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- रायपुर। देश के पूर्व प्रधानमंत्री 'भारत रत्न' स्व. अटलबिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की उपस्थिति में भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं व नेताओं ने 'स्मृति मन्दिर में अटलजी की प्रतिमा व तैलचित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित कर उनका श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।इस मौके पर भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा, नागरिक आपूर्ति निगम अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, प्रदेश कार्यालय मंत्री अशोक बजाज, प्रदेश सह कार्यालय मंत्री प्रीतेश गांधी, अंजय शुक्ला सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
- -प्रदेश उपाध्यक्ष रंजना साहू का तीखा हमला : 23 मार्च के भाजपा के संगठनात्मक कार्यक्रम के वीडियो को 15 अगस्त का बताकर भ्रम फैला रहे कांग्रेसीरायपुर। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष रंजना साहू ने कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे पावन राष्ट्रीय पर्व पर भी कांग्रेस अपनी ओछी राजनीति से बाज नहीं आ रही है। श्रीमती साहू ने कहा कि कांग्रेस के कृत्यों के खिलाफ इन दिनों भारी आक्रोश है, तो कांग्रेस का पूरा तंत्र झूठ और षड्यंत्र का सहारा ले रहा है। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती साहू ने कहा कि अपनी शर्मनाक कोशिशों में कांग्रेस के नेता इतने हताश और बदहवास हो चुके हैं कि वे वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के महीनों पुराने वीडियो को स्वतंत्रता दिवस का बताकर झूठा प्रचार कर रहे हैं। श्रीमती साहू ने कहा कि जिस वीडियो और तस्वीर को कांग्रेसी स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, 2026) का बताकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, उस पोस्ट पर 23 मार्च की तारीख स्पष्ट रूप से दर्ज है। यह वीडियो 15 अगस्त का कतई नहीं है, बल्कि 22-23 मार्च 2026 को कुरुद (धमतरी) स्थित स्वामी विवेकानंद मंगल भवन में आयोजित भाजपा के पंडित दीनदयाल उपाध्याय मंडल प्रशिक्षण वर्ग के दौरान पार्टी ध्वज फहराने का है। संगठनात्मक प्रशिक्षण वर्ग के वीडियो को स्वतंत्रता दिवस का बताकर जनता को गुमराह करना कांग्रेस के बौद्धिक दीवालियापन और घटिया स्तर की राजनीति को उजागर करता है। श्रीमती साहू ने कहा कि देश पर 55 वर्षों तक शासन करने वाली पार्टी राष्ट्रीय पर्व पर इस स्तर की फर्जी और भ्रामक राजनीति पर उतर आएगी, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जनता अब कांग्रेस के इस दोहरे चरित्र और दुष्प्रचार को भली-भाँति समझ चुकी है। कांग्रेस चाहे जितने भी षड्यंत्र रच ले, वह अपनी दरिद्र मानसिकता और आपराधिक कृत्यों से बच नहीं सकती। भाजपा कांग्रेस के इस फर्जीवाड़े की कड़े शब्दों में निंदा करती है।
- बलौदाबाजार / सद्भाव और भाईचारा का सन्देश देने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा शनिवार को सद्भावना क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया। पंडित चक्रपाणी शुक्ल हाई स्कूल मैदान में आयोजित सद्भावना क्रिकेट मैच मे प्रशासन एकादश और पत्रकार इलेवन की टीम ने भाग लिया। मैच में दोनों टीमों ने खेल भावना का परिचय देते हुए अच्छा प्रदर्शन किया जिसमें प्रशासन एकादश क़ी टीम ने बेहतर प्रदर्शन कर विजेता बना।विजेता टीम के कप्तान कलेक्टर कुलदीप शर्मा एवं उप विजेता टीम के कप्तान नरेश गनशानी क़ो ट्रॉफी प्रदान किया गया। टॉस जीत कर पत्रकार इलेवन क़ी टीम ने पहले बल्लेबाजी चुना और निर्धारित 8 ओवर में 3 विकेट खोकर 123 रन बनाए ।124 रन के लक्ष्य क़ा पीछा करते हुए प्रशासन एकादश क़ी मजबूत टीम ने 7 ओवर में 4 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया । इस तरह से प्रशासन एकादश 7 विकेट से विजयी हुआ। बैटिंग और बॉलिंग में बेहतर प्रदर्शन करने पर प्रशासन एकादश से प्रेम निषाद को ऑल राउंडर,बेस्ट फिल्डर आशीष तिवारी,बेस्ट बैट्स मैन के लिए पत्रकार इलेवन से खिलेश्वर जायसवाल एवं बेस्ट बॉलर के लिये दिलीप माहेश्वरी को ट्रॉफी प्रदान किया गया इस अवसर पर कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर सद्भावना मैच का आयोजन अच्छी पहल है जिसमें प्रशासन और नागरिकों मे मेल- मिलाप बढ़ता है और एक दूसरे क़ो जानने का भी मौका मिलता है। इस बार बॉलिंग मे एक खिलाडी एक ओवर नियम से सभी को बॉलिंग का मौका मिला।खेल में हार -जीत होता ही है, दोनों टीम के खिलाड़ियों ने टीम भावना के साथ उत्साह के साथ खेला।इस अवसर पुलिस अधीक्षक गौरव राय,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खोमन सिन्हा,खेल अधिकारी प्रीति बंछोर सहित अधिकारी- कर्मचारी,पत्रकार एवं खेल प्रेमी उपस्थित थे।
- -बिहान से जुड़कर स्वरोजगार की नई राह चुनी, ई-रिक्शा से हर माह 15 से 18 हजार रुपये की शुद्ध आय-रक्षाबंधन पर मिला ई-रिक्शा बना संगीता के लिए आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और सम्मान का प्रतीकरायपुर। स्वतंत्रता दिवस केवल देश की आजादी का पर्व नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान की भावना को मजबूत करने का अवसर भी है। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान देने वाली जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड की श्रीमती संगीता देवी की कहानी इसी संकल्प को साकार करती है। कभी परिवार की जरूरतों और कृषि कार्य के लिए छोटे-छोटे ऋण पर निर्भर रहने वाली संगीता आज स्वयं ई-रिक्शा चलाकर प्रतिमाह लगभग 15 से 18 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं और ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ चुकी हैं।ग्राम पंचायत छेरडाढ़ की दीपक स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती संगीता देवी वर्ष 2018 में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, ऋण सुविधा और विभिन्न आजीविका गतिविधियों की जानकारी मिली। उन्होंने छोटे-छोटे ऋण लेकर कृषि कार्य और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा किया। समय के साथ उनमें स्वयं की स्थायी आय का साधन विकसित करने की इच्छा मजबूत हुई। इसी सोच के साथ उन्होंने दुलदुला के संकुल संगठन के समक्ष ई-रिक्शा के माध्यम से आजीविका शुरू करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने दुलदुला से पतराटोली मार्ग पर सवारी मिलने की संभावनाओं का भी आकलन किया। उनकी पहल, इच्छाशक्ति और आजीविका के प्रति स्पष्ट सोच को देखते हुए मुख्यमंत्री जशपुर एक्सप्रेस योजना के तहत वर्ष 2025 में उन्हें बैटरी चालित ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया।’रक्षाबंधन पर मिला उपहार बना आत्मनिर्भरता का माध्यम’वर्ष 2025 में रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कर-कमलों से जिले की 13 दीदियों को ई-रिक्शा प्रदान किए गए थे। संगीता देवी के लिए यह ई-रिक्शा केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत साबित हुआ। ई-रिक्शा मिलने के बाद संगीता ने स्वयं इसका संचालन शुरू किया। पिछले करीब एक वर्ष से वे नियमित रूप से ई-रिक्शा चला रही हैं। प्रतिदिन लगभग 700 से 800 रुपये की आमदनी होती है। परिचालन एवं अन्य खर्च निकालने के बाद उन्हें प्रतिमाह लगभग 15 से 18 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।’आय बढ़ी तो परिवार में भी आया बदलाव’ई-रिक्शा से प्राप्त आय ने संगीता के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। वे अपने बच्चों के पालन-पोषण और उनकी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं। साथ ही परिवार की जरूरतों में आर्थिक सहयोग देने के साथ आवश्यकता पड़ने पर अपने पति की भी मदद कर रही हैं। आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उनके भीतर आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत किया है।संगीता बताती हैं कि बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें समूह की ताकत और आजीविका के नए अवसरों की जानकारी मिली। ई-रिक्शा ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। अब वे अन्य बिहान दीदियों को भी पारंपरिक कृषि गतिविधियों के साथ गैर-कृषि गतिविधियों और स्वरोजगार के नए अवसर अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।’ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा’संगीता देवी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संगठित किया जाए और उन्हें वित्तीय सहायता, आजीविका के अवसर तथा प्रशासन का मार्गदर्शन मिले, तो वे अपनी मेहनत और इच्छाशक्ति से आत्मनिर्भरता की नई राह बना सकती हैं। उनकी कहानी यह भी दर्शाती है कि महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। परिवार की आर्थिक मजबूती के साथ बच्चों की शिक्षा, बेहतर जीवन-स्तर और सामाजिक आत्मविश्वास को भी नई दिशा मिलती है।श्रीमती संगीता देवी ने ई-रिक्शा उपलब्ध कराने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अवसर प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन जशपुर एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि ई-रिक्शा ने उन्हें केवल आय का साधन नहीं दिया, बल्कि सम्मान के साथ अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी दिया। स्वतंत्रता दिवस पर संगीता देवी की कहानी आर्थिक आत्मनिर्भरता के उस संदेश को मजबूत करती है, जिसमें स्वावलंबन से सम्मान, आजीविका से आत्मविश्वास और मेहनत से सफलता की नई राह तैयार होती है।
- -लंबे समय से रिक्त पदों पर भर्ती से विभाग को मिलेगी नई ऊर्जा, जमीनी स्तर पर पोषण अभियानों का होगा बेहतर क्रियान्वयनरायपुर। महिला सशक्तिकरण और नौनिहालों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध छत्तीसगढ़ सरकार ने एक और बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सुशासन सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के विशेष प्रयासों से, विभाग के अंतर्गत पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर) के 50 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती को आधिकारिक सहमति प्रदान कर दी गई है। मैदानी स्तर पर विभाग की योजनाओं—विशेषकर आंगनबाड़ी केंद्रों के सुचारू संचालन, पोषण अभियानों की निगरानी, महत्वपूर्ण सामाजिक पहलों के क्रियान्वयन—में पर्यवेक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। लंबे समय से इन पदों के रिक्त होने के कारण मैदानी स्तर पर कार्य का दबाव था। इन 50 नए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से विभागीय ढांचे को ऐतिहासिक मजबूती मिलेगी और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे हितग्राहियों तक और अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सकेगा।इस महत्वपूर्ण स्वीकृति पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा, "माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन और दूरदर्शी नेतृत्व के चलते आज विभाग को यह अहम स्वीकृति मिली है। पर्यवेक्षकों की कमी से जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग में जो चुनौतियां आ रही थीं, वे अब दूर होंगी। हमारी सरकार माताओं और बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। इन नई नियुक्तियों से विभाग की कार्यक्षमता में व्यापक सुधार आएगा और हमारी आंगनबाड़ी व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी।"ज्ञात हो कि संचालनालय, महिला एवं बाल विकास द्वारा इन पदों की पूर्ति के लिए शासन से अनुमति मांगी गई थी। विभागीय मंत्री के निर्देश पर इस प्रक्रिया में तेजी लाई गई और 13 अगस्त 2026 को वित्त विभाग द्वारा 50 पर्यवेक्षकों की भर्ती के लिए विधिवत सहमति जारी कर दी गई है। इसके पश्चात महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा भी आदेश जारी कर भर्ती प्रक्रिया का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया गया है। इस बहुप्रतीक्षित फैसले से न केवल विभाग के कार्यों में गति आएगी, बल्कि प्रदेश की योग्य युवतियों और महिलाओं को शासकीय सेवा में आकर समाज के लिए कार्य करने का एक बड़ा अवसर भी प्राप्त होगा।
