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- सूरजमुखी के बीज सुपरफूड की श्रेणी में आते हैं। ये स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। कई सालों से सेहत के लिए का इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बीज कई गुणों से भरपूर होते हैं, जिसकी वजह से इसको काफी लोकप्रिय माना जाता है। इसके सेवन से शरीर में कई पोषक तत्व की पूर्ति होती है साथी ही इसका सेवन कई बीमारियों से लडऩे की क्षमता देता है। सूरजमुखी के बीज में आवश्यक फैटी एसिड, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए हमें इन बीजों को किसी न किसी रूप में अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। भुने हुए या नमकीन सूरजमुखी के बीज एक स्वास्थ्यपरक स्नैक माने जाते हैं।आइये जाने इसके 10 फायदे.....1. इसके बीज में मैग्निशियम की मात्रा काफी पाई जाती है, इसलिए यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रण करने में मदद करता है। कई शोध के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को रोजाना 80 ग्राम सूरजमुखी के बीज खाना चाहिए।2. सूरजमुखी के बीजों में क्लोरोजेनिक एसिड होता है., इसलिए इसका सेवन डायबिटीज को नियंत्रित रखता है।3. इसके बीजों में फाइटोस्टरोल्स उच्च मात्रा में होता है, जो कि दिल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। इसमें विटामिन ई और खनीज पदार्थ की मात्रा खूब पाई जाती है, जिससे दिल संबंधित बीमारियों से बचाव होता है।4. इसके बीज हड्डियों को स्वस्थ बनाए रखते हैं, क्योंकि इसमें फैट, खनिज पदार्थ, विटामिन और प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है। इसका सेवन स्ट्रोक के खतरे में आ चुके लोगों के लिए फायदेमंद होता है।5. सूरजमुखी के बीज त्वचा को निखारते हैं, क्योंकि इसमें विटामिन ई और कॅापर पाया जाता है।6. इसके बीजों में विटामिन ई की मात्रा भरपूर पाई जाती है, साथ ही फाइबर और सिलेनियम कोलोन बी होता है, इसलिए यह कैंसर जैसी बीमारी से बचाता है।7. सूरजमुखी के बीज में आवश्यक फैटी एसिड, विटामिन और मिनरल्स पाय जाते हैं, जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए हमें इन बीजों को किसी न किसी रूप में अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। भुने हुए या नमकीन सूरजमुखी के बीज एक स्वास्थ्यपरक स्नैक माने जाते हैं।8. सूरजमुखी के बीज में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी के साथ-साथ घाव को भरने का गुण भी होता है। सूरजमुखी के बीज में फ्लेवोनॉइड, पॉलीसैचुरेटेड फैटी एसिड और विटामिन मौजूद होते हैं, जो ह्रदय संबंधी समस्याओं से बचाव करने का काम करते हैं।9. अगर शुरुआत से ही हड्डियों का ध्यान न रखा गया, तो बढ़ती उम्र का प्रभाव हड्डियों पर भी पडऩे लगता है। इसलिए, पोषक तत्वों से भरपूर आहार को अपनी डाइट में शामिल करना जरूरी है। खासकर, आयरन, कैल्शियम व जिंक और सूरजमुखी के बीज में आयरन, जिंक, कैल्शियम मौजूद होते हैं, जो हड्डियों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं।10. मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी पोषक तत्व जरूरी होते हैं। बढ़ती उम्र का असर दिमाग पर भी पड़ता है, जिससे कई तरह की मस्तिष्क संबंधी समस्याएं (भूलने की बीमारी, सोचने की शक्ति कमजोर होना) उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में सूरजमुखी के बीज आपकी मदद कर सकते हैं। सूरजमुखी के बीज में कैल्शियम व जिंक जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो मस्तिष्क विकास में लाभकारी हो सकते हैं।
- छत्तीसगढ़ में भाजियां बड़े चाव से खाई जाती हैं। इनमें औषधीय गुण भी भरपूर होते हैं। इन्हीं में एक है कुलफा, जो एक खरपतवार की तरह फैलती हैं और ज्यादार लोग इसे बेकार समझ कर फेंक देते हैं। एक प्रकार से यह एक जंगली घास है, और अक्सर यह खाली पड़ी जमीन पर अपने आप ही उग आती है। इस जंगली घास को लोणी, बड़ी लोणी, लोणा शाक, खुरसा, कुलफा, लुनाक, घोल, लोनक आदि नामों से भी जाना जाता है। अंग्रेजी में इसे कॉमन पुर्सलेन कॉन, पर्सले, पिगविड भी कहते हैं।आइये जाने इसके औषधीय गुणों के बारे में .....-आयुर्वेद में इसको सर के रोग, आंखों के रोग, कानों के रोग, मुख रोग, त्वचा के रोग, थूक में खून आना, पेट के रोग, मूत्र के रोग में लाभकारी माना गया है।-बेहतर स्वास्थ्य के लिए इसे सलाद, सब्जी या फिर काढ़े के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।-इसकी जड़ कभी नहीं मरती और बारिश या फिर पानी मिलने पर दोबारा हरी हो जाती है। कहा जाता है कि इसकी जड़ 25 सालों तक नहीं मर सकती है। आप सोच सकते हैं कि इसमें कितनी इम्युनिटी होती होगा।- इसकी गोल-गोल पत्तियों में गजब के गुण भरे हुए हैं। इसमें विटामिन, आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं। जो हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।.- हरी सब्जियों में यदि ओमेगा 3 फैटी एसिड्स किसी में मिलते हैं, यह कुलफा भाजी ही है, जो हृदय रोगों से बचाते हैं।- इसकी पत्तियों में सभी हरी सब्जियों से ज्यादा विटामिन मिलते हैं। जो कैंसर जैसे रोगों से लडऩे में हमारे शरीर की रक्षा करते हैं।- यह भाजी कैंसर, हृदयरोग, खून की कमी, हड्डियों की मजबूती के लिए लाभकारी है।-इसका स्वाद नींबू जैसा खट्टा होता है। इसके सेवन से शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलती है। यह भाजी शरीर में ताकत को बढ़ाती है।- यह भाजी बच्चों के दिमागी विकास के लिए लाभकारी है।.
- अश्वगंधा एक औषधीय जड़ी-बूटी है। इसके कई फायदे हैं। यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी वजन घटाने के साथ-साथ बेहतर स्वास्थ्य में मददगार है। इसकी बनी चाय स्वास्थ्यवर्धक है और कई तरह की संक्रामक बीमारियों से शरीर की रक्षा करती है।अश्वगंधा का वैज्ञानिक नाम विथानिया सोमनीफेरा है। यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने, थायरॉइड, वजन घटाने और इम्युनिटी को बढ़ाने के काम आती है। हर रोज अश्वगंधा से बनी चाय का सेवन कर खुद को बीमारियों से दूर रखा सकता है और अपनी इम्युनिटी पावर को मजबूत कर सकते हैं।अश्वगंधा की चाय- वजन घटाने में मददगार तो है ही साथ ही ब्लड शुगर को कंट्रोल करती है, तनाव को कम करने में सहायक, महिलाओं में प्रजनन क्षमता के लिए फायदेमंद , एनीमिया में सहायक साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।ऐसे बनाएं अश्वगंधा की चायअश्वगंधा चाय ऑनलाइन या किसी स्टोर पर आसानी से मिल जाती है, जिसे आपको सामान्य चाय की तरह बनाना होता है। लेकिन अगर आप इस बूटी से खुद घर पर चाय बनाना चाहते हैं, तो ये विधि अपनाएं-जरूरी सामान- अश्वगंधा की जड़ या पाउडर , शहद और नींबू ।विधि- अश्वगंधा चाय बनाने के लिए आप एक पैन में 1 गिलास पानी डालकर गर्म कर लें। अब इसमें आप 1 या 2 अश्वगंधा की जड़ डालें और इसे 5-7 मिनट उबालें। अब आप गैस को बंद कर लें और अब चाय में स्वादानुसार शहद और नींबू का रस डालें। चाय तैयार है। इस चाय को आप दिन में 2 से 3 बार पी सकते हैं।इस चाय में मौजूद ये तीनों घटक इम्युनिटी बढ़ाने और स्वास्थ्य के लिए कई फायदों से भरपूर हैं-1. अश्वगंधा- यह तनाव और चिंता से राहत देता है और इंफ्लेमेशन को कम करता है। वहीं इसके अलावा, यह आपकी इम्युनिटी को भी बढ़ाता है।2. नींबू- नींबू में विटामिन सी होता है, जो आपकी इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं, जो आपके समग्र स्वास्थ्य के लिए इसे सर्वश्रेष्ठ बनाते हैं। प्रणाली को बढ़ावा देने में भी मदद करता है।3. शहद- शहद को मीठा अमृत माना जाता है, यह एंटीऑक्सिडेंट और एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर है। यह आपके आपके पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में मदद करता है।---
- अधिकांश लोगों के घरों में पवित्र तुलसी का पौधा होता है, जिसकी कि पूजा की जाती है। लेकिन इसी तुलसी का इन 6 तरीकों से सेवन आपको स्वस्थ भी रख सकता है। आयुर्वेद में तुलसी को एक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद में तुलसी को शरीर से मन तक का एक मरहम माना गया है। तुलसी के तीन अलग-अलग प्रकार हैं- राम (हरी पत्ती) तुलसी, श्यामा (बैंगनी पत्ती) तुलसी, और वन (जंगली पत्ता) तुलसी। लेकिन इनमें से हरे पत्ते वाली राम-तुलसी का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। तुलसी की पत्तियों की खुशबू और स्वाद काफी अच्छा होता है, खासकर कि जब सूखे पत्तों को चाय में पीसा जाता है।तुलसी के स्वास्थ्य लाभतुलसी दिखने में तो आम हरा पौधा है लेकिन यह कई औषधीय गुणों से भरपूर है। तुलसी के अर्क का उपयोग आयुर्वेदिक दवा के तौर पर सर्दी-जुखाम, पेद दर्द, सिर दर्द, इंफ्लेमेशन, विभिन्न प्रकार के संक्रमण, जहर, डेंगू-मलेरिया और स्किनकेयर के लिए किया जाता है। इसके अवाला, तुलसी का उपयोग भी हर स्वास्थ्य समस्या के लिए कई अलग-अलग तरीकों से किया जाता है। जिसमें तुलसी का एसेंशियल ऑयल से लेकर तुलसी की हर्बल चाय या काढ़ा शामिल है।तुलसी के उपयोग के 6 तरीके1- सर्दी-जुखाम और इन्फ्लूएंजा के लिए तुलसी का पानीसर्दी-जुखाम, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और इन्फ्लूएंजा से पीडि़त तुलसी के पत्तों से बना ये पानी पी सकते हैं। तुलसी के 7-8 पत्तियां लें और उन्हें एक गिलास पानी में डालकर उबाल लें। अब आप इस उबलते पानी में अदरक को कुचल कर डाल दें। 5 मिनट उबालने के बाद आप इस पानी को थोड़ा ठंडा होने दे और फिर छलनी से छानकर कर गिलास में निकाल लें। इसके बाद 1 चम्मच शहद इस पानी में मिलाएं और इस काढ़े को पिएं।2- तनाव को कम करने और इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार तुलसीरोजाना दिन में दो बार कम से कम 8-10 पत्ते तुलसी की पत्तियां चबाने से तनाव को कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, यह इम्युनिटी बढ़ाने और ब्लड प्रेशर व ब्लड शुगर पर भी सामान्य प्रभाव डालती है।3- मुंह के अल्सर और संक्रमण के लिए तुलसी का काढ़ायदि आप तुलसी का काढ़ा बनाकर पीते हैं, तो यह आपके खून को साफ करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह काढ़ा मुंह के अल्सर और संक्रमण को रोकने में मदद करता है और आपको मजबूत बनाता है।4- एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर है तुलसी के बीजआप नियमित तौर पर तुलसी के बीजों का सेवन कर अपनी इम्युनिटी बढ़ा सकते हैं और स्वस्थ रह सकते हैं। आप तुलसी के बीजों को पानी या फिर दूध में भिगो कर रखें और फिर इस मिश्रण को पी लें। यह एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करते हैं, जो शरीर के लिए पौष्टिक और सुखदायक साबित होता है।5- यूटीआई और किडनी की समस्या में पिएं तुलसी का रसआप तुलसी के तुलसी के पत्तों का रस और शहद का मिश्रण बनाकर पी सकते हैं। यह आपकी यूटीआई की समस्या में भी अच्छा माना जाता है और यह किडनी स्टोन में भी फायदेमंद है। आप अपने डॉक्टर की सलाह के साथ इसका सेवन शुरू कर सकते हैं।6- सिर दर्द के लिए तुलसी का काढ़ा और एसेंशियल ऑयलसिर दर्द की समस्या में तुलसी की पत्तियों का काढ़ा और एसेंशियल ऑयल का उपयोग लाभकारी होता है। इसके अलावा, चंदन के पेस्ट के साथ तुलसी की पत्तियों को पीसकर माथे पर लेप लगाने से भी सिर दर्द से राहत मिलती है।----
