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मशरूम तो आपने अकसर खाई होगी, पर आज हम आपको ऑएस्टर मशरूम के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका सेवन आपको नॉनवेज से भी ज्यादा पोषक तत्व दे सकता है।
मशरूम कई तरह की होती है। सफेद मशरूम, बटन मशरूम और शिटेक को अकसर आपने पिज्जा या सूप में इ्रसतेमाल किया होगा। पर क्या आप जानती हैं कि ऑएस्टर मशरूम इन सबसे ज्यादा पौष्टिक होती है। कई विटामिन्स और माइक्रो न्यूट्रीएंट्स से भरपूर ऑएस्टर मशरूम आपकी इम्युनिटी बढ़ाकर कई गंभीर बीमारियों से बचा सकती है।
क्या है ऑएस्टर मशरूम
इसे इसके आकार के कारण ऑएस्टर मशरूम या सीप मशरूम कहा जाता है। यह बिल्कुल किसी सीप की तरह दिखती है पर बेहद नाजुक होती है। लेकिन इसकी नजाकत पर न जाएं यह इतनी ज्यादा पौष्टिक होती है कि इसका सेवन आपको नॉन वेज से ज्यादा पोषक तत्व देता है।
ऑएस्टर या सीप माशरूम में मौजूद पोषक तत्व
रिसर्च गेट में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार ऑएस्टर मशरू में बटन मशरूम या शिटेक से ज्यादा पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स मौजूद होते हैं। जो मौसम में हो रहे बदलावों से मुकाबला करने के लिए आपको तैयार करते हैं। इसके अलावा इसमें 1.6 से 2.5% प्रोटीन होता है।
सूक्ष्म पोषक तत्वों का खजाना है सीप मशरूम
ऑएस्टर मशरूम या सीप मशरूम उन सूक्ष्म पोषक तत्वों का भी भंडार है जिनकी जरूरत आपके शरीर को सुचारू रूप से काम करने के लिए होती है। -
मोटापा कम करने में असरदार
गुड़ के सेवन से इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है. वजन कम करने से लेकर, कई बीमारियों के लिए गुड़ की चाय बहुत जरूरी होती है. गुड़ की चाय सर्दियों में एनर्जी बूस्ट करने का काम करती है. आपको बताते हैं कि सर्दियों में कैसे आप बड़ी आसानी से घर पर गुड़ की चाय बना सकते हैं, जानें इसके फायदे.
ये सामग्री चाहिए
तीन चम्मच बारीक गुड़
2 चम्मच चाय की पत्ती
2 इलायची
1 चम्मच सौंफ
और एक कप पानी के साथ दो कप दूध.
आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर और अदरक
ऐसे बनाएं
पैन में एक कप पानी में उसमें अदरक, इलायची, कालीमिर्च, सौंफ मिलाकर उबाल लें. उबलने के दौरान दूध मिलाकर इस फिर उबालें. अब गुड़ डालें और अच्छी तरह मिला लें. ज्यादा देर तक इसे उबालें नहीं वरना चाय फट सकती है.
पेट कम होता है
सर्दियों में गुड़ की चाय पीने से पेट की चर्बी खत्म होती है और इंसान स्वस्थ भी रहता है.
पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है
गुड़ की चाय पाचन तंत्र में सुधार लाती है. सीने की जलन को कम करने में मददगार होती है. गुड़ में बहुत कम कृत्रिम स्वीटनर होते हैं. गुड़ में चीनी से ज्यादा विटामिन और खनिज होते हैं, जो स्वास्थ्य में फायदेमंद होते हैं.
माइग्रेन से राहत, लाल रक्त कोशिकाओं में वृद्धि
माइग्रेन या सिरदर्द के मरीजों को गाय के दूध में गुड़ की चाय बनाकर पीनी चाहिए. इससे आराम मिलता है. साथ ही खून की कमी वालों के लिए भी गुड़ खाना या इसकी चाय पीना फायदेमंद होता है. - भाग्यश्री फिल्म अभिनेत्री होने के साथ डाइटिशियन और न्युट्रिशियन भी हैं। जो अपने इंस्टाग्राम पर स्किन केयर से लेकर स्वास्थ्य पर देसी उपाय बताती रहती हैं। अभी के समय में लोग वायु प्रदूषण की वजह से परेशानी से गुजर रहे हैं इसका असर फेफड़ों पर देखने को मिल रहा है। हमारे शरीर का अहम हिस्सा होते हैं फेफड़े। इसके अस्वस्थ रहने की वजह से कई अन्य बीमारियों से गुजरना पड़ता है जैसे कि अस्थमा, टीबी, कैंसर, निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर आदि। फेफड़े हवा ही नहीं, प्रदूषण व स्मोकिंग की खतरनाक हवा को भी भीतर लेते हैं। फेफड़ों को स्वस्थ रखने का आसान तरीका है कि नियमित रूप से व्यायाम और हेल्दी फूड खाएं। फिल्म अभिनेत्री भाग्यश्री ने फेफड़ों में असाधारण जमाव को साफ करने के लिए साधारण घरेलू इलाज साझा किया है। जानते हैं क्या हैं वो टिप्स।भाग्यश्री ने इंस्टाग्राम एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा, "हम सभी ये बात जानते हैं कि धूम्रपान करने से हमारे फेफड़ों प्रभावित होते हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है कि ये परेशानी प्रदूषण, आपके किचन से निकलने वाला खराब धुआं और यहां तक तक कि लंबे समय तक साइनस के कारण भी हो सकती है? फेफड़े शरीर से खराब पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं।, लेकिन इसके लिए फेफड़ों की देखभाल करना जरूरी है? आपके किचन में मौजूद सामान्य मसाले ऐसा कर सकते हैं। "भाग्यश्री के घरेलू टिप्स--दो कुचली हुई काली मिर्च के साथ एक छोटा चम्मच जीरा लें और उसे पानी में उबालें और इसका सेवन गर्म चाय की तरह करें। भाग्यश्री ने आगे बताया कि शानदार पाचक होने के साथ जीरा में असाधारण जमाव को साफ करने वाले गुण पाए जाते हैं। जीरा पानी छाती में जमी बलगम संचय को साफ करने में मदद करता है और जबरदस्त हाइड्रेटेर होता है।- सेब का सेवन करें- फेफड़ों को हेल्दी रखने के लिए विटामिन सी, विटामिन ई और बीटा कैरोटिन वाले आहार का सेवन करना चाहिए। सेब में एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं जो फेफड़ों को हेल्दी बनाने में मदद करते हैं।-घर की हवा साफ रखें- घर में पौधों को लगाकर आप घर की हवा साफ रख सकते हैं जो आपके फेफड़ों को भी सेहतमंद रखने में मदद करते हैं। इसके लिए आप घर में स्पाइडर प्लांट्स, मनी प्लांट्स, एलोवेरा और बोस्टन फन्र्स जैसे पौधे लगा सकते हैं।-एक्सरसाइज करें- अगर आप हर समय बैठे रहते हैं तो ये आपकी खराब सेहत का कारण बन सकता है। आप अपने लिए एक नियम बना लें कि आपको दिन में 20 मिनट एक्सरसाइज जरूर करनी है और पसीना निकालना है। इसके लिए आप कोई भी एक्सरसाइज कर सकते हैं या फिर तेज-तेज चल सकते हैं।-खूब पानी पीएं- शरीर के लिए पानी से अच्छा कुछ नहीं होता, इससे शरीर डिटॉक्सीफाई होता है। इसलिए, दिन में कम से कम 8 गिलास पानी पीना चाहिए।भाग्यश्री ने कहा शरीर को हर हिस्सा जरूरी होता है इसलिए हर अंग का ख्याल सही तरीके से करना चाहिए। हम अपने आंख, नाक . कान, दांत, दिल और किडनी को लेकर हमेशा सतर्क रहते हैं, लेकिन जब बात फेफड़े की आती है तो हम डर जाते हंै। ये हमेशा ढंग से काम करते रहते हैं और हमें परेशान नहीं करते, इसलिए हम इनकी ज्यादा फिक्र भी नहीं करते, लेकिन सही समय पर इनका ध्यान रखना जरूरी है।

- मिठाई का नाम लेते ही मुंह में पानी तो आता ही है। यदि दीवाली जैसा खास त्यौहार को तो फिर मिठाई खाना तो बनता है। त्योहार में पारंपरिक मिठाइयों की अपनी एक जगह है। आज हम आपको एक ऐसी मिठाई की रेसिपी बता रहे हैं, जो अलग स्वाद तो देगी ही बल्कि ये सेहत से भरपूर भी है और ये है मखाना के लड्डू.....सामग्री3 या 4 कप - मखानाड्राई फ्रूट्स- नारियल, किशमिश, काजू, बादाम, चिरौंजी, अलसी के बीज आदि यदि अलसी के बीज नहीं लेना चाहते हैं तो मत डालिए।1 कप - पीसी हुई चीनी वैकल्पिक2 कप घीमखाना लड्डू बनाने का तरीकाआप सबसे पहले एक पैन लें और उसमें 1 या 2 चम्मच घी डालकर मखाना को रोस्ट कर लें। इसके बाद आप मखानों को अलग निकाल लें और उसी पैन में आप ड्राई फ्रूट्स डालकर, उन्हें भून लें। नारियल को आप कद्दूकश करके रख सकते हैं। इसके बाद आप इन्हें ग्राइंडर में दरदरा पीस लें। अब आप इसमें कद्दूकश किया हुआ नारियल डालें और इसमें चाहें, तो पीसी हुई चीनी भी डाल सकते हैं। इसके बाद आप इसमें घी डालें और इन सबको अच्छे से मिलाएं। अब आप इस तैयार मसाले से अपने मनचाहे आकार के लड्डूू तैयार करें। इसके बाद आप इन्हें कम से कम 3 महीने के लिए स्टोर करके रख सकते हैं।मखाना लड्डू के फायदेयदि आप इस मखाना लड्डू का सेवन करते हैं, तो यह आपके स्वाद के साथ और कई फायद भी देगा। यदि डायबिटीज रोगी भी मखाना लड्डू का सेवन बिना किसी टेंशन के कर सकते हैं। यह मखाना लड्डू एक शुगर फ्री मिठाई का विकल्प भी है। इसके अलावा, यह मखाना लड्डू स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेस्ट हैं क्योंकि इसमें मौजूद ड्राई फ्रूट्स या नट्स में शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व मौजूद हैं। इतना ही नहीं, अगर जो लोग वजन घटाने की भी कोशिश कर रहे हैं, तो वे बेफ्रिक होकर ये लड्डू तो खा ही सकते हैं। दरअसल इस लड्डू में इतनी कम कैलोरी है, जिसे आप आसानी से बर्न हो जाती है। इसलिए देर किस बात की इस त्योहार में घर पर ही बना डालिए ये सेहत से भरे लड्डू।