- -छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में बढ़ा दाखिले का दायरा- अब 31 अगस्त तक ले सकेंगे प्रवेशरायपुर। उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि हमारी सरकार का मूल ध्येय प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा का प्रकाश पहुँचाना है। दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों के कई मेधावी युवा विभिन्न व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण समय पर प्रवेश नहीं ले सके थे। हम नहीं चाहते कि तिथियों के फेर में किसी भी योग्य विद्यार्थी का एक साल खराब हो या वह उच्च शिक्षा से वंचित रह जाए। छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए प्रवेश की तारीख 31 अगस्त तक बढ़ाई गई है। मैं सभी विद्यार्थियों से अपील करता हूँ कि वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं।छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को बड़ी राहत देते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कॉलेजों में प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। राज्य के जिन शासकीय और निजी महाविद्यालयों में अभी भी सीटें रिक्त हैं, वहाँ छात्र अब 31 अगस्त 2026 तक दाखिला ले सकेंगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में विधिवत आदेश जारी कर दिया गया है।उल्लेखनीय है कि इससे पहले विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत प्राचार्य स्तर पर प्रवेश की समय सीमा 31 जुलाई तक और कुलपति की अनुमति से 14 अगस्त तक तय की गई थी। लेकिन अंतिम तिथि बीतने के बाद भी कई महाविद्यालयों में सीटें खाली रह गई थीं और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले कई अभ्यर्थी समय पर आवेदन नहीं कर पाए थे। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए शासन ने तिथि विस्तार का यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
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रायपुर प्रेस क्लब ने पुनर्जीवित किया पूर्व में संचालित कोष
QR कोड जारी कर शुरू किया “आपका सहयोग, अपने लिए” अभियान
आज का सहयोग, कल का सहारा
रायपुर। पत्रकार साथी या उनके परिवार के सामने आने वाली आकस्मिक और कठिन परिस्थितियों में सहयोग की भावना को एक सशक्त और सहज माध्यम देने के उद्देश्य से रायपुर प्रेस क्लब ने पूर्व में संचालित पत्रकार कल्याण कोष को पुनः सक्रिय करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में रविवार को प्रेस क्लब परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पत्रकार कल्याण कोष के खाते का QR कोड जारी कर इसे सार्वजनिक किया गया।
QR कोड जारी करने के साथ ही “आपका सहयोग, अपने लिए” अभियान की शुरुआत की गई। अभियान के तहत प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी और मनीष वोरा ने स्वयं सहयोग राशि देकर पत्रकार साथियों से अपनी क्षमता के अनुसार कोष में योगदान करने की अपील की। इसके बाद अभियान के पहले ही दिन बृजेश चौबे, प्रशांत शर्मा, रामावतार तिवारी, मनीष वोरा, दिलीप साहू त्रिलोचन मानिकपुरी ,भूपेश जांगड़े, नरेंद्र बंगाले, भरत योगी, अमृता शर्मा, ऋषि नेताम, सहित पत्रकार साथियों ने यथासंभव सहयोग राशि देकर इस पहल को अपना समर्थन दिया।
अब पत्रकार साथी अपनी इच्छानुसार इस कोष में आसानी से सहयोग कर सकेंगे। इसके अलावा पत्रकारों के शुभचिंतक एवं पत्रकारों के सुख-दुख में सहभागी बनने की इच्छा रखने वाले आम नागरिक भी इस कोष में अपना योगदान दे सकेंगे। QR कोड के माध्यम से प्राप्त राशि का उपयोग आकस्मिक एवं दुखद परिस्थितियों में जरूरतमंद पत्रकारों अथवा उनके परिवारों को संबल प्रदान करने के लिए किया जाएगा। सहायता से संबंधित निर्णय निर्धारित नियम एवं प्रक्रिया के अनुसार प्रेस क्लब की कार्यकारिणी द्वारा लिया जाएगा।
पुरानी परंपरा को फिर मिली नई शुरुआत
रायपुर प्रेस क्लब में पत्रकार कल्याण की इस पहल का इतिहास पुराना है। वर्ष 2003-04 में तत्कालीन प्रेस क्लब अध्यक्ष बृजेश चौबे के कार्यकाल में पत्रकार कल्याण कोष की शुरुआत की गई थी। उस समय भी पत्रकारों के साथ-साथ आम लोगों से सहयोग लेकर जरूरत के समय पत्रकार साथियों की सहायता करने की परंपरा शुरू की गई थी। अब उसी भावना और परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान कार्यकारिणी ने पुराने कल्याण कोष के खाते को पुनः सक्रिय कर इसे व्यवस्थित रूप से संचालित करने का निर्णय लिया है।
रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी ने कहा कि प्रेस क्लब पत्रकारों की हर सुख-दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ा रहने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पत्रकार कल्याण कोष को पुनर्जीवित करने का उद्देश्य ऐसा सशक्त माध्यम तैयार करना है, जिसमें पत्रकार साथी अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दें और जरूरत पड़ने पर इसी सामूहिक सहयोग का उपयोग किसी पत्रकार या उसके परिवार को कठिन समय में संबल देने के लिए किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरे पत्रकार परिवार के लिए सामूहिक सुरक्षा और सहयोग की भावना है।
इस अवसर पर पुराने पत्रकार कल्याण कोष के खाते को पुनः संचालित कराने में विशेष सहयोग करने वाले पूर्व एसबीआई अधिकारी एवं एंकर शकील साजिद का प्रेस क्लब की ओर से विशेष आभार व्यक्त करते हुए सम्मान किया गया। शकील साजिद ने पत्रकार हित में प्रेस क्लब की इस पहल की सराहना करते हुए पत्रकारों के हर सुख-दुख में सहयोगी बने रहने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष बृजेश चौबे ने पत्रकार कल्याण कोष के गठन की अवधारणा और उसके शुरुआती दौर की जानकारी साझा की। उन्होंने वर्तमान कार्यकारिणी को इस पहल को पुनः शुरू करने के लिए बधाई देते हुए कोष के सुचारू एवं पारदर्शी संचालन के लिए राशि के उपयोग की स्पष्ट नियमावली और प्रक्रिया निर्धारित करने का सुझाव दिया।
कार्यक्रम में प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े सहित वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा, विजय मिश्रा, मनीष वोरा, विकास शर्मा, मुकेश वर्मा, भरत योगी, जावेद अली, योगेश साहू, विनय घाटगे,त्रिलोचन मानिकपुरी, विद्याभूषण सहित अन्य पत्रकार साथी उपस्थित रहे। - -लखनपुर के ग्राम कटकोना में क्षेत्रवासियों से किया सीधा संवाद, खदान से जुड़े विषय पर ग्रामीणों को दिया भरोसा-ग्रामीणों के हितों की रक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता, किसी भी स्तर पर नहीं होगा समझौता: -राजेश अग्रवालरायपुर। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज लखनपुर विकासखंड के ग्राम कटकोना पहुंचकर क्षेत्रवासियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं, आवश्यकताओं और स्थानीय स्तर पर सामने आ रहे विभिन्न विषयों की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित एवं यथोचित निराकरण के लिए आवश्यक निर्देश दिए।मंत्री श्री अग्रवाल ने ग्रामीणों से संवाद के दौरान उनकी बातों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में क्षेत्र की जनता से सीधे संवाद करना और उनकी समस्याओं को समझकर उनका समाधान सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। ग्रामीणों द्वारा बताई गई समस्याओं के संबंध में उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों से आवश्यक जानकारी ली और समस्याओं के निराकरण के लिए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।इस दौरान ग्रामवासियों ने खदान से संबंधित विभिन्न विषय भी मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के संज्ञान में लाए। ग्रामीणों की चिंताओं को गंभीरता से सुनते हुए मंत्री ने कहा कि इस विषय में ग्रामवासियों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि पूरे मामले का यथोचित परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।श्री अग्रवाल ने कहा कि विकास कार्यों का उद्देश्य क्षेत्र के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। विकास के साथ स्थानीय लोगों के हितों, सुविधाओं और अधिकारों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ग्रामवासियों के हितों की रक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं और विकास कार्यों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना तथा क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य करना सरकार की प्राथमिकता है।ग्राम कटकोना में मंत्री श्री अग्रवाल के साथ हुए संवाद के दौरान ग्रामीणों ने विभिन्न स्थानीय विषयों और आवश्यकताओं से उन्हें अवगत कराया। मंत्री ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनके द्वारा उठाए गए विषयों पर संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और जनहित से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के साथ देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्रवासियों की सहभागिता से ही विकास की दिशा को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ग्रामीणों की अपेक्षाओं और सुझावों को विकास कार्यों में शामिल करते हुए क्षेत्र को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। ग्रामवासियों ने मंत्री श्री राजेश अग्रवाल द्वारा उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनने और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाने पर आभार व्यक्त किया।
