चिकित्सक-वैज्ञानिक हूं। मैं मनोचिकित्सक हूं। मुझे मरीजों और ऑटिज्म तथा अवसाद से पीड़ित अपने मरीजों की चिंता रहती है। लेकिन मैं एक बुनियादी वैज्ञानिक भी हूं और मुझे इस अद्भुत अंग—मस्तिष्क को समझने में रुचि है कि यह कैसे काम करता है, कैसे सूचनाओं को एकीकृत और संसाधित करता है तथा उन सभी चीजों को कैसे संभव बनाता है जो हमें इंसान बनाती हैं।'' साक्षात्कारों का सिलसिला खत्म करने के बाद डीसेरोथ ने स्टेनफोर्ड के कर्मचारियों से कहा कि उन्हें सुबह साढ़े छह बजे से करीब एक घंटे का विराम चाहिए। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे जागने वाले हैं और स्कूल जाने से पहले उनके लिए लंच तैयार करना होगा। जब स्टेनफोर्ड के एक प्रतिनिधि ने देर रात तक चल रही हलचल से पड़ोसियों को परेशानी होने की आशंका जताई, तो मोन्जे-डीसेरोथ ने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने कहा कि वे विश्वविद्यालय के शिक्षकों के आवासीय परिसर में रहते हैं और उनके पड़ोस में कई नोबेल पुरस्कार विजेता हैं।
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दुबई. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शनिवार को भारतीय पायलट स्मित मच्छार से फोन पर बात की और 'फ्लाईदुबई' के विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की सह-पायलट की साजिश को नाकाम करने के लिए उन्हें पूरी दुनिया का 'नायक' बताया। कैप्टन मच्छार पर बुधवार को फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 के कॉकपिट में उनके सह-पायलट ने हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उस समय विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था। नेतन्याहू ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक अस्पताल में उपचार करा रहे 38 वर्षीय पायलट से बात करके उनका हालचाल जाना। 'लाउडस्पीकर मोड' पर की गई इस कॉल की एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर साझा की गई। उन्होंने बातचीत के दौरान मच्छार एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इजराइल के स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित किया। कैप्टन मच्छार से बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने कहा, ''यह हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान है, जो हम अपने स्वतंत्रता दिवस पर प्रदान करते हैं। आमतौर पर यह केवल इजराइल के नागरिकों के लिए है, लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले में इजराइल का हर नागरिक आपका सम्मान करेगा। हम उम्मीद करते हैं कि आप जल्द ही इजराइल आएंगे।'' इजराइल के स्वतंत्रता दिवस को 'योम हाअत्जमाउत' कहा जाता है और यह हिब्रू कैलेंडर के इयार महीने की पांचवीं तारीख को मनाया जाता है, जो अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में पड़ती है। शनिवार को इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आप इजराइल, भारत और पूरी दुनिया के नायक हैं। मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं आपको (मच्छार) इजराइल के स्वतंत्रता दिवस पर मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित करता हूं।'' पोस्ट में कहा गया, ''आज शाम हुई इस भावुक बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कैप्टन मच्छार से पूछा कि यह सब कैसे शुरू हुआ। इस पर मच्छार ने कॉकपिट के उन भयावह पलों के बारे में कई नयी जानकारियां साझा कीं।'' मच्छार ने उन्हें बताया कि हमले से पहले सह-पायलट इबादत करना चाहता था। उन्होंने कहा, ''जब वह इबादत कर रहा था, तो सम्मान के कारण मैं आगे की ओर देख रहा था और पीछे की तरफ नहीं देख रहा था। अचानक, करीब चार-पांच मिनट बाद, मेरे सिर के पीछे जोरदार वार हुआ।'' भारतीय पायलट ने कहा, ''मेरे मन में पहला ख्याल यह आया कि विमान को भारी नुकसान हुआ है और कुछ ठीक नहीं है। लेकिन इसके बाद एक के बाद एक वार होते रहे और तभी मुझे एहसास हुआ कि यह विमान की समस्या नहीं है, बल्कि कॉकपिट में मेरे साथ मौजूद दूसरा व्यक्ति है।'' उन्होंने कहा, ''मैंने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती वार के कारण मेरी आंखों के आगे लगभग अंधेरा छा गया था और मुझे सबकुछ धुंधला दिखाई दे रहा था।'' मच्छार ने बताया कि इसके बाद उन्हें अहसास हुआ कि विमान ''तेजी से नीचे की ओर जा रहा है''। उन्होंने कहा कि इस हादसे की केवल ''धुंधली सी यादें'' ही उनके पास बची हैं। उन्होंने कहा कि वह एक बार कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे, लेकिन सह-पायलट ने उसे फिर से बंद कर दिया, जिससे वह कॉकपिट के फर्श पर पड़े रहे और उन्हें विमान तथा ''लोगों के चीखने'' की आवाजें सुनाई दे रही थीं। कैप्टन ने कहा, ''मुझमें खुद के लिए और यात्रियों की जान बचाने के लिए एक अंतिम प्रयास करने की ताकत बाकी थी। मैंने मन बना लिया था कि अगर मैंने अभी कदम नहीं उठाया, तो मेरा बचना असंभव है।'' मच्छार ने कहा, ''और उसी पल मैंने अपनी पूरी ताकत लगा दी। जान की बाजी लगाकर मैं दरवाजे की ओर बढ़ा और उसे धक्का देकर खोल दिया। गनीमत थी कि बाहर लोग बिल्कुल तैयार थे; (उन्होंने) फौरन मोर्चा संभाल लिया और आगे की कहानी तो आपको मालूम ही है।'' नेतन्याहू ने उनसे कहा कि वह उनके साहस और ''असंभव परिस्थितियों में भी निर्णय लेने की सूझबूझ'' से ''हैरान'' हैं। उन्होंने मच्छार से कहा, ''आपने इतने लोगों की जान बचाई। मुझे