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- बालों का कमजोर होना, हेयर फॉल या सूखापन होने के पीछे के कारण कई बार सामान्य ही होते हैं। बढ़ता प्रदूषण, गलत खानपान, केमिकल युक्त या ज्यादा स्ट्रॉन्ग हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना या फिर शरीर के अंदर होने वाली कोई बीमारी। स्वस्थ और खूबसूरत बाल हर किसी की चाहत होती है, लेकिन इसके लिए मेहनत भी जरूरी है। ऐसे में हम आपके लिए एक आसान और प्राकृतिक तरीका लेकर आए हैं, जिससे आप घर पर ही नेचुरल हेयर ऑयल बना सकते हैं। इसमें छत पर उगे हुए एलोवेरा और करी पत्ते जैसे पौधे भी इस्तेमाल होंगे, जो बालों को घना, मजबूत और सिल्की बनाने में मदद करेंगे। यह तरीका न सिर्फ सस्ता है, बल्कि बालों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित भी है। तो आइए कैसे करना है इसका इस्तेमाल।नारियल तेल का पोषणनारियल तेल बालों के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक उपाय है। नारियल तेल बालों को गहराई से पोषण देता है, जिससे बाल मुलायम, सिल्की और चमकदार बनते हैं। यह स्कैल्प के सूखेपन और खुजली को भी दूर कम करने में मददगार होता है। साथ ही नारियल तेल में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो बालों को संक्रमण से बचाते हैं। नारियल तेल की नियमित मालिश से बालों की ग्रोथ बढ़ती है और डैंड्रफ की समस्या कम होती है। ऐसे में इसके साथ कुछ और नेचुरल चीजें मिला ली जाएं तो बालों के स्वस्थ्य को लाभ मिलता है।नेचुरल हेयर ऑयल के लिए जरूरी सामग्रीइसके लिए आपको आमतौर पर 1 कप नारियल तेल, 2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल, 10-12 करी पत्ते, 1 प्याज कद्दूकस, 1 चम्मच कलौंजी और 1 चम्मच मेथी दाना आदि की जरूरत पड़ेगी। इन सभी को एक बर्तन में डालकर धीमी आंच पर 20-25 मिनट तक पकाएं। फिर ठंडा होने पर छान लें और किसी साफ शीशी में भर लें।नारियल तेल में इस्तेमाल की जाने वाली ये सभी सामग्री बालों के लिए अलग-अलग काम करती हैं, जैसे एलोवेरा बालों की ग्रोथ को बढ़ाता है और स्कैल्प की सूजन कम करता है। करी पत्ते में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट बालों को झड़ने से बचाते और घना बनाते हैं। प्याज में सल्फर होता है, जो बालों के रोम को मजबूत करता है।उपयोग का तरीका व फायदेइस तेल को हफ्ते में 2-3 बार बालों की जड़ों में अच्छी तरह मालिश करें। मालिश के बाद कम से कम 1 घंटे तक तेल को लगे रहने दें ताकि पोषक तत्व अच्छी तरह से बालों में समा जाएं। इसके बाद शैम्पू से बाल धो लें। इसे आप हफ्ते में कम से कम दो बार इस्तेमाल कर सकते हैं।नेचुरल ऑयल बनाकर बालों की देखभाल करना न सिर्फ सस्ता है, बल्कि पूरी तरह से सुरक्षित और प्रभावी भी। नारियल तेल, एलोवेरा, करी पत्ते, प्याज, कलौंजी और मेथी दाने के फायदे मिलकर आपके बालों को दे नए जीवन की ऊर्जा।
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सौंठ का इस्तेमाल हमारे घरों में अलग-अलग तरीके से किया जाता है। आज हम बात करेंगे कि फेफड़ों में जमी कफ को साफ करने में सौंठ का इस्तेमाल कैसे कारगर है? सौंठ खांसी और जकड़न से राहत दिलाने में बेहद मददगार है। सौंठ की सबसे अच्छी बात ये है कि ये कफ और पित्त दोनों की प्रकृति वाले लोगों के लिए फायदेमंद है। कफ की प्रकृति वाले लोग सौंठ का सेवन कर सकते हैं लेकिन पित्त प्रकृति वाले लोग अक्सर गर्म चीजों के सेवन से बचते हैं और सौंठ इतना गर्म नहीं है कि ये पित्त प्रकृति वाले लोगों को नुकसान पहुंचाए। इसके अलावा भी कफ साफ करने में सौंठ अपनी अहम भूमिका निभा सकती है। जैसै कि
-सोंठ में मौजूद सक्रिय यौगिक जिंजरोल में सूजन-रोधी गुण होते हैं जो गले की तकलीफ और जलन को कम कर सकते हैं। जिंजरोलखांसी-जुकाम से जुड़े तमाम लक्षणों को कम करने में असरदार है और ये कफ की वजह से छाती में महसूस होने वाले भारीपन को भी कम करने में मदद कर सकता है।- सोंठ श्वसन तंत्र से बलगम और कफ को साफ करने में मदद करने के लिए जाना जाता है, जिससे सांस लेना आसान हो जाता है और कंजेशन में कमी आती है। जो भी लोग अस्थमा, निमोनिया और तमाम प्रकार के फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं से परेशान रहते हैं उनके लिए ये खांसी और कंजेशन को कम करने वाला है।-सौंठ का गर्म और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला प्रभाव काफी हद तक कारगर है। इसकी गर्म प्रकृति पसीना लाने में मदद करती है, जो बुखार कम करने और सर्दी-जकाम व वायरल के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है।-सोंठ में एंटी बैक्टीरियल गुण भी होते हैं जो शरीर को सर्दी के लक्षणों का कारण बनने वाले रोगाणुओं से लड़ने में मदद कर सकते हैं। इससे फेफड़ों में होने वाली इंफेक्शन को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।कफ साफ करने के लिए सौंठ का इस्तेमाल-सर्दी-जुकाम में आप सौंठ का इस्तेमाल कई प्रकार से कर सकते हैं। बस ध्यान रखें कि इसका सेवन आप सही मात्रा में और सही समय पर करें। जैसे कि आप सबसे पहले तो सौंठ का काढ़ा बनाकर पी सकते हैं जो कि सीने में जमे कफ को साफ करने में मददगार है।शहद में मिलाकर खाएं सौंठशहद एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुणों से भरपूर है और जब आप इसे शहद में मिलाकर खाते हैं तो ये फेफड़ों को आराम देने के साथ बलगम और कफ को साफ करने में मदद कर सकता है। तो आपको करना ये है कि 1 चम्मच शहद लें और इसमें सौंठ मिलाकर खा लें। आप इसे खाने के बाद ले।सौंठ और पिपली का इस्तेमाल करेंसौंठ और पिपली का इस्तेमाल फेफड़ों की कई समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है। ये दोनों ही फेफड़ों में जमी कफ और कंजेशन को दूर करने में मददगार है तो पिपली और सौंठ कोगुड़ और घी में पका लें और फिर इनका सेवन करें।सौंठ और सुहागा का सेवन करेंसौंठ और सुहागा का सेवन उन तमाम लोगों के लिए फायदेमंद है जो कि कंजेशन, कफ और खांसी-जुकाम की समस्या से गुजर रहे हों। ऐसे में जरूरी ये है कि सौंठ और सुहागा दोनों का काढ़ा बनाएं और फिर इनका सेवन करें। ये फेफड़ों की सफाई में मददगार साबित होगा।सौंठ और मुलेठी का सेवन करेंसौंठ और मुलेठी का सेवन कंजेशन कम करने के साथ गले को साफ करने और फेफड़ों की सफाई में मददगार है तो सौंठ पाउडर को मुलेठी के साथ मिलाएं और शहद में मिलाकर इसे खा लें। इसे आप खाना खाने के बाद 2 से 3 बार लें।इस प्रकार से सौंठ का सेवन कफ और कंजेशन कम करने में मदद कर सकता है तो अगर आपने अब तक इस घरेलू उपचार को नहीं अपनाया है तो एक बार अपनाकर जरूर देखें। - नयी दिल्ली. नवरात्र शुरू हो रहे हैं और विशेषज्ञों की सलाह है कि इस दौरान उपवास करने वालों को रात्रि में अचानक भारी भोजन करने से बचना चाहिए। चिकित्सकों का मानना है कि ऐसा करना उनके ‘मेटाबॉलिज्म' और पाचन तंत्र पर नकारात्मक असर डाल सकता है। आमतौर पर, नवरात्र में उपवास करने वाले श्रद्धालु दिन में फल और रात्रि में आलू-साबूदाना की खिचड़ी, सिंघाड़े के आटे का हलवा, लौकी, कद्दू, दूध, दही या पनीर इत्यादि चीजों का सेवन करते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नौ दिन तक खाने का यह पैटर्न नुकसानदायक साबित हो सकता है। दिनभर भोजन न करने से शरीर की ऊर्जा की जरूरत पूरी नहीं हो पाती है और शाम या रात्रि में भारी भोजन लेने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है। इससे अपच, एसिडिटी और पेट में भारीपन की शिकायत हो सकती है।दिल्ली स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के ‘डायटिक्स एंड न्यूट्रिशन विभाग' की वरिष्ठ कंसलटेंट दिव्या मलिक ने कहा, “नौ दिन के उपवास में दिनभर कुछ न खाना और रात्रि में एक बार भारी भोजन लेने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है। मेटाबॉलिज़्म भी धीमा पड़ सकता है क्योंकि भूखे रहने के बाद एक बार में ज्यादा खाना खाने से शरीर कैलोरी को सही तरीके से जलाने में मुश्किल महसूस करता है।” उन्होंने कहा, “बेहतर यह है कि भोजन थोड़ा हल्का और संतुलित किया जाए तथा पानी पर्याप्त पीया जाए ताकि पाचन सही रहे और शरीर को नुकसान न हो।” इसके अलावा, व्रत के दौरान सही मात्रा में प्रोटीन न लेने पर शरीर में फैट बढ़ सकता है और लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उभर सकती हैं। कामकाजी महिलाओं के लिए व्रत के दौरान शारीरिक ऊर्जा बनाए रखना और अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।दिल्ली की पटपड़गंज निवासी, ई-रिक्शा चलाने वाली फूलवती ने कहा, “नौ दिन नौ रात व्रत के साथ सौ-सौ बार माता रानी का नाम जपती हूं .....नौ दिन माता इतनी शक्ति देती हैं कि मैं पानी भी ना पीऊं तो भी मस्त रिक्शा चलाऊंगी। खैर, शाम को वापस घर जाकर पूजा करती हूं और माता को जो भोग चढ़ाती हूं वही खाती हूं।” पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 की रहने वाली शिक्षिका सुनीता भारद्वाज ने कहा, “मैं हर साल नवरात्र का उपवास करती हूं। सुबह-सुबह स्कूल जाना होता है और घर के कामकाज की भी जिम्मेदारियां होती हैं, इसलिए सुबह के समय व्रत वाला खाना बनाना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि मैं दिन में केला या सेब खा लेती हूं और रात में माता रानी की आरती के बाद आलू-साबूदाने की खिचड़ी खा लेती हूं।” निजी बैंक में काम करने वाली अंजलि तिवारी ने कहा, “दिनभर की व्यस्त जीवनशैली के कारण व्रत में अपने आहार का ध्यान रखना मुश्किल है। व्रत के दौरान कमजोरी हो जाती है लेकिन मैं पूरे नौ दिन माता रानी के लिए उपवास करती हूं।'' उपवास के दौरान संतुलित आहार नहीं लेने से शरीर में प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, जिससे कमजोरी, चक्कर आना और हड्डियों में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। व्रत के दौरान धार्मिक मान्यताओं और अच्छी सेहत का संतुलन कैसे बनाया जाए, इस सवाल पर नोएडा जिला अस्पताल की डायटिशियन खुशबू सिंह ने कहा, ‘‘दिन की शुरुआत गर्म पानी और कड़ी पत्ते से करें। इसके बाद नाश्ते में हल्के फल और मेवे खा सकते हैं।'' उन्होंने कहा कि व्रत रखने वाले लोग इसी तरह दोपहर, शाम और रात का अपना भोजन संयमित और हल्का रखें।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, उपवास में लोग तीन-चार आम गलतियां करते है। पहला, भूखे रहकर अचानक भारी या तला-भुना खाना खाना, जिससे पाचन में समस्या हो सकती है। दूसरा, प्यास लगने पर पानी कम पीना, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। तीसरा, पर्याप्त और संतुलित पोषण न लेना, जिससे कमजोरी और थकान हो सकती है। चौथा, नींद पूरी न करना, जिससे ‘मेटाबॉलिज्म' और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है।
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आज से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रही है। कई लोग नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा की भक्ति में और श्रद्धा से पूरे 9 दिनों तक उपवास रखते हैं, जिसमें वे सिर्फ व्रत की चीजों का सेवन करते हैं और फलाहार करते हैं। उपवास रखना न सिर्फ धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा का हिस्सा होता है, बल्कि शरीर को डिटॉक्स करने का एक तरीका भी माना जाता है। हालांकि, बहुत बार लोग उपवास के दौरान तले-भुने, ज्यादा तेल और मसाले वाले फूड्स का सेवन करते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है और शरीर में पोषक तत्वों की कमी कारण बन सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं नवरात्रि के व्रत के दौरान पौष्टिक आहार कैसे लेना चाहिए?
