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- - जानिए पालक की कढ़ी बनाने की स्वादिष्ट और हेल्दी रेसिपीबूंदी और बेसन के पकोड़े की कढ़ी तो आपने बहुत खाई होगी, लेकिन आज हम आपको पालक की कढ़ी के फायदे बताने जा रहे हैं। यह स्वादिष्ट होने के साथ ही स्वास्थ्यवर्धक भी है। ठंड के मौसम में आपको पालक बहुत ही आसानी से मिल जाती है। ऐसे में कई लोग सर्दियों में पालक का सूप काफी ज्यादा पीते हैं, लेकिन आज हम आप को पालक की कढ़ी के फायदे बताने जा रहे हैं।कई गुणों से भरी है पालक की कढ़ीपालक कई गुणों से भरपूर होती है। पालक में विटामिन-ए, विटामिन बी 2, विटामिन सी, विटामिन ई, विटामिन के, सेलेनियम, कैल्शियम, प्रोटीन फास्फोरस, मैग्नीशियम, जस्ता, मैंगनीज, फाइबर और फोलेट जैसे तत्व भरपूर होते हैं। पालक के सेवन से हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम बेहतर होता है। इसके साथ ही पालक कढ़ी में बेसन होता है। बेसन के सेवन से आपका वजन कंट्रोल में रहता है। साथ ही इसमें मैग्नीशियम, फोलेट, जिंक और मैग्नीज जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके साथ ही आयरन, फास्फोरस, कैल्शियम और पोटेशियम भी बेसन में होता है। कढ़ी में दही को मिक्स किया जाता है। दही भी हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। इसमें प्रोटीन, राइबोफ्लेविन, कैल्शियम, विटामिन बी 6 और विटामिन बी 12 जैसे पोषक तत्वों होते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहतर होते हैं।वजन नियंत्रित करेपालक से तैयार कढ़ी में कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है। यह एक ऐसा आहार है, जिससे वजन घटाने में सहायता मिलती है या फिर वजन नियंत्रित रहता है।कैंसर से बचाव में फायदेमंदकैंसर से बचाव में पालक की कढ़ी फायदेमंद हो सकती है। पालक में बीटा कैरोटीन और विटामिन-सी समृद्ध रूप से होता है, ये दोनों पोषक तत्व शरीर में विकसित हो रही कैंसर की कोशिकाओं से शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है।बढ़ती है आंखों की रोशनीपालक का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही अच्छा होता है। पालक में विटामिन ए भरपूर रूप से होता है, जो आंखों की रोशनी के लिए फायदेमंद है।आयरन की कमी होगी दूरपालक की कढ़ी का सेवन करने से शरीर में आयरन की कमी दूर होती है।कैसे तैयार करें पालक की कढ़ीसामग्री- 2 कप कटी हुई पालक, हरी मिर्च- 3 से 4, 2 कप छाछ या दही, आधा कप बेसन, जीरा - आधा चम्मच, मेथी दाना - 1 चुटकी, हल्दी पाउडर - आधा चम्मच, लाल मिर्च स्वादानुसार हींग - 1 चुटकी, नमक स्वादानुसार, तेलविधि -सबसे पहले पालक को अच्छी तरह धो लें। अगर आप कढ़ी में दही डाल रहे हैं, तो इसे अच्छी तरह फेंटें। फेटी हुई दही या छाछ में बेसन मिलाएं। अब एक कड़ाही में तेल को गर्म करें। इसमें जीरा और मेथी डालें और फिर इसमें हरी मिर्च, हींग, हल्दी पाउडर डालकर कुछ सेकंड के लिए पकाएं। अब कड़ाही में पालक डालकर अच्छी तरह मिलाएं। अब पानी डालकर इसे कुछ समय के लिए पकाएं। अब घोले हुए छाछ और दही में नमक और लाल मिर्च पाउडर डालें। सब्जी पकने के बाद इसमें फेटी हुई दही मिलाकर अच्छे से उबलने दें। कढ़ी अच्छी तरह पकने पर आंच से उतार लें और सर्व करें।--
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हमारे देश में पीपल के पेड़ का बहुत ही महत्व होता है। कई लोग इस पेड़ की पूजा करते हैं। वहीं, वनस्पति विज्ञान और आयुर्वेदिक क्षेत्रों में भी इसका महत्व है। पीपल के पेड़ को सबसे अधिक ऑक्सीजन देने वाला पेड़ माना जाता है। इसकी पत्तियों में कई ऐसे गुण छिपे हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद है। पीपल की पत्तियां और फल का सेवन कई लोग करते हैं।
आंखों के दर्द से मिलेगी राहतअगर आपके आंखों में जलन और दर्द की परेशानी है, तो आप पीपल की पत्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। पीपल की पत्तियों से आंखों को आराम मिलेगा। आंखों की समस्या से राहत पाने के लिए आप पीपल की पत्तियों को दूध में मिलाएं और इसे उबालें। इस दूध को पीने से आंखों की समस्या से आपको काफी राहत मिलेगा। इसके अलावा आप पीपल की पत्तियों को पीसकर आंखों में लगाएं। इससे आपकी आंखों को ठंडक मिलेगी।अस्थमा की समस्याओं को करे कंट्रोलअस्थमा रोगियों के लिए भी पीपल की पत्तियां काफी फायदेमंद हो सकती हैं। इसके लिए कुछ पत्तियां लें। इसे अच्छी तरह सुखा लें। अब इन सूखी पत्तियों को पीसकर पाउडर तैयार कर लें। इस पाउडर को दूध में उबाल कर पिएं। इसमें आप शहद या चीनी मिक्स कर सकते हैं। अस्थमा की परेशानी बढऩे पर दिन में दो बार इसका सेवन करें।पेट दर्द में दर्द से मिलेगी राहतअगर आपके पेट में काफी ज्यादा दर्द हो रहा है, तो पीपल की पत्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। दरअसल, पीपल में एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक के गुण पाए जाते हैं, जो दर्द निवारण गुण हैं। इसके साथ ही शरीर में होने वाले विभिन्न तरह के दर्द और सूजन से भी आपको राहत मिल सकती है। पेट में किसी तरह की परेशानी होने पर पीपल की पत्तियों को पानी में उबाल लें। इस पानी को दिन में दो बार पिएं। इससे पेट की परेशानी से राहत मिलेगी।दांतों के दर्द से मिलेगी राहतदांतों में दर्द की परेशानी होने पर आप पीपल की पत्तियों का इस्तेमाल करें। अगर आपके दांत में काफी दर्द हो रहा है, तो पीपल के तने से ब्रश करें। वहीं, अगर आपके दांतों में कीड़ें हैं या फिर मुंह से बदबू आती है, तो पीपल की कच्ची जड़ का इस्तेमाल करें। इन जड़ों को अपने दांतों में रगडें। इससे दांतों में कीड़े की परेशानी दूर होगी।फटी एडिय़ांसर्दियों में एडिय़ां फटने की शिकायत काफी लोगों को होती है। अगर आपकी भी एडिय़ां सर्दियों में फट रही हैं, तो पीपल की पत्तियां आपके काम आ सकती हैं। इसकी पत्तियों को पीस लें और फूट क्रीम की तरह अपने पैरों की एडिय़ों में लगाएं । इसमें एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जो फटी एडिय़ों की परेशानी को दूर करने में गुणकारी साबित होते हैं।बुखार को करे ठीकतेज बुखार को ठीक करने में पीपल की पत्तियां फायदेमंद हो सकती हैं। अगर किसी को तेज बुखार है, तो कुछ पीपल की पत्तियां लें। इन पत्तियों को 1 गिलास दूध में डालें और इसे अच्छी तरह उबालें। दूध का स्वाद ठीक करने के लिए आप इसमें थोड़ी सी चीनी मिलाएं। अगर तेज बुखार है, तो इसे दिन में दो बार पीएं। इससे बुखार से राहत मिलेगा।(नोट: कृपया किसी योग्य चिकित्सक की सलाह पर ही उन उपायों का प्रयोग करें। हम यहां केवल जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। ) - रेड पाम ऑयल (ताड़ का तेल) अभी बहुत ज्यादा लोकप्रिय नहीं हुआ है इसलिए लोग इसके बारे में बहुत कम जानते हैं। हालांकि सुपर मार्केट्स और ऑनलाइन स्टोर्स पर रेड पाम ऑयल आसानी से मिल सकता है। ये एक खास कुकिंग ऑयल है, जो पाम (ताड़) के पेड़ से निकलने वाले फल से बनाया जाता है। इस पेड़ को सबसे ज्यादा इंडोनेशिया और मलेशिया में उगाया जाता है। रेड पाम ऑयल भले ही कम पॉपुलर हो, लेकिन इसके ढेर सारे स्वास्थ्य लाभ हैं, जिसके कारण दुनिया के कुछ हिस्सों में लोग खाना बनाने के लिए इस तेल का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि इस तेल के इस्तेमाल को पर्यावरण के लिए थोड़ा नुकसानदायक माना जाता है।कैसे बनता है रेड पाम ऑयल?पाम ऑयल पाम के फलों से बनाता है। पाम का पेड़ बहुत लंबा लेकिन कम पत्तों वाला होता है। लगभग 20 मीटर लंबे इस पेड़ में 20-30 पत्तियां ही होती हैं। इसके अलावा इस पेड़ में खास फल होते हैं, जिनसे पाम ऑयल निकाला जाता है। इस तेल की खास बात ये है कि इसका स्मोक प्वाइंट ज्यादा होता है, जिसके कारण खाना बनाने के लिए खासकर फ्राइंग और रोस्टिंग के लिए इस ऑयल का इस्तेमाल अच्छा होता है। वैसे तो पाम ऑयल का इस्तेमाल काफी समय से दुनिया के कई हिस्सों में होता रहा है, लेकिन इसके फायदों के बारे में थोड़े समय पहले ही वैज्ञानिक शोधों से पता चला है।बिना प्रॉसेसिंग के रेड पाम ऑयल गहरे लाल रंग का होता है। इसका कारण है इसमें मौजूद खास बीटा-कैरोटीन, जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। बीटा कैरोटीन गाजर और कद्दू जैसी सब्जियों में भी पाया जाता है। शुद्ध पाम ऑयल के स्वाद और सुगंध में थोड़ा कड़वापन होता है, इसलिए मार्केट में मिलने वाले ज्यादातर पाम ऑयल रिफाइंड, ब्लीच किए हुए और सेंट डालकर बेचे जाते हैं।क्यों फायदेमंद माना जाता है रेड पाम ऑयल?रेड पाम ऑयल में 50 प्रतिशत सैचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं, 40त्न अनसैचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं और 10 प्रतिशत पॉलीसैचुरेटेड फैटी एसिड्स होते हैं। यही कारण है कि इस तेल में कैलोरीज थोड़ी ज्यादा होती हैं लेकिन ये सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। 1 चम्मच रेड पाम ऑयल (लगभग 14 ग्राम) में 126 कैलोरीज होती हैं। इसके बाद भी इस तेल को फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इसमें अल्फा कैरोटीन, बीटा कैरोटीन और लाइकोपीन होता है। इसके अलावा इस तेल में स्टेरॉल्स और विटामिन ई की मात्रा भी अच्छी होती है। विटामिन ई के कारण इसे कुकिंग के साथ-साथ स्किन केयर के लिए भी अच्छा माना जाता है।रेड पाम ऑयल सेहत के लिए किस तरह है फायदेमंद?-इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल घटता है।-हार्ट की बीमारियों का खतरा कम होता है।-मस्तिष्क के लिए फायदेमंद है और ब्रेन फंक्शन को बढ़ाता है।-बीटा-कैरोटीन होने के कारण शरीर में विटामिन ्र के अवशोषण को बढ़ाता है।-ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस कम करता है, जिससे व्यक्ति को कई गंभीर बीमारियों से बचाव मिलता है।-त्वचा और बालों के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि इसमें विटामिन ई होता है।रेड पाम ऑयल के नुकसानरेड पाम ऑयल के फायदे तो हैं ही, साथ ही इससे जुड़े कुछ नुकसान भी हैं, जिन्हें प्रयोग से पहले आपको जरूर जानना चाहिए।कुछ अध्ययन बताते हैं कि रेड पाम ऑयल कोलेस्ट्रॉल घटाता है। लेकिन इन अध्ययनों पर कोकोनट ऑयल की तरह विवाद चल रहा है। कुछ हेल्थ एक्सपट्र्स का मानना है कि रेड पाम ऑयल के अधिक सेवन से नुकसान भी हो सकते हैं। इसलिए बेहतर यही होगा कि अगर आप इसका सेवन कर रहे हैं, तो साथ में कुछ अन्य हेल्दी फैट्स का कॉम्बिनेशन बनाएं। दूसरा नुकसान यह है कि मार्केट में बिकने वाले ज्यादातर रेड पाम ऑयल्स की बहुत ज्यादा प्रॉसेसिंग होती है। इस प्रॉसेसिंग के दौरान इसमें कुछ केमिकल्स का प्रयोग करके इसी ब्लीच किया जाता है। इसलिए रिफाइंड रेड पाम ऑयल का इस्तेमाल करना बहुत सेहतमंद नहीं है, जबकि कोल्ड प्रेस्ड रेड पाम ऑयल का प्रयोग ज्यादा फायदेमंद और सुरक्षित है।तीसरी सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि रेड पाम ऑयल अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। दरअसल इस तेल को बनाने के लिए जंगल को काटना पड़ता है। अगर पाम ऑयल का इस्तेमाल लोगों में बढ़ गया तो उसका नुकसान जंगलों और पर्यावरण को उठाना पड़ेगा। इसलिए बहुत सारे पर्यावरणविद् इस तेल के कुकिंग के उद्देश्य से इस्तेमाल को ठीक नहीं ठहराते हैं।
