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दुबई . ओमान के निकट होर्मुज जलडमरूमध्य में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो तेल टैंकरों पर ईरान के हमले में मंगलवार को चालक दल के एक भारतीय सदस्य की मौत हो गई, जबकि छह भारतीयों समेत आठ अन्य लोग घायल हो गए। यह घटना पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बड़े विस्तार के रूप में सामने आई है।
यूएई के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उसके राष्ट्रीय टैंकर 'मोम्बासा' और 'अल बहियाह' ओमान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी नौवहन मार्ग से गुजर रहे थे, तभी उन पर ईरान की ओर से दो क्रूज मिसाइलें दागी गईं। मंत्रालय ने बताया कि 'मोम्बासा' टैंकर पर सवार चालक दल के एक भारतीय सदस्य की हमले में मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल हुए हैं। घायलों में से चार की हालत गंभीर बताई गई है। उसने बताया कि घायलों में छह भारतीय और यूक्रेन के दो नागरिक शामिल हैं।
बयान के अनुसार, हमले के कारण दोनों टैंकरों में आग लग गई, जिससे उन्हें नुकसान पहुंचा। हालांकि बाद में आग पर काबू पा लिया गया। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने इस ''खुले हमले'' की निंदा करते हुए इसे ''गंभीर उल्लंघन'' और ''अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट हनन'' बताया। मंत्रालय ने कहा, ''यूएई इस तनावपूर्ण स्थिति पर जवाब देने तथा अपने क्षेत्र, नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का पूरा अधिकार सुरक्षित रखता है।'' उसने कहा कि किसी भी खतरे से निपटने के लिए मंत्रालय उच्चतम स्तर की तैयारी और सतर्कता बनाए हुए है।
इस बीच, अमेरिका ने मंगलवार तड़के ईरान पर हमले किए। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की नाकेबंदी ''फिर से लागू'' कर रहा है। उन्होंने सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने के बदले अन्य जहाजों से शुल्क लेने का भी संकेत दिया। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और यूएई से जुड़े इन दोनों टैंकरों को निशाना बनाकर हमले किए।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अब तक 11 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। इस संघर्ष के दौरान जहाजों और टैंकरों पर हुए हमलों के बीच कई नाविकों को भी बचाया गया है। पिछले महीने पलाऊ के ध्वज वाले टैंकर 'एमटी सेट्टेबेलो' पर अमेरिका के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। -
वेलिंगटन. 'जुरासिक पार्क' में डायनॉसोर से बचने की कोशिश करते नजर आए और 'द पियानो' में हॉली हंटर के पति की भूमिका निभाने वाले बहुमुखी अभिनेता सैम नील का 78 वर्ष की उम्र निधन हो गया है। अभिनेता के सोशल मीडिया पेज पर जारी बयान के अनुसार, नील का निधन सोमवार को सिडनी में हुआ।
नील ने 2023 में बताया था कि उन्हें एंजियोइम्यूनोब्लास्टिक टी-सेल लिम्फोमा की समस्या हो गई है। यह गैर-हॉजकिन लिम्फोमा का ही एक दुर्लभ प्रकार है। बयान में कहा गया कि उनकी मृत्यु ''अचानक और अप्रत्याशित'' थी और निधन के समय वह ''कैंसर मुक्त'' हो चुके थे। हालांकि, मृत्यु के कारण का खुलासा नहीं किया गया। उनके परिवार ने कहा, ''सैम ने अपने परिवार के बीच उसी गरिमा के साथ विदा ली, जो उनके पूरे जीवन की पहचान रही।'' नील उन कई ऑस्ट्रेलियाई कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने 1970 के दशक के अंत में ऑस्ट्रेलियाई सिनेमा के उभार के बाद अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की। इस सूची में पॉल होगन, मेल गिब्सन, ज्योफ्री रश, रसेल क्रो, जेन कैंपियन, पीटर वीयर और जिलियन आर्मस्ट्रॉन्ग जैसे नाम शामिल हैं। नील की अभिनय क्षमता का दायरा काफी व्यापक था। उन्होंने एलन एकबॉर्न की कॉमेडी 'स्वीट रिवेंज' में हेलेना बोनहम कार्टर के साथ काम किया, 'द पियानो' में हॉली हंटर की उंगली काटने वाले किरदार को निभाया और विज्ञान-कथा हॉरर फिल्म 'इवेंट हॉराइजन' में अपनी आंखें निकालने वाले दृश्य के लिए भी जाने गए। अंतरराष्ट्रीय दर्शकों का ध्यान उन्होंने 1979 में जिलियन आर्मस्ट्रॉन्ग की फिल्म 'माई ब्रिलियंट करियर' से खींचा, जिसमें जूडी डेविस भी थीं। इसके बाद उन्होंने फिलिप नॉयस की समुद्री पृष्ठभूमि वाली थ्रिलर 'डेड काल्म' में काम किया, जिसमें निकोल किडमैन भी थीं। सैम नील की सबसे प्रसिद्ध फिल्मों में 'जुरासिक पार्क' शामिल है, जिसमें उन्होंने जीवाश्म विज्ञानी डॉ. एलन ग्रांट की भूमिका निभाई थी। फिल्म में उनका किरदार एक समझदार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाला व्यक्ति था, जो उस थीम पार्क के निर्माता को चेतावनी देता है जहां क्लोन किए गए डायनासोर रखे गए हैं। उन्होंने लौरा डर्न, जेफ गोल्डब्लम और रिचर्ड एटनबरो के साथ इस फिल्म में अभिनय किया था। एलन ग्रांट का किरदार पहली फिल्म की घटनाओं से बच जाता है, लेकिन 1997 में आई 'द लॉस्ट वर्ल्ड : जुरासिक पार्क दो' में नजर नहीं आया। वह 2001 की तीसरी कड़ी और 2022 की 'जुरासिक वर्ल्ड : डोमिनियन' में फिर लौटे। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने उन्हें ''महान कलाकारों में से एक'' बताया।
उन्होंने कहा, ''उन्होंने ऐसे समय में शुरुआत की थी जब न्यूजीलैंड में फिल्म उद्योग लगभग नहीं के बराबर था। पांच दशक से अधिक समय तक उन्होंने न्यूजीलैंड की कहानियों को दुनिया तक पहुंचाया और उनकी प्रतिभा ने हमारे फिल्म उद्योग को आज का स्वरूप देने में मदद की।'' उनका संस्मरण 'डिड आई एवर टेल यू दिस?' मार्च 2023 में प्रकाशित हुआ था। फिल्मों में उनके ''उत्कृष्ट योगदान'' के लिए उन्हें नाइटहुड से सम्मानित किया गया था, जिसे दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने मंजूरी दी थी। -
63 घायल, 22 की हालत गंभीर
बैंकॉक. थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में एक पब में रविवार देर रात भीषण आग लगने से कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और 63 अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। शहर प्रशासन के अनुसार, उत्तरी बैंकॉक स्थित 'ना लाडप्राओ' बीयर हॉल में रविवार को मध्यरात्रि से पहले आग लग गई। दमकलकर्मियों ने लगभग आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पब से आग की ऊंची लपटें और घना काला धुआं निकलता दिखाई दे रहा है। लोग जान बचाने के लिए बाहर भागते नजर आए। बैंकॉक के गवर्नर चाडचार्ट सिट्टिपुंत ने कहा कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। जांचकर्ता छत में इस्तेमाल सामग्री के साथ साथ यह भी जांचेंगे कि कहीं आपातकालीन निकास मार्ग अवरुद्ध तो नहीं थे, जिससे लोगों को बाहर निकलने में कठिनाई हुई हो। सोमवार सुबह घटनास्थल को घेर लिया गया और फोरेंसिक विशेषज्ञ आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए जले हुए मलबे की जांच में जुट गए। प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल ने घटनास्थल पर संवाददाताओं से कहा कि हादसे में 27 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि पब में प्रस्तुति दे रहे एक संगीतकार ने उन्हें बताया कि मंच के पास लगे एक सर्किट ब्रेकर से धुआं निकलता दिखाई दिया। इसके बाद बिजली चली गई, विस्फोट जैसी आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते पूरा परिसर घने धुएं से भर गया। अनुतिन ने बताया कि मृतकों में से कई लोगों के शव पब के पिछले हिस्से में मिले।
गवर्नर ने बताया कि 63 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें 22 की हालत गंभीर है। उन्होंने कहा कि मृतकों और घायलों की पहचान की जा रही है और कई लोगों के पास पहचान पत्र नहीं हैं या वह बेहोश हैं। आग से पब के सामने की ओर लगी खिड़कियों के शीशे टूट गए और सड़क पर जले हुए टेलीविजन, स्पीकर तथा इलेक्ट्रिक गिटार सहित अन्य सामान बिखरा मिला। अंदर मेज-कुर्सियां बुरी तरह जल गईं। सोमवार सुबह कुछ बौद्ध भिक्षु मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने घटनास्थल पर पहुंचे। स्वास्थ्यकर्मियों ने आसपास मौजूद लोगों को धुएं और जहरीले अवशेषों से बचाव के लिए मास्क वितरित किए। प्रशासन ने लापता लोगों के बारे में जानकारी जुटाने और परिजनों की सहायता के लिए घटनास्थल पर एक पंजीकरण केंद्र भी स्थापित किया है। गायिका सुकन्या वोंगवोंगवाई ने बताया कि वह पास में प्रस्तुति दे रही थीं। आग लगने की सूचना मिलने पर वह घटनास्थल पर पहुंचीं क्योंकि उनके बैंड के कई सदस्य उस पब में प्रस्तुति दे रहे थे। उन्होंने बताया कि उनके एक साथी की मौत हो गई, तीन अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि एक अन्य का अब तक पता नहीं चल सका है। उन्होंने कहा, ''अंदर मौजूद लोगों ने बताया कि आग लगते ही पूरा परिसर अंधेरे में डूब गया। बिजली चली गई थी और चारों ओर धुआं फैल गया था, जिससे लोग एक-दूसरे का पता नहीं लगा सके।'' थाईलैंड में इससे पहले वर्ष 2022 में देश के पूर्वी हिस्से में एक म्यूजिक बार में लगी आग में 14 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, एक जनवरी 2009 को बैंकॉक के सैंटिका नाइटक्लब में नए साल के जश्न के दौरान लगी आग में 66 लोगों की मौत और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। उस हादसे का कारण परिसर के भीतर की गई आतिशबाजी को माना गया था। -
