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- अच्छे स्वास्थ्य के लिए अक्सर लोगों को प्रोटीन और फाइबर जैसे हेल्दी फूड्स को डाइट में शामिल करने के लिए कहा जाता है। प्रोटीन के लिए अक्सर लोगों को दालों को डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। इन्हीं दालों में से एक है मसूर दाल। मसूर दाल में भरपूर मात्रा में फाइबर, प्रोटीन, आयरन और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं। मसूर दाल का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसको सही तरीके से खाना बेहद जरूरी है।मसूर दाल को खाने के सही तरीकेघी में छौंककर खाएंमसूर दाल में विटामिन-सी, ए और ई जैसे पोषक तत्व होते हैं। वहीं, घी में अच्छी मात्रा में हेल्दी फैट्स और विटामिन-ए होते हैं। ऐसे में मसूर दाल को देसी घी में छौंककर खाने से आंखों के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है। इससे आंखों की ड्राइनेस को कम करने, पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ावा देने, आंखों की जलन या खुजली को कम करने, इंफेक्शन से बचाव करने और आंखों में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है।कम मसालों के साथ खाएंमसूर दाल में भरपूर मात्रा में फाइबर और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में दाल को कम मसालों के साथ बनाकर खाने से कब्ज की समस्या से राहत देने, पाचन में सुधार करने, मेटाबॉलिज्म में सुधार करने और पाचन संबंधी समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है। इसके अलावा, कम मसालों के साथ मसूर दाल को खाने से गले की सूजन को कम करने, गले को आराम देने और गले से जुड़ी समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है।मसूर दाल के साथ छाछ पिएंमसूर दाल के छाछ के साथ पीना फायदेमंद होता है। बता दें, छाछ में भरपूर मात्रा में प्रोबायोटिक्स के गुण होते हैं, जिससे आंतों के स्वास्थ्य में सुधार करने और पाचन में सुधार करने में मदद मिलती है। ऐसे में मसूर की दाल के साथ छाछ का सेवन करने से ब्लीडिंग को रोकने और खूनी बवासीर की समस्या से राहत देने में मदद मिलती है।निष्कर्षमसूर दाल को घी में छौंककर, छाछ के साथ पिएं और कम मसालों के साथ इसका सेवन किया जा सकता है। इससे आंखों के स्वास्थ्य में सुधार करने, ब्लीडिंग को रोककर, खूनी बवासीर की समस्या से राहत देने, पाचन में सुधार करने, कब्ज की समस्या से राहत देने, गले की सूजन को कम करने और गले की समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है। ये स्वास्थ्य के लिए कई तरीकों से फायदेमंद हैं, लेकिन ध्यान रहे, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लें और हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करने की कोशिश करें।
- सर्दियों का मौसम शुरू होते ही एड़ियों के फटने की समस्या भी काफी ज्यादा बढ़ जाती है। पैरों की एड़ियों को सर्दियों में खास देखभाल की जरूरत होती है, क्योंकि इस मौसम में सर्द हवाएं और नमी की कमी के कारण एड़ियों के फटने और दरारें पड़ने की समस्या बढ़ जाती हैं। ऐसे में आप फटी एड़ियों की समस्या को ठीक करने के लिए घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें देसी घी और एलोवेरा जेल के मिश्रण का उपयोग शामिल है।फटी एड़ियों पर एलोवेरा और घी का इस्तेमाल कैसे करें?जब एलोवेरा और देसी घी को एक साथ मिलाकर फटी एड़ियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है कि तो ये ज्यादा बेहतर तरीके से काम करता है। यह मिश्रण फटी एड़ियों के लिए एक नेचुरल हीलिंग क्रीम की तरह काम करता है, जो आपकी एड़ियों के लिए इस तरह फायदेमंद होता है-1. गहराई तक मॉइस्चराइज करेंएलोवेरा और देसी घी दोनों ही नेचुरल मॉइश्चराइजर की तरह काम करते हैं। एलोवेरा जेल पानी से भरपूर होता है, जो स्किन को तुरंत नमी देने में मदद करता है, जबकि देसी घी स्किन की परतों के अंदर जाकर उसे पोषण देता है। इन दोनों को मिलाकर फटी एड़ियों पर लगाने से रूखी और फटी एड़ियों को ठीक करने में मदद मिलती है।2. फटी एड़ियों को तेजी से भरता हैएलोवेरा में गिबरेलिन और ग्लूकोमैनन जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो स्किन की डैमेज सेल्स को जल्दी भरते हैं। वहीं देसी घी में मौजूद विटामिन ए और ई स्किन को रिपेयर करते हैं। इन दोनों का मिश्रण फटी एड़ियों को जल्दी भरता है और दर्द से राहत मिलती है।3. एंटीसेप्टिक और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूरफटी एड़ियों में धूल-मिट्टी जाने से इंफेक्शन होने का जोखिम बढ़ जाता है। एलोवेरा के एंटी-बैक्टीरियल गुण बैक्टीरिया और फंगस को बढ़ने से रोकते हैं। देसी घी में नेचुरल एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो इंफेक्शन को दूर रखते हैं।4. स्किन को मुलायम बनाएएड़ियां फटने का सबसे बड़ा कारण स्किन का ज्यादा कठोर होना होता है। देसी घी स्किन की कठोरता को कम करता है, और उसे मुलायम बनाता है। जबकि एलोवेरा स्किन को ठंडक और लचक देती है, जिससे एड़ियां दोबारा नहीं फटती हैं। यह मिश्रण पैरों की स्किन को मुलायम और चिकना बनाता है।5. सूजन और दर्द से राहतफटी एड़ियों के कारण पैरों में सूजन, जलन और दर्द होने की समस्या काफी आम हो जाती है। ऐसे में एलोवेरा में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण स्किन की सूजन को कम करने में मदद करता है, जबकि देसी घी से मालिश करने करने पर ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे दर्द और जलन की समस्या से राहत मिलती है।6. स्किन को पोषण देंएलोवेरा स्किन में कोलेजन प्रोडक्शन को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे स्किन युवा और लचीली बनती है। वहीं, देसी घी स्किन को हेल्दी फैट देता है, जो त्वचा को अंदर से मजबूत बनाती है। इन दोनों का मिश्रण आपकी एड़ियों की स्किन को सही पोषण देता है, जो किसी भी केमिकल प्रोडक्ट से नहीं मिलता है।फटी एड़ियों पर एलोवेरा और घी का इस्तेमाल कैसे करें?फटी एड़ियों को ठीक करने के लिए आप एलोवेरा जेल और देसी घी के मिश्रण का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका उपयोग करने के लिए आप 1 चम्मच देसी घी और 1 चम्मच ताजा एलोवेरा जेल लेकर दोनों को अच्छी तरह मिला कर पेस्ट तैयार कर लें। अब रोजाना रात को सोने से पहले हल्के गुनगुने पानी से अपने पैरों को धोकर सुखा लें। इसके बाद इस मिश्रण को एड़ियों पर अच्छी तरह लगाकर मालिश करें और फिर कॉटन की जुराब पहनकर सो जाएं और अगली सुबह अपने पैरों को साफ कर लें।एलोवेरा और देसी घी दोनों ही नेचुरल तरीके से आपकी स्किन को रिपेयर करते हैं, स्किन को पोषण देते हैं और नमी बनाए रखने में मदद करते हैं। इस मिश्रण का नियमित इस्तेमाल आपकी फटी एड़ियों को जल्दी भरने में मदद करता है, दर्द को कम करता है और इंफेक्शन से बचाने में मदद करता है।एड़ी किस विटामिन की कमी से फटती है?एड़ी फटने का कारण शरीर में किसी एक विटामिन की कमी नहीं है, बल्कि ये विटामिन बी3, सी और ई की कमी के कारण होता है, जो स्किन के रूखेपन और कोलेजन उत्पादन को प्रभावित करता है।पैर फटने का मुख्य कारण क्या है?पैर फटने के मुख्य कारणों में ड्राई स्किन, लंबे समय तक खड़े रहना और गलत जूते पहनना है। वहीं अन्य कारणों में मोटापा और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं।पैरों की एड़ी को मुलायम कैसे बनाएं?पैरों की एड़ी को मुलायम बनाने के लिए आप पैरों को गुनगुने पानी में भिगोएं, डेड स्किन सेल्स को हटाने के लिए प्यूमिक स्टोन का इस्तेमाल करें और फिर मॉइश्चराइजिंग क्रीम या नारियल तेल का उपयोग करें।
- सर्दियों की ठंडी हवा जैसे-जैसे तेज होने लगती है, वैसे-वैसे शरीर में जकड़न, हाथ-पैर ठंडे रहना, स्किन का रूखापन और रोजाना की थकान कई लोगों की आम समस्या बन जाती है। इस मौसम में शरीर को सबसे ज्यादा जरूरत होती है गर्माहट की, वो गर्माहट जो अंदर तक जाकर मांसपेशियों को ढील दे, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाए और त्वचा को पोषण दे। आयुर्वेद में ऐसी ही एक प्राचीन और असरदार तकनीक का जिक्र मिलता है, अभ्यंग, यानी तेल मालिश। यह सिर्फ एक ब्यूटी रिचुअल नहीं, बल्कि एक हर्बल थेरेपी मानी जाती है जो शरीर, मन और इम्यूनिटी तीनों पर सकारात्मक असर डालती है लेकिन जैसे ही मसाज की बात आती है, सबसे बड़ा सवाल उठता है कि सर्दियों में कौन-सा तेल सबसे ज्यादा फायदेमंद है? सरसों का तेल या नारियल का तेल?सर्दियों में मसाज के लिए कौन सा तेल बेहतरअगर स्किन ज्यादा ड्राई है तो नारियल का तेलजिन लोगों की त्वचा बहुत ड्राई रहती है, उनके लिए सर्दियों में नारियल का तेल (Coconut Oil) सबसे अच्छा विकल्प है। नारियल तेल में मौजूद फैटी एसिड स्किन की नमी लॉक करके त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखते हैं।यह तेल त्वचा पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बनाता है, जिससे ठंडी हवा का असर कम होता है।इसके अलावा यह फाइनलाइंस को भी कम करने में मदद करता है।ऐसे लोग जिन्हें रूसी, ड्राई स्कैल्प या ठंड में स्किन फटने की समस्या होती है, वे नारियल तेल से मालिश कर काफी फायदा उठा सकते हैं।कमजोरी के लिए सरसों का तेलजिन लोगों को ठंड बहुत लगती है, शरीर में कमजोरी महसूस होती है या सर्दियों में एनर्जी कम रहती है, उनके लिए सरसों का तेल(Mustard Oil) अधिक फायदेमंद बताया गया है। आयुर्वेद में सरसों को उष्ण यानी गर्म प्रकृति वाला माना गया है। यह शरीर के अंदर गर्मी बढ़ाता है, ब्लड सर्कुलेशन तेज करता है और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।सरसों का तेल जोड़ों के दर्द, जकड़न और सूजन में भी बहुत उपयोगी है।ठंड के कारण जिन व्यक्तियों की उंगलियां सुन्न हो जाती हैं या पैरों में ठंड जमा हो जाती है, उनके लिए सरसों तेल की मालिश तुरंत राहत देने वाली होती है। इसकी तीव्र सुगंध और गर्माहट शरीर को अंदर से एक्टिव करती है।निष्कर्षसर्दियों में मसाज के लिए कौन-सा तेल आपके लिए बेहतर है, इसका एक ही जवाब नहीं है। यदि आपको ठंड ज्यादा लगती है, शरीर में दर्द होता है या एनर्जी कम रहती है, तो सरसों का तेल आपके लिए ज्यादा फायदे वाला है। वहीं अगर आपकी स्किन बहुत ड्राई है, आप एंटी-एजिंग बेनिफिट चाहते हैं या बहुत फ्रेगरेंस-फ्री, हल्का तेल पसंद करते हैं, तो नारियल तेल चुनें। आयुर्वेद में सही तेल का चुनाव आपकी बॉडी टाइप, जलवायु और जरूरत को ध्यान में रखकर किया जाता है।
