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अदरक का इस्तेमाल कई तरह की परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है। इसके कई मेडिकल फायदे हैं, जिसमें से एक यह है कि ये गले की खराश को दूर करने में मदद करता है। गले में खराश होने पर आपको जो दर्द होता है वह गले में सूजन और खुजली के कारण होता है। सूजन आपके शरीर की संक्रमण के प्रति प्रतिक्रिया करने वाली इम्यूनिटी का परिणाम है। ऐसे में अदरक शरीर में प्रो-इंफ्लेमेटरी प्रोटीन को ब्लॉक करने में मदद करता है। ये प्रोटीन सूजन दर्द और खुजली का कारण बनते हैं। इसे अलग अलग तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है।
सोंठ को चबाएं
गले की खराश से छुटकारा पाने के लिए आप सोंठ यानी कच्चे अदरक का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये आपकों किसी भी किराना स्टोर पर मिल जाएगा। इले हल्का सा छील लें और फिर एक इंच अदरक के टुकड़े को काट कर चबा लें। थाड़ी देर चबाने के बाद इसका रस खत्म हो जाए तब आप इसकी जड़ को निगल सकते हैं।
अदरक की चाय
सबसे बेस्ट और आसान तरीकों की बात करें तो आप अदरक की चाय पी सकते हैं। गर्म अदरक की चाय गले की खराश को शांत करने का एक फेमस और इफेक्टिव तरीका है। ये चाय गले की सूजन में आराम देती है। इसे बनाने के लिए एक कप पानी में 2 इंच कच्ची अदरक को घिसकर डालें और चाय बनाएं। चाय को पांच मिनट तक ऐसे ही रहने दें, फिर छान लें।
सेक कर खाएं अदरक
अगर गले में बहुत ज्यादा खराश है और चाय नहीं पी सकते हैं तो अदरक के छोटे टुकड़े कर लें। फिर इसे सेकें और इस पर काला नमक डालें। इसे कुछ देर तक मुंह में रखें और इसके रस को निगलते रहें। दादी-नानी का ये नुस्खा बड़े काम का है। -
एड़ी का दर्द पैर की एक आम स्थिति है। यह आमतौर पर चलते समय एड़ी का उपयोग करते समय तीव्र दर्द के रूप में महसूस किया जाता है। एड़ी का दर्द आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है और समय के साथ खराब होता जाता है। जब भी चलते समय आप अपनी एड़ी पर भार डालती हैं, तो ये बहुत तेजी के साथ होता है और लगातार बढ़ता जाता है। इस दर्द को नजरंदाज करने से बेहतर है, इसके कारणों को जानना। ताकि आप इसका समय रहते समाधान किया जा सके। ज्यादातर मामलों में, केवल एक एड़ी प्रभावित होती है, हालांकि अनुमान बताते हैं कि लगभग एक तिहाई लोगों को दोनों एड़ियों में दर्द होता है।
ये हो सकते हैं एड़ी में दर्द के कुछ सामान्य कारण---
00 कैल्शियम
00 मोटापा
00 कठिन एक्सरसाइज़
1. प्लांटर फशिया
आपकी एड़ी के नीचे दर्द का सबसे आम कारण, यह स्थिति हर साल 2 मिलियन लोगों को प्रभावित करती है। न्यूयॉर्क शहर में एनवाईयू लैंगोन मेडिकल सेंटर में हुए एक शोध के अनुसार प्लांटर फशिया ऊतक का एक बैंड है जो आपके पैर के आर्च को नीचे की ओर चलाता है, पैर की उंगलियों को एड़ी से जोड़ता है। यह पैर को झटके को अवशोषित करने में मदद करता है, लेकिन चलने या दौड़ने से बार-बार दबाव पड़ने से इसमें सूजन पैदा हो सकती है। यह दर्द अक्सर सुबह सुबह होता है, खासकर बैठने या खड़े होने के बाद।
2. फैट पैड एट्रोफी
जीवन भर में, हमारे पैर 100,000 मील से अधिक की दूरी तय करते हैं। तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि प्राकृतिक कुशनिंग खराब हो जाती है, जैसे आपके स्नीकर्स की। एनल्स ऑफ रिहैबिलिटेशन मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पतले फैट पैड आपकी एड़ी पर दबाव बढ़ाते हैं। यही कारण है कि यह एड़ी के दर्द का दूसरा सबसे आम कारण है।
3. अकिलीज़ टेंडन
आपके शरीर का सबसे बड़ा हिस्सा, अकिलीज़ टेंडन आपके काल्व्स को आपकी एड़ी की हड्डी से जोड़ता है। इनमें अक्सर चलने और जॉगिंग जैसी गतिविधियों के कारण होता है। काल्व्स की तंग मांसपेशियां भी इसमें तनाव जोड़ सकती हैं। इसलिए, यदि आपको बहुत ज़्यादा दर्द है तो डॉक्टर को दिखाएं। - बढ़ती उम्र के साथ आपके चेहरे पर दाग-धब्बे और झुर्रियां दिखाई देने लगते हैं। इन लक्षणों को कम करने के लिए कई लोग बाजार में पाए जाने वाले स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इन प्रोडक्ट्स में मौजूद केमिकल आपकी त्वचा को खराब कर सकते हैं। ऐसे में आप स्किन पर नारियल तेल और हल्दी का पैक लगा सकते हैं। इससे स्किन ग्लोइंग और साफ नजर आती है। हल्दी और नारियल में एंटीबैक्टीरियल, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा को इंफेक्शन और रैशेज से बचा सकता है। हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो घाव को जल्द ठीक करने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन को लचीला और टाइट बनाए रखते हैं। इससे स्किन में झुर्रियां, फाइन लाइन्स और रिंकल्स नजर नहीं आते हैं। आइए नारियल तेल और हल्दी के फायदे और इस्तेमाल के बारे में विस्तार से जानते हैं।स्किन के लिए नारियल तेल और हल्दी के फायदे1. ग्लोइंग स्किनहल्दी और नारियल तेल में एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। जो स्किन को चमकदार बनाए रखने में मदद करता है। ये नैचुरली स्किन में निखार लाता है और बेदाग बनाता है। इसके लिए आप एक कटोरी में दही, नारियल तेल और हल्दी ले लें। इन तीनों चीजों को अच्छे से मिला लें। इस पेस्ट को चेहरे और गर्दन वाले हिस्से पर लगाकर 20 मिनट तक छोड़ दें। फिर ठंडे पानी से चेहरे को धो लें।2. कील-मुहांसों से छुटकाराकील-मुहांसों की समस्या कई लोगों को होती है। हल्दी और नारियल तेल में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो त्वचा में मौजूद बैक्टीरिया और सूजन को कम कर सकता है। इसके लिए आप एक चम्मच नारियल तेल और आधा चम्मच हल्दी लेकर उसे अच्छे से मिक्स कर लें। फिर उसे चेहरे पर मसाज कराते हुए लगाएं। इसके अलावा चेहरे के कील-मुहांसों पर हल्दी और नारियल तेल का पेस्ट रातभर रखकर छोड़ दें। सुबह उठकर इसे साफ कर लें।3. डार्क सर्कल्स की समस्याहल्दी और नारियल तेल का इस्तेमाल आपके आँखों के नीचे आने वाले डार्क सर्कल्स से छुटकारा दिला सकता है। दरअसल यह आंखों को आराम दिलाता है और इससे नींद अच्छी आ सकती है। इसलिए रात को सोने से पहले आप आंखों के नीचे आप हल्दी और नारियल तेल का पेस्ट लगाकर सो सकते हैं। इससे आपको काफी आराम मिलता है। हालांकि आप चाहे तो आंखों के नीच हल्के हाथों से मसाज भी कर सकते हैं।4. सनबर्न से बचाएनारियल तेल और हल्दी का पैक लगाने से आपकी सनबर्न की समस्या खत्म हो सकती है। यह स्किन के टैन को दूर करके निखार लाता है। इसके लिए आप आधा चम्मच हल्दी, एक चम्मच नारियल तेल और एक चम्मच ऑलिव ऑयल ले लें। इससे स्किन पर पडऩे वाली धूप का असर आप पर कम पड़ता है।5. स्ट्रेच माक्र्स हल्का करेआप स्ट्रेच माक्र्स को दूर करने के लिए हल्दी और नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकते है। यह दाग के निशान को हल्का बनाने और रंगत निखारने में मदद करता है। हल्दी और नारियल तेल आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।
- चेहरे पर घी लगाने त्वचा की कई समस्याओं से छुटकारा मिलता है। हम त्वचा पर दो तरह के घी का सबसे ज्यादा प्रयोग एक भैंस के दूध से बना घी और दूसरा गाय के दूध से बना घी। दोनों ही त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है। लेकिन गाय का घी चेहरे पर लगाने थोड़ा ज्यादा फायदेमंद होता है। गाय का घी हेल्दी फैट्स के साथ ही लिनोलिक एसिड से भरपूर होता है। यह मॉइस्चराइजिंग और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भी भरपूर होता है, जिससे यह त्वचा की कई समस्याओं को दूर करने में बहुत प्रभावी है। इस लेख में हम आपको चेहरे पर गाय का लगाने के 5 फायदे.....-प्राकृतिक मॉइस्चराइजर है: चेहरे पर गाय का घी लगाने से त्वचा नैचुरली मॉइस्चराइज होती है। यह ड्राई स्किन की समस्या से छुटकारा दिलाता है और त्वचा को कोमल बनाता है।-एजिंग के लक्षण कम होते हैं: यह त्वचा को टाइट करने में मदद करता है, जिससे झुर्रियां, फाइन लाइन्स और रोम छिद्र कम होते हैं और आप जवां नजर आते हैं।-त्वचा के घाव ठीक करता है: रात में सोने से पहले अगर आप चेहरे पर गाय का घी लगाकर सोते हैं, तो इससे चेहरे की दरारें, त्वचा पर कट या घाव और फटी त्वचा को ठीक करने में मदद मिलती है। यह फटे होंठों से भी छुटकारा दिलाता है।-मुंहासे की समस्या में फायदेमंद है: चेहरे की गहराई से सफाई करने में गाय का घी बहुत प्रभावी है। यह त्वचा के रोम की गंदगी को साफ करता है साथ ही हानिकारक बैक्टीरिया को हटाता है। यह त्वचा पर अतिरिक्त तेल के उत्पादन को कंट्रोल करता है, जिससे मुंहासे कम होते हैं।-त्वचा में निखार आता है: गाय का घी त्वचा पर त्वचा पर लगाने से त्वचा की रंगत में सुधार होता है। यह त्वचा के मृत कोशिकाओं को हटाने में भी मदद करता है। त्वचा के दाग-धब्बों, टैनिंग, पिगमेंटेशन और कालेपन के लिए यह बहुत प्रभावी उपाय है।चेहरे पर गाय की घी कैसे लगाएं-चेहरे पर गाय का घी लगाने के लिए आपको सबसे पहले घी को थोड़ा गर्म कर लेना है। गुनगुने घी से चेहरे की अच्छी तरह मालिश करनी है। रात में चेहरे पर घी लगाना ज्यादा फायदेमंद होता है। बस रात को फेस वॉश करने के बाद चेहरे पर गाय का घी लगाएं और रात भर के लिए छोड़ दें। सुबह सादे पानी से धो लें।
