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- लखीमपुर। खीरी लखीमपुर खीरी जिले में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और दो बच्चों को कथित तौर पर जहर खिलाने के बाद खुद भी जहर खा लिया। इस घटना में पत्नी और बच्चों की मौत हो गई। पुलिस अधीक्षक विजय ढुल ने बुधवार को बताया कि जिले के ईसानगर थाना क्षेत्र के वीर सिंह पुर गांव में मंगलवार रात आरोपी बुधई ने अपनी पत्नी नन्हीं (30) और दो बेटों कुलदीप (दो) तथा संदीप (एक) को जहर खिलाने के बाद खुद भी खा लिया। उन्होंने बताया कि इस घटना में मां और दोनों बेटों की मौत हो गई जबकिआरोपी बुधई को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसकी हालत बेहद नाजुक बताई जाती है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इस घटना के पीछे पति-पत्नी के बीच विवाद को मुख्य कारण बताया जा रहा है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं।
- बहराइच (उप्र)। दुर्लभ स्वच्छ जलीय जीव कछुओं और कुर्म की देश भर की नदियों और तालाबों में पायी जाने वाली कुल 29 और उत्तर प्रदेश में मौजूद 15 प्रजातियों में से सर्वाधिक 11 प्रजातियां अकेले बहराइच जिले की सरयू नदी में पायी गयी हैं। एक शोध के अनुसार, बहराइच की सरयू नदी का किनारा दुर्लभ कछुओं के संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण है।सरयू नदी में कछुओं की विभिन्न प्रजातियों की पहचान व संरक्षण पर 2008 से वहां काम कर रही स्वैच्छिक संस्था 'टर्टल सर्वाइवल एलायन्स इन्डिया' (टीएसए) की प्रतिनिधि एवं शोधकर्ता अरुणिमा सिंह ने बताया कि भारत में कछुओं की 29 प्रजातियां पायी जाती हैं जिनमें 24 प्रजाति के कछुए (टॉरटॉइज) एवं पांच प्रजाति के कुर्म (टर्टल) हैं। उन्होंने बताया ''ये सभी भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न अनुसूचियों के अन्तर्गत संरक्षित हैं। किन्तु इन कछुओं की प्रजातियों, इनके विचरण के क्षेत्रों तथा प्रकृति में इनके पारिस्थितिक महत्व के बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते।'' अरूणिमा ने बताया कि शोध में प्राप्त निष्कर्षों से अब यह माना जा रहा है कि एक ही नदी में इतनी अधिक प्रजातियों के मिलने से सरयू नदी और इससे जुड़ा इलाका कछुओं की उत्पत्ति और संरक्षण के लिए काफी अनुकूल और महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया,'' इसी को लेकर साल 2008 से बहराइच की सरयू नदी में कछुआ संरक्षण प्रोजेक्ट चल रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत हम लोग स्कूली बच्चों, मछुआरों और नदी के किनारे रहने वाले लोगों को कछुओं के बारे में जागरूक करते हैं।''इस संबंध में बहराइच के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि वन विभाग के साथ, एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल), पुलिस और स्वैच्छिक संस्थाएं जलीय जीवों की सुरक्षा पर काम कर रही हैं। सिंह ने बताया कि "कछुए जलीय क्षेत्र के गिद्ध समान होते हैं जो नदियों और तालाबों के दूषित पदार्थों व बीमार मछलियों को खाकर जल को प्रदूषण मुक्त एवं स्वच्छ बनाते हैं।
- प्रयागराज। कोरोना महामारी से पैदा हुई परिस्थितियों से कोई सबसे अधिक प्रभावित हुआ है तो वे हैं घर के बड़े बुजुर्ग। ऐसे ही बुजुर्गों की दिलचस्प और प्रेरक कहानियों का संग्रह है कोरोनानामा जिसका विमोचन जल्द ही दादी दादा फाउंडेशन करेगा।कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण पर मंगलवार को यहां आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम में एनजीओ दादी दादा फाउंडेशन के निदेशक मुनि शंकर ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "कोरोनानामा: बुजुर्गों की अनकही दास्तां" में बुजुर्गों की कुल आठ सच्ची कहानियां हैं जो लखनऊ, जयपुर आदि शहरों में बुजुर्गों की कोरोना से जंग पर लिखी गई हैं।उन्होंने बताया कि 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम की घोषणा होने के साथ ही उनका फाउंडेशन बुजुर्गों के टीकाकरण के कार्य में जुट गया। दादी दादा फाउंडेशन के कार्यकर्ता टीकाकरण पर जागरूकता कार्यक्रम एक वर्ष तक चलाएंगे। मुनि शंकर ने कहा कि कोरोना महामारी के बीच टीका आशा की किरण बनकर आई है और हर किसी को टीकाकरण के लिए आगे आना चाहिए। हालांकि शहरों में टीका लगवाने को लेकर लोगों में उत्साह है, जबकि ग्रामीण इलाकों में लोग उदासीन हैं। यह उदासीनता जागरूकता फैलाकर ही दूर की जा सकती है।--
