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- -प्रधानमंत्री आवास योजना से राजकुमारी यादव को मिली सुरक्षित छत, अब परिवार के साथ सुकून से बीत रही जिंदगी-मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जरूरतमंद परिवारों को मिल रहा सम्मानजनक जीवन का आधाररायपुर । योजना जरूरतमंद परिवारों के इसी सपने को हकीकत में बदल रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को पक्के आवास का लाभ मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में स्थायित्व और खुशियां आ रही हैं।जशपुर जिले के तपकरा निवासी राजकुमारी यादव के लिए भी अपने परिवार के साथ एक सुरक्षित और सुविधाजनक पक्के मकान में रहने का सपना लंबे समय से था। पहले उनका घर छोटा था और सीमित जगह में परिवार के सभी सदस्यों के साथ रहना चुनौतीपूर्ण होता था। बारिश और खराब मौसम के दौरान घर की स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ जाती थी। परिवार के लिए एक बेहतर और सुरक्षित आशियाने की उम्मीद उनके मन में हमेशा बनी रही।प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जब राजकुमारी यादव को आवास का लाभ मिला, तो उनके जीवन में बदलाव की नई शुरुआत हुई। योजना से मिली सहायता से पक्के मकान का निर्माण पूरा हुआ और परिवार को अपना सुरक्षित आशियाना मिल गया। अब वे अपने परिवार के साथ नए घर में सुकून और खुशी से जीवन बिता रही हैं।राजकुमारी यादव बताती हैं कि पहले छोटे घर में परिवार के साथ रहना काफी मुश्किल था। जगह की कमी के कारण रोजमर्रा के जीवन में कई परेशानियां आती थीं। अब अपना पक्का मकान मिलने से परिवार की यह चिंता दूर हो गई है। नए घर ने उन्हें न केवल सुरक्षित रहने की सुविधा दी है, बल्कि बेहतर और सम्मानजनक जीवन जीने का भरोसा भी दिया है।प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि अपने घर का सपना पूरा होना उनके परिवार के लिए बहुत बड़ी खुशी है। अब उनका परिवार मौसम की चिंता से मुक्त होकर अपने नए घर में सुरक्षित और सुकून से रह रहा है।प्रधानमंत्री आवास योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए केवल एक आवास योजना नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ जीवन की नई शुरुआत का माध्यम बन रही है। राजकुमारी यादव की कहानी इसी बदलाव की तस्वीर है—सीमित जगह और असुविधाओं से निकलकर अपने सपनों के पक्के आशियाने तक पहुंचने की कहानी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का प्रयास है कि पात्र परिवारों को आवास का लाभ देकर उनके जीवन को अधिक सुरक्षित और बेहतर बनाया जाए। जशपुर की राजकुमारी यादव जैसी हितग्राहियों के जीवन में आया बदलाव इस बात का प्रमाण है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जब जरूरतमंदों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल घर नहीं बनातीं, बल्कि परिवारों के सपनों और भविष्य की मजबूत नींव भी तैयार करती हैं।
- -केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों ने मिट्टी से तैयार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं-प्रतिमाओं में तुलसी एवं विभिन्न पौधों के बीज, विसर्जन के बाद अंकुरित होकर बनेंगे पौधेरायपुर / गणेशोत्सव के पावन अवसर पर केंद्रीय जेल रायपुर के बंदियों ने आस्था, रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम प्रस्तुत किया है। आगामी गणेशोत्सव के लिए केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा प्राकृतिक मिट्टी से लगभग 1 से 2 फीट आकार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। इन प्रतिमाओं की खासियत यह है कि इनके निर्माण में प्राकृतिक मिट्टी एवं रंगों का उपयोग किया गया है तथा प्रतिमाओं में तुलसी सहित विभिन्न पौधों के बीज भी डाले गए हैं।गणेशोत्सव के पश्चात इन प्रतिमाओं का विसर्जन किए जाने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप लेंगे। इस प्रकार ये प्रतिमाएं धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरित संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेंगी। केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में लगभग 10 बंदियों ने अत्यंत लगन, मेहनत और रचनात्मकता के साथ भगवान श्री गणेश की इन आकर्षक प्रतिमाओं का निर्माण किया है। यह पहल बंदियों के कौशल विकास, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें समाजोपयोगी एवं पर्यावरण हितैषी गतिविधियों से जोड़ने का सार्थक प्रयास है। मिट्टी की प्रतिमाओं में बीजों का समावेश इस कार्य को और विशेष बनाता है।जेल अधीक्षक रायपुर श्री योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि केंद्रीय जेल रायपुर द्वारा बंदियों के पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में बंदियों द्वारा तैयार की गई ये बीजयुक्त पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं इस संदेश को साकार करती हैं कि आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों से बंदियों को अपनी प्रतिभा और कौशल को सकारात्मक दिशा में उपयोग करने का अवसर मिलता है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- -राज्यपाल श्री रमेन डेका से छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने की भेंटरायपुर /राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने भेंट कर छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा इसके संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के संबंध में चर्चा की।भाषाविदों ने राज्यपाल को छत्तीसगढ़ी भाषा की प्राचीनता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा, व्याकरण, शब्दकोश एवं मानकीकरण की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा एवं प्रमुख संपर्क भाषा है और लगभग डेढ़ करोड़ लोग इसका प्रयोग करते हैं। राज्यपाल श्री डेका ने स्वयं पहल करते हुए इस विषय पर सार्थक चर्चा की। छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए कहा कि इसके लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश एवं अन्य संदर्भ सामग्री का व्यवस्थित संकलन किया जाएगा। इसके लिए विषय के विद्वानों एवं विशेषज्ञों से आवश्यक जानकारी और सुझाव भी लिए जाएंगे। राज्यपाल ने इस संदर्भ में असमिया और बोडो भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उदाहरण भी दिया। भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी में 15 वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। कविता, खंडकाव्य, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना एवं पत्रकारिता सहित विभिन्न विधाओं में प्रचुर सामग्री उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ी का व्याकरण वर्ष 1890 में तथा पहला शब्दकोश वर्ष 1939 में तैयार हुआ। वर्ष 1924 में पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘हीरू के कहिनी’ प्रकाशित हुआ। पंडित सुंदरलाल शर्मा द्वारा जेल से हस्तलिखित छत्तीसगढ़ी पत्रिका ‘दुलरवा’ का प्रकाशन भी किया गया था। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर छत्तीसगढ़ी का अध्ययन कराया जा रहा है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।इस अवसर पर भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर, डॉ. सुधीर शर्मा, छत्तीसगढ़ी साहित्यकार श्री शीलकांत पाठक एवं श्रीमती अर्चना पाठक उपस्थित थीं।
- -प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता से जरूरत के समय मिल रहा संबल, प्रधानमंत्री आवास और महतारी वंदन योजना का भी मिला लाभरायपुर / शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम छोर पर खड़े परिवारों के जीवन में आर्थिक सुरक्षा और स्थायित्व का आधार बन रही हैं। योजनाओं का प्रभाव तब और अधिक सार्थक दिखाई देता है, जब एक परिवार को आजीविका के साथ आवास और सामाजिक सुरक्षा का लाभ एक साथ मिलता है। सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत पतरापारा निवासी शंभू बारी का परिवार इसका उदाहरण है।भूमिहीन कृषि मजदूर शंभू बारी को दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है। सीमित आय और अनिश्चित रोजगार के बीच मिलने वाली यह सहायता परिवार के लिए जरूरत के समय महत्वपूर्ण सहारा बनी है। शंभू बारी बताते हैं कि इस राशि का उपयोग वे घरेलू जरूरतों, बीमारी के समय उपचार और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करने में करते हैं।शंभू बारी का परिवार लंबे समय तक स्वयं के पक्के मकान के अभाव में कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करता रहा। शासन की पहल से उन्हें भूमि उपलब्ध कराई गई और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पक्का आवास भी मिला। अब उनका परिवार अपने सुरक्षित और पक्के घर में रह रहा है। उनके लिए यह केवल एक मकान नहीं, बल्कि वर्षों से देखे जा रहे सुरक्षित आशियाने के सपने का साकार रूप है।परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महतारी वंदन योजना भी सहायक बन रही है। शंभू बारी की पत्नी को योजना के अंतर्गत प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह राशि घरेलू जरूरतों और छोटे-छोटे खर्चों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है।शंभू बारी कहते हैं कि अलग-अलग योजनाओं से मिले लाभ ने उनके परिवार की परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव लाया है। भूमिहीन कृषि मजदूर के रूप में मिलने वाली वार्षिक आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला पक्का घर और पत्नी को मिल रही महतारी वंदन योजना की राशि ने परिवार को आर्थिक सहारा देने के साथ भविष्य के प्रति भरोसा भी बढ़ाया है।शंभू बारी ने कहा, “दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना से हमें साल में 10 हजार रुपये मिलते हैं। यह राशि हमारे जरूरी कामों में बहुत मदद करती है। प्रधानमंत्री आवास योजना से हमें पक्का घर मिला है और मेरी पत्नी को महतारी वंदन योजना से हर महीने एक हजार रुपये मिल रहे हैं। इन योजनाओं से हमारे परिवार को बहुत सहारा मिला है।”शंभू बारी ने इन जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं ने उनके जैसे जरूरतमंद परिवारों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि पक्के आवास और सम्मानजनक जीवन की मजबूत नींव भी प्रदान की है। शंभू बारी के परिवार की कहानी यह दर्शाती है कि जब शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचता है, तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जीवन में स्थायी बदलाव की राह खुलती है। भूमिहीन परिवार को आर्थिक सहायता के साथ पक्का आवास और महिला सदस्य को नियमित आर्थिक सहयोग मिलना, समावेशी और संवेदनशील शासन व्यवस्था की सार्थक तस्वीर प्रस्तुत करता है।
- -मुर्गी पालन से दंतेवाड़ा की रामबती ने कमाए 25 हजार रुपयेरायपुर / राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (‘बिहान’) के तहत संचालित इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर योजना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक प्रभावी जरिया बन रही है। दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा और दंतेवाड़ा विकासखंडों में बीते डेढ़ वर्षों से लागू इस योजना के जरिए लगभग 2,200 परिवारों को आजीविका के नए साधनों से जोड़ा जा चुका है।दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा विकासखंड के ग्राम मुड़ापारा की निवासी रामबती नाग ने इस योजना का लाभ उठाकर मुर्गी पालन की शुरुआत की। जिला प्रशासन के सहयोग से उन्हें जून माह में ₹80 प्रति चूजा की दर से 100 चूजे और दाना उपलब्ध कराया गया था। शुरुआती दौर में बीमारी के कारण करीब 25 से 30 चूजों की मृत्यु हो जाने से रामबती को झटका ज़रूर लगा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बचे हुए चूजों का बेहतर रखरखाव और देखभाल करके उन्होंने अब तक करीब ₹25,000 की शुद्ध आय अर्जित कर ली है। रामबती अपने तैयार मुर्गों को ₹500 प्रति किलो की दर से बेचती हैं, जिनका औसतन वजन 1 से 3 किलोग्राम तक होता है।योजना के अंतर्गत एक विशेष पहल भी शुरू की गई है, जिसमें क्लस्टर स्तर पर महिलाओं को उद्यमी के रूप में तैयार किया जा रहा है। ये महिला उद्यमी बाहर से क्रॉस असील प्रजाति के ज़ीरो-डे चूजे लाती हैं और ब्रुडिंग केंद्र में 15 दिनों तक उनका पालन-पोषण करती हैं। इसके बाद इन स्वस्थ चूजों को समूह की अन्य महिलाओं को सौंपा जाता है, जिससे तैयार करने वाली उद्यमी और पालन करने वाली महिला, दोनों को आय का अवसर मिल रहा है। जिले के विभिन्न क्लस्टरों में अब तक लगभग 450 महिलाओं को मुर्गी पालन गतिविधि से जोड़ा गया है। महिलाओं को उनकी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार 50 से 100 चूजे मुहैया कराए जाते हैं। बिहान योजना की इस पहल ने न केवल स्थानीय स्तर पर नियमित रोजगार उपलब्ध कराया है, बल्कि रामबती जैसी सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास भरकर उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर खड़ा किया है।
- -75 दिवसीय पर्व को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का संकल्प, बलराम मांझी बने दशहरा समिति के नए उपाध्यक्षरायपुर । ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा पर्व 2026 इस वर्ष भी पूरी भव्यता, आस्था और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा। पर्व की तैयारियों, पूजा विधान, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न आयोजनों को लेकर मंगलवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में बस्तर दशहरा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री महेश कश्यप ने की।बैठक में बस्तर राजपरिवार के श्री कमलचंद भंजदेव, कलेक्टर श्री आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ श्री तन्मय खन्ना, दंतेवाड़ा से मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया बाबा सहित समस्त मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरीन, पुजारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं टेम्पल स्टेट समिति के सदस्य उपस्थित रहे।बैठक की शुरुआत औपचारिक प्रक्रियाओं के साथ हुई। इसके बाद बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन कराया गया। बचेली परगना के श्री बीरो मांझी ने श्री अर्जुन मांझी के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि सोनाबाल परगना के श्री समुन्द मांझी ने श्री बलराम मांझी के नाम का प्रस्ताव किया। सदस्यों द्वारा हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें स्पष्ट बहुमत के आधार पर श्री बलराम मांझी को बस्तर दशहरा समिति का नया उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया।नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष श्री बलराम मांझी ने देवसराय सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के संबंध में सुझाव दिए।बैठक को संबोधित करते हुए सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, जनभागीदारी और विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने पर्व की व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए एनएमडीसी प्रबंधन से सीएसआर मद के अंतर्गत प्रतिवर्ष कम से कम डेढ़ करोड़ रुपये की स्थायी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग करने की बात कही।उन्होंने बताया कि बस्तर दशहरा के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार को लेकर केंद्रीय मंत्रियों से सकारात्मक चर्चा हुई है। सांसद ने कहा कि 75 दिनों तक चलने वाले इस विशिष्ट पर्व की मौलिकता और परंपरागत स्वरूप को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।उन्होंने पर्व अवधि के दौरान समानांतर आयोजनों की अनुमति नहीं देने, देवस्थलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा प्रमुख पूजा विधान स्थलों पर सुरक्षा रेलिंग और पक्की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी श्री कमलचंद भंजदेव ने बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1423 से निरंतर चली आ रही यह परंपरा मैसूर और कुल्लू दशहरा से भी प्राचीन है। उन्होंने बस्तर दशहरा को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए सामूहिक प्रयास और साझा संकल्प को दोहराया।उन्होंने मावली परघाव के लिए संबंधित स्थलों एवं मार्गों की विशेष साफ-सफाई, देवी-देवताओं और आंगा देव के सम्मानपूर्वक आगमन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही मांझी-चालकी से पर्व के दौरान पारंपरिक वेशभूषा एवं पगड़ी धारण करने का आग्रह किया।श्री भंजदेव ने मेंबर-मेंबरीन के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए मेंबरीन के मासिक मानदेय में वृद्धि करने का प्रस्ताव भी दशहरा समिति के समक्ष रखा।बैठक में दशहरा समिति के सचिव एवं तहसीलदार ने बस्तर दशहरा पर्व के लिए एक करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया। उन्होंने पर्व के दौरान संपन्न होने वाले विभिन्न पूजा विधानों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी समिति के सदस्यों को दी।बैठक में पूजा स्थलों, मार्गों, देवस्थलों, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तथा श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। पर्व की विशिष्ट परंपराओं को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रशासनिक समन्वय के साथ आयोजन को सफल बनाने पर विशेष जोर दिया गया।