- -अटल जी का जीवन राष्ट्रसेवा, सुशासन, लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना की प्रेरणा: श्री राजेश अग्रवाल-छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता के रूप में अटल जी का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगारायपुर । भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अटल जी भारतीय राजनीति के ऐसे विराट व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपने विचारों, सिद्धांतों, संवेदनशील नेतृत्व और राष्ट्रहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने की भावना से सार्वजनिक जीवन में एक नई मिसाल कायम की। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी का छत्तीसगढ़ से विशेष और आत्मीय संबंध रहा है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ देश के नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। छत्तीसगढ़ के गठन का निर्णय केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं था, बल्कि यह प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं, पहचान और विकास की संभावनाओं को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक निर्णय था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भी छत्तीसगढ़ की रजत जयंती के अवसर पर अटल जी को राज्य के निर्माण की दूरदर्शी सोच वाला नेता बताते हुए उनके योगदान को स्मरण कर चुके हैं।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि अटल जी ने राजनीति में विचारों की गरिमा, संवाद की संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वाेच्च स्थान दिया। वे अपनी प्रभावशाली वाणी के साथ-साथ सहज, सरल और संवेदनशील व्यक्तित्व के लिए भी सदैव याद किए जाते रहेंगे। उन्होंने राष्ट्रहित को राजनीति से ऊपर रखा और विभिन्न विचारधाराओं के लोगों के साथ संवाद एवं समन्वय की लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत किया।उन्होंने कहा कि अटल जी का व्यक्तित्व केवल राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं था। वे एक संवेदनशील कवि, प्रखर वक्ता और भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्र चेतना के सजग प्रतिनिधि थे। उनके विचारों में देश की सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरा सम्मान और आधुनिक भारत के निर्माण की स्पष्ट दृष्टि दिखाई देती थी। उनकी सरकार के कार्यकाल में देश ने अधोसंरचना, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, परमाणु क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की।श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि अटल जी ने देश को विकास के साथ अपनी जड़ों और विरासत से जुड़े रहने का संदेश दिया। आज छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध लोककला, लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सौंदर्य को देश-दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में अटल जी की दूरदर्शिता और विकास के साथ विरासत को सम्मान देने की सोच विशेष रूप से प्रासंगिक है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पर्यटन और संस्कृति के विकास के प्रयासों में भी अटल जी की उस सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक संपदा को विकास का आधार बनाया जा सकता है। राज्य की ऐतिहासिक धरोहरें, पुरातात्विक स्थल, जनजातीय संस्कृति, लोककलाएं, धार्मिक स्थल और प्राकृतिक पर्यटन केंद्र छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन के साथ पर्यटन को रोजगार और आर्थिक अवसरों से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी को वर्ष 2014 में देश के सर्वाेच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके राष्ट्र के प्रति आजीवन समर्पण और अतुलनीय योगदान का सम्मान है। अटल जी का जीवन हमें सिखाता है कि सार्वजनिक जीवन में सिद्धांत, संवेदनशीलता, राष्ट्रभक्ति और जनसेवा का महत्व सर्वाेपरि है। उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए हम सभी को छत्तीसगढ़ के विकास, समृद्धि और सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लेना चाहिए।श्री अग्रवाल ने पुण्यतिथि पर श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को नमन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती और प्रदेश की जनता उनके ऐतिहासिक योगदान को सदैव कृतज्ञता के साथ स्मरण करती रहेगी। अटल जी ने जिस छत्तीसगढ़ की कल्पना की थी, उसे विकसित, समृद्ध, आत्मविश्वासी और अपनी संस्कृति एवं विरासत पर गर्व करने वाला प्रदेश बनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
- -दिल्ली की राष्ट्रीय प्रदर्शनी में छाईं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की राखियां, महिला स्व-सहायता समूहों की रचनात्मकता ने खींचा व्यापारियों का ध्यान-स्थानीय उत्पादों को मिल रहा राष्ट्रीय बाजार, ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में बिहान की महिला उद्यमिता ने बढ़ाया कदमरायपुर छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की महिला स्व-सहायता समूहों की मेहनत और रचनात्मकता अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। विकासखंड पेंड्रा की महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा स्थानीय विष्णुभोग धान से तैयार की गई आकर्षक राखियों ने दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी में देशभर से पहुंचे व्यापारियों का ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शनी के बाद अब गुजरात और लुधियाना से इन राखियों के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं, जिससे जिले की महिला उद्यमियों में उत्साह का माहौल है।दिल्ली में 6 से 8 अगस्त तक आयोजित बायोफेच इंडिया ईंटो ऑर्गेनिक प्रदर्शनी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। इस राष्ट्रीय मंच पर जिले के विष्णुभोग धान, शहद तथा विष्णुभोग धान से निर्मित राखियों को प्रदर्शित किया गया। इनमें विष्णुभोग धान से तैयार राखियां विशेष आकर्षण का केंद्र बनीं। स्थानीय कृषि उत्पाद को रचनात्मकता के साथ उपयोग में लाकर तैयार की गई इन राखियों ने अपनी विशिष्टता के कारण प्रदर्शनी में पहुंचे व्यापारियों और आगंतुकों का ध्यान खींचा।विष्णुभोग धान जीपीएम की विशिष्ट पहचान रखने वाले स्थानीय उत्पादों में शामिल है। महिला स्व-सहायता समूहों ने इसी स्थानीय उत्पाद को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ते हुए राखी निर्माण में इसका रचनात्मक उपयोग किया। स्थानीय संसाधन और महिलाओं की सृजनात्मक क्षमता के इस मेल ने एक ऐसे उत्पाद को जन्म दिया, जिसमें जिले की पहचान, ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और स्थानीय संस्कृति की झलक दिखाई देती है। राष्ट्रीय प्रदर्शनी में इन राखियों को मिली सराहना इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय संसाधनों से तैयार गुणवत्तापूर्ण और नवाचार आधारित उत्पादों के लिए देशभर में बाजार की संभावनाएं मौजूद हैं। गुजरात और लुधियाना से मिले ऑर्डर ने इन महिला समूहों के उत्पादों के लिए नए बाजार के द्वार खोल दिए हैं।बिहान समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रदर्शनियों में जिले के उत्पादों को प्रदर्शित कर उन्हें संभावित खरीदारों और व्यापारियों से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।इसी क्रम में दिल्ली की राष्ट्रीय प्रदर्शनी में जिले के उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को देश के विभिन्न हिस्सों से आए व्यापारियों तक पहुंचने का अवसर मिला। इसका प्रत्यक्ष परिणाम गुजरात और लुधियाना से प्राप्त राखियों के ऑर्डर के रूप में सामने आया है।राज्यों से प्राप्त ऑर्डर से राखी निर्माण में जुटी महिला स्व-सहायता समूहों में उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा है। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय संसाधनों पर आधारित स्वरोजगार का अवसर मिलने के साथ अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने का मंच भी मिल रहा है।विष्णुभोग धान से तैयार राखियां महिला समूहों की आय बढ़ाने का माध्यम बनने के साथ-साथ जिले के स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिला रही हैं। इससे महिलाओं को अपने हुनर को व्यावसायिक अवसर में बदलने का अवसर मिल रहा है और वे परिवार की आय में योगदान देने के साथ आर्थिक रूप से अधिक सशक्त हो रही हैं।बिहान महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय धान से तैयार राखियों को गुजरात और लुधियाना जैसे दूरस्थ बाजारों से ऑर्डर मिलना इस बात का संकेत है कि जिले के स्थानीय उत्पादों में राष्ट्रीय स्तर पर बाजार की मजबूत संभावनाएं हैं।महिला स्व-सहायता समूहों की मेहनत, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास मिलकर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। विष्णुभोग धान से निर्मित राखियों की राष्ट्रीय स्तर पर बनी पहचान जिले के लिए गौरव का विषय होने के साथ ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता और महिला उद्यमिता की सफलता की प्रेरक कहानी भी बन रही है।
- -ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4 के तहत सरगुजा से सैनिकों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ की बहनों का स्नेह, सम्मान और आशीर्वादरायपुर । रक्षाबंधन के पावन अवसर पर देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात सैनिक भाइयों के प्रति सम्मान, स्नेह और कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से संचालित ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4’ अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सरगुजा की महिलाओं एवं स्काउट-गाइड द्वारा एकत्रित रक्षा सूत्र सैनिकों के लिए रवाना किए। अंबिकापुर के सर्किट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने स्वयं रक्षा सूत्र भेजकर सैनिकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया।मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि यह लगातार चौथा वर्ष है, जब छत्तीसगढ़ की बहनों की ओर से देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए रक्षा सूत्र भेजे जा रहे हैं। यह अभियान प्रदेश की महिलाओं के सैनिक भाइयों के प्रति स्नेह, सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के अवसर पर जब पूरा देश अपने परिवार के साथ खुशियां मनाता है, तब हमारे सैनिक भाई अपने परिवार से दूर रहकर देश की सीमाओं की सुरक्षा में डटे रहते हैं। उनके त्याग और समर्पण को नमन करते हुए बहनों की ओर से भेजा गया यह रक्षा सूत्र प्रेम, सम्मान और आशीर्वाद का संदेश लेकर जवानों तक पहुंचेगा।श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि रक्षा सूत्र केवल एक धागा नहीं, बल्कि सैनिकों और देशवासियों के बीच भावनात्मक संबंध का प्रतीक है। इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ की माताएं और बहनें देश के वीर जवानों को यह संदेश दे रही हैं कि पूरा प्रदेश उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए अपने परिवार और व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से दूर रहने वाले सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि इस प्रकार के अभियान समाज में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करते हैं। छत्तीसगढ़ की महिलाओं द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए रक्षा सूत्र जब सैनिक भाइयों की कलाइयों पर बंधेंगे, तो उनमें प्रदेश की बहनों के स्नेह और आशीर्वाद की अनुभूति होगी।अभियान के संयोजक एवं पूर्व सैनिक महासभा के अध्यक्ष श्री महेंद्र प्रताप सिंह राणा ने बताया कि ‘सिपाही रक्षा सूत्र’ अभियान की शुरुआत बिलासपुर से हुई थी। वर्ष 2023 में लगभग 6 लाख 71 हजार, वर्ष 2024 में लगभग 9 लाख और वर्ष 2025 में 12 लाख 21 हजार रक्षा सूत्र सैनिकों तक भेजे गए। इस तरह पिछले तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ से लगभग 27 लाख 92 हजार रक्षा सूत्र सैनिकों के सम्मान में भेजे जा चुके हैं।वर्ष 2026 में अभियान का चौथा चरण ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4’ के रूप में संचालित किया जा रहा है। इस वर्ष लगभग 21 लाख रक्षा सूत्र एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान के माध्यम से थल सेना, जल सेना और वायु सेना के जवानों तक भी छत्तीसगढ़ की बहनों का रक्षा सूत्र पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।अंबिकापुर में आयोजित कार्यक्रम के बाद रक्षा सूत्रों से भरी वाहन रैली जशपुर होते हुए रांची की ओर रवाना होगी। इसके बाद विभिन्न माध्यमों से देश के अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात सैनिकों तक रक्षा सूत्र पहुंचाए जाएंगे। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरूपा सिंह, पूर्व सांसद श्री कमल भान सिंह, श्री किसन सिंह, श्री भारत सिंह सिसौदिया, श्री विनोद हर्ष, श्रीमती अरुणा सिंह सहित जनप्रतिनिधि, पूर्व सैनिक महासभा के पदाधिकारी, स्काउट-गाइड की सदस्याएं एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