- नई दिल्ली। खेतों में पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान करने और ताप विद्युत उत्पादन के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए, विद्युत मंत्रालय ने कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के इस्तेमाल को लेकर एक राष्ट्रीय मिशन स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह देश में ऊर्जा संबंधी बदलाव और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर बढऩे के हमारे लक्ष्यों में और मदद करेगा।"ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के इस्तेमाल से जुड़े राष्ट्रीय मिशन" के निम्नलिखित उद्देश्य होंगे;-ताप विद्युत संयंत्रों से कार्बन न्यूट्रल बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा पाने के लिए को-फायरिंग के स्तर को वर्तमान 5 प्रतिशत से बढ़ाकर उच्च स्तर तक ले जाना।-बायोमास पेलेट में सिलिका, क्षार की अधिक मात्रा को संभालने के लिए बॉयलर डिजाइन में आर एंड डी (अनुसंधान एवं विकास) गतिविधि शुरू करना।-बायोमास पेलेट एवं कृषि अवशेषों की आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को दूर करने और बिजली संयंत्रों तक इसके परिवहन की सुविधा देना।-बायोमास को-फायरिंग में नियामक मुद्दों पर विचार करना।राष्ट्रीय मिशन के संचालन और संरचना के तौर-तरीकों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह परिकल्पना की जा रही है कि मिशन में सचिव (विद्युत) की अध्यक्षता में एक संचालन समिति होगी जिसमें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी), नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) आदि के प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारक शामिल होंगे। सीईए सदस्य (ताप) कार्यकारी समिति के अध्यक्ष होंगे। एनटीपीसी प्रस्तावित राष्ट्रीय मिशन में रसद और बुनियादी ढांचा सहायता प्रदान करने में बड़ी भूमिका निभाएगी। मिशन में सीईए, एनटीपीसी, डीवीसी और एनएलसी या अन्य भाग लेने वाले संगठनों के पूर्णकालिक अधिकारी शामिल होंगे। प्रस्तावित राष्ट्रीय मिशन की अवधि न्यूनतम पांच वर्ष होगी। मिशन के तहत निम्नलिखित उप-समूह भी गठित करने का प्रस्ताव है।उप-समूह 1: यह बायोमास के गुणों/विशेषताओं पर शोध करने की जिम्मेदारी संभालेगा।उप-समूह 2: यह चूर्णित कोयले (पीसी) वाले बॉयलरों में कोयले के साथ बायोमास की को-फायरिंग की अधिक मात्रा की खातिर पायलट परियोजना को संभालने के लिए बॉयलर डिजाइन आदि में अनुसंधान सहित तकनीकी विनिर्देश और सुरक्षा पहलुओं को पूरा करेगा।उप-समूह 3: यह मिशन अवधि और संवेदीकरण कार्यक्रम के दौरान आपूर्ति श्रृंखला के मुद्दों को हल करेगा।उप-समूह 4: यह कृषि आधारित बायोमास पैलेट और म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडब्ल्यू) पैलेट के परीक्षण के लिए नामित प्रयोगशालाओं और प्रमाणन निकायों का चयन करेगा।उप-समूह 5: यह कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास को-फायरिंग की नियामक संरचना और अर्थशास्त्र पर गठित किया जाएगा।बायोमास पर प्रस्तावित राष्ट्रीय मिशन राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) में भी योगदान देगा।
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नई दिल्ली। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुबोध कुमार जायसवाल को मंगलवार को दो साल के लिए सीबीआई प्रमुख नियुक्त किया गया है। कार्मिक मंत्रालय के एक आदेश में यह जानकारी दी गई है। महाराष्ट्र कैडर के 1985 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी जायसवाल फिलहाल केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के महानिदेशक हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत तीन सदस्यीय चयन समिति ने सोमवार को उनके नाम को इस पद के लिये मंजूरी दी। मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि जायसवाल को दो साल के लिये केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का निदेशक नियुक्त किया गया है। वह महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक भी रह चुके हैं।
- नयी दिल्ली। दिल्ली में इस साल मई के महीने में 144.8 मिली मीटर बारिश हुई है, जो बीते 13 साल में सर्वाधिक है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने यह जानकारी दी। विभाग के स्थानीय अनुमान केन्द्र ने मंगलवार को कहा, अगले चार-पांच दिन में बारिश होने का अनुमान नहीं है। लिहाजा, इस साल 2008 के बाद मई में सबसे अधिक बारिश हुई है।'' दिल्ली के मौसम संबंधी आंकड़े जारी करने वाली सफदरजंग वेधशाला के मुताबिक पिछले साल मई में 21.1 मिली मीटर, 2019 में 26.9 मिली मीटर और 2018 में 24.2 मिली मीटर बारिश रिकॉर्ड की गई थी। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार साल 2017 में 40.5 मि.मी, 2016 में 24.3 मि.मी, 2015 में 3.1 मि.मी और 2014 में 100.2 मि.मी बारिश दर्ज की गई। वेधशाला ने कहा कि इस साल मई में 2014 के बाद सबसे अधिक नौ दिन बारिश हुई। 2014 में दस दिन बारिश हुई थी। पिछले साल सात दिन और 2018 में पांच दिन बारिश हुई। दिल्ली में पिछले सप्ताह बुधवार सुबह 8:30 बजे से बृहस्पितवार सुबह 8:30 बजे के बीच ताउते चक्रवात और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते 119.3 मि.