- नमक हमारी भोजन में एक अहम भूमिका अदा करता है। ऐसे में हमें पता होना चाहिए कि नमक की कितनी मात्रा हमारे शरीर में जानी चाहिए।नमक के बिना खाने में स्वाद की कल्पना करना भी असंभव है। नमक की जरूरत हमारे शरीर को बहुत होती है, लेकिन इसकी अधिकता भी हमारे शरीर के लिए नुकसानदेह है। नमक केवल हमारी भोजन के स्वाद को नहीं बढ़ाता बल्कि यह हमारे जीवन में भी एक अहम भूमिका निभाता है। नमक एक बहुत महत्वपूर्ण मिनरल है जिसे सोडियम क्लोराइड के नाम से भी जाना जाता है अगर इसकी मात्रा हमारे शरीर में ज्यादा हो जाए तो अनेक बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है जैसे हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर, ऑस्टियोपोरोसिस आदि समस्याएं इसके अधिकता के कारण हो सकती हैं।इसके अलावा अस्थमा, स्टमक कैंसर, किडनी से जुड़ी बीमारियां भी इसके अधिक मात्रा में सेवन करने से होती हैं। इसके अलावा कुछ लोग जिनको नमक खाने की आदत को नियंत्रण नहीं कर पाते वह लो सोडियम सॉल्ट का सेवन करते हैं। लेकिन आपको बता दें कि इस सॉल्ट का सेवन भी सीमित मात्रा में करना चाहिए।नमक की कितनी मात्रा अच्छीअक्सर जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है वे नमक खाना बिल्कुल ही बंद कर देते हैं पर ऐसा करना गलत है। एक्सपट्र्स की मानें तो एक साथ नमक बंद करना सही नहीं है। धीरे-धीरे नमक की मात्रा को कम करना ही लाभदायक है। अगर पानी की मात्रा को बढ़ा दी जाए तो नमक से होने वाले नुकसान यूरिन के जरिए बाहर निकल जाएंगे। बता दें कि शरीर में मौजूद सोडियम और पोटेशियम यूरिन के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं। लेकिन हां, अगर किसी को किडनी की समस्या है तो इस प्रक्रिया में बाधा आती है। जिन लोगों को किडनी की समस्या होती है वे खुद को ज्यादा नमक खाने से रोकें।लो सोडियम सॉल्ट कितना सहीजो लोग ज्यादा नमक खाने की आदत से परेशान हैं वह लो सोडियम सॉल्ट का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या इसका नियमित रूप से सेवन करना सेहत के लिए अच्छा है। इस नमक का स्वाद नमक जैसा होता है पर इसमें सोडियम क्लोराइड के अधिकांश मात्रा को पोटेशियम सॉल्ट में बदल दिया जाता है जो दिल और किडनी पर बहुत प्रभाव डालता है। ऐसे में इसके सेवन से बचना चाहिए। और साथ ही कुछ लोग खाने को जल्दी पकाने के चक्कर में मीठा सोडा या यानी सोडियम बाइ कार्बोनेट डाल देते हैं, जिसकी वजह से हमारी पाचन तंत्र की प्रक्रिया में गड़बड़ आनी शुरू हो जाती है। इसके अलावा व्रत के दौरान जो लोग सामान्य नमक की बजाय सेंधा नमक का सेवन करते हैं उन्हें पता होना चाहिए कि सेंधा नमक में आयोडीन नहीं होता है क्योंकि आयोडीन हमारी स्वास्थ्य और मस्तिष्क के लिए एक जरूरी तत्व है। इसलिए सेंधा नमक का प्रयोग सामान्य नमक की तुलना में करना उचित नहीं। ऐसे में केवल वही नमक खरीदें जो आयोडीन युक्त हो।जंक फूड के सेवन से बचें।-अगर आप खाने का स्वाद बढ़ाना चाहते हैं तो नमक के साथ हरा धनिया, पुदीना, नींबू का इस्तेमाल करें। इससे नमक की मात्रा पूरी हो जाएगी। चूंकि पालक, मेथी जैसी हरी सब्जियों में प्राकृतिक नमक होता है इसलिए उसे बिना नमक के ही पकाएं।-जो लोग अपने घर में सेंधा नमक, काला नमक और चार्ट मसाले का इस्तेमाल करते हैं वे इनका सीमित मात्रा में सेवन करें।-अपनी डाइट में फलों और सब्जियों को भरपूर मात्रा में शामिल करें।-अगर आप किसी होटल में जाते हैं तो वहां के सूप या चाइनीस फूड का ऑर्डर ना करें। ऐसे खाने में नमक की मात्रा ज्यादा होती है।-अपने घरवालों को नमक की आदत छुड़वाने के लिए डाइनिंग टेबल पर नमक ना रखें।-अगर आप खाने में सोया या पिज़्ज़ा सॉस का इस्तेमाल कर रहे है तो ऊपर से नमक डालने की भूल ना करें।
- आक या मदार का धार्मिक महत्व भी है और औषधीय तथा वास्तु शास्त्रीय महत्व भी इसका कम नहीं है। यह एक जहरीला पौधा है, लेकिन इसके फायदे भी हैं। आज हम जानेंगे इसके फूल के फायदे....लोगों ने पूजा के लिए आक के फूल का इस्तेमाल किया होगा। इस पौधे को उगाया नहीं जाता बल्कि अपने आप ही किसी भी जगह उग जाता है। इस पौधे की जड़ में मंडारएल्बन और फ्युएबिल पाया जाता है, जो कई बीमारियों के इलाज में कारगर है। आक के पौधे से ज्यादतर लोग दूर रहते हैं क्योंकि लोगों को ये जहरीला पौधा लगता है लेकिन यह सत नहीं हैं क्योंकि लोगों को इसके गुणो के बारे में नहीं पता होता। इस पौधे से शरीर के कई समस्या दूर हो सकती है।एलर्जीअगर किसी को स्किन एलर्जी की समस्या हो जाती है तो इस परेशानी से निजात पाने के लिए आके की जड़ को जलाकर चूर्ण बना लें और उसे कड़वे तेल में मिलाकर एलर्जी वाले हिस्से पर लगाएं।बवासीर की समस्या दूर करने में लाभदायकबवासीर की समस्या होने पर लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आक के पत्ते और जड़ बहुल गुणकारी होती है। इसके लिए पानी में आक के पत्ते और उसका डण्ठल भिगो दें और फिर इस पानी को पीएं। इससे जल्द बवासीर की परेशानी खत्म हो जाती है।डायबिटीज कंट्रोल करने में मदद करेंलोग डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन इस समस्या के लिए आप हर रोज सुबह आक के पत्तों को पैर के नीचे लगाकर रखें और रात को सोने से पहले हटा दें। ऐसा करने से शुगर कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।चेहरे से झुर्रियां व दाग-धब्बे दूर करेंउम्र के बढऩे के साथ चेहरे पर झुर्रियां की परेशानी होने लग जाती है, जिसके लिए लोग अलग-अलग तरह की क्रीम और उपाय अपनाते हैं। लेकि इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप हल्दी में गुलाब जल और आक का दुध मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। इससे चेहरे की झुर्रियां और दाग-धब्बे दूर हो जाएंगे। लेकिन इस पेस्ट को लगाते समय ध्यान रखे कि ये आंखों में न जाएं।सिर दर्द से राहत दिलाएजिन लोगों को माइग्रेन की वजह से अक्सर सिर दर्द रहता है या कान में दर्द हो, तो ऐसे में आक के फूल का इस्तेमाल फायदेमंद होता है। सिर दर्द से राहत के लिए इसमें से निकलने वाला दूध सिर पर लगाएं।घाव भरने में करे मददचोट लगने के बाद उसका घाव भरने में समय लगता है। तो इसे जल्द सही करने के लिए आप आक की पत्तियों को पीस कर इसमें सरसों का तेल मिला लें और इसे घाव पर लगाएं। जब तक घाव भर न जाए नियमित रूप से ऐसा करें।खांसी सही न होने पर करें आक के फूल का इस्तेमालकई लोगों को अक्सर खांसी की परेशानी रहती है, जिसके लिए वह दवा का सहारा लेते हैं पर ज्यादा अराम नहीं मिलता। ऐसे में उन लोगों के लिए आक का पौधा रामबाण औषधि होता है। इस समस्या से जल्द राहत पाने के लिए आक के फूल मे लौंग और काली मिर्च मिलाकर पीस लें और इसे रोज सुबह गर्म पानी से पीएं। खांसी के साथ जिन लोगों को सांस की समस्या है उसमें ये लाभकारी होगा।आक के पौधे को लेकर अक्सर लोग इसे जहरीला समझकर इससे दूर रहते हैं ऐसा इसलिए क्यों इस पौधे से निकलने वाली दूध आंखों के लिए परेसानी ला सकता है। पर अगर ध्यान से इसका इस्तेमाल किया जाए तो सेहत के लिहाज से बहुत फायदेमंद होता है आक को पौधा और इसके फूल।(सावधानी- बिना अनुभवी चिकित्सक या वैद्य की सलाह से इसका इस्तेमाल न करें। इस आलेख में हम केवल इसके फायदों की जानकारी दे रहे हैं।)
- शोध से एक बात सामने आई है कि कद्दू यानी कुम्हड़ा के बीज गंजेपन का रामबाण इलाज बन सकते हैं। तो आइए जानते हैं इसे इस्तेमाल करने का सही तरीका और इसके खास लाभ।कद्दू छत्तीसगढ़ में बड़े शौक से खाया जाता है। सूखी सब्जी के अलावा इसकी कढ़ी, भजिया जिसे तलन कहते हैं और हलुआ...भी बनाया जाता है। कुम्हड़ा के अलावा इसके बीज भी काफी फायदेमंद हैं। इसे जहां लोग डायबिटीज में इंसुलिन की मात्रा को संतुलित करने के लिए इस्तेमाल करते हैं, वहीं ये ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए भी फायदेमंद है। इसमें पाया जाने वाला मैग्नीशियम जहां दिल को स्वस्थ रखता है, वहीं जिंक आपनी इम्यूनिटी बूस्ट करता है, तो कुल मिला कर समझें, तो ये स्वास्थ्य के लिए हर तरह से फायदेमंद है। कद्दू का बीज बालों के लिए भी बहुत लाभकारी है। ये न सिर्फ बालों की जड़ों को मजबूत बनाते बल्कि स्कैल्प इंफेक्शन और बाल झडऩे की भी परेशानी को भी कम करते हैं।बालों के लिए कद्दू के बीज का लाभकद्दू के बीज में बालों को कई पोषण प्रदान करते हैं। इसमें जिंक, सेलेनियम, मैग्नीशियम, ऑयरन, कैल्शियम, और विटामिन ए, बी और सी आदि होता है, जो कि बालों की ग्रोथ को ट्रिगर कर सकते हैं। ये न सिर्फ पतले बालों को मोटा बनाने के लिए फायदेमंद है बल्कि ये बालों की गुणवक्ता को भी बेहतर बनाते हैं। वहीं जिन लोगों में विशेष रूप से अधिक टेस्टोस्टेरोन के कारण गंजेपन की परेशानी होती है उनके लिए भी ये बहुत फायदेमंद है। इसे आप पीस कर ही खाने के अलावा बालों में लगा सकते हैं। वहीं इसका तेल भी बालों के लिए बहुत फायदेमंद है।बालों के लिए कद्दू के बीज का उपयोग कैसे करेंकद्दू के बीज से हेयर पैक बनाया जा सकता है। . ये बालों की जड़ों को खास फायदा पहुंचाने का काम करेंगे। ये स्कैल्प में ठंडक लाने का काम करता है और बालों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं। इसे बनाने के लिए ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं है बस कद्दू के बीज को पीस कर दही और शहद में मिला कर बालों में लगा लें। फिर इसे आधा घंटे तक ऐसे ही छोड़ दें और फिर बालों को ठंडे पानी से धो कर शैंपू कर लें। कुछ दिनों तक कद्दू के बीज का रेगुलर इस्तेमाल करने से आप पाएंगे कि आपके बालों की रंगत बेहतर बन गई और बाल टूटने में भी कमी आएगी।कद्दू के बीज का तेलकद्दू के बीज के तेल आमतौर पर तेल या जेल कैप्सूल के रूप में बेची जाती है। कद्दू के बीज का तेल घर पर भी बनाया जा सकता है। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं करना बस इसके बीज को पीस कर पाउडर बना कर रख लें। फिर इसे जैतून के तेल के साथ मिला कर हल्का गर्म कर लें और फिर ठंडा होने पर इससे स्कैल्प पर लगा लें। आप चाहें, तो इसमें विटामिन-ई की गोलियां भी मिल सकते हैं। ये बालों को अतिरिक्त लाभ पहुंचाने का काम करेगी। हर हफ्ते दो बार बालों की इस तरह से चंपी करने से आप अपने बालों को मजबूत और घना बना सकते हैं।इस तरह से कद्दू के बीजों का रेगुलर इस्तेमाल करना आपको बालों को मजबूती प्रदान करेगा। वहीं जिन लोगों को गंजेपन की परेशानी है उनके लिए तो ये रामबाण इलाज बन सकता है।
