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अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस
संयुक्त राष्ट्र. भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा के प्रति अपनी ''अटूट प्रतिबद्धता'' पर जोर देते हुए यहां संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एक कार्यक्रम में उन शांतिरक्षकों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र में भारत और ऑस्ट्रिया के स्थायी मिशन ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें शहीद शांति रक्षकों के सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि ''ये शांतिरक्षक दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संकटग्रस्त क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं।'' पर्वतनेनी ने कहा, ''संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों को सलाम, जिनके अथक प्रयासों से सबसे खतरनाक परिस्थितियों में भी दुनिया भर में शांति और स्थिरता बनी रहती है। भारत संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता रखता है और इस महान लक्ष्य की दिशा में अपने प्रयास जारी रखेगा।'' भारतीय मिशन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि श्रद्धांजलि कार्यक्रम में 4,000 से अधिक उन बहादुर पुरुषों और महिलाओं, शांतिरक्षक वर्दीधारियों और आम नागरिकों को श्रद्धांजलि दी गई जिन्होंने शांति के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया। मिशन ने कहा कि भारत शांति अभियानों में सबसे अधिक सैन्य योगदान देने वाले देशों में से एक है। भारत ने 1948 से अब तक 50 से अधिक संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में लगभग तीन लाख सैनिक तैनात किए हैं। भारतीय मिशन ने बताया कि लगभग 184 भारतीय शांति रक्षकों ने अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया है। अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक दिवस हर वर्ष 29 मई को मनाया जाता है। इस तिथि का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि 1948 में इसी दिन सुरक्षा परिषद ने पश्चिम एशिया में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियान- संयुक्त राष्ट्र युद्धविराम पर्यवेक्षण संगठन की स्थापना की थी। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पांच जून को यह दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर महासचिव एंतोनियो गुतारेस संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा में सेवारत उन पुरुषों और महिलाओं को श्रद्धांजलि देंगे जिन्होंने शांति के लिए अपना जीवन बलिदान किया। इसके बाद वह उन 68 सैन्य, पुलिस और असैन्य शांतिरक्षकों को मरणोपरांत 'डैग हैमरस्कजोल्ड पदक' प्रदान करेंगे जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान गंवाई। इनमें से 59 की मृत्यु पिछले वर्ष हुई थी। -
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक आवास एवं कार्यालय'व्हाइट हाउस' में शुक्रवार को अपने सलाहकारों के साथ बैठक की लेकिन ईरान के साथ युद्धविराम की अवधि बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने संबंधी प्रस्तावित समझौते पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं किया है। इस बीच ईरान ने भी कहा है कि यह समझौता अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है।
बैठक से पहले ट्रंप ने कहा था कि वह इस मुद्दे पर ''अंतिम निर्णय'' लेने वाले हैं। हालांकि, बाद में प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ लगभग दो घंटे चली बैठक बिना किसी निर्णय के समाप्त हो गई। अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ट्रंप केवल उसी समझौते को मंजूरी देंगे जो उनकी ''तय शर्तों'' को पूरा करे और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अंकुश लगाए। ट्रंप ने यह उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में की जब एक दिन पहले कई मीडिया संस्थानों ने खबर दी थी कि अमेरिकी और ईरानी वार्ताकार एक प्रारंभिक समझौते पर सहमत हो गए हैं जिसके तहत मौजूदा नाजुक युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाया जाएगा और ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर फिर से वार्ताएं शुरू होंगी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''ईरान को यह मानना होगा कि वह कभी परमाणु हथियार या बम नहीं बनाएगा।'' उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खोला जाना चाहिए और वहां बिछाई गई सभी समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाया जाना चाहिए। वहीं, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर कालिबाफ ने शुक्रवार को कहा कि ईरान को ''गारंटी या शब्दों पर नहीं'', बल्कि केवल ठोस कार्रवाई पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में अमेरिका और इजराइल द्वारा दो बार हमले किए जाने के बाद अविश्वास बना हुआ है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''दूसरा पक्ष कार्रवाई नहीं करेगा तो ईरान भी कोई कदम नहीं उठाएगा। हम बातचीत से नहीं, बल्कि मिसाइलों से रियायतें हासिल करते हैं।'' ट्रंप की बैठक समाप्त होने से पहले ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी प्रसारक से कहा कि समझौता ''अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है।'' अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बृहस्पतिवार को संकेत दिया था कि वार्ताकार ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि विस्तृत शर्तों पर आगे की वार्ताओं में चर्चा होगी। हालांकि, बघाई ने कहा कि ईरानी अधिकारी फिलहाल ''युद्ध समाप्त करने पर ध्यान लगा रहे हैं और इस समय परमाणु योजना के विवरण पर चर्चा नहीं कर रहे हैं।'' ईरान चाहता है कि किसी भी समझौते में इजराइल और लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला के बीच युद्धविराम भी शामिल हो। साथ ही, वह विदेशों में फ्रीज अरबों डॉलर के अपने फंड जारी कराने की मांग भी कर रहा है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''ईरान शर्तें तय करेगा : नकद के बदले नकद, लाभ के बदले लाभ, मुफ्त में कुछ नहीं।'' -
जोहानिसबर्ग. भारत के लोकप्रिय गायक अनूप जलोटा को दक्षिण अफ्रीका में भारतीय प्रवासियों द्वारा भारत की संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए स्थापित उत्तर प्रदेश देवभूमि संगठन (यूपीडेस) की मानद सदस्यता सोमवार को प्रदान की गई। जलोटा ने सप्ताहांत में डर्बन और जोहानिसबर्ग में दो संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उन्होंने वहां के भारतीय मूल के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पांच पीढ़ियों से अपनी संस्कृति को जीवित रखा है। अमेरिका में संगीत कार्यक्रम की यात्रा पर रवाना होने से पहले 'पीटीआई-भाषा' को दिए साक्षात्कार में जलोटा ने याद किया कि वह और भारत के कई अन्य प्रमुख कलाकार दशकों तक दक्षिण अफ्रीका में अपने प्रशंसकों के लिए कार्यक्रम करना चाहते थे, लेकिन संयुक्त राष्ट्र में 1948 से रंगभेद के खिलाफ वैश्विक मुहिम का नेतृत्व कर रही भारत सरकार के कड़े रुख के कारण उन्हें वहां कार्यक्रम प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा, ''हम दक्षिण अफ्रीका जाकर कार्यक्रम करने के लिए बेहद उत्सुक थे, लेकिन हमें अनुमति नहीं मिली। हम बस दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर पूरी दुनिया की यात्रा करते थे। हमने भारत सरकार से कई बार अनुरोध किया, लेकिन हर बार जवाब यही मिला कि संबंध ठीक नहीं हैं, इसलिए वहां मत जाओ।'' जलोटा ने बिना नाम लिए दावा किया कि कुछ भारतीय कलाकारों ने नियमों की अनदेखी कर दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की थी। नेल्सन मंडेला की 27 साल की राजनीतिक कैद के बाद रिहाई होने पर भारत ने अपना रुख बदला और जलोटा उन पहले भारतीय कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने मंडेला के राष्ट्रपति बनने से ठीक पहले दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की। जलोटा ने कहा कि तब से वह दक्षिण अफ्रीका में कई बार कार्यक्रम कर चुके हैं और हर बार दर्शकों ने उनके भजनों और गजलों को बड़े उत्साह से सराहा है। उन्होंने कहा, ''दक्षिण अफ्रीका हमारा छोटा भारत है। पांच पीढ़ियां बीत जाने के बाद भी यहां के लोगों ने अपनी संस्कृति को जीवित रखा है। वे अब भी रामायण का पाठ करते हैं, हनुमान चालीसा के कार्यक्रम आयोजित करते हैं और हिंदू विष्णु परिषद भी सक्रिय है। यह देखना बेहद प्रभावशाली है कि इन्होंने अपनी संस्कृति और कला को कैसे जीवित रखा है।'' हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भाषा के क्षेत्र में अभी और काम किए जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि हिंदी सिखाने के लिए विद्यालय पहले से खुल रहे हैं। अगर ये लोग हिंदी में बात कर सकें, तो संस्कृति का प्रसार और तेजी से होगा। मुझे उम्मीद है कि ऐसा जरूर होगा।'' जलोटा ने संगठन के संस्थापक एवं अध्यक्ष आशीष शर्मा की भी प्रशंसा की, जिन्होंने उनकी मेजबानी की और उन्हें मानद सदस्यता प्रदान की। उन्होंने कहा, ''मैं स्वयं उत्तर प्रदेश से हूं और इस संगठन का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं।'' शर्मा ने कहा कि 'यूपीडेस' अविभाजित उत्तर प्रदेश के उन क्षेत्रों की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने का काम करता है, जो अब उत्तराखंड के नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने कहा, ''उत्तराखंड की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने के लिए अनूप जी से बेहतर कोई नहीं हो सकता, क्योंकि वह भजन सम्राट हैं। वे हमें हमारी संस्कृति से जोड़े रखते हैं और हमारे उद्देश्यों को पूरा करने में सच्चे सहायक हैं।'' जलोटा ने सोमवार को अपने सम्मान में आयोजित एक स्वागत समारोह में भारतीय मूल के कुछ युवा दक्षिण अफ्रीकी गायकों की भी सराहना की, जिन्होंने उनके चर्चित गीत प्रस्तुत किए। -
