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- थकान होने पर अक्सर हम कॉफी या चाय का सेवन कर लेते हैं और थकान दूर हो जाती है। चाय या कॉफी में मौजूद कैफीन दिमाग की केमिकल प्रक्रियाओं को प्रभावित करके सतर्कता बढ़ा देता है, लेकिन ऐसा करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है? नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी के मुताबिक, सही डोज में कैफीन का सेवन, थकान को कुछ हद तक कम कर सकती है। हालांकि स्टडी में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि लंबे समय तक थकान के लिए कैफीन का इस्तेमाल सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।थकान होने पर कैफीन लेने के फायदे-थकान होने पर चाय या कॉफी पी लेने से तुरंत एनर्जी मिलती है।- कैफीन की मदद से सजगता और ध्यान-क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है।-सुस्ती महसूस होने पर चाय या कॉफी, एनर्जी बूस्टिंग ड्रिंक का काम करती है।थकान होने पर कैफीन लेने के नुकसान-कैफीन का बार-बार सेवन करने से या ज्यादा मात्रा और रात में पीने से अनिद्रा की समस्या हो सकती है।-कुछ लोगों को ज्यादा चाय या कॉफी पीने से बेचैनी या पाचन की समस्याएं होने लगती हैं।-समस्या को अनदेखा करके अगर कैफीन का सेवन करेंगे, तो थकान के पीछे की असली वजह का पता नहीं चल पाएगा।थकान होने पर कैफीन लेना सही है या गलत?-थकान होने पर कैफीन ले सकते हैं, लेकिन सही कारण का पता होना जरूरी है।-अगर सुस्ती या आलस्य है, तो सीमित मात्रा में कैफीन का सेवन कर सकते हैं।-अगर थकान लगातार बनी हुई है, तो कैफीन का सेवन न करें, क्योंकि इसके पीछे बीमारी, डिहाइड्रेशन या अनिद्रा जैसी समस्याएंं भी हो सकती हैं।-थकान के साथ अन्य लक्षण नजर आने पर भी कैफीन का सेवन नहीं करना चाहिए।थकान दूर करने के लिए क्या करें?--लगातार थकान महसूस हो रही है, तो नींद पूरी करें। नींद की कमी से थकान और सुस्ती बनी रहती है।-थकान होने पर अश्वगंधा या तुलसी की हर्बल चाय पिएं, क्योंकि ये शरीर को एनर्जी देती हैं। इनका सेवन करके तनाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है।-रोज सुबह हल्की एक्सरसाइज करें जैसे योग, तेज चलना या स्ट्रेचिंग।-हाइड्रेशन बनाए रखें। डिहाइड्रेशन भी थकान का एक कारण हो सकता है।-प्रोटीन, फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स युक्त भोजन खाएं।-काम के बीच छोटे ब्रेक्स लें, स्क्रीन टाइम सीमित करें और स्ट्रेस कंट्रोल करें।-थकान होने पर पावर नैप लें, 10-15 मिनट सो लेने से थकान (Fatigue) कम हो जाती है और रिफ्रेश महसूस होता है।-लगातार थकान बनी हुई है, तो डॉक्टर से चेकअप कराएं ताकि असली कारण का पता चल सके।निष्कर्ष:थकान में कैफीन का सेवन कर सकते हैं लेकिन यह थकान कम करने का स्थायी इलाज नहीं है क्योंकि कैफीन का ज्यादा सेवन करना सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता। इससे अनिद्रा, डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं इसलिए थकान होने पर हर्बल टी लें, ब्रेक लें और नींद पूरी करें।
- आज के डिजिटल युग में युवा दिनभर मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन पर लगे रहते हैं. पढ़ाई, काम और मनोरंजन के लिए बढ़ा हुआ स्क्रीन टाइम उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है. दूसरी ओर, करियर प्रेशर, सोशल मीडिया कॉम्पिटिशन और अनिश्चित भविष्य का तनाव मानसिक थकान को बढ़ा रहा है. जब आंखें लंबे समय तक स्क्रीन पर टिकी रहती हैं, तो दिमाग लगातार एक्टिव रहता है और आराम नहीं कर पाता. युवाओं में यह स्थिति तेजी से बढ़ रही है, जिससे मानसिक और शारीरिक दोनों स्वास्थ्य पर नेगेटिव असर पड़ रहा है.अत्यधिक स्क्रीन टाइम और तनाव का सीधा असर दिमाग, आंखों और नींद पर पड़ता है. लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, जलन और धुंधलापन महसूस होता है. तनाव के कारण माइग्रेन अटैक, गर्दन-दर्द, चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी जैसी परेशानियां भी बढ़ती हैं. नींद पूरी न होने से शरीर को आराम नहीं मिल पाता, जिससे हॉर्मोनल इम्बैलेंस और इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है. लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो डिप्रेशन, एंग्जायटी, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. कई बार नींद की कमी के कारण व्यक्ति का व्यवहार बदल जाता है, जिससे उसका आत्मविश्वास और कार्यक्षमता घट जाती है. इसलिए इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.स्क्रीन टाइम और तनाव के कॉम्बिनेशन से कैसे बचें?जीबी पंत अस्पताल में न्यूरोसर्जरी विभाग के पूर्व एचओडी डॉ. दलजीत सिंह बताते हैं कि सबसे पहले दिनभर के स्क्रीन टाइम को सीमित करें. काम के दौरान हर 30 मिनट में 5 मिनट का ब्रेक लें और आंखों को आराम दें. सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल या लैपटॉप से दूरी बनाएं, ताकि दिमाग को शांति मिले. ध्यान, मेडिटेशन या योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, यह तनाव कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है. नियमित एक्सरसाइज और सही नींद का समय तय करें ताकि शरीर को पर्याप्त आराम मिल सके.अगर माइग्रेन या सिरदर्द बार-बार हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें. तनाव को नजरअंदाज करने के बजाय परिवार या दोस्तों से बात करें. साथ ही डिजिटल डिटॉक्स वीकेंड अपनाएं यानी ऐसा समय जब आप मोबाइल, लैपटॉप और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाकर खुद को मानसिक रूप से आराम दें, जिससे सुकून और फोकस दोनों बेहतर होते हैं.यह भी जरूरीरोज़ाना कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें.काम या पढ़ाई के बीच आंखों को रिलैक्स करने वाले एक्सरसाइज करें.दिनभर में पर्याप्त पानी पिएं और संतुलित डाइट लें.नींद के समय मोबाइल दूर रखें और कमरे की लाइट हल्की रखें.सोशल मीडिया पर बिताया समय सीमित करें.--
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आंवला एक ऐसा सुपरफूड है जो न सिर्फ इम्यूनिटी बढ़ाता है बल्कि लिवर को डिटॉक्स करने और सेल्स को रिपेयर करने में भी मदद करता है। इसमें मौजूद ऐंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन C लिवर को हेल्दी रखकर शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित करते हैं। अगर आप अपने लिवर को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो रोजाना किसी न किसी रूप में आंवला जरूर शामिल करें, चाहे जूस के रूप में, पाउडर, काढ़ा या डिटॉक्स वॉटर के रूप में। बस ध्यान रखें कि मात्रा संतुलित हो और ताजा आंवले का उपयोग करें। अगर आप ब्लड थिनर या शुगर कंट्रोल की दवाइयां ले रहे हैं, तो आंवला का सेवन डॉक्टर से पूछकर करें। आंवला को अमृतफल कहा गया है, यह दोषों को संतुलित करता है। इसके विटामिन्स, एंटीऑक्सीडेंट और फाइटोन्यूट्रिएंट्स लिवर सेल्स को रिपेयर करते हैं और डिटॉक्स प्रोसेस को बूस्ट करते हैं। इस लेख में जानिए, रोजाना आंवला खाने के 3 असरदार तरीके, जो लिवर को डिटॉक्स और मजबूत करने में मदद करेंगे।
आंवला से लिवर डिटॉक्स करने के तरीके1. सुबह खाली पेट आंवला जूस का सेवनआंवला जूस लिवर के लिए सबसे आसान और असरदार घरेलू उपाय है। सर्दियों में जब ताजे आंवले आते हैं तो रोज सुबह खाली पेट एक गिलास पानी में 20-30 ml ताजा आंवला जूस मिलाकर पीने से लिवर क्लीन रहता है और टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं। अगर इसका स्वाद कड़वा लगे तो इसमें थोड़ा शहद मिलाकर पी सकते हैं।2. आंवला और मुलेठी का हर्बल काढ़ालिवर को डिटॉक्स करने और सूजन ( कम करने के लिए आंवला और मुलेठी का काढ़ा बेहद असरदार हो सकता है। एक कप पानी में आधा चम्मच आंवला पाउडर और आधा चम्मच मुलेठी डालें और इसे 5-7 मिनट तक उबालें और फिर छान लें। ठंडा होने पर थोड़ा शहद मिलाकर पिएं। मुलेठी में मौजूद गुण लिवर सेल्स को रीजेनरेट करने में मदद करते हैं तो वहीं, आंवला ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करके शरीर से टॉक्सिन्स निकालता है। इस काढ़े का सेवन लिवर की सूजन घटाने में भी मदद कर सकता है। दिन में एक बार ही इसका सेवन करें और लगातार 2-3 सप्ताह तक प्रयोग करने के बाद 1 सप्ताह का ब्रेक लें।3 . आंवला और मिंट का डिटॉक्स वॉटरअगर आप हल्के और रिफ्रेशिंग तरीके से लिवर डिटॉक्स करना चाहते हैं, तो आंवला-मिंट वॉटर एक अच्छा विकल्प है। इसे बनाने के लिए 1 लीटर पानी में 3-4 टुकड़े कटे हुए ताजे आंवले डालें और साथ ही कुछ पुदीना पत्ते और आधा नींबू निचोड़ें। इसे रातभर के लिए रखें और अगले दिन दिनभर घूंट-घूंट करके पिएं। यह डिटॉक्स वॉटर शरीर की गर्मी कम करता है, लिवर को ठंडक देता है और पित्त दोष को शांत करता है। इस डिटॉक्स वॉटर को हफ्ते में 3-4 बार पिएं। इससे न केवल लिवर हेल्दी रहेगा, बल्कि स्किन भी ग्लो करेगी और पाचन बेहतर होगा। - आमतौर पर माना जाता है कि भारत में सालभर अच्छी धूप रहती है, इसलिए यहां विटामिन डी की कमी नहीं होनी चाहिए। लेकिन हकीकत इसके विपरीत है, हमारे देश में भी बहुत से लोगों में 'विटामिन डी' की कमी पाई जाती है। हमारे देश में विटामिन डी की कमी एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जिसे अक्सर 'सनशाइन विटामिन' कहा जाता है।