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सर्दियां आते ही सबसे ज्यादा परेशानी जोड़ों के दर्द की होती है। दरअसल, ठंडी हवा, शरीर में कम ब्लड सर्कुलेशन और बढ़ा हुआ वात दोष हड्डियों और जॉइंट्स में अकड़न, सूजन और दर्द को बढ़ा देता है। इसी वजह से लोगों को ठंड बढ़ते ही घुटनों में खिचांव या जोड़ों में दर्द महसूस होने लगता है। इस वजह से लोगों को चलने में दिक्कत होने लगती है या फिर जोड़ों में दर्द के कारण काम करना मुश्किल हो जाता है। कई लोगों को तो ठंड में पुराना दर्द भी दोबारा होने लगता है। इस दर्द से राहत पाने के लिए आयुर्वेद में 10 ऐसे फूड्स बताए गए हैं, जिन्हें लेकर जोड़ों के दर्द को कम किया जा सकता है।
तिल - Sesame Seedsसर्दियों में तिल को सबसे ज्यादा पॉवरफुल फूड कहा जाता है और आयुर्वेद में तो इसे जॉइंट्स का सुपरफूड कहा गया है। इसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम, कॉपर, मैग्नीशियम और हेल्दी फैट्स होते हैं, जो जॉइंट्स को लुब्रिकेशन देते हैं और हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। अगर आप तिल खाना चाहते हैं, तो सुबह खाली पेट एक चम्मच भुना तिल या तिल का लड्डू खा सकते हैं। यह हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद है।गाय का घी - Cow Milkजोड़ों में दर्द की समस्या वात की वजह से होती है और गाय का घी वात शान्त करने वाला है और जोड़ों को अंदर से कंडीशनिंग देता है। अगर सर्दियों में रेगुलर घी लिया जाए, तो यह न सिर्फ जोड़ों के मूवमेंट को बेहतर करता है, बल्कि अकड़न को भी कम करता है। इसे आप अपने रोजाना की सब्जी, रोटी या दूध में एक चम्मच डालकर ले सकते हैं। माना जाता है कि गाय के घी की मालिश भी दर्द को आराम देती है।अश्वगंधा - Ashwagandhaअश्वगंधा मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और स्ट्रेस को कम करता है। अश्वगंधा लेने से जोड़ों की सूजन भी कम होती है। यह शरीर में प्राकृतिक गर्माहट लाता है। इसे रात में गर्म दूध के साथ एक चम्मच अश्वगंधा लेना काफी फायदेमंद है।हड़जोड़ - Cissus Quadrangularisअगर हड्डियों को मजबूत करना है, तो हड़जोड़ से बेहतर और कोई भी नहीं है। यह फ्रैक्चर हीलिंग में मदद करता है और पुराने जोड़ों के दर्द में भी असरदार माना जाता है। इसे लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। ये आमतौर पर कैप्सूल या चूर्ण रूप में लिया जाता है।हल्दी और काली मिर्च - Turmeric and Black Pepperहल्दी शरीर की सूजन कम करती है और कार्टिलेज को सेफ रखती है, वहीं काली मिर्च हल्दी में पाए जाने वाले कुरकुमिन को बेहतर तरीके से ऑब्जर्ब करती है। दोनों का कॉम्बिनेशन जोड़ों के दर्द में राहत पाने का सबसे बेहतरीन तरीका है। इसे लेना भी आसान है। सर्दियों में गर्म दूध में थोड़ी हल्दी और काली मिर्च बेहतरीन जॉइंट का टॉनिक बन जाता है। इसे रोजाना थोड़ी मात्रा में डालकर लिया जा सकता है।अदरक - Gingerसर्दियों में अदरक शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है और जोड़ों के लिए रामबाण है। दरअसल, अदरक की उष्ण प्रकृति वात को संतुलित करती है। इससे सूजन और दर्द दोनों ही कम होते हैं। अदरक रोजाना सब्जी, चाय, सूप या ग्रीन टी में डालकर लिया जा सकता है। इसका रोजाना इस्तेमाल करने से जोड़ों को फायदा मिलता है।मेथी दाना - Fenugreek Seedsमेथी कैल्शियम से भरपूर होती है और जोड़ों के लिए कैल्शियम सबसे बेहतरीन न्यूट्रिशन है। इससे जोड़ों में सूजन कम करने में मदद मिलती है। इसे लेने के लिए रात को एक गिलास में कुछ दाने मेथी के भिगोकर रख दें और उसे सुबह पी लें, मेथी के परांठे,सब्जी या फिर सर्दियों में मेथी के लड्डू भी लिए जा सकते हैं।रागी - Nachniरागी कैल्शियम का बेहतरीन स्रोत है, जो हड्डियों के लिए नेचुरल सप्लीमेंट का काम करती है। इसेस हड्डियों को मजबूती मिलती है। सर्दियों में रागी की रोटी या रागी का दलिया जोड़ो में लंबे समय तक ताकत बनाए रखता है।गिलोय - Giloyगिलोय वात पित्त कफ सभी को संतुलित करती है। यह पुराने जोड़ों के दर्द, सूजन और अकड़न को दूर करता है। जिन लोगों को ठंड में ये सभी समस्याएं होती हैं, उन्हें सर्दियों में सुबह गिलोय का काढ़ा या रस लेना चाहिए। अगर किसी भी तरह की समस्या है, तो एक बार डॉक्टर से जरूर सलाह लें।बादाम और अखरोट - Almond and Walnutबादाम और अखरोट में हेल्दी फैट्स, कैल्शियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में होता है। ये दोनों ये healthy fats, calcium और magnesium से भरपूर होते हैं। यह जोड़ों के साइनोवियल फ्लूड (synovial fluid) को सपोर्ट करते हैं, जो जोड़ों में लुब्रिकेशन बनाए रखने में मदद करता है। आप रातभर भिगोकर रखे बादाम और अखरोट सुबह खाली पेट खा सकते हैं।बहुत ज्यादा ठंडा और सूखा खाना खाने से बचें। रोजाना 10-15 मिनट धूप जरूर लें, हफ्ते में 2-3 बार गुनगुने तेल से मालिश जरूर करें और योगा रेगुलर करें। इससे जोड़ों के दर्द में काफी राहत मिलेगी, लेकिन अगर दर्द काफी ज्यादा हो और चलने-फिरने में तकलीफ हो, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। - सर्दियों का मौसम स्टार्ट होते ही लड़कियों की प्रॉब्लम बढ़ जाती है। दिनभर जो उन्हें स्किन केयर में बिताना पड़ता है। ड्राई स्किन, ड्राई लिप्स और ड्राई हैंड एंड फीट काफी इम्बेरेसिंग फील कराते हैं। खासतौर पर जब आपके हाथ बिल्कुल ड्राई और बेजान से दिखते हैं। तो जरा भी अच्छे नहीं लगते। हाथों को दिनभर मॉइश्चराइज करने के बाद भी स्किन सिकुड़ी हुई और रूखी सी दिखती है तो ये हैक ट्राई करें। जिसकी मदद से हाथों की स्किन रूखी और बेजान सी नहीं दिखेगी।नमक और मॉइश्चराइजर का इस्तेमालस्किन को दोबारा से चमकदार और मॉइश्चराइज बनाने के लिए बस इस हैक को ट्राई करें। दरअसल, रूखी स्किन के साथ काफी सारी डेड स्किन हाथों पर जमा हो जाती है। जिसे अगर साफ कर लिया जाए तो हाथ बिल्कुल सॉफ्ट और शाइनी, मॉइश्चराइज दिखना शुरू हो जाएंगे। और डेड स्किन को हटाने में मदद करेगा ये खास नुस्खा।बस किसी भी मॉइश्चराइजर या बॉडी लोशन को हाथ में लें। इसमे दो चुटकी नमक डाल लें। फिर दोनों हाथों को अच्छी तरह से इससे मसाज करें। जिससे सारी गंदगी और डेड स्किन निकल जाए। नमक स्किन को जेंटली स्क्रब करेगा और डेड स्किन को रिमूव करने में मदद करेगा। वहीं मॉइश्चराइजर या बॉडी लोशन स्किन को अंदर तक मॉइश्चराइज करने का काम करेगी। बस दोनों चीजों को मिलाकर मसाज करने के बाद हाथों को धो लें। साबुन का इस्तेमाल ना करें बस पानी से धोएं। ऐसा करने से हाथ बिल्कुल सॉफ्ट और सुंदर दिखते हैं और स्किन में नमी भी बनी रहती है।ऑलिव ऑयल या नारियल का तेल करें यूजअगर आप नेचुरल इफेक्ट के साथ स्किन की केयर करना भी चाहती हैं तो नमक के साथ नेचुरल मॉइश्चराइजर ऑलिव ऑयल या कोकोनट ऑयल लें। इस तेल को नमक में मिलाकर हाथों की मसाज करें और हाथ धोएं।ध्यान में रखें ये बातेंलेकिन ध्यान रहे अगर आपको हाई बीपी या सोडियम से जुड़ी कोई बीमारी हो तो हथेलियों में नमक रगड़ने की गलती ना करें। नहीं तो ये बॉडी में अब्जॉर्ब होकर शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ा सकती हैं। जिससे हाई बीपी वालों को खतरा हो सकता है।.
- स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती की दुनिया में आपका स्वागत है! जीरा सिर्फ एक मसाला नहीं है; यह स्वास्थ्य लाभों का खजाना है। शोधकर्ताओं ने पुष्टि की है कि इसमें कई स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले गुण हैं जैसे कि पाचन में सुधार, वजन कम करना, खट्टी डकार से राहत आदि।इस विस्तृत गाइड में, हम जीरा पानी पीने के कई सिद्ध स्वास्थ्य लाभों की खोज करते हैं, जो एक प्राकृतिक अमृत के रूप में खड़ा है और यह आपकी समग्र भलाई को कैसे बढ़ा सकता है।जीरा पानी के 11 फायदेभारतीय करी में स्वाद बढ़ाने के अलावा यहाँ जीरा पानी पीने के स्वास्थ्य लाभों की सूची है:पाचन में सुधारजीरा पानी पीने के फायदों की सूची में, पाचन में मदद करने की इसकी क्षमता सबसे ऊपर है। जीरे के बीजों में थाइमॉल और अन्य आवश्यक तेलों जैसे यौगिकों की उपस्थिति उन एंजाइमों के स्राव को उत्तेजित करती है जो पाचन में सहायता करते हैं। जीरा पानी लीवर से पित्त की रिहाई भी बढ़ाता है, जो शरीर को आंत में चर्बी और अन्य पोषक तत्वों को पचाने में मदद करता है। यह इस तरह से शरीर को अपच और पेट फूलने से राहत दिलाता है।वजन घटाने के लिए सबसे अच्छावजन घटाने की यात्रा पर जाने वालों के लिए, जीरा पानी पीना एक अच्छी आदत साबित हो सकती है। जीरा पानी मुक्त रैडिकल को न्यूट्रल करता है करता है और इसे स्थिर बनाता है जिससे यह आपके शरीर में स्वस्थ पड़ोसी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने से रोकता है और लंबी बीमारियों का खतरा कम करता है।स्वस्थ त्वचा और बालों को बढ़ावा देता हैजीरा पानी पीने के फायदों में एक सुंदरता बढ़ाने वाला भी शामिल है। त्वचा के लिए जीरा पानी के फायदे अद्भुत हैं क्योंकि यह एक उत्कृष्ट प्राकृतिक डिटॉक्स करने वाला है, यह आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। इसके अलावा, जीरा पानी कैल्शियम, पोटेशियम, मैंगनीज और सेलेनियम जैसे खनिजों से भरपूर है, जो आपकी त्वचा को फिर से जवान बनाता है।इसके अलावा, इसके एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण, जीरा पानी बुढ़ापे के संकेतों से लड़ता है और मुंहासों को कम करता है। जीरा पानी बालों के रोमों को भी मजबूत बनाता है, बाल झड़ने से रोकता है और बालों की वृद्धि को प्रोत्साहित करता है को बढ़ावा देता है।दिल की सेहत के लिए अच्छाआपकी धमनियों में वसा अम्लों (चर्बी) का ऑक्सीकरण धमनियों को अवरुद्ध कर सकता है और दिल की बीमारी का कारण बन सकता है। जीरा पानी का नियमित सेवन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करके, ब्लड प्रेशर को कम करके, और खून के थक्कों के बनने को रोककर दिल की सेहत को फायदा पहुंचाता है।ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करता हैजीरा पानी ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में फायदा करता है क्योंकि यह इंसुलिन की संवेदनशीलता में सुधार करके और ब्लड ग्लूकोज के स्तर में अचानक वृद्धि या गिरावट के जोखिम को कम करके ब्लड शुगर के स्तर को स्थिर करने में मदद कर सकता है।कैंसर का खतरा कम करता हैडीएनए का ऑक्सीकरण कैंसर का कारण बन सकता है। जीरा पानी में मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट में कैंसर-रोधी गुण दिखाए गए हैं, जो कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकते हैं और कैंसर के जोखिम को कम करते हैं।खट्टी डकार से राहत दिलाता हैजीरा पानी एक प्राकृतिक एंटासिड के रूप में काम करता है, पेट की दीवार को शांत करता है और खट्टी डकार, सीने में जलन, और एसिड रिफ्लक्स से राहत प्रदान करता है।खून की कमी में सहायकअगर आप खून की कमी से पीड़ित हैं तो जीरा पानी फायदेमंद है क्योंकि जीरा पानी आयरन का समृद्ध स्रोत है। जीरा पानी का नियमित सेवन हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने और थकान और कमजोरी के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है।मासिक धर्म और स्तनपान के दौरान उपयोगीमहिलाओं में मासिक धर्म और स्तनपान के दौरान जीरा पानी पीने के फायदे हैं। मासिक धर्म के दौरान, जीरा पानी अपने सूजन-रोधी गुणों के कारण मासिक धर्म की ऐंठन को कम करने में मदद कर सकता है, असुविधा और दर्द से राहत प्रदान करता है। इसके अलावा, जीरा पानी आपके गर्भाशय को टोन करता है और किसी भी फंसे हुए खून को छोड़ने में मदद करता है।इसके अतिरिक्त, जीरा पानी स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए फायदेमंद है क्योंकि यह आयरन की मात्रा से भरपूर है। जीरा पानी दूध के उत्पादन को बढ़ावा दे सकता है, माता और बच्चे दोनों के लिए पर्याप्त पोषण सुनिश्चित करता है।प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थनजीरा पानी पोटेशियम और आयरन का अच्छा स्रोत है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। जीरा पानी की उच्च विटामिन C सामग्री के कारण, जो एक एंटीऑक्सीडेंट है जो घावों को भरता है। जीरा पानी एक बहुत अच्छा जीवाणु-रोधी एजेंट भी है और आपके शरीर को संक्रमण से लड़ने और समग्र प्रतिरक्षा बढ़ाने में मदद करता है।सूजन-रोधी गुणजीरा पानी में क्यूमिनाल्डिहाइड और थाइमोक्विनोन जैसे यौगिकों की उपस्थिति के कारण उत्कृष्ट सूजन-रोधी गुण हैं, जो शरीर में सूजन को कम करने में मदद करते हैं। अगर आपको गठिया और जोड़ों के दर्द जैसी स्थितियां हैं तो जीरा पानी सूजन और सूजन को कम करने में प्रभावी है।जीरा पानी कैसे बनाएंयह आसानी से बनने वाली जीरा पानी की रेसिपी आपको कई जीरा पानी के फायदे हासिल करने में मदद कर सकती है:तरीका 1:सामग्री:1 चम्मच जीरे के बीज1 गिलास पानीविधि:एक पैन में पानी उबालें।उबलते पानी में जीरे के बीज डालें।इसे 5-10 मिनट तक उबलने दें।मिश्रण को छान लें और ठंडा होने दें।आपका जीरा पानी पीने के लिए तैयार है।तरीका 2:एक गिलास या कंटेनर में 1 चम्मच जीरे के बीज रखें।जीरे के बीजों पर 1 कप पानी डालें।गिलास या कंटेनर को ढक्कन या प्लास्टिक रैप से ढकें।जीरे के बीजों को पानी में रात भर, अधिमानतः कम से कम 8 घंटे के लिए भिगोने दें।सुबह में, जीरे के बीजों को हटाने के लिए भिगोए हुए जीरा पानी को एक कप में छान लें।आपका जीरा पानी पीने के लिए तैयार है!आप इसे जैसा है वैसे ही पी सकते हैं या अगर चाहें तो अतिरिक्त स्वाद के लिए नींबू का रस या शहद की एक बूंद मिला सकते हैं।अपने दिन की शुरुआत के लिए ताज़गी देने वाले और पौष्टिक जीरा पानी का आनंद लें!ये रेसिपी घर पर जीरा पानी तैयार करने के दो सरल तरीके प्रदान करती हैं। अपनी स्वाद की पसंद के अनुसार जीरे के बीज और पानी की मात्रा को समायोजित करने के लिए स्वतंत्र महसूस करें।जीरा पानी पीने का सबसे अच्छा समयसर्वोत्तम परिणामों के लिए, सुबह खाली पेट या भोजन से 30 मिनट पहले जीरा पानी पीने की सिफारिश की जाती है। यह पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण की अनुमति देता है और इसके पाचन लाभों को बढ़ाता है।जीरा पानी के नुकसानजबकि जीरा पानी आमतौर पर सेवन के लिए सुरक्षित है, यह कुछ व्यक्तियों में हल्के दुष्प्रभाव का कारण हो सकता है। जीरा पानी के नुकसानों में शामिल हैं:एलर्जी की प्रतिक्रियाएं: यदि आपको जीरा पानी, जीरा या संबंधित पौधों से एलर्जी है, तो आपको खुजली, सूजन, या सांस लेने में कठिनाई जैसे एलर्जी के लक्षण हो सकते हैं।पाचन संबंधी समस्याएं: जीरा पानी का अत्यधिक सेवन पेट फूलना, गैस, या दस्त सहित पाचन संबंधी असुविधा का कारण हो सकता है।गर्भावस्था और नर्सिंग: गर्भावस्था और नर्सिंग के दौरान जीरा पानी का अत्यधिक सेवन ब्लड शुगर के स्तर में तेजी से गिरावट और स्तन के दूध के उत्पादन में कमी का कारण हो सकता है। गर्भावस्था और नर्सिंग के दौरान जीरा पानी लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेकर इन जीरा पानी के नुकसानों से बचा जा सकता है।निष्कर्षजीरा पानी कई स्वास्थ्य लाभों के साथ एक प्राकृतिक उपचार है, जो बेहतर पाचन से लेकर बढ़ी हुई प्रतिरक्षा और उससे आगे तक के लाभ देता है। इस सरल लेकिन शक्तिशाली अमृत को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करके, आप बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में एक यात्रा शुरू कर सकते हैं। बेहतर स्वास्थ्य की इस यात्रा को और आसान बनाने के लिए अब मेट्रोपोलिस लैब्स में अपनी घर-बुकिंग यात्रा बुक करें। मेट्रोपोलिस लैब्स की नैदानिक सेवाओं की विस्तृत श्रृंखला के साथ, हम सुनिश्चित करते हैं कि आपके स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए। इष्टतम स्वास्थ्य के लिए अतिरिक्त अंतर्दृष्टि और व्यक्तिगत समाधान खोजने के लिए हमारे संसाधनों का अन्वेषण करें।
- चाय के शौकीनों की कमी नहीं है। ज्यादातर लोग दूध वाली चाय पीना पसंद करते हैं। ज्यादा हुआ तो इसमें अदरक और इलायची पाउडर डाल दिया। ऐसी चाय स्वाद में तो शानदार होती है, लेकिन सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकती है। आज हम आपको हर्बल चाय मसाले की ऐसी रेसिपी बता रहे हैं, जो ना केवल ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में सहायक होगी, बल्कि वजन भी कम करेगी। शुगर पेसेंट भी इसे पी सकते हैं।हर्बल चाय मसाला बनाने के लिए चाहिए- ग्रीन टी-अर्जुन की छाल-इलायची-दालचीनी-सोंठ-तुलसी (सूखे पत्ते)-पुदीना (सूखे पत्ते)-सौंफ- देसी लाल गुलाब के पत्ते (सूखे हुए)इन सभी सामग्री को 30- 30 ग्राम ले लें। कड़ाही में इन सभी सामग्री को धीमी आंच में भून लें ताकि इसकी नमी निकल जाए। इन सभी को दरदरा पीस लें। इस मसाले को एयर टाइट डब्बे में रख दें। इसे आप साल भर तक स्टोर कर रख सकते हैं। इसे फ्रीज में ना रखें।जब भी चाय बनानी हो तो एक कप पानी में आधा चम्मच (टी स्पून) चाय मसाला इसमें डाल दें। फिर मिठास के लिए थोड़ा सा शुद्ध गुड़ डाल दें। एक मिनट पका लें। शुगर पेसेंट गुड़ ना डालें, वे इसमें आधा नींबू डाल कर पीएं। इस हर्बल चाय को आप सुबह खाली पेट पीएं। वहीं रात को खाने के बाद इसे ले सकते हैं। इस हर्बल चाय को पीने से शरीर को अनेक फायदे मिलते हैं। इस चाय से बेड कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही शुगर , बीपी भी कंट्रोल होता है।
- सर्दियों के मौसम में हम अक्सर आलसी हो जाते हैं, हर समय सुस्ती छाई रहती है। इतना ही नहीं, इस मौसम में भूख में भी काफी बढ़ोत्तरी हो जाती है। इस मौसम में लोगों का कम एक्टिव होना आम बात है, जो शरीर में ज्यादा कैलोरी जमा होने और मोटापा बढ़ने का कारण बन सकता है। ऐसे में आप अपने खानपान में क्या शामिल करते हैं, इसका सीधा असर आपके संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ता है। शाम के समय आप अपनी डाइट में कुछ ऐसी ड्रिंक्स शामिल कर सकते हैं, जो आपके शरीर को अंदर से गर्म रखने के साथ, मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर कैलोरी बर्न करने में मदद करता है।सर्दियों में तेजी से कैलोरी बर्न करने के लिए शाम को पिएं ये 4 ड्रिंक्स1. कैमोमाइल टीकैमोमाइल टी एक हर्बल चाय है, जो तनाव को कम करने, नींद में सुधार करने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। सर्दियों में यह चाय सामल के समय पीना काफी फायदेमंद होता है। इस चाय को पीने से शरीर और मन को शांति मिलती है, जिससे तनाव कम होता है। तनाव कम होने से शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन को कम करता है, जो फैट स्टोर कराने के लिए जिम्मेदार होता है। इसके साथ ही कैमोमाइल टी ब्लोटिंग को कम करने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है, जिससे भोजन जल्दी पच जाता है और कैलोरी फैट के रूप में जमा नहीं होता है।2. अदरक की चायसर्दियों में लोग अदरक का सेवन करना बहुत पसंद करते हैं, क्योंकि ये शरीर को गर्म रखने में मदद करता है। अदरक में थर्मोजेनिक गुण होते हैं, जो शरीर का तापमान बढ़ाकर कैलोरी बर्निंग की प्रक्रिया को तेज करता है। अदरक का सेवन शरीर में जमा एक्स्ट्रा फैट को टूटने में मदद करता है, यह पाचन शक्ति को बढ़ाता है और गैस, अपच आदि जैसी समस्याओं को भी दूर करता है। अदरक मेंं मौजूद जिंजरॉल और शोअगोल कंपाउंड्स मेटाबोलिज्म को एक्टिव रखता है, जिससे आपका शरीर आसानी से कैलोरी बर्न करता है।3. दालचीनी की चायभरतीय घरों की रसोई में दालचीनी एक पावरफूल मसाला है, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने और फैट बर्निंग की प्रक्रिया को एक्टिव करने में अहम भूमिका निभाता है। दालचीनी का सेवन इंसुलिन लेवल को कंट्रोल करता है, जो शरीर में एक्स्ट्रा फैट जमा होने से बचाता है। यह पाचन में सुधार करता है और भोजन को एनर्जी में बदलने की प्रक्रिया को केज करता है। सर्दियों में शाम के समय दालचीनी की चाय पीने से कैलोरी ज्यादा खर्च होती है, भूख कंट्रोल में रहती है और आप अनहेल्दी स्नैकिंग से बचते हैं।4. कश्मीरी कहवाकहवा कश्मीर की एक ट्रेडिशनल चाय है, जो ग्रीन टी बेस पर तैयार की जाती है और इसमें दालचीनी, इलायची, केसर आदि चीजों को मिलाकर तैयार किया जाता है। यह कहवा सर्दियों में शरीर को गर्म रखने और एनर्जी बढ़ाने में मदद करता है। कहवा में मौजूद ग्रीन टी फैट ऑक्सीकरण को बढ़ाता है और शरीर को तेजी से कैलोरी बर्न करने में मदद करता है। इसके अलावा, इसमें मौजूद मसाले जैसे दालचीनी और इलायची मेटाबोलिज्म को स्वाभाविक रूप से एक्टिव रखता है। कहवा का सेवन पाचन में सुधार कनरे और खाने को पेट में अच्छी तरह तोड़ने में मदद करती है।निष्कर्षसर्दियों में शाम के समय कैमोमाइल चाय, दालचीनी की चाय, कश्मीरी कहवा और अदरक की चाय शामिल कर सकते हैं। इन चायों को पीने से न सिर्फ शरीर को गर्म रखने में मदद मिलती है, बल्कि ये हमारे मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देता है और कैलोरी तेजी से बर्न करता है, जिससे वजन कम करने के साथ, तनाव से राहत और पाचन को बेहतर रखने में मदद मिलती है।