- हमारी सेहत कैसी रहेगी यह हमारे खान-पान पर निर्भर करता है। लेकिन हमारी किडनी पर सिर्फ हमारी डायट का ही नहीं बल्कि हमारे द्वारा लिए गए तरल पदार्थों का भी प्रभाव होता है। यदि किसी भी कारण हम दूषित जल का सेवन कर लेते हैं या दूषित भोजन खा लेते हैं तो हमारी किडनी बुरी तरह प्रभावित होती हैं। यहां जानें, उन 5 खास चीजों के बारे में जो किडनी की सेहत बनाए रखने का कार्य करती हैं...पार्सले के फायदेपार्सले को अमजोद नाम से जाना जाता है और यह दिखने में हरी धनिया पत्ती जैसा होता है। आमतौर पर पार्सले का उपयोग फूड को गार्निश करने के लिए किया जाता है। पार्सले अपने औषधीय गुणों के कारण बॉडी से टॉक्सिन्स निकालने का काम करता है। इसमें एपिओल और मिरिस्टिसिन होते हैं किडनी स्टोन से बचाते हैं।सेलेरी की जड़हमारी किडनी तभी सेहतमंद रह पाती हैं, जब हमारे शरीर में पोटैशियम और सोडियम का बैलंस हो। सेलेरी में ये दोनों ही तत्व संतुलित मात्रा में होते हैं। इसकी जड़ में लिक्विड कंटेंट होता है, जो यूरिन की मात्रा बढ़ाकर किडनी को क्लीन करने का काम भी करता है। हेल्थ ऐक्सपट्र्स का कहना है कि यह यूटीई और किडनी इंफेक्शन से भी बचाता है।अदरक करे किडनी की सफाईअगर आप चाहते हैं कि किडनी जीवनभर स्वस्थ बनी रहें तो सबसे पहले शुगर का सेवन कम करें। क्योंकि यह किडनी को बहुत नुकसान पहुंचाती है। अदरक में जिंजरॉल होता है जो ब्लड शुगर को कम करने का काम करता है। रोज के खाने में अदरक का सेवन करने से डायबीटीज होने का खतरा भी बेहद कम हो जाता है।हल्दी का सेवनहल्दी अपने कलर और फ्लेवर दोनों के कारण भोजन को स्वादिष्ट और सेहतमंद बनाती है। हल्दी में ऐंटिइंफ्लामेट्री एंजाइम्स होते हैं और कक्र्यूमिन नाम का यौगिक होता है, जो शरीर में किसी प्रकार की सूजन या दर्द को नहीं बढऩे देते और किडनी की बीमारी के कारणों को पनपने से रोकते हैं। एक तरफ जहां हल्दी अपनी खूबियों के कारण हमें किडनी या गुर्दे की बीमारी से बचाती है। वहीं अगर किसी को यह बीमारी हो चुकी है तो हल्दी का सेवन बेहद कम करने या ना करने की सलाह भी दी जाती है। क्योंकि इसमें पोटैशियम काफी हाई होता है, जिसे बैलंस करने के लिए किडनी को काफी मेहनत करनी पड़ती है।लहसुन है किडनी के लिए लाभकारीलहसुन के बारे में पुरानी कहावत है कि इसमें अगर एक गुण और होता तो यह अमृत बन जाता। खैर, हेल्थ एक्सपट्र्स का कहना है कि लहसुन में एलिसिन नामक इंग्रीडिऐंट होता है, जो ऐंटिफंगल, ऐंटिबैक्टीरियल और ऐंटिइंफ्लामेट्री मेडिसिन के रूप में काम करता है। अपने औषधीय गुणों के कारण लहसुन हमारी किडनी को हार्मफुल टॉक्सिन्स फिल्टर करने में मदद करता है। ताकि किडनी के साथ ही पूरी बॉडी फिट बनी रहे। यह यूरिन की मात्रा बढ़ाकर बॉडी में सोडियम की मात्रा को मेंटेन रखने का काम करता है।--
- संक्रामक बीमारियों से बचाने वाली चीजों में विटामिन सी का नाम काफी ऊपर आता है। यह एक ऐसी चीज है जिसकी हमें रोजाना बहुत कम मात्रा में जरूरत होती है। देखिए कैसे और कितना विटामिन सी हमें बीमारियों से बचाने के लिए जरूरी है।इंसान को छोड़कर ज्यादातर स्तनधारी अपने शरीर में विटामिन सी का निर्माण कर पाते हैं। इंसान को इसे बाहर से लेना पड़ता है।सबके लिए सेहत की बूटीविटामिन सी की पर्याप्त मात्रा ली जाए तो यह ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और स्ट्रोक से बचाती है। केवल बूढ़े, बीमार और वीगन लोगों के लिए ही नहीं बल्कि सबके लिए काम की है। यह एक ऐसा माइक्रोन्यूट्रिएंट है जो बहुत कम मात्रा में चाहिए और इससे शरीर को कोई ऊर्जा नहीं मिलती है, लेकिन शरीर की कई अहम प्रक्रियाओं के लिए इसकी ज़रूरत होती है, जैसे सेल मेटाबोलिज्म और शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र।रैडिकल्स की रैडिकल तोड़अहम पोषण तत्व के अलावा इसकी दूसरी भूमिका एंटीऑक्सीडेंट की है। यह उस नुकसान को कम करता है जो ऑक्सीजन के फ्री रैडिकल्स के कारण शरीर को पहुंचता है। यह रैडिकल्स शरीर की सामान्य मेटाबोलिक प्रक्रियाओं में पैदा होती रहती हैं।एंजाइम की मददगार भीस्ट्रॉबेरी जैसे फलों से हमें केवल स्वाद में लिपटा विटामिन सी ही नहीं मिलता जो ऑक्सीजन रैडिकल्स से बचाए। इसके साथ ही यह कई एंजाइमों के काम में उनकी मदद करता है।एंटीऑक्सीडेंट के रूप में यह हमारे शरीर की कोशिकाओं को सुरक्षित रखने में मदद करता है। संक्रमणों से बचाने में विटामिन सी काम आता है। संक्रमण होने पर यह शरीर की इम्यून सेल्स, न्यूट्रोफिल्स को उस जगह तक पहुंचाने में मदद करता है।कमी का क्या नतीजा?अगर किसी को विटामिन सी की बहुत ज्यादा कमी हो जाए तो स्कर्वी की बीमारी हो सकती है। इसके लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए जैसे चोट भरने में लंबा समय लगना, शरीर पर खरोंचे दिखना, बाल का झडऩा, दांतों और जोड़ों में दर्द होना।कितना काफी है?जर्मन कंज्यूमर एडवाइस सेंटर के अनुसार, पुरुषों को रोज 110 मिलिग्राम और महिलाओं को 75 मिलिग्राम विटामिन सी लेना चाहिए. तो वहीं अमेरिका की ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर बालिगों के लिए रोज 400 मिलिग्राम की सलाह देते हैं। सच तो ये है कि अगर आपने इसकी ज्यादा मात्रा भी ले ली तो उससे कोई नुकसान नहीं होगा बल्कि वह मूत्र के साथ बाहर निकल जाएगा।इनमें है भरपूर विटामिन सीसंतरा- एक बड़े संतरे में 82 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है।रेड पिपर- आधा कप कटी हुई लाल मिर्च में 95 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है।केल- एक कप केल में 80 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है।ब्रोकली- आधा कप पके हुए ब्रोकली में 51 मिलीग्राम विटामिन सी होता है।स्ट्राबेरी- आधा कप स्ट्राबेरी में 42 मिलीग्राम विटामिन सी होता है।अमरूद- एक अमरूद में 125 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है।कीवी- एक कीवी में 64 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है।ग्रीन पिपर- आधा कप कटी हुई ग्रीन पिपर में 60 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है।ब्रसेल्स स्प्राउट्स- आधा कप पके ब्रसल्स स्प्राउट्स में 48 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है।ग्रेपफ्रूट: हाफ ग्रेपफ्रूट में 43 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है।
- घर में पौधे लगाने की परंपरा बहुत पुरानी है। आयुर्वेद में बताए गए कुछ खास पौधों की पत्तियों और जड़ों को तमाम तरह की बीमारियों के इलाज के लिए पुराने समय से ही इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे पौधों को आप घर में छोटी सी जगह में भी लगा सकते हैं। 3 ऐसे ही मेडिकेटेड पौधे और इनके आश्यर्यजनक फायदे के बारे में हम बता रहे हैं...तुलसी- भारतीय घरों में तुलसी का पौधा धार्मिक कारणों से भी लगाया जाता है। लेकिन इससे अलग ये पौधा तमाम तरह की बीमारियों में आयुर्वेदिक औषधि का काम करता है। तुलसी को लगाने का सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि ये पौधा आपके घर के वातावरण को पॉजिटिव बनाएगा और निगेटिव एनर्जी को दूर करेगा। तुलसी का पौधा आपके घर में ताजी ऑक्सीजन भी लाएगा। तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल आप सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, गले में छाला, पेट में इंफेक्शन, कब्ज, गैस, बदहजमी आदि में कर सकते हैं। इसके अलावा इसकी पत्तियों में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं इसलिए इसका इस्तेमाल आप मच्छरों के काटने या किसी कीड़े आदि के काटने पर पीसकर लगाने में कर सकते हैं। तुलसी की पत्तियों से बना काढ़ा आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, इसलिए रोजाना काली चाय में 4-5 तुलसी की पत्तियां डालने से आप बैक्टीरियल बीमारियों से बच सकते हैं।मुंहासे और दूसरी त्वचा समस्याओं में भी इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से बड़ी जल्दी आराम मिलता है। तुलसी के बीज भी बहुत फायदेमंद होते हैं और इनके सेवन से वजन घटता है।एलोवेरा- एलोवेरा का इस्तेमाल मेडिकल साइंस में 6 हजार सालों से किया जा रहा है। एलोवेरा की पत्तियों में भी बहुत सारे गुण होते हैं, जिनके कारण ये आपके लिए बड़ा फायदेमंद साबित हो सकता है। चोट लगने, घाव होने, जलने और कटने पर भी एलोवेरा जेल को लगाने से बड़ी जल्दी आराम मिलता है। एलोवेरा जेल आपकी त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसे लगाने से त्वचा के दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं। इसके अलावा मुंहासें, झुर्रियों, झाइयों, आंखों के नीचे काले घेरों, बैक्टीरियल इंफेक्शन, फंगल इंफेक्शन, खुजली, दाद, चर्म रोग आदि समस्याओं में इसकी पत्तियों से बना जेल लगाने से आपको फायदा मिलेगा। एलोवेरा जेल को नियमित खाने से आपका पेट ठंडा रहता है और इससे आपको पेट दर्द, कब्ज, एसिडिटी, अपच, बदहजमी, पेट में मरोड़, फूड एलर्जी, फूड पॉयजनिंग आदि समस्याओं से 10 मिनट में छुटकारा मिल सकता है।एलोवेरा जेल का इस्तेमाल से आप कई तरह के आप बिना केमिकल के इस्तेमाल के ही कई ब्यूटी प्रोडक्ट्स जैसे- फेसपैक, मॉइश्चराइजिंग क्रीम, नाइट क्रीम, हेयर पैक, एक्ने क्रीम आदि बना सकते हैं। एलोवेरा का जूस पीने से पेट के छालों में आराम मिलता है और आंतों की बीमारियों, कोलाइटिस, बॉवल सिंड्रोम जैसी समस्याओं में भी आराम मिलता है।