यह कमी इसलिए होती है क्योंकि लोग धूप लेने का सही समय और वैज्ञानिक तरीका नहीं जानते। विटामिन डी हमारे शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण पोषक तत्व है, जो न केवल हड्डियों और दांतों को मजबूती देता है, बल्कि इम्यूनिटी को बढ़ाता है और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। यह विटामिन हमारी त्वचा में मौजूद कोलेस्ट्रॉल से तब बनता है जब वह सूर्य की अल्ट्रावायलेट-बी किरणों के संपर्क में आती है।विषेशज्ञों के मुताबिक सही तरीके से और सही समय पर अगर धूप लिया जाए तो विटामिन डी की कमी को दूर किया जा सकता है। इस बारे में जागरूकता बढ़ाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि सनस्क्रीन लगाकर या खिड़की के शीशे के पीछे बैठने से शरीर को पर्याप्त विटामिन डी नहीं मिल पाता। इसलिए आइए इस लेख में विटामिन डी लेने के सही तरीकों के बारे में जानते हैं।धूप लेने का सही समयहेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार धूप से विटामिन डी पाने का सबसे अच्छा समय सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक का होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दौरान सूर्य की रोशनी में यूवीबी किरणें सबसे मजबूत होती हैं। यही किरणें आपकी त्वचा को विटामिन डी बनाने में मदद करती हैं। लोग सोचते हैं कि सुबह की हल्की धूप बेहतर है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से दोपहर से पहले वाली धूप ही विटामिन डी के लिए ज्यादा असरदार होती है, बशर्ते आप ज्यादा देर तक न बैठें।धूप लेने का तरीकाविटामिन डी लेने के लिए आपको रोजाना कम से कम 15 से 30 मिनट तक धूप में बैठना चाहिए। जरूरी नहीं है कि आप पूरे कपड़े उतारकर धूप लें। बस आपके हाथ, पैर और चेहरा सीधे धूप के संपर्क में आने चाहिए।धूप में बैठने के बाद, जब आपकी अवधि पूरी हो जाए, तो छाया में आ जाएं या कपड़े से शरीर ढक लें। यह आसान तरीका शरीर में विटामिन डी की जरूरी मात्रा पूरी करने के लिए काफी है।सनस्क्रीन से दूरीधूप लेते समय सनस्क्रीन बिल्कुल न लगाएं। सनस्क्रीन एक कवच की तरह काम करती है, जो यूवीबी किरणों को रोक देती है। अगर आप सनस्क्रीन लगाते हैं, तो यह 90% से ज्यादा विटामिन डी बनने की प्रक्रिया को रूक जाती है। इसलिए पहले 15-30 मिनट बिना सनस्क्रीन के धूप लें। इसके बाद ही अपनी त्वचा को हानिकारक किरणों से बचाने के लिए सनस्क्रीन का उपयोग करें।त्वचा का रंगयह समझना महत्वपूर्ण है कि जिन लोगों की त्वचा का रंग डार्क होता है, उन्हें हल्की त्वचा वालों की तुलना में विटामिन डी बनाने के लिए धूप में 3 से 5 गुना ज्यादा समय बिताना पड़ सकता है।अगर आप पर्याप्त धूप नहीं ले पाते हैं, तो मछली, अंडे का पीला भाग और फोर्टिफाइड दूध जैसे खाद्य पदार्थ खाएं। या फिर किसी डॉक्टर से सलाह लेकर विटामिन डी के सप्लीमेंट्स लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
- सर्दियों का मौसम आते ही हाथों की त्वचा रूखी और खुरदरी हो जाती है। ऐसे में लोग बॉडी लोशन और हैंड क्रीम का इस्तेमाल भी करने लगते हैं। कई बार बाजार की महंगी क्रीम और लोशन भी हाथों की नमी को बनाए रखने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाती। ऐसे में घरेलू नुस्खे अपनाना सबसे आसान और कारगर उपाय साबित होता है।घरेलू उपायों में प्राकृतिक तेल, हर्ब्स और फलों के मिश्रण से हाथों को मुलायम और नर्म बनाया जा सकता है। रोजाना थोड़े समय में इन उपायों को अपनाकर आप न सिर्फ हाथों की रूखापन दूर कर सकते हैं, बल्कि उन्हें जवान और चमकदार भी रख सकते हैं। अगर आपके हाथों की त्वचा भी रूखापन दिखा रही है, तो ये आसान घरेलू नुस्खे आपके काम आएंगे और किसी क्रीम की जरूरत नहीं पड़ेगी।पहला नुस्खाबात करें पहले नुस्खे की तो आप सिर्फ नारियल के तेल के इस्तेमाल से अपने हाथों का रूखापन दूर कर सकते हैं। इसके लिए हर रोज रात को सोने से पहले हाथों पर नारियल तेल लगाकर हल्की मालिश करें। नारियल का तेल बेहद कम दामों में बाजार में आसानी से मिल भी जाता है।दूसरा नुस्खाअगर आपके घर में एलोवेरा का पौधा लगा है, तो उसमें से फ्रेश एलोवेरा जेल निकालकर हर दिन अपने हाथों पर लगाएं। इसे 15–20 मिनट रखकर आप अपने हाथों को धो सकते हैं। अगर ताजा एलोवेरा जेल नहीं है, और बाजार वाले जेल का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप इसे लगाकर रात में सो भी सकते हैं।तीसरा नुस्खाहाथों को मुलायम करने में ग्लिसरीन और गुलाब जल आपकी मदद करेंगे। इसके लिए बराबर मात्रा में ग्लिसरीन और गुलाबजल को मिक्स कर के एक डिब्बी में भर लें। अब अपने हाथों को नर्म बनाने के लिए ग्लिसरीन में गुलाब जल मिलाकर हल्की मालिश करें। आप दिन में दो बार इस नुस्खे का इस्तेमाल कर सकते हैं।चौथा नुस्खाअगर हाथों पर डेड स्किन जमने लगी है तो हफ्ते में एक बार हाथों पर स्क्रब कर लें। इसके लिए 1 छोटा चम्मच शुगर और 1 चम्मच ऑलिव ऑयल की जरूरत पड़ेगी। इन दोनों चीजों से स्क्रब बनाकर हफ्ते में 2 बार इस्तेमाल करें। ये स्क्रब आपके काफी काम आएगा।इस बात का ध्यान रखेंअगर आप नहीं चाहते कि आपके हाथों पर किसी तरह की कोई दिक्कत हो तो अपने हाथों को धोने के बाद मॉइस्चराइज अवश्य करें। साबुन के बाद हमेशा हाथों पर प्राकृतिक तेल या मॉइस्चराइजर लगाएं, ताकि हाथों का रूखापन बढ़ने न पाए। इन नुस्खों से हाथों की त्वचा रूखी नहीं रहेगी और आपको महंगी क्रीम की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
- सर्दियों के मौसम में मूंगफली का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि सेहत में भी बेहद फायदेमंद है? मूंगफली को ‘गरीबों का ड्राई फ्रूट’ कहा जाता है क्योंकि इसमें वो सारे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो महंगे ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम और काजू में पाए जाते हैं. आइए जानते हैं कि रोजाना थोड़ी-सी मूंगफली खाने से शरीर को क्या-क्या फायदे मिलते हैं.मूंगफली एक सस्ता, स्वादिष्ट और पौष्टिक सुपरफूड है जो न सिर्फ आपकी एनर्जी बढ़ाता है, बल्कि दिल, दिमाग, स्किन और बालों को भी हेल्दी रखता है. अगर आप रोजाना थोड़ी-सी मूंगफली को अपनी डाइट में शामिल करते हैं, तो यह आपको लंबे समय तक फिट और एक्टिव रख सकती है. रोजाना 25–30 ग्राम मूंगफली यानी मुट्ठीभर खाना ही सेहत के लिए सही होता है, क्योंकि किसी भी चीज को अधिक खाने से बॉडी को नुकसान भी पहुंच सकता है.प्रोटीन का पावरहाउसमूंगफली में प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. 100 ग्राम मूंगफली में लगभग 25–26 ग्राम प्रोटीन होता है, जो अंडे और काजू से भी अधिक होती है. 100 ग्राम अंडे में लगभग 13 ग्राम प्रोटीन होता है और 100 ग्राम काजू में 18 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है. यही वजह है कि वेजिटेरियन लोगों के लिए मूंगफली को बेहतरीन प्रोटीन सोर्स माना जाता है और यह मसल्स बनाने, टिश्यू रिपेयर करने और एनर्जी बनाए रखने में मदद करती है.दिल को रखे हेल्दी‘मोनोअनसैचुरेटेड’ और ‘पॉलीअनसैचुरेटेड’ फैटी एसिड्स मूंगफली में पाए जाते हैं जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाकर अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाते हैं. इससे हार्ट ब्लॉकेज और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का खतरा कम होता है, इसके साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट ‘रेसवेराट्रॉल’ भी पाया जाता है जो दिल को मजबूत बनाने में कारगार है.वजन घटाने में मददगारकई लोगों का मानना है कि मूंगफली खाने से मोटापा बढ़ती है, लेकिन सच्चाई इसकी उल्टी है. मूंगफली में मौजूद फाइबर और प्रोटीन लंबे समय तक पेट को भरा हुआ महसूस कराते हैं और इसकी वजह से हम ओवरईटिंग से भी बच जाते हैं. इसलिए मूंगफली खाने से वजन कंट्रोल करने में मदद मिलती है और मेटाबॉलिज्म भी एक्टिव रहता है.दिमाग और याददाश्त के लिए फायदेमंदमूंगफली में मौजूद नियासिन और विटामिन B3 दिमाग की काम करने की शक्ति को बढ़ाते हैं. यह नर्वस सिस्टम को शांत रखता है और अल्जाइमर जैसी बीमारियों से बचाव करता है. बच्चों के लिए यह दिमाग तेज करने वाला स्नैक भी है, इसलिए बच्चों की डाइट में तो मूंगफली या पीनट बटर को जरूर शामिल करना चाहिए.स्किन और हेयर के लिए बेस्टमूंगफली में मौजूद विटामिन E और जिंक स्किन को चमकदार और बालों को मजबूत बनाते हैं. यह एजिंग प्रोसेस को धीमा करती है और स्किन को अंदर से हाइड्रेट रखने में भी काम आती हैं. मूंगफली का तेल भी बालों और स्किन के लिए शानदार मॉइश्चराइजर का काम करता है.शुगर कंट्रोल में मददगारमूंगफली में ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम होता है, जिससे यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने नहीं देती. डायबिटीज के मरीजों के लिए यह एक हेल्दी स्नैक ऑप्शन हो सकती है, लेकिन इसे लिमिट में ही खाना सही होगा.