- सर्दियों का मौसम अपने साथ ठंड, सुस्ती, कम पानी पीना, भूख बढ़ना और स्किन ड्राईनेस जैसी समस्याएं लेकर आता है। सर्दियों में होने वाली इन परेशानियों से राहत पाने के लिए डाइट में कुछ चीजों को शामिल करना फायदेमंद होता है। सर्दियों में डाइट में विशेष रूप से किशमिश को शामिल किया जाए, तो ये सेहत के लिहाज से बहुत फायदेमंद होता है।शरीर को प्राकृतिक गर्माहट देती हैसर्दियों में शरीर का मेटाबॉलिज्म थोड़ा धीमा हो जाता है और ठंड लगने की शिकायत बढ़ जाती हैं। किशमिश में मौजूद फ्रक्टोज और ग्लूकोज शरीर को तुरंत एनर्जी देते हैं। सर्दियों में किशमिश खाने से थर्मोजेनेसिस (शरीर में गर्मी पैदा करना) को बढ़ाने में मदद मिलती है।एनीमिया से बचाव करेंसर्दियों के मौसम में बहुत से लोगों में खून की कमी की समस्या देखी जाती है। सर्दियों में एनीमिया की परेशानी महिलाओं और बच्चों को ज्यादा होती है। किशमिश एनीमिया को भी दूर करता है। डाइटिशियन के अनुसार, किशमिश आयरन का बहुत अच्छा स्रोत है। रोजाना 10–15 किशमिश खाने से RBC बनाने में मदद मिलती है। इसके अलावा किशमिश में विटामिन B-complex भी होता है, जो आयरन का अवशोषण बेहतर करता है।पाचन शक्ति बढ़ाएसर्दियों में लोग मसालेदार और डीप फ्राई खाना ज्यादा खाते हैं। इस तरह का खाना खाने से कब्ज, गैस और एसिडिटी की परेशानी बढ़ती है। किशमिश में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत करता है और आंतों को साफ करने में मदद करता है। रोजाना सुबह 4 से 5 पीस भीगी हुई किशमिश खाई जाए, तो इससे मल मुलायम बनता है। किशमिश मल त्याग की प्रक्रिया को भी आसान बनाता है। इससे पाचन से जुड़ी परेशानी दूर होती है और पाचन शक्ति मजबूत बनती है।सर्दी-जुकाम से बचाएकिशमिश में एंटीऑक्सीडेंट्स, पॉलीफेनॉल्स और विटामिन C जैसे तत्व होते हैं, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। सर्दी के मौसम में होने वाले वायरल इन्फेक्शन, गले में खराश, फ्लू और सर्दी-जुकाम की समस्या से भी ये ड्राई फ्रूट राहत दिलाता है। सर्दियों में 1 मुट्ठी किशमिश इम्यूनिटी सेल्स की एक्टिविटी बढ़ाती है।हड्डियों की परेशानी करता है दूरसर्दियों में सर्द हवाओं के कारण जोड़ो और हड्डियों से जुड़ी परेशानी बढ़ जाती है। इन परेशानियों को दूर करने में भी किशमिश बहुत फायदेमंद होती है। हेल्थ एक्सपर्ट बताती हैं कि किशमिश में कैल्शियम, बोरोन, मैग्नीशियम, पोटैशियम जैसे मिनरल्स होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। बोरोन हड्डियों की घनता (Bone Density) बढ़ाता है और ओस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करता है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी व्यक्ति को हड्डी से जुड़ी परेशानी है, तो उन्हें किशमिश जरूर खिलाएं।वजन बढ़ाएजो लोग बहुत दुबले हैं या ठंड में वजन बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए किशमिश प्राकृतिक वेट गेन के लिए मददगार है। दूध में किशमिश उबालकर पीने से वजन जल्दी बढ़ता है। Also Read - बिना क्रीम-पाउडर के खुद ब खुद चमकने लगेगी स्किन, बस खाना शुरु कर दें कोलेजन बढ़ाने वाले ये फूड्ससर्दियों में किशमिश किस तरह खानी चाहिए?सर्दियों में आप रात भर 10-15 किशमिश भिगो दें। रोजाना सुबह खाली पेट भीगी हुई किशमिश खाएं। गर्म दूध में उबली हुई किशमिश सर्दियों के लिए सबसे फायदेमंद होती है। अगर आपको लो एनर्जी की समस्या है, तो आप दूध में उबालकर किशमिश खा सकते है।
- अस्थमा फेफड़ों की एक पुरानी बीमारी है जिसमें नेसल पैसेज संकरे हो जाते हैं और सूज जाते हैं। इस बीमारी में सीने में लगातार बलगम बनता है जिससे कंजेशन, घरघराहट, सांस लेने में तकलीफ और खांसी की समस्या हो सकती है। ऐसे में कुछ हर्ब्स का सेवन इस बीमारी से राहत दिला सकता है जैसे कि तुलसी। तुलसी एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुणों से भरपूर है और इसका सेवन फेफड़ों को साफ करने में मदद कर सकता है।अस्थमा में तुलसी के फायदे-तुलसी को कूटकर इसका रस पिएं-तुलसी के तेल का इस्तेमाल करें-सूखे पत्ते का चूर्ण शहद के साथ लें-तुलसी में सूजन-रोधी यौगिक होते हैं जो वायुमार्ग की सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। इससे अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है और ये उन लोगों के लिए काफी मददगार है जिन्हें अस्थमा के दौरान सांस फूलने की समस्या होती है।- तुलसी के एंटीऑक्सीडेंट अस्थमा से जुड़े ऑक्सीडेटिव तनाव का मुकाबला कर सकते हैं और आपके फेफड़ों की नलियों को हेल्दी रखने में मददगार हैं। दरअसल, अस्थमा के मरीज का फेफड़ा बेहद कमजोर होता है और रिकवरी पूरी तरह से नहीं हो पाती जिससे आपको बार-बार खांसी की समस्या हो सकती है। ऐसे में तुलसी के प्रभाव से फेफड़ों को रिकवरी मिलती है।- तुलसी का ब्रोन्कोडायलेटरी प्रभाव अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि तुलसी ब्रोन्कियल मांसपेशियों को आराम देने में मदद कर सकती है। इसलिए श्वसन संबंधी समस्याओं के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसका उपयोग किया जाता है।अस्थमा में तुलसी का उपयोग कैसे करें-तुलसी को कूटकर इसका रस पिएंश्रेय शर्मा बताते हैं कि सबकुछ तुलसी के अर्क में ही है। आप तुलसी की पत्तियों को पीस लें और इसका अर्क लें। आप इसका अर्क एक चम्मच में डालकर और शहद मिलाकर ले सकते हैं। इसके अलावा आप इस अर्क को काली मिर्च के साथ मिलाकर भी ले सकते हैं जो कि गले की समस्या को शांत करने में मदद कर सकता है।तुलसी के तेल का इस्तेमाल करेंअस्थमा में तुलसी का तेल गर्म पानी में मिलाकर पीना काफी राहत दे सकता है। आप इस तेल को अपने नाक में भी लगा सकते हैं। तुलसी का तेल आप घर पर भी बना सकते हैं या फिर इसे खरीदकर भी ला सकते हैं। इससे आपके नेसल पैसेज को काफी बेहतर महसूस होगा।सूखे पत्ते का चूर्ण शहद के साथ लेंये नुस्खा आपके लिए लंबे समय तक काम कर सकता है। आप तुलसी के पत्तों को सूखाकर इसका पाउडर बना सकते हैं और इस पाउडर को एक चूर्ण की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। आप इसे शहद में मिलाकर ले सकते हैं जो कि गले को शांत करने के साथ सर्दी-जुकाम के लक्षणों में कमी ला सके।तुलसी की चाय पीना अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, आप ताजी तुलसी की पत्तियां चबाएं या किसी व्यंजन में इस्तेमाल करें। इसके अलावा तुलसी की भाप लेना भी फेफड़ों को हेल्दी रखने में मदद कर सकता है।हालांकि, अगर आपको गंभीर अस्थमा है तो किसी स्वास्थ्य सेवा पेशेवर से परामर्श लें। अस्थमा के लिए मेडिकल हेल्प जरूरी है। तुलसी के प्रति प्रतिक्रियाएं भिन्न हो सकती हैं इसलिए लक्षणों पर नजर रखें। तुलसी से किसी भी प्रकार की एलर्जी की जांच करें। तुलसी कुछ दवाओं के साथ परस्पर क्रिया कर सकती है इसलिए लक्षणों पर नजर रखें। अगर बाहर से खरीद रहे हैं तो तुलसी उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करें।
- सुबह उठते ही एक कप गर्म ब्लैक कॉफी पीना दुनिया भर में लाखों लोगों की एक प्रिय आदत है। बहुत से लोग मानते हैं कि यह उन्हें तुरंत ऊर्जा देती है और उनकी दिनचर्या को किक-स्टार्ट करती है। यह बात सच है कि कॉफी में मौजूद कैफीन एक शक्तिशाली उत्तेजक है जो मानसिक सतर्कता और शारीरिक क्षमता को सक्रिय करती है।मगर जब बात इसे खाली पेट पीने की आती है, तो बहुत से लोगों के मन में ये सवाल आता है कि क्या यह हमारे पाचन तंत्र के लिए सुरक्षित है। विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि कॉफी को हमेशा कुछ खाने के बाद ही पीना चाहिए। इसका मुख्य कारण यह है कि ब्लैक कॉफी स्वभाव से अम्लीय होती है, और जब यह सीधे पेट की परत के संपर्क में आती है तो यह पेट में एसिड के उत्पादन को बढ़ा सकती है।यह बढ़ा हुआ एसिड उन लोगों में एसिडिटी, पेट में जलन, और यहां तक कि गैस्ट्राइटिस के लक्षणों को ट्रिगर कर सकता है, जिनका पेट संवेदनशील है या जिन्हें पहले से ही पाचन संबंधी समस्याएं हैं। इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं कि खाली ब्लैक कॉफी पीने से पाचन पर क्या असर पड़ता है।पाचन तंत्र पर इसका क्या असर पड़ता है?ब्लैक कॉफी पीने का एक महत्वपूर्ण प्रभाव यह है कि यह पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड के स्राव को उत्तेजित करती है। यह एसिड भोजन को पचाने के लिए आवश्यक है, लेकिन जब पेट खाली होता है, तो यह एसिड पेट की संवेदनशील आंतरिक परत को नुकसान पहुंचाना शुरू कर सकता है। समय के साथ, यह बार-बार होने वाला एसिड एक्सपोजर पेट के अल्सर या एसिड रिफ्लक्स जैसी गंभीर पाचन समस्याओं में जोखिम बढ़ा देता है।हार्मोन और ब्लड शुगर पर प्रभावखाली पेट ब्लैक कॉफी का सेवन केवल पाचन तंत्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हार्मोनल संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। सुबह उठते ही हमारा शरीर स्वाभाविक रूप से कोर्टिसोल नामक तनाव हार्मोन का उच्च स्तर उत्पन्न करता है। कॉफी पीने से कोर्टिसोल का स्तर और बढ़ सकता है।कोर्टिसोल का अत्यधिक और लंबे समय तक बढ़ा हुआ स्तर हमारे शरीर की तनाव प्रतिक्रिया को बाधित कर सकता है और समय के साथ इंसुलिन संवेदनशीलता को भी प्रभावित कर सकता है।क्या करें?यदि आप ब्लैक कॉफी पीना पसंद करते हैं, तो अपने पाचन तंत्र की सुरक्षा के लिए कुछ सरल उपाय अपना सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह है कि कॉफी पीने से पहले कुछ हल्का जरूर खा लें। एक केला, मुट्ठी भर मेवे, या दलिया का एक छोटा कटोरा आपके पेट में एक परत बना देगा, जिससे कॉफी का एसिड सीधे पेट की परत को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