मी बारिश हुई, जिसने मई महीने के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये। मौसम विभाग के अनुसार पिछला रिकॉर्ड 24 मई 1976 को बना था, जब 60 मि.मी बारिश हुई थी।विभाग के अनुसार पहले पश्चिमी विक्षोभ और फिर ताउते चक्रवात के चलते ''रिकॉर्ड'' बारिश दर्ज की गई।इस साल 31 मई तक अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहने का अनुमान है , लिहाज 2014 के बाद पहली बार ऐसा होने की उम्मीद है कि सफदरजंग वेधशाला मानसून-पूर्व 'लू' रिकॉर्ड न कर पाए। पालम वेधशाला में भी अभी तक 'लू' रिकॉर्ड नही की गई है। मैदानी इलाकों में 'लू' तब घोषित की जाती है जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक और सामान्य से कम से कम 4.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा होता है। ''गंभीर'' लू की घोषणा तब की जाती है जब अधिकतम तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा होता है। दिल्ली में इस साल मई में औसत अधिकतम तापमान 37.02 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो 30 साल के औसत तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस के मुकाबले कम है। मंगलवार तक औसत न्यूनतम तापमान 22.93 डिग्री सेल्सियस रहा। मई में लंबे समय से औसत न्यूनतम तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस रहा है।
- मुंबई । महाराष्ट्र सरकार ने अधिक संक्रमण दर वाले 18 जिलों में कोविड-19 मरीजों के गृह पृथक-वास में रहने पर रोक लगाने का फैसला किया है। इन क्षेत्रों के मरीजों को कोविड देखाभल केंद्र में भर्ती किया जाएगा। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने मंगलवार को यह जानकारी दी। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के कुल 36 जिलों में सतारा, सिंधदुर्ग, रत्नागिरी, उस्मानाबाद, बीड, रायगढ़, पुणे, हिंगोली, अकोला, अमरावती, कोल्हापुर, ठाणे, सांगली, गढ़चिरौली, वर्धा, नासिक, अहमदनगर और लातूर में औसत संक्रमण दर अधिक है। आमतौर पर बिना लक्ष्ण वाले और हल्के कोरोना वायरस संक्रमण वाले मरीजों को घर में ही पृथक-वास में रहने की सलाह दी जाती है। टोपे ने संवाददाताओं से कहा कि राज्य में फिलहाल कोविड-19 के 3,27,000 मरीज उपचाराधीन हैं और स्वस्थ होने की दर 93 फीसदी है जबकि मृत्यु दर 1.5 फीसदी है। हालांकि, 18 जिलों में संक्रमण की दर राज्य के औसत से अधिक करीब 12 फीसदी है। मंत्री ने कहा, '' राज्य सरकार ने इन 18 जिलों में गृह पृथक-वास पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्णय लिया है। जिलाधिकारियों को कोविड देखभाल केंद्रों की संख्या बढ़ाने और सभी मरीजों को वहां भर्ती कराने को कहा गया है।'' कोविड-19 टीके की खरीद के लिए राज्य द्वारा जारी वैश्विक निविदा के बारे में टोपे ने कहा, '' किसी भी टीका निर्माता से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। हमने स्पूतनिक-वी टीके के लिए रूसी निर्माता कंपनी को ई-मेल भेजे हैं लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। केंद्र को राज्यों की तरफ से निविदा जारी करनी चाहिए।'
- नयी दिल्ली। आईआईटी समेत देश के शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों का मानना है कि छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को जल्द से जल्द कोविड-19 से बचाव के लिए टीका लगाने से परिसरों में उनकी सुरक्षित वापसी का रास्ता सुनिश्चित हो सकता है। अधिकतर उच्च शिक्षण संस्थान कोविड-19 महामारी के कारण मिले-जुले तरीके से शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, वहीं कुछ आईआईटी संस्थानों में इस समय परिसर में सीमित संख्या में छात्र रह रहे हैं। आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक टी जी सीताराम ने कहा, ‘‘कोरोना वायरस की रोकथाम के लिहाज से सभी के लिए टीकाकरण अत्यधिक जरूरी और कारगर लगता है। आईआईटी गुवाहाटी में हम मानते हैं कि हमारे छात्रों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों को टीका लगाया जाए ताकि मामले घटने के साथ परिसरों को सुगमता से पुन: खोला जाए और छात्र परिसर में सुरक्षित वापसी कर निर्बाध प्रशिक्षण प्राप्त करें।'' आईआईटी मद्रास के निदेशक भास्कर राममूर्ति ने भी इसी तरह की राय रखी और कहा, ‘‘अगर आवासीय परिसरों में रहने वाले छात्रों को टीका लगाया जाता है तो परिसर में छात्रावासों के फिर से खुलने और कक्षाओं के शुरू होने से संभावित जोखिम कम हो जाएगा।'' सूत्रों के अनुसार, कुछ आईआईटी के निदेशकों ने पिछले सप्ताह केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल के साथ बैठक में अनुरोध किया था कि छात्रों की परिसरों में सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए उनका तेजी से टीकाकरण किया जाए। भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर), भोपाल के निदेशक शिव उमापति ने कहा, ‘‘आवासीय परिसर होने के नाते संस्थान उन छात्रों की वापसी का पक्षधर है जिन्होंने कम से कम टीके की पहली खुराक लगवा ली है। इस संबंध में संस्थान सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करेगा और टीकों की जरूरत के हिसाब से उपलब्धता के लिए सरकार के सहयोग की सराहना करेगा।'