- छोटी सी दिखने वाली मिर्च खाने में तीखी होती है। लेकिन ये स्वाद को बढ़ा देती है। हरी मिर्च जितनी तीखी होती है उतनी ही सेहत के लिए फायदेमंद भी, क्योंकि इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, आयरन, पोटेशियम, प्रोटीन, कॉपर, कार्बोहाइड्रेट जैसे गुण जो पाए जाते हैं। इसके साथ ही हरी मिर्च शरीर को कई बीमारियों से बचाती है। इसलिए इसे खाने में जरूर डालना चाहिए ये आपको सेहतमंद रखने में मदद करेगी।शरीर के बैक्टीरिया से दूर रखे हरी मिर्चअक्सर जिन लोगों का इम्यून सिस्टन कमजोर होता है वह लोग बहुत ही जल्दी बीमार भी हो जाते हैं। इसके बाद वह डॉक्टर के चक्कर काटते रहते हैं। लेकिन अगर आप पहले से अपनी सेहत और खाने पीने का ख्याल रखेंगे तो आपको न तो डॉक्टर के पास जाने की जरूरत होगी और न ही आप बार-बार बीमार होंगे इसलिए आप इस छोटी सी दिखने वाली हरी मिर्च को अपने खाने में शामिल करें, ये हरी मिर्च आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में आपकी मदद करेगी।तनाव दूर करेआज के समय में लोग अक्सर तनाव में रहते है, जिसका असर उनकी सेहत पर देखने को मिलता है। तनाव कई बीमारियों की चपेट में ले सकता है। इसलिए जितना हो सके कोशिश करें कि तनाव से दूरी बनाकर ही रखें। हरी मिर्च को अपनी डाइट में शामिल करने से ये दिमाग में एंडोर्फिन रिलाज करती है, जो किसी भी व्यक्ति के मूड को प्रभावित करता है। इसके साथ ही हरी मिर्च शरीर में नई उर्जा पैदा करती है।कैंसर से बचाती है रही मिर्चहरी मिर्च में अच्छी मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट गुण पाय जाते हैं जो शरीर को कैंसर जैसे बीमारी से बचाने का काम करते हैं। इसके साथ ही कैलोरी नही होती। जिसकी वजह से शरीर में इसे खाने से मेटाबॉलिज्म में भी तेजी आती है।-हरी मिर्च में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में होता है।-हरी मिर्च एंटी-ऑक्सीडेंट का एक अच्छा माध्यम है ।- विटामिन ए से भरपूर हरी मिर्च आंखों और त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद है।-हाल में हुई कुछ स्टडीज के अनुसार, हरी मिर्च ब्लड शुगर को कम करने में कारगर होती है।- हरी मिर्च को मूड बूस्टर के रूप में भी जाना जाता है।लाल मिर्च से रखें दूरीअगर आप भी अपने खाने में लाल मिर्च का इस्तेमाल करते हैं तो आज इस अपनी इस आदत को बदल डालें और हरी मिर्च का इस्तेमाल करना शूरू कर दें क्योंकि लाल मिर्च बीमारियों की ओर लेकर जाती है और हरी मिर्च बीमारियों से बचाने का काम करती है।
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आमतौर पर मूली के पत्तों को कई लोग फेंक देते हैं लेकिन आपको बता दें कि मूली के पत्तों में मूली से भी ज्यादा पोषण होता है। ऐसे में आपको मूली के पत्ते खाने के फायदे जान लेने चाहिए, जिससे कि आप मूली की तरह ही इसके पत्तों का सेवन कर सकें। मूली के पत्ते विटामिन ए, विटामिन बी, सी के साथ ही क्लोरीन, फास्फोरस, सोडियम, आयरन, मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और पेट के लिए फायदेमंद होने के साथ ही मूत्र विकारों में भी बेहद लाभकारी होते हैं।
क्या हैं फायदे
-मूली के पत्ते विटामिन ए, विटामिन बी, सी के साथ ही क्लोरीन, फास्फोरस, सोडियम, आयरन, मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं जो आपके पेट के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।
-मूली के पत्तों का प्रयोग आप सब्जी या पराठे बनाने में कर सकते हैं। इसका सेवन करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा होता है और थकान महसूस नहीं होती।
-पाइल्स यानि बवासीर के रोगियों के लिए मूली एवं इसके पत्तों की सब्जी खाना बेहद फायदेमंद होता है। रोजाना इसके प्रयोग से आपकी समस्या समाप्त हो सकती है।
-इसमें सोडियम होता है और यह शरीर में नमक की कमी को पूरा करता है, इसलिए लो ब्लडप्रेशर के मरीजों के लिए भी यह बेहद फायदेमंद है। इसके अलावा इसमें मौजूद एंथेकाइनिन दिल के लिए फायदेमंद होता है।
-इसमें फाइबर भरपूर होता है इसलिए यह कब्ज से राहत देता है। वहीं इसके रस को पानी और मिश्री के साथ पीने पर पीलिया रोग में लाभ मिलता है। इतना ही नहीं यह बालों का झडऩा भी कम करता है। -
महिलाएं तो अपनी त्वचा की देखभाल के लिए बहुत सारे जतन करती हैं। जिससे कि उनकी त्वचा सुंदर और वो खूबसूरत नजर आएं। लेकिन क्या आप अंदाजा लगा सकती हैं कि महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को अपनी चेहरे की त्वचा की देखभाल की जरूरत होती है। क्योंकि पुरुष ज्यादातर फील्ड वर्क करते हैं। जिसकी वजह से उनके चेहरे पर धूल-मिट्टी और गंदगी जमा होने लगती है। वहीं चेहरे पर प्रदूषण के प्रभाव की वजह से धीरे-धीरे उनका चेहरा डल पडऩे लगता है। अगर चाहते हैं कि आपका चेहरा भी चांद की तरह चमके तो त्वचा की देखभाल से जुड़ी इन बातों को भी भी नजरअंदाज ना करें। लड़का हो या लड़की हर किसी के लिए सुबह उठकर चेहरा धोना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि रातभर में आपकी स्किन पर ऑयल आ जाता है, जिसके लिए अच्छा होगा कि आप अपनी स्किन के अनुसार फेस क्लींजर से चेहरा साफ करें। दफ्तर से घर आकर फेसवॉश से एक बार अपना चेहरा जरूर धोएं। दिनभर धूप और गंदगी की वजह से आपकी त्वचा के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं। इसके लिए घर आकर अच्छे से जरूर फेसवॉश करें। जब आप घर से बाहर हो और आपके शरीर पर जबरदस्त पसीना टपक रहा हो ऐसे में फेस वाइप्स आपके काम आएंगी। हमेशा अपने बैग में स्किन वाइप्स जरूर रखें। इसे खरीदते वक्त अपनी स्किन टाइप को ध्यान में रखते हुए इसका चयन करें। ये आपको तुरंत फ्रेश फील कराने के साथ आपके चेहरे से गंदगी दूर करने का काम करती है। त्वचा पर नमी खोने लगती है तो ऐसे में स्किन पर हमेशा मॉइश्चराइज का इस्तेमाल करें। इससे आपकी स्किन पर नमी बनी रहेगी और समय से पहले चेहरे पर दिखने वाली एजिंग भी कम होगी। आखिर में घर से निकलते समय सूर्य की हानिकारक किरणों से बचने के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें। समस्क्रीन सूरज की किरणों से स्किन डैमेज होने के खतरे को कम करता है। सनस्क्रीन का इस्तेमाल करने से आप टैनिंग, डार्क स्पॉट्स और एजिंग के इफेक्ट्स से बचे रहेंगे। - नसों में दर्द और खिंचाव बहुत ही आम समस्या है जिसके कारण लोगों को चलने-फिरने और उठने-बैठने में काफी तकलीफ का सामना करना पड़ता है। जरूरी नहीं कि नसों में दर्द सिर्फ बुजुर्ग या ज्यादा उम्र वालों को ही हो, बल्कि नसों का दर्द कम उम्र वाले लोगों को भी परेशान कर सकते हैं। हालांकि, हर किसी के लिए नसों में दर्द के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। आइये जाने किन कारणों से नसों में दर्द या खिंचाव होता है और इससे राहत का क्या तरीका है।नसों में खिंचाव और हल्का दर्द एक्सरसाइज के कारण होता है, जिसकी वजह से काफी समय तक दर्द और खिंचाव महसूस हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब किसी एक्सरसाइज को करने के लिए शुरुआत की जाती है। इस दौरान नसें काफी हद तक खिंचती हैं जिसके कारण वो पूरी तरह खुलती है। यही वजह है कि जब बहुत दिनों तक शारीरिक गतिविधियां या एक्सरसाइज नहीं की जाती और अचानक से एक्सरसाइज को करने की चाहत होती है, इससे नसों पर खिंचाव पड़ता है जिससे दर्द का अनुभव हो सकता है। ये दर्द या खिंचाव ज्यादा समय तक परेशान नहीं करता और ना ही इस दौरान घबराने की जरूरत है। ये अपने आप ही कुछ ही दिनों में खत्म हो जाता है।खून का खराब संचारखून का संचार अगर शरीर में सही तरीके से नहीं होता तो इससे कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अगर बहुत दिनों तक ये समस्या रहती है तो इससे हृदय और मानसिक स्वास्थ्य के साथ अन्य स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है। ऐसे ही जब शरीर में रक्त प्रवाह सही से नहीं होता तो नसों में खून की आपूर्ति नहीं हो पाती जिसके कारण ये दर्द और सूजन का शिकार हो जाती है। इस कारण जकडऩ वाला दर्द का अनुभव हो सकता है। ये स्थिति डाइट, एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल के तरीकों पर निर्भर करती है।विटामिन बी-12 की कमीशरीर में वैसे तो सभी तरह के पोषक तत्व जरूरी होते हैं जिसकी मदद से लंबे समय तक खुद को स्वस्थ रखा जा सकता है, लेकिन जब शरीर में किसी विटामिन्स की कमी या पोषण की कमी होने लगती है तो इससे शरीर में कई समस्याएं पैदा हो सकती है। ऐसे ही नसों में दर्द का कारण है विटामिन बी-12 की कमी, जिसके कारण नसों में दर्द होने लगता है। विटामिन बी-12 शरीर की नसों को स्वस्थ रखने और नसों के कार्य को बढ़ावा देने का काम करता है।चोट के कारणचोट के कारण होने वाला दर्द बच्चों से लेकर बड़ों तक किसी को भी हो सकता है, कई बार जब चोट लगती है तो वो मांसपेशियों के साथ नसों पर प्रभाव डालती है। जिसके कारण मांसपेशियों के साथ-साथ नसों में भी सूजन पैदा होने लगती है जिससे दर्द महसूस होता है। ऐसे में जरूरी है कि जब भी किसी को चोट लगे तो डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।कुछ स्थितियों के कारणस्ट्रोक, डायबिटीज, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर स्थितियों के कारण भी शरीर के किसी हिस्से में नसों का दर्द हो सकाता है। इस दौरान लोगों को इन नसों के दर्द का अनुभव होता है और इसके लिए संबंधित डॉक्टर इस दर्द को कम करने के लिए दवाओं का इस्तेमाल भी करते हैं।कैसे करें बचाव-पूर्ण स्वास्थ्य को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि अपनी डाइट को हेल्दी बनाए रखें जिसकी मदद से खुद को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। डाइट में शामिल पौष्टिक आहार शरीर को कई बीमारियों और स्थितियों से बचाने का काम करता है। इसलिए अपनी डाइट में सभी पोषण से युक्त भोजन को शामिल करें और नियमित रूप से इसका पालन करें।-व्यायाम या एक्सरसाइज शरीर को स्वस्थ रखने का एक बेहतरीन तरीका है, जिसके कारण शरीर में रक्त का संचार सही तरीके से होता है साथ ही कई बीमारियों से बचा जा सकता है। सभी को खुद को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें।-आजकल ज्यादातर बीमारियां तनाव के कारण बढ़ रही है, ऐसे ही नसों में दर्द का एक कारण तनाव भी है जो सिर की नसों को दर्द दे सकता है। इसके लिए जरूरी है कि खुद को ज्यादा से ज्यादा तनावमुक्त रखें, इसके लिए रोजाना व्यायाम, योगा और मेडिटेशन को अपना सकते हैं।-लंबे समय तक नसों में दर्द का अनुभव होने पर आप डॉक्टर से संपर्क जरूर करें, इससे आप जांच के जरिए सही वजह को जान सकते हैं।------
