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- : तोरई एक पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी है। इसमें कई विटामिन, खनिज और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। तोरई में विटामिन-सी होता है, जिससे इम्यूनिटी मजबूत बनती है। तोरई में फाइबर पाया जाता है जिससे कब्ज की समस्या दूर होती है और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद मिलती है। वजन को कंट्रोल करने के लिए भी तोरई की सब्जी फायदेमंद मानी जाती है। तोरई में विटामिन-ए, मैग्नीशियम, कैल्शियम और विटामिन-बी6 जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। तोरई में कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं जिससे शरीर को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाया जा सकता है। इन पोषक तत्वों की मदद से, न केवल पाचन स्वास्थ्य सुधरता है बल्कि इम्यूनिटी, मस्तिष्क और ह्रदय भी मजबूत बनता है।हार्ट के लिए क्यों फायदेमंद है तोरई?--तोरई में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। तोरई खाने से कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद मिलती है जिससे हार्ट अटैक के जोखिम को कम किया जा सकता है।-तोरई में पोटैशियम की अच्छी मात्रा होती है, जो रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है। हाई बीपी हृदय रोगों का मुख्य कारण होता है, इसलिए इसे नियंत्रित रखना हृदय स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।-तोरई में कैलोरीज की मात्रा कम होती है और यह फाइबर से भरपूर होती है। इस सब्जी को खाने से वजन को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। इस सब्जी को खाकर हृदय रोगों का खतरा कम होता है।-तोरई में विटामिन-सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो हृदय को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट्स का सेवन हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।-तोरई में मौजूद पोषक तत्वों में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करने में मदद करते हैं। हृदय के आस-पास की सूजन कम होने से हृदय रोगों का जोखिम घटता है।हार्ट के मरीज डाइट में तोरई को कैसे शामिल करें?तोरई की सब्जी को कई तरह से खाया जा सकता है--तोरई को छोटे टुकड़ों में काटकर प्याज, टमाटर और मसालों के साथ पकाया जाता है। तोरई की सब्जी रोटी या चावल के साथ बहुत स्वादिष्ट लगती है।-कद्दूकस की हुई तोरई को थोड़ी देर उबालकर ठंडा करें। इसे दही, भुना जीरा पाउडर, काला नमक और थोड़े से पुदीने के पत्तों के साथ मिलाकर रायता बनाएं। यह रायता स्वादिष्ट होता है और शरीर में ताजगी भरा देता है।-तोरई को टुकड़ों में काटकर मूंग दाल या अरहर दाल के साथ पकाया जा सकता है। इसे चावल या रोटी के साथ परोसा जा सकता है।-तोरई को पीसकर उसका जूस तैयार कर सकते हैं। यह जूस हार्ट ओर डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद गुणकारी होता है।-इन तरीकों से आप तोरई को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं और इसके स्वास्थ्य लाभों का आनंद उठा सकते हैं। उम्मीद करते हैं कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। इस लेख को शेयर करना न भूलें।
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बहुत बार हम अक्सर नोटिस करते हैं कि कोई भी चीज रखकर भूल जाते हैं या कोई बात करते-करते अचानक ही भूल जाते है। दिमाग पर बहुत जोर डालने के बाद भी हमें चीजें याद नहीं आती हैं। आपको बदा दें कि इस तरह की समस्याएं आमतौर पर तब होती हैं, जब आपकी मेमोरी या याददाश्त कमजोर होने लगती है। बढ़ती उम्र के साथ याददाश्त कमजोर होना एक आम बात है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति कम उम्र में ही मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करता है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। याददाश्त कमजोर होने का एक बड़ा कारण डाइट में पोषण की कमी भी हो सकती है। जब आप स्वस्थ, संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार नहीं लेते हैं, तो इससे शरीर में कई जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। आपको बता दें कि कुछ ऐसे पोषक तत्व भी होते हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। मस्तिष्क के बेहतर फंक्शन और बेहतर याददाश्त के लिए यह बहुत जरूरी है कि आप पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें। बहुत से लोग अक्सर यह सवाल पूछते हैं कि आखिर ऐसे कौन-कौन से पोषक तत्व या विटामिन होते हैं, जिनकी कमी से याददाश्त कमजोर हो सकती है? इस लेख में हम आपको मस्तिष्क के लिए जरूरी है विटामिन और मिनरल्स के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।
किन पोषक तत्वों की कमी से याददाश्त कमजोर होती है-जब मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने की बात आती है, तो इसमें विटामिन डी, बी-12, आयरन और ओमेगा-3 फैटी एसिड बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि कई अन्य पोषक तत्व भी मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं, लेकिन ये कुछ महत्वपूर्ण पोषक तत्व हैं।विटामिन डी (Vitamin D)अध्ययन में पाया गया है कि मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में विटामिन डी कई तरह से भूमिका निभाता है। यह डिप्रेशन, ब्रेन फॉग और मेमोरी कमजोर होने से रोकने में मदद करता है।विटामिन बी 12 (Vitamin B12)नर्वस सिस्टम को दुरुस्त रखने, लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन और डीएनए के लिए यह बहुत आवश्यक विटामिन है। इस विटामिन की कमी से याददाश्त, सोच और निर्णय लेने में परेशानी संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।आयरन (Iron)शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने और मस्तिष्क तक जरूरी पोषक पहुंचाने के लिए यह बहुत आवश्यक मिनरल है। यह शरीर में खून की कमी को दूर करने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों में सुधार करने में मदद करता है। यह मेमोरी और संज्ञानात्मक प्रदर्शन में सुधार करने में मदद करता है।ओमेगा -3 फैटी एसिड (Omega 3 Fatty Acid)यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक फैट होता है। यह मस्किष्क की सूजन कम करने और ब्रेन फंक्शन में सुधार करने में मदद करता है। याददाश्त को मजबूत बनाने के लिए यह बहुत जरूरी है। यह मस्तिष्क की सीखने और याद रखने की क्षमता में सुधार करता है।इन पोषक तत्वों के अलावा, मैग्नीशियम, विटामिन सी, कोलीन आदि जैसे न्यूट्रिएंट्स भी ब्रेन फंक्शन में सुधार करने और याददाश्त को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक हैं। बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए इन फूड्स को डाइट में शामिल जरूर करना चाहिए। -
आहार का असर हमारी सेहत पर देखने को मिलता है। जो लोग पौष्टिक आहार का सेवन नहीं करते हैं उनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। ऐसे में उनको कई तरह के रोग होने की संभावना अधिक होती है। विभिन्न रोगों से बचने के लिए आप फलों का सेवन कर सकते हैं। फलों में अनार का सेवन करना ब्रेन हेल्थ के लिए फायदेमंद होता है। इससे लोगों का दिमाग तेज होता है। जिससे वह हर स्थिति को बिना दबाव के आसानी से ठीक कर लेते हैं।
ब्रेन के लिए अनार खाने के फायदे -
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूरअनार में पॉलीफेनोल्स और फ्लेवोनोइड्स सहित एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो शरीर में फ्री रेडिकल्स के प्रभावों को कम करता है। फ्री रेडिकल्स की वजह से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ सकता है। जिससे ब्रेन की कोशिकाओं को नुकसान हो सकता है। अनार में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट ब्रेन के लिए एक शिल्ड की तरह कार्य करता है, यह कॉग्नेटिव पावर (संज्ञानात्मक) को गिरने से बचाने में सहायक होता है।मेमोरी पावर को बढ़ानाएक्सपर्ट बताते हैं कि जो लोग नियमित रूप से अनार का सेवन करते हैं, उनकी याददाश्त बेहतर होती है। माना जाता है कि अनार में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट नर्वस सिस्टम को सपोर्ट करते हैं। अनार में पाए जाने वाले कम्पाउंड कॉग्नेटिव गतिविधियों को बढ़ा सकते हैं, जिससे ब्रेन तेजी कार्य कर सकता है।एंटी-इंफ्लेमेटरीसूजन को अल्जाइमर और पार्किंसंस रोग सहित कई नर्वस सिस्टम संबंधी डिसऑर्डर से जोड़ा जाता है। अनार में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। अनार मस्तिष्क में सूजन को कम करके न्यूरोइन्फ्लेमेशन से जुड़ी स्थितियों को कम करने में सहायक हो सकता है।न्यूरोलॉजिकल रिकवरी मे सपोर्ट करनाब्रेन में किसी तरह चोट या इंजरी होने पर आप अनार का सेवन कर तेजी से रिकवरी कर सकते हैं। अनार में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स डैमेज नर्वस सेल्स को रिपेयर करते हैं। साथ ही, नए सेल्स को बनाने में मदद करते हैं। साथ ही, अनार के सेवन से ब्रेन के इलाज की प्रक्रिया में रिकवरी तेजी से होती है।तनाव कम करने में सहायकस्ट्रेस और तनाव के कारण ब्रेन की पावर कमजोर होने लगती है। ऐसे में एक्सपर्ट्स लोगों को अनार का सेवन करने की सलाह देते हैं। दरअसल, अनार तनाव के लिए जिम्मेदार कार्टिसोल हार्मोन को नियंत्रित करने में सहायक होता है।समय और उम्र के साथ लोगों में न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों का खतरा बढ़ जाता है। अनार के न्यूरोप्रोटेक्टिव गुण उम्र के साथ होने वाले मेमोरी लॉस से लोगों का बचाव करते हैं। इसके अलावा, अनार से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। यदि आपको ब्रेन संबंधित किसी तरह की समस्या है तो इसे अनदेखा न करें और तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें। -