लगता है कि आपने इससे भी बड़ी चीज बचाई है। आपने दुनिया की भावना को बचाया... दुनिया भर में उचित रूप से आपकी प्रशंसा की जा रही है। आप इजराइल के नायक हैं। आप भारत के नायक हैं। आप पूरी दुनिया के नायक हैं।'' नेतन्याहू ने कहा, ''आप जानते हैं, मेरा मानना है कि यह किस्मत का खेल और आस्था का भी एक मोड़ है, तथा आपने जो किया वह असाधारण है। मैंने निश्चित रूप से इजराइली यात्रियों से सुना कि उसके बाद क्या हुआ और आप एक महान नायक हैं। आपके साथ भी नायक थे और आपने उस दिन सबको बचा लिया।'' कई समाचार संस्थानों, जिनमें 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' और सीएनएन शामिल हैं, की खबरों के अनुसार, ओमान के नागरिक हमाम अल-हम्मामी की पहचान फ्लाईदुबई के उस सह-पायलट के रूप में हुई है, जिसने मच्छार पर हमला किया और उड़ान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का प्रयास किया। खबरों में मामले से परिचित लोगों के हवाले से कहा गया है कि कट्टरपंथी विचारों को लेकर चिंता के कारण अल-हम्मामी को पहले ओमान में विमान उड़ाने से प्रतिबंधित किया गया था। उसने कॉकपिट में आम तौर पर आपात स्थिति में इस्तेमाल के लिए रखी जाने वाली कुल्हाड़ी से मच्छार पर हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। इस उड़ान में 174 यात्री सवार थे। विमान ने आपातकालीन संकेत भेजे और 34,000 फुट की ऊंचाई से 17,000 फुट से अधिक नीचे की ओर लुढ़क गया। कैप्टन मच्छार कॉकपिट के फर्श पर घायल अवस्था में पड़े थे। उन्हें जब विमान के नीचे जाने का एहसास हुआ तो उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिससे यात्रियों को हमलावर पर काबू पाने में मदद मिली। दो रिजर्व पायलटों ने विमान को सऊदी अरब के तबुक शहर स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा। वहां अल-हम्मामी को हिरासत में ले लिया गया, जबकि मच्छार को पास के अस्पताल ले जाया गया और बाद में एयर एंबुलेंस से अबू धाबी पहुंचाया गया। जांच की अगुवाई कर रहे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने शनिवार को कहा कि उसकी जांच में सामने आया है कि सह-पायलट ने ''आतंकवादी कृत्य'' को अंजाम देने का प्रयास किया था। शुक्रवार को मच्छार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से वीडियो कॉल पर बात की और हमले के बाद के भयावह क्षणों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वह अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन दूसरों को भी नहीं मरने देने के लिए दृढ़ थे। भारतीय दूतावास ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा कि मच्छार की हालत स्थिर है और वह ''अच्छी तरह स्वस्थ हो रहे हैं।'' दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने शनिवार को अस्पताल में मच्छार से मुलाकात की और उनके साहस तथा जिम्मेदारी की भावना की सराहना की। यूएई के उपप्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री हमदान ने कहा कि फ्लाईदुबई के पायलट ने ''साहस, जिम्मेदारी और मानव जीवन के प्रति चिंता की सर्वोच्च भावना'' का परिचय दिया। नेतन्याहू ने इससे पहले उन चार इजराइली यात्रियों से मुलाकात की थी, जिन्होंने हमलावर पर काबू पाने में मदद की थी। उन्होंने विमान को बचाने के लिए हुए संघर्ष के बारे में यात्रियों से जानकारी ली। यात्रियों ने बताया कि हमलावर को काबू में करने के बाद उन्होंने हेडफोन की केबल से सह-पायलट को बांध दिया था। इजराइल के प्रधानमंत्री ने उनके ''असाधारण साहस, सूझबूझ और दृढ़ विश्वास'' की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने एक बड़ी त्रासदी को टालने और कई लोगों की जान बचाने में मदद की। उन्होंने यह भी कहा कि इजराइल के स्वतंत्रता दिवस पर ये यात्री नागरिक वीरता की मशाल जलाएंगे। नेतन्याहू ने बुधवार शाम सीएनएन के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि घायल पायलट, यात्रियों और चालक दल के अन्य सदस्यों ने ''9/11 जैसी त्रासदी को होने से रोकने में सफलता हासिल की।'' इजराइली प्रधानमंत्री ने बृहस्पतिवार को फॉक्स न्यूज से कहा कि उड़ान में काबू किए जाने के बाद हमलावर चिल्ला रहा था, ''मुझे मारो, मुझे मारो!'' उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी से संकेत मिलता है कि हमलावर आत्मघाती था और ऐसा प्रतीत होता है कि उसका इरादा विमान को गिराने का था। उन्होंने यह भी कहा कि हमलावर ''इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित'' था। इस बीच, मीडिया में आई खबरों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया और इजराइल के अधिकारी ओमानी सह-पायलट के ऑस्ट्रेलिया से संबंधों और उसके फ्लाईदुबई की तेल अवीव जाने वाली उड़ान के चालक दल का हिस्सा बनने की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। वहीं, यूएई के नेतृत्व में जारी जांच में उसके मकसद और संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।