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खाने-पीने का जैसा मजा सर्दियों में है, वैसा दूसरे मौसम में कहां! एक तरफ जहां फल-सब्जियों की भरमार होती है, वहीं दूसरी ओर लड्डू, पिन्नी, गुड़-मूंगफली, गजक, रेवड़ी जैसे मिठाई के तौर पर खाए जाने वाले खाद्य-पदार्थों की ढेरों वैराइटी मिलती हैं। सर्दी में अपने शरीर को गर्म रखने के चक्कर में हम कई बार बैलेंस डाइट को नजरअंदाज कर देते हैं और मोटापे और इससे जुड़ी समस्याओं की गिरफ्त में आ जाते हैं,ऐसेे ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए डाइट का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ठंड के मौसम में फलों का सेवन सबसे ज्यादा लाभदायक है।
सेब
सेब पेक्टिन फाइबर, विटामिन, मिनरल्स, फाइटोन्यूट्रिएंट्स और एंटी ऑक्सीडेंट जैसे तत्वों से भरा है, जो हमारे शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल या संतृप्त वसा के स्तर को नियंत्रित करते हैं, हानिकारक मुक्त कणों (फ्री रेडिकल्स) के प्रभाव से बचाते हैं, संक्रमण फैलाने वाले एजेंटों को दूर रखते हैं और चयापचय क्षमता को बढ़ाते हैं। सेब शरीर में हीमोग्लोबिन और आयरन के स्तर को बढमता है और रक्त की कमी को दूर करता है।
अनार
अपने अनोखे खट्टे-मीठे स्वाद और गुणों के कारण अनार 'एक अनार सौ बीमार' की उक्ति को चरितार्थ करता है। फाइटोकैमिकल्स, पॉली-फिनॉल, एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर, आयरन, विटामिन से भरपूर अनार उच्च कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, दिल के दौरे या फ्री रेडिकल्स से बचाव कर हृदय के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। खून की कमी के रोगियों के लिए अनार का सेवन उपयोगी है।
अमरूद
सर्दियों में अमरूद को फलों का राजा कहा जाता है। इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व शरीर को फिट, स्वस्थ रखने के साथ-साथ इम्यूनिटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह हाइपोग्लीसेमिक ब्लडप्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में फायदेमंद है। इसमें मौजूद पेक्टिन फाइबर पाचन बढ़ाने और भूख में सुधार करने में मदद करता है।
सिट्रस फल
सर्दियों में मिलने वाले संतरा, कीनू जैसे खट्टे जूसी साइट्रस फल अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें। विटामिन सी, पेक्टिन फाइबर, लाइमोनीन, फाइटोकैमिकल्स से भरपूर ये फल जूस से भरपूर हैं। इनके नियमित सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में बढोतरी होती है, जिससे वायरल संक्रमण से होने वाले जुकाम-खांसी, फ्लू, वायरल जैसे रोगों से बचाव होता है।
अंगूर
अंगूर विटामिन, मिनरल्स, काबरेहाइड्रेट, ग्लूकोज जैसे पौष्टिक तत्वों और पोली-फिनॉल, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल, फाइटोन्यूट्रिएंट्स गुणों से लबरेज है। इसमें मौजूद शर्करा रक्त में आसानी से अवशोषित हो जाती है और थकान दूर कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। कोलेस्ट्रॉल कम करने में सक्षम अंगूर के सेवन से हृदय रोग का खतरा कम रहता है। यह रक्त विकारों को दूर कर क्लींजर का काम करते हैं। - सहजन यानी मुनगा छत्तीसगढ़ में खूब खाया जाता है। इसकी पत्तियों की विशेष तौर से बनाई गई भाजी कमरछठ त्योहार के दिन खाई जाती है। इसकी पत्तियों के विशेष गुण के कारण ही इसका पाउडर अब बाजार में काफी बिक रहा है। आज हम जानेंगे इसकी पत्तियों के फायदे... यकीनन ये जानने के बाद आप इसका इस्तेमाल जरूर करेंगे।मुनगा ही नहीं, बल्कि इसकी पत्तियों में भी प्रोटीन का मात्रा भरपूर रूप से होती है। अस्थमा, गठिया, यौग संबंधी समस्याओं में मुनगे की पत्तियों का सेवन बहुत ही फायदेमंद साबित हो सकता है। मुनगे की पत्तियों में केल के पत्तों से भी 7 गुना अधिक पोटेशियम होता है। इतना ही नहीं इसकी पत्तियों में दूध से भी दोगुना प्रोटीन मौजूद होता है। मुनगा की पत्तियों को कई लोग मोरिंगा के नाम से जानते हैं। इसमें विटामिन ए, सी, बी 1 (थियामिन), बी 2 (राइबोफ्लेविन), बी 6, बी 3 (नियासिन) और फोलेट से भरपूर मात्रा से होता है। इतना ही नहीं मुनगे की पत्तियां कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, मैंगनीज, फास्फोरस जैसे खनिज तत्वों से भरपूर होता है। बालों को सुरक्षित रखने वाली विटामिन ई भी इसमें भरपूर रूप से होता है।प्रोटीन से है भरपूरमुनगे की पत्तियों में अमीनो एसिड के साथ अन्य प्रोटीन की मात्रा भी उच्च रूप से होती है। ऐसे में अगर शरीर में प्रोटीन की कमी है, तो मुनगे की पत्तियों का सेवन किया जा सकता है। यह एक हाई-एमिनो एसिड डाइट है, जो शरीर का इम्यून सिस्टम बूस्ट करने में मदद करता है। मुनगे की पत्तियों के सेवन से खोई ताकत दोबारा लौट सकती है। अगर शरीर किसी बीमारी के चलते कमजोर हो चुका है, तो नियमित रूप से इसकी पत्तियों का सेवन करने से लाभ मिलता है।वजन को करे कमअगर आप अपने वजन को कम करना चाहते हैं, तो मुनगे की पत्तियों का सेवन करें। इसकी पत्तियों में वजन को कंट्रोल करने के गुण पाए जाते हैं। इसमें फाइबर की मात्रा काफी ज्यादा होती है, जिसके कारण पेट काफी भरा-भरा रहता है। मुनगे की पत्तियों के सेवन से भूख कंट्रोल रहती है। ऐसे में वजन कम होना स्वभाविक है। इसके साथ ही मुनगे की पत्तियों में क्लोरोजेनिक एसिड नामक एंटीऑक्सिडेंट होता है, जो शरीर के फैट को नैचुरल रूप से कम करने में मदद करता है। इसके साथ ही इसकी पत्तियों में शर्करा के स्तर को कम करने का गुण होता है, जो शरीर के चयापचय से जुड़ा होता है। शरीर में ग्लूकोज के लेवल को कंट्रोल करने में मेटाबॉलिज्म मदद करता है।ब्लड शुगर को करे कंट्रोलशरीर में शर्करा की मात्रा हाई होने से डायबिटीज का खतरा काफी ज्यादा होता है। डायबिटीज के कारण दिल से संबंधित समस्या बढऩे का खतरा भी काफी ज्यादा होता है। ऐसे में शरीर में शर्करा की मात्रा को कंट्रोल करना बहुत ही जरूरी है। मुनगे की पत्तियों में आइसोथियोसाइनेट्स मौजूद होता है, जो ब्लड में शुगर की मात्रा को कंट्रोल करने में मदद करता है।स्किन और बालों के लिए है बेहतरमुनगे की पत्तियों में विटामिन ए होता है, जो स्किन को सॉफ्ट करने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही इसमें सभी जरूरी अमीनो एसिड होते हैं, जो बालों को लंबा और घना करने में आपकी मदद करते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट की भी प्रचुरता होती है, जो एंटी-एजिंग गुणों से भरपूर होती है। इसमें करीब 30 एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं।कोलेस्ट्रॉल लेवल को करे कंट्रोलअलसी और ओट्स की तरह ही मुनगा की पत्तियां कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने में मदद करती हैं। इन पत्तियों को खाने से हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल में सुधार किया जाता है।लिवर को रखे सुरक्षितमुनगे की पत्तियों के सेवन से यकृत कोशिकाओं की मरम्मत काफी तेजी से होती है। इन पत्तियों में पॉलीफेनोल की हाई सांद्रता होती है, जो यकृत को ऑक्सीडेटिव क्षति होने से बचाव करने में मदद करते हैं। सहजन की पत्तियों के सेवन से यकृत में प्रोटीन का स्तर बढ़ता है, जिससे लिवर सुरक्षित रहता है।हड्डियों को रखे स्वस्थ्यसहजन की पत्तियों में ना सिर्फ प्रोटीन की अधिकता होती है, बल्कि इसमें कैल्शियम और फास्फोरस भी समृद्ध रूप से होता है, जो आपकी हड्डियों को सुरक्षित रखता है। सहजन की पत्तियों में प्राकृतिक रूप से सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं, जो गठिया जैसे रोगों से निपटने में मदद करते हैं।
- खजूर एक ऐसा फल है जो सेहत के लिए बहुत ही अच्छा है। इसमें ढेरों पोषक तत्व पाए जाते हैं और माना जाता है कि ये कई बीमारियों को दूर कर सकता है। ये न सिर्फ डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है, बल्कि खजूर में मौजूद फाइबर दिल को भी मजबूत और सेहतमंद बनाने का काम करते हैं। वहीं इसमें मौजूद पोटेशियम हार्ट अटैक के खतरे को कम करता है। खजूर का फाइबर, पाचन तंत्र की सफाई करने के लिए भी काम आता है। पर क्या आपको पता है कि खजूर को खाने का सही समय क्या है और किस समय खजूर खाने से बचना चाहिए?खजूर खाने का सबसे अच्छा समयखजूर मीठे का पर्याय है। कई लोगों के लिए ये बहुत सेहतकारी है। जैसे कि डायबिटीज के मरीजों के लिए बनाई जाने वाली मिठाई में खजूर का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं खजूर मीठे के क्रेविंग को भी कम करता है। हालांकि जब आपको भूख लगे तब आप खजूर खा सकते हैं, पर कुछ तय समय पर खजूर खाने से आपको इसके कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।1.नाश्ते के समयसुबह-सुबह अपने आहार में प्राकृतिक मिठास और फाइबर को जोडऩे के लिए खजूर एक उत्कृष्ट उपाय हो सकता है। इसकी उच्च फाइबर सामग्री आपको सुबह से शाम तक भरा हुआ महसूस करवा सकती है। वास्तव में, ये शरीर भोजन के मैक्रोन्यूट्रिएंट अनुपात को भी बैलेंस करता है। इसकी कार्ब, प्रोटीन, और वसा संरचना आपके पेट के लिए फायदेमंद है।2.दोपहर के स्नैक्स के रूप मेंखजूर फाइबर का एक अच्छा स्रोत है और प्राकृतिक शर्करा में उच्च है। फाइबर और चीनी की यह जोड़ी ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है। जब आप भूखे होते हैं इन्हें खाने से आपके शरीर में कैलोरी का बैलेंस हो जाता है। वहीं दिन लोगों को बीच-बीच में कुछ खाने का मन होता है खजूर उनके लिए भी फायदेमंद है।3.वर्कआउट से पहलेहालांकि खजूर में शुगर स्वाभाविक रूप से अधिक होते हैं पर ये हेल्दी होते हैं। ये एक प्रकार की धीमी गति से रिलीज़ होने वाली कार्ब प्रदान करते हैं, जो आपके वर्कआउच को तेज करने में मदद करता है। कोशिश करें कि वर्कआउट से 30-60 मिनट पहले 2-4 खजूर खाएं।4.नाइट स्नैक्स के रूप मेंखजूर उच्च फाइबर सामग्री के कारण एक उत्कृष्ट नाइट स्नैक्स है। फाइबर को पचने में अधिक समय लगता है, जो आपको भरा महसूस करने में मदद कर सकता है और आधी रात को भूख को दबा सकता है। तो रात में अगर मीठे की क्रेविंग हो, तो खजूर खाएं।कब आपको खजूर नहीं खाना चाहिए?-यदि आंत्र सिंड्रोम की शिकायत है तो खजूर खाने से बचना चाहिए।-कमजोर लिवर वाले लोगों को भी ज्यादा खजूर नहीं खाना चाहिए क्योंकि ये फ्रुक्टोज के एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो पेट को खराब कर सकता है।-भोजन के बाद खजूर न खाएं। इसमें फाइबर अधिक होता है, जिसे पचने में अधिक समय लगता है। परिणामस्वरूप, ज्यादा खाने के बाद बड़ी संख्या में खजूर खाने से आप बेहद भरा और असहज महसूस कर सकते हैं।-खजूर यूं, तो शरीर के लिए हर मायने में फायदेमंह है पर अगर किसी को एलर्जी है, तो उन्हें खजूर खाने से बचना चाहिए।
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करेला में विटामिन और विटामिन सी से भरपूर मात्रा में होता है, जिसके कारण करेला हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। करेला हमारे दिल के लिए भी बहुत फायदेमंद है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार जानते हैं करेले के कुछ चमत्कारी फायदे...