- रक्षाबंधन का त्योहार 11 अगस्त को मनाया जाएगा। इस त्योहार में पूरा परिवार साथ होता है, ऐसे में इस दिन मीठा अवश्य बनाया जाता है। रक्षाबंधन के मौके पर अगर आप भी कुछ मीठा लेकिन हेल्दी बनाने की सोच रही हैं, तो हम आपको बता रहे हैं 5 स्पेशल खीर की रेसिपीज, जो स्वाद में तो अनूठी हैं ही, साथ ही सेहत के लिए भी फायदेमंद साबित होंगी। ये 5 तरह की खीर बनाकर घर पर आए मेहमानों को आसानी से खिला सकती हैं। ये सभी खीर आसानी से बन जाती हैं, साथ ही हेल्थ के लिए काफी अच्छी होती हैं। ये खीर बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को काफी पसंद आती हैं। आइये जानते है कैसे बनाएं ये खीर।साबूदाना खीरसाबूदाना सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। साबूदाना खीर बनाने के लिए साबूदाना को पानी में 2-3 बार अच्छे से धो कर 1-2 घंटे के लिए भिगो कर रख दें। अब एक पैन में दूध को चढ़ाएं। जब दूध अच्छे से गर्म हो जाए, तो उसमें साबूदाना डालें। साबूदाना को अच्छे से उबलने के बाद इसमें चीनी, इलायची पाउडर डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। थोड़ी देर बाद जब साबूदाना पक जाए, तो गैस का फ्लेम बंद कर दें। साबूदाना खीर तैयार है। गर्निश करने के लिए किशमिश का इस्तेमाल करें।मखाने की खीरमखाने की खीर बनाने के लिए एक पैन में मखाने को भून लें और उसे ठंडा होने के लिए अलग रख दें। अब एक पैन में दूध को गर्म करें। दूध जब अच्छे से गर्म हो जाए, तो उसमें घी में तले हुए या ड्राई रोस्ट हुए मखाने डालें। जब मखाना अच्छे से पक जाए तो उसमें इलायची पाउडर और ड्राई फ्रूट्स डाल कर अच्छे से मिक्स करें। धीमी गैस पर कुछ देर मखाने की खीर को पकने दें। फिर गैस बंद करें और मखाने की खीर तैयार है।एप्पल खीरएप्पल खीर स्वादिष्ट होने के साथ- साथ सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होती है। इसे बनाने के लिए सेब को कद्दूकस कर लें और घी में अच्छे से भूनकर अलग रख लें। अब गैस पर एक पैन में दूध को अच्छे से गर्म करें। गैस को बंद करने के बाद दूध को ठंडा होने के लिए कुछ देर के लिए रखें। दूध ठंडा होने के बाद उसमें कद्दूकस किया हुआ सेब मिक्स करें। फ्लेवर के लिए इलायची पाउडर और ड्राई फ्रूट्स इसमें मिक्स करें। ठंडा करके इस खीर को परोसें।लौकी की खीरलौकी की खीर सेहत के लिए काफी पौष्टिक होती है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले लौकी को कद्दूकस करके भून लें। एक पैन में दूध को उबालें। दूध उबलने के बाद उसमें लौकी डालकर 10 मिनट तक पकाएं। ठंडा होने के बाद उसमें इलायची और ड्राईफ्रूट्स डालकर सर्व करें।पाइनएप्पल की खीरपाइनएप्पल की खीर बनाने के लिए पाइनप्पल को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। अब पाइनएप्पल और चीनी को साथ में मिलाकर पीसें। कड़ाही में अनानास का पेस्ट डालें और उसे अच्छे से पकाएं। जब पेस्ट गाढ़ा हो जाए, तो उसमें दूध डालकर अच्छे से मिलाएं। दूध और पेस्ट को अच्छे से मिलाएं। ध्यान रखें उसमें कोई गांठ न पड़े। अब इसमें खोया डालकर मिक्स करें। 4 से 5 मिनट में ये तैयार हो जायेगा। सूखे मेवे डालकर गर्निश करें।
- जई, गेहूं, राई और चावल जैसे अनाज हमारी डाइट में अहम भूमिका निभाते हैं क्योंकि साबुत अनाजों में भरपूर पोषक तत्व होते हैं। इनमें प्रोटीन, फाइबर, बी विटामिन समेत आयरन, जिंक जैसे मिनरल्स भी शामिल हैं। इन्हीं अनाजों में से एक जौ भी है जिसे बार्ले भी कहा जाता है। आज के लेख में हम जानते हैं जौ खाने के फायदे-वजन कम करने में मददगारजौ काफी स्वस्थ होते हैं और जब वजन घटाने की बात आती है तो इन्हें बेहद अच्छा माना जाता है। जौ भूख को कम करने में मदद कर सकते हैं और आपके पेट को लंबे समय तक भरे रखते हैं। इसलिए यह वजन कम करने में मदद कर सकते हैं।डाइजेशन में सुधारजौ आपके डाइजेशन में सुधार करते हैं। इनमें हाई फाइबर कंटेन्ट होता है, विशेष तौर पर इनसोल्यूबल फाइबर। ये फाइबर अघुलनशील होते हैं जो पानी में नहीं घुलते जिससे ये आपके बोवेल मूवमेंट्स में सुधार करते हैं और कब्ज की संभावनाओं को कम करते है।कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल होता हैजौ आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कम करने में मदद कर सकते हैं। जौ में पाए जाने वाले बीटा-ग्लूकन्स बाइल एसिड को कम करके 'खराबÓ एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करते हैं। एक अध्ययन में देखा गया है कि हाई कोलेस्ट्रॉल वाले पुरुषों को साबुत गेहूं, ब्राउन राइस या जौ से भरपूर डाइट दी गई। पांच हफ्तों के बाद, जौ का सेवन करने वाले पुरुषों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर 7 प्रतिशत कम हुआ।शुगर लेवल नियंत्रित होता हैजौ ब्लड शुगर के स्तर को कम करके और इंसुलिन रिलीजमें सुधार करके टाइप 2 डायबिटीज के रिस्क को कम कर सकता है। ऐसा जौ में मौजूद मैग्नीशियम कंटेन्ट के कारण होता है। यह मिनरल इंसुलिन उत्पादन और शरीर द्वारा शुगर के उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।भरपूर विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्सजौ में विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर होते हैं जो सेल्स की स्वस्थ ग्रोथ में मदद करते हैं। इसमें फोलेट, आयरन, सोडियम, कॉपर और मैंगनीज और बी विटामिन्स होते हैं। साथ ही इसमें फाइबर और प्रोटीन की भी अच्छी मात्रा होती है। जौ 'खराबÓ एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करते हैं और साथ ही जौ में मौजूद फाइबर रक्तचाप के स्तर को कम करते हैं।ब्रेकफास्ट के लिए परफेक्टजौ पोषक तत्वों से भरपूर होते है और नाश्ते के लिए एक परफेक्ट मील है। इसमें फाइबर और आवश्यक मिनरल्स होते हैं जैसे सेलेनियम, कॉपर, ट्रिप्टोफैन और मैंगनीज। ये आपको दिनभर के लिए एनर्जी देते हैं और आपको दिन भर तक संतुष्ट महसूस कराते हैं। जौ में मैंगनीज होने से यह खुश और ऊर्जावान महसूस कराता है, और यह आपके नर्वस सिस्टम को भी शांत करता है।अर्थराइटिस के लक्षण कम करेंजौ में कॉपर अच्छी मात्रा होता है, जो गठिया के लक्षणों को कम करने में भी सहायक हो सकता है। कॉपर फ्री रेडिकल्स को बेअसर करता है जिससे यह सेल्स को रेनोवेट करने में मदद करता है। क्रॉस-लिंकिंग कोलेजन के उत्पादन में भी कॉपर आवश्यक है।इम्यून सिस्टम को बूस्ट करता हैजौ के पौधे में लिगनन्स होते हैं, जो आपकी आंतों के लिए अच्छे होते हैं। जौ आपके इम्यून सिस्टम को बूस्ट करता है। इसके अतिरिक्त, जौ विटामिन सी में हाई होते हैं जो इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं। जौ आपको पूर्ण, संतुष्ट और तनाव मुक्त रखते हैं।
- चने पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। चने में प्रोटीन, काब्र्स, आयरन, फाइबर और फोलेट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। फिट और हेल्दी रहने के लिए हेल्थ एक्सपट्र्स भी काले चने खाने की सलाह देते हैं। यही वजह है कि अधिकतर लोग अकसर चने खाते भी हैं। कुछ लोग चने भूनकर खाते हैं, तो कुछ अंकुरित करके या फिर उबालकर खाना पसंद करते हैं। ऐसे में अकसर लोगों मन में सवाल रहता है कि किस तरह के चने खाना अधिक फायदेमंद होते हैं?भुने हुए चनेअधिकतर लोग चने भूनकर खाना पसंद करते हैं। क्योंकि भुने हुए चने स्वाद में काफी अच्छे लगते हैं। अगर आपको सर्दी-जुकाम या कोई अन्य कफ विकार है, तो आप भुने हुए चने खा सकते हैं। डायबिटीज और थायराइड रोगियों के लिए भी भुने हुए चने अधिक फायदेमंद होते हैं। ओवरवेट होने पर भी आप भुने हुए चने खा सकते हैं। लेकिन जो लोग पतले हैं, उन्हें चने से परहेज करना चाहिए।अंकुरित चनेहेल्थ एक्सपट्र्स हमेशा अंकुरित चने खाने की सलाह देते हैं। दरअसल, अंकुरित चने खाने से शरीर को अधिक लाभ मिल सकता है। अंकुरित चने में अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं। अंकुरित चने खाने से आपको पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी कॉम्पलेक्स मिल सकता है। चने को अंकुरित करके खाने से प्रोटीन की मात्रा भी बढ़ जाती है। इससे आपकी मसल्स स्ट्रान्ग बनती हैं। अंकुरित चने को पचाने में थोड़ी दिक्कत आती है, इसलिए अगर आपको कोई दिक्कत होती है तो आपको अंकुरित चने खाने से बचना चाहिए। अंकुरित चने में आप प्याज, खीरा और टमाटर मिलाकर खा सकते हैं।उबले हुए चनेआप उबले हुए चने भी खा सकते हैं। उबले हुए चने खाने में स्वादिष्ट होते हैं, साथ ही पोषक तत्वों से भी भरपूर होते हैं। अगर आप उबले हुए चने खाना चाहते हैं, तो इसके लिए इन्हें घी में रोस्ट कर लें। रोस्टेड चने में नमक डालकर खाया जा सकता है। आप इनमें ऊपर से नींबू भी निचोड़ सकते हैं। इससे उबले हुए चने खाने से शरीर में इम्यूनिटी बढ़ेगी और आपको स्वाद भी पसंद आएगा।चना किसे नहीं खाना चाहिए?वैसे तो चना खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन कुछ खास लोगों को चना खाने से परहेज करना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार वात प्रकृति के लोगों को चने नहीं खाने चाहिए। इसके अलावा जो लोग काफी दुबले-पतले और कमजोर हैं, उन्हें भी काले चने खाने से बचना चाहिए। जिन लोगों को अकसर ही कब्ज रहती है, उन्हें काले चने से परहेज करना चाहिए। अगर आपकी स्किन ड्राई या रूखी रहती है, तो आपको भी चने नहीं खाने चाहिए। आप भी अपनी डाइट में चने शामिल कर सकते हैं, लेकिन अगर आपको कब्ज रहती है तो चने खाने से बचें।