- हर घर में खाने में स्वाद बढ़ाने के लिए छौंका या तड़का लगाया जाता है। अपने स्वाद के अनुसार इसमें सामग्री इस्तेमाल की जाती है। बिना छौंका लगाए सब्जी या दाल में वो स्वाद नहीं आता है, जिसे भारतीय जीभ स्वाद लेकर खा पाए। लेकिन क्या खाने में छौंका सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए लगाया जाता है? जवाब है नहीं। भारतीय खानपान प्राचीन समय से ही ऐसा रहा है, जिसमें आयुर्वेदिक नियमो को बड़ी प्राथमिकता दी गई है। इसलिए खाने में छौंका या तड़का लगाने के पीछे भी ढेर सारे स्वास्थ्य लाभ हैं।दरअसल भारतीय खाने में तड़का लगाने के लिए जिन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, वो सभी आयुर्वेदिक हब्र्स और मसाल हैं, जो एंटीऑक्सीडेंट्स और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। अलग-अलग मसालों से तड़का लगाने के अलग-अलग फायदे मिलते हैं।खाने में तड़का लगाने का आयुर्वेदिक रहस्यखाने में तड़का लगाने के पीछे आयुर्वेद में बताए गए नियमों का विशेष महत्व है। जैसे गरिष्ठ भोजन को पचाने के लिए अलग तरह का तड़का लगाया जाता है, तो सौम्य भोजन को पौष्टिक बनाने के लिए अलग तरह का तड़का लगाया जाता है। ये तड़का उस दाल या सब्जी के खाने से शरीर में होने वाले विकास को बैलेंस कर देता है, जिससे शरीर भी स्वस्थ रहता है और आप अलग-अलग तरह के भोजन का आनंद भी ले पाते हैं।बेसन की कढ़ी - बेसन या चने की दाल की कढ़ी बनाते समय इसमें हींग, मेथी और कड़ी पत्ते का तड़का लगाना चाहिए। दरअसल बेसन या चने की दाल को पचाने में पेट को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। हींग और मेथी के दाने इस काम में पेट की मदद करते हैं और कढ़ी का स्वाद भी बढ़ाते हैं।अरबी (कोचई) की सब्जी- अरबी की सब्जी बनाते समय इसमें आवश्यक रूप से अजवाइन का तड़का लगाना चाहिए। इसका कारण है कि अरबीकी सब्जी से पेट में गर्मी और गैस बढ़ती है, जिसे रोकने के लिए अजवाइन बहुत फायदेमंद होती है।कद्दू- इसी तरह कद्दू या कुम्हड़े की सब्जी में मेथी का छौंक लगाया जाता है, ताकि इसकी गरिष्ठता कम हो सके।चने की दाल- चने की दाल में जीरा, तेजपत्ता और दाल चीनी का तड़का लगाना अच्छा रहता है। चने की दाल भी पचाने में थोड़ी हार्ड होती है। इसके अलावा चने की दाल खाने से कई बार पेट में गैस बनने, पेट फूलने और दूसरी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए गांवों में लोग चने की दाल के साथ लौकी को मिलाकर भी बनाते हैं। लौकी सुपाच्य होती है, इसलिए दाल को बचाने में मदद करती है। दाल बनाते समय तेजपत्ता, दालचीनी और जीरा तीनों ही इसे पचाने में आपके पेट की सहायता करते हैं।कटहल की सब्जी-कटहल की सब्जी में अदरक, लहसुन, हींग और जीरा का तड़का लगाना चाहिए। कटहल भी एक गरिष्ठ सब्जी है, जिसे पचाने के लिए पेट को बहुत अधिक मेहनत करनी पड़ती है। लहसुन, हींग और जीरा पेट की पाचन क्षमता को बढ़ाकर पेट का काम आसान कर देते हैं।अरहर की दाल-अरहर की दाल बनाने में देसी घी, लहसुन और जीरे का तड़का लगाना चाहिए। इसका कारण यह है कि अरहर की दाल को आयुर्वेद में गर्म तासीर का माना गया है। ये पेट में जाकर गर्मी न करे इसलिए इसके तड़के में घी और जीरा का बड़ा महत्व है। ये तड़का दाल का स्वाद भी बढ़ा देता है।इसी तरह अन्य भारतीय व्यंजनों में हल्दी, धनिया, मिर्च, प्याज, लहसुन, अदरक, हींग और जीरा का तड़का जरूर लगाया जाता है। ये सभी मसाले आयुर्वेद में विशेष फायदेमंद बताए गए हैं। इन मसालों में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की रोगों से लडऩे की क्षमता बढ़ाते हैं।----
- कोरोना वायरस से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही मास्क पहनने और बार-बार साबुन से हाथ धोने तथा हैंड सेनेटाइजर का इस्तेमाल किए जाने की सलाह दी गई है। इसलिए लोग बाहर निकलते समय मास्क और हैंड सेनेटाइजर साथ में रखकर चल रहे हैं। हम अपने वाहन में सेनेटाइजर की बोतल रखकर अपने काम में लग जाते हैं, फिर वह चाहे बाइक की डिक्की हो या फिर कार, लेकिन यह काफी खतरनाक हो सकता है।कई लोगों का मानना है कि हैंड सैनिटाइजऱ का उपयोग करना या इसे सुरक्षा उपायों के रूप में कार में रखना एक अच्छा उपाय है। बहुत सारे लोग, यहां तक कि कोरोनो वायरस महामारी से पहले भी इस आदत का पालन करते थे और कार के डैशबोर्ड में सैनिटाइजऱ की बोतल रखते थे, कुछ लोग अपने बैग में रखते हैं। हालांकि, कार में सैनिटाइजर रखना जोखिम भरा हो सकता है। दरअसल सैनिटाइजर की बोतल में आसानी से आग पकड़ सकती है।हैंड सैनिटाइजर में होता है अल्कोहलहैंड सैनिटाइजर शक्तिशाली रासायनों से बने होते हैं । एक अच्छा और उच्च-ग्रेड का सैनिटाइजर में अल्कोहल की मात्रा अधिक होती। भले ही यह वायरस फैलने से रोकने के लिए अच्छा है लेकिन सैनिटाइजर में अल्कोहल की मात्रा ज्वलनशील हो सकती है, विशेष रूप से जब लंबे समय तक गाड़ी गर्म रहती है। ऐसा कुछ तब हो सकता है जब आप इसे कार में घंटों या दिनों तक स्टोर कर रखते हैं। जब आप रसोई में भी खाना बना रहे हों तो सैनिटाइजर का उपयोग करना उचित नहीं होता।कार में अपना हैंड सैनिटाइजर न छोड़ेंजैसा कि तापमान का स्तर लगातार बढ़ रहा है ऐसे में स्वास्थ्य अधिकारी भी लोगों को कार में या किसी भी स्थान पर हाथ सैनिटाइजऱ नहीं छोडऩे की चेतावनी दे रहे हैं जो गर्मी के संपर्क में आते हैं।रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, अल्कोहल बेस्ड हैंड सैनिटाइजर प्रकृति में ज्वलनशील होते हैं और गर्मी के संपर्क में आने पर कमरे के तापमान पर आसानी से वाष्पित हो सकते हैं। इसके अलावा, अधिकांश सेनेटाइजर प्लास्टिक की बोतलों में संग्रहीत या संरक्षित किए जाते हैं, जो फिर से जोखिम को बढ़ाते हैं। गर्मी में वाहन वास्तव में गर्म हो जाते हैं। वैसे सैनिटाइजर को आग की लपटों में दहन करने के लिए आदर्श रूप से 300 डिग्री या उससे ऊपर के तापमान तक पहुंचने की आवश्यकता होती है। इसके अलावा कुुछ शोध कहते हैं कि कार में सैनिटाइजर रखने से इसकी प्रभावकारिता कम हो जाती है, विशेषकर जब ये सीधे ऊष्मा के संपर्क में आता है (विशेषकर जब सामने की ओर रखा जाता है)।सुरक्षित रूप से कैसे स्टोर करें सैनिटाइजरइसलिए बेहतर है कि आप आप अपने सैनिटाइजऱ की बोतल को सुरक्षित तरीके से रखें। इसे अच्छी तरह से स्टोर करें, ढक्कन को सील रखें और किसी भी गर्म क्षेत्र से दूर रखें। अल्कोहल विषाक्तता के जोखिम से बचने के लिए इसे बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें।--
- सौंफ का उपयोग माउथ फ्रेशनर के रूप में किया जाता रहा है। पान में भी इसका उपयोग किया जाता है, लेकिन सौंफ में कई औधषीय गुण समाए हुए हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद है। आज हम आपका सौंफ की चाय के गुणों के बारे में बताने जा रहे हैं।सौंफ का पानी हो या सौंफ की चाय, यह दोनों ही आपके लिए कई फायदों से भरपूर है। यह एक कूलिंग एजेंट के रूप में काम करते हैं। इसके अलावा, सौंफ का सेवन ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने, वजन घटानें, डिहाइड्रेशन और आंखों के लिए अच्छा माना जाता है। वहीं यदि आप सौंफ की चाय का सेवन करते हैं, तो यह पाचन सबंधी समस्याओं से दूर रखने में मददगार है।सौंफ की चाय बनाने का तरीका - सौंफ की चाय बनाने के लिए आप सबसे पहले चाय के पैन में 2 कप पानी डाल लें। अब आप इसमें 2 चम्मच सौंफ डालें और इन बीजों को पानी के साथ उबलने दें। 3-4 मिनट तक पानी उबलने के बाद आप इसमें 3-4 पुदीने की पत्तियां डालें और 2-3 मिनट और उबालें। फिर इसे आप गैस से हटा लें और छलनी छे छान लें। इसमें स्वाद के लिए आप शहद और नींबू का रस मिलाएं और फिर इस चाय का आनंद लें।सौंफ की चाय पीने के अन्य फायदे1- वजन घटाने में मददगार- सौंफ की चाय का सेवन करना उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है, जो वजन घटाने की कोशिश में लगे हैं। क्योंकि सौंफ की चाय पाचन को बढ़ावा देती है और आपकी भूख को कम करती है।2- अस्थमा रोगियों के लिए फायदेमंद- सौंफ की चाय को अस्थमा रोगियों के लिए अच्छा माना जाता है। कुछ अध्ययनों से भी पता चलता है कि सौंफ के बीच या इससे बनी चाय का सेवन अस्थमा के लक्षणों को कम कर सकता है। सौंफ एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर है और इंफ्लेमेशन को कम करने में सहायक है।3- डिहाइड्रेशन के लिए- गर्मियों के दिनों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए सौंफ की चाय या सौंफ का पानी काफी मददगार हो सकता है। सौंफ में कूलिंग और हाइड्रेटिंग गुण होते हैं, जो शरीर को ठंडा रखने और हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं।4- नींद में सुधार करे-सौंफ की गर्म चाय नींद में सुधार और अनिद्रा की समस्या को दूर करने में मददगार है। सौंफ की चाय में मैग्नीशियम की भी मात्रा होती है, जो बेहतर नींद में सहायक है।5- हाई ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर के लिए -सौंफ की चाय आपके ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने में भी मददगार है। ऐसा इसलिए क्योंकि सौंफ में पोटैशियम होता है, जो बीपी को कंट्रोल करने में मदद करता है। वहीं अध्ययनों के अनुसार यह भी पाया गया है कि सौंफ आपके ब्लड शुगर को कंट्रोल कर सकती है।6- आंखों की रोशनी के लिए -सौंफ में विटामिन-ए पाया जाता है और विटामिन ए आपकी आंखों की रौशनी को बढ़ाने में मददगार पोषक तत्?व है। यदि आप सौंफ की चाय का रोजाना सेवन करते हैं, तो यह आंखों की रौशनी को कमजोर होने से बचा सकता है। इसके अलावा, आप आंखों की छोटी-मोटी समस्याओं के लिए जैसे आंखों में जलन या फिर खुजली हाने पर सौंफ की भाप आंखों पर ले सकते हैं।7- कॉलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करे -सौंफ की चाय फाइबर भी भरपूर है, जो कि कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में फायदेमंद है। सौंफ की चाय में मौजूद फाइबर, कोलेस्ट्रॉल को खून में घुलने से रोकता है। जिससे कि आपका कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल रहता है और आप दिल की बीमारियों से भी दूर रहते हैं।----