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दुबई. ऑस्ट्रेलिया और इजराइल के अधिकारी ओमान के सह-पायलट के ऑस्ट्रेलिया से संबंधों और इस बात की जांच कर रहे हैं कि वह तेल अवीव जा रही 'फ्लाईदुबई' की उड़ान के चालक दल का हिस्सा कैसे बना। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के नेतृत्व में जारी जांच में उसके इरादों और संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। मीडिया की खबरों से यह जानकारी मिली। ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) की रविवार को प्रकाशित खबर के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस ने कहा है कि आतंकवाद रोधी टीम इस व्यक्ति के ऑस्ट्रेलिया से संबंधों की जांच कर रही है। ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस ने 'एबीसी' और 'बीबीसी' को बताया कि ऑस्ट्रेलिया की जांच विक्टोरिया संयुक्त आतंकवाद रोधी टीम कर रही है, जिसमें संघीय पुलिस, विक्टोरिया पुलिस और सुरक्षा खुफिया संगठन शामिल हैं। सूत्रों ने ऑस्ट्रेलियाई मीडिया को बताया कि सह-पायलट को 2014 में छात्र वीजा जारी किया गया था और उसने 2015 से 2017 के बीच ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की थी। इसके बाद वह देश छोड़कर चला गया। 'एबीसी' की खबर के अनुसार, उसका वीजा 2019 में रद्द कर दिया गया था। हालांकि, वीजा रद्द किए जाने की वजह उसका आचरण नहीं था, बल्कि वह किसी पाठ्यक्रम में पंजीकृत नहीं था और इसलिए छात्र वीजा के लिए पात्र नहीं रह गया था। जांच का नेतृत्व कर रहे यूएई ने शनिवार को कहा कि उसकी जांच में सामने आया है कि सह-पायलट ने ''आतंकी कृत्य'' करने की कोशिश की। सरकारी समाचार एजेंसी 'डब्ल्यूएएम' के अनुसार, यूएई के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल शम्सी ने बताया कि सह-पायलट ने पायलट पर हमला करने के लिए विमान में मौजूद कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया और विमान पर नियंत्रण करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि घटना से जुड़ी पूरी परिस्थितियों, मकसद और किसी भी संभावित संबंध का पता लगाने के लिए जांच जारी है। कई मीडिया संस्थानों ने सह-पायलट की पहचान ओमान के नागरिक हमाम अल-हमामी के रूप में की है, हालांकि आधिकारिक तौर पर उसकी पहचान की पुष्टि नहीं हुई है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की खबर के अनुसार, अल-हमामी को उसके कट्टरपंथी वैचारिक विचारों को लेकर चिंता के कारण पूर्व में ओमान में विमान उड़ाने से रोक दिया गया था। बुधवार को फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में अल-हमामी ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी (क्रैश एक्स) से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले के पीछे का मकसद अभी स्पष्ट नहीं है।
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दुबई/दुबई के शहजादे हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मक्तूम ने भारतीय पायलट स्मित मच्छार के 'साहस' की शनिवार को प्रशंसा की, जिन्होंने उड़ान के दौरान अपने सह-पायलट के हमले के बाद विमान को दुर्घटनाग्रस्त कराने के प्रयास को नाकाम कर दिया था। कैप्टन मच्छार पर बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 के कॉकपिट में चाकू से हमला किया गया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हमदान ने अस्पताल में मच्छार से मुलाकात की और इसकी तस्वीरें 'एक्स' पर साझा कीं। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री हमदान ने कहा कि फ्लाईदुबई के पायलट ने ''साहस, जिम्मेदारी और मानव जीवन के प्रति संवेदनशीलता की सर्वोच्च मिसाल पेश की।'' उन्होंने कहा, ''हम और देश का नेतृत्व उनकी सराहना करते हैं।''
हमदान ने कहा, ''हमें गर्व है कि वह हमारी टीम का हिस्सा हैं...हमारे देश की कहानी का हिस्सा हैं... और उन मूल्यों का हिस्सा हैं, जिनके लिए यूएई जाना जाता है... करुणा, शांति और जीवन को महत्व देने वाला देश।'' यूएई में भारतीय दूतावास ने इससे पूर्व कहा था कि मच्छार की हालत में सुधार हो रहा है और उनका इलाज जारी है। दूतावास ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''कैप्टन स्मित का बेहतरीन इलाज किया जा रहा है और उनकी हालत में सुधार हो रहा है। हम उनके परिवार और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं तथा उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए हरसंभव सहयोग दे रहे हैं।'' दूतावास ने मच्छार को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए यूएई की सरकार का भी आभार व्यक्त किया और कहा कि वह उनकी सेहत में सुधार के लिए प्रार्थना कर रहा है। जांच का नेतृत्व कर रहे यूएई ने कहा कि सह-पायलट ने ''आतंकवादी कृत्य'' को अंजाम देने की कोशिश की।
सरकारी समाचार एजेंसी 'डब्ल्यूएएम' के अनुसार यूएई के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल शम्सी ने बताया कि सह-पायलट ने मच्छार पर हमला करने के लिए विमान में मौजूद कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया और विमान पर नियंत्रण करने की कोशिश की। खबरों के अनुसार, घायल होने के बावजूद मच्छार कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे, जिससे यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सह-पायलट पर काबू पाने का मौका मिल गया। -