- डायबिटीज के मरीजों को अपने खानपान का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। ऐसे में ड्राई नट्स का सेवन करना उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए कुछ खास प्रकार के नट्स काफी फायदेमंद होता है। इनके सेवन से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहता है और अन्य फूड्स की तुलना में ये लाभकारी हो सकता है। दरअसल ड्राई नट्स में अनसैचुरेटेड फैट, विटामिन, थायमिन, कैरोटीनॉयड, एंटीऑक्सीडेंट और फाइटोस्टेरॉल और प्रोटीन से भरपूर होते हैं। इसके सेवन से डायबिटीज, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोगों और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से बचा जा सकता है। साथ ही ये सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद हो सकता है। आइए डायबिटीज में ड्राई नट्स खाने के फायदे के बारे में विस्तार से जानते हैं।डायबिटीज में ड्राई नट्स खाने के फायदे1. बादामबादाम का सेवन करने से आपको कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। इससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम हो सकता है। बादाम में मौजूद पोषक तत्व ब्लड शुगर को कंट्रोल कर शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है, जिससे धमनियों में रक्त का प्रवाह अच्छे से हो पाता है। इसके अलावा बादाम एचडीएल की मात्रा बढ़ाते हैं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और हृदय समस्याओं का खतरा कम हो सकता है।2. अखरोटदरअसल अखरोट में कैलोरी की मात्रा बहुत कम पाई जाती है। इसके सेवन से डायबिटीज के मरीजों का वजन संतुलित रहता है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, शुगर, डाइटरी फाइबर, कैल्शियम, आयरन और फास्फोरस पाए जाते हैं। इससे आपका पाचन तंत्र भी सही रहता है और हड्डियां भी मजबूत होती है।3. मूंगफलीमूंगफली के सेवन से मोटापा का खतरा कम हो सकता है। इसके सेवन से डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर कंट्रोल हो सकता है और भूख भी कम लगती है। इसमें प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो कोशिकाओं के विकास के लिए आवश्यक है। डायबिटीज के मरीज कम मात्रा में मूंगफली का सेवन करें क्योंकि इसमें कैलोरी की मात्रा बहुत अधिक होती है।4. पिस्तापिस्ता खाने से शरीर को भरपूर एनर्जी मिलती है। इसमें फाइबर, फैट्स और ओमेगा 3 फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो पेट को अधिक देर तक भरा हुआ महसूस कराते हैं। डायबिटीज के रोगी अपने कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित करने के लिए पिस्ता का सेवन कर सकते हैं। पिस्ता खाने से शरीर में ट्राइग्लिसराइड का स्तर काफी कम हो जाता है, जो हृदय समस्याओं को दूर कर सकता है।5. काजूकाजू टाइप-2 डायबिटीज के जोखिमों को कम करने में मदद कर सकता है। इससे ब्लड प्रेशर की समस्या कम हो सकती है। इसमें मैग्नीशियम, जिंक, कॉपर, फास्फोरस, कैल्शियम, विटामिन बी और पोटैशियम जैसे तत्व पाए जाते हैं। ये सभी डायबिटीज के लक्षणों को कम कर सकते हैं। डायबिटीज के मरीज रोजाना एक मु_ी काजू खा सकते हैं।
- कोचई यानी अरबी के पत्ते सेहत के लिए काफी फायदेमंद रहते हैं। ये पत्ते स्वादिष्ट होने के साथ-साथ शरीर के लिए काफी पौष्टिक भी होते हैं। मानसून के मौसम में आप इसकी सब्जी और पकौड़े बनाकर खा सकते हैं। अरबी के पत्तों में विटामिन ए, बी, सी, कैल्शियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स आदि भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसका सेवन करने से पेट संबंधी बीमारी से बचा जा सकता है और वजन कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं अरबी के पत्तों के फायदों के बारे में।150 ग्राम अरबी के पत्तों में मौजूद पोषक तत्वकैलोरीज- 35, काब्र्स- 6 ग्राम, प्रोटीन- 4 ग्राम, फाइबर- 3 ग्राम, फैट- 1 ग्राम, विटामिन सी- 57 प्रतिशत, विटामिन ए- 34 प्रतिशत, फोलेट- 17 प्रतिशत, पोटेशियम- 14 प्रतिशत, कैल्शियम- 13 प्रतिशत, आयरन- 10 प्रतिशत।अरबी के पत्ते खाने के फायदेब्लड प्रेशर कम करेअरबी के पत्तों के सेवन से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है। अरबी के पत्तों में एंटी-हाइपरटेंसिव गुण मौजूद होता है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायता करता है। इसके लगातर सेवन से तनाव में भी कमी आती है। अरबी के पत्तों का सेवन आप सब्जी और पकौड़े के तौर पर कर सकते हैं।वजन कम करने में मददगारअरबी के पत्तों में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। फाइबर के सेवन से भूख कम लगती है और शरीर में एनर्जी बनी रहती है। इसलिए वजन कम करने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए अरबी के पत्ते काफी लाभदायक हो सकते हैं।आंखों के लिएअरबी के पत्तों में बीटा-कैरोटीन पाया जाता है, जो आंखों के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसके सेवन से आंखो की रोशनी तेज होती है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है, जो शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाता है और आंखों की रोशनी को तेज करता है।हृदय के लिएकई रिसर्च बताती हैं कि हरी पत्तेदार सब्जियों के सेवन से दिल की बीमारियों का खतरा लगभग 16 प्रतिशत तक कम हो जाता है। अरबी के पत्तों में नाइट्रेट होता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मदद करता है। इसलिए दिल को स्वस्थ रखने के लिएअरबी के पत्ते खाएं। ध्यान रखें जब भी अरबी के पत्तों का सेवन करें, तो उसे तेल में ज्यादा न तलें। हल्के तेल में ही सेंक कर खाएं।एनीमिया में लाभकारीअरबी के पत्तों में भरपूर मात्रा में आयरन होता है, जो एनीमिया की समस्या दो दूर करता है। इसके सेवन से हीमोग्लोबीन का स्तर सही रहता है। इसके लगातार सेवन से आपको कमजोरी बिल्कुल अनुभव नहीं होगी। अरबी के पत्तों में आयरन, फाइबर और अन्य आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
- अजवाइन और सौंफ का पानी पीने आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इनके मिश्रण में एंटीऑक्सीडेंट, प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और कैल्शियम पाए जाते हैं। इसके अलावा सौंफ और अजवाइन में मैगनीज, जिंक, विटामिन सी, विटामिन के और ई पाए जाते हैं। इनका इस्तेमाल करने से आपका वजन कम हो सकता है और साथ ही पाचन तंत्र भी सही रहता है। अजवाइन और सौंफ का पानी सर्दी-जुकाम और गले की खराश भी ठीक कर सकता है। इससे आपका इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है। आइए अजवाइन और सौंफ का पानी पीने के फायदे और इस्तेमाल के बारे में विस्तार से जानते हैं।अजवाइन और सौंफ का पानी पीने के फायदे1. इम्यून सिस्टम मजबूत बनाएबारिश के मौसम में आपका इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है। अपने आपको अंदर से मजबूत बनाने के लिए अजवाइन और सौंफ का पानी पी सकते हैं। दरअसल इसमें विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और आयरन पाए जाते हैं। जो वायरल बीमारियों और अन्य समस्याओं को दूर कर सकते हैं। इसे आप सुबह खाली पेट में पी सकते हैं।2. कोलेस्ट्रोल कम करेअजवाइन और सौंफ का पानी पीने से कोलेस्ट्रॉल लेवल नियंत्रित किया जा सकता है। यह आपके शरीर में जमा अतिरिक्त फैट को कम कर सकता है। अजवाइन और सौंफ का पानी वजन कम करने में भी मददगार साबित हो सकता है। इसमें काफी कम मात्रा में कैलोरी पाई जाती है।3. पेट की समस्याओं में कारगरपेट की समस्याओं के लिए सौंफ और अजवाइन काफी फायदेमंद होता है। इस मिश्रण में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, यह पाचन तंत्र को ठीक कर सकता है। इसके सेवन से पेट में अपच, गैस, कब्ज और एसिडिटी की दिक्कत नहीं होती है। इसे आप दिन में दो बार पी सकते हैं।4. मार्निंग सिकनेसकई लोगों को सुबह उठने पर मार्निंग सिकनेस की समस्या होती है। अगर सुबह उठने पर आपको भी उल्टी, जी मिचलाना और मतली की दिक्कत होती है, तो आप अजवाइन और सौंफ का पानी जरूर पिएं। इससे सुबह उठने पर आप फ्रेश और ताजगी का अनुभव करते हैं।5. स्किन के लिए फायदेमंदस्किन को ग्लोइंग बनाने के लिए आप अजवाइन और सौंफ का पानी पी सकते हैं। यह स्किन को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। इनका मिश्रण आपको पिंपल फ्री और बेदाग त्वचा दे सकता है।