- आयुर्वेद के अनुसार भोजन एक तरह की औषधि है जो जीवन के तत्वों, भोजन और शरीर के बीच तालमेल बिठाते हुए किसी को भी स्वस्थ कर सकता है। आयुर्वेद का मानना है कि उचित खाद्य चयन और उचित समय पर भोजन ग्रहण करने से शांत दिमाग के साथ संपूर्ण सेहत बनाए रखने में मदद मिलती है। भगवद्गीता और योग शास्त्रों ने भोजन को उनके गुणों के आधार पर तीन प्रकार का बताया है। वह हैं सत्व (सतोगुण), राजस (रजोगुण) और तामस (तमोगुण)। सात्विक भोजन का मतलब ऐसे भोजन और खाने की आदतों को अपनाना है जो प्राकृतिक, जीवंत और उर्जा से भरपूर हो और जो धीरज एवं शांति प्रदान करता हो और लंबी उम्र, सुबोध, ताकत, सेहत और आनंद बढ़ाता हो।राजसी भोजन वह है जो काफी मसालेदार, गर्म या तीखा, खट्टा एवं नमकीन स्वाद के साथ पकाया गया हो। राजसी भोजन नकारात्मकता, वासना और बेचैनी बढ़ाने वाले होते हैं। जड़ता का बोधक तामसिक भोजन वह है जो जरूरत से ज्यादा पकाया हुआ, बासी, फिर से गर्म किया हुआ, माइक्रोवेव में पकाया या ठंडा जमाया हुआ भोजन, मांस, मछली मांस-पक्षी, अंडे जैसे मृत भोजन, अल्कोहल, सिगरेट, और मादक दवाइयां इत्यादि हैं। तामसिक भोजन सुपाच्य नहीं होता है और निष्क्रियता एवं सुस्ती देता है तथा सोने को प्रेरित करता है। ऐसेे भोजन मोटापा, मधुमेह, हृदय एवं यकृत की बीमारियों के मुख्य कारण हैं। प्याज और लहसुन जैसे खाद्य पदार्थ दवाई के रूप में अच्छे हो सकते हैं लेकिन यह रोज खाने लायक नहीं है।भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के मौजूदा दिशा-निर्देश सुरक्षात्मक स्वास्थ्य उपायों और प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए स्वयं ध्यान रखने के दिशा निर्देश दिए हैं। इन दिशा निर्देशों में कोविड-19 के खिलाफ प्रतिरक्षा बढ़ाने के उपायों के रूप में हर्बल चाय और तुलसी, दालचीनी, कालीमिर्च, सौंठ (सूखी अदरक) और मुनक्का का काढ़ा जिसमें स्वाद के लिए गुड़ और /या ताजा नींबू रस मिला हो, पीने की सलाह दी गई है।कभी-कभार खा सकते हैं- कम मसालेदार और तैलीय भोजन, लहसुन, प्याज, सीमित मात्रा में बेमौसम सब्जियां, पौल्ट्री , मांस, और मछली, ब्राउन ब्रेड, मक्खन, इडली, डोसा, ढोकला, पी- नट, बटर के साथ ब्राउन ब्रेड जैसे घर में बने कम वसा शर्करा वाले स्नैक्स, डिब्बाबंद भोजन अतिरिक्त चीनी और नमक हटाने के लिए धोने के बाद ही खाएंं,शर्करा की अधिकता वाले साफ्ट ड्रिंक, ब्राउन शुगर, आयोडिन युक्त नमक।क्या खाएं- कच्चे और ताजे फल, रेशेदार भोजन जिसमें विटामिन ए, सी और ई पाए जाते हों, साबुत अनाज, दलहन, जौ, ब्राउन पास्ता, बाजरा और चावल और गेहूं की ताजी रोटियां, कम वसा वाला दूध, दही, बिना नमक के नट्स और सूरजमुखी, कद्दू, अलसी के बीज, जो विटामिन ई, नियासिन, राइबोफ्लेविन, प्रोटीन, स्वस्थ वसा, ऑक्सीकरण रोधी और फाइबर के बड़े स्रोत हैं। ताजा फलों का रस, कम वसा वाली लस्सी, नींबू पानी, नारियल पानी/ गर्म पानी, हर्बल चाय पॉलीफेनॉल्स, फ्लेवोनॉयड्स और एंटी ऑक्सीडेंट जो फ्री रेडिकल्स को नष्ट कर देते हैं। शहद और गुड़, अंडे का पीला भाग और अनाज से भरपूर नाश्ता, भारतीय औषधियां- धनिया, हल्दी, मेथी, तुलसी, लोंग, काली मिर्च, दालचीनी, अदरक और कड़ी पत्ता। इन मसालों में एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल, एंटी फ्लेमेट्री गुण होते हैं। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर से किसी भी पदार्थ को निकालने में मददगार होते हैं । रॉक साल्ट रोज 5 ग्राम (1 चम्मच के बराबर) लेना चाहिए ।
- हम ज्यादातर पीले केले ही खाते हैं, लेकिन केले एक प्रजाति लाल भी होती है, जो केरल में ही ज्यादातर देखने को मिलती है। केरल कभी घूमने जाएं, तो आपको सड़क किनारे लगी छोटी-छोटी दुकानों में इस केले की पूरी घेर देखने को मिल जाएगी। लाल केलों को रेड डक्का के रूप में भी जाना जाता है। इसमें लाल रंग का बाहरी छिलका होता है । ये दक्षिण पूर्व एशिया से केले के एक उपसमूह में आता है। लाल केले पीले केले की तुलना में काफी छोटे और मीठे होते हैं, इसके साथ ही ये ज्यादा पोषक तत्व भरे भी होते हैं। लाल केले ब्लड शुगर के स्तर को कम करने, प्रतिरक्षा को बढ़ाने और पाचन में सहायता करते हैं। ऐसे ही इसके कई अन्य फायदे होते हैं, आइए जानते हैं लाल केलों के अन्य फायदों के बारे में।पोषक तत्वों से भरपूरएक सामान्य लाल केले करीब 100 ग्राम का होता है, इसमें काफी कम मात्रा में फैट होता है और भारी मात्रा में फाइबर होता है। लाल केले कार्बोहाइड्रेट का एक अच्छा स्रोत होता है, जैसे सुक्रोज और फ्रुक्टोज। यह आपको तुरंत ऊर्जा देने का काम करता है और इससे आपके रक्तप्रवाह में तेजी आती है। इसके अलावा लाल केलों में भारी मात्रा में विटामिन सी, थीआमिन, विटामिन बी-6 और फोलेट जैसे तत्व होते हैं।डायबिटीज को करता है कंट्रोललाल केलों का सेवन करने से ये आपके डायबिटीज को कंट्रोल करने का काम करता है, इसके साथ ही ये आपके ब्लड शुगर लेवल में अचानक स्पाइक को कम करता है। एक अध्ययन में पाया गया है कि लाल केले की कम ग्लाइसेमिक प्रतिक्रिया डायबिटीज से पीडि़त लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है।मौजूद होते हैं एंटीऑक्सीडेंट तत्वलाल केले में भारी मात्रा में फेनॉल्स और विटामिन-सी होते हैं, इसके साथ ही इसमें काफी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट तत्व भी होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। मुक्त कणों की अधिकता से ऑक्सीडेटिव तनाव हो सकता है और ये मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर जैसे चयापचय संबंधी समस्याओं के खतरे को कम कर सकता है।ब्लड प्रेशर को करता है कमनियमित रूप से लाल केलों का सेवन करने से ये आपके ब्लड प्रेशर को बढऩे से रोकता है और उसे नियंत्रित करने का काम करता है। लाल केलों में भरपूर मात्रा में पोटैशियम मौजूद होता हैं। रक्तचाप को बनाए रखने और हृदय रोग के जोखिम को कम करने में पोटेशियम की भूमिका अच्छी तरह से स्थापित की गई है।आंखों के लिए फायदेमंद है लाल केलेलाल केले में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो हमारी आंखों के लिए काफी अच्छे होते हैं साथ ही ये हमारी आंखों की रोशनी को बढ़ाने का काम करते हैं। लाल केले ल्यूटिन और जेक्सैंथिन होते हैं। इसके साथ ही लाल केले में बीटा-कैरोटेनॉइड भी होता है। इसमें विटामिन ए की मात्रा भी पाई जाती है जो आंखों की रोशनी के लिए फायदेमंद होती है।----
- दाल हमारी थाली का एक अभिन्न हिस्सा है। दाल न सिर्फ हमारे शरीर में जरूरी विटामिन और मिनरल की आपूर्ति करती है बल्कि हमें तंदुरुस्त बनाए रखने में भी मदद करती है। सभी दालें हमारे लिए फायदेमंद हैं।आज हम आपको ऐसी 5 दालों के बारे में बता रहे हैं, जिनके अनूठे फायदे हैं।1. अरहर- यह दाल सबको पसंद है। अरहर दाल- चावल और घी बच्चों से लेकर बड़ों तक का पसंदीदा खाना रहा है। अरहर की दाल का सेवन न केवल आपके शरीर को तंदुरुस्त बनाए रखने में मदद करता है बल्कि हमें जरूरी विटामिन और मिनरल्स की भी आपूर्ति करती है। अरहर की दाल में प्रोटीन , पोटेशियम, सोडियम, विटामिन ए , बी 12 , कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं।अरहर की दल के दो अनूठे फायदे- अरहर की कच्ची दाल को पानी में पीसकर पिलाने से भांग का नशा उतारने में मदद मिलती है।-शरीर के किसी भी अंग पर लगा घाव अगर नहीं सूख रहा हो तो अरहर की दाल के पत्तों को पीसकर घाव पर लगा लें। ऐसा करने से घाव को सूखाने में मदद मिलती है।2. मूंग की दाल - मूंग की पीली दाल को धुली हुई मूंग दाल के नाम से भी जाना जाता है। मूंग दाल खाने में काफी हल्की होती है और इसे आपको पचाना बहुत ही ज्यादा आसान होता है। बीमार लोगों या मरीजों को खाने में मूंग दाल की खिचड़ी खाने की सलाह दी जाती है। ये न सिर्फ आपके पाचन को दुरुस्त बनाती है बल्कि आपके पेट को भी हल्का रखती है।मूंग की दाल के अनूठे फायदे- मूंग की दाल का सेवन गर्भवती महिलाओं में फाइबर, आयरन और प्रोटीन की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है।- मूंग की दाल का सेवन शरीर में जमा एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद करता है।3. चने की दाल- चने की दाल में फाइबर और प्रोटीन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। चने की दाल आपके शरीर को तंदुरुस्त बनाएं रखने के साथ-साथ पर्याप्त ऊर्जा प्रदान करने में मदद करती है। चने की दाल का सेवन युवाओं के लिए अधिक फायदेमंद माना जाता है क्योंकि ये शरीर में प्रोटीन की कमी को दूर करने में बहुत उपयोगी है।चने की दाल के अनूठे फायदे- चने की दाल का सेवन डायबिटीज और ह्रदय रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बहुत कम पाई जाती है।-चने की दाल का सेवन एनिमिया , पीलिया , कब्ज जैसी परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।4. मसूर दाल- लाल रंग की मसूर दाल फाइबर और प्रोटीन के खजाने से कम नहीं है। मसूर दाल का सेवन पेट और पाचन संबंधी सभी रोगों को दूर करने में मदद करता है। मसूर की दाल पेट संबंधी परेशानियों से भी राहत दिलाने में मदद करती है।मसूर की दाल के अनूठे फायदे- मसूर की दाल का सूप बना कर पीने से गले और आंत के रोगों को दूर करने में मदद करती है।- जिन लोगों में खून की कमी होती है उन्हें मसूर की दाल पीनी चाहिए क्योंकि ये शरीर में खून की कमी को पूरा करने का काम करती है।5. उड़द दाल- अरहर की दाल के बाद जिस दाल को लोग सबसे ज्यादा खाना पसंद करते हैं उसे उड़द दाल के नाम से जाना जाता है। इस दाल को लोगों की दूसरी सबसे ज्यादा पसंदीदा दाल के रूप में भी जाना जाता है। उड़द दाल न सिर्फ स्वाद में बल्कि कई पौष्टिक गुणों से भी भरपूर होती है।उड़द की दाल के अनूठे फायदे- उड़द दाल में आयरन की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जिसके सेवन से न पेशाब में जलन और अन्य समस्याएं दूर हो जाती हैं। शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ाने के लिए भी इस दाल का सेवन किया जाता है।- चेहरे पर निखार लाने के लिए उड़द की दाल की खीर का सेवन भी किया जा सकता है।