समय के साथ लोगों की बदलती आदतों का असर उनकी सेहत पर देखने को मिलता है। खाने की गलत आदतें, शारीरिक गतिविधियों में कमी और स्ट्रेस आदि के कारण लोगों में डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ने लगी है। यही कारण है कि आज डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। इंसुलिन बनने की प्रक्रिया में आई बाधा के चलते व्यक्ति को यह समस्या होती है। इसके अलावा अन्य कारणों से भी डायबिटीज हो सकती है। डायबिटीज के रोगियों को हर समय थकान और कमजोरी महसूस होती है। साथ ही, ब्लड शुगर का लेवल बढ़ने से उनको हृदय संबंधी रोग होने का खतरा भी अधिक होता है। इन लक्षणों से बचाव के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना बेहद आवश्यक है।
डायबिटीज में जामुन की पत्तियों के फायदे
आयुर्वेद में जामुन के फल, उसकी गुठलियों और पत्तियों का इस्तेमाल सदियों से डायबिटीज को दूर करने के लिए किया जा रहा है। इनके नियमित इस्तेमाल से ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
ब्लड शुगर को करें कंट्रोलजामुन के पत्तों में जंबोलिन कम्पाउंड पाया जाता है, यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में सहायक होता है। यह कम्पाउंड इंसुलिन बनने की प्रक्रिया को बूस्ट करता है और शरीर में ग्लूकोज के अवशोषण को कम करता है। इससे डायबिटीज के रोगियों को ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।एंटीऑक्सिडेंट गुणजामुन के पत्तों में अधिक मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में फ्री रेडिकल्स से होने वाले डैमेज को कम करते हैं। डायबिटीज के मरीजों में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस अधिक होने की संभावना होती है, जिससे विभिन्न समस्याएं शुरु हो सकती हैं। जामुन के पत्तों का सेवन करने से शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है, जिससे डायबिटीज को कंट्रोल करने और इसके लक्षणों के प्रभाव को कम किया जा सकता है।एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रभावडायबिटीज में अक्सर सूजन की समस्या देखने को मिलती है, जो विभिन्न अंगों को प्रभावित कर सकती है। जामुन के पत्तों में मौजूद टैनिन और फ्लेवोनॉइड्स एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होते हैं। ये सूजन और दर्द को कम करने में सहायक होते हैं, जिससे डायबिटीज के रोगियों को समस्या में आराम मिलता है।जामुन के पत्तों का उपयोग कैसे करेंपत्तों का रसजामुन के ताजे पत्तों को तोड़ लें। इनको पानी से धोने के बाद इनसे रस निकाल लें। इस रस का सेवन सुबह खाली पेट करने से आपको कुछ ही दिनों में डायबिटीज में आराम मिलने लगेगा। साथ ही ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।जामुन के पत्तों का पाउडरइसके लिए आप जामुन के पत्तों को सूखाकर इसका पाउडर बना लें। ये पाउडर आप सुबह व शाम पानी के साथ ले सकते हैं। इस उपाय के साथ आपको डाइट में भी आवश्यक बदलाव करने की सलाह दी जाती है।जामुन के पत्तों की चायडायबिटीज में आप जामुन के पत्तों की चाय भी पी सकते हैं। इसके लिए आप पत्तों को पानी में उबालकर छान लें। इसके बाद इसे गुनगुना होने पर चाय की तरह पिएं।जामुन की पत्तियों को डायबिटीज में लेने से ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। लेकिन, इसके साथ आपको डाइट और लाइफस्टाइल में भी आवश्यक बदलाव करने की सलाह दी जाती है। डाइट में शुगर को बढ़ाने वाले आहार, जैसे आलू, चावल, आदि का सेवन न करें। इसके साथ ही रोजाना एक्सरसाइज करें। डायबिटीज की समस्या अधिक होने पर आप इसे अनदेखा न करें, ऐसे में आप तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। - वर्तमान समय में आपने अपने आस-पास कई लोगों को ये कहते हुए सुना होगा कि अक्सर उनके पूरे शरीर में दर्द रहता है। दरअसल, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी के साथ अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खानपान के चलते शरीर में कई तरह के विटामिन और खनिजों की कमी आम बात हो गई है। कई बार लोग शरीर में होने वाले दर्द को लंबे समय तक नजरअंदाज करते रहते हैं, जिसके कारण दिक्कतें बढ़ जाती हैं। शरीर में जब विटामिन्स और मिनरल्स की कमी होती है, तो इससे कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगती है। पूरे शरीर में दर्द होना भी विटामिन और मिनरल्स की कमी का ही एक लक्षण है, जिसे इग्नोर करना स्वास्थ्य के लिए भारी पड़ सकता है।किस की कमी से पूरे शरीर में दर्द होता है?1. विटामिन D की कमी - Vitamin D Deficiencyशरीर में विटामिन D की कमी आजकल आम हो गई है, जिसका एक बड़ा कारण है कि लोग सुबह की धूप में ज्यादा समय नहीं बिताते हैं, इसके साथ ही शरीर में विटामिन D का सही तरीके से अवशोषण न होना। विटामिन D की कमी के कारण मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द की शिकायत के साथ थकान और कमजोरी का एहसास होता है। विटामिन D की कमी दूर करने के लिए आप रोजाना कम से कम 15-20 मिनट धूप में बिताएं, खासकर सुबह के समय और डाइट में दूध, दही, अंडे की जर्दी, और सैल्मन मछली को शामिल करें। इसके अलावा आप डॉक्टर की सलाह पर विटामिन D के सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं।2. विटामिन B12 की कमी - Vitamin B12 Deficiencyपूरे शरीर में दर्द और कमजोरी के साथ अगर व्यक्ति को झनझनाहट का एहसास होता है और मांसपेशियों में ऐंठन रहती है तो यह विटामिन B12 की कमी के कारण हो सकता है। इसके लिए आप डाइट में मछली, अंडे और डेयरी उत्पादों का सेवन करें और डॉक्टर की सलाह पर विटामिन B12 के सप्लीमेंट्स लें।3. मैग्नीशियम की कमी - Magnesium Deficiencyसेहतमंद रहने के लिए जरूरी है कि आप ऐसी चीजों का सेवन करें जिनमें मैग्नीशियम की अच्छी मात्रा हो। शरीर में मैग्नीशियम की कमी होने पर थकान, कमजोरी, सिरदर्द और अनिद्रा की शिकायत होती है। इसकी कमी दूर करने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ-साथ नट्स, बीज, और साबुत अनाज का सेवन करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह अनुसार मैग्नीशियम के सप्लीमेंट्स लें।4. आयरन की कमी - Iron Deficiencyशरीर में आयरन की कमी होने पर मांसपेशियों में दर्द और सूजन के अलावा थकान-कमजोरी और सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। आयरन की कमी पूरी करने के लिए हरी पत्तेदार सब्जिया, लाल मांस, बीन्स का सेवन करें। शरीर में आयरन का अवशोषण को बढ़ाने के लिए विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें, जैसे संतरे, नींबू, और टमाटर आदि।किसी भी कमी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। हेल्दी लाइफस्टाइल और संतुलित आहार के माध्यम से आप इन पोषक तत्वों की कमी से बच सकते हैं।