- -स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा से विकसित छत्तीसगढ़ की नई तस्वीर तक को एक मंच पर समेट रही प्रदर्शनी-वंदे मातरम की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, सेनानियों के योगदान और सुशासन की उपलब्धियों का प्रदर्शन-21 अगस्त तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनीरायपुर । 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान, अमर सेनानियों के शौर्य एवं बलिदान, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा तथा राज्य की सुशासन और विकास यात्रा को प्रदर्शनी में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।इसी क्रम में बी.पी. पुजारी गवर्नमेंट इंग्लिश मीडियम स्कूल, राजातालाब रायपुर के विद्यार्थियों ने शिक्षिकाओं के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विद्यार्थी मानवी साहू, पलक साहू, योगिता विश्वकर्मा, आनंदित बोस और युगती सोनकर शिक्षिका अनवरी जावेद शेख एवं सुनील महर के साथ प्रदर्शनी देखने पहुंचे। विद्यार्थियों ने विभिन्न छायाचित्रों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्रदर्शित सामग्री को उत्सुकता के साथ देखा तथा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों की जानकारी प्राप्त की।प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की 150 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पर केंद्रित खंड है। इसमें ‘वंदे मातरम’ की रचना से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रजागरण के प्रेरणादायी स्वर के रूप में इसकी भूमिका को ऐतिहासिक संदर्भों और छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।प्रदर्शनी के माध्यम से नई पीढ़ी को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि स्वतंत्रता केवल संघर्ष और बलिदान का परिणाम नहीं, बल्कि देशवासियों की एकजुटता, राष्ट्रप्रेम और दृढ़ संकल्प की भी गौरवगाथा है।प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, जननायकों और अमर बलिदानियों के योगदान से जुड़े दुर्लभ छायाचित्र, दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रसंग प्रदर्शित किए गए हैं। महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास तथा प्रदेश में हुए सामाजिक और राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग भी प्रदर्शनी का हिस्सा हैं।विभागीय अधिकारियों ने विद्यार्थियों को छायाचित्रों और ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी देते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण से अवगत कराया।प्रदर्शनी में राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं और आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। महिलाओं, किसानों, युवाओं, श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के लिए संचालित योजनाओं के माध्यम से विकास और सशक्तिकरण की तस्वीर प्रस्तुत की गई है।महतारी वंदन योजना, कृषक उन्नति योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी पहलों की जानकारी भी प्रदर्शनी में दी गई है। विद्यार्थियों ने इन योजनाओं के बारे में भी विशेष रुचि दिखाई।प्रदर्शनी में डिजिटल पंजीयन, सुशासन तिहार, हरित छत्तीसगढ़, शिक्षा एवं अधोसंरचना विस्तार सहित राज्य की विकास यात्रा को भी छायाचित्रों और सूचनात्मक सामग्री के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क, औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश और रोजगार के नए अवसरों की झलक भी यहां देखने को मिल रही है।प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक और छत्तीसगढ़ की विरासत का अनूठा संगम भी देखने को मिल रहा है। एआई आधारित विशेष पहल के माध्यम से आगंतुक प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों की पृष्ठभूमि के साथ अपनी डिजिटल तस्वीर तैयार करा सकते हैं। बच्चों और युवाओं में इस पहल को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इसके अलावा राज्य की विकास यात्रा, उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित यह सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी 15 से 21 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10ः30 बजे से रात 8 बजे तक आम नागरिकों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी और छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास एवं वर्तमान विकास से परिचित कराने वाला अनुभव बताया।
- रायपुर । कृषि विभाग द्वारा कृषि आदान सामग्री के भंडारण, अभिलेखों के संधारण एवं विक्रय व्यवस्था की नियमित निगरानी के क्रम में बेमेतरा के विकासखंड बेरला अंतर्गत कृषि केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अभिलेखों के संधारण में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित कृषि आदान विक्रेताओं के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई।निरीक्षण के दौरान वर्मा कृषि केंद्र, कोदवा एवं जय भोले कृषि केंद्र, कोदवा में स्टॉक रजिस्टर एवं बिल बुक का नियमित एवं नियमानुसार संधारण नहीं किया जाना पाया गया। इस अनियमितता को गंभीरता से लेते हुए दोनों कृषि केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया तथा तत्काल प्रभाव से कृषि आदान सामग्री के विक्रय पर प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई की गई।इसी प्रकार सिद्धिविनायक कृषि केंद्र, कोदवा एवं तिवारी कृषि केंद्र, घोटमर्रा के निरीक्षण के दौरान स्टॉक रजिस्टर का समुचित रूप से संधारण नहीं किया जाना पाया गया। इस पर संबंधित कृषि केंद्रों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।कृषि विभाग द्वारा कृषि आदान विक्रेताओं को निर्देशित किया गया है कि वे उर्वरक, बीज, कीटनाशक सहित अन्य कृषि आदान सामग्री के भंडारण एवं विक्रय से संबंधित सभी आवश्यक अभिलेखों का नियमित एवं नियमानुसार संधारण सुनिश्चित करें। स्टॉक रजिस्टर एवं बिल बुक में प्रत्येक आवक एवं विक्रय का सही एवं अद्यतन विवरण दर्ज किया जाए तथा शासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं प्रावधानों का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए।कृषि विभाग द्वारा कृषि आदान विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कृषि सामग्री के भंडारण एवं विक्रय में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कृषि आदान विक्रेताओं की जांच एवं निगरानी की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- -पीएम श्री सेजेस धरमजयगढ़ की कक्षा 11वीं की छात्रा अर्चना एक्का के ‘ईको ब्रिक बैंक’ नवाचार का राष्ट्रीय स्तर पर चयनरायपुर । प्लास्टिक कचरे को समस्या के बजाय संसाधन के रूप में देखने वाली रायगढ़ जिले की छात्रा अर्चना एक्का ने अपने नवाचार से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। पीएम श्री सेजेस धरमजयगढ़ की कक्षा 11वीं की छात्रा अर्चना के नवाचार ‘ईको ब्रिक बैंक रू प्लास्टिक कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदलना’ का राष्ट्रीय स्तर के लिए चयन हुआ है। यह उपलब्धि उनकी रचनात्मक सोच, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और स्थानीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान तलाशने की क्षमता को दर्शाती है।शैक्षणिक सत्र 2025-26 में अर्चना ने दुर्ग स्थित छत्रपति शिवाजी प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईटी) में आयोजित राज्य स्तरीय मार्गदर्शन सत्र में रायगढ़ जिले का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने विशेषज्ञों और मार्गदर्शकों के समक्ष अपने नवाचार का प्रतिरूप प्रस्तुत किया। विशेषज्ञों से प्राप्त सुझावों के आधार पर परियोजना में आवश्यक सुधार किए गए। पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी वास्तविक समस्या के समाधान और परियोजना की उपयोगिता को देखते हुए ‘ईको ब्रिक बैंक’ का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए किया गया।अर्चना की परियोजना का उद्देश्य अनुपयोगी समझकर फेंके जाने वाले प्लास्टिक को एकत्रित कर उसका पुनः उपयोग करना और उससे टिकाऊ एवं उपयोगी उत्पाद तैयार करना है। परियोजना में प्लास्टिक कचरे से फर्नीचर सहित विभिन्न उपयोगी वस्तुओं के निर्माण की संभावनाओं पर काम किया गया है। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के बेहतर प्रबंधन की दिशा में उपयोगी साबित हो सकती है।‘ईको ब्रिक बैंक’ के माध्यम से प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के साथ ही लोगों को कचरे के पुनः उपयोग, संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार के लिए जागरूक करने का प्रयास किया गया है।अर्चना अपनी सफलता का श्रेय अपनी मार्गदर्शक अनामिका लहरे के निरंतर मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन को देती हैं। विद्यालय के प्राचार्य हकीम उल्लाह खान और व्याख्याता रवि कुमार यादव ने भी परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। विद्यालय में विद्यार्थियों को नवाचार, प्रयोग और रचनात्मक गतिविधियों के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जाता है।विद्यालय में तैयार सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान के लिए नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित कर रहा है। इसी प्रोत्साहन का परिणाम है कि अर्चना का स्थानीय स्तर पर शुरू किया गया विचार अब राष्ट्रीय मंच तक पहुँचने में सफल हुआ है।अर्चना एक्का की यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पीएम श्री सेजेस धरमजयगढ़ और रायगढ़ जिले के लिए भी गौरव का विषय है। उनकी परियोजना यह संदेश देती है कि नवाचार के लिए हमेशा बड़े संसाधनों या अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की आवश्यकता नहीं होती। आसपास मौजूद किसी समस्या को संवेदनशीलता और रचनात्मक दृष्टिकोण से देखने पर भी समाधान की नई राह निकाली जा सकती है। प्लास्टिक कचरे में उपयोगिता और संभावना तलाशने वाली अर्चना की सोच अब राज्य की सीमाओं से आगे राष्ट्रीय मंच तक पहुँच गई है। उनकी यह पहल नई पीढ़ी के विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, नवाचार और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है।