- गर्मियों का मौसम आते ही तरबूज, खरबूज , खीरा और ककड़ी जैसे ठंडे व पानी से भरे फूड्स का सेवन बढ़ जाता है और बाजार में इनकी मांग भी बहुत ज्यादा होने लगती है। तरबूज और खरबूज जहां फलों में शामिल किए जाते हैं वहीं खीरा और ककड़ी भोजन के साथ खाएं जाते हैं। खीरा और ककड़ी न सिर्फ भोजन के साथ बड़ी आसानी से खाएं जा सकते हैं बल्कि ये वजन कम करने की कोशिशों में जुटे लोगों के लिए ये भी काफी मददगार साबित होते हैं।खीरे में मौजूद पानी की मात्रा, विटामिन सी और कई आवश्यक पोषक तत्व इसे आपके लिए गर्मियों का एक बेहतरनी फूड बनाते हैं, जो आपको हाइड्रेट रखने के साथ-साथ आपका पेट भी फुल रखने में मदद करता है। दरअसल खीरा हमारे स्वास्थ्य के बहुत ही लाभदायक माना जाता है। अधिकतर लोग खीरे को सलाद के रूप में खाना पसंद करते हैं। खीरा के सेवन से न सिर्फ हमारे शरीर में फाइबर की आपूर्ति होती है बल्कि खीरा हमारी स्किन को ग्लोइंग स्किन बनाने में भी बहुत मदद करता है। गर्मियों में खीरा खाना हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही अच्छा होता है, जो शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ स्वाद भी प्रदान करता है। लेकिन खीरे को अगर गलत ढंग से खाया जाए या फिर उचित सावधानियां न बरती जाएं तो यही खीरा हमारे लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।कुछ लोग खीरा खाने के तुरंत बाद ऐसे काम कर देते हैं, जिनसे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। दरअसल खीरा 95 फीसदी पानी से भरा होता है और यही कारण है कि खीरा खाने के बाद तुरंत हमें किसी भी प्रकार के पेय पदार्थों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। खीरा खाने के बाद कुछ चीजों के सेवन से न सिर्फ पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं बल्कि खीरे में मौजूद पोषक तत्वों की हानि भी होती है। अगर आप सोच रहे हैं कि ऐसी कौन सी चीजें हैं जिनका सेवन खीरे के बाद नहीं करना चाहिए तो हम आपको इस लेख में ऐसी 3 चीजों के बारे में बता रहे हैं, जिनका सेवन खीरे के तुरंत बाद करना आपको परेशानी में डाल सकता है।खीरा खाने के बाद न पीएं पानीबहुत से लोग खीरा खाने के बाद तुरंत पानी पी लेते हैं या फिर सलाद के रूप में खीरे के सेवन के साथ पानी का सेवन करते हैं जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। खीरे में पानी की प्रचुर मात्रा होती है और खीरे के ऊपर पानी पीने से खांसी और पेट में गुडग़ुड़ का अहसास हो सकता है। खीरा खाने के तुरंत बाद पानी पीने से इसके पोषक तत्व भी कम हो जाते हैं और हमारा शरीर खीरे का संपूर्ण लाभ नहीं ले पाता। इसलिए खीरा खाने के तुरंत बाद भूलकर भी पानी नहीं पीना चाहिए।खीरे के ऊपर लस्सीगर्मियों में कुछ लोगों को भोजन के बाद लस्सी पीना बहुत ज्यादा पसंद होता है। लेकिन अगर आपने सलाद के रूप में खीरा खाया है तो आपको भोजन के साथ लस्सी पीने से बचना चाहिए । खीरे के ऊपर लस्सी आपका पेट खराब कर सकती है और आपको पेट संबंधी परेशानियों का शिकार बना सकती है।खीरा खाने के बाद न पीएं दूधखीरा खाने के बाद कभी भी आपको दूध नहीं पीना चाहिए क्योंकि दूध में मौजूद तत्व काफी गर्म होते हैं और खीरा खाने के बाद दूध पीने से कोई भी व्यक्ति ठंडा-गर्म का शिकार हो सकता है। ठंडा -गर्म का शिकार होने पर कोई भी व्यक्ति बुखार, खांसी और अन्य परेशानियों से जूझ सकता है। इसलिए खीरे के ऊपर दूध न पीएं ।
- छत्तीसगढ़ में इस समय वनोपज की खरीदी कार्य जारी है। प्रदेश के प्रमुख वनोपज में एक महुआ भी शामिल है। बचपन से हर गर्मी में इसके नए हरे फलों की सब्जी बनते देखा है। स्वाद अलग सा होता है जो सभी को पसंद आए, ऐसा नहीं है, लेकिन औषधीय गुणों पर जाएं, तो एक बार आप भी इसकी सब्जी जरूर खाना चाहेंगे। आयुर्वेद में महुआ के पेड़ के कई स्वास्थ्य लाभ हैं, इसमें कई औषधीय गुण मौजूद हैं। महुआ कई तरह से सेहत के साथ त्वचा के लिए भी फायदेमंद है।सर्दी, खांसी व दर्द में राहतमहुआ के फूल कृमिनाशक और कफ से राहत देने वाले होते हैं। महुआ के फूल की तासीर ठंडी होती है। इसके फलों और फूलों को प्राकृतिक कूलिंग एजेंट व स्वास्थ्य वर्ध टॉनिक के रूप में उपयोग किया जाता हैं। लेकिन फिर भी इसके फूलों को सर्दी-जुखाम, खांसी ब्रोंकाइटिस और अन्य पेट व श्वसन संबंधी विकारों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है।दस्त की समस्या दूर करेइसकी छाल से बने काढ़े को पीने से दस्त की समस्या दूर होती है। इसके अलावा इसके बीजों का इस्तेमाल दवा के तौर वर किया जाता है। इसका इस्तेमाल निमोनिया, त्वचा संबंधी समस्या के लिए किया जाता है। इसके अलावा इसके पेड़ की छाल त्वचा को मुलायम बनाने में मदद करती है।डायबिटीज के लिएडायबिटीज की समस्या आम हो गई है। जिन लोगों को डायबिटीज यानि मधुमेह की समस्या है, उनके लिए महुआ एक औषधी के समान है। डायबिटीज के रोगियों के लिए महुआ की छाल से बना काढ़ा लाभदायक होता है। इसके औषधीय गुण शरीर में ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखने में मदद करते हैं। इसकी छाल से बनें काढ़े के नियमित सेवन से डायबिटीज के लक्षण को दूर किया जा सकता है।गठिया रोग के इलाज में मददमहुआ की छाल टॉन्सिलिटिस, डायबिटीज, अल्सर और गठिया के लिए इस्तेमाल की जाती है। आप महुआ के बीजों से निकाले गये तेल से भी मालिश कर सकते हैं। ऐसा करने से गठिया रोग के इलाज में मदद मिलेगी।दांतों के दर्द से छुटकारादांतों से संबंधित समस्याओं में आप महुआ का इस्तेमाल कर सकते हैं। महुआ की टहनी और छाल दांतों के दर्द में फायदेमंद है। यदि आपके दांतों में दर्द और मसूड़ो से खून निकल रहा हो, तो आप महुआ की छाल से निकलने वाले रस के साथ थोड़ा पानी मिलाएं और इस पानी से गरारे करें। इसके अलावा आप इसकी टहनी से मंजन भी कर सकते हैं। इससे मुंह के बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं और दांतों के दर्द में राहत मिलती है।बवासीर व आंखों संबंधी बीमारी के लिएमहुआ के फूल बवासीर में भी फायदेमंद हैं। इसके अलावा आंखों से पानी आने व आंखों में खुजली होने पर इलाज के तौर पर भी इससे बना शहद गुणकारी होता है।त्वचा संबंधी रोग एक्जिमा मेंमहुआ का उपयोग न केवल त्वचा को मुलायम करने के लिए किया जाता है, बल्कि त्वचा संबंधी रोग एक्जिमा के इलाज के रूप में भी किया जाता है।
- गिलोय कई पोषक तत्वों से भरी एक हेल्दी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसका प्रयोग कई स्वास्थ्य समस्याओं में किया जाता है। गिलोय में मौजूद गिलोइन नाम का ग्लूकोसाइड, टीनोस्पोरिन, पामेरिन और टीनोस्पोरिक एसिड जैसे यौगिक मौजूद होते हैं, जो आपके शरीर से कई रोगों को दूर करने में मदद करते हैं।इतना ही नहीं गिलोय में आयरन, फॉस्फोरस, कॉपर, कैल्शियम, जिंक, मैगनीज की मात्रा भी अधिक पाई जाती है, जो हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी पोषक तत्व होते हैं। ये सभी पोषक तत्व हमारे शरीर को कई रोगों से बचाने में मदद करते है। लेकिन जब आप कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से पहले ही जूझ रहे हों तो आपको गिलोय के सेवन में सावधानी बरतनी चाहिए। लेकिन खून की कमी वाले लोगों के लिए अमृत से कम नहीं है गिलोय।गर्मियों में सेवन करने से हो सकता है कब्जगिलोय को पाचन से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के उपचार में फायदेमंद माना जाता है हालांकि गर्मियों में ये पेट से जुड़ी कुछ समस्याओं को बढ़ा सकता है। गर्मियों में गिलोय के सेवन से आपको कब्ज जैसी परेशानी हो सकती है। कुछ स्थितियों में गिलोय का सेवन आपको पेट में जलन जैसा अनुभव भी प्रदान कर सकता है। इसलिए इस समस्या के परिणामस्वरूप आपको डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए। इसके अलावा गिलोय के सेवन से अपच की समस्या में इजाफा हो सकता है और नतीजन पेट में दर्द और मरोड़ की परेशानी भी हो सकती है।ब्लड शुगर लेवल होता है प्रभावितगिलोय का सेवन ब्लड शुगर से ग्रस्त लोगों के लिए नुकसानदाह होता है क्योंकि ये इस समस्या को बढ़ा सकता है। ब्लड शुगर से जूझ रहे लोगों को गिलोय के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए। गिलोय आपके ब्लड शुगर लेवल को और भी ज्यादा प्रभावित कर सकता है। दरअसल होता यूं है कि गिलोय ब्लड शुगर लेवल को काफी कम कर देता है, जिसके कारण आपको लो ब्लड शुगर लेवल से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार होना पड़ सकता है। इसलिए आपको डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही गिलोय का सेवन करना चाहिए।गिलोय के स्वास्थ्य लाभएनीमिया या खून की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए गिलोय का सेवन बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है। गिलोय के पत्तों से बना जूस शरीर में खून की कमी जैसी गंभीर समस्या को दूर करने में फायदेमंद होता है। गिलोय के जूस में आधा चम्मच घी और एक छोटा चम्मच शहद मिलाकर पीने से भी शरीर में खून की कमी दूर होती है।पीलिया में फायदेमंदपीलिया जैसी बीमारी में गिलोय का सेवन फायदेमंद होता है। इस स्थिति से निपटने के लिए गिलोय की पत्तियों को सूखा लें और उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण के सेवन से से आपको पीलिया दूर करने में मदद मिलती है।हाथ-पैरों में जलन की समस्या दूर करेहाथ-पैरों में झनझनाहट या जलन की समस्या में गिलोय का जूस आपको राहत प्रदान कर सकता है। अगर आपकी हथेलियां बहुत ज्यादा गर्म रहती हैं, तो गिलोय का रस पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।