- गर्मियों में मिलने वाला आम लोगों को बेहद पसंद होता है। आम को फलों का राजा सिर्फ इसके स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि इसमें मौजूद पोषक तत्वों की वजह से भी कहा जाता है। गर्मियों में आम का सेवन करना न सिर्फ मजेदार होता है, बल्कि इससे शरीर को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व भी प्राप्त होते हैं।आम में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?एक मध्यम आकार के आम (100 ग्राम) में लगभग इतने पोषक तत्व पाए जाते हैं।कैलोरी - 70KCalकार्ब्स - 15-16 ग्रामशुगर - 14-15 ग्रामफैट - 0.4 ग्रामडाइटरी फाइबर - 2 ग्रामविटामिन और खनिजविटामिन C: 40 मिलीग्रामविटामिन A: 1500 यूनिट्सपोटैशियम: 150 मिलीग्रामविटामिन Eविटामिन Kविटामिन B (B6, फोलेट)ताँबाएंटीऑक्सिडेंट्सफाइटोन्यूट्रिएंट्सगर्मियों में आम खाने के फायदेडायटिशियन की सलाह है कि लोगों को एक बार में 1-2 आम ही खाने चाहिए और इन्हें खाने से पहले कम से कम 3 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि आम को भिगोने से इसकी गर्मी कम होती है और पाचन के भी लिए यह बेहतर हो जाता है।1. आम में मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व वजन कंट्रोल करने में सहायक हो सकते हैं। आम में स्वाद भरपूर होता है लेकिन कैलोरी ज्यादा नहीं होती है, ऐसे में इसे खाने के बाद आपको वजन बढ़ने की चिंता नहीं होनी चाहिए।2. गर्मियों में आम का सेवन हार्ट हेल्थ के लिए भी लाभदायक हो सकता है। आम में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ पोटैशियम और विटामिन C की अच्छी मात्रा होती है, जो हार्ट हेल्थ को बढ़ावा देते हैं।3. जिन लोगों को अक्सर पेट में भारीपन की शिकायत रहती है उनके लिए आम का सेवन फायदेमंद हो सकता है। आम आम में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को सुधारने में सहायक होता है और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करता है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करें।4. गर्मियों में अक्सर लोग थकान और कमजोरी की शिकायत करती है, ऐसे लोगों के लिए आम खाना लाभदायक हो सकता है। आम का सेवन करने से आपके शरीर में एनर्जी आएगी, जिससे आप दिनभर एनर्जेटिक महसूस करेंगे। आम को कई अलग-अलग तरीकों से डाइट में शामिल किया जा सकता है।5. आम में विटामिन A और विटामिन C की अच्छी मात्रा होती है, जो त्वचा को हेल्दी बनाने में सहायक होते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि इसका सेवन भिगोने के बाद ही करें।
- : त्वचा के किसी भी हिस्से में झुर्रियां हो सकती हैं। वैसे, तो माथे पर झुर्रिंया होना उम्र बढ़ने का एक सामान्य प्रोसस है। लेकिन कभी-कभी उम्र से पहले भी झुर्रियों की समस्या हो सकती है। इसका कारण है यूवी रेज के संपर्क में ज्यादा रहना। जो लोग यूवी रेज के संपर्क में ज्यादा रहते हैं, उनके चेहरे पर रिंकल्स नजर आ सकते हैं। शरीर में पानी की कमी के कारण झुर्रियां नजर आ सकती हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है, जो झुर्रियों का कारण बन सकता है। स्किन केयर रूटीन को ठीक से फॉलो न करने के कारण भी माथे पर झुर्रियां हो सकती हैं। इस लेख में हम जानेंगे 5 ऐसे ऑयल्स के बारे में जिससे झुर्रियों की समस्या को दूर किया जा सकता है। साथ ही आपको बताएंगे इनके फायदे और इस्तेमाल का तरीका।1. आर्गेन ऑयल से दूर करें झुर्रियांमाथे की झुर्रियां को कम करने के लिए आर्गेन ऑयल का इस्तेमाल करें। आर्गेन ऑयल में विटामिन ई और फैटी एसिड्स होते हैं। आर्गेन ऑयल में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो त्वचा को फ्री रैडिकल्स से बचाते हैं। इसके नियमित इस्तेमाल से झुर्रियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।2. रोजहिप ऑयल से दूर करें झुर्रियांरोजहिप ऑयल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो त्वचा की सूजन और रेडनेस को कम करते हैं। रोजहिप ऑयल की मदद से त्वचा की टोन को सुधारने और पिग्मेंटेशन की समस्या को कम करने में मदद मिलती है। रोजहिप ऑयल में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो त्वचा को फ्री रैडिकल्स से बचाते हैं। इस तरह झुर्रियों और फाइन लाइन्स की समस्या को कम करने में मदद मिलती है।3. जोजोबा ऑयल से दूर करें झुर्रियांमाथे की झुर्रियां कम करने के लिए जोजोबा ऑयल का इस्तेमाल करें। जोजोबा ऑयल में विटामिन ई और विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स होते हैं, जो शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स हैं। जोजोबा ऑयल त्वचा में कोलेजन को बढ़ावा देते हैं। इस तरह झुर्रियां कम दिखाई देती हैं और त्वचा ज्यादा जवां नजर आती है।4. ग्रेपसीड ऑयल का इस्तेमाल करेंमाथे की झुर्रियां कम करने के लिए ग्रेपसीड ऑयल का इस्तेमाल करें। ग्रेपसीड ऑयल अंगूर के बीजों से निकाला जाता है और इसमें कई पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं।5. नारियल तेल से दूर करें झुर्रियांनारियल तेल में एंटीऑक्सीडेंट्स और फैटी एसिड्स होते हैं जो त्वचा को स्वस्थ बनाए रखते हैं। नारियल तेल, त्वचा में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देता हैै इससे त्वचा युवा दिखती है और झुर्रियों की समस्या दूर होती है।माथे की झुर्रियां कम करने के लिए तेल का इस्तेमाल कैसे करें?-सबसे पहले, अपने चेहरे को अच्छी तरह से धोकर साफ करें और सुखा लें।-अपनी हथेली पर तेल की थोड़ी मात्रा लें।-तेल को माथे पर हल्के हाथों से लगाते हुए मालिश करें।-तेल का इस्तेमाल रात में सोने से पहले करें ताकि त्वचा इसे अच्छी तरह से एब्सॉर्ब कर सके।-गर्मी को देखते हुए तेल का ज्यादा इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि यह त्वचा को चिपचिपा बना सकता है।
- वजन कम करने के लिए लोग अपनी डाइट में कम से कम कैलोरी रिच फूड्स शामिल करना चाहते हैं। ऐसे में अक्सर लोग दही और छाछ के सेवन को लेकर कंफ्यूज रहते हैं कि वे वजन कम करने के लिए अपनी डाइट में क्या शामिल करें? दही और छाछ दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद होता है। खासकर गर्मियों के मौसम में लोग दही या छाछ का सेवन करना ज्यादा पसंद करते हैं। हालांकि, उनके मन में ये सवाल रहता है कि वजन कम करने के लिए क्या दही छाछ से बेहतर है? “वजन कम करने के लिए दही और छाछ दोनों ही अच्छे विकल्प हैं। लेकिन, अगर कैलोरी की बात करें तो 100 ग्राम छाछ में 40 कैलोरी होती है जबकि 100 ग्राम दही में 98 कैलोरी होती है। इसलिए, वजन कम करने के लिए दही से बेहतर छाछ है।” तो आइए विस्तार में जानते हैं छाछ या दही वजन कम करने के लिए क्या है बेहतरवजन घटाने के लिए कौन सा अच्छा है दही या छाछ?कम कैलोरीदही की तुलना छाछ में कैलोरी की मात्रा कम होती है, जिसके कारण छाछ उन लोगों के लिए एक हेल्दी और बेहतर विकल्प बनता है, जो वजन कम करने के दौरान कैलोरी का सेवन कम मात्रा में करना चाहते हैं।हाइड्रेशनछाछ में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जो आपके शरीर को वेट लॉस के दौरान हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है। दही के स्थान पर छाछ का सेवन कम कैलोरी के साथ आपके शरीर को भरा हुआ महसूस कराने और हाइड्रेटेड रहने के लिए बढ़ावा देता है।पाचन स्वास्थ्यछाछ और दही दोनों में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो आंत में गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं। हेल्दी गट हेल्थ पाचन और चयापचय में सुधार करने में मदद करती है, जो वजन कम करने के लिए बहुत जरूरी है। हालांकि, छाछ में प्रोबायोटिक्स के खास स्ट्रेन्स पाचन के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।पोषक तत्वछाछ कैल्शियम, विटामिन और मिनरल्स जैसे जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है, लेकिन इसमें आम तौर पर फुल फैट वाले दही की तुलना में कम फैट होता है, जिस कारण छाछ आपके शरीर को कम कैलोरी के साथ अन्य जरूरी पोषक तत्व देने में मदद करती है।लैक्टोज इनटोलरेंटलैक्टोज इनटोलरेंट वाले व्यक्तियों के लिए दही की तुलना में छाछ पचाने में ज्यादा आसान हो सकता है, क्योंकि इसमें आमतौर पर कम लैक्टोज होता है, जो बेहतर पाचन के साथ ओवरओल हेल्थ में सुधार कर सकता है और वजन कम करने में फायदेमंद हो सकता है।हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि छाछ और दही को बनाने के अनुसार इनके फायदे अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए, वजन कम करने के दौरान आपनी डाइट में दही या छाछ शामिल करने से पहले डाइटिशियन से सलाह जरूर ले लें।
- आयुर्वेद में लहसुन को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद बताया गया है। इसमें मौजूद विटामिन बी 6, विटामिन सी, विटामिन बी 1, सेलेनियम, कैल्शियम और कॉपर जैसे पोषक तत्व समस्त स्वास्थ्य को फायदा करते हैं। जोड़ों में दर्द, शरीर में सूजन या पाचन सम्बन्धित समस्याओं में भी यह कारगर साबित हुआ है। कई लोग इसे कच्चा निगलना पसंद करते हैं। जबकि कई लोग इसे पकाकर और चबाकर खाना पसंद करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं लहसुन खाने का सही तरीका क्या है?लहसुन खाने का सही तरीका क्या है?लहसुन हमेशा पकाकर और चबाकर ही खाना चाहिए। इसके सेवन का सबसे बेहतर तरीका है कि आप लहसुन को घी में भूनकर या सब्जी में पकाकर खाएं। लेकिन लहसुन को कच्चा निगलना या खाली पेट खाना बिल्कुल फायदेमंद नहीं होता है। इससे आपको कई परेशानियां हो सकती हैंलहसुन को घी में भूनकर खाना क्यों फायदेमंद है?लहसुन हाई एसिडिक होता है। कच्चे लहसुन का सेवन करने से शरीर में एसिड बढ़ जाता है। जबकि इसे घी में भूनकर खाने से इसमें मौजूद एसिड काफी हद तक कम हो जाता है। साथ ही, घी में भुना हुआ लहसुन खाने से पित्त भी नियंत्रित होने लगता है। इसके अलावा, घी में भूनकर खाने से इसका असर टिशुज तक होता है। लेकिन अगर आप कच्चा खाते हैं, तो इससे घी में एंटी-लिपिड गुण भी होते हैं, जिससे इसका सेवन करना हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद है।लहसुन को कच्चा खाना या निगलना नुकसानदायक क्यों है?इस तरह से लहसुन शरीर को गर्मी भी कर सकता है। जिस कारण शरीर में पित्त का संतुलन बिगड़ सकता है। इसके अलावा, कच्चा खाने से शरीर को इसके पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। इसलिए इसे कच्चा खाना य निगलना फायदेमंद नहीं होता है। कच्चा लहसुन खाने से कई लोगों को पाचन संबन्धित समस्याएं भी हो सकती हैं।रोज लहसुन का सेवन करना क्यों फायदेमंद है?लहसुन को डेली डाइट में शामिल करने से यह आपके समस्त स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।सब्जी या व्यंजन में इसका सेवन करने से यह पाचन को स्वस्थ रखने में भी मदद करेगा। इससे आपको एसिडिटी, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं से भी राहत मिलेगी।जोड़ों से दर्द से राहत देने में भी भुना हुआ लहसुन खाना फायदेमंद है। इसे आप तेल में मिलाकर मसाज करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।अगर आप वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, तो घी में भुना लहसुन आपके लिए काफी फायदेमंद होगा।अगर आप किसी स्वास्थ्य समस्या की दवा रोज लेते हैं, तो अपने डॉक्टर की सलाह पर ही इसे डाइट में शामिल करें। इस लेख में दी जानकारी को शेयर करना न भूलें।