कलेक्टर श्री आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा ने बस्तर दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और भव्य रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक तैयारियों और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने पर्व से जुड़े सभी प्रमुख स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण करने तथा सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया।बैठक में मौजूद मांझी-चालकी, पुजारी, मेंबर-मेंबरीन और समिति के सदस्यों ने भी विभिन्न पूजा विधान एवं आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं के संबंध में सुझाव दिए। इस प्रकार बैठक में बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा, जनभागीदारी, धार्मिक आस्था और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं के समन्वय के साथ वर्ष 2026 के पर्व को भव्य एवं गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित करने की रूपरेखा पर व्यापक चर्चा हुई।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दिए जांच के निर्देश, कहा - बच्चियों को अपनी समस्या बताने के लिए पैदल निकलना पड़े, यह स्वीकार्य नहीं-जिम्मेदारी तय कर लापरवाह अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश-विद्यालय की बिजली, पढ़ाई, मेस सहित सभी व्यवस्थाएं तत्काल दुरुस्त करने के दिए निर्देशरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिले के शिवपुर एकलव्य आवासीय विद्यालय की छात्राओं के अपनी समस्याओं को लेकर पैदल कलेक्टोरेट के लिए निकलने की घटना को गंभीरता से लिया है। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने सरगुजा कलेक्टर श्री अजीत वसंत से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने विद्यालय में लंबे समय से समस्याएं बने रहने और छात्राओं को अपनी बात रखने के लिए इस तरह पैदल निकलने की स्थिति उत्पन्न होने पर कड़ी नाराजगी जताई।मुख्यमंत्री श्री साय ने कलेक्टर से कहा कि बच्चियों को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए विद्यालय से पैदल निकलना पड़े, यह स्थिति किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। यदि विद्यालय में लंबे समय से बिजली सहित अन्य समस्याएं बनी हुई थीं, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा समय रहते उनका समाधान क्यों नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी अंचलों के आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा तथा मूलभूत सुविधाओं को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने छात्राओं द्वारा सामने लाई गई बिजली, शिक्षकों की कमी, नियमित पढ़ाई, मेस तथा साफ-सफाई से जुड़ी समस्याओं का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कलेक्टर से कहा कि केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे छात्राओं की समस्याएं विद्यालय एवं छात्रावास स्तर पर ही समय पर सुनी और दूर की जा सकें।मुख्यमंत्री ने आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा और अधिकारियों द्वारा सतत निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि छात्रावासों में रहने वाले बच्चों को किसी परेशानी के समाधान के लिए प्रशासन तक स्वयं पहुंचने की ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। बच्चों की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी लेना तथा समय पर उनका समाधान करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के आदिवासी अंचलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार संसाधन उपलब्ध करा रही है। इन संसाधनों और योजनाओं का लाभ बच्चों तक सही ढंग से पहुंचे, यह सुनिश्चित करना मैदानी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्रत्येक बच्चे को पढ़ाई के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सकारात्मक वातावरण मिले।मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे बच्चे हम पर विश्वास करके आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी छोटी से छोटी समस्या को भी संवेदनशीलता के साथ सुनना और उसका समयबद्ध समाधान करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने जिला प्रशासन को छात्राओं से संवाद बनाए रखने और विद्यालय की व्यवस्थाओं में किए जा रहे सुधारों की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए।
- रायपुर / केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। इस योजना के माध्यम से लोग न केवल स्वच्छ ऊर्जा अपना रहे हैं, बल्कि अपने बिजली खर्च में भी उल्लेखनीय बचत कर रहे हैं। दंतेवाड़ा जिले के बड़े तुमनार निवासी और मोफलनार माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक श्री कैलाश कुमार देवांगन इसके प्रेरक उदाहरण बने हैं।कैलाश कुमार देवांगन अपने गाँव के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने मार्च 2026 में इस योजना का लाभ उठाते हुए अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित कराया। उन्होंने बताया कि पहले उनके 4 सदस्यीय परिवार का मासिक बिजली बिल करीब 1,000 से 1,200 (लगभग 200 यूनिट खपत) आता था। लेकिन सोलर प्लांट लगने के बाद से उनका बिजली बिल पूरी तरह समाप्त हो गया है।श्री देवांगन को मार्च माह में आयोजित शिक्षकों की एक बैठक के दौरान इस योजना की विस्तृत जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी इस योजना की सबसे बड़ी खासियत है, जिससे आम परिवारों के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र लगाना बेहद आसान हो गया है। उन्होंने अन्य नागरिकों से भी इस योजना का लाभ उठाकर अपने बिजली बिल को कम करने की अपील की है।शिक्षक कैलाश देवांगन का मानना है कि यह योजना केवल आर्थिक बचत का ज़रिया नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान देती है। भविष्य में बिजली की बढ़ती माँग और दरों को देखते हुए सौर ऊर्जा एक टिकाऊ विकल्प है। जिला प्रशासन एवं विद्युत विभाग ने भी जिले के नागरिकों से ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ से जुड़कर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया है।
- -250 हेक्टेयर खेतों को मिला संजीवनी जल-नारायणपुर के 6 गांवों में रबी फसलों की लहराएगी बहाररायपुर / जल संसाधन विभाग के समयबद्ध प्रयासों और बिंजली जलाशय की नहरों के जीर्णाेद्धार अभियान ने बस्तर अंचल के कृषि परिदृश्य को बदलकर रख दिया है। विभाग द्वारा जल संसाधन संभाग, नारायणपुर के माध्यम से नहरों की मरम्मत और गाद सफाई का वृहद कार्य कराया गया है, जिसका सीधा और सकारात्मक असर अब खेतों में दिखाई देने लगा है। इस व्यवस्था के सुचारू होने से नारायणपुर विकासखंड के खैराभाट, पालकी, तेलसी, करलखा, गुरिया और सुलेंगा गांवों की लगभग 250 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुनिश्चित सुविधा प्राप्त हुई है।समय के साथ बिंजली जलाशय की नहरों में जमा हुई गाद और अवरोधों के कारण जल प्रवाह बाधित हो गया था, जिससे खेतों तक पानी पहुँचाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। सफाई और आवश्यक मरम्मत कार्य के बाद अब नहरों में पानी का प्रवाह निर्बाध रूप से हो रहा है, जिससे किसानों की मानसून पर निर्भरता काफी कम हुई है। इस जल सुरक्षा से खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों के उत्पादन और गुणवत्ता में भी भारी सुधार की संभावना बढ़ गई है। जिन खेतों में पहले पानी की कमी के कारण खेती सीमित रहती थी, वहाँ अब किसान दोहरी फसल लेकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग की इस पहल से क्षेत्र के ग्रामीण अर्थतंत्र को नई गति मिली है और किसानों के जीवन में एक सुखद व सकारात्मक बदलाव आया है।