दुबई/ अमेरिका के हवाई हमलों पर ईरान की जवाबी कार्रवाई के बीच सोमवार सुबह कुवैत ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय होकर देश की ओर आने वाले हवाई खतरों को निष्क्रिय करने में जुटी है। कुवैत की सेना ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। हालांकि, उसने तत्काल यह नहीं बताया कि इस कार्रवाई में देश में किसी तरह का नुकसान हुआ है या कोई हताहत हुआ है। कुवैत इससे पहले भी कई बार ईरान के हमलों का निशाना बन चुका है। वहीं, ईरानी हमलों के मद्देनजर सोमवार को बहरीन में दूसरी बार मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजे।
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दुबई. अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज पर हमले के जवाब में रविवार तड़के ईरान पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को निशाना बनाकर हमले किए। फारस की खाड़ी में दोनों पक्षों के बीच हमलों का यह नया दौर ऐसे समय में शुरू हुआ है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान युद्ध को लेकर हुआ अंतरिम समझौता और युद्धविराम अब ''समाप्त'' हो चुका है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, ''ईरान ने गलत विकल्प चुना। अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।'' संयुक्त अरब अमीरात ने नजदीक में स्थित कतर में विस्फोटों की आवाज सुने जाने के बीच रविवार को लोगों को मिसाइल और ड्रोन हमले की आशंका को लेकर चेतावनी जारी की। धमाकों के कुछ ही देर बाद कतर में मिसाइल हमले की चेतावनी के सायरन बजने लगे। इस बीच, फारस की खाड़ी में स्थित बहरीन में भी मिसाइल हमले की चेतावनी के सायरन बजे। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय स्थित है। यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका कि संयुक्त अरब अमीरात में किन स्थानों को निशाना बनाया गया। ईरान के हालिया हमलों के दौर में अब तक उसे निशाना नहीं बनाया गया था। होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए हमले के संबंध में 'यूएस सेंट्रल कमांड' (सेंटकॉम) ने कहा कि साइप्रस के ध्वज वाले एक कंटेनर जहाज को ईरान ने निशाना बनाया, जिससे उसके ''इंजन कक्ष को काफी नुकसान'' पहुंचा और चालक दल का एक असैन्य सदस्य लापता है। ईरान के अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि कई जहाजों ने ''अपना मार्ग बदलने और स्वीकृत रास्ते से आगे बढ़ने संबंधी हमारी चेतावनियों तथा निर्देशों की अनदेखी की।'' रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि इनमें से एक जहाज ''चेतावनी के तौर पर चलाई गई गोली की चपेट में आ गया और उसे रोक दिया गया।'' ईरान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ''अगली सूचना तक'' बंद रहेगा। उसने यह भी कहा कि यदि उस पर और हमले किए गए तो वह ''क्षेत्र में दुश्मन के अन्य सैन्य ठिकानों'' को निशाना बनाने पर विचार करेगा।
- सैन जुआन. बहामास में एक विमान हादसे में मारे गए 10 लोगों में संगीतकार और एक डीजे भी शामिल हैं। 'बहामास म्यूजिशियंस एंड एंटरटेनर्स यूनियन' ने शनिवार को यह जानकारी दी। हादसे के बाद सरकार ने विमानन कंपनी 'फ्लेमिंगो एअर' की उड़ानों पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी। यह हादसा बहामास की राजधानी नासाउ के ठीक पश्चिम में स्थित नॉर्थ एंड्रोस में हुआ।यूनियन ने 'एक्स' पर एक बयान में कहा, ''दिवंगत हुए लोगों में हमारे कुछ प्रतिभाशाली और ऊर्जावान सदस्य भी शामिल हैं, जिनमें 'द पॉन्ड बैंड' के सदस्य और एक डीजे शामिल हैं।'' बहामास के प्रधानमंत्री फिलिप ब्रेव डेविस ने शुरुआत में कहा था कि हादसे में एक व्यक्ति जीवित बच गया है लेकिन बाद में उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में पुष्टि की कि उस व्यक्ति की भी गंभीर रूप से घायल होने के कारण मौत हो गई। उन्होंने कहा कि लोग बहामास की स्वतंत्रता की 53वीं वर्षगांठ मना रहे थे लेकिन ''यह दिन शोक के दिन में बदल गया।''उन्होंने कहा, ''हम उन सभी परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं जिन्हें यह दुखद समाचार मिला है कि उनका कोई प्रियजन अब घर नहीं लौटेगा।'' देश के विमान दुर्घटना जांच प्राधिकरण ने एक बयान में कहा कि बहामास में पंजीकृत 'सेसना 402' विमान ने नासाउ के लिंडन पिंडलिंग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी और वह सैन एंड्रोस जा रहा था, तभी वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। ऊर्जा, सार्वजनिक सेवाएं और विमानन मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दुर्घटना के कारणों की जांच के मद्देनजर 'फ्लेमिंगो एअर' के विमान परिचालन प्रमाणपत्र को निलंबित करना सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया केवल एहतियाती कदम है। मंत्रालय ने कहा कि शुक्रवार को सुरक्षा संबंधी दो घटनाएं होने के बाद यह कदम उठाया गया।ऊर्जा, सार्वजनिक सेवाएं और विमानन मंत्री जोबेथ कोल्बी-डेविस ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पहली घटना शुक्रवार को 'फ्लेमिंगो एअर' के एक विमान के साथ हुई थी। उन्होंने बताया कि विमान मायागुआना जा रहा था, तभी पायलट ने एक समस्या की सूचना दी और विमान को वापस नासाउ ले आया। विमान के उतरने और यात्रियों के बाहर निकलने के बाद उसमें आग लग गई। इस घटना की भी जांच की जा रही है।
- हनोई. वियतनाम के फू क्वोक द्वीप के पास शनिवार को एक नौका (स्पीडबोट) पलटने से 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई। हनोई स्थित भारतीय दूतावास ने इसकी पुष्टि की। दूतावास के अनुसार, नाव में 32 भारतीय पर्यटकों और स्थानीय चालक दल के चार सदस्यों सहित कुल 36 लोग सवार थे। इनमें से 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। वियतनाम सरकार ने दुर्घटना का कारण पता लगाने के लिए तुरंत जांच के आदेश दिए।फू क्वोक, वियतनाम का सबसे बड़ा द्वीप है और अपने सफेद रेतीले समुद्र तटों, प्रवाल भित्तियों तथा द्वीप भ्रमण के कारण प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। बताया गया है कि ये पर्यटक द्वीप भ्रमण से लौट रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। वियतनामी समाचार पोर्टल 'वीएन एक्सप्रेस इंटरनेशनल' के अनुसार, स्पीडबोट 'होन मे रुट नगोआई' द्वीप से लगभग 400 मीटर दूर पलट गई। हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद पर्यटक नौकाएं यात्रियों को बचाने के लिए पहुंचीं। बाद में सीमा सुरक्षा बल, नौसेना, तटरक्षक बल और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त रूप से व्यापक खोज एवं बचाव अभियान चलाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ यात्री पलटी हुई नाव के अंदर ही फंस गए थे, जिससे बचाव अभियान में काफी कठिनाई आई। स्थानीय मीडिया के अनुसार, दुर्घटना में जान गंवाने वाले सभी 15 पर्यटकों के शव बरामद कर लिए गए हैं।मरने वाले 15 लोगों में से 10 तमिलनाडु से, तीन आंध्र प्रदेश से और दो केरल से थे।हनोई में भारतीय दूतावास की ओर से 'एक्स' पर साझा की गई सूची के मुताबिक, मरने वालों में दो महिलाएं भी शामिल थीं। सूची के अनुसार, तमिलनाडु के मृतकों की पहचान सेंथिल कुमार जयवेल, मुरुगा प्रभु अरुमुगम, श्रीधर सुंदरराजन, शेख अब्दुल्ला अब्दुल मजीद, बालाजी नटेसन, विनय कुमार चिथिरापुरम भास्कर, रविशंकर सुकुमारन, संतोष कुमार शांतिलाल जैन, बाबू कुप्पुस्वामी और अलगुराजन शिवसामी के तौर पर हुई है। आंध्र प्रदेश के मृतकों की पहचान नल्लापेटा आदिशेषैया रवितेजा, श्रीधर मुडियम और जया लक्ष्मी गेल्ली के तौर पर हुई, जबकि केरल के मृतकों की पहचान एविकोट चेरियन थॉमस और लोवेनी थॉमस के तौर पर की गई। तीनों दक्षिणी राज्यों की सरकारों ने प्रभावित लोगों के रिश्तेदारों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। दुर्घटना में जीवित बचे निर्मल कुमार ने 'पीटीआई वीडियो' से बातचीत में बताया, '' एक बड़ी लहर नाव से टकराई। करीब 20 लोग बाहर निकल आए, लेकिन बाकी लोग अंदर फंस गए।'' उन्होंने कहा,'' यह एक बंद नाव थी। हम दोनों (मैं और मेरा मित्र) आगे की ओर बैठे थे, इसलिए बच गए। पीछे बैठे लोग अंदर फंस गए। हालांकि, नाव संचालकों ने सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय किए थे।'' 'एसोसिएटेड प्रेस' (एपी) के अनुसार, वियतनामी टीवी चैनलों पर प्रसारित फुटेज में समुद्र में ऊंची लहरें और तेज हवाएं दिखाई दीं। बचाव दल ने पानी में फंसे लोगों की ओर रबर के रिंग फेंके और जेट स्की के जरिए उन्हें किनारे तक पहुंचाया, जहां मौजूद लोगों ने कुछ घायलों को प्राथमिक उपचार दिया। दुर्घटना के वास्तविक कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।'एपी' की रिपोर्ट के अनुसार, वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हुंग ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और दुर्घटनास्थल सहित अन्य जलमार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने के निर्देश भी दिए हैं। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों से जुड़े इस दर्दनाक हादसे की खबर से वह बेहद दुखी हैं। उन्होंने कहा, ''अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। वियतनाम में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास हरसंभव सहायता प्रदान कर रहे हैं। हमारे अधिकारी वियतनामी प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में हैं।'' राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "वियतनाम में नाव दुर्घटना की खबर से दुख हुआ। पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। मैं घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करती हूं।" सभी पार्टियों के नेताओं ने इस घटना पर शोक व्यक्त किया है।