- प्रोटीन ऐसा न्यूट्रिएंट है जो हर इंसान के लिए जरूरी है. मांसपेशियों का निर्माण और मरम्मत, एंजाइम और हार्मोन बनाना, टिश्यू रिपेयर करना, इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना, बाल, त्वचा और नाखून के निर्माण में मदद करना आदि प्रोटीन के काम हैं. इसलिए प्रोटीन की सही मात्रा लेना भी जरूरी हो जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि जहां प्रोटीन का अधिक सेवन किडनी की समस्या पैदा कर सकता है वहीं कम प्रोटीन का सेवन आपको कमजोर महसूस करा सकता है.एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रोटीन की जरूरत हमेशा एक जैसी नहीं रह सकती बल्कि ये आपकी उम्र, वजन और फिजिकल एक्टिविटी पर भी निर्भर करती है. कई मामलों में एक्सरसाइज करने वाले या अधिक मेहनत करने वालों को अधिक प्रोटीन की जरूरत हो सकती है तो वहीं सामान्य लाइफस्टाइल वालों को कम प्रोटीन की. इन स्थितियों को देखते हुए आपको प्रतिदिन कितने प्रोटीन की जरूरत है इस बारे में भी जान लीजिए.आपको कितने प्रोटीन की जरूरत है?भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR -NIN 2020) के मुताबिक, वयस्कों के लिए प्रतिदिन शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम 0.83 ग्राम प्रोटीन लेनी की सलाह दी जाती है. यानी कि यदि किसी का वदन 80 किलो है तो उसे रोजाना लगभग 66 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होगी.एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो इंसान रोजाना जिम जाता है या एक्सरसाइज करता है, उस अपनी फिजिकल एक्टिविटी, इंटेंसिटी और गोल के आधार पर रोजाना 1.2 से 2 ग्राम प्रतिकिलो बॉडी वेट मुताबिक प्रोटीन लेना चाहिए. यानी यदि किसी का वजन 80 किलो है तो उसे 1.2 ग्राम प्रतिकिलो बॉडी वेट के हिसाब से 96 ग्राम और 2 ग्राम प्रतिकिलो बॉडी वेट के हिसाब से 160 ग्राम तक प्रोटीन की जरूरत हो सकती है.क्या कहते हैं एक्सपर्ट?उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की डाइट एक्सपर्ट डॉ. सृष्टि गोयल का कहना है, 'औसतन, एक व्यक्ति को अपने दैनिक प्रोटीन सेवन की पूर्ति के लिए प्रत्येक भोजन में 15 से 25 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए. हालांकि, यह मात्रा फिजिकल एक्टिविटी के आधार पर अलग-अलग हो सकती है.अन्य एक्सपर्ट् के मुताबिक, 30 या 35 वर्ष की उम्र के बाद मसल्स लॉस होने लगता है जिसे सार्कोपेनिया कहते हैं. यदि इस उम्र में थोड़ा अधिक प्रोटीन लेते हैं या फिर फिजिकल एक्टिविटी करकते हैं तो इस प्रोसेस को धीमा किया जा सकता है.ICMR की प्रोटीन रिकमेंडेशनवयस्क पुरुष: 54 ग्राम प्रति दिन (मीडियम एक्टिविटी वालों के लिए)वयस्क महिलाएं: 45.7 ग्राम प्रति दिन (मीडियम एक्टिविटी वालों के लिए)प्रेग्नेंट महिलाएं: चौथे से छठवें महीने में एक्स्ट्रा 9.5 ग्राम प्रतिदिन और सातवें से नवें महीने में 22 ग्राम प्रतिदिन.ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाएं: पहले 6 महीनों के दौरान एक्स्ट्रा 16.9 ग्राम प्रतिदिन और डिलीवरी के बाद 6-12 महीनों के दौरान 13.2 ग्राम प्रतिदिन एक्स्ट्रा.
- अक्टूबर का महीना खत्म होने वाला है और धीरे-धीरे ठंड का मौसम शुरू रहा है। ठंड के दिनों में गठिया या जोड़ों के दर्द के मरीजों की मुश्किलें बढ़ने लगती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण हैं। ठंडे तापमान के कारण हमारे शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे प्रभावित जोड़ों तक रक्त का संचार कम हो जाता है।यही वजह है कि जोड़ों में सूजन और अकड़न बढ़ जाती है। साथ ही कम तापमान में जोड़ों के आस-पास का साइनोवियल फ्लूइड गाढ़ा हो जाता है, जो जोड़ों के लिए नेचुरल चिकनाई का काम करता है। इस गाढ़ेपन के कारण जोड़ों को हिलाने-डुलाने में अधिक दर्द और कठिनाई महसूस होती है।इसके अलावा ठंडे मौसम में लोग शारीरिक गतिविधियां भी कम कर देते हैं, जिससे जोड़ों की अकड़न और बढ़ जाती है। इन्हीं वजहों से सर्दियों में गठिया के मरीजों को अपने स्वास्थ्य और जोड़ों की गर्माहट का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। आइए इस लेख में गठिया के दर्द से राहत पाने के लिए कुछ सरल उपायों के बारे में जानते हैं।गर्माहट ही है सबसे पहली और जरूरी राहतगठिया के दर्द से राहत पाने का सबसे जरूरी उपाय है गर्माहट। जोड़ों को गर्म रखने के लिए हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल से 15-20 मिनट तक सिकाई करें। गर्म पानी से नहाना भी रक्त संचार बेहतर करता है। बाहर निकलते समय जोड़ों को ऊनी कपड़ों और सपोर्ट से ढककर रखें।हल्का व्यायाम और मूवमेंट बनाए रखेंठंड के कारण गतिहीनता जोड़ों की अकड़न को बढ़ाती है। मरीजों को रोजाना हल्का व्यायाम जरूर करना चाहिए। घर के अंदर ही स्ट्रेचिंग, योग या धीमी गति से टहलना जोड़ों की चिकनाई और लचीलापन बनाए रखने में मदद करता है।हाइड्रेशन और पोषक तत्वों से भरपूर आहारठंड में अक्सर लोगों को डिहाइड्रेशन की समस्या होती है क्योंकि ठंड होने की वजह से बहुत से लोग पानी नहीं पीते हैं। इससे दर्द बढ़ सकता है, इसलिए गुनगुना पानी पर्याप्त मात्रा में पीते रहें। साथ ही ओमेगा-3 फैटी एसिड (जैसे अलसी, अखरोट) से भरपूर चीजों का सेवन करते रहें और विटामिन डी के लिए धूप में जरूर बैठें।हल्दी और अदरक के नुस्खे अपनाएंदर्द से राहत के लिए हल्दी (करक्यूमिन) और अदरक (जिंजरॉल) बेहतरीन प्राकृतिक उपाय हैं। इनमें शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। रोजाना हल्दी वाला दूध या अदरक की चाय का सेवन करें। ध्यान रखें कि असहनीय दर्द होने पर घरेलू नुस्खों के बजाय रूमेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
- दिल्ली और एनसीआर की हवा पहली ही काफी ज्यादा जहरीली हो रखी थी और दीपावली के बाद तो हालत ज्यादा खराब हो गए हैं. बच्चों, बुजुर्गों और फेफड़ों से जुड़ी दिक्कत से परेशान लोगों के लिए यह समय सबसे ज्यादा मुश्किल होता है और इन्हें अपनी सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए. अगर दिवाली के बाद आपको भी सांस लेने में तकलीफ हो रही हैं तो आपको अपने फेफड़ों की सफाई करने की जरूर है और इसलिए आज हम आपको कुछ आयुर्वेदिक डिटॉक्स ड्रिंक्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपके लंग्स की नेचुरली साफ करेंगे.सबसे खास बात ये है कि इन डिटॉक्स ड्रिंक्स को बनाना भी आसान है और ये सभी चीजें आपके घर में मौजूद होती हैं. ये नेचुरल ड्रिंक्स आपके फेफड़ों को साफ करने और उन्हें मजबूत बनाने में मदद कर सकती हैं. ये न केवल शरीर को डिटॉक्स करती हैं बल्कि इम्यूनिटी बढ़ाने और एनर्जी देने में भी मदद करती हैं.अदरक-नींबू चायअदरक और नींबू से बनी यह चाय शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करती है. नींबू में विटामिन C और अदरक में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो फेफड़ों को मजबूत बनाने और इंफेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं. सुबह खाली पेट इस ड्रिंक को पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जात है.गाजर-चुकंदर का जूसगाजर और चुकंदर दोनों ही हार्ट हेल्थ और स्किन के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं. मगर इन दोनों का जूस पीने से ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर बनता है और थकान कम होती है. गाजर और चुकंदर के जूस में विटामिन A और C होते हैं, जो फेफड़ों और शरीर के अन्य अंगों की सेहत के लिए फायदेमंद हैं.नींबू-शहद पानीनींबू और शहद मिलाकर पानी सिर्फ वेट लॉस में कारगार नहीं है, बल्कि इस पानी को पीने से हमारे शरीर की अच्छे से सफाई होती है और सारे टॉक्सिन बॉडी से बाहर निकल जाते हैं. नींबू-शहद वाला पानी पीने से हमारी स्किन में भी निखार आ जाता है, जो दिवाली की भागदौड़ में मुरछा जाती है. यह ड्रिंक शरीर को डिटॉक्स करने के साथ-साथ विटामिन C के जरिए इम्यूनिटी भी बढ़ाने का काम करती है.हल्दी वाला दूधचोट लगने पर हल्दी वाला दूध लोगों को अक्सर पीते आपने देखा होगा, लेकिन हल्दी वाला दूध फेफड़ों को डिटॉक्स करने में भी काम आता है.हल्दी में मौजूद करक्यूमिन सूजन कम करने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है. रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध पीने से फेफड़ों की सुरक्षा होती है. इसके साथ ही गले और फेफड़ों में होने वाली जलन भी कम होती है.मुलेठी की चायमुलेठी की चाय गले की खराश को कम करती है और श्वसन तंत्र को आराम देती है. यह नेचुरली फेफड़ों की सुरक्षा करती है और खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर आराम देती है.मुलेठी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-माइक्रोबियल गुण शामिल होते हैं, जिसकी वजह से खांसी के साथ ही डाइजेशन के लिए बहुत अच्छी होती है.अगर आप रोजाना इन 5 डिटॉक्स ड्रिंक्स को पीते हैं, तो आपके लंग्स ही नहीं बल्कि आपकी ओवरऑल हेल्थ भी ठीक रहती है. हालांकि इन ड्रिंक्स को पीने के साथ ही आपको धूम्रपान,धूल-मिट्टी और प्रदूषण से दूरी बनानी है, क्योंकि फेफड़ों की सेहत सिर्फ ड्रिंक्स से ही नहीं, बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल और बैलेंस डाइट से भी मजबूत होती है.--