- -लोकरंग पर्व के दूसरे दिन मुक्ताकाशी मंच पर जीवंत हुईं लोकगाथाएं और लोकपरंपराएं- कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ारायपुर । छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू, लोकजीवन की सहज संवेदनाएं और पीढ़ियों से चली आ रही लोकपरंपराओं के रंगों से ‘लोकरंग पर्व’ का दूसरा दिन सराबोर रहा। मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित कार्यक्रम में ‘लोरिक चंदा’, ददरिया और चंदैनी जैसी पारंपरिक लोकविधाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।कार्यक्रम की शुरुआत प्रदेश की लोकप्रिय लोकगाथा ‘लोरिक चंदा’ के भावपूर्ण प्रसंग से हुई। श्री व्यासनाथ योगी एवं साथियों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से लोकगाथा की कथात्मकता, भाव और गायन परंपरा को मंच पर जीवंत कर दिया। प्रस्तुति के दौरान लोकसंगीत और पारंपरिक गायन शैली ने वातावरण को पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में रंग दिया।इसके बाद श्री विजय साहू एवं साथियों ने ददरिया की प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ के लोकजीवन से गहरे जुड़ी ददरिया की मधुर धुनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। वहीं श्री बरसन देशलहरे ने चंदैनी के माध्यम से प्रेम, लोकजीवन और मानवीय संवेदनाओं को सुरों में पिरोया। प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण जीवनशैली, लोकभावनाओं और सामाजिक सरोकारों की सहज झलक दिखाई दी।कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि स्थानीय मंच छत्तीसगढ़ की लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने और प्रोत्साहन पाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी हैं।उन्होंने कहा कि लोरिक चंदा, चंदैनी गीत और ददरिया जैसी लोकविधाएं छत्तीसगढ़ के लोकजीवन की पहचान हैं। इनकी प्रस्तुति और संरक्षण से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है। ‘लोकरंग पर्व’ इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल है।कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, पूर्व संचालक श्री अनिल कुमार साहू, उपसंचालक श्री उमेश मिश्रा, छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार श्री विजय मिश्रा तथा समाजसेवी श्री उदयभान चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे।‘लोकरंग पर्व’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं, लोकगीतों, लोकसंगीत और पारंपरिक लोकनृत्यों को एक साझा मंच प्रदान किया जा रहा है। आयोजन के दूसरे दिन की प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि आधुनिकता के दौर में अपनी लोकपरंपराओं को सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना उतना ही जरूरी है। मुक्ताकाशी मंच पर गूंजे लोकसुरों और कलाकारों की सजीव प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया। लोरिक चंदा की कथा, ददरिया की मिठास और चंदैनी के भावपूर्ण सुरों ने लोकरंग पर्व के दूसरे दिन को यादगार बना दिया।
- -पहली बार लोकरंग पर्व में दिखी सरगुजा-जशपुर अंचल की आदिवासी लोकसंस्कृति की मनमोहक झलक, पंथी और नाचा-गम्मत ने भी मोहा दर्शकों का मनरायपुर । छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करने वाले तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का तीसरा एवं अंतिम दिन सरगुजा-जशपुर अंचल की आदिवासी लोकसंस्कृति के नाम रहा। पहली बार लोकरंग पर्व के मंच पर जशपुर अंचल के सरहुल एवं करमा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकधुनों की मधुरता और कलाकारों के ऊर्जावान नृत्य ने पूरे वातावरण को उत्साह और उमंग से भर दिया। कार्यक्रम में श्री विजय कुमार भगत, जशपुर के दल द्वारा सरहुल एवं करमा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। आदिवासी लोकजीवन, प्रकृति और सामुदायिक परंपराओं से जुड़े इन लोकनृत्यों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचलों की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया। कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति, पारंपरिक लय और आकर्षक वेशभूषा ने कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया। इसके साथ ही रायपुर के डॉ. रामनारायण नेताम ने आदिवासी लोकगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति दी। श्री नवलदास मानिकपुरी, दुर्ग ने लोकगीत-संगीत से समां बांधा। वहीं सुश्री आरती बारले, भिलाई ने पंथी नृत्य की ऊर्जापूर्ण प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। सुश्री रमादत्त जोशी, रायपुर की नाचा-गम्मत की प्रस्तुति ने हास्य, मनोरंजन और लोकनाट्य के रंगों से कार्यक्रम को और जीवंत बना दिया।लोकरंग पर्व के समापन अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सुदूर जनजातीय अंचलों सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्थानीय कलाकारों ने अपनी-अपनी लोककलाओं की शानदार प्रस्तुतियां दीं। ऐसे आयोजन कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ प्रोत्साहन और सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि लोकरंग पर्व जैसे सांस्कृतिक आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध और सुघर लोकसंस्कृति को सहेजने तथा उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। लोकगीत, लोकनृत्य, लोकनाट्य और पारंपरिक कलाओं के माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को मंच मिलने के साथ ही विलुप्त होती लोकविधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन को भी प्रोत्साहन मिलता है।तीन दिनों तक चले लोकरंग पर्व में छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों की लोकसंस्कृति, लोकगायन और लोकनृत्य की विविध परंपराओं को मंच मिला। अंतिम दिन सरहुल, करमा, आदिवासी लोकगीत, पंथी और नाचा-गम्मत जैसी प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान उसकी विविध लोकपरंपराओं में निहित है। कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, छत्तीसगढ़ के कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार श्री विजय मिश्रा, फिल्म बोर्ड की सदस्य श्रीमती प्रसन्ना अवस्थी तथा समाजसेवी श्री उदयभान चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे।लोकरंग पर्व का अंतिम दिन दर्शकों के लिए छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की विविधता और जीवंतता को करीब से अनुभव करने का अवसर बना। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया। आयोजन ने एक ओर जहां लोककलाकारों को सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराया, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं को सहेजने, संवारने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सार्थक संदेश दिया।
- रायपुर /भारत रत्न एवं प्रख्यात संगीतकार, गायक, गीतकार और फिल्मकार डॉ. भूपेन हजारिका की जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर आज लोक भवन स्थित छत्तीसगढ़ मंडपम में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. हजारिका के कला, संगीत एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में अतुलनीय योगदान का स्मरण किया गया तथा उनकी कालजयी रचनाओं और जीवन-यात्रा को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की गई।राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि डॉ. भूपेन हजारिका का संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि उसमें समाज, संस्कृति, प्रकृति, मानवीय संवेदना और राष्ट्रीय एकता की गहरी अभिव्यक्ति थी। उन्होंने अपने गीतों और संगीत के माध्यम से भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को जोड़ने का कार्य किया। उनकी रचनाएं आज भी लोगों को सामाजिक समरसता, भाईचारे और मानवीय मूल्यों का संदेश देती हैं।सांस्कृतिक संध्या में इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के कलाकारों ने डॉ. भूपेन हजारिका के जीवन एवं रचनाओं पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। नृत्य के माध्यम से उनकी रचनाओं और जीवन-यात्रा को प्रभावशाली ढंग से जीवंत किया गया। महाकालीबाड़ी एवं विश्वनाथ मंदिर समिति, पंडरी, रायपुर के कलाकारों ने डॉ. हजारिका द्वारा गाए प्रसिद्ध गीतों की भावपूर्ण संगीतमय प्रस्तुति दी।राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री अनुज शर्मा, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन सहित गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
- - डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने स्मार्ट मीटर और चेक मीटर की रीडिंग की कराई गंभीरता से जांच- अधीक्षण अभियंता की रिपोर्ट में पता लगा रीडिंग लेने में हुई गलतीअंबिकापुर । बैकुंठपुर में स्मार्ट मीटर और चेक मीटर की रीडिंग में अंतर होने की जानकारी को छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने गंभीरता से लिया और तत्काल इस मामले की अधीक्षण अभियंता से जांच कराई। जांच में पुष्टि हुई कि स्मार्ट मीटर और चेक मीटर की रीडिंग में किसी तरह का अंतर नहीं है। बैकुंठपुर के कनिष्ठ अभियंता को इस मामले में नोटिस जारी कर दिया गया है।डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के क्षेत्रीय मुख्य अभियंता श्री यशवंत सिलेदार ने बताया कि स्मार्ट मीटर और चेक मीटर की रीडिंग में किसी तरह का अंतर नहीं है। दोनों की रीडिंग शत-प्रतिशत सही है। बैकुंठपुर के जेई व्दारा जारी किये गए पत्र पर संज्ञान लेते हुए मामले की जांच अधीक्षण अभियंता बैकुंठपुर से कराई गई। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि बैकुंठपुर की उपभोक्ता भावना गुप्ता ने आवेदन देकर अपने घर में चेक मीटर लगाने का अनुरोध किया था। जिसके बाद उनके घर में 27 जुलाई को चेक मीटर लगाया गया। चेक मीटर लगाते समय स्मार्ट मीटर की रीडिंग 5374 यूनिट तथा चेक मीटर की रीडिंग 2474 थी। 7 अगस्त 2026 को स्मार्ट मीटर की रीडिंग बढ़कर 5676 और चेक मीटर की रीडिंग 2777 दर्ज हुई। इस प्रकार 10 दिन की अवधि में स्मार्ट मीटर पर खपत 302 यूनिट, जबकि चेक मीटर की खपत 303 यूनिट रही।रीडिंग लेते समय इसकी वीडियो रिकार्डिंग भी कराई गई थी, जिससे सारे तथ्य स्पष्ट हो गए। दरअसल रीडिंग लेने में चेक मीटर की रीडिंग लेते समय त्रुटि की गई थी। चेक मीटर में खपत दर्ज करने के पहले पुश बटन दबा कर देखा जाता है, जिसमें अधिकतम मांग, बिलिंग महीने का चक्र पूरा होने पर खपत और रीडिंग लेने की तिथि की खपत दिखाई देती है। 7 अगस्त की रीडिंग लेने के बजाय कनिष्ठ अभियंता द्वारा 31 जुलाई की रीडिंग दर्ज की गई ।इस गलती के कारण रीडिंग का सही आकलन नहीं हुआ ।इसके लिए जेई को नोटिस जारी कर दिया गया है।जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि भौतिक मीटर रीडिंग, दोनों मीटरों द्वारा दर्ज खपत तथा वीडियो रिकॉर्डिंग के परीक्षण के आधार पर स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली में किसी प्रकार की विसंगति स्थापित नहीं होती है। दोनों मीटरों द्वारा दर्ज खपत में पाया गया एक यूनिट का अंतर सीमा के भीतर है तथा इससे मीटर रीडिंग में किसी प्रकार की असामान्यता का संकेत नहीं मिलता। रीडिंग लेने में त्रुटि के लिए कनिष्ठ अभियंता को नोटिस जारी किया गया है ।
- - शहर के बीच दलदलसिवनी में 220 केवी का बना नया उपकेंद्र- घरेलू उपभोक्ताओं के साथ उरला, सिलतरा एवं मेटल पार्क के औद्योगिक क्षेत्रों को भी मिलेगा लाभरायपुर । राजधानी रायपुर की 40 फीसदी आबादी को बेहतर बिजली आपूर्ति के लिए 220 केवी का नया उपकेंद्र आज सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया गया। लगभग 60 करोड़ रुपए की लागत से दलदलसिवनी में यह बड़ा उपकेंद्र बनाया गया है, जहां से शहर की ढाई लाख से अधिक घरेलू, गैर-घरेलू तथा औद्योगिक मांग को विश्वसनीय और सुदृढ़ तरीके से पूरा किया जा सकेगा। इस बड़ी उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं पावर कंपनीज़ के चेयरमैन श्री सुबोध कुमार सिंह ने अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई दी है और इसे राजधानी रायपुर की विद्युत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला एवं डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री भीम सिंह कंवर ने इस उपकेंद्र का स्विच ऑन कर ऊर्जीकृत किया। इस उपकेंद्र में 160 एमवीए का एक ट्रांसफार्मर और 63 एमवीए के दो ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत किए गए। इसमें 160 एमवीए का एक और ट्रांसफार्मर दो महीने में और स्थापित कर लिया जाएगा।राजधानी का यह सब-स्टेशन इसलिए भी बहुत महत्व रखता है क्योंकि कोरबा (मड़वा) से आने वाली बिजली को पहले 400 केवी की लाइनों के जरिये 400 केवी उपकेंद्र तक लाया जाता है। फिर इसे 220 केवी की लाइन व उपकेंद्र से 132 केवी की लाइन व उपकेंद्र पहुंचाया जाता है। इसके बाद डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के 33 केवी और 11 केवी उपकेंद्रों से एलटी लाइनों के जरिये घरेलू उपभोक्ताओं बिजली पहुंचाई जाती है।उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति हो, इसके लिए शहर में बड़ा उपकेंद्र आवश्यक था। यह लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में बना है। राजधानी बनने के बाद शहर के बीच में बड़ा उपकेंद्र बनाने में कई तरह की दिक्कतें थीं, जिसमें रायता से दलदलसिवनी की लाइन के काम में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन एवं स्थानीय निकायों की सामूहिक सहभागिता के साथ दूर किया गया। इस उपकेंद्र से वर्तमान में 132 केवी की दो लाइनें कचना और उरला में सप्लाई के लिए निकाली गई हैं। साथ ही 33 केवी की आठ फीडर लाइनें भी निकाली जाएंगी। इनमें से सात फीडर रायपुर शहर तथा एक फीडर रायपुर ग्रामीण के लिए होगी। उल्लेखनीय है कि पूर्व में राजधानी की सप्लाई डोमा स्थित 220 केवी उपकेंद्र से होती ही थी, जिसकी दूरी अधिक थी। अब इसमें दलदलसिवनी उपकेंद्र जुडने से विद्युत आपूर्ति व्यवस्था सुदृढ़ हुई है।220 केवी की साढ़े चार किमी नई मल्टीसर्किट लाइन भी इसमें शामिल है, जिससे भविष्य में 132 केवी की दो और लाइन निकाली जा सकेगी, जिसका लाभ सिलतरा, मंदिर हसौद और नवा रायपुर को हो सकेगा।इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक सर्वश्री एमएस चौहान, केएस मनोठिया, संजय पटेल, वीके दीक्षित, मुख्य अभियंता सर्वश्री अब्राहम वर्गीस, प्रसन्ना गोसावी, संजय तिवारी, संजीव सिंह, अनीस लखेरा, अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री आरके तिवारी, अधीक्षण अभियंता श्रीमती पुष्पा पिल्लई, सर्वश्री वीए देशमुख, एम विश्वकर्मा, करुणेश यादव, धरमजीत भट्ट, विक्रम मंधान, धनेश देवांगन, कार्यपालन अभियंता सर्वश्री उमाकांत यादव, सुचिंद्र उइके, जितेंद्र झा, प्रदीप साहू, अनिल व्दिवेदी, अखिलेश गजपाल, अभिषेक दीवान, अमृता महाजन, रोहित वर्मा, सहायक अभियंता सर्वश्री सुरेश वर्मा, प्रबोल मित्रा, पीके तिवारी, अरुण एंटोनी, नैनेश गोटे, रामकुमार ठाकुर उपस्थित थे।
- -सहकारिता मंत्री ने की विभागीय काम-काज की समीक्षा-मंत्री श्री कश्यप ने सहकारी सप्ताह 2026 पर आधारित काफी-टेबल बुकलेट का किया विमोचनरायपुर /सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में आज नवा रायपुर में सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। मंत्री श्री केदार कश्यप ने बैठक में सहकारिता के सुदृढ़ीकरण पर जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और किसान-हितैषी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। हमारा मुख्य ध्येय प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के माध्यम से अंतिम व्यक्ति और प्रदेश के प्रत्येक किसान तक शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाना है।बैठक में मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि डिजिटलाइजेशन और आधुनिक बैंकिंग सेवाओं से किसानों का भरोसा सहकारिता प्रणाली पर और मजबूत होगा। उन्होंने को-आपरेटिव बैंको में रिक्त पदों की समीक्षा की। उन्होंने रिक्त पदों की भर्ती की कार्यवाही तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में मंत्री ने सहकारी सप्ताह 29 जून से 06 जूलाई 2026 तक छत्तीसगढ़ में को-ऑपरेटिव सेक्टर में आयोजित विविध कार्यक्रम पर केन्द्रीत काफी-टेबल बुकलेट का विमोचन किया गया। बैठक में मंत्री श्री कश्यप ने अधिकारियों, प्रबंध संचालकों, संभागीय संयुक्त आयुक्तों, उप/सहायक आयुक्तों तथा जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। पैक्स के शत-प्रतिशत कम्प्यूटराइज़ेशन और अंकेक्षण (ऑडिट) प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देश दिए ताकि वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी रहे।मंत्री श्री कश्यप ने अल्पकालीन कृषि ऋणों पर ब्याज अनुदान, समय पर उर्वरक (खाद), बीज एवं ऋण वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश के किसानों को कोआपरेटिव्ह बैंको के माध्यम से चालू खरीफ सीजन 2026 हेतु 8800 करोड़ रुपए का कृषि ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 16 लाख से अधिक किसानों को 7973 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया जा चुका है, जो कि लक्ष्य का 90 प्रतिशत है। बैठक में मंत्री श्री कश्यप द्वारा अधिकारियों को शत-प्रतिशत कृषि ऋण वितरण के निर्देश दिया गया। ग्रामीण अंचलों में कॉमन सर्विस सेंटर का विस्तार करने तथा माइक्रो ए.टी.एम. की उपलब्धता बढ़ाकर डिजिटल बैंकिंग को सुलभ बनाने पर बल दिया गया। मंत्री श्री कश्यप ने 100 सोसायटियों में गोदाम निर्माण व त्प्क्थ् योजना के तहत स्वीकृत निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई, साथ ही नवगठित 515 पैक्स के सुचारू संचालन के निर्देश दिए गए। बैठक में आराईडीएफ अंतर्गत आबंटित 725 गोदामों में 718 गोदामों के निर्माण पूर्ण होने की जानकारी दी गई है। शेष 7 गोदाम के जल्द ही निर्माण पूर्ण किये जाने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया। सीएम हेल्पलाइन में दर्ज प्रकरणों के शीघ्र निराकरण, न्यायालयीन मामलों में समय पर जवाबदावा प्रस्तुत करने तथा कार्यालयों में ई-ऑफिस और आधार-बेस्ड उपस्थिति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए गए। धान उपार्जन केंद्रों में शेष बचे धान का शीघ्र एवं पारदर्शी तरीके से अंतिम निराकरण करने के आदेश दिए गए। बैठक के अंत में मंत्री श्री कश्यप ने सभी विभागीय अधिकारियों को जवाबदेही और पूरी पारदर्शिता के साथ शासकीय योजनाओं का त्वरित लाभ किसानों एवं सहकारिता क्षेत्र से जुड़े आम नागरिकों तक पहुंचाने का निर्देश दिये।इस अवसर पर सचिव सहकारिता डॉ सी.आर प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता व पंजीयक सहकारी संस्थाएं श्री रमेश शर्मा, अपेक्स बैंक महाप्रबंधक एवं प्रभारी प्रबंध संचालक श्री युगल किशोर, अपर पंजीयक श्री यू बीएस राठिया, अपर पंजीयक श्रीमती सावित्री भगत व सहकारिता विभाग व अपेक्स बैंक के अधिकारीगण तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के सीईओ उपस्थित थे।