- डायबिटीज या मधुमेह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर या तो पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता या फिर बनाया गया इंसुलिन शरीर की कोशिकाओं द्वारा ठीक से उपयोग नहीं हो पाता है। नतीजा ये होता है कि खून में शुगर का स्तर लगातार बढ़ता रहता है। डायबिटीज को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन हेल्दी डाइट और एक्टिव जीवनशैली अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। डायबिटीज में ब्लड शुगर कंट्रोल में रखने और परेशानियों से बचने के लिए दूधी घास का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।डायबिटीज में दूधी घास के फायदेकम कैलोरी और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स: दूधी में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है। 100 ग्राम दूधी में केवल 17 कैलोरी होती हैं। साथ ही इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है (लगभग 44)। ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) किसी खाद्य पदार्थ को खाने के बाद कितनी जल्दी ब्लड शुगर की मात्रा बढ़ेगी उसे दिखाता है। कम GI वाली चीजें खाने से ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से रोका जा सकता है।फाइबर से भरपूर: दूधी में घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर पाए जाते हैं। फाइबर ब्लड शुगर के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे खाने के बाद ब्लड शुगर का स्तर तेजी से नहीं बढ़ता। साथ ही फाइबर आपको जल्दी तृप्ति का एहसास कराता है, जिससे आप कम खाते हैं और वजन नियंत्रण में रहता है।एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर: दूधी में विटामिन A, C और E जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं। ये एंटीऑक्सिडेंट शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम करते हैं। डायबिटीज के रोगियों में फ्री रेडिकल्स का स्तर अधिक होता है, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। दूधी का सेवन इन फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करता है।पानी की अच्छी मात्रा: दूधी में 92% पानी होता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शरीर को हाइड्रेट रखता है और खून के गाढ़ेपन को कम करता है। इससे शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है, जो डायबिटीज के रोगियों के लिए काफी जरूरी है।अन्य पोषक तत्व: दूधी में मैंगनीज, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स भी पाए जाते हैं। ये मिनरल्स शरीर के विभिन्न कार्यों के लिए जरूरी होते हैं और साथ ही इंसुलिन के बेहतर उत्पादन में भी मदद करते हैं।डायबिटीज में दूधी का सेवन कैसे करें?-डायबिटीज में दूधी का सेवन कई तरह से कर सकते हैं--दूधी की सब्जी: आप दूधी का साग बनाकर खाने से भी डायबिटीज के मरीजों को फायदा मिलता है।-दूधी का रायता: दूधी का रायता बनाकर आप दोपहर या रात के भोजन के साथ खा सकते हैं। रायता बनाने के लिए दही, कटी हुई लौकी, जीरा, पुदीना और हरी मिर्च का इस्तेमाल करें।-दूधी का सूप: दूधी का सूप हल्का और पौष्टिक होता है। आप नाश्ते में या शाम के नाश्ते के समय इसका सेवन कर सकते हैं।-डायबिटीज के रोगियों को दूधी घास सेवन से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। दूधी घास एक प्राकृतिक और पौष्टिक सप्लीमेंट है जो डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, इसका सही तरीके से सेवन करने के लिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
- हमारे गले में तितली के आकार की एक ग्रंथि होती है, जो थायराइड फंक्शन को मैनेज करती है। थायराइड एक हार्मोन है, जिसका काम थायराइड ग्रंथि को स्टिम्युलेट करना है। ऐसे में जब थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बनाती है तो आपको हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायरायडिज्म की समस्या हो सकती है। थायराइड की समस्या होने के कारण आपका वजन तेजी से बढ़ना, वजन कम होना, शरीर में दर्द, चिड़चिड़ापन, ज्यादा पसीना आना और स्किन या बालों से जुड़ी समस्याएं भी होने लगती है। थायराइड अक्सर खराब लाइफस्टाइल या जेनेटिक कारणों से होता है। इसलिए, जरूरी है कि आप एक हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करें और हेल्दी डाइट लें।थायराइड कंट्रोल के लिए हल्दी और दालचीनी का दूध कैसे बनाएं? -सामग्री-दूध- 1 कपहल्दी पाउडर- 1/2 चम्मचदालचीनी पाउडर- 1/4 चम्मचअदरक पाउडर या कसा हुआ- 1/4 चम्मचकाली मिर्च- एक चुटकीशहद या मेपल सिरप- 1 चम्मचदूध तैयार करने की विधि--एक छोटे सॉस पैन में, दूध को मध्यम आंच पर उबाल आने तक गर्म करें।-अब दूध में हल्दी, दालचीनी, अदरक और काली मिर्च पाउडर डालें।-सामग्रियों को मिलाने के लिए मिश्रण को धीरे-धीरे मिलाएं।-दूध को 5 मिनट तक उबलने दें और बीच-बीच में हिलाते रहें।-इसके बाद सॉस पैन को आंच से उतार लें और हल्दी वाले दूध को कुछ मिनट के लिए ठंडा होने दें।-अगर चाहें तो हल्दी वाले दूध को मीठा करने के लिए उसमें शहद या मेपल सिरप मिलाएं।-फिर छन्नी से दूध को गिलास में छान लें और गर्मागर्म पिएं।हल्दी और दालचीनी का दूध पीने के फायदे-हल्दी वाले दूध में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शामिल हैं, जो थायराइड स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।-हल्दी में करक्यूमिन होता है, जिसमें सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो थायराइड स्वास्थ्य का समर्थन कर सकते हैं।-दालचीनी में सूजन-रोधी गुण होते हैं और यह थायराइड मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही आपके दूध का स्वाद भी बढ़ाता है।-अदरक में सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो थायराइड फंक्शन कंट्रोल रखने का काम करता है।-काली मिर्च हल्दी में करक्यूमिन के असर को बढ़ाने का काम करती है, जिससे शरीर इसे ज्यादा प्रभावी ढंग से अवशोषित कर पाता है।-दूध कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर होता है, जो आपके ओवरओल हेल्थ के लिए जरूरी है और थायराइड फंक्शन को बढ़ावा देता है।थायराइड कंट्रोल करने के लिए हल्दी और दालचीनी के इस दूध को आप डाइट में शामिल कर सकते हैं। इसके साथ अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में हेल्दी बदलाव करने पर भी ध्यान दें।