1. तले-भुने खाद्य पदार्थों से बचें
व्रत रखने के समय अक्सर लोग पूड़ी, पकौड़ी, साबूदाना वड़ा आदि तले-भुने खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। ये चीजें खाने में स्वादिष्ट तो होती हैं, लेकिन इनमें ज्यादा तेल और कैलोरी होती है, जो पाचन क्रिया पर नकारात्मक असर डाल सकती है और वजन बढ़ने का कारण बन सकती है। इसके स्थान पर आप व्रत में खाने के लिए हेल्दी विकल्प को चुन सकते हैं। आप मखाने के हल्का भूनकर खा सकते हैं जो फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं, या फिर सिंघाड़े या कुट्टू के आटे से बने चीले को भी शामिल कर सकते हैं।
2. भरपूर मात्रा में पानी पिएं
उपवास के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिसके कारण थकान, सिरदर्द और चक्कर आने की समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए दिन भर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और इसके अलावा आप कुछ हेल्दी ड्रिंक्स भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। नींबू पानी, नारियल पानी और फलों का ताजा जूस आपके शरीर को हाइड्रेट रखने और पोषण देने में मदद करेगा।
3. स्नैकिंग के लिए हेल्दी विकल्प चुनें
बहुत सारे लोग व्रत के दौरान फलाहार के नाम पर पैकेज्ड चिप्स, नमकीन या पापड़ का सेवन करते हैं, जो सेहत के लिए बिल्कुल भी हेल्दी नहीं होता है। इन चीजों में ट्रांस फैट, ज्यादा नमक और प्रिजर्वेटिव्स से भरपूर होते हैं। इसलिए, इनके स्थान पर आप खीरे, गाजर, ककड़ी जैसी हाइड्रेट सब्जियां, फ्रूट सलाद और साबूदाना खिचड़ी शामिल कर सकते हैं, जो हेल्दी होने के साथ पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।
4. छोटे और बार-बार भोजन करें
व्रत के दौरान कई बार आप एक बार में ही अपना पेट भर लेते हैं, जो ब्लोटिंग की समस्या को बढ़ा सकता है। पेट देर तक खाली रहने से मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए, कोशिश करें कि दिन भर छोटे-छोटे और संतुलित आहार लें। सुबह के समय एक फल खाएं और पानी पिएं। इसके बाद दोपहर में चीला या साबूदाना खिचड़ी खाएं, शाम को नारियल पानी पिएं या मखाना खाएं और रात को हल्का फ्रूट सलाद या दूध लें। इससे न सिर्फ आपके शरीर में एनर्जी का स्तर बना रहता है, बल्कि पाचन तंत्र पर भी ज्यादा दबाव नहीं पड़ता है। उपवास के दौरान खानपान में थोड़ी सी समझदारी और हेल्दी बदलाव न सिर्फ आपके शरीर को एनर्जी देने में मदद करता है, बल्कि पौष्टिक होता है। इसलिए उपवास के दौरान तले-भुने और प्रोसेस्ड फूड्स से परहेज करें, हेल्दी विकल्पों को अपनी डाइट में शामिल करें और खुद को हाइड्रेट रखें।
- दोपहर की नींद यानी नैपिंग जहां शरीर को आराम देती है वहीं ये ब्रेन को ब्रेक देने का काम करती है। इतना ही नहीं, ऑफिस में भी ली गई 15 मिनट की नींद आपको बेहतर महसूस करा सकती है और इसकी वजह से आपका स्ट्रेस कम होता है और बीपी मैनेज रहता है लेकिन तब क्या जब आपको डायबिटीज हो? डायबिटीज के मरीजों के लिए हर एक चीज शुगर से जुड़ी होती है और कई बार लापरवाही शुगर स्पाइक की वजह बन सकती है। ऐसे में जरूरी है कि डायबिटीज के मरीज हर काम को सोच समझकर करें और इसमें डॉक्टर की राय ले लें। ऐसे में एक सवाल ये आता है कि क्या डायबिटीज के मरीजों के लिए दोपहर की नींद शुगर बढ़ाने का काम कर सकती है? जानते हैं इस बारे -NIH की इस रिपोर्ट के अनुसार झपकी लेना डायबिटीज के जोखिम को प्रभावित कर सकता है। अध्ययन नियमित रूप से दिन में झपकी लेने और T2D विकसित होने की अधिक संभावना के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध दर्शाते हैं। 30 मिनट की छोटी झपकी तो ठीक है लेकिन लंबी झपकी लेने से जोखिम काफी बढ़ जाता है। दोपहर की नींद से शुगर बढ़ने का जोखिम विशेष रूप से उन व्यक्तियों में और भी बढ़ जाता है जो बार-बार झपकी लेते हैं और रात में कम नींद लेते हैं। इससे बीपी बढ़ सकता है, मोटापे की समस्या हो सकती है और डायबिटीज असंतुलित हो सकता है।दोपहर में लंबा सोने का नुकसानदोपहर में लंबी झपकी सूजन और मोटापे की समस्या पैदा कर सकती है जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक झपकी लेने से रात की नींद में बाधा आ सकती है और शरीर के नेचुरल नींद लेने और जागने के चक्र में व्यवधान आ सकता है, जो डायबिटीज के जोखिम का एक प्रमुख कारक है।शुगर पेशेंट को दिन में लगभग 7 से 8 घंटे की पूरी और नियमित नींद लेने की सलाह दी जाती है।NIH की इस रिपोर्ट के अनुसार पर्याप्त नींद शरीर को स्वयं की मरम्मत करने और हार्मोन को संतुलित करने में मदद करती है जिससे ब्लड शुगर स्थिर हो जाता है। नींद की कमी से शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाती हैं, जिससे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। नियमित और गुणवत्तापूर्ण नींद शरीर को स्वस्थ चयापचय क्रिया बनाए रखने में मदद करती है, जो डायबिटीज की रोकथाम और प्रबंधन दोनों के लिए जरूरी है। कम नींद भूख और चयापचय को नियंत्रित करने वाले हार्मोन के स्तर को बाधित कर सकती है, जिससे वजन बढ़ता है और डायबिटीज का खतरा भी बढ़ सकता है।इस प्रकार से पर्याप्त और अच्छी नींद से शरीर का मेटाबोलिज्म सही रहता है और ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है। इसलिए, दोपहर की नींद को नियंत्रित रखें और रात की नींद को प्राथमिकता दें। नींद संबंधी कोई समस्या हो तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।
- कच्चा पपीता खाने के फायदे: कच्चा पपीता कई प्रकार के पोषक तत्वो से भरपूर होता है जिसका सेवन आपको कई बीमारियों से बचा सकता है। खासकर जिन लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं रहती हैं या फिर बवासीर या पुराने कब्ज की समस्या रहती है उनके लिए कच्चा पपीता खाना कई प्रकार से फायदेमंद है।कच्चा पपीता खाने से प्लेटलेट्स बढ़ते हैं क्यापपीते के पत्तों का रस प्लेटलेट काउंट बढ़ाने में मदद कर सकता है, खासकर डेंगू, कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट या प्रतिरक्षा समस्याओं के कारण कम प्लेटलेट्स वाले लोगों में। अध्ययनों से पता चलता है कि पपीते के पत्तों का रस या अर्क शरीर को अधिक प्लेटलेट्स बनाने में मदद करता है और उन्हें टूटने से बचाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पत्तियों में फ्लेवोनोइड्स, ग्लाइकोसाइड्स और पपैन जैसे स्वस्थ प्राकृतिक पदार्थ होते हैं। दूसरी ओर, पके और कच्चे पपीते के फल विटामिन ए, सी, ई, फोलेट और एंटीऑक्सिडेंट जैसे अच्छे पोषक तत्वों से भरे होते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। लेकिन अध्ययनों के अनुसार, फल खाने से प्लेटलेट्स बढ़ाने में स्पष्ट रूप से मदद नहीं मिलती है। लेकिन प्लेटलेट के स्तर को बढ़ाने की बात करें तो इसका पत्ते के रस जैसा प्रभाव नहीं होता है।प्लेटेलेट्स बढ़ाने में कच्चा पपीता खाने के फायदे-माना जाता है कि कच्चे पपीते में प्लेटलेट काउंट बढ़ाने के संभावित लाभ हैं। जैसे कि कच्चे पपीते का अर्क प्लेटलेट उत्पादन को बढ़ाने के लिए माना जाता है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि कच्चे पपीते का अर्क डेंगू बुखार या अन्य स्थितियों वाले रोगियों में प्लेटलेट काउंट बढ़ा सकता है। आप कच्चे पपीते का रस पी सकते हैं। आप कच्चे पपीते की सब्जी खा सकते हैं। आप कच्चे पपीते को उबालकर इसका चोखा बनाकर खा सकते हैं जो कि आपको कई बीमारियों से बचाव में मदद करता है। संभावित लाभों में प्लेटलेट उत्पादन में वृद्धि और समग्र स्वास्थ्य में सुधार शामिल है।कच्चे पपीते में विटामिन ए, सी और ई भी होता है जो कि शरीर के काम काज को बेहतर बनाने में मददगार है। इन विटामिनों में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो त्वचा को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं और कोलेजन उत्पादन का समर्थन जिससे स्किन और बालों से जुड़ी समस्याओं में भी कमी आती है। इसलिए अलावा अगर आप अपनी डाइट में फाइबर का साइज बढ़ाना चाहते हैं तो कच्चे पपीते का सेवन कर सकते हैं। यह आपके शरीर को डिटॉक्स करने के साथ पाचन क्रिया तो तेज करने में मदद कर सकता है। इसलिए आपको कच्चे पपीते का सेवन करना चाहिए।इन बातों का रखें ध्यान-गर्भावस्था के दौरान कच्चे पपीते का सेवन करने से बचें, क्योंकि यह गर्भाशय के संकुचन को उत्तेजित कर सकता है। कुछ लोगों को पपीते से एलर्जी हो सकती है, इसलिए इसके एलर्जी प्रतिक्रियाओं पर ध्यान दें और इससे बचें। अगर आप दवाएं ले रहे हैं, तो डॉक्टर से परामर्श लें, क्योंकि पपीता कुछ दवाओं के साथ अंतःक्रिया कर सकता है। इससे आपको दिक्कत हो सकती है।बेहतर अवशोषण के लिए खाली पेट कच्चा पपीता खाएं। हालांकि कच्चा पपीता फायदेमंद हो सकता है, लेकिन व्यक्तिगत सलाह के लिए डॉक्टर से बात करें खासकर अगर आपको पहले से कोई चिकित्सा समस्या है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि प्लेटलेट काउंट के लिए कच्चे पपीते को आप बाकी दवाओं के साथ खा सकते हैं। पपीते में सूजनरोधी गुण होते हैं तथा इसमें टैनिन और एल्कलॉइड जैसे फाइटोकॉन्स्टिट्यूएंट्स होते हैं जो खून की कोशिकाओं के निर्माण में सहायता करते हैं और प्लेटलेट की संख्या बढ़ाते हैं।