- - विटामिन-सी, एंटी-ऑक्सिडेंट्स और फाइबर से भरपूर है पपीतारायपुर। पपीते को सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। पपीते को आयुर्वेद में एक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। सिर्फ पपीते को ही नहीं, बल्कि इसके पत्ते और बीजों का भी इस्तेमाल आयुर्वेदिक उपचार के लिए किया जाता है। पपीते के सेवन से शरीर को कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाया जा सकता है। पपीते की एक अच्छी बात ये है कि ये हर मौसम में आसानी से मिल जाता है। पपीते में पोषक, विटामिन, प्रोटीन, एनर्जी आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम प्रचूर मात्रा में पाया जाता है जो शरीर को सेहतमंद बनाए रखने में सहायक होता है। पपीते को पेट के लिए काफी अच्छा माना जाता है। पपीते में एंटी-बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं जो हमारे पाचन में मदद करते हैं। इसके साथ ही यह फूड पॉइजनिंग जैसी बीमारियों से लड़ने में भी हमारी मदद करता है।पके पपीते के समान ही कच्चे पपीते के भी कई औषधीय गुण हैं। कच्चा पपीता लीवर के लिए काफी फायदेमंद होता है। यह लीवर को शक्ति प्रदान करता है और पीलिया आदि में लीवर के कमजोर पड़ जाने की स्थिति में इसके सेवन से या कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर खाने से पीलिया रोगियों को काफी फायदा होता है। इसमें मौजूद फाइबर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में बेहद कारगर साबित होते हैं। पपीते का दूसरा सबसे बड़ा फायदा है कि यह वजन को नियंत्रित रखता है। यदि वजन कम करना चाहते हैं, तो एक मध्यम आकार के पपीते का सेवन फायदेमंद है।शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय, रायपुर के सह-प्राध्यापक डॉ. संजय शुक्ला ने पपीते के सेवन संबंधी दिशा-निर्देश बताएं हैं। उन्होंने बताया कि इसमें एसिडिक गुण कम होने के कारण सुबह के समय खाने से इसका पाचन आसानी से हो जाता है और इसमें मौजूद पानी की ज्यादा मात्रा और फाइबर की प्रचुरता भी शरीर की मेटाबोलिक रेट को संतुलित करती है। लेकिन यह ध्यान रखें कि इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करें। कच्चे पपीते और इसके बीजों में काफी मात्रा में विटामिन ‘ए’ ‘सी’ और ‘ई’ होता है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अर्थात् इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। कच्चा पपीता सर्दी और जुकाम के साथ कई अन्य प्रकार के इन्फेक्शन से भी लड़ने में मददगार साबित होता है। यह मूत्र संबंधी समस्याओं में भी फायदा पहुंचा सकता है। पपीते में पोटैशियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है। पोटैशियम एक प्रकार का खनिज है जो हमारे शरीर में सोडियम से होने वाले प्रभावों को कम करता है जिससे हमारा रक्तचाप नियंत्रित रहता है। इसलिए आहार विशेषज्ञ भी उच्च रक्तचाप के मरीजों को पपीता खाने की सलाह देते हैं।बीमारियों से लडऩे में है मददगारपपीता हमारे शरीर में विटामिन-सी की मात्रा को पूरा करता है। इससे हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे हमें कई प्रकार की बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है। पपीते के नियमित सेवन से शरीर के रोगग्रस्त होने आशंका कम हो जाती है। कच्चा पपीता एवं पका हुआ पपीता दोनों ही स्वास्थ्य की दृष्टि से फायदेमंद हैं। एक छोटे पपीते में लगभग 60 कैलोरी होती है।
- अलसी के बीज और मेथी का सेवन करने से आपको कई फायदे मिलते हैं। नियमित रूप से इसे खाने से आप कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। जो लोग मोटापे या अधिक वजन की दिक्कत से परेशान हैं, तो आपको अलसी के बीज और मेथी का सेवन जरूर करना चाहिए। इससे आपकी हार्ट हेल्थ और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या ठीक हो सकती है। मेथी में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, आयरन, फाइबर, मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटैशियम, जिंक, विटामिन सी, थायमिन, नियासिन, राइबोफ्लेविन, विटामिन-बी 6, विटामिन ए, विटामिन के, फोलेट, एंटीओक्सीडेंट, सेलेनियम, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। इसके अलावा अलसी में हेल्दी फैट, सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम, फाइबर, प्रोटीन और कैल्शियम पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व आपके शरीर के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। आइए इसके फायदे और उपयोग के बारे में विस्तार से जानते हैं।अलसी और मेथी के फायदे1. हृदय रोगों में लाभकारीअलसी और मेथी में कई गुणकारी पोषक तत्व होते हैं। इनमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं। इससे हृदय रोग की संभावनाएं कम हो जाती है। साथ ही स्ट्रोक और हार्ट अटैक के जोखिम से बच सकते हैं।2. कोलेस्ट्रॉल लेवल नियंत्रित करेअलसी और मेथी के बीज का सेवन करने से आपके शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलित रहता है। रोजाना इन दोनों के मिश्रण के सेवन से आपको हाई ब्लड प्रेशर और अन्य समस्याएं हो सकती है। दरअसल इसमें मौजूद फाइबर और गुड फैट मददगार साबित हो सकता है।3. पाचन शक्ति में मददगारअलसी और मेथी के बीज का सेवन करने से आपकी पाचन शक्ति बेहतर होती है। इनमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, इससे गैस और एसिडिटी की समस्या नहीं होती है। साथ ही आपको कब्ज की दिक्कत भी नहीं होती है।4. त्वचा के लिए उपयोगीअलसी और मेथी का उपयोग त्वचा के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोकैमिकल्स विटामिन्स और मिनरल्स आपकी स्किन को क्लीयर और बेदाग बनाते हैं। आप हफ्ते में एक बार अलसी और मेथी का पैक चेहरे पर लगा सकते हैं। इससे आपकी स्किन जवां और खूबसूरत नजर आती है।5. बालों के लिए लाभकारीअगर आपके बाल रूखे और बेजान नजर आते हैं, तो मेथी और अलसी का उपयोग काफी साबित हो सकता है। इसमें मौजूद विटामिन ए, विटामिन के और प्रोटीन पाया जाता है, जो बालों को खूबसूरत और शाइनी बनाता है।
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टमाटर का इस्तेमाल भारतीय करी में आमतौर से किया जाता है. ये खाने के स्वाद को बढ़ाने में मदद करता है. ये न केवल खाने के स्वाद को बढ़ाने का काम करता है बल्कि ये सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद है. ये कई सारे पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसमें विटामिन सी, विटामिन ए, फाइबर, फोलेट और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व होते हैं. करी के अलावा सलाद के रूप में भी आप टमाटर का सेवन कर सकते हैं. इसके अलावा आप टमाटर का जूस में नियमित रूप से पी सकते हैं. ये स्वास्थ्य संबंधित कई समस्याओं को दूर करने का काम करता है. आइए जानें ये सेहत के लिए कैसे फायदेमंद है.
आंखों के लिए फायदेमंद
टमाटर के जूस में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है. ये आंखों के लिए बहुत ही फायदेमंद है. ये आंखों की रोशनी को बढ़ाने का काम करता है. आंखों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आप नियमित रूप से इसका सेवन कर सकते हैं.
डायबिटीज
टमाटर के जूस में विटामिन सी, पोटैशियम, कैरोटीन, विटामिन ई, फोलेट, कैरोटीन और फ्लेवोनोइड जैसे पोषक तत्व होते हैं. ये डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करता है.
इम्युनिटी को बढ़ाता है
टमाटर के जूस में विटामिन सी होता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं. इसमें लाइकोपीन और बीटा-कैरोटीन जैसे पोषक तत्व होते हैं. ये इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. इम्यून सिस्टम बनाए रखने के लिए आप टमाटर के जूस का सेवन कर सकते हैं.