- छठ पूजा सिर्फ आस्था का त्योहार नहीं है, जो न सिर्फ आस्था से जुड़ा है, बल्कि हमारी सेहत को भी प्रभावित करता है। इसमें चढ़ाया जाने वाला सभी प्रसाद (भोजन) बहुत ही स्वादिष्ट भी होता है और हमारी हेल्थ के लिए फायदेमंद भी होता है। बात चाहे ठेकुआ की हो गया फिर डाभ नींबू की, छठ में जो चीजें भगवान सूर्य और छठी मैया को चढ़ाई जाती हैं, वे हमारी सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं होती। आइए जानते हैं छठ पूजा के उन 5 खास चीजों के बारे में जो हेल्दी हैं।ठेकुआछठ पूजा का सबसे खास प्रसाद होता है ठेकुआ, जिसे बनाने के लिए गेहूं के आटे, गुड़ या चीनी और घी/सूखे नारियल का इस्तेमाल किया जाता है। यह प्रसाद खाने में स्वादिष्ट तो होता ही है, साथ ही यह शरीर को तुरंत ताकत देने का काम भी करता है। इसमें सभी पोषक तत्व होते हैं, इसलिए जब छठ के दौरान लंबे समय तक निर्जला व्रत रखना होता है तो ठेकुआ शरीर को एनर्जी देता है और डाइजेशन को भी मजबूत बनाता है।डाभ नींबूतीसरी चीज है डाभ नींबू, जो हमारे शरीर में इम्यूनिटी बूस्ट करने और बॉडी को डिटॉक्सिफाई करने का काम करता है। डाभ नींबू सामान्य नींबू से बड़ा और स्वाद में हल्का मीठा होता है। इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जो बदलते मौसम में इम्यूनिटी को को जबरदस्त तरीके से बढ़ाता है।गुड़ और गन्नाछठ में गुड़ का इस्तेमाल खूब होता है और प्रसाद के तौर पर गन्ना भी चढ़ाया जाता है। खासकर गुड़ की खीर यानी कि खरना के समय। गुड़ शरीर में आयरन की कमी को पूरा करता है और खून को प्यूरीफाई रखता है। इसके अलावा गन्ना लिवर को साफ करने (डिटॉक्सिफाई) में मदद करता है और शरीर को प्राकृतिक मिठास और तुरंत एनर्जी देता है।केला और अन्य मौसमी फलछठ पूजा में केले का बहुत महत्व है और इसे 'सदा शुभ' फल माना जाता है। केला हमें पोटैशियम देता है, जबकि संतरा और अन्य खट्टे फल इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। केला खाने से न सिर्फ पेट ठीक रहता है, बल्कि शरीर नेचुरल तरीके से मजबूत भी बनाता है। ये सभी फल विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर होते हैं। इसलिए छठ के प्रसाद को जरूर खाना चाहिए।नारियलछठ पूजा की पूजा सामग्री में नारियल का इस्तेमाल किया जाता है। यह किसी सुपरफूड से कम नहीं है, क्योंकि इसमें हेल्दी फैट, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। व्रत के बाद इसे खाने से शरीर को पोषक तत्व मिलते हैं। यह इंस्टेंट एनर्जी देने का काम करता है और हार्ट हेल्थ को भी बनाए रखने व सुधारने में मदद करता है।
- आजकल के दौर में सभी लोगों के हाथ में स्मार्टफोन जिंदगी का हिस्सा बन गया है। सुबह आंख खुलते ही मोबाइल देखना और रात में सोने से पहले मोबाइल पर सोशल मीडिया खंगलाना आम बात है जब पूरा दिन मोबाइल हाथ में रहता है, तो इसे पकड़ने का तरीका सही होना महत्वपूर्ण है। क्या फोन पकड़ने या देखने का तरीका गलत हो, तो इससे मेंटल हेल्थ को भी नुकसान हो सकता है? दरअसल जो लोग झुके हुए कंधों के साथ बैठते हैं, सिर नीचे होता है और आंखें फोन पर टिक जाती हैं तो इस स्थिति में दिमाग को थकान, उदासी और चिंता के सिग्नल भेजती है। लगातार इस तरह की पोजीशन में बैठने या चलने से डिप्रेशन और एंग्जायटी होने का रिस्क बढ़ जाता है। इसके उलट, जो लोग सीधे बैठते हैं, कंधे खुले होते हैं और छाती ऊपर की ओर होती है, उन लोगों में ज्यादा आत्मविश्वास, एनर्जी और खुशी महसूस होती है।क्या गलत पोस्चर में मोबाइल देखने से डिप्रेशन हो सकता है?वैसे सीधा असर तो नहीं पड़ता, लेकिन यह ट्रिगर बन सकता है क्योंकि अकेले पोस्चर से डिप्रेशन या एंग्जायटी नहीं हो सकती, लेकिन यह मौजूदा मानसिक स्थितियों को खराब कर सकता है। इसका एक अच्छा उदाहरण मैं आपको दे सकता हूं कि अगर कोई इंसान पहले से ही लो मूड या स्ट्रेस में हो, तो झुका हुआ पोस्टर इस नेगेटिव इमोशन को और ज्यादा मजबूत कर सकता है। इसे आप फीडबैक लूप कह सकते हैं। पहले दिमाग शरीर पर असर डालता है और फिर शरीर वापस दिमाग को प्रभावित करता है।”गलत पोस्चर शरीर पर कैसे असर डालता है?गलत पोस्चर का शरीर पर कई तरीकों से असर पड़ता है।सांस लेने के प्रोसेस पर असर - झुके हुए शरीर से फेफड़े पूरी तरह फैल नहीं पाते, जिससे ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है। इससे थकान और स्ट्रेस दोनों बढ़ते हैं।सर्कुलेशन में कमी - ब्लड फ्लो कम होने से शरीर और दिमाग दोनों में सुस्ती आती है। हार्मोनल बदलाव- लगातार झुके रहने से स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल बढ़ता है, जिससे एंग्जायटी और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।मेंटल हेल्थ को बेहतर रखने के टिप्स-गर्दन को नीचे झुकाने के बजाय, फोन को आंखों की ऊंचाई पर रखें।-एक टाइमर लगाएं और हर आधे घंटे में उठकर थोड़ा स्ट्रेच करें।-दिन में कई बार खुद को देखें कि आप कैसे बैठे हैं?-गर्दन और कंधों की कसरत करके इसे मजबूत बनाएं।-किसी भी तरह की एक्सरसाइज एक्सपर्ट की निगरानी में करें।निष्कर्षसीधा बैठना आपके दिमाग को सिग्नल भेजता है कि आप पॉजिटिव है और गलत पोस्चर भले ही सीधे तौर पर एंग्जायटी या डिप्रेशन का कारण न बने, लेकिन यह मेंटल और फिजिकल दोनों लेवल पर बैलेंस बिगाड़ सकता है। सिर्फ फोन के इस्तेमाल का तरीका बदलकर और हर कुछ मिनट में अपना पोस्टचर सुधारकर खुद को बेहतर और एनर्जेटिक महसूस करेंगे।
- सर्दियों में गरम-गरम दूध और गुड़ वाली चाय का स्वाद कौन नहीं पसंद करता? बहुत से लोग इसे एनर्जी बूस्टर और सर्दी भगाने का उपाय मानते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये कॉम्बिनेशन आपकी सेहत के लिए कितना सही है? गुड़ भले ही चीनी से हेल्दी माना जाता है, पर जब इसे दूध और चाय की पत्तियों के साथ उबाला जाता है, तो इसकी पौष्टिकता कम हो जाती है और कुछ नुकसानदायक प्रभाव भी दिखते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, दूध और गुड़ वाली चाय का रोजाना सेवन शरीर में एसिडिटी, गैस और ब्लड शुगर असंतुलन जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है।दूध और गुड़ वाली चाय सेहत के लिए हानिकारक क्यों है?दूध और गुड़ वाली चाय सेहत के लिए हानिकारक होती है। कारण यह है कि दूध में मौजूद कैसिइन प्रोटीन और गुड़ में मौजूद आयरन एक-दूसरे के एब्सॉर्ब होने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। इससे न, तो दूध का पूरा पोषण शरीर को मिलता है और न ही गुड़ का आयरन ठीक से पचता है। साथ ही, जब गुड़ को गर्म चाय में मिलाया जाता है, तो उसमें मौजूद ग्लूकोज और फ्रुक्टोज तेजी से टूटकर शरीर में शुगर स्पाइक बढ़ाते हैं। यह खासतौर पर डायबिटीज मरीजों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।दूध और गुड़ वाली चाय पीने के नुकसानगुड़ भले ही नेचुरल स्वीटनर है, लेकिन इसमें भी ग्लूकोज और सुक्रोज मौजूद होते हैं जो ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकते हैं। दूध में पहले से मौजूद लैक्टोज शुगर के साथ मिलकर इसका असर और तेज हो जाता है, जिससे इंसुलिन सेंसिटिविटी घट सकती है। कई लोग मानते हैं कि दूध और गुड़ वाली चाय एनर्जी देती है, लेकिन इसके विपरीत यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाकर तुरंत गिरा देती है। इस उतार-चढ़ाव से शरीर में थकान, सिरदर्द और नींद आने जैसी शिकायतें बढ़ सकती हैं। गुड़ और दूध का मिश्रण पचने में भारी होता है। दोनों की प्रकृति गर्म होती है, जिससे पेट में गैस, फुलावट और एसिडिटी की समस्या बढ़ जाती है। रोजाना सुबह खाली पेट इस चाय का सेवन करने से पेट में जलन और अपच की संभावना रहती है। गुड़ में प्राकृतिक शुगर होती है जो बार-बार सेवन करने पर दांतों पर प्लाक बना सकती है।जब गुड़ को उबलते दूध या चाय में डाला जाता है, तो उसकी पोषण क्षमता कम हो जाती है। तेज तापमान पर गुड़ में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स नष्ट हो जाते हैं। इस वजह से जो फायदा गुड़ से मिलना चाहिए, वह शरीर तक नहीं पहुंचता।निष्कर्ष:दूध और गुड़ दोनों ही अपने-अपने रूप में हेल्दी हैं, लेकिन इन्हें एक साथ उबालना शरीर के लिए फायदेमंद नहीं बल्कि हानिकारक है। अगर आपको गुड़ पसंद है, तो इसे चाय में मिलाने की बजाय भोजन के बाद एक छोटा टुकड़ा गुड़ अलग से खाएं। इससे आपको इसका पूरा पोषण मिलेगा और सेहत पर ज्यादा बुरा असर नहीं पड़ेगा।