- -बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने किया योजना का शुभारंभ-48 वैद्यों को हर्बल गार्डन के लिए प्रथम किस्त का स्वीकृति पत्र वितरित-जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के संरक्षण और संवर्धन पर हुई चर्चारायपुर। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा और वनौषधियों के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विगत 13 अगस्त को छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा कोण्डागांव में जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन का आयोजन किया गया। दक्षिण कोण्डागांव वनमंडल के काष्ठागार में आयोजित सम्मेलन में बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने हीलर हर्बल गार्डन योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर 48 वैद्यों को अपने घर की बाड़ी में औषधीय पौधों का उद्यान विकसित करने के लिए प्रथम किस्त का स्वीकृति पत्र वितरित किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। वैद्य रामप्रसाद निषाद, सुखमन मरकाम, हीरालाल मरकाम, जेठूराम प्रधान, श्रीमती चिला पोथाम, जयनाथ मरकाम, विशाल सोरी, सकालु राम कोर्राम, मोहन नेताम और नथाराम नाग ने पारंपरिक जड़ी-बूटियों और उनके उपचार में उपयोग से संबंधित अपना अनुभव साझा किया। वैद्यों ने पहचान पत्र जारी करने तथा वनौषधियों के संरक्षण में वैद्यों की भूमिका बढ़ाने का आग्रह किया। बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव ने बताया कि हीलर हर्बल गार्डन योजना के तहत वैद्य अपनी बाड़ी में सामान्य रूप से उपयोग होने वाली वनौषधियों का छोटा उद्यान तैयार कर सकेंगे। इसके लिए बोर्ड की ओर से आर्थिक और तकनीकी सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वैद्यों के समूहों को जड़ी-बूटियों की बेहतर प्रसंस्करण के लिए निःशुल्क पिसाई मशीन (पल्वराइजर) उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है।उन्होंने कहा कि वैद्यों के निवास वाले गांवों के स्कूलों में स्कूल हर्बल गार्डन विकसित करने के लिए भी बोर्ड तकनीकी और आर्थिक सहायता प्रदान कर रहा है। साथ ही प्रदेश के वैद्यों के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। वैद्यों द्वारा तैयार औषधीय उत्पादों और पारंपरिक उपचार से जुड़े उत्पादों के पेटेंट में भी बोर्ड सहयोग करेगा।दक्षिण कोण्डागांव वनमंडल अधिकारी श्री चूड़ामणि सिंह ने वैद्यों की सेवाओं के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने वनौषधियों के उपयोग की मात्रा और उपचार संबंधी जानकारी को व्यवस्थित करने, विभिन्न बीमारियों के विशेषज्ञ वैद्यों की सूची तैयार करने तथा उनके अनुभवों को साझा करने की आवश्यकता बताई।उन्होंने कम हो रही वनौषधियों की जानकारी वैद्यों से उपलब्ध कराने का आग्रह किया, ताकि उनके संरक्षण और संवर्धन के लिए आवश्यक योजना बनाई जा सके। उन्होंने वैद्यों के साथ हर महीने बैठक आयोजित करने और वनौषधियों से संबंधित उपयोगी जानकारी का प्रकाशन एवं प्रचार-प्रसार करने की बात कही।बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने कहा कि सरकार वैद्यों और पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के संरक्षण के लिए गंभीरता से काम कर रही है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी जिलों में वैद्य सम्मेलन आयोजित कर वैद्यों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अगले तीन महीनों में राज्य के सभी जिलों में वैद्य सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।श्री मरकाम ने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज और वैद्यों ने पारंपरिक भोजन, दैनिक जीवनशैली, स्वास्थ्य परंपराओं और उपचार पद्धतियों के ज्ञान को आज भी जीवित रखा है। उन्होंने बताया कि नवंबर माह में अखिल भारतीय वैद्य सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें विशेषज्ञ वैद्यों को अपनी उपचार पद्धतियों का प्रदर्शन करने के लिए मंच और स्टॉल उपलब्ध कराए जाएंगे।कार्यक्रम के अंत में बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने हीलर हर्बल गार्डन योजना का विधिवत शुभारंभ करते हुए 48 वैद्यों को प्रथम किस्त का स्वीकृति पत्र वितरित किया। सम्मेलन में शामिल सभी वैद्यों को सहभागिता प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।सम्मेलन में दक्षिण कोण्डागांव और केशकाल वनमंडल से लगभग 200 वैद्य शामिल हुए। इस अवसर पर उपवनमंडल अधिकारी श्री आशीष कुमार कोटरीवार, परिक्षेत्र अधिकारी श्री मोतीलाल बेसरिया, श्री प्रतीक वर्मा सहित दोनों वनमंडलों और बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
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-बिल्हा विकासखंड के ग्राम कड़ार में 20 लाख रूपए के सामुदायिक भवन का हुआ भूमिपूजन
रायपुर। बिलासपुर जिला स्थित बिल्हा विकासखंड के ग्राम कड़ार में आयोजित भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेश के राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने डॉ. खूबचंद बघेल और स्वामी आत्मानंद महाराज जैसी महान विभूतियों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में लाखों लोग जन्म लेते हैं, लेकिन अमर वही होते हैं जो अपने सत्कर्मों से समाज का निर्माण करते हैं और इतिहास रचते हैं।इस अवसर पर मंत्री ने 20 लाख रूपए से बनने वाले सामुदायिक भवन का भूमि पूजन किया। छत्तीसगढ़ निर्माण की पृष्ठभूमि का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि पृथक छत्तीसगढ़ राज्य का सपना देखा गया था, और मार्ग में निरंतर आगे बढ़ने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने उस सपने को साकार किया। यदि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ का निर्माण न हुआ होता, तो प्रदेश की स्थिति आज भी वैसी ही बनी रहती। आज सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, नौकरी और अधोसंरचना के हर क्षेत्र में तेज़ी से काम हो रहा है। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा और राजस्व का पूरा पैसा अब यहीं के सर्वांगीण विकास में उपयोग हो रहा है।सामाजिक बदलाव पर प्रकाश डालते हुए मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि कभी पूर्णतः कृषि पर आधारित हमारा समाज अब व्यवसाय, व्यापार और नौकरियों के क्षेत्र में भी तेज़ी से आगे बढ़ा है। लोगों के रहन-सहन का स्तर बदला है; जिनके पास कभी साइकिल नहीं थी, वे आज दोपहिया, चारपहिया और हवाई यात्रा तक का आनंद ले रहे हैं। गांव-गांव में महज 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में स्कूल, हायर सेकेंडरी विद्यालय और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी है। इस भौतिक प्रगति के साथ हम सभी को सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी है।आधुनिकता के इस दौर में गांव-घर का पारस्परिक प्रेम और पारिवारिक मर्यादाएं प्रभावित हो रही हैं। प्रगति के साथ-साथ अपनी प्राचीन संस्कृति, परंपरा और संस्कारों को बनाए रखना बेहद अनिवार्य है, क्योंकि संस्कारों के बिना जीवन अधूरा है। हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना होगा जहां आपसी प्रेम, भाईचारा, संवेदनशीलता और एक-दूसरे के दुख-सुख में खड़े रहने की भावना सदैव जीवंत रहे।कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने अपने उद्बोधन में वरिष्ठ नेतृत्व के मार्गदर्शन और जीवन अनुभवों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं का जीवन अनुभवों से भरा होता है, जिससे सीखकर, समझकर और पढ़कर संगठन व समाज सेवा के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। पृथक छत्तीसगढ़ के निर्माण के बाद से लेकर आज तक प्रदेश ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है। दूर-दराज़ के क्षेत्रों तक भौतिक साधनों और बुनियादी सुविधाओं की पहुंच ने आम नागरिक के जीवन को सुगम बनाया है। बिल्हा विकासखंड के ग्राम कड़ार में आयोजित इस भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के क्रेडा के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी,सरपंच ब्रजेश दुबे,जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ नागरिक और ग्रामीण जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। - -छत्तीसगढ़ी भाषा की सेवा में समर्पित वरिष्ठ साहित्यकारों का हुआ सम्मान, राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित 26 पुस्तकों का विमोचन-प्रदेशभर से जुटे साहित्यकार, विद्वानों ने छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और साहित्यिक समृद्धि पर रखे विचाररायपुर। छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य के संरक्षण, संवर्धन तथा विकास को समर्पित राजभाषा आयोग के कार्यालय स्थापना दिवस 14 अगस्त के अवसर पर राजधानी रायपुर में गरिमामय साहित्यिक आयोजन हुआ। कार्यक्रम में प्रदेशभर से साहित्यकार, कवि, रचनाकार, भाषा-सेवी एवं साहित्य प्रेमी शामिल हुए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी भाषा की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले वरिष्ठ साहित्यकारों एवं भाषा-सेवियों का सम्मान किया गया। साथ ही राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित 26 पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।कार्यक्रम में विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति श्री मनोज दयाल, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, संस्कृति एवं राजभाषा संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, राजभाषा आयोग के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा तथा राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार सहित प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार श्री परदेशी राम वर्मा, श्री अरुण निगम, श्री मीर अली मीर, वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती शशिकला दुबे, श्री वीर अजीत शर्मा, श्रीमती शकुंतला तरार और श्रीमती सीमा निगम सहित प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए साहित्यकारों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को समृद्ध बनाया।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रचार-प्रसार, साहित्य सृजन और जनमानस तक भाषा की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में सेवानिवृत्त उद्घोषक, आकाशवाणी श्री संजय पाण्डेय, वरिष्ठ दूरदर्शन उद्घोषक एवं पत्रकार श्रीमती ज्योति सिंह, सेवानिवृत्त कार्यक्रम अधिकारी, आकाशवाणी श्री समीर शुक्ला, साहित्यकार श्री चेतन भारती, रायपुर तथा साहित्यकार श्री चोवाराम वर्मा ‘बादल’ शामिल रहे।