- दांतों को स्वस्थ रखने के लिए लोग अलग-अलग तरीके अपनाते हैं, ज्यादातर लोगों को नीम की दातुन से दांतों की सफाई और ब्रश करते देखते हैं। लोगों का मानना है कि नीम की दातुन से दांतों की सफाई करने से दांतों में संक्रमण पर रोकथाम होती है और दांत अच्छी तरह से चमक सकते हैं। लेकिन कई लोग ऐसे भी होंगे जो इस पर यकीन नहीं करते होंगे। कई लोगों के बीच ये सवाल होता है कि क्या दातुन से दांतों की सफाई करना सही है या नहीं और कैसे ये हमारे दांतों को स्वस्थ रखने में मददगार है। आइये जानते हैं नीम दातून करना फायदेमंद है या नुकसानदायक।दांतों के लिए कैसे फायदेमंद है नीम की दातुनबरसों से लोग नीम की दातुन से अपने दांतों की सफाई करते आ रहे हैं। भारत में इसे आयुर्वेदिक ब्रश के रूप में देखा जाता है। जर्नल 'फार्माकोग्नॉसी रिव्यू' में 'अजादिराचट्टा इंडिका: अ हर्बल पैनेशिया इन डेंटिस्ट्री - एन अपडेट नाम से प्रकाशित एक अध्ययन में दिखाया गया है कि नीम की छाल दांतों के लिए एक सक्रिय घटक के रूप में काम करती है। सामने आए अध्ययन के मुताबिक, नीम की छाल का मसूड़ों की समस्या और दांतों में संक्रमण को दूर करने का काम करते हैं। इस अध्ययन में नीम की छाल को दांतों के इलाज के लिए एक बेहतरीन तरीके के रूप में देखा जाता है।क्या कहते हैं एक्सपट्र्सविशेषज्ञों के अनुसार नीम अपने बहुत से फायदेमंद गुणों के साथ जाना जाता है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन होते हैं। लेकिन नीम की दातुन से लगातार और ज्यादा देर तक दांत को साफ करना नुकसानदायक हो सकता है। अगर हम बहुत देर तक दांतों को दातुन से साफ करते हैं तो इस कारण हमारे दांत भी घिसने लगते हैं जिस कारण ये कमजोर हो जाते हैं। जबकि जिन लोगों का ये मानना है कि दातुन से आपके दांत मजबूत होते हैं तो ये धारण गलत है। विशेषज्ञों के अनुसार हकीकत है कि नीम कई संक्रमण और वायरस का खात्मा करता है लेकिन इसकी दातुन का बहुत ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदायक है।- नीम की जड़ की छाल का चूर्ण 50 ग्राम, सोना गेरू 50 ग्राम तथा सेंधा नमक 10 ग्राम, इन तीनों को मिला कर खूब महीन पीस लें। इसे नीम के पत्ते के रस में भिगो कर छाया में सुखा दें। इस चूर्ण से दांतों को मंजन करने से दांतों से खून गिरना, पीव निकलना, मुंह में छाले पडऩा, मुंह से दुर्गन्ध आना, जी का मिचलाना आदि रोग दूर होते हैं।- 100 ग्राम नीम की जड़ को कूट कर आधा लीटर पानी में एक चौथाई शेष रहने तक उबालें। इस पानी से कुल्ला करने से दांतों के अनेक रोग दूर होते हैं।नीम की दातून में कौन से प्रभावी गुण हैं?नीम सदियों से कई इलाज के काम आती है, आयुर्वेद में इसे ज्यादातर इलाज के लिए एक बेहतरीन विकल्प के रूप में देखा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि नीम में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं जो हमारे बालों, त्वचा, संपूर्ण स्वास्थ्य और दांतों को फायदा पहुंचाते हैं। नीम में फाइटोकेमिकल और एंटी माइक्रोबियल एजेंट गुण होते हैं जो इसे फायदेमंद बनाते हैं।
- दूध सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है। इसके अलावा दूध से बने अन्य आहार जैसी घी, मक्खन, पनीर, दही, छाछ आदि भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। आइये जानते हैं कि किस उम्र में कितना दूध पीना चाहिए....गाय और भैंस का दूध अगर आप अपने सामने निकलवा कर पीते हैं तो वे ज्यादा फायदेमंद होता है उसमें मिलावट की कोई गुंजाइश नहीं होती है। भैंस के दूध में गाय के दूध की उपेक्षा ज्यादा फैट होता है। भैंस का 100 मिली दूध में करीब 115 या 117 कैलरी पाई जाती है जबकि अगर गाय के दूध की बात की जाए तो उसमें 100 मिली दूध में 60 से 70 कैलरी पाई जाती है। मां के दूध में भी 100 कैलोरी पाई जाती है। जिन लोगों का वजन ज्यादा होता है उन्हें भैंस के दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही कोलेस्ट्रोल के मरीजों को गाय के दूध से बचना चाहिए।टोंड या डबल टोंड दूधअगर कोलेस्ट्ऱॉल और फैट से बचना चाहते हैं तो टोंड या डबल टोंड दूध बेहद फायदेमंद होता है। फैट की बात की जाए तो टोंड में 3 प्रतिशत और डबल टोन में 1.5 प्रतिशत फैट होता है। जबकि फुल क्रीम में 7 से 9 प्रतिशत फैट पाया जाता है। बच्चों के लिए फुल क्रीम मिल्क सही होता है। जब बच्चा 1 साल का हो जाए तो उसे पैकेट वाला फुल क्रीम दूध दिया जा सकता है।टेट्रा पैक दूध का सेवनटेट्रा पैक दूध की क्वालिटी ज्यादा अच्छी नहीं होती है। यह सच है कि पैकिंग में दूध जल्दी खराब नहीं होता लेकिन जो लोग यह सोचते हैं कि दूसरे दूध के मुकाबले टेट्रा पैक दूध सेहत के लिए बेहतरीन है तो वह गलत हैं।किस उम्र में कितना दूध है जरूरीदूध को कंप्लीट आहार कहा जाता है। आयरन और विटामिन सी के अलावा दूध प्रोटीन और अमीनो एसिड से भरपूर है। जीरो से 1 साल तक की उम्र के बच्चों को गाय, भैंस या पैकेट का दूध नहीं देना चाहिए। ऐसे बच्चे मां का दूध पीते हैं और अगर उन्हें किसी कारण मां का दूध नहीं मिलता है तो वे फॉर्मूला मिल्क पी सकते हैं।- 1 से 2 साल तक के बच्चों के विकास के लिए फुल क्रीम दूध फायदेमंद होता है क्योंकि उन्हें इस उम्र में ज्यादा फैट की जरूरत होती है इसीलिए करीब 800 से 900 मिली यानी 3 कप दूध दिन में दें।- 2 से 3 साल तक के बच्चे के लिए दूध से बनी चीजें बेहद फायदेमंद होती है जैसे पनीर, दही आदि। इन बच्चों को 2 कप दूध देना जरूरी होता है।- 4 से 8 तक के बच्चों की डाइट भी समान ही होती है। इन्हें भी दूर से बनी चीजों के साथ 2 से ढाई कप दूध का सेवन कराना चाहिए।- 9 साल या उससे ज्यादा बच्चों को तीन कप दूध पीना चाहिए। इसके अलावा दूध से बनी चीजों का सेवन करना चाहिए।- शारीरिक रूप से एक्टिव टीनएजर्स को चार कप दूध पीना चाहिए।-दूध हड्डी की मजबूती के लिए जरूरी है इसीलिए एक्सपट्र्स के बच्चों की ही नहीं बड़ों को भी दूध पीने की सलाह देते हैं।- वयस्कों को फुल क्रीम दूध से बचना चाहिए इसकी बजाय वे टोंड या रिकमेंट मिल्क पी सकते हैं।- एक गिलास फुल क्रीम दूध में 8 ग्राम फैट पाया जाता है।(नोट- यह न्यूट्रिशयंस की राय है। हर इंसान की पाचन शक्ति अलग-अलग होती है। इसलिए दूध का सेवन करने वाले लोग पहले ये जान लें कि वे कितना दूध पचा पा रहे हैं कितना नहीं)
- वैसे तो बाजार में साल भर फूल गोभी मिलती है, लेकिन स्वाद की बात करें तो सर्दियों में ही फूल गोभी खाने का असली मजा आता है। सर्दी के मौसम में शीत पडऩे पर फूल गोभी में स्वाद बढ़ जाता है। बाजार में अभी ऐसी फूल गोभी बिकने पहुंच गई है। फूल गोभी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सब्जी है। इसे खाने से शरीर को अनेक फायदे मिलते हैं। खासकर अपने वजन को लेकर गंभीर रहने वाले लोग इसे मजे से खा सकते हैं क्योंकि यह फैट फ्री सब्जी है।फूलगोभी एक क्रूसिफायर सब्जी है जो , कि ब्रोकोली और पत्ता गोभी के जेनटिकल फैमिली से आता है। इसके पोषण संबंधी प्रोफाइस को देखें, तो 100 ग्राम फूल गोभी में 25 कैलोरी होती है, जिसमें कि जीरो परसेंट फैट होता है। यानी कि ये हर उस इंसान के लिए फायदेमंद है, जो कि फैट फ्री खाने की चाहत रखता है। इसी तरह इसके हाई फाइबर और बाकी अन्य विटामिन भी शरीर के लिए फायदेमंद हैं।फूल गोभी के पोषक तत्वफूल गोभी के विटामिन और पोषक तत्वों की बात करें, तो 100 ग्राम फूल गोभी में सबसे ज्यादा कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। सबसे खास बात ये है कि ये आपके दैनिक ज़रूरत का 70 से 100 प्रतिशत तक का विटामिन सी देता है, जो कि सर्दियों में कई बीमारियों से बचा सकता है। वहीं बाकी चीजों की बात करें, तो इसमें 2 प्रतिशत कैल्शियम और ऑयरन, 6 प्रतिशत पोटेशियम और 3 प्रतिशत मैग्नीशियम है।इम्यूनिटी बूस्टर है फूल गोभीफूलगोभी में विटामिन सी की एक उच्च मात्रा होती है, जो कि एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है। यह अपने एंटी इंफ्लेमेटरी प्रभाव के कारण शरीर को इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है और शरीर को कई तरह के संक्रमणों और बीमारियों से बचाता है।.पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद100 ग्राम फूलगोभी में 92 ग्राम पानी होता है। इसका मतलब है कि इसकी सब्जी शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद कर सकती है। यह फाइबर का भी एक अच्छा स्रोत है, जो कि कब्ज से बचाव और पाचन तंत्र को ठीक रखने के लिए जरूरी है। साथ ही गोभी में ग्लूकोसाइनोलेट्स नामक पदार्थों का एक समूह भी पाया जाता है, जो कि शरीर के पाचन प्रणाली को सही रखता है।मौसमी फ्लू से बचावफूल गोभी का विटामिन-सी शरीर को सर्दी-जुकाम जैसे मौसमी फ्लू से बचा सकता है। जहां इसका ये विटामिन सी स्किन के लिए भी फायदेमंद है, वहीं इसके हाई काब्र्स इसे नाश्ते में खाने के लिए इसे एक बेहतरीन विकल्प बनाती है। इस तरह नाश्ते में फूल गोभी खाना दिन भर के लिए शरीर को पर्याप्त एनर्जी दे सकता है।एंटीऑक्सिडेंट का अच्छा स्रोतफूलगोभी एंटीऑक्सिडेंट का एक बड़ा स्रोत है, जो शरीर की कोशिकाओं को हानिकारक फाइन रेडिक्लस और सूजन से बचाता है। फूलगोभी में विशेष रूप से एंटीऑक्सिडेंट के दो समूह ग्लूकोसाइनोलेट्स और आइसोथियोसाइनेट्स होते हैं, जो कि फेफड़े, स्तन और प्रोस्टेट कैंसर से बचाए रखने में भी मददगार हैं।हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंदफूलगोभी में कैरोटीनॉयड और फ्लेवोनॉइड एंटीऑक्सिडेंट भी होते हैं, जो कि दिल से जुड़ी बीमारियों से बचा सकते हैं। दरअसल, 100 ग्राम ताजी फूलगोभी में 267.21 मिलीग्राम फ्लेवोनोइड पाया जाता है, जो कि ब्लड सर्कुलेशन को सही रखता है और दिल को स्वस्थ रखता है। पर फूल गोभी को अलग-अलग तरीके से पकाने पर फ्लेवोनोइड की मात्रा कम हो सकती है। इसलिए, फूल गोभी को पूरी तरह पानी में उबालने की जगह हल्का कच्चा या भूनकर खाएं।ब्रेन फंक्शन और मूड को बूस्ट करता हैफूल गोभी कोलिन का एक अच्छा स्रोत है, जो कि ब्रेन हेल्थ को बढ़ावा देता है। फूल गोभी खाने से याददाश्त, मूड, मांसपेशियों पर नियंत्रण, मस्तिष्क के विकास और न्यूरोट्रांसमीटर सिस्टम को सही रखने में मदद मिलती है। इस तरह ये मस्तिष्क को स्वस्थ रखने और मूड को बूस्ट करने का काम करता है।त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंदफूल गोभी में मौजूद विटामिन-सी कोलेजन के उत्पादन में सुधार कर सकता है। कोलेजन को एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है, जो कि त्वचा को मॉइस्चराइजिंग गुण प्रदान करता है। सर्दियों में इसे खाना, त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है। इतना ही नहीं यह बढ़ती उम्र के साथ त्वचा पर नजर आने वाली समस्याओं जैसे कि ड्राईनेसऔर झुर्रियों के प्रभाव को भी कम कर सकता है।रखें सावधानीफूल गोभी को पकाते वक्त कुछ चीजों का ध्यान रखें, जैसे कि इसे भाप में पकाएं, हल्का भूनें और मैश करके खाने की कोशिश करें। ताकि इसका पोषण और भरपूर फायदा आपको मिल सके। साथ ही इसे हमेशा अच्छी तरह से धोकर पकाएं क्योंकि इसमें हरे कीड़े होते हैं।