- नयी दिल्ली । देश में अब तक कोविड-19 टीके की 20 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि देशभर में टीकाकरण अभियान का तीसरा चरण शुरू होने के बाद से अब तक 18-44 आयुवर्ग के कुल 1,28,74,546 लाभार्थियों को कोविड-19 टीका लगाया जा चुका है। इस आयुवर्ग के 9,42,796 लाभार्थियों को मंगलवार को कोविड-19 टीके की पहली खुराक दी गई। मंत्रालय ने कहा कि बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 18 से 44 आयु वर्ग के 10 लाख से अधिक लाभार्थियों को टीके की पहली खुराक दी गई। मंत्रालय के अनुसार देश में अब तक टीके की कुल 20,04,94,991 खुराक दी जा चुकी हैं।मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 97,94,835 स्वास्थ्यकर्मी टीके की पहली खुराक जबकि 67,28,443 स्वास्थ्यकर्मी दूसरी खुराक भी ले चुके हैं। इसी तरह, अग्रिम मोर्चे पर तैनात 1,51,62,077 लाभार्थियों को पहली खुराक जबकि 83,77,270 दूसरी खुराक दी जा चुकी है। मंत्रालय ने कहा कि इसके अलावा 45 से 60 साल की आयु के 6,20,47,952 को पहली जबकि 1,00,24,157 लोगों को दूसरी खुराक दी जा चुकी है। वहीं 60 साल से अधिक आयु के 5,71,19,900 लाभार्थी पहली जबकि 1,83,65,811 लाभार्थी दूसरी खुराक ले चुके हैं।-file photo
- नयी दिल्ली । केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि सरकार नौ देशों में स्थित अपने उच्चायोगों/दूतावासों में ‘वन स्टॉप सेंटर' खोलेगी। ‘वन स्टॉप सेंटर' का मकसद महिला विरोधी हिंसा से निपटना है। अधिकारी ने बताया, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और सिंगापुर में एक-एक ‘वन स्टॉप सेंटर' खेले जाएंगे। सऊदी अरब में ऐसे दो ‘वन स्टॉप सेंटर' खोले जाएंगे।'' इस अधिकारी के अनुसार, पूरे भारत में 300 ‘वन स्टॉप सेंटर' खोले जाएंगे।उन्होंने बताया कि विदेश में खोले जा रहे वन स्टॉप सेंटर को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की ओर से सहयोग दिया जाएगा।
- इंदौर (मध्यप्रदेश)। ब्लैक फंगस के मामलों में वृद्धि के बीच यहां हफ्ते भर में इस संक्रमण से पीडि़त चार मरीजों की जान बचाने के लिए सर्जनों को उनके ऊपरी जबड़े का आधा हिस्सा काट कर निकालना पड़ा है। शासकीय स्वशासी दंत चिकित्सा महाविद्यालय के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।महाविद्यालय के सहायक प्रोफेसर और मुख व चेहरे के सर्जन अमित रावत ने बताया, "हमारे महाविद्यालय के सर्जनों की टीम पिछले एक हफ्ते के दौरान ब्लैक फंगस के 50 मरीजों का ऑपरेशन कर चुकी है। संक्रमण की रोकथाम के लिए हमें इनमें से चार लोगों के ऊपरी जबड़े का आधा हिस्सा सर्जरी के जरिये काटकर निकालना पड़ा है।" रावत ने बताया, "अगर हम मरीज के मुख के भीतर ब्लैक फंगस के संक्रमण को उचित इलाज के जरिये समय रहते रोक देते हैं, तो यह उसकी आंख और मस्तिष्क तक नहीं पहुंच पाता जिससे उसकी आंख और जान, दोनों बच जाती है।" अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल स्थानीय अस्पतालों में ब्लैक फंगस के 350 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं और इनमें इंदौर के अलावा राज्य के अन्य जिलों के मरीज भी शामिल हैं। ब्लैक फंगस का संक्रमण कोविड-19 से उबर रहे और स्वस्थ हो चुके लोगों में से कुछेक में मिल रहा है।-File photo
- शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में शराब के नशे में धुत एक व्यक्ति ने 10 वर्षीय बेटे की मंगलवार को कथित रूप से पीट-पीट कर हत्या कर दी। यह घटना शिवपुरी शहर के देहात पुलिस थाना इलाके के महल सराय में हुई। देहात पुलिस थाना प्रभारी सुनील खेमरिया ने बताया कि महल सराय में निवास करने वाला आरोपी शौकीन आदिवासी शराब के नशे में धुत्त होकर आज सुबह करीब पांच बजे अपनी पत्नी से झगड़ रहा था। उन्होंने बताया कि झगड़े की आवाज सुनकर घर में सो रहे 10 वर्षीय बेटे राजीव की नींद खुल गई और उसने माता-पिता को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इस बीच बचाव में आरोपी पिता शौकीन ने अपने बेटे राजीव को पीटा और जोर का धक्का मार दिया, जिससे उसका सिर दीवार में जा लगा और घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। खेमरिया ने बताया कि पड़ोसियों ने इस मामले की सूचना देहात थाना पुलिस को दी। उन्होंने कहा कि घटना के बाद आरोपी शौकीन आदिवासी मौके से फरार हो गया। खेमरिया ने बताया कि पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है और आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरु कर दी है।