पथरी गलाने में कारगर
करेला पथरी की बीमारी में भी बहुत लाभकारी है. करेले का रस शहद के साथ लेने से पथरी गलकर शरीर से बाहर निकल जाती है.
पाचन शक्ति को करे मजबूत
करेला हमारी पाचन शक्ति को बढ़ाता है. करेले के सेवन से पेट में भोजन का पाचन ठीक से होता है. करेला खाने से पेट में गैस नहीं बनती है.
सिर दर्द को रखे दूर
करेला सिर दर्द को ठीक करता है. अगर आपके सिर में दर्द है तो करेले का लेप लगाएं, इससे सिर दर्द ठीक हो जाएगा.
मोटापे को करता है कम
करेला मोटामा घटाने में मदद करता है. नींबू के साथ करेले के सेवन से मोटापा कम हो जाता है.
पैरालिसिस में है फायदेमंद
करेला पैरालिसिस के रोग में बहुत लाभकारी है. कच्चे करेले के सेवन से पैरालिसिस में फायदा मिलता है.
बढ़ाता है रोग प्रतिरोधक क्षमता
करेला में विटामिन ए और विटामिन सी से भरपूर मात्रा में होता है, जिसके कारण करेला हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है.
डायबिटीज कंट्रोल करने में करता है मदद
करेला डायबिटीज में फायदेमंद है. करेले का पाउडर रोजाना खाने से डायबिटीज कंट्रोल की जा सकती है.
अस्थमा को करता है ठीक
करेला अस्थमा की बीमारी में बहुत फायदेमंद है। अस्थमा की बीमारी में बिना मसाले की करेले की सब्जी खानी चाहिए, इससे अस्थमा ठीक हो जाएगा।
खाने से बढ़ती है भूख
करेला में पर्याप्त मात्रा में फास्फोरस होता है. इस वजह से कफ, कब्ज और पाचन संबंधी समस्याएं दूर रहती हैं.
गठिया से दिलाता है निजात
करेला गठिया की बीमारी और हाथ पैरों में जलन को दूर करता है. गठिया होने पर करेले के रस की मालिश से राहत मिलती है। -
बात जब इम्युनिटी बढ़ाने वाली चीजों की आती है तो सबसे पहले गिलोय का ही नाम लिया जाता है। गिलोय इम्युनिटी बढ़ाने के साथ-साथ और भी कई तरह से लाभकारी है। जानते हैं इसके फायदे.....
गिलोय का जूस
अगर आपको गिलोय का तना मिल गया है तो आप इसके छोटे-छोटे पीस काट लें। इन्हें अच्छी तरह से धोकर दो ग्लास पानी में उबाल लें। पानी को उबाल कर आधा कर लें। फिर इसे ठंडा करके पिएं. आप रोज एक ग्लास गिलोय जूस पी सकते हैं।
मधुमेह में लाभकारी
गिलोय एक हाइपोग्लाइकेमिक एजेंट के रूप में कार्य करता है और मधुमेह के इलाज में मदद करता है। गिलोय का रस ब्लड शुगर के उच्च स्तर को कम करने का बेहतर काम करता है। लौंग, अदरक, तुलसी मिलाकर बने गिलोय का काढ़ा पिने से बहुत लाभ मिलता है।
तनाव और चिंता में मदद
गिलोय मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है। यह शरीर से खराब चीजों को बाहर निकालने में मदद करता है। यह मेमोरी को बढ़ाने का काम भी कर सकती है।
पाचन समस्याओं को करे दूर
पाचन समस्याओं को इसके नियमित सेवन से पाचन सुचारु रूप से चलने में मदद मिलती है। कब्ज जैसी पेट की बीमारी में भी गिलोय के सेवन से राहत मिलती है। कब्ज होने पर एक-चौथाई कप गिलोय के रस में गुड़ मिलाकर पिएं।
बुखार में भी फायदेमंद
कई बार लोगों को बुखार हो जाता है. जो शरीर को तोड़ कर रख देता है। ऐसे में आप गिलोय का सेवन जरूर करें। ये डेंगू,फ्लू, और मलेरिया जैसे बुखारों से लडऩे में भी कारगर है।
मोटापे को कम करे
अगर आप बढ़ते हुए वजन से परेशान हैं, तो ऐसे में गिलोय का सेवन जरूर करें। इसके एक चम्मच रस में एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह और शाम पीएं. ऐसा करने से आपका वजन कम होगा।
गठिये के लिए बेहद फायदेमंद
गिलोय गठिया के इलाज में मदद करता है। यदि आप गठिया से पीडि़त हैं तो आप रोजाना गिलोय का सेवन से इस बीमारी से निजात पा सकते है. इसमें सूजन को कम करने के साथ जोड़ों में दर्द को कम करने के कई गुण पाए जाते है। गठिए में गिलोय रामबाण साबित हो सकता है।
आंखों के लिए फायदेमंद
जिन लोगों की आंखे लगातार कमजोर होती जा रही हैं। उन्हें गिलोय के रस में आंवले का रस मिलाकर पीना चाहिए। इससे आपकी आंखों की कमजोर होती हुई रोशनी मजबूत बनेगी।
गिलोय कब और किस समय लें
गिलोय लेने का सही समय सुबह खाली पेट होता है। यदि हम गिलोय का काढ़ा या चाय पीते हैं तो इसे भी सुबह खाली पेट ले सकते हैं। इसे रोजाना लेने से जलन की समस्या दूर होती है, साथ ही प्लेटलेट्स का काउंट बढ़ता है.जो हमारी हर तरह के वायरस से रक्षा करती है। - ताजा शोध बताते हैं कि नियमित रूप से अखरोट और बादाम खाने से दिल का दौरा पडऩे का खतरा कम होता है और वजन काबू में रखने में भी मदद मिलती है।मेवे सेहत के लिए अच्छे होते हैं, लेकिन इन्हें जरूरत से ज्यादा भी नहीं खाना चाहिए। तो क्या है काजू, बादाम या अखरोट को खाने का सही तरीका? और इन्हें खाने से शरीर में किस तरह के बदलाव होते हैं? येना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मिषाइल ग्लाई बताते हैं, "इससे ब्लड शुगर और लिपिड मेटाबोलिज्म के पैरामीटर पर असर होता है जिससे टाइप टू डायबिटिज के अलावा दिल की बीमारियों और हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम कम होता है। " प्रोफेसर ग्लाई के अनुसार बादाम हमारा जीवन लंबा करता है, लेकिन यह होता कैसे है, इस पर दुनिया भर के वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं।म्यूनिख मेडिकल कॉलेज में अखरोट पर एक स्टडी की गई है। स्टडी में भाग लेने वाले एक व्यक्ति हैं डीटर गैर्शवित्स। आठ हफ्तों तक उन्होंने हर दिन एक मु_ी यानि 43 ग्राम अखरोट खाया। उसके बाद तुलनात्मक अध्ययन के लिए आठ हफ्ते तक कोई अखरोट नहीं। हर दिन बराबर कैलरी का सेवन। अखरोट खाने से पहले और उसके बाद दोनों ही उन्होंने अपनी मेडिकल जांच करवाई। जांच के नतीजे ने उन्हें हैरान कर दिया। वह कहते हैं, "मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि नियमित रूप से अखरोट खाने पर ऐसा नतीजा हो सकता है। " अखरोट का सबसे महत्वपूर्ण असर खून में मौजूद वसा पर था। खराब कोलेस्ट्रॉल समझे जाने वाले एलडीएल में अखरोट की वजह से 7 प्रतिशत की कमी आई।म्यूनिख मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर पारहोफर लका कहना है, "शायद यही संभव कारण है कि नियमित रूप से अखरोट खाने वाले मरीजों को दिल का दौरा कम पड़ता है, क्योंकि हमें पता है कि एलडीएल कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारियों के मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।" क्लाउस गैर्शवित्स उसके बाद से अखरोट और बादाम के फैन हो गए हैं। सिर्फ कोलेस्ट्रॉल की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए भी कि इससे उनका वजन भी कम हुआ है ।यह बहुत ही आश्चर्यजनक बात है क्योंकि आम तौर पर बादाम और अखरोट को कैलरी बम कहा जाता है । अखरोट में 65 फीसदी फैट और 15 प्रतिशत प्रोटीन होता है प्रोफेसर ग्लाई कहते हैं, "इस बात के लगातार सबूत मिल रहे हैं कि नियमित रूप से अखरोट खाने पर हमारे शरीर के वजन पर सकारात्मक असर पड़ता है और यह वजन कम करने में मदद करता है, लेकिन इसकी एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि बादाम सामान्य खाने के अलावा नहीं, बल्कि खाने के किसी हिस्से को छोड़कर लिया जाए। वजन पर हुआ सकारात्मक असर इस वजह से भी हो सकता है कि बादाम खाते समय हम उसे थोड़ा तोड़ते भर हैं, उसे चबाकर अत्ंयत महीन नहीं करते शायद अखरोट के टुकड़े पेट में पूरी तरह पचते नहीं ।
- आयुर्वेद में नीम को कई बीमारियों का रामबाण इलाज माना गया है। इसकी पत्तियों से लेकर इसके छाल और निबौरियों तक को कई प्रकार से इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार रोज सुबह खाली पेट नीम का सेवन करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ती ही है पर इससे कई बीमारियों से भी निजात मिलती है। साथ ही ये एंटीबैक्टिरिल गुणों वाला भी है, जिसे चेहरे और बालों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। आज हम आपको नीम के कारण होने वाले कुछ नुकसानों के बारे में बताएंगे, जिसे किसी को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।नीम के पत्ते खाने का नुकसान-1. ब्लड शुगर का अधिक लो हो जानानीम की पत्तियों का सेवन करने से शरीर के अंदर हाइपोग्लाइसेमिक या ब्लड शुगर का स्तर कम होता है। शुगर के कारण शरीर में होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करता है। नीम की पत्तियों का रोज और ज्यादा सेवन करने से ब्लड शुगर ज्यादा लो हो सकता है। ये खास तौर पर डायबिटीज के रोगियों के लिए नुकसानदेह है क्योंकि डॉक्टर मधुमेह के रोगियों के लिए नीम के पत्तियों को चबाने की सलाह देते हैं क्योंकि यह ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है। लेकिन, जब अधिक मात्रा में लिया जाता है, तो व्यक्ति को हाइपोग्लाइसीमिया की परेशानी हो सकती है, जिसके कारण चक्कर आना और कमजोरी आदि हो सकती है।2. एलर्जीकिसी भी चीज को जब शरीर संभाल नहीं पाता है, तो उसे एलर्जी के रूप में पहचानता है। ऐसा ही कुछ नीम के साथ होता है। नीम को लेकर किए किए एक अध्ययन के अनुसार लगातार तीन हफ्तों तक नीम का सेवन करने से शरीर में एलर्जी की प्रतिक्रिया हुई। इसमें बताया गया कि एलर्जी नीम के प्रति शरीर की सेंसिटिवनेस है, जो कि दाने और चक्कते के रूप में नजर आते हैं। कई बार इसके कारण लोगों के शरीर पर बिना वजह खुजली होती है, जिसमें कि व्यक्ति को कुछ दिनों के लिए नीम लेना बंद कर देना चाहिए।3.