- गर्मी के दिनों में एक ग्लास बेल का शर्बत आपकी सारी परेशानी दूर कर देता है। इसका शीतल गुण शरीर को ठंडक प्रदान करता है। बेल गर्मी के लिए औषधि है, यह शरीर को हाइड्रेट रखने में हमारी मदद करता है। यह देशी फल पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर है।बेल का पोषण वैल्यू बहुत ज्यादा है। अध्ययन के अनुसार, बेल फल में पानी, शुगर, प्रोटीन, फाइबर, फैट, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, आयरन के अलावा विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी और राइबोफ्लेविन होते हैं। इसका शरबत आप सादे पानी या फिर दूध डालकर भी बना सकते हैं।बेल, हृदय और मस्तिष्क के लिए टॉनिक का काम करता है। यह हमारी आंतों या पेट के अनुकूल भी है और पारंपरिक रूप से कई स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक करने के लिए बेल का उपयोग किया जाता है। इसमें टैनिन, फ्लेवोनोइड्स और कैमारिन जैसे रसायन होते हैं, जो सूजन को कम करते हैं। जर्नल फार्मा इनोवेशन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, बेल के पेड़ के सभी हिस्से उपयोगी होते हैं, लेकिन फल का औषधीय महत्व अधिक है। अध्ययन के मुताबिक, बेल एक सुगंधित, शीतल और रेचक होता है। यह स्राव या रक्तस्राव को रोकता है। कच्चा या आधपका फल भी पाचन के लिए अच्छा हो सकता है। गर्मी में पके बेल का शरबत बनाकर पीना फायदेमंद होता है। यह स्कर्वी को रोकने या ठीक करने में उपयोगी है। यह पेट को मजबूत करता है और पाचन क्रिया को बढ़ावा देता है। बेल में एंटी-फंगल और एंटीहेल्मिंटिक गुण भी होता है, जो शरीर से आंतरिक परजीवी को बाहर निकालता है।बेल अल्सर को ठीक करने में मदद करता हैशोध से पता चला है कि पेय के रूप में सेवन किए जाने पर बेल पेट के म्यूकोसा पर एक लेप बनाती है और अल्सर को ठीक करने में मदद करती है।बेल हैजा का इलाज करता हैबेल टैनिन का उच्च स्रोत है, जो हैजा के इलाज के लिए महत्वपूर्ण है। यह छिलके में लगभग 20 प्रतिशत और गूदे लगभग 9 प्रतिशत होता है। फल को हैजा का इलाज माना जाता है।बेल कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता हैबेल का रस लिपिड प्रोफाइल और ट्राइग्लिसराइड्स को नियंत्रित करता है, और रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। इसके सेवन से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले सकते हैं।बेल मधुमेह का प्रबंधन करता हैबेल रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखता है, जिससे मधुमेह का प्रबंधन करने में मदद मिलती है। हालांकि, अधिक मात्रा में सेवन नहीं किया जाना चाहिए। और कुछ सावधानी भी बरतनी चाहिए।बेल का शरबत बनाने में सावधानी जरूरीशरबत बनाने के लिए बेल का अच्छी तरह से पका होना जरूरी होता है। बेल में नैचुरल शुगर होता है इसलिए उसमें अतिरिक्त चीनी मिलाने से बचना चाहिए। क्योंकि इससे डायबिटीज रोगियों को नुकसान पहुंच सकता है। बेल का शरबत बनाने के लिए बर्फ का उपयोग बिल्कुल न करें। फ्रेश वाटर की मदद से शर्बत बनाना ज्यादा फायदेमंद होता है। सबसे जरूरी बात ये कि, इसका सेवन भी अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। अगर आप इसे किसी समस्या के इलाज के तौर पर उपयोग में लाना चाहते हैं तो विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
- क्या आप भी शिमला मिर्च को इस्तेमाल करते समय इसके बीजों को निकालकर फेंक देते हैं? अगर ऐसा है तो आप अनजाने में ही एक गलती कर रहे हैं। शिमला मिर्च को सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है और देश के लगभग सभी हिस्सों में इसका इस्तेमाल सब्जी, ग्रेवी बनाने से लेकर चाइनीज और इटैलियन फूड्स तक किया जाता है। शिमला मिर्च के बीज भी शिमला मिर्च की ही तरह ढेर सारे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। अगर आप इन्हें खाएं, तो आपको इससे भी कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।आप भी इन फायदों को जान लें और अगली बार जब भी शिमला मिर्च का इस्तेमाल करें, तो इसके बीजों को निकालें नहीं, बल्कि शौक से खाएं, क्योंकि ये आपके लिए फायदेमंद साबित होंगे।विटामिन सी का है अच्छा स्रोतशिमला मिर्च और इसके बीज, दोनों ही विटामिन सी का बहुत अच्छा स्रोत हैं। इसलिए आपको शिमला मिर्च बीजों सहित जरूर खाना चाहिए। विटामिन सी आपके शरीर में आयरन को अवशोषित करने में मदद करता है और शरीर के लिए एक पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है। इसके अलावा विटामिन सी शरीर की इम्युनिटी यानी रोगों से लडऩे की क्षमता बढ़ाता है और त्वचा को जवान बनाए रखता है।कैलोरीज बर्न करने में करता है मददअगर आपके शरीर में एक्सट्रा चर्बी जमा हो गई है, जिसके कारण आप चिंतित हैं, तो परेशान न हों। शिमला मिर्च खाएं क्योंकि ये लो-कैलोरी फूड है और फायदेमंद भी है। और साथ ही इसके बीजों को भी डिशेज में डाल दें, क्योंकि ये बीज आपकी कैलोरीज बर्न करने में मदद करेंगे। ये बीज फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत होते हैं, साथ ही मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाते हैं, जिससे कैलोरीज बर्न करने में मदद मिलती है। अगर आप अपने लिए वेट लॉस सूप बना रहे हैं, तो उसमें शिमला मिर्च के बीज जरूर डालें।दिल की सेहत को रखेगा दुरुस्तआप जानते हैं कि हार्ट की बीमारियां कितनी खतरनाक होती हैं। दुनियाभर में सबसे ज्यादा लोग आज भी कार्डियोवस्कुलर रोगों से ही मरते हैं। हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए बहुत सारे फूड्स डायटीशियन बताते हैं। शिमला मिर्च के बीज भी आपके दिल की सेहत को दुरुस्त रखने में बड़े फायदेमंद हो सकते हैं। हरे या ऑरेंज शिमला मिर्च के बीज साइटोकेमिकल्स और फ्लैवोनॉइड्स का बहुत अच्छा स्रोत होते हैं। इनके सेवन से शरीर में खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) नहीं जमा होते हैं, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।कई बीमारियों से बचाएंगे शिमला मिर्च के बीजशिमला मिर्च या बेल पिपर किसी भी रंग के हों, आपके लिए बहुत फायदेमंद होते हैं क्योंकि इनके सेवन से कई तरह की बीमारियों से शरीर की रक्षा होती है। इसी तरह इनके बीज भी आपके लिए बहुत फायदेमंद हैं। शोध के अनुसार शिमला मिर्च के बीजों में पाए जाने वाले विटामिन ई और दूसरे एंटीऑक्सीडेंट्स के कारण ये डायबिटीज को कंट्रोल करता है, शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करता है और दर्द में भी राहत पहुंचाता है। इसलिए आपको शिमला मिर्च और इसके बीजों, दोनों का ही सेवन करना चाहिए। े विटामिन ई झुर्रियों, झाइयों, डार्क सर्कल्स आदि को रोकने में बहुत फायदेमंद होता है। बहुत सारे ब्यूटी प्रोडक्ट्स में विटामिन ई का इस्तेममाल किया जाता है। यही नहीं विटामिन ई आपके बालों को भी हेल्दी, रेशमी और मजबूत बनाता है।
- लौकी का इस्तेमाल सब्जी के रूप में किया जाता है। भारत में प्राय: सभी क्षेत्रों में लौकी का उत्पादन बड़ी मात्रा में किया जाता है। लौकी में दूध के सभी गुण मौजूद रहते हैं। वास्तव में यह वनस्पति-जन्य दूध ही है। लौकी करीब-करीब बार महीने उपलब्ध रहती है। लौकी की अनेक किस्में होती हैं- लंबी, तुमड़ी, चिपटी, तूमरा आदि। सामान्यत: लौकी मीठी होती है और तुमड़ी कड़वी। लौकी की एक किस्म में तुमड़ी के आकार के फल लगते हैं । उसे मीठी तुमड़ी कहा जाता है और उसका उपयोग साग बनाने में किया जाता है। वहीं कड़वी तुमड़ी लौकी का उपयोग नदी में तैरने के लिए होता है।लौकी की एक किस्म मगिया लौकी के रूप में प्रसिद्ध है। इसका आकारा लंबी बोतल जैसा होता है इसलिए अंग्रेजी में इसे ड्ढशह्लह्लद्यद्ग द्दशह्वह्म्स्र कहते हैं। लौकी में चने की दाल मिलाकर बनाई हुई तरकारी स्वादिष्टï और गुणकारी होती है। लौकी का हलुआ खाने में स्वादिष्टï और शीतल होता है। लौकी गरिष्ठï , रेचक और बलप्रद है। अशक्त और रोगियों के लिए यह लाभकारी है। गर्म प्रकृति वालों के लिए लौकी का सेवन ठंडक और पोषण देने वाला होता है। सिर में डालने वाले तेल में लौकी का उपयोग ठंडक देने के लिए होता है। इसके बीज का उपयोग औषधि के रूप में होता है। कड़वी लौकी के फलों का उपयोग सख्त जुलाब देने के लिए होता है। लौकी हृदय के लिए लाभकारी, पित्त, कफ को नष्टï करने वाली, गरिष्ठï, वीर्यवर्धक, रुचि उत्पन्न करने वाली और धातुपुष्टिï को बढ़ाने वाली मानी जाती है। लौकी गर्भ की पोषक है। इसके सेवन से गर्भावस्था में कब्जियत दूर होती हैयूनानी मत के अनुसार लौकी के बीज मस्तिष्क की गर्मी को दूर करते हैं और मस्तिष्क को पुष्टï करते हैं। मस्तिष्क की गर्मी मिटाने के लिए और उसे तर करने के लिए हकीम लौकी के बीज के गर्भ का उपयोग करते हैं। इसके अलावा अन्य रोगों में भी लौकी का उपयोग प्रमुखता से किया जाता है।पानी से भरपूर ठंडी लौकी खासकर गर्मियों के मौसम में सेहत के लिए काफी फायदेमंद साबित होती है। हरी सब्जियों में लौकी शायद सबसे जल्दी पकती है। लौकी में लगभग 96 प्रतिशत पानी होता है। यानी सलाद में जो काम खीरा करता है, सब्जी में वही काम लौकी करती है। लौकी ठंडी होती है। और यह हमारे लीवर को भी दुरुस्त रखती है। इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है, जिस वजह से इसे आसानी से पचाया जा सकता है।लौकी गर्मियों के मौसम में आपके पेट के लिए काफी अच्छी रहती है, और पेट में गैस बनने जैसी समस्या को दूर करती है। इसमें फाइबर होने की वजह से यह अल्सर, पाइल्स और गैस के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद सब्जी है। क्योंकि फाइबर होने के कारण लौकी जल्दी पच जाती है, और शरीर में गैस की समस्या नहीं होती। केवल पर्याप्त मात्रा में लौकी क़ी सब्जी का सेवन कब्ज को भी दूर कर देता है और इससे पेट में गैस नहीं बनती। पेशाब से जुड़ी अनियमितताओं के ईलाज में लौकी फायदा करती है। अगर पेशाब करते समय किसी को जलन महसूस होती है तो डॉक्टर उसे लौकी खाने या उसका सूप पीने की सलाह देते हैं। लौकी हमारे लीवर को भी दुरुस्त रखती है। अगर किसी का लीवर संक्रमित है और ठीक से काम नहीं कर रहा है तो लौकी खाना उसके लिए फायदेमंद होता है।----
- यदि आप घर के बने कपड़े या कपड़े के फेस मास्क का उपयोग कर रहे हैं, तो आपको इसे नियमित रूप से साफ करना चाहिए। गंदा मास्क कोविड-19 वायरस के खतरे को ही नहीं बढ़ाते बल्कि अन्य संक्रमणों को भी बढ़ाते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से अपने मास्क को डिसइंफेक्ट करें और साफ करें और यह जांच लें कि आपका मास्क साफ हो। दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ फैब्रिक मास्क या होममेड मास्क पहनने की सलाह दे रहे हैं। क्योंकि ये त्वचा पर कठोर नहीं होते और त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाते, जैसे कि सर्जिकल मास्क होते हैं। इसके अलावा, उन्हें साफ करना सर्जिकल मास्क या बाजार में मिलने वाले एन 95 मास्क की तुलना में आसान है।
कितनी बार हमें मास्क साफ करना चाहिए?