- नयी दिल्ली । केंद्र सरकार ने मंगलवार को नागपुर स्थित राष्ट्रीय आपदा मोचन बल अकादमी में निदेशक के एक पद के सृजन को मंजूरी दे दी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (एसएजी) में निदेशक पद के सृजन के गृह मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दी। बयान में कहा गया कि एनडीआरएफ अकादमी में निदेशक के पद के सृजन के साथ, संगठन की कमान और नियंत्रण एक वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी को सौंपा जाएगा, जो तय उद्देश्यों के अनुसार संस्थान का संचालन कर सकता है। अकादमी एनडीआरएफ, राज्य आपदा मोचल बल (एसडीआरएफ) अन्य हितधारकों और दक्षेस व अन्य देशों की आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों के 5000 से अधिक कर्मियों को वार्षिक कौशल आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी। अकादमी हितधारकों की बदलती जरूरतों और आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विश्लेषण करते हुए उनमें सुधार भी करेगी। इससे विशेष रूप से एनडीआरएफ, एसडीआरएफ कर्मियों और अन्य हितधारकों को आपदा प्रतिक्रिया पर दिए जाने वाले प्रशिक्षण के स्तर में अत्यधिक सुधार किया जा सकेगा। एनडीआरएफ अकादमी की स्थापना वर्ष 2018 में नागपुर में राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा कॉलेज (एनसीडीसी) में विलय के साथ की गई थी। अकादमी का मुख्य परिसर निर्माणाधीन है, तब तक यह एनसीडीसी के मौजूदा परिसर से कार्य कर रहा है। अकादमी वर्तमान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों और अन्य हितधारकों को प्रशिक्षण प्रदान करती है और इसकी अवधारणा अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान के तौर पर विकसित होने के लिए की गई है यह दक्षेस और अन्य देशों के आपदा मोचन कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा।
- नोएडा। जिले के थाना सेक्टर 39 क्षेत्र के भट्ठा कॉलोनी में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने फांसी लगाकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। वहीं खुर्जा के रहने वाले एक व्यक्ति ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जान दे दी। पुलिस प्रवक्ता अभिनेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि थाना सेक्टर 39 क्षेत्र के भट्ठा कॉलोनी में रहने वाले प्रदोष रंजन पांडव (39 वर्ष) ने बीती रात को अपने घर पर पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने बताया कि घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रवक्ता के अनुसार, मृतक के पड़ोसियों ने पुलिस को बताया है कि वह एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर था। वह मूल रूप से उड़ीसा प्रांत का रहने वाला था। मौजूदा समय में वह अकेले रह रहा था। सिंह ने बताया कि खुर्जा के रहने वाले दिनेश शर्मा (पुत्र श्याम सुंदर शर्मा) ने सल्फास की गोली खा ली। गंभीर हालत में उनको ग्रेटर नोएडा के कैलाश अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां पर उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि थाना नॉलेज पार्क पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
- मुंबई । जीएमआर समूह के परिचालन वाले दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर पिछले एक माह के दौरान 100 कोविड-19 राहत उड़ानें उतरी हैं। इन उड़ानों के जरिये 36 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से 1,750 टन राहत सामग्री आई है। दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा लि. (डायल) ने मंगलवार को बयान में कहा कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान हवाईअड्डे पर दुनियाभर से आने वाली चिकित्सा राहत का बेहतर तरीके से प्रबंधन सुनिश्चित किया गया। देश का सबसे व्यस्त हवाईअड्डा दक्षिण एशिया क्षेत्र का सबसे बड़ा कार्गो हब हवाईअड्डा है। इसके दो एकीकृत कार्गो टर्मिनल की सालाना क्षमता 18 लाख टन की है जिसे 23 लाख टन तक बढ़ाया जा सकता है। डायल ने कहा कि मंगलवार को हवाईअड्डे पर 100वीं राहत उड़ान उतरी। घरेलू हवाईअड्डों में यह संख्या सबसे अधिक है। बयान में कहा गया है कि 27 अप्रैल से 25 मई के दौरान दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर 100 कोविड-19 राहत उड़ानों के जरिये 1,750 टन राहत सामग्री आई। 100वीं उड़ान मंगलवार को रूस से आई। इसमें 10 टन चिकित्सा राहत सामग्री थी।