वजन कम करने के लिए
टमाटर के जूस में फाइबर होता है. ये जूस सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. इसका सेवन वजन कम करने में भी मदद करता है.
बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है
टमाटर में फाइबर होता है. ये बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है. अगर आप बढ़ते हुए कोलेस्ट्रॉल से परेशान हैं तो आप रोजाना एक गिलास टमाटर के जूस का सेवन कर सकते हैं.
डिटॉक्सीफाई
टमाटर का जूस शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने का काम भी करता है. इसका रोजाना सेवन करने से किडनी और लिवर के कार्यों को बेहतर बनाने में मदद मिलती है.
हृदय के लिए फायदेमंद
टमाटर में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं. ये हृदय के लिए बहुत ही फायदेमंद है. इसमें लाइकोपीन, बीटा-कैरोटीन और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व भी होते हैं. ये हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. -
तरोई की सब्जी पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इस मौसम में अधिकतर घरों में तरोई की सब्जी जरूर बनती है। तरोई की सब्जी सेहत के साथ ही त्वचा के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है। अधिकतर लोग तरोई के छिलकों को निकाल देते हैं और फिर इसकी सब्जी बनाते हैं। इसके बाद तरोई के छिलकों को फेंक दिया जाता है। लेकिन आप तरोई के छिलकों की सब्जी और चटनी बनाकर खा सकते हैं, जो स्वादिष्ट होने के साथ ही फायदेमंद भी है।
तरोई के छिलकों के फायदे1. इम्यूनिटी बढ़ाएतरोई के छिलकों की सब्जी और चटनी खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है। यह शरीर को रोगों से लडऩे की शक्ति प्रदान करता है। तरोई के छिलकों की सब्जी खाने से आप हमेशा मौसमी बीमारियों से दूर रह सकते हैं।2. त्वचा के लिए लाभकारीतरोई के साथ ही इसके छिलके भी त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं। तरोई के छिलकों की सब्जी और चटनी खाने से त्वचा की समस्याएं दूर होती हैं। इससे त्वचा में निखार आता है और खूबसूरत बनती है।3. कब्ज से छुटकारा दिलाएअगर आपको कब्ज बनी रहती है, तो आप तरोई के छिलकों की सब्जी को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। तरोई के छिलके भोजन को पचाने में मदद करते हैं। ये मल को नरम बनाते हैं और कब्ज से छुटकारा दिलाते हैं। तरोई की सब्जी में पानी अधिक होता है, इससे कब्ज दूर होती है।4. पाचन मजबूत बनाएतरोई के छिलकों की सब्जी खाने से पाचन बेहतर बन सकता है। इसमें मौजूद तत्व पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। कभी-कभार तरोई के छिलकों की सब्जी या चटनी खाने से पाचन से जुड़ी समस्याओं से बचाव हो सकता है।5. वेट लॉस में मददगारअगर आप वजन घटाना चाहते हैं, तो तरोई के छिलकों की सब्जी खा सकते हैं। तरोई के छिलकों की सब्जी खाने से आपको पर्याप्त ऊर्जा मिलेगी। साथ ही वेट लॉस में भी मदद मिलेगी। लेकिन सिर्फ तरोई के छिलकों को खाने से आपका वेट लॉस नहीं हो सकता है।तरोई के छिलकों की सब्जी-तरोई की सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले उसके छिलके निकाल लें। कड़ाही में तेल गर्म करें। अब इसमें जीरा, हींग डालें। इसके बाद कटा हुआ प्याज डालकर भून लें। फिर टमाटर, हल्दी, नमक, मिर्च और धनिया पाउडर डालकर अच्छी तरह से मिला लें। अब आप इसमें तरोई के छिलकों को डालें। फिर ढंककर 10 मिनट के लिए छोड़ दें। तैयार तरोई के छिलकों की सब्जी को आप रोटी के साथ खा सकते हैं।तरोई के छिलके की चटनीतरोई के छिलकों की चटनी बनाने के लिए सबसे पहले छिलके निकाल लें और धो लें। इसके बाद छिलकों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। एक पैन में तेल गर्म करें। इसमें साबुत लाल मिर्च डालें। इसके बाद कटी हुआ हरी मिर्च, हल्दी और नमक डालकर मिलाएं। अब इसमें उड़द की दाल, मेथी, धनिया, तिल, जीरा और तरोई के छिलके डालकर भून लें। इन सभी मसालों को ठंडा होने दें और फिर पीस लें। अब इसे पैन में डालें, फिर गुड़ डालें और गैस बंद कर दें। इसके बाद इसमें इमली पल्प डालकर अच्छी तरह से मिला लें। आखिर में आप इसका स्वाद बढ़ाने के लिए तड़का लगा सकते हैं। ये चटनी स्वादिष्ट होने के साथ ही पौष्टिक भी होती है। - किशमिश सेहत के लिए बहुत फायदेमंद ड्राई फ्रूट माना जाता है। इसका सेवन शरीर के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। खानपान में गड़बड़ी और खराब लाइफस्टाइल के कारण पाचन से जुड़ी समस्याएं जन्म लेती हैं। पाचन से जुड़ी सबसे कॉमन समस्या है कब्ज। कब्ज और अपच जैसी समस्या में किशमिश का सेवन बहुत फायदेमंद माना जाता है। किशमिश में मौजूद गुण शरीर को पोषण देने के साथ ही पाचन से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने का काम करते हैं। किशमिश में पर्याप्त मात्रा में आयरन, पोटैशियम, विटामिन, कैल्शियम और फाइबर पाया जाता है। फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और कब्ज को दूर करने के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा किशमिश का सेवन शरीर को डिटॉक्स करने के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।कब्ज दूर करने के लिए किशमिश के फायदे-1. किशमिश में फाइबर का पर्याप्त मात्रा होती है, फाइबर पेट को साफ रखने और कब्ज की समस्या को कम करने में बहुत फायदेमंद होता है।2. रोजाना किशमिश का सेवन करने से आपका पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है और अपच, पेट की गैस और कई अन्य समस्याओं में भी फायदा मिलता है।3. वजन कम करने के लिए भी किशमिश का सेवन बहुत फायदेमंद होता है, इसमें मौजूद फाइबर पेट को भरा रखते हैं और बार-बार भूख नहीं लगती है।4. पेट में गैस बनने और एसिडिटी की समस्या में भी किशमिश का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। किशमिश का पानी पीने से पेट साफ रहता है।5. शरीर में खून की कमी दूर करने के लिए भी किशमिश का सेवन बहुत फायदेमंद होता है, किशमिश में आयरन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।कब्ज दूर करने के लिए कैसे खाएं किशमिश?कब्ज की समस्या दूर करने के लिए किशमिश का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है। इसके लिए आप रात में एक मु_ी किशमिश लेकर इसे पानी में भिगोएं। सुबह खाली पेट किशमिश को छानकर इसका सेवन करें। इसके अलावा किशमिश के पानी का सेवन भी सेहत के लिए फायदेमंद होता है। कब्ज दूर करने के अलावा कई अन्य समस्याओं में भी किशमिश का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। डायबिटीज के मरीजों को किशमिश का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।----
- हरियाली तीज के दिन महिलाएं नए कपड़े पहनती हैं. मेहंदी लगाती हैं. सोलह श्रृंगार करती हैं. पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं. इस दिन बहुत से स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाए जाते हैं. अगर आप मीठे खाने के शौकीन हैं तो आप इस मौके पर लौकी की बर्फी भी बना सकते हैं. लौकी की बर्फी बहुत ही स्वादिष्ट और हेल्दी होती हैं. इसे बनाना भी बहुत आसान है. बच्चे हों या बड़े ये बर्फी सभी को बहुत पसंद आएंगी. आप अपने परिवार और दोस्तों के लिए खास मौकों और त्योहारों पर भी ये बर्फी बना सकते हैं. आपको घर पर एक बार लौकी की बर्फी जरूर ट्राई करनी चाहिए. आइए जानें इसकी आसान रेसिपी.लौकी बर्फी की सामग्री1 कप छिला हुआ कद्दूकस लें125 ग्राम खोया1 बड़ा चम्मच घी1/4 कप चीनीआधा लीटर फुल क्रीम दूध1 छोटा चम्मच हरी इलायची पाउडरसजाने के लिएकटे बादामकटे हुए पिस्तेलौकी बर्फी बनाने की विधिस्टेप – 1 एक पैन में दूध उबाल लेंइस स्वादिष्ट डेजर्ट को बनाने के लिए एक गहरे तले के नॉन स्टिक कढ़ाई गैस पर रखें. इसे मध्यम आंच पर रहने दें. इसमें दूध डालें. दूध में उबाल आने दें. इसमें कद्दूकस किया लौकी डालें. इसे अच्छी तरह से मिलाएं. इसे लगभग 10 से 15 मिनट के लिए उबलने दें.स्टेप – 2 चीनी डालेंअब एक पैन में चीनी डालें. इसे अच्छी तरह से मिलाएं. लौकी में दूध सोखने और गाढ़ा होने तक अच्छी तरह से पकाएं. इसके बाद कढ़ाई में घी और इलाइची पाउडर के साथ खोया डाल दें. एक बार फिर इसे अच्छे से मिलाएं.स्टेप – 3 हलवे को प्लेट में फैला देंअब एक बड़ी प्लेट लें. इसमें थोड़ा घी लगाकर इसे चिकना कर लें. दूध पूरी तरह से सोख लेने के बाद गैस बंद कर दें. अब हलवे को प्लेट में निकाल लें. इसे समान रूप से फैलाएं. इसे कटे हुए पिस्ता और बादाम से गार्निश करें. इसे थोड़ा ठंडा होने दें.स्टेप- 4 सेट करने के लिए रेफ्रिजरेट करेंहलवे के पर्याप्त ठंडा होने के बाद बर्फी को सेट करने के लिए इसे 4 से 5 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें. इसके बाद बाहर निकाल कर इसे अपनी पसंद के अनुसार आकार में काट लें.स्टेप – 5 परोसेंअब आपकी बर्फी परोसने के लिए तैयार है. आप इन्हें स्टोर भी करके रख सकते हैं. इसे आप एक एयरटाइट कंटेनर में रखें.