- बच्चों के साथ अक्सर देखा जाता है वह टेस्टी चीजें पसंद करते हैं न कि न्यूट्रिशनल चीजें। इस स्थिति में आप अपने बच्चे को चना, केला और खजूर से बनी इस स्मूदी को पिला सकते हैं जो कि उनकी सेहत के लिए फायदेमंद है। इस स्मूदी में वह तमाम गुण हैं जो कि बच्चे के ग्रोथ फेज मददगार हो सकते हैं।बच्चों के लिए चना, केला और खजूर की स्मूदी-साबुत चना या चना दाल से बनी स्मूदी का सेवन बच्चों को प्रोटीन, कार्ब्स और तमाम प्रकार के पोषक तत्व प्रदान करता है। चना जो कि फाइबर से भरपूर है बच्चों को प्रोटीन देना है जिससे उनकी ग्रोथ और हाइट बढ़ती है। इसके अलावा केले का पोटेशियम मसल्स बिल्डिंग में मददगार है और बच्चों के लिए फायदेमंद है। केले में कैलोरी की अच्छी मात्रा होती है और इनमें कार्बोहाइड्रेट भी काफी ज्यादा होता है। यह पोटेशियम से भी भरपूर होता है और शरीर को तमाम प्रकार के विटामिन और खनिज प्रदान करता है। तो केला विकास के चरण के बच्चों के लिए एक अच्छा फल है जो उन्हें अच्छे कार्बोहाइड्रेट के साथ काफी एनर्जी देने में मददगार है। अब बात खजूर की करें तो यह ड्राई फ्रूट वास्तव में कार्बोहाइड्रेट से भरपूर है। खजूर में कुछ मात्रा में आयरन और विभिन्न प्रकार के खनिज भी होते हैं। इसलिए खजूर विकास के चरण के बच्चों के लिए शुगर का एक बेहतर विकल्प होगा। इसके अलावा भी बच्चों के लिए चना केला और खजूर के फायदे कई हैं। जैसे कि-इस स्मूदी को पीकर मांसपेशियों, हड्डियों और टिशूज के निर्माण और मरम्मत में मदद मिलती है।-केले जटिल कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं, जो स्वस्थ पाचन के लिए निरंतर ऊर्जा और फाइबर प्रदान करते हैं। इससे बॉवेल मूवमेंट सही रहता है और फिर बच्चों मेंकब्ज की समस्या नहीं होती।-खजूर एक प्राकृतिक स्वीटनर है, जो फाइबर, पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है। इससे बच्चों का पेट भरा रहता है और उन्हें क्रेविंग नहीं होती।-यह स्मूदी विटामिन सी और बी6, पोटेशियम, मैग्नीशियम और आयरन का एक अच्छा स्रोत है। तो इसे पीने आपको यह तमाम फायदे मिल सकते हैं।-केले का प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य खनिज तत्व हड्डियों के विकास में मदद करते हैं।- केले और खजूर में मौजूद पोटेशियम की मात्रा स्वस्थ मस्तिष्क कार्य और संज्ञानात्मक विकास में सहायता कर सकती है।स्मूदी बनाएं और बिना छाने पिएंतो अगर आपको स्मूदी के तमाम फायदे को पाना है तो आप इसे बिना छाने पिएं। यानी कि इस दरदरा बनाएं और अगर कोई चीज साबुत रह जाती है तो इसे वैसे ही रहने दें। इससे बच्चों को ज्यादा न्यूट्रिएंट्स, विटामिन औरफाइबर मिलेंगे।सावधानियांअगर आपके बच्चे को चने या केले से एलर्जी है, तो उन्हें इसे देने से बचें। साथ ही ध्यान रखें कि खजूर एक प्राकृतिक स्वीटनर है इसलिए इसमें ऊपर से और अलग से चीनी मिलाने की गलती न करें। अगर आपका बच्चा यह स्मूदी न पीना चाहे तो आप उसे यह तमाम चीजें साबूत ही खिला सकते हैं।
- आज की लाइफस्टाइल में घुटनों का दर्द एक बेहद आम समस्या बन चुकी है। यह सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं और यहां तक कि किशोरों में भी देखने को मिल रही है। लंबे समय तक बैठे रहना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, मोटापा और आर्थराइटिस इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। विटामिन D को 'सनशाइन विटामिन' कहा जाता है क्योंकि इसका प्रमुख सोर्स सूरज की रोशनी है। यह शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में मदद करता है, जिससे हड्डियां मजबूत रहती हैं। अगर शरीर में विटामिन D की कमी हो जाए तो हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और सबसे पहले असर घुटनों जैसे भार सहने वाले जोड़ों पर पड़ता है।क्या विटामिन D की कमी से घुटनों में दर्द होता है?विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को कंट्रोल करता है। पर्याप्त कैल्शियम न मिलने पर हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। जब हड्डियां कमजोर होती हैं तो सबसे पहले असर घुटनों जैसे भार सहने वाले जोड़ों पर पड़ता है। यही वजह है कि विटामिन D की कमी से घुटनों में दर्द और जकड़न महसूस हो सकती है।घुटने केवल हड्डियों से नहीं बने होते, बल्कि मांसपेशियां, लिगामेंट और टेंडन भी उन्हें सपोर्ट करते हैं। विटामिन D की कमी मांसपेशियों को कमजोर बना सकती है, जिससे घुटनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और दर्द शुरू हो जाता है।विटामिन D की कमी से मांसपेशियों की रिकवरी भी धीमी हो जाती है।जिन लोगों में विटामिन D का लेवल कम होता है, उनमें ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) होने का खतरा ज्यादा रहता है। आर्थराइटिस में घुटनों के जोड़ों में सूजन और घिसाव होता है, जिससे दर्द बढ़ जाता है। पर्याप्त विटामिन D लेने से इस खतरे को कम किया जा सकता है।विटामिन D के लक्षण कैसे पहचानें?विटामिन D की कमी हमेशा तुरंत नजर नहीं आती। इसके शुरुआती लक्षण थकान, हड्डियों में हल्का दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और बार-बार घुटनों में अकड़न हो सकते हैं। लंबे समय तक इसकी कमी रहने पर हड्डियां भुरभुरी होने लगती हैं और फ्रैक्चर का खतरा भी बढ़ सकता है।डॉक्टर की सलाहघुटनों के दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर यह दर्द लंबे समय तक बना रहे तो डॉक्टर की सलाह अनुसार ब्लड टेस्ट जरूर कराना चाहिए। अक्सर पाया जाता है कि विटामिन D की कमी ही दर्द की मुख्य वजह होती है और सही डाइट व सप्लीमेंट से इसमें राहत मिल सकती है।बचाव और उपाय-रोजाना सुबह की हल्की धूप में 15-20 मिनट तक रहना शरीर में विटामिन D बनाने का नेचुरल तरीका है।-दूध, अंडे की जर्दी, फिश और मशरूम विटामिन D के अच्छे सोर्स हैं।-गंभीर कमी होने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेना जरूरी हो सकता है।-नियमित वॉक, योग और स्ट्रेंथ एक्सरसाइज से हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।निष्कर्षविटामिन D की कमी को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह घुटनों के दर्द और हड्डियों की कमजोरियों की बड़ी वजह बन सकती है। समय पर जांच, बैलेंस डाइट, धूप और एक्सरसाइज से न केवल इस कमी को पूरा किया जा सकता है बल्कि घुटनों के दर्द से भी बचाव संभव है।
- जब दांत में तेज दर्द उठता है तो इंसान का रोजमर्रा का जीवन काफी मुश्किल हो जाता है। यह दर्द कभी हल्का-फुल्का झनझनाने जैसा हो सकता है तो कभी इतना तेज कि सिर तक चढ़ जाए। अक्सर लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन असल में दांत का दर्द शरीर में किसी बड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है। सिरदर्द और कान दर्द के कई सामान्य कारण हो सकते हैं, जैसे माइग्रेन, साइनस या कान का इंफेक्शन। लेकिन अगर यह दर्द दांत के दर्द या चेहरे की सूजन के साथ जुड़ा हो, तो यह दांत के इंफेक्शन से उत्पन्न हो सकता है।क्या दांतों के इंफेक्शन से सिर और कान दर्द हो सकता है?डॉक्टर सुरभि श्रीवास्तव बताती हैं कि दांत में दर्द होना आम समस्या है, लेकिन कई बार दांत का इंफेक्शन सिर्फ मुंह तक ही सीमित नहीं रहता। यह सिरदर्द, कान दर्दऔर अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है। दांत का इंफेक्शन तब होता है जब दांत की जड़ (Root) या उसके आसपास की टिशूज में बैक्टीरिया की वजह से सूजन या पस जमा हो जाता है। इसे डेंटल अब्सेस भी कहा जाता है। इस स्थिति में दर्द तेज होता है और बिना इलाज के यह आसपास की हड्डियों, मांसपेशियों और नसों तक फैल सकता है। सिरदर्द और कान दर्द के कई कारण हो सकते हैं, जैसे माइग्रेन, साइनस, कान का इंफेक्शन, या गर्दन की समस्या, लेकिन अगर यह दर्द दांत में दर्द के साथ जुड़ा हो और मसूड़ों या चेहरे में सूजन भी हो, तो दांत का इंफेक्शन मुख्य कारण हो सकता है।सिरदर्द और कान दर्द का कनेक्शन -साइनस और दांत की नसेंऊपरी जबड़े (Upper Jaw) के दांत साइनस और चेहरे की नसों के करीब होते हैं। अगर दांत में इंफेक्शन है, तो यह नसों के माध्यम से सिर और साइनस में दर्द पहुंचा सकता है।नर्वस कनेक्शनचेहरे की नसें दांतों, कान और माथे से जुड़ी होती हैं। इसलिए दांत का इंफेक्शन सिरदर्द या कान दर्द का कारण बन सकता है।ऊपरी और निचले जबड़े के दांतखासकर दाढ़ के दांत का इंफेक्शन कान के पीछे दर्द, गले में खराश या कंधे में दर्द भी पैदा कर सकता है।दांत में इंफेक्शन का इलाज1. डेंटल चेकअपदांत में दर्द या इंफेक्शन महसूस होने पर तुरंत डेंटिस्ट से मिलें। समय पर इलाज से सिरदर्द और कान दर्द जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।2. एंटीबायोटिक थेरेपीडेंटिस्ट की सलाह से एंटीबायोटिक दवाएं लेने से बैक्टीरिया खत्म होते हैं और सूजन कम होती है।3. रूट कैनाल या एक्सट्रैक्शनअगर दांत में गहरा इंफेक्शन है तो रूट कैनाल ट्रीटमेंट या जरूरत पड़ने पर दांत निकालना पड़ सकता है।निष्कर्षदांत का इंफेक्शन सिर्फ मुंह तक सीमित नहीं रहता। यह सिरदर्द, कान दर्द और चेहरे में सूजन जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए दांत में दर्द, सूजन या संक्रमण के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय पर डेंटिस्ट से चेकअप, उचित इलाज और ओरल हाइजीन अपनाने से सिरदर्द और कान दर्द जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।