- नयी दिल्ली। सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी फेसबुक ने कहा है कि वह परिचालनगत प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन के लिए काम कर रही है और उसका उद्देश्य आईटी नियमों के प्रावधानों का अनुपालन करना है। ये नियम 26 मई से प्रभाव में आएंगे। हालांकि, इसके साथ ही फेसबुक ने कहा कि वह सरकार के साथ उन मुद्दों पर विचार जारी रखेगी, जिनपर अधिक संपर्क रखने की जरूरत है। फेसबुक का मंगलवार को जारी यह बयान इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि सोशल मीडिया कंपनियों को डिजिटल मंचों के लिए नए दिशानिर्देशों को पूरा करना है। इसकी समयसीमा 25 मई ही है। नए नियमों की घोषणा फरवरी में की गई थी। इनके तहत सोशल मीडिया मंचों मसलन ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हॉट्सएप को अतिरिक्त जांच-परख को पूरा करना होगा। साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों को मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल संपर्क कर्मी तथा निवासी शिकायत निपटान अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि नियमों के अस्तित्व में आने के बाद पहले दिन से शिकायत के समाधान के लिए अधिकारी की नियुक्ति सबसे महत्वपूर्ण जरूरत है। इन नियमों का अनुपालन नहीं करने पर सोशल मीडिया कंपनियां मध्यवर्ती का दर्जा गंवा देंगी। इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को उनके द्वारा तीसरे पक्ष की सूचना और ब्योरे की ‘होस्टिंग' के लिए दायित्व से छूट मिलती है। फेसबुक के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को बयान में कहा, ‘‘हमारा मकसद आईटी नियमों के प्रावधानों का अनुपालन करना है। साथ ही हम उन मुद्दों पर सरकार से चर्चा जारी रखेंगे, जिनके लिए और बातचीत करने की जरूरत है। हम परिचालनगत प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन के लिए काम कर रहे हैं।'' प्रवक्ता ने कहा कि फेसबुक इस बात को लेकर प्रतिबद्ध है कि लोग हमारे मंच के जरिये मुक्त और सुरक्षित तरीके से अपने विचार व्यक्त कर सकें। हालांकि, कंपनी ने इस बारे में और ब्योरा नहीं दिया। सरकार ने 25 फरवरी को सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कड़े नियमनों की घोषणा की थी। इसके तहत कंपनियों को किसी भी सामग्री पर प्राधिकरण की ओर से चिंता जताए जाने पर उसे 36 घंटे में हटाना होगा। साथ ही एक मजबूत शिकायत निपटान प्रणाली स्थापित करनी होगी। शिकायत निपटान अधिकारी देश में ही बैठेगा।
- नयी दिल्ली। सरकार के राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के कोविड-19 संबंधी कार्यसमूह के प्रमुख ने कहा है कि यह मानने के कोई कारण मौजूद नहीं हैं कि आने वाले हफ्तों, महीनों या कोविड-19 की अगली लहर में, बड़ी संख्या में बच्चे इससे प्रभावित होंगे। बहरहाल, उन्होंने बाल कोविड सेवाओं में सुधार के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पर जोर जरूर दिया। एनटीएजीआई के कोविड-19 संबंधी कार्यसमूह के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा है कि मौजूदा आंकड़े भारत में वायरस के विभिन्न स्वरूपों द्वारा बच्चों या युवाओं को विशेषतौर पर प्रभावित करने संबंधी कोई पूर्वानुमान नहीं दर्शाते हैं। उन्होंने, ‘‘चूंकि संक्रमण के कुल मामले बढ़े हैं इसलिए दोनों आयुवर्ग के मरीज भी ज्यादा नजर आ रहे हैं।'' आईएनसीएलईएन न्यास के निदेशक अरोड़ा ने कहा कि इस वक्त तीसरी लहर के बारे में कुछ भी अनुमान लगाना संभव नहीं है। अरोड़ा ने कहा, ‘‘अपने देश में जो अनुभव मिला है और दुनिया के अन्य हिस्सों में जो देखने को मिला है उसके आधार पर यह मानने का कोई कारण नहीं है कि आगामी हफ्तों या महीनों में या कोरोना वायरस की अगली लहर में, बड़ी संख्या में बच्चे इससे प्रभावित होंगे।'' बहरहाल, उन्होंने बाल कोविड सेवाओं में सुधार की जरूरत पर और इन्हें शेष कोविड-19 प्रबंधन संरचना से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि नवजात, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विशेष देखभाल संबंधी सुविधाओं की आवश्यकता है। दस वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखभाल करने के लिए मां या फिर पिता की जरूरत होती है। इसी तरह संक्रमित गर्भवती महिलाओं का प्रसव समयपूर्व हो सकता है। जहां तक मैं जानता हूं... उपचार संबंधी प्रोटोकॉल तैयार हो चुके हैं और विभिन्न बाल चिकित्सा समूह एवं संगठन इनकी समीक्षा कर रहे हैं।'' अरोड़ा ने कहा कि इसी तरह से अस्पतालों में देखभाल से जुड़ी विशिष्ट जरूरतों पर भी काम किया जा रहा है। कोविड-19 कार्यसमूह के प्रमुख ने कहा, ‘‘देश में बच्चों का उपचार पहले से चल रहा है और ज्यादातर कोविड देखभाल केंद्रों में इससे संबंधित प्रावधान हैं लेकिन बाल कोविड सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है और इन्हें शेष कोविड-19 प्रबंधन संरचना से जोड़ा जाना चाहिए।'' गौरतलब है कि कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर में वयस्कों से ज्यादा बच्चे प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने इसके मद्देनजर तैयारी करने को कहा है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने भी कहा है कि अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि कोविड-19 की संभावित आगामी लहर में बच्चों में ज्यादा संक्रमण फैलेगा या उनमें ज्यादा मामले आएंगे। उन्होंने संवाददाताओं से सोमवार को कहा, ‘‘अगर हम पहली एवं दूसरी लहर के आंकड़ों को