सम्मान समारोह के दौरान साहित्यकारों एवं भाषा-सेवियों के योगदान को स्मरण करते हुए उनके द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए किए गए कार्यों की सराहना की गई। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी भाषा की वास्तविक शक्ति उसके साहित्य, लोक परंपराओं और उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाने वाले लोगों से निर्मित होती है। छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास में साहित्यकारों, कवियों, पत्रकारों, कलाकारों और भाषा-सेवियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित 26 पुस्तकों का विमोचन रहा। इन पुस्तकों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य को समृद्ध करने के साथ-साथ प्रदेश की लोकभाषा, लोकसंस्कृति और साहित्यिक परंपरा को दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकों का प्रकाशन केवल साहित्य के सृजन और संरक्षण का कार्य नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी है। राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित पुस्तकों से छत्तीसगढ़ी साहित्य के विविध पक्षों को सामने लाने और प्रदेश के रचनाकारों को व्यापक मंच प्रदान करने में मदद मिलेगी।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के अधिष्ठाता कला संकाय एवं विभागाध्यक्ष प्रो. राजन यादव ने जानकारीपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने भाषा, साहित्य और संस्कृति के परस्पर संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए छत्तीसगढ़ी भाषा की साहित्यिक परंपरा, उसकी समृद्ध अभिव्यक्ति और वर्तमान समय में उसके संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास, संस्कृति, संवेदनाओं और सामूहिक स्मृतियों को अपने भीतर संजोए रखती है। इसलिए छत्तीसगढ़ी भाषा के साहित्य को समृद्ध करना प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के समान है।राजभाषा आयोग के कार्यालय स्थापना दिवस समारोह में प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से साहित्यकारों की सहभागिता रही। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य के प्रति समर्पित रचनाकारों ने एक-दूसरे से संवाद किया तथा भाषा के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार साझा किए।कार्यक्रम ने छत्तीसगढ़ी भाषा के साहित्यिक संसार को एक साझा मंच प्रदान किया, जहां वरिष्ठ साहित्यकारों के अनुभव, नवोदित रचनाकारों की ऊर्जा और भाषा-सेवियों का समर्पण एक साथ दिखाई दिया। आयोजन के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार के संकल्प को भी मजबूती मिली।राजभाषा आयोग का कार्यालय स्थापना दिवस समारोह इस दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा कि इसमें सम्मान, साहित्य और प्रकाशन तीनों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रति सम्मान और प्रतिबद्धता को अभिव्यक्ति मिली। 26 पुस्तकों का विमोचन और भाषा-सेवियों का सम्मान छत्तीसगढ़ी भाषा एवं साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आया।
- -चित्रकोट जलप्रपात की भव्यता, जनजातीय संस्कृति और धुड़मारास के रोमांचक अनुभव से रूबरू हुए देश के विभिन्न राज्यों से आए 30 पर्यटन प्रतिनिधि-चित्रकोट की बदलती जलधारा और प्राकृतिक सौंदर्य को प्रतिनिधियों ने बताया अविस्मरणीय अनुभव, छत्तीसगढ़ को पर्यटन की अपार संभावनाओं वाला प्रदेश बतायारायपुर ।छत्तीसगढ़ पर्यटन को देश के पर्यटन बाजार में व्यापक पहचान दिलाने और राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत से देशभर के पर्यटन प्रतिनिधियों को परिचित कराने के उद्देश्य से 10 से 14 अगस्त 2026 तक आयोजित फैम टूर का सफल आयोजन हुआ। इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए कुल 48 पर्यटन प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इनमें दक्षिण छत्तीसगढ़ अर्थात बस्तर क्षेत्र के भ्रमण में 30 प्रतिनिधि शामिल हुए। पांच दिवसीय भ्रमण के दौरान प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरों, स्थानीय परंपराओं, साहसिक पर्यटन और आत्मीय आतिथ्य का करीब से अनुभव किया। प्रतिनिधियों ने बस्तर के प्रवेश द्वार के रूप में प्रसिद्ध केशकाल घाटी से बस्तर में प्रवेश किया। घने जंगलों, घुमावदार पहाड़ी मार्गों और चारों ओर फैली हरियाली के बीच से गुजरते हुए प्रतिनिधियों ने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव किया। केशकाल घाटी ने उन्हें बस्तर के उस प्राकृतिक संसार की झलक दी, जहां जंगल, पहाड़ और घाटियां मिलकर अद्भुत पर्यटन अनुभव रचते हैं।प्रतिनिधियों ने विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात का भ्रमण किया। इंद्रावती नदी पर निर्मित यह भव्य जलप्रपात अपने विस्तृत जलप्रवाह और प्राकृतिक परिवेश के कारण प्रतिनिधियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। चित्रकोट की विशाल जलधारा और आसपास का मनोहारी प्राकृतिक दृश्य देखकर प्रतिनिधियों ने इसे अविस्मरणीय पर्यटन अनुभव बताया।चित्रकोट जलप्रपात का अनुभव साझा करते हुए प्रतिनिधियों ने इसकी प्राकृतिक सुंदरता की विशेष सराहना की। उन्होने चित्रकोट के वातावरण को घूमने के लिए बेहद आकर्षक बताया और जलप्रपात के मनोहारी दृश्य को कैमरे में कैद करते हुए अपने अनुभव साझा किए।चित्रकोट जलप्रपात को करीब से देखकर प्रतिनिधि इसकी सुंदरता से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि यहां जलप्रपात और आसपास का प्राकृतिक दृश्य अलग-अलग समय में अलग रंग और रूप में दिखाई देता है। सूर्य की रोशनी में पानी की चमक और सफेद झाग जलप्रपात की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। उन्होंने कहा कि चित्रकोट प्रकृति की सुंदरता को करीब से महसूस करने का शानदार पर्यटन स्थल है।बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता के साथ प्रतिनिधियों को यहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति से भी परिचित कराया गया। इस अवसर पर पारंपरिक गेड़ी नृत्य एवं परब नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों की धुन और कलाकारों के उत्साहपूर्ण प्रदर्शन ने प्रतिनिधियों को बस्तर की जीवंत लोक संस्कृति से रूबरू कराया।प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिनिधियों ने महसूस किया कि बस्तर की पहचान केवल उसके जंगलों और जलप्रपातों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की लोककलाएं, परंपराएं, नृत्य, संगीत और जनजातीय जीवनशैली भी पर्यटन की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। प्रतिनिधियों ने कांगेर नदी और घने जंगलों के बीच बसे धुड़मारास गांव का रोमांचक अनुभव लिया। प्रकृति और जनजातीय जीवन के अनूठे मेल के लिए पहचान बना रहा धुड़मारास ग्रामीण पर्यटन की नई संभावनाओं को सामने लाता है।प्रतिनिधियों ने यहां जनजातीय गृह-निवास का अनुभव लिया। स्थानीय समुदाय द्वारा पारंपरिक तरीके से पर्यटकों का स्वागत, मिट्टी और स्थानीय शैली से बने घरों में ठहरने का अनुभव, स्थानीय व्यंजनों का स्वाद और ग्रामीण जीवन को करीब से समझने का अवसर उनके लिए विशेष आकर्षण रहा।धुड़मारास में प्रतिनिधियों ने स्थानीय हाट बाजार का भी भ्रमण किया। यहां उन्हें स्थानीय उत्पादों, वन उपज, बांस से बने सामान, हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुओं को देखने और समझने का अवसर मिला। प्रतिनिधियों ने महसूस किया कि ऐसे बाजार स्थानीय समुदाय की आजीविका को पर्यटन से जोड़ने के साथ-साथ पारंपरिक कला और संस्कृति के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।धुड़मारास में बांस की नाव से जल भ्रमण, नौकायन, जंगल भ्रमण और ग्राम भ्रमण जैसे साहसिक एवं प्रकृति आधारित अनुभवों ने फैम टूर को और अधिक रोमांचक बना दिया। यहां विकसित समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल यह दर्शाता है कि स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए पर्यटन के माध्यम से ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।10 से 14 अगस्त तक आयोजित फैम टूर का 14 अगस्त को भव्य समापन हुआ। आयोजन में उत्तर छत्तीसगढ़ भ्रमण के 18 और दक्षिण छत्तीसगढ़ भ्रमण के 30, इस प्रकार कुल 48 पर्यटन प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। समापन समारोह में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य, सम्माननीय अतिथिगण तथा पर्यटन मंडल के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ में अपने अनुभव साझा किए।प्रतिनिधियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रकृति और संस्कृति का ऐसा अनूठा संगम है, जो इसे देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में शामिल करने की क्षमता रखता है। उन्होंने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, चित्रकोट की भव्यता, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय परंपराओं और समुदाय आधारित पर्यटन अनुभवों की विशेष सराहना की।फैम टूर का उद्देश्य केवल पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराना नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए पर्यटन प्रतिनिधियों को छत्तीसगढ़ की वास्तविक पर्यटन क्षमता का प्रत्यक्ष अनुभव कराना रहा। प्रतिनिधियों ने यहां प्रकृति, संस्कृति, जनजातीय विरासत, साहसिक पर्यटन, ग्रामीण जीवन और आतिथ्य को करीब से जाना। यात्रा के दौरान प्राप्त अनुभवों के आधार पर प्रतिनिधियों ने भविष्य में अपने-अपने क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा अधिक से अधिक पर्यटकों को राज्य की यात्रा के लिए प्रेरित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।फैम टूर ने चित्रकोट, बस्तर और धुड़मारास जैसे गंतव्यों को देश के पर्यटन प्रतिनिधियों के प्रत्यक्ष अनुभव से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। इससे छत्तीसगढ़ के पर्यटन को राष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने और राज्य को एक प्रमुख, विविधतापूर्ण एवं आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर मिला है। प्रकृति की भव्यता, जनजातीय संस्कृति की जीवंतता, रोमांच और आत्मीय आतिथ्य इन सभी अनुभवों के संगम ने फैम टूर के प्रतिभागियों के लिए छत्तीसगढ़ को केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि यादगार यात्रा अनुभव के रूप में स्थापित किया।