काहिरा. संयुक्त अरब अमीरात ने शनिवार को बताया कि फ्लाईदुबई की उड़ान के सह-पायलट ने कॉकपिट में रखी कुल्हाड़ी (क्रैश एक्स) से विमान के कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया था। यूएई ने इस घटना को "आतंकी हमला" करार दिया।विमान में 182 यात्री सवार थे। यूएई के बयान में अटॉर्नी जनरल के हवाले से बताया गया कि सह-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने बुधवार को इजराइल जा रही उड़ान पर हमले के दौरान विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की भी कोशिश की। यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने हस्तक्षेप कर सह-पायलट को काबू में किया और विमान को स्थिर किया।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लाईदुबई के पायलट को ''नायक'' बताते हुए उसकी सराहना की, जिसने सह-पायलट के चाकू से किए गए हमले का मुकाबला किया, कॉकपिट का दरवाजा खोला और मदद के लिए आवाज लगाई, जिससे विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश नाकाम हो गई। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की। ट्रंप के अनुसार नेतन्याहू ने उन्हें बताया कि एक 'प्लंबर', जिसने कभी विमान नहीं उड़ाया था, उसने दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। यह विमान बाद में सऊदी अरब में उतरा। विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश को नाकाम करने वाले पायलट की पहचान भारतीय नागरिक स्मित मच्छार के रूप में हुई है। नेतन्याहू समेत कई अन्य लोगों ने उन्हें ''नायक'' बताया है। ट्रंप ने नेतन्याहू से हुई बातचीत को याद करते हुए कहा, ''पायलट की हालत बहुत खराब थी और मेरा अनुमान है कि अब भी उसकी हालत बहुत खराब है, लेकिन उसने अद्भुत सूझबूझ दिखायी। एक तरह से वह नायक है।'' ट्रंप ने कहा कि पायलट ने पीछे की ओर गिरते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोला और मदद के लिए चिल्लाया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ''ऐसा लगता है कि सह-पायलट शायद आतंकवादी था या शायद मानसिक रूप से अस्थिर था और उसने पायलट पर चाकू से हमला किया।'' इसके बाद ट्रंप ने एक इजराइली यात्री के ''अद्भुत'' हस्तक्षेप का जिक्र किया, जिसकी पहचान उन्होंने एक प्लंबर के रूप में की। ट्रंप ने कहा कि इस यात्री ने कभी विमान नहीं उड़ाया था, लेकिन वह कॉकपिट में गया, सह-पायलट को उसकी सीट से खींचकर बाहर निकाला और उसे पीछे की ओर धकेल दिया, जिसके बाद अन्य यात्रियों ने उसे काबू करने में मदद की। ट्रंप के अनुसार, उस यात्री ने बाद में बताया कि उसने टेलीविजन कार्यक्रम 'एयर डिजास्टर्स' देखकर विमान उड़ाने से जुड़ी कुछ बुनियादी बातें सीखी थीं। ट्रंप ने कहा, ''उसने बताया कि वह यह कार्यक्रम काफी देखता है और उसे देखकर उसने विमान उड़ाने के बारे में कुछ बातें सीखीं।'' ट्रंप ने कहा कि विमान के पिछले हिस्से में मौजूद अतिरिक्त पायलट और सुरक्षाकर्मी बाद में कॉकपिट तक पहुंचे और विमान का नियंत्रण संभाल लिया। उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि यह सबसे अद्भुत कहानी है।''हालांकि, ट्रंप ने कहा कि वह केवल उन्हें मिली जानकारी बता रहे हैं और उन्होंने इन तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है। उन्होंने कहा, ''अब, यह वो कहानी है जो मैंने सुनी है। मुझे नहीं पता कि यह सच है या नहीं, लेकिन मुझे यह कहानी बीबी (बेंजामिन नेतन्याहू) और संभवत: प्रारंभिक सूत्रों से मिली है।'' -
यरुशलम. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि फ्लाईदुबई विमान को कथित तौर पर गिराने की कोशिश करने वाले सह-पायलट का ईरान से संबंध हो सकता है। व्हाइट हाउस में बृहस्पतिवार को संवाददाताओं ने ट्रंप से पूछा कि क्या उन्हें हमले के पीछे रहे सह-पायलट और तेहरान के बीच किसी संबंध के बारे में जानकारी दी गई है।उन्होंने कहा, ''हम इस पर अभी काम कर रहे हैं।'' ट्रंप ने कहा, ''मैं जो सुन रहा हूं, उसके आधार पर कहूंगा कि जवाब हां है, लेकिन हम इस पर अभी काम कर रहे हैं।'' उन्होंने इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।
यह पूछे जाने पर कि यदि हमले के पीछे ईरान का हाथ पाया गया तो क्या अमेरिका तेहरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करेगा, ट्रंप ने कहा, ''हां, उन पर बहुत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चिंता मत कीजिए।'' उन्होंने कहा, ''आप उनसे ही पूछिए। वे जानते हैं कि क्या हुआ। उन पर बहुत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।'' -
वाशिंगटन. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दक्षिण और मध्य एशिया में पदस्थ अमेरिकी राजदूतों के एक सम्मेलन को डिजिटल माध्यम से संबोधित किया। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर की मेजबानी में मंगलवार को नयी दिल्ली में राजदूतों का क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। रुबियो ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आज मैंने भारत में राजदूत सर्जियो गोर की मेजबानी में आयोजित हमारे राजदूतों के क्षेत्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया।'' उन्होंने कहा कि कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, बांग्लादेश, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका में तैनात अमेरिकी राजदूतों तथा दूतावास प्रमुखों से बात करके उन्हें अच्छा लगा। रुबियो ने कहा, ''हमारे राजदूत गर्व के साथ अमेरिका को अधिक सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध बनाने के लिए काम कर रहे हैं।'' रुबियो अक्टूबर के मध्य में 100 से अधिक अमेरिकी कंपनियों के कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ उज्बेकिस्तान की यात्रा करने वाले हैं। इस यात्रा का उद्देश्य अमेरिका और मध्य एशिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाना तथा द्विपक्षीय कूटनीतिक और वाणिज्यिक सहयोग मजबूत करना है। अमेरिका पिछले एक दशक से उज्बेकिस्तान के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है। सोवियत संघ का हिस्सा रहा यह देश क्षेत्र में अमेरिका के एक प्रमुख सहयोगी के रूप में उभरा है। समरकंद यात्रा के दौरान रुबियो कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रियों के साथ 'सी5प्लस1' मंत्रिस्तरीय बैठक में भी हिस्सा लेंगे।