आप हमेशा यह तय कर लें कि आप बिना मास्क पहने घर से बाहर न जाएं। यदि यह संभव है, तो आप अपने पूरे चेहरे को एक स्कार्फ के साथ कवर करें। मास्क पहनना घातक कोरोना वायरस बचाव के लिए जरूरी उपाय में से एक है। इस वैश्विक महामारी से बचने के लिए फिलहाल रोकथाम ही एकमात्र उपाय है। यह सुझाव दिया जाता है कि हमें हर एक बार उपयोग के बाद मास्क को साफ करना चाहिए। यदि एक बार उपयोग के बाद संभव नहीं है, तो आपको इसे दैनिक रूप से रोज साफ करना चाहिए। रोटेशन में उपयोग करने के लिए 2-3 मास्क रखें। यह न केवल आपको विकल्प देगा, बल्कि आपकी त्वचा के लिए भी अच्छा होगा।घर पर फैब्रिक मास्क की सफाई के तरीके
यहां आपके फैब्रिक मास्क को साफ और निष्फल करने के कुछ आसान और प्रभावी तरीके दिए गए हैं और इससे आप उन्हें पुन: उपयोग के लिए तैयार कर सकते हैं। ध्यान दें कि ये विधियां केवल कपड़े के मास्क के लिए हैं। सर्जिकल मास्क को इनसे साफ नहीं किया जाना चाहिए।उबालना- कपड़े के मास्क को साफ करने की सबसे आसान विधि उबालकर मास्क को साफ करना। एक बर्तन ले और उसमें पानी डालकर उसे उबालें, अब आप इसमें अपने गंदे मास्क को डाल दें। आप इसे 5-6 मिनट के लिए उबाल लें और फिर आप पानी को गिरा दें और मास्क हटा लें। बेहतर परिणाम के लिए आप डेटॉल की कुछ बूंदें या क्लिनिकल डिसइंफेक्टेंट को मिला सकते हैं।हालांकि, इस पद्धति का एक नकारात्मक पहलू यह है कि उबलने के कुछ राउंड के बाद, कपड़ा खराब होना शुरू हो सकता है। ठीक उसी तरह जैसे कपड़े को बार-बार धोने से कपड़े की गुणवत्ता प्रभावित होती है, इससे मास्क सिकुड़ सकता है। इसलिए 10-15 बार मास्क को उबालकर धोने के बाद फेंक देना बेहतर है।डिटर्जेंट गर्म पानी के साथ वायरस और बैक्टीरिया को मारने के लिए सबसे अच्छा काम करता है क्योंकि उनमें ये उच्च तापमान पर निष्क्रिय हो जाते हैं।गर्म पानी और ब्लीच- उबालने के अलावा, अपने मास्क को धोने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप मास्क को गर्म पानी में उबालें और फिर ब्लीच के घोल में डालें। 1: 4 के अनुपात में ब्लीचिंग पाउडर और गर्म पानी का घोल बनाएं। इस घोल में अपने गंदे फेस मास्क को 5 मिनट के लिए भिगोएं और फिर कपड़े पर बचे हुए ब्लीच से छुटकारा पाने के लिए सामान्य पानी से धो लें। अब धूप में मास्क को सुखा लें।--- - कैमोमाइल एक औषधीय पौधा है, जिसका इस्तेमाल काफी पुराने समय से किया जा रहा है। खास बात ये है कि इस पौधे के फूल बहुत खूबसूरत होते हैं, इसलिए ये आपके लिए सजावटी पौधे की तरह भी काम करेगा और कई तरह की समस्याओं में दवा का भी काम करेगा।जिन लोगों की हड्डियां कमजोर हो या जिन्हें ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या हो, उनके लिए भी कैमोमाइल की चाय बहुत फायदेमंद होती है। जिन लोगों को अनिद्रा की समस्या, रात में देर से नींद आने की समस्या, थकान, तनाव और जल्दी-जल्दी बीमार होने की समस्या हो, उनके लिए भी इसकी चाय बड़ी फायदेमंद है। कैमोमाइल टी पीने से शरीर की पाचन क्षमता में सुधार होता है। चाय में एपिगेनिन होता है जो एक एंटीऑक्सीडेंट है।कैमोमाइल का पौधा घर में लगाने से तनाव, चिंता, डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं से छुटकारा मिलता हैं क्योंकि इस पौधों में रिलैक्सिंग के गुण होते हैं। कैमोमाइल का पौधा आपकी नव्र्स को रिलैक्स करता है, इसलिए घर में इसे लगाने से और इसकी खुशबू से ब्लड प्रेशर के रोगियों को बड़ा आराम मिलता है। इस पौधे की पत्तियों को आप त्वचा समस्याओं, जैसे- खुजली, रैशेज आदि में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा घावों को भरने में भी इसकी पत्तियां मदद करती हैं। कैमोमाइल के फूलों और पत्तियों को डालकर चाय बनाकर पीने से डायबिटीज कंट्रोल रहता है और ब्लड प्रेशर कम होता है। इसके अलावा ये आपके कोलेस्ट्रॉल को भी कम करती है। मुंह के छालों, डायरिया और बवासीर के रोगियों के लिए भी कैमोमाइल का पौधा बड़े काम का होता है।कैमोमाइल चाय में एपिगेनिन होता है जो एक एंटीऑक्सीडेंट है। यह इंसोम्निया, नींद आने में असमर्थता आदि से छुटकारा पाने में मदद करता है। यह अच्छी नींद पाने और अवसाद के संकेतों को कम करने में भी मदद करता है। सोने से पहले कैमोमाइल टी का सेवन अच्छी नींद लेने में मदद कर सकती है।एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण, रोजाना कैमोमाइल टी का सेवन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बूस्ट करता है। यह शरीर को सर्दी, बुखार, वायरल इंफेक्शन से बचाने में मदद करता है। रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में उतार-चढ़ाव को कम करता है जिससे हृदय से जुड़ी समस्याएं कम हो सकती हैं.(नोट-कैमोमाइल चाय का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें)
- हरीतकी (लैटिन भाषा में इसे Terminalia chebula कहते हैं। ) एक ऊंचा वृक्ष होता है एवं मूलत: निचले हिमालय क्षेत्र में रावी तट से लेकर पूर्व बंगाल-असम तक पांच हजार फीट की ऊंचाई पर पाया जाता है । हरड़ बाजार में दो प्रकार की पाई जाती है-बड़ी और छोटी । बड़ी में पत्थर के समान सख्त गुठली होती है, छोटी में कोई गुठली नहीं होती । वे फल जो पेड़ से गुठली पैदा होने से पहले ही गिर पड़ते हैं या तोड़कर सुखा लिया जाते हैं । उन्हें छोटी हरड़ कहते हैं । आयुर्वेद के जानकार छोटी हरड़ का उपयोग अधिक निरापद मानते हैं, क्योंकि आंतों पर उनका प्रभाव सौम्य होता है, तीव्र नहीं ।बवासीर, सभी उदर रोगों, संग्रहणी आदि रोगों में हरड़ बहुत लाभकारी होती है। आंतों की नियमित सफाई के लिए नियमित रूप से हरड़ का प्रयोग लाभकारी है। लंबे समय से चली आ रही पेचिश तथा दस्त आदि से छुटकारा पाने के लिए हरड़ का प्रयोग किया जाता है। सभी प्रकार के उदरस्थ कृमियों को नष्ट करने में भी हरड़ बहुत प्रभावकारी होती है।अतिसार में हरड़ विशेष रूप से लाभकारी है। यह आंतों को संकुचित कर रक्तस्राव को कम करती हैं वास्तव में यही रक्तस्राव अतिसार के रोगी को कमजोर बना देता है। हरड़ एक अच्छी जीवाणुरोधी भी होती है। अपने जीवाणुनाशी गुण के कारण ही हरड़ के एनिमा से अल्सरेरिक कोलाइटिस जैसे रोग भी ठीक हो जाते हैं। हरड़ बवासीर तथा खूनी पेचिश आदि बीमारी के उपचार में काम आती है। लीवर, स्पलीन बढऩे तथा उदरस्थ कृमि आदि रोगों की इलाज के लिए लगभग दो सप्ताह तक लगभग तीन ग्राम हरड़ के चूर्ण का सेवन करना चाहिए। हरड़ त्रिदोष नाशक है परन्तु फिर भी इसे विशेष रूप से वात शामक माना जाता है। अपने इसी वातशामक गुण के कारण हमारा संपूर्ण पाचन संस्थान इससे प्रभावित होता है। यह दुर्बल नाडिय़ों को मजबूत बनाती है तथा कोषीय तथा अंर्तकोषीय किसी भी प्रकार के शोध निवारण में प्रमुख भूमिका निभाती है।हालांकि हरड़ हमारे लिए बहुत उपयोगी है परन्तु फिर भी कमजोर शरीर वाले व्यक्ति, अवसादग्रस्त व्यक्ति तथा गर्भवती स्त्रियों को इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए। हरड़ में ग्राही (एस्ट्रिन्जेन्ट) पदार्थ हैं, टैनिक अम्ल (बीस से चालीस प्रतिशत) गैलिक अम्ल, चेबूलीनिक अम्ल और म्यूसीलेज । रेजक पदार्थ हैं एन्थ्राक्वीनिन जाति के ग्लाइको साइड्स । इनमें से एक की रासायनिक संरचना सनाय के ग्लाइको साइड्स सिनोसाइड ए से मिलती जुलती है । इसके अलावा हरड़ में दस प्रतिशत जल, 13.9 से 16.4 प्रतिशत नॉन टैनिन्स और शेष अघुलनशील पदार्थ होते हैं । वेल्थ ऑफ इण्डिया के वैज्ञानिकों के अनुसार ग्लूकोज, सार्बिटाल, फ्रूक्टोस, सुकोस, माल्टोस एवं अरेबिनोज हरड़ के प्रमुख कार्बोहाइड्रेट हैं । 18 प्रकार के मुक्तावस्था में अमीनो अम्ल पाए जाते हैं । फास्फोरिक तथा सक्सीनिक अम्ल भी उसमें होते हैं । फल जैसे पकता चला जाता है, उसका टैनिक एसिड घटता एवं अम्लता बढ़ती है । बीज मज्जा में एक तीव्र तेल होता है । हरड़ का उपयोग त्रिफला बनाने में किया जाता है , जो पेट के रोगों के लिए एक उत्तम औषधि है।---