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सैन जुआन/बहामास में एक विमान हादसे में मारे गए 10 लोगों में संगीतकार और एक डीजे भी शामिल हैं। 'बहामास म्यूजिशियंस एंड एंटरटेनर्स यूनियन' ने शनिवार को यह जानकारी दी। हादसे के बाद सरकार ने विमानन कंपनी 'फ्लेमिंगो एअर' की उड़ानों पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी।
यह हादसा बहामास की राजधानी नासाउ के ठीक पश्चिम में स्थित नॉर्थ एंड्रोस में हुआ। यूनियन ने 'एक्स' पर एक बयान में कहा, ''दिवंगत हुए लोगों में हमारे कुछ प्रतिभाशाली और ऊर्जावान सदस्य भी शामिल हैं, जिनमें 'द पॉन्ड बैंड' के सदस्य और एक डीजे शामिल हैं। बहामास के प्रधानमंत्री फिलिप ब्रेव डेविस ने शुरुआत में कहा था कि हादसे में एक व्यक्ति जीवित बच गया है लेकिन बाद में उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में पुष्टि की कि उस व्यक्ति की भी गंभीर रूप से घायल होने के कारण मौत हो गई। उन्होंने कहा कि लोग बहामास की स्वतंत्रता की 53वीं वर्षगांठ मना रहे थे लेकिन ''यह दिन शोक के दिन में बदल गया।'' उन्होंने कहा, ''हम उन सभी परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं जिन्हें यह दुखद समाचार मिला है कि उनका कोई प्रियजन अब घर नहीं लौटेगा।
देश के विमान दुर्घटना जांच प्राधिकरण ने एक बयान में कहा कि बहामास में पंजीकृत 'सेसना 402' विमान ने नासाउ के लिंडन पिंडलिंग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी और वह सैन एंड्रोस जा रहा था, तभी वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। ऊर्जा, सार्वजनिक सेवाएं और विमानन मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दुर्घटना के कारणों की जांच के मद्देनजर 'फ्लेमिंगो एअर' के विमान परिचालन प्रमाणपत्र को निलंबित करना सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया केवल एहतियाती कदम है। मंत्रालय ने कहा कि शुक्रवार को सुरक्षा संबंधी दो घटनाएं होने के बाद यह कदम उठाया गया।
ऊर्जा, सार्वजनिक सेवाएं और विमानन मंत्री जोबेथ कोल्बी-डेविस ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पहली घटना शुक्रवार को 'फ्लेमिंगो एअर' के एक विमान के साथ हुई थी। उन्होंने बताया कि विमान मायागुआना जा रहा था, तभी पायलट ने एक समस्या की सूचना दी और विमान को वापस नासाउ ले आया। विमान के उतरने और यात्रियों के बाहर निकलने के बाद उसमें आग लग गई। इस घटना की भी जांच की जा रही है। - ऑकलैंड । भारत के बढ़ते वैश्विक कद पर जोर देते हुए न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में से एक, एक बड़ी भू-राजनीतिक ताकत और एक अहम हिंद-प्रशांत साझेदार के तौर पर उभरा है। शनिवार को ऑकलैंड में पीएम मोदी के लिए आयोजित शानदार लंच में लक्सन ने कहा, “यहां हर कोई समझता है कि एक मजबूत साझेदारी बनाने के लिए क्या करना पड़ता है और उन्हें भरोसे की जरूरत होती है। इसके लिए प्रतिबद्धता, भरोसेमंद होना, फॉलो-थ्रू और साझा मूल्य बनाना जरूरी है। यह बात उतनी ही सच है, चाहे वह बिजनेस हो या डिप्लोमेसी।” उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री मोदी आपके नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेजी से और सबसे ज्यादा बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था में से एक बन गया है। भारत मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य में अहम देश और हिंद-प्रशांत का साझेदार है, जो अपने स्केल, इनोवेशन, एम्बिशन और अपने रणनीतिक प्रभाव के लिए जाना जाता है।”पीएम लक्सन ने कहा कि न्यूजीलैंड एक खुली, भरोसेमंद, इनोवेटिव और ग्लोबली कनेक्टेड जगह है। यह देश खाद्य उत्पादन, शिक्षा, तकनीकी, पर्यटन, स्थिरता में विशेषज्ञता देता है और इसका व्यावहारिक सहयोग और भरोसेमंद साझेदारी का मजबूत रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा, “हम सब मिलकर नौकरियों के सृजन में मदद कर सकते हैं, हम व्यापार बढ़ा सकते हैं, निवेश ला सकते हैं और भारत और न्यूजीलैंड दोनों में नए मौके बना सकते हैं और इन सबका मकसद हमारे लोगों की खुशहाली और सुरक्षा बढ़ाना है।”भारत और न्यूजीलैंड अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाने पर सहमत हुए। प्रधानमंत्री लक्सन ने इसे एक बड़ा कदम बताया और कहा कि यह तेजी से अनिश्चित होते वैश्विक माहौल के बीच कई क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक मजबूत नींव देगा। उन्होंने कहा, “एक ऐसी दुनिया में जो तेजी से अस्थिर और अनिश्चित होती जा रही है, मजबूत साझेदारी पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हैं। यह खुशहाली, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों में व्यवहारिक सहयोग के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म देता है।”पीएम लक्सन ने कहा, “इससे व्यापार, निवेश, शिक्षा, तकनीक, खेल और पर्यटन में हमारे संबंध और गहरे होंगे। इससे रक्षा, समुद्री सुरक्षा और कानून लागू करने पर भी करीबी सहयोग मिलेगा। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि इसका मतलब है ऐसा संबंध बनाना जिससे दोनों देशों को फायदा हो और जिसके असली नतीजे मिलें।”द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में भारतीय प्रवासियों की अहम भूमिका पर जोर देते हुए, लक्सन ने कहा कि न्यूजीलैंड में रहने वाला भारतीय समुदाय न्यूजीलैंड की सफलता के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं और आगे भी रहेंगे और दोनों देशों के बीच संबंधों के केंद्र में बने रहेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा, “उनका प्रभाव पूरे न्यूजीलैंड में व्यवसाय, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, संस्कृति, खेल और सामुदायिक जीवन में महसूस किया जाता है। अपनी ऊर्जा, अपने व्यवसाय और अपने मजबूत पारिवारिक संपर्क के जरिए, कीवी इंडियंस न्यूजीलैंड को भारत को समझने में और भारत को न्यूजीलैंड को समझने में मदद करते हैं। यह हर दिन परिवारों, स्टूडेंट्स, आगंतुकों, उद्यमियों और एथलीट्स में साफ दिखता है जो हमारे देशों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं। यह एक ऐसे संबंधों की नींव है जो लंबे समय तक चलेगा।”पीएम मोदी को उनके नेतृत्व और द्विपक्षीय संबंध को आगे बढ़ाने में व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद देते हुए लक्सन ने कहा, “आज हम पूरे भरोसे के साथ कह सकते हैं कि न्यूजीलैंड और भारत एक जीत का साझेदार है। मैं आपके साथ, मेरे दोस्त और इस कमरे में मौजूद सभी लोगों के साथ मिलकर आने वाले सालों में इस साझेदारी को और मजबूत करने के लिए काम करने का इंतजार कर रहा हूं।”
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ऑकलैंड ।भारत और न्यूज़ीलैंड ने आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और अन्य उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच ऑकलैंड में हुई वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने तथा वैश्विक शांति, सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की। संयुक्त बयान में दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों, विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और 10 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली के लाल किले के पास हुई आतंकी घटना की निंदा करते हुए दोषियों को जल्द न्याय के कटघरे में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।भारत और न्यूज़ीलैंड ने आतंकवाद के वित्तपोषण नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों और ऑनलाइन आतंकी ढांचे को समाप्त करने के लिए सहयोग बढ़ाने का संकल्प दोहराया। दोनों देशों ने काउंटर-टेररिज्म पर जॉइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) के गठन के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। यह तंत्र दोनों देशों के बीच सूचना और विशेषज्ञता साझा करने के लिए संस्थागत ढांचा उपलब्ध कराएगा।दोनों देशों ने गैर-कानूनी मादक पदार्थों की तस्करी, वित्तीय अपराध, साइबर अपराध, आतंकवाद से जुड़े अपराध और मानव तस्करी जैसे ट्रांसनेशनल एवं संगठित अपराधों से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। साथ ही काउंटर-नारकोटिक्स सहयोग और कानून प्रवर्तन संबंधी व्यवस्थाओं को जल्द औपचारिक रूप देने की दिशा में काम करने का भी फैसला किया गया।प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री लक्सन ने स्वतंत्र, खुला, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान के साथ नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के अनुरूप नौवहन और ओवरफ्लाइट की स्वतंत्रता तथा समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता को भी दोहराया।संयुक्त बयान में दोनों देशों ने ईस्ट एशिया समिट, आसियान रीजनल फोरम और आसियान डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग प्लस जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए आसियान की केंद्रीय भूमिका और उसके दृष्टिकोण के महत्व को भी दोहराया।