- सर्दियों की शुरुआत होते ही त्वचा रूखी होना शुरू हो जाती है और एड़ियां फटना भी एक ऐसी आम समस्या है, जिससे बहुत सारे लोग परेशान रहते हैं. इसमें एड़ी की त्वचा काफी मोटी और खुरदरी हो जाती है. कई बार तो दरारें काफी ज्यादा बढ़ जाती है. ये न सिर्फ देखने में खराब लगती है, बल्कि इससे दर्द भी होने लगता है, इसलिए जरूरी ही कि सही समय पर आप इसको ट्रीट करें. एड़ियों की त्वचा में दरार, सूखापन, त्वचा खुरदरी और मोटी होने के पीछे कई वजह हो सकती हैं, जैसे लंबे समय तक नंगे पैर रहना, हमेशा खुले हुए फुटवियर पहनना, ठंडे पानी में लंबे समय तक रहना, एड़ियों की त्वचा को मॉइस्चराइज न करना. इन सारी चीजों पर ध्यान देने के साथ ही कुछ सिंपल से घरेलू नुस्खे आपको फटी एड़ियों की समस्या से निजात दिला सकते हैं और इससे आपके पैरों की त्वचा मुलायम भी बनती है.फटी एड़ियों को अगर नजरअंदाज किया जाए तो इसमें न सिर्फ दर्द हो सकता है, बल्कि घाव बन सकते हैं और संक्रमण होने की संभावना भी बढ़ जाती है. खासतौर पर जिन लोगों को डायबिटीज है, उन्हें इसपर बहुत ज्यादा ध्यान देना चाहिए. मार्केट में कई महंगी क्रीमें मौजूद हैं, लेकिन घरेलू नुस्खे भी आपकी एड़ियों को मुलायम और सॉफ्ट बनाए रखने में काफी कारगर होते हैं. तो चलिए जान लेते हैं डिटेल में.ग्लिसरीन-नींबू के रस की रेमेडीफटी एड़ियों से छुटकारा पाने के लिए गुलाब जल, ग्लिसरीन और नींबू के रस को अच्छी तरह से मिलाकर किसी बोतल में भरकर रख लें. इसे रोज रात में सोने से पहले अपनी एड़ियों पर लगाएं. ये मिश्रण आप सिर्फ एड़ियो पर ही नहीं बल्कि पैरों की ऊपरी त्वचा पर भी लगा सकते हैं. ये हाथों की त्वचा को भी मुलायम बनाने में कारगर रेमेडी है.ये है पुराना नुस्खामार्केट में आपको यलो कलर का मोम मिल जाएगा (मधुमक्खियों के छत्ते से मिलने वाला मोम). इसे आप गर्म कर लें और इसमें ग्लिसरीन, चुटकी भर हल्दी पाउडर, कैस्टर ऑयल या फिर नारियल का तेल मिला लें. इसे थोड़ा ठंडा करने के बाद किसी एयरटाइट कंटेनर में भरकर रख लें. ये बिल्कुल बाम जैसा बन जाएगा. इसे रोजाना रात में अपनी एड़ियों पर लगाकर मोजे पहनकर सो जाएं. इससे आपको कुछ ही दिनों में फटी एड़ियों से छुटकारा मिलेगा और पैरों की त्वचा सॉफ्ट बन जाएगी.सॉफ्ट एड़ियों के लिए पैकअगर आपकी एड़ियों के साथ ही पैरों के पंजों की त्वचा बहुत सख्त हो गई है और हल्की दरारें बनने लगी हैं तो आप शहद, एलोवेरा जेल,और पका हुआ केला मिलाकर ग्राइंड कर लें. इससे ये बिल्कुल पेस्ट जैसा बन जाएगा. इस पैक को एड़ियों के साथ ही पूरे पैरों पर कम से कम 20 मिनट लगाकर रखें और फिर मसाज करते हुए पैरों को क्लीन कर लें. इस पैक को आप हफ्ते में तीन बार लगाएं, जिससे डेड स्कीन भी क्लीन होगी और त्वचा मुलायम-चमकदार बनेगी.डेड स्किन हटाना है जरूरीकिसी भी रेमेडी को अप्लाई करने से पहले पहले आपको एड़ियों पर जमा डेड स्कीन हटानी होगी. इसके लिए एक बड़े टब में गर्म पानी डालकर उसमें माइल्ड शैंपू और थोड़ा सा नमक और फिटकरी डालकर पैरों को कम से कम 15 मिनट डुबोकर रखें और फिर प्यूमिक स्टोन से एड़ियों को साफ करें. आप डेड स्किन क्लीन करने के लिए कॉफी, चीनी, शहद और थोड़ा सा नारियल तेल मिलाकर स्क्रब भी बना सकते हैं. इसके बाद कुछ देर इससे सर्कुलर मोशन में मसाज करें और पैरों को क्लीन करने के बाद मॉइस्चराइजर लगाएं. ध्यान रखें कि गर्म पानी से पैर सिर्फ हफ्ते में एक बार ही क्लीन करने हैं.ये है बिल्कुल सिपंल तरीकाअपनी एड़ियों को सॉफ्ट बनाए रखने के लिए डेली रूटीन में अपने पैरों को बहुत ज्यादा खुला न रखें. ऐसे फुटवियर पहनें जो बंद होने के साथ ही सॉफ्ट भी हो. इसके अलावा रोजाना रात में अपने पैरों पर कैस्टर ऑयल लगाकर सोएं. कुछ देर तक पैरे के तलवों और एड़ियों पर तेल लगाकर मसाज करें. इससे न सिर्फ पैरों की त्वचा खूबसूरत बनेगी, बल्कि इससे स्ट्रेस भी दूर होगा.
- सर्दियों का मौसम शुरु हो गया है. इस मौसम में हवा में नमी की कमी हो जाती है, जिसकी वजह से त्वचा भी रूखी और बेजान लगने लगती हैं. होंठ फटने लगते हैं, एड़ियां फटने लगती हैं और नाक के आसपास भी त्वचा छिल सी जाती है. ऐसे में इन सबका एक रामबाण इलाज है और वो है वैसलीन पेट्रोलियम जेली. ये न सिर्फ स्किन तो मुलायम बनाने में मदद करती है बल्कि कई समस्याओं से राहत दिलाने में मददगरा है.वैसे तो आमतौर पर लोग वैसलीन को सिर्फ फटे होंठो को रिपेयर करने के लिए इस्तेमाल करते हैं. लेकिन आप नहीं जानते हैं कि ये बड़े काम आ सकती है. आज इस आर्टिकल में हम आपको वैसलीन के 5 ऐसे ही यूज बताने जा रहे हैं, जो सर्दियों के मौसम में आपके बहुत काम आ सकते हैं.रूखे होंठों के लिए नेचुरल मॉइस्चराइजरसर्दियों में होंठों का फटना बहुत आम बात है. लेकिन ये काफी दर्द भरे होते हैं. कभी-कभी तो होंठ इतने फट जाते हैं कि खून तक निकलने लगता है. ऐसे में इसे राहत पाने के लिए सबसे बेहतरीन इलाज है वैसलीन. ये होंठो पर एक सुरक्षा लेयर बनाती है, जिससे उनमें मौजूद नमी बरकरार रहती है. रात को होंठों पर वैसलीन लगाने से सुबह आपको मुलायम और गुलाबी होंठ मिलते हैं.जुकाम में नाक बंद होने पर ऐसे करें यूजसर्दी-जुकाम होने पर नाक को बार-बार पोंछना पड़ता है. ऐसे में नाक के पास की त्वचा ड्राई हो जाती है और लाल पड़ने लगती है. ऐसे में आप वैसलीन को इफेक्टिड एरिया पर लगाएं. ये त्वचा को मुलायम बनाएगी. इसके अलावा आप वैसलीन को हल्का गर्म करके इसकी खुशबू को अंदर लें इससे भी राहत मिल सकती है.फटी एड़ियों का इलाजसर्दियों में एड़ियां फटना भी एक आम बात है. लेकिन वक्त रहते अगर इसकी केयर न की जाए तो एड़ियां बहुत ज्यादा पैनफुल हो जाती है. ऐसे में आप इसके लिए वैसलीन का इस्तेमाल कर सकते हैं. रात को सोने से पहले एड़ियों में वैसलीन लगानें और मोजे पहनकर सो जाएं. कुछ दिन में ही आपकी एड़ियां मुलायम होने लगेंगी.परफ्यूम को लंबे समय तक टिकाने का तरीकावैसलीन सिर्फ त्वचा को मॉइस्चराइज करने में ही नहीं बल्कि परफ्यूम को लंबे समय तक टिकाने में भी मदद करती है. बस आपको परफ्यूम लगाने से पहले कलाई, गर्दन और कान के पीछे थोड़ी सी वैसलीन लगा लेनी है. इसकी चिनकी चिकनी लेयर खुशबू को होल्ड करके रखती है, जिससे आपका परफ्यूम घंटों टिका रहता है.आईब्रो सेट करने के लिए नेचुरल जेलमेकअप में भी वैसलीन काफी काम आती है. अगर आपके पास आईब्रो सेट करने के लिए कोई जेल नहीं है तो वैसलीन का इस्तेमाल कर सकती हैं. इसके लिए बस आपको एक ब्रश की मदद से थोड़ा सी वैसलीन लें और अपनी आईब्रो पर लगा लें. इससे बाल अपनी जगह पर बने रहते हैं और आईब्रो शार्प-क्लीन नजर आती हैं.
- सर्दियों में अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, सीजनल फल, ड्राई फ्रूट्स, नट्स सीड्स आदि को तो शामिल करना ही चाहिए. इसके अलावा कुछ हर्ब्स काफी फायदेमंद रहती हैं. ठंडे मौसम की वजह से जुकाम-खांसी, गले में खराश, हल्का बुखार जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में इन समस्याओं से बचाव के साथ ही राहत पाने के लिए नेचुरल हर्ब्स से बनी चाहिए काफी फायदेमंद रहती है.इन सभी हर्ब्स में कई पावरफुल प्लांट कंपाउंड होने के साथ ही विटामिन और मिनरल भी पाए जाते हैं, साथ ही ये हर्ब्स तासीर की भी गर्म रहती हैं, इसलिए सर्दियों में आपको सेहतमंद बनाए रखने में हेल्पफुल हैं.आयुर्वेद में कई ऐसी हर्ब्स बताई गई हैं जो काफी शक्तिशाली होती हैं और आसानी से मिल भी जाती हैं. कुछ हर्ब्स के मिश्रण की चाय आपकी सर्दियों को हैप्पी और हेल्दी बना सकती है. ये न सिर्फ आपको जुकाम-खांसी जैसी समस्याओं में आराम दिलाएंगी, बल्कि अगर आप डेली रूटीन में सीमित मात्रा में दिन में एक बार हर्ब्स से बनी चाय लेते हैं तो ये आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने में भी मदद करेंगी. तो चलिए देख लेते हैं.अदरक-तुलसी की चायसबसे पहले हमें ये समझना चाहिए कि अगर बात हम हर्बल चाय की कर रहे हैं तो उसमें शुगर और दूध को अवॉइड करना चाहिए. कोशिश करें कि चायपत्ती का इस्तेमाल भी न करें. इस तरह से ये चाय एक तरह का काढ़ा होती हैं. आप अदरक और तुलसी की चाय बनाकर पी सकते हैं. ये दोनों ही चीजें कई गुणों से भरपूर होती हैं. हेल्थ लाइन के मुताबिक, अदरक में जिंजरोल नाम का पावरफुल एंटीइंफ्लामेटेरी बायोएक्टिव कंपाउंड होता है. ये अदरक में कई मेडिसिनल प्रॉपर्टीज के लिए जिम्मेदार है. इसके अलावा तुलसी को आयुर्वेद में शक्तिशाली जड़ी-बूटी माना गया है.मुलेठी-लौंग की चायसर्दियों में हेल्दी रहने के लिए मुलेठी और लौंग भी बेहतरीन हर्ब्स हैं. मुलेठी खराश और खांसी से राहत दिलाती है तो वहीं लौंग भी आपको जुकाम, खांसी,खराश में आराम दिलाने के साथ आपकी इम्यूनिटी को मजबूत करती है. पबमेड में भी लौंग के कई फायदे बताए गए हैं तो वहीं मुलेठी में कम से कम 300 कंपाउंड पाए जाते हैं.हल्दी-दालचीनी की चायघरों में मसाले के रूप में इस्तेमाल होने वाली हल्दी और दालचीनी भी औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं और आपकी इम्यूनिटी बूस्ट करने से लेकर शरीर को गर्म रखने का काम भी करती हैं. आप इन दोनों हर्ब्स को पानी में उबालकर चाय की तरह ले सकते हैं या फिर दूध में भी मिलाकर पिया जा सकता है. ध्यान रखें कि चाय में हल्दी पाउडर की बजाय कच्ची हल्दी (देखने में अदरक की तरह होती है) इस्तेमाल करना चाहिए.नीलगिरी चाय भी है फायदेमंदसर्दियों में आप नीलगिरी की चाय पी सकते हैं जो कई एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है. हेल्थ लाइन के मुताबिक ये आपकी बॉडी को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल्स डैमेज से भी बचाती है. इसके अलावा ये जुकाम के लक्षणों को कम करने, ड्राई स्किन को ट्रीट करने, दर्द कम करने से लेकर दांतों के लिए भी फायदेमंद होती है.