किडनी पर प्रभावनीम शरीर को प्यूरीफाई करता है और डिटॉक्स कर देता है। पर अगर ये ज्यादा हो जाए और शरीर में कुछ वेस्ट प्रोडक्ट न बनें, तो किडनी फ्लेयोर का डर बढ़ जाता है। हालांकि नीम के सेवन और गुर्दे की क्षति के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है, इसलिए किसी भी व्यक्ति को इसे लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।4.पेट की परेशानियां हो सकती हैंनीम पेट से जुड़ी परेशानियों का भी कारण बन सकता है। ज्यादा नीम की पत्तियों का सेवन करने से मतली या पेट में जलन आदि की शिकायत हो सकती है। ऐसा इसलिए कि नियमित रूप से नीम का रस पीने से पेट साफ करने में मदद मिलेगी और चयापचय में सुधार होता है। जब इसे ज्यादा मात्रा में लिया जाता है, तो यह फैट को ज्यादा बर्न करेगा और इससे खाली पेट जलन और मतली आदि हो सकती है।5. इम्यून सिस्टम को ओवर एक्टीवेट कर सकता हैनीम या नीम आधारित उत्पादों का सेवन प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा दे सकता है। हालांकि, आपको डॉक्टर से पूछ कर ही इसका सेवन करना चाहिए, क्योंकि नीम का अधिक सेवन इम्यून सिस्टम को एक्टिवेट कर सकता है और अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों को ट्रिगर कर सकता है।कितनी मात्रा में लें नीम?-नीम के पत्तों का अर्क या जेल दांतों और मसूड़ों पर 6 सप्ताह तक लगातार इस्तेमाल किया जा सकता है।- ब्रश करने के बाद 30 सेकंड के लिए माउथवॉश के रूप में 15 एमएल नीम का ही उपयोग करें।-रोजाना 3 मिलीग्राम या इससे ज्यादा नीम के पत्तियों के अर्क का सेवन न करें।----
- टमाटर विश्व मे सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाली सब्जी है । इसका पुराना वानसप्तिक नाम लाइकोपोर्सिकान एस्कुलेंटम मिल, है। वर्तमान में इसे सोलेनम लाइको पोर्सिकान कहते हैं।टमाटर में प्रोटीन, विटामिन, वसा आदि तत्व विद्यमान होते हैं। यह सेवफल व संतरा दोनों के गुणों से युक्त होता है। शोध बताते हैं कि वजन घटाने में मदद करने के साथ ही टमाटर कई तरह के कैंसर को भी रोकने की क्षमता रखता है। रिसर्च से साबित हुआ है कि अगर आप एक हफ्ते में 10 बार टमाटर खाते हैं, तो कैंसर होने का खतरा 45 प्रतिशत कम हो जाता है। इतना ही नहीं, टमाटर को सलाद में लेने से पेट के कैंसर होने का रिस्क 60 पर्सेन्ट तक घट जाता है। दरअसल, रिसर्च बताती है कि टमाटर में लाइकोपीन खासी अमाउंट में पाया जाता है और यह कई तरह के कैंसर रोकने में फायदेमंद है।डाइट एक्सपर्ट्स हरे टमाटर की तुलना में लाल टमाटर को ज्यादा फायदे देने वाला बताते हैं, क्योंकि फ्राई करने पर वह लाइकोपीन को अच्छे से आब्जर्व कर लेता है। रिसर्च से यह भी पता लगा है कि टमाटर को तेल में फ्राई करने के बावजूद उसके न्यूट्रिएंट्स खत्म नहीं होते। लाइकोपीन के अलावा, टमाटर में पोटाशियम, नियासिन, विटामिन बी6 और फॉलेट होते हैं, जो दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी हैं। इतना ही नहीं, टमाटर में दो एंटी एंजिंग कंपाउंड्स, आईकोपीन और बीटा कैरोटिन भी होते हैं।लाल टमाटर में बीटा कैरोटिन और आईकोपीन की मात्रा बहुत अधिक होती है। वैसे, अगर आप अपना वजन कम करने के बारे में सोच रहे हैं, तो भी टमाटर आपके लिए फायदेमंद रहेंगे। इसमें फाइबर ज्यादा व कैलोरीज कम होती हैं, जो वेट घटाने में मदद करती हैं। इसमें मौजूद बीटा कैरोटिन भी बॉडी के लिए बेहद फायदेमंद है। दरअसल, यह बॉडी में विटामिन ए में बदल जाता है और यह तो सभी जानते हैं कि विटामिन ए त्वचा, बालों, हड्डियों और दांतों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है।
- सौंफ का इस्तेमाल माउथ फ्रैशनर से लेकर रसोई में मसाले के रूप में किया जाता है। सौंफ के अंदर मौजूद औषधीय गुण इसे सबसे अलग करते हैं। यह एक अच्छा पाचक है। आइये जाने... सौंफ खाने से शरीर को क्या-क्या फायदे मिलते हैं....दिल के रोगियों के लिए सौंफ है फायदेमंदसौंफ का सेवन करने से दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। चूंकि इसके अंदर पोटेशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है इसीलिए यह शरीर में फोलेट की मात्रा को कम करने के साथ-साथ उच्च रक्तचाप को भी नियंत्रित करता है। इसके अलावा इसके अंदर विटामिन सी मौजूद है, जिससे फ्री रेडिकल गतिविधियां को रोका जा सकता है व हृदय को स्वस्थ बनाया जा सकता है।श्वसन समस्या को करे दूरसौंफ के सेवन से सांस संबंधित परेशानी को दूर किया जा सकता है। चूंकि सौंफ के अंदर कफ को दूर करने वाले गुण पाए जाते हैं ऐसे में फ्लू, साइनस, खांसी, सर्दी आदि संक्रमण को दूर करने के लिए ये बेहद मददगार है। इसके लिए आप दिन में दो या तीन बार सौंफ की चाय या पानी में सौंफ के बीजों को उबालकर उस पानी से कुल्ला कर इस्तेमाल कर सकते हैं।कैंसर से लडऩे में मददगारसौंफ कैंसर के जोखिम को कम करने में मददगार है। चूंकि इसके अंदर एनेथोल नामक एंटी इन्फ्लेमेटरी फाइटोन्यूट्रिएंट्स मौजूद होता है, जिससे कैंसर को रोकने में मदद मिलती है। इसके अलावा ये ब्रेस्ट कैंसर की कोशिकाओं में विकास को रोकने में बेहद मददगार है।वजन को करें कमसौंफ की मदद से वजन को कम किया जा सकता है। इसके सेवन से भूख कम लगती है और पेट भरा हुआ महसूस करता है। ऐसे में आप जरूरत से ज्यादा खाने से भी बचे जाते हैं। इसके अलावा सौंफ को प्राकृतिक वसा नाशक के रूप में भी जाना जाता है। यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने और वसा को पचाने में मदद करते हैं। अगर आप सौंफ के माध्यम से वजन कम करना चाहते हैं तो सौंफ को भूनकर और उसक पीसकर पाउडर बना लें। उस पाउडर को दिन में दो बार गर्म पानी के साथ लें फायदा मिलेगा।पाचन शक्ति हो तंदुरुस्तजिन लोगों को पेट फूलना, कब्ज, गैस, एसिडिटी आदि समस्याएं होती हैं उनसे लडऩे में सॉफ्टवेयर मददगार है। इस जड़ी बूटी के माध्यम से पाचन शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा जो लोग कीमोथेरेपी उपचार का सहारा लेते हैं उस उपचार के बाद पाचन तंत्र को फिर से तंदुरुस्त बनाने में सौंफ बेहद मददगार है। ऐसे में आप सौंफ को भोजन के बाद अच्छे से चबाएंगे तो लाभ मिलेगा। साथ ही पेट में दर्द, सूजन की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा। अगर आप अपच से परेशान हैं तो सौंफ की चाय एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है। साथ ही आप सौंफ के पाउडर का सेवन पानी के साथ कर सकते हैं।हड्डियों को बनाए मजबूतहड्डियों को मजबूती कैल्शियम से मिलती है। और सौंफ के अंदर भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है। बता दें कि इसके अंदर 115 एमजी कैल्शियम पाया जाता है। जो हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद है। लेकिन हां सौंफ के अंदर मैग्नीशियम, फास्फोरस और विटामिन भी शामिल होते हैं। ऐसे में हड्डियों को और मजबूती मिलती है।त्वचा को निखरी हुईजो लोग त्वचा की समस्याओं से परेशान हैं उन्हें बता दें कि सौंफ के बीज उन लोगों की बेहद मदद कर सकते हैं। चूंकि सौंफ के बीजों में एंटीमाइक्रोबॉयल गुड मौजूद होते हैं जो त्वचा को निखारने के साथ-साथ उसमें नई जान भी डालते हैं। ऐसे में आप सौंफ के पानी को उबालकर उसे ठंडा कर लें और इस पानी में सौंफ के तेल की कुछ बूंदे मिला लें। अब इस मिश्रण को छानकर चेहरे पर लगाएं त्वचा में निखार आएगा।कैसी होती है सौंफ की तासीरसौंफ की तासीर ठंडी होती है ऐसे में इसका अधिक सेवन गर्मियों में किया जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि सर्दियों में इसका सेवन नहीं कर सकते। सर्दियों में इसका सेवन निश्चित मात्रा के साथ किया जा सकता है। अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से नुकसान भी हो सकते हैं।
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हमारी रसोई में तेज पत्ता का इस्तेमाल मसालों के रूप में किया जाता है। वहीं, आयुर्वेद में भी इसका इस्तेमाल औषधीय रूप में किया जाता है। गैस से लेकर कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव करने में आयुर्वेदिक दवाइयों में इसकी पत्तियों और तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही सिर में मौजूद डेंड्रफ को दूर करने के लिए भी तेजपत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद में तेज पत्तियों के तेल का इस्तेमाल औषधि को तैयार करने के लिए किया जाता है। जोड़ों और मांसपेशियों में होने वाले दर्द को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक तेल बनाने के लिए तेजपत्तों का भी इस्तेमाल होता है।