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दोहा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (एआईआईबी) की सालाना बैठक के दौरान सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड, जॉर्डन और नेपाल के मंत्रियों के साथ अलग से द्विपक्षीय बैठकें कीं। कतर की अपनी यात्रा के पहले दिन 28 सितंबर को सीतारमण ने सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सऊदी अरब द्विपक्षीय निवेश संधि को जल्द लागू किए जाने की उम्मीद कर रहा है। वित्त मंत्रालय ने कहा, ''दोनों मंत्रियों ने भारत-सऊदी अरब द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर बातचीत के सफल समापन का स्वागत किया। यह द्विपक्षीय निवेश के लिए एक मजबूत और अधिक भरोसेमंद रूपरेखा प्रदान करेगी और निवेशकों का विश्वास को और मजबूत करेगी।'' वित्त मंत्री ने कहा कि सऊदी अरब भारत का भरोसेमंद और महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। उन्होंने रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति तथा दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी का भी उल्लेख किया। मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक भागीदारी को और मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा की। सऊदी अरब के मंत्री ने भारत से निवेश में रुचि जताई। सीतारमण ने स्विट्जरलैंड से एआईआईबी गवर्नर पिएत्रो लाजेरी से भी मुलाकात की और राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) को भारत में अवसर तलाशने वाले विदेशी निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद भागीदार बताया। उन्होंने स्विट्जरलैंड के निवेशकों को भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश का लाभ उठाने के लिए एनआईआईएफ अवसंरचना कोष में अवसर तलाशने का निमंत्रण दिया। राजदूत लाजेरी ने कहा कि भारत में निवेश में विविधता लाने और निवेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने भारत की आगामी यात्रा और नयी दिल्ली में होने वाले दूसरे ईएफटीए (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) समृद्धि सम्मेलन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में स्विट्जरलैंड के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की वृद्धि वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की वृद्धि से तेज है। लाजेरी ने द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौते को अंतिम रूप देने के लिए समर्थन मांगा।
उन्होंने वित्तीय क्षेत्र और टिकाऊ वित्त के क्षेत्र में सहयोग में भी रुचि जताई।
वित्त मंत्री ने स्विट्जरलैंड के निवेशकों और वित्तीय सेवा क्षेत्र की इकाइयों को भारत के घरेलू वित्तीय सेवा केंद्र गिफ्ट आईएफएससी में निवेश के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। यह केंद्र वित्तीय सेवाएं और उत्पाद, कर लाभ तथा कारोबार के अनुकूल माहौल उपलब्ध कराता है। सीतारमण ने नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले से मुलाकात की और बाढ़ के बाद नेपाल के पुनर्निर्माण और राहत कार्यों के आकलन तथा प्राथमिकताओं पर चर्चा की। बातचीत में इस महत्वपूर्ण समय में भारत की ओर से दी जा सकने वाली सहायता के स्वरूप को तय करने के लिए दोनों देशों की टीम के बीच लगातार संपर्क बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। यूपीआई-एनपीआई संपर्क व्यवस्था को जल्द शुरू करने और उसके उपयोग पर भी चर्चा की गई, जो दोनों देशों के लिए लाभकारी पहल है। सीतारमण ने जॉर्डन की योजना एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री जेना जैद तौकान से भी मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को पांच अरब डॉलर तक बढ़ाने के लक्ष्य का उल्लेख किया। -
वाशिंगटन. अमेरिका के संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने सोमवार को कुख्यात अपराधी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को 10 शीर्ष वांछित भगोड़े अपराधियों की सूची में शामिल किया और उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने पर 10 लाख अमेरिकी डॉलर के इनाम की घोषणा की। एफबीआई ने कहा, ''लॉरेंस बिश्नोई के नेतृत्व वाले संगठित अपराध गिरोह में कथित संलिप्तता के लिए सतिंदरजीत सिंह वांछित है। यह गिरोह दक्षिणी कैलिफोर्निया के साथ-साथ पूरे अमेरिका और कनाडा में कई तरह की हिंसक गतिविधियों में शामिल है।'' जांच एजेंसी ने चेतावनी दी कि गोल्डी बराड़ खतरनाक और हथियारबंद अपराधी है।
एफबीआई के अनुसार, गोल्डी बराड़ राजनीतिक और धार्मिक नेताओं की हत्या, गोलीबारी, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, मारपीट तथा मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी जैसी गतिविधियों में कथित तौर पर शामिल है। एफबीआई ने कहा कि गोल्डी बराड़ अमेरिका में है और उत्तरी अमेरिका में इस गिरोह का कथित सरगना है।