- सर्दियों में आपको सब्जियों की काफी ज्यादा वैरायटी खाने को मिल जाती है। इस मौसम में गर्मियों की तुलना में सब्जियों में स्वाद अधिक आता है। इस मौसम में सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी समस्याएं ज्यादा होती हैं। सर्दियों में आप पोषक तत्वों से भरपूर सब्जियों का सेवन कर सकते हैं। इन सब्जियों में साग सबसे ज्यादा बेहतरीन होता है। आज हम आपको साग की कुछ ऐसी वैरायटियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सेहत के लिए बहुत गुणकारी हैं। इसके सेवन से आप सर्दियों में भी चुस्त-दुरुस्त रहेंगे।मेथी का सागमेथी के पराठे स्वाद में काफी अच्छे होते हैं। इसे बनाना भी आसान है। सेहत की बात करें, तो यह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद हो सकता है। मेथी में विटामिन सी, फाइबर, प्रोटीन, आयरन, नियासिन जैसे पोषक तत्वों की प्रचुरता होती है। इसके अलावा मैग्नीशियम, जिंक, कॉपर और फोलिड एसिड जैसे तत्व इसमें मौजूद होते हैं। ये सभी तत्व हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरूरी हैं। डायबिटीज के रोगियों के लिए मेथी दाना और मेथी का साग बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा पेट से संबंधी समस्याओं जैसे- अपच, गैस और दस्त के लिए भी यह बहुत ही अच्छा होता है। मेथी को किसी भी साग में डाला जा सकता है। मेथी वाली मिस्सी रोटी की बात ही क्या है। दाल में भी आप मेथी का छौंका लगाकर एक अलग स्वाद का मजा ले सकते हैं। .चौलाई का सागचौलाई का साग, हरे पत्तेदार सब्जियों में सबसे प्रमुख साग माना जाता है। सेहत की दृष्टि से भी यह साग हमारे लिए काफी फायदेमंद है। अगर आप नियमित रूप से चौलाई के साग का सेवन करते हैं, तो आपके शरीर में विटामिन्स और मिनरल्स की कमी नहीं होगी। इसमें विटामिन सी, विटामिन ए, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन जैसे तत्व भरपूर रूप से होते हैं। कफ और पित्त की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह साग काफी अच्छा माना जाता है। यह कफ और पित्त की समस्याओं को नाश करने के लिए बहुत ही उत्तम साग है।सरसों का सागसरसों का साग और मक्के की रोटी पंजाब का प्रसिद्ध खाना है। जो स्वाद में काफी अच्छा होता है। सेहत की दृष्टि से भी सरसों का साग हमारे लिए काफी फायदेमंद है। इस साग में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर रूप से होता है, जो शरीर को विषैले पदार्थों से बचाता है, साथ ही इम्यूनिटी बूस्ट करने में भी आपकी मदद करता है। इसमें विटामिन, ए, विटामिन बी12, विटामिन सी, विटामिन डी, कैलोरी, फैट, मैग्नीशियम, फाइबर और आयरन जैसे तत्व भरपूर रूप से होते हैं। इस साग में फाइबर की अधिकता होती है, इसलिए पाचन की दृष्टि से भी यह हमारे लिए अच्छा माना जाता है। सरसों के साग में बथुआ, पालक और मेथी डाला जाता है, जो लाजवाब स्वाद देते हैं।चने का सागचना भाजी छत्तीसगढ़ में काफी लोकप्रिय है। सर्दियों में चने का साग खाने से आपके सेहत को कई लाभ पहुंच सकते हैं। इसमें कई पोषक तत्व जैसे- प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन ए, कैल्शियम और फाइबर जैसे कई अन्य तत्व पाए जाते हैं। कब्ज, पीलिया और डायबिटीज के मरीजों के लिए यह साग काफी अच्छा माना जाता है। उत्तरप्रदेश में चना भाजी को सरसों तेल में बनाया जाता है, जो बहुत ही स्वादिष्ट लगता है।पालक का सागशरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर अधिकतर डॉक्टर्स पालक खाने की सलाह देते हैं। इसमें सिर्फ आयरन की प्रचुरता ही नहीं, बल्कि प्रोटीन, कैलोरी, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट जैसे तत्व भी मौजूद होते हैं। इसके साथ ही इसमें अन्य कई तत्वों की भी मौजूदगी होती है, जो हमारे सेहत के लिए अच्छे मानें जाते हैं। हालांकि, अधिक पालक खाने से आपको, पेट में गैस, दर्द और सूजन की समस्या हो सकती है, इसलिए संतुलित मात्रा में पालक का सेवन करें।बथुआ का सागयूरीक एसिड की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए बथुआ का सेवन फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा कई समस्याओं के लिए भी यह फायदेमंद है। इसमें विटामिन ए, फॉस्फोरस, कैल्शियम और पोटैशियम जैसे तत्व भरपूर रूप से होते हैं। गुर्दे की पथरी से परेशान लोगों के लिए भी बथुआ काफी फायदेमंद हो सकता है। बथुवा का साग नहीं खा सकते हैं, तो आप इसका रायता बना लें, जो स्वाद में भी लाजवाब होता है। इसके अलावा बथुवा को रोटी में डालकर या फिर इसके पराठे भी खाए जा सकते हैं।----
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बाजार में अब आंवला के फल ने दस्तक दे दी है। इस अमृत फल का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। एक आंवले में दो संतरे के बराबर विटामिन सी पाया जाता है, जो कई बीमारियों से लडऩे में मददगार होता है। आंवला के फल या जूस का सेवन करने से विटामिन सी के अलावा जिंक, आयरन, कैरोटीन, फाइबर, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, कैल्शियम, एंटीऑक्सीडेंट्स आदि पौष्टिक तत्व शरीर मिलते हैं। आंवला के नियमित सेवन से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, आंवला एक ऐसा फल है, जिसके अनगिनत लाभ है। आंवला ना सिर्फ त्वचा, और बालों के लिए फायदेमंद है, बल्कि कई तरह के रोगों के लिए औषधि के रूप में भी काम करता है। आंवला का प्रयोग कई तरह से किया जाता है, जैसे- आमला जूस , आंवला पाउडर , आंवला अचार आदि। आइये जाने आंवला खाने के क्या फायदे हैं।
1. आंवला खाने से शरीर में प्रोटीन का स्तर अधिक होता और नाइट्रोजन संतुलित होता है, जिससे फैट कम होता है और वजन घटाने में मदद मिलती है।2. आंवला खाने से खून साफ होता है। एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी के कारण त्वचा चमकती है।3. आंवले का जूस पेट से जुड़ी कई समस्याओं के लिए काफी फायदेमंद होता है। कब्ज से राहत मिलती है। अगर आपके पेट में जलन होती है और गैस की समस्या है तो आंवला जूस पीना चाहिए। अगर एसिडिटी की समस्या है तो घी के साथ आंवला जूस दिन में दो बार लेने से राहत मिलती है।4. आंवले का उपयोग नसों की कमज़ोरी दूर करने में सहायक होता है, क्योंकि आँवले में रसायन का गुण पाया जाता है। रसायन का गुण नसों में समय साथ हो रहे परिवर्तनों यानि डिजेनरेटिशन को नियंत्रित कर कमजोरी दूर करता है।5. आंवला का जूस आंखों से जुड़ी समस्याओं के लिए फायदेमंद होता है। इससे आंख की रोशनी तेज होती है। आंखों में खुजली या आंख से पानी गिरने की समस्या दूर होती है।6. रोज सुबह खाली पेट एक ग्लास पानी में दस एमएल आंवले का जूस मिलाकर लेने से शरीर में मौजूद सारे विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं।7. चरक संहिता में आयु बढ़ाने, बुखार कम करने, खांसी ठीक करने और कुष्ठ रोग का नाश करने वाली औषधि के लिए अमला (आंवला) का उल्लेख मिलता है। इसी तरह सुश्रुत संहिता में आंवला के औषधीय गुणों के बारे में बताया गया है. इसे अधोभागहर संशमन औषधि बताया गया है, इसका मतलब है कि आंवला वह औषधि है, जो शरीर के दोष को मल के द्वारा बाहर निकालने में मदद करता है। पाचन संबंधित रोगों और पीलिया के लिए आंवला का उपयोग किया जाता है। इसे कई जगहों पर अमला नाम से भी जाना जाता है।8.आमतौर पर उम्र के बढऩे के साथ कई लोगों को मोतियाबिंद की परेशानी होने लगती है। इससे बचने के लिए आंवला के साथ रसांजन, मधु और घी मिला लें। इस मिश्रण को आंखों में लगाने से आंखों के पीलेपन और मोतियाबिंद में फायदा मिलता है।9. कई बार असमय खाने या कुछ भी गलत खा लेने पर अपच या इंडाइजेशन हो जाता है। इसके लिए आंवला को पका लें। इसमें उचित मात्रा में काली मिर्च, सोंठ, सेंधा नमक, भूना जीरा और हींग मिला लें। इसे छाया में सुखाकर सेवन करने से भूख लगती है, तथा कब्ज और अपच जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।10. वर्तमान में डायबिटीज से अनेक लोग ग्रस्त हैं। इसके लिए आंवला, हरड़, बहेड़ा, नागरमोथा, दारुहल्दी एवं देवदारु लें। इनको समान मात्रा में लेकर पाउडर बना लें। इसे 10-20 मिली की मात्रा में सुबह-शाम डायबिटीज के रोगी को पिलाने से लाभ मिलता है।(नोट- कोई भी उपाय करने से पहले एक बार अपने चिकित्सक से अवश्य सलाह ले लें, क्योंकि हर किसी की तासीर अलग-अलग होती है।) - गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ ही ज्यादातर घरों में खान-पान में बदलाव भी देखा जा रहा है। इस मौसम में मूंगफली का सेवन विशेष तौर के किया जाता है। इसके अपने फायदे भी हंै। यह काफी स्वास्थ्यवर्धक भी होता है। स्किन से लेकर बालों और स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है। मूंगफली में विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट, खनिज और फैटी एसिड की मात्रा काफी ज्यादा पाई जाती है। काले नमक के साथ इसका स्वाद और भी ज्यादा बढ़ जाता है। लेकिन मूंगफली का अधिक सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है। आइये जाने मूंगफली की अधिक मात्रा के सेवन से क्या -क्या परेशानियां हो सकती हैं-एलर्जी की होती है शिकायतअधिक मूंगफली के सेवन से एलर्जी की शिकायत हो सकती है। कुछ लोगों को मूंगफली सूट नहीं करते हैं, ऐसे में उन्हें एलर्जी की समस्या हो सकती है। अगर मूंगफली खाने के बाद सांस लेने में परेशानी, लाल दाने जैसी शिकायत हो जाती है, तो बिल्कुल भी मूंगफली ना खाएं। अस्थमा के रोगियों को अधिक मूंगफली का सेवन नहीं करना चाहिए, इससे अस्थमा के अटैक का खतरा बढऩे की आशंका रहती है। वहीं थायरॉइड से ग्रसित व्यक्ति को डॉक्टर्स की सलाह लेकर ही मूंगफली का सेवन करना चाहिए।