- कुछ लोगों को गर्मी की वजह से जलन जैसी समस्या भी हो जाती है। खासकर, हथेलियों और तलवों पर जलन होना आम है। अगर आपको भी गर्मी की वजह से तलवों पर जलन का अनुभव हो रहा है, तो ऐसे में आप कुछ उपायों को आजमा सकते हैं।1. नीलगिरी के तेलआयुर्वेद में नीलगिरी तेल का उपयोग कई समस्याओं का इलाज करने के लिए किया जाता है। अगर गर्मी की वजह से आपके तलवों या पैरों में जलन हो रही है, तो भी आप नीलगिरी तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप रात को सोते समय तलवों की नीलगिरी तेल से मालिश कर सकते हैं। इससे आपके तलवों को ठंडक मिलेगी और जलन भी शांत होगी। आपको बता दें कि नीलगिरी तेल की तासीर ठंडी होती है, जो तलवों की जलन को शांत करने में मदद करता है। इससे आपको काफी आराम मिलेगा।2. नारियल तेलनारियल तेल की तासीर भी ठंडी होती है। इसलिए गर्मियों के लिए इस तेल को काफी फायदेमंद माना जाता है। अक्सर लोग शरीर की मालिश करने के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल करते हैं। अगर आपके तलवों पर गर्मी की वजह से जलन हो रही है, तो भी आप नारियल तेल का उपयोग कर सकते हैं। नारियल तेल शरीर को ठंडक प्रदान करने में मदद करता है। आप रात को नारियल तेल को तलवों पर लगा सकते हैं। इससे जलन में आराम मिलेगा। साथ ही, त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी दूर होंगी।3. चंदन पाउडर पेस्टगर्मी की वजह से तलवों में जलन महसूस हो रही है, तो आप चंदन पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप चंदन पाउडर लें। अब इसमें गुलाब जल या पानी मिलाएं। इस पेस्ट को तलवों पर लगाएं। आधे घंटे के लिए तलवों को ऐसे ही छोड़ दें। फिर आप तलवों को पानी से साफ कर सकते हैं। चंदन की तासीर ठंडी होती है, जो शरीर को ठंडक प्रदान करता है। आयुर्वेद में चंदन पाउडर का उपयोग त्वचा से जुड़ी समस्याओं का इलाज करने के लिए भी किया जाता है।4. मुल्तानी मिट्टी पेस्टअक्सर लोग खूबसूरती बढ़ाने के लिए मुल्तानी मिट्टी का उपयोग करते हैं। मुल्तानी मिट्टी त्वचा से जुड़ी समस्याओं को दूर करती है। मुल्तानी मिट्टी तासीर में ठंडी होती है। अगर आपको तलवों पर जलन हो रही है, तो आप मुल्तानी मिट्टी का उपयोग कर सकते हैं। मुल्तानी मिट्टी के पेस्ट को तलवों पर लगाने से जलन को शांत करने में मदद मिलती है। इसलिए अगर आपको भी जलन की समस्या है, तो मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करना लाभकारी हो सकता है।5. गुलकंद खाएंगुलकंद, गुलाब की पंखुड़ियों से बना होता है। यह बेहद ठंडा होता है। गर्मियों में गुलकंद का सेवन करना बेहद फायदेमंद होता है। गुलकंद खाने से शरीर में ठंडक बनी रहती है। अगर आपके तलवों में जलन हो रही है, तो भी गुलकंद का सेवन करना लाभकारी हो सकता है। शरीर में ठंडक बनाए रखने के लिए आप रोजाना 1-2 चम्मच गुलकंद का सेवन कर सकते हैं।
- पान खाना ज्यादातर लोगों को पसंद होता है। भारतीय संस्कृति में इसका खास महत्व है। ये पत्ता एंटी-डायबिटिक, कार्डियोवस्कुलर, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-अल्सर और एंटी-इनफेक्टिव गुण से भरपूर पान का पत्ता खाने से सेहत को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति कब्ज की समस्या से परेशान है तो वह भी पान पत्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। जानिए कब्ज में पान के पत्ते के फायदे-पुरानी कब्ज से मिलेगा छुटकारादरअसल, पान के पत्ते एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। ये शरीर में पीएच लेवल को मेंटेन रखने में मदद कर सकता है। ऐसे में इसे खाकर पेट से जुड़ी समस्याएं से राहत मिल सकती है।सुबह इस तरह लें पान का पत्ताकब्ज को दूर कर पेट से सारी गंदगी निकालने के लिए पान के पत्तों को पीसकर रात भर पानी में भिगो दें। सुबह उठकर पानी को छानकर खाली पेट पिएं। इसके अलावा आप एक गिलास पानी को गर्म करें और इसमें पान के पत्ते को डालकर उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए तो इसे ग्लास में निकालें।। अब इस पानी को घूंट-घूंट करके पिएं।यूं पाएं एसिडिटी से छुटकाराकई बार खाना खाने के बाद सीने में जलन, खट्टी डकार आने जैसी समस्याएं हो जाती हैं। इससे निपटने के लिए पान के पत्ते फायदेमंद होते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए पान के पत्तों को चबाकर खाएं। नियमित रूप से पान के पत्तों को सादा चबाने से पेट से जुड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।
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खाने में स्वाद और तीखापन बढ़ाने के लिए ज्यादातर लोग रसोई में हरी मिर्च का इस्तेमाल करते हैं। सेहत के लिहाज से भी हरी मिर्च लाल मिर्च की तुलना में ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है। बात अगर हरी मिर्च में मौजूद पोषक तत्वों की करें तो हरी मिर्च में विटामिन-ए, विटामिन-सी, आयरन, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं। बात अगर दिल की सेहत की करें तो हरी मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन नामक कंपाउंड हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाए रखने का काम करता है। ऐसे में आइए जानते हैं रोजाना अपनी डाइट में हरी मिर्च शामिल करने से व्यक्ति की सेहत को मिलते हैं कौन से गजब के फायदे।
हरी मिर्च खाने के फायदे-
डायबिटीज-डायबिटीज रोगियों को सेहतमंद बने रहने के लिए अपने खाने-पीने का बहुत ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, छोटी सी दिखने वाली ये हरी मिर्च कई गंभीर रोगों को जन्म देने वाली डायबिटीज को भी कंट्रोल करने में मदद कर सकती है। दरअसर मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन रसायन इंसुलिन सेक्रेशन को बढ़ावा देता है, जिससे ब्लड में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि शुगर रोगियों को हरी मिर्च खाने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए।आयरन की कमी-शरीर में आयरन की कमी होने पर व्यक्ति को कमजोरी और थकान महसूस होने लगती है। ऐसे में हरी मिर्च आयरन की कमी को पूरा करने में मदद कर सकती है। दरअसल, हरी मिर्च आयरन का प्राकृतिक स्रोत होता है, जिसके नियमित सेवन से आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।मोटापा-आपको सुनकर हैरानी हो सकती है, लेकिन यह सच है कि हरी मिर्च आपके मोटापे की समस्या को भी कम करने में मदद करती है। हरी मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन और एंटीओबेसिटी गुण पाए जाते हैं, जो फैट बर्न करने में मदद कर सकते हैं। जिससे तेजी से वजन कम करने में मदद मिलती है।दिल की सेहत-हरी मिर्च का सीमित मात्रा में सेवन दिल के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि हरी मिर्च का सेवन करने से शरीर में जमे बैड कोलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता है। जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है और दिल की बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।इम्यूनिटी-हरी मिर्च में बीटा कैरोटिन और विटामिन सी की अधिक मात्रा पाई जाती है। बीटा कैरोटिन एक पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट है, जो इम्यून सिस्टम को बूस्ट कर सकता है। जबकि विटामिन सी भी बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में मददगार होता है - डेंगू होने पर लोगों की प्लेटलेट्स बहुत कम हो जाती हैं। अगर इस दौरान सही उपचार और अच्छा खानपान नहीं लिया जाता है, तो इसके कारण प्लेटलेट्स का स्तर बहुत अधिक गिर सकता है, जिसके सेहत पर गंभीर दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा, प्लेटलेट्स कम होने पर कुछ फूड्स से सख्त परहेज करने की भी सलाह दी जाती है। बहुत से लोग डेंगू में कुछ ऐसे फूड्स का सेवन करते हैं, जो उनकी प्लेटलेट्स को बढ़ने नहीं देते हैं। इसकी वजह से उनकी स्थिति में सुधार देखने को नहीं मिलता है। इसलिए इन फूड्स के सेवन से सख्त परहेज किया जाना चाहिए। इस लेख में हम आपको ऐसे 5 फूड्स बता रहे हैं, जिनका सेवन डेंगू रोगियों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।प्लेटलेट्स कम होने पर कौन से फूड्स नहीं खाने चाहिएपैकेज्ड फूड्सइन फूड्स में लंबे समय तक खराब होने से बचाने के लिए कई केमिकल डाले जाते हैं। समय के साथ इनका पोषण भी कम हो जाता है। प्रोसेस्ड और जंक फूड्स से भी परहेज करना चाहिए। ये पचने में भारी होते हैं और शरीर की थकान बढ़ाते हैं।डेयरी प्रोडक्ट्स कम खाएंदूध और दूध से बने उत्पादन जैसे, दही और पनीर आदि के सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। इनका अधिक सेवन शरीर में बलगम का कारण बन सकता है। इसके कारण कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों का जोखिम भी बढ़ता है।मीठे फूड्स से परहेज करेंचीनी युक्त फूड्स और ड्रिंक्स का सेवन कम से कम करें। सिर्फ इतना ही नहीं, आर्टिफिशियल स्वीटनर्स, शहद और फलों के जूस से भी इस दौरान परहेज करना चाहिए। यह शरीर के पीएच स्तर को प्रभावित कर सकते हैं और शरीर अम्लता को बढ़ा सकते हैं।मीट खाने से बचेंइसमें कोई संदेह नहीं है, कि मीट, चिकन और मछली आदि में प्रोटीन और कई अन्य पोषक तत्व अच्छी मात्रा में होता हैं। लेकिन ये पचने में भारी होते हैं, साथ ही इनमें फैट भी अधिक होता है। इनका सेवन से शरीर में थकान बढ़ती है।ब्लड क्लॉट को प्रभावित करने वाले फूड्स कम खाएंफल खाना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। लेकिन कुछ फलों का सेवन रक्त में थक्कों को बनने से रोकता है। इनमें ब्लूबेरी, अंगूर और इससे बने उत्पाद और टमाटर सभी रक्त के थक्के को रोकने के लिए दिखाए गए हैं। इसके अलावा लहसुन, प्याज, अदरक और जिनसेंग आदि का सेवन भी सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए।
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समर सीजन में लोग तमाम तरह के मौसमी फलों को अपने फ्रिज में स्टोर करने लगते हैं। क्योंकि फ्रिज में फलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। लेकिन कुछ फलों को हमेशा रेफ्रिजरेटर में स्टोर करना सही नहीं होता है। क्योंकि फ्रिज में रखने से न सिर्फ उस खाद्य पदार्थ का स्वाद बदल जाता है, बल्कि इसका असर हमारी सेहत पर भी पड़ता है। एक्सपर्ट के अनुसार, गर्मी में आने वाले आम और तरबूज जैस मौसमी फलों को फ्रिज में बिल्कुल भी नहीं रखना चाहिए। बेशक, आप में से कई लोगों के लिए यह आश्चर्यजनक हो सकता है, लेकिन यही उचित है। बहरहाल, यहां हम आपको इसके पीछे की वजह भी बता रहे हैं।