- -दुर्ग में आयोजित हुई उच्च स्तरीय बैठक-विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंध जैसे मुद्दों पर सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने दिए सुझावरायपुर / छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यावहारिक, समावेशी और जनोपयोगी बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा गठित यूसीसी समिति ने जनपरामर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी कड़ी में मंगलवार, 08 सितंबर को दुर्ग में यूसीसी प्रारूप समिति द्वारा एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या श्रीमती (डॉ.) ज्योति रानी सिंह की उपस्थिति में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंध जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।बैठक के दौरान विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संघों के पदाधिकारियों ने यूसीसी के पक्ष और विपक्ष में खुलकर अपने विचार रखे। इस दौरान पारंपरिक-सामाजिक मान्यताओं से लेकर आधुनिक वैधानिक सुधारों तक के कई अहम पहलुओं पर चर्चा की गई। समिति के सदस्यों ने आश्वस्त किया कि प्राप्त सभी सुझावों का अध्ययन कर संहिता का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।इस महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्र के विभिन्न समाजों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख रूप से साहू समाज, मनवा कुर्मी समाज, कंवर समाज, चंद्रनाहू कुर्मी समाज, गोंडवाना सेवा समिति, आंध्र समाज, हलवा समाज, ताम्रकार समाज, यादव समाज, कंडरा आदिवासी समाज एवं मुस्लिम समाज युवा प्रभाग के पदाधिकारी, सर्व आदिवासी समाज, गोंडवाना गोंड महासभा, बीएसपी एसटी कर्मचारी संघ, भारतीय बौद्ध महासभा और राम मंदिर ट्रस्ट बेमेतरा के प्रतिनिधि शामिल थे। इसी प्रकार नागरिक एवं व्यावसायिक मंच से वरिष्ठ नागरिक कल्याण मंच, प्रज्ञा वरिष्ठ नागरिक संघ, पेंशनर्स संघ, छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स और छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के सदस्य सुझाव देने वालों में शामिल थे।बैठक में एडवोकेट प्रांजल शर्मा ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन (च्च्ज्) के माध्यम से समान नागरिक संहिता के स्वरूप और प्रावधानों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। समिति ने आम जनता और संगठनों से सुझाव प्राप्त करने के लिए आधिकारिक वेबसाईट http://ucc.cgstate.gov.in एवं ई-मेल [email protected] भी साझा की है।बैठक में यूसीसी समिति के सदस्य सचिव एवं रायपुर संभाग आयुक्त श्याम धावड़े, दुर्ग संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर, दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह, एडीएम वीरेंद्र सिंह और एसडीएम प्रफुल्ल गुप्ता सहित दुर्ग, बालोद एवं बेमेतरा जिले के प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
- रायपुर। जल उपभोक्ता संस्था टेकारी के अंतर्गत आने वाले डायरेक्टर आउटलेट से लगभग 80- 90 एकड़ खेतों को सिंचाई पानी पहुंचाने वाले क्षतिग्रस्त क्रासिंग डी सी का बीते मई माह में आयोजित सुशासन तिहार में ध्यानाकर्षण के 114 दिनों बाद भी मरम्मत नहीं हो पाया है जिसके कारण इन खेतों को सिंचाई पानी नहीं मिल पा रहा जबकि अब सामयिक सिंचाई पानी की दरकार है । किसानों के ध्यानाकर्षण पर संस्था के अध्यक्ष रहे भूपेंद्र शर्मा ने विभागीय अधिकारियों का ध्यान एक बार फिर इस ओर आकृष्ट करा अविलंब मरम्मत करवाने का आग्रह किया है ।ज्ञातव्य हो कि महानदी जलाशय परियोजना के अंतर्गत महानदी सिंचाई मंडल व जल प्रबंध संभाग क्रमांक 01 के उपसंभाग क्रमांक 04 के अधीन पड़ता है यह संस्था । महानदी मुख्य नहर के 94 किलोमीटर के बाये साइड के डायरेक्टर आउटलेट पर यह क्रासिंग डी सी से टेकारी के करीबन 80-90 एकड़ खेतों को सिंचाई पानी मिलता है इससे । इसके क्षतिग्रस्त होने की ओर पूर्व में विभागीय अधिकारियों का ध्यानाकर्षण कराने के बाद बीते 18 मई को ग्राम सिवनी में आयोजित सुशासन तिहार में श्री शर्मा ने आवेदन दे इस ओर ध्यानाकृष्ट कराया था । आवेदन में इसके साथ नहर प्रणाली में 3-4 स्थानों पर कुलापो की आवश्यकता होने के साथ - साथ पानी की बरबादी रोकने महानदी मुख्य नहर के समानांतर निकले नहर नाली के लाइनिंग की मांग भी की गयी थी । बहरहाल इस आउटलेट से सिंचाई सुविधा पाने वाले किसानों की शिकायत पर श्री शर्मा ने अधीक्षण अभियंता एस एस के साहू , कार्यपालन अभियंता ललित रावटे व अनुविभागीय अधिकारी विनोद कुमार बहादुर को इसकी जानकारी दे अविलंब इस क्रासिंग डी सी की मरम्मत करवाने का आग्रह किया है ।
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नागरिकों तक पहुंच रही डिजिटल शासकीय सेवाएं
बिलासपुर/सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को शासकीय सेवाएं अब अधिक सरल, सहज और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो रही हैं। सेवा सेतु नागरिकों और शासकीय सेवाओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य कर रहे हैं। आवेदन से लेकर आवश्यक दस्तावेजों की जांच और प्रमाण पत्र जारी होने तक की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने से नागरिकों को शासकीय कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से राहत मिल रही है। बिलासपुर तहसील के ’’श्री गौरी पहाड़ी को सेवा सेतु के माध्यम से आवेदन करने के महज चार दिनों के भीतर आय प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया।’’
श्री गौरी पहाड़ी को आय प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। आवेदन प्रस्तुत करने के महज चार दिनों के भीतर श्री गौरी पहाड़ी का आय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। कम समय में प्रमाण पत्र प्राप्त होने से उन्हें अपने आवश्यक व्यक्तिगत एवं शासकीय कार्यों को पूरा करने में काफी सुविधा मिली। सेवा सेतु के माध्यम से पूरी प्रक्रिया सहज और सुविधाजनक होने से उन्हें प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़े। आय प्रमाण पत्र मिलने के बाद श्री गौरी पहाड़ी ने ’’सेवा सेतु की त्वरित एवं सरल कार्यप्रणाली’’ पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि सेवा सेतु के माध्यम से आवेदन करने की प्रक्रिया आसान रही और निर्धारित समय से पहले ही प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया। इससे उनके जरूरी कार्य समय पर पूरे हो सके। उन्होंने त्वरित निराकरण के लिए छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
सेवा सेतु छत्तीसगढ़ के नागरिकों तक डिजिटल सेवाएँ लाने का एक खास पहल है। इसका उद्देश्य हर एक नागरिक, विशेषतः दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में रहने वालों, तक सरकार की योजनाएँ और सुविधाएँ पहुंचाना हैं। ‘सेवा सेतु’ सरकार की डिजिटल परिवर्तन यात्रा में एक महत्वपूर्ण अध्याय हैं। इतने सालों में यह एक बड़े सेवा-वितरण व्यवस्था में बदल गया है जो यह सुनिश्चित करता है कि नागरिक सरकारी दफ्तर जाए बिना विभिन्न सेवाओ के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकें। - रायपुर/रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री संबित मिश्रा के निर्देश पर नगर निगम जोन 5 नगर निवेश विभाग द्वारा नगर निगम जोन 5 जोन कमिश्नर श्री खीरसागर नायक के मार्गदर्शन एवं कार्यपालन अभियंता श्री लाल महेन्द्र प्रताप सिंह, सहायक अभियंता श्री नागेश रामटेके, उपअभियंता श्री टिकेन्द्र चंद्राकर की उपस्थिति में जोन 5 क्षेत्र अंतर्गत चंगोराभाठा रिंग रोड नम्बर 1 क्षेत्र में अनुमति के विपरीत निर्माणाधीन व्यवसायिक भवन को सम्बंधित निर्माणकर्ता कमलकांत चंद्राकर को नगर निगम अधिनियम के अंतर्गत नियमानुसार प्रक्रिया के अंतर्गत नोटिस देने के उपरांत हटाने की कार्रवाई अभियानपूर्वक की गयी .