- आजकल बढ़ता हुआ एयर पलूशन हमारी हेल्थ के लिए चिंता का बड़ा विषय बन गया है। हवा की क्वालिटी बहुत तेजी से बिगड़ रही है और इसका सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। उनके लंग्स और इम्यून सिस्टम अभी पूरी तरह से डेवलप नहीं होते, इसलिए वे प्रदूषण से ज्यादा अफेक्टेड होते हैं। डॉक्टर अर्पित गुप्ता बताते हैं कि अगर पैरेंट्स कुछ आसान कदम अपनाएं तो बच्चों को एयर पॉल्यूशन के बढ़ते खतरे से काफी हद तक बचाया जा सकता है। आइए जानते हैं -सुबह और शाम खिड़कियां बंद रखेंडॉ. के अनुसार, सुबह और शाम के समय हवा में पलूशन का लेवल सबसे ज्यादा होता है। इसलिए ऐसे टाइम में बाहर की हवा घर में ना आने दें। इस दौरान घर की खिड़कियां बंद रखना बेहतर है ताकि बच्चे जहरीली हवा से दूर रहें। दिन में जब हवा थोड़ी साफ होती है, तभी खिड़कियां खोलकर घर में ताजी हवा आने दें। यह छोटा सा कदम बच्चों की सांस की तकलीफ और एलर्जी को काफी कम कर सकता है।कमरे में एयर प्यूरीफायर लगाएंअगर संभव हो तो जिस कमरे में बच्चे ज्यादा टाइम बिताते हैं, वहां एयर प्यूरीफायर लगाएं। डॉअर्पित बताते हैं कि इससे हवा में मौजूद धूल, धुआं और हानिकारक कण काफी हद तक कम हो जाते हैं। एयर प्यूरीफायर बच्चों को साफ और सुरक्षित हवा में सांस लेने में मदद करता है।आउटडोर गेम से बनाएं दूरीजब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ज्यादा खराब हो, तो बच्चों को आउटडोर गेम्स खेलने से बचाना चाहिए। डॉक्टर सलाह देते हैं कि ऐसे दिनों में बच्चों को घर के अंदर खेलने के लिए मोटिवेट करें। आप उन्हें पजल, बोर्ड गेम्स या ड्रॉइंग जैसी इनडोर एक्टिविटी में शामिल कर सकते हैं।बच्चों को खूब पानी पिलाएंडॉ. बताते हैं कि जब हवा में पलूशन बढ़ जाता है, तो शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं। ऐसे में बच्चों को दिनभर खूब सारा पानी पिलाना चाहिए। पर्याप्त पानी पीने से शरीर अंदर के टॉक्सिक एजेंट को बाहर निकाल देता है और लंग्स को हेल्दी रखता है। आप बच्चों को नारियल पानी या सूप जैसी हेल्दी ड्रिंक्स भी दे सकते हैं ताकि शरीर हाइड्रेटेड बना रहे।विटामिन सी वाले फूड्स देंडॉक्टर का कहना है कि विटामिन सी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है और शरीर को प्रदूषण से लड़ने की ताकत देता है। बच्चों को रोजाना आंवला, संतरा, टमाटर और नींबू जैसे फलों का सेवन कराएं। ये फूड्स बच्चों के लंग्स को हेल्दी रखते हैं और पलूशन से होने वाली खांसी या गले की समस्या को कम करते हैं। इन चीजों को आप बच्चों के लंच या स्नैक्स में शामिल कर सकते हैं।बाहर जाते समय N95 मास्क जरूर पहनाएंअगर बच्चे को किसी जरूरी काम से घर से बाहर जाना पड़े, तो उसे बिना मास्क कभी ना भेजें। डॉक्टर सलाह देते हैं कि बच्चों को हमेशा N95 मास्क पहनाकर ही बाहर जाने दें। यह मास्क हवा में मौजूद हानिकारक कणों को रोकता है और बच्चों के लंग्स की सुरक्षा करता है। इस बात का ध्यान रखें कि मास्क सही तरह से फिट होना चाहिए ताकि बच्चे को सांस लेने में दिक्कत ना हो और सुरक्षा भी बनी रहे।काम!
- काली किशमिश और चिया सीड्स दोनों ही न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होते हैं। इनके पानी को पीना स्वास्थ्य के लिए कई तरीकों से फायदेमंद हो सकता है।पाचन में को दुरुस्त करेचिया सीड्स और काली किशमिश के पानी में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और फाइबर के गुण होते हैं। इनका सेवन करने से पाचन प्रक्रिया को बेहतर करने और गैस, अपच और कब्ज जैसी पाचन संबंधी समस्याओं से राहत देकर बाउल मूवमेंट को बढ़ावा देने में मदद मिलती है, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।वजन कम करने में सहायकचिया सीड्स और काली किशमिश के पानी में मौजूद फाइबर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। इसका सेवन करने से शरीर में मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देने, पेट को भरा रखने और वजन कम नेचुरल रूप से कम करने में सहायक है।स्किन के लिए फायदेमंदचिया सीड्स और काली किशमिश के पानी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण स्किन के लिए फायदेमंद होते हैं। इसका सेवन करने से स्किन को नेचुरल रूप से हाइड्रेट रखने, शाइनी बनाने, त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर कर स्किन को ग्लोइंग बनाने में मदद मिलती है।शरीर को एनर्जी देचिया सीड्स और काली किशमिश के पानी में भरपूर मात्रा में आयरन और विटामिन्स होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने के शरीर को नेचुरल रूप से एनर्जी देने और शरीर की थकान या कमजोरी को दूर करने में मदद मिलती है।कैसे तैयार करें काली किशमिश और चिया सीड्स का पानी?इसके लिए 2 छोटी चम्मच काली किशमिश और 1 छोटी चम्मच चिया सीड्स को 1 कप पानी में डालकर इसको रातभर के लिए फ्रिज या किसी ठंडी जगह पर रख दें। अब इस पानी का सेवन सुबह के समय करें या स्नैक टाइम पर करें। इससे स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं।निष्कर्षकाली किशमिश और चिया सीड्स में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में इनके पानी का सेवन करने से पाचन को दुरुस्त करने, वजन कम करने, स्किन को हेल्दी रखने, कब्ज से राहत देने, शरीर को एनर्जी देने और स्किन को नेचुरल रूप से हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखने में मदद मिलती है, लेकिन ध्यान रहे, इसका सेवन सीमित मात्रा में करें। इसके अलावा, कोई भी परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें और इनसे किसी भी तरह की एलर्जी होने पर इसका सेवन जरूर करें।
- शादी का मौसम शुरू होते ही हर लड़की चाहती है कि उसकी त्वचा चमकदार, साफ और बेदाग दिखे। खासकर वुड बी दुल्हन का चेहरा चमकना तो बहुत जरूरी है भई। लेकिन कई बार नाक, ठोड़ी और चेहरे पर दिखने वाले ब्लैकहेड्स (Blackheads) चेहरे की चांद की खूबसूरती में दाग लगाते हैं। इस वेडिंग सीजन अगर आप भी अपनी शादी या किसी खास मौके से पहले ब्लैकहेड्स हटाने का नेचुरल तरीका ढूंढ रही हैं, तो घर पर बना स्क्रब आपके लिए सबसे अच्छा ऑप्शन है।ब्लैकहेड्स क्या हैं और ये क्यों होते हैंब्लैकहेड्स दरअसल ऑयल, डेड स्किन और धूल मिट्टी के कारण रोमछिद्र (pores) बंद होने से बनते हैं। जब ये रोमछिद्र हवा के संपर्क में आते हैं, तो ऑक्सीकरण की वजह से काले दिखाई देने लगते हैं। ब्लैकहेड्स अक्सर ये नाक, ठोड़ी और माथे पर ज्यादा बनते हैं। ब्लैकहेड्स को हटाने के लिए सबसे आसान तरीका है स्क्रब करना। स्क्रबिंग करने से स्किन गहराई से साफ होती है, जिससे ब्लैकहेड्स निकलते हैं और त्वचा चमकदार बनती है।शादी से पहले कौन सा होममेड स्क्रब करें इस्तेमाल?शादी से पहले ब्लैकहेड्स को हटाने के लिए आप घर पर बनाए गए स्क्रब का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस स्क्रब को बनाने के लिए एक कटोरी में 1 चम्मच नींबू का रस, 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच चीनी को अच्छे से मिक्स कर लें। इस स्क्रब को चेहरे पर हल्के हाथों से 2–3 मिनट तक गोल-गोल घुमाएं। फिर 5 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें। नींबू का विटामिन सी स्किन को डीप क्लीन करके ब्लैकहेड्स को हटाता है। वहीं, शहद स्किन को सॉफ्ट और मॉइस्चराइज रखता है।बेसन और हल्दी का स्क्रबजिन लोगों की स्किन ऑयली है उनके लिए बेसन और हल्दी का स्क्रब बेस्ट ऑप्शन है। इस स्क्रब को बनाने के लिए 1 बड़ा चम्मच बेसन, एक चुटकी हल्दी, कुछ बूंदें गुलाबजल या दूध की एक साथ मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें। चेहरे पर लगाकर 5 मिनट तक सूखने दें और फिर हल्के हाथों से मसाज करते हुए धो लें। बेसन और हल्दी का स्क्रब डेड सेल्स को हटाकर ब्लैकहेड्स का सफाया करता है। बेसन और हल्दी का स्क्रब शादी से पहले इस्तेमाल करने से चेहरे पर नेचुकल ग्लो आता है।कॉफी और एलोवेरा स्क्रबनाक, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर होने वाले ब्लैकहेड्स को हटाने के लिए कॉफी और एलोवेरा का स्क्रब बहुत फायदेमंद होता है। इस स्क्रब को बनाने के लिए 1 चम्मच कॉफी पाउडर में 1 चम्मच एलोवेरा जेल को मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें। चेहरे पर 3–4 मिनट तक हल्के हाथों से मसाज करें और फिर ठंडे पानी से धो लें। कॉफी स्किन की एक्सफोलिएशन करती है और एलोवेरा स्किन को सॉफ्ट व हाइड्रेटेड रखता है।स्क्रब करने का सही समय और तरीकाब्लैकहेड्स हटाने के लिए शादी से पहले हफ्ते में 2 बार स्क्रब जरूर करें। स्क्रब हमेशा क्लीन चेहरे पर करें। मसाज करते समय हल्के हाथों से गोलाई में रगड़ें, ज्यादा दबाव न डालें। स्क्रब के बाद हमेशा फेस पैक या मॉइस्चराइजर लगाएं ताकि स्किन ड्राई न हो। ध्यान रहे कि जिन लोगों को स्किन पहले से सेंसेटिव और ड्राई है तो स्क्रब का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर लें।
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कच्ची हल्दी सिर्फ दूध में डालकर सर्दी-खांसी दूर करने के काम नहीं आती है, बल्कि यह हमारे पेट से जुड़ी समस्याओं के लिए भी बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होती है। हल्दी में करक्यूमिन नाम का एक ऐसा कम्पाउंड होता है जिसमें एंटी इंफ्लेमेशन, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। खासकर कच्ची हल्दी को खाया जाए तो इरिटेबल बाउल सिंड्रोम को कम करने व सूजन को कम करने फायदेमंद होता है। लेकिन इसका सेवन कैसे किया जाए, आइए विस्तार से जानते हैं, लेकिन उससे पहले आइए फायदे जानें।