तेज पत्तों में कई ऐसे गुण छिपे हैं, जो आपके सेहत के लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं। तेज पत्तों में भरपूर रूप से फाइबर, प्रोटीन, मोनोससैचुरेटेड वसा , विटामिन ए, विटामिन सी, ओमेगा-3 फैटी एसिड, रिबोफ्लाविन, थायमिन, नियासिन, विटामिन बी 6 और फोलेट जैसे तत्व भरपूर रूप से होते हैं, जो शरीर के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। इसमें मैग्निीशियम, आयरन, फास्फोरस, कैल्शियम, लौह, पोटेशियम और कई एंटी-ऑक्सीडेंट जैसे तत्व छिपे हैं, जो बीमारियों से लडऩे में आपकी मदद करते हैं।पाचन को ठीक करे तेजपत्तातेज पत्ते के इस्तेमाल से पाचन स्वास्थ्य को दुरुस्त किया जाता है। इसमें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्रणाली को दुरुस्त करने का प्रभावी गुण है। स्वस्थ पाचन और गैस्ट्रोइंस्टाइनल सिस्टम हमारे शरीर में मूत्र वर्धकका कार्य करती है। इसके इस्तेमाल से शरीर में विषाक्ता पदार्थ को कम करने में मदद मिलती है। तेज पत्तों में कार्बनिक यौगिक पाया जाता है, जो पेट में होने वाली परेशानी, आंत्र सिंड्रोम , चिड़चिड़ या सेलियाक रोग के लक्षणों को कम करने में मदद करता है।डायबिटीज का इलाजआयुर्वेद के अनुसार तेज पत्तों का उपयोग कर डायबिटीज का उपचार किया जा सकता है क्योंकि यह रक्त ग्लूकोज, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। और अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए इन पत्तों का पाउडर भी बनाया जा सकता है और 30 दिनों तक सेवन कर शरीर में शुगर के स्तर को कम किया जा सकता है। इसका सेवन करने से दिल की कार्य प्रणाली को नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि तेज पत्ते में एंटीऑक्सिडेंट होते है जो शरीर के इंसुलिन को स्वस्थ्य बनाते हैं। इस प्रकार मधुमेह और इंसुलिन प्रतिरोध वाले लोगों के लिए तेज पत्ता एक अच्छा विकल्प होता है।एंटी कैंसर का गुणतेज पत्ते के इस्तेमाल से कैंसर के प्रभावों को दूर किया जाता है। इसमें एंटी-कैंसररोधी गुण छिपे होते हैं। तेज पत्तों में कार्सेटिन, कैफीक एसिड, यूगानोल और कैचिन जैसे केमो- सुरक्षात्मक गुण पाए जाते हैं, जो कई तरह के कैंसर से बचाव करने में शरीर की मदद करते हैं। इसमें पार्टनोलॉइड नामक तत्व होता है, जो सर्वाइकल कैंसर की कोशिकाओं को बढऩे से रोकने में आपकी मदद करते हैं।अल्सर के उपचार मेंअल्सर रोगियों के लिए तेज पत्ता बहुत अच्छी दवा होती हैं। इसके लिए 15-20 तेज पत्तों को धों लें, और 15 मिनट के लिए आधा लीटर पानी में उबालें। इसमें स्वादानुसार शक्कर को मिलाया जा सकता है। ठंडा होने के बाद इस मिश्रण को हर्बल चाय के रूप में सेवन करने से यह दर्द और अल्सर के उपचार में काफी मदद करता है।दांतों के लिए है फायदेमंददांतों से जुड़ी कई परेशानियों को दूर करने में तेज पत्ता मदद कर सकता है। इसमें दांतों को साफ करने और मजबूत करने के गुण छिपे होते हैं। संतरे के छिलके के साथ इसका पाउडर बना लें और इसे दंतमंजन की तरह इस्तेमाल करें।वजन कम करे तेजपत्तातेज पत्ता और दालचीनी का पानी मोटापे को कंट्रोल करने में सहायक होता है। इसके सेवन से शरीर में मौजूद अतिरिक्त वसा दूर होता है। इसे साधारण चाय बनाने के समय भी इस्तेमाल किया जा सकता है। - बचपन से हम सूजी का हलवा बड़े ही चाव से खाते आ रहे हैं। आज भी घर में बने सूजी के लड्डू चाव से खाए जाते हैं। सूजी से तरह-तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि सूजी किस तरह तैयार की जाती है? आज हम आपको इस बारे में बताएंगे और साथ ही सूजी के फायदों की जानकारी भी देंगे।सूजी ही नहीं सूजी का आटा भी हमारे सेहत के लिए फायदेमंद होता है। सूजी का आटा एक हेल्दी विकल्प के रूप में हम शामिल कर सकते हैं। आमतौर पर सूजी के आटे का इस्तेमाल ब्रेड और पास्ता बनाने के लिए किया जाता है क्योंकि यह साधारण आटे की तुलना में काफी बेहतर होता है।कैसे तैयार होती है सूजी?सूजी बनाने के लिए दुरुम गेहूं का उपयोग किया जाता है। गेंहू से सूजी तैयार करने के लिए इसे अच्छी तरह साफ किया जाता है। इसके बाद मशीनों की मदद से गेंहू के ऊपरी छिलके को निकाला जाता है। इसके बाद गेंहू के सफेद भाग को मशीनों की मदद से दानेदार रूप में पीसा जाता है। गेंहू से तैयार इन दानों हम सूजी के रूप में इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, गेंहू की तुलना में सूजी कम पौष्टिक होते हैं क्योंकि गेंहू के छिलके में पोषक तत्व मौजूद होता है, जिसे हम सूजी तैयार करने के लिए निकाल देते हैं।क्या मैदे की तुलना में सूजी है फायदेमंद?वहीं मैदा तैयार करने के लिए गेहूं के ऊपरी भाग के साथ-साथ इनर जर्म को हटा दिया जाता है और रिफाइनिंग प्रोसेस से गुजरता है। इस वजह से मैदे में सभी जरूरी न्यूट्रीएंट्स कम हो जाते हैं। सूजी को तैयार करने के लिए सिर्फ उसके बाहरी ऊपरी हिस्से को हटाया जाता है, जिसमें सभी जरूरी न्यूट्रीएंस मौजूद होते हैं। ऐसे में मैदे की तुलना में सूजी हमारे सेहत के लिए अधिक फायदेमंद होता है।सूजी में मौजूद पोषक तत्वसूजी वसा, प्रोटीन, विटामिन ए, थायमिन या विटामिन बी 1, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, राइबोफ्लेविन बी 2 , विटामिन बी 6, नियासिन बी 3 , फोलेट बी 9, विटामिन सी और विटामिन बी 12 भरपूर रूप से होता है। वहीं, अगर हम खनिज पदार्थों की बात करें, तो इसमें फास्फोरस, पोटेशियम, जस्ता, आयरन और कैल्शियम की मात्रा भरपूर रूप से होती है। ऐसे में यह सेहत की दृष्टि से भी हमारे लिए फायदेमंद है।मधुमेह करे कंट्रोलडायबिटीज रोगियों के लिए सूजी फायदेमंद हो सकता है। इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स की मात्रा बहुत ही कम हो जाती है। जिसके कारण सफेद आटे की तुलना में सूजी पेट के लिए अच्छा माना जाता है। यह पेट और आंतों में धीमी गति से पचता है और उन्हें पूर्ण रूप से अवशोषित होता है। इस वजह से शरीर में मौजूद शर्करा का स्तर भी कंट्रोल रहता है। सूजी के सेवन से डायबिटीज रोगियों में ब्लड शुगर का स्तर तेजी से कम होता है।वजन कम करने में कारगरसूजी के सेवन से वजन तेजी से कंट्रोल होता है क्योंकि यह अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में धीमी गति से पचता है और यह शरीर में अच्छी तरह से अवशोषित होता है। इसके सेवन से लंबे समय तक भूख नहीं लगती है। ऐसे में ओवर ईटिंग की परेशानी से भी बचा जा सकता है।एनीमिया की समस्या को करे दूरजिन लोगों के शरीर में खून की कमी होती है या फिर जिन्हें एनीमिया की शिकायत होती हैं, उनके लिए सूजी बहुत ही फायदेमंद होता है। दरअसल, सूजी में आयरन की मात्रा भरपूर रूप से होती है। ऐसे में शरीर में खून की कमी होने पर आप सूजी का सेवन कर सकते हैं। यह शरीर में रक्त उत्पादन की क्षमता रखता हैकब्ज की परेशानी करे दूरकब्ज की परेशानी को दूर करने में सूजी हमारी मददद करता है। सूजी में फाइबर होता है, जो पाचनतंत्र को दुरुस्त करने में हमारी मदद करते हैं। सूजी भोजन को पचाने मे कारगर साबित होता है। इसके सेवन से कब्ज और पेट की समस्याओं से राहत पाई जा सकती है।एनर्जी बढ़ाएसूजी के सेवन से शरीर में एनर्जी बनी रहती है। इसके सेवन से शरीर को अतिरिक्त उर्जा मिलती है। सूजी में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है। सूजी के सेवन से आपके शरीर का ऊर्जा स्तर उच्च होता है।कोलेस्ट्रॉल को कम करेसूजी के सेवन से शरीर में वसा और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है। इसमें वसा और कोलेस्ट्रॉल बहुत ही कम मात्रा में होता है।सूजी खाने के नुकसान-जिन लोगों को सूजी से एलर्जी होती है, उन्हें सूजी अधिक नहीं खाना चाहिए। क्योंकि सूजी भी गेंहू से बनाई जाती है।- नाक का बहना, झींक, पेट में ऐंठन, उल्टी और मतली की समस्या होने पर सूजी का सेवन करें।-सांस संबंधी समस्या होने पर सूजी का सेवन अधिक ना करें।-दस्त जैसी परेशानी होने पर सूजी का सेवन अधिक ना करें।-विशेष तरह की दवाइयों का सेवन करने पर सूजी ना खाएं।--
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जानिए हरा प्याज के सेवन के चमत्कारिक फायदे
हमारे स्वास्थ्य के लिए हरे पत्तेदार प्याज बहुत लाभदायक हो सकते है, इसे कच्चा या पका कर किसी भी रूप में खाया जा सकता है. हरे प्याज में उच्च गुणकारी पौष्टिक तत्व होते है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी-2, विटामिन के, कॉपर, मैग्नीशियम, क्रोमियम, फास्फोरस, और फाइबर उच्च मात्रा में होता है। हरे प्याज खाने के क्या-क्या फायदे हैं....
1. हरा प्याज हमारी इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है। आमतौर पर ठंड में सर्दी-जुकाम और एलर्जी की समस्या बढऩे लगती है, लेकिन यदि हरा प्याज डाइट में शामिल किया जाए तो इससे इम्युन सिस्टम मजबूत होता है।
2. जिन व्यक्तियों को दमे की समस्या हो उनके लिए हरे प्याज का सेवन लाभकारी होता है, क्योंकि हरे प्याज में एंटीहिस्टामिन जैसे पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं, जो दमा की समस्या को दूर करते हैं। फेफड़ों के लिए भी लाभदायक होते है।
3. हरा प्याज जीवाणुरोधी और एंटीवायरल गुणों से भरपूर होता है, जो वायरल फीवर और फ्लू से लडऩे में भी कारगर होता है, साथ ही ये शरीर में बलगम(कफ) बनने की प्रक्रिया को भी रोकता है।
4. हरे प्याज में क्रोमियम की अधिकता होने के कारण यह हमारे खून में शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है साथ ही यह ग्लूकोज सहनशीलता को भी सुधारता है।
5. अधिकतर चिकित्सक कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए हरे प्याज की सब्जी खाने की सलाह देते है, क्योंकि इसे खाने से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में रहता है साथ ही वजन भी कंट्रोल में रहता है।
6. हरे प्याज में पाया जाने वाला विटामिन सी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने का काम करता है. जिससे दिल से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है. इसके नियमित उपयोग करने से हृदय-धमनी रोगों का खतरा कम होता जाता है।
7. हरा प्याज पेट से सम्बंधित समस्याओं को दूर करता है. इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है जो पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाये रखने में मदद करता है. साथ ही यह भूख बढ़ाने में सुधार करता है.