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-बाल वाचनालय में आयोजित पर्व में रंगबिरंगी नौवारी साड़ी ने बढ़ाई रौनक, गुब्बारे के खेल को सभी ने किया एंजॉय
रायपुर। सावन का महीना हो, उस पर तीज महोत्सव का आयोजन। ऐसे में मराठी परिवार की महिलाएं अपने पारंपरिक परिधान यानी नौवारी साड़ी में न आएं, ऐसा हो ही नहीं सकता। महाराष्ट्र मंडल के शंकर नगर महिला केंद्र की ओर से बाल वाचनालय- उद्यान में आयोजित हरियाली तीज महोत्सव में पहुंचीं महिलाओं को पारंपरिक परिधान में ही देखा गया।
शंकर नगर केंद्र की संयोजिका आयुषी विठालकर ने बताया कि केंद्र की सदस्य पुष्पा जावलेकर, सुजाता देशपांडे, रैना पुराणिक, संगीता राजिमवाले, लीना मुजुमदार, अमृता सोमण, सपना काडू, वर्षा उरकुरकर, वैशाली निमजे, श्रुति मनोहर और कविता लांजेवार की टीम ने कार्यक्रम का सुव्यवस्थित आयोजन किया। इसके बाद अमृता सोमण, लीना मुजुमदार और सपना काडू ने आकर्षक गणेश वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद शुभदा गिरजे ने सुंदर भजन प्रस्तुत किया। वहीं 'पिंगा' और 'बाईपण भारी देवा' पर मिक्स डांस भी प्रतिभागियों की ओर से महिलाओं ने प्रस्तुत किया। इस बीच वरिष्ठ सभासद पुष्पा जावलेकर ने सावन महीने के सुंदर महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रमों की अगली कड़ी में अमृता, श्रुति मनोहर, वैशाली, वर्षा उरकुर, कविता, रैना, लीना और संगीता राजिमवाले ने 'श्रावण मधली किटी' थीम पर एक लघु कॉमेडी नाट्य प्रस्तुति दी, जिसने सभी को खूब हंसाया। प्रोग्राम में श्वेता डबली, स्वाति जोशी और रेनू काडे ने अपनी मधुर आवाज़ में सुंदर गाने पेश करके सबका दिल जीत लिया। वहीं डॉ. शेफाली फडणवीस ने डांस परफॉर्मेंस दी। आखिर में वैशाली और वर्षा ने सभी के लिए गेम खेला, जिसमें रेणू और शिल्पा ने पहला और दूसरा स्थान हासिल किया। सभी ने गुब्बारों से खेलकर खूब मस्ती की और उत्सव का समापन किया।
इस अवसर पर निर्मला पिंपरे, अनुराधा शिवलकर, अर्चना दशपुत्रे, कंचन केलकर, मंजूषा कावड़कर, जया कावड़कर, कविता, वैशाली, ज्योती अंदनकर, मधुरा भागवत, आयुषी, स्मिता कोमजवार, स्वाति कोराणे, मनीषा देशपांडे, मेधा कोतवाले, अदिती जोशी, डॉ. शेफाल, कुंदा विठालकर, नेहा फडणवीस, सपना काडू, तोशिका भुजबल, गीता दलाल, सुनीता वंजारे, शिल्पा धोत्रे, रेणुका पुराणिक, रेणू काले और योगिनी वरेटवार उपस्थित रहीं। - रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के बूढ़ापारा केंद्र की महिलाओं ने दीपाली बर्वे के निवास पर कमरछट (हलछट) की पूजा की। इस मौके पर महिलाओं ने कथा का वाचन व श्रवण किया। कमरछट व्रत और पूजा के माध्यम से व्रती महिलाओं ने अपने बच्चों के सुखी, निरोगी व समृद्धशाली जीवन की कामना की। मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले के अनुसार इस मौके पर रंजना ढोबले, दीप्ति राऊत, संध्या चौधरी, ममता पानबुड़े, वैशाली पवार, दीपाली बर्वे, हेमा बर्वे, अपर्णा मोघे, पूर्वा वोडितेलवार सहित केंद्र की अनेक महिलाएं उपस्थित रहीं।
- - महाराष्ट्र मंडल में धूमधाम से मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, मटकी फोड़ ने बढ़ाया आकर्षणरायपुऱ। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से रविवार, 6 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर छोटे-छोटे बच्चों की ओर से मनमोहक लघु नाटिका प्रस्तुत की गई। इसमें श्रीकृष्ण, उनकी बालसखा और गोपियों की टूटे-फूटे संवादों ने सभी का मन मोह लिया। आकर्षक वेशभूषा के साथ हाथों में बासुंरी और माथे पर मोरपंख लिए जब कान्हा मंच पर उतरे तो दर्शक दीर्घा में बैठे लोग अपने मोबाइल पर उनकी तस्वीरें निकालने लग गए।आध्यात्मिक समिति की समन्वयक सृष्टि दंडवते ने बताया कि इस अवसर पर वरिष्ठ सभासद कल्याण देशपांडे, साक्षी परमानंद, सुमीत मोड़क, अभिश्री जोशी और अर्णव कुसरे ने सुमधुर भजन प्रस्तुत किया। ढोलक पर मनीष यादव ने संगत किया। भजनों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को पूरी तरह भक्तिमय कर दिया। अध्यक्ष अजय मधुकर काले और सचिव चेतन दंडवते ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया।आध्यात्मिक समिति के प्रमुख आलोक शेंडे ने बताया कि फैंसी ड्रेस में बच्चों ने एक से बढ़कर एक मनोहारी रूप धरा था। वहीं लघु नाटिका में बच्चों के संवादों ने सभी मन मोह लिया। लघु नाटिका में कृष्ण जन्म से लेकर गीता ज्ञान तक को दर्शाया गया। जिसमें अलग-अलग बाल पात्रों ने अभियन किया। लघु नाटिका का निर्देशन आनंद कुसरे ने किया। नाटिका का प्रारंभ भगवान के जन्म के साथ हुआ। इसमें दिखाया गया कि कैसे भगवान देवकी के घर जन्म लिया और वासुदेव जी उन्हें यमुना पार कर नंद बाबा के घर ले गए। वहीं उनकी बाल लीलाएं और रास की मंचन भी बच्चों ने खूब अच्छे ढंग से किया। इसके बाद कंस वध और गीता ज्ञान भी मंचित किया गया।फैंसी ड्रेस में आरोही अलकरी, उर्वी रणदिवे, सुदीक्षा निब्ररड़, अर्णव कुसरे, ओवी गायकवाड़, अभिज्ञा शुक्ला, अंश कुसरे, केशवी राजपूत, शार्विल देशपांडे, प्रशस्ति आकांत, युक्ता रोकडे, यशीत काळे, प्रथमेश ओगले, दक्षा टेंबे, अव्यान हृषिकेश जोशी, स्वस्ति नाफडे, अव्या आदित्य कुलकर्णी, अनंत देसाई, अभिश्री जोशी,, प्रनवी ओगले, आयुष शिरके, आरव भुजाडे, आरोही भुजाडे, अनिशा सिंह और अंवय मानस सुले शामिल हुए।
- चतुर्थ कृष्ण श्रृंगार स्पर्धा-2026 के पुरस्कार घोषितरायपुर। महाकोशल कला परिषद रायपुर, अग्रवाल युवती मंडल, अग्रवाल सभा तथा गौड़ ब्राह्मण समाज संस्था रायपुर द्वारा जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित चतुर्थ कृष्ण श्रृंगार स्पर्धा-2026 के परिणाम निर्णायक समिति द्वारा घोषित कर दिए गए हैं। निर्णायक मंडल में डॉ. प्रवीण शर्मा, डॉ. भावना शाह एवं डॉ. शिखर शर्मा शामिल थे।प्रदेश स्तरीय इस स्पर्धा में प्रशांत एवं मंजूषा शर्मा के निवास स्थान पर सजाई गई श्रीकृष्ण की भव्य झांकी को महाकोशल कला परिषद द्वारा सर्वश्रेष्ठ संपूर्ण झांकी वर्ग में द्वितीय स्थान प्रदान किया गया। इस उपलब्धि से शर्मा परिवार एवं उनके शुभचिंतकों में हर्ष का वातावरण है।