- ऑकलैंड ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (स्थानीय समयानुसार) ऑकलैंड में न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-न्यूज़ीलैंड साझेदारी की व्यापक समीक्षा की और व्यापार, रक्षा, आर्थिक सहयोग समेत विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को नई मजबूती देने पर चर्चा की। इससे पहले गवर्नमेंट हाउस में प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच हुई वार्ता में भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों के सभी प्रमुख पहलुओं पर चर्चा हुई। विशेष रूप से व्यापार, वाणिज्य, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुई प्रगति की समीक्षा की गई तथा सहयोग को नई दिशा देने पर विचार-विमर्श किया गया। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को प्रमुख उद्योगपतियों और खेल जगत की हस्तियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वह ऑकलैंड में भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि यह कार्यक्रम दोनों देशों के बीच जन-से-जन संबंधों को और मजबूत करेगा।शुक्रवार को ऑकलैंड पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा को ऐतिहासिक बताया था। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा था कि चार दशकों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली न्यूज़ीलैंड यात्रा है। उन्होंने एयरपोर्ट पर स्वागत के लिए प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन का आभार जताते हुए कहा था कि वह दोनों देशों की मित्रता के सभी पहलुओं पर व्यापक चर्चा और भारतीय समुदाय से संवाद को लेकर उत्साहित हैं।प्रधानमंत्री मोदी, प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर न्यूज़ीलैंड की यात्रा पर पहुंचे हैं। अप्रैल में भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर के बाद यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात 17 मार्च 2025 को नई दिल्ली में हुई थी, जब लक्सन भारत के आधिकारिक दौरे पर आए थे।न्यूज़ीलैंड पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की अपनी यात्रा पूरी, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के साथ तीसरे ऑस्ट्रेलिया-भारत वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और स्वच्छ ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति जताई।
- ऑकलैंड । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक न्यूज़ीलैंड दौरे के स्वागत में शुक्रवार को ऑकलैंड की प्रतिष्ठित स्काई टावर भारतीय तिरंगे के रंगों से रोशन कर दी गई। करीब 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की आधिकारिक न्यूज़ीलैंड यात्रा के अवसर पर यह विशेष सम्मान दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के तीसरे और अंतिम चरण के तहत शुक्रवार शाम (स्थानीय समयानुसार) ऑकलैंड पहुंचे, जहां न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी की।विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तिरंगे की रोशनी से सजी स्काई टावर की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “ऑकलैंड में विशेष स्वागत! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूज़ीलैंड यात्रा के अवसर पर प्रतिष्ठित स्काई टावर को भारतीय तिरंगे के रंगों से रोशन किया गया, जो दोनों देशों की मित्रता का प्रतीक है।”ऑकलैंड पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। इस दौरान न्यूज़ीलैंड में भारत की उच्चायुक्त मुआनपुई सैयावी सहित दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री लक्सन ने भी ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री मोदी के आगमन का वीडियो साझा करते हुए उनका स्वागत किया।प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि चार दशकों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली न्यूज़ीलैंड यात्रा है। उन्होंने एयरपोर्ट पर स्वागत के लिए प्रधानमंत्री लक्सन का आभार जताते हुए कहा कि वह दोनों देशों की मित्रता के सभी पहलुओं पर व्यापक चर्चा करेंगे। साथ ही ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करने को लेकर भी उत्साह जताया।विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों को नई गति देगी। व्यापार, रक्षा, खेल, संस्कृति, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों पर चर्चा होगी। मंत्रालय ने कहा कि यह ऐतिहासिक दौरा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और आपसी सहयोग के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
- ऑकलैंड । न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने शनिवार को घोषणा की कि भारत और न्यूज़ीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) तक बढ़ाने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देगा और भविष्य में संबंधों को और गहरा करने के लिए व्यापक ढांचा प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री लक्सन ने ऑकलैंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान यह बात कही।प्रधानमंत्री लक्सन ने कहा कि 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला न्यूज़ीलैंड दौरा दोनों देशों के संबंधों में ऐतिहासिक पड़ाव है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया था और अब उन्हें न्यूज़ीलैंड में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत कर खुशी हो रही है।पीएम क्रिस्टोफर ने कहा कि दोनों देशों ने कम समय में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब सहयोग केवल एफटीए तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि रणनीतिक साझेदारी के जरिए दोनों देश रक्षा, व्यापार, निवेश और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को और व्यापक बनाएंगे। प्रधानमंत्री लक्सन ने कहा कि रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के रिश्तों को अधिक गहराई और स्पष्ट दिशा देगी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दो अलग-अलग छोर पर होने के बावजूद भौगोलिक दूरी भारत और न्यूज़ीलैंड के आर्थिक सहयोग में बाधा नहीं बनेगी। उन्होंने कहा कि एफटीए के लागू होने के पहले दिन से ही न्यूज़ीलैंड के भारत को होने वाले निर्यात पर 57% टैरिफ समाप्त हो जाएगा, जिससे दोनों देशों के व्यापार को नई गति मिलेगी।ऑकलैंड में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की मौजूदगी में विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में शुक्रवार को न्यूज़ीलैंड पहुंचे थे।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ऑकलैंड में आयोजित भारत-न्यूज़ीलैंड बिजनेस इवेंट को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को आर्थिक सहयोग के नए युग की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि भारत और न्यूज़ीलैंड 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेंगे और निवेश, प्रौद्योगिकी, सेवाओं तथा प्रतिभा आदान-प्रदान के नए अवसरों का लाभ उठाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और न्यूज़ीलैंड के संबंध एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। उन्होंने कहा कि रणनीतिक साझेदारी केवल एक कूटनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि साझा भविष्य का नया संकल्प है। उन्होंने प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के नेतृत्व में रिकॉर्ड नौ महीनों में एफटीए को अंतिम रूप दिए जाने की सराहना की।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि न्यूज़ीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि यह केवल निवेश नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा में सहभागी बनने का भरोसा है। उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बताते हुए कहा कि बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल परिवर्तन और मजबूत बुनियादी ढांचा भारत को वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बना रहे हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत 14 क्षेत्रों में लगभग 20 अरब डॉलर का समर्थन दिया जा रहा है। उन्होंने न्यूज़ीलैंड की कंपनियों को इस मैन्युफैक्चरिंग अभियान का हिस्सा बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने एविएशन, एयर कार्गो, पर्यटन, हॉर्टिकल्चर, डेयरी साइंस, फॉरेस्ट्री, एग्री-टेक, फिनटेक, ग्रीन फाइनेंस, स्मार्ट सिटी और स्पेस सेक्टर में भी साझेदारी बढ़ाने की अपील की।पीएम मोदी ने कहा कि भारत में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप काम कर रहे हैं और एक यूनिकॉर्न भी बन चुका है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की कंपनियां स्मॉल सैटेलाइट, रिमोट सेंसिंग और ओशन मॉनिटरिंग जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की 50% रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट भारत में होती हैं और दोनों देश डिजिटल भुगतान, ग्रीन बॉन्ड तथा ब्लेंडेड फाइनेंस में सहयोग बढ़ा सकते हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने माओरी बिजनेस लीडर्स का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और माओरी परंपराओं में प्रकृति, समुदाय और सतत विकास के प्रति समान सम्मान है। उन्होंने दोनों देशों के बीच पांच प्रमुख फ्लैगशिप परियोजनाओं की पहचान कर समयबद्ध बिजनेस रोडमैप तैयार करने का सुझाव दिया। साथ ही 35 वर्ष से कम आयु के युवा उद्यमियों के द्विपक्षीय प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान का प्रस्ताव भी रखा, ताकि नई पीढ़ी के बीच मजबूत कारोबारी संबंध विकसित किए जा सकें। - नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया का सफल दौरा पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्यूजीलैंड के लिए रवाना हो गए। यात्रा समाप्त होने पर पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज, उनकी सरकार और जनता की गर्मजोशी के लिए आभार व्यक्त किया।