- -112 आत्मसमर्पित युवाओं ने तिरंगा थामकर दिया शांति और राष्ट्रप्रेम का संदेश-पुनर्वास नीति से बदली जिंदगी, सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में लौट रहे युवा-एसपी श्री मयंक गुर्जर ने पुनर्वासित महिला अमीला पदामी को ध्वजारोहण का दिया अवसररायपुर। कभी हिंसा के रास्ते पर चले 112 आत्मसमर्पित युवाओं ने इस स्वतंत्रता दिवस पर हाथों में तिरंगा थामकर शांति, भाईचारे और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। सुकमा के पुनर्वास केंद्र में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में इन युवाओं ने देश की एकता और अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।कभी जिन हाथों में हथियार थे, उन्हीं हाथों में आज तिरंगा था। यह बदलाव केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि सुकमा में शांति और पुनर्वास की दिशा में हो रहे सकारात्मक प्रयासों की कहानी है। आत्मसमर्पण के बाद शासन की पुनर्वास नीति के माध्यम से इन युवाओं को समाज की मुख्यधारा में लौटने और सम्मानजनक जीवन शुरू करने का अवसर मिल रहा है।स्वतंत्रता दिवस समारोह में पुलिस अधीक्षक श्री मयंक गुर्जर पुनर्वास केंद्र पहुंचे। उन्होंने पुनर्वासित महिला अमीला पदामी को ध्वजारोहण के लिए आमंत्रित किया। अमीला पदामी के हाथों तिरंगा फहराए जाने का क्षण सभी के लिए भावुक और प्रेरणादायी रहा। राष्ट्रगान के दौरान सभी पुनर्वासित युवाओं ने तिरंगे को सलाम कर देश के प्रति अपनी आस्था और सम्मान व्यक्त किया।एसपी श्री मयंक गुर्जर की इस संवेदनशील पहल ने पुनर्वासित युवाओं में आत्मविश्वास और अपनत्व की भावना को मजबूत किया। उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना की।आत्मसमर्पण के बाद इन युवाओं के जीवन में बदलाव की नई शुरुआत हुई है। शासन-प्रशासन की पुनर्वास नीति उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति, रोजगार और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर दे रही है। सही मार्गदर्शन और सहयोग से ये युवा अब अपने परिवार और समाज के लिए बेहतर भविष्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन सुकमा में बदलते वातावरण की प्रेरक तस्वीर बना। तिरंगे की छांव में आत्मसमर्पित युवाओं का यह उत्सव बताता है कि विश्वास, अवसर और पुनर्वास के प्रयासों से हिंसा के रास्ते से लौटकर युवा शांति और विकास के सहभागी बन सकते हैं।कार्यक्रम में श्री हरिशंकर साहू, क्रांति बघेल, सुमन मौर्य, भगत यादव, राजेश तिग्गा, किच्चे मुका, सोढ़ी भीमा सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर किया नमनरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास परिसर में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने अटल जी के विराट व्यक्तित्व, राष्ट्रसेवा और छत्तीसगढ़ निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान का स्मरण किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंहदेव भी उपस्थित रहे।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रद्धेय अटल जी छत्तीसगढ़ के निर्माता और प्रदेशवासियों की भावनाओं को सम्मान देने वाले महान राष्ट्रनायक थे। छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण उनके दूरदर्शी नेतृत्व, दृढ़ संकल्प और संवेदनशील सोच का परिणाम है। उन्होंने इस अंचल की भौगोलिक विशिष्टताओं, विकास की आवश्यकताओं और पृथक राज्य की वर्षों पुरानी जनआकांक्षा को समझा तथा प्रधानमंत्री के रूप में उसे साकार किया। छत्तीसगढ़ को पृथक राज्य के रूप में पहचान दिलाने वाला उनका यह ऐतिहासिक निर्णय प्रदेश के इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अटल जी का छत्तीसगढ़ से रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि गहरा आत्मीय और भावनात्मक था। छत्तीसगढ़ और यहां के लोगों के प्रति उनके मन में विशेष स्नेह था। श्री साय ने अटल जी के साथ अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि उन्हें स्वयं भी श्रद्धेय अटल जी का स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। उनके साथ जुड़ी अनेक आत्मीय स्मृतियां आज भी मन में जीवंत हैं। अटल जी का स्नेह और उनका मार्गदर्शन उनके जीवन की अमूल्य स्मृतियों में है, जो उन्हें जनसेवा के पथ पर निरंतर प्रेरित करता है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रद्धेय अटल जी का व्यक्तित्व बहुआयामी था। संवेदनशील कवि, प्रखर पत्रकार, ओजस्वी वक्ता और दूरदर्शी राजनेता के रूप में उन्होंने भारतीय जनमानस पर अमिट छाप छोड़ी। वे ऐसे सर्वस्वीकार्य राजनेता थे, जिन्हें दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर सभी वर्गों का सम्मान और स्नेह प्राप्त हुआ। वैचारिक दृढ़ता के साथ विनम्रता, संवेदनशीलता और संवाद उनके सार्वजनिक जीवन की विशेषता थी।राष्ट्रहित उनके लिए सदैव सर्वाेपरि रहा और मां भारती की सेवा उनके जीवन का सर्वाेच्च ध्येय थी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अटल जी ने सुशासन और अंत्योदय को शासन का आधार बनाकर विकास की ऐसी विरासत स्थापित की, जो आज भी देश को दिशा दे रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से गांवों को सड़कों से जोड़ने की ऐतिहासिक पहल ने ग्रामीण भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति दी। किसानों के कल्याण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों का दूरगामी प्रभाव पड़ा।मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता देते हुए अटल जी के कार्यकाल में पृथक जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया गया। यह निर्णय जनजातीय समुदायों के विकास, अधिकारों और आकांक्षाओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता का परिचायक था। उन्होंने विकास की मुख्यधारा को गांव, गरीब, किसान, जनजातीय समाज और वंचित वर्गों तक पहुंचाने के लिए अनेक दूरदर्शी पहल कीं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अटल जी ने जिस छत्तीसगढ़ की आधारशिला रखी, उसे समृद्ध, विकसित और आत्मनिर्भर बनाना हम सभी का दायित्व है। उनकी सरकार अटल जी के सुशासन, अंत्योदय और जनकल्याण के मूल्यों को आत्मसात करते हुए प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आज विकास और सुशासन के नए अध्याय लिख रहा है। सरकार का प्रत्येक प्रयास गांव, गरीब, किसान, युवा, महिला और जनजातीय समाज के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को साकार करने की दिशा में केंद्रित है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी का जीवन, विचार और आदर्श नेतृत्व सदैव देश और प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। छत्तीसगढ़ के निर्माता के रूप में उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके सपनों के अनुरूप समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।
- रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर और एकात्म परिसर स्थित कार्यालयों में 80वें स्वाधीनता दिवस के पावन अवसर पर गरिमामय एवं देशभक्तिपूर्ण माहौल में ध्वजारोहण कार्यक्रम किया गया।भाजपा प्रदेश कार्यालय (कुशाभाऊ ठाकरे परिसर) में आयोजित समारोह में भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहराया और उपस्थित सभी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर प्रमुख रूप से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कण्डेय, प्रदेश कार्यालय मंत्री अशोक बजाज, श्रम आयोग अध्यक्ष रामप्रताप सिंह, खाद्य आयोग अध्यक्ष संदीप शर्मा, नागरिक आपूर्ति निगम अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, प्रदेश मंत्री द्वय अमित साहू व जयंती पटेल, प्रदेश प्रवक्ता नलिनीश ठोकने, डॉ. विजयशंकर मिश्रा, डॉ. किरण बघेल, अंजय शुक्ला सहित वरिष्ठ नेता एवं पदाधिकारी, विभिन्न निगमों, मण्डलों व आयोगों के अध्यक्ष, प्रदेश पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।एकात्म परिसर में भी लहराया गया तिरंगाभाजपा के एकात्म परिसर स्थित कार्यालय में भी स्वाधीनता दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कंडेय, रायपुर शहर जिला अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर सहित भाजपा के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने तिरंगे को सलामी दी और राष्ट्र सेवा का संकल्प दोहराया।
- -पौधारोपण, जल संरक्षण और ‘विकसित भारत-जी राम जी योजना’ की दी गई जानकारीरायपुर ।स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर जांजगीर-चांपा जिले में राष्ट्रप्रेम के साथ जल एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया। शासन के निर्देशानुसार जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में निर्मित अमृत सरोवरों के तट पर स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किए गए। इन आयोजनों में पंचायत प्रतिनिधियों, ग्रामीणों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, युवाओं, विद्यार्थियों एवं स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। समारोह के दौरान अमृत सरोवर स्थलों पर ध्वजारोहण के साथ पौधारोपण, स्वच्छता अभियान एवं श्रमदान जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। ग्रामीणों को जल संरक्षण एवं संवर्धन के महत्व की जानकारी देते हुए वर्षा जल को सहेजने, जल स्रोतों के संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। अमृत सरोवरों को जल संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के जीवंत केंद्र के रूप में विकसित करने का संदेश दिया गया।कार्यक्रमों के दौरान ग्रामीणों को ‘विकसित भारत-जी राम जी योजना’ के उद्देश्यों और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण तथा गांवों के समग्र विकास में इसकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। ग्रामीणों को शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के साथ-साथ गांव के विकास, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया।स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर विभिन्न ग्राम पंचायतों में देशभक्ति गीत, तिरंगा यात्रा, नुक्कड़ नाटक, निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं सहित विविध सांस्कृतिक एवं जनजागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की गईं। इन आयोजनों के माध्यम से स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को जनभागीदारी से जोड़ते हुए राष्ट्रप्रेम के साथ जल, पर्यावरण और ग्रामीण विकास के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।