- दिवाली की शॉपिंग करते समय ही सिर्फ शुभ-अशुभ नहीं देखा जाता है। इस दिन रसोई में बनने वाले भोजन में भी कई ऐसी चीजें हैं, जिन्हें बनाना भी ट्रेडिशन और शुभता का प्रतीक होता है। जिनमें से एक नाम जिमीकंद है। जी हां, दिवाली की रात ज्यादातर परिवारों में जिमीकंद की सब्जी जरूर बनाई जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं जिमीकंद, जिसे सूरन नाम से भी जाना जाता है, आपके स्वाद, शुभता का ही ध्यान नहीं रखता है, बल्कि इसके सेवन से आपकी सेहत को अनजाने में कई बड़े फायदे भी मिलते हैं। आइए जानते हैं जिमीकंद की सब्जी खाने से सेहत को क्या फायदे मिलते हैं।जिमीकंद की सब्जी में मौजूद पोषक तत्वजिमीकंद की सब्जी में मौजूद पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन बी1, बी6, फोलिक एसिड, बीटा-कैरोटीन, विटामिन सी, पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और तांबा जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। जो कई तरह के रोगों को दूर रखने में मदद करते हैं।जिमीकंद की सब्जी खाने के फायदेवेट लॉसजिमीकंद में फाइबर की अधिकता और कैलोरी कम होती है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और व्यक्ति को बार-बार भूख नहीं लगती,जिससे व्यक्ति ओवर ईटिंग से बच जाता है और उसे वजन कम करने में मदद मिलती है।हार्ट हेल्थजिमीकंद में मौजूद पोटेशियम की अच्छी मात्रा ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखकर दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने में भी मदद करती है।मजबूत इम्यून सिस्टमजिमीकंद में मौजूद विटामिन-सी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर इन्फेक्शन के खतरे को कम करता है।पाचन तंत्र को रखे स्वस्थजिमीकंद में भरपूर मात्रा में फाइबर होने से यह पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करता है। यह मल को मुलायम बनाकर कब्ज की समस्या में राहत देता है। बवासीर के मरीजों के लिए तो जिमीकंद रामबाण दवा है। ऐसा इसलिए क्योंकि कब्ज बवासीर का मुख्य कारण होता है। दिवाली पर इसका सेवन पाचन संबंधी परेशानियों से बचाता है।त्वचा और बालों की सेहतजिमीकंद में मुख्य रूप से विटामिन A और E अधिक मात्रा में होते हैं, जो त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद हैं। विटामिन B, विशेष रूप से B3 (नियासिन) और B7 (बायोटिन), त्वचा की चमक और बालों की मजबूती को बनाए रखने में भी मदद करते हैं।
- गुलाब जल और कच्चा दूध, दोनों ही स्किन को हाइड्रेट करते हैं। लेकिन, इनमें से ज्यादा फायदेमंद क्या है? आइए, जानते हैं-चेहरे पर गुलाब जल लगाने के फायदेगुलाब जल स्किन के लिए काफी अच्छा होता है। यह त्वचा को हाइड्रेट करता है और स्किन के पीएच लेवल को बैलेंस में रखता है। गुलाब जल ड्राई और डल स्किन से छुटकारा दिलाता है। अगर आपकी बेजान त्वचा है तो गुलाब जल का यूज करना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, गुलाब जल को सभी स्किन टाइप के लोग लगा सकते हैं। गुलाब जल का इस्तेमाल कई अलग-अलग तरीकों से होता है।चेहरे पर गुलाब जल कैसे लगाएं?चेहरे पर गुलाब जल लगाना फायदेमंद होता है। आप गुलाब जल को क्लींजर या टोनर के तौर पर लगा सकते हैं। आप चाहें तो मुल्तानी मिट्टी, चंदन पाउडर या बेसन आदि के साथ भी गुलाब जल को मिक्स करके चेहरे पर अप्लाई कर सकते हैं। गुलाब जल को चेहरे पर लगाने से स्किन हाइड्रेट होती है और त्वचा पर नमी बनी रहती है। Also Read - रात में सोने से पहले चेहरे पर इस तरह लगाएं शहद और मलाई, सुबह चेहरे पर दिखेगा ऐसा ग्लो कि देखनेवाला रह जाएगा हैरानचेहरे पर कच्चा दूध लगाने के फायदेदूध सिर्फ सेहत के लिए नहीं, स्किन के लिए भी फायदेमंद होता है। कच्चा दूध त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं को मिटाता है। कच्चा दूध मुंहासों और दाग-धब्बों को मिटाने में असरदार होता है। यह पोर्स को हेल्दी बनाए रखने में मदद करता है। इससे ब्रेकआउट नहीं होता है और स्किन ग्लो करती है। कच्चा दूध झाइयों और पिग्मेंटेशन को भी मिटाने में मदद करता है।चेहरे पर कच्चा दूध कैसे लगाएं?आप चेहरे पर कच्चा दूध भी लगा सकते हैं। कच्चा दूध स्किन की डीप क्लींजिंग करता है। आप एक कटोरी में कच्चा दूध लें। कॉटन पैड की मदद से चेहरे पर कच्चा दूध अप्लाई करें। इससे त्वचा पर जमी सारी धूल-मिट्टी और गंदगी आसानी से रिमूव हो जाएगी। कच्चा दूध त्वचा का निखार भी बढ़ाता है। आप कच्चे दूध को मुल्तानी मिट्टी या चंदन पाउडर के फेस पैक भी मिला सकते हैं। Also Read - नहाने के बाद चेहरे पर लगाएं ये 4 चीजें, खिल जाएगी त्वचा और दिनभर रहेगा निखारगुलाब जल या कच्चा दूध: स्किन के लिए क्या है ज्यादा फायदेमंदगुलाब जल और कच्चा दूध, दोनों ही स्किन के लिए अच्छे होते हैं। गुलाब जल स्किन को साफ और हाइड्रेट करता है। कच्चा दूध भी स्किन की डीप क्लींजिंग करता है। अगर आप गुलाब जल और कच्चे दूध का पूरा फायदा लेना चाहते हैं, तो गुलाब जल को टोनर के तौर पर यूज कर सकते हैं। वहीं, कच्चे दूध से चेहरे की क्लींजिंग कर सकते हैं। इस तरह आप गुलाब जल और कच्चा दूध, दोनों को अपने स्किनकेयर रूटीन में शामिल कर सकते हैं।
- दाल हमारी सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है। दाल और दाल से बनी चीजें फाइबर और प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत हैं, लेकिन कुछ लोगों को इन्हें खाने के बाद पेट में गैस या फूलापन (Bloating) महसूस होता है। इसका कारण यह है कि दालों में कुछ कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट (Complex Carbohydrates) जैसे रैफिनोज (Raffinose) और स्टैचियोस (Stachyose) पाए जाते हैं, जिन्हें हमारा पाचन तंत्र पूरी तरह से तोड़ नहीं पाता है। कार्बोहाइड्रेट छोटी आंत से पचकर बड़ी आंत तक पहुंचते हैं, जहां गट बैक्टीरिया इन्हें फर्मेंट करते हैं और इसके दौरान गैस बनती है, जिससे पेट फूलता है और असहजता महसूस होती है। हर व्यक्ति का गट माइक्रोफ्लोरा (Gut Flora) और पाचन एंजाइम्स अलग-अलग होते हैं, इसलिए कुछ लोगों को दाल खाने के बाद ज्यादा गैस महसूस हो सकती है। दाल के साथ दही या छाछ लेने से गुड बैक्टीरिया बढ़ते हैं और पाचन में सुधार होता है। साथ ही, नियमित एक्सरसाइज और तनाव कम करना भी पेट की सेहत के लिए जरूरी है।दाल से होने वाली ब्लोटिंग से कैसे बचें?-दाल खाने से होने वाली गैस या फूलापन कम करने के कुछ आसान उपाय-1. दाल को भिगोकर रखेंदाल को 6-8 घंटे या रातभर भिगोकर रखने से गैस बनाने वाले तत्व कम हो जाते हैं और यह पचने में आसान होती है।2. दाल को अच्छी तरह पकाएंदाल को ठीक से पकाने से उसके कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट टूट जाते हैं और पेट में गैस बनने की संभावना कम होती है।3. धीरे-धीरे सेवन बढ़ाएंअगर आप रोज दाल नहीं खाते हैं, तो इसे धीरे-धीरे अपनी डाइट में शामिल करें ताकि पेट इसकी आदत डाल सके।4. पाचन में मदद करने वाले मसाले डालेंदाल बनाते समय हींग, अदरक, जीरा और सौंफ डालें। ये गैस बनने से रोकते हैं और पाचन सुधारते हैं।5. दाल को चबाकर खाएंखाना धीरे-धीरे और अच्छे से चबाने से पाचन एंज़ाइम्स को सही तरह से काम करने में मदद मिलती है।6. गुनगुना पानी पिएंखाने के बाद गुनगुना पानी पीने से पाचन में राहत मिलती है और गैस निकलने में मदद मिलती है।निष्कर्ष:दाल पोषक तत्वों से भरपूर भोजन है, लेकिन इसमें मौजूद फाइबर और प्राकृतिक तत्व कुछ लोगों में गैस या फूलापन पैदा कर सकते हैं। ऊपर दिए गए उपायों को अपनाकर आप इस असुविधा को कम कर सकते हैं और दाल के सभी स्वास्थ्य लाभ का आनंद उठा सकते हैं।
- सभी विटामिन हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं, लेकिन कुछ विटामिन की कमी से हमारे शरीर पर असर पड़ सकता है। जिससे हमारी त्वचा का रंग और उसकी चमक काफी हद तक हमारे खानपान और शरीर में मौजूद विटामिन्स पर निर्भर करता है। अगर शरीर को जरूरी विटामिन सही मात्रा में न मिलें, तो स्किन डल, बेजान और गहरी दिखाई देने लगती है। खासतौर पर कुछ विटामिन की कमी से त्वचा पर पिगमेंटेशन, दाग-धब्बे और रंग काला पड़ने की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में जरूरी है कि आपको पता होना चाहिए कि कौन-कौन से विटामिन्स हमारी स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखते हैं। आज हम आपको यहां 5 ऐसे जरूरी विटामिन्स के बारे में विस्तार से बताएंगे जिनकी कमी से त्वचा का रंग गहरा हो सकता है।विटामिन E की कमी स्किन को करती है डार्कविटामिन ई त्वचा को एंटीऑक्सीडेंट प्रोटेक्शन देता है और रंगत निखारने में मदद करता है। आपको बता दें विटामिन ई कमी होने पर त्वचा रूखी, डल और बेजान दिखने लगती है। ऐसे में त्वचा पर झाइया बढ़ सकती है और स्किन की नेचुरल ब्राइटनेस कम हो जाती है।विटामिन C की कमी स्किन को करता है डार्कविटामिन सी की कमी से त्वचा पर हाइपरपिगमेंटेशन जैसी समस्या पैदा हो सकती है। यह कोलेजन बनाने में मदद करता है साथ ही, विटामिन सी की कमी होने पर त्वचा रूखी, बेजान और डल दिख सकती है। आपको बता दें कि विटामिन सी एक एंटीऑक्सीडेंट है, जो सूरज और प्रदूषण से होने वाले नुकसान को कम करता है।विटामिन D की कमी से चेहरा हो सकता है कालाविटामिन डी की कमी से त्वचा पर डलनेस और कभी-कभी हल्के काले धब्बे दिखा सकते हैं। साथ ही, स्किन ड्राई और रूखी हो जाती है, जिससे नेचुरल ग्लो कम हो जाता है और रंग गहरा या बेजान दिख सकता है। आपको बता दें कि त्वचा पर डार्क सर्कल्स और थकान का असर भी विटामिन डी की कमी कारण दिख सकता है। ऐसे में, शरीर में थकान, कमजोरी और डार्क सर्कल्स बढ़ सकते हैं। विटामिन A की कमी से त्वचा पर पड़ता है असरविटामिन ए की कमी त्वचा पर असर डाल सकती है, लेकिन इससे त्वचा रूखी, खुरदरी और बेजान हो सकती है। साथ ही, त्वचा पर डलनेस और पिगमेंटेशन जैसी समस्या बढ़ सकती है। विटामिन ए की कमी से होंठ फटने लगते हैं और त्वचा पर दाग-धब्बे हो सकते हैं।विटामिन B12 की कमी से डार्क हो सकती है स्किनजब शरीर में बी12 की कमी होती है, तो मेलानिन का उत्पादन असंतुलित हो सकता है और इसके कारण त्वचा का रंग सामान्य से गहरा दिख सकता है। साथ ही, कुछ मामलों में त्वचा पर हाइपरपिग्मेंटेशन हो सकता है, जिसमें हाथों, पैरों और चेहरे पर त्वचा का रंग गहरा पड़ने लगता है। इसके साथ ही बी12 की कमी से अक्सर थकान, कमजोरी, बाल झड़ना और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी देखी जा सकती हैं।