स्किन को पहुंच सकता है नुकसानअगर किसी की स्किन अति संवेदनशील है, तो अधिक मूंगफली खाने से बचें। इससे खुजली और रैशेज की शिकायत हो सकती है। अधिक संवेदनशील स्किन वालों के लिए मूंगफली खाना नुकसानदेय हो सकता है। इससे चेहरे और गले में सूजन की शिकायत हो सकती है।पेट में गैस की समस्यासर्दियों में जरूरत से ज्यादा मूंगफली खाने से गैस की शिकायत भी हो सकती है। एसिडिटी की परेशानी होने पर सीने में जलन, पेट में परेशानी और कई अन्य समस्याएं आपको हो सकती हैं। इसलिए अगर मूंगफली खाएं, तो सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करें।लिवर पर पड़ता है असरअधिक मूंगफली के सेवन से लिवर पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। ज्यादा मूंगफली खाने से लिवर में अफलेटोक्सिन की मात्रा काफी ज्यादा बढ़ जाती है। यह एक कार्सिनोजन है, जो लिवर से जुड़ी परेशानियों को बढ़ाता है।पेट खराब होने की संभावनामूंगफली की तासीर काफी ज्यादा गर्म होती है। इसलिए सर्दियों में इसका सेवन किया जाता है। गर्मी में अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से दस्त और उल्टी की शिकायत हो सकती है।ओमेगा-6 फैटी एसिडमूंगफली में ओमेगा-6 फैटी एसिड की मात्रा काफी ज्यादा होती है। यह शरीर के लिए काफी अच्छा माना जाता है। लेकिन यह शरीर में ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा को काफी कम कर देता है। शरीर के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड भी जरूरी होता है। ऐसे में दिल से जुड़ी समस्या और इंफ्लेमेशन होने की संभावना रहती है।
- सब्जियों का राजा बैंगन बहुत से लोगों की फेवरेट सब्जी होती है। इसका भर्ता स्वाद में लाजवाव होता है, जो काफी लोग पसंद करते हैं। इसकी टेस्टी और चटपटी सब्जियां भी लोग बहुत ही चाव से खाते हैं। सर्दियों में इसकी पैदावर काफी ज्यादा होती है। ठंड में इसके सेवन से सेहत को भी कई लाभ होते हैं। इसमें कई ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो सर्दियों में होने वाली समस्याओं से हमें दूर रखते हैं। लेकिन नाम की तरह इसमें कुछ बेगुन भी होते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन लोगों को बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए...बवासीर होने परबवासीर के रोगियों को बैंगन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। खूनी बवासीर से ग्रसित लोगों के लिए बैंगन घातक साबित हो सकता है। अगर ऐसे लोग बैंगन का सेवन करते हैं, तो उनकी समस्या बढ़ सकती है।किडनी में पथरीबैंगन में ओक्जेलेट नामक तत्व पाया जाता है, जो किडनी में पथरी की समस्या को बढ़ा सकता है। ऐसे में जो लोग किडनी की पथरी से परेशान हैं, उन्हें बैंगन से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा ओक्जेलेट की वजह से शरीर में कैल्शियम का सही तरीके से अवशोषण नहीं हो पाता है। इस वजह से हड्डी और दांतों में परेशानी बढ़ जाती है।गर्भवती महिलाबैंगन का अधिक सेवन गर्भवती महिलाओं के लिए घातक हो सकता है। बैंगन की तासीर बहुत ही ज्यादा गर्म होती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को बैंगन से दूर रहने की सलाह दी जाती है।एनीमिया की शिकायतमहिलाओं में खून की कमी आम बात है। एनीमिया से ग्रसित महिलाओं को भी ज्यादा बैंगन नहीं खाना चाहिए। खासतौर पर पीरियड्स के समय। इसके कई कारण हो सकते हैं। बैंगन की तासीर गर्म होने के कारण ब्लीडिंग होने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इसके अलावा यह गर्भाशय को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।डिप्रेशन की दवाओं के साथएंटी डिप्रेशन की दवा लेने वाले मरीजों को भी बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर वे अधिक बैंगन का सेवन करते हैं, तो इसमें मौजूद तत्व दवा से रिएक्शन करते हैं। ऐसे में मरीज पर दवा का असर काफी कम हो सकता है।फैट की समस्याबैंगन में फैट की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इसलिए कभी भी इसे अधिक तलकर ना खाएं। तलकर खाने से इसमें फैट की अधिकता और ज्यादा बढ़ सकती है। फैट दिल और दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर शरीर की चर्बी काफी ज्यादा बढ़ रही है, तो बैंगन से दूरी बना लेने में ही भलाई है।आंखों में जलनआंखों में जलन या फिर किसी तरह की परेशानी होने पर बैंगन ना खाएं। बैंगन के सेवन से नेत्र के विकार काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं। इसलिए अधिकतर डॉक्टर नेत्र विकार से पीडि़त मरीजों को बैंगन ना खाने की सलाह देते हैं।बैंगन का सेवन किस तरह करना लाभदायक होता है?-बैंगन को हमेशा उबालकर खाएं-कभी भी अधिक तला-भुना बैंगन ना खाएं।-बैंगन को अच्छी तरह से धोकर खाएं।-अगर भर्ता बना रहे हैं, तो काटकर चेक करें कि कहीं उसमें कीड़े तो नहीं।-बैंगन को कोयले या फिर कंडे में भूनकर उसका भर्ता खाएं।
- अजवाइन के इस्तेमाल से खाने का स्वाद काफी ज्यादा बढ़ जाता है। हर एक भारतीय रसोई में अजवाइन बहुत ही आसानी से आपको मिल जाएगा। यह एक विशेष भारतीय मसाला है, जिसका इस्तेमाल अधिकतर लोग करते हैं। अजवाइन से तैयार काढ़े से पाचन क्रिया को दुरुस्त किया जा सकता है। इसकी मदद से आप कई छोटी और बड़ी बीमारियों को ठीक कर सकते हैं। पाचन के लिए अजवाइन बहुत फायदेमंद है, लेकिन इसकी पत्तियों का सेवन में शरीर को अनेक लाभ देता है। आज हम आपको इसकी पत्तियों के सेवन से होने वाले लाभ के बारे में बताने जा रहे हैं।अजवाइन की पत्तियों में कई स्वास्थ्यकारी गुण छिपे होते हैं। इतना ही नहीं इसके पौधों को घरों में लगाने से यह एक एंटी प्यूरीफाइड की तरह कार्य करता है, जो आसपास के वातारवरण को स्वस्थ रखने में आपकी मदद कर सकता है। अजवाइन की पत्तियों से आने वाली खूशबू आपके वातावरण को फ्रेश करती है, इसलिए बहुत से लोग अपने घरों में अजवाइन का पौधा लगाते हैं। इसके पौधों से आने वाली भीनी-भीनी सी खूशबू हमारे दिमाग को तरोताजा करती है। अगर आप सुबह-सुबह तरोताजा महसूस करना चाहते हैं, तो अपने घर में एक छोटा का अजवाइन का पौधा जरूर लगाएं ताकि इसकी पत्तियों का इस्तेमाल कर आप कई समस्याओं से छुटकारा पा सकें।इसकी पत्तियों से मिलते हैं ये लाभ- अगर रोजाना इसके पौधों से कुछ पत्तियों को तोड़कर खाने में इस्तेमाल किया जाए, तो यह यूरीन से जुड़ी तमाम समस्याओं से छुटकारा दिला सकता है। अजवाइन की पत्तियों में संतुलित रूप से आयरन, सोडियम, पोटैशियम और कैल्शियम पाया जाता है, जो यूरीन से संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकता है। इसकी पत्तियों के इस्तेमाल से मस्तिष्क और पाचन नली में किसी भी तरह के सूजन और संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। इसमें कई तरह के एंटी एजिंग गुण पाए जाते हैं, तो सेहत के लिए बहुत ही गुणकारी माने जाता हैं।- अजवाइन के पत्तियों से तैयार चाय से ना सिर्फ पेट दर्द की समस्या से छुटकारा मिलता है, बल्कि इससे कई बीमारियों को खत्म भी किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल आप औषधीय जड़ी-बूटियों के रूप में कर सकते हैं। आयुर्वेद में भी अजवाइन की पत्तियों का इस्तेमाल औषधी के रूप में किया जाता है। इसमें कई शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट, एंटीकैंसर, एंटीबायोटिक और एंटी-इन्फ्लैमेटरी के गुण पाए जाते हैं, तो फेफड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।- अजवाइन के पत्तों की चाय रोजाना पीने से शरीर डिटॉक्स होता है। इसकी इसकी पत्तियों का इस्तेमाल सूखाकर भी कर सकते हैं। इसमें फाइबर, नियासिन, फोलेट, लेटेन, मैग्नीज, लोटे, क्रिप्टोक्सैथिन जैसे कई तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखते हैं।- अजवाइन की पत्तियों का जूस अगर रोजाना पीने से तंत्रिका तंत्र की थकान खत्म हो जाती है। इसके साथ ही इनकी पत्तियों का इस्तेमाल ऐसे लोगों को भी करना चाहिए, जो अर्थराइटिस और रह्यूमेटाइड जैसी समस्याओं से जूझ रहे होते हैं। यह हड्डियों की सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।- मौसम बदलने के साथ-साथ कई लोगों को सर्दी-जुकाम की समस्याएं होने लगती हैं। सर्दी-जुकाम की समस्या से राहत पाने के लिए सबसे पहले आजवाइन की कुछ पत्तियों को लें। इसे 1 गिलास पानी में अच्छी तरह से उबालें। इस पानी को तब तक उबालें जब तक पानी आधा ना हो जाए। पानी अच्छी तरह से उबलने के बाद इसे आंच से उतारकर इसे ठंडा करें। इसके बाद इसे पिएं। अगर आप इसका स्वाद बदलना चाहते हैं, तो इसमें थोड़ा सा शहद मिला लें।- मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द से भी अजवाइन की पत्तियां शरीर को राहत दिला सकती हैं। मांसपेशियों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए एक टब में गर्म पानी भरें। इसमें अजवाइन की कुछ पत्तियां डालकर कम से कम 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद इस पानी से नहाएं या फिर सिंकाई करें। इससे शरीर को काफी राहत मिलेगी।