- हमारे शरीर के लिए विटामिन बी7 भी एक महत्वपूर्ण विटामिन है, जिसे बायोटिन के रूप में भी जाना जाता है। शरीर में विटामिन बी7 की कमी तो बहुत कम लोगों को होती है, लेकिन इसकी कमी के कारण सेहत पर बुरा असर पड़ता है। विटामिन बी7 पानी में घुलनशील विटामिन है, जो विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स ग्रूप का हिस्सा होता है। यह विटामिन शरीर में फैट, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के मेटाबॉलिज्म में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि शरीर में विटामिन बी7 की कमी से क्या होता है?विटामिन B7 की कमी से क्या होता है? -हमारे शरीर में विटामिन बी7 की कमी से न सिर्फ शारीरिक समस्याएं होती है, बल्कि ये मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डालता है। आइए जानते हैं कैसे-1. बालों का झड़नाविटामिन बी7 की कमी का सबसे ज्यादा और पहले असर बालों पर नजर आता है। इस विटामिन की कमी से बालों का झड़ना, बाल पतले होना और कभी-कभी गंजेपन की समस्या भी हो सकती है।2. त्वचा से जुड़ी समस्याएंविटामिन बी7 की कमी से स्किन पर भी लाल चकत्ते, ड्राईनेस, खुजली या स्किन पर पपड़ी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। इस विटामिन की कमी से आपका चेहरा सबसे ज्यादा प्रभावित होता है, जिसमें आंखों, नाक और मुंह के आसपास की स्किन शामिल है।3. थकान और कमजोरीविटामिन बी7 यानी बायोटिन की कमी से व्यक्ति बिना किसी काम के थका-थका महसूस करता है, उसके शरीर में एनर्जी की कमी होने लगती हैं और मांसपेशियां कमजोर हो सकती है।4. मानसिक स्वास्थ्य पर असरविटामिन बी7 की कमी का असर आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।, जिससे मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशर, भ्रण या याददाश्त कमजोर होने की समस्या शामिल है।5. नाखून का कमजोर होनाविटामिन बी7 की कमी न सिर्फ आपकी स्किन और बालों पर असर डालते है, बल्कि ये आपके नाखूनों को भी कमजोर करते हैं, जिससे वे टूटने लगते हैं और नाखून के आसपास की स्किन में बदलाव और सूजन की समस्या हो सकती है।बायोटिन की कमी से कैसे बचें?विटामिन बी7 से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे अंडा, दालें, नट्स, सीड्स, केला और साबुत अनाज का सेवन करें। लेकिन, ध्यान रहे बायोटिन की कमी होने पर कच्चे अंडे का सेवन करने से बचें, क्योंकि ये विटामिन बी7 की कमी का कारण बन सकता है। इसके अलावा अगर आपके शरीर में ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण नजर आते हैं तो डॉक्टर से कंसल्ट करें और डॉक्टर की सलाह पर जरूरत पड़ने पर बायोटिन सप्लीमेंट लें।निष्कर्षविटामिन बी7 यानी बायोटिन की कमी बहुत कम लोगों में होती है, लेकिन जब होती है तो इसकी कमी आपके शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करती है। इसलिए, इसके लक्षणों को पहचान कर समय पर इलाज करवाने की कोशिश करें और इस कमी को दूर करें।
- कॉफी आज के समय में हर नौकरी पेशा व्यक्ति की साथी है, जिसे वह अक्सर थकान मिटाने और नींद भगाने के लिए पीते हैं। एक कप कॉफी शरीर में ऊर्जा भर जाती है और आप वापस से पूरी क्षमता के साथ काम में जुट जाते हैं। हालांकि कई शोधों से पता चला है कि कॉफी सिर्फ नींद भगाने वाला एक पेय ही नहीं, बल्कि यह हमारे लिवर स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है। सालों तक किए गए शोधों से आज यह परिणाम सामने आया है कि नियमित रूप से सीमित मात्रा में कॉफी पीने से लिवर से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है। यह लिवर की सूजन को कम करती है और फैटी लिवर, सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को घटाती है। इस तरह कॉफी स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी साबित हो रही है। तो आइए आज जानते कॉफी के अन्य लाभों के बारे में।कैसे करती है लिवर की सुरक्षा?कॉफी स्वादिष्ट होती है हम सभी जानते हैं। लेकिन इसमें कई गुण मौजूद होते हैं जैसे- एंटीऑक्सिडेंट्स, क्लोरोजेनिक एसिड और कैफीन। यह तत्व लिवर फाइब्रोसिस और लिवर में सूजन के लक्षण को कम करने मदद करते हैं। शोध बताते हैं कि यह नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर कैंसर के जोखिम को भी घटा सकती है। एक अध्ययन के अनुसार, दिन में 2 से 3 कप ब्लैक कॉफी पीने वाले लोगों में लिवर एंजाइम्स बेहतर स्थिति में पाए गए और लिवर से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कम रहा।कब और कैसे करें सेवन?विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह या दोपहर में कॉफी पीना सबसे बेहतर रहता है। देर शाम या रात में इसे पीना नींद न आने का कारण बन सकता है, क्योंकि कॉफी में कैफीन की मात्रा अधिक होती है। वहीं अगर आप दूध वाली कॉफी पीते हैं तो हम आपको बता दे कि ब्लैक कॉफी (बिना चीनी और क्रीम) लिवर के लिए सबसे लाभकारी होती है, न की दूध वाली। वहीं कितनी मात्रा में कॉफी पी जाएं इसके बारे में विशेषज्ञ बताते हैं कि दिन में 2 से 3 कप से अधिक कॉफी न पिएं। अधिक कैफीन से दिल की धड़कन तेज हो सकती है और नींद खराब हो सकती है। वहीं सबसे जरूरी बात कभी भी खाली पेट कॉफी न पिएं। कॉफी को हमेशा किसी हल्के नाश्ते के बाद पीना बेहतर होता है।किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?कॉफी सभी के लिए सही नहीं होती, इसलिए कुछ लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जैसे- गर्भवती महिलाओं को सीमित मात्रा में ही कैफीन लेना चाहिए, क्योंकि अधिक कैफीन से गर्भस्थ शिशु पर प्रभाव पड़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को भी कॉफी का सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए, क्योंकि कैफीन हृदय की धड़कन बढ़ा सकता है। वहीं जिन लोगों को कैफीन से एलर्जी या संवेदनशीलता है, उन्हें कॉफी से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। विशेषज्ञ कहते हैं कि कॉफी यदि सही समय और मात्रा में पी जाए, तो यह लिवर के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक का काम कर सकती है। हालांकि किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह के लिए डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
- भारतीय मसालों में से एक सौंफ का इस्तेमाल खाना पकाने के लिए किया जाता है। इसमें विटामिन-ए, सी और फाइबर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, साथ ही, इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल के गुण पाए जाते हैं। इसके पानी का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं। लेकिन कई बार लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या सौंफ के पानी को पीने से पेट खराब होने या इससे जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।क्या सौंफ का पानी पीने से दस्त हो सकते हैं?सौंफ में अच्छी मात्रा में फाइबर होता है। इसके पानी का सेवन करने से पाचन को दुरुस्त रखने में मदद मिलती है। लेकिन इसका अधिक सेवन करने के कारण लोगों को दस्त होने या पेट खराब होने, पेट दर्द होने मतली होने, उल्टी होने और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती है।अधिक सेवन से बचेंसौंफ के पानी का अधिक सेवन करने से लोगों को पाचन तंत्र में परेशानी होने, मल के नरम होने, हल्की ऐंठन होने और दस्त की समस्या के बढ़ने की समस्या हो सकती है। ऐसे में इसके अधिक सेवन से बचना चाहिए।एलर्जी के कारणकई बार लोगों को सौंफ या इसके पानी से एलर्जी हो सकती है। इसके कारण लोगों को उल्टी, मतली, दस्त होने, पेट में दर्द होने, त्वचा में रेशैज होने की समस्या हो सकती है। ऐसे में एलर्जी की समस्या महसूस होने पर इसके सेवन से बचें।सावधानियां- सौंफ के पानी का अधिक सेवन करने से बचें- धीरे-धीरे शुरु करें, एकदम से सौंफ के पानी का सेवन करने से बचें- एलर्जी होने पर सौंफ के पानी का सेवन करने से बचेंनिष्कर्षसौंफ के पानी का अधिक सेवन करने से लोगों को पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसके कारण लोगों को हल्की ऐंठन होने, दस्त होने, मल के नरम होने, उल्टी, मतली, पेट में दर्द और त्वचा में एलर्जी होने की समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में इसका सेवन सीमित मात्रा में करें। कोई भी परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें और एलर्जी होने पर इसका सेवन करने से बचें।