- आज के समय में घुटनों के दर्द की परेशानी बहुत ही आम बन चुकी है। चाहे वह बुजुर्ग हो या युवा हर उम्र के लोग घुटनों के दर्द की समस्या से परेशान हैं। घुटनों के दर्द के कारणों में गठिया (Arthritis), शरीर का ज्यादा वजन, कोई पुरानी चोट, खाने में पोषण की कमी और आयु संबंधी हड्डियों की क्षति शामिल होती है। सामान्य तौर पर देखा जाता है कि जब किसी व्यक्ति को घुटनों के दर्द की समस्या होती है, तो लोग इसका इलाज तेल से करने की कोशिश करते हैं। परंतु आयुर्वेद में तेल के अलावा कई प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं जो घुटनों के दर्द को जड़ से ठीक करने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में से एक उपाय है- गोंद का सेवन।गोंद क्या है?गोंद एक प्रकार का प्राकृतिक रेजिन (resin) होता है जो पेड़ों के तनों से निकलता है। इसे सुखाकर पाउडर या दानों के रूप में तैयार करके रोजाना इस्तेमाल किया जाता है।आयुर्वेद में गोंद का महत्वआयुर्वेद के अनुसार, गोंद को "बल्य" (शरीर को बल देने वाला), "वातहर" (वात दोष को शांत करने वाला) और "संधि स्थायी" (जोड़ों को मजबूत करने वाला) माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार, जब व्यक्ति के शरीर का वात दोष असंतुलित हो जाता है, तो इससे घुटनों में दर्द, सूजन और अकड़न की परेशानी होती है। गोंद का सेवन करने से शरीर का वात दोष संतुलित होता है और ये घुटनों के दर्द की समस्या को दूर करता है।गोंद में पाए जाने वाले पोषक तत्वगोंद सिर्फ एक पारंपरिक उपाय नहीं है, बल्कि इसमें कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। गोंद में कैल्शियम, प्रोटीन, हाई फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ई जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व समग्र स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद होते हैं।घुटनों के दर्द में गोंद कैसे करता है काम?घुटनों के दर्द को कम करने में गोंद का सेवन कई प्रकार से फायदेमंद होता है।1. वात दोष को करें संतुलितआयुर्वेद में वात दोष का असंतुलन जोड़ों में दर्द और सूजन का मुख्य कारण माना गया है। गोंद का सेवन वात दोष को नियंत्रित करता है, घुटनों के सूजन और दर्द में राहत मिलती है।2. हड्डियों को करें पोषितगोंद में मौजूद कैल्शियम और प्रोटीन हड्डियों को पोषित करके उसकी ताकत को बढ़ाते हैं। गोंद का सेवन करने से घुटनों की हड्डियों में घिसाव कम होता है। जिसकी मदद से घुटनों के दर्द की परेशानी दूर होती है।3. जोड़ो की लुब्रिकेशन बढ़ाता हैगोंद में नेचुरल लुब्रिकेंट्स होते हैं जो जोड़ो की चिकनाई बढ़ाते हैं। इससे उम्र के साथ होने वाली घुटनों की क्षति कम हो जाती है। गोंद का सेवन करने से उम्र के साथ होने वाली चलने-फिरने की तकलीफ कम होती है।4. घुटनों की सूजन करे कमगोंद के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण घुटनों के दर्द और सूजन को भी कम करते हैं।5. मांसपेशियां बनाएं मजबूतगोंद का नियमित रूप से सेवन किया जाए, तो इसके पोषक तत्व मांसपेशियों की ताकत बढ़ाकर घुटनों पर पड़ने वाले दबाव को कम करती है। इससे घुटनों में होने वाला दर्द और सूजन कम करने में मदद मिलती है।Journal of Medicinal Plants Studies में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, गोंद कतीरा का नियमित सेवन जोड़ो के दर्द और ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है। नियमित रूप से गोंद का सेवन करने से कम उम्र में घुटनों के दर्द की परेशानी नहीं होती है।घुटनों के दर्द में गोंद का सेवन कैसे करें-घुटनों के दर्दऔर अन्य परेशानियों में गोंद का सेवन कई प्रकार से किया जा सकता है। आइए जानते हैं इसके बारे में।1. गोंद के लड्डू - गोंद से बनाए जाने वाले लड्डू सबसे पारंपरिक और प्रभावी तरीका है इसे खाने का।2. गोंद कतीरा ड्रिंक- गर्मी के मौसम में गोंद कतीरा को पानी में भिगोकर नींबू के साथ मिलाकर ड्रिंक के तौर पर पिया जा सकता है।3. गोंद पाउडर- पारंपरिक तौर पर गोंद का सूखा पाउडर बना लें। रात को सोने पहले आधा गोंद का पाउडर गुनगुने दूध के साथ लें।निष्कर्षगोंद सिर्फ एक मिठाई बनाने की सामग्री नहीं है, बल्कि यह एक सम्पूर्ण औषधि है जो घुटनों के दर्द जैसी गंभीर समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है। अगर आप घुटनों के दर्द से परेशान हैं, तो गोंद को अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाएं।
- एक्सपर्ट्स कहते भी हैं कि अगर शरीर के किसी हिस्से में दर्द, सूजन है या रेडनेस है, तो ऐसे में हीट थेरेपी कारगर साबित होती है। इससे सूजन में कमी आती है और दर्द भी छूमंतर हो जाता है। यहां यह सवाल जरूर उठता है कि क्या जिस तरह हीट हीट थेरेपी काम करती है, इसी तरह गर्म पानी का शॉवर लेने से भी दर्द से राहत मिलती है? विशेषकर, मांसपेशियों के दर्द में क्या वाकई यह तरीका काम कर सकता है? आइए, जानते हैं इस बारे में सभी बातें विस्तार से।नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) में प्रकाशित एक लेख की मानें, तो मांसपेशियों में दर्द के गर्म पानी का शॉवर लेना बहुत ही फायदेमंद होता है। यह बिल्कुल उसी तरह काम करता है, जिस तरह हीट थेरेपी काम करती है। कहने का मतलब है कि मांसपेशियों में तनाव, खिंचाव या दर्द हो, तो ऐसे में आप गर्म पानी से नहाने पर मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं। साथ ही, ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है, जिससे मांसपेशियों की अकड़न दूर होती है और दर्द का एहसास भी कम होने लगता है।गर्म पानी से नहाने पर किस तरह मांसपेशियों का दर्द दूर होता है?मांसपेशियां रिलैक्स होती हैंगर्म पानी में शॉवर लेने से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं, क्योंकि अकड़न दूर हो जाती है और दर्द में भी कमी आने लगती है। दरसअल, गर्म पानी में शॉवर लेने से हमारी ब्लड वेसल्स खुलती हैं, जो मांसपेशियों पर पॉजिटिव असर डालती है।ब्लड फ्लो में सुधार होता हैजब आप गर्म पानी में नहाते हैं, तो इससे ब्लड वेसल्स अधिक खुलती हैं। इसका मतलब है कि ब्लड फ्लो बढ़ जाता है। ऐसे में पूरी बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बहुत अच्छी तरह से होता है, मसल्स में भी इसका असर देखने को मिलता है। जब मसल्स में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, तो दर्द, सूजन या अकड़न की समस्या भी दूर हो जाती है।मांपेशियों के दर्द से राहत के लिए कब लें गर्म शॉवरवैसे तो आप गर्म पानी से कभी भी शॉवर ले सकते हैं। अगर आप नियमित रूप से वर्कआउट करते हैं, तो इसके बाद हॉट शॉवर लेना फायदेमंद हो सकता है। इससे वर्कआउट के दौरान मांसपेशियों में आया तनाव कम होगा, खिंचाव दूर होगा और इंजुरी के कारण आई सूजन में भी कमी आ सकती है।-गर्म पानी से शॉवर लेने से पहले याद रखें जरूरी बातें-शॉवर लेने के लिए बहुत ज्यादा गर्म पानी का यूज न करें।-अगर किसी गंभीर चोट के कारण मांसपेशियों में सूजन आई है, तो हॉट शॉवर लेने से बचें।-हॉट शॉवर लेते हैं, तो बॉडी को हाइड्रेट करने पर भी जोर दें।निष्कर्षमांसपेशियों में आई अकड़न दूर करने के लिए हॉट शॉवर लेना अच्छी बात हैं। इससे अकड़न तो कम होती है, साथ ही दर्द भी दूर होता है। हां, अगर आपको किसी तरह की स्किन कंडीशन है, तो गर्म पानी से नहाने से पहले एक्सपर्ट की सलाह लेना न भूलें। इसके अलावा, अगर आपको गर्म पानी से नहाने के बाद मांसपेशियों के दर्द से आराम न आए, तो इसे इग्नोर न करें। तुरंत डॉक्टर से अपना इलाज करवाएं।