- छत्तीसगढ़ में ठंड ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। ठंड के साथ खानपान में भी काफी बदलाव आते हैं, लेकिन खिचड़ी एक ऐसा सदाबहार फूड है, जिसे हर मौसम में खाया जा सकता है। खासकर सर्दियों में इसे खाना काफी फायदेमंद होता है।सर्दियों में हमें ऐसे खाने की जरूरत होती है जो हमारे शरीर को गर्मी प्रदान करें। आइए जानते हैं सर्दियों में खिचड़ी खाने के फायदे...- दाल, चावल, सब्जियों और मसालों के साथ तैयार की गई खिचड़ी काफी स्वादिष्ट और पोषण से भरपूर होती है, जो शरीर को ऊर्जा और पोषण देती है। इसके माध्यम से एक साथ सभी पोषक तत्व प्राप्त किए जा सकते हैं।- पाचन क्षमता कमजोर होने पर भी खिचड़ी आसानी से पच जाती है और पाचन क्रिया को दुरुस्त करती है, इसलिए बीमारी में मरीजों को इसे खिलाया जाता है, क्योंकि उस वक्त पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है।- सर्दियों के मौसम में ठंड लगने की वजह से बहुत से लोगों को कफ, बुखार, कमजोरी आदि की शिकायत हो जाती है। ऐसे में यदि खिचड़ी का सेवन किया जाए, तो शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे शरीर जल्दी स्वस्थ हो जाता है और सर्दियों में आसानी से काम करता है।- महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान अक्सर कब्ज या अपच की स्थिति बनती है, ऐसे में उनके लिए खिचड़ी खाना फायदेमंद होता है और आरामदायक भी। इसे खाने के बाद पेट में अतिरिक्त भारीपन नहीं लगता और जल्दी पाचन भी हो जाता है।-खिचड़ी बनाने के लिए इसमें मूंग दाल, चावल के साथ गाजर, मटर, सेम, पालक, शिमला मिर्च , टमाटर, गोभी भी डाला जा सकता है, जो शरीर को लाभ पहुंचाते हैं। इसे मसाला खिचड़ी कहते हैं। फिर खिचड़ी के चार यार तो साथ होते ही हंै- जैसे दही, चोखा, पापड़, घी और अचार, मतलब अगर खिचड़ी बनी है तो उसके साथ चार चीजें बहुत जरुरी हैं, यानी खिचड़ी के साथ थाली में दही, चोखा (भर्ता) पापड़, घी और अचार का होना बहुत जरुरी है, तभी इसका स्वाद आता है। चोखा बैंगन या फिर आलू का भी हो सकता है। मूंग दाल - चावल की खिचड़ी के अलावा, उड़द दाल-चावल, अरहर दाल-चावल और ज्वारे की खिचड़ी भी काफी पसंद की जाती है, जिसके अपने-अपने गुण और फायदे हैं।
- हल्दी हमारी रसोई के मसालों का एक अभिन्न हिस्सा है। बात चाहें खाने की करें या घरेलू नुस्खों की करें ये हर काम में इस्तेमाल किया जाता है। वहीं बात अगर आयुर्वेद की करें, तो ऑयुर्वेद में हल्दी को कई औषधीय गुणों की भरमार माना जाता है। ये जहां छोटी मोटी चोटों को ठीक कर सकता है, वहीं हड्डियों के दर्द को भी कम कर सकता है। साथ ही इसके एंटीवायरल और एंटीबायोटिक गुणों से तो हम लोग वाकिफ हैं ही, जिसे हम नजरअंदाज नहीं कर सकते है। पर क्या आपको पता है कि बाजार से मिलना वाला हेल्दी पाउडर भी इन्हीं गुणों वाला है या नहीं?हल्दी पाउडरबाजार में मिलने वाला हल्दी पाउडर जिस प्रोसेस के जरिए तैयार होता है, उसके बारे में हम सभी ज्यादा नहीं जानते हैं। कई बार इन हल्दी पाउडर में मिलावटी रंग भी होते हैं, जो कि शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकता है। पहले घरों में ही हल्दी को कूट-छानकर तैयार किया जाता था। या फिर हल्दी की गांठ को पानी में भिगोकर उसे सिलबट्टे पर पीसा जाता था और फिर उसे सब्जी में डाला जाता था, पर अब ऐसा नहीं होता। जहां तक हल्दी तैयार करने की विधि के बारे में बात करें, तो ये सूखे हल्दी को छीलकर, उबालकर और सुखाकर बनाया जाता है, जिसे बाद बेचा जाता है। हल्दी सूखने की इस प्रक्रिया में अपने कुछ आवश्यक तेलों और गुणों को खो देती है, लेकिन फिर भी यह गर्मी और रंग प्रदान कर सकती है।कच्ची हल्दीताजा हल्दी अक्सर जड़ वाली हल्दी को कहा जाता है, जो कि अदरक के समान दिखते हैं। अदरक की तुलना में इनके ताजा जड़ सूखी हल्दी की तुलना में एक जीवंत स्वाद देते हैं। इस हल्दी का रंग नारंगी और भूरा जैसा लग सकता है। वहीं इसमें कड़वाहट थोड़ी ज्यादा होती है। अदरक की तरह, हल्दी को आप सूखा कर लंबे समय तक के लिए रख सकते हैं। फिर जब भी आपको जरूरत पड़े आप इसका पाउडर बना कर या इसे पीस कर इस्तेमाल कर सकते हैं।कच्ची हल्दी के फायदे1.कच्ची हल्दी में ज्यादा होती है करक्यूमिनकच्छी हल्दी में करक्यूमिन की मात्रा अधिक होती है। ये हल्दी किसी भी तरह की चोट के लिए एक आदर्श मरहम हो सकती है। करक्यूमिन, हल्दी का वो मेडिकल गुण है, जिसके कारण हल्दी करक्यूमिन को एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुणों से भरा माना जाता है, जो हीलिंग को बढ़ाता है।2.हड्डियों के लिए ज्यादा फायदेमंद है कच्ची हल्दीकच्ची हल्दी की तुलना में हल्दी पाउडर में कम एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इस तरह से कच्ची हल्दी हड्डियों में दर्द के लिए ज्यादा फायदेमंद है। वहीं ये ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटाइड आर्थराइटिस के उपचार के लिए भी जरूरी है। इस तरह कच्ची हल्दी घरेलू नुस्खों के लिए बेहतर है। वहीं गठिया के लोगों को कच्ची हल्दी को दूध में उबाल कर पीना चाहिए।3.त्वचा के लिएकच्ची हल्दी में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट फाइन रेडिकल्स को रोकने में मदद कर सकते हैं, जो त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकता है। कच्ची हल्दी का उपयोग त्वचा की बीमारियों को ठीक करने के सबसे पुराने और पारंपरिक तरीकों में से एक है। यह वायु प्रदूषण के कारण होने वाली त्वचा की समस्याओं को ठीक करने के लिए भी जाना जाता है।इस तरह कभी भी हल्दी के पाउडर की तुलना में कच्ची हल्दी का इस्तेमाल करें और उन्हें पीस कर इस्तेमाल करें। वहीं अगर आप पाउडर का उपयोग कर रहे हैं, तो खुले हुए पाउडर का इस्तेमाल न करें और देख कर इस्तेमाल करें। कोशिश ये रखें कि बाजार से कच्ची हल्दी खरीदें और उन्हें ही पीस कर इस्तेमाल करें।
- कटेली या भटकटैया एक कांटेदार पौधा होता है , जो जमीन पर फैलता है। इसके पत्ते हरे होते और उसके साथ में लंबे-लंबे कांटे होता हंै। इसके फूल बैंगनी और सफेद रंग के होते हैं। आयुर्वेद में इस कांटेदार पौधे के अनेक गुण बताए हैं। इसकी प्रकृति गर्म होती और शरीर में पसीना पैदा करती है। संस्कृत में कटेरी, कंटकारी, छोटी कटाई, भटकटैया आदि नामों से जाना जाता है।कटेरी अक्सर जंगलों और झाडिय़ों में बहुतायत रूप से पाया जाता है। आमतौर पर कटेरी की तीन प्रजातियां पाई जाती हैं। छोटी कटेरी, बड़ी कटेरी और श्वेत कंटकारी। जिनका प्रयोग रोगों को दूर करने के लिए औषधि के तौर पर किया जाता है। कटेरी का प्रयोग पथरी, लिवर का बढऩा और माइग्रेन जैसे गंभीर रोगों में किया जाता है। इसके और भी कई लाभ हैं। माइग्रेन, और सिरदर्द में कंटकरी का प्रयोग काफी फायदेमंद है। इसके अलावा अस्थमा में , गठिया में दर्द और सूजन को कम करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसके तने, फूल और फल, कड़वे होने के कारण, पैरों में होने वाली जलन से राहत दिलाने में मदद करते हैं।भटकटैया के कच्चे फल हरित रंग के, लेकिन पकने के बाद पीले रंग के हो जाते हैं। बीज छोटे और चिकने होते हैं। भटकटैया की जड़ औषधि के रूप में काम आती है। यह तीखी, पाचनशक्तिवद्र्धक और सूजननाशक होती है और पेट के रोगों को दूर करने में मदद करती है।भटकटैया का पौधा ब्रेन ट्यूमर के उपचार में सहायक होता है। वैज्ञानिक के अनुसार पौधे का सार तत्व मस्तिष्क में ट्यूमर द्वारा होने वाले कुशिंग बीमारी के लक्षणों से राहत दिलाता है। मस्तिष्क में पिट्युटरी ग्रंथि में ट्यूमर की वजह से कुशिंग बीमारी होती है। कांटेदार पौधे भटकटैया के दुग्ध युक्त बीज में सिलिबिनिन नामक प्रमुख एक्टिव पदार्थ पाया जाता है, जिसका इसका उपयोग ट्यूमर के उपचार में किया जाता हैं। भटकटैया अस्थमा रोगियों के लिए फायदेमंद होता है।भटकटैया की जड़ के साथ गुडूचू का काढ़ा बनाकर पीना खांसी में लाभकारी सिद्ध होता है। भटकटैया दर्दनाशक गुण से युक्त औषधि है। साथ ही यह अर्थराइटिस में होने वाले दर्द में भी लाभकारी होता है। इसके अलावा सिर में दर्द होने पर भटकटैया के फलों का रस माथे पर लेप करने से सिर दर्द दूर हो जाता है।---
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कोरोना काल में इम्यूनिटी मजबूत रखना बहुत ही जरूरी हो चुका है। इम्यूनिटी कमजोर होने की वजह से लोग कई तरह की बीमारियों के चपेट में आ सकते हैं। इम्यूनिटी को मजबूत रखने के लिए लोग कई तरह के उपाय अपना रहे हैं, लेकिन आयुर्वेदिक तरीके से इम्यूनिटी को मजबूत करने का तरीका सबसे बेहतर तरीका माना जाता है। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाइयों के कई साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, लेकिन नेचुरल उपायों के दुष्प्रभाव बहुत कम देखे जाते हैं। इसके साथ-साथ इम्यूनिटी को स्ट्रॉन्ग करने के लिए खानपान का भी विशेष ख्याल रखना चाहिए। इसके साथ-साथ कुछ घरेलू उपायों से इम्यूनिटी को मजबूत करने की कोशिश करनी चाहिए।