सूजन बढ़ने से रोकता हैकरक्यूमिन में एंटी इंट्राफ्लेमेशन गुण होते हैं जो सूजन बढ़ने से रोकते हैं, इस दौरान पेट की परतों और आंतों में होने वाली सूजन भी कम करते हैं। इसके अलावा टिश्यू को हील करने, गैस को कम करने और अन्य पेट से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है।हट माइक्रोबायोमी मॉड्यूलेशनकच्ची हल्दी बेनेफिशियल गट बैक्टीरिया जैसे लैक्टोबैकीलयस, बिफीडोबैक्टीरियम को बढ़ाने में मदद करती है और हानिकारक बैक्टीरिया को कम करके गट बैरियर फंक्शन को इंप्रूव करने का काम करती है। यह पाचन को ठीक करने और पोषक तत्वों को सही से अबॉर्शन को बेहतर बनाता है। साथ ही इम्यूनिटी और मेटाबॉलिज्म की हेल्थ को भी प्रमोट करता है। यही कारण है कि लोग शरीर की समस्याओं को ठीक करने के लिए दूध में कच्ची हल्दी डालकर पीते हैं।कैसे करें कच्ची हल्दी का उपयोगअगर आप भी अपने पेट से जुड़ी समस्याओं को ठीक करना चाहते हैं तो कच्ची हल्दी का सेवन कर सकते हैं। लेकिन इसे आप पहले बार में ही ज्यादा मात्रा में न लें। बल्कि पहले इनडाइजेशन में पेट में होने वाली जलन से बचने के लिए रोज आधी चम्मच पिसी हुई ताजी हल्दी का सेवन करें।हल्दी का सेवन करने के अन्य तरीकेआप चाहें तो कच्ची हल्दी का सूप भी पी सकते हैं, स्टू, सलाद या स्मूदी में पीसकर डाल सकते हैं। वहीं रात को सोने से पहले गर्म दूध में हल्दी व काली मिर्च मिलाकर भी पी सकते हैं। यह आपकी गट हेल्थ के साथ-साथ पूरे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में फायदेमंद साबित होगी। रोजाना कच्ची हल्दी का सेवन करने से कुछ ही दिनों में आपको असर दिखने शुरु हो जाएंगे।कच्ची हल्दी से जुड़ी इन बातों का रखें ध्यानकच्ची हल्दी का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखें कि हल्दी की मात्रा हमेशा कम ही रखें, वरना सीने व पेट में जलन हो सकती है और गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स की समस्या को बढ़ा सकती है। साथ ही दवाओं के साथ इसे न खाएं और अगर समस्या ज्यादा बढ़ रही है तो पहले डॉक्टर से कंसल्ट करें। - सर्दियों का मौसम आते ही सबसे आम स्किन प्रॉब्लम होती है रूखी और पपड़ीदार त्वचा (Dry and Flaky Skin)। चेहरे पर खिंचाव, हाथों में रूखापन और पैरों की एड़ियों में दरारें न सिर्फ दर्द देती हैं बल्कि आपकी स्किन की खूबसूरती भी छीन लेती हैं। बाजार में मिलने वाले महंगे मॉइश्चराइजर और क्रीम्स कुछ समय के लिए राहत जरूर देते हैं, लेकिन उनमें मौजूद केमिकल्स लंबे समय में स्किन को और ज्यादा डिहाइड्रेट कर सकते हैं। ऐसे में जरूरत होती है घरेलू नुस्खों की, जो आपकी स्किन को नेचुरल तरीके से मॉइश्चराइज और पोषित करें।रूखी और पपड़ीदार त्वचा का घरेलू इलाज1. तिल का तेलतिल के तेल में फैटी एसिड्स और विटामिन E भरपूर मात्रा में होते हैं जो स्किन की नेचुरल नमी को लॉक करते हैं। इसे नहाने के बाद हल्के गीले शरीर पर लगाने से ड्राइनेस कम होती है और त्वचा में कोमलता आती है। रात में सोने से पहले चेहरे पर तिल तेल की कुछ बूंदें लगाने से रूखेपन और पपड़ी से राहत मिलती है। आयुर्वेद में सर्दियों के लिए तिल के तेल को त्वचा पोषक तेल कहा गया है, जो वात दोष को शांत करता है और त्वचा की कोमलता बनाए रखता है।2. दूध और मलाईदूध में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाकर नई कोशिकाओं के विकास में मदद करता है। मलाई (Milk Cream) एक गाढ़ा नेचुरल मॉइश्चराइजर है जो त्वचा की गहराई तक जाकर उसे मुलायम बनाता है। एक चम्मच मलाई में चुटकीभर हल्दी और कुछ बूंदें गुलाबजल मिलाकर लगाने से स्किन में निखार आता है। इसे रोजाना नहाने से पहले चेहरे या कोहनी जैसे रूखे हिस्सों पर लगाना बेहद लाभदायक होता है।3. शहदशहद (Honey) एक नेचुरल ह्यूमेक्टेंट है यानी यह त्वचा में नमी को बनाए रखता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं जो त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाते हैं। ड्राई स्किन के लिए शहद को सीधे चेहरे पर लगाकर 10-15 मिनट रखें और फिर ताजे पानी से धो लें। इससे त्वचा में ताजगी और नमी दोनों लौट आती हैं। चाहें तो शहद में कुछ बूंदें नींबू रस या गुलाबजल मिलाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।4. एलोवेरा जेलएलोवेरा (Aloe Vera) में पानी की मात्रा अधिक होती है और इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण स्किन की जलन, खुजली और पपड़ीदार त्वचा में राहत देते हैं। आप घर के एलोवेरा पौधे से ताजा जेल निकालकर सीधे चेहरे और हाथों पर लगा सकते हैं। इसे 15 मिनट बाद धो लें। यह स्किन को ठंडक देता है और कोमल बनाता है।आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में वात दोष बढ़ जाता है तो त्वचा की नमी और तैलीयता घट जाती है। वात बढ़ने के कारण त्वचा सूखने लगती है, झुर्रियां और बेजानपन आने लगता है। इसे संतुलित करने के लिए तिल के तेल (Sesame Oil) से रोजाना अभ्यंग यानी पूरे शरीर की मालिश करने की सलाह दी जाती है। साथ ही, घी, दूध और बादाम जैसे स्निग्ध पदार्थों का सेवन भी त्वचा की नमी बनाए रखने में सहायक होता है।निष्कर्षरूखी और पपड़ीदार त्वचा सिर्फ एक ब्यूटी इश्यू नहीं, बल्कि शरीर में नमी की कमी और असंतुलित लाइफस्टाइल का संकेत भी हो सकता है। केमिकल क्रीम्स की बजाय घर में मौजूद ये प्राकृतिक उपाय लंबे समय तक त्वचा को हेल्दी और चमकदार बनाए रखते हैं। यदि ड्राइनेस के साथ खुजली या फटने की समस्या बढ़ जाए, तो डॉक्टर या डर्मेटोलॉजिस्ट से परामर्श लेना भी जरूरी है।
- आज के समय में खराब खानपान के कारण ज्यादातर लोग पाचन से जुड़ी समस्याओं से परेशान रहते हैं। इसके करण अक्सर लोगों को ब्लोटिंग, कब्ज, गैस, अपच और मतली जैसी समस्याएं होती हैं, जो स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इन समस्याओं से राहत के लिए आपकी रसोई में रखीं कुछ हर्ब्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। पाचन से जुड़ी समस्याओं से राहत के लिए रसोई में रखीं कुछ हर्ब्स का सेवन नियमित रूप से किया जा सकता है। इनमें औषधीय गुण होते हैं, जिससे स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं।हल्दी खाएंआयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। इसका सेवन करने से पाचन तंत्र को दुरुस्त कर पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलती है, जिससे गैस, कब्ज और अपच जैसी पाचन संबंधी कई समस्याओं से राहत मिलती है। हल्दी को नियमित रूप से डाइट में शामिल करना फायदेमंद है। इसको सब्जियों में डालकर या रात को सोने से पहले दूध में डालकर इसका सेवन करना फायदेमंद है।अदरक खाएंआयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक और औषधीय गुणों से भरपूर अदरक में एंटी-ऑक्सीडेंट्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल के गुण होते हैं। इसका सेवन करने से कब्ज और गैस जैसी समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है। ये स्वास्थ्य के लिए कई तरीकों से फायदेमंद है। इसको नियमित रूप से डाइट में शामिल किया जा सकता है।लहसुन खाएंऔषधीय गुणों से भरपूर लहसुन में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। इसका सेवन करने से पाचन के लिए जरूरी एंजाइम्स को बढ़ावा देने, गट में बैड बैक्टीरिया को कम करने, अपच, गैस और कब्ज जैसी पाचन संबंधी समस्याओं से राहत देने और पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में मदद मिलती है, साथ ही, इससे मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है।दालचीनी खाएंदालचीनी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। इसका सेवन करने से भूख को बढ़ावा देने, मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने, ब्लोटिंग की समस्या से राहत देने, वजन कम करने और खाना खाने के बाद ब्लड शुगर के स्तर को तेजी से बढ़ने से रोकने में सहायक है। इसको सब्जियों, परांठे और चावल में मिलाकर खाया जा सकता है। इसके अलावा, खाने के बाद दालचीनी की चाय का सेवन किया जा सकता है।केसर खाएंऔषधीय गुणों से भरपूर और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक केसर में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। इसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए कई तरीकों से फायदेमंद है। केसर का सेवन करने से पाचन तंत्र को एक्टिव करने, भूख को बढ़ावा देने, सूजन को कम करने, ब्लोटिंग, गैस, अपच, एसिडिटी और कब्ज की समस्या से राहत देने में मदद मिलती है। इसको सीमित मात्रा में नियमित रूप से सेवन किया जा सकता है।मोरिंगा खाएंऔषधीय गुणों से भरपूर मोरिंगा में फाइबर और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व होते हैं, साथ ही, इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण होते हैं। इसका सेवन करने से गैस, एसिडिटी और अपच जैसी पाचन संबंधी समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है, साथ ही, इससे डिटॉक्स करने में मदद मिलती है।
- कुछ लोग फेफड़ों की सफाई के लिए गुड़ खाते हैं। इसके अलावा लोगों को मानना है कि गुड़ फेफड़ों में गर्मी पैदा करती है जो कि फेफड़ों की सफाई के साथ बलगम और खांसी कम करने में मददगार है लेकिन सवाल ये उठता है कि गुड़ को लेकर ये तर्क कितना सही है? गुड़ को अक्सर फेफड़ों के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन इस बात का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि यह उन्हें साफ कर सकता है। हालांकि, NIH की स्टडीमें इस बात की चर्चा की गई है कि सालों पहले धूल भरे या धुंए भरे वातावरण में काम करने वाले लोग अपने फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए गुड़ का सेवन करते हैं। उनका मानना था कि इससे फेफड़ों में जमा धूल और धुंए के कणों के असर को बेअसर करने में मदद मिलती है। इसलिए इस पर रिसर्च की गई और इसके लिए धूल के संपर्क में आने वाले चूहों पर गुड़ के प्रभावों को देखने के लिए प्रायोगिक अध्ययन किए गए।इस स्टडी में कोयले की धूल वाले अंतःश्वासनलीय इंजेक्शन चूहों को दिया गया। इसके बाग उन्हेंगुड़ के पानी का इंजेक्शन दिया गया है चूहों में फेफड़ों से ट्रेकिओब्रोंकियल लिम्फ नोड्स तक कोयले के कणों का बढ़ा हुआ स्थानांतरण देखा गया। इसके अलावा, गुड़ ने कोयले से प्रेरित ऊतकीय घावों और फेफड़ों में हाइड्रॉक्सीप्रोलाइन की मात्रा को कम कर दिया। इतना ही नहीं, गुड़ ने कोयले और सिलिका धूल के कणों को भी कम करने में मदद की। इस बात ये पता चलता है कि गुड़ खालकर शुद्ध देसी गुड़ फेफड़ों की सफाई में काफी हद तक मददगार है।वायुमार्ग से बलगम साफ करने में मदद मिलती हैगुड़ फेफड़ों को साफ करने में काफी कारगर है। इसके कुछ स्वास्थ्य लाभ जरूर हैं क्योंकि इसमें थोड़ी मात्रा में आयरन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। कम मात्रा में गुड़ खाने से वायुमार्ग से बलगम साफ करने और प्रदूषण या धूल से होने वाली जलन को कम करने में मदद मिल सकती है। यह पाचन में सुधार और ऊर्जा को भी बढ़ा सकता है।बलगम साफ करने के लिए आप ये कर सकते हैं गुड़ को रात में सोते समय खा लें। इसके अलावा आप गुड़ का काढ़ा या गुड़ का पानी पी सकते हैं जो कि फेफड़ों में जमा बलगम को साफ करने में मददगार है। इसके अलावा आपको सूखी खांसी हो रही है तो आपको गुड को अदरक या सोंठ के साथ पकाकर लेना चाहिए।हालांकि, गुड़ अभी भी चीनी का एक रूप है, इसलिए ज्यादा खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है, खासकर डायबिटीज रोगियों के लिए। अपने फेफड़ों को साफ रखने के लिए, धूम्रपान से बचना, स्वच्छ हवा में सांस लेना, हाइड्रेटेड रहना और विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल और सब्जियां खाना बेहतर है।रोजाना गुड़ खाने से क्या होता है?रोजाना अगर आप खाना खाने के बाद 1 टुकड़ा गुड़ खाते हैं तो आपके शरीर में आयरन की कमी नहीं होगी और न ही आपको मीठे की क्रेविंग परेशान करेगी। इसके अलावा गुड़ पाचन एंजाइम्स को बढ़ावा देने के साथ डाइजेशन को बेहतर बनाने में मददगार है। इससे अलावा गुड़ खाना आपकी सेहत को बेहतर बनाने में मददगार है।गुड़ कब नहीं खाना चाहिए?अगर आपको डायबिटीज की दिक्कत है तो आपको गुड़ खाने से बचना चाहिए। इसके अलावा शुगर सेंसिटिव लोगों को भी गुड़ के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि ये शुगर स्पाइक बढ़ाता है।