- अमरूद हेल्दी और पोषक तत्वों से युक्त फलों में से एक है। अमरूद में भरपूर मात्रा में फाइबर, फोलेट, पोटैशियम, मैग्नीशियम, कॉपर, जिंक, आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन-सी, ए और बी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसका सेवन करने से इम्यूनिटी को बूस्ट करने, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, पाचन तंत्र को दुरुस्त करने, वजन कम करने और हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है, लेकिन क्या इससे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।क्या अमरूद कोलेस्ट्रॉल के लिए अच्छा है?डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, अमरूद में फाइबर और विटामिन-सी जैसे बहुत से पोषक तत्व होते हैं और इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और हार्ट को हेल्दी बनाए रखने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रहे, इससे किसी भी तरह की समस्या होने पर इसका सेवन करने से बचें, साथ ही, इसका सेवन सीमित मात्रा में करें।कोलेस्ट्रॉल को कम करेअमरूद में एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण, फाइबर और विटामिन्स होते हैं। इसका सेवन करने से शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ावा देने और शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद मिलती है।हार्ट के लिए फायदेमंदअमरूद में बहुत से एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कम करने, धमनियों में जमा प्लाक को निकालने, हार्ट के प्रेशर को कम करने और हार्ट से जुड़ी समस्याओं के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।
- ड्राई फ्रूट्स सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। ड्राई फ्रूट्स में विटामिन ई, फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स होते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं। ड्राई फ्रूट्स खाने से शरीर को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है। अगर आप नियमित रूप से ड्राई फ्रूट्स का सेवन करेंगे, तो इससे हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती मिलेगी। ड्राई फ्रूट्स डाइजेशन के लिए भी अच्छे होते हैं। आपको सभी मौसमों में ड्राई फ्रूट्स जरूर खाने चाहिए। आपको बदलते मौसम में ड्राई फ्रूट्स का सेवन जरूर करना चाहिए। ड्राई फ्रूट्स खाने से इम्यूनिटी बूस्ट होती है और कई रोगों से बचाव होता है।बादाम खाएंबदलते मौसम में आप रोजाना बादाम का सेवन कर सकते हैं। बादाम खाने से शरीर को एनर्जी मिलती है। बादाम में विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए जरूरी होते हैं। इसके लिए आप 5-6 बादाम लें और रातभर भिगोकर रख दें। सुबह बादाम के छिलके निकालकर खाली पेट खा लें। बादाम खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनेगी। बादाम खाने से बीमारियों का खतरा भी कम होगा।किशमिश खाएंबदलते मौसम में किशमिश खाना भी फायदेमंद होता है। आप अपनी रोज की डाइट में किशमिश शामिल कर सकते हैं। आप 4-5 किशमिश लें और इन्हें रातभर भिगोकर रख दें। सुबह खाली पेट इनका सेवन किया जा सकता है। किशमिश खाने से आयरन की कमी दूर होती है। इससे हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है और कमजोरी-थकान मिटती है। इसलिए आप चाहें तो रोजाना किशमिश को अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं।अखरोट खाएंबदलते मौसम में अखरोट खाना अच्छा होता है। अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर, प्रोटीन और मैंगनीज जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। अखरोट एंटीऑक्सीडेंट्स का भी अच्छा सोर्स होता है। इसलिए आप अपनी रोज की डाइट में अखरोट जरूर शामिल करें। आप रोज सुबह अखरोट की 1-2 भिगी हुई गिरी खा सकते हैं। इससे शरीर को एनर्जी मिलेगी और इम्यूनिटी भी बूस्ट होगी।
- बालों के झड़ने और टूटने की समस्या से बचने के लिए अक्सर लोग आंवला और भृंगराज का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि बालों के लिए आंवला या भृंगराज कौन सा फायदेमंद है? आइए जानें बालों को तेजी से बढ़ाने के लिए आंवला या भृंगराज क्या है फायदेमंद?बालों को तेजी से बढ़ाने के लिए आंवला या भृंगराज क्या है फायदेमंद? -ये सभी आयुर्वेदिक औषधियां प्राकृतिक रूप से उपलब्ध हैं और इसका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है। इन दोनों जड़ी बूटियों में कई गुण पाए जाते हैं जो आपके बालों को पोषण प्रदान करते हैं इसलिए यह दोनों ही फायदेमंद हैं।आँवला: यह आपके बालों को पोषण प्रदान करता है और उसे चमकदार बनाता है। इसमें विटामिन सी की प्रचुर मात्रा पाई जाती है और आपके स्कैल्प का पीएच भी संतुलित रखता है। इसके प्रयोग से बालों में डैंड्रफ की समस्या भी कम हो जाती है और बालों का सफ़ेद होना भी कम हो जाता है। यह आपके बालों को मजबूती प्रदान करता है।भृंगराज: बालों की मजबूती और तेजी से बढ़ने के लिए भृंगराज एक फायदेमंद आयुर्वेदिक औषधि का काम करती है। आयुर्वेद के अनुसार भृंगराज “बालों का राजा” है, अगर आप इस तेल से अपने स्कैल्प की मसाज करते हैं तो वहां ब्लड सर्कुलेशन फ़ास्ट हो जाता है और बाल तेजी से बढ़ते हैं। इससे आपका स्ट्रेस भी कम होता है और बालों का झड़ना भी कम हो जाता है।वैसे तो यह दोनों औषधि आपके बालों के लिए बहुत अच्छे हैं लेकिन अगर आप बालों को तेजी से बढ़ाने के उपाय ढूंढ़ रहे हैं तब भृंगराज आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हैं।
- अक्टूबर महीने की शुरुआत के साथ ही मौसम में एक सुखद बदलाव महसूस होने लगता है। दिन में हल्की धूप और सुबह-शाम हल्की ठंड का यह मौसम हर किसी को पसंद आता है। मगर यह सुहावना मौसम अपने साथ वायरल संक्रमण का एक बड़ा जोखिम भी लेकर आता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दिन और रात के तापमान में होने वाला यही उतार-चढ़ाव हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है और ऐसे में बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है।यही कारण है कि इस मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी और वायरल फीवर के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर हम पहले से ही कुछ जरूरी सावधानियां बरतें, तो इस मौसम का बिना बीमार पड़े आनंद लिया जा सकता है। इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।इम्यूनिटी को बनाएं मजबूतइस मौसम में बीमारियों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है अपनी इम्यूनिटी को मजबूत करना। इसके लिए अपनी डाइट में विटामिन C से भरपूर खट्टे फलों जैसे आंवला, संतरा और नींबू को शामिल करें। इसके अलावा रोजाना तुलसी-अदरक की चाय और रात को सोने से पहले हल्दी वाले दूध का सेवन करें। ये नेचुरल इम्यूनिटी बूस्टर शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं और संक्रमण से लड़ने की ताकत देते हैं।कपड़ों और हाइड्रेशन पर दें ध्यानदिन की धूप से धोखा न खाएं। इस मौसम में सुबह और शाम के समय तापमान तेजी से गिरता है, इसलिए पूरी बाजू के कपड़े पहनें ताकि शरीर ठंडी हवा के सीधे संपर्क में न आए। साथ ही, शरीर को हाइड्रेटेड रखना भी बहुत जरूरी है। ठंडे पानी की जगह दिन भर गुनगुना पानी, सूप और हर्बल टी पिएं। यह गले को आराम देता है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।स्वच्छता और दूरी बनाए रखनावायरल संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे में आसानी से फैलता है। इससे बचने के लिए बार-बार अपने हाथों को साबुन से धोएं या सैनिटाइजर का उपयोग करें। अपनी आंखों, नाक और मुंह को छूने से बचें। इस मौसम में जितना हो सके, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से परहेज करें ताकि संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके। खांसते या छींकते समय हमेशा मुंह पर रूमाल या टिश्यू रखें।पूरी नींद और आराम है जरूरीएक मजबूत इम्यून सिस्टम के लिए पर्याप्त नींद लेना अत्यंत आवश्यक है। रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लेने से हमारे शरीर को खुद को मरम्मत करने और संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाओं को बनाने का समय मिलता है। नींद की कमी शरीर को कमजोर बनाती है और बीमारियों की चपेट में आने का खतरा बढ़ाती है। इसलिए अपनी नींद से कोई समझौता न करें।