- पान या खैनी में कई लोग चूना लगाकर खाते हैं, लेकिन यह हमारे स्वास्थ्य के लिए ज्यादा हेल्दी नहीं माना जाता है। खासतौर पर खैनी स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदेह होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि चूना खाने से स्वास्थ्य को कई फायदे हो सकते हैं। जिन लोगों के शरीर में कैल्शियम की कमी होती है, उन्हें चूना खाने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं चूना का सेवन करने से शरीर को होने वाले लाभ क्या हैं?1. चूना से दांत हो सकते हैं स्वस्थदांतों में किसी तरह की परेशानी होने पर चूना का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे आपके दांत स्वस्थ रहते हैं। इसका इस्तेमाल करने के लिए चूना पाउडर को थोड़ा सा टूथपेस्ट में लगा लें। अब इसे दांत दर्द से प्रभावित हिस्से पर लगाएं। इससे आपके शरीर को थोड़ी सी मात्रा में कैल्शियम मिलता है, जो दांतों को मजबूत और स्वस्थ रखने में प्रभावी है।2. इम्यूनिटी करे बूस्टइसमें विटामिन सी होता है। यह एक ऐसा पोषक तत्व है जो इम्युनिटी को बढ़ाता है। विटामिन सी श्वेत रक्त कोशिकाओं का प्रोडक्शन बढ़ाने में मददद करता है। यह शरीर को संक्रमण और बीमारी से बचाने में कारगर है। चूना सूजन को कम कर कोलेजन उत्पादन को उत्तेजित करता है। जिससे घाव जल्दी ठीक हो जाते है कोलेजन घाव की मरम्मत करता है। यह एंटीऑक्सिडेंट का भी एक बड़ा स्रोत है। जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करता है।3. शरीर के दर्द से आरामशरीर में कैल्शियम की कमी की वजह से अगर आपको घुटनों, कमर में दर्द जैसा महसूस हो रहा है, तो चूने का सेवन करें। चूने के सेवन से इन दर्द से आराम मिल सकता है। हालांकि, ध्यान रखें कि एक्सपर्ट की सलाह पर ही चूना का सेवन करें।4. बच्चों की बढ़ाए हाइटहड्डियों के बेहतर ग्रोथ के लिए बच्चों को चूना दे सकते हैं। इससे बच्चों की लंबाई बढ़ती है। बच्चों को इसका सेवन कराने के लिए आप दाल या दही में थोड़ा सा चूना मिलाकर उन्हें खिलाएं। इससे बच्चों की हाइट बेहतर हो सकती है।5. दिल को रखे स्वस्थचूना कैल्शियम के अलावा विटामिन सी से भरपूर होता है, जो हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में प्रभावी हो सकता है। चूने के सेवन से हाई ब्लड प्रेशर कम होता है, जो हार्ट हेल्थ को सुरक्षित रख सकता है। चूना खाने से हार्ट डिजीज के जोखिमों को कम किया जा सकता है।6. आयरन की कमी करे दूरचूना शरीर में आयरन की कमी को दूर कर सकता है। शरीर में आयरन की कमी होने पर थकान, कमजोरी, स्किन का पीलापन जैसी परेशानियां होने लगती है। ऐसे में इन सभी परेशानियों को दूर करने के लिए आप चूने का सेवन कर सकते हैं।कैसे करें चूने का सेवन?आयुर्वेदाचार्य का कहना है कि आप चूने को डायरेक्ट रूप से खा सकते हैं। आप पूरे दिन में 100 से 200 एमजी के बीच ले सकते हैं। लेकिन इससे अधिक चूने का सेवन न करें। इसका सेवन आप गर्म पानी के साथ या फिर खाने में मिलाकर खा सकते हैं। चूने से स्वास्थ्य को कई लाभ हो सकते हैं। इससे शरीर को कई लाभ हो सकते हैं। हालांकि, एक्सपर्ट की सलाह पर ही चूने का सेवन करें।
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अगर एक बार पथरी की बीमारी हो जाए, तो इंसान को काफी दर्द और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोग फिर ऑपरेशन का सहारा लेते है। लेकिन क्या आप जानते हैं बिना ऑपरेशन के भी पथरी का इलाज किया जा सकता है। लेकिन आप इन कुछ घरेलू नुस्खों के इस्तेमाल से पथरी की समस्या को कम कर सकते हैं।
जाने माने आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ अबरार मुल्तानी ने हमें 10 ऐसी घरेलू चीजें बताई हैं जिससे पथरी होने की संभावना कम हो सकती है।
ज़्यादा से ज़्यादा पानी पिएं:
किडनी स्टोन होने पर ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की कोशिश करें। दिन में कम से कम 10 से 12 गिलास पानी पिएं। पानी स्टोन बनाने वाले केमिकल को गलाने में मदद करता है और जितनी ज्यादा मात्रा में मूत्र बनेगा उतनी ही कम मात्रा में पथरी बनेगी।
केला खाएं :
पथरी की समस्या से निपटने के लिए केला जरूर खाना चाहिए। केले में विटामिन बी भरपूर मात्रा में पायी जाती है। ये शरीर में पत्थर बनने से रोकता है और बने हुए पत्थर को छोटे छोटे हिस्सों में तोड़ने में मदद करता है। अगर किडनी के मरीज रोज़ाना 100 से 150 ग्राम तक विटामिन बी का सेवन करें तो उन्हें किडनी की पथरी कभी नही होती.
एप्पल खाएं पथरी भगाएं:
पथरी से बचाव करने के लिए सेब बहुत फायदेमंद है। इसका रोज़ाना सेवन पथरी के दर्द में भी आराम देता है। 1 गिलास एप्पल जूस अगर रोज़ाना पीया जाये तो पथरी नहीं बनती।
जौ का पानी:
जौ का पानी पीने से काफी फायदा होता है। जौ के पानी में मौजूद न्यूट्रिएंट्स पथरी को हटाने में बेहद मददगार हैं। जिन लोगों को किडनी प्रॉब्लम हैं, उन्हें रोज सुबह इसे पानी में भिगोकर पीना चाहिए। इससे पथरी निकल जाती है।
कलौंजी का कमाल :
किडनी स्टोन की समस्या में कलौंजी का सेवन फायदा पहुंचाता है.कलौंजी के बीज पथरी की एक शानदार औषधि है। इसे रोज़ाना सुबह एक चम्मच खाया जाये तो पथरी बनना रुक जाती है।
धनिया:
धनिया सिर्फ खाने में स्वाद का ही तड़का नहीं लगती, बल्कि पथरी में भी बेहद असरदार है। धनिये में डिटॉक्सिफिकेशन के गुण पाए जाते हैं, जो आपके शरीर को डिटॉक्स करने में बेहद असरदार है। धनिये के बीज और हरा धनिया दोनों ही किडनी और पथरी के रोगियों के लिए अमृत है। -
फूड और शुगर की क्रेविंग कुछ लोगों पर इस कदर हावी होती है कि वे चाहकर भी खुद पर कंट्रोल नहीं कर पाते हैं. फूड क्रेविंग का सबसे बड़ा नुकसान ये है कि इसकी वजह से तेजी से वजन बढ़ने लगता है. फूड क्रेविंग के भी कई टाइप होते हैं, जिनमें से एक स्पाइसी फूड की क्रेविंग भी है. स्पाइसी फूड या तीखा फूड कुछ लोगों को इतना पसंद होता है कि वे इसे ही अपना टेस्ट बना लेते हैं. रूटीन के अलावा भी वे बाहर से ऐसा फूड मंगाकर खाते हैं और क्रेविंग को शांत करते हैं. मार्केट में मिलने वाले फास्ट फूड या जंक फूड का चलन आजकल बहुत ज्यादा चल गया है. तीखा और टेस्टी होने के चलते ज्यादातर लोगों को इसकी क्रेविंग रहती है.
वैसे एक्सपर्ट्स का मानना है कि तीखे फूड की क्रेविंग शरीर के लिए अच्छी नहीं होती. यहां हम आपको कुछ ऐसे कारण बताने जा रहे हैं, जो ये बताते हैं कि आपको क्यों तीखे खाने की क्रेविंग सताती है. जानें इनके बारे में…
स्ट्रेस
जिस तरह स्ट्रेस में शुगर की क्रेविंग सताने लगती है, उसी तरह इस सिचुएशन में तीखा खाने की इच्छा भी होने लगती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक जो लोग तीखा खाना पसंद करते हैं उन्हें टेंशन में इसका सेवन करने की ज्यादा इच्छा होने लगती है. ये भी देखा गया है कि टेंशन में तीखा खाने से लोगों को आराम भी मिलता है. अगर आप इस तरह की सिचुएशन को पेस कर रहे हैं, तो इसका इलाज जरूर कराएं.
बॉडी टेंपरेचर
ये भी देखा गया है कि बॉडी टेंपरेचर में चेंज आने के दौरान भी लोगों को तीखा खाने की इच्छा हो सकती है. टेंपरेचर के बढ़ने पर ऐसा होता है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि तीखा खाने पर बॉडी टेंपरेचर और ज्यादा बढ़ सकता है. ज्यादा तीखा खाने से शरीर में गर्मी बन सकती है और आपको कई हेल्थ प्रॉब्लम जैसे पाइल्स भी हो सकती है.