7. उच्च मात्रा में सल्फर पाए जाने के कारण यह कैंसर के खतरे को कम करता है। इस प्याज में पेक्टिन नमक तत्व पाया जाता है, जो एक प्रकार का फ्लुइड्स कोलॉइडल कार्बोहाइड्रेट होता है जिससे पेट का कैंसर रोकने में मदद मिलती है। - बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार निर्विवाद रूप से बॉलीवुड के सबसे फिट अभिनेताओं में से एक हैं। वह अपनी डाइट और एक्सरसाइज रूटीन को सख्ती से फॉलो करते हैं। उनके बारे में आपने अक्सर सुना होगा कि वह डेली रूटीन से समझौता नहीं करते हैं। वह हमेशा एक स्वस्थ जीवन शैली की आदतों की वकालत करते हैं। हाल ही में अक्षय कुमार ने एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन में वाइल्डलाइफ एडवेंचरर बेयर ग्रिल्स के साथ अपनी सेहत से जुड़ा एक रहस्य अपने प्रशंसकों के साथ शेयर किया, जिसमें खुलासा किया कि वह हर दिन 'गोमूत्र' पीते हैं। इसके बाद एक बार फिर गोमूत्र के सेवन को लेकर तमाम तरह की बातें सामने आने लगी।आयुर्वेद में गोमूत्र का महत्वआयुर्वेद में गोमूत्र को काफी फायदेमंद माना जाता है। विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य स्थितियों से पीडि़त लोगों को गोमूत्र पीने की सलाह दी जाती है। 1000 साल पुरानी वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली के अनुसार, गोमूत्र कई खनिजों का एक प्राकृतिक स्रोत है और इसके दैनिक सेवन से शरीर को विभिन्न पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में मदद मिल सकती है। ऐसा माना जाता है कि जब गाय मैदान में आती है, तो वे कई औषधीय पत्तियों को खाती हैं, जिनके निशान उनके मूत्र में पाए जा सकते हैं।भारत में गोमूत्र का उपयोग चिकित्सीय प्रयोजनों के लिए बहुत लंबे समय से किया जाता रहा है। गर्भवती गाय के मूत्र को भी स्वस्थ माना जाता है क्योंकि इसमें विशेष हार्मोन और खनिज होने का दावा किया जाता है। आयुर्वेद मधुमेह, ट्यूमर, तपेदिक, पेट की समस्याओं और यहां तक कि कैंसर सहित विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य बीमारियों के इलाज के लिए रोज सुबह खाली पेट गोमूत्र पीने की सलाह देता है।गोमूत्र पीने के अन्य स्वास्थ्य लाभ-प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली के अनुसार, गोमूत्र सभी के लिए फायदेमंद है। यह न केवल रोग के लक्षणों को ठीक करता है, बल्कि इसके रोजाना सेवन से पुरानी बीमारी भी दूर रहती है। आयुर्वेद द्वारा बताए गए गोमूत्र पीने के कुछ अन्य स्वास्थ्य लाभ हैं।- यह कुष्ठ, पेट के दर्द, पेट फूलना, मधुमेह और यहां तक कि कैंसर के इलाज में मददगार होने का दावा किया जाता है।-बुखार के इलाज के लिए इसे काली मिर्च, दही और घी के साथ लिया जाता है।-माना जाता है कि त्रिफला, गोमूत्र और गाय के दूध का मिश्रण एनीमिया को दूर करने में मदद करता है।-यह एक उत्कृष्ट डिटॉक्स ड्रिंक माना जाता है। आयुर्वेद का मानना है कि गोमूत्र सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर मानव शरीर को अंदर से साफ कर सकता है, जिससे पुरानी बीमारी का खतरा कम होता है। इसके अलावा, साबुन और शैंपू जैसे कॉस्मेटिक उत्पादों को तैयार करने के लिए भी तरल पदार्थ का उपयोग किया जाता है।-गोमूत्र को लेकर विज्ञान क्या कहता है?जैसा कि हम जानते हैं कि आयुर्वेद गोमूत्र पीने के लाभों के लिए दावा करता है, लेकिन इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। गोमूत्र सोडियम, पोटेशियम, क्रिएटिनिन, फास्फोरस और इपिथेलियल कोशिकाओं जैसे खनिजों में काफी समृद्ध है, लेकिन विज्ञान इस बात का समर्थन नहीं करता है कि इसे पीना किसी भी तरह से स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। इस खनिज युक्त उत्पाद का उपयोग मिट्टी को समृद्ध करने के लिए किया जा सकता है, न कि स्वास्थ्य के मुद्दों के इलाज के लिए।
- कालमेघ एक बहुवर्षीय औषधीय पौधा है। इसका स्वाद कसैला होता है। यह कई बीमारियों के इलाज में फायदेमंद है।यह पौधा खास तौर पर भारत और श्रीलंका में पाया जाता है। भारत में यह बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बंगाल में सबसे ज्यादा होते हैं। कालमेघ का इस्तेमाल पेट संबंधी समस्याओं के लिए बहुत लाभकारी है। इसके उपयोग से पेट में गैस, अपच, मिचली, एसिडिटी की समस्या को दूर होती है। इस औषधीय पौधे की पत्तियों का इस्तेमाल पेचिस, ज्वर नाशक, जांडिस, सिरदर्द समेत अन्य पेट की बीमारियों के इलाज में किया जाता है।ब्रोंकाइटिस में सांस लेने वाली नली में सूजन आ जाती है जिसकी वजह से श्वासनली कमजोर होने लगती है, इस बीमारी की वजह से फेफड़े बहुत प्रभावित होते हैं। इस बीमारी के इलाज में कालमेघ का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं कालमेघ पौधे में रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता पाई जाती है। यह मलेरिया और अन्य प्रकार के बुखार के लिए भी रामबाण औषधि है।इन रोगों में भी कालमेघ पौधे का होता है इस्तेमाल- इसका उपयोग लीवर और कब्ज से संबन्धित रोगों को दूर करने में होता है।-इस पौधे की जड़ का इस्तेमाल भूख लगने वाली औषधी के रूप में भी किया जाता है।-कालमेघ का पौधा पित्तनाशक है, अत: पित्त से संबन्धित बीमारियों में इसका उपयोग किया जाता है।- इसकी ताजी पत्तियों से हैजा रोग का इलाज किया जाता है।-यह रक्तविकार सम्बन्धी रोगों के उपचार में भी लाभदायक है। कालमेघ के नियमित रूप से सेवन करने से खून साफ होता है।-कालमेघ में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक गुण पाए जाते हैं। इसलिए जोड़ों के दर्द या सूजन को कम करने में ये पौधा सहायक है।- चर्म रोग को दूर करने के लिए सरसों के तेल के साथ मिलाकार इसे त्वचा पर लगाने से आराम मिलता है। ऐसा करने से दाद, खुजली आदि रोगों में फायदा होता है।- सर्दी के कारण नाक बहने की परेशानी आम है जिसे दूर करने के लिए 1200 मिलीग्राम कालमेघ का रस नाक में डालने से नाक का बहना ठीक हो जाता है.- पीलिया रोग को दूर करने के लिए आधा लीटर पानी में 1 ग्राम कालमेघ, 2 ग्राम भुना हुआ आंवला चूर्ण, 2 ग्राम मुलेठी डाल कर उबालें और एक चौथाई पानी बचने पर इसे छान कर प्रयोग करें।-शारीरिक दुर्बलता या कमजोरी को मिटाने के लिए कालमेध का उपयोग किया जाता है, इसके लिए 10-20 मिली पत्तों का काढ़ा बना कर सेवन करना चाहिए। इसका तना भी एक शक्तिशाली टॉनिक होता है।(नोट- किसी भी उपाय का इस्तेमाल करने से पहले किसी योग्य चिकित्सक से अवश्य सलाह ले लें।)
- सर्दियों में पालक के सेवन के कई फायदे हैं। आयरन की कमी को दूर करने के साथ पालक में इम्युनिटी पावर को बूस्ट करने वाले जरूरी विटामिन्स भी होते हैं। सबसे ज्यादा फायदा पालक वाली दाल खाने से होता है। आइए, जानते हैं पालक वाली दाल खाने के फायदे और इसे बनाने का हेल्दी तरीका -पालक में मौजूद पोषक तत्वपालक में विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन के, मैग्नीशियम, मैगनीज और आयरन पर्याप्त मात्रा में होता हैं। आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए, तनाव को कम करने और ब्लड प्रेशर को सही बनाए रखने के लिए पालक खाना फायदेमंद होता है। खून की कमी होने पर सबसे पहले लोग पालक खाने की सलाह देते है, इससे शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ता है।अरहर की दाल में मौजूद पोषक तत्व100 ग्राम अरहर दाल में 22 ग्राम प्रोटीन, 343 कैलोरी, 17 मिलीग्राम सोडियम, 1392 मिलीग्राम पोटैशियम, 63 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 15 ग्राम फाइबर और विटामिन ए, बी12, डी और कैल्शियम की मात्रा पाई जाती है।चने की दाल में मौजूद पोषक तत्वचने की दाल जिंक, कैल्शिीयम, प्रोटीन, फोलेट आदि से भरपूर होने के कारण आपको आवश्यक और जरूरी ऊर्जा देती है।पालक वाली दाल खाने के फायदे-पालक में विटामिन के की अच्छी मात्रा होती है। वहीं, दाल में प्रोटीन मौजूद होता है जिससे हडिड्यां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।-पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए भी दाल पीने की सलाह दी जाती है। ये शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मददगार है। इसके अलावा कब्ज की समस्या में पालक वाली दाल फायदेमंद होती है।-वहीं त्वचा से जुड़ी कोई समस्या होने पर पालक की दाल में नींबू का रस डालकर पीने से फायदा होता है। इसे त्वचा ग्लोइंग और जवां बनी रहती है। ये बालों के लिए भी अच्छा है।-गर्भवती महिलाओं को पालक की दाल खाने की सलाह दी जाती। पालक का जूस पीने से गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी नहीं होती है।-पालक में मौजूद कैरोटीन और क्लोरोफिल कैंसर से बचाव में सहायक हैं। इसके अलावा ये आंखों की रोशनी के लिए भी अच्छा है।कैसे बनाएं पालक वाली दालपालक वाली दाल किसी भी दाल के साथ बनाई जा सकती है, लेकिन अरहर और चने की दाल मिलाकर दाल बनाने से पालक की दाल का स्वाद बढ़ जाता है। इसे बनाने के लिए कुकर में एक -दो चम्मच देसी घी डालकर इसमें हींग, जीरा और मिर्च का तड़का लगा लें। इसके बाद पालक को डालकर 1 मिनट भूनें। इसके बाद दोनों दालों को कुकर में डालकर नमक, हल्दी, मिर्च, आधा चम्मच गर्म मसाला डालकर पका लें। इसके बाद दाल में अलग से तड़का लगाकर इसे रोटी या चावल के साथ खाएं। आप चाहें, तो इसे ऐसे भी सूप की तरह घी डालकर पी सकते हैं।
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पेड़ों से निकलने वाला गोंद भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। औषधीय पेड़ बबूल से निकलने वाले गोंद का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवा और घरेलू उपचार में किया जाता है। बबूल का गोंद बहुत की प्रसिद्ध है। इसका निर्माण बबूल के सूखे हुए दूध से होता है। इसकी तासीर ठंडी होती है। इसका उपयोग करने से आमाश्य शक्तिशाली बनता है और आंते भी मजबूत होती हैं। यह गले की आवाज को साफ करता है। इसका प्रयोग फेफड़ों के लिए अतयंत लाभकारी है। इस गोंद का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाई बनाने के साथ ही लड्डू बनाने के लिए भी किया जाता है।