आज हम आपको नीम और एलोवेरा से तैयार एक ड्रिंक के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपकी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में आपकी मदद कर सकता है। इस लाजवाब ड्रिंक से ना सिर्फ आप अपनी इम्यूनिटी को मजबूत कर सकते हैं, बल्कि इसकी मदद से आप अपने वजन को भी काफी तेजी से घटा सकते हैं।एलोवेरा के फायदेएलोवेरा का पौधा देखने में आपको काफी सामान्य लगता है, लेकिन यह कई तरह के औषधीय गुणों से भरपूर होता है। आयुर्वेद में इसे औषधियों का राजा कहा जाता है। इससे स्किन से लेकर पाचन से जुड़ी समस्याएं को कंट्रोल किया जा सकता है। इसके साथ ही ब्लड शुगर और डायबिटीज से पीडि़त मरीजों के लिए भी एलोवेरा काफी फायदेमंद हो सकता है। जोड़ों में दर्द, पेट दर्द और आंखों की परेशानियों से जूझ रहे लोगों के लिए भी एलोवेरा काफी फायदेमंद होता है।नीम के फायदेनीम की पत्तियों से लेकर इसका छाल हमारे लिए फायदेमंद होता है। नीम एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी के गुणों से भरपूर होता है। यह हमें कई गंभीर समस्याओं से दूर रखने में हमारी मदद कर सकता है। स्किन से लेकर बालों की समस्याओं से छुटकारा दिलाने के साथ-साथ डायबिटीज, लिवर की समस्या, कैंसर जैसे कई गंभीर बीमारियों से भी हमारी रक्षा करता है। आयुर्वेद में नीम का इस्तेमाल काफी सालों से किया जा रहा है। इसका सेवन आप कई रूपों में कर सकते हैं। कई लोग नीम का जूस पीते हैं, ताकि उनके शरीर का ब्लड साफ हो सके। इसके अलावा स्किन की कई समस्याओं के लिए भी नीम का इस्तेमाल किया जाता है।ड्रिंक बनाने का तरीकाआवश्यक सामाग्रीनीम के पत्ते का रस - 1 चम्मचएलोवेरा जेल - 1 चम्मचपानी - 1 कपशहद - 1 चम्मचविधिसभी चीजों को एक मिक्सर ग्राइंडर में डालें।अब इसे अच्छी तरह पीसें।अच्छी तरह ग्राइंडर में मिश्रण को पीसने के बाद इसे छान लें।अब इसमें स्वादानुसार शहद मिलाकर इसका सेवन करें।इस बेहतरीन ड्रिंक के सेवन से कुछ ही दिनों में आपके सामने चौंका देना वाला रिजल्ट होगा।एलोवेरा और नीम का जूस पीने के अन्य फायदे-डायबिटीज की समस्या से मिलेगा छुटकारा-स्किन की परेशानियां होगी दूर-शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकलेंगे-पेट की हर एक समस्या होगी दूर-बालों में डैंड्रफ की परेशानी से मिलेगा छुटकारा-कैंसररोधी ड्रिंक के रूप में करेगा काम-आंखों की परेशानी से मिलेगा निजात - शरीर में खून यानि ब्लड ही है जिसके सहारे शरीर का हर अंग काम कर पाता है। ये शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाता है और शरीर का तापमान कंट्रोल करता है। इसके अलावा ब्लड छोटे-छोटे न जाने कितने काम करता है, जिनके बिना जीवन मुमकिन नहीं है। दरअसल हम जो कुछ खाते-पीते हैं उसमें मौजूद पौष्टिक तत्वों को अलग-अलग अंगों तक पहुंचाने का काम ब्लड ही करता है, जिससे शरीर सुचारु रूप से काम कर पाता है। गलत और अनहेल्दी आहार खाने से हमारे ब्लड में कुछ ऐसे तत्व भी पहुंच जाते हैं जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। इसी को खून खराब होना कहते हैं। ब्लड में गंदगी से फोड़े-फुंसी, पिंपल और चर्म रोग हो जाते हैं। इसके अलावा जल्दी थक जाना, वजन कम हो जाना, पेट की समस्याएं आदि भी ब्लड में गंदगी की वजह से हो जाती हैं। लेकिन ब्लड में मौजूद विषैले तत्वों को कुछ आहारों और जीवनशैली में परिवर्तन की मदद से बाहर निकाला जा सकता है।खूब पानी पियेंहमारे शरीर का एक-तिहाई हिस्सा पानी से बना हुआ है। ब्लड साफ करने का सबसे आसान तरीका है कि खूब पानी पियें। अगर आप रोजाना 3 से 4 लीटर पानी पीते हैं तो ब्लड में गंदगी की समस्या आपको कभी नहीं होगी। पानी से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ और हानिकारक बैक्टीरिया यूरिन और मल के माध्यम से निकल जाते हैं।सौंफ खाएंसौंफ खून की सफाई के लिए सबसे अच्छा विकल्प है। रोजाना सौंफ के इस्तेमाल से शरीर का ब्लड डिटॉक्सिफाई होता रहता है और गंदगी शरीर से बाहर निकलती रहती है। इसलिए रोज के खाने के बाद थोड़ा सा सौंफ खाएं। सौंफ में कई तत्व होते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखते हैं और आंखों की रोशनी बढ़ाते हैं। आप रोजाना खाने के 5 मिनट बाद एक चम्मच सौंफ में आधा चम्मच मिश्री मिलाकर खाएं। सौंफ और मिश्री खाने की परंपरा भारत में काफी पुराने समय से चल रही है।शारीरिक मेहनत या व्यायाम करेंअगर आप शारीरिक मेहनत वाला कोई काम करते हैं तो ठीक और अगर नहीं करते हैं तो थोड़ा सा समय एक्सरसाइज के लिए जरूर निकालें। घर के काम करने वाली महिलाओं को भी शारीरिक व्यायाम करना चाहिए। इससे उनका शरीर फिट रहता है और शरीर गंभीर रोगों से दूर रहता है। व्यायाम करने या शारीरिक मेहनत के समय शरीर से जो पसीना निकलता है, उसके सहारे भी शरीर की तमाम गंदगी शरीर से बाहर निकलती है। इसलिए व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।ग्रीन टी पियेंग्रीन टी भी आपके ब्लड को प्यूरिफाई करने का गुण रखती है। ज्यादातर लोग ग्रीन टी को वजव घटाने के लिए ही पीते हैं जबकि ये आपके मेटाबॉलिज्म को ठीक करती है और शरीर में मौजूद अशुद्धियों को बाहर निकालने में मदद करती है। इसके अलावा ग्रीन टी पीने से तनाव और डिप्रेशन से भी राहत मिलती है।फाइबर और विटामिन सी युक्त आहारखून की अशुद्धियों को दूर करने के लिए आपको फाइबर और विटामिन सी युक्त आहार लेना चाहिए। फाइबर के लिए हरी सब्जियां, गाजर, मूली, चुकंदर, शलजम, फल, ड्राई फ्रूट्स और मोटा अनाज ले सकते हैं। विटामिन सी के लिए नींबू, संतरा, आंवला और पपीता आदि ले सकते हैं। ये सभी आहार खून को शुद्ध करने के साथ-साथ आपके शरीर को भी स्वस्थ रखेंगे। चुकंदर खाने से ब्लड में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है।
- आलूबालू, गिलास या चेरी एक खट्टा-मीठा गुठलीदार फल है। इसका रंग लाल, काला या पीला होता है और इसका आकार आधे से सवा इंच के व्यास (डायामीटर) का गोला होता है।आलूबालू में ऐन्थोसाय्निन नाम के पदार्थ होते हैं जो शरीर के अंगों में जलन और दर्द कम करते हैं। माना जाता है के मधुमेह और ह्रदय व अन्य ग्रंथियों के रोगों में छुपी हुई जलन का बहुत बड़ा हाथ है। चूहों के साथ प्रयोगों में देखा गया है के आलूबालू के ऐन्थोसाय्निन जलन हटाने में मदद करते हैं।भारत में आलू बालू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तरपूर्वी राज्यों में पैदा किया जाता है। विश्व भर में सन् 2007 में 20 लाख टन आलूबालू पैदा किया गया था, जिसमें से 40 प्रतिशत यूरोप में और 13 प्रतिशत संयुक्त राज्य अमेरिका में पैदा किया गया। आलूबालू को कश्मीरी में भी गिलास कहा जाता है। नेपाली में इसे पैयुं कहा जाता है। अंग्रेज़ी में इसे चेर, पंजाबी और उर्दू में इसे शाह दाना कहा जाता है। अरबी में इसे कज़ऱ् कहा जाता है।चेरी का खाने में उपयोग-चेरी एक स्वादिष्ट फल है जो विभिन्न तरह से भोज्य पदार्थों में उपयोग किया जाता है। इस फल को व्यंजनों तथा पेय पदार्थों की सजावट के तौर पर भी प्रयोग करते हैं। कॉकटेल में इसका खूब उपयोग होता है। चेरी शेक, जूस इत्यादि स्वादिष्ट पेय बनाए जाते हैं। चैरी के विभिन्न पोषक तत्व चेरी स्वास्थ्यप्रद फल है जो अनेक पोषक तत्वों से भरपूर है। यह विटामिन सी और ए का अच्छा स्रोत है। इसके साथ ही इसमें अधिकांश विटामिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पाए जाते हैं। चेरी फोलिक एसिड, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फ़ॉस्फोरस जैसे खनिज तत्वों का भी एक अच्छा स्रोत है। एसिडिटी से छुटकारे के लिए आप चेरी को खा सकते हैं या चेरी का जूस भी ले सकते हैं जो फायदेमंद होता है। चेरी खाने से मधुमेह नियंत्रित हो सकता है। चेरी के मीठे और खट्टे फल में महत्वपूर्ण तत्व ऐन्थोसाइनिन शरीर में इन्सुलिन की मात्रा बढ़ाने के साथ साथ रक्त में शुगर की मात्रा को नियंत्रित रखता है और हृदय से संबंधी बीमारियों के खतरे को भी कम करने में सहायक है।--------
- आलू सभी का पसंदीदा होता है जिसे सब्जी, चिप्स आदि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसमें पाये जाने वाला एक पदार्थ सोलेनाइन काफी विषैला होता है और यह पदार्थ केवल हरे आलू में पाया जाता है।आलू नाइटशैड (धतूरा) की फैमिली में आता है। इस फैमिली के पौधे अपने में टॉक्सिक कंपाउंड सोलेनाइन जमा करते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इतिहास में बेलाडोना आलू को लोगों की जान लेने के लिए याद किया जाता है। दरअसल इसके बारे में प्रसिद्ध है कि स्कॉटिश के राजा मेकबेथ ने अपने दुश्मनों को जान से मारने के लिए बेलाडोना आलू का इस्तेमाल किया था। आलू में सोलेनाइन इसके तना और अंकुर में जमा होता है। सोलेनाइन खासतौर पर हरा आलू में पाया जाता है। इसी तरह से आलू के अंकुरित हिस्से का भी प्रयोग नहीं करना चाहिए।आलू में विटामिन सी, बी कॉम्पलेक्स तथा आयरन , कैल्शियम, मैंगनीज, फास्फोरस तत्व होते हैं। आलू के प्रति 100 ग्राम में 1.6 प्रतिशत प्रोटीन, 22.6 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 0.1 प्रतिशत वसा, 0.4 प्रतिशत खनिज और 97 प्रतिशत कैलोरी पाई जाती है। आलू खाते रहने से रक्त वाहिनियां बड़ी आयु तक लचकदार बनी रहती हैं तथा कठोर नहीं होने पातीं।यदि दो-तीन आलू उबालकर छिलके सहित थोड़े से दही के साथ खा लिए जाएं तो ये एक संपूर्ण आहार का काम करते हैं। आलू मोटापा नहीं बढ़ाता है। आलू को तलकर तीखे मसाले घी आदि लगाकर खाने से जो चिकनाई पेट में जाती है, वह चिकनाई ही मोटापा बढ़ाती है। आलू को उबालकर या गर्म रेत अथवा गर्म राख में भूनकर खाना लाभकारी है। सूखे आलू में 8.5 प्रतिशत प्रोटीन होता है जबकि सूखे चावलों में 6 - 7 प्रतिशत प्रोटीन होता है। इस प्रकार आलू में अधिक प्रोटीन पाया जाता है। आलू में मुर्गियों के चूजों जैसी प्रोटीन होती है। बड़ी आयु वालों के लिए प्रोटीन आवश्यक है। आलू की प्रोटीन बूढ़ों के लिए बहुत ही शक्ति देने वाली और वृद्धावस्था की कमजोरी दूर करने वाली होती है। आलू रक्तचाप को सामान्य बनाने में लाभ करता है क्योंकि आलू में मैग्निशियम पाया जाता है।