प्रेगनेंसी
इस पीरियड में महिलाओं को मूड स्विंग्स का सामना करना पड़ता है. वैसे खानपान से जुड़ी कई चीजें महिलाओं को परेशान करती हैं. किसी केस में एक महिला को मीठे की क्रेविंग होती है, तो कभी खट्टे. देखा जाए, तो प्रेगनेंसी में तीखा खाने की क्रेविंग भी हो सकती है. कहा जाता है कि आप तीखा खाएं, लेकिन इसकी मात्रा को सीमित ही रखें. - आपने करेला बहुत बार खाया होगा पर क्या आपने कभी सफेद करेला का सेवन किया है? अगर नहीं, तो आपको बता दें सफेद करेला स्वाद में लगभग करेले जैसा ही होता है। लोग सफेद करेले को भरवां सब्जी बनाकर बड़े चाव से खाते हैं। सफेद करेले में विटामिन ए, विटामिन बी6, फाइबर, आयरन, पोटैशियम, सोडियम, जिंक और कॉपर आदि गुण होते हैं। आप सफेद करेले का पराठा बना सकते हैं। सफेद करेले का अचार भी बनाया जाता है। आप सफेद करेले का जूस भी पी सकते हैं। जानते हैं सफेद करेले के फायदों के बारे में।1. वजन घटाने में फायदेमंद-सफेद करेला का सेवन करना वजन घटाने में फायदेमंद होता है। सफेद करेले में कैलोरीज कम होती है। आप इसका सेवन करेंगे, तो वजन कम करने में मदद मिलेगी। वजन घटाने के लिए सुबह के समय करेले के जूस का सेवन कर सकते हैं। सफेद करेले का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।2. कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल होता हैसफेद करेले का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने में मदद मिलती है। हार्ट के मरीज अपनी डाइट में करेला शामिल कर सकते हैं। सफेद करेले को सलाद या सब्जी के रूप में खा सकते हैं। लिवर से जुड़ी समस्या है, तो आपको सफेद करेले का सेवन करना चाहिए। लिवर के स्वास्थ्य के लिए इसका सेवन फायदेमंद माना जाता है।3. डायबिटीज में फायदेमंद है सफेद करेलासफेद करेले का सेवन करने से डायबिटीज कंट्रोल होती है। डायबिटीज के मरीज सफेद करेले का सेवन कर सकते हैं। डायबिटीज में मरीजों को पैर या हाथ में सूजन हो जाती है। सूजन से बचाव में भी सफेद करेले का सेवन फायदेमंद माना जाता है।4. आंखों की रौशनी बढ़ती है-सफेद करेले का सेवन करने से आंखों की रौशनी बढ़ती है। सफेद करेले में विटामिन ए पाया जाता है। सफेद करेले में बीटा कैरोटीन होता है जिससे आंखों की रौशनी बढ़ती है और आंखों की बीमारियों से बचाव होता है। सफेद करेले में फॉस्फोरस की अच्छी मात्रा होती है। इसका सेवन करने से कब्ज या पेट से जुड़ी समस्या से भी राहत मिलती है।5. बालों के लिए फायदेमंदसफेद करेले का सेवन बालों के लिए फायदेमंद होता है। बालों की अच्छी ग्रोथ के लिए सफेद करेले का सेवन करना चाहिए। आप सफेद करेले का रस बालों पर लगा सकते हैं। सफेद करेले के रस का सेवन भी कर सकते हैं।नोट- सफेद करेले का सेवन करने से गर्भवती महिलाओं को बचना चाहिए। जिन लोगों को लो डायबिटीज की समस्या होती है, उन्हें इसका सेवन करने से बचना चाहिए।.
- -कीटनाशक, प्रदूषण, मोटापा तथा शारीरिक श्रम व व्यायाम की कमी भी जीवन-शैली से जुड़े रोगों के लिए जिम्मेदार-मधुमेह, उच्च रक्तचाप व हृदय रोगों के बचने के लिए वसायुक्त खाद्य पदार्थों, जंक-फूड, कोल्डड्रिंक्स, मांसाहार, मद्मपान और धूम्रपान से करें परहेजरायपुर। आधुनिक जीवन-शैली, अनियमित दिनचर्या और खानपान के कारण एक बड़ी आबादी मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रही है। किशोर और युवा भी इनकी चपेट में आ रहे हैं। जीवन-शैली से जुड़े इन रोगों के लिए मुख्यतः अनुवांशिक, हमारी खानपान से जुड़ी आदतें और अनियमित दिनचर्या जिम्मेदार हैं। लोगों में वसायुक्त भोजन, फास्ट-फूड, मांसाहार, शराब और धूम्रपान का सेवन बढ़ रहा है। इनके शौकीनों में ज्यादातर किशोर और युवा भी हैं। इसके अलावा फसलों में कीटनाशकों का अधिकाधिक उपयोग, प्रदूषण, शारीरिक श्रम या व्यायाम का अभाव तथा मोटापा भी इन रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ा रहा है।शासकीय आयुर्वेद कॉलेज, रायपुर के सह-प्राध्यापक डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि जीवन-शैली से जुड़े रोगों से बचाव संयमित दिनचर्या और संतुलित खानपान से ही हो सकता है। आज की पीढ़ी खानपान और दिनचर्या के प्रति लगातार लापरवाही बरत रही है। फलस्वरूप कम उम्र में ही लोग उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोगों का शिकार हो रहे हैं। युवाओं में इन बीमारियों का प्रमुख कारण मोटापा भी है जो जंक-फूड, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों, कोल्ड ड्रिंक्स, शराब और मांसाहार के कारण बढ़ रहा है। किशोर व युवा लगातार इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की गिरफ्त में रहते हैं और वे रात में देर तक जागते हैं। इनका प्रभाव उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।शोध से यह पता चला है कि मानसिक स्वास्थ्य का असर सीधे तौर पर इन जीवन-शैली से जुड़ी बीमारियों में होता है। इन रोगों के उपचार के लिए आजीवन दवाईयां, नियमित रूप से चिकित्सक के परामर्श में रहने, नियंत्रित खानपान और संयमित दिनचर्या अपनाने की जरूरत होती है। आमतौर पर यह देखा जाता है कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोगों के मरीज बिना चिकित्सक के परामर्श के दवाईयां बंद कर देते हैं। फलस्वरूप उन्हें आपात स्थितियों का सामना करना पड़ता है। कई बार यह जानलेवा साबित होता है। लोगों को इस बारे में जागरूक होना होगा कि ये बीमारियां जड़ से खत्म नहीं होतीं, बल्कि दवाओं, संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम व योग के द्वारा नियंत्रित होती है। अतएव सावधानी जरूरी है।डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि चूंकि ये बीमारियां मनो-दैहिक यानि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी हैं, इसलिए इन रोगों के बचाव में आयुर्वेद और योग कारगर है। इस पद्धति में विभिन्न ऋतुओं के लिए खानपान और दिनचर्या निर्धारित हैं। इन्हें अपनाकर तथा पंचकर्म, रसायन चिकित्सा, आचार रसायन, नियमित व्यायाम, योग व ध्यान के द्वारा जीवन-शैली गत रोगों से बचाव संभव है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों के बचाव के लिए शाकाहारी भोजन जिसमें मिश्रित अनाज की रोटी, अरहर या मूंग की दाल, कोदो या ब्राउन चांवल, करेला, सहजन यानि मुनगा, तरोई, हरी तरकारी, करी पत्ते, अदरक, मेथी, लहसुन, गुणमार, जामुन, आंवला इत्यादि का सेवन करना चाहिए तथा वसायुक्त खाद्य पदार्थ, जंक-फूड, कोल्डड्रिंक्स, मांसाहार, मद्मपान और धूम्रपान का परहेज आवश्यक है। इसके अलावा शक्कर और नमक का संतुलित मात्रा में उपयोग करना चाहिए। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में इन रोगों के बचाव और नियंत्रण के लिए अनेक प्रकार के रसायन और औषधियां भी उपलब्ध हैं जिनका प्रयोग आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन एवं परामर्श में किया जाना चाहिए।
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ड्राई कफ से छुटकारा पाने में मददगार है दादी-नानी का सौंफ और मिश्री वाला नुस्खा
दादी-नानी के नुस्खे हमेशा काम आ ही जाते हैं। बदलते मौसम में कई बार बिमारियां आपकों घेर लेती हैं। गर्मी के बाद बारिश का मौसम आने से हल्की ठंडक होना शुरू हो जाती है। ऐसे में ज्यादातर लोग गले के संक्रमण की चपेट में आते हैं। इस संक्रमण से छुटकारा पाने के लिए आप कुछ घरेलू नुस्खों को अपना सकते हैं। यहां हम बता रहे हैं सौंफ और मिश्री वाला नुस्खा जो ड्राई कफ से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकता है।सौंफ, मिश्री और मुलेठी पाउडरइस नुस्खे को बनाने के लिए सौंफ, मुलेठी और मिश्री तीनों को बराबर मात्रा में लेकर एक साथ मिलाएं। फिर इन्हें पीसकर बहुत महीन पाउडर बना लें। इस चूर्ण का 1 बड़ा चम्मच गर्म पानी के साथ लें या फिर इसे हर रात में सोने से पहले शुद्ध शहद के साथ ले सकते हैं। इससे आपकी सूखी खांसी ठीक हो जाएगी और आपको अच्छी नींद आने में मदद मिलेगी।