कराची. पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रविवार को एक 'शटल' ट्रेन में एक शक्तिशाली विस्फोट में कम से कम 20 लोगों के मारे जाने और कई लोगों के घायल होने की आशंका है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने विस्फोट की जिम्मेदारी ली है।
सरकारी समाचार एजेंसी 'एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान' की खबर के अनुसार, 'शटल' ट्रेन क्वेटा छावनी से शहर के रेलवे स्टेशन की ओर जा रही थी कि तभी चमन फाटक के पास इसे निशाना बनाया गया। बीएलए के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह हमला तब किया गया जब ट्रेन छावनी क्षेत्र से सैन्य कर्मियों को ले जा रही थी। सरकार ने हालांकि अब तक आधिकारिक तौर पर 14 लोगों की मौत की पुष्टि की, जिनमें फ्रंटियर कोर के तीन जवान शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 20 लोगों के मारे जाने की आशंका है जबकि मीडिया में प्रकाशित खबरों में मरने वालों की संख्या इससे अधिक बताई गई है। पाकिस्तान के रेल मंत्री हनीफ अब्बासी ने कहा कि 'शटल' ट्रेन में असैन्य यात्री भी थे और विस्फोट से इंजन व तीन डिब्बे प्रभावित हुए। विस्फोट इतना जोरदार था कि आसपास के वाहनों के शीशे और आस-पास की इमारतों के शीशे चकनाचूर हो गए।
अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन में सवार अधिकांश यात्री आगामी ईद के त्यौहार के लिए अपने घर जाने वाली संपर्क ट्रेनों को पकड़ने की प्रतीक्षा कर रहे थे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा, "आतंकवाद के ऐसे कायरतापूर्ण कृत्य पाकिस्तान की जनता के संकल्प को कमजोर नहीं कर सकते।" उन्होंने कहा, "हम आतंकवाद के हर रूप को खत्म करने के अपने संकल्प पर अडिग हैं।"
जियो न्यूज की एक खबर के अनुसार, रेलवे अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर विस्फोट के बाद पेशावर जाने वाली जाफर एक्सप्रेस को क्वेटा रेलवे स्टेशन पर रोक दिया। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता बाबर यूसुफजई ने कहा कि विस्फोट के बाद सभी संबंधित संस्थानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने जनता से विस्फोट स्थल के पास इकट्ठा न होने का आग्रह किया ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और आपातकालीन टीमों को बिना किसी बाधा के बचाव कार्य करने में मदद मिल सके। -
संयुक्त राष्ट्र. लेबनान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में सेवारत भारतीय शांतिरक्षक, मेजर अभिलाषा बराक को विश्व संस्था द्वारा प्रतिष्ठित ''यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड'' के लिए नामित किया गया है। पश्चिम एशियाई देश में तैनाती के दौरान महिलाओं और लड़कियों के साथ किए गए संपर्क प्रयासों के लिए बराक को 2025 का ''यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड'' प्रदान किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि मेजर अभिलाषा बराक को 2025 का 'यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' प्रदान किया जाएगा। उन्हें महिलाओं और किशोरियों के साथ संपर्क कायम करने और सामुदायिक गतिविधियों तथा शांतिरक्षकों को लैंगिक संवेदनशीलता प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए सम्मानित किया जा रहा है।'' बराक संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (यूएनआईएफआईएल) में महिला सहभागिता दल (एफईटी) की कमांडर के रूप में भारतीय बटालियन में कार्यरत हैं। वह भारतीय सेना की पहली महिला लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलट भी हैं। उन्हें संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 29 मई को सम्मानित किया जाएगा। विश्व संस्था 29 मई को हर वर्ष संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के अंतरराष्ट्रीय दिवस का आयोजन करती है। भारत के लिए यह गर्व का क्षण है, क्योंकि बराक देश की तीसरी महिला हैं जिन्हें लैंगिक समानता के संबंध में उनके कार्यों के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है। बराक से पहले मेजर सुमन गवानी और मेजर राधिका सेन को संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में उनके सराहनीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया था। गवानी ने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनएमआईएसएस) में अपनी सेवाएं दी थीं और उन्हें वर्ष 2019 का 'यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' प्रदान किया गया था। उन्हें यह सम्मान मध्य अफ्रीकी गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र बहुआयामी एकीकृत स्थिरीकरण मिशन (एमआईएनयूएससीए) में कार्यरत ब्राजील की नौसेना अधिकारी कमांडर कार्ला मोंटेइरो डी कास्त्रो अरौजो के साथ संयुक्त रूप से दिया गया था। कांगो गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र संगठन स्थिरीकरण मिशन (एमओएनयूएससीओ) में सेवा दे चुकीं मेजर राधिका सेन को प्रतिष्ठित 2023 'यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। शांति अभियान विभाग (डीपीओ) के अंतर्गत सैन्य मामलों के कार्यालय द्वारा 2016 में स्थापित यह पुरस्कार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 1325 (महिला, शांति एवं सुरक्षा) के सिद्धांतों को बढ़ावा देने में एक सैन्य शांतिरक्षक के समर्पण और प्रयासों को मान्यता देता है। यह पुरस्कार उस सैन्य शांतिरक्षक के योगदान को रेखांकित करता है, जिसने शांति स्थापना गतिविधियों में लैंगिक दृष्टिकोण को सबसे प्रभावी ढंग से शामिल किया हो।
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वाशिंगटन. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली की अपनी पहली यात्रा से पहले कहा कि अमेरिका भारत को उतनी ही ऊर्जा बेचने के लिए तैयार है जितनी भारत खरीदने को तैयार होगा। स्वीडन और भारत की यात्रा पर रवाना होते समय मियामी में पत्रकारों के साथ बातचीत में रूबियो ने नयी दिल्ली को एक ''महान साझेदार'' बताया और कहा कि उनकी यह यात्रा महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उन्हें क्वाड देशों के मंत्रियों से मिलने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा, ''हम उन्हें उतनी ऊर्जा बेचना चाहते हैं जितनी वे खरीद सकें। और जाहिर है, आपने देखा होगा कि मुझे लगता है कि हम अमेरिकी उत्पादन और निर्यात के ऐतिहासिक स्तर पर हैं।'' रूबियो 23 से 26 मई तक भारत में रहेंगे और कोलकाता, आगरा, जयपुर तथा नयी दिल्ली का दौरा करेंगे।
रूबियो ने कहा, "हम और अधिक करना चाहते हैं। हम पहले से ही उनसे और अधिक करने के लिए बातचीत कर रहे थे। हम चाहते हैं कि वे अपने पोर्टफोलियो में उनका बड़ा हिस्सा शामिल करें। हमें वेनेजुएला के तेल में भी अवसर दिखाई देते हैं।" वह होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण भारत पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों के प्रभाव से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। रूबियो ने कहा, "वे हमारे महान सहयोगी और महान साझेदार हैं। हम उनके साथ मिलकर बहुत अच्छा काम करते हैं। इसलिए यह एक महत्वपूर्ण यात्रा है। मुझे खुशी है कि हम यह यात्रा कर पा रहे हैं क्योंकि मुझे लगता है कि हमें इस दौरान कई विषयों पर चर्चा करने का मौका मिलेगा।'' उन्होंने कहा, "हम वहां क्वाड के साथ भी बैठक करेंगे, जो महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि विदेश मंत्री के रूप में मेरी पहली बैठक क्वाड के साथ ही हुई थी। मुझे खुशी है कि हम अब भारत में ऐसा कर पा रहे हैं और हम इस साल के अंत में भी एक बैठक करेंगे।'' रूबियो ने कहा कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज भी अगले सप्ताह भारत पहुंचने वाली हैं और नयी दिल्ली के साथ काम करने के कई अवसर मिलेंगे। क्वाड की बैठक 26 मई को होगी, जिसमें रूबियो, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापानी विदेश मंत्री मोटेगी तोशिमित्सु के शामिल होने की उम्मीद है, जबकि भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इसकी अध्यक्षता करेंगे। रूबियो की कोलकाता यात्रा लगभग चौदह वर्षों में किसी अमेरिकी विदेश मंत्री की पहली यात्रा होगी। अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने 2012 में कोलकाता की यात्रा की थी। - रोम. भारत और इटली ने बुधवार को अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई, रक्षा औद्योगिक रूपरेखा को अंतिम रूप दिया और 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक बढ़ाने के साझा लक्ष्य की पुष्टि की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी इतालवी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी ने बढ़ती भू-राजनीतिक उथल-पुथल के मद्देनजर द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने के लिए व्यापक वार्ता की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति और क्षेत्र के साथ-साथ दुनिया के बाकी हिस्सों पर पड़ने वाले इसके प्रभावों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए संवाद और कूटनीति के जरिये संघर्ष का समाधान निकालने पर जोर दिया। मोदी और मेलोनी ने नौवहन की स्वतंत्रता और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन को पुनः शुरू करने का भी आह्वान किया। मोदी-मेलोनी वार्ता के बाद भारत और इटली ने एक रक्षा औद्योगिक रूपरेखा जारी की, जिसका उद्देश्य हेलीकॉप्टर और समुद्री हथियारों सहित अन्य सैन्य उपकरणों के साझा विकास एवं उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करना है। इसके अलावा, दोनों देशों ने इटली में भारतीय नर्सों के आवागमन और उच्च शिक्षा के लिए नयी रूपरेखा को भी अंतिम रूप दिया। दोनों पक्षों ने 10 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिनमें महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, समुद्री परिवहन और समुद्री उत्पादों के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने से जुड़े करार शामिल हैं। मोदी अपनी पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में मंगलवार रात रोम पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा का मकसद रक्षा एवं सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना था। मोदी और मेलोनी ने जनवरी में अंतिम रूप दिए गए भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने पर सहमति जताई और इसके शीघ्र कार्यान्वयन का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ''मुझे खुशी है कि हम अपने संबंधों को एक विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ा रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ''भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 हमारी साझेदारी के लिए एक व्यावहारिक और भविष्योन्मुखी ढांचा प्रदान करती है। हम इस पर समयबद्ध तरीके से प्रगति कर रहे हैं। हमारे संयुक्त प्रयासों के जरिये द्विपक्षीय व्यापार तेजी से 20 अरब यूरो के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।'' इस बीच, मेलोनी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां चीन अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। इतालवी प्रधानमंत्री ने भारत-इटली संबंधों को मौजूदा रणनीतिक साझेदारी से विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाए जाने का भी जिक्र किया। एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, दोनों पक्षों ने भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की समीक्षा करने और विशेष रणनीतिक साझेदारी को मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में एक तंत्र स्थापित करने पर भी सहमति जताई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मोदी और मेलोनी व्यापार एवं निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं नवाचार, अंतरिक्ष, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, शिक्षा और सांस्कृतिक जुड़ाव में सहयोग और बढ़ाने पर सहमत हुए। मोदी ने कहा, ''प्रौद्योगिकी और नवाचार हमारी साझेदारी के आधार हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष और असैन्य परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हमारे बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''हम भारत-इटली नवाचार केंद्र पर काम कर रहे हैं, ताकि दोनों देशों के स्टार्टअप, अनुसंधान केंद्रों और उद्योगों को जोड़ा जा सके।'' उन्होंने कहा कि रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग ''गहरे आपसी विश्वास'' का प्रतीक है। मोदी ने कहा, ''दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के साथ-साथ हमारी सेनाओं के बीच भी सहयोग बढ़ रहा है।''दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त आशय घोषणा और रक्षा औद्योगिक रूपरेखा को अपनाने का स्वागत किया, जो हेलीकॉप्टर, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, समुद्री हथियार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध कौशल सहित तकनीकी सहयोग, सह-उत्पादन और सह-विकास परियोजनाओं के लिए साझेदारी को बढ़ावा देगा। मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष जहाजरानी, बंदरगाह आधुनिकीकरण, रसद और समुद्री अर्थव्यवस्था पर मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा, ''हमने तीसरे देशों में भी अपनी लाभकारी साझेदारी का विस्तार करने पर चर्चा की। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए, हम अफ्रीका में ठोस परियोजनाओं पर काम करने के लिए सहमत हुए।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इटली इस बात पर एकमत हैं कि आतंकवाद मानवता के लिए गंभीर चुनौती है और इसके वित्तपोषण के खिलाफ दोनों पक्षों की संयुक्त पहल ने पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा, ''भारत और इटली ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जिम्मेदार लोकतंत्र न केवल आतंकवाद की निंदा करते हैं, बल्कि इसके वित्तीय नेटवर्क को बाधित करने के लिए ठोस कदम भी उठाते हैं।'' मोदी ने कहा, ''हम यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों में संघर्षों के संबंध में लगातार संपर्क में हैं। भारत का स्पष्ट मत है कि सभी समस्याओं का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।'' दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) पर सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की तथा वैश्विक व्यापार, संपर्क और समृद्धि को नया रूप देने में इसकी परिवर्तनकारी क्षमता को मान्यता दी। मोदी और मेलोनी ने परियोजना को लेकर हुई प्रारंभिक चर्चाओं की सराहना करते हुए 2026 में होने वाली पहली आईएमईसी मंत्रिस्तरीय बैठक में इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। मोदी और मेलोनी ने छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल श्रमिकों की आवाजाही बढ़ाने पर सहमति जताई। इसमें विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में जोर दिया गया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच सहयोग और वाणिज्यिक अंतरिक्ष सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों का भी स्वागत किया। एक संयुक्त घोषणा के अनुसार, मोदी और मेलोनी ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की।इसमें कहा गया है कि दोनों नेताओं ने आतंकवादियों और आतंकवादी समूहों तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 1267 प्रतिबंध प्रणाली में सूचिबद्ध लोग भी शामिल हैं। संयुक्त घोषणा के अनुसार, ''दोनों नेताओं ने सभी देशों से वित्तीय कार्रवाई कार्य बल के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों एवं बुनियादी ढांचे को नष्ट करने, आतंकवादी नेटवर्क का सफाया करने और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने की दिशा में काम जारी रखने का आह्वान किया।'
- रोम. खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और ग्रामीण विकास में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने प्रतिष्ठित 'एफएओ एग्रीकोला' पदक से सम्मानित किया। पांच देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण के तहत मंगलवार रात इटली पहुंचे मोदी ने रोम में संयुक्त राष्ट्र के एफएओ मुख्यालय में एफएओ महानिदेशक डॉ. क्वू डोंग्यू से यह पुरस्कार ग्रहण किया। मोदी ने कहा कि यह सम्मान खाद्य सुरक्षा, सतत विकास और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के अथक परिश्रम के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "यह भारत के लाखों किसानों, पशुपालकों, मछली पालकों, कृषि वैज्ञानिकों और श्रमिकों का सम्मान है। यह भारत की उस अटूट प्रतिबद्धता का भी सम्मान है, जिसके केंद्र में मानव कल्याण, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास निहित हैं।" 'एफएओ एग्रीकोला' पदक एफएओ द्वारा उन विशिष्ट व्यक्तियों को दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में से एक है, जिन्होंने वैश्विक खाद्य सुरक्षा, बेहतर पोषण और कृषि विकास की दिशा में प्रयासों को आगे बढ़ाने में असाधारण भूमिका निभाई है। भारत में कृषि प्रधान जीवन के महत्व को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि कृषि, धरती माता और भारतीय जनता के बीच एक पवित्र बंधन है। अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी भारतीय कृषि की नई शक्ति बन रही है।उन्होंने कहा, ''हमारा मानना है कि कृषि का भविष्य केवल 'अधिक उत्पादन' करना नहीं है, बल्कि 'बेहतर उत्पादन' है। इसी सोच से प्रेरित होकर हम जैव विविधता को बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा,''हमारे लिए खाद्य सुरक्षा केवल एक नीतिगत मामला नहीं है बल्कि यह मानवता के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।'' इससे पहले, मोदी का डॉ. डोंग्यू ने गर्मजोशी से स्वागत किया। एफएओ मुख्यालय की उनकी यात्रा पिछले 30 वर्षों में किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की पहली यात्रा थी। महानिदेशक के साथ अपनी मुलाकात के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की कृषि और खाद्य सुरक्षा में एफएओ के महत्वपूर्ण योगदान को याद किया।
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जोहानिसबर्ग. दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के दो वैज्ञानिक उन 38 लोगों में शामिल हैं जिन्हें जन स्वास्थ्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया है। प्रोफेसर सलीम अब्दुल करीम और प्रोफेसर कीर्तन धेड़ा को मंगलवार को प्रिटोरिया में राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा द्वारा 'ऑर्डर ऑफ मापुंगुब्वे' से सम्मानित किया गया। यह विशेष सम्मान दक्षिण अफ्रीका के उन नागरिकों को दिया जाता है जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका और वैश्विक समुदाय को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने के लिए असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं। करीम को 'गोल्ड ऑर्डर ऑफ मापुंगुब्वे' से सम्मानित किया गया। उनके प्रशस्ति पत्र में चिकित्सा विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य में उनके महत्वपूर्ण योगदान, विशेष रूप से एचआईवी/एड्स और तपेदिक (टीबी) महामारी विज्ञान में उनके अभूतपूर्व शोध और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति विकास में उनके असाधारण नेतृत्व को रेखांकित किया गया है। हालांकि, करीम व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने राजकीय सम्मान के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह सम्मान टीम के सदस्यों और यहां तक कि अध्ययन में शामिल किये गए मरीजों को संयुक्त रूप से दिया जाना चाहिए। 'सिल्वर ऑर्डर ऑफ मापुंगुब्वे' से सम्मानित किये गए धेड़ा के प्रशस्ति पत्र में फेफड़ा विज्ञान में उनके वैज्ञानिक अनुसंधान को सराहा गया है, जिसने तपेदिक और दवा प्रतिरोधी श्वसन संक्रमण के नैदानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन में क्रांति लाई है। राष्ट्रपति रामफोसा ने कहा, ''इस वर्ष सम्मानित किये गए सभी लोगों की उपलब्धियां वैज्ञानिक और चिकित्सा क्षेत्र में सर्वोत्तम कार्यों के वैश्विक केंद्र के रूप में हमारे देश की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दर्शाती हैं।