देखते हैं तो यह काफी मिलता-जुलता है और यह दिखाता है कि बच्चे सामान्य तौर पर सुरक्षित हैं और अगर उनमें संक्रमण होता भी है तो उनमें मामूली संक्रमण आता है। और वायरस ज्यादा नहीं बदला है इसलिए इस तरह के संकेत नहीं हैं कि तीसरी लहर में बच्चे ज्यादा प्रभावित होंगे।'' इस तरह की अवधारणा है कि वायरस शरीर में एसीई रिसेप्टर (एक तरह का एंजाइम जो आंत, गुर्दे, हृदय की कोशिकाओं से जुड़ा होता है) के माध्यम से प्रवेश करता है और वयस्कों की तुलना में बच्चों में यह रिसेप्टर कम होता है। उन्होंने कहा कि इसी अवधारणा के आधार पर बताया जा रहा है कि बच्चों में संक्रमण का स्तर कम क्यों है। गुलेरिया ने कहा, ‘‘जिन लोगों ने इस सिद्धांत को प्रचारित किया उनका कहना है कि अभी तक बच्चे प्रभावित नहीं हुए हैं, इसलिए संभवत: तीसरी लहर में वे ज्यादा प्रभावित होंगे। लेकिन अभी तक साक्ष्य नहीं मिला है कि आगामी लहर में बच्चों में इसका गंभीर संक्रमण होगा या उनमें ज्यादा मामले आएंगे।'' इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने हाल में कहा था कि बच्चों में भी वयस्कों के जितना ही संक्रमण का खतरा प्रतीत होता है, लेकिन ‘‘तीसरी लहर में विशेष रूप से बच्चों के अधिक प्रभावित होने की आशंका नहीं है।'' देश के शीर्ष बाल अधिकार निकाय ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग' (एनसीपीसीआर) ने कहा है कि देश में कोविड-19 की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर केंद्र और राज्य सरकारों को बच्चों एवं नवजातों को बचाने के लिए तैयारियां तेज करनी चाहिए।-file photo
- गोरखपुर । जिले के पीपीगंज थाना क्षेत्र के कौड़िया इलाके में रोहिन नदी से एक महिला और उसकी दो बेटियों के शव सोमवार को बरामद किए गए। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार रोहिन नदी से माया (40) और उसकी दो बेटियों शिवानी (13) और अर्पिता (9) के शव बरामद किये गये। शवों पर चोट के निशान नहीं है। पीपीगंज के थानाध्यक्ष एसपी सिंह ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट मिलने के बाद मौत की वजह पता चल सकेगी। file photo
- फतेहपुर (उप्र) ।उत्तर प्रदेश के फतेहपुर शहर कोतवाली क्षेत्र में आबू नगर पुलिस चौकी से चंद कदम की दूरी पर सोमवार देर रात एक युवक का शव मिला। युवक के परिजनों ने हत्या की आशंका जतायी है। पुलिस के एक अधिकारी ने मंगलवार को इस बारे में बताया। शहर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) सत्येन्द्र सिंह ने बताया कि सोमवार रात करीब नौ बजे पनी मोहल्ला निवासी शाहिद उर्फ राजा (24) का शव आबू नगर पुलिस चौकी से कुछ दूरी पर मिला। शव पर चोट के निशान पाये गये हैं। उन्होंने बताया कि शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। एसएचओ ने बताया कि युवक के परिजनों ने मामले में हत्या की आशंका जतायी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के बिसंडा थाना क्षेत्र के ओरन कस्बे के नजदीक मंगलवार को दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आमने-सामने हुई भिड़ंत में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बबेरू क्षेत्र के पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) सियाराम ने बताया कि बिसंडा थाना क्षेत्र के ओरन कस्बे के नजदीक पेट्रोल पंप के पास मंगलवार दोपहर दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियां आमने-सामने भिड़ गयीं। इस हादसे में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि सभी मृतक और घायल सहेवा गांव के रहने वाले हैं और एक कार्यक्रम से वापस अपने गांव लौट रहे थे। ट्रैक्टर-ट्रॉली में करीब 35 महिला-पुरुष सवार थे। सीओ ने बताया कि घायलों में पांच की हालत ज्यादा नाजुक है, सभी को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान करवाई जा रही है।
- विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश। सिलेरू नदी में दो नाव के पलटने से हुए हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। पुलिस ने बताया कि मृतकों में दो बच्चे भी शामिल हैं। ये ओडिशा के मालकानगिरि जिले के निवासी थे।दमकल एवं बचाव सेवा के कर्मियों ने पांच लापता लोगों की तलाश को लेकर अभियान शुरू किया है। ये लोग उन दोनों नौकाओं में सवार थे जो सुबह पलट गई। पीड़ित आदिवासी प्रवासी मजदूर हैं और हैदराबाद से ओडिशा के अपने गांव कोंदुगुदा लौट रहे थे। पांच नाव में सवार होकर करीब 35 लोगों ने एक साथ सिलेरू नदी में यात्रा शुरू की थी। इनमें से कुछ सुरक्षित अपने गंतव्य पहुंच गए। राज्य में कोविड-19 के मद्देनजर लगे कर्फ्यू के कारण वह लोग नदी के रास्ते जा रहे थे। लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान जारी है।