- भारत में गुड़ को सिर्फ मिठास का सोर्स नहीं है बल्कि सेहत का खजाना भी माना जाता है। खासकर सर्दियों में तो हर घर की रसोई में गुड़ से बनी मिठाइयां, चाय, लड्डू और चक्की जरूर देखने को मिलती हैं। लेकिन गुड़ को लेकर एक सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है कि क्या गुड़ खाने से खून सच में बढ़ता है? हमारी बॉडी में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आयरन बेहद जरूरी है। जब शरीर में आयरन की कमी हो जाती है तो खून की मात्रा कम हो जाती है और एनीमिया जैसी समस्या हो सकती है। आयरन से भरपूर भोजन खून की कमी को दूर करने में मदद करता है।'' ऐसे में गुड़ में नेचुरल रूप से आयरन पाया जाता है और यह शरीर में आसानी से अवशोषित हो जाता है। गुड़ में आयरन की मात्रा लोहे के बर्तनों के कारण होती है। दरअसल, पहले गुड़ बड़े लोहे के बर्तनों में बनाया जाता था और इसलिए पुराने तरीकों से बनाए गए गुड़ में आयरन होता है। इसी वजह से कहा जाता है कि नियमित रूप से सीमित मात्रा में गुड़ खाने से खून की कमी पूरी हो सकती है।गुड़ आयरन का अच्छा सोर्स है, लेकिन इसे चमत्कारिक इलाज नहीं माना जा सकता। हल्के एनीमिया या आयरन की कमी वाले लोगों के लिए गुड़ फायदेमंद साबित हो सकता है। रोजाना 10–20 ग्राम गुड़ का सेवन सेहत को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। गंभीर एनीमिया की स्थिति में सिर्फ गुड़ खाना काफी नहीं है, बल्कि डॉक्टर की सलाह से आयरन सप्लीमेंट्स और अन्य ट्रीटमेंट भी जरूरी हैं।गुड़ खाने के फायदे-आयरन कंटेंट की वजह से एनीमिया में लाभकारी।-खाना खाने के बाद गुड़ खाने से गैस, अपच और एसिडिटी की समस्या कम होती है।-गुड़ को नेचुरल एनर्जी बूस्टर माना जाता है।-खून साफ करने से स्किन पर नेचुरल ग्लो आता है।-इसमें मौजूद मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी मजबूत करते हैं।निष्कर्षगुड़ जरूरी मिनरल्स से भरपूर एक नेचुरल स्वीटनर है, जो खून की कमी को पूरा करने में मददगार साबित हो सकता है। हालांकि, यह किसी मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं है। यदि किसी को गंभीर एनीमिया या अन्य ब्लड से जुड़ी समस्या है तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। संक्षेप में कहा जाए तो हां, गुड़ खाने से खून बढ़ सकता है, लेकिन संतुलित मात्रा और सही डाइट के साथ ही इसका पूरा फायदा मिलता है।
- कई लोग अपने बालों को काला करने के लिए तरह-तरह की केमिकल वाली डाई का इस्तेमाल करते हैं, जिससे हमारे बाल पहले से ज्यादा रूखे व बेजान हो जाते हैं। साथ ही जब रंग छुटता है तो पहले की तुलना में अधिक बाल सफेद आते हैं। ऐसे में अगर आप सफेद बालों की इस समस्या को अनदेखा कर रहे हैं तो ये बहुत बड़ी गलती है। बालों का सफेद होना सीधे तौर पर दर्शाता है कि आपका शरीर एक विटामिन मिस कर रहा है। आइए आपको बताते हैं ये कौन सा विटामिन है।किस विटामिन की कमी से बाल सफेद होते हैं?हमारे बालों के सफेद होने का कारण है शरीर में विटामिन बी 12 की कमी का होना। विटामिन बी 12 की कमी का सीधा असर हमारे बालों पर पड़ता है, क्योंकि रेड ब्लड सेल्स के प्रोडक्शन को हेल्दी नर्वस सिस्टम के लिए बहुत जरूरी होता है। अगर इस विटामिन की कमी हो जाए तो मेलेनिन प्रोडक्शन कम होने लगता है जिससे बाल समय से पहले सफेद होने लगते हैं।विटामिन बी 12 की पूर्ति कैसे करें?जरूरी नहीं है कि आप दवाइयां खाकर ही अपने शरीर में विटामिन बी 12 की कमी को पूरा करें। इसके अलावा आप चाहें तो मांस, मछली, अंडा, दूध आदि खाकर इस कमी को पूरा कर सकता है। अगर आप मांस नहीं खाते हैं तो विटामिन बी 12 के सप्लीमेंट्स का सहारा भी ले सकते हैं।बालों को काला करने का नेचुरल तरीकाविटामिन बी 12 की पूर्ति करने के अवाला आप अपनी डाइट में भीगे हुए मेथी के बीज, आंवला, डेयरी प्रोडक्ट, हरी सब्जियां व नट्स खाना शुरू कर दें। इसी के साथ आप समय-समय पर अपने बालों पर तेल लगाएं और उन्हें नरिश रखें। साथ ही बेहतर होगा कि आप केमिकल वाले शैम्पू का कम से कम इस्तेमाल करें।जब हम ज्यादा मात्रा केमिकल वाले हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं तो ये हमारे हेयर फॉलिकल्स को कमजौर करने का काम करता है। ये हमारे बालों को पतला भी करने का काम करते हैं। इसलिए अगर आप अपने बालों को समय से पहले सफेद होने से बचाना चाहते हैं तो केमिकल की जगह नेचुरल प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें।
- नारियल सेहत को तो कई फायदे पहुंचाता है. साथ ही भारतीय संस्कृति में इसे काफी शुभ भी माना जाता है. भारत के अलावा थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में भी नारियल लाइफस्टाइल का एक अहम हिस्सा है. हालांकि, आज भी कई लोग इसके फायदों से अनजान है. ऐसे में कोकोनट का महत्व समझाने और इसके फायदों के बारे में लोगों में जागरुकता फैलाने के लिए हर साल 2 सितंबर को ‘वर्ल्ड कोकोनट डे’ मनाया जाता है.नारियल की झाल, इसका गूदा, पानी और यहां तक की पत्तियां भी पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं और सेहत के लिए लाभकारी भी. नारियल के बारे में कुछ ऐसी बातें भी हैं, जिनके बारे में हर किसी को पता होना चाहिए. चलिए आज इस आर्टिकल में जानते हैं नारियल से जुड़ी 5 अहम बातें. साथ ही इसके क्या-क्या फायदे हैं और इसे हम अपनी डाइट में कैसे शामिल कर सकते हैं.क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड कोकोनट डे ?इंटरनेट पर मिली जानकारी के मुताबिक, वर्ल्ड कोकोनट डे मनाने की शुरुआत साल 2009 में 2 सितंबर को हुई थी. इस दिन की शुरुआत Asian and Pacific Coconut Community ने की थी. आज भी ये ग्रुप बड़े धूम-धाम से इस दिन को मनाता है. वर्ल्ड कोकोनट डे मनाने का उद्देश्य दुनियभार में नारियल के महत्व और इसके फायदों के बारे में जागरुकता फैलाना है.नारियल से जुड़ी 5 अहम बातें1. ‘जीवन का वृक्ष’ कहलाता है नारियल का पेड़नारियल के पेड़ को Life Of Tree कहा जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि नारियल के पेड़ का हर हिस्सा किसी न किसी काम आता है. चाहे फिर वो नारियल की झाल हो, इसका पानी, गूदा और यहां की पत्तियां भी इस्तेमाल की जाती हैं. इसके अलावा ये भारतीय संस्कृति में शुभ भी माना जाता है. सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में नारियल लाइफस्टाइल का एक अहम हिस्सा बना हुआ है, जिसे खाने बनाने से लेकर कई तरह से इस्तेमाल किया जा रहा है.2. नारियल तेल पचने में आसाननारियल तेल को सेहत के लिए काफी लाभकारी माना जाता है. इसमें MCT यानी Medium-Chain Triglyceride होता है. ये पचने में आसान होते हैं. इसके अलावा नारियल तेल एनर्जी बढ़ाने का एक बेहतरीन स्त्रोत है और मेटाबॉलिज्म को भी तेज करता है. साथ ही हार्ट के लिए भी अच्छा होता है.3. पोषक तत्वों से भरपूर नारियलनारियल पोषक तत्वों का भंडार है. इसमें फाइबर की मात्रा काफी ज्यादा होती है, जिससे ये वजन घटाने के लिए काफी अच्छा है. इसके अलावा इसमें सैचुरेटिड फैट पाया जाता है. मैग्निशियम, कॉपर, आयरन और सेलेनियम का भी अच्छा सोर्स है. वहीं, नारियल पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स भरपूर होता है.4. कोकोनट नाम कैसे पड़ा?कोकोनट शब्द पुर्तगाली शब्द ‘कोको’ से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है खोपड़ी, सिर या बंदर. नारियल की शेप इसी तरह की होती है, ऐसे में 16वीं शताब्दी में नारियल को कोकोनट नाम पुर्तगालियों द्वारा दिया गया है.5. द्वितीय विश्व युद्ध में IV ड्रिप की तरह हुआ था यूजनारियल से जुड़ी ये रोचक बात आपको हैरान कर सकती है. कहा जाता है कि, वर्ल्ड वॉर II में नारियल पानी का यूज IV ड्रिप की तरह किया गया था. क्योकि उस समय पर्याप्ट मात्रा में ब्लड प्लाज्मा और कई तरह की मेडिकल सप्लाई कम हो गई थी, जिसके बाद नारियल पानी का इस्तेमाल किया गया था. इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे पोटेशियम, सोडियम) और विटामिन सी, बी-कॉम्प्लेक्स पाए जाते हैं.