कम तामपान में रहता है खराब होने का खतरासमर सीजन में तरबूज और आम सबसे ज्यादा खाए जाने वाले फलों में आते हैं। दोनों में ही पानी की मात्रा काफी ज्यादा रहती है लिहाजा ये फल हमें सनस्ट्रोक से बचाते हैं और हाइड्रेट रखते हैं। लेकिन इन दोनों ही फलों को फ्रिज में नहीं रखना चाहिए। एक्सपर्ट का कहना है कि आम और तरबूज जैसे फलों को गर्मियों में फ्रिज से बाहर ही रखना चाहिए, क्योंकि कम तापमान में इनके खराब होने का खतरा ज्यादा रहता है। गर्मी के सुपरफूड हैं आम और लीची, लाल- पीले फलों में से कौन है सेहत के लिए ज्यादा बेहतरभूलकर भी न रखें कटे फलएक्सपर्ट के अनुसार, आम और तरबूज को काटकर फ्रिज में स्टोर नहीं करना चाहिए। इस तरह रखने पर ये फल 'चिल इंजरी' का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में इनका स्वाद भी अच्छा नहीं रहता और रंग भी फीका हो जाता है। साथ ही खुला रखने पर इनकी सतह पर बैक्टीरिया भी पनपने का डर रहता है जिससे सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।रूम टेम्प्रेचर पर ही रखें ये फलएक्सपर्ट का सुझाव है कि आप तरबूज, खरबूज और आम जैसे गूदेदार फलों को मार्केट से लाकर सीधे फ्रिज में स्टोर न करें। पहले इन फलों को कुछ देर तक ठंडे पानी में रखा रहने दें। इसके बाद इन्हें रूम टेम्प्रेचर पर ही रहने दें। हालांकि, खाने से पहले इन्हें काटकर कुछ देर फ्रिज में स्टोर कर सकते हैं। क्योंकि कटे हुए फल खुले में रखने से बेस्वाद हो सकते हैं।फ्रिज में अलग-अलग रखें फल और सब्जियांफ्रिज में कभी भी फल और सब्जियों को एक शेल्फ में स्टोर नहीं करना चाहिए। इन्हें अलग-अलग रखना चाहिए। क्योंकि फल और सब्जियां अलग तरह की गैस रिलीज करते हैं। साथ में स्टोर करने से इनके टेस्ट पर फर्क पड़ सकता है।रूम में रखने से बेहतर रहते हैं फलों के एंटीऑक्सीडेंट्सयूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तरबूज, खरबूजा या आम जैसे फलों को रूम टेंपरेचर में रखना ज्यादा बेहतर विकल्प होना चाहिए। बाहर रखने से इन फलों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स सही रहते हैं जो हमारे शरीर के लिए कई तरह से लाभकारी होते हैं। - डायबिटीज के मरीजों को ब्लड शुगर का स्तर कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी होता है। ब्लड शुगर स्तर नियंत्रण में रखने के लिए अच्छी डाइट और लाइफस्टाइल को फॉलो करना जरूरी होता है। गर्मियों में अनाज खाने की इच्छा कम होती है। ऐसे में अधिकतर लोग फलों का सेवन ज्यादा करते हैं। हालांकि, डायबिटीज रोगियों को गर्मियों में कुछ फलों का अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए।डायबिटीज रोगी गर्मियों में न खाएं ये फल1. तरबूजतरबूज गर्मियों में सबसे अधिक खाए जाने वाले फलों में से एक है। अधिकतर लोगों को तरबूज खाना बेहद पसंद होता है। इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है। इसके साथ ही, तरबूज में चीनी भी होती है, जो डायबिटीज रोगियों में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा सकती है। इसलिए अगर आपको डायबिटीज है, तो गर्मियों में कम मात्रा में ही तरबूज का सेवन करें। तरबूज शरीर को हाइड्रेटेड रखता है। इसे खाने से पेट की गर्मी शांत होती है और रिलैक्स फील होता है। अगर आप तरबूज का सेवन करना चाहते हैं, तो अपनी डाइट से चीनी की मात्रा को मैनेज करें। इससे ब्लड शुगर का स्तर भी कंट्रोल में रहेगा।2. आमआम अधिकतर लोगों का पसंदीदा फल होता है। गर्मियों में आम को खाना खूब पसंद किया जाता है। कोई आम को फल के रूप में खाता है, तो कोई मैंगो शेक पीना पसंद करता है। अकसर लोग एक दिन में खाना खाने के बाद खूब आम खा जाते हैं। लेकिन अगर आप डायबिटीज रोगी हैं, तो आम का सेवन अधिक मात्रा में करने से बचें। आम में शुगर और कार्ब्स अधिक होते हैं, जो रक्त में शुगर के स्तर को बढ़ा सकते हैं। आम दिन में एक आम खा सकते हैं। हालांकि, ज्यादा आम खाने से आपको बचना चाहिए।3. केलाकेला सभी मौसमों में मिलता है। केले में भी चीनी और कार्ब्स अधिक होते हैं। इसलिए डायबिटीज रोगियों को ज्यादा मात्रा में केले का सेवन नहीं करना चाहिए। केला डायबिटीज रोगियों में ब्लड शुगर के स्तर को अनियंत्रित कर सकता है।4. अनानासगमियों में शरीर में पानी की कमी को दूर करने के लिए अधिकतर लोग अनानास का सेवन करते हैं। अनानास एक खट्टा-मीठा फल है। इसमें कार्बोहाइड्रेट भी पाए जाते हैं। आपको बता दें कि 100 ग्राम अनानास में लगभग 13.1 ग्राम कार्ब्स होते हैं। अगर आप डायबिटीज रोगी हैं, तो अधिक मात्रा में अनानास का सेवन करने से बचें।
- भारतीय आयुर्वेद में दूध को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है। दूध पीने से आपकी हड्डियांं मजबूत होती है। साथ ही, रात के समय हल्का गर्म दूध केसर और जायफल के साथ पीने आपको कई बेहतरीन फायदे देखने को मिल सकते हैं। सामान्य प्रवृत्ति के लोगों द्वारा इस दूध को किसी भी मौसम में पिया जा सकता है। लेकिन, ज्यादातर इस दूध को सर्दियों के मौसम में पीना बेस्ट माना जाता है। यह दूध आपके नींद की क्वालिटी में सुधार लाता है। इसके साथ ही पाचन क्रिया व इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। इस दूध को पीने से आपको वायरल इंफेक्शन होने का खतरा कम होता है।रात में जायफल और केसर वाला दूध पीने के फायदेनींद की क्वालिटी को बेहतर बनाएंजायफल और केसर वाला दूध आपकी नींद के लिए आवश्यक होता है। यह नींद को बेहतर करने में सहायक होता है। जायफल में मिरिस्टिसिन नामक एक प्राकृतिक कम्पाउंड होता है, इसमे स्मुदिंग गुण होते हैं जो नींद लाने में मदद कर सकते हैं। वहीं, केसर में क्रोसिन और सफ़रनल जैसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो मूड को बेहतर बनाने और हल्के डिप्रेशन को दूर करने में मददगार होते हैं।पाचन क्रिया को बेहतर करनाजायफल और केसर का दूध पाचन क्रिया के लिए फायदेमंद होता है। पारंपरिक चिकित्सा में जायफल का इस्तेमाल लंबे समय से पेट फूलने, गैस और दस्त जैसी पाचन समस्याओं के लिए किया जाता रहा है। यह पाचन एंजाइम्स को बूस्ट करता है और भोजन को पचाने में मदद करता है। वहीं, केसर एसिडिटी और पाचन अग्नि को बनाए रखता है।इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाएंजायफल और केसर के दूध का नियमित सेवन आपकी इम्यून सिस्टम मजबूत बनती है। जायफल में विटामिन ए, सी और ई जैसे आवश्यक पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, साथ ही मैग्नीशियम, कैल्शियम और मैंगनीज जैसे मिनरल्स भी होते हैं। ये पोषक तत्व इम्यून सिस्टम को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।हार्ट हेल्थ के लिए आवश्यकजायफल और केसर वाला दूध हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद होता है। जायल के एक्टिव कम्पाउंड ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और सर्कुलेशन को बेहतर करने में मदद करते हैं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते है, जो नसों की सूजन को कम करते हैं। इससे हार्ट संबंधी बीमारियों का जोखिम कम होता है। वहीं केसर नसों में प्लाक को बनने से रोकता है। इससे हार्ट हेल्थ बेहतर होती है।संज्ञानात्मक कार्य को बढ़ाएं (कॉग्नेटिव कार्य)जायफल और केसर का दूध संज्ञानात्मक स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचा सकता है। जायफल में मिरिस्टिसिन और मैसेलिगनन जैसे आवश्यक तेल होते हैं, जो संज्ञानात्मक कार्य को बेहतर बनाने और न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों को रोकने में सहायक होते हैं।इस दूध के नियमित सेवन से आपको कई तरह के संक्रमण से बचाव होता है। इससे बनाने के लिए आप गर्म दूध में थोड़ा सा केसर और जायफल मिला दैं। रात को सोने से पहले इस दूध पीने से अधिक फायदेमंद देखने को मिल सकते हैं।