अमेरिका के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया की डिस्ट्रिक्ट अदालत ने एक जुलाई को गोल्डी बराड़ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। उसके खिलाफ 'रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशंस' (आरआईसीओ) कानून के तहत आपराधिक साजिश, वसूली के जरिए कारोबार को प्रभावित करने और ऐसा करने का प्रयास करने की साजिश तथा मादक पदार्थों की तस्करी और उन्हें तस्करी के इरादे से अपने पास रखने की साजिश के आरोप लगाए गए हैं। गोल्डी बराड़ उन भगोड़े आरोपियों में शामिल है, जिनकी पहचान भारत से संचालित अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध गिरोहों के खिलाफ वर्षों तक चली संघीय जांच 'ऑपरेशन हार्डबॉल' के बाद हुई थी। अमेरिकी अधिकारियों ने जुलाई में ऐसे तीन समूहों से जुड़े 37 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए थे। - काठमांडू. नेपाल में पिछले कुछ दिनों के दौरान बाढ़, भूस्खलन और बारिश से जुड़ी अन्य घटनाओं में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। लगातार हो रही बारिश के कारण देश के कई हिस्सों में फिर बाढ़ आ गई, मकान क्षतिग्रस्त हो गए और सड़क यातायात बाधित हुआ। नेपाल पिछले महीने आई विनाशकारी आकस्मिक बाढ़ से अभी उबर भी नहीं पाया है। इस बाढ़ में कम से कम 1,453 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 5,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। शनिवार रात पाल्पा जिले की माथागढ़ी ग्रामीण नगरपालिका में भूस्खलन के कारण एक मकान मलबे में दब गया, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। रविवार सुबह उनके शव बरामद कर लिए गए। अलग-अलग घटनाओं में पिछले चार दिनों के दौरान बाढ़, भूस्खलन, आकाशीय बिजली गिरने और बारिश से जुड़ी अन्य घटनाओं में 16 लोगों की मौत हुई, जिससे मृतकों की कुल संख्या 21 हो गई। देश में पिछले पांच दिनों के दौरान मानसून से जुड़ी 439 घटनाएं हुईं, जबकि सुरक्षा बलों ने बाढ़, भूस्खलन और जलभराव से प्रभावित 1,284 लोगों को बचाया।
- संयुक्त राष्ट्र. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कनाडा की अपनी समकक्ष अनीता आनंद के साथ संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के इतर ''सार्थक वार्ता'' करने के बाद कहा कि भारत और कनाडा अपने संबंधों को ''नयी ऊंचाई'' पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। जयशंकर ने शनिवार को 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से मुलाकात हमेशा सुखद रहती है। उनके साथ संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर मुलाकात की। संबंधों को नयी ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी के बीच सार्थक चर्चा हुई।'' कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस सप्ताह की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संभवत: इस साल दिसंबर के आसपास कनाडा की यात्रा करेंगे।उन्होंने कहा था कि भारत के साथ व्यापार वार्ता में ओटावा ''अच्छी प्रगति'' कर रहा है। कार्नी ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था, ''भारत के साथ हमारी व्यापार वार्ता में अच्छी प्रगति हो रही है। ये संबंध लोगों के बीच आपसी संबंधों, सुरक्षा और व्यापार एवं अर्थव्यवस्था समेत कई स्तरों पर बेहद महत्वपूर्ण हैं।'' उन्होंने कहा था कि भारत और कनाडा ने पिछले साल जी20 शिखर सम्मेलन में यह प्रतिबद्धता जताई थी कि ''इस साल जी20 तक वार्ता पूरी करने की कोशिश की जाएगी।'' कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कनाडा यात्रा और भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने की दिशा में हुई प्रगति से जुड़े सवालों के जवाब में कही। इस समझौते का उद्देश्य 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना से अधिक बढ़ाकर सालाना 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 14-15 दिसंबर को फ्लोरिडा के डोराल स्थित ट्रंप नेशनल डोराल मियामी रिसॉर्ट में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे।कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान भारत-कनाडा संबंधों में काफी गिरावट आई थी, खासकर सितंबर 2023 में उनके उस बयान के बाद जब उन्होंने कहा था कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियां ब्रिटिश कोलंबिया में कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंट की संभावित संलिप्तता के आरोपों की जांच कर रही हैं। भारत ने इस दावे को खारिज कर दिया था। इस राजनयिक विवाद के कारण दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया था और राजनयिक कर्मचारियों की संख्या में कटौती की थी। इस साल जुलाई में रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस ने कहा कि उसे निज्जर की हत्या में भारत सरकार के अधिकारियों को जोड़ने वाला कोई सबूत नहीं मिला है। मार्च 2025 में कार्नी के कार्यभार संभालने के बाद से दोनों देशों के संबंधों में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौटने के संकेत दिखे हैं। कनाडाई प्रधानमंत्री और मोदी ने पिछले साल जून में संबंधों में स्थिरता बहाल करने के लिए संतुलित कदम उठाने पर सहमति जताई थी। इसके बाद दोनों देशों में उच्चायुक्तों की वापसी हुई और उच्चस्तरीय बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ। इस साल मार्च में दोनों सरकारों ने कहा था कि द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की दिशा में ''महत्वपूर्ण प्रगति'' हुई है। भारतीय मूल की आनंद के माता-पिता तमिलनाडु और पंजाब से थे।