1. वजन घटाएबबूल गोंद स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही यह अधिक वसा को कम करने में भी सहायक है। एक अध्ययन के मुताबिक, महिलाएं जिन्होंने बबूल गोंद का छह हफ्ते तक सेवन किया था, उनके बॉडी मास इंडेक्स (शरीर में मौजूद वसा) में कमी दर्ज की गई। माना जाता है कि बबूल गोंद डाइटरी फाइबर से भरपूर होता है, जिस वजह से यह वजन घटाने में मदद करता है।2. कैंसरकैंसर जैसी प्राणघातक बीमारी से बचने में भी बबूल गोंद मदद कर सकता है। इसमें एंटीकार्सिनोजेनिक प्रभाव पाए जाते हैं। यह प्रभाव कैंसर सेल्स को खत्म करने में मदद करता है। इसका सेवन नियमित दवाओं के साथ भी किया जा सकता है।3. डायबिटीजएक अध्ययन के मुताबिक, बबूल गोंद के इस्तेमाल से सीरम ग्लूकोज के स्तर में कमी देखी गई है। इसके अलावा, यह हानिकारक कोलेस्ट्रोल एलडीएल को कम करता है और अच्छे कोलेस्ट्रोल एचडीएल को बढ़ाने में मदद करता है । ये सभी किसी न किसी तरह से डायबिटीज से जुड़े हुए हैं। डायबिटिक व्यक्ति अगर अपने ग्लूकोज लेवल और कोलस्ट्रोल को नियंत्रण में रखता है, तो उसे डायबिटीज में काफी फायदा मिलता है । वहीं, मोटापे को नियंत्रण में रखकर भी यह आपको डायबिटीज के खतरे से बचाता है। दरअसल, मोटापा डायबिटीज का जोखिम कारक (रिस्क फैक्टर) होता है ।4. डायरियाबबूल गोंद का इस्तेमाल डायरिया ठीक करने के लिए ओआरएस में मिलाकर कर सकते हैं। कई रिसर्च में इसे डायरिया रोकने में लाभदायक पाया गया है। बबूल गोंद को शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट के अवशोषण के लिए जरूरी पाया गया है। हालांकि, कई रिसर्च में इसको लेकर विरोधाभास भी है। माना जाता है कि बबूल गोंद के सेवन से हल्का डायरिया हो सकता है। इसलिए, डायरिया में इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें।5. पेट संबंधी परेशानियांबबूल गोंद का सीधा सेवन तो पेट से जुड़ी समस्याओं में राहत नहीं दिलाता, लेकिन आप दही में बबूल गोंद को मिलाकर खाते हैं, तो आपको पेट संबंधी परेशानियों से जल्द राहत मिल सकती है। जब दही में बबूल गोंद मिला दिया जाता है, तो बबूल में मौजूद फाइबर और दही में होने वाला बिफिदोबैक्टीरियम लैक्टिस, इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम से आपको बचा सकता है। इसका मतलब यह है कि बबूल गोंद के सेवन से पेट में होने वाले दर्द, पेट फूलने और कब्ज जैसी समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है ।6. टॉन्सिलसूजन की वजह से गले में टॉन्सिल हो सकते हैं। इसलिए, बबूल गोंद में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण आपको टॉन्सिल से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। इसके इस्तेमाल से गले में टॉन्सिल की वजह से होने वाली सूजन को कम किया जा सकता है।7. दांतों के लिएबबूल गोंद का उपयोग कई लोगों द्वारा दैनिक रूप से मुंह की स्वच्छता के लिए किया जाता है। इसमें मौजूद रोगाणुरोधी गुण आपके मुंह में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करने और उन्हें पनपने से रोक सकते हैं। इसके साथ ही यह आपके मुंह में मौजूद प्लाक को दूर करने और मसूड़ों की सूजन को कम करने के लिए भी इस्तेमाल में लाए जाते हैं ।8. एक्जिमाबबूल गोंद में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो स्किन को एक्जिमा से बचाने और इसके उपचार में मदद कर सकते हैं।9. घावबबूल के पेड़ को इसके एंटीसेप्टिक गुणों के लिए जाना जाता है। आप घाव लगने पर बबूल गोंद या इसके पत्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। बबूल गोंद का इस्तेमाल घाव को भरने के लिए कारगर हो सकता है। जलने-कटने पर भी आप त्वचा पर सीधे बबूल गोंद को लगा सकते हैं ।10. त्वचा स्वास्थ्यमाना जाता है कि बबूल गोंद त्वचा स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। लोग चेहरे पर कसावट लाने, झुर्रियां और त्वचा संबंधी रोग को दूर रखने के लिए इसका इस्तेमाल चेहरे पर भी करते हैं। हालांकि, इससे संबंधित कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है। -
अजवाइन के बीज हमारी रसोई में मिलने वाली कुछ आम चीजों में से एक है। अजवाइन एक ऐसा बीज है, जो कि औषधीय गुणों से भरपूर है। अजवाइन फाइबर, विटामिन, एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों की खान है। इसी वजह से पेट दर्द से लेकर अर्थराइटिस के दर्द तक में इस बीज का इस्तेमाल किया जाता है।
अजवाइन के फायदेअपचअपच की परेशानी में अजवाइन बहुत फायदे की चीज है। दरअसल अजवाइन पेट में उन डाइजेशटिव एंजाइम को रेगुलेट करता है, जो कि खाना पकाने की गतिविधि में तेजी लाते हैं। अजवाइन से पुरानी अपच को रोकने और इसके इलाज में भी मदद मिल सकती है। इसके इस्तेमाल के लिए थोड़ा जीरा, थोड़ा सौंफ, धनिया और थोड़े से अजवाइन को भून कर पीस लेना चाहिए और हमेशा खाने के बाद इस पाउडर को खा लेना चाहिए।एसिडिटीएसिडिटी की परेशानी में अजवाइन का इस्तेमाल शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद है। गैस की परेशानी हो तो अजवाइन को गर्म पानी के साथ या फिर अजवाइन का पानी लेने से आराम मिलता है। इसके लिए 250 ग्राम अजवाइन को 4 कप पानी में डाल कर उबाल लें। अब इसे गाढ़ा होने तक पका लें। पानी जब कम हो जाएगा, तो उसे एक बर्तन में रख लें और गैस महसूस होने पर इसका सेवन करें। इससे सीने में जलन, खट्टी डकारें आना, पेट दर्द, पेट में गुडग़ुड़ाहट आदि रोगों से आराम मिलेगा। इसके अलावा अजवाइन को बारीक पीसकर, उसमें थोड़ी मात्रा में हींग मिला लें। इसका लेप बना लें। इसे पेट पर लगाने से पेट के फूलने और पेट की गैस आदि परेशानियों में तुरंत आराम मिल सकता है।पेट में कीड़ेपेट में कई सारे पैरासाइट्स और बैक्टीरिया होते हैं। ये हमारा पोषण चुराने लगते हैं और पेट से जुड़ी कई परेशानियों को कारण बनते हैं। कई बार ये भूख मार देते हैं, अपच और मतली आदि की परेशानी भी पैदा करते हैं। इसके लिए अजवाइन के 3 ग्राम महीन चूर्ण को दिन में दो बार छाछ के साथ सेवन करें। इसके अलावा गुड़ के साथ अजवाइन सुबह खाली पेट लें या खाने के बाद लें। इससे आंत के हानिकारक कीड़े खत्म हो जाएंगे। बच्चों को ये परेशानी हो तो अजवाइन के 2 ग्राम चूर्ण को काला नमक के साथ सुबह-सुबह बच्चों को खिलाने से आराम मिलता है।प्रेग्नेंसी मेंप्रेग्नेंसी में अक्सर महिलाओं को सुबह उठते ही मॉर्निंग सिकनेस यानी कि मतली आदि महसूस होने लगती है। ऐसे में अजवाइन की गर्म चाय पीने से आराम मिलता है। अजवाइन मूड बूस्टर की तरह काम करता है और इसका एक चम्मच मतली की परेशानी को रोक सकता है। प्रेग्नेंसी में मॉर्निंग सिकनेस से बचने के लिए अजवाइन की चाय पिएं। इसके लिए एक कप पानी में एक चम्मच अजवाइल उबाल लें। फिर इसमें गुड़ या शहद मिला लें। आप चाहें, तो स्वाद के लिए इसमें थोड़ा सा नींबू भी डाल सकती हैं। फिर इसे गर्म चाय का सेवन करें। आपको बेहतर महसूस होगा।अर्थराइटिस के दर्द मेंअजवाइन अर्थराइटिस के दर्द से राहत दिला सकता है। दरअसल, अजवाइन में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो, दीर्घकालिक या पुरानी सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। अजवाइन में एंटीबायोटिक गुण भी होते हैं, जो कि रेडनेस को कम करने और सूजन का मुकाबला करने में मदद करते हैं। इसमें हाई सेंसिटिव गुण भी हैं , जो कई हद तक टिशूज को आराम पहुंचाते हैं। इसके लिए अजवाइन के बीजों के पेस्ट को जोड़ों में लगाएं या अजवाइन को पीस कर उबाल लें और उससे दर्द की सिकाई करें।ब्लड प्रेशर कम करने मेंहाई ब्लड प्रेशर एक सामान्य स्थिति है जो, हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाती है। ऐसे में अजवाइन काफी मदद कर सकती है। पारंपरिक उपचार में कैल्शियम-चैनल ब्लॉकर्स जैसी दवाओं का उपयोग शामिल है। ये ब्लॉकर्स कैल्शियम को दिल की कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोकते हैं और रक्त वाहिकाओं को फैला देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप ब्लड प्रेशर कम होता है। इस तरह अजवाइन भी कैल्शियम-चैनल-अवरोधक की तरह काम करता है और ब्लड प्रेशर को कम करने में भी मदद करता है।माइग्रेन मेंअजवाइन के इस्तेमाल से माइग्रेन के दर्द में भी राहत मिल सकती है। इससे निपटने के लिए अदरक, अजवाइन और काले नमक के मिश्रण का सेवन करें।मुंह के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंदअगर अचानक सें दांत में दर्द हो तो अजवाइन के बीजों का इस्तेमाल किया जा सकते हैं। इसके लिए अजवाइन के बीजों को दांत के नीचे दबा सकते हैं। अजवाइन के बीज कैविटी और सांसों की बदबू से भी बचाएगा।इन सबके अलावा अजवाइन का एंटी ऑक्सीडेंट गुण सर्दी-जुकाम से भी बचाता है।--- -
दूध को संपूर्ण आहार मानते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप दूध के साथ कुछ भी ले सकते हैं। अकसर लोगों की आदत होती है कि वे समय की कमी के कारण जल्दी जल्दी में दूध के साथ गलत चीजों का सेवन कर लेते हैं। और बाद में उन्हें सेहत से जुड़ी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बता दें कि कुछ ऐसे भी खाद्य पदार्थ होते हैं जिनका सेवन अगर दूध के साथ किया जाए तो वह सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
दूध के साथ केलाअकसर आपने लोगों को दूध के साथ केले का सेवन करते हुए देखा होगा। यह कॉम्बिनेशन सेहत के लिए सही है। दरअसल केले में इनुलिन नामक फाइबर पाया जाता है, जिसके माध्यम से कैल्शियम को ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है। ऐसे में दूध का कैल्शियम और केले का इनुलिन जब एक साथ काम करता है तो इससे हड्डियों को मजबूती मिलती है। एक प्रकार से ये हमारे पूरे शरीर को चलाने के लिए यह एक ईंधन के रूप में काम करता है।दूध के साथ हाई प्रोटीन सोर्सजो लोग दूध के साथ हाई प्रोटीन सोर्स लेते हैं , लेकिन यह सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। दूध के साथ अंडा या मीट सही कॉन्बिनेशन नहीं है। कुछ लोगों को लगता है इसके सेवन से शरीर को ज्यादा ऊर्जा मिलेगी, लेकिन इससे ना केवल शरीर का एनर्जी लेवल घटता है बल्कि शरीर भी थका हुआ भी महसूस करता है।दूध के साथ हल्दीशरीर में गर्मी लाने के लिए हल्दी का सेवन किया जाता है। साथ ही बैक्टीरियल और वायरल इन्फेक्शन को दूर करने में हल्दी बेहद मददगार है। इसके अंदर एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जिसके कारण सूजन, जोड़ों में दर्द, अल्सर, अपच, पीरियड्स में दर्द, मोच, सिर दर्द, जलन, अर्थराइटिस आदि में राहत मिलती है। यह ना केवल खून को साफ करता है बल्कि अगर इसे दूध के साथ मिलाकर पिया जाए तो यह रक्त प्रभाव को भी तेज करता है।दूध के साथ सिट्रस जूससिट्रस जूस के अंदर एसिड पाया जाता है ऐसे में अगर इन जूस को दूध के साथ लिया जाए तो यह शरीर के अंदर बलगम बनाता है। ऐसे में डॉक्टर दूध और जूस को एक साथ पीने के लिए मना करते हैं। जिन लोगों को दूध और जूस दोनों पीने की आदत हैं वे दूध लेने से आधे घंटे पहले जूस का सेवन कर सकते हैं। इससे जूस के अंदर पाए जाने वाला एसिड का असर खत्म हो जाता है।दूध के साथ मेवादूध और मेवे का कॉम्बिनेशन शरीर के लिए बेहद स्वास्थ्यकारक है। दोनों को एक साथ लेने से शरीर को फाइबर मिलता है। साथ ही पेट भरा भरा महसूस होता है। यह वजन को कम करने में भी बेहद मददगार है क्योंकि इसके सेवन से भूख कम लगती है, जिसके कारण लोग कम आहार ग्रहण करते हैं। इसके अलावा दूध और मेवे को एक साथ लेने से अर्थराइटिस और ओस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियां शरीर से दूर रहती हैं। एक्सपर्ट सर्दियों के मौसम में इस कॉम्बिनेशन को रोज लेने की सलाह देते हैं।दूध के साथ नमक का सेवननमक के अंदर सोडियम और दूध में कैल्शियम पाया जाता है। ऐसे में दोनों को एक साथ लेने से पाचन क्रिया के काम में बाधा आती है।दूध और शहददूध और शहद एक साथ लेने से त्वचा में निखार आता है। इसके सेवन से ना केवल त्वचा जवां दिखती है बल्कि इसके अंदर पाए जाने वाला प्रोबायोटिक कॉम्बिनेशन पेट की बीमारियों को भी दूर रखता है। इसके अलावा कब्ज, पेट फूलना, आंतों की बीमारी आदि भी इसके सेवन से दूर हो जाती है, पर डॉक्टरों की सलाह पर ही इसका सेवन किया जाना चाहिए। जिन लोगों को अनिद्रा की समस्या है वे अपनी डाइट में इस कॉम्बिनेशन को शामिल कर सकते हैं।दूध के साथ स्टार्ची फूड्सदूध के साथ पास्ता, मैदा से बनी चीजें, ब्रेड आदि हार्ड स्टार्टस वाली फूड का सेवन करते हैं तो बता दें कि यह कॉम्बिनेशन सेहत के लिए नुकसानदेह है। चूंकि इन सब चीजों को खाने और पचाने के लिए शरीर को काफी मेहनत करनी पड़ती है इसीलिए इसे खाते ही गैस, पेट फूलना, थकान का एहसास, बदहजमी जैसी परेशानियां आदि होने लगती हैं।दूध के साथ अनाजदूध के साथ अनाज लिया जा सकता है। यह सेहत के लिए हर प्रकार से अच्छा है। शारीरिक और मानसिक दोनों विकास के लिए इसका सेवन एक्सपर्ट की सलाह पर लिया जाता है। इसके लिए आप किसी एक अनाज का चुनाव करें और लो फैट मिल्क या स्किम्ड मिल्क के साथ लें। इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है साथ ही इसके अंदर पाए जाने वाले माइक्रोन्यूट्रिएंट्स जैसे विटामिंस और मिनरल्स शरीर को भरपूर मात्रा में मिलते हैं। अगर दूध को अनाज के साथ लिया जाए तो शरीर में जिंक, आयरन, फॉलिक एसिड, फास्फोरस, विटामिन ए और ई, बी आदि की कमी पूरी हो जाती है। यह न केवल पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है, बल्कि इसके सेवन से शुगर लेवल भी कंट्रोल में रहता है।


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