- गर्मियों में अंडरआर्म्स एरिया में अक्सर रैशेज और खुजली की समस्या रहती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अंडरआर्म्स में पसीना जल्दी इकट्ठा हो जाता है। पसीने के कारण अंडरआर्म्स में रैशेज और खुजली की समस्या होती है। रैशेज और खुजली की समस्या समय के साथ बढ़ सकती है। इसका इलाज करने के लिए तवचा को मॉइश्चराइज करना जरूरी है। त्वचा को मॉइश्चराइज करने के लिए बाजार में कई प्रकार के क्रीम और लोशन मिलते हैं। इनका इस्तेमाल करने के बजाय आप घर पर होममेड क्रीम बना सकते हैं। होममेड क्रीम में नेचुरल इंग्रीडिएंट्स होते हैं और ये त्वचा को नमी प्रदान करने में फायदेमंद माने जाते हैं। इस लेख में जानें अंडरआर्म्स में रैशेज और खुजली दूर करने के लिए होममेड क्रीम बनाने का तरीका और फायदे।अंडरआर्म्स के लिए होममेड क्रीम बनाने का तरीकानारियल तेल ,एलोवेरा जेल ,टी ट्री ऑयल,शिया बटरविधि:-सबसे पहले एक छोटे बर्तन में नारियल तेल को गर्म करें।-इस तेल में एलोवेरा जेल मिलाएं और अच्छी तरह से मिक्स करें।-इसके बाद मिश्रण में टी ट्री ऑयल की 3 से 4 बूंदें मिक्स करें।-अब मिश्रण में शिया बटर मिलाएं।-सभी सामग्रियों को अच्छी तरह से मिलाएं ताकि समान मिश्रण तैयार हो जाए।अंडरआर्म्स के लिए होममेड क्रीम का इस्तेमाल कैसे करें?अंडरआर्म्स के लिए होममेड क्रीम का इस्तेमाल करने के लिए पहले अंडरआर्म्स को अच्छी तरह से साफ करें। अंडरआर्म्स को अच्छी तरह से साफ करने के बाद होममेड क्रीम को अप्लाई करें। क्रीम को लगाकर हल्के हाथ से मालिश करें ताकि क्रीम त्वचा में अच्छी तरह से समा जाए। बेहतर परिणाम के लिए क्रीम को दिन में 2 बार लगाएं। सुबह और शाम क्रीम को लगाएंगे, तो त्वचा मुलायम रहेगी।अंडरआर्म्स के लिए होममेड क्रीम के फायदे-अंडरआर्म्स के लिए होममेड क्रीम का इस्तेमाल फायदेमंद है क्योंकि इसमें शिया बटर मौजूद है।-शिया बटर की मदद से त्वचा मुलायम बनती है और खुजली की समस्या दूर होती है।-इस क्रीम में मौजूद टी ट्री ऑयल की मदद से त्वचा को रैशेज और खुजली से बचाया जा सकता है।-अंडरआर्म्स के लिए इस क्रीम को इस्तेमाल करने से त्वचा को एलोवेरा जेल के फायदे मिलेंगे, एलोवेरा जेल में एंटीबैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं। एंटीबैक्टीरियल गुणों की मदद से त्वचा को इंफेक्शन से बचाया जा -सकता है।
- पैनिक अटैक एक तरह की मानसिक स्थिति है। इसमें व्यक्ति कई बार कुछ निगेटिव विचारों के चलते अचानक घबराहट, किसी चीज का डर और बैचेनी होने लगती है। यह लक्षण कुछ मिनटों पर ही अधिक बढ़ सकते हैं। इस दौरान व्यक्ति को पसीना आना, कांपना, सांस फूलने लगती है। यह समस्या ट्रिगर करने वाले कई कारक जैसे रिश्तों में दरार, फाइनेंशियल प्रॉब्लम, दवाओं का साइड इफेक्ट, शराब, आसपास लोगों का बुरा बर्ताव, पोषक तत्वों की कमी और तनाव का स्तर बढ़ने आदि की वजह से हो सकती हैं। पैनिक अटैक एक गंभीर समस्या है जो किसी भी समय हो सकती है। लेकिन, रात में होने वाले पैनिक अटैक अधिक परेशान करने वाले होते हैं। ये न केवल आपकी नींद में खलल डालते हैं बल्कि आपकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर भी बुरा असर डालते हैं।रात में पैनिक अटैक से बचने के उपाय -रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएंरात में पैनिक अटैक को रोकने का एक सबसे अच्छा तरीका है रिलैक्सेशन तकनीकों का अभ्यास करना। डीप ब्रीदिंग, प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन, और मेडिटेशन जैसी तकनीकों का नियमित अभ्यास आपकी नर्वस सिस्टम को शांत करने में मदद करता है। इससे आप मानसिक रूप से शांत और स्थिर रह सकते हैं।सोने की नियमित दिनचर्या बनाएंअच्छी नींद के लिए नियमित दिनचर्या बहुत महत्वपूर्ण है। हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें। इससे आपका शरीर और मस्तिष्क एक नियमित पैटर्न में आ जाते हैं, जिससे पैनिक अटैक का खतरा कम हो जाता है। सोने से पहले थोड़ी देर किताब पढ़ें या संगीत सुनने से भी आपको आराम मिल सकता है।कैफीन और शराब से बचेंकैफीन और शराब आपके नर्वस सिस्टम को ट्रिगर कर सकती हैं, जिससे पैनिक अटैक की संभावना बढ़ जाती है। सोने से कम से कम 4-6 घंटे पहले कैफीन और शराब का सेवन बंद कर दें। इसके बदले में हर्बल चाय या गर्म दूध का सेवन कर सकते हैं।स्वस्थ भोजन करेंस्वस्थ और संतुलित आहार आपके मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। अत्यधिक चीनी और प्रौसेस्ड फूड आपके ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ा सकते हैं, जिससे पैनिक अटैक का खतरा बढ़ जाता है। अपने आहार में अधिक फल, सब्जियां, प्रोटीन और साबुत अनाज शामिल करें।नियमित व्यायाम करेंनियमित व्यायाम तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है। दिन में कम से कम 30 मिनट का व्यायाम आपके मूड को सुधारने और पैनिक अटैक की संभावना को कम करने में सहायक हो सकता है। ध्यान रखें कि सोने से ठीक पहले अत्यधिक शारीरिक गतिविधि न करें, क्योंकि यह आपकी नींद को प्रभावित कर सकती है।सकारात्मक सोचेंसकारात्मक सोच से आपको पैनिक अटैक में आराम मिलता है। नकारात्मक विचार और चिंता को दूर करने के लिए सकारात्मक विचारों पर फोकस करें। हर दिन कुछ मिनट निकालकर अपने बीते दिनों की सकारात्मक बातों पर ध्यान केंद्रित करें।रात में पैनिक अटैक को नियंत्रित करना बेहद कठिन हो सकता है। लेकिन, सही तकनीकों को अपनाकर आप इसे आसानी से नियंत्रित कर सकते हैं। नियमित रिलैक्सेशन, हेल्दी लाइफस्टाइल और एक्सपर्ट के सपोर्ट से आप पैनिक अटैक को रोक सकते हैं।
- पोटैशियम हमारे शरीर के लिए जरूरी है। जिन लोगों को डायबिटीज या हाई बीपी की समस्या है, उन्हें किडनी डिजीज से बचने के लिए पोटैशियम रिच फूड्स का सेवन करने की सलाह दी जाती है। पोटैशियम रिच फूड्स का सेवन करने से स्ट्रोक से भी बचाव होता है। लेकिन कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि अगर आपको किडनी से संबंधित कोई समस्या है, तो केला खाना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। केला, आलू, स्वीट पोटैटो और पकी हुई पालक में पोटैशियम की मात्रा ज्यादा होती है। जिन लोगों को किडनी संबंधित समस्या होती है, उनके लिए पोटैशियम रिच फूड्स को पचाना मुश्किल हो जाता है। अगर पोटैशियम रिच फूड्स का ज्यादा सेवन करेंगे, तो शरीर में पोटैशियम की मात्रा तेजी से बढ़ने लगेगी। किडनी स्टेज 3, किडनी स्टेज 4 के मरीज या जो मरीज डायलिसिस पर हैं, उनके शरीर में पोटैशियम की मात्रा कभी-कभी जल्दी बढ़ जाती है। ऐसे में लोगों को अक्सर यह कंफ्यूजन रहता है कि केला और आलू खाएं या नहीं।किडनी की समस्याओं से जूझ रहे कुछ लोगों के लिए ज्यादा केला खाना हानिकारक हो सकता है। केले में कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद फल है। केला खाने से इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बना रहता है और किडनी ठीक ढंग से काम करती है। केले में फाइबर होता है, जो पाचन क्रिया को आसान बनाता है और किडनी से विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। केला ऊर्जा का अच्छा स्रोत है जो किडनी और अन्य अंगों की कार्यक्षमता में सुधार लाता है। लेकिन केला उच्च पोटैशियम का स्रोत है। किडनी रोग में डॉक्टर लो पोटैशियम डाइट लेने की सलाह देते हैं। ऐसे में केले का अधिक सेवन उनके लिए हानिकारक हो सकता है। डायलिसिस और क्रॉनिक किडनी रोग होने पर पोटैशियम की मात्रा कम करनी होती है। इसलिए डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टर से संपर्क करें। दवा और डाइट के आधार पर डॉक्टर बताएंगे कि आपको डाइट में केला और आलू को शामिल करना चाहिए या नहीं।क्या आलू खाना किडनी के लिए हानिकारक है?-किडनी की समस्याओं वाले व्यक्तियों को आलू के सेवन में सावधानी बरतनी चाहिए। खासकर अगर उन्हें पोटैशियम के उच्च स्तर से बचना है। आलू में पोटैशियम की मात्रा को कम करने के लिए, आलू को छोटे टुकड़ों में काटकर पानी में भिगोकर रखें और फिर पकाकर खाएंगे, तो पोटैशियम की मात्रा कम हो सकती है। आलू का सेवन संतुलित मात्रा में और सही तरीके से किया जाए तो यह किडनी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन किडनी रोग से पीड़ित लोगों को अपने आहार में आलू शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। आलू में फाइबर की भी अच्छी मात्रा होती है, जो पाचन तंत्र को सुधारता है जिससे किडनी की समस्याओं से बचा जा सकता है लेकिन इसकी सीमित मात्रा ही खानी चाहिए।