महाकोशल कला परिषद द्वारा पुरस्कार---वर्ष का सर्वश्रेष्ठ संपूर्ण झांकी पुरस्कार: भारती यदुप्रथम: रीमा साहूद्वितीय: श्वेता व्यास एवं प्रशांत शर्मातृतीय: निशा श्रीवास्तवविशेष पुरस्कार: मुश्कान सुलेख नाविक, प्रीति श्रीवास्तवसांत्वना पुरस्कार: गोपाल देवांगन, आशु अडे एवं प्रीति श्रीवास्तवगौड़ ब्राह्मण समाज संस्था द्वारा पुरस्कारसर्वश्रेष्ठ संपूर्ण झांकी: अंजलि शर्मासर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति (वीडियो-ऑडियो): रमा मनोज शर्मासर्वश्रेष्ठ कृष्ण श्रृंगार: लक्ष्मी शर्माप्रथम: श्रीमती इंदु जोशीद्वितीय: श्रीमती उषा पुजारी एवं श्रीमती तारा शर्मातृतीय: कु. वैदेही पुरोहितसांत्वना: मंजुला शर्माअग्रवाल युवती मंडल एवं अग्रवाल सभा द्वारा पुरस्कारसर्वश्रेष्ठ संपूर्ण कृष्ण श्रृंगार: अर्चना अग्रवालसर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति (वीडियो-ऑडियो): भावना अग्रवालसर्वश्रेष्ठ कृष्ण श्रृंगार: संचिता अग्रवालप्रथम: शिवांगी अग्रवालद्वितीय: श्रीमती प्रगति अग्रवालतृतीय: श्रीमती निकिता अग्रवालविशेष पुरस्कार: श्रीमती श्वेता अग्रवालसांत्वना: ममता अग्रवालविजयी प्रतिभागियों के पुरस्कार वितरण समारोह की तिथि की सूचना संबंधित संस्थाओं द्वारा अलग से दी जाएगी।चयन समिति एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार--इस सम्मान पर प्रशांत शर्मा एवं मंजूषा शर्मा ने चयन समिति के सभी सदस्यों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी के अवसर पर उनके घर पधारकर श्रीकृष्ण झांकी के दर्शन करने वाले सभी श्रद्धालु भक्तों, परिजनों एवं शुभचिंतकों का स्नेह और आशीर्वाद इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने विशेष रूप से भाई राजेन्द्र निगम जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी पारखी नजरों ने झांकी की सुंदरता को पहचाना। उन्होंने झांकी की शानदार तस्वीरें एवं वीडियो तैयार कर उन्हें स्पर्धा के लिए भेजने की पहल की। उनके सहयोग, सूझबूझ, पारखी दृष्टि एवं तत्परता ने इस सम्मान को संभव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशांत शर्मा एवं मंजूषा शर्मा ने सभी सहयोगियों, श्रद्धालुओं और शुभचिंतकों को हृदय से धन्यवाद देते हुए कहा कि यह सम्मान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद और सभी के स्नेह को समर्पित है।
- 0- महाराष्ट्र मंडल में हुई सीड बाल वाले गणेश जी बनाने की कार्यशालारायपुर। स्कूलों में बच्चे मार्केट में मिलने वाले क्ले से खेलते है और तरह तरह के डिजाइन बनाते है, ऐसे में अगर उन्हें मिट्टी से मूर्तियां बनाने का मौका मिले तो वे कहां पीछे रहने वाले है। महाराष्ट्र मंडल आयोजित ‘मिट्टी के गणेश’ की कार्याशाला में पहुंचे 100 से अदिक बच्चों ने अपनी-अपनी प्रतिभा के अनुरुप गणेश की प्रतिमा को आकार दिया। जैसे जैसे प्रतिमा आकार लेती गई बच्चों का उत्साह बढ़ता है। बच्चों के उत्साहवर्धन के लिए मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने सभी बच्चों से मुलाकात की और उनसे बात भी की।मंडल द्वारा 13 वर्षों से चली आ रही परंपरा में इस वर्ष भी बच्चों के साथ बड़ों में खासा उत्साह नजर आया। बच्चों ने जहां बाल गणेश को आकार दिया वहीं बड़े बुजुर्गों ने भगवान की अभय मुद्रा और बाल कृष्ण जैसे रूपों को साकार किया। बच्चों का मार्गदर्शन आर्टिसन अजय पोतदार ने किया। उनका साथ शेखर क्षीरसागर ने दियामहाराष्ट्र मंडळ ने 6 सितंबर को बच्चों को मिट्टी के श्रीगणेश की प्रतिमा बनाने की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। लगातार 13 वर्षों से चल रहे इस काम में इस वर्ष भी 100 से अधिक बच्चों ने अपनी भागीदारी निभाई। बच्चों ने मिट्टी से श्री गणेश को आकर्षक स्वरूप प्रदान किया। खुद से मिट्टी के गणेश बनाकर बच्चों में अच्छी खासी खुशी देखी गई।अजय ने बताया कि मिट्टी मंडळ की ओर से उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने बताया कि मिट्टी से श्रीगणेश की प्रतिमा बनाने के लिए सर्वप्रथम कुल मिट्टी को पांच बराबर भागों में बांटा गया। पहले भाग से प्रतिमा के लिए बेस तैयार किया गया। दूसरे भाग से भगवान का पेट वाला हिस्सा तैयार किया गया। तीसरे भाग से भगवान का सिर और शूड तैयार किया गया। चौथे भाग के दो हिस्से कर दोनों पैर बनाए गए। पांचवें भाग के चार हिस्से कर श्रीगणेश के चारों हाथ तैयार किए गए। मिट्टी को पांच बराबर हिस्सों में इसलिए बांटा गया ताकि प्रतिमा के सारे अंग बराबर बने कोई मोटा पतला न हो।
- 0- महराष्ट्र मंडल में मिट्टी के गणेश निर्माण की कार्यशाला संपन्न0- दिव्यांग बालिका में निवासरत मूकबधिर बच्चियों ने बनाएं सुंदर प्रतिमाएंरायपुऱ। महाराष्ट्र मंडल परिसर में रविवार 6 सितंबर को आयोजित गणेश की मूर्ति बनाने की कार्यशाला में अद्भुत नजारा देखने को मिला। जहां एक तरफ आम बच्चों का शोर था, वहीं दूसरी तरफ मूकबधिर बच्चों की ऐसी अद्भुत शांति और रचनात्मकता थी कि सभी अचंभित हो उठे। मंडल परिसर में आयोजित मिट्टी के गणेश बनाने की कार्यशाला में मंडल के दिव्यांग बालिका विकास गृह में निवासरत मूकबधिर बच्चियों ने बिना एक शब्द बोले, सिर्फ अपने हाथों के भावों (साइन लैंग्वेज) और बोलने में सक्षम गुरु अजय पोद्दार के इशारों को समझकर मिट्टी से भगवान गणेश की अत्यंत सुंदर मूर्तियाँ बनाई। मंडल अध्यक्ष अजय काले ने सभी बच्चों का उत्साहवर्धन किया।कार्यशाला के ट्रेनर और मंडल के सहसचिव अजय पोतदार ने बच्चों को मिट्टी को आकार देने की कला सिखाई। उन्होंने जैसे ही अपने हाथों से बप्पा की सूंड, कान और मुकुट बनाने का इशारा किया, बच्चों की आँखों में एक चमक सी आ गई। बच्चों ने प्रशिक्षक के हाथों की हर हरकत को इतनी बारीकी से देखा और समझा कि कुछ ही देर में उनके नन्हें-नन्हें हाथों ने मिट्टी के ढेरों को सुंदर मूर्तियों में बदल दिया।मूर्ति निर्माण के लिए पूरी तरह से प्राकृतिक मिट्टी का उपयोग किया गया। इन बच्चों ने न केवल मूर्ति बनाना सीखा, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण (Eco-Friendly) का एक बड़ा संदेश भी दिया। सभी मूर्तियों में मंडल की पर्यावरण समिति की ओर से सीड बाल डाले गए। ताकि विसर्जन के बाद उस मिट्टी से एक पौधा जन्म लें।जब इन बच्चों की बनाई मूर्तियाँ पूरी तरह तैयार हो गईं, तो उनके चेहरों की खुशी देखने लायक थी। भले ही वे बोल नहीं सकते थे, लेकिन उनकी आँखों की चमक, चेहरे की मुस्कान और बप्पा के सामने जुड़े उनके हाथ यह बता रहे थे कि वे मन ही मन कितने उत्साहित और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। इस अवसर पर मंडल उपाध्यक्ष गीता दलाल, कार्यकारिणी सदस्य मालती मिश्रा, प्रवीण क्षीरसागर, आर्टिस्ट शेखर क्षीरसागर सहित बड़ी संख्या में सभासद उपस्थित थे।









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