उन्होंने 2025 में कनाडा की विदेश मंत्री बनने के बाद से जयशंकर के साथ भी कई बैठकें की हैं। भारत में ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने पर जारी चर्चा के बीच जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर वेनेजुएला के विदेश मंत्री फेलिक्स प्लासेंसिया गोंजालेज से भी मुलाकात की। जयशंकर ने बैठक के बाद कहा, ''द्विपक्षीय सहयोग के अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ हमारे ऊर्जा संबंध भी गति पकड़ रहे हैं। हमने मौजूदा क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की।'' जयशंकर ने बेलारूस के विदेश मंत्री मैक्सिम रिझेनकोव एवं मेक्सिको के विदेश मंत्री रॉबर्टो वेलास्को अल्वारेज से भी मुलाकात की।
- वाशिंगटन. जी20 देशों के व्यापार एवं वाणिज्य मंत्री अमेरिका की बदलती शुल्क नीतियों, लंबे समय से जारी ईरान युद्ध और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे दबाव के बीच मिलवॉकी में बैठक करेंगे। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से एक अक्टूबर तक अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर की मेजबानी में होने वाली जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। बैठक में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बंधुआ मजदूरी को खत्म करने, 'सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र' (एमएफएन) के सिद्धांत को अद्यतन करने, खाद्य उत्पादों के व्यापार को राजनीतिक हथियार बनाने का विरोध करने तथा औद्योगिक क्षमता और अतिरिक्त उत्पादन से निपटने समेत कई मुद्दों पर चर्चा होगी। यूएसटीआर ने बयान में कहा कि ग्रीर जी20 की चर्चा का नेतृत्व करेंगे। इसमें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम को खत्म करने और औद्योगिक क्षेत्र में अतिरिक्त क्षमता तथा उत्पादन से निपटने जैसे मुद्दे शामिल हैं। मिलवॉकी अमेरिका का प्रमुख औद्योगिक और विनिर्माण केंद्र है। यहां खाद्य एवं पेय पदार्थ, मशीनरी विनिर्माण, ऊर्जा और जल प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों की कई बड़ी कंपनियां हैं। बैठक की शुरुआत मंगलवार शाम बिजनेस राउंडटेबल और नेशनल एसोसिएशन ऑफ मैन्युफैक्चरर्स की ओर से आयोजित स्वागत समारोह से होगी।बुधवार सुबह औपचारिक कार्यक्रम की शुरुआत वैश्विक इस्पात अतिरिक्त क्षमता मंच की मंत्रिस्तरीय बैठक से होगी। इस्पात उत्पादन और औद्योगिक क्षेत्र में अतिरिक्त क्षमता अंतरराष्ट्रीय व्यापार में विवाद का एक प्रमुख मुद्दा बन गई है। अमेरिका लगातार अतिरिक्त उत्पादन को अपने घरेलू विनिर्माताओं और श्रमिकों पर पड़ रहे दबाव से जोड़ता रहा है। इस्पात बैठक के बाद ग्रीर और जी20 देशों के मंत्री मिलवॉकी में 'रॉकवेल ऑटोमेशन' के एक संयंत्र का दौरा करेंगे। यूएसटीआर के बयान के अनुसार, इस दौरान ग्रीर और जी20 देशों के मंत्री कारखाने में श्रमिकों और उद्योग जगत के लोगों से मुलाकात करेंगे और चर्चा करेंगे कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति किस तरह अमेरिका में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत कर रही है। गोयल की ग्रीर के साथ द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। इसमें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मुख्य रूप से चर्चा होने की उम्मीद है। भारत और अमेरिका ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। हालांकि, अमेरिका में शुल्क व्यवस्था में हुए बदलावों के कारण इस समझौते पर आगे बातचीत जारी है। इस दौरान गोयल अमेरिकी उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी बातचीत कर सकते हैं।
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वॉशिंगटन. अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बीच टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची प्रतिमा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। एक रूढ़िवादी यूट्यूबर द्वारा प्रतिमा को हटाने की मांग किए जाने के बाद हिंदू संगठनों और उनसे मिलती-जुलती सोच रखने वाले लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया है। शुगर लैंड स्थित 'अष्टलक्ष्मी मंदिर' में स्थापित प्रतिमा की अगस्त 2024 में प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी। इसके बाद से ही यह विवाद के केंद्र में है। ईसाई रूढ़िवादी समुदाय के एक वर्ग ने इसे "ईसाई विरोधी" बताया है। यूट्यूबर जेसी ह्यूज ने मूर्ति की एक तस्वीर साझा करते हुए कहा, "वैसे, जब हम जीतेंगे, तो हम इसे गिरा देंगे।" अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी ने ह्यूज की टिप्पणी को "हिंदू धर्म के खिलाफ धमकी" करार दिया।9
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न्यूयॉर्क. अमेरिका के पूर्वोत्तर इलाके में सोमवार को एक अहम क्षेत्रीय हवाई यातायात नियंत्रण केंद्र में तकनीकी खराबी के कारण सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी गईं। यह व्यवधान ऐसे समय हुआ जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने के लिए कई देशों के नेता अमेरिका पहुंच रहे थे। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विमान तय समय अनुसार वॉशिंगटन से न्यूयॉर्क के लिए रवाना हुआ।