- अक्सर लोग मुंह से बदबू आने, छाले होने, दांतों से जुड़ी समस्या होने और मसूड़ों से जुड़ी कई ओरल हेल्थ समस्याओं से परेशान रहते हैं। इससे राहत के लिए अक्सर लोगों को ओरल हेल्थ की खास देखभाल करने और नियमित रूप से दिन में 2 बार ब्रश करने जैसी सलाह दी जाती है। इसके अलावा, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक और औषधीय गुणों से भरपूर चिरचिटा के पत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है।ओरल हेल्थ के लिए चिरचिटा के पत्तों के फायदेचिरचिटा के पत्तों में औषधीय गुण होते हैं, साथ ही, इसमें एटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण भी होते हैं। इसका इस्तेमाल करने से ओरल हेल्थ में सुधार करने में मदद मिलती है।मुंह के छालों से दे राहतआयुर्वेद के अनुसार, चिरचिटा के पत्तों का इस्तेमाल करने या इनको कच्चा चबाने से मुंह के छाले को कम करने, इसके घाव को तेजी से भरने और इसके कारण होने वाली दर्द और सूजन की समस्या से भी राहत देने में मदद मिलती है।मसूड़ों की समस्या से दे राहतचिरचिटा के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण होते हैं। इसका इस्तेमाल करने से मसूड़ों में बैक्टीरिया के जमाव को रोकने, सूजन को कम करने, दर्द कम करने, इंफेक्शन से बचाव करने और ब्लीडिंग की समस्या से राहत देने में मदद मिलती है।दांतों के पीलेपन से दे राहतचिरचिटा के पत्तों में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण पाए जाते हैं। इसका सेवन करने से दांतों के दर्द से राहत देने, प्लाक के निर्माण को कम करने, पीलेपन को कम कर नेचुरली सफेद बनाए रखने, कैविटीज से बचाव करने, दांतों की सड़न और दांतों की सेंसिटिविटी को कम करने में मदद मिलती है।मुंह की बदबू से दे राहतचिरचिटा के पत्तों में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-बैक्टीरियल के गुण होते हैं। इसका इस्तेमाल करने से मुंह की बदबू से राहत देने, मुंह के इंफेक्शन से बचाव और मुंह में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद मिलती है।बीमारियों से बचाव करेचिरचिटा के पत्तों में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण ओरल हेल्थ में सुधार करने, बैक्टीरिया को खत्म करने और मुंह से जुड़ी बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है।ओरल हेल्थ के लिए कैसे करें चिरचिटा के पत्तों का इस्तेमाल?ओरल हेल्थ में सुधार करने के लिए चिरचिटा के पत्तों को कई तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है।- सुबह के समय 1-2 चिरचिटा के पत्तों को चबाने से मुंह को साफ करने, मुंह की बदबू को कम करने और मसूड़ों के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है।- चिरचिटा के पत्तों को पानी में 10 मिनट के लिए उबाल कर, इस पानी को माउथवॉश की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे मसूड़ों की सूजन को कम करने, इनसे जुड़ी समस्याओं से राहत देने, दांतों में कैविटीज से बचाने और दांतों के पीलेपन को कम करने में मदद मिलती है।- चिरचिटा की ताजा पत्तियों का पेस्ट बनाकर इसको सीधे तौर पर मुंह के छाले, दांतों में दर्द और मसूड़ों पर 5 मिनट के लिए लगाया जा सकता है। इसके बाद कुल्ला कर लें।- चिरचिटा के पत्तों के पाउडर को टूथपेस्ट में मिलाकर इससे ब्रश भी किया जा सकता है।निष्कर्षचिरचिटा के पत्तों का इस्तेमाल करने से ओरल हेल्थ में सुधार करने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रहे, इससे किसी भी तरह की एलर्जी होने पर इसके इस्तेमाल से बचें। इसके अलावा, किसी मेडिकल कंडीशन से पीड़ित होने, ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं और प्रेग्नेंसी के दौरान इसके इस्तेमाल से बचें। ओरल हेल्थ से जुड़ी अधिक समस्या महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
- आंखों के नीचे नजर आने वाले काले घेरों को लोग अकसर कमजोरी या नींद ना पूरी होने का कारण मानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, ये काले घेरे आपकी सेहत से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेत भी देते हैं। जी हां, आंखों के नीचे के ये काले घेरे शरीर में कुछ खास विटामिन्स की कमी की ओर इशारा करते हैं। अगर आपकी आंखों के नीचे भी काले घेरे बने हुए हैं और आप हैरान हैं कि पूरी नींद लेने के बावजूद ये काले निशान आपकी आंखों की खूबसूरती को क्यों कम कर रहे हैं तो जान लें इसके पीछे इन विटामिन्स की कमी कारण हो सकती है।विटामिन के की कमीविटामिन के शरीर में उचित रक्त संचार और रक्त के थक्के जमने के लिए आवश्यक होता है। शरीर में इसकी कमी से रक्त जमा हो सकता है, जिससे काले घेरे हो सकते हैं। शरीर में इस विटामिन की कमी होने पर त्वचा का पतला होना, आसानी से चोट लगना, और काले घेरे का बढ़ना जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं। इस विटामिन की कमी होने पर डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, केल, मछली, अंडे, और मांस शामिल करें।विटामिन बी12 की कमीविटामिन बी12 लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन के लिए जरूरी होता है। लाल रक्त कोशिकाओं की कमी से एनीमिया हो सकता है, जिससे काले घेरे हो सकते हैं। विटामिन बी12 के लक्षणों में थकान, कमजोरी, पीली त्वचा, और सांस फूलना शामिल होता है। शरीर में इस विटामिन की कमी को पूरा करने के लिए डाइट में मछली, मांस, अंडे, दूध, और फोर्टिफाइड अनाज शामिल करें।विटामिन सी की कमीविटामिन सी कोलेजन उत्पादन के लिए जरूरी होता है, जो त्वचा की लोच बढ़ाता है। विटामिन सी की कमी होने पर आंखों के नीचे की त्वचा की कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं, जिससे काले घेरे होने लगते हैं। शरीर में विटामिन सी की कमी होने पर त्वचा में रूखापन, थकान, और बार-बार बीमार पड़ने जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं। इस विटामिन की कमी पूरी करने के लिए डाइट में आंवला, संतरा, नींबू, स्ट्रॉबेरी, शिमला मिर्च, और टमाटर को शामिल करें।विटामिन ईविटामिन ई त्वचा को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाता है। इसकी कमी से त्वचा की चमक कम हो सकती है और आंखों के नीचे काले घेरे बढ़ सकते हैं। विटामिन ई की कमी होने पर त्वचा का रूखापन, झुर्रियां, और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जैसे लक्षण नजर आते हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए डाइट में बादाम, सूरजमुखी के बीज, एवोकाडो, और हरी सब्जियां शामि करें।विटामिन ए की कमीविटामिन ए त्वचा की मरम्मत और रखरखाव के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से त्वचा शुष्क और बेजान हो सकती है, जिससे आंखों के नीचे की त्वचा पतली होकर काले घेरे उभर सकते हैं। इसके लक्षणों में रूखी त्वचा, रतौंधी और आंखों में सूखापन देखा जा सकता है। इस विटामिन की कमी को पूरा करने के लिए डाइट में गाजर, शकरकंद, कद्दू, पालक, और मछली का तेल शामिल करें।शरीर में इन 5 विटामिन्स के अलावा इन कारणों से भी आंखों के नीचे काले घेरे हो सकते हैंआयरन की कमीशरीर में आयरन की कमी होने पर त्वचा के ऊतकों में रक्त संचार और ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी आ सकती है। जिसकी वजह से आंखों के नीचे की त्वचा पीली और काली पड़ सकती है।नींद की कमी7-8 घंटे की अच्छी नींद न लेने की वजह से भी आपका चेहरा पीला पड़ सकता है। लंबे समय तक जागने से आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स हो सकते हैं।ज्यादा स्क्रीन टाइमफोन और लैपटॉप स्क्रीन का ज्यादा और लंबे समय तक इस्तेमाल करने से आंखों के नीचे काले घेरे हो सकते हैं। यह नीली रोशनी के संपर्क में आने से होता है।
- जब साइटिका नर्व में दर्द होता है, तो उसे हम साइटिका पेन कहते हैं। यह नर्व हमारे शरीर की सबसे लंबी नर्व है, जो कि नितंब से होते हुए पैरों तक जाती है। जब साइटिका नर्व पर दबाव बनता है, तब यह समस्या पैदा होती है। अगर इसके कारणों का जिक्र करें,तो इस बारे में डॉक्टरों का कहना है कि स्लिप्ड डिस्क, स्पाइनल स्टेनोसिस आदि शामिल हैं। साइटिका पेन होने पर पैरों में झुनझुनाहट, सुन्नपन, पैरों में कमजोरी जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं। बहरहाल, माना जाता है कि कभी-कभी खरबा जीवनशैली भी साइटिका का कारण बन सकती हैं। यह भी लोगों के बीच प्रचलित है कि लंबे समय तक बैठे रहने के कारण साइटिका हो सकता है। आइए जानते हैं कि इस बात में कितनी सच्चाई है?क्या लंबे समय तक बैठे रहने के कारण साइटिका हो सकता है?-डॉक्टरों के अनुसार "यह सच है कि लंबे समय तक बैठे रहने के कारण साइटिका हो सकता है। यहां तक कि बैठे रहने से साइटिका का दर्द बढ़ सकता है, जो कभी-कभी असहनीय हो जाता है।" सवाल है, ऐसा क्यों होता है? जब आप लंबे समय तक एक ही अवस्था में बैठे रहते हैं, तो ऐसे में स्पाइन, डिस्क और साइटिका नर्व पर दबाव पड़ता है। पीठ के निचले हिस्से और हिप्स पर भी अतिरिक्त प्रेशर बढ़ने की वजह से साइटिका का दर्द बढ़ने लगता है। यहां तक कि खराब तरीके से बैठने की पोजिशन आपके स्पाइनल में बदलाव कर सकती है, जो कि साइटिका पेन को ट्रिगर करती है।"लंबे समय तक बैठे रहने से साइटिका का दर्द ट्रिगर कैसे होता हैशरीर के निचले हिस्से पर दबावजब आप एक ही अवस्था में लंबे समय तक बैठते हैं और यही प्रक्रिया लंबे समय तक फॉलो करते हैं। इससे एक ही हिस्से पर बार-बार प्रेशर बनता है। खासकर, शरीर के निचले हिस्से पर यह दबाव अधिक पड़ने लगता है, जिससे साइटिका हो सकता है। इसके अलावा, जिन लोगों का वजन ज्यादा है या ओबेसिटी का शिकार हैं, उनमें इस तरह की दिक्कत अधिक देखने को मिलती है।डिस्क डिजनरेशनसमय के साथ और लगातार बैठने के कारण शरीर के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ता जाता है, जोकि स्पाइन डिस्क को नुकसान पहुंचाता है, उसे खराब कर सकता है, जो कि हर्निएटेड डिस्क की वजह बनता है। ऐसे में साइटिका का रिस्क भी बढ़ जाता है।स्पाइन पर प्रेशरजब आप बैठते हैं कि आपके शरीर का काफी ज्यादा भार आपकी स्पाइन पर होता है। यह खड़े रहने की तुलना में अधिक है। नतीजतन स्पाइन डिस्क पर नेगेटिव असर पड़ता है और स्पाइनल डिस्क और साइटिका जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ने लगता है।साइटिका दर्द से कैसे आराम पाएं-अपने पोस्चर में सुधार करें।-लंबे समय तक एक पोजिशन पर न बैठें।-अपने कोर मसल्स की स्ट्रेंथ बढ़ाएं।-लंबे समय तक बैठे रहने के बजाय खड़े होकर काम करें।-बैठकर काम करना है, तो समय-समय पर ब्रेक लें।निष्कर्षइस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि लंबे समय तक बैठे रहने के कारण साइटिका का दर्द होता है या इसकी कंडीशन बिगड़ सकती है। इसलिए, आप कोशिश करें कि लंबे समय तक एक ही जगह पर न बैठें। साथ ही, अपनी जीवनशैली में अच्छी आदतों को अपनाकर साइटिका के दर्द को मैनेज कर सकते हैं। जैसे मोटापा कम करना और एक्सरसाइज करना।