- -अमर वाटिका में शहीदों को दी श्रद्धांजलिरायपुर / 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बस्तर क्षेत्र के वीर जवानों के अदम्य साहस, पराक्रम और बलिदान को नमन किया। जगदलपुर स्थित अमर वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में कांकेर, नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा जिले में पदस्थ अधिकारी-जवानों को जिन्हें वीरता पदक से अलंकृत पुलिस जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि जवानों के शौर्य ने बस्तर का नया इतिहास लिखा है,नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में मिली ऐतिहासिक सफलताओं का श्रेय सुरक्षा बलों के साहस, समर्पण और दृढ़ संकल्प को जाता है।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जवान कठिन परिस्थितियों और आईईडी जैसे घातक खतरों के बीच भी पूरी निष्ठा से मोर्चे पर डटे रहे हैं। राज्य गठन के 25 वर्ष के भीतर छत्तीसगढ़ पुलिस के 141 जवानों को गैलेंट्री अवार्ड मिलना उनकी कर्तव्यनिष्ठा और शौर्य का प्रमाण है। श्री शर्मा ने कहा कि नई सरकार के गठन के बाद बस्तर के उन दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी राष्ट्रीय पर्वों पर तिरंगा फहराया जा रहा है, जहां पहले ऐसा संभव नहीं था। इस वर्ष 93 नए स्थानों पर तिरंगा फहराकर सुरक्षा बलों ने विश्वास और लोकतंत्र की नई नींव मजबूत की है।उप मुख्यमंत्री ने जगदलपुर में 2025 अगस्त माह के दौरान हुए बड़े आत्मसमर्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि 210 नक्सलियों द्वारा 163 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पुनर्वास अभियान है। उन्होंने इसे सुरक्षा बलों के दृढ़ संकल्प और शांति की दिशा में बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि बस्तर में संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्रभावी स्थापना जवानों के पराक्रम और स्थानीय जनता के विश्वास का परिणाम है। माओवादी विचारधारा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि बंदूक के बल पर कायम व्यवस्था जनता के अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकती। लोकतंत्र में वही व्यवस्था मान्य है, जो जनता द्वारा चुनी गई हो और जनता के प्रति जवाबदेह हो।गृह मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता बस्तर की जल, जंगल और संस्कृति को संरक्षित रखते हुए यहां के बच्चों को आधुनिक शिक्षा और तकनीक से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में कभी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, वहां अब विकास की नई संभावनाएं तैयार हो रही हैं।उन्होंने बताया कि टेकुलगुड़म जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा कैंपों को ‘शहीद वीर गुंडाधूर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों में स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी और कौशल विकास केंद्र जैसी सुविधाएं स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के अनुरूप विकसित की जाएंगी।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में शांति, विकास और लोकतंत्र की स्थापना की दिशा में लगातार सकारात्मक बदलाव हो रहे हैं। उन्होंने सभी जवानों और अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बस्तर में सुख, शांति और विकास का नया मार्ग प्रशस्त करने में सुरक्षा बलों के साथ-साथ यहां की जनता की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इस अवसर पर वीर जवानों ने अपनी वीरता की कहानियों को बयां किया और शहीदों के पराक्रम की कहानियां साझा की। इस दौरान गृह मंत्री ने अमर जवान शहीद स्मारक में पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और शहीदों की स्मरण पट्टिका पर पुष्पांजलि अर्पित की । इस दौरान महापौर श्री संजय पांडेय, सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री दिनेश कश्यप, अन्य जनप्रतिनिधि, कमिश्नर श्री डोमन सिंह, आई जी श्री बद्री नारायण मीणा, कलेक्टर श्री आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा सहित पुलिस विभाग के अधिकारी- जवान उपस्थित रहे ।
- रायपुर /स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोकभवन में स्वागत समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां शामिल हुईं। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी। राज्यपाल श्री डेका को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी उपस्थित थीं।समारोह में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री श्री टंकराम वर्मा, अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, महासमुंद सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल श्री रमेश बैस, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री सुनील सोनी, श्री अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ ममता साहू, जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे। समारोह में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित श्री भारतीबंधु, डॉ. राधेश्याम बारले, सुश्री उषा बारले एवं अन्य उपस्थित थे। स्वागत समारोह में शहीदों के परिजन, वीरता पुरस्कार से सम्मानित पुलिस के अधिकारी, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली हस्तियां, ब्रम्हकुमारी बहनें मौजूद थीं। समारोह में देशभक्ति पूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।समारोह में मुख्य सचिव श्री विकास शील, पुलिस महानिदेशक श्री अरूण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, श्री मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव श्री सोनमणी बोरा राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, संचालक आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण श्रीमती हिना अनिमेष नेताम, राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्रीमती सत्यभामा अजय दुबे, सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, सेना के वरिष्ठ अधिकारीगण, विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रेस-मीडिया कर्मी एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
- - विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने मेडिकल कॉलेज परिसर में किया पौधरोपण- एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेशराजनांदगांव । विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजनांदगांव प्रवास के दौरान एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत भारतरत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में मौलश्री का पौधरोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण और प्रकृति के संतुलन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए नागरिकों से अधिक से अधिक फलदार एवं उपयोगी पौधे लगाने का आह्वान किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आजादी की 80 वर्ष की यात्रा पूरी हो चुकी है। भारतरत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर स्थापित राजनांदगांव का मेडिकल कॉलेज सभी के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ और आज प्रदेश में बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थान विकसित हुए हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज परिसर को हरा-भरा देखकर प्रसन्नता व्यक्त की।विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रकृति सबसे बड़ी चिकित्सक है। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश पंचतत्वों से हमारा जीवन और यह सृष्टि बनी है। प्रकृति हमें अन्न, जल, वायु और सूर्य की ऊर्जा जैसी अमूल्य चीजे नि:शुल्क प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन का महत्व कोरोना काल में सभी ने अनुभव किया, जब लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए संघर्ष करना पड़ा। इसलिए पेड़ों का संरक्षण और अधिक से अधिक पौधरोपण मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने कहा कि पर्यावरण का संतुलन बिगडऩे पर मानव अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा। जल को प्रदूषित और वायु को अशुद्ध करने के दुष्परिणाम आज महानगरों में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने भावी चिकित्सकों से प्रकृति संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी भविष्य के डॉक्टर हैं और डॉक्टर मानव जीवन की रक्षा करने वाले महत्वपूर्ण सेवक हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के बाद मानव जीवन की रक्षा में डॉक्टर का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में बेहतर कार्य करने वाले चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, सफाई कर्मचारियों एवं अन्य कर्मचारियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आने वाले समय में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिक से अधिक कर्मचारियों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाना चाहिए।विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने पौधरोपण के अवसर पर नागरिकों से स्थानीय एवं फलदार प्रजातियों के पौधे लगाने का आग्रह किया। उन्होंने आम, जामुन, पीपल, बरगद, आंवला, हर्रा, बहेड़ा, कुसुम आदि उपयोगी पौधे लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पौधे केवल लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी किया जाना चाहिए। उन्होंने सौर ऊर्जा का अधिक से अधिक उपयोग करने कहा। उन्होंने कहा कि सूर्य की ऊर्जा कभी समाप्त नहीं होने वाली ऊर्जा है और इसका उपयोग स्वच्छ ऊर्जा के रूप में किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों को सौर ऊर्जा अपनाने और पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बनने का संदेश दिया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों की प्रतिष्ठा वहां कार्य करने वाले चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों की सेवाभावना से बनती है। उन्होंने शासकीय मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव में बेहतर कार्य करने के लिए सभी चिकित्सकों एवं कर्मचारियों को शुभकामनाएं दी।महापौर श्री मधुसूदन यादव ने देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को नमन किया। उन्होंने सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि भारतरत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव लाखों लोगों को जीवनदान देने का कार्य कर रहा है। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की सेवाभावना की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। महापौर श्री यादव ने बताया कि मेडिकल कॉलेज परिसर में आगामी फिजियोथेरेपी सेंटर के लिए 200 पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव में इस वर्ष लगभग 10 हजार पौधों का रोपण किया जा रहा है। पिछले भीषण गर्मी को देखते हुए पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए सार्वजनिक स्थानों के साथ-साथ नागरिकों को अपने घरों में भी फलदार एवं छायादार पौधे लगाने चाहिए। उन्होंने एक पेड़ मां के नाम अभियान से जुड़कर प्रत्येक नागरिक से पौधरोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि नगर पालिक निगम, वन विभाग एवं अन्य माध्यमों से नागरिकों को पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महापौर श्री यादव ने मेडिकल कॉलेज परिसर में पौधों की बेहतर देखरेख के लिए प्रबंधन को धन्यवाद देते हुए सभी से पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में सहयोग करने की अपील की। इस अवसर पर अध्यक्ष राजगामी संपदा न्यास श्रीमती पूर्णिमा साहू, श्री खूबचंद पारख, श्री कोमल सिंह राजपूत, श्री संतोष अग्रवाल, श्री रमेश पटेल, पार्षद श्री पारस वर्मा, श्री भावेश बैद, आईजी श्री अजय कुमार यादव, कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव, सीईओ जिला पंचायत श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी, मेडिकल कॉलेज के डीन श्री पंकज लुका सहित चिकित्सक, अधिकारी-कर्मचारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।



