फिलाडेल्फिया में हवाई यातायात केंद्र का एक अहम सर्किट खराब हो गया, जिससे इस शहर के साथ-साथ कैनेडी, ला-गार्डिया और नेवार्क हवाई अड्डों पर आने वाली उड़ानें भी प्रभावित हुईं। बाद में संघीय उड्डयन प्रशासन को पता चला कि कहीं और जारी निर्माण कार्य की वजह से 'बैकअप फाइबर ऑप्टिक लाइन' भी कट गई थी। -
काहिरा. सूडान के एक सुदूरवर्ती इलाके में सोने की खदान ढहने से कम से कम 67 लोगों की मौत हो गई। चिकित्सकों के एक समूह और हादसे में बचे लोगों ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह हादसा वेस्ट कोर्डोफान प्रांत के नूहूद शहर में अल-जारा सोने की खदान में हुआ। यह इलाका अर्धसैनिक बल 'रैपिड सपोर्ट फोर्सेज' के नियंत्रण में है, जो पिछले तीन साल से ज्यादा समय से देश की सेना के साथ लड़ाई लड़ रही है। हादसे में बचे हुए लोगों ने बताया कि खदान ढहने की घटना मंगलवार देर रात हुई और कई लोग अब भी लापता हैं। चिकित्साकर्मियों के समूह ने कहा कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि मलबे में दबे लोगों या जीवित बचे लोगों की तलाश के लिए खोज और बचाव अभियान अभी जारी है।
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वाशिंगटन. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उद्योग के प्रमुख दिग्गजों के बीच आमतौर पर सहमति कम ही देखने को मिलती है और ऐसे में जब वे किसी मुद्दे पर एक राय बनाते हैं तो उस पर ध्यान जाना स्वाभाविक है। एंथ्रोपिक के दारियो अमोडेई, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, स्पेसएक्सएआई के एलन मस्क और उद्योग जगत की अन्य प्रमुख हस्तियों ने हाल के दिनों में कहा है कि एआई के विकास की रफ्तार धीमी करने की जरूरत है। यह सहमति एंथ्रोपिक के एक शोधकर्ता के इस्तीफे के बाद सामने आई, जिन्होंने इस तकनीक से मानवता को होने वाले गंभीर खतरों की चेतावनी दी थी। हालांकि, घरेलू और वैश्विक प्रतिस्पर्धा, मुनाफे की प्रेरणा और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विरोध जैसे कारक एआई के विकास की गति को लेकर किसी समन्वित प्रयास की राह में बाधा बने हुए हैं। गृह सुरक्षा विभाग में उभरती प्रौद्योगिकी नीति के पूर्व निदेशक और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर निक रीज का कहना है कि फिर भी, यह स्थिति उद्योग को ''सफलता की हमारी परिभाषा को नए सिरे से तय करने'' के लिए मजबूर कर सकती है।
रीज ने कहा, ''अगर हम एआई में सफलता को उसी तरह देखें जैसे विमानन क्षेत्र में सफलता को देखते हैं? विमान समय पर पहुंचे और न जाने कितने समय से कोई दुर्घटना न हुई हो। हम वाणिज्यिक विमानों की दुर्घटनाओं को स्वीकार नहीं करते, लेकिन एआई की बड़ी विफलताओं को स्वीकार कर लेते हैं।'' सैद्धांतिक रूप से प्रमुख एआई स्टार्टअप अपने मॉडल के विकास की गति कभी भी धीमी कर सकते हैं। लेकिन तकनीक में हुई तेज प्रगति के पीछे और अधिक शक्तिशाली मॉडल बनाने की प्रतिस्पर्धा भी एक प्रमुख कारण रही है। व्हाइट हाउस भी इस प्रयास का समर्थन करता रहा है ताकि अमेरिका एआई के क्षेत्र में चीन से अपनी बढ़त न खोए। एंथ्रोपिक और ओपनएआई संभावित रूप से रिकॉर्ड स्तर के सार्वजनिक शेयर निर्गम की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि, ओपनएआई ने कहा है कि वह इस साल सार्वजनिक होने की योजना को टाल रहा है और फिलहाल सुरक्षा प्रयासों पर ध्यान दे रहा है। इसी वजह से उद्योग की ओर से सामने रखे गए प्रस्ताव आपसी सहयोग और कुछ हद तक सरकारी नियमन पर निर्भर हैं। अमोडेई ने हाल में एक विस्तृत लेख प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने उन्नत एआई के विकास को धीमा करने की योजना सामने रखी। उनके एक प्रस्ताव के अनुसार, एआई के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों, जिन्हें आम तौर पर 'फ्रंटियर लैब्स' कहा जाता है, को स्वतंत्र बाहरी मूल्यांकनकर्ताओं को ''लगातार, कर्मचारी जैसे स्तर का पहुंच अधिकार'' देने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। इन मूल्यांकनकर्ताओं की टीमों के पास कंपनियों के कार्यालयों में काम करने, प्रवेश कार्ड और कंपनी के लैपटॉप इस्तेमाल करने जैसी सुविधाएं होनी चाहिए, ताकि वे सुरक्षा संबंधी गतिविधियों की निगरानी कर सकें। अमोडेई ने लिखा कि एंथ्रोपिक इस कदम के लिए अभी ''एकतरफा प्रतिबद्धता'' जता रही है। ऑल्टमैन ने सोशल मीडिया पर इसे ''बहुत अच्छा विचार'' बताया और कहा कि ओपनएआई भी इसका अनुसरण करेगी। ऑल्टमैन ने उन्नत एआई के लिए सुरक्षा मानक तय करने वाले ''संघीय ढांचे'' का स्वागत किया। हालांकि उन्होंने कहा कि एआई सुरक्षा पर काम करने के लिए कंपनी को कानून बनने या प्रतिस्पर्धा-विरोधी नियमों से छूट मिलने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। अमोडेई ने सरकार द्वारा नियमन और हस्तक्षेप की भी वकालत की। इसमें अमेरिका और अन्य लोकतांत्रिक देशों की सरकारों की मदद से अग्रणी एआई कंपनियों के बीच समन्वय शामिल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रमुख प्रयोगशालाएं ''साझा सुरक्षा मानक और अनियंत्रित एआई विकास की रफ्तार की सीमाएं'' तय कर सकती हैं। अमोडेई की योजना में अमेरिका और अन्य देशों द्वारा ''सत्तावादी सरकारों'' के साथ भी समन्वय का प्रस्ताव है। उन्होंने माना कि चीन से सहयोग हासिल करने सहित इसमें कई कठिनाइयां हैं।










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