- भागदौड़ करने के बाद घर लौटने या गर्मी-उमस के मौसम में लगने वाली तेज प्यास बुझाने के लिए नींबू पानी पीना बहुत फायदेमंद होता है। नींबू पानी पीते ही प्यास तो बुझती ही है साथ ही तुरंत एनर्जी भी मिलती है। वहीं, कुछ लोग सुस्ती-थकान दूर करने के लिए बार-बार नींबू पानी पीते हैं। जबकि वेट लॉस के लिए सुबह खाली पेट नींबू पानी पीने की आदत भी बहुत-से लोगों में देखी जाती है। लेकिन वहीं, कुछ लोगों के लिए नींबू पानी का सेवन बिल्कुल फायदेमंद नहीं होता। यहां पढ़ें कि किन लोगों को नींबू पानी पीने से बचना चाहिए और क्या हैं इसके नुकसान।बढ़ सकती है दांतों में सेंसिटिविटीनींबू के रस में साइट्रिक एसिड पाया जाता है जो आपके दांतों की सबसे ऊपर की लेयर को डैमेज कर सकता है। इससे आपके दांतों में सेंसिटिविटी की समस्या हो सकती है।किडनी की बीमारी मे ना पिएं नींबू पानीअगर किसी को किडनी से जुड़ी कोई समस्या है तो उन्हें नींबू पानी नहीं पीना चाहिए। इससे किडनी को डैमेज पहुंच सकता है।कमजोर पाचन शक्ति वालेजिन लोगों को कमजोर डाइजेशन की समस्या होती है उन्हें नींबू पानी संभलकर पीना चाहिए। दरअसल, नींबू पानी पीने से डाइजेस्टिव सिस्टम का काम बिगड़ सकता है और इससे एसिडिटी और पेट में अल्सर जैसी परेशानियां हो सकती हैं।बढ़ सकता है जॉइंट पेनक्या आप जानते हैं कि नींबू पानी पीने से जोड़ों में दर्द की समस्या बहुत बढ़ सकती है। दरअसलस नींबू में पाए जाने वाले एसिड्स शरीर में कैल्शियम का लेवल कम कर देते हैं। इससे जोड़ों का दर्द बढ़ सकता है।स्किन एलर्जीनींबू पानी पीने के बाद कई लोगों की स्किन में खुजली और रैशेज जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। दरअसल, नींबू पानी एलर्जिक रिएक्शन्स बढ़ा देता है जिससे स्किन पर एलर्जी के लक्षण दिखायी दे सकते हैं।गॉलब्लैडर स्टोन में नींबू पानी है नुकसानदायकपित्त की पथरी या गॉलब्लैडर में स्टोन्स की समस्या हो तो नींबू पानी का सेवन संभलकर ही करें क्योंकि इससे आपकी समस्या गम्भीर हो सकती है।
- हेयर फॉल की समस्या मानसून में बहुत अधिक बढ़ जाती है और इसका सीधा असर मौसम में होने वाले बदलावों से है। दरअसल, मानसून में बालों की जड़ों की मजबूत कम होने लगती है। जिससे बाल कमजोर होकर टूटने लगते हैं और हेयर फॉल की समस्या बढ़ जाती है। बालों के झड़ने की ये समस्या कम करने के लिए नारियल तेल और प्याज का इस्तेमाल कर सकते हैं।प्याज से रोके बालों का झड़नाबालों के लिए प्याज एक गुणकारी नुस्खा है। प्याज में पाए जाने वाले सल्फर और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो बालों को हेल्दी और स्ट्रॉन्ग बनाते हैं। जिससे बालों का टूटना और कमजोर होने जैसी परेशानियां कम होती हैं।बालों में प्याज कैसे लगाएं?1 प्याज को काटकर उसका पेस्ट बना लें। इसे 100 मिली नारियल तेल में मिलाकर अच्छी तरह उबाल लें। प्याज और नारियल तेल को तब तक उबालें जब तक कि तेल का मिश्रण लाल ना हो जाए। जब तेल अच्छी तरह पक जाए तो मिश्रण को आंच से उतारकर ठंडा होने के लिए रख दें।बालों में ऐसे लगाएं प्याज-नारियल का तेलप्याज और नारियल तेल के मिश्रण को ठंडा होने का बाद छान लें और किसी जार में रख दें। फिर, इस तेल से सिर की मालिश करें।कितनी देर तक लगाकर रखें बालों में तेलबालों में 1-2 घंटे तक प्याज वाला नारियल तेल लगाकर रखें। फिर, किसी माइल्ड शैम्पू और पानी से सिर को धो लें।बालों में नारियल तेल-प्याज लगाने के फायदेनारियल तेल बालों के लिए नेचुरल मॉइस्चराइजर की तरह काम करता है। यह ड्राई और अनमैनेजबल बालों को सॉफ्ट बनाता है, जिससे बाल सॉफ्ट और सुलझे हुए बनते हैं।
- क्या आपने कभी नोटिस किया है कि शहरों में कामकाजी लोगों के चेहरों से मुस्कान जैसे गायब होती जा रही है! दिनभर में आप कितने ऐसे लोगों को देखते हैं जिनके चेहरे पर हंसी या मुस्कान रहती है. सड़कों पर चलने या काम पर जाने वाले या फिर काम से लौटकर आने वाले लोगों के चेहरे को देखने से पता चलेगा कि लोगों के जीवन से स्माइल कहीं गायब हो रही है. क्या इसमें लाफ्टर थेरेपी मदद कर सकती है समझेंगे इस आर्टिकल में.आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में तनाव हर किसी की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है. नौकरी का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और हेल्दी न रहने वाली लाइफस्टाइल का असर सबसे पहले हमारे दिमाग और दिल पर पड़ता है. ऐसे में लोग मेडिटेशन, योग और एक्सरसाइज को अपनाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि सिर्फ़ हँसने से भी दिमाग और दिल दोनों हेल्दी रह सकते हैं?क्या होती है लाफ्टर थेरेपी है?गाजियाबाद के जिला अस्पताल में मानसिक रोग विभाग में डॉ. ए. के विश्वकर्मा बताते हैं कि ये एक ऐसा तरीका है जिसमें लोग जोर से हंस-हंसकर तनाव को कम करते हैं. इसे ग्रुप में किया जाता है जिसे हम अक्सर पार्कों या गार्डन में सुबह-सुबह देखते है. यहां लोग जोर जोर से हंसते हैं और अपने तनाव को कम करते हैं. माना जाता है कि खुलकर हंसने से हमारे दिमाग में एंडॉर्फिन हार्मोन रिलीज होते हैं. इस हार्मोन से हमें अच्छा महसूस होता है और तनाव कम रहता है.लाफ्टर थेरेपी का दिमाग पर असरहंसने से दिमाग हल्का और फ्रेश रहता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि लाफ्टर थेरेपी करने वाले लोगों में चिंता और डिप्रेशन के लक्षण कम हो जाते हैं.जब हम हंसते हैं तो हमारे दिमाग में मौजूद स्ट्रेस हार्मोन यानी कॉर्टिसोल का लेवल कम हो जाता है.लाफ्टर थेरेपी करने से मूड भी बेहतर रहता है और सोच भी पॉजिटिव आती है.कई स्टडी में यह भी पाया गया है कि लाफ्टर थेरेपी करने वाले बुजुर्गों की मेमोरी और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी बेहतर हो जाती है.लाफ्टर थेरेपी का दिल पर असरलाफ्टर थेरेपी करने से दिल भी हेल्दी रहता है. जब हम हंसते हैं तो ब्लड वेसल्स फैलती है जिससे खून का सर्कुलेशन बेहतर होता है. जब खून का फ्लो बढ़िया रहता है तो ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है और दिल की धड़कन स्थिर रहती है. डॉक्टरों का कहना है कि खुलकर हंसने से शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और धमनियों में जमी चर्बी का असर कम होता जाता है. इसलिए कहा जाता है दिल खोलकर हंसना चाहिए जिससे दिल की बीमारियां दूर रहती है.इम्यूनिटी भी होती है मजबूतलाफ्टर थेरेपी का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह हमारी इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है. हंसने के दौरान शरीर में बनने वाले पॉज़िटिव हार्मोन इम्यून कोशिकाओं को सक्रिय करते हैं, जिससे बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है.लाफ्टर थेरेपी सोशल कनेक्शन भी बेहतरलाफ्टर थेरेपी अक्सर ग्रुप में की जाती है. इसमें लोग मिलकर हँसते हैं, एक्टिविटी करते हैं और बातचीत करते हैं. इससे लोगों के बीच सामाजिक जुड़ाव बढ़ता है. जो लोग अकेलापन महसूस करते हैं या डिप्रेशन में होते हैं, उनके लिए यह थेरेपी बहुत कारगर मानी जाती है.क्या हर किसी के लिए सुरक्षित है?लाफ्टर थेरेपी वैसे तो कोई भी ले सकता है. ज्यादातर से फायदेमंद ही होती है. हालांकि जान लोगों को दिल से जुड़ी कोई गंभीर बीमारी पहले से है उनको डॉक्टर से सलाह लेकर ही लाफ्टर थेरेपी में शामिल होना चाहिए. बाकि लोग इसे आराम से रोजाना कर सकता है. घर, पड़ोस या काम की जगहों, दफ्तरों में भी लोग लाफ्टर थेरेपी करने के लिए अलग से समय निर्धारित करने लगे हैं.
- कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds), कद्दू के अंदर पाए जाने वाले छोटे हरे-भूरे बीज होते हैं। ये बीज, पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-ई, जिंक, मैग्नीशियम और हेल्दी फैट्स मौजूद होते हैं। ये बीज, स्नैक, सलाद, स्मूदी या सब्जियों में डाले जा सकते हैं। कद्दू के बीज हार्ट, पाचन तंत्र और लिवर की सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। अक्सर लोग इसे बस एक सामान्य बीज मान लेते हैं, लेकिन कद्दू के बीज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और लिवर की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं। इस लेख में हम जानेंगे लिवर के लिए कद्दू के बीज खाने के फायदे।1. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता हैकद्दू के बीज में जिंक और विटामिन-ई जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट्स, ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं। ये एंटी-ऑक्सीडेंट्स, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं, जो सूजन और लिवर को नुकसान पहुंचाने का मुख्य कारण है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस वह प्रक्रिया है जिसमें हानिकारक फ्री रेडिकल्स हमारी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।2. लिवर को मजबूत बनाने में मदद मिलती हैकद्दू के बीज में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स लिवर की कोशिकाओं को सुरक्षा देते हैं और फ्री रेडिकल्स को हटाकर, लिवर को रिपेयर और मजबूत होने की प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं।3. लिवर की सूजन कम होती हैकद्दू के बीज में गुड फैट्स जैसे ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड होते हैं। इन फैटी एसिड्स में सूजन कम करने वाली विशेषताएं होती हैं, जिससे लिवर की कोशिकाओं को रिपेयर करने में मदद मिलती है। चूंकि लिवर में लगातार सूजन फैटी लिवर, फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ाती है, इसलिए सूजन कम करने वाले फूड्स जैसे कद्दू के बीज का सेवन जरूरी है।4. लिवर डिटॉक्स में मदद मिलती हैकद्दू के बीज में मैग्नीशियम होता है, जो शरीर में 300 से ज्यादा एंज़ाइम वाली गतिविधियों में मदद करता है, जिसमें लिवर का डिटॉक्सिफिकेशन भी शामिल है। कद्दू के बीज में मौजूद मैग्नीशियम, एनर्जी मेटाबॉलिज्म और लिवर के कामकाज को बेहतर बनाकर यह सुनिश्चित करता है कि लिवर, अपशिष्ट पदार्थों और हानिकारक तत्वों को ठीक से प्रोसेस कर सके।5. लिवर स्ट्रेस कम होता हैकद्दू के बीज में फाइबर और प्लांट-बेस्ड प्रोटीन भी होते हैं, जो आंतों में संतुलित बैक्टीरिया को सपोर्ट करता है। यह हानिकारक बैक्टीरिया और टॉक्सिन्स को लिवर तक पहुंचने से रोकता है। साथ ही स्वस्थ गट फ्लोरा को मेनटेन करता है जिससे लिवर पर तनाव कम होता है।निष्कर्ष:अपने आहार में कद्दू के बीज को शामिल करना, लिवर के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है। ये डिटॉक्सिफिकेशन को बढ़ाते हैं, सूजन को कम करते हैं और शरीर को एंटी-ऑक्सीडेंट सुरक्षा देते हैं।
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अक्सर लोगों को सर्दी-जुकाम, नाक, गले और कान से जुड़ी कोई भी समस्या होने पर भाप लेने की सलाह दी जाती है। इससे गले को खोलने, सर्दी-जुकाम की समस्या से राहत देने, सूजन को कम करने और गले की खराश से राहत देने में मदद मिलती है। वहीं, इम्यूनिटी को बूस्ट करने के लिए औषधीय गुणों से भरपूर हल्दी का सेवन करना भी फायदेमंद है। इससे स्वास्थ्य की कई समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है। लेकिन क्या हल्दी से भाप लेने से क्या होता है? आइए जानें हल्दी के पानी से भाप लेने के क्या फायदे हैं?