- अंजीर, फाइबर और मल्टीन्यूट्रिएंट्स से भरपूर ड्राई फ्रूट है जिसका सेवन सेहत को कई लाभ पहुंचा सकता है। आपने कई बार सुना होगा कि अंजीर में इतना फाइबर होता है कि कब्ज और बवासीर वाले लोग इसका सेवन करते हैं लेकिन तब क्या जब अंजीर खाने के बाद आपको गैस और ब्लोटिंग की दिक्कत होने लगे? दरअसल, बहुत से लोगों की ये शिकायत होती है कि अंजीर पचाना उनके लिए आसान नहीं होता । इसके अलावा कुछ लोग जिनका मेटाबॉलिज्म स्लो होता है और फाइबर पचाने में उतना सक्षम नहीं होता उन्हें भी अंजीर खाने के बाद गैस की दिक्कत हो सकती है।क्यों कुछ लोग आसानी से नहीं पचा पाते अंजीर?खासतौर पर जिन लोगों को इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS), गैस्ट्रिक या एसिडिटी की समस्या रहती है, उन्हें अंजीर सीमित मात्रा में खाना चाहिए। इसके अलावा, सूखे अंजीर में शुगर ज्यादा होती है, जो पेट में गैस बनने की संभावना बढ़ा देती है। इसके अलावा अंजीर में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है जिसे पचाने के लिए शरीर को पानी की पर्याप्त जरूरत होती है। अगर ऐसा नहीं होता तो शरीर पूरी तरह से फाइबर नहीं पचा पाता, इससे कब्ज की भी दिक्कत होती है और यही खराब डाइजेशन की वजह बनता है और लोगों को गैस व ब्लोटिंग की दिक्कत होती है।आसानी से अंजीर कैसे पचाएं?इसलिए अंजीर का सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में करें और खाने से पहले इसे पानी में भिगो लें, इससे यह पचने में आसान हो जाती है। इसके अलावा आप दूध में भी अंजीर भिगोकर खा सकते हैं जिससे ये आसानी से पच जाता है और शरीर को गैस व बदहजमी की दिक्कत भी नहीं होती।इसके अलावा आप ये कर सकते हैं कि अंजीर खाने के बाद ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं ताकि ये आसानी से पच जाए और पेट से जुड़ी समस्याओं का सामना न करना पड़े। हालांकि, कोशिश यही करें कि अंजीर जब भी खाना हो उसे पहले पानी में भिगोकर रख दें और फिर इसका सेवन करें।
- हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर और कलरिंग प्रोडक्ट्स बालों की नेचुरल नमी को खत्म कर देते हैं, जिससे बाल बेजान और टूटने लगते हैं। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपके बाल फिर से नेचुरली शाइनी, स्मूद और हेल्दी बनें, तो आपको महंगे सैलून ट्रीटमेंट की नहीं बल्कि किचन में रखी कुछ नेचुरल चीजों की जरूरत है। इस लेख में जानिए, किचन की किन चीजों से आप बालों को शाइनी बना सकते हैं?घर की चीजों से बालों को रेशमी बनाने के नुस्खे. दही - Curdदही में मौजूद लैक्टिक एसिड स्कैल्प की गंदगी हटाता है और रूखेपन को कम करता है। इस नुस्खे को आजमाने के लिए आधा कप दही में 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच नींबू रस मिलाकर बालों की जड़ों से लेकर सिरों तक लगाएं और 30 मिनट बाद धो लें। दही बालों को डीप कंडीशन करके रेशमी और मुलायम बनाता है।शहद - Honeyशहद एक नेचुरल ह्यूमेक्टेंट है जो बालों में नमी बनाए रखता है, यह स्कैल्प को हाइड्रेट करता है और बालों में नेचुरल शाइन लाता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए 2 चम्मच शहद को 3 चम्मच नारियल तेल या ऑलिव ऑयल के साथ मिलाकर बालों में लगाएं। 30 मिनट बाद ताजे पानी से धो लें। इसके उपयोग से बालों की ड्राईनेस दूर होती है और बाल मुलायम बनते हैं।एलोवेरा - Aloe Veraएलोवेरा जेल बालों को चमकदार और मजबूत बनाता है। इसमें मौजूद एंजाइम स्कैल्प को पोषण देते हैं और ड्राइनेस कम करते हैं। ताजे एलोवेरा जेल को सीधे बालों पर लगाएं या इसे नारियल तेल के साथ मिलाकर लगाएं। इसके उपयोग से बालों में सिल्की टेक्सचर आता है और डैंड्रफ भी कम होता है।नींबू - Lemonनींबू में मौजूद विटामिन C स्कैल्प को डिटॉक्स करता है और बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है। इसका उपयोग करने के लिए 1 चम्मच नींबू रस को 2 चम्मच एलोवेरा जेल में मिलाएं और स्कैल्प पर 10 मिनट के लिए लगाएं, इससे बालों में चमक आती है और डैंड्रफ दूर होता है।निष्कर्षरेशमी और हेल्दी बाल पाने के लिए महंगे केमिकल प्रोडक्ट्स की जरूरत नहीं है। बस जरूरत है किचन के नेचुरल इंग्रेडिएंट्स की सही पहचान और नियमित उपयोग की। एलोवेरा, दही, शहद और नींबू जैसे साधारण घरेलू नुस्खे बालों को अंदर से पोषण देकर उन्हें मुलायम, चमकदार और मजबूत बनाते हैं।
- बदलते मौसम में ऐसी कई बीमारियां हैं जो हमारे स्वास्थ्य को बिगाड़ कर रख देती हैं। खासकर अगर हम पेट से जुड़ी समस्याओं की बात करें तो वह सबसे ज्यादा बढ़ जाती हैं। बच्चे हों या बूढ़े, पेट से जुड़ी समस्या हर उम्र के व्यक्ति को परेशान करती है। इसमें दर्द से लेकर खाना न पचने तक, यह सभी परेशानियां हमारी लाइफ को इफेक्ट करने का काम करते हैं। ऐसे में गोलियां व सिरप खाने से अगर कुछ नहीं हो रहा है तो आप नेचुरल नुस्खा का सहारा ले सकते हैं।हम बात कर रहे हैं ऐसी जड़ी बूटियों की जो डाइजेशन और पेट से जुड़ी अन्य समस्याओं को ठीक करने में फायदेमंद हैं। ये 3 ऐसी जड़ी बूटियां हैं जिनमें से एक-दो के बारे में शायद आप जानते न हों, पर आज इनके फायदे जान आप इस्तेमाल करने से पीछे नहीं रहेंगे। गैस, एसिडिटी और पेट दर्द को दूर कर पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करती हैं। आइए बिना देर किए हम इन जड़ी बूटियों के बारे में जानें।आंवला करेगा पाचन मजबूतआंवला के बारे में हम सभी जानते हैं कि यह हमारी इम्यूनिटी को बूस्ट करने में बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होता है। यह एक ऐसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में बहुत ही ज्यादा असरदार होती है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो डाइजेस्टिव एंजाइम्स को एक्टिंग करते हैं, जो पेट में गए खाने को आसानी से पचाने में मदद करते हैं। आंवला खाने से आपकी गैस और एसिडिटी की समस्या दूर होती है और पेट दर्द भी कम होता है।हरड़ खाने से सुधरेगा डाइजेशनहरड़ के बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं, लेकिन जो जानते हैं उन्हें पता होगा कि यह स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद होता है। इसमें फाइबर, विटामिन-सी, मैग्नीशियम, पोटेशियम, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। यह पेट से जुड़ी हर समस्या को दूर रखने के साथ-साथ गले के दर्द, खांसी और मौसमी बीमारियों को दूर करने में भी फायदेमंद होता है। इसे आप पाउडर बनाकर दूध के साथ भी खा सकते हैं और टॉफी की तरह मुंह में रखकर चूस भी सकते हैं।जानें बहेड़ा के फायदेअब बात करें हम बहेड़ा के फायदे की तो ऊपर की जो जड़ी बूटियां और बेहड़ को मिलाकर त्रिफला चूर्ण बनता है। आपको बता दें कि बेहड़ डाइजेशन को इंप्रूव करने के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होती है। यह टर्मिनलिया बेलिरिका नाम के एक पेड़ के फल से मिलता है। आप पेट की समस्या होने पर इसका सेवन कर सकते हैं।-आंवला इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद है।-पेट से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने के लिए हरड़ खाना फायदेमंद है।-आप चाहें तो त्रिफला पाउडर के सेवन से अपने डाइजेशन को मजबूत कर सकते हैं।
- शाकाहारियों के लिए पनीर प्रोटिन प्राप्त करने का सबसे बेहतरीन जरिया है। साथ ही यह स्वाद में भी बेहद अच्छा होता है, इसलिए अधिकतर लोग इसका सेवन पसंद करते हैं। पनीर की बढ़ती मांग का फायदा उठाकर कई मिलावटखोर बाजार में नकली और मिलावटी पनीर बेचने लगते हैं। वैसे तो यह पनीर दिखने में असली जैसा लगता है, जिसे आप पहचान नहीं पाते हैं और इसका सेवन कर बीमार हो जाते हैं। नकली पनीर स्वाद और बनावट में कितना ही असली जैसा न दिखता हो, लेकिन स्वास्थ्य के लिए होता बेहद हानिकारक ही है।गंध और बनावटआपने महसूस किया होगा कि घर पर तैयार पनीर में दूध-सी हल्की खुशबू होती है और छुने पर मुलायम-सा महसूस होता है। ऐसे में अगर बाजार से खरीदे गए पनीर से हल्की बदबू या तेल जैसा गंध आए और बनावट रबर-जैसी या चिपचिपी लगे, तो समझ जाइए कि यह नकली पनीर है।गर्म पानी से टेस्ट करेंआप पनीर का एक छोटा टुकड़ा गर्म पानी में डालें। यह तरीका पनीर के असली और नकली होने का सबूत दे सकता है। असली पनीर अपनी आकृति बनाए रखेगा, जबकि नकली पनीर पिघलने लगेगा या तेल छोड़ने लगेगा। अगर गर्म पानी में डालने से पनीर पिघलने लगता है या फिर पानी का रंग सफेद होने लगता है तो यह नकली पनीर हो सकता है।छोटा सा आयोडीन टेस्टइसके लिए आप पनीर का एक टुकड़ा पानी में उबालें फिर उसे ठंडा कर उस पर आयोडीन की कुछ बूंदें डालें। अगर रंग नीला या काला हो जाए तो उसमें स्टार्च मिला है और पनीर नकली है। यह एक बेहद ही आसान तरीका है अपनी सेहत को नकली पनीर से होने वाले नुकसान से बचाने का।हाथ से दबाएंआप पनीर को बाजार से खरीदने से पहले हल्के हाथों से दबाकर देखें। असली पनीर टूट-सा जाएगा, जबकि नकली पनीर बहुत सख्त या रबर-जैसा लगेगा और उछल के इधर-उधर भी गिर सकता है, जो कि उसके नकली होने का साफ सबूत है। पनीर की संरचना रबर जैसी नहीं होती है और दबाने पर वह टूट जाता है।अगर खाएंगे तो होंगे नुकसानशोध बताते हैं कि मिलावटी पनीर का सेवन पाचन तंत्र पर बुरा असर डालता है। इससे पेट दर्द, उल्टी, गैस और दस्त जैसी समस्याएं सामने आती हैं। वहीं लंबे समय तक इसका सेवन करने से लीवर, किडनी और हृदय पर भी असर पड़ता है, क्योंकि नकली पनीर में ट्रांस-फैट और रसायन मौजूद होते हैं। बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह विशेष रूप से हानिकारक है, इसलिए इसकी जांच करना जरूरी है।



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