पीएम मोदी ने यह भी कहा कि इस यात्रा ने हमारी साझेदारी को और मजबूत किया है।“मेरी ऑस्ट्रेलिया यात्रा समाप्त हुई। मैं प्रधानमंत्री अल्बानीज, ऑस्ट्रेलिया की सरकार और लोगों को उनकी गर्मजोशी के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। इस यात्रा के परिणामों ने हमारी साझेदारी को और मजबूत किया है और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खोले हैं। आने वाले समय में इस गति से हमारे देश और पूरी दुनिया को लाभ होगा।”दौरे के दौरान पीएम मोदी और अल्बानीज ने मशहूर मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) का दौरा किया और वहां सेल्फी भी ली। पीएम मोदी ने MCG की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि खेल भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी का एक अहम हिस्सा है, जो दोनों देशों के लोगों को जुनून और आपसी सम्मान से करीब लाता है। उन्होंने युवा खिलाड़ियों के साथ मुलाकात की तस्वीरें भी पोस्ट कीं और कहा कि बच्चों को क्रिकेट, कबड्डी और ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल खेलते देखना बहुत खुशी का अनुभव था।खेल साझेदारी का नया रोडमैपविदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स कोलैबोरेशन रोडमैप लॉन्च किया।इस रोडमैप में शामिल प्रमुख बातें:– अधिक खेल आदान-प्रदान– युवाओं का जुड़ाव– खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट डेवलपमेंट में सहयोगप्रधानमंत्री मोदी ने उल्लेख किया कि 2030 में भारत कॉमनवेल्थ गेम्स और 2032 में ऑस्ट्रेलिया ओलंपिक की मेजबानी करने जा रहा है, जिससे अगले दशक में दोनों देशों के बीच खेल संबंध और मजबूत होंगे। यह यात्रा न केवल आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बल्कि लोगों के बीच सांस्कृतिक और खेल संबंधों को नई ऊंचाई देने वाली साबित हुई है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान शुक्रवार को वहां के विपक्ष के नेता एंगस टेलर से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) को और मजबूत बनाने तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
बैठक के दौरान भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए ऑस्ट्रेलिया में मौजूद मजबूत द्विदलीय (बाइपार्टिजन) समर्थन पर भी जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने रणनीतिक, आर्थिक और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार तथा दोनों देशों के लगातार मजबूत होते संबंधों पर विचार-विमर्श किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एंगस टेलर के बीच सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि यह बैठक भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने तथा भारत के साथ संबंधों को लेकर ऑस्ट्रेलिया में व्यापक राजनीतिक समर्थन को दर्शाती है।ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इसके अलावा उन्होंने गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन, विक्टोरिया की गवर्नर मार्गरेट गार्डनर, ऑस्ट्रेलिया-इंडिया सीईओ फोरम के प्रतिनिधियों, भारतीय समुदाय के सदस्यों और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन से भी मुलाकात की।प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) का भी दौरा करेंगे। इस दौरान दोनों नेता भारत-ऑस्ट्रेलिया खेल सहयोग रोडमैप का अनावरण करेंगे, जिसका उद्देश्य खेल क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देना है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि एमसीजी का दौरा खेल क्षेत्र में दोनों देशों के बढ़ते सहयोग का प्रतीक होगा। उन्होंने बताया कि भारत वर्ष 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा, जबकि ऑस्ट्रेलिया 2032 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। ऐसे में खेल दोनों देशों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभर रहा है। -
हिंद-प्रशांत पर नजर
मेलबर्न. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज ने शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने में द्विपक्षीय साझेदारी की अहम भूमिका को रेखांकित किया और उनकी इस मुलाकात के दौरान भारत एवं ऑस्ट्रेलिया ने असैन्य परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने संबंधी कई महत्वपूर्ण समझौतों को बृहस्पतिवार को अंतिम रूप दिया। मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई नेता के साथ व्यापक बातचीत की। मोदी तेजी से बदलते और विभाजित होते भू-राजनीतिक माहौल के बीच व्यापार एवं रक्षा संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीन देशों की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में इंडोनेशिया से ऑस्ट्रेलिया पहुंचे। मोदी एवं अल्बनीज की बैठक के बाद दोनों पक्षों ने सुरक्षा पर भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त घोषणा, ऊर्जा संबंधों पर संयुक्त बयान और साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग के लिए एक खाका जारी किया। असैन्य परमाणु ऊर्जा से जुड़े समझौते के जरिए ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की वाणिज्यिक आपूर्ति का रास्ता खुलेगा। इससे भारत की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को मदद मिलेगी। दोनों पक्षों ने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते के साथ-साथ द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौते पर भी तेजी से काम करने का निर्णय लिया। मोदी ने मीडिया में जारी अपने बयान में कहा, ''आज हमने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता खुलेगा और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में हमारे लक्ष्यों को नयी गति मिलेगी।'' उन्होंने कहा, ''महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में हमारा सहयोग हमारी रणनीतिक सुरक्षा एवं स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने संबंधी बदलाव के लिए अहम है। इसी को ध्यान में रखते हुए आज हमने साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ऑस्ट्रेलिया-भारत साझेदारी शुरू की है।'' मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष महत्वपूर्ण खनिज गलियारे पर भी मिलकर काम करेंगे।
प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग का भी उल्लेख किया और स्वतंत्र एवं स्थिर हिंद-प्रशांत के महत्व पर जोर दिया। रक्षा संबंधों को मजबूत करने की ये नयी पहल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन द्वारा अपनी सैन्य ताकत दिखाए जाने को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच की गई हैं। उन्होंने कहा, ''हिंद-प्रशांत क्षेत्र केवल दो महासागरों का संगम नहीं है। यह भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे समान सोच वाले लोकतंत्रों की साझा आकांक्षाओं का भी प्रतीक है।'' मोदी ने कहा, ''आज हमने सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण संयुक्त घोषणा जारी की है। भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा नवोन्मेष गलियारे के माध्यम से हम रक्षा स्टार्टअप और उद्योगों को जोड़ने के लिए काम करेंगे।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा सहयोग खाका, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा प्रयासों को नयी गति देगा। उन्होंने कहा, ''हम पोत निर्माण, पोतों की मरम्मत और रखरखाव के क्षेत्र में भी साथ-साथ आगे बढ़ेंगे।''
मोदी ने यह भी कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि आतंकवाद किसी एक देश के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा, ''इसलिए आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई साझा है, हमारा संकल्प अडिग है और हमारा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।'' मोदी ने कहा, ''हम यह भी मानते हैं कि दुनिया के कई हिस्सों में जारी तनाव और संघर्षों का समाधान केवल संवाद और कूटनीति से ही हो सकता है। हम मिलकर पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, नौवहन की स्वतंत्रता तथा नियम-आधारित व्यवस्था को और मजबूत करेंगे।'' अल्बनीज ने अपने संबोधन में कहा कि ऑस्ट्रेलिया के भारत के साथ संबंध आज जितने अहम हैं, उतने पहले कभी नहीं रहे। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा पर हुआ समझौता शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम के निर्यात को आसान बनाएगा। उन्होंने कहा, ''यह व्यवस्था ऑस्ट्रेलिया से भारत में यूरेनियम का निर्यात सुगम बनाएगी जिससे गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी और ऑस्ट्रेलिया के संसाधन क्षेत्र को एक अतिरिक्त बाजार मिलेगा।'' अल्बनीज ने कहा कि दोनों पक्ष संबंधों में विविधता लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि ये संबंध लगातार और मजबूत होते रहें। उन्होंने कहा, ''हमारी रणनीतिक साझेदारी के छह वर्ष पूरे होने पर ऑस्ट्रेलिया के भारत के साथ संबंध आज जितने महत्वपूर्ण हैं, उतने पहले कभी नहीं रहे। हमारी साझेदारी पहले कभी इतनी मजबूत नहीं रही।'' उन्होंने कहा, ''हमारा ध्यान अपने देशों के संबंधों को और गहरा तथा विविधतापूर्ण बनाने पर है ताकि हम लगातार और मजबूत होते रहें।'' अल्बनीज ने कहा, ''आज हमने अपने संबंधों के पूरे दायरे में इसी दिशा में कदम बढ़ाया है। नए ऐतिहासिक समझौतों के माध्यम से हम सुरक्षा, शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में अपने संबंधों का विस्तार कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा ''व्यावहारिक साझेदारी'' को और गहरा करने का रास्ता तैयार करेगी। अल्बनीज ने कहा, ''ऑस्ट्रेलिया भारत को शीर्ष स्तरीय सुरक्षा साझेदार मानता है और यह घोषणा शांतिपूर्ण, स्थिर एवं समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।'' उन्होंने कहा, ''हम रणनीतिक समन्वय को बढ़ाएंगे, अपने रक्षा अभ्यासों को और जटिल बनाएंगे तथा अपनी रक्षा सेनाओं के बीच आपसी संचालन क्षमता को और मजबूत करेंगे। -