हल्दी के पानी से भाप लेने के फायदेआयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक और औषधीय गुणों से भरपूर हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-माइक्रोबियल के गुण पाए जाते हैं। इसके पानी से भाप लेने से स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं।साइनस को डिटॉक्स करेहल्दी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण होते हैं। ऐसे में इससे भाप लेने से साइनस को डिटॉक्स करने, बलगम को बाहर निकालने, सूजन को कम करने और साइनस की जकड़न को कम करने में मदद मिलती है।गले की खराश से दे राहतहल्दी की भाप लेने से गले के बैक्टीरिया से राहत देने, सूजन को कम करने, खांसी से राहत देने, कफ को ढीला करने, ब्रोंकाइटिस से राहत देने, गले की जलन और खराश से राहत देने में मदद मिलती है।श्वसन मार्ग के लिए फायदेमंदहल्दी में एंटी-सेप्टिक, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण होते हैं। इससे श्वसन मार्ग को बेहतर करने, बंद नाक, सर्दी-जुकाम, फ्लू से राहत देने, नाक को साफ करने, नाक की सूजन को कम करने और इंफेक्शन से बचाव करने में मदद मिलती है।लंग्स को हेल्दी रखने में सहायकहल्दी की भाप लेने से बलगम को ढीलाकर बाहर निकालने, सूजन को कम करने, लंग्स के कार्यों को बेहतर करने, लंग्स को हेल्दी करने, डिटॉक्स करने, लंग्स का किसी भी इंफेक्शन से बचाव करने और खुलकर सांस लेने में मदद मिलती है।स्किन को डिटॉक्स करेहल्दी की स्टीम लेने से त्वचा में जमा गंदगी को साफ करने, स्किन को हाइड्रेट करने, स्किन को सॉफ्ट करने, दाग-धब्बों को कम करने, स्किन का इंफेक्शन से बचाव करने, मुंहासों को कम करने, त्वचा की सूजन को कम करने, स्किन को सॉफ्ट और शाइनी बनाने में मदद मिलती है।इम्यूनिटी बूस्ट करेहल्दी में एंटी-बैक्टीरियल और कई अन्य गुण पाए जाते हैं। इसका भाप लेने से इम्यूनिटी को बूस्ट करने और संक्रमण से बचाव करने में मदद मिलती है, जिससे बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है।कैसे लें हल्दी के पानी से भाप?इसके लिए 1 बर्तन में पानी उबालें। इसके बाद इसमें आधा छोटी चम्मच हल्दी पाउडर को डालकर अच्छे से मिला लें। अब सिर को तौलिए की मदद से ढककर सांस लें। इससे कई लाभ मिलते हैं।सावधानियांभाप लंबे समय तक न लें। इसके कारण लोगों को जलन की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, श्वसन मार्ग से जुड़ी किसी भी समस्या से पीड़ित व्यक्ति भाप लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें और भाप लेते समय आंखों को बंद रखें, जिससे आंखों की किसी भी समस्या से बचा जा सकें। -
नारियल तेल (Coconut Oil) न सिर्फ बालों, बल्कि त्वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-ऑक्सीडेंट और मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं, जो चेहरे की गहराई से सफाई करके उसे नमी प्रदान करते हैं। साथ ही यह दाग-धब्बों, मुंहासों के निशान और झुर्रियों को भी धीरे-धीरे कम करने में मदद करता है। अगर आप प्राकृतिक रूप से दमकती और साफ त्वचा पाना चाहते हैं तो रोजाना नारियल तेल से मसाज जरूर करें। आज हम आपको 5 आसान स्टेप्स बता रहा हैं, जिसे अपनाकर आप अपने चेहरे को निखार सकते हैं।
चेहरे की सफाई करेंमसाज से पहले चेहरे को माइल्ड फेस वॉश या गुनगुने पानी से अच्छी तरह धो लें, ताकि सारी गंदगी, धूल और ऑयल हट जाए। इससे तेल बेहतर तरीके से त्वचा में समा सकेगा। अगर आप हार्ड वाटर की जगह सॉफ्ट वाटर का इस्तेमाल करेंगे तो यह आपकी स्किन के लिए और ज्यादा अच्छा रहेगा।नारियल तेल लेंअब एक छोटी कटोरी में शुद्ध नारियल तेल (ऑर्गेनिक वर्जिन कोकोनट ऑयल) लें। ध्यान रखें कि तेल बहुत अधिक गर्म न हो। अगर ठोस रूप में है तो उसे हथेली पर रगड़कर पिघला सकते हैं। नारियल तेल को गर्म करने की जरूरत नहीं है, तो हल्की गर्मी मिलते ही पिघलने लगता है।हल्के हाथों से मसाज करेंतेल को उंगलियों की सहायता से पूरे चेहरे पर लगाएं और हल्के हाथों से 5-10 मिनट तक गोल-गोल घुमाते हुए मालिश करें। खासकर दाग-धब्बों वाले हिस्सों पर थोड़ा ज्यादा ध्यान दें। ध्यान रहे हाथों से चेहरे की त्वचा की जोर से मालिश न करें।मालिश के बाद चेहरे को ऐसे ही 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें, ताकि तेल त्वचा में अच्छे से समा जाए और अंदर से पोषण दे, क्योंकि यही पोषण आपकी त्वचा को निखारेगा। आप चाहें तो आधे घंटे तक भी चेहरे पर लगाकर छोड़ सकते हैं, क्योंकि नारियल तेल स्किन के लिए पूरी तरह से सुरक्षित माना जाता है।गुनगुने पानी से धो लेंअंत में चेहरे को गुनगुने पानी और हल्के फेस वॉश से धो लें। चाहें तो साफ कॉटन कपड़े से भी पोंछ भी सकते हैं। इससे आपकी त्वचा को और समय मिल जाएगा खुद को रिपेयर करने का और आपको चिपचिपाट भी महसूस नहीं होगी। - जैस्मिन यानी चमेली का फूल, इसकी खुशबू इतनी मनमोहक होती है कि यह तुरंत मन को शांत कर देती है और तनाव को कम करने में मदद करती है। चमेली का फूल सिर्फ सुंदरता और सुगंध का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक औषधि भी है। चमेली के फूलों का इस्तेमाल हार्ट हेल्थ को मजबूत बनाने, दिमाग को शांत रखने और इमोशनल बैलेंस बनाए रखने में किया जा सकता है।चमेली के फूल के फायदेचमेली के फूल हार्ट हेल्थ, दिमाग, डाइजेशन, इमोशनल बैलेंस और अच्छी नींद के लिए बेहद लाभकारी हैं। आइए विस्तार से जानते हैं चमेली के फूलों के फायदे और उपयोग।1. हार्ट हेल्थ के लिए चमेली के फूलआयुर्वेद के अनुसार, चमेली के फूलों की खुशबू मन को तुरंत शांत कर देती है। जब तनाव और चिंता कम होती है तो इसका सीधा असर हार्ट पर भी पड़ता है। हार्ट डिजीज का एक बड़ा कारण बढ़ता तनाव और हाई ब्लड प्रेशर है। चमेली के फूलों की खुशबू दिल की धड़कन को सामान्य रखने और ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद करती है। डॉक्टर किरण बताती हैं कि जो लोग अक्सर हार्टबीट तेज होने, घबराहट या तनाव महसूस करते हैं, वे रोज कुछ समय तक चमेली के फूल पास रखकर या गजरा पहनकर राहत पा सकते हैं।2. दिमाग के लिए उपयोगीचमेली का फूल केवल खुशबू ही नहीं देता, बल्कि यह ब्रेन टॉनिक के रूप में भी काम करता है। इसकी खुशबू से मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे हैप्पी हार्मोन का लेवल बढ़ता है, जिससे मूड बेहतर होता है और मानसिक थकान कम होती है। आयुर्वेदिक मान्यता है कि चमेली का फूल सत्वगुण को बढ़ाता है, जिससे एकाग्रता, स्मृति और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। विद्यार्थियों या दिमागी काम करने वालों के लिए यह बेहद उपयोगी है।3. तनाव और इमोशनल हेल्थ में मददगारआज की तेज-तर्रार जिंदगी में तनाव (Stress) और चिंता (Anxiety) आम समस्या बन गई है। चमेली के फूलों की प्राकृतिक सुगंध मन को तुरंत शांत कर देती है और बेचैनी को कम करती है। आयुर्वेद के अनुसार, यह मन और शरीर दोनों में वात दोष को संतुलित करता है। यही कारण है कि जो लोग भावनात्मक रूप से अस्थिर महसूस करते हैं, उनके लिए चमेली के फूल बेहद फायदेमंद हैं। गजरे या मालाओं में चमेली के फूल पहनने से इमोशनल बैलेंस बना रहता है और दिनभर पॉजिटिव एनर्जी महसूस होती है।4. नींद की समस्या में कारगरअनिद्रा (Insomnia) आजकल एक बड़ी समस्या बन गई है। देर रात तक जागना, तनाव, और मोबाइल स्क्रीन पर अधिक समय बिताना नींद को प्रभावित करते हैं। चमेली की खुशबू दिमाग को शांत करती है और नींद आने में मदद करती है। जैस्मिन एरोमा थेरेपी में उपयोग होता है और यह स्लीप क्वालिटी को सुधारता है। आयुर्वेद में कहा गया है कि रात को सोते समय कमरे में चमेली के फूल रख देने या इसके तेल की कुछ बूंदें डिफ्यूजर में डालने से गहरी और आरामदायक नींद आती है।5. पाचन तंत्र के लिए चमेली की चायचमेली के फूलों से बनी जैस्मिन टी न सिर्फ स्वादिष्ट होती है बल्कि पाचन के लिए भी बेहद फायदेमंद है। यह चाय पेट की गैस, एसिडिटी और अपच की समस्या को दूर करती है। आयुर्वेद के अनुसार, चमेली के फूल पित्त दोष को शांत करते हैं, जिससे पेट की जलन और एसिडिटी से राहत मिलती है। डॉक्टर किरण बताती हैं कि भोजन के बाद चमेली की हल्की गुनगुनी चाय पीने सेडाइजेशन बेहतर होता है और शरीर हल्का महसूस करता है।चमेली के फूलों का उपयोग कैसे करें?-गजरा या माला पहनें-जैस्मिन टी पिएं-कमरे में फूल रखें-जैस्मिन ऑयल इस्तेमाल करेंनिष्कर्षआयुर्वेद में चमेली के फूलों को केवल सजावट और खुशबू तक सीमित नहीं किया गया है, बल्कि इसे शरीर, मन और आत्मा की सेहत से जोड़ा गया है। हार्ट हेल्थ, दिमाग की शांति, पाचन सुधार, तनाव कम करने और अच्छी नींद के लिए यह एक सरल और प्राकृतिक उपाय है। अगर आप रोजमर्रा की जिंदगी में चमेली के फूलों को शामिल करते हैं, तो यह न सिर्फ आपके शरीर को स्वस्थ रखेगा बल्कि मन को भी संतुलित और खुशहाल बनाएगा।

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