कैसे काम करता है ये नुस्खासौंफ एंटीऑक्सिडेंट, एंटीमाइक्रोबियल कंपोनेंट और एंटी इंफ्लामेटरी तेलों से भरे होते हैं जो सर्दी, खांसी और फ्लू के जोखिम को दूर रखने में मदद कर सकते हैं। सौंफ के बीज में भी विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत हैं जो मौसमी संक्रमण के खिलाफ इम्यून रखता है। वहीं मिश्री कई आवश्यक पोषक तत्वों से पूर्ण होती है जो खांसी को दूर करने में मदद करते हैं। यह आपके गले और ओरल कैविटी के लिए अच्छा होता है। वहीं इस नुस्खे में इस्तेमाल हो रही मुलेठी गले की खराश का सदियों पुराना इलाज है। यह जड़ी बूटी नैचुरल रूप से मीठी होती है। इसके एंटीऑक्सीडेंट और एंटी बैक्टीरियल गुण सांस संक्रमण का कारण बनने वाले बैक्टीरिया पर हमला करते हैं और सूजन को भी कम करते हैं। - मेथी बालों के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है। यह बालों की जड़ों को मजबूत करने के साथ-साथ सफेद बालों की समस्याओं को कम कर सकता है। दरअसल, मेथी के अर्क में फाइटोएस्ट्रोजेन पाया जाता है, जो एस्ट्रोजन हार्मोन को बढ़ाने में आपकी मदद कर सकता है। इस हार्मोन से बालों के विकास को बढ़ावा मिलता है। साथ ही यह बालों की ग्रोथ, वॉल्यूम और रंगत को भी बेहतर कर सकता है। बालों में आप मेथी का इस्तेमाल कई तरीकों से कर सकते हैं। आज हम इस लेख में बालों में मेथी के दानों का इस्तेमाल करने के तरीकों के बारे में जानेंगे।1. मेथी और नारियल तेलनारियल तेल के साथ आप मेथी के दानों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले नारियल तेल को गर्म करें। इसमें थोड़ा सा मेथी दाना डालें। जब मेथी दाने के रंग लाल हो जाए, तो गैस को बंद कर दें। तब तेल हल्का ठंडा हो जाए, तो इससे स्कैल्प की मसाज करें। इससे बालों की ग्रोथ अच्छे होगी। साथ समय से पहले सफेद बालों की समस्याओं को दूर करने में प्रभावी हो सकता है।2. मेथी और शहद से बढ़ाएं बालों की ग्रोथअगर आप बालों की ग्रोथ को बेहतर करना चाहते हैं, तो मेथी और शहद का इस्तेमाल करें। मेथी और शहद के इस्तेमाल से बालों की ग्रोथ को बेहतर की जा सकती है। इसका इस्तेमाल करने के लिए मेथी दानों को पानी में डालकर रातभर के लिए छोड़ दें। सुबह इन दानों को पीसकर पेस्ट तैयार कर लें। अब इसमें 1 चम्मच शहद मिक्स करें। इसके बाद इसे अपने बालों की जड़ों में लगाएं। करीब 30-40 मिनट तक इस पेस्ट को बालों पर लगा हुआ छोड़ दें। इसके बाद शैंपू से अपने बालों को धो लें। सप्ताह में दो बार इस हेयर मास्क का इस्तेमाल करने से बालों की ग्रोथ अच्छी हो सकती है।3. मेथी और दही से बालों की समस्या होगी दूरमेथी और दही के इस्तेमाल से डैंड्रफ, बेजान बाल और झड़ते बालों की परेशानी दूर हो सकती है। इसका इस्तेमाल करने के लिए 2 चम्मच मेथी दाना लें। इसे रातभर पानी में भिगोकर छोड़ दें। इसके बाद सुबह मेथी के दानों को निकालकर इसे अच्छे से पीस लें। अब इस पेस्ट को दही में मिक्स करके अपने बालों पर लगाएं। करीब 30 मिनट बाद अपने बालों को धो लें। इससे डैंड्रफ की समस्या दूर हो सकती है। सप्ताह में कम से कम दो बार इस मिश्रण का इस्तेमाल करें।4. मेथी और दूध बालों के लिए है हेल्दीबालों से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के लिए मेथी और दूध का इस्तेमाल करें। इसका इस्तेमाल करने के लिए 1 चम्मच मेथी के दानों को पानी में डालकर रातभर के लिए छोड़ दें। सुबह इन दानों का पेस्ट तैयार कर लें। इसके बाद इस पेस्ट में थोड़ा सा दूध मिक्स कर लें। अब इसे अपने बालों पर लगाकर करीब 20 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद अपने बालों को धो लें। इससे आपके बालों की ग्रोथ बेहतर होगी। साथ ही झड़ते और बेजान बालों से छुटकारा मिल सकता है।मेथी के इस्तेमाल से आप बालों की खूबसूरती को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, ध्यान रखें कि अगर बालों से जुड़ी परेशानियां काफी ज्यादा बढ़ रही है, तो इस स्थिति में एक्सपर्ट से जरूर सलाह करें।
- सदाबहार का पौधा आप सभी ने घर के आसपास कहीं न कहीं देखा होगा। सदाबहार की पत्तियां और फूल दिखने में जितने खूबसूरत होते हैं इनके औषधीय गुण भी उतने ही काम के हैं। आयुर्वेद में सदाबहार को बीमारियों के लिए संजीवनी के रूप में जाना जाता है। शरीर में वात और कफ दोष को दूर करने के लिए सदाबहार की पत्तियों का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद कड़वापन के गुण शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। सदाबहार की पत्तियों का इस्तेमाल शरीर की इन समस्याओं के लिए फायदेमंद माना जाता है।1. गले में इन्फेक्शन की समस्या में फायदेमंद सदाबहारसदाबहार की पत्तियां गले में इन्फेक्शन की समस्या में बहुत फायदेमंद होती हैं। इसमें मौजूद एलकालॉइड्स, एजमेलीसीन, सरपेन्टीन नामक तत्व शरीर में मौजूद संक्रमण को दूर करने में बहुत उपयोगी माने जाते हैं। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए भी सदाबहार की पत्तियों का काढ़ा और रस बहुत उपयोगी होता है।2. ब्लड प्रेशर की समस्या में उपयोगी सदाबहारब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए सदाबहार बहुत फायदेमंद होता है। सदाबहार की पत्तियों में मौजूद गुण हाई ब्लड प्रेशर में फायदेमंद होते हैं। आप ब्लड प्रेशर की समस्या में सदाबहार की जड़ का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आप एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए सदाबहार की पत्तियों और जड़ का सेवन कर सकते हैं।3. डायबिटीज मरीजों के लिए रामबाण सदाबहार की पत्तियांडायबिटीज की समस्या में सदाबहार की पत्तियों को बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसकी पत्तियों में एल्कलॉइड नामक तत्व शरीर में इंसुलिन के निर्माण के लिए बहुत फायदेमंद होता है। डायबिटीज या मधुमेह के मरीजों के लिए सदाबहार की पत्तियों का रस पीना बहुत फायदेमंद होता है। आप रोजाना सुबह के समय डॉक्टर की सलाह के आधार पर सदाबहार की पत्तियों का रस पी सकते हैं।4. कैंसर में फायदेमंद सदाबहार की पत्तियांसदाबहार की पत्तियों में मौजूद कैंसर रोधी गुण शरीर में कैंसर सेल्स को खत्म करने या ठीक करने का काम करते हैं। सदाबहार की पत्तियों में मौजूद विन्क्रिस्टिन और विंब्लास्टिन एल्कलॉइड कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।5. स्किन से जुड़ी समस्याओं में उपयोगीसदाबहार की पत्तियों का इस्तेमाल स्किन से जुड़ी समस्याओं में बहुत फायदेमंद होता है। स्किन पर खुजली, इन्फेक्शन या अन्य समस्या होने पर प्रभावित जगह पर सदाबहार की पत्तियों का लेप लगाने से फायदा मिलता है। इसके अलावा सदाबहार की पत्तियां कील, मुहांसे और झुर्रियों आदि के लिए भी बहुत उपयोगी होती हैं।6. किडनी स्टोन की समस्या में फायदेमंदकिडनी स्टोन की समस्या में सदाबहार की पत्तियों का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। किडनी की पथरी होने पर सदाबहार की पत्तियों को पानी में उबालने के बाद इस पानी को पीने से फायदा मिलता है।ऊपर बताई गयी समस्याओं के अलावा कई अन्य समस्याओं और बीमारियों में सदाबहार की पत्तियों का इस्तेमाल फायदेमंद होता है। इन समस्याओं में डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह के बाद ही सदाबहार की पत्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए।
- आपने अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि डायबिटीज के मरीजों को फ्रूट्स का सेवन नहीं करना चाहिए। फलों में कार्बोहाइड्रेट और नेचुरल शुगर होता है जिसे फ्रुक्टोज कहा जाता है,जिससे आपका ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है, लेकिन फिर भी आपको अपनी मील में फ्रूट्स को जरूर शामिल करना चाहिए क्योंकि फलों में विटामिन, मिनरल्स और फाइटोकेमिकल्स होते हैं।फलों में पाए जाने वाले फाइटोकेमिकल्स की वजह से हार्ट डिजीज, कैंसर, और स्ट्रोक का खतरा कम होता है और यह आपकी ओवरओल हेल्थ को बूस्ट करता है। फलों का सेवन इसलिए भी जरूरी है कि क्योंकि डायबिटीज हार्ट डिजीज और अन्य समस्याओं के जोखिम से जुड़ा हुआ होता है। बहुत से फलों में फाइबर की मात्रा भी पाई जाती है। फाइबर आपके डाइजेशन को स्लो करने, ब्लड शुगर स्पाइक को बढऩे से रोकने में मदद करता है।सभी फ्रूट्स में विटामिन, फाइटोकेमिकल्स और कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। लेकिन कुछ फ्रूट्स ऐसे होते हैं जो क्रॉनिक डिजीज के खतरे को कम कर सकते हैं।आइए जानते हैं उन फ्रूट्स के बारे में -ब्लैकबेरी- एक कप ब्लैकबेरी में 62 कैलोरीज, 14 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 7.6 ग्राम फाइबर होता है।स्ट्रॉबेरीज- एक कप स्ट्रॉबेरीज में 46 कैलोरीज, 11 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 3 ग्राम फाइबर होता है।टमाटर- एक कप टमाटर में 32 कैलोरीज, 7 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 2 ग्राम फाइबर होता है।ऑरेंज- एक मीडियम ऑरेंज में 69 कैलोरीज, 17 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 3 ग्राम फाइबर होता है।--




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