नई दिल्ली। ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट सिटी के तटीय इलाकों में गुरुवार दोपहर कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरान की समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक, ये आवाजें स्थानीय समय के अनुसार करीब दोपहर 2 बजे (भारतीय समयानुसार शाम 4 बजे) शहर के दक्षिणी तट के आसपास सुनी गईं। माना जा रहा है कि ये धमाके खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट के कुछ हिस्सों में हुई गोलीबारी या सैन्य कार्रवाई के कारण हुए।
इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि गुरुवार सुबह अमेरिका के हमले में खुजेस्तान प्रांत के उसके तीन सैनिक मारे गए।वहीं, बहरीन और कुवैत ने बताया कि उनके हवाई रक्षा तंत्र ने ईरान की ओर से किए गए हवाई हमलों को रोक दिया और उन्हें नष्ट कर दिया। बहरीन डिफेंस फोर्स (बीडीएफ) ने एक बयान में कहा कि ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन हमलों के जरिए आम नागरिकों को निशाना बनाना जारी रखा है। उसने इसे देश के खिलाफ एक ‘लगातार शत्रुतापूर्ण रवैया’ बताया।बीडीएफ ने कहा कि उसकी सभी सैन्य इकाइयां देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे हमलों के बाद मिले किसी भी अनजान या संदिग्ध सामान के पास न जाएं और उसे हाथ न लगाएं।बहरीन ने कहा कि आम लोगों और निजी संपत्ति को निशाना बनाने के लिए मिसाइल और ड्रोन का जानबूझकर इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है।उधर, कुवैत की सशस्त्र सेनाओं के जनरल स्टाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि सेना ने तड़के तीन बैलिस्टिक मिसाइल, एक क्रूज मिसाइल और दस ड्रोन को रोक दिया। हालांकि, इनके मलबे से कई जगहों पर नुकसान हुआ और एक व्यक्ति घायल हुआ, जिसकी हालत स्थिर बताई गई है।गुरुवार सुबह पूरे कुवैत में हवाई हमले के सायरन बजाए गए। हमलों के दौरान गिरे मलबे को हटाने के लिए विस्फोटक निष्क्रिय करने वाली टीमें तैनात की गईं। इसके अलावा, कुवैत के विदेश मंत्रालय ने ईरानी हमलों की निंदा करते हुए उन्हें कुवैत की संप्रभुता का ‘खुला उल्लंघन’, उसकी सुरक्षा और स्थिरता के लिए ‘सीधा खतरा’ और अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का गंभीर उल्लंघन बताया।इससे पहले अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने कहा था कि उसकी सेनाओं ने ईरान की होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों पर हमला करने की क्षमता को कम करने के लिए एक और दौर के हमले पूरे किए हैं। यह लगातार दूसरे दिन की गई ऐसी कार्रवाई थी।अमेरिकी सेना ने बताया कि उसने ईरान के तट के पास करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें हवाई रक्षा प्रणाली, तटीय निगरानी उपकरण, मिसाइल और ड्रोन रखने के स्थान, नौसैनिक क्षमताएं और सैन्य सामान पहुंचाने से जुड़ी सुविधाएं शामिल थीं। ईरान के आईआरजीसी और सेना ने दावा किया कि उन्होंने बहरीन, कुवैत और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सुविधाओं पर हमला किया। दरअसल, ये नए संघर्ष ऐसे समय में हुए हैं, जब ईरान और अमेरिका हाल ही में हुए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के आधार पर 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए बातचीत कर रहे थे। -
जकार्ता. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत ''सुधार, प्रदर्शन और बदलाव'' के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसकी आत्मनिर्भरता न केवल इंडोनेशिया के लिए, बल्कि पूरे आसियान क्षेत्र के प्रभाव को कई गुना बढ़ाने वाली ताकत है। जकार्ता में प्रवासी भारतीयों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को भारत का ''सच्चा मित्र'' बताया। कार्यक्रम में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और उनके शीर्ष मंत्री भी मौजूद थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''भारत ने एक के बाद एक कई सुधार किए हैं। हमने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है और इसी वजह से आज देश बदलाव के दौर से गुजर रहा है। हम सुधार, प्रदर्शन और बदलाव के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहे हैं।'' मोदी ने कहा कि अगर भारत के विकास की गति और पैमाने को एक पंक्ति में व्यक्त करना हो तो वह कहेंगे, ''1.4 अरब आकांक्षाएं गति में हैं।'' उन्होंने कहा, ''भारत केवल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा राष्ट्र है जहां एक अरब से अधिक सपने आगे बढ़ रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''ऊर्जा से लेकर कनेक्टिविटी और चिप निर्माण तक, भारत को रोका नहीं जा सकता। आज का भारत केवल अपने सपनों को पूरा नहीं कर रहा, बल्कि हर मित्र देश के सपनों को पूरा करने में भी योगदान दे रहा है। भारत 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र पर चलता है।'' उन्होंने कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता केवल इंडोनेशिया ही नहीं, बल्कि पूरे आसियान क्षेत्र के लिए विकास को बढ़ावा देने वाली ताकत है। मोदी ने कहा कि भारत अपने बंदरगाहों का आधुनिकीकरण कर रहा है, नये जहाजों का निर्माण कर रहा है और समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नये समुद्री मार्गों की तलाश कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में इंडोनेशिया भारत का एक पसंदीदा मित्र है। उन्होंने कहा, ''चाहे इंडोनेशिया हो या भारत, हमारा साझा लक्ष्य विकास है। हम न तो इंतजार कर सकते हैं और न ही रुक सकते हैं।'' मोदी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आज वैश्विक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा, ''जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी, तब भी भारत की अर्थव्यवस्था नहीं रुकी। जब पश्चिम एशिया में संकट पैदा हुआ, तब भी भारत की अर्थव्यवस्था थमी नहीं। हमने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और यही कारण है कि भारत तेजी से परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है।'' इस अवसर पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने कहा कि 2025 के भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनना उनके लिए सम्मान की बात थी। उन्होंने बताया कि यह अवसर उन्हें राष्ट्रपति पद संभालने के मात्र तीन महीने बाद मिला था। सुबियांतो ने कहा, ''भारत की अपनी राजकीय यात्रा से ठीक पहले मैंने जीनोम अनुक्रमण परीक्षण कराया था। जब मेरे डीएनए की जांच हुई तो पता चला कि उसमें भारतीय डीएनए भी है। शायद यही वजह है कि जब भी मैं कोई संगीत सुनता हूं, खासकर भारतीय संगीत, तो मेरे पैर अपने आप थिरकने लगते हैं।'' उन्होंने कहा कि वह सभी भारतीयों के दोस्त हैं, लेकिन वह प्रधानमंत्री मोदी के ''बहुत बड़े प्रशंसक'' हैं और उन्होंने उनकी कई नीतियों को अपनाया है। उन्होंने कहा, ''इंडोनेशिया के लोगों को भारत के अनुभवों से सीखना चाहिए। हमारी सभ्यता और संस्कृति पर भारतीय सभ्यता का गहरा प्रभाव है। हमारी भाषा का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा संस्कृत से आया है। हमारे कई नाम भी संस्कृत मूल के हैं। इसलिए हमारे बीच एक विशेष निकटता है और हम दोनों देशों के बीच और अधिक घनिष्ठ सहयोग का स्वागत करते हैं।'' इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के अंदर भारतीय डीएनए होने संबंधी उनकी टिप्पणी का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, ''आपके इस बयान ने भारतीयों के दिलों को छू लिया। यह डीएनए आपसी विश्वास, साझा विरासत और साझा स्मृतियों से बना है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध साझा सभ्यतागत विरासत और दोनों देशों को जोड़ने वाले समुद्रों पर आधारित हैं। तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में सोमवार को जकार्ता पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बुधवार को वह योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रम्बानन मंदिर जाएंगे। सदियों पुराने इस मंदिर को इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर माना जाता है। यह योग्याकार्ता शहर से करीब 17 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महानदी में केले के तने से बनी छोटी-छोटी नावों को प्रवाहित करने की परंपरा हो, 'वायंग कुलित' के माध्यम से महाभारत का मंचन हो या देवी श्री की पूजा, हर परंपरा भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों की जीवंत झलक प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में बॉलीवुड की प्रसिद्ध फिल्म 'कुछ कुछ होता है' का गीत बेहद लोकप्रिय है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''मैंने राष्ट्रपति प्रबोवो से कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो बहुत कुछ होता है...।'' उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया द्वारा उन्हें सर्वोच्च सम्मान से नवाजा जाना दोनों देशों के बीच गहरी मित्रता का एक और प्रतीक है। मोदी ने प्रवासी भारतीय समुदाय से अपील की कि वे अपने इंडोनेशियाई मित्रों को भारत के बारे में बताएं और उन्हें भारत यात्रा के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा, "अब सीधी उड़ानें उपलब्ध होने से भारत की यात्रा काफी आसान हो गई है। इंडोनेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय को वहां की युवा पीढ़ी को भी भारत के बारे में अधिक जानने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।" मोदी ने यह भी कहा कि इंडोनेशिया में फुटबॉल के प्रति लोगों का जबरदस्त जुनून है। उन्होंने कहा, ''जब-जब मैं इंडोनेशिया आया हूं, तब-तब यहां फीफा विश्व कप का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है।'' बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''मुझे खुशी है कि भारत और इंडोनेशिया आपसी विश्वास के आधार पर मिलकर एक नए भविष्य की रचना कर रहे हैं। इस साझेदारी का सबसे अधिक लाभ इंडोनेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय को मिलेगा।'' उन्होंने सामुदायिक कार्यक्रम में संबोधन के लिए राष्ट्रपति सुबियांतो का भी आभार जताते हुए कहा, ''उनका संबोधन भारत के प्रति अभूतपूर्व आत्मीयता और सराहना से परिपूर्ण था।'' इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल के पारंपरिक धुनुची नृत्य का भी आनंद लिया। -
जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को इंडोनेशिया की तीन दिन की यात्रा पूरी करके ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना हो गए। इस यात्रा के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों, समुद्री सुरक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 14 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। मोदी ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''इंडोनेशिया की अपनी यात्रा पूरी करते हुए, मैं हमारी साझेदारी के भविष्य को लेकर आए परिणामों से बहुत संतुष्ट हूं।
पोस्ट में कहा गया, ''मैं इंडोनेशिया के लोगों और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने बहुत गर्मजोशी दिखाई और भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रतिबद्धता दिखाई।" इसमें कहा गया, ''इस यात्रा ने रक्षा और सुरक्षा, समुद्री सहयोग, अहम और उभरती हुई तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल नवाचार और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खोले हैं।'' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 'एक्स' पर लिखा, ''तेरिमा कसिह (धन्यवाद) इंडोनेशिया! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडोनेशिया की अपनी राजकीय यात्रा पूरी की और तीन देशों की यात्रा के दूसरे चरण के लिए मेलबर्न रवाना हुए।'' पोस्ट में लिखा है, ''दोस्ती की एक विशेष भाव-भंगिमा दिखाते हुए राष्ट्रपति प्रबोवो ने हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री को विदा किया। इंडोनेशिया की इस यात्रा से सहयोग के अहम क्षेत्रों में महत्वपूर्ण नतीजे निकले, जिससे भारत-इंडोनेशिया की साझेदारी और भी मज़बूत हुई और भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी एजेंडा तय हुआ।'' इस यात्रा के दौरान, मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। राष्ट्रपति स्वयं उन्हें हवाई अड्डे पर विदा करने के लिए आए थे। दोनों नेताओं ने एक स्वतंत्र और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए गहरी द्विपक्षीय साझेदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। दोनों पक्षों ने कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए 14 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें महत्वपूर्ण खनिज और इस्पात की आपूर्ति शृंखलाएं, समुद्री सुरक्षा, दवाएं, शिक्षा, अंतरिक्ष, अनुसंधान और नवाचार, दूरसंचार तथा खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच संबंध और मजबूत होंगे। एक और अहम कदम के तौर पर, भारत और इंडोनेशिया रणनीतिक रूप से अहम सबांग पत्तन को संयुक्त रूप से विकसित करने पर सहमत हुए। यह पोर्ट मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित है और भारत की ग्रेट निकोबार बंदरगाह परियोजना से लगभग 100 मील दूर है। मोदी सोमवार को जकार्ता पहुंचे थे जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। यह उनके तीन देशों के दौरे का पहला चरण था। इसमें ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी शामिल हैं। मंगलवार को एक सामुदायिक समारोह में मोदी ने कहा कि भारत 'सुधार, प्रदर्शन और बदलाव' (रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म) के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की आत्मनिर्भरता न केवल इंडोनेशिया के लिए, बल्कि पूरे आसियान क्षेत्र के लिए एक बड़ी ताकत साबित होगी। जकार्ता में भारतीय समुदाय के एक कार्यक्रम में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो ने कहा कि उनमें भारतीय डीएनए है। उन्होंने अपने देश के लोगों से भारत के अनुभव से सीखने का आह्वान किया, क्योंकि भारत ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देश की सभ्यता और संस्कृति को काफी प्रभावित किया है। राष्ट्रपति प्रबोवो ने कहा कि पद संभालने के ठीक तीन महीने बाद 2025 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनना उनके लिए सम्मान की बात थी। बुधवार को रवाना होने से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता में विशाल प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा किया। इस दौरान यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के लिए एक संयुक्त संरक्षण परियोजना की शुरुआत की गई। मोदी ने प्रम्बानन मंदिर परिसर की विरासत को संरक्षित रखने के लिए इंडोनेशिया और वहां के लोगों का धन्यवाद किया। दोनों नेताओं ने इस ऐतिहासिक जगह का दौरा तब किया, जब भारत और इंडोनेशिया ने भारत की मदद से मंदिर परिसर के संरक्षण और जीर्णोद्धार की परियोजना शुरू करने के लिए 'आशय पत्र' का आदान-प्रदान किया था। इंडोनेशिया के बाद, मोदी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर 8 से 10 जुलाई तक मेलबर्न की यात्रा करेंगे। उन्होंने प्रस्थान के समय अपने बयान में कहा, ''मेरी यात्रा हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी, और प्रधानमंत्री अल्बनीज के साथ बातचीत में मैं रक्षा और सुरक्षा, व्यापार और निवेश, शिक्षा और आवाजाही तथा लोगों के बीच आपसी संबंधों के क्षेत्रों में हमारे रिश्तों को आगे बढ़ाऊंगा।'' मोदी ने कहा कि मेलबर्न में वह भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत करेंगे, जो इस रणनीतिक साझेदारी का एक अहम स्तंभ हैं। -
अंकारा. अमेरिका नीत सैन्य गठबंधन उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने मंगलवार को अरबों अमेरिकी डॉलर की हथियार खरीद योजना की घोषणा की। नाटो ने यह घोषणा ऐसे समय की जब मंगलवार दोपहर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संगठन के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए तुर्किये के अंकारा शहर पहुंचे। माना जा रहा है कि नाटो ने यह घोषणा अस्थिर स्वभाव वाले ट्रंप को खुश करने की कोशिश के तहत की है। अंकारा में अमेरिकी राष्ट्रपति के विमान 'एयर फोर्स वन' के उतरने से ठीक पहले नाटो ने अरबों डॉलर के कई सैन्य परियोजनाओं की घोषणा की। एक संगठन के तौर पर नाटो के पास अपना कोई हथियार नहीं है। ये हथियार इसके 32 सदस्य देशों की संपत्ति हैं। हालांकि नाटो के पास 14 अवाक्स पूर्व चेतावनी रडार निगरानी विमानों का बेड़ा है जो लगभग 50 साल पुराने हैं, और साथ ही कुछ नए निगरानी ड्रोन भी हैं। पुराने हो चुके विमानों को बदलने के लिए मंगलवार को एक समझौते की घोषणा की गई। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने घोषणा की कि स्वीडिश कंपनी साब 10 देशों के समूह को 10 नए ग्लोबलआई निगरानी विमान की आपूर्ति करेगी। कुछ परियोजनाओं का वित्तपोषण यूरोपीय संघ द्वारा स्थापित किफायती ऋण प्रणाली से किया जाएगा। इस प्रणाली के तहत पूंजी बाजार से 170 अरब अमेरिकी डॉलर तक की रकम जुटाई जाएगी। संगठन के महासचिव मार्क रुटे ने कहा, ''हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम अपनी आर्थिक ताकत को सैन्य क्षमताओं में बदलें और धन का इस्तेमाल रक्षा परियोजनाओं से लेकर ड्रोन, मिसाइल और इंटरसेप्टर आदि के लिए करें।''
- वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की अपने देशों के बीच जारी युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस ने कीव पर ताजा हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, ''राष्ट्रपति पुतिन इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं। मैं यह बात पूरे दृढ़ता से कह सकता हूं। हमारी अच्छी बातचीत हुई। राष्ट्रपति जेलेंस्की भी अब वास्तव में युद्ध समाप्त करना चाहते हैं। हम नाटो सम्मेलन में जा रहे हैं और वहां भी इस मुद्दे पर चर्चा होगी।'' ट्रंप न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और नैस्डैक में बच्चों के लिए 'ट्रंप अकाउंट्स' योजना की शुरुआत के अवसर पर ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सप्ताहांत में उन्होंने पुतिन और ज़ेलेंस्की से फोन पर अलग-अलग बातचीत कर यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के प्रयासों पर चर्चा की।रूस-यूक्रेन युद्ध का उल्लेख करते हुए ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान सहित आठ युद्धों को रुकवाया। उन्होंने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष से परमाणु युद्ध का खतरा भी था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ''मैंने आठ युद्ध खत्म कराए। मुझे लगा था कि यूक्रेन से जुड़ा मामला आसान होगा, क्योंकि मैं दोनों नेताओं को जानता हूं। मैंने भारत-पाकिस्तान के बीच भी तनाव कम कराया।'' उन्होंने कहा, ''वह स्थिति परमाणु युद्ध तक पहुंच सकती थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के अनुसार, इसमें चार से पांच करोड़ लोगों की जान जा सकती थी। 11 विमान गिराए जा चुके थे और चार दिनों तक संघर्ष जारी था, लेकिन मैंने उसे रुकवा दिया।'' ट्रंप का यह बयान पिछले वर्ष भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के संदर्भ में था।हालांकि, भारत किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावों को लगातार खारिज करता रहा है। नयी दिल्ली का कहना है कि मई 2025 में पाकिस्तान के साथ संघर्ष समाप्त करने पर सहमति दोनों देशों के सैन्य अभियान महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच हुई प्रत्यक्ष बातचीत के बाद बनी थी।
- कोलंबो. श्रीलंका के बदुल्ला जिले में भारत की सहायता से बनाए जाने वाले 10,000 आवासों की परियोजना के तहत सोमवार को आधारशिला रखी गई। भारतीय उच्चायोग ने यह जानकारी दी। भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, ''अठारह अरब रुपये से अधिक की अनुदान सहायता से भारतीय आवास परियोजना के चौथे चरण के तहत बदुल्ला के ''कैनावरेला प्लांटेशन एस्टेट'' में 57 नए आवासों की आधारशिला रखी गई है।''उच्चायोग ने बताया कि इस परियोजना के तहत श्रीलंका के छह प्रांतों में बागान क्षेत्रों के समुदायों के लिए 10,000 से अधिक आवास बनाए जाएंगे। विज्ञप्ति के अनुसार, भारतीय आवास परियोजना भारत सरकार की प्रमुख विकास परियोजनाओं में से एक है, जिसके तहत लगभग 60,000 आवासों का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना के पहले दो चरणों में उत्तरी और पूर्वी प्रांतों में 46,000 आवासों का निर्माण या जीर्णोद्धार किया गया, जबकि तीसरे चरण में बागान क्षेत्रों में 4,000 आवास बनाए गए। विज्ञप्ति में कहा गया कि श्रीलंका के तमिल समुदाय और बागान क्षेत्र भारत-श्रीलंका विकास सहयोग साझेदारी के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं।
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जकार्ता. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तीन देशों की अपनी यात्रा के पहले चरण में सोमवार को इंडोनेशिया पहुँचे। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी', 'महासागर विजन' तथा एक स्वतंत्र, खुले एवं समावेशी हिंद-प्रशांत के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत करना है। विशेष सद्भावना के तहत हवाई अड्डे पर मोदी का स्वागत इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने किया। इसके अलावा, प्रधानमंत्री की अगवानी करने के लिए चार मंत्री भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी का इस दौरान पारंपरिक ढंग से स्वागत किया गया और उन्होंने सलामी गारद का निरीक्षण किया। मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''जकार्ता पहुँच गया हूँ। हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा मेरा स्वागत किए जाने की सद्भावना से मैं बहुत प्रभावित हूँ।'' वर्ष 2018 में संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक ले जाए जाने के बाद से इंडोनेशिया की यह मोदी की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। मोदी ने कहा, ''2018 में इंडोनेशिया की मेरी पहली यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया, जिससे हमारे लोगों को लाभ हुआ है।'' उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ बातचीत करेंगे, जिसका उद्देश्य ''अलग-अलग क्षेत्रों में इस साझेदारी को और गति देना'' है। मोदी ने कहा, ''राष्ट्रपति प्रबोवो और मैं योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा करेंगे। इससे हमारे देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे। इंडोनेशिया में रहने के दौरान, मैं भारतीय समुदाय के लोगों से मिलने के लिए भी उत्सुक हूँ।'' योग्याकार्ता शहर से लगभग 17 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित यह सदियों पुराना मंदिर इंडोनेशिया का सबसे विशाल हिंदू मंदिर माना जाता है। दिल्ली से रवाना होने से पहले, मोदी ने कहा कि इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की उनकी यात्रा भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी', 'महासागर विजन' और साथ ही ''मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत के प्रति हमारे नजरिए'' को और मजबूत करेगी। महासागर, यानी 'सभी क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए पारस्परिक एवं समग्र विकास', सभी क्षेत्रों की सुरक्षा और विकास के लिए भारत का विजन है। मोदी की यह यात्रा जनवरी 2025 में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रपति प्रबोवो की भारत की राजकीय यात्रा के बाद हो रही है। उन्होंने कहा, ''भारत और इंडोनेशिया के बीच सभ्यतागत एवं लोगों के आपसी संबंध बहुत मजबूत हैं, तथा मेरी यह यात्रा हमारी बहुआयामी साझेदारी के सभी पहलुओं को और मजबूत करेगी।'' इंडोनेशिया से मोदी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर मेलबर्न जाएंगे। यात्रा के आखिरी चरण में वह न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के न्योते पर ऑकलैंड पहुंचेंगे।
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न्यूयॉर्क. अमेरिका में 300 से अधिक कलाकारों ने भारत की विविध शास्त्रीय और लोक नृत्य कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के समक्ष समृद्ध भारतीय संस्कृति और परंपराओं की एक झलक पेश की। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने भरतनाट्यम कलाकार एवं शिक्षिका विजी राव द्वारा स्थापित फिलाडेल्फिया की गैर-लाभकारी नृत्य संस्था 'थ्री अक्ष' के साथ मिलकर रविवार को मैनहट्टन के प्रतिष्ठित कार्नेगी हॉल में 'अखिल भारतीय नृत्य उत्सव-2026' का आयोजन किया। अमेरिका ने चार जुलाई को अपना 250वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। इसके एक दिन बाद भारतीय वाणिज्य दूतावास की ओर से आयोजित इस नृत्य महोत्सव में दोनों देशों की सांस्कृतिक साझेदारी की झलक देखने को मिली। अमेरिका में जन्मे और पले-बढ़े भारतीय मूल के बच्चों ने कथक, कुचिपुड़ी और भरतनाट्यम जैसे शास्त्रीय नृत्यों के साथ-साथ भांगड़ा की भी आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। करीब दो घंटे तक चले इस महोत्सव में न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, फिलाडेल्फिया और डेलावेयर के 10 विभिन्न नृत्य संस्थानों के लगभग 387 कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की प्रस्तुति दी। न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत विनय प्रधान ने कलाकारों की ''बेहतरीन प्रस्तुति'' की सराहना करते हुए कहा, ''आप सभी कलाकार आज एक मंच पर आए और भारत की 5,000 वर्षों पुरानी संस्कृति, उसकी विविधता और उसकी जीवंत परंपरा को हमारे सामने प्रस्तुत किया।'' विजी राव ने भी इस बात पर जोर दिया कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय की नयी पीढ़ी तक भारतीय संस्कृति और विरासत की परंपराओं को नृत्य तथा अन्य कला के माध्यम से निरंतर पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है। महोत्सव की शुरुआत वीणा पंडिरी के कलात्मक निर्देशन में संचालित 'नोट्स एन बीट्स स्कूल' के विद्यार्थियों द्वारा 'वंदे मातरम्' की भावपूर्ण प्रस्तुति से हुई। इस प्रस्तुति का नेतृत्व गायक और संगीतकार भार्गव एचसी ने किया। गायत्री सुधाकर के निर्देशन में 'नृत्य समर्पणम स्कूल ऑफ डांस' ने 'सर्वम् शिवमयम्' प्रस्तुत किया। इसमें भगवान शिव के तांडव से प्रेरित भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और मोहिनीअट्टम की अनूठी शास्त्रीय जुगलबंदी देखने को मिली। इसी तरह अन्य कलाकारों ने विभिन्न प्रस्तुतियां दी। करीब तीन हजार दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।























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