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रोम. इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने 'मेलोडी' टॉफी भेंट किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया है। इस हल्के-फुल्के पल ने सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं से जुड़े चर्चित 'मेलोडी' शब्द को फिर से चर्चा में ला दिया। मेलोनी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह कहती सुनाई दे रही हैं, "प्रधानमंत्री मोदी मेरे लिए एक बहुत ही अच्छी टॉफी लेकर आए हैं—मेलोडी।" उन्होंने वीडियो के साथ लिखा, "उपहार के लिए धन्यवाद।"
बुधवार को अपलोड किए गए इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी भी नजर आते हैं और मेलोनी के 'मेलोडी' टॉफी के जिक्र पर हंसते दिखाई देते हैं। मोदी और मेलोनी के नामों के संयोजन के तौर पर 'मेलोडी' हैशटैग पहली बार इटली की प्रधानमंत्री ने 2023 में दुबई में आयोजित कॉप-28 सम्मेलन के दौरान गढ़ा था। इसके बाद दोनों नेताओं की वैश्विक मंचों पर हुई गर्मजोशी भरी मुलाकातों के बीच यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मेलोनी ने उस समय भी सोशल मीडिया पर मोदी के साथ तस्वीर साझा करते हुए 'मेलोडी' हैशटैग के साथ लिखा था, "कॉप-28 में अच्छे दोस्त।" प्रधानमंत्री मोदी 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की पांच देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण में मंगलवार को रोम पहुंचे। वह इटली की प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर यहां आए हैं, जहां दोनों नेता व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। -
बीजिंग. चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को यहां द्विपक्षीय संबंधों और ईरान, यूक्रेन युद्ध तथा व्यापार सहित प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर व्यापक वार्ता की। दोनों नेताओं की यह बातचीत इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले 14-15 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग की यात्रा पर आए थे और उन्होंने भी शी चिनफिंग के साथ ईरान और यूक्रेन युद्ध से लेकर द्विपक्षीय व्यापारिक तनाव और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर व्यापक चर्चा की थी। 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल' में वार्ता से पहले, शी चिनफिंग ने पुतिन का औपचारिक स्वागत किया। औपचारिक स्वागत के बाद द्विपक्षीय वार्ता हुई। मंगलवार रात यहां पहुंचे पुतिन का स्वागत चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने किया।
अपनी यात्रा से पहले मंगलवार को दिए गए एक वीडियो संबोधन में पुतिन ने कहा कि रूस-चीन संबंध "वास्तव में अभूतपूर्व स्तर" पर पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय सहयोग द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने और उनकी "असीमित क्षमता" को उजागर करने के प्रयासों का एक अभिन्न अंग हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि शी और पुतिन द्विपक्षीय संबंधों, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और आपसी हित के अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार करेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने सोमवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ''यह पुतिन की चीन की 25वीं यात्रा है'' और उन्होंने बीजिंग और मॉस्को के बीच घनिष्ठ रणनीतिक संबंधों को रेखांकित किया। पुतिन की यह यात्रा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर वैश्विक चिंताओं के बीच हो रही है। ये तनाव ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के बाद पैदा हुआ है। ईरान रूस और चीन दोनों का करीबी रणनीतिक साझेदार है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन ईरान से 90 प्रतिशत तेल आयात करता है। -
ओस्लो/ भारत और नॉर्डिक देशों ने मंगलवार को अपने संबंधों को हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ ऊर्जा, स्थिरता, नवाचार, उभरती प्रौद्योगिकियों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए नॉर्डिक देशों के समकक्षों के साथ वार्ता की। ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के बाद एक संयुक्त प्रेस बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक तनाव और संघर्ष के इस दौर में भारत और नॉर्डिक देश नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, ''चाहे वह यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हम संघर्षों के शीघ्र समाधान और शांति प्रयासों का समर्थन करना जारी रखेंगे।''
अन्य नॉर्डिक नेताओं ने भी नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने के मोदी के आह्वान का समर्थन किया। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने कहा, ''हमने अंतरराष्ट्रीय कानून के समर्थन पर ध्यान केंद्रित किया, एक नियम-आधारित व्यवस्था और यूक्रेन में न्यायपूर्ण एवं स्थायी शांति की आवश्यकता पर जोर दिया और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का कूटनीतिक समाधान खोजने का प्रयास किया।'' फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो ने कहा कि नॉर्डिक देशों के भारत के साथ कई साझा उद्देश्य हैं, जिनमें नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना शामिल है। मोदी ने आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रन फ्रॉस्टडॉटिर, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन, नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन की मौजदूगी में कहा, ''लोकतंत्र, कानून के शासन और बहुपक्षवाद के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता हमें स्वाभाविक साझेदार बनाती है।' मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों का ''आतंकवाद को लेकर एक स्पष्ट और एकजुट रुख है : कोई समझौता नहीं, कोई दोहरा मापदंड नहीं।'' उन्होंने कहा, ''आज हमने भारत-नॉर्डिक देशों के संबंधों को हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया है।
इस हरित प्रौद्योगिकी साझेदारी के जरिये हम पूरी दुनिया के लिए एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित करेंगे।'' मोदी ने कहा, ''इससे नवाचार, व्यापकता और प्रतिभा का संयोजन होगा, साथ ही स्थिरता, विश्वसनीय प्रौद्योगिकियों और मानवता के बेहतर भविष्य के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया जाएगा।'' प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि शिखर सम्मेलन ने नॉर्डिक क्षेत्र के साथ भारत की साझेदारी के बढ़ते दायरे और मजबूती को दर्शाया। नेताओं ने स्थिरता, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियों और अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की। मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार ''आवश्यक और बहुत महत्वपूर्ण'' है। उन्होंने कहा कि आज की चर्चा में स्थिरता, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियों और शांतिपूर्ण एवं समृद्ध भविष्य के लिए सहयोग को मजबूत करने समेत कई पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा, ''भारत और नॉर्डिक देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, विश्वास और मानव-केंद्रित विकास को लेकर एकजुट हैं।'' मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि व्यापारिक संबंध मजबूत हुए हैं और निवेश संबंधी संबंध काफी प्रगाढ़ हुए हैं। मोदी ने कहा कि नॉर्डिक देशों के निवेश कोष भी भारत के तीव्र विकास में महत्वपूर्ण भागीदार बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में नॉर्डिक देशों से भारत में निवेश में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मोदी ने कहा, ''तेजी से बढ़ते व्यापार और निवेश ने न केवल भारत की विकास गाथा में योगदान दिया है, बल्कि नॉर्डिक अर्थव्यवस्थाओं में भी बहुत सकारात्मक भूमिका निभाई है, जिससे हजारों नये रोजगार सृजित हुए हैं।'' मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों ने संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण पहल की हैं, जिनमें नॉर्वे, आइसलैंड और अन्य ईएफटीए देशों के साथ व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता, भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता शामिल हैं और इसमें डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन भी भागीदार हैं। उन्होंने कहा, ''इन महत्वाकांक्षी व्यापार समझौतों के साथ हम भारत और नॉर्डिक देशों के बीच संबंधों में एक नये स्वर्णिम युग की शुरुआत कर रहे हैं।'' मोदी ने कहा कि भारत-नॉर्डिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ व्यापक अनुसंधान और नवाचार संबंध है। उन्होंने कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्ष इसे मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं और स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र के बीच संबंधों को संयुक्त रूप से बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा, ''भले ही हम सब अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं, लेकिन कभी-कभी एक शब्द भी हमारी स्वाभाविक साझेदारी को दर्शाने के लिए काफी होता है। आज मैंने 'संबंध' शब्द का कई बार इस्तेमाल किया। कई नॉर्डिक भाषाओं में 'संबंध' शब्द का अर्थ जुड़ाव, रिश्ते या बंधन होता है। हिंदी में भी 'संबंध' का यही अर्थ है। यह केवल शब्दों की समानता नहीं है, बल्कि यह हमारे विचारों और सोच की समानता को भी दर्शाता है।'' दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय मंचों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। नॉर्डिक नेताओं ने एक विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए भारत की स्थायी सदस्यता के प्रति अपने समर्थन को दोहराया। नेताओं ने अगला भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन हेलसिंकी में आयोजित करने का निर्णय लिया।