- भदोही। उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में मंगलवार को सात माह की गर्भवती विवाहिता द्वारा फांसी लगाकर खुदकुशी करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इसकी जानकारी दी । पुलिस के अनुसार भदोही जिले के सुरियावां थाना इलाके में पति के साथ गोवा जाने की जिद पूरी न हो पाने से नाराज सात माह की गर्भवती नवविवाहिता ने कथित रूप से फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।थाना प्रभारी प्रदीप कुमार ने बताया कि कनकपुर गांव निवासी राज कुमार बिंद की पत्नी शिवानी (20) ने सोमवार की आधी रात कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। कुमार ने बताया कि राज कुमार बिन्द लखनऊ में काम करता था और वहां निशातगंज स्थित पुलिस लाइन में तैनात स्वीपर राजेश बाल्मीकि की लड़की शिवानी से दस महीने पहले दोनों ने यहां आकर शादी कर ली थी। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह पहले राजकुमार को गोवा के रत्नागिरी में काम मिल जाने से वह अकेले जाने की बात पत्नी से बोला। थाना प्रभारी के मुताबिक सात माह की गर्भवती शिवानी साथ जाने की ज़िद कर रही थी। राजकुमार के जाने के बाद नाराज़ शिवानी ने बीती रात कमरे में फांसी लगा ली। राजकुमार के परिजनों की सूचना पर शिवानी के पिता राजेश वाल्मीकि ने यहाँ पहुंच कर पुलिस को सूचना दी। थाना प्रभारी ने बताया शव को कब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
- नई दिल्ली। चक्रवाती तूफान यास के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी दिशा में आगे बढ़ते हुए अगले कुछ घंटे में अति भीषण चक्रवाती तूफान बनने की आशंका है। तूफान कल सुबह तक ओडिसा और पश्चिम बंगाल के तटों के पास बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी भागों पर पहुंच जाएगा। तूफान के कल दोपहर अति भीषण चक्रवाती तूफान की क्षमता में ओडिसा और पश्चिम बंगाल के तटों पर पारादीप और सागर द्वीप के बीच से टकराने की संभावना है।तूफान से ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में राहत और बचाव टीमें तैनात। भारतीय मौसम विभाग ने आज कहा कि तूफान यास पिछले छह घंटे में बंगाल की खाड़ी के मध्य पूर्वी भागों से दस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ा है। यह पारादीप से 320 किलोमीटर दक्षिण, दक्षिण-पूर्व, बालासोर से 430 किलोमीटर दक्षिण, दक्षिण-पूर्व, दिघा से 420 किलोमीटर दक्षिण, दक्षिण-पूर्व और खेपूपाड़ा से 470 किलोमीटर दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।
- नई दिल्ली। केन्द्र ने पिछले चार दिनों में राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के लिए फंगसरोधी औषधि एम्फोटेरिसिन बी की 43 हजार से अधिक शीशियां आबंटित की हैं। केन्द्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री सदानंद गौडा ने बताया है कि सरकार सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए फंगसरोधी औषधि के उत्पादन में तेजी ला रही है।उन्होंने बताया कि बढती मांग को देखते हुए राज्य और केन्द्रशासित प्रदेशों को एम्फोटेरिसिन बी की 19 हजार 420 शीशियों की आपूर्ति की गई है। इससे पहले केन्द्रीय रसायन मंत्री ने पिछले एक महीने में कोविड से निपटने के लिए रेमेडिसिवर की करीब एक करोड़ शीशियों का त्वरित और समय पर आबंटन सुनिश्चित किया था। देश में फंगस के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है और इसके कारण फंगसरोधी दवा की मांग बढ़ी है।
- नई दिल्ली। व्हाट्सऐप ने कहा है कि वह उसकी निजता नीति स्वीकार न करने वाले उपयोगकर्ताओं की सुविधाएं सीमित नहीं करेगी लेकिन उपयोगकर्ताओं को अपडेट के बारे में बार-बार ध्यान दिलाती रहेगी और नये डेटा सुरक्षा कानून के लागू होने तक "य़ह रुख बनाए रखेगी।"हाल ही में सरकार ने व्हाट्सऐप को उसकी नयी निजता नीति वापस लेने का निर्देश दिया था जिसके बाद अब कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि व्हाट्सऐप ने सरकार की चि_ी का जवाब दिया है और इस बात का "आश्वासन दिया है" कि उपयोगकर्ताओं की निजता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। प्रवक्ता ने ईमेल के जरिए दिए गए एक बयान में कहा कि कंपनी अपने मंच पर दी जाने वाली सुविधाओं को आने वाले हफ्तों में सीमित नहीं करेगी। उन्होंने कहा, "इसके बजाए हम उपयोगकर्ताओं को समय-समय पर अपडेट की याद दिलाते रहेंगे। हम उम्मीद करते हैं कि उपयोगकर्ता किसी व्यापार (व्यापार खाते) से साथ बातचीत करना चाहें या न चाहें, यह सभी उपयोगकर्ताओं के पास उपलब्ध इस विकल्प को मजबूत करेगा। हम कम से कम आगामी निजी डेटा सुरक्षा कानून के प्रभाव में आने के साथ यह रुख बनाए रखेंगे।" प्रवक्ता ने एक बार फिर से दोहराया कि हाल के अपडेट से लोगों के व्यक्तिगत मैसेज की निजता नहीं बदलती। उन्होंने कहा, "इसका उद्देश्य इस बारे में अतिरिक्त सूचना उपलब्ध कराना है कि लोग अगर चाहें तो किस तरह से कारोबारी इकाइयों के साथ बातचीत कर सकते हैं।"



















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