- अनहेल्दी लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण ज्यादातर लोग विटामिन-डी की कमी से परेशान रहते हैं। इसके कारण लोगों को हड्डियों के कमजोर होने, थकान होने, बालों के झड़ने, मांसपेशियों के कमजोर होने, मांसपेशियों में दर्द होने, बार-बार बीमार पड़ने, इम्यूनिटी के कमजोर होने, घाव के धीरे-धीरे भरने, स्ट्रेस होने, डिप्रेशन होने और हड्डियों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ने जैसी स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बता दे, विटामिन-डी की कमी के कारण लोगों को शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्वास्थ्य प्रभावित होते हैं।विटामिन डी की कमी आपके मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित करती है?शरीर में विटामिन-डी की कमी होने पर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। विटामिन-डी ब्रेन के कार्यों के लिए बेहद जरूरी है, जिसमें मूड और व्यवहार की रेगुलेशन भी शामिल है। कई अध्ययनों के अनुसार, विटामिन-डी की कमी और डिप्रेशन, चिंता (anxiety) और मौसमी भावात्मक विकार (seasonal affective disorder (SAD)) के बढ़ते जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। बता दें, ऐसा इसलिए है क्योंकि विटामिन-डी शरीर में सेरोटोनिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के उत्पादन को नियंत्रित करने में मदद करता है, जो मनोदशा या मानसिक स्वास्थ्य की स्थिरता को प्रभावित करता है।नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अध्ययन के अनुसार, विटामिन-डी, जिसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं और जो ब्रेन के टिश्यूज के लिए जरूरी है। मनोदशा संबंधी विकारों (mood disorders preventions) की रोकथाम या उपचार के लिए जरूरी है।विटामिन-डी की कमी के लक्षणशरीर में विटामिन-डी की कमी होने पर व्यक्ति को थकान होने, एकाग्रता की कमी होने, चिड़चिड़ापन होने और डिप्रेस्ड मूड होने जैसे लक्षण दिखते हैं। बता दें, विटामिन-डी की कमी होने की समस्या खासकर, ठंडे मौसम में रहने वाले लोगों, घर के अंदर काम करने वाले लोगों या गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों को ज्यादा होती है। इसके अलावा, विटामिन-डी की कमी संज्ञानात्मक में गिरावट (cognitive decline) से जुड़ी हुई है और यह बढ़ती उम्र में मनोभ्रंश (dementia) जैसी स्थितियों के विकास या बिगड़ने में योगदान दे सकती है।विटामिन-डी की कमी को दूर करने के लिए क्या करें?विटामिन-डी की कमी को दूर करने के लिए धूप में बैठें, विटामिन-डी युक्त फैट युक्त मछली और फोर्टिफाइड फूड्स को डाइट में शामिल करें। इसके अलावा, डॉक्टर की सलाह अनुसार, विटामिन-डी के सप्लीमेंट्स का सेवन किया जा सकता है। इनसे विटामिन-डी के स्तर में सुधार करने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने में मदद मिलती है। हालांकि, सप्लीमेंट्स लेना शुरु करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। पर्याप्त विटामिन-डी बनाए रखना मानसिक स्वास्थ्य के बचाव की दिशा में एक सरल लेकिन प्रभावी कदम है।निष्कर्षशरीर में विटामिन-डी की कमी होने पर व्यक्ति को चिड़चिड़ापन होने, एकाग्रता की कमी होने, थकान होने और डिप्रेस्ड मूड होने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, इसके कारण व्यक्ति को डिमेंशिया जैसी समस्याओं को बढ़ावा मिल सकता है। ऐसे में विटामिन-डी की कमी को दूर करने के लिए विटामिन-डी युक्त फूड्स को डाइट में शामिल करें, सप्लीमेंट्स लें और धूप में बैठें। इससे स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं। ऐसे में ध्यान रहे, विटामिन-डी की कमी को दूर करने के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें, साथ ही, सप्लीमेंट्स का सेवन डॉक्टर की सलाह के साथ ही करें।
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जब भी शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने की बात होती है, तो सबसे पहले जोड़ों में दर्द और गठिया का ख्याल आता है। मगर कई बार ये शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने से भी हो सकता है। यूरिक एसिड भोजन के पाचन से उत्पन्न एक प्राकृतिक अपशिष्ट उत्पाद है, जिसे किडनी फिल्टर करके शरीर से बाहर निकाल देती है। लेकिन जब शरीर में यह ज्यादा बनने लगता है या किडनी इसे ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह क्रिस्टल के रूप में जोड़ों में जमा होकर दर्द और सूजन का कारण बनता है।
यूरिक एसिड बढ़ने के मुख्य लक्षण हैं जोड़ों में तेज दर्द, सूजन, लालिमा और गर्माहट, खासकर पैर के अंगूठे में। अन्य लक्षणों में जोड़ों में अकड़न, बार-बार गाउट का दौरा पड़ना, गुर्दे की पथरी बनना, थकान आदि। हालांकि बहुत कम लोग यह जानते हैं कि यूरिक एसिड बढ़ने की वजह से आपकी त्वचा पर भी कई चेतावनी भरे संकेत मिल सकते हैं। इन लक्षणों को अक्सर सामान्य त्वचा की समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जो आगे चलकर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप ले सकता है। इसलिए आइए इस लेख में त्वचा के उन्हीं लक्षणों के बारे में जानते हैं।
त्वचा के नीचे गांठें बनना
जब यूरिक एसिड का स्तर लंबे समय तक बहुत अधिक रहता है, तो इसके क्रिस्टल त्वचा के नीचे जमा होने लगते हैं, जिससे सख्त और दर्द रहित गांठें बन जाती हैं। इन्हें 'टोफी' कहा जाता है। ये गांठें आमतौर पर उंगलियों, कोहनी, कान और पैर के अंगूठे के आसपास दिखाई देती हैं। यह क्रोनिक गाउट का एक स्पष्ट संकेत है।
त्वचा का छिलना और लालपन
शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने की वजह से सूजन भी बढ़ जाता है, जिसका असर त्वचा पर भी दिख सकता है। इससे त्वचा बहुत रूखी हो सकती है, और पपड़ी बनकर छिलने लगती है। कई बार यह लक्षण सोरायसिस जैसा दिखता है। जिस जोड़ में गठिया का दर्द होता है, उसके आसपास की त्वचा का लाल होना और सूजा हुआ दिखना भी एक आम लक्षण है।
त्वचा में तेज खुजली होना
कई मामलों में जब क्रिस्टल त्वचा के नीचे जमा होते हैं, तो वे नसों को उत्तेजित कर सकते हैं, जिससे त्वचा में तेज और लगातार खुजली हो सकती है। यह खुजली बिना किसी चकत्ते या दाने के भी महसूस हो सकती है और सामान्य मॉइस्चराइजर से भी ठीक नहीं होती। यह बढ़े हुए यूरिक एसिड का एक कम ज्ञात लेकिन महत्वपूर्ण लक्षण है।
त्वचा के रंग में बदलाव
जब किसी जोड़ में गाउट का तीव्र अटैक होता है, तो उस जोड़ के ऊपर की त्वचा अत्यधिक लाल, चमकदार और बैंगनी रंग की दिख सकती है। यह त्वचा छूने पर बहुत गर्म और संवेदनशील महसूस होती है। यदि आपको अपनी त्वचा पर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे साथ में जोड़ों के दर्द भी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर अपना यूरिक एसिड लेवल जरूर जांच कराएं। - अनहेल्दी खानपान और कई अन्य कारणों से आज के समय में ज्यादातर लोग कब्ज और अपच जैसी पाचन से जुड़ी समस्याओं से परेशान रहते हैं। कब्ज की समस्या के कारण लोग घंटों टॉयलेट में बैठे रहते हैं, लेकिन ठीक से पेट साफ नहीं हो पाता है। इसके कारण लोगों को पेट में भारीपन, एसिडिटी और गैस जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं। ऐसे में इस समस्या से राहत के लिए दूध और घी का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो पाचन की समस्याओं से राहत देने में सहायक हैं। जानें पुरानी कब्ज की समस्या से राहत के लिए घी और दूध का सेवन कैसे करें?बाउल मूवमेंट को बढ़ावा देअक्सर लोग कब्ज की समस्या से परेशान रहते हैं। ऐसे में दूध में घी डालकर लेने से पुरानी कब्ज की समस्या से राहत देने में मदद मिलती है। घी में भरपूर मात्रा में फैटी एसिड के गुण पाए जाते हैं, जो मल को नरम कर मल त्याग में मदद करता है। इससे कब्ज की समस्या से राहत मिलती है।शरीर को डिटॉक्स करेघी में बहुत से पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। दूध में घी डालकर पीने से शरीर में मौजूद टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद मिलती है, जिससे पाचन को हेल्दी रखने के साथ-साथ स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है।मेटाबॉलिज्म बूस्ट करेघी में फैटी एसिड पाए जाते हैं। ऐसे में इसको गर्म दूध को डालकर लेने से पाचन प्रक्रिया को बेहतर कर मजबूती देने, इसकी कार्य क्षमता को बढ़ावा देने और मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में मदद मिलती है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर करने में भी मदद मिलती है।एसिडिटी से दे राहतघी में एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण पाए जाते हैं, जो पेट के लिए फायदेमंद है। दूध में घी डालकर लेने से पाचन प्रक्रिया बेहतर होती है, साथ ही, इससे एसिडिटी और सूजन जैसी समस्या से राहत देने में मदद मिलती है।गट के लिए फायदेमंदगर्म दूध में घी डालकर लेने से आंतों की दीवारों में चिकना बनाता है, जिससे मल त्याग करने में मदद मिलती है। इससे मल मोबिलिटी को बढ़ावा देने और कब्ज की समस्या से राहत देने में मदद मिलती है।कैसे और कब करें घी और दूध का सेवन?इसके लिए रात को 1 गिलास गर्म दूध में 1 छोटी चम्मच घी को डालकर पीने से पाचन को दुरुस्त करने और पुरानी कब्ज की समस्या से राहत देने में भी मदद मिलती है। यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।निष्कर्षपुरानी कब्ज की समस्या से राहत के लिए रात को गर्म दूध में घी डालकर लेना फायदेमंद है। इसका सेवन करने से पाचन प्रक्रिया को बेहतर करने, गट को हेल्दी रखने, एसिडिटी से राहत देने, बाउल मूवमेंट को बेहतर करने, मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, इससे स्वास्थ्य को भी कई लाभ मिलते हैं।ध्यान रहे, गैस, ब्लोटिंग, एसिडिटी और कब्ज जैसी पाचन से जुड़ी अधिक समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इसके अलावा, कोलेस्ट्रॉल या हार्ट से जुड़ी समस्या से पीड़ित लोगों को भी इनके सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।












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