विदेश मंत्रालय ने शिखर सम्मेलन के आठ परिणामों की एक सूची साझा की, जिनमें जलवायु परिवर्तन पर भारत-नॉर्डिक देशों की पहल, समुद्री अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाना, प्रतिभाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और नॉर्डिक देशों के साथ रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करना आदि शामिल है। -
गोथनबर्ग. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत की ''सुधार एक्सप्रेस'' पूरी गति से आगे बढ़ रही है। साथ ही स्वीडन की कंपनियों से विनिर्माण, हरित हाइड्रोजन मिशन, स्वच्छ ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का आग्रह किया। यूरोपीय कंपनियों को आकर्षित करते हुए उन्होंने दूरसंचार एवं डिजिटल अवसंरचना सहित पांच व्यापक क्षेत्रों में संभावनाओं को रेखांकित किया और कहा कि वे भारत को वैश्विक अनुसंधान एवं विकास केंद्र बनाने में मदद कर सकती हैं। प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स, डीप टेक विनिर्माण, कृत्रिम मेधा (एआई) हरित ऊर्जा, अवसंरचना, परिवहन, शहरी बदलाव, स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान क्षेत्रों में भी सहयोग की अपील की। स्वीडन की आधिकारिक यात्रा पर गए मोदी ने यूरोपीय उद्योग गोलमेज (ईआरटी) को संबोधित करते हुए कहा कि सभी कंपनियों के लिए अवसर मौजूद हैं और उन्हें आने वाले वर्षों में भारत की प्रमुख परियोजनाओं का हिस्सा बनाने के लिए संस्थागत व्यवस्था की जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी नवाचार की अगली लहर का सह-निर्माण भारत में होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा, ''पिछले 12 वर्षों में भारत ''सुधार, प्रदर्शन एवं परिवर्तन'' के मूल मंत्र पर काम कर रहा है। सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ यह 'सुधार एक्सप्रेस' पूरी गति से आगे बढ़ रही है।'' उन्होंने देश की युवा आबादी, बढ़ते मध्यम वर्ग और अवसंरचना विकास का भी उल्लेख किया।
भारत और स्वीडन के लोकतंत्र, पारदर्शिता, नवाचार एवं स्थिरता जैसे साझा मूल्यों पर जोर देते हुए मोदी ने स्वीडन की नवाचार एवं स्थिरता की ताकत को भारत की व्यापकता, प्रतिभा और विकास गति के साथ जोड़ने का आह्वान किया। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय उद्योग के वरिष्ठ नेता एवं प्रमुख यूरोपीय तथा भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधि भी वोल्वो समूह द्वारा आयोजित इस गोलमेज बैठक में शामिल हुए। अपने संबोधन में मोदी ने भारत-यूरोप संबंधों में बढ़ती गति का स्वागत किया जिसमें भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर वार्ता का सफल समापन भी शामिल है। उन्होंने इस समझौते को व्यापार, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, सेवाओं और मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं में नए अवसर उत्पन्न करने वाली परिवर्तनकारी आर्थिक साझेदारी करार दिया। मोदी ने कहा, ''सरकारों के स्तर पर हमने एक महत्वाकांक्षी एवं रणनीतिक एजेंडा तय किया है… जैसा कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा था, यह सभी समझौतों में सबसे बड़ा है। हम इसे जल्द से जल्द लागू करने का प्रयास कर रहे हैं।'' भारत और यूरोपीय संघ ने जनवरी में एफटीए को अंतिम रूप दिया था।
उन्होंने साथ ही कहा कि भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) जैसी संपर्क परियोजनाएं भारत-यूरोप व्यापार साझेदारी में नया मूल्य जोड़ती हैं। मोदी ने कहा कि आज भारत निवेश, नवाचार एवं विनिर्माण के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक गंतव्यों में से एक है। उन्होंने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, अगली पीढ़ी के आर्थिक सुधार, कारोबार सुगमता, सुशासन पर जोर, विस्तारित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, सशक्त विनिर्माण परिवेश तंत्र और तेजी से बदलते अवसंरचना क्षेत्र को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने ''डिजाइन फॉर इंडिया, मेक इन इंडिया और एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया'' के दृष्टिकोण को दोहराया और यूरोपीय कंपनियों को भारत के साथ भरोसेमंद एवं विश्वसनीय आर्थिक भागीदार के रूप में अपनी भागीदारी बढ़ाने का निमंत्रण दिया। उन्होंने प्रतिभा गतिशीलता, शिक्षा और कौशल साझेदारी के महत्व को भी रेखांकित किया और भारत की युवा एवं कुशल कार्यबल को भविष्य की वैश्विक आर्थिक वृद्धि के लिए प्रमुख ताकत बताया। प्रधानमंत्री ने भारत-यूरोप मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) की गोलमेज बैठक को वार्षिक रूप से आयोजित करने और ईआरटी में एक 'इंडिया डेस्क' बनाने का सुझाव दिया। इस संवाद ने भारत-यूरोप आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया और सतत विकास, प्रौद्योगिकी सहयोग तथा मजबूत वैश्विक साझेदारी के प्रति दोनों पक्षों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। मोदी ने स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया, प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन और स्वीडन के चुनिंदा सीईओ से भी बातचीत की। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, मोदी ने कहा कि भारत और स्वीडन के बीच संबंध केवल आर्थिक नहीं बल्कि विचारों, प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं सह-निर्माण की साझेदारी है। उन्होंने भारत की वृद्धि में स्वीडन की कंपनियों के दीर्घकालिक योगदान का स्वागत किया और अनुसंधान, नवाचार, हरित परिवर्तन तथा विनिर्माण में गहन सहयोग का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने स्वीडन की कंपनियों को 'मेक इन इंडिया', राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन जैसी पहलों के तहत भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का निमंत्रण दिया। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में अवसरों के विस्तार की भी चर्चा की। आपूर्ति शृंखलाओं, हरित परिवर्तन, सतत गतिशीलता, जीवन विज्ञान और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चाओं में विशेष ध्यान दिया गया। भारत-स्वीडन संबंधों पर उन्होंने कहा कि दोनों देश खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी विकसित करने पर काम कर रहे हैं।
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वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा पर अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस ने एक तथ्य पत्र (फैक्ट शीट) जारी किया है जिसमें कहा गया है कि अमेरिका और चीन व्यापार और निवेश पर बोर्ड स्थापित करने तथा निष्पक्ष और परस्पर सहयोग पर आधारित रणनीतिक स्थिरता वाले संबंध बनाने पर सहमत हुए हैं। रविवार को जारी किए गए तथ्य पत्र में कहा गया है कि चीन दुर्लभ पृथ्वी धातुओं और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों, जिनमें यट्रियम, स्कैंडियम, नियोडिमियम और इंडियम शामिल हैं, से संबंधित आपूर्ति श्रृंखला की कमी के बारे में अमेरिका की चिंताओं का समाधान करेगा। इसमें यह भी कहा गया कि ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग इस बात पर सहमत हुए कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का आह्वान किया गया और इस बात पर सहमति बनी कि किसी भी देश या संगठन को टोल वसूलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस तथ्य पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रंप इस वर्ष शी चिनफिंग का वाशिंगटन में स्वागत करेंगे, और दोनों देश इस वर्ष के अंत में जी20 और एपेक शिखर सम्मेलनों की मेजबानी में एक-दूसरे का समर्थन करेंगे। तथ्य पत्र में ताइवान का कोई उल्लेख किए बिना कहा गया कि "राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति शी ने उत्तर कोरिया को परमाणु मुक्त करने के अपने साझा लक्ष्य की पुष्टि की। शी के साथ वार्ता के बाद मीडिया साक्षात्कारों में ट्रंप ने ताइवान को अरबों डॉलर के संभावित हथियार विक्रय को चीन के साथ "समझौते का केंद्र" बताया, जिससे ताइवान में चिंताएं बढ़ गईं। इस ऐतिहासिक समझौते की आधारशिला के रूप में, ट्रंप और शी ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए दो नए संस्थानों की स्थापना पर सहमति जताई। ये संस्थान 'यूएस-चाइना बोर्ड ऑफ ट्रेड' और 'यूएस-चाइना बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट' हैं। इस तथ्य पत्र में यह भी बताया गया है कि चीन दुर्लभ धातुओं के उत्पादन और प्रसंस्करण उपकरण एवं प्रौद्योगिकी की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों या सीमाओं के संबंध में अमेरिका की चिंताओं का समाधान करेगा। इस तथ्य पत्र में कहा गया है, ''चीन ने चीनी एयरलाइंस के लिए अमेरिका निर्मित 200 बोइंग विमानों की प्रारंभिक खरीद को मंजूरी दे दी है।'' इसमें यह भी कहा गया है कि चीन की यह प्रतिबद्धता अमेरिका में उच्च वेतन और उच्च कौशल वाले विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