- ब्लोटिंग यानी पेट फूलना एक आम पेट की समस्या है जो अन हेल्दी डाइट खाने या अधिक खाने के कारण होती है। इसके अलावा भी कुछ बीमारियां भी सूजन और पानी की अधिकता का कारण ब सकती हैं। जिसके कारण हर समय पेट भरा हुआ लगता है। इसी पेट की परेशानी के कारण आप असहज महसूस करते हैं।यह समस्या अब आम हो गई है। बहुत से, लोगों ने ब्लोटिंग से राहत पाने के लिए हर्बल चाय के प्राकृतिक उपचार का उपयोग किया है और उनको फायदा भी मिला है। कई हर्बल चाय इस असहज स्थिति को शांत करने में मदद कर सकती है। देखें कौन सी हर्बल चाय से इस समस्या से आराम मिलता है-पुदीना की पत्तियों से बनी चायप्राचीन समय से ही पुदीने को व्यापक रूप से पचाने में मदद करने के लिए पहचाना जाता है। इसमें ठंडक व ताजगी देने वाले गुण होते हैं। पुदीना से पेट की सफाई होती है। इसलिए यह हमारे पेट के लिए बहुत ही अच्छा पाचक तत्व है। इसके कैप्सूल्स से भी ब्लोटिंग की समस्या से राहत मिल सकती है। इसके अलावा पुदीन की चाय भी फायदा करती है। इसे बनाने के लिए एक कप पानी में कुछ पत्ती पुदीने की और टी बैग डालें। इसे छान कर पीने से पेट फूलने की समस्या से तुरंत आराम मिलता है।सौंफ की चायसौंफ़ के दानें, या सौंफ, सबसे अच्छा देसी मसाला माना जाता है। सौंफ़ का प्रयोग आज से नहीं, पारंपरिक रूप से पहले से ही भारतीय खाने में किया जाता है। यह शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा करती हैं और पाचन तंत्र के सुचारू संचालन में भी मदद करती हैं। सौंफ़ भोजन को पचाने में सहयोग करता है; यही कारण है कि भारतीय इसका सेवन रात के खाने के बाद भी करते हैं। सौंफ़ के एंटी-ब्लोटिंग लाभ पाने के लिए पानी के साथ उबालें और सेवन करें। सब तरह की गैस और ऐंठन मिनटों में दूर हो जाती है।अजवायन की चायअजवायन के बीज, गैस और अपच के लिए सबसे अच्छे देसी उपचारों में से एक हैं। स्वाद बढ़ाने के लिए हमारे कई व्यंजनों में अजवायन का प्रयोग किया जाता है और जब चाय के रूप में इसका सेवन किया जाता है, तो इसमें मौजूद थाइमोल की उपस्थिति के कारण यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है। अजवायन के बीज को पेट फूलने के लिए भी एक प्रभावी उपाय कहा जाता है। इस हर्बल चाय को बनाने के लिए पानी में कुछ अजवायन के बीज उबालें, पानी को एक कप में छान लें और इसमें काला नमक, शहद (या गुड़) और नींबू मिलाकर पीने से पेट फूलने की समस्या से राहत मिलती है।अदरक नींबू और शहद की चायअदरक सबसे महत्वपूर्ण मसालों में से एक है जिसका उपयोग सूजन को दूर करने और गर्मियों के दौरान अन्य पाचन संबंधी परेशानियों को दूर रखने के लिए किया जा सकता है। स्वाद बढऩे के लिए उसमे शहद और नींबू का इस्तेमाल किया जा सकता है। शहद इम्यूनिटी बढ़ाने वाला स्वीटनर है। जबकि नींबू विटामिन सी प्रदान करता है। जो त्वचा के साथ-साथ शरीर के अन्य कार्यों को भी स्वस्थ रख सकता है। अदरक, शहद और नींबू की चाय को चाय की पत्तियों (कैफीन मुक्त) के उपयोग के साथ या बिना तैयार किया जा सकता है, लेकिन ब्लोटिंग से राहत पाने के लिए कैफीन का इस्तेमाल कम करना बेहतर होता है।कैमोमाइल की पत्तियों की चायकैमोमाइल फूल कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं, जिनमें तनाव से लडऩा और सूजन को कम करना इसकी दो मुख्य विशेषताएं हैं। कैमोमाइल चाय फंसी हुई गैस को छोडऩे में भी मदद करती है। इससे सूजन से राहत भी मिलती है। हर्बल चाय के अन्य कथित लाभों में से एक मासिक धर्म की ऐंठन से राहत और शरीर दर्द से राहत शामिल हैं। इसे बनाने के लिए एक कप उबले हुए पानी में एक कैमोमाइल का ड्राई टी बैग डाल दें और 10 मिनट के लिए रख दें। फिर छान कर पीयें।
- पान एक बहुवर्षीय बेल है, जिसका उपयोग हमारे देश में पूजा-पाठ के साथ-साथ खाने में भी होता है। खाने के लिए पान पत्ते के साथ-साथ चूना कत्था तथा सुपारी का प्रयोग किया जाता है। इसे संस्कृत में नागबल्ली, ताम्बूल हिन्दी भाषी क्षेत्रों में पान मराठी में पान/नागुरबेली, गुजराती में पान/नागुरबेली तमिल में बेटटीलई,तेलगू में तमलपाकु, किल्ली, कन्नड़ में विलयादेली और मलयालम में बेटीलई नाम से पुकारा जाता है।पान अपने औषधीय गुणों के कारण पौराणिक काल से ही प्रयुक्त होता रहा है। आयुर्वेद के ग्रन्थ सुश्रुत संहिता के अनुसार पान गले की खरास एवं खिचखिच को मिटाता है। यह मुंह के दुर्गन्ध को दूर कर पाचन शक्ति को बढ़ाता है, जबकि कुचली ताजी पत्तियों का लेप कटे-फटे व घाव के सडऩ को रोकता है। अजीर्ण एवं अरूचि के लिए प्राय: खाने के पूर्व पान के पत्ते का प्रयोग काली मिर्च के साथ तथा सूखे कफ को निकालने के लिये पान के पत्ते का उपयोग नमक व अजवायन के साथ सोने के पूर्व मुख में रखने व प्रयोग करने पर लाभ मिलता है। पान एक जड़ी-बूटी की तरह भी काम करता है, और पान के कई सारे औषधीय गुण हैं। क्या आपको पता है कि सिर दर्द, आंखों की बीमारी, कान दर्द, मुंह के रोग, बच्चों की सर्दी में पान के इस्तेमाल से फायदे ले सकते हैं। इतना ही नहीं, कुक्कर खांसी, सर्दी-जुकाम, ह्रदय रोग, सांसों के रोग में भी पान के औषधीय गुण से लाभ मिलता है।पान भारतीय संस्कृति का हिस्सा होने साथ एक महत्वपूर्ण औषधि भी है। पान के पत्तों में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह, आयोडीन और पोटैशियम जैसे तत्व भी पाए जाते हैं। सर्दी खांसी और जुकाम होने पर सेंकी हुई हल्दी का टुकड़ा पान में डालकर खाने से आराम मिलता है। उंगलियों में सूजन की शिकायत काफी लोगों को होती है, इसे कम करने के लिए पान के पत्तों को गर्म करके अंगुली पर लपेटने से लाभ मिलता है।पाचन में सहायकपान खाना पाचन क्रिया के लिए फायदेमंद है। ये सैलिवरी ग्लैंड को सक्रिय करके लार बनाने का काम करता है जो कि खाने को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोडऩे का काम करता है। कब्ज की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए भी पान की पत्ती चबाना काफी फायदेमंद है। गैस्ट्रिक अल्सर को ठीक करने में भी पान खाना काफी फायदेमंद है।मुंह के स्वास्थ्य के लिएपान के पत्ते में कई ऐसे तत्व होते हैं जो बैक्टीरिया के प्रभाव को कम करने में सहायक होते हैंै। जिन लोगों के मुंह से दुर्गंध आ रही हो उनके लिए पान का सेवन काफी फायदेमंद होता हैै। इसमें इस्तेमाल होने वाले मसाले जैसे लौंग, कत्था और इलायची भी मुंह को फ्रेश रखने में सहायक होते हैं। पान खाने वालों के लार में एस्कॉर्बिक एसिड का स्तर भी सामान्य बना रहता है, जिससे मुंह संबंधी कई बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है।मसूड़ों में सूजनपर या गांठ आ जाने परमसूड़े में गांठ या फिर सूजन हो जाने पर पान का इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है। पान में पाए जाने तत्व इन उभारों को कम करने का काम करते हैं।साधारण बीमारियों और चोट लगने परसर्दी में भी पान के पत्ते फायदेमंद होते हैं। इसे शहद के साथ मिलाकर खाने से फायदा होता है। साथ ही पान में मौजूद एनालजेसिक गुण सिर दर्द में भी आराम देता है। चोट लगने पर पान का सेवन घाव को भरने में मदद करता है।पान में मुख्य रूप से निम्न कार्बनिक तत्व पाए जाते हैं, इसमें प्रमुख निम्न है:-फास्फोरस -0.13-0.61 प्रतिशतपौटेशियम -1.8- 36 प्रतिशतकैल्शियम -0.58 -1.3 प्रतिशतमैग्नीशियम -0.55 - 0.75 प्रतिशतकॉपर -20-27 पी.पी.एम.जिंक -30-35 पी.पी.एम.शर्करा - 0.31-40 /ग्रा.कीनौलिक यौगिक - 6.2-25.3 /ग्रा. -पान में पाये जाने वाले बिटामिनों में ए,बी,सी प्रमुख है।
- वजन कम करने के लिए सही आहार और एक्सरसाइज दो सबसे महत्वपूर्ण चीजें हैं, जिनके माध्यम से आप आसानी से अपने शरीर की चर्बी को कम कर सकते हैं। जब तक आप अपने रूटीन को फॉलो नहीं करेंगे आप कितनी भी मेहनत कर लीजिए आपका वजन जस का तस बना रहेगा। अगर आप अपने शरीर की अतिरिक्त चर्बी को घटाना चाहते हैं तो सही समय पर संतुलित भोजन करने की आदत डालें साथ ही नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। इन सबके साथ ही यहां हम आपको एक और घरेलू नुस्खा अपनाने का तरीका बता रहे हैं जो वजन कम करने में आपकी मदद करेगा।नींबू पानी में मिलाकर पीएं काला नमकशरीर खासकर पेट की चर्बी घटाने के लिए सुबह खाली पेट गर्म नींबू पानी पीना काफी फायदेमंद माना जाता है। नींबू विटामिन सी, कैलोरी में कम और एंटीऑक्सिडेंट के साथ विटामिन और मिनरल्स से युक्त होता है। यही नहीं, नींबू पानी आपको हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है। नींबू पानी मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और अतिरिक्त वजन को कम करने में मदद करता है। हालांकि, नींबू पानी में काला नमक जोडऩा और भी फायदेमंद हो सकता है। काला नमक पेय के स्वास्थ्य लाभ को बढ़ा देता है। काला नमक प्राकृतिक मिनरल्स से युक्त होता है जो मानव शरीर के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक हैं।नींबू पानी और काला नमक का मिश्रण कैसे आपका वजन कम कर सकता है?यह बेहतरीन पेय पाचन से जुड़ी समस्याओं को खत्म करने में मदद करता है। आपका मल त्याग सुचारू रूप से होगा और आप अपच की समस्या से आपको कभी भी सामना नहीं करना पड़ेगा। वजन कम करने के लिए दोनों आवश्यक हैं। यदि आपका आंतरिक पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो आपके लिए चर्बी कम करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, यह पेय शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे आपका मेटाबॉलिज्म और वजन घटाने की प्रक्रिया रफ्तार पकड़ लेती है।नींबू पानी और काला नमक पीने के अन्य स्वास्थ्य लाभकाले नमक के साथ नींबू पानी पाचन तंत्र के पीएच स्तर को बनाए रखने में भी मदद कर सकता है। जो एसिडिटी, त्वचा रोग, ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया की समस्या को कम करने में मदद करता है। काला नमक आपके द्वारा खाए गए भोजन से अधिक पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है। एंटीऑक्सिडेंट में समृद्ध होने के नाते, उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रित करता है और रक्त के थक्के को रोकता है।नींबू पानी और काला नमक सेवन करने का तरीकाएक गिलास पानी लें (सामान्य या गर्म और ठंडे पानी से बचें) और 2 बड़े चम्मच नींबू का रस और एक चुटकी काला नमक मिलाएं। इसे अच्छे से मिलाकर पिएं। आप या तो सुबह-सुबह या अपने भोजन के बाद इसे पी सकते हैं। आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि यह सिर्फ एक ट्रिक है जो आपके वजन घटाने की योजना का समर्थन कर सकती है। केवल इस पेय को पीने से आप अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाएंगे। स्वस्थ आहार और व्यायाम भी जरूरी है।






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