- स्किन को हेल्दी रखने के लिए देखभाल करना सबसे ज्यादा जरूरी है। सही देखभाल के जरिये आप स्किन इंफेक्शन और एलर्जी के खतरे को भी कम कर सकते हैं। कई बार हम स्किन रूटीन तो फॉलो करते हैं, लेकिन इसका असर हमें नजर नहीं आता है। क्योंकि हम ऐसी चीजें इस्तेमाल कर रहे होते हैं, जो असल में हमारी स्किन को नुकसान करती हैं। इस लेख के माध्यम से जानें इन चीजों के बारे में।चेहरे पर साबुन लगानाकई लोग चेहरा धोने के लिए साबुन इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इससे चेहरे की त्वचा को नुकसान हो सकता है। साबुन में सोडियम लॉरिल सल्फेट नामक केमिकल मौजूद होता है। साबुन में यह केमिकल झाग पैदा करने के लिए डाला जाता है। लेकिन लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से त्वचा को नुकसान हो सकता है। इसके इस्तेमाल से आपकी स्किन डैमेज हो सकती है और आपको स्किन प्रॉब्लम्स हो सकती है। लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से स्किन से ऑयल कम होने लगता है। इससे स्किन में ड्राईनेस और इरिटेशन बढ़ सकती है।पेट्रोलियम जेलीकुछ लोग स्किन को मॉइस्चराइज करने के लिए पेट्रोलियम जेली लगाते हैं। लेकिन चेहरे पर पेट्रोलियम जेली लगाना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। अगर आपको एक्ने या ब्रेकआउट की समस्या रहती है, तो आपको इसे चेहरे पर नहीं लगाना चाहिए। अगर आपकी ड्राई स्किन है, तो आप इसे थोड़ी मात्रा में त्वचा पर इस्तेमाल कर सकते हैं।बॉडी लोशनअगर आप स्किन को मॉइस्चराइज और हाइड्रेट रखने के लिए बॉडी लोशन इस्तेमाल करते हैं, तो इससे आपकी त्वचा को नुकसान हो सकता है। क्योंकि बॉडी लोशन को शरीर के लिए बनाया जाता है। हमारे चेहरे की त्वचा शरीर के मुकाबले थोड़ी हल्की होती है। ऐसे में इसे चेहरे पर इस्तेमाल करने से त्वचा को नुकसान हो सकता है।टोनर लगानात्वचा में निखार लाने के लिए कई लोग चेहरे पर टोनर भी इस्तेमाल करते हैं। यह स्किन पर ग्लोइंग रखने में मदद करता है। लेकिन मार्केट के ज्यादातर टोनर में ऐल्कोहॉल इस्तेमाल किया जाता है। इनके इस्तेमाल से आपको त्वचा निखरी और सॉफ्ट लग सकती है। लेकिन लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से स्किन ड्राई होने लगती है। यह स्किन को ड्राई कर देता है। जिससे स्किन और भी ज्यादा ऑयल बनाने लगती है।इन बातों का विशेष रखें ध्यानस्किन को हेल्दी रखने के लिए रिफाइंड प्रोडक्ट अवॉइड करें। क्योंकि ये चीजें स्किन एलर्जी और इंफेक्शन का कारण बन सकती हैं।अपनी स्किन टाइप के मुताबिक ही स्किन केयर प्रोडक्ट्स चुनें। क्योंकि इससे स्किन को हेल्दी रहने में मदद मिलती है।दिन में दो बार स्किन को क्लीन जरूर करें। इससे त्वचा की गहराई से सफाई होती है।Advertisementअगर आपकी स्किन सेंसिटिव है, तो कोई भी प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। लेख में दी गई जानकारी पसंद आई हो, तो इसे शेयर करना न भूलें।
- रसोई में कभी बर्तनों के ऊपर तो कभी पके हुए भोजन के आसपास आपने कई बार सेहत के दुश्मन कॉकरोचों को घूमते हुए देखा होगा। रसोई में इधर-उधर घूमकर भोजन को दूषित करने वाले कॉकरोच घर की महिलाओं के लिए सिरदर्द का कारण होते हैं। जिनसे छुटकारा पाने के लिए कई बार लोग बाजार में मिलने वाले केमिकल्स और दवाओं का सहारा तक लेने से पीछे नहीं हटते हैं। लेकिन समस्या तब और ज्यादा बढ़ जाती है, जब इन दवाओं से कॉकरोच तो नहीं भागते लेकिन घर के सदस्य जरूर बीमार पड़ने लगते हैं। अगर आप भी तिलचट्टों के आतंक से परेशान हैं तो मिनटों में इनका सफाया करने के लिए अपनाएं ये किचन टिप्स।कॉकरोच से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय-तेज पत्ता-खाने का स्वाद बढ़ाने वाला तेजपत्ता आपके घर से कॉकरोच का सफाया करने में भी मदद कर सकता है। इस उपाय को करने के लिए तेजपत्ते को हाथ से मसलकर उसका चुरा बनाकर रसोई के हर उस कोने में डाल दें, जहां से आपको लगता है कॉकरोच आते हैं। तेजपत्ते की गंध से कोने में छिपे हुए कॉकरोच भी बाहर निकल आते हैं।बोरिक पाउडर-बोरिक पाउडर को आप आटे में गूंधकर आटे की छोटी-छोटी गोलियां बना लें। अब इन गोलियों को रसोईघर के हर उस कोने में रख दें, जहां भी कॉकरोच आते हों। आप देखेंगे कि धीरे-धीरे कॉकरोच गायब हो जाएंगें।लौंग-खाने में खुशबू बढ़ाने वाली लौंग, कॉकरोचों की दुश्मन होती है। अपनी किचन से कॉकरोच का सफाया करने के लिए आप नीम के तेल में लौंग का पाउडर बनाकर अच्छी तरह मिला लें। अब इस तेल को स्प्रे बोतल में डालकर कॉकरोच वाली जगहों पर स्प्रे करें। लौंग की गंध सूंघते ही कॉकरोच भाग जाएंगे।बेकिंग सोडा-बेकिंग सोडा की मदद से भी आप अपनी रसोई को कॉकरोच फ्री बना सकती हैं। इसके लिए एक कप में पानी,चीनी और बेकिंग सोडा डालें। अब इस घोल को घर के हर उस कोने में डाल दें जहां पर कॉकरोच होते हैं। घोल में मौजूद चीनी कॉकरोच को अपनी तरफ खींचती है और बेकिंग सोडा कॉकरोच के लिए जहर की तरह होता है। कॉकरोच घोल से चिपकते ही भाग जाते हैं या फिर मर जाते हैं।
- तपती धूप में शरीर तो डिहाइड्रेट होता ही है साथ ही साथ सनबर्न की समस्या भी बढ़ जाती है। तेज धूप में ज्यादा समय बिताने के कारण त्वचा पर जलन और लालिमा हो सकती है, जिसे आमतौर पर सनबर्न कहा जाता है। धूप से झुलसी त्वचा को रिपेयर करने के लिए लोग पार्लर में कई तरह के महंगे ट्रीटमेंट्स लेते हैं, लेकिन इनका कुछ खास असर नहीं होता है। अगर आप भी सनबर्न से परेशान हैं तो नेचुरल आयुर्वेदिक उपाय आजमा सकते हैं।धूप से झुलसी त्वचा का इलाज कैसे करें? -1. चंदन लेपआयुर्वेद में गर्मियों में शरीर पर चंदन लेप लगाने के अनेक फायदे बताए गए हैं। चंदन लेप में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो धूप से झुलसी त्वचा की लालिमा और जलन को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक बाउल में 4 चम्मच चंदन पाउडर को जरूरत अनुसार गुलाबजल मिलाकर एक पेस्ट तैयार करना होगा। चंदन के इस लेप को चेहरे समेत शरीर के उन हिस्सों पर लगाएं, जहां सनबर्न हुआ हो। चंदन के लेप को 15-20 मिनट तक लगा रहने दें और फिर ताजे पानी से इसे साफ करें। चंदर का लेप त्वचा को ठंडक प्रदान करता है और सनबर्न को कम करने में सहायक होता है। इसके साथ ही यह त्वचा की जलन और सूजन को कम करने त्वचा को नेचुरली ग्लोइंग बनाने में भी सहायक होता है। गर्मियों में आ चंदन लेप का इस्तेमाल नियमित कर सकते हैं।2. एलोवेराऔषधीय गुणों से भरपूर एलोवेरा का इस्तेमाल त्वचा को हील करने के लिए किया जा सकता है। हाइड्रेटिंग गुणों से भरपूर एलोवेरा में मौजूद गुण त्वचा को ठंडक पहुंचाते हैं और इसे रिपेयर करने में मदद करते हैं। एलोवेरा में विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो धूप से झुलसी त्वचा की जलन को कम करते हैं और ठंडक पहुंचाते हैं। आप ताजे एलोवेरा जेल से अपने शरीर की मसाज कर सकते हैं और जब ये जेल सूख जाए तो ताजे पानी से साफ करें। एलोवेरा जेल सनबर्न को कम करता है और त्वचा को मॉइश्चराइज करता है।3. दहीसनबर्न की समस्या में दही का उपयोग कारगर साबित होता है। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को एक्सफोलिएट करता है जिससे त्वचा सॉफ्ट होती है। धूप से झुलसी त्वचा पर दही लगाने से तुरंत ठंडक मिलती है और त्वचा की जलन और लालिमा भी कम होती है। इसके लिए आप ताजे दही को अपने शरीर पर लगाकर मसाज कर सकते हैं और फिर स्नान कर लें। दही त्वचा को मॉइश्चराइज करके ठंडक और राहत प्रदान करता है।4. नारियल तेलएंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर नारियल का तेल सनबर्न की समस्या को कम करने में सहायक हो सकता है। आप नहाने के पहले नारियल तेल से अपने शरीर की मालिश कर सकते हैं, यह त्वचा को पोषण देता है। धूप से झुलसी त्वचा पर नारियल तेल लगाने से जलन से राहत मिलती है। नारियल तेल का इस्तेमाल करने से त्वचा की नमी बरकरार रहती है, ये त्वचा को अंदर से रिपेयर करने में सहायक होता है।
- गर्मियों में लीची खाना भला किसे पसंद नहीं होगा। आगे जानते हैं गर्मी को शांत के लिए लीची से हेल्दी ड्रिंक्स कैसे तैयार करें। लीची में एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidants), विटामिन, और मिनरल्स पाए जाते हैं। लीची से कई तरह की ड्रिंक्स तैयार की जा सकती हैं। यह ड्रिंक्स शरीर की गर्मी को कम करने और गर्मी के दुष्प्रभावों को भी दूर करने में सहायक होती हैं।लीची समर ड्रिंक्सलीची मेलन बॉल (Lychee Melon Balls)-इस ड्रिंक को बनाने के लिए आप करीब 8 से 10 लीची के पल्प को मिक्सी में मैश कर लें।-इसके बाद इसमें करीब दो से चार चम्मच नींबू का रस मिलाएं।-अब इसमें करीब आधा बोतल सोडे की मिलाएं।-इसके बाद इस ड्रिंक्स में बर्फ को क्रश करके डालें।-अब सभी को अच्छे से मिला लें।-अंत में इसमें तरबूज के गोल या चोकर काटकर पीस डालें।-तैयार ड्रिंक को कांच के गिलास में सर्व करें और ऊपर से पुदिने की दो पत्तियां डाल दें।लीची लेमनेड (Lychee Lemonade)-इस ड्रिंक को बनाने के लिए आप एक कप लीची का पल्प निकाल लें।-इसके बाद पल्प में पुदिने की करीब छह-सात पत्तियां मिलाकर मिक्सी में पीस लें।-तैयार पल्प को एक बाउल में निकाल लें।-इसमें करीब एक कप लीची का जूस मिलाएं और ऊपर से दो नींबू का रस मिलाएं।-अंत में आवश्यकतानुसार नमक और क्रश बर्फ मिलाएं।-आपकी ड्रिंक्स सर्व कनरे के लिए तैयार हैं।लीची कोकोनट मॉकटेल (Lychee Coconut MockTail)-इसे बनाने के लिए आप करीब 5 से 8 लीची का पल्प ले लें।-इस पल्प को पीस लें।-अब इसे एक बड़े बाउल में निकालें। इसके बाद इसमें करीब 200 मिली ग्राम नारियल पानी मिलाएं।-इसके बाद इसमें लीची का 100 ग्राम जूस मिलाएं।-ऊपर से करीब दो नींबू का रस और सूखा जीरे का पाउडर मिलाएं।-अब इसमें क्रश्ड बर्फ को मिलाकर कुछ देर चलाएं।-गर्मियों में आपकी लीची कोकोनट कूलिंग मॉकटेल तैयार हैं।इन ड्रिंक्स को आप गर्मियों में किसी भी समय पी सकते हैं। यदि, आपको पहले से ही किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या या एलर्जी है, तो ऐसे में डॉक्टर की सलाह के बाद ही इस तरह के ड्रिंक्स पिएं। गर्मियों के सामान्य लक्षण जैसे थकान और कमजोरी इससे दूर हो सकती है।

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