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गोथेनबर्ग (स्वीडन) . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को स्वीडन पहुंचे, जहां वह व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर बातचीत करेंगे। गोथेनबर्ग हवाई अड्डे पर उतरने से पहले प्रधानमंत्री मोदी के विमान को स्वीडिश वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने सुरक्षा प्रदान की । हवाई अड्डे पर उनके स्वीडिश समकक्ष उल्फ क्रिस्टर्सन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, जो इस यात्रा के महत्व को दर्शाता है। मोदी स्वीडन की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों पर केंद्रित बातचीत करेंगे और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए सहयोग के नए अवसर तलाशेंगे, जो 2025 में 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों पक्ष हरित ऊर्जा की ओर बढ़ने, एआई, उभरती प्रौद्योगिकियों, स्टार्टअप, लचीली आपूर्ति शृंखलाओं, रक्षा, अंतरिक्ष, जलवायु कार्रवाई और दोनों देशों की जनता के स्तर पर संबंध जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने पर चर्चा करेंगे। इससे पहले मोदी ने 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए स्वीडन का दौरा किया था।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ''दोनों देशों के प्रधानमंत्री यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लायन के साथ यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री को भी संबोधित करेंगे, जो एक प्रमुख अखिल यूरोपीय व्यापारिक नेताओं का मंच है।'' यह मोदी की चार देशों की यूरोपीय यात्रा का दूसरा चरण है। वह नीदरलैंड की यात्रा कर चुके हैं और उनकी उपस्थिति में भारत और नीदरलैंड ने रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस सप्ताह के अंत में, वह नॉर्वे और इटली की भी यात्रा करेंगे। -
काठमांडू. नेपाल के पर्वतारोही कामी रीता शेरपा ने रविवार को दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी 'माउंट एवरेस्ट' को 32वीं बार फतह करके इतिहास रच दिया। शेरपा ने एवरेस्ट पर सबसे अधिक बार सफलता पूर्वक चढ़ाई करने का अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया।
पर्यटन विभाग के अनुसार, 56 वर्षीय अनुभवी पर्वतारोही रविवार पूर्वाह्न 10 बजकर 12 मिनट पर 8,849 मीटर ऊंचे शिखर पर पहुंचे। विभाग ने बताया कि शेरपा '14 पीक्स एक्सपेडिशन' द्वारा संचालित एक अभियान का नेतृत्व कर रहे थे।
काठमांडू पोस्ट की खबर के अनुसार, एवरेस्ट आधार शिविर स्थित पर्यटन विभाग के फील्ड कार्यालय ने सफलतापूर्वक चढ़ाई करने की पुष्टि की। पर्यटन विभाग ने शेरपा को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि नेपाल के पर्वतारोहण क्षेत्र और देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा में महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है। जनवरी 1970 में कोशी प्रांत के सोलुखुम्बु जिले के एक गांव में जन्मे कामी रीता ने 1992 में एक पेशेवर पर्वतारोही के रूप में अपना करियर शुरू किया। शेरपा ने पहली बार 1994 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी। उन्होंने 27 मई, 2025 को एवरेस्ट पर 31वीं बार सफलतापूर्वक चढ़ाई की। रविवार को 'पर्वत रानी' नाम से मशहूर और माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वालीं नेपाल की प्रथम महिला ल्हाकपा शेरपा ने शिखर पर11वीं बार सफल चढ़ाई पूरी करके अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया। पर्यटन विभाग ने बताया कि ल्हाकपा रविवार सुबह साढ़े नौ बजे शिखर पर पहुंचीं। -
जल प्रबंधन में सहयोग की उम्मीद जताई
हेग. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ रविवार को प्रतिष्ठित अफस्लुइटडिज्क बांध का दौरा किया। भारत और नीदरलैंड के बीच जल प्रबंधन और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे में गहन सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने के मद्देनजर ये दौरा हुआ है। मोदी ने दौरे के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ''जल प्रबंधन एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें नीदरलैंड ने अभूतपूर्व कार्य किया है। इससे पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय बहुत कुछ सीख सकता है।'' उन्होंने कहा, ''हम भारत में आधुनिक प्रौद्योगिकी लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसका उद्देश्य सिंचाई, बाढ़ सुरक्षा और अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क के विस्तार में सहायता करना है।'' विदेश मंत्रालय ने अफस्लुइटडिज्क बांध को ''उत्कृष्टता और नवाचार का प्रतीक'' बताते हुए जल प्रबंधन, बाढ़ सुरक्षा और मीठे पानी के भंडारण में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''इस दौरे ने गुजरात में कल्पसर परियोजना के लिए डच विशेषज्ञता के महत्व को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य खंभात की खाड़ी के पास एक मीठे पानी का जलाशय और बांध बनाना है।'' मंत्रालय ने कहा, ''इस यात्रा ने जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, जल प्रौद्योगिकी और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड सहयोग को और गहरा करने के अवसरों पर जोर दिया।'' -
द हेग. वैश्विक भू-राजनीति में बदलावों के बीच भारत और नीदरलैंड ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नीदरलैंड के उनके समकक्ष रॉब जेटेन के बीच हुई वार्ता के दौरान रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। शनिवार शाम हुई बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने पश्चिम एशिया की स्थिति, विशेष रूप से क्षेत्र और व्यापक विश्व पर इसके गंभीर प्रभावों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की क्योंकि इसके कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। संयुक्त बयान के अनुसार, मोदी और जेटेन ने होर्मुज जलडमरूमध्य से स्वतंत्र नौवहन और वैश्विक वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन का आह्वान किया। उन्होंने किसी भी तरह के ''प्रतिबंधात्मक'' कदमों का विरोध किया और इस संबंध में जारी पहलों के प्रति अपना समर्थन भी दोहराया। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इस संकरे जलमार्ग से 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले के बाद से जहाजों का आवागमन बुरी तरह से बाधित है, जिसके परिणामस्वरूप जवाबी हमले भी हुए। दोनों नेताओं ने यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की जो रूस के साथ जारी संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा घटनाक्रमों से प्रभावित है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों पर आधारित संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति प्राप्त करने के प्रयासों का समर्थन जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। बयान के अनुसार, यूक्रेन के विषय पर दोनों पक्षों ने जारी युद्ध पर भी चिंता व्यक्त की जो ''अत्यधिक मानवीय पीड़ा का कारण बन रहा है और इसके वैश्विक परिणाम हैं''। मोदी ने रविवार को स्वीडन के लिए रवाना होते समय सोशल मीडिया पर किये गए पोस्ट में कहा, ''मेरी नीदरलैंड यात्रा ने भारत-नीदरलैंड संबंधों को नयी गति प्रदान की है।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने से लेकर जल संसाधन, सेमीकंडक्टर, नवाचार, रक्षा, स्थिरता और गतिशीलता में सहयोग का विस्तार करने तक, हमने भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी खाका तैयार किया है।'' नीदरलैंड के प्रधानमंत्री जेटेन ने शिफोल हवाई अड्डे पर पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी को विदा किया। मोदी ने कहा, ''मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में भारत और नीदरलैंड के बीच मित्रता और भी मजबूत होती रहेगी।'' विदेश मंत्रालय ने एक अलग सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ''इस यात्रा के कई अहम परिणाम सामने आए, जिनमें रणनीतिक साझेदारी के लिए एक नए खाके की शुरुआत शामिल है, जो भारत-नीदरलैंड संबंधों को और प्रगाढ़ करेगा और प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के रास्ते खोलेगा।'' संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की संक्षिप्त यात्रा के बाद मोदी शुक्रवार को हेग पहुंचे। यह दो दिवसीय दौरा यूरोप के चार देशों की यात्रा का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। इस दौरे में वह नॉर्वे और इटली भी जाएंगे। मोदी-जेटेन वार्ता के बाद, भारत और नीदरलैंड ने व्यापार एवं निवेश, रक्षा और सुरक्षा तथा सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्वांटम कंप्यूटिंग सहित महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों में संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक ''रणनीतिक साझेदारी रूपरेखा'' की शुरुआत की। दोनों नेताओं ने ''हरित हाइड्रोजन के विकास पर भारत-नीदरलैंड रूपरेखा'' की भी शुरुआत की।