- गर्मी का मौसम आते ही आम का सीजन शुरू हो जाता है और ज्यादातर लोगों को आम बहुत पसंद होता है। अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को कच्चा आम बहुत पसंद है और उन्होंने कच्चे आम के प्रति अपने प्यार को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है।दीपिका ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर हाल ही में एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें कच्चे आम की कुछ कटी हुई फांकों पर नमक और मिर्च पाउडर डाला गया है। इस तस्वीर को देखकर किसी के भी मुंह से पानी आ सकता है। दीपिका ने फोटो शेयर करते हुए उसके कैप्शन में लिखा है, ये चीज बेहद शानदार है और बाकी सभी से बेहतर हैं। उन सब में से बेहतर, जिनसे मैं अभी तक मिली हूं।वैसे भी कच्चे आम का स्वाद किसी को भी दीवाना बना सकता है। कच्चे आम से बना आम पन्ना गर्मी के मौसम में शरीर को राहत देने का काम करता है। लेकिन एक कारण ये भी है कि हमारी माताएं हमेशा यह सुनिश्चित करती हैं कि गर्मियों के दौरान अचार या पेय के रूप में हम पर्याप्त मात्रा में कच्ची कैरी का सेवन करें क्योंकि ये बहुत हेल्दी होती है। इसे रोजाना अपने खाने में किसी न किसी रूप में इस्तेमाल करें। आइए जानते हैं कच्चे आम के फायदे....1. कच्चा आम अपच, दस्त जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं से पीडि़त लोगों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह पेट से जुड़ी समस्याओं में राहत दिलाने का काम करती है।2. आम का रस पीने से तेज गर्मी के प्रभाव को कम किया जा सकता है और डिहाइड्रेशन को रोका जा सकता है।3. कच्चा आम शरीर को ऊर्जा भी देता है, जो आपको उबासी से छुटकारा पाने में मदद कर सकता है। इसलिए भोजन के बाद जिन लोगों को नींद आती है उन्हें अक्सर कच्चे आम का सेवन करना चाहिए। इससे उन्हें नींद नहीं आती।4. अमचूर या कच्चे आम का पाउडर विटामिन सी से भरपूर होता है, जो मसूड़ों से खून बहने, कमजोरी और थकान को दूर करने के लिए फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के विकास को भी बढ़ाता है। इसमें नियासिन नाम का तत्व होता है, जो इसे दिल के लिए एक हेल्दी फल बनाता है। यह रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सुधारने में भी मदद करता है।5. कच्चा आम में विटामिन सी होता है, जो कोलेजन बनाने के लिए आवश्यक विटामिन है। कोलेजन एक प्रोटीन है, जो त्वचा और बालों के स्वास्थ्य में सुधार करता है।6. कच्चा आम विटामिन ए से भी समृद्ध होता है, जो स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली यानी की इम्यून सिस्टम के लिए बेहद आवश्यक है। यह मजबूत प्रतिरक्षा संक्रमण को दूर करने में मदद करता है।---
- कटेरी, जिसे कंटकारी और भटकटैया भी कहते हैं। हिंदी में इसके कई नाम है जैसे- छोटी कटाई, भटकटैया, रेंगनी, रिगणी, कटाली, कटयाली आदि। यह कांटेदार एक पौधा है जो जमीन पर उगता है। कटेरी अक्सर जंगलों और झाडिय़ों में बहुतायत रूप से पाया जाता है। आमतौर पर कटेरी की तीन प्रजातियां पाई जाती हैं- छोटी कटेरी , बड़ी कटेरी और श्वेत कंटकारी। जिनका प्रयोग रोगों को दूर करने के लिए औषधि के तौर पर किया जाता है।कटेरी का प्रयोग पथरी, लिवर का बढऩा और माइग्रेन जैसे गंभीर रोगों में किया जाता है। इसके और भी कई लाभ हैं। यहां हम आपको कटेरी के फायदे बता रहे हैं।कटेरी का प्रयोग और फायदे1. कटेरी या कंटकरी कृमि, सर्दी-जुकाम, आवाज का बैठना, बुखार, बदहजमी, मांसपेशियों में दर्द, और मूत्राशय में पथरी के इलाज में उपयोगी है। पथरी के लिए कटेरी के जड़ का चूर्ण दही के साथ मिलाकर खाया जाता है।2. माइग्रेन, और सिरदर्द में कंटकरी का प्रयोग काफी फायदेमंद है। इसके अलावा अस्थमा में छोटी कटेरी के 2-4 ग्राम कल्क में हींग औरशहद मिलाकर, सेवन करने से लाभ मिलता है।3. गले की खराश को ठीक करने में इसके साथ जामुन के रस का उपयोग किया जाता है।4. कंटकारी का प्रयोग खूनी बवासीर में सहायक है।5. गठिया में दर्द और सूजन को कम करने के लिए कटेरी का पेस्ट जोड़ों पर लगाया जाता है।5. इसकी जड़ और बीज को अस्थमा, खांसी और सीने में दर्द होने पर पयोग किया जाता है।6. खांसी का इलाज करने के लिए कटेरी की जड़ का काढ़ा शहद के साथ दिया जाता है।7. इसके तने, फूल और फल, कड़वे होने के कारण, पैरों में होने वाली जलन से राहत दिलाने में मदद करते हैं।8. यह जड़ी-बूटी एडिमा से जुड़ी हृदय रोगों के उपचार में फायदेमंद है, क्योंकि यह हृदय और रक्त शोधक के लिए उत्तेजक का काम करती है।9. शारीरिक कमजोरी में दिन में दो बार कटेरी के ताजे पत्तों का रस पीना चाहिए। इसमें आप मिश्री मिलाकर उपयोग कर सकते हैं।10. लिवर की समस्या में कटेरी का उपयोग किया जाता है। नियमित रूप से कटेरी के काढ़े का सेवन लिवर में मौजूद संक्रमण और सूजन को कम करने में मदद करता है।(नोट: ये सभी प्रयोग एक बार विशेषज्ञ की राय लेकर ही किए जाने चाहिए )---
- स्किनकेयर और हेयरकेयर के लिए ज्यादातर लोग अब प्राकृतिक अवयवों के उपयोग की तरफ मुड़ रहे हैं। बात चाहे छोटे-मोटे घरेलू नुस्खों की हो या स्किनकेयर और बालों की देखभाल की, लोग हर दिन अपने आस-पास मौजूद प्राकृतिक उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में अभिनेता शाहिद कपूर की पत्नी मीरा कपूर ने हिबिस्कस यानी कि गुड़हल के फूल से हेयर ऑयल और हेयर पैक की रेसिपी साझा की।इस रेसिपी को साझा करते हुए मीरा ने हिबिस्कस यानी गुड़हल के फूलों के कुछ खास फायदे भी बताए। दरअसल बालों के लिए गुड़हल के फूल का अर्क कई मायनों में फायदेमंद है। ये बालों के रोम में जाकर इसके विकास को एक गति देता है, जो गंजे पैच को कवर करने में मदद करता है और सूखापन और रुसी को भी कम करने में मददगार है।कैसे बनाएं गुड़़हल के फूल का तेलमीरा ने अपने पोस्ट में गुड़़हल के फूल से तेल बनाने और हेयर मास्क बनाना बताया है। जैसे कि-दो हिबिस्कस फूल यानी कि गुड़हल के फूल और कम से कम 7-8 इसी के ताजा हरे पत्ते भी ले लें।- अब नारियल तेल का एक चम्मच लें और इसमें मिलाकर एक पीस कर पेस्ट बना लें।- सुनिश्चित करें कि आप इसके पराग को छोड़कर पूरे फूल का उपयोग करें।-अब, मध्यम आंच पर एक पैन रखें और उसमें तीन चम्मच नारियल का तेल डालें। इसमें वो पेस्ट मिला लें।- अब आप इसमें कुछ मेथी के बीज, आंवला पाउडर और करी पत्ते भी मिला लें। साथ ही आप नीम की पत्तियों को भी इसमें मिला सकते हैं।-अब इसे अच्छे से गर्म कर लें। अब एक मलमल के कपड़े का उपयोग करके सामग्री पक तनाव डालते हुए इसे एक एयर-टाइट कंटेनर में छान कर स्टोर करें। अब इस तेल का इस्तेमाल अपने बालों के लिए करेंमीरा कपूर ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में उल्लेख किया है,यह वास्तव में उपलब्ध और सीजन पर निर्भर करता है। मीरा बताती हैं कि इस तेल को आप अपने बालों की जड़ों में लगाएं और आपको इसका फायदा नजर आएगा।बालों के लिए गुड़़हल के फूलों का लाभ-हिबिस्कस फूलों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले अमीनो एसिड बालों को पोषण प्रदान करने के साथ बालों के विकास को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।- ये अमीनो एसिड केराटिन नामक एक विशेष प्रकार के संरचनात्मक प्रोटीन का उत्पादन करते हैं, जो बालों के लिए फायदेमंद है।-केराटिन बालों को बांधता है जिससे उनके टूटने की संभावना कम हो जाती है।-हिबिस्कस के फूलों और पत्तियों में अधिक मात्रा में पानी होता है, जो प्राकृतिक कंडीशनर के रूप में काम करता है।- ये डैंड्रफ और स्कैलप को हेल्दी बनाने में मदद करता है।-बालों के लिए हिबिस्कस की पत्तियों का उपयोग स्केल्प को ठंडा करता है और बालों के पीएच संतुलन को बनाए रखता है।-परंपरागत रूप से, हिबिस्कस का उपयोग ग्रे बालों काला करने के लिए एक प्राकृतिक डाई के रूप में किया जाता था।-इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन मेलेनिन का उत्पादन करने में मदद करते हैं, जो स्वाभाविक रूप से बालों को प्राकृतिक रंग देता है।






















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