मोदी और जेटेन ने रक्षा उपकरणों, रक्षा प्रणालियों, कलपुर्जों और अन्य प्रमुख क्षमताओं का संयुक्त निर्माण सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त उद्यमों की स्थापना के माध्यम से एक रक्षा औद्योगिक रूपरेखा स्थापित करने की संभावनाओं का पता लगाने पर भी सहमति व्यक्त की। यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक गंतव्यों में से एक नीदरलैंड के साथ द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 27.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। यह यूरोपीय देश 55.6 अरब अमेरिकी डॉलर के कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के साथ भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक है। विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक नेटवर्क वाला नीदरलैंड मुख्य रूप से रॉटरडैम बंदरगाह के माध्यम से भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप का एक रणनीतिक प्रवेश द्वार भी है। वार्ता में दोनों पक्षों ने विज्ञान और नवाचार, सतत विकास, स्वास्थ्य, कृषि, जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा परिवर्तन, समुद्री विकास और लोगों के बीच आपसी संबंध में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच हुए समझौतों से सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, स्वास्थ्य, जल, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और संस्कृति सहित अन्य क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। मोदी-जेटेन की बैठक के बाद हुए एक महत्वपूर्ण समझौते में प्रवासन और आवागमन पर सहमति बनी जिससे उम्मीद है कि रोजगार और शिक्षा के लिए भारतीयों का यूरोपीय देश में आवागमन बढ़ेगा। संयुक्त बयान के अनुसार, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श करते हुए दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, नौवहन की स्वतंत्रता और ''दबाव एवं संघर्षों की स्थिति से3 रहित'' एक स्वतंत्र, खुले और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र का आह्वान किया। ये टिप्पणियां क्षेत्र में चीन के बढ़ते आक्रामक व्यवहार को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंताओं की पृष्ठभूमि में आई हैं। निरंतर नवाचार के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के रणनीतिक महत्व को स्वीकार करते हुए दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने महत्वपूर्ण खनिजों की मूल्य शृंखला में सहयोग को मजबूत करने में अपनी पारस्परिक रुचि व्यक्त की, जिसमें खोज और मूल्य शृंखलाओं का एकीकरण शामिल है। चीन का वर्तमान में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला में एकाधिकार है। वह न केवल 15 से अधिक आवश्यक खनिजों के खनन को नियंत्रित करता है, बल्कि उनके परिष्करण, प्रसंस्करण और विनिर्माण पर भी उसका नियंत्रण है। संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने 'डच सेमीकंडक्टर कॉम्पिटेंस सेंटर' को भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन से जोड़ने की पहल का भी स्वागत किया जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र को समर्थन और मजबूत करना है। दोनों देशों के बीच समग्र व्यापार को बढ़ाने के संदर्भ में मोदी और जेटेन ने विशेष रूप से इस वर्ष की शुरुआत में हस्ताक्षरित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से उत्पन्न अवसरों के आलोक में आगे वृद्धि की अपार संभावनाओं पर जोर दिया। संयुक्त बयान में कहा गया है, ''दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि मुक्त व्यापार समझौता भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों में वृद्धि के समय दुनिया की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा।'' बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार तथा भारत की स्थायी सदस्यता के लिए नीदरलैंड द्वारा निरंतर समर्थन दिए जाने को लेकर जेटेन को धन्यवाद दिया। संयुक्त बयान के अनुसार, जेटेन ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की जिसमें 26 लोग मारे गए थे और सीमा पार आतंकवाद समेत सभी तरह के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को अपने देश का अटूट समर्थन जताया। बयान में कहा गया कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने सभी तरह के आतंकवाद की स्पष्ट रूप से निंदा की और आतंकवाद से निपटने के लिए 'कतई बर्दाश्त नहीं' की नीति के दृष्टिकोण का आह्वान किया तथा इस खतरे का मुकाबला करने में दोहरे मापदंडों को खारिज किया। मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री जेटेन के साथ वार्ता के दौरान अपने शुरुआती संबोधन में कहा, ''पिछले एक दशक में भारत-नीदरलैंड संबंधों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।'' प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत नीदरलैंड को अपने सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक मानता है क्योंकि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंध ''गहरे'' हैं। उन्होंने कहा, ''लोकतांत्रिक मूल्य, बाजार अर्थव्यवस्था और जिम्मेदार व्यवहार हमारी साझा सोच का हिस्सा हैं। जल, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में हमारा सहयोग हमारे लोगों के जीवन को बेहतर बना रहा है।'' मोदी ने भारत की आर्थिक वृद्धि पर भी प्रकाश डाला।
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि हर क्षेत्र में नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की ''गति एवं कौशल'' का समन्वय होना चाहिए। मोदी ने कहा, ''हमें नवाचार, निवेश, सतत विकास और रक्षा क्षेत्रों में अपने सहयोग को नयी ऊंचाई पर ले जाने की आवश्यकता है। इसी साझा दृष्टिकोण के तहत हम भारत-नीदरलैंड संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जा रहे हैं।'' भारत-नीदरलैंड के बीच शनिवार को हुई द्विपक्षीय वार्ता से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने जेटेन के साथ ऊर्जा, बंदरगाह, स्वास्थ्य, कृषि व्यापार और प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख डच कंपनियों के सीईओ से बातचीत की। मोदी ने नीदरलैंड की कंपनियों को भारत में, विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में अवसरों का पता लगाने के लिए आमंत्रित किया। -
हेग. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मुलाकात की तथा पारस्परिक हित के मुद्दों पर चर्चा की। व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के उद्देश्य से पांच देशों की अपनी यात्रा के दूसरे चरण के तहत मोदी शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात में संक्षिप्त ठहराव के बाद नीदरलैंड पहुंचे। इससे पहले दिन में, मोदी ने हेग में भारतीय समुदाय के लोगों की एक सभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने भारत को ''अवसरों की भूमि'' बताया जो ''अभूतपूर्व परिवर्तन'' से गुजर रही है। प्रधानमंत्री मोदी की 15 से 17 मई तक की नीदरलैंड यात्रा इस यूरोपीय देश की उनकी दूसरी यात्रा है। अधिकारियों ने इस यात्रा को भारत-नीदरलैंड संबंधों में एक ''महत्वपूर्ण मोड़'' बताया है। इससे पहले उन्होंने 2017 में नीदरलैंड की यात्रा की थी।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि इस यात्रा में एक ''समृद्ध और ठोस एजेंडा'' शामिल है तथा इससे दोनों देशों के बीच निरंतर जुड़ाव के माध्यम से उभरी साझेदारी के रणनीतिक आयामों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। भारत और नीदरलैंड ने हाल के वर्षों में व्यापार, निवेश और जल, कृषि तथा स्वास्थ्य के प्राथमिकता वाले पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर अपने सहयोग का काफी विस्तार किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और समुद्री क्षेत्र सहित रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी में वृद्धि हुई है। शनिवार को बाद में, मोदी नीदरलैंड के अपने समकक्ष रॉब जेटेन से मुलाकात करेंगे। -
लंदन. ब्रिटेन के प्रमुख संग्रहालयों में से एक 'वेलकम कलेक्शन' ने दक्षिण एशिया के बाहर मौजूद जैन पांडुलिपियों के सबसे बड़े संग्रह को लौटाने की "ऐतिहासिक" पहल की शुक्रवार को घोषणा की। लंदन स्थित इस संग्रहालय में एक सदी से अधिक समय से रखी गई 2,000 से अधिक पांडुलिपियों की वापसी का फैसला यहां स्थित 'इंस्टीट्यूट ऑफ जैनोलॉजी' के साथ संवाद और सहयोग के बाद लिया गया है। पांडुलिपियों के इस संग्रह में 15वीं शताब्दी की चित्रित पांडुलिपियों से लेकर 19वीं शताब्दी के दुर्लभ ग्रंथ शामिल हैं। इनमें धर्म, साहित्य, चिकित्सा और संस्कृति से संबंधित सामग्री प्राकृत, संस्कृत, गुजराती, राजस्थानी और प्रारंभिक हिंदी लिपियों में उपलब्ध है। इनमें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नैतिक सिद्धांतों का एक प्रारंभिक और प्रभावशाली उदाहरण भी शामिल है, जिनसे महात्मा गांधी ने प्रेरणा ली थी और उन्होंने इसे लोकप्रिय बनाया। यह दस्तावेज भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की बुनियाद की तीखी आलोचना करता है। अन्य पांडुलिपियों में जैन धर्मग्रंथ 'कल्पसूत्र' की 16वीं शताब्दी की एक ''दुर्लभ और भव्य चित्रों से सुसज्जित'' प्रति भी शामिल है। इसके अलावा 1688 की एक पतली, नाजुक और जर्जर कागजी पांडुलिपि भी संग्रह में है, जिसे प्रारंभिक हिंदी के पहले चिकित्सा ग्रंथ 'वैद्य मनोत्सव' (1592) की संभवतः सबसे पुरानी सुरक्षित प्रति माना जाता है। समझौते के तहत इस संग्रह को प्रारंभिक रूप से 'धर्मनाथ नेटवर्क इन जैन स्टडीज' के पास रखा जाएगा, जो बर्मिंघम विश्वविद्यालय में स्थित है। यहां शोधकर्ताओं और जैन समुदाय को इन पांडुलिपियों का अध्ययन, व्याख्या और अनुवाद करने की सुविधा मिलेगी। 'इंस्टीट्यूट ऑफ जैनोलॉजी' के प्रबंध न्यासी मेहुल संघराजका ने कहा, ''वेलकम कलेक्शन का इन 2,000 पवित्र पांडुलिपियों को लौटाने का साहसिक निर्णय ऐतिहासिक है और अन्य धार्मिक समुदायों के लिए भी एक आदर्श है।'' उन्होंने कहा, ''हम यह भी स्वीकार करते हैं कि भारत की स्वतंत्रता के बाद की उथल-पुथल में इनमें से कुछ पांडुलिपियां शायद सुरक्षित नहीं रह पातीं। इन ग्रंथों के प्रति वेलकम कलेक्शन द्वारा दिखाए गए सम्मान और संरक्षण के लिए हम आभारी हैं।'' संस्थान ने कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं को आधुनिक नजरिए से परखने के बजाय सहयोग के माध्यम से ऐसे रास्ते खोजने की जरूरत है, जिससे ''जैन अध्ययन और शोध को नयी दिशा मिले और समुदाय को अपनी सांस्कृतिक विरासत तक पहुंच प्राप्त हो सके।'' संस्थान ने कहा, ''हम भविष्य की पीढ़ियों के लिए इन धरोहरों को सुलभ बनाने के सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।'' इस सप्ताह वेलकम ट्रस्ट, इंस्टीट्यूट ऑफ जैनोलॉजी और बर्मिंघम विश्वविद्यालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। बाद में विस्तृत कानूनी समझौता तैयार किया जाएगा।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की यात्रा से लौट आए और उन्होंने राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ हुई वार्ता को ''दो महान देशों के नेताओं की मुलाकात'' बताया। ट्रंप शुक्रवार शाम मैरीलैंड स्थित 'जॉइंट बेस एंड्रूज' पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि इस यात्रा के दौरान कई अहम व्यापारिक समझौते हुए, जिनमें बोइंग के 200 विमानों की चीन को बिक्री तथा भविष्य में 750 अतिरिक्त विमान खरीदने का वादा शामिल है। उन्होंने चीन द्वारा अमेरिकी कृषि क्षेत्र को समर्थन देने की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। बृहस्पतिवार को शी चिनफिंग के साथ मुलाकात के बाद 'फॉक्स न्यूज' को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, ''ये दो महान देश हैं। मैं इसे 'जी-2' कहता हूं। मुझे लगता है कि इतिहास में इसे एक बेहद अहम क्षण के रूप में याद किया जाएगा।'' 'द वाशिंगटन पोस्ट' ने अपनी खबर में कहा कि ट्रंप के इस बयान से चीन को वह दर्जा मिला, जिसकी राष्ट्रपति शी लंबे समय से अपेक्षा कर रहे थे यानी अमेरिका के समकक्ष एक महाशक्ति के रूप में पहचान। रिपोर्ट में कहा गया, ''दो दिनों तक चली बैठकों के दौरान सुनियोजित समारोह, भव्य स्वागत और दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली नेताओं के बीच मित्रता तथा पारस्परिक सम्मान के प्रदर्शन ने उस भू-राजनीतिक समीकरण को स्पष्ट रूप से सामने ला दिया, जिसकी चीन लंबे समय से इच्छा रखता रहा है और जिसका अमेरिका अब तक प्रतिरोध करता आया था।'' ट्रंप ने 'फॉक्स न्यूज' से बातचीत में यह भी कहा कि शी चिनफिंग के साथ अच्छे संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जब तक वह सत्ता में हैं, तब तक चीन संभवतः ताइवान के खिलाफ कोई आक्रामक कदम नहीं उठाएगा। ट्रंप ने कहा, ''यह ताइवान पर कब्जे का मामला नहीं है। वे (चीन) सिर्फ यह नहीं चाहता कि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश घोषित करे।'' उन्होंने कहा, ''जब तक मैं (सत्ता) में हूं, मुझे नहीं लगता कि वे कुछ करेंगे। लेकिन मेरे बाद वे ऐसा कर सकते हैं।'' ट्रंप ने कहा, ''मैं चाहता हूं कि चीन शांत रहे। हम युद्ध नहीं चाहते। अगर मौजूदा स्थिति बनी रहती है, तो मुझे लगता है कि चीन भी इससे संतुष्ट रहेगा।'' अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उन्होंने शी चिनफिंग को सितंबर में वाशिंगटन आने का निमंत्रण दिया है।
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वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दंत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परीक्षण के लिए इस महीने चिकित्सकों से मिलेंगे और पदभार संभालने के बाद वह चौथी बार जांच के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों से मिलेंगे। 'व्हाइट हाउस' ने इसे नियमित वार्षिक शारीरिक जांच बताया है। 'व्हाइट हाउस' ने सोमवार शाम एक बयान में कहा कि ट्रंप 26 मई को वाल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर में अपने चिकित्सकों से मिलेंगे। ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए सबसे अधिक उम्र के व्यक्ति हैं और अगले महीने वह 80 वर्ष के हो जाएंगे। राष्ट्रपति के स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएं बनी रहती हैं। ट्रंप ने कहा कि उन्हें पिछले साल अपने हृदय और पेट की जांच करवाने के बाद इस बात का अफसोस हुआ कि इससे लोगों के मन में उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता पैदा हो गई थी। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन की उम्र संबंधी जटिलताओं और स्वास्थ्य समस्याओं के लिए अक्सर आलोचना करने वाले ट्रंप ने हाल ही में टिप्पणी की है कि बढ़ती उम्र के बावजूद वह अच्छा महसूस कर रहे हैं। ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उन्हें 50 साल पहले जैसा महसूस होता था, वैसा ही अब भी महसूस होता है। 'ओवल ऑफिस' में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ''मुझे बिल्कुल वैसा ही महसूस होता है। मुझे नहीं पता कि ऐसा क्यों है। ऐसा इसलिए नहीं है कि मेरा खानपान उच्च गुणवत्ता का है।''
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो को 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक आदर्श टीम के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की। ट्रंप ने कानून प्रवर्तन से जुड़े दिग्गजों के लिए सोमवार शाम रोज़ गार्डन में रात्रि भोज आयोजित किया जहां उन्होंने लोगों से कहा "ये जे. डी. होंगे या कोई और होंगे मुझे नहीं पता।'' इसके बाद राष्ट्रपति ने अचानक एक अनौपचारिक मतदान कराया, जिससे वहां मौजूद लोग हंसने लगे। ट्रंप ने आगंतुकों से प्रश्न किया, ''कौन जे. डी. वेंस को पसंद करता है और कौन मार्को रुबियो को पसंद करता है?'' इस पर लोगों ने अपनी पसंद के उम्मीदवार के लिए तालियां बजाईं और उत्साह दर्शाया। ट्रंप ने कहा, ''यह एक अच्छा विचार लगता है''। उन्होंने
यह स्पष्ट भी किया कि वह दोनों में से किसी का भी प्रचार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ''वैसे, मेरा मानना है कि यह एक बेहतरीन टीम है, लेकिन ये छोटी-मोटी बातें हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी भी परिस्थिति में आपको मेरा समर्थन प्राप्त है।'' राष्ट्रपति ने कहा, ''मुझे लगता है कि यह राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जैसा लग रहा है।'' ट्रंप, प्रशासन के अपने करीबी लोगों के बीच माहौल का जायजा लेने के लिए अक्सर वेंस-रुबियो का सवाल उठाते हैं। ओहायो से पहली बार सांसद बने वेंस को ट्रंप ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उपराष्ट्रपति उम्मीदवार चुना था। रुबियो ने 2016 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन रिपब्लिकन प्राइमरी में ट्रंप से हारने के बाद उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था। फ्लोरिडा से तीन बार सीनेटर रह चुके रुबियो ने 2025 में ट्रंप प्रशासन में विदेश मंत्री के रूप में पदभार संभाला था। - पेशावर.। पाकिस्तान के अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में एक पुलिस चौकी पर आत्मघाती हमले में कम से कम 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, यह घटना शनिवार को बन्नू जिले के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में हुई, जहां विस्फोटकों से भरे एक वाहन को पुलिस चौकी की ओर बढ़ते देख सुरक्षाकर्मियों ने उस पर गोलीबारी की। इसके बाद जोरदार विस्फोट हो गया। धमाके की चपेट में आकर आसपास के कई घरों की छत ढह गईं, पुलिस चौकी की इमारत पूरी तरह जमींदोज हो गई जिससे कई सुरक्षाकर्मी मलबे में दब गए। विस्फोट के तुरंत बाद उग्रवादियों के एक बड़े समूह ने पुलिस चौकी पर हमला कर दिया और उन्हें रोकने के लिए पुलिस की ओर से भी गोलीबारी की गई। बन्नू पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस हमले में 15 सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई घायल हैं। हालांकि, हमले में कितने चरमपंथी मारे गए या कोई पकड़ा गया, इस बारे में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री मोहम्मद सोहेल अफरीदी ने इस चरमपंथी हमले की कड़ी निंदा की और जान-माल के नुकसान पर गहरा दुख जताया। अफरीदी ने कहा कि ''आतंकवाद के विरुद्ध'' यह लड़ाई केवल खैबर पख्तूनख्वा की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की है। उन्होंने यह भी कहा कि बंद कमरों में लिए गए फैसलों और थोपी गई नीतियों ने देश को असुरक्षा के दल-दल में धकेल दिया है। उन्होंने कहा, ''हम अपने शहीदों की कुर्बानी को व्यर्थ नहीं जाने देंगे और आतंकवाद के इस अभिशाप को जड़ से मिटाने तक प्रयास जारी रखेंगे।'' पिछले सप्ताह इसी तरह की एक घटना में, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने खैबर पख्तूनख्वा के दक्षिण वजीरिस्तान क्षेत्र में एक जांच चौकी की ओर विस्फोटक से भरे वाहन में आ रहे एक संदिग्ध चरमपंथी को मार गिराया था। हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली है। हालांकि, इससे पहले पाकिस्तान सरकार इस क्षेत्र में हिंसा के लिए प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराती रही है.।
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वाशिंगटन. अमेरिका ने अपने राजनयिक कर्मियों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का हवाला देते हुए पाकिस्तान के पेशावर में स्थित अपने वाणिज्य दूतावास को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ''अमेरिकी विदेश मंत्रालय पेशावर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की घोषणा कर रहा है। खैबर पख्तूनख्वा से राजनयिक संपर्क की जिम्मेदारी अब इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास को सौंप दी जाएगी।'' बयान में कहा गया है, ''यह निर्णय हमारे राजनयिक कर्मियों की सुरक्षा और संसाधनों के कुशल प्रबंधन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।'' इसमें यह भी कहा गया है कि पेशावर में प्रत्यक्ष उपस्थिति में बदलाव के बावजूद पाकिस्तान में अमेरिकी प्रशासन की नीतिगत प्राथमिकताएं कायम रहेंगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका खैबर पख्तूनख्वा के लोगों और अधिकारियों के साथ आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और अमेरिकी जनता के हितों को आगे बढ़ाने के लिए सार्थक रूप से बातचीत जारी रखेगा। प्रवक्ता ने कहा, ''विदेश विभाग पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास के माध्यम से इस्लामाबाद, कराची और लाहौर में अपने